🔋 Battery Smart का FY25 में जबरदस्त ग्रोथ: 52% राजस्व वृद्धि, EBITDA पॉजिटिव

Battery Smart

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क Battery Smart ने भी अपने बिज़नेस ग्राफ को लगातार ऊपर उठाया है। गुरुग्राम स्थित इस स्टार्टअप ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में राजस्व में 52% की बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में बढ़कर ₹249 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वर्ष (FY24) में ₹164 करोड़ था।


🚀 कैसे हासिल की यह ग्रोथ?

Battery Smart का बिज़नेस मॉडल “Battery-as-a-Service (BaaS)” पर आधारित है। इस मॉडल के तहत EV ड्राइवर्स आसानी से बैटरी बदल (swap) सकते हैं, जिससे उन्हें चार्जिंग के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ता।

  • कंपनी की शुरुआत 2019 में पुल्कित खुराना और सिद्धार्थ सिक्का ने की थी।
  • आज Battery Smart का नेटवर्क 50 से ज्यादा शहरों में फैला हुआ है।
  • कंपनी के पास 1,600 से अधिक स्वैपिंग स्टेशन हैं।
  • अब तक 90 लाख से ज्यादा बैटरी स्वैप्स पूरे हो चुके हैं।
  • करीब 90,000 ड्राइवर्स इस नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।

📈 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

  • FY25 में कंपनी की कुल आय ₹279 करोड़ रही, जो FY24 के ₹187 करोड़ की तुलना में 49% अधिक है।
    • इसमें ₹30 करोड़ की अन्य आय (other income) भी शामिल है।
  • खर्चों (expenses) में भी 53% की वृद्धि हुई और यह FY25 में ₹306 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि FY24 में यह ₹200 करोड़ था।
  • अधिक खर्च का कारण:
    • नेटवर्क का विस्तार
    • कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि
    • टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश

✅ EBITDA पॉजिटिव

कंपनी के मुताबिक, बढ़ते खर्च के बावजूद उसने हाल ही में ऑपरेटिंग ब्रेक-ईवन हासिल कर लिया है और अब EBITDA पॉजिटिव हो गई है।

  • FY25 में कंपनी ने ₹1 ऑपरेटिंग रेवेन्यू कमाने के लिए ₹1.22 खर्च किए
  • यह गैप धीरे-धीरे कम हो रहा है, जो बताता है कि कंपनी की कॉस्ट एफिशिएंसी में सुधार हो रहा है।

💰 निवेश और वैल्यूएशन

Battery Smart अब तक $192 मिलियन (लगभग ₹1,600 करोड़) जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशक हैं:

  • Tiger Global
  • Blume Ventures
  • Ecosystem Integrity Fund

इन निवेशकों का भरोसा बताता है कि कंपनी के पास लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और मार्केट लीडर बनने की मजबूत संभावना है।


⚡ EV मार्केट में संभावनाएं

भारत में EV एडॉप्शन का सबसे बड़ा चैलेंज है – चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर। बैटरी स्वैपिंग इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान साबित हो रहा है।

  • खासकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में इसकी भारी डिमांड है।
  • ड्राइवर्स को लंबे समय तक बैटरी चार्ज होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
  • कुछ ही मिनटों में बैटरी बदलकर वे सफर जारी रख सकते हैं।

🏆 बैटरी स्मार्ट की पोज़िशन

  • EV बैटरी स्वैपिंग मार्केट में Battery Smart तेजी से लीडर बनता जा रहा है।
  • कंपनी के पास न सिर्फ विस्तृत नेटवर्क है, बल्कि अब वह लाभप्रदता (profitability) की दिशा में भी बढ़ रही है।
  • इसके मुकाबले अन्य स्टार्टअप्स अभी भी स्केलिंग और यूनिट इकॉनॉमिक्स को मैनेज करने की चुनौती से जूझ रहे हैं।

🔮 आगे की राह

हालांकि Battery Smart की ग्रोथ पोजिटिव है, लेकिन आने वाले सालों में कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा:

  1. खर्चों पर नियंत्रण – नेटवर्क विस्तार के साथ लागत बढ़ती है।
  2. यूनिट इकॉनॉमिक्स सुधारना – लंबे समय तक टिकाऊ ग्रोथ के लिए ज़रूरी।
  3. कंपटीशन से आगे रहना – EV सेक्टर में कई नए खिलाड़ी तेजी से आ रहे हैं।

अगर कंपनी इन चुनौतियों को मैनेज कर लेती है, तो यह भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी EV बैटरी स्वैपिंग का ग्लोबल लीडर बन सकती है।


📌 निष्कर्ष

FY25 Battery Smart के लिए बेहद अहम रहा। जहां एक तरफ कंपनी ने अपनी राजस्व ग्रोथ 52% तक पहुंचाई, वहीं दूसरी तरफ EBITDA पॉजिटिविटी हासिल करके यह साबित किया कि EV बैटरी स्वैपिंग मॉडल न सिर्फ स्केलेबल है बल्कि सस्टेनेबल भी है।

भारत में EV इंडस्ट्री के तेजी से बढ़ते कदमों के साथ, Battery Smart जैसे स्टार्टअप्स इस ट्रांजिशन को और मजबूत बना रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह कंपनी EV इकोसिस्टम की रीढ़ की हड्डी (backbone) बन सकती है।


👉 आपका क्या मानना है? क्या बैटरी स्वैपिंग मॉडल भारत में EV सेक्टर का सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा?

Read more : Unacademy ने FY25 में घटाई घाटे की रफ्तार, लेकिन रेवेन्यू में 16% गिरावट

📚 Unacademy ने FY25 में घटाई घाटे की रफ्तार, लेकिन रेवेन्यू में 16% गिरावट

Unacademy

भारत की जानी-मानी एडटेक यूनिकॉर्न Unacademy ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में अपनी कुल आय में गिरावट के बावजूद EBITDA घाटे और नेट लॉस दोनों में बड़ी कमी दर्ज की है। कंपनी ने लागत में कटौती और कुशल प्रबंधन के ज़रिए अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं।


📉 रेवेन्यू में गिरावट

Unacademy का कुल रेवेन्यू FY25 में 16% घटकर ₹826.3 करोड़ रह गया।

  • FY24 में यह आंकड़ा ₹988 करोड़ था।
  • यह लगातार दूसरा साल है जब कंपनी के रेवेन्यू में कमी दर्ज हुई है।

इस गिरावट के बावजूद कंपनी ने अपने लॉस कम करने पर ज़ोर दिया है, जिससे निवेशकों और मार्केट ऑब्जर्वर्स में कंपनी की रणनीति को लेकर भरोसा बना हुआ है।


