💊 PharmEasy ने FY25 में घाटा 38% घटाया, राजस्व लगभग स्थिर

PharmEasy

भारत की अग्रणी ई-फार्मेसी और डायग्नोस्टिक ब्रांड PharmEasy की पेरेंट कंपनी API Holdings ने वित्त वर्ष 2025 (मार्च 2025 को समाप्त) के नतीजे जारी किए। इसमें कंपनी ने भले ही राजस्व में बहुत बड़ी बढ़त दर्ज नहीं की हो, लेकिन घाटे को 38% तक कम करने में सफलता हासिल की है। यह सुधार मुख्य रूप से फाइनेंस और डिप्रिशिएशन कॉस्ट में कटौती के कारण हुआ है।


📊 राजस्व: मामूली बढ़त

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में 3.7% बढ़कर ₹5,872 करोड़ पर पहुंचा, जो पिछले साल (FY24) ₹5,664 करोड़ था।

PharmEasy का बिजनेस मॉडल दवाइयों की बिक्री, डायग्नोस्टिक टेस्ट्स और टेली-कंसल्टेशन पर आधारित है।

  • फार्मा और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की बिक्री से सबसे ज्यादा आय हुई – ₹5,097.5 करोड़ (87%)
  • बाकी रेवेन्यू डायग्नोस्टिक्स, टेली-कंसल्टेशन, डिलीवरी, वेयरहाउसिंग और पैथोलॉजी टेस्ट्स की कमिशन फीस से आया।
  • कंपनी को ₹108 करोड़ नॉन-ऑपरेटिंग इनकम (इंटरेस्ट और एसेट गेन) भी हुई, जिससे कुल रेवेन्यू ₹5,898 करोड़ हो गया।

💸 खर्च और कॉस्ट कटौती

FY25 में PharmEasy का कुल खर्च ₹7,208.5 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा।
सबसे बड़ा कॉस्ट सेंटर रहा:

  • मटीरियल कॉस्ट – ₹4,844 करोड़ (कुल खर्च का 67.2%)।
  • कर्मचारियों पर खर्च – ₹908.4 करोड़ (30% की वृद्धि, FY24 में ₹700 करोड़)।
  • डिलीवरी एसोसिएट्स के भुगतान – ₹90 करोड़।

लेकिन राहत यह रही कि—

  • फाइनेंस कॉस्ट 30% घटकर ₹506 करोड़ रह गई।
  • डिप्रिशिएशन और अमॉर्टाइजेशन कॉस्ट 21.7% घटकर ₹168.9 करोड़ पर आई।

इस तरह कंपनी ने अपने घाटे को नियंत्रित किया।


📉 घाटे में बड़ी गिरावट

कंपनी का घाटा FY24 के ₹2,533.5 करोड़ से घटकर FY25 में ₹1,572.3 करोड़ रह गया।
यानी 38% की कमी, जो निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है।

PharmEasy का EBITDA (लॉस) ₹553.5 करोड़ पर रहा।

  • EBITDA मार्जिन – -15.71%
  • ROCE – -13.9%
  • यूनिट लेवल पर कंपनी ने हर ₹1 की कमाई के लिए ₹1.23 खर्च किया

🧪 Thyrocare ने दिखाई मजबूती

PharmEasy ने 2021 में Thyrocare में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी थी। FY25 में Thyrocare का प्रदर्शन बेहतर रहा।

  • राजस्व – ₹687.5 करोड़ (20% वृद्धि)
  • मुनाफा – ₹90.75 करोड़ (30% की वृद्धि)

इससे साफ है कि डायग्नोस्टिक्स डिवीजन अभी भी ग्रोथ का मजबूत स्तंभ बना हुआ है।


👥 लीडरशिप में बदलाव

इस साल कंपनी के फाउंडर्स ने सक्रिय भूमिका से पीछे हटने का फैसला किया।

  • सह-संस्थापक धर्मिल शेट, धवल शाह और हार्दिक देधिया पहले ही पीछे हट चुके थे।
  • चौथे सह-संस्थापक सिद्धार्थ शाह ने भी अगस्त 2025 में कंपनी छोड़ दी।

अब API Holdings ने राहुल गुहा को नया MD और CEO नियुक्त किया है। वे Thyrocare के भी CEO हैं।


💰 फंडिंग और निवेशक

PharmEasy ने अब तक करीब $1.1 बिलियन (₹9,000 करोड़ से ज्यादा) फंडिंग जुटाई है।
इसके प्रमुख निवेशक हैं:

  • Ranjan Pai की MEMG,
  • Prosus,
  • और Temasek

🏥 हेल्थकेयर सेक्टर की चुनौतियाँ

हालांकि PharmEasy ने घाटा घटाया है, लेकिन हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स सेक्टर कई चुनौतियों से जूझ रहा है।

  • कोविड के बाद उम्मीद की जा रही थी कि डायग्नोस्टिक्स की डिमांड स्थायी रूप से बढ़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
  • हेल्थकेयर इंडस्ट्री पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है –
    • बड़े अस्पतालों में PE फंड्स की मालिकाना हिस्सेदारी महंगे इलाज का कारण बताई जाती है।
    • हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की नीतियों से उपभोक्ताओं में असंतोष है।
    • अनावश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट्स पर गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है।

इस माहौल में सरकार की ओर से कीमतों पर कैप,
सब्सिडी योजनाएँ,
या ऑनलाइन मेडिसिन डिस्ट्रीब्यूशन पर सख्त नियम आने की संभावना बहुत अधिक है।


🔮 आगे का रास्ता

PharmEasy को अब—

  • डायग्नोस्टिक्स बिजनेस में भरोसा बहाल करना,
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाना,
  • और रेगुलेटरी बदलावों के लिए तैयार रहना होगा।

यदि कंपनी खर्च पर नियंत्रण और भरोसेमंद सेवाएँ देने में सफल होती है, तो आने वाले सालों में यह भारत की हेल्थटेक इंडस्ट्री का लीडर बनकर उभर सकती है।


✅ निष्कर्ष

PharmEasy के FY25 नतीजे दोहरी तस्वीर पेश करते हैं।

  • राजस्व मामूली बढ़ा है,
  • खर्च लगभग स्थिर रहा है,
  • लेकिन घाटा 38% घटाना बड़ी उपलब्धि है।

साथ ही, Thyrocare की मजबूत परफॉर्मेंस और नई मैनेजमेंट टीम कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि हेल्थकेयर सेक्टर की चुनौतियाँ अभी खत्म नहीं हुईं, लेकिन यदि PharmEasy सही रणनीति अपनाता है तो यह आने वाले वर्षों में ई-फार्मेसी और डायग्नोस्टिक्स स्पेस में प्रमुख खिलाड़ी बना रहेगा।

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📱 अगस्त 2025 में UPI ट्रांजैक्शंस: कर्ज़ वसूली, ग्रॉसरी और फ्यूल में सबसे ज्यादा खर्च

UPI

भारत में डिजिटल पेमेंट्स का चेहरा बन चुका UPI (Unified Payments Interface) अगस्त 2025 में भी तेज़ी से बढ़ता नज़र आया। इस महीने कई कैटेगिरीज़ ने ₹5,000 करोड़ से अधिक का लेन-देन दर्ज किया। NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के ताज़ा आंकड़े दर्शाते हैं कि कर्ज़ वसूली एजेंसियों, ग्रॉसरी स्टोर्स और फ्यूल स्टेशन ने डिजिटल पेमेंट ग्रोथ की कमान संभाली।


