🏠 Altum Credo को मिला British International Investment

Altum Credo

भारत के हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सक्रिय Altum Credo को एक और बड़ी फंडिंग मिली है। ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (British International Investment – BII) ने कंपनी में 70 करोड़ रुपये (लगभग $8.2 मिलियन) का निवेश किया है। खास बात यह है कि यह निवेश सिर्फ एक महीने में दूसरी बार हुआ है। पिछले महीने ही BII ने Altum Credo में 100 करोड़ रुपये लगाए थे।


💰 डील का पूरा विवरण

कंपनी के Registrar of Companies (RoC) में दर्ज फाइलिंग के अनुसार, Altum Credo के बोर्ड ने 40,46,243 Series C1 CCPS शेयर जारी करने का प्रस्ताव पास किया। ये शेयर 173 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट को अलॉट किए गए, जिससे कुल 70 करोड़ रुपये जुटाए गए।

निवेश से पहले BII की कंपनी में हिस्सेदारी 9.04% थी, जो इस डील के बाद बढ़कर 12.55% हो जाएगी। फिलहाल, Aavishkaar Capital कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है, जिसकी हिस्सेदारी 14.27% है।


📈 निवेश का उद्देश्य

Altum Credo इस नई फंडिंग का इस्तेमाल लेंडिंग ऑपरेशंस के विस्तार और भौगोलिक पहुंच बढ़ाने के लिए करेगी। कंपनी का फोकस खासतौर पर उन इलाकों में है जहां हाउसिंग फाइनेंस की पहुंच अब भी सीमित है, जैसे सेमी-अर्बन और ग्रामीण भारत


🔙 पहले का फंडिंग इतिहास

अप्रैल 2024 में, Altum Credo ने $40 मिलियन (करीब ₹332 करोड़) की फंडिंग जुटाई थी। यह फंडिंग Z3Partners और Oikocredit की अगुवाई में हुई थी और इसमें प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों ट्रांजैक्शंस शामिल थे।

स्टार्टअप डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, अब तक कंपनी कुल $80 मिलियन (₹664 करोड़) फंडिंग जुटा चुकी है। इस नई फंडिंग के बाद Entrackr का अनुमान है कि Altum Credo का वैल्यूएशन ₹1,777.5 करोड़ (लगभग $209 मिलियन) तक पहुंच जाएगा।


🏡 कंपनी का बिज़नेस मॉडल

2016 में स्थापित Altum Credo का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर और लो-इनकम ग्रुप के लोगों को घर का सपना पूरा करने में मदद करना है। कंपनी:

  • ₹4 लाख से ₹40 लाख तक के होम लोन देती है।
  • लोन की अवधि 5 से 20 साल होती है।
  • टारगेट ग्राहक पहली बार घर खरीदने वाले होते हैं।
  • खास फोकस सेमी-अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों पर है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

मार्च 2024 को समाप्त वित्त वर्ष में, Altum Credo का प्रदर्शन शानदार रहा:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू 67% बढ़कर ₹112.87 करोड़ हुआ।
  • नेट प्रॉफिट दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹20 करोड़ पहुंच गया।

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि हाउसिंग फाइनेंस की मांग छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ रही है और Altum Credo उस गैप को सफलतापूर्वक भर रहा है।


🌍 निवेशकों के लिए आकर्षण का कारण

BII जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशक का लगातार निवेश करना इस बात का सबूत है कि भारत का अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस मार्केट आने वाले वर्षों में बहुत तेज़ी से बढ़ने वाला है। इसके प्रमुख कारण:

  1. सरकारी स्कीमें – प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी योजनाएं।
  2. रियल एस्टेट में स्थिर वृद्धि – खासकर छोटे शहरों में।
  3. डिजिटल लेंडिंग और आसान प्रोसेस – लोन अप्रूवल में तेजी।

🔮 आगे की राह

Altum Credo का फोकस आने वाले समय में और ज्यादा ग्रामीण और टियर-2/3 शहरों में पहुंच बढ़ाने पर होगा। साथ ही, कंपनी तकनीकी समाधान (Tech-enabled services) के जरिए लोन प्रोसेस को और आसान और तेज बनाने की योजना पर काम कर रही है।

BII की लगातार दूसरी फंडिंग यह दिखाती है कि कंपनी न केवल अपने बिज़नेस मॉडल को स्केल करने में सक्षम है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी लगातार मजबूत कर रही है।


📌 निष्कर्ष

Altum Credo की यह डील भारत के अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। तेजी से बढ़ते हाउसिंग लोन मार्केट, सरकारी प्रोत्साहन और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग के साथ, आने वाले सालों में यह सेक्टर और ज्यादा निवेश आकर्षित कर सकता है।

Read more : जुलाई में UPI पर PhonePe और Google Pay का दबदबा,

📱 जुलाई में UPI पर PhonePe और Google Pay का दबदबा,

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम जुलाई 2025 में एक नए रिकॉर्ड पर पहुँच गया है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने इस महीने अब तक का सबसे ऊँचा आंकड़ा छुआ – 19.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शन जिनकी वैल्यू रही ₹25.08 लाख करोड़।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताज़ा डेटा के मुताबिक, PhonePe और Google Pay ने मिलकर UPI ट्रांज़ैक्शनों के वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में 81% से अधिक का शेयर हासिल किया है।


📊 PhonePe नंबर 1, Google Pay दूसरे नंबर पर

  • PhonePe: 8.93 बिलियन ट्रांज़ैक्शन (वॉल्यूम शेयर 45.88%)
    • वैल्यू शेयर: ₹12,19,000 करोड़ (48.64%)
  • Google Pay: 6.92 बिलियन ट्रांज़ैक्शन (वॉल्यूम शेयर 35.56%)
    • वैल्यू शेयर: ₹8,91,000 करोड़ (35.53%)

यानी दोनों कंपनियों का संयुक्त योगदान:

  • वॉल्यूम में 81.44%
  • वैल्यू में 84.17%

यह साफ़ दिखाता है कि भारत का UPI मार्केट फिलहाल दो कंपनियों के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है


💳 Paytm, Navi और CRED जैसे प्लेयर्स का प्रदर्शन

  • Paytm: 1.36 बिलियन ट्रांज़ैक्शन (7.02% वॉल्यूम), ₹1,43,650 करोड़ वैल्यू (5.73%)
  • Navi: 444.06 मिलियन ट्रांज़ैक्शन (2.28% वॉल्यूम), ₹23,562 करोड़ वैल्यू (0.94%)
  • Flipkart super.money: 252.85 मिलियन (1.30% वॉल्यूम)
  • CRED: 144.38 मिलियन (0.74% वॉल्यूम), लेकिन वैल्यू शेयर 2.20% – यानी हाई-वैल्यू ट्रांज़ैक्शन पर फोकस

📉 छोटे प्लेयर्स की स्थिति

  • FamApp by Trio: 0.64% वॉल्यूम, 0.06% वैल्यू
  • Amazon Pay: 0.52% वॉल्यूम, 0.43% वैल्यू
  • BHIM: 0.45% वॉल्यूम, 0.58% वैल्यू
  • WhatsApp Pay: 0.38% वॉल्यूम, 0.22% वैल्यू
  • Axis Bank Apps: 27.79 मिलियन ट्रांज़ैक्शन (0.14% वॉल्यूम), ₹5,483 करोड़ वैल्यू (0.22%)

🛒 किस सेक्टर में हुई सबसे ज़्यादा UPI ट्रांज़ैक्शन?