💸 नेट लॉस और EBITDA घाटा

  • FY25 में कंपनी का नेट लॉस 31% घटकर ₹436 करोड़ रह गया।
    • FY24 में यह ₹633 करोड़ था।
  • कंपनी का EBITDA घाटा 37.6% घटकर ₹305 करोड़ रह गया।
    • FY24 में यह ₹489 करोड़ था।

इस बड़े सुधार का मुख्य कारण है कास्ट ऑप्टिमाइजेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस।


🏦 कैश रिज़र्व और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी

मार्च 2025 तक Unacademy के पास ₹1,238 करोड़ का कैश और कैश इक्विवेलेंट बैलेंस था।
कंपनी के सह-संस्थापक और CEO गौरव मुंजाल ने अप्रैल में कहा था कि:

  • कंपनी वित्तीय रूप से स्थिर है।
  • इसकी यूनिट्स जैसे Graphy और PrepLadder हर महीने पॉजिटिव कैश फ्लो जनरेट कर रही हैं।

यह संकेत देता है कि कंपनी अब सस्टेनेबल बिज़नेस मॉडल की तरफ बढ़ रही है।


👨‍💼 लीडरशिप में बदलाव

हाल ही में Unacademy ने एक अहम कदम उठाया और:

  • Graphy के को-फाउंडर सुमित जैन को Test Prep बिज़नेस का CEO नियुक्त किया।
  • यह कदम कंपनी की लीडरशिप स्ट्रक्चर को मजबूत करने और कोर वर्टिकल्स पर फोकस करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव कंपनी में फाइनेंशियल डिसिप्लिन और ग्रोथ स्ट्रेटजी को और बेहतर बनाएगा।


🔍 संदर्भ: FY24 का प्रदर्शन

तुलना के लिए, FY24 में:

  • कंपनी ने 62% तक घाटा कम किया था
  • हालांकि उस समय भी रेवेन्यू में कोई बड़ी वृद्धि देखने को नहीं मिली थी।

यानी कंपनी लगातार घाटा कम करने में सफल रही है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।


🏫 बिज़नेस मॉडल और चुनौतियाँ

Unacademy मुख्य रूप से ऑनलाइन टेस्ट प्रिपरेशन, कोर्सेस और स्किल-बेस्ड लर्निंग पर केंद्रित है।

  • कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी ग्रोथ तेज़ी से बढ़ी थी।
  • लेकिन महामारी के बाद एडटेक सेक्टर में मांग धीमी हुई है।

कंपनी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है:

  1. रेवेन्यू को दोबारा ग्रोथ ट्रैक पर लाना।
  2. नए यूज़र्स जोड़ना और मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखना।
  3. लागत और नवाचार के बीच संतुलन बनाना।

⚔️ प्रतिस्पर्धा

Unacademy का मुकाबला Byju’s, Vedantu और PhysicsWallah जैसे बड़े खिलाड़ियों से है।

  • Byju’s हाल के वर्षों में वित्तीय संकट से जूझ रहा है।
  • वहीं PhysicsWallah ने लो-कॉस्ट मॉडल के जरिए बाज़ार में तेज़ी से जगह बनाई है।

Unacademy को अपनी पोज़िशन मजबूत रखने के लिए लगातार प्रोडक्ट इनोवेशन और ब्रांड वैल्यू पर काम करना होगा।


🚀 आगे का रास्ता

Unacademy का रोडमैप आने वाले वर्षों के लिए इस प्रकार हो सकता है:

  • टेस्ट प्रेप बिज़नेस पर और अधिक फोकस।
  • Graphy और PrepLadder जैसी कैश-पॉजिटिव यूनिट्स का विस्तार।
  • लॉस और रेवेन्यू ग्रोथ के बीच बैलेंस बनाना।
  • नए टेक-ड्रिवन लर्निंग टूल्स और AI बेस्ड सॉल्यूशंस लाना।

👉 निष्कर्ष
भले ही Unacademy का रेवेन्यू FY25 में घटा हो, लेकिन कंपनी ने जिस तरह से लॉस और EBITDA घाटे को कम किया है, वह निवेशकों और इंडस्ट्री के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।
मजबूत कैश पोजीशन और लीडरशिप चेंज दिखाता है कि कंपनी सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल मॉडल की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

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🍽️ Petpooja ने जुटाए ₹137 करोड़, रेस्टोरेंट SaaS सेक्टर में AI-ऑटोमेशन पर फोकस

Petpooja

अहमदाबाद स्थित Restaurant POS और मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर Petpooja ने अपने सीरीज C फंडिंग राउंड में ₹137 करोड़ (लगभग $15.5 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Dharana Capital ने किया, जबकि Helion Ventures के को-फाउंडर आशीष गुप्ता, और Urban Company के को-फाउंडर्स अभिराज सिंह भाल व वरुण खैतन ने भी इसमें हिस्सा लिया।

यह फंडिंग कंपनी के लिए खास इसलिए है क्योंकि यह निवेश चार साल बाद आया है।


💰 फंडिंग डिटेल्स

  • Dharana Capital का निवेश: ₹82 करोड़
  • आशीष गुप्ता का निवेश: ₹1 करोड़
  • बाकी निवेश की अलॉटमेंट प्रक्रिया जारी है।

Entrackr के अनुमान के मुताबिक, इस निवेश से Petpooja का वैल्यूएशन ₹910 करोड़ ($103 मिलियन) तक पहुंच गया है। यह इसकी पिछली फंडिंग के मुकाबले 3.5 गुना अधिक है।
जब बाकी निवेश की राशि डिस्बर्स होगी, तब कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन और बदल सकता है।


🛠️ फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

Petpooja ने साफ किया है कि यह नया कैपिटल निम्न क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा:

  1. प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत करने में
  2. AI-ड्रिवन ऑटोमेशन को तेज़ करने में
  3. कस्टमर सपोर्ट को और बेहतर बनाने में

यानी कंपनी आने वाले समय में टेक्नोलॉजी अपग्रेड और स्केलेबिलिटी पर फोकस करेगी।


📖 Petpooja की कहानी

  • 2011 में Petpooja ने एक B2B फूड डिलीवरी वेंचर के रूप में शुरुआत की थी।
  • बाद में इसने SaaS प्लेटफॉर्म में पिवट किया, जहां यह क्लाउड-आधारित बिलिंग और रेस्टोरेंट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर ऑफर करता है।
  • आज कंपनी के 1 लाख से अधिक क्लाइंट्स भारत, UAE और साउथ अफ्रीका में हैं।
  • यह Zomato और Swiggy पर होने वाले 25% ऑनलाइन ऑर्डर वॉल्यूम्स को प्रोसेस करती है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन

हालांकि FY25 के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन FY24 में कंपनी का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:

  • रेवेन्यू: ₹76 करोड़ (43% साल-दर-साल वृद्धि)
  • नेट लॉस: ₹13.4 करोड़ (घाटा कम हुआ)

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी ग्रोथ के साथ-साथ अपने घाटे को भी कंट्रोल करने में सफल रही है।