💳 कर्ज़ वसूली एजेंसियों का दबदबा

अगस्त महीने में सबसे बड़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम कर्ज़ वसूली एजेंसियों (Debt Collection Agencies) के नाम रहा। इस कैटेगिरी ने ₹77,007 करोड़ के लेन-देन पूरे किए।

इसके बाद सिक्योरिटीज़ ब्रोकर्स और डीलर्स ने ₹45,687 करोड़ के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। यह साफ दर्शाता है कि वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े डिजिटल ट्रांजैक्शंस लगातार बढ़ रहे हैं।


🛒 ग्रॉसरी और सुपरमार्केट्स: रोज़मर्रा के खर्च का डिजिटल चेहरा

भारतीय उपभोक्ताओं की रोज़मर्रा की ज़रूरतों में ग्रॉसरी सबसे ऊपर रही।

  • ग्रॉसरी और सुपरमार्केट्स₹68,116 करोड़, लगभग 3.1 बिलियन ट्रांजैक्शंस
  • फ्यूल स्टेशन (सर्विस स्टेशन)₹34,547 करोड़

यहां तक कि खाने-पीने की कैटेगिरी में भी UPI का बोलबाला जारी रहा।

  • रेस्टोरेंट्स और डाइनिंग प्लेसेज़₹19,432 करोड़
  • फास्ट फूड और QSR चेन₹14,542 करोड़

स्पष्ट है कि भारतीय ग्राहक अब कैश की जगह डिजिटल पेमेंट को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।


🔌 ज़रूरी सेवाओं में स्थिर ग्रोथ

आवश्यक सेवाओं (Essential Services) में भी UPI ट्रांजैक्शन लगातार बढ़ रहे हैं।

  • टेलीकॉम सेवाएँ₹21,218 करोड़
  • यूटिलिटीज़ (बिजली, गैस, पानी, सैनिटरी)₹22,368 करोड़

इन आंकड़ों से साफ है कि बिजली बिल, फोन रिचार्ज और गैस पेमेंट जैसी ज़रूरी सेवाओं के लिए अब ज्यादातर लोग UPI पर निर्भर हैं।


🛍️ डिस्क्रिशनरी खर्च: दवाइयों और शॉपिंग में तेज़ी

UPI का इस्तेमाल केवल ज़रूरी सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लाइफ़स्टाइल और शॉपिंग कैटेगिरी में भी बड़ी हिस्सेदारी देखने को मिली।

  • फार्मेसी और ड्रग स्टोर्स₹12,581 करोड़
  • कपड़ों की दुकानें (Men’s & Women’s Clothing)₹11,811 करोड़
  • इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप्स₹10,209 करोड़
  • सरकारी सेवाएँ₹10,000 करोड़+

🎮 गेमिंग ट्रांजैक्शंस में गिरावट

अगस्त 2025 में एक बड़ा बदलाव ऑनलाइन गेमिंग पेमेंट्स में देखने को मिला।

  • 271 मिलियन ट्रांजैक्शंस₹7,441 करोड़
  • जुलाई 2025 – 351 मिलियन ट्रांजैक्शंस, ₹10,076 करोड़

यानी महीने-दर-महीने करीब 26% की गिरावट। इसका मुख्य कारण है रियल मनी गेमिंग ऐप्स पर बैन, जो अगस्त के दूसरे हिस्से से लागू हुआ।


🛒 अन्य प्रमुख कैटेगिरी

कुछ और कैटेगिरीज़ ने भी ₹5,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया—

  • ऑनलाइन मार्केटप्लेस₹7,822 करोड़
  • शराब की दुकानें (Liquor Stores)₹6,116 करोड़

📊 कुल तस्वीर: UPI बना सबसे भरोसेमंद पेमेंट टूल

अगस्त 2025 के ये आंकड़े साबित करते हैं कि UPI अब केवल छोटे ट्रांजैक्शन का साधन नहीं, बल्कि बड़े कैटेगिरी-विशिष्ट खर्चों का मुख्य पेमेंट चैनल बन चुका है।

  • रोज़मर्रा की जरूरतें (ग्रॉसरी, फ्यूल, बिल पेमेंट्स)
  • लाइफ़स्टाइल (रेस्टोरेंट्स, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स)
  • निवेश और कर्ज़ वसूली

हर जगह UPI का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।


🔮 आगे का रास्ता

भारत सरकार और NPCI लगातार UPI को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले समय में—

  • क्रेडिट लाइन ऑन UPI,
  • अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शंस,
  • और B2B पेमेंट्स

जैसी नई सुविधाएँ इसे और ताकतवर बनाएंगी।


✅ निष्कर्ष

अगस्त 2025 में UPI ट्रांजैक्शंस ने भारतीय डिजिटल इकॉनमी की ताकत को फिर साबित कर दिया।

जहाँ कर्ज़ वसूली और निवेश जैसी कैटेगिरीज़ में हज़ारों करोड़ का वॉल्यूम दर्ज हुआ, वहीं ग्रॉसरी, फ्यूल और रेस्टोरेंट्स जैसी रोज़मर्रा की कैटेगिरीज़ ने दिखाया कि आम उपभोक्ता के जीवन में UPI कितनी गहराई से जुड़ चुका है।

📌 यह कहना गलत नहीं होगा कि UPI अब सिर्फ पेमेंट ऐप नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल लाइफलाइन बन चुका है।

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🚀 इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $348 मिलियन,

भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में इस हफ्ते जबरदस्त हलचल देखने को मिली। कुल 28 स्टार्टअप्स ने $348 मिलियन (करीब ₹2,900 करोड़) जुटाए, जिसमें 6 ग्रोथ-स्टेज और 18 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं। वहीं, एक स्टार्टअप ने अपनी डील की राशि सार्वजनिक नहीं की।

पिछले हफ्ते की तुलना में, जब 24 स्टार्टअप्स ने केवल $127.59 मिलियन जुटाए थे, इस हफ्ते की फंडिंग लगभग 2.7X ज्यादा रही।


💰 ग्रोथ-स्टेज डील्स: Tessolve ने मारी सबसे बड़ी बाज़ी

ग्रोथ और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स ने इस हफ्ते कुल $285 मिलियन जुटाए।

  • Tessolve – $150 मिलियन (TPG से)
  • CityMall – $47 मिलियन (Series D, Accel लीड)
  • Seekho – $28 मिलियन
  • Blue Tokai – $25 मिलियन
  • Colive – $20 मिलियन
  • Offgrid Energy Labs – $15 मिलियन

🌱 अर्ली-स्टेज डील्स: Firstclub ने खींचा सबसे बड़ा निवेश

अर्ली-स्टेज कैटेगरी में 21 स्टार्टअप्स ने कुल $63 मिलियन जुटाए।

  • Firstclub (Quick Commerce) – $23 मिलियन (Series A, Accel लीड)
  • PlatinumRx (Online Pharmacy)
  • StockGro (Social Investing)
  • Ecosoul (Eco-friendly D2C)
  • Roadzen (AI Startup)

वहीं, Homelane को भी फंडिंग मिली लेकिन राशि का खुलासा नहीं किया गया।


🏙️ शहर और सेक्टर के आधार पर फंडिंग

  • बेंगलुरु – 14 डील्स (लीडर)
  • दिल्ली-एनसीआर – 5 डील्स
  • पुणे, चेन्नई और लखनऊ – भी सक्रिय