NPCI ने इस बार पहली बार कैटेगरी-वाइज UPI डेटा जारी किया है।

  • ग्रोसरी और सुपरमार्केट: 3.03 बिलियन ट्रांज़ैक्शन, ₹64,882 करोड़ वैल्यू
  • फास्ट फूड: 1.22 बिलियन ट्रांज़ैक्शन
  • रेस्टोरेंट्स: 1.15 बिलियन ट्रांज़ैक्शन
  • सर्विस स्टेशन और टेलिकॉम सर्विसेज़: वॉल्यूम कम लेकिन हाई-वैल्यू स्पेंड
  • छोटे कैटेगरी जैसे डिजिटल गुड्स, फार्मेसी, बेकरी में भी UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है

📈 क्यों PhonePe और Google Pay का दबदबा कायम है?

  1. यूज़र-फ्रेंडली ऐप इंटरफ़ेस
  2. तेज़ और सुरक्षित ट्रांज़ैक्शन
  3. लॉयल्टी और कैशबैक प्रोग्राम
  4. मर्चेंट नेटवर्क का मज़बूत कवरेज
  5. पार्टनरशिप और ब्रांड ट्रस्ट

इन कारणों से नए प्लेयर्स के लिए इस डुओपॉली को तोड़ना मुश्किल हो रहा है।


🆚 नए प्लेयर्स की रणनीति

  • CRED: हाई-वैल्यू और प्रीमियम यूज़र टारगेट
  • Navi: फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से जुड़ा क्रॉस-सेल
  • super.money: ई-कॉमर्स यूज़र्स पर फोकस
  • WhatsApp Pay: सोशल मैसेजिंग इंटीग्रेशन के ज़रिए ग्रोथ की कोशिश

🏦 भविष्य की तस्वीर

  • नियामकीय बदलाव: NPCI ट्रांज़ैक्शन लिमिट और मार्केट शेयर कैप जैसी नीतियों पर विचार कर सकता है
  • नवाचार की ज़रूरत: छोटे प्लेयर्स को पर्सनलाइज़्ड ऑफ़र और निच सेगमेंट में पैठ बनाने पर ध्यान देना होगा
  • UPI ग्लोबल: भारत सरकार के प्रयास से UPI अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी एंट्री कर रहा है, जिससे बड़े प्लेयर्स को और बढ़त मिलेगी

📌 निचोड़

जुलाई 2025 में UPI ने रिकॉर्ड-ब्रेकिंग प्रदर्शन किया, लेकिन मार्केट में PhonePe और Google Pay का दबदबा पहले से भी ज़्यादा मज़बूत हुआ है। Paytm और बाकी प्लेयर्स के सामने चुनौती है कि वे कैसे यूज़र बेस बढ़ाएँ और डुओपॉली को तोड़ें

डिजिटल पेमेंट्स का यह सफ़र अभी लंबा है, और आने वाले महीनों में हम और नए इनोवेशन, कैटेगरी डेटा और कॉम्पिटिशन देखने वाले हैं।

Read more : Q1 FY26 में Indiqube की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ,

📊 Q1 FY26 में Indiqube की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ,

IndiQube

Managed workspace solutions देने वाली कंपनी Indiqube ने NSE पर लिस्ट होने के बाद पहली बार अपने Q1 FY26 (अप्रैल–जून 2025) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 27% की राजस्व वृद्धि हासिल की है और घाटे को 12% तक कम करने में भी सफलता पाई है।


📈 रेवेन्यू में दमदार उछाल

कंपनी के Revenue from Operations Q1 FY25 के ₹242 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹309 करोड़ पहुंच गए। वहीं, कुल आय (Total Income) ₹251 करोड़ से बढ़कर ₹324 करोड़ रही।

  • इस तिमाही में कंपनी को ₹15 करोड़ अन्य आय (Other Income) से भी प्राप्त हुए।
  • हालांकि, कंपनी ने तिमाही के लिए रेवेन्यू का सेगमेंट-वाइज ब्रेकडाउन जारी नहीं किया।

💰 खर्चों में भी बढ़ोतरी

रेवेन्यू के साथ-साथ कंपनी के खर्च भी बढ़े हैं।

  • Employee Benefits में 18% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹20 करोड़ पहुंच गया।
  • Finance Cost में 49% की तेज वृद्धि हुई, जो Q1 FY25 के ₹74 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹110 करोड़ हो गई।
  • Depreciation & Amortization भी बढ़कर ₹143 करोड़ पहुंच गया।

कुल मिलाकर, कंपनी के Total Expenses ₹290 करोड़ से बढ़कर ₹374 करोड़ हो गए, जो 29% की वृद्धि है।


📉 घाटे में कमी, EBITDA पॉज़िटिव

खर्च बढ़ने के बावजूद Indiqube ने अपना घाटा कम किया है —

  • Q1 FY25 में ₹42 करोड़ का घाटा था, जो Q1 FY26 में घटकर ₹37 करोड़ रह गया (12% की कमी)।
  • कंपनी का EBITDA पॉज़िटिव ₹203 करोड़ रहा, क्योंकि वित्तीय लागत और डीप्रिसिएशन मिलाकर कुल खर्च का 68% हिस्सा थे।
  • यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से, कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.21 खर्च किए।

📜 IGAAP स्टैंडर्ड के हिसाब से नतीजे

इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के अलावा, अगर IGAAP Equivalent मानकों के अनुसार देखें तो —

  • रेवेन्यू ₹313 करोड़
  • प्रॉफिट ₹19 करोड़
    रहा, जो कंपनी की ऑपरेशनल मजबूती को दर्शाता है।

💹 IPO और लिस्टिंग का सफर

Indiqube ने जुलाई 2025 में ₹700 करोड़ का IPO लॉन्च किया था, जिसमें ₹650 करोड़ का Fresh Issue और ₹50 करोड़ का Offer for Sale शामिल था।

  • IPO का प्राइस बैंड ₹225 से ₹237 प्रति शेयर तय हुआ।
  • लिस्टिंग से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ऊपरी बैंड पर ₹374 करोड़ जुटाए।
  • IPO को 12.41 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, और ग्रे मार्केट में 4–10% लिस्टिंग गेन की उम्मीद थी।

लेकिन हकीकत में—

  • NSE पर लिस्टिंग प्राइस ₹216 रहा, जो इश्यू प्राइस से 8.9% डिस्काउंट था।
  • BSE पर ₹218.70 पर लिस्ट हुआ, जो 7.7% डिस्काउंट रहा।