📈 निवेश का अब तक का सफर

Petpooja ने अब तक कुल ₹185 करोड़ जुटाए हैं।

  • 2021 में Aroa Ventures की अगुवाई में $4.5 मिलियन सीरीज B फंडिंग की थी।
  • मौजूदा सीरीज C राउंड के बाद Dharana Capital की कंपनी में हिस्सेदारी 18.62% होगी (फुली डायल्यूटेड बेसिस पर)।

🌍 SaaS और F&B इंडस्ट्री में Petpooja की भूमिका

भारत में रेस्टोरेंट और फूड सर्विस इंडस्ट्री तेज़ी से टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हो रही है। छोटे-छोटे SMB रेस्टोरेंट्स और कैफे को अब ऑटोमेटेड बिलिंग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट और ऑनलाइन ऑर्डर इंटीग्रेशन जैसी सेवाओं की ज़रूरत होती है।

Petpooja का प्लेटफॉर्म इसी समस्या का हल देता है।

  • ऑर्डर मैनेजमेंट से लेकर किचन डिस्प्ले सिस्टम तक
  • ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर्स से कनेक्टिविटी
  • और अब AI-ड्रिवन सॉल्यूशंस

यानी यह प्लेटफॉर्म SMB रेस्टोरेंट्स को बड़ी चेन जैसी तकनीकी क्षमताएं प्रदान करता है।


⚖️ मुकाबला और मार्केट पोज़िशन

Petpooja का मुकाबला POS और रेस्टोरेंट SaaS इंडस्ट्री के अन्य प्लेयर्स जैसे Posist, LimeTray और UrbanPiper से है।
लेकिन Petpooja का बड़ा क्लाइंट बेस और इंटरनेशनल मौजूदगी इसे और कंपनियों से अलग पहचान दिलाता है।


🚀 आगे का रोडमैप

Petpooja इस फंडिंग का इस्तेमाल करके:

  • AI-संचालित इनोवेशन को मार्केट में उतारेगा।
  • वैश्विक विस्तार (खासतौर पर मध्य पूर्व और अफ्रीका) पर ध्यान देगा।
  • छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट्स को सस्ती और स्केलेबल टेक्नोलॉजी मुहैया कराएगा।

👉 निष्कर्ष:
Petpooja की यह नई फंडिंग सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के फूड सर्विस SaaS सेक्टर के लिए भी बड़ा संकेत है।
रेस्टोरेंट्स की बढ़ती डिजिटल डिमांड और AI की तेजी से बढ़ती भूमिका को देखते हुए, Petpooja आने वाले समय में इंडस्ट्री का लीडर बनने की क्षमता रखता है।

Read more : WeWork India ला रहा है ₹3,000 करोड़ का IPO, 3 अक्टूबर से खुलेगा इश्यू

🏢 WeWork India ला रहा है ₹3,000 करोड़ का IPO, 3 अक्टूबर से खुलेगा इश्यू

WeWork India

भारत का सबसे बड़ा मैनेज्ड ऑफिस स्पेस प्रोवाइडर, WeWork India, अपना ₹3,000 करोड़ (लगभग $340 मिलियन) का IPO 3 अक्टूबर 2025 को लॉन्च करने जा रहा है। यह इश्यू 7 अक्टूबर तक खुला रहेगा, जबकि Anchor Investors के लिए बिडिंग 1 अक्टूबर से शुरू होगी।

यह कदम कंपनी को SEBI से IPO की मंज़ूरी मिलने के लगभग ढाई महीने बाद उठाया गया है।


💰 IPO का ढांचा

कंपनी द्वारा जारी Red Herring Prospectus (RHP) के अनुसार:

  • पूरा IPO Offer for Sale (OFS) के ज़रिए होगा।
  • इसमें कुल 4.63 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे।
  • प्राइस बैंड ₹615 – ₹648 तय किया गया है।
  • अगर ऊपरी प्राइस बैंड पर इश्यू प्राइस तय होती है, तो IPO का साइज लगभग ₹3,000 करोड़ होगा।

इस OFS में:

  • Promoter Embassy Buildcon LLP लगभग 3.54 करोड़ शेयर बेचकर ₹2,294 करोड़ जुटाएगा।
  • वहीं, 1 Ariel Way Tenant (जो WeWork Global से संबद्ध है) 1.08 करोड़ शेयर बेचकर ₹706 करोड़ जुटाएगा।

📊 शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर

IPO से पहले:

  • Embassy Buildcon के पास WeWork India की 73.56% हिस्सेदारी है।
  • 1 Ariel Way Tenant की हिस्सेदारी 22.64% है।

IPO के बाद इन दोनों प्रमोटरों की हिस्सेदारी में कमी आएगी।


🏦 IPO मैनेजमेंट और रजिस्ट्रार

WeWork India के IPO को कई बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक्स मैनेज कर रहे हैं:

  • JM Financial
  • ICICI Securities
  • Jefferies
  • Kotak Mahindra Capital
  • 360 ONE

वहीं, MUFG Intime इस IPO का रजिस्ट्रार होगा।


🏢 WeWork India का बिज़नेस

WeWork India, भारत में WeWork ब्रांड का एक्सक्लूसिव लाइसेंसी है और इसकी बहुमत हिस्सेदारी रियल एस्टेट दिग्गज Embassy Group के पास है।

कंपनी के पास:

  • 68 सेंटर्स में ऑपरेशन
  • कुल 1,14,077 डेस्क्स
  • पोर्टफोलियो का 94% हिस्सा Grade A Properties में

कंपनी की मौजूदगी मुख्य रूप से बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली-NCR जैसे टियर-1 शहरों में है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन

  • FY25 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,949 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 17% अधिक है।
  • कंपनी ने FY24 के ₹135.7 करोड़ के घाटे से उबरते हुए FY25 में ₹128 करोड़ का प्रॉफिट कमाया।

यह बदलाव निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय सेहत और ग्रोथ पोटेंशियल को मज़बूत संकेत देता है।


⚖️ तुलना: WeWork India बनाम अन्य लिस्टेड प्लेयर्स

WeWork India का IPO लिस्टिंग के बाद उसे सीधे अपने को-वर्किंग स्पेस साथियों के साथ खड़ा कर देगा।

वर्तमान में प्रमुख लिस्टेड खिलाड़ी और उनके प्रदर्शन:

  • Awfis (मई 2024 में लिस्टेड): ₹569/शेयर, मार्केट कैप ₹4,073.5 करोड़
  • Indiqube: ₹228/शेयर, मार्केट कैप $544 मिलियन
  • Smartworks: ₹562.75/शेयर, मार्केट कैप $730 मिलियन

WeWork India के पास इन कंपनियों की तुलना में बड़ी स्केल और मज़बूत बैकिंग है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।


🔎 निवेशकों के लिए क्या खास?