सेगमेंट-वाइज:

  • हेल्थटेक – 6 डील्स (टॉप सेक्टर)
  • ई-कॉमर्स – 5 डील्स
  • फिनटेक, एनर्जी और AI स्टार्टअप्स – भी निवेशकों की रडार पर

📊 सीरीज़-वाइज ब्रेकअप

  • Seed Funding – 8 डील्स
  • Series A – 5 डील्स
  • Debt Funding – 4 डील्स
  • Pre-Series A और Series D – कुछ डील्स

👥 हायरिंग और डिपार्चर

  • Pazcare ने सीनियर लीडरशिप में प्रमोशन किया – आदित्य मलिक (CRO), अर्पित रुंगटा (SVP, Customer Success), अभिषेक गोयल (Director, Growth)।
  • सामंथा रुथ प्रभु बनीं Zoy (Menstrual Wellness Brand) की को-फाउंडर।
  • हर्षजीत सेठी (Peak XV MD) और गिरीश मथ्रुबूथम (Freshworks Co-founder) ने पद छोड़े।

🤝 मर्जर और एक्विज़िशन

  • Star Localmart (SGG Group) ने DusMinute खरीदा।
  • Flipkart ने Pinkvilla India में बहुमत हिस्सेदारी ली।
  • Amazon ने Axio (Capital Float) का अधिग्रहण पूरा किया।

🏦 फंड लॉन्च

  • L Catterton India Fund – ₹1,760 करोड़
  • Venturi Partners Fund II – ₹1,320 करोड़
  • BizDateUp – Pulse Fund I – ₹1,000 करोड़
  • Elev8 Venture Partners Fund – ₹1,400 करोड़

⚠️ लेऑफ्स

  • MPL – 500-600 कर्मचारियों की छंटनी (60% वर्कफोर्स)
  • Head Digital Works (A23) – 500 लोग प्रभावित
  • Ola Krutrim AI Unit – तीसरी बार कटौती, 50 कर्मचारी निकाले गए

🆕 नए लॉन्च और पार्टनरशिप्स

  • CoFounder Circle लॉन्च – दर्पण संधवी द्वारा
  • Reliance AI Unit – Google और Meta साझेदार
  • BeyondXcelerate D2C Accelerator – ₹5 करोड़ का पूल
  • Cashify + Google – Refurbished Pixel Phones सेल
  • Euler Motors + Pickkup.io – 200 EVs डील
  • Swiggy – Giftables लॉन्च (Festive Gifting प्लेटफॉर्म)
  • FuelBuddy – Zimbabwe और Zambia में एंट्री

📈 इस हफ्ते के फाइनेंशियल रिजल्ट

  • OYO – Q1 FY26 में ₹200 करोड़ प्रॉफिट
  • Emoha – FY25 में ₹74.35 करोड़ रेवेन्यू, 32% लॉस कट
  • boAt – FY25 में ₹60 करोड़ प्रॉफिट
  • Bluestone – Q1 FY26 में 41% लॉस कंट्रोल

📰 भारतीय स्टार्टअप्स अन्य बड़ी खबरें

  • ऑनलाइन गेमिंग बैन पर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची
  • Urban Company IPO – शुरुआती निवेशकों को बड़ा रिटर्न
  • boAt और Urban Company को SEBI से IPO की मंज़ूरी
  • E2W मार्केट – TVS (23.09%), Ola (18.19%), Ather (17.2%) टॉप 3

🔎 निष्कर्ष

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने इस हफ्ते $348 मिलियन की फंडिंग जुटाकर एक नई रफ्तार पकड़ी। ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स खासतौर पर निवेशकों की पहली पसंद बने। वहीं, लेऑफ्स और नेतृत्व परिवर्तन जैसी खबरें चुनौतियों की भी झलक दिखाती हैं।

📌 साफ है कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम निवेशकों के भरोसे और नए इनोवेशन की बदौलत तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले हफ्तों में IPOs, नए फंड्स और अंतरराष्ट्रीय एक्सपैंशन इसे और गति देंगे।

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📦 Delhivery ने कर्मचारियों को दिए 4.36 लाख ESOPs,

Delhivery

भारत की प्रमुख लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery ने अपने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने अपने ESOP (Employee Stock Ownership Plan) स्कीम के तहत कुल 4,36,800 स्टॉक ऑप्शंस ग्रांट किए हैं। यह कदम कंपनी की ग्रोथ और कर्मचारियों को लंबी अवधि के लिए जोड़कर रखने की रणनीति को दिखाता है।


📑 डील की डिटेल्स

  • 4 सितंबर 2025 को कंपनी की ओर से यह मंजूरी दी गई।
  • इसमें शामिल हैं:
    • 85,700 ऑप्शंस – ESOP 2012 स्कीम के तहत
    • 3,51,100 ऑप्शंस – ESOP 2021 स्कीम के तहत

👉 मौजूदा शेयर प्राइस ₹467 के हिसाब से इन ऑप्शंस की कुल वैल्यू करीब ₹20.4 करोड़ बैठती है।


💹 कैसे काम करता है ESOP?

डिस्क्लोज़र के मुताबिक, हर एक ऑप्शन को एक फुली पेड-अप इक्विटी शेयर में बदला जा सकता है।

  • फेस वैल्यू: ₹1 प्रति शेयर
  • एक्सरसाइज प्राइस: ₹1 प्रति शेयर

यानि कर्मचारियों को यह ऑप्शंस लगभग नाम मात्र कीमत पर मिलेंगे, जबकि उनका मार्केट वैल्यू बहुत ज्यादा है।


⏳ वेस्टिंग शेड्यूल

कंपनी के अनुसार, यह ESOPs अगले चार सालों में धीरे-धीरे वेस्ट होंगे

  • शर्त: कर्मचारी की लगातार नौकरी और कंपनी की ओर से तय किए गए अन्य कंडीशन्स।
  • फायदा: लंबे समय तक कर्मचारियों को कंपनी के साथ जोड़े रखने में मदद।

📊 Delhivery की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

Delhivery ने हाल ही में अपने Q1 FY26 के रिजल्ट जारी किए:

  • रेवेन्यू: ₹2,294 करोड़ (साल-दर-साल 5.6% की वृद्धि, Q1 FY25 में ₹2,172 करोड़)
  • प्रॉफिट: ₹91 करोड़

👉 यह बताता है कि कंपनी लगातार रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों में सुधार कर रही है।


💰 मार्केट कैप और शेयर प्राइस

  • मौजूदा समय (1 सितंबर 2025 को सुबह 10:27 बजे) पर Delhivery का शेयर प्राइस ₹467 था।
  • कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹34,886 करोड़ (लगभग $4 बिलियन) है।

🎯 क्यों अहम है यह कदम?

