🚀 अगस्त में स्टार्टअप फंडिंग का उछाल: फिनटेक ने मारी बाजी, गेमिंग सेक्टर संकट में

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भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने जुलाई की सुस्ती के बाद अगस्त 2025 में एक बार फिर रफ्तार पकड़ी है। हालांकि कुल फंडिंग अभी भी $1 बिलियन के नीचे रही, लेकिन लेट-स्टेज और ग्रोथ-स्टेज डील्स ने बाजार को नई जान दी। खास बात यह रही कि फिनटेक सेक्टर सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरा, जबकि ई-कॉमर्स और हेल्थटेक ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ, एग्रीटेक और एडटेक जैसे सेक्टर लगभग निष्क्रिय दिखाई दिए। वहीं, सरकार की गेमिंग कंपनियों पर सख्ती ने कई स्टार्टअप्स को या तो बंद होने या बिजनेस मॉडल बदलने पर मजबूर कर दिया।


💰 अगस्त में कितनी फंडिंग आई?

TheKredible के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $961 मिलियन जुटाए

  • ग्रोथ और लेट-स्टेज डील्स: $733 मिलियन (24 डील्स)
  • अर्ली-स्टेज डील्स: $228 मिलियन (68 डील्स)
  • अनडिस्क्लोज्ड राउंड्स: 8

📊 सालाना तुलना में देखें तो अगस्त 2025 पिछले 5 सालों में दूसरा सबसे मजबूत अगस्त रहा। वहीं, 2023 का अगस्त सबसे कमजोर था जब सिर्फ $459 मिलियन जुटाए गए थे।


🌟 टॉप 10 ग्रोथ-स्टेज डील्स

अगस्त में टॉप 10 लेट-स्टेज डील्स ने कुल $558 मिलियन जुटाए।

  • Weaver Services – $170M (हाउसिंग फाइनेंस)
  • Truemeds – $85M (ई-फार्मेसी और टेलीहेल्थ)
  • The Sleep Company – $56M
  • Amnex Technologies – $52M
  • Zepto – $46M
  • Darwinbox – $40M
  • RENÉE Cosmetics – $30M
  • R for Rabbit – $27M
  • Fibe – $26.5M
  • TransBnk – $25M

🌱 टॉप 10 अर्ली-स्टेज डील्स

अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने अगस्त में करीब $101 मिलियन जुटाए।

  • Arintra – $21M (मेडिकल कोडिंग)
  • Dashverse – $13M (एंटरटेनमेंट)
  • Jeh Aerospace & Pronto – $11M प्रत्येक
  • Graas AI – $9M
  • WizCommerce – $8M
  • Vutto, DPDzero, Brandworks – $7M प्रत्येक
  • Refold AI – $6.5M

🤝 M&A गतिविधियाँ

अगस्त में कुछ अहम अधिग्रहण हुए:

  • StampMyVisa ने Teleport को खरीदा (ट्रैवल टेक)
  • Niyo ने Kanji Forex का अधिग्रहण किया (फिनटेक)
  • Credgenics ने Arrise को जोड़ा (डेट रिकवरी)
  • MakeO ने Apple Dental को अधिग्रहित किया (हेल्थटेक)
  • Uniphore ने US-आधारित Orby AI Inc. को खरीदा (ऑटोमेशन)

🏙️ शहरवार और सेक्टरवार डील्स

  • मुंबई – $410.6M (15 डील्स, 43% हिस्सा)
  • बेंगलुरु – $178.1M (35 डील्स)
  • दिल्ली-NCR – $74.6M (21 डील्स)
  • पुणे और हैदराबाद – ~$142M मिलकर

👉 सेक्टर के हिसाब से:

  • फिनटेक – $314.4M (33%)
  • ई-कॉमर्स – $195.6M (20%)
  • हेल्थटेक – $106M (11%)
  • AI स्टार्टअप्स – $96.5M
  • डीपटेक व फूडटेक – $14M से भी कम

📊 सीरीज-वाइज डील्स

  • Series A – $202.1M (22 डील्स, 21%)
  • Series B – $157.6M (10 डील्स)
  • Seed & Pre-Seed – $60.9M
  • Pre-Series A – $19M

⚠️ छंटनी और शटडाउन

सरकार द्वारा Online Gaming Act लागू होने के बाद कई RMG (Real Money Gaming) कंपनियाँ बंद हो गईं या बिजनेस बदलने पर मजबूर हुईं।