  1. Profitability में टर्नअराउंड – घाटे से मुनाफे में जाना बड़ा पॉजिटिव है।
  2. Strong Promoter Backing – Embassy Group जैसी मज़बूत रियल एस्टेट कंपनी का समर्थन।
  3. Premium Assets – 94% पोर्टफोलियो Grade A Properties में।
  4. High Growth Industry – भारत का फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है, खासकर स्टार्टअप्स और एंटरप्राइजेज के बीच।

🌍 आगे का रास्ता

WeWork India इस IPO से सीधे तौर पर कोई फंड नहीं जुटा रहा क्योंकि यह OFS इश्यू है। लेकिन:

  • इससे कंपनी की मार्केट विज़िबिलिटी बढ़ेगी।
  • लिक्विडिटी बढ़ेगी और इन्वेस्टर्स को एक्ज़िट का मौका मिलेगा।
  • लिस्टिंग के बाद कंपनी का मुकाबला सीधे अपने लिस्टेड पीयर्स से होगा, जिससे मार्केट बेंचमार्किंग आसान होगी।

👉 कुल मिलाकर, WeWork India का यह IPO भारत के को-वर्किंग और मैनेज्ड ऑफिस सेक्टर में एक बड़ा माइलस्टोन साबित हो सकता है। बढ़ते रेवेन्यू, प्रॉफिटेबिलिटी और मज़बूत ब्रांड पोज़िशनिंग के चलते, निवेशकों की नज़र इस इश्यू पर टिकी रहेगी।

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🍦 Hocco ने जुटाए ₹115 करोड़, Ice Cream ब्रांड की वैल्यूएशन पहुँची ₹2,000 करोड़

Hocco

प्रीमियम आइसक्रीम ब्रांड Hocco ने अपने नए फंडिंग राउंड में ₹115 करोड़ (लगभग $13 मिलियन) जुटाए हैं। यह निवेश उसके मौजूदा निवेशक Sauce.vc के नेतृत्व में हुआ है। इस ताज़ा राउंड के बाद कंपनी की वैल्यूएशन बढ़कर ₹2,000 करोड़ हो गई है।

गौर करने वाली बात यह है कि यह निवेश कंपनी के लिए महज़ तीन महीने में दूसरी बड़ी फंडिंग है। जून 2024 में Hocco ने अपनी Series A फंडिंग में ₹100 करोड़ (लगभग $12 मिलियन) जुटाए थे, तब उसकी वैल्यूएशन केवल ₹600 करोड़ थी। इसके बाद सितंबर 2024 में कंपनी ने Series B राउंड में $10 मिलियन (लगभग ₹85 करोड़) जुटाए थे। अब ताज़ा फंडिंग से यह ब्रांड भारत के तेज़ी से बढ़ते प्रीमियम आइसक्रीम सेक्टर में और भी मज़बूत खिलाड़ी बनकर उभरा है।


🚀 Hocco का विस्तार प्लान

Hocco ने कहा है कि इस फंडिंग का इस्तेमाल इन प्रमुख कामों के लिए किया जाएगा:

  • मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाना – कंपनी का लक्ष्य है कि 2026 की गर्मियों तक वह 3 लाख लीटर प्रतिदिन आइसक्रीम उत्पादन करने लगे।
  • कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स मज़बूत करना – ताकि देशभर में प्रोडक्ट की स्मूद डिलीवरी हो सके।
  • नए प्रोडक्ट इनोवेशन पर काम – ग्राहकों को नए फ्लेवर और फॉर्मेट में विकल्प उपलब्ध कराना।
  • देश और विदेश में विस्तार – Hocco भारतीय बाज़ार के साथ चुनिंदा ग्लोबल मार्केट्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है।

अगर यह लक्ष्य पूरे होते हैं, तो Hocco देश के सबसे बड़े और एडवांस्ड आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग सेटअप्स में से एक होगा।


🏭 ब्रांड की कहानी और प्रोडक्ट्स

Hocco की शुरुआत Chona परिवार ने की थी, जो पहले से ही आइसक्रीम इंडस्ट्री में जाना-पहचाना नाम रहा है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को तीन बड़े चैनलों के ज़रिए बेचती है:

  • Retail Stores
  • Quick Commerce Platforms (जैसे Zepto, Blinkit, Swiggy Instamart)
  • Out-of-home touchpoints (जैसे ट्रैवल, होटल्स और कैफे)

ब्रांड की खासियत है कि यह नेचुरल इंग्रेडिएंट्स और यूनिक फ्लेवर्स पर ध्यान देता है। इसके प्रोडक्ट्स में अलग-अलग पैक और फॉर्मेट उपलब्ध हैं, जो मॉडर्न रिटेल और डेली कंजम्पशन के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं।


📊 Hocco की फाइनेंशियल झलक

Hocco ने हाल ही में कहा कि उसने FY25 में ₹220 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है। हालांकि, कंपनी ने अपने लॉसेस को लेकर कोई जानकारी नहीं दी।

  • FY24 में Hocco का रेवेन्यू ₹32.38 करोड़ था।
  • उसी साल कंपनी को लगभग ₹20.23 करोड़ का घाटा हुआ था।

इस तरह, एक ही साल में कंपनी का रेवेन्यू कई गुना बढ़ा है, जो इसके तेज़ी से बढ़ते बिज़नेस मॉडल को दर्शाता है।


🥶 मार्केट में मुकाबला

भारतीय आइसक्रीम इंडस्ट्री पहले से ही काफी कॉम्पिटिटिव है। Hocco का सीधा मुकाबला इन ब्रांड्स से है:

  • Legacy Players: Amul, Vadilal, Hindustan Unilever (Kwality Walls)
  • New-age Brands: NIC (Walko Foods), Hangyo, Go Zero, NOTO Ice Cream

इन बड़े नामों के बीच Hocco ने अपनी Premium Quality, Unique Flavours और Smart Distribution Strategy से एक अलग पहचान बनाई है।


📈 क्यों खास है Hocco की जर्नी?