Delhivery का यह ESOP ग्रांट कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

  1. कर्मचारियों को प्रोत्साहन – ESOPs कर्मचारियों को कंपनी की सफलता से जोड़ते हैं।
  2. लंबी अवधि की स्थिरता – वेस्टिंग शेड्यूल कर्मचारियों को कंपनी के साथ लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करेगा।
  3. टैलेंट रिटेंशन – लॉजिस्टिक्स जैसे हाई-ग्रॉथ सेक्टर में टैलेंट को रोककर रखना बहुत जरूरी है।

🚚 Delhivery का बिजनेस मॉडल

  • Delhivery भारत की सबसे बड़ी थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन कंपनी है।
  • इसकी सर्विसेज में शामिल हैं:
    • पार्सल डिलीवरी
    • वेयरहाउसिंग
    • फ्रेट मैनेजमेंट
    • क्रॉस-बॉर्डर लॉजिस्टिक्स

👉 ई-कॉमर्स के बढ़ते विस्तार ने Delhivery को तेजी से आगे बढ़ाया है।


📈 ग्रोथ और चैलेंजेज

Delhivery पिछले कुछ सालों से लगातार ग्रोथ ट्रैक पर है, लेकिन साथ ही इसे कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है:

  • फ्यूल कॉस्ट और ऑपरेशनल एक्सपेंस
  • ई-कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मांग
  • अन्य लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप्स और पारंपरिक कंपनियों से प्रतिस्पर्धा

फिर भी, ESOP जैसे कदम कंपनी को बेहतर वर्कफोर्स बनाए रखने और आगे बढ़ने में मदद करेंगे।


🌐 IPO और निवेशकों की नजर

Delhivery का IPO मई 2022 में आया था और तब से कंपनी पर लगातार निवेशकों की नजर बनी हुई है।

  • ESOP ग्रांट्स निवेशकों को यह संदेश देते हैं कि कंपनी एम्प्लॉयी-फर्स्ट पॉलिसी अपनाती है।
  • इससे ब्रांड वैल्यू और ट्रस्ट दोनों मजबूत होते हैं।

📌 निष्कर्ष

Delhivery का अपने कर्मचारियों को ₹20.4 करोड़ वैल्यू के ESOP देना इस बात का सबूत है कि कंपनी सिर्फ बिजनेस ग्रोथ पर ही नहीं, बल्कि अपनी टीम पर भी जोर देती है।

  • यह कदम कंपनी को लॉन्ग-टर्म टैलेंट बनाए रखने में मदद करेगा।
  • साथ ही, आने वाले सालों में Delhivery भारत की लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री की रीढ़ बनने की ओर और तेजी से बढ़ेगी।

👉 कुल मिलाकर, यह ESOP ग्रांट Delhivery की ग्रोथ स्टोरी का एक और अहम पड़ाव है।

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📚 PhysicsWallah ने Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीदी,

PhysicsWallah

भारत के सबसे चर्चित एडटेक स्टार्टअप्स में से एक PhysicsWallah (PW) ने UPSC कोचिंग संस्थान Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीद ली है। यह डील करीब ₹250 करोड़ वैल्यूएशन पर हुई है। इस निवेश के साथ PW ने UPSC और सिविल सर्विसेज की तैयारी के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर ली है।


🤝 डील के बाद भी Sarrthi IAS रहेगा स्वतंत्र

सूत्रों के अनुसार, Sarrthi IAS स्वतंत्र रूप से काम करता रहेगा, लेकिन PhysicsWallah की टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाएगा। यह कदम UPSC टेस्ट प्रेप मार्केट में तेजी से हो रही कंसोलिडेशन (Consolidation) का हिस्सा माना जा रहा है।

👉 इस डील की जानकारी सबसे पहले Entrackr ने अप्रैल में एक्सक्लूसिव रूप से रिपोर्ट की थी।


🏛 Sarrthi IAS की खासियत

Sarrthi IAS की स्थापना वरुण जैन और डॉ. शिविन चौधरी ने की थी। यह संस्थान खासतौर पर मेंटॉरशिप-फोकस्ड कोर्सेज के लिए जाना जाता है।

इनके कोर्सेज में शामिल हैं:

  • GS Foundation
  • Mains Modules
  • Prelims Revision
  • Interview Guidance

यानी यह प्लेटफ़ॉर्म UPSC की तैयारी के हर चरण को कवर करता है और छात्रों को पर्सनलाइज्ड गाइडेंस प्रदान करता है।


📊 डील से बढ़ेगा रेवेन्यू

PhysicsWallah पहले से ही PWOnlyIAS के जरिए UPSC की तैयारी के क्षेत्र में मौजूद है।

  • इस डील के बाद PWOnlyIAS और Sarrthi IAS का कंबाइंड रेवेन्यू FY26 में ₹350 करोड़ से पार होने की उम्मीद है।
  • इसका मतलब है कि PW अब सिविल सर्विसेज प्रेपरेशन मार्केट का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनने की ओर बढ़ रहा है।

🌐 PhysicsWallah की रणनीति

PW का यह निवेश UPSC और अन्य स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन एग्ज़ाम्स की तैयारी वाले सेगमेंट में उसकी पोज़िशन को और मजबूत करेगा।

  • खासतौर पर ऑफ़लाइन प्रेज़ेंस बढ़ाने में यह डील मददगार होगी।
  • PW इससे पहले Drishti IAS जैसे बड़े अधिग्रहण की कोशिश भी कर चुका था, लेकिन वह डील पूरी नहीं हो पाई।

🏦 IPO से पहले बड़ा कदम

PhysicsWallah ने हाल ही में SEBI से IPO के लिए DRHP फाइल करने की मंजूरी प्राप्त कर ली है।

  • कंपनी का लक्ष्य है कि ₹4,500 करोड़ का फंड IPO के जरिए जुटाया जाए।
  • Sarrthi IAS में यह निवेश IPO से पहले अपनी स्ट्रेंथ और मार्केट पोज़िशन दिखाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

💰 फंडिंग और वैल्यूएशन

  • अब तक PW ने कुल $312 मिलियन (करीब ₹2,600 करोड़) फंडिंग जुटाई है।
  • इसमें सबसे बड़ा राउंड $210 मिलियन का Series B था, जिसका नेतृत्व Hornbill Capital ने किया था।
  • इस राउंड में Lightspeed, GSV और WestBridge Capital जैसे बड़े निवेशक भी शामिल थे।
  • उस समय कंपनी की वैल्यूएशन $2.8 बिलियन आंकी गई थी।

📈 FY25 के फाइनेंशियल्स

PhysicsWallah ने हाल ही में अपने FY25 के वित्तीय नतीजे साझा किए:

  • रेवेन्यू: ₹3,000 करोड़ (55% साल-दर-साल वृद्धि)
  • लॉस: लगभग 80% तक कम हुए

👉 यानी कंपनी न सिर्फ ग्रोथ कर रही है बल्कि घाटे को भी तेजी से कंट्रोल कर रही है।


🔎 मार्केट पर असर

UPSC कोचिंग मार्केट लंबे समय से ऑफलाइन प्लेयर्स जैसे Drishti IAS, Vision IAS और Vajiram & Ravi पर निर्भर रहा है।
लेकिन PW और Sarrthi IAS जैसी न्यू-एज एडटेक कंपनियां टेक्नोलॉजी, मेंटॉरशिप और हाइब्रिड मॉडल के जरिए इस मार्केट को बदल रही हैं।

  • छात्रों को सस्ती और क्वालिटी गाइडेंस मिल रही है।
  • ऑनलाइन-ऑफलाइन का कॉम्बिनेशन नए जमाने के छात्रों की जरूरतों को पूरा कर रहा है।

📌 निष्कर्ष

Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीदकर PhysicsWallah ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ JEE और NEET तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि UPSC और सरकारी नौकरी परीक्षाओं के क्षेत्र में भी दबदबा बनाना चाहता है।