📊 मौजूदा शेयर प्राइस और मार्केट कैप

13:26 PM के डेटा के अनुसार—

  • Indiqube का शेयर प्राइस ₹219.81 है।
  • कंपनी का मार्केट कैप ₹4,634 करोड़ (लगभग $528 मिलियन) है।

🏢 Indiqube का बिज़नेस मॉडल

Indiqube एक Managed Workspace Solutions Provider है, जो स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े कॉरपोरेट्स को फ्लेक्सिबल ऑफिस सॉल्यूशंस देती है।

  • इनके मॉडल में Coworking + Customizable Office Spaces शामिल हैं।
  • कंपनी का नेटवर्क भारत के कई बड़े शहरों में फैला हुआ है।

🔍 विश्लेषण: ग्रोथ बनाम चुनौतियाँ

Q1 FY26 के नतीजे साफ़ दिखाते हैं कि Indiqube ने रेवेन्यू में तो दमदार ग्रोथ दिखाई है, लेकिन Finance Cost और Depreciation का दबाव अभी भी भारी है।

  • पॉज़िटिव EBITDA निवेशकों के लिए राहत की बात है।
  • हालांकि, घाटे में कमी के बावजूद लिस्टिंग डिस्काउंट ने बाजार में हल्की निराशा पैदा की।

🚀 आगे की रणनीति

कंपनी को अगले क्वार्टर्स में खर्चों पर कंट्रोल और ऑक्युपेंसी रेट बढ़ाने पर फोकस करना होगा।

  • ऑफिस स्पेस डिमांड में बढ़ोतरी से मिड-टर्म में बेहतर रेवेन्यू ग्रोथ संभव है।
  • अगर कंपनी अपना नेट लॉस घटाकर नेट प्रॉफिट में बदल पाती है, तो शेयरहोल्डर वैल्यू में तेजी आ सकती है।

निष्कर्ष 📝
Indiqube के Q1 FY26 नतीजे बताते हैं कि कंपनी ग्रोथ ट्रैक पर है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी तक का सफर अभी बाकी है। निवेशकों के लिए यह एक ग्रोथ-फोकस्ड प्ले है, जहाँ धैर्य और लंबे समय की सोच की जरूरत होगी।

Read more : Allen Digital की CEO अाभा महेश्वरी ने दिया इस्तीफा,

🚀 Allen Digital की CEO अाभा महेश्वरी ने दिया इस्तीफा,

Allen Digital

Allen Career Institute की डिजिटल यूनिट Allen Digital की CEO और पूर्व Meta एक्जीक्यूटिव आभा महेश्वरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में घोषणा की कि वह अपने अगले कदम से पहले एक छोटा ब्रेक लेंगी।


✨ 2 साल का सफर: WeWork ऑफिस से बड़े डिजिटल मिशन तक

आभा ने याद किया कि 2022 में जब उन्होंने Allen Digital जॉइन किया, तब उनकी टीम सिर्फ 15–20 लोगों की थी, जो WeWork ऑफिस से काम करती थी।

“हम स्क्रैपी, महत्वाकांक्षी और कुछ अर्थपूर्ण बनाने के लिए समर्पित थे। आज मैं एक ऐसे ऑफिस को छोड़ रही हूं जो जोश से भरा है, बड़े आइडियाज और मजबूत टीम के साथ,” उन्होंने लिखा।

दो साल में, उन्होंने Allen Digital को भारत के टॉप EdTech प्लेयर्स को चुनौती देने वाली ताकत में बदला।


💰 Allen का डिजिटल प्लान और बड़ी फंडिंग

  • अप्रैल 2022 में, Allen Career Institute ने अपनी 100% सहायक कंपनी Allen Digital लॉन्च की थी।
  • यह कदम Allen को भारत के मल्टी-बिलियन डॉलर EdTech मार्केट में उतारने के लिए उठाया गया था।
  • सिर्फ एक महीने पहले, Allen ने Bodhi Tree Systems से $600 मिलियन (लगभग ₹4,500 करोड़) की मेगा फंडिंग हासिल की थी।
  • Bodhi Tree Systems, जेम्स मर्डोक और पूर्व Disney एशिया-पैसिफिक चेयरमैन उदय शंकर का निवेश प्लेटफ़ॉर्म है।

🤝 बड़े अधिग्रहण और डील्स

आभा के कार्यकाल में Allen Digital ने कई स्ट्रेटेजिक कदम उठाए —

  1. Doubtnut का अधिग्रहण 🧠 — जुलाई 2023 में, Allen Digital ने AI-पावर्ड डाउट-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म Doubtnut को एक slump sale में खरीदा। डील का मूल्य लगभग $10 मिलियन बताया गया।
  2. Unacademy डील की चर्चा 📚 — दिसंबर 2024 में रिपोर्ट्स आईं कि Allen, Unacademy को लगभग $800 मिलियन वैल्यूएशन पर खरीदने के शुरुआती चरण में है। हालांकि, Unacademy के CEO गौरव मुंजाल ने इस खबर को सार्वजनिक रूप से नकार दिया।

🎯 डिजिटल-फर्स्ट विज़न और टेक्नोलॉजी इनोवेशन

आभा ने बताया कि Allen Digital का विज़न learning outcomes पर आधारित था।

  • AI-पावर्ड लर्निंग टूल्स
  • ऑफ़लाइन और ऑनलाइन का seamless integration
  • छात्र-फ्रेंडली टेक सॉल्यूशन्स
  • एजुकेशन को और ज़्यादा accessible बनाना

उन्होंने लिखा,

“हमने ऐसी टेक्नोलॉजी लॉन्च की जो बदलाव लाने वाली थी, तेजी से स्केल किया, और छात्रों की ज़िंदगी में असली फर्क डाला।”


📈 Allen की वित्तीय स्थिति (FY24)

  • रेवेन्यू ग्रोथ: 42% साल-दर-साल बढ़कर ₹3,244.7 करोड़
  • मुख्य कारण: मजबूत ऑफलाइन एनरोलमेंट्स + डिजिटल एक्सपैंशन
  • प्रॉफिट: 44% गिरकर ₹136 करोड़
  • डिजिटल विस्तार के बावजूद, कंपनी की ऑफलाइन ताकत अभी भी उसका सबसे बड़ा ड्राइविंग फैक्टर रही।

🔍 इस्तीफे के पीछे की संभावनाएं

हालांकि आभा ने इस्तीफे का सीधा कारण नहीं बताया, लेकिन इंडस्ट्री इनसाइडर्स का मानना है कि —

  • EdTech सेक्टर में प्रतिस्पर्धा
  • ऑफलाइन-ऑनलाइन बैलेंस बनाने की चुनौती
  • और IPO या बड़े स्ट्रेटेजिक शिफ्ट की तैयारी
    … इन सबने उनके निर्णय में भूमिका निभाई हो सकती है।

🌟 Allen Digital का आगे का रास्ता

आभा के जाने के बाद Allen Digital के लिए बड़ी चुनौती होगी —

  • नए लीडरशिप के तहत ग्रोथ बनाए रखना
  • AI और पर्सनलाइज्ड लर्निंग सॉल्यूशन्स को और आगे बढ़ाना
  • Byju’s, Unacademy, और Physics Wallah जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करना