Hocco की ग्रोथ स्टोरी भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक अच्छा उदाहरण है। महज़ कुछ ही सालों में कंपनी ने:

  • कई फंडिंग राउंड्स पूरे किए
  • अपनी वैल्यूएशन को ₹600 करोड़ से ₹2,000 करोड़ तक पहुँचाया
  • देशभर में मज़बूत कस्टमर बेस बनाया

कंपनी का फोकस क्वालिटी और स्केल पर है, जिससे यह आने वाले सालों में और तेज़ी से बढ़ने की संभावना रखता है।


🌍 आगे का रास्ता

Hocco का लक्ष्य सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी अपनी Premium Ice Cream Brand Identity बनाना है।
अगर कंपनी अपने Production Target (3 लाख लीटर/दिन) तक पहुँचती है, तो यह न केवल भारत की बल्कि एशिया की भी सबसे बड़ी आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल हो सकती है।


👉 कुल मिलाकर, Hocco ने साबित कर दिया है कि भारत में Premium Ice Cream Segment की डिमांड कितनी तेज़ी से बढ़ रही है। और ताज़ा फंडिंग के बाद कंपनी का फोकस सिर्फ एक चीज़ पर है – Innovation और Expansion

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🌿 Kapiva ने जुटाए $60M, Fireside Ventures का पूरा एग्ज़िट

Kapiva

आयुर्वेद वेलनेस ब्रांड Kapiva ने अपने Series D फंडिंग राउंड में $60 मिलियन (करीब ₹500 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व 360 ONE Asset और Vertex Growth ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक Vertex Ventures Southeast Asia & India और 3one4 Capital ने भी भाग लिया।

इस राउंड में से $28 मिलियन प्राइमरी कैपिटल के रूप में आए, जबकि बाकी सेकेंडरी हिस्से में गए, जिससे शुरुआती निवेशक Fireside Ventures ने पूरी तरह एग्ज़िट किया।


💰 फंडिंग का बैकग्राउंड

Kapiva ने इस राउंड की शुरुआत सितंबर 2024 में OrbiMed Asia, Vertex Ventures और 3one4 Capital से $10 मिलियन जुटाकर की थी। अब तक कंपनी ने कुल मिलाकर $90 मिलियन से अधिक फंडिंग हासिल कर ली है।


🎯 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि यह नई राशि इन प्रमुख क्षेत्रों में खर्च की जाएगी:

  • 🔬 R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) पर निवेश
  • 🏭 मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को मजबूत करना
  • 📢 ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग
  • 🩺 हेल्थटेक प्लेटफॉर्म का विस्तार
  • 🧬 क्रॉनिक कंडीशन मैनेजमेंट और पर्सनलाइज्ड केयर

🏛️ Kapiva की कहानी

2015 में Ameve Sharma और Shrey Badhani द्वारा स्थापित Kapiva एक आयुर्वेदिक न्यूट्रिशन ब्रांड है। यह प्राकृतिक और ऑर्गेनिक उत्पादों की पेशकश करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • डायबिटीज़
  • हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension)
  • लिवर हेल्थ
  • हार्मोनल बैलेंस
  • एनर्जी और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन
  • जनरल वेलनेस

कंपनी के प्रोडक्ट्स ऑनलाइन (अपनी वेबसाइट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स) के साथ-साथ 40,000 ऑफलाइन स्टोर्स पर भी उपलब्ध हैं।


📊 बिज़नेस परफॉर्मेंस

Kapiva इस समय करीब ₹550 करोड़ के ARR (Annual Revenue Run Rate) पर ऑपरेट कर रही है, जो FY25 में लगभग ₹350 करोड़ था।

  • 📈 कंपनी पिछले तीन सालों से 80%+ YoY ग्रोथ दर्ज कर रही है।
  • ⚖️ अभी यह EBITDA स्तर पर हल्की नेगेटिव है, लेकिन जल्द ही प्रॉफिटेबल होने की उम्मीद है।
  • FY24 में Kapiva का रेवेन्यू दोगुना होकर ₹228 करोड़ पहुंचा था, जबकि लॉसेज़ घटकर ₹56 करोड़ रह गए।

🛒 मार्केट प्रेज़ेंस

Kapiva की ताकत इसका ओम्नी-चैनल डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल है।

  • 🛍️ 40,000 से ज्यादा रिटेल स्टोर्स
  • 🌐 ऑनलाइन उपस्थिति: अपनी वेबसाइट, Amazon, Flipkart, Nykaa जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स
  • 🏬 तेजी से बढ़ते हुए ऑफलाइन चैनल्स

⚔️ प्रतिस्पर्धा

Kapiva का मुकाबला भारतीय आयुर्वेद और न्यूट्रिशन स्टार्टअप इकोसिस्टम के कई बड़े खिलाड़ियों से है।

  • Innovacare
  • Gynoveda
  • Wellbeing Nutrition

ये सभी कंपनियां आयुर्वेद और पर्सनलाइज्ड हेल्थकेयर स्पेस में मजबूत पकड़ बना रही हैं।


📉 Fireside Ventures का एग्ज़िट

इस फंडिंग राउंड की एक बड़ी खासियत यह रही कि Fireside Ventures, जिसने Kapiva में शुरुआती दौर में निवेश किया था, अब पूरी तरह बाहर निकल गया। यह निवेशकों के लिए एक सफल एक्ज़िट स्टोरी का उदाहरण है, जो भारतीय वेलनेस स्टार्टअप्स में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।


🌐 Kapiva का भविष्य

Kapiva के फाउंडर्स का कहना है कि कंपनी आने वाले समय में:

  • 🧪 नए आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी।
  • 📊 डेटा-ड्रिवन पर्सनलाइजेशन पर काम करेगी।
  • 🌍 भारत से बाहर भी ग्लोबल मार्केट्स में विस्तार की तैयारी करेगी।

🏁 निष्कर्ष

Kapiva की यह फंडिंग भारत के वेलनेस और आयुर्वेद सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर है। जहां एक ओर लोग हेल्थ और वेलनेस प्रोडक्ट्स में ज्यादा निवेश कर रहे हैं, वहीं Kapiva जैसी कंपनियां अपने नवाचार, पर्सनलाइज्ड सॉल्यूशंस और आयुर्वेदिक ब्रांडिंग के जरिए मार्केट में मजबूत पोजीशन बना रही हैं।

👉 आने वाले महीनों में Kapiva का प्रॉफिटेबल बनना और उसका ग्लोबल विस्तार भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक और प्रेरणादायक कहानी साबित हो सकता है।

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🏗️ Infra.Market ने सीरीज G फंडिंग में जुटाए ₹731.5 करोड़, IPO की तैयारी तेज़

Infra.Market

भारत का तेजी से उभरता हुआ बिल्डिंग मटेरियल्स प्लेटफॉर्म Infra.Market एक बार फिर सुर्खियों में है। कंपनी ने अपने सीरीज G फंडिंग राउंड में ₹731.5 करोड़ (लगभग $83 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Silverline Homes ने किया है, जबकि Tiger Global, NK Squared, Accel India, Nexus Ventures और Evolvence India ने भी इसमें भाग लिया है।


💰 निवेश का ब्योरा

Infra.Market ने 34,276 सीरीज G प्रेफरेंस शेयर ₹2,13,439 प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर जारी किए।

इस राउंड में प्रमुख निवेश इस प्रकार रहे:

  • Silverline Homes (कंपनी के संस्थापक आदित्य शारदा और सौविक सेनगुप्ता की इकाई) – ₹250 करोड़
  • NK Squared (निखिल कामथ) – ₹200 करोड़
  • Tiger Global – ₹176 करोड़
  • Accel India और Evolvence India – ₹44 करोड़-44 करोड़
  • Nexus Ventures – ₹17.6 करोड़