  • IPO से पहले यह कदम निवेशकों और छात्रों, दोनों के लिए बड़ा संदेश है।
  • आने वाले वर्षों में PW और Sarrthi IAS का संयुक्त मॉडल UPSC की तैयारी को और ज्यादा डिजिटल, किफायती और प्रभावी बना सकता है।

👉 कुल मिलाकर, यह डील UPSC प्रेप इंडस्ट्री में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

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🎧 boAt ने FY25 में ₹60 करोड़ का मुनाफा कमाया,

Boat Office

भारत की प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी boAt (Imagine Marketing) ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में ₹60 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह कंपनी के लिए बड़ा टर्नअराउंड है, क्योंकि पिछले वर्षों में उसे भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा था। कंपनी ने लागत में कटौती और संचालन में सुधार कर यह उपलब्धि हासिल की है।


📊 राजस्व में हल्की गिरावट, लेकिन मुनाफे की वापसी

boAt की FY25 में कुल आय ₹3,073 करोड़ रही, जो पिछले साल (FY24) के ₹3,118 करोड़ से मामूली कम है। हालांकि, कंपनी घाटे से मुनाफे में लौट आई, जो निवेशकों और बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

  • प्रोडक्ट सेल्स: ₹3,070.4 करोड़ (इयरबड्स, स्पीकर्स, एयरडोप्स और वॉयरलेस डिवाइस)
  • ऑपरेटिंग इनकम: ₹2.9 करोड़
  • कुल राजस्व (नॉन-ऑपरेटिंग इनकम सहित): ₹3,098 करोड़

🌍 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बिक्री

  • भारत: ₹3,050.5 करोड़ की बिक्री (कोर मार्केट)
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार: 44% साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹20 करोड़

यह साफ दर्शाता है कि boAt की पकड़ अब सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ रही है।


🎶 ऑडियो सेगमेंट का दबदबा, वियरेबल्स में गिरावट

boAt के लिए ऑडियो प्रोडक्ट्स (इयरबड्स, हेडफोन, स्पीकर्स) अब भी सबसे बड़ा राजस्व जनरेटर बने हुए हैं।

  • ऑडियो सेगमेंट: ₹2,586 करोड़ (5% की वृद्धि)
  • वियरेबल्स सेगमेंट: ₹330.4 करोड़ (40% की गिरावट)

👉 वियरेबल्स में यह गिरावट बताती है कि boAt को इस कैटेगरी में कड़ी प्रतिस्पर्धा और मांग में कमी का सामना करना पड़ रहा है।


💸 लागत प्रबंधन ने बचाया खेल

FY25 में boAt ने अपने कुल खर्च को 6% घटाकर ₹3,040 करोड़ कर दिया।

  • स्टॉक-इन-ट्रेड खरीदारी: ₹2,070 करोड़ (FY24 में ₹2,271 करोड़ से 8.9% कम)
  • एडवरटाइजिंग खर्च: ₹390 करोड़ (7% की बढ़ोतरी)
  • एम्प्लॉयी कॉस्ट: ₹135 करोड़ (3.1% की वृद्धि)

इससे साफ है कि कंपनी ने मार्केटिंग में आक्रामक रुख बनाए रखा, जबकि सप्लाई चेन और स्टॉक की लागत पर नियंत्रण किया।


📈 निवेश और प्रमुख स्टेकहोल्डर्स

boAt ने अब तक $170 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।

  • 2023 में Warburg Pincus और Malabar Investments से $60 मिलियन जुटाए गए थे।
  • TheKredible के मुताबिक, Warburg Pincus सबसे बड़ा एक्सटर्नल स्टेकहोल्डर है, इसके बाद Fireside Ventures और Qualcomm का नाम आता है।

🏦 IPO की तैयारी

boAt की पेरेंट कंपनी Imagine Marketing ने IPO के लिए SEBI की मंजूरी हासिल कर ली है।

  • कंपनी ₹2,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है।
  • इसमें से ₹900 करोड़ का हिस्सा नया इश्यू होगा।
  • boAt भारत की पहली D2C इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी बनने जा रही है जो पब्लिक होगी।

यह IPO कंपनी के लिए न सिर्फ पूंजी जुटाने का साधन होगा, बल्कि निवेशकों को भी boAt की ग्रोथ स्टोरी में हिस्सा लेने का मौका देगा।


📌 नतीजा: boAt की अगली मंज़िल

FY25 में boAt ने घाटे से मुनाफे की वापसी कर दी है।

  • कंपनी ने दिखा दिया है कि सही लागत प्रबंधन और मजबूत प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी से मुश्किल हालात बदले जा सकते हैं।
  • अब असली परीक्षा IPO के दौरान होगी, जहाँ निवेशक देखेंगे कि boAt लंबे समय तक मुनाफे में टिक पाती है या नहीं।

👉 कुल मिलाकर, boAt का यह टर्नअराउंड भारतीय D2C स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो बड़े घाटे से जूझ रही हैं।

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🚀 UPI ने तोड़ा नया रिकॉर्ड: अगस्त 2025 में पहली बार 20 अरब लेन-देन पार

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अगस्त 2025 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस महीने UPI ने 20.01 अरब लेन-देन पूरे किए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेन-देन के मूल्य के लिहाज से भी, UPI ने अगस्त में ₹24.85 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किया।


📈 जून से अगस्त तक का सफर

UPI का यह माइलस्टोन किसी एक महीने की उछाल नहीं, बल्कि लगातार हो रही मजबूत वृद्धि का नतीजा है।

  • जून 2025 → 18.40 अरब लेन-देन, मूल्य ₹24.04 लाख करोड़
  • जुलाई 2025 → 19.47 अरब लेन-देन (5.8% बढ़त), मूल्य ₹25.08 लाख करोड़
  • अगस्त 2025 → 20.01 अरब लेन-देन (2.8% बढ़त), मूल्य ₹24.85 लाख करोड़

हालांकि अगस्त में लेन-देन के कुल मूल्य में जुलाई के मुकाबले 0.9% की मामूली गिरावट दर्ज हुई, लेकिन यह अब भी जून से काफी ऊपर रहा।


📊 UPI साल-दर-साल शानदार ग्रोथ

अगस्त 2024 की तुलना में इस साल UPI ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।

  • वॉल्यूम (संख्या) में 34% की बढ़त
  • वैल्यू (मूल्य) में 21% की वृद्धि

औसतन, हर दिन 645 मिलियन (64.5 करोड़) लेन-देन हुए, जिनका मूल्य लगभग ₹80,177 करोड़ रहा। खास बात यह है कि 2 अगस्त को UPI ने एक ही दिन में 700 मिलियन से अधिक लेन-देन का नया रिकॉर्ड बनाया।


🎮 गेमिंग बैन के बावजूद ग्रोथ

यह उछाल ऐसे समय आया है जब रीयल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया गया है। 21 अगस्त को संसद द्वारा Online Gaming Bill, 2025 पास होने के बाद अधिकांश गेमिंग प्लेटफॉर्म बंद हो गए। चूंकि ये प्लेटफॉर्म UPI लेन-देन का बड़ा हिस्सा बन चुके थे, इसके बावजूद रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ यह दर्शाती है कि UPI का इस्तेमाल अब असली और रोज़मर्रा के पेमेंट्स में तेजी से बढ़ रहा है।


📌 UPI: भारत के डिजिटल पेमेंट्स की रीढ़

आज UPI केवल P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स यानी दुकानों, रेस्टोरेंट्स और ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे भरोसेमंद साधन बन गया है।

🏆 टॉप प्लेयर्स (जुलाई 2025 डेटा के अनुसार):

  • PhonePe → 8.93 अरब लेन-देन (45.88% शेयर), मूल्य का 48.64% हिस्सा
  • Google Pay → 6.92 अरब लेन-देन (35.56% शेयर), मूल्य का 35.53% हिस्सा

यानी, UPI ट्रांजैक्शन का लगभग 80% हिस्सा सिर्फ इन दो कंपनियों के पास है।


🛒 कौन से सेक्टर सबसे आगे?