कंपनी के ऑफलाइन स्ट्रॉन्गहोल्ड को डिजिटल स्केल में बदलना अब अगले CEO का मुख्य मिशन होगा।


🗣️ इंडस्ट्री में चर्चा

EdTech इंडस्ट्री में आभा की लीडरशिप को लेकर पॉज़िटिव राय है। Meta और अन्य टेक कंपनियों में उनके अनुभव ने Allen Digital को टेक-ड्रिवन बिजनेस मॉडल अपनाने में मदद की।

एक स्टार्टअप विश्लेषक के अनुसार,

“Allen Digital का AI और हाइब्रिड लर्निंग पर फोकस आने वाले सालों में मार्केट का बड़ा हिस्सा जीत सकता है, बशर्ते वे लगातार इनोवेशन और सही प्राइसिंग बनाए रखें।”


📌 निष्कर्ष

आभा महेश्वरी का Allen Digital में दो साल का सफर एक स्क्रैपी स्टार्टअप से लेकर बड़े डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तक की कहानी है। उनके जाने के बाद Allen के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि नया नेतृत्व उनकी बनाई नींव पर कैसे आगे बढ़ता है।

Allen Digital अब ऐसे मोड़ पर है जहां ग्रोथ, टेक्नोलॉजी और प्रतिस्पर्धा — तीनों को संतुलित करना ज़रूरी है।

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🍼 FirstCry ने Q1 FY26 में बढ़ाई रफ्तार

FirstCry

बच्चों के प्रोडक्ट्स पर फोकस करने वाले ओम्नीचैनल रिटेलर FirstCry (Brainbees Solutions) ने जून 2025 खत्म होने वाली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। कंपनी का राजस्व 13% बढ़कर ₹1,862.56 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि घाटा भी 13% घटकर ₹66.5 करोड़ रह गया।


📈 Firstcry राजस्व में मजबूती

कंपनी के ऑपरेशंस से राजस्व Q1 FY25 के ₹1,652 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹1,862.56 करोड़ हो गया।

  • 77.55% राजस्व का बड़ा हिस्सा भारत और इंटरनेशनल मार्केट में ऑफलाइन स्टोर्स व वेबसाइट सेल्स से आया।
  • इसकी सहायक कंपनी GlobalBees ने ₹426 करोड़ का योगदान दिया।
  • कंपनी ने ब्याज से ₹49 करोड़ कमाए, जिससे कुल राजस्व बढ़कर ₹1,911 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹1,679 करोड़ से काफी ऊपर है।

🏪 ऑफलाइन-ऑनलाइन स्ट्रैटेजी का असर

FirstCry की सफलता में उसकी ओम्नीचैनल स्ट्रैटेजी (ऑफलाइन स्टोर्स + ऑनलाइन प्लेटफॉर्म) का बड़ा रोल है।

  • कंपनी बच्चों के कपड़ों, खिलौनों, और अन्य बेबी प्रोडक्ट्स की विशाल रेंज ऑफर करती है।
  • ग्लोबलबीज़ के जरिए ब्रांड बिल्डिंग और D2C मॉडल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

💰 खर्चों का लेखा-जोखा

कंपनी के मटीरियल प्रोक्योरमेंट (कच्चा माल व प्रोडक्ट खरीद) का खर्च कुल खर्च का 58% रहा, जो ₹1,029 करोड़ से बढ़कर ₹1,145 करोड़ हो गया।

  • कर्मचारी लाभ: ₹203 करोड़ (जिसमें ₹60 करोड़ ESOP लागत शामिल)
  • मार्केटिंग, लीगल, रेंट और टेक्नोलॉजी पर भी खर्च हुआ, जिससे कुल खर्च ₹1,971 करोड़ तक पहुंच गया।

📉 घाटे में कमी और मुनाफे की झलक

बेहतर स्केल और खर्च नियंत्रण की वजह से कंपनी ने

  • घाटा 13% घटाकर ₹66.5 करोड़ किया
  • EBITDA ₹75 करोड़ का पॉजिटिव नतीजा दिखाया
  • हर ₹1 ऑपरेटिंग रेवेन्यू कमाने के लिए कंपनी ने ₹1.06 खर्च किए, जो पिछले समय से बेहतर है।

📊 शेयर बाज़ार में स्थिति

  • Q1 FY26 के नतीजों के दिन, FirstCry का शेयर प्राइस ₹375.35 पर बंद हुआ।
  • कंपनी का मार्केट कैप ₹19,586 करोड़ (लगभग $2.2 बिलियन) तक पहुंचा।

🧩 ग्रोथ के पीछे की कहानी

FirstCry की मजबूती के पीछे कुछ अहम फैक्टर्स हैं:

  1. ओम्नीचैनल प्रेज़ेंस – छोटे-बड़े शहरों में ऑफलाइन स्टोर्स और मजबूत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म।
  2. ब्रांड डाइवर्सिफिकेशन – GlobalBees के जरिए नए-नए ब्रांड्स का अधिग्रहण और स्केलिंग।
  3. कस्टमर ट्रस्ट – पेरेंट्स और न्यू पेरेंट्स के बीच भरोसेमंद ब्रांड इमेज।

🌏 फ्यूचर प्लान्स

कंपनी आने वाले क्वार्टर्स में:

  • स्टोर नेटवर्क बढ़ाने
  • टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स में निवेश
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार
    पर फोकस करेगी।

🏁 नतीजा

Q1 FY26 में FirstCry ने दिखा दिया कि सही स्ट्रैटेजी, खर्च नियंत्रण और मजबूत ब्रांड वैल्यू के दम पर कैसे लगातार ग्रोथ हासिल की जा सकती है।
बच्चों के प्रोडक्ट्स के रिटेल मार्केट में, FirstCry का मुकाबला मजबूत है, लेकिन इस परफॉर्मेंस से यह साफ है कि कंपनी आने वाले समय में अगली ग्रोथ स्टोरी लिखने को तैयार है।

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💊 Truemeds ने जुटाए $85 मिलियन,

Truemeds

मुंबई-स्थित ई-फार्मेसी और टेलीहेल्थ प्लेटफ़ॉर्म Truemeds ने अपने सीरीज़ C फंडिंग राउंड में $85 मिलियन (लगभग ₹710 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Accel और Peak XV Partners ने किया, जबकि WestBridge Capital और Info Edge Ventures ने भी भाग लिया।
यह फंडिंग दो चरणों (Tranches) में पूरी हुई।


💰 Truemeds फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी ने बताया कि यह फंड इन कामों में लगाया जाएगा:

  • गैर-मेट्रो (Non-Metro) इलाकों में नए फुलफ़िलमेंट सेंटर्स खोलना
  • इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीम का विस्तार
  • बेंगलुरु में नया ऑफिस स्थापित करना
  • राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच (Penetration) को तीन गुना करना

इसके साथ, Truemeds ने ESOP बायबैक पॉलिसी भी शुरू की है ताकि टीम के योगदान को सम्मानित किया जा सके।