  • आधिकारिक रूप से सिर्फ 1 छंटनी रिपोर्ट हुई, लेकिन अनऑफिशियल तौर पर गेमिंग सेक्टर में भारी जॉब लॉस दर्ज हुआ।
  • अनुमान है कि करीब 400 RMG स्टार्टअप्स भारत में सक्रिय थे, जो सालाना $2.3 बिलियन टैक्स और 2 लाख नौकरियों में योगदान करते थे।

🔥 ट्रेंड्स पर नज़र

  • Micro-drama apps: 1–2 मिनट की शॉर्ट स्टोरी ऐप्स (WinZO का ZO TV, Flick TV, Kuku TV आदि) तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
  • TikTok की वापसी की अटकलें: ByteDance ने गुरुग्राम ऑफिस के लिए भर्तियाँ शुरू कीं, लेकिन सरकार ने साफ किया कि बैन बरकरार है।
  • Uber vs Rapido: Uber CEO ने माना कि भारत में Rapido अब Ola से बड़ा खतरा है।
  • PhysicsWallah IPO: कंपनी ने SEBI से मंजूरी पाई, करीब ₹4,500 करोड़ जुटाने की तैयारी। वैल्यूएशन ₹35,000–40,000 करोड़ तक जा सकती है।

📌 नतीजा: आगे क्या?

अगस्त का प्रदर्शन जरूर बेहतर रहा, लेकिन सितंबर में सुस्ती लौटने की आशंका है।

  • अमेरिकी सेकेंडरी टैरिफ और RMG बैन निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
  • चीन से निवेश नियमों में ढील एक पॉजिटिव संकेत हो सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा।

कुल मिलाकर, अगस्त ने थोड़ी राहत दी है लेकिन आने वाले महीनों में स्टार्टअप इकोसिस्टम को अनिश्चितताओं और पॉलिसी बदलावों का सामना करना पड़ सकता है।

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🏠 Square Yards ने Q1 FY26 में रेवेन्यू में 45% की बढ़त,

Square Yards

गुरुग्राम स्थित Square Yards, जो एक इंटीग्रेटेड रियल एस्टेट और मॉर्टगेज प्लेटफॉर्म है, ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के नतीजे घोषित करते हुए बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने न केवल 45% साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की, बल्कि पहली बार EBITDA स्तर पर लाभ (Profitability) भी दर्ज किया।


📊 रेवेन्यू और मुनाफे में ऐतिहासिक बढ़त

कंपनी की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, Square Yards का रेवेन्यू Q1 FY26 में ₹378 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही (Q1 FY25) में यह ₹260 करोड़ था। यानी कंपनी ने एक साल में ही लगभग ₹118 करोड़ की अतिरिक्त कमाई की।

सबसे अहम बात यह रही कि कंपनी ने पहली बार EBITDA स्तर पर मुनाफा दर्ज किया।

  • ग्रॉस प्रॉफिट ₹70 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹24 करोड़ था।
  • मार्जिन 9% से बढ़कर 18% हो गया।
  • सेगमेंटल EBITDA ₹38.2 करोड़ रहा, जिसमें 10% का मार्जिन है।
  • कुल EBITDA ₹4.4 करोड़ पॉजिटिव रहा, जबकि पिछले साल कंपनी को ₹33.7 करोड़ का घाटा हुआ था।

🌍 Square Yards का बिजनेस मॉडल

Square Yards एक प्रॉपटेक (PropTech) प्लेटफॉर्म है जो रियल एस्टेट से जुड़ी एंड-टू-एंड सर्विसेज प्रदान करता है। इसमें शामिल हैं:

  • प्रॉपर्टी डिस्कवरी (Property Discovery)
  • खरीद-फरोख्त (Buying & Selling)
  • मॉर्टगेज असिस्टेंस (Mortgage Assistance)
  • होम फर्निशिंग और रेनोवेशन
  • रेंटल्स और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट

कंपनी आज भारत ही नहीं बल्कि 9 देशों के 100 से अधिक शहरों में अपनी सेवाएं देती है।


📈 सेगमेंटवार परफॉर्मेंस

कंपनी के तीन प्रमुख सेगमेंट्स में रेवेन्यू में खासा उछाल देखने को मिला:

  • फाइनेंशियल सर्विसेज – 60% सालाना बढ़त
  • रियल एस्टेट – 36% ग्रोथ
  • होम रेनोवेशन – 21% ग्रोथ
  • डिजिटल प्रोडक्ट्स – हल्की गिरावट दर्ज की गई