UPI का इस्तेमाल सिर्फ बिल पेमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोज़मर्रा की खरीदारी और लाइफस्टाइल खर्चों में भी सबसे पसंदीदा बन गया है।

  • ग्रोसरी और सुपरमार्केट → 3.03 अरब लेन-देन, मूल्य ₹64,882 करोड़
  • फास्ट फूड आउटलेट्स → 1.22 अरब लेन-देन
  • रेस्टोरेंट्स → 1.15 अरब लेन-देन
  • डिजिटल गुड्स और गेमिंग → 351.24 मिलियन लेन-देन, मूल्य ₹10,076 करोड़

🔮 आगे का रास्ता

UPI की लगातार बढ़ती ग्रोथ यह साबित करती है कि भारत में डिजिटल पेमेंट्स की पैठ अब छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में:

  • क्रेडिट लाइन और UPI लिंक्ड लोन जैसी सुविधाएं UPI को और ताकत देंगी।
  • NPCI के नए इनोवेशन जैसे UPI लाइट और UPI इंटरनेशनल, इसका इस्तेमाल और भी बढ़ाएंगे।
  • फोनपे और गूगल पे जैसे बड़े प्लेयर्स के बीच प्रतिस्पर्धा यूज़र्स को और बेहतर अनुभव देगी।

🌟 निष्कर्ष

अगस्त 2025 का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल क्रांति की सफलता की गवाही है। 20 अरब से अधिक लेन-देन यह बताते हैं कि UPI अब हर भारतीय की जेब में बैंक बन चुका है। चाहे छोटी चाय की दुकान हो या बड़ी सुपरमार्केट चेन – UPI आज भारत की डिजिटल इकॉनमी की धड़कन बन चुका है।


👉 यह लेख www.fundingraised.in के लिए लिखा गया है, जहां आपको मिलती है स्टार्टअप्स, फंडिंग, फिनटेक और डिजिटल इकॉनमी की हर ताज़ा अपडेट।

Read more : अगस्त में EV रेस: TVS ने बरकरार रखा नंबर-1 स्थान, Ola electric ने Bajaj को पछाड़ा

🚴‍♂️ अगस्त में EV रेस: TVS ने बरकरार रखा नंबर-1 स्थान, Ola electric ने Bajaj को पछाड़ा

ola electric

भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) बाजार अगस्त 2025 में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। TVS Motor ने 23.09% मार्केट शेयर के साथ अपनी नेतृत्व की स्थिति बनाए रखी, जबकि Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर Bajaj को पीछे छोड़ दिया।


📊 EV उद्योग की अगस्त रिपोर्ट

Vahan पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में कुल 1,04,306 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स रजिस्टर हुए, जो जुलाई की तुलना में 1.4% की बढ़त दर्शाता है। इसमें सबसे बड़ा योगदान चार प्रमुख कंपनियों – TVS, Ola, Ather और Hero MotoCorp – का रहा।


🏆 TVS Motor: मजबूती से शीर्ष पर

  • रजिस्ट्रेशन: 24,087 यूनिट्स
  • बढ़त: जुलाई की तुलना में 8.38% वृद्धि
  • मार्केट शेयर: 23.09%

TVS ने लगातार तीसरे महीने अपने मार्केट शेयर को बढ़ाया और अगस्त में भी नंबर-1 की स्थिति बनाए रखी। कंपनी की iQube सीरीज़ की बढ़ती मांग ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया।


⚡ Ola Electric: तेजी से बढ़ता दबदबा

  • रजिस्ट्रेशन: 18,972 यूनिट्स
  • बढ़त: 6.3%
  • मार्केट शेयर: 18.19%

Ola Electric ने अगस्त में Bajaj Auto को पछाड़ते हुए दूसरी पोज़िशन हासिल की। इस उपलब्धि का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखा, जो 11% चढ़कर ₹60.2 तक पहुंच गए। अब Ola की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹26,465 करोड़ (लगभग $3 बिलियन) पर पहुंच गई।


🚀 Ather Energy: तीसरे स्थान पर मजबूत पकड़

  • रजिस्ट्रेशन: 17,856 यूनिट्स
  • बढ़त: 10%
  • मार्केट शेयर: 17.12%

Ather Energy ने Ola से अंतर कम किया और साल-दर-साल आधार पर 60% से अधिक ग्रोथ दर्ज की। कंपनी के शेयर ₹475 पर ट्रेड हो रहे हैं, जिससे इसका मार्केट कैप ₹17,654 करोड़ ($2 बिलियन) तक पहुंच गया है।


🛵 Hero MotoCorp: मजबूत वापसी

  • रजिस्ट्रेशन: 13,313 यूनिट्स
  • बढ़त: 26.92% (MoM)
  • मार्केट शेयर: 12.76%

Hero MotoCorp ने इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में दमदार वापसी की और चौथे स्थान पर पहुंच गया। इसकी ग्रोथ जुलाई के मुकाबले लगभग 27% रही, जो EV सेगमेंट में बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।


📉 Bajaj Auto: बड़ी गिरावट

  • रजिस्ट्रेशन: 11,730 यूनिट्स
  • गिरावट: 40.3%
  • मार्केट शेयर: 11.25%

Bajaj Auto, जो जुलाई में दूसरी पोज़िशन पर था, अगस्त में पांचवें स्थान पर फिसल गया। कंपनी के मार्केट शेयर में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई।


🔎 अन्य प्रमुख खिलाड़ी

  • Greaves Electric Mobility: 7.17% ग्रोथ
  • Pure EV (IPO-bound): 5.39% ग्रोथ
  • BGauss: 7.97% ग्रोथ
  • River Mobility: 9.23% ग्रोथ
  • Kinetic Green: 23.51% ग्रोथ

इन कंपनियों ने भी अगस्त में अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी उपस्थिति को मज़बूत बनाया। खासकर Kinetic Green ने 23% से अधिक की ग्रोथ हासिल की।


🔮 EV इंडस्ट्री का भविष्य

भारत का EV मार्केट लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है।

  • सरकारी सब्सिडी और EV पॉलिसी: ग्राहकों के लिए EV खरीद को आकर्षक बना रही है।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे उपयोगकर्ताओं की चिंता कम हो रही है।
  • स्टार्टअप्स की एंट्री: Ola और Ather जैसे स्टार्टअप्स पारंपरिक दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 2-3 सालों में भारत का EV बाजार दोगुना हो सकता है।


📌 निष्कर्ष

अगस्त का महीना भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग के लिए बेहद खास रहा।

  • TVS ने अपनी बादशाहत कायम रखी।
  • Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर मजबूत संदेश दिया।
  • Ather और Hero MotoCorp ने भी तेजी से ग्रोथ दिखाई।
  • वहीं, Bajaj Auto को भारी झटका लगा।