📱 नए प्रोडक्ट और सर्विस प्लान

Truemeds ने हाल ही में अपना iOS ऐप लॉन्च किया है। आने वाले दो से चार महीनों में डायग्नोस्टिक सर्विसेज शुरू करने की योजना है।

  • शुरुआती पायलट डायग्नोस्टिक्स ऑपरेशन्स अगले दो क्वार्टर्स में चार शहरों में शुरू होंगे।
  • कंपनी AI और मशीन लर्निंग-पावर्ड टूल्स में निवेश कर रही है, जिससे प्रोडक्ट क्यूरेशन, पेशेंट जर्नी और डिमांड फोरकास्टिंग बेहतर हो सके।

🏥 कंपनी की शुरुआत और सेवाएं

2019 में अक्षत नैयर और डॉ. कुणाल वानी द्वारा स्थापित, Truemeds का मकसद मरीजों को ब्रांडेड दवाओं के क्लीनिकली इक्विवेलेंट विकल्प प्रदान करना है।

  • कंपनी का दावा है कि मरीज अपनी मासिक दवाई खर्च में 50-70% तक बचत कर सकते हैं।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म खासकर क्रॉनिक केयर मरीजों — जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से पीड़ित लोगों — को टारगेट करता है।

🚚 देशभर में मजबूत नेटवर्क

  • Truemeds भारत के सभी प्रमुख लोकेशंस में सेवाएं देता है।
  • इसका नेशनल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क सक्रिय रूप से काम करता है।
  • कंपनी रोजाना 600 डॉक्टरों से जुड़ती है।
  • इसमें लगभग 3,000 कर्मचारी हैं, जिनमें से 250 हेड ऑफिस टीम का हिस्सा हैं।

📊 फंडिंग और निवेशक हिस्सेदारी

स्टार्टअप डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, Truemeds अब तक $110 मिलियन से अधिक फंड जुटा चुका है।

  • पिछली फंडिंग तक, WestBridge सबसे बड़ा शेयरहोल्डर था।
  • इसके बाद Info Edge और Peak XV Partners का नाम आता है।

📈 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

  • राजस्व: ₹315 करोड़ (पिछले साल के मुकाबले दोगुना)
  • नुकसान: ₹61 करोड़ (9% की कमी)

ये आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी न सिर्फ राजस्व में बल्कि लॉसेज़ घटाने में भी प्रगति कर रही है।


⚔️ मार्केट में मुकाबला

Truemeds का मुकाबला ई-फार्मेसी और टेलीहेल्थ सेक्टर के बड़े खिलाड़ियों से है:

  • PharmEasy — FY24 में ₹5,664 करोड़ का राजस्व
  • Tata 1mg — FY24 में ₹1,964 करोड़ का राजस्व

हालांकि, Truemeds का यूनिक सेलिंग पॉइंट (USP) क्लीनिकली इक्विवेलेंट लो-कॉस्ट मेडिसिन्स पर फोकस है, जो इसे मार्केट में अलग पहचान देता है।


🔍 क्यों अहम है यह फंडिंग?

  1. हेल्थकेयर एक्सेसिबिलिटी — गैर-मेट्रो शहरों में दवाइयों और हेल्थ सर्विसेज की कमी को पूरा करना।
  2. टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन — AI और ML का इस्तेमाल कर पर्सनलाइज्ड और एफिशिएंट हेल्थकेयर प्रोवाइड करना।
  3. लागत में बचत — मरीजों के लिए 50-70% तक दवा खर्च कम करना।
  4. स्केलेबिलिटी — लॉजिस्टिक्स और फुलफ़िलमेंट सेंटर्स का तेज़ी से विस्तार।

🚀 आगे की रणनीति

Truemeds आने वाले समय में इन मोर्चों पर फोकस करेगा:

  • डायग्नोस्टिक सर्विसेज की शुरुआत और स्केलिंग
  • AI-पावर्ड पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम का विकास
  • नए शहरों में ऑफलाइन और ऑनलाइन नेटवर्क का विस्तार
  • टैलेंट रिटेंशन के लिए ESOP पॉलिसी को और मजबूत बनाना

📌 निष्कर्ष

Truemeds का यह $85 मिलियन सीरीज़ C फंडिंग राउंड उसके ग्रॉथ फेज़ को और तेज़ करेगा।
गैर-मेट्रो क्षेत्रों में मेडिकल एक्सेस बढ़ाने से लेकर AI-ड्रिवन हेल्थकेयर इनोवेशन तक, कंपनी भारतीय ई-फार्मेसी और टेलीहेल्थ सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
दोगुना राजस्व, घटते नुकसान और बढ़ते निवेशकों का भरोसा — ये सब संकेत हैं कि आने वाले सालों में Truemeds इस सेक्टर में एक बड़ा नाम बनने की क्षमता रखता है।

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📊 Q1 FY26 में Awfis का दमदार प्रदर्शन,

Awfis

को-वर्किंग सॉल्यूशंस प्रोवाइडर Awfis ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के नतीजे घोषित किए हैं, जिसमें कंपनी ने राजस्व में अच्छा इजाफा और मुनाफे में बड़ी छलांग दर्ज की है। कंपनी का Q1 FY26 में प्रॉफिट 3.5 गुना बढ़कर ₹10 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹2.8 करोड़ था।


💼 राजस्व में 30% सालाना वृद्धि

Awfis के NSE से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार —

  • ऑपरेशंस से राजस्व ₹335 करोड़ रहा, जो Q1 FY25 के ₹258 करोड़ के मुकाबले 30% YoY की वृद्धि है।
  • अन्य आय (Other Income) ₹18 करोड़ रही, जिससे कुल आय (Total Income) ₹353 करोड़ हो गई।
  • हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर राजस्व में 1.5% की गिरावट हुई, Q4 FY25 के ₹340 करोड़ से घटकर ₹335 करोड़ पर आ गया।

🏢 कंपनी का बिज़नेस मॉडल और सर्विसेज

2015 में स्थापित Awfis स्टार्टअप्स, SMEs और बड़ी कंपनियों के लिए को-वर्किंग ऑफिस स्पेस उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही यह —

  • फूड और बेवरेज सर्विस
  • आईटी सपोर्ट
  • इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस
    भी प्रदान करती है।

📈 सेगमेंट-वाइज रेवेन्यू ब्रेकअप

Q1 FY26 में कंपनी के मुख्य राजस्व स्रोत इस प्रकार रहे:

  1. को-वर्किंग स्पेसेस — ₹276 करोड़ (49% वृद्धि, Q1 FY25 के ₹185 करोड़ से)
  2. कंस्ट्रक्शन और फिट-आउट प्रोजेक्ट्स — ₹58 करोड़
  3. अन्य सेवाएं — ₹1 करोड़

को-वर्किंग स्पेसेस कंपनी के लिए सबसे बड़ा और तेज़ी से बढ़ने वाला सेगमेंट बना रहा।


💸 Awfis खर्चों पर नियंत्रण

खर्चों के मामले में, Awfis ने बेहतर मैनेजमेंट दिखाया:

  • डिप्रिशिएशन: ₹86 करोड़ (सबसे बड़ा खर्च)
  • कर्मचारी लाभ (Employee Benefits): ₹30 करोड़ (कमी दर्ज)
  • सबकॉन्ट्रैक्टिंग खर्च: ₹47 करोड़, जो सालाना आधार पर 15% कम है।
  • फाइनेंस कॉस्ट: ₹46 करोड़

Q1 FY26 में कंपनी का कुल खर्च ₹343 करोड़ रहा।


📈 प्रॉफिट में बड़ी छलांग

खर्चों में नियंत्रण और राजस्व में लगातार वृद्धि की वजह से, कंपनी का प्रॉफिट ₹2.8 करोड़ से बढ़कर ₹10 करोड़ हो गया — यानी 3.5 गुना की बढ़त। यह निवेशकों के लिए एक पॉजिटिव सिग्नल है, खासकर ऐसे समय में जब को-वर्किंग इंडस्ट्री में कड़ी प्रतिस्पर्धा है।


🎯 ESOP अलॉटमेंट

Awfis ने 2024 Employee Stock Option Scheme के तहत 1,36,777 ESOPs अलॉट किए हैं, जिनकी मौजूदा वैल्यू ₹7.6 करोड़ है। यह कदम कर्मचारियों को दीर्घकालिक प्रोत्साहन देने और टैलेंट रिटेंशन बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।


📊 स्टॉक परफॉर्मेंस

  • 16:12 PM तक Awfis का शेयर ₹557 पर ट्रेड कर रहा था।
  • कंपनी का मार्केट कैप ₹3,971 करोड़ (लगभग $453 मिलियन) है।
    यह निवेशकों के भरोसे और कंपनी की मार्केट पोजीशन को दर्शाता है।

🔍 मार्केट एनालिसिस: क्यों अहम हैं ये नतीजे?

  1. तेजी से बढ़ता को-वर्किंग सेक्टर — पोस्ट-कोविड, फ्लेक्सिबल ऑफिस सॉल्यूशंस की डिमांड में तेजी आई है।
  2. डाइवर्सिफाइड रेवेन्यू — को-वर्किंग के साथ कंस्ट्रक्शन और फिट-आउट प्रोजेक्ट्स से भी मजबूत कमाई।
  3. खर्च नियंत्रण — सबकॉन्ट्रैक्टिंग और कर्मचारी लाभ खर्च में कमी से मार्जिन सुधरे हैं।
  4. निवेशक भरोसा — स्टॉक का स्थिर प्रदर्शन और बढ़ती प्रॉफिटबिलिटी, दोनों निवेशकों के लिए अच्छे संकेत हैं।

🚀 आगे की रणनीति

Awfis आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों पर फोकस कर सकती है:

  • नए को-वर्किंग सेंटर्स का विस्तार
  • कॉर्पोरेट क्लाइंट्स के लिए कस्टमाइज्ड ऑफिस सॉल्यूशंस
  • टेक्नोलॉजी अपग्रेड और सर्विस क्वालिटी में सुधार
  • ESOP पॉलिसी के जरिए टैलेंट रिटेंशन

📌 निष्कर्ष

Q1 FY26 के नतीजों से साफ है कि Awfis न सिर्फ राजस्व बल्कि प्रॉफिटबिलिटी के मामले में भी मजबूती से आगे बढ़ रही है
30% सालाना राजस्व वृद्धि और 3.5 गुना मुनाफे की छलांग यह दिखाती है कि कंपनी सस्टेनेबल ग्रोथ और खर्चों पर नियंत्रण दोनों में संतुलन बनाए हुए है।
को-वर्किंग इंडस्ट्री के बढ़ते ट्रेंड के साथ, Awfis आने वाले समय में इस सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।

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🛡️ INDmoney Scam पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती,

INDmoney

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, जो कथित तौर पर वेल्थ-टेक प्लेटफॉर्म INDmoney और इसके फाउंडर आशीष कश्यप के नाम पर निवेशकों को ठग रहा था। कोर्ट ने इसे विस्तृत स्तर पर साइबर क्रैकडाउन का मामला बताते हुए डोमेन रजिस्ट्रार, ऐप स्टोर्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, बैंक और साइबरक्राइम यूनिट्स को मिलकर ऑपरेशन बंद करने का निर्देश दिया है।


⚖️ कोर्ट का आदेश — मिलकर बंद करें ठगी का नेटवर्क

28 जुलाई को दिए गए आदेश में जस्टिस मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि सभी संबंधित संस्थानों को समन्वय (coordination) से कार्रवाई करनी होगी।

  • डोमेन रजिस्ट्रार को संदिग्ध वेबसाइट्स ब्लॉक करने और ओनरशिप डिटेल्स देने का आदेश।
  • Google व Apple को फेक मोबाइल ऐप्स हटाने के निर्देश।
  • WhatsApp और Telegram को फर्जी नंबर और ग्रुप ब्लॉक करने का आदेश।
  • बैंकों को जुड़े खातों को फ्रीज करने और KYC डिटेल्स उपलब्ध कराने के निर्देश।
  • नेशनल साइबर सेल और गुरुग्राम साइबर पुलिस को जांच रिपोर्ट फाइल करने का आदेश।

🕵️‍♂️ ठगी कैसे हुई?

यह मामला INDmoney Tech और इसकी एफिलिएट कंपनी INDstocks ने दायर किया था। शिकायत में आरोप है कि नवंबर 2024 से एक शख्स, जिसकी पहचान “अशोक कुमार” के रूप में हुई, ने नकली पहचान बनाकर लोगों को WhatsApp व Telegram ग्रुप्स, फर्जी वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स के जरिए ठगा।

फ्रॉड नेटवर्क की कार्यप्रणाली:

  1. ब्लॉक ट्रेडिंग, IPO टिप्स और शेयर मार्केट बेट्स पर हाई रिटर्न का झांसा।
  2. फर्जी SEBI सर्टिफिकेट और नकली डॉक्यूमेंट दिखाकर भरोसा जीतना।
  3. INDmoney के लोगो, ट्रेडमार्क और वेबसाइट कंटेंट की नकल कर असली जैसा दिखाना।

🌐 नेटवर्क का आकार और पहुंच

INDmoney की जांच में सामने आया कि इस ठगी नेटवर्क में शामिल थे:

  • 8 फर्जी वेबसाइट्स
  • 4 नकली मोबाइल ऐप्स
  • दर्जनों WhatsApp व Telegram अकाउंट्स
  • कई बैंक अकाउंट्स

इन सबका इस्तेमाल निवेशकों से पैसे ऐंठने के लिए किया गया।


📜 INDmoney कोर्ट की सख्त टिप्पणियां

कोर्ट ने माना कि यह मामला ट्रेडमार्क उल्लंघन, पासिंग ऑफ और कॉपीराइट वायलेशन का स्पष्ट उदाहरण है।