Q1 FY26 में कंपनी ने कुल 55,771 ट्रांजैक्शंस को पूरा किया। इनका ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू (GTV) ₹18,480 करोड़ तक पहुंचा।

भारत से होने वाला रेवेन्यू ₹340 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 57% ज्यादा है।


💬 फाउंडर और CEO का बयान

Square Yards के फाउंडर और CEO तनुज शोरी ने कहा:
“हम अपने अब तक के सबसे मजबूत Q1 प्रदर्शन को दर्ज करने पर बेहद उत्साहित हैं। 45% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ और ग्रॉस प्रॉफिट का तीन गुना होना हमारे ऑपरेटिंग मॉडल की मजबूती को दिखाता है। यह तिमाही कंपनी के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है।”


📌 IPO की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, Square Yards अब ₹2,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही अपना IPO लाने की योजना बना रही है। इसके लिए वह इस वित्त वर्ष के भीतर ही Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर सकती है।

  • संभावित वैल्यूएशन $1.5–2 बिलियन के बीच हो सकता है।
  • यदि यह IPO सफल होता है तो Square Yards भारत के प्रमुख प्रॉपटेक लिस्टेड खिलाड़ियों में शामिल हो जाएगा।

📌 फंडिंग और ग्रोथ स्ट्रैटेजी

Square Yards की रणनीति सिर्फ रियल एस्टेट तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी तेजी से फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और होम सॉल्यूशंस पर भी फोकस कर रही है। इसके चलते कंपनी का रेवेन्यू बेस मजबूत हुआ है।

IPO से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी निम्न क्षेत्रों में कर सकती है:

  • नए शहरों और देशों में विस्तार
  • टेक्नोलॉजी और AI-आधारित डिजिटल प्रोडक्ट्स का विकास
  • होम रेनोवेशन और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट बिजनेस को स्केल करना

🏆 Square Yards की उपलब्धियां

  • 100+ शहरों और 9 देशों में ऑपरेशन
  • 55,000 से अधिक डील्स एक तिमाही में
  • ₹18,480 करोड़ का GTV
  • पहली बार EBITDA स्तर पर मुनाफा

📢 निष्कर्ष

Square Yards का Q1 FY26 प्रदर्शन न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरे PropTech सेक्टर के लिए प्रेरणादायक है। 45% रेवेन्यू ग्रोथ, तीन गुना ग्रॉस प्रॉफिट और पहली बार मुनाफा दर्ज करना दर्शाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल अब मजबूत आधार पर खड़ा है।

IPO की तैयारी के साथ Square Yards भारतीय प्रॉपटेक इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए यह कंपनी अहम भूमिका निभाने जा रही है।

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💼 Info Edge ने Q1 FY26 में 17% रेवेन्यू ग्रोथ और 32% मुनाफे

Info Edge

📊 नतीजे मजबूत, नौकरी और 99एकर्स बने ग्रोथ के इंजन

नोएडा स्थित जॉब और प्रॉपर्टी पोर्टल चलाने वाली दिग्गज कंपनी इंफो एज Info Edge ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY26) के दमदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने 17% साल-दर-साल रेवेन्यू ग्रोथ और 32% मुनाफे में उछाल दर्ज किया है, जो इसके डिजिटल बिज़नेस मॉडल की मजबूती को दर्शाता है।

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q1 FY26 में बढ़कर ₹791 करोड़ हो गया, जो Q1 FY25 में ₹677 करोड़ था। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त दस्तावेज़ों के आधार पर सामने आई है।


🔍 Q1 FY26 में प्रमुख वित्तीय आंकड़े:

  • 📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू (YoY): ₹791 करोड़ (17% वृद्धि)
  • 📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू (QoQ): ₹791 करोड़ बनाम ₹750 करोड़ (5.5% वृद्धि)
  • 💰 कुल रेवेन्यू (ब्याज सहित): ₹1,004 करोड़
  • 🧾 कुल खर्च: ₹564 करोड़ (YoY 16% वृद्धि)
  • 💵 मुनाफा (Net Profit): ₹343 करोड़ (YoY 32% वृद्धि)
  • 💹 EBITDA: ₹468 करोड़

🔧 रेवेन्यू में कौन से प्लेटफॉर्म्स रहे आगे?