भारत का EV बाजार अब स्पष्ट रूप से प्रतिस्पर्धी और रोमांचक दौर में प्रवेश कर चुका है।भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) बाजार अगस्त 2025 में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। TVS Motor ने 23.09% मार्केट शेयर के साथ अपनी नेतृत्व की स्थिति बनाए रखी, जबकि Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर Bajaj को पीछे छोड़ दिया।


📊 EV उद्योग की अगस्त रिपोर्ट

Vahan पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में कुल 1,04,306 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स रजिस्टर हुए, जो जुलाई की तुलना में 1.4% की बढ़त दर्शाता है। इसमें सबसे बड़ा योगदान चार प्रमुख कंपनियों – TVS, Ola, Ather और Hero MotoCorp – का रहा।


🏆 TVS Motor: मजबूती से शीर्ष पर

  • रजिस्ट्रेशन: 24,087 यूनिट्स
  • बढ़त: जुलाई की तुलना में 8.38% वृद्धि
  • मार्केट शेयर: 23.09%

TVS ने लगातार तीसरे महीने अपने मार्केट शेयर को बढ़ाया और अगस्त में भी नंबर-1 की स्थिति बनाए रखी। कंपनी की iQube सीरीज़ की बढ़ती मांग ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया।


⚡ Ola Electric: तेजी से बढ़ता दबदबा

  • रजिस्ट्रेशन: 18,972 यूनिट्स
  • बढ़त: 6.3%
  • मार्केट शेयर: 18.19%

Ola Electric ने अगस्त में Bajaj Auto को पछाड़ते हुए दूसरी पोज़िशन हासिल की। इस उपलब्धि का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखा, जो 11% चढ़कर ₹60.2 तक पहुंच गए। अब Ola की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹26,465 करोड़ (लगभग $3 बिलियन) पर पहुंच गई।


🚀 Ather Energy: तीसरे स्थान पर मजबूत पकड़

  • रजिस्ट्रेशन: 17,856 यूनिट्स
  • बढ़त: 10%
  • मार्केट शेयर: 17.12%

Ather Energy ने Ola से अंतर कम किया और साल-दर-साल आधार पर 60% से अधिक ग्रोथ दर्ज की। कंपनी के शेयर ₹475 पर ट्रेड हो रहे हैं, जिससे इसका मार्केट कैप ₹17,654 करोड़ ($2 बिलियन) तक पहुंच गया है।


🛵 Hero MotoCorp: मजबूत वापसी

  • रजिस्ट्रेशन: 13,313 यूनिट्स
  • बढ़त: 26.92% (MoM)
  • मार्केट शेयर: 12.76%

Hero MotoCorp ने इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में दमदार वापसी की और चौथे स्थान पर पहुंच गया। इसकी ग्रोथ जुलाई के मुकाबले लगभग 27% रही, जो EV सेगमेंट में बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।


📉 Bajaj Auto: बड़ी गिरावट

  • रजिस्ट्रेशन: 11,730 यूनिट्स
  • गिरावट: 40.3%
  • मार्केट शेयर: 11.25%

Bajaj Auto, जो जुलाई में दूसरी पोज़िशन पर था, अगस्त में पांचवें स्थान पर फिसल गया। कंपनी के मार्केट शेयर में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई।


🔎 अन्य प्रमुख खिलाड़ी

  • Greaves Electric Mobility: 7.17% ग्रोथ
  • Pure EV (IPO-bound): 5.39% ग्रोथ
  • BGauss: 7.97% ग्रोथ
  • River Mobility: 9.23% ग्रोथ
  • Kinetic Green: 23.51% ग्रोथ

इन कंपनियों ने भी अगस्त में अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी उपस्थिति को मज़बूत बनाया। खासकर Kinetic Green ने 23% से अधिक की ग्रोथ हासिल की।


🔮 EV इंडस्ट्री का भविष्य

भारत का EV मार्केट लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है।

  • सरकारी सब्सिडी और EV पॉलिसी: ग्राहकों के लिए EV खरीद को आकर्षक बना रही है।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे उपयोगकर्ताओं की चिंता कम हो रही है।
  • स्टार्टअप्स की एंट्री: Ola और Ather जैसे स्टार्टअप्स पारंपरिक दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 2-3 सालों में भारत का EV बाजार दोगुना हो सकता है।


📌 निष्कर्ष

अगस्त का महीना भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग के लिए बेहद खास रहा।

  • TVS ने अपनी बादशाहत कायम रखी।
  • Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर मजबूत संदेश दिया।
  • Ather और Hero MotoCorp ने भी तेजी से ग्रोथ दिखाई।
  • वहीं, Bajaj Auto को भारी झटका लगा।

भारत का EV बाजार अब स्पष्ट रूप से प्रतिस्पर्धी और रोमांचक दौर में प्रवेश कर चुका है।

Read more : CityMall ने जुटाए ₹334 करोड़ की नई फंडिंग,

🛒 CityMall ने जुटाए ₹334 करोड़ की नई फंडिंग,

CityMall

गुरुग्राम स्थित ग्रॉसरी-फोकस्ड सोशल ई-कॉमर्स स्टार्टअप सिटीमॉल (CityMall) ने अपने विकास और विस्तार को तेज़ करने के लिए Series D राउंड में ₹334 करोड़ (लगभग $38 मिलियन) जुटाने की घोषणा की है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Accel ने किया है, जिसमें उसके मौजूदा निवेशक — Waterbridge Ventures, Elevation Capital, Norwest Capital, Citius, और General Catalyst — ने भी हिस्सा लिया है।

यह कंपनी का 3.5 साल बाद पहला बड़ा फंडिंग राउंड है। इससे पहले मार्च 2022 में CityMall ने Series C राउंड में $75 मिलियन जुटाए थे।


💰 निवेश का ब्योरा

कंपनी के RoC (Registrar of Companies) में दाखिल दस्तावेज़ों के मुताबिक, बोर्ड ने 7,278 Series D CCPS और एक इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दी है, जिनकी कीमत ₹4,58,716 प्रति शेयर तय की गई है।

  • Accel: ₹173.2 करोड़ ($19.7 मिलियन)
  • Waterbridge Ventures: ₹52 करोड़ ($5.9 मिलियन)
  • Citius: ₹48.38 करोड़ ($5.5 मिलियन)
  • Norwest Capital: ₹25.96 करोड़ ($2.95 मिलियन)
  • Elevation Capital: ₹21.65 करोड़
  • General Catalyst: ₹8.67 करोड़
  • एंजल इन्वेस्टर रोहित अग्रवाल: ₹4 करोड़

कंपनी इस राशि का उपयोग कैपिटल एक्सपेंडिचर, मार्केटिंग और अन्य कॉर्पोरेट आवश्यकताओं के लिए करेगी।


📊 वैल्यूएशन और भविष्य की योजनाएँ

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस राउंड के बाद भी कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹2,780 करोड़ ($316 मिलियन) पर स्थिर रहा है। हालाँकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले चरणों में CityMall और फंड जुटा सकती है, जिससे वैल्यूएशन बढ़ने की संभावना है।


🏬 CityMall का बिज़नेस मॉडल

2020 में स्थापित, CityMall एक सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो मुख्य रूप से ग्रॉसरी, FMCG और होम व किचन प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराता है। कंपनी का फोकस टियर-II और टियर-III शहरों पर है, जहाँ यह कम्युनिटी रिसेलर्स के नेटवर्क के माध्यम से उत्पाद बेचती है।