📌 खास बात यह है कि यह निवेश फ्लैट वैल्यूएशन पर हुआ है – कंपनी की वैल्यूएशन अब भी $2.8 बिलियन है, जो इसके पिछले सीरीज F राउंड के बराबर है।


📑 IPO की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, Infra.Market जल्द ही अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) फाइल करेगी।

  • संभावित IPO साइज: $600-700 मिलियन
  • टाइमलाइन: अगला महीना

इससे साफ है कि कंपनी अब पब्लिक मार्केट्स में एंट्री के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है।


🛠️ Infra.Market का बिज़नेस मॉडल

Infra.Market एक फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म है जो निर्माण क्षेत्र (construction sector) के लिए विस्तृत प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराता है।

  1. स्ट्रक्चरल प्रोडक्ट्स – कंक्रीट, स्टील, कंस्ट्रक्शन केमिकल्स
  2. फिनिशिंग प्रोडक्ट्स – AAC ब्लॉक्स, MDF, प्लाइवुड, पाइप्स
  3. कंज़्यूमर और होम प्रोडक्ट्स – टाइल्स, सैनिटरीवेयर, पेंट्स, फैंस, मॉड्यूलर किचन, ड्यूरेबल्स

यह B2B और रिटेल दोनों सेक्टर में काम करता है और छोटे से बड़े कॉन्ट्रैक्टर्स तक को सेवा देता है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन

Infra.Market ने FY24 में शानदार ग्रोथ दर्ज की:

  • रेवेन्यू – ₹14,530 करोड़ (23% YoY ग्रोथ)
  • प्रॉफिट – ₹378 करोड़ (2.4X बढ़त)

FY25 के आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।

📌 प्रतिस्पर्धा की झलक:

  • OfBusiness (गुरुग्राम) – ₹19,296 करोड़
  • Zetwerk – ₹14,436 करोड़
  • Moglix – ₹4,964 करोड़

इससे साफ है कि Infra.Market इस सेक्टर में टॉप खिलाड़ियों में से एक बन चुका है।


👥 फाउंडर्स की रणनीति – हिस्सेदारी बढ़ाने का ट्रेंड

IPO से पहले फाउंडर्स द्वारा अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का ट्रेंड तेज़ हो गया है।

  • Lenskart के पेयुष बंसल ने IPO से पहले 2.5% स्टेक खरीदा, वह भी पिछली प्राइवेट वैल्यूएशन से बहुत कम दाम पर।
  • Zetwerk के अमृत आचार्य और श्रीनाथ रामकृष्णन ने ₹600 करोड़ का निवेश करके अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।
  • Meesho के विदित आत्रेय और संजीव बर्नवाल ने ESOPs के ज़रिए स्टेक बढ़ाया।

उसी तरह, Infra.Market के संस्थापक आदित्य शारदा और सौविक सेनगुप्ता ने अपनी इकाई Silverline Homes के ज़रिए इस राउंड का नेतृत्व किया है।


🌍 Infra.Market की अहमियत

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त बूम आया है।

  • सरकार का “हाउसिंग फॉर ऑल” मिशन,
  • स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स,
  • और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश

इन सबने बिल्डिंग मटेरियल्स प्लेटफॉर्म्स के लिए अपार अवसर पैदा किए हैं।

Infra.Market का टेक-ड्रिवेन मॉडल और सप्लाई चेन में इनोवेशन इसे प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिला रहा है।


📌 मुख्य सीख

  1. फंडिंग स्ट्रेटेजी – लगातार इक्विटी और डेट फंडिंग जुटाकर कंपनी ने अपनी ग्रोथ को तेज़ किया है।
  2. फाउंडर-लेड निवेश – IPO से पहले हिस्सेदारी बढ़ाना निवेशकों के भरोसे को मज़बूत करता है।
  3. स्केलेबल बिज़नेस मॉडल – मल्टी-सेगमेंट प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के ज़रिए कंपनी ने विविधता और स्थिरता पाई है।

📝 निष्कर्ष

Infra.Market की यह नई फंडिंग केवल पूंजी जुटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह IPO रोडमैप का अहम हिस्सा है।

👉 ₹731.5 करोड़ की सीरीज G फंडिंग, स्थिर वैल्यूएशन और मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ यह दर्शाते हैं कि कंपनी अब वैश्विक और घरेलू निवेशकों के बीच और भी आकर्षक विकल्प बन चुकी है।

अगर कंपनी अपने FY25 के परिणामों में प्रॉफिटेबिलिटी और रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखती है, तो यह आने वाले IPO में निवेशकों के लिए टॉप चॉइस साबित हो सकती है।

🍲 Wow! Momo ने सीरीज D फंडिंग राउंड में जुटाए ₹75 करोड़

Wow! Momo

भारत के क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में तेजी से उभरती कंपनी Wow! Momo ने अपनी फंडिंग यात्रा में एक और अहम पड़ाव पार कर लिया है। कंपनी ने अपने सीरीज D राउंड में ₹75 करोड़ (लगभग $8.5 मिलियन) जुटाए हैं। यह निवेश मुख्य रूप से 360 ONE और Kyrush Investments द्वारा किया गया है।

यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब कंपनी ने सिर्फ़ तीन महीने पहले ही Stride Ventures से ₹85 करोड़ की डेट फंडिंग हासिल की थी। इस नई राशि के साथ Wow! Momo की कुल सीरीज D फंडिंग ₹650 करोड़ से अधिक हो गई है।


💰 निवेश का ब्योरा

कंपनी के RoC (Registrar of Companies) फाइलिंग्स के अनुसार:

  • बोर्ड ने 7,837 सीरीज D6 CCPS को ₹95,699 प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर जारी करने का फैसला किया है।
  • इस राउंड में 360 ONE ने ₹70 करोड़ और Kyrush Investments ने ₹4.99 करोड़ का निवेश किया।
  • इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब $315-320 मिलियन आँका जा रहा है।

शेयरहोल्डिंग संरचना में,

  • 360 ONE Portfolio की हिस्सेदारी 2.53%
  • Kyrush Investments की हिस्सेदारी 0.18% होगी।

🚀 कंपनी इन पैसों का कहाँ करेगी इस्तेमाल?