Info Edge की कमाई का बड़ा हिस्सा इसके प्रमुख प्लेटफॉर्म Naukri.com से आता है। इस पोर्टल ने Q1 FY26 में ₹562 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया, जो Q1 FY25 की तुलना में 15% अधिक है।

📌 अन्य प्लेटफॉर्म्स का योगदान:

  • 🏠 99acres: ₹111 करोड़
  • 💍 Jeevansathi: ₹34 करोड़
  • 🎓 Shiksha: ₹50 करोड़

इन चारों ब्रांड्स ने मिलकर इंफो एज की उपस्थिति को नौकरियों, रियल एस्टेट, मैट्रिमोनी और एजुकेशन सर्च सेगमेंट में मज़बूत किया है।


💰 ब्याज और निवेश से अतिरिक्त कमाई

कंपनी ने ब्याज और निवेश से ₹213 करोड़ की अतिरिक्त आय अर्जित की। इससे Q1 FY26 में कंपनी की कुल आय ₹1,004 करोड़ तक पहुँच गई, जो ऑपरेटिंग रेवेन्यू से कहीं अधिक है।


💸 खर्च का बड़ा हिस्सा कर्मचारी और विज्ञापन पर

इंफो एज ने Q1 FY26 में कुल खर्च का 58% हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और लाभ पर खर्च किया।

🧾 मुख्य खर्च इस प्रकार रहे:

  • 👨‍💼 Employee Benefits: ₹327 करोड़ (YoY 12% वृद्धि)
  • 📢 Advertising खर्च: ₹127 करोड़
  • 🌐 Internet खर्च: ₹22 करोड़

इस प्रकार, कुल खर्च में 16% की सालाना वृद्धि देखी गई, जो ₹485 करोड़ से बढ़कर ₹564 करोड़ हो गया।


📈 शेयर बाज़ार में स्थिति

8 अगस्त 2025 को दोपहर 2:22 बजे, Info Edge का शेयर ₹1,333.5 पर ट्रेड कर रहा था, जो आज के ओपनिंग प्राइस से 2% कम है।

📊 कंपनी की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन इस समय ₹86,277 करोड़ (~$9.8 बिलियन) है।


🧠 क्या कहती है यह परफॉर्मेंस?

Info Edge ने डिजिटल इकोसिस्टम के चार प्रमुख स्तंभों – नौकरी, प्रॉपर्टी, मैट्रिमोनी और एजुकेशन – में अपना दबदबा बनाए रखते हुए शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का फोकस हाई मार्जिन सेगमेंट पर है और ब्याज व निवेश से आय भी इसे वित्तीय रूप से मजबूत बनाती है।


🔮 आगे की रणनीति क्या हो सकती है?

  • कंपनी अब AI और डेटा-ड्रिवन हायरिंग सॉल्यूशंस की दिशा में निवेश बढ़ा रही है।
  • रियल एस्टेट और एजुकेशन पोर्टल्स पर पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस और SaaS इंटीग्रेशन की संभावना भी जताई जा रही है।
  • Jeevansathi और Shiksha जैसे सेगमेंट्स में ग्रोथ को बढ़ाने के लिए नई मार्केटिंग रणनीतियों पर काम हो सकता है।

📌 निष्कर्ष

Info Edge का Q1 FY26 प्रदर्शन न केवल इसके बिजनेस मॉडल की ताकत को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ और प्रोफिटेबिलिटी दोनों मुमकिन हैं।
Naukri.com जैसा मजबूत ब्रांड, 99acres जैसी स्थायी डिमांड और विविध प्लेटफॉर्म्स के जरिए Info Edge भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है।

📊 अगर कंपनी इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो आने वाले क्वार्टर्स में इसके मार्केट कैप और मुनाफे दोनों में और तेज़ी देखी जा सकती है।


✍️ लेख: FundingRaised टीम द्वारा
🔗 अधिक जानकारियों के लिए FundingRaised.in पर पढ़ें।

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🛒 SuperK, ₹100 करोड़ जुटाए

SuperK

भारत के छोटे शहरों में संगठित रिटेल को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही ब्रांडेड फ्रैंचाइज़ रिटेल चेन SuperK ने अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹100 करोड़ (लगभग $11.7 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Binny Bansal की 3STATE Ventures और CaratLane के पूर्व सीईओ Mithun Sancheti ने किया। खास बात यह रही कि भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज़ और मौजूदा टेस्ट कप्तान Shubman Gill ने भी इस राउंड में निवेश किया।

साथ ही, SuperK के मौजूदा निवेशकों Blume Ventures और Xeed Ventures ने भी इस राउंड में भाग लिया। इससे पहले, कंपनी ने मार्च 2023 में ₹50 करोड़ ($6 मिलियन) जुटाए थे, जिसे Blume Ventures ने लीड किया था।


📈 कहां होगा निवेश का इस्तेमाल?