अब CityMall ब्यूटी और एक्सेसरीज़ जैसी नई कैटेगरी में भी विस्तार करने की तैयारी कर रही है, ताकि छोटे शहरों के उपभोक्ताओं को भी बड़े शहरों जैसी प्रोडक्ट चॉइस मिल सके।


📈 अब तक की फंडिंग और निवेश

TheKredible के आँकड़ों के अनुसार, CityMall अब तक $110 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटा चुकी है। Accel जैसी ग्लोबल वीसी फर्म का लगातार समर्थन यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल और उसके स्केल-अप पोटेंशियल पर भरोसा है।


💹 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

कंपनी ने अभी तक FY25 के वित्तीय आँकड़े दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन FY24 की रिपोर्ट के अनुसार:

  • ग्रॉस रेवेन्यू (GMV): ₹427 करोड़ (FY23 में ₹346.4 करोड़ की तुलना में 23% वृद्धि)
  • नेट लॉस: ₹159 करोड़ (FY23 में ₹144 करोड़ से 10% अधिक)

यह दर्शाता है कि जहाँ कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ तेज़ है, वहीं लॉस भी बढ़ रहा है, जो विस्तार और मार्केटिंग खर्च की वजह से है।


🌐 छोटे शहरों पर बड़ा फोकस

CityMall का उद्देश्य सिर्फ ग्रॉसरी और FMCG तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के छोटे और मध्यम शहरों में ई-कॉमर्स की पहुँच बढ़ाने का है। भारत में Amazon और Flipkart जैसे बड़े प्लेटफॉर्म का दबदबा ज़्यादातर मेट्रो और बड़े शहरों में है। वहीं, CityMall का फोकस है कि छोटे कस्बों और शहरों के ग्राहकों को भी सस्ती और क्वालिटी प्रोडक्ट्स आसानी से उपलब्ध हों।

इस रणनीति ने इसे स्थानीय ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बनाया है और कम्युनिटी-बेस्ड मॉडल ने विश्वास बनाने में मदद की है।


🚀 निष्कर्ष

CityMall का यह ₹334 करोड़ का नया फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है। हालाँकि घाटे की चुनौती बनी हुई है, लेकिन टियर-II और टियर-III शहरों पर फोकस और नई कैटेगरी में एंट्री से कंपनी अपने राजस्व और ग्राहक आधार को मज़बूत करने की दिशा में बढ़ रही है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि CityMall कितनी तेज़ी से अपने बिज़नेस को स्केल कर पाता है और क्या यह बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ियों को छोटे शहरों में कड़ी टक्कर दे पाएगा।

Read more : Kiwi ने सीरीज़ B राउंड में जुटाए ₹208 करोड़,

🏦 Kiwi ने सीरीज़ B राउंड में जुटाए ₹208 करोड़,

Kiwi

भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। फिनटेक स्टार्टअप Kiwi ने अपने सीरीज़ B फंडिंग राउंड में $24 मिलियन (लगभग ₹208 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Vertex Ventures Southeast Asia & India ने किया, जबकि मौजूदा निवेशकों Nexus Venture Partners, Stellaris Venture Partners और Omidyar Network ने भी भागीदारी की।

💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि इस निवेश से उसका ध्यान तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:

  1. प्रोडक्ट रोडमैप को तेज करना – नई सुविधाएँ और टेक्नोलॉजी अपग्रेड लॉन्च करना।
  2. यूनिट इकॉनॉमिक्स को मजबूत करना – लाभप्रदता और लागत नियंत्रण पर ध्यान।
  3. कस्टमर एक्विज़िशन बढ़ाना – अधिक से अधिक नए यूज़र्स को जोड़ना।

📱 Kiwi का बिज़नेस मॉडल

Kiwi की शुरुआत साल 2022 में सिद्धार्थ मेहता, मोहित बेदी और अनुप अग्रवाल ने की थी। यह प्लेटफ़ॉर्म यूज़र्स को RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक करने की सुविधा देता है।

  • इसका मतलब है कि अब ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी उसी तरह कर सकते हैं, जैसे डेबिट कार्ड से UPI पेमेंट्स करते हैं।
  • इससे क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति (acceptance) नेटवर्क काफी बड़ा हो जाता है, क्योंकि भारत में हर जगह UPI व्यापारी (merchants) मौजूद हैं।

📊 अब तक का प्रदर्शन

  • Kiwi ने लॉन्च के बाद से अब तक 2 लाख से अधिक RuPay क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं।
  • वर्तमान में यह स्टार्टअप 600 शहरों में सक्रिय है।
  • हर महीने 50 लाख से ज्यादा मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करता है।
  • Kiwi ने YES Bank और AU Small Finance Bank के साथ पार्टनरशिप की है और इस वित्त वर्ष में दो और बड़े बैंकों को जोड़ने की योजना बना रहा है।

🎯 आने वाला लक्ष्य

कंपनी ने बड़ा विज़न रखा है – साल 2027 तक 10 लाख RuPay क्रेडिट कार्ड जारी करने का लक्ष्य।
यह ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में फिनटेक सेक्टर UPI आधारित क्रेडिट एक्सेस को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

📈 क्यों है Kiwi का मॉडल खास?

भारत में फिलहाल 350 मिलियन से ज्यादा यूनिक UPI यूज़र्स हैं, जो कि क्रेडिट कार्ड यूज़र्स की संख्या से 8–10 गुना अधिक है।

  • पारंपरिक क्रेडिट कार्ड की तुलना में UPI पर क्रेडिट की acceptance network 35 गुना बड़ा है।
  • इसीलिए Kiwi का मॉडल निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए आकर्षक माना जा रहा है।

🧑‍🤝‍🧑 शेयरहोल्डिंग और निवेशकों की दिलचस्पी

स्टार्टअप डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के मुताबिक:

  • सीरीज़ A राउंड के बाद सिद्धार्थ मेहता, अनुप अग्रवाल और मोहित बेदी के पास लगभग 16.2% हिस्सेदारी थी।
  • वहीं Nexus Venture Partners सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है।
  • सीरीज़ B राउंड के बाद संस्थापकों ने कितनी हिस्सेदारी डायल्यूट की है, यह देखना दिलचस्प होगा।

🌍 प्रतिस्पर्धा और उद्योग का माहौल

भारत में कई फिनटेक कंपनियाँ इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं:

  • LazyPay, OneCard, Uni और Slice जैसी कंपनियाँ भी UPI के जरिए क्रेडिट एक्सेस का विस्तार कर रही हैं।
  • बढ़ते डिजिटल पेमेंट यूज़र्स के चलते इस मार्केट में आने वाले सालों में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है।

📌 नतीजा

Kiwi का फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि भारत का फिनटेक इकोसिस्टम अभी भी निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक है।

  • क्रेडिट कार्ड और UPI का मेल आने वाले समय में ग्राहकों की क्रेडिट उपयोग की आदतों को पूरी तरह बदल सकता है।
  • अगर Kiwi अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेता है, तो यह भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में Game Changer साबित हो सकता है। 🚀

👉 यह फंडिंग न सिर्फ Kiwi के लिए, बल्कि भारत के फिनटेक सेक्टर के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले वर्षों में क्रेडिट ऑन UPI का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

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