Wow! Momo ने साफ किया है कि जुटाए गए पैसे का उपयोग इन उद्देश्यों के लिए होगा:

  1. कैपिटल एक्सपेंशन (नए स्टोर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश)
  2. वर्किंग कैपिटल रिक्वायरमेंट्स
  3. जनरल कॉरपोरेट पर्पस

कंपनी का मकसद है कि आने वाले वर्षों में अपने बिज़नेस को नई ऊँचाइयों पर ले जाया जाए।


🍜 Wow! Momo की शुरुआत और सफर

Wow! Momo की शुरुआत 2008 में दो युवा उद्यमियों सागर दरयानी और बिनोद होमागाई ने की थी।
आज कंपनी भारत के 70 शहरों में 700 से अधिक आउटलेट्स चला रही है।

कंपनी के पास कई सब-ब्रांड्स हैं:

  • Wow! Momo
  • Wow! China
  • Wow! Chicken
  • Wow! Kulfi

इन ब्रांड्स के ज़रिए कंपनी ने विविध स्वादों और कस्टमर बेस को जोड़ने में सफलता पाई है।


📈 एक्सपेंशन प्लान्स

Wow! Momo सिर्फ रेस्टोरेंट बिज़नेस तक सीमित नहीं रहना चाहती। आने वाले तीन सालों में कंपनी ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं:

  • 1,500 स्टोर्स का विस्तार, जो 100 शहरों में होंगे।
  • FMCG बिज़नेस को ₹100 करोड़ तक स्केल करना।
  • HORECA डिवीजन (Hotels, Restaurants, Cafes) में भी मज़बूत उपस्थिति बनाना।

यह विस्तार दिखाता है कि कंपनी सिर्फ QSR नहीं बल्कि फूड इकोसिस्टम का बड़ा खिलाड़ी बनना चाहती है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन

डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार:

  • FY24 में Wow! Momo का रेवेन्यू ₹470 करोड़ रहा, जो FY23 के ₹413 करोड़ से 13% की बढ़त है।
  • हालांकि, कंपनी का घाटा FY24 में भी स्थिर रहा और यह ₹114 करोड़ पर कायम रहा।
  • FY25 के आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।

यह साफ दिखाता है कि कंपनी की राजस्व वृद्धि जारी है, लेकिन लाभप्रदता (profitability) की चुनौती अभी भी बनी हुई है।


🌍 भारतीय QSR सेक्टर में Wow! Momo की स्थिति

भारत का QSR मार्केट लगातार बढ़ रहा है, खासकर शहरी और सेमी-शहरी क्षेत्रों में।

  • डोमिनोज़, केएफसी और मैकडॉनल्ड्स जैसे ग्लोबल ब्रांड्स के बीच Wow! Momo ने अपनी भारतीय पहचान और स्थानीय स्वाद के दम पर जगह बनाई है।
  • कंपनी का मल्टी-ब्रांड अप्रोच इसे अन्य खिलाड़ियों से अलग करता है।

📌 Wow! Momo से सीख

  1. नवाचार (Innovation) – सिर्फ मोमो बेचने से शुरुआत कर आज यह मल्टी-क्यूज़ीन ब्रांड बन चुका है।
  2. एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी – छोटे आउटलेट्स से लेकर FMCG और HORECA में प्रवेश तक, कंपनी का विज़न बड़ा है।
  3. फंडिंग का महत्व – लगातार पूंजी जुटाकर कंपनी ने अपने विकास को तेज़ किया है।

📝 निष्कर्ष

Wow! Momo की ताज़ा फंडिंग यह साबित करती है कि भारतीय QSR ब्रांड्स में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है। कंपनी का ध्यान अब तेज़ी से विस्तार, नए ब्रांड्स की ग्रोथ और FMCG सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाने पर है।

👉 हालांकि घाटे की समस्या अभी बनी हुई है, लेकिन सस्टेन्ड रेवेन्यू ग्रोथ और निवेशकों का सपोर्ट कंपनी को आने वाले वर्षों में और भी मज़बूत बना सकता है।

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🚗 MyPickup सब्सक्रिप्शन-बेस्ड इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप ने बंद की सेवाएं

MyPickup

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अक्सर नई-नई इनोवेशन देखने को मिलती हैं, लेकिन हर प्रयोग सफलता तक नहीं पहुँच पाता। ऐसा ही हुआ MyPickup के साथ, जो कि एक सब्सक्रिप्शन-बेस्ड इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप था। Inflection Point Ventures (IPV) के सपोर्ट से शुरू हुआ यह स्टार्टअप अब तीन साल के सफर के बाद बंद हो गया है।

कंपनी ने साफ कहा कि उसका मॉडल प्रोडक्ट-मार्केट फिट (PMF) हासिल नहीं कर पाया और लंबे समय तक टिकने के लिए जिस तरह की पेशेंट कैपिटल की ज़रूरत थी, उसकी कमी रही।


🛺 MyPickup का आइडिया: सब्सक्रिप्शन पर ई-रिक्शा

फरवरी 2023 में अभिजीत जगताप द्वारा शुरू किया गया MyPickup एक अनोखा कॉन्सेप्ट लेकर आया था।

  • ग्राहक साप्ताहिक या मासिक सब्सक्रिप्शन प्लान ले सकते थे।
  • इसमें ज़ीरो कैंसलेशन और नो सर्ज प्राइसिंग का वादा किया गया था।
  • उद्देश्य था कि रोज़मर्रा के यात्रियों को फिक्स्ड और भरोसेमंद किराए पर सुविधा मिले।

यह मॉडल पारंपरिक ऑटो-रिक्शा और कैब सेवाओं के मुकाबले किफ़ायती और भरोसेमंद विकल्प बनने का दावा करता था।


📉 क्यों नहीं चला मॉडल?

कंपनी ने अपने तीन साल के सफर में चार बार बिज़नेस मॉडल बदला, लेकिन फिर भी अपेक्षित नतीजे नहीं मिले।

  • नॉन-पीक टाइम्स में स्केलिंग की समस्या
  • ग्राहकों को वादा किया गया अनुभव पूरा न हो पाना
  • सीमित संख्या में वाहन और सब्सक्राइबर

मई 2025 तक कंपनी के पास:

  • सिर्फ़ 19 गाड़ियाँ
  • हर महीने लगभग 4,000 राइड्स
  • 100 से भी कम सब्सक्राइबर थे

हालांकि कंपनी का 80% रिटेंशन रेट काफी मज़बूत था, लेकिन यह आंकड़े बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।


💸 फंडिंग और निवेश की चुनौतियाँ

MyPickup ने जुलाई 2024 में Inflection Point Ventures (IPV) से $179,000 (करीब ₹1.5 करोड़) की सीड फंडिंग जुटाई थी।

  • इस राशि से कंपनी ने लगभग एक साल तक संचालन जारी रखा।
  • लेकिन बड़े फंडिंग राउंड्स के लिए कंपनी को संस्थागत निवेशक (institutional investors) नहीं मिल पाए।

निवेशकों के मुताबिक, इस मॉडल में स्केलेबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी की संभावनाएँ सीमित थीं। यही वजह रही कि आगे की फंडिंग नहीं हो सकी।


🌍 इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर की सच्चाई

भारत का ईवी (EV) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और नीतिगत सहायता दे रही है। फिर भी कई स्टार्टअप्स को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

  1. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
  2. हाई ऑपरेशनल कॉस्ट
  3. ग्राहकों की सीमित स्वीकार्यता
  4. लॉन्ग-टर्म कैपिटल की अनुपलब्धता