  • इन गतिविधियों से अपूर्णीय क्षति (irreparable injury) हो रही थी।
  • आरोपी, उसके सहयोगी और एजेंट्स को ब्रांड इस्तेमाल करने या फर्जी प्लेटफॉर्म चलाने से रोका गया
  • Gname.com, Dominet और Dynadot को संदिग्ध डोमेन्स ब्लॉक करने और मालिक की जानकारी देने का आदेश दिया गया।

📅 अगली सुनवाई की तारीखें

  • 2 सितंबर: जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने सुनवाई।
  • 17 दिसंबर: हाईकोर्ट में अगली सुनवाई।

इन तारीखों तक सभी संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई रिपोर्ट पेश करनी होगी।


💬 आशीष कश्यप की प्रतिक्रिया

कोर्ट के आदेश के बाद INDmoney के फाउंडर आशीष कश्यप ने LinkedIn पर पोस्ट किया:

“यह ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ एक मजबूत डिजिटल-फर्स्ट कदम है। यह लोगों को संगठित और तकनीकी फ्रॉड से बचाने की दिशा में अहम पहल है।”

उन्होंने लोगों से “Stay alert, stay informed, stay safe” का संदेश देते हुए साइबर सुरक्षा को गंभीरता से लेने की अपील की।


🔍 क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?

  1. निवेशकों की सुरक्षा — फिनटेक सेक्टर में भरोसा बनाए रखने के लिए फर्जीवाड़ा खत्म करना जरूरी है।
  2. ब्रांड की प्रतिष्ठा — ऐसे मामले कंपनियों के ब्रांड इमेज को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
  3. साइबर कानूनों का पालन — अदालत की सख्ती से साइबरक्राइम पर नकेल कसी जा सकती है।
  4. डिजिटल जागरूकता — यह मामला दिखाता है कि यूजर्स को बिना जांचे-परखे निवेश से बचना चाहिए।

📢 निवेशकों के लिए चेतावनी

  • किसी भी स्टॉक टिप या निवेश स्कीम को बिना सत्यापन के फॉलो न करें।
  • केवल आधिकारिक वेबसाइट्स और ऐप्स से ही लेन-देन करें।
  • किसी भी संदिग्ध लिंक, नंबर या ग्रुप को तुरंत साइबरक्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें।

📌 निष्कर्ष

यह मामला सिर्फ एक कंपनी का नहीं, बल्कि पूरे फिनटेक इकोसिस्टम की विश्वसनीयता का है। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश दिखाता है कि अगर कंपनियां और कानून मिलकर कार्रवाई करें, तो तकनीकी ठगों के नेटवर्क को खत्म किया जा सकता है।

अब सभी की निगाहें 2 सितंबर और 17 दिसंबर की सुनवाई पर होंगी, जहां इस केस में आगे की दिशा तय होगी।

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💰 BharatPe की Pre-IPO Funding Talks तेज़,

BharatPe

भारत के फिनटेक सेक्टर में हलचल बढ़ गई है! दिल्ली स्थित यूनिकॉर्न BharatPe अपने IPO से पहले एक बड़े प्री-IPO फंडिंग राउंड की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, यह राउंड $80-$100 मिलियन (₹670-₹835 करोड़) का हो सकता है और इसकी अगुवाई Coatue Management कर रही है।

यह फंडिंग राउंड खास है क्योंकि BharatPe पिछले चार साल में पहली बार इक्विटी फंडिंग जुटाने जा रही है, और यह उसके IPO रोडमैप का अहम हिस्सा है।


📈 क्यों हो रही है यह फंडिंग?

इस राउंड का मुख्य मकसद कंपनी की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना और पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी करना है।

  • इसमें कुछ नए निवेशक और मौजूदा निवेशक दोनों शामिल होंगे।
  • Coatue के नए पार्टनर अमित मुखर्जी इस डील का नेतृत्व कर रहे हैं और वे कंपनी के मैनेजमेंट व बोर्ड के साथ मिलकर IPO की तैयारी में जुटे हैं।
  • यह पूंजी BharatPe को ऑपरेशन्स स्केल करने और मार्केट पोजीशन मजबूत करने में मदद करेगी।

⏳ IPO इस साल नहीं, पहले मुनाफ़े पर फोकस

BharatPe के CEO नलिन नेगी ने हाल ही में कहा था कि कंपनी प्री-IPO राउंड ज़रूर करेगी, लेकिन इस वित्त वर्ष (FY26) में IPO लाने का कोई प्लान नहीं है।

  • कंपनी चाहती है कि सतत लाभप्रदता (consistent profitability) बनाए रखने के बाद ही SEBI में ड्राफ्ट पेपर फाइल किए जाएं।
  • इसका मतलब है कि BharatPe अगले कुछ तिमाहियों में अपने रेवेन्यू मॉडल और मार्जिन्स को और मजबूत करेगा।

🦄 BharatPe की यूनिकॉर्न जर्नी

  • अगस्त 2021 में BharatPe ने आखिरी बार इक्विटी फंडिंग जुटाई थी और उसी समय यूनिकॉर्न क्लब में एंट्री की थी।
  • अब तक कंपनी ने Tiger Global, Dragoneer Investment Group, Steadfast Capital, Coatue Management, Ribbit Capital समेत कई बड़े निवेशकों से $650 मिलियन से अधिक की इक्विटी और डेट फंडिंग जुटाई है।
  • फिनटेक सेक्टर में इसकी पहचान एक मजबूत B2B डिजिटल पेमेंट्स और लेंडिंग प्लेयर के रूप में है।

📊 FY25 में प्रॉफिट का बड़ा दावा

BharatPe ने हाल ही में दावा किया है कि FY25 में उसने प्रॉफिटबिलिटी हासिल कर ली है:

  • प्रॉफिट बिफोर टैक्स ₹6 करोड़ (ESOP कॉस्ट को छोड़कर)
  • रेवेन्यू ₹1,800 करोड़
  • पहले नौ महीनों में EBITDA लेवल पर ब्रेक-ईवन (ESOP एडजस्ट करने के बाद)
  • इसी अवधि में नेट लॉस घटकर ₹148.8 करोड़ रह गया, जो पिछले सालों की तुलना में काफी कम है।

यह बदलाव दिखाता है कि कंपनी ने कॉस्ट कंट्रोल और बिज़नेस ऑप्टिमाइजेशन पर गहरी मेहनत की है।


🏦 लाइसेंस और रेगुलेटरी बढ़त

अप्रैल 2025 में BharatPe की सहायक कंपनी Resilient को RBI से पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस मिल गया। इससे BharatPe के पास अब ये तीन बड़ी रेगुलेटरी ताकतें हैं:

  1. NBFC लाइसेंस (Trillion Loans के ज़रिए)
  2. Unity Small Finance Bank में हिस्सेदारी
  3. पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस

यह कॉम्बिनेशन BharatPe को क्रेडिट, बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट्स के पूरे इकोसिस्टम में मजबूत पोजीशन देता है।


🔍 मार्केट एनालिसिस: क्यों अहम है यह कदम?