MyPickup जैसी कंपनियाँ इन चुनौतियों से पार नहीं पा सकीं और अंततः उन्हें बंद करना पड़ा।


📌 MyPickup से सीख

MyPickup की कहानी स्टार्टअप्स के लिए कई सीख छोड़ती है:

  • सिर्फ़ आइडिया इनोवेटिव होना काफी नहीं है, बल्कि उसे बाज़ार में स्केल और टिकाऊ बनाना भी ज़रूरी है।
  • शुरुआती सफलता के बाद भी दीर्घकालिक पूंजी के बिना सर्वाइवल मुश्किल हो जाता है।
  • ग्राहक अनुभव (CX) को निरंतर बेहतर करना किसी भी सब्सक्रिप्शन मॉडल के लिए अहम है।

📈 भविष्य की राह

हालांकि MyPickup का सफर यहाँ थम गया, लेकिन इससे जुड़े अनुभव भविष्य के उद्यमियों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं।

  • भारत में शेयरिंग और सब्सक्रिप्शन-बेस्ड मॉडल्स की मांग अभी भी बनी हुई है।
  • अगर बेहतर टेक्नोलॉजी, चार्जिंग नेटवर्क और कैपिटल सपोर्ट मिले, तो यह मॉडल फिर से सफल हो सकता है।

📝 निष्कर्ष

MyPickup का बंद होना इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में इनोवेशन जितना ज़रूरी है, उतना ही आवश्यक है टिकाऊ बिज़नेस मॉडल और पर्याप्त फंडिंग।

👉 तीन साल के छोटे सफर में MyPickup ने यह साबित किया कि यात्रियों को किफ़ायती और भरोसेमंद विकल्प चाहिए, लेकिन बिना सही स्केलिंग स्ट्रेटेजी और लंबे समय तक निवेशकों का भरोसा पाए यह सफर अधूरा रह जाता है।

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💰 Finnable ने प्री-सीरीज़ C राउंड में जुटाए ₹250 करोड़,

Finnable

भारत का फिनटेक सेक्टर लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है और इसी कड़ी में डिजिटल लेंडिंग प्लेटफ़ॉर्म Finnable ने अपने प्री-सीरीज़ C राउंड में ₹250 करोड़ (लगभग $29 मिलियन) जुटाने की घोषणा की है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Matrix Partners, TVS Capital और India Nippon Electricals Limited कर रहे हैं।


📊 फंडिंग का स्ट्रक्चर

RoC (Registrar of Companies) से मिली जानकारी के अनुसार, Finnable के बोर्ड ने 3,35,238 प्रेफरेंस शेयर जारी किए हैं, जिनकी कीमत प्रति शेयर ₹3,788.35 तय की गई।

  • इस राउंड के पहले ट्रांज़ (₹127 करोड़ या $14.7 मिलियन) में:
    • Matrix Partners ने निवेश किया ₹125 करोड़
    • India Nippon Electricals ने निवेश किया ₹2 करोड़
  • बाकी की राशि जल्द ही इस राउंड को पूरा करेगी।

यह निवेश उस समय आया है जब लगभग छह महीने पहले रंजन पाई के फैमिली ऑफिस ने Finnable में ₹40 करोड़ का निवेश किया था।


💵 वैल्यूएशन और शेयरहोल्डिंग

Entrackr के अनुमान के मुताबिक, इस निवेश के बाद Finnable की वैल्यूएशन लगभग ₹1,300 करोड़ (लगभग $150 मिलियन) हो जाएगी।

नए निवेश से पहले कंपनी की कैप टेबल इस प्रकार थी:

  • MEMG Family Office LLP – 18.69%
  • Matrix Partners India – 14.53%
  • TVS Shriram Growth – 8.05%
  • को-फाउंडर और CEO नितिन गुप्ता – 24% से अधिक

नए राउंड के बाद शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव होगा, खासकर Matrix और TVS के निवेश से, जिससे फाउंडर्स की हिस्सेदारी में थोड़ी डायल्यूशन देखने को मिलेगी।


🏦 Finnable का सफर

Finnable की स्थापना 2016 में तीन पूर्व बैंकरों – नितिन गुप्ता, अमित अरोड़ा और विराज त्यागी – ने की थी।

  • यह कंपनी मुख्य रूप से सैलरीड प्रोफेशनल्स को पर्सनल लोन उपलब्ध कराती है।
  • कंपनी का दावा है कि अब तक उसने 2.7 लाख से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दी हैं।
  • Finnable का AUM (Assets Under Management) फिलहाल ₹3,000 करोड़ तक पहुँच चुका है।

📈 वित्तीय प्रदर्शन

कंपनी ने अभी FY25 के नतीजे दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन FY24 में इसका प्रदर्शन इस प्रकार रहा:

  • रेवेन्यू (आय) – ₹181.7 करोड़
  • नेट लॉस (हानि) – ₹5.88 करोड़

यह दिखाता है कि कंपनी लगातार अपने बिज़नेस को स्केल कर रही है और घाटे को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है।


🔑 क्यों है Finnable खास?

भारत में डिजिटल लेंडिंग सेक्टर बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।

  • सैलरीड प्रोफेशनल्स के बीच पर्सनल लोन की बढ़ती डिमांड
  • डिजिटल KYC और पेपरलेस प्रोसेस
  • तेज़ डिस्बर्सल और ट्रांसपेरेंसी

ये सभी फैक्टर Finnable जैसी कंपनियों को एक मजबूत ग्रोथ पोज़िशन पर ला रहे हैं।

Finnable का फोकस खासतौर पर यंग प्रोफेशनल्स और मिडिल-क्लास सेगमेंट पर है, जो तेजी से डिजिटल फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस को अपनाते हैं।


🌍 भारतीय फिनटेक सेक्टर का भविष्य

भारत में फिनटेक सेक्टर का मार्केट 2025 तक $150 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है। डिजिटल लेंडिंग, पेमेंट्स और NBFC सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

Finnable का बढ़ता AUM, मजबूत निवेशकों का भरोसा और ग्राहकों का बढ़ता बेस इस बात का संकेत है कि कंपनी आने वाले समय में लेंडिंग स्पेस की अग्रणी खिलाड़ियों में शामिल हो सकती है।


📝 निष्कर्ष

Finnable का ₹250 करोड़ का प्री-सीरीज़ C राउंड यह साबित करता है कि निवेशकों का भरोसा अब भी भारतीय फिनटेक स्टार्टअप्स पर बना हुआ है।
👉 कंपनी अब इन फंड्स का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी अपग्रेड, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर बेस विस्तार के लिए करेगी।

यदि कंपनी अपनी रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखते हुए घाटा कम करने में सफल होती है, तो निकट भविष्य में यह एक और यूनिकॉर्न बनने की ओर बढ़ सकती है।

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