  1. IPO रोडमैप को गति – यह फंडिंग IPO से पहले की तैयारी को तेज करेगी।
  2. इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस – Coatue जैसे बड़े निवेशक की भागीदारी मार्केट में भरोसा बढ़ाती है।
  3. कंपटीशन में बढ़त – Paytm, PhonePe और Razorpay जैसे बड़े प्लेयर्स के बीच अपनी पोजीशन को मजबूत करना।
  4. ऑपरेशनल स्केल – नई पूंजी से टेक्नोलॉजी, टीम और मार्केटिंग पर निवेश बढ़ेगा।

🚀 आगे की रणनीति

  • BharatPe का लक्ष्य 2026 के बाद IPO लाना है।
  • कंपनी SME लेंडिंग, डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज में प्रोडक्ट एक्सपैंशन करेगी।
  • रेगुलेटरी कंप्लायंस और सतत मुनाफ़ा बनाए रखना टॉप प्राथमिकता होगी।
  • ब्रांड बिल्डिंग और कस्टमर अधिग्रहण (acquisition) पर भी ज़ोर रहेगा।

📌 निष्कर्ष

BharatPe का यह प्री-IPO राउंड भारतीय फिनटेक सेक्टर के लिए एक बड़ा सिग्नल है। यह दिखाता है कि कंपनी स्टार्टअप से पब्लिक लिस्टेड कंपनी बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रही है।
$80-$100 मिलियन की यह फंडिंग न केवल वित्तीय स्थिरता लाएगी बल्कि मार्केट में इन्वेस्टर्स का भरोसा भी मजबूत करेगी। आने वाले महीनों में BharatPe के कदमों पर पूरी इंडस्ट्री की नज़र होगी।

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📉 Eternal चीन की Antfin ने Zomato में ₹4,097 करोड़ के शेयर बेचे,

Eternal

📰 न्यूज़ हाइलाइट्स:

  • Antfin Singapore ने Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal Ltd. में से ₹4,097 करोड़ के शेयर बेचे
  • 14.13 करोड़ शेयरों का ट्रांजैक्शन ₹289.91 प्रति शेयर की कीमत पर
  • कंपनी की हिस्सेदारी घटकर 0.52% से भी कम होने की संभावना
  • पिछले साल से अब तक Eternal से ₹11,696 करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी बेच चुका है Ant Group
  • Zomato की रेवेन्यू ग्रोथ 70% पर लेकिन मुनाफा 90% गिरा FY26 की पहली तिमाही में

📦 क्या है डील का पूरा मामला?

Alibaba Group की सहयोगी कंपनी Antfin Singapore Holding Pte. ने भारतीय फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal Ltd. में से ₹4,097 करोड़ (लगभग $482 मिलियन) के शेयर bulk deal के ज़रिए बेचे हैं।

स्टॉक एक्सचेंज डेटा के अनुसार, यह डील गुरुवार को हुई जिसमें कुल 14.13 करोड़ शेयर ₹289.91 प्रति शेयर की कीमत पर ट्रांसफर किए गए।

खरीदार कौन हैं? फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये शेयर किसने खरीदे, लेकिन यह Antfin द्वारा Eternal में की गई सबसे बड़ी बिकवाली में से एक है।


📉 कितनी हिस्सेदारी अब बची है Antfin के पास?

जून 2025 तक Antfin की Eternal Ltd. में 18.84 करोड़ शेयर, यानी लगभग 2.08% हिस्सेदारी थी। इस डील के बाद उनकी हिस्सेदारी 0.52% से भी कम होने की संभावना है — या संभव है कि यह पूर्णतः Exit भी हो।

यह Ant Group द्वारा Eternal में की गई पहली बिकवाली नहीं है।

  • अगस्त 2024 में Antfin ने 18.54 करोड़ शेयर, ₹257.4 की कीमत पर बेचे थे जिससे उसे ₹4,772 करोड़ ($561 मिलियन) प्राप्त हुए थे।
  • मार्च 2024 में भी Antfin ने ₹160.4 प्रति शेयर की कीमत पर 17.63 करोड़ शेयर बेचकर ₹2,827 करोड़ जुटाए थे।

📊 Antfin और Zomato: पीछे की कहानी

जब Eternal ने अपना DRHP फाइल किया था (IPO से पहले), उस समय Antfin इसके चौथे सबसे बड़े शेयरधारक थे। उनके पास 55 करोड़ शेयर थे जो कंपनी में 8.19% हिस्सेदारी के बराबर थे।

Eternal में Antfin के अलावा अन्य प्रमुख निवेशक रहे हैं:

  • Info Edge
  • Uber B.V.
  • Alipay (जो अब पूरी तरह बाहर निकल चुका है)

Alipay, जो कि Ant Group की ही एक और सहयोगी कंपनी है, नवंबर 2023 में Zomato से पूरी तरह बाहर हो चुका है। उस समय खरीदारों में शामिल थे:

  • Goldman Sachs
  • Fidelity
  • Morgan Stanley
  • Vanguard
  • ADIA
  • ICICI Prudential

💰 और सिर्फ Zomato ही नहीं, Paytm से भी निकला Antfin

इस सप्ताह की शुरुआत में ही, Antfin (Netherlands) Holding B.V. ने One97 Communications (Paytm) से भी 5.84% हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹3,800 करोड़ का सौदा किया।

इस तरह, चीनी निवेशक Ant Group भारत के इंटरनेट सेक्टर से धीरे-धीरे बाहर निकलता दिख रहा है।


📈 Eternal/Zomato के वित्तीय नतीजे: FY26 Q1 में क्या रहा प्रदर्शन?

Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal Ltd. ने Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई, लेकिन प्रॉफिट में बड़ी गिरावट देखी गई:

  • रेवेन्यू: ₹7,167 करोड़ (पिछले साल की तुलना में 70% की बढ़त)
  • प्रॉफिट: ₹25 करोड़ (FY25 Q1 में ₹253 करोड़ था, यानी 90% गिरावट)

कंपनी का स्टॉक प्राइस फिलहाल ₹300.7 (सुबह 11:15 बजे तक) पर ट्रेड कर रहा है, और मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹2,90,234 करोड़ ($34 बिलियन) है।


🤔 इसका मतलब क्या है भारतीय निवेशकों के लिए?

Ant Group की यह धीरे-धीरे हो रही एग्ज़िट स्ट्रैटेजी भारत के डिजिटल इकॉनॉमी में विदेशी निवेश की धारणा पर असर डाल सकती है। साथ ही, यह भारतीय कंपनियों के लिए एक अवसर भी हो सकता है कि वे स्थानीय निवेशकों को ज्यादा जगह दें।

Zomato के बढ़ते रेवेन्यू और घटते मुनाफे को देखना दिलचस्प रहेगा कि कंपनी लॉन्ग टर्म में मुनाफा बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।


📌 निष्कर्ष:

Antfin की इस बिकवाली के बाद Eternal में विदेशी निवेश की हिस्सेदारी और घट गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि Zomato में आगे कौन नया स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर आता है, और कंपनी अपने प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे संभालती है।

📍 क्या Zomato एक बार फिर निवेशकों को आकर्षित कर पाएगा? इसका जवाब समय देगा।


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