SuperK के सह-संस्थापक अनिल थोंतेपू और नीरज मेंता ने बताया कि इस नई फंडिंग से कंपनी अपने संचालन को मजबूत करने के लिए टैलेंट हायरिंग पर ज़ोर देगी। खासतौर पर मार्केटिंग, स्टोर ऑपरेशंस, कैटेगरी मैनेजमेंट और ग्रोथ से जुड़े विभागों में नई भर्तियाँ की जाएंगी।

इसके अलावा, कंपनी का फोकस नए कस्बों में विस्तार और ग्रोसरी के अलावा ई-कॉमर्स उत्पादों जैसे मिक्सर, कूलर, कुकर और पंखों की बिक्री पर रहेगा।


🏙 छोटे शहरों में बड़ा मौका

भारत में ग्रोसरी रिटेल एक ₹50 लाख करोड़ ($600 बिलियन) का मार्केट है, जिसमें से 80% से अधिक खर्च Tier-II और उससे छोटे शहरों से आता है। लेकिन इसमें से महज 5% मार्केट ही संगठित रिटेल द्वारा कवर किया गया है।

SuperK इस बड़े अंतर को भरना चाहता है। कंपनी छोटे शहरों में Costco की तरह एक भरोसेमंद और टेक-इनेबल्ड सुपरमार्केट ब्रांड बनना चाहती है। इसके लिए कंपनी स्थानीय फ्रेंचाइज़ पार्टनर्स, अपनी खुद की टेक्नोलॉजी और ग्राहक डेटा का इस्तेमाल कर रही है।


🛍 130 से अधिक स्टोर्स, 80 से ज्यादा कस्बों में मौजूदगी

SuperK फिलहाल आंध्र प्रदेश के 80 से अधिक छोटे शहरों में 130 स्टोर्स चला रहा है, जो सभी फ्रेंचाइज़ी मॉडल पर आधारित हैं। कंपनी ने अपने लिए खुद की POS मशीन, इन-हाउस रिटेल ऑपरेटिंग सिस्टम, कस्टमर और पार्टनर ऐप्स डेवलप किए हैं जिससे दैनिक संचालन को आसान बनाया जा सके।

SuperK का कहना है कि वह भारत की एकमात्र ऑफलाइन रिटेल कंपनी है जिसके पास ग्राहकों की खरीदारी पर 100% डेटा विजिबिलिटी है। इस डेटा की मदद से कंपनी कस्टमर्स को पर्सनलाइज ऑफर भेजती है और फ्रेंचाइज़ पार्टनर्स को टारगेट्स पूरा करने पर इनाम देती है।


🌟 गोल्ड मेंबरशिप से बढ़ी लॉयल्टी

SuperK का Gold मेंबरशिप प्रोग्राम भी काफी सफल रहा है। कंपनी का दावा है कि इस प्रोग्राम से कस्टमर लॉयल्टी और रिटेंशन में इज़ाफा हुआ है। अब कंपनी की कुल बिक्री का एक बड़ा हिस्सा इसी मेंबरशिप से आता है।


💻 टेक्नोलॉजी + ग्रोसरी = SuperK

SuperK केवल ग्रोसरी तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी ने हाल ही में अपने टेक और सप्लाई चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर के ऊपर एक ई-कॉमर्स वर्टिकल शुरू किया है, जहां वह किफायती घरेलू उपकरण छोटे शहरों में पहुंचा रही है।

इस मॉडल के ज़रिए SuperK छोटे शहरों की प्राइस सेंसिटिव जनता को भरोसेमंद और सस्ते प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रही है, जो उसे अन्य ऑफलाइन रिटेल चेन से अलग बनाता है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में 41% ग्रोथ, घाटा भी बढ़ा

SuperK ने अब तक FY25 के लिए अपनी वित्तीय रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, लेकिन FY24 में कंपनी का राजस्व ₹84.5 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41% की बढ़ोतरी है।

हालांकि, इस दौरान कंपनी का घाटा ₹30.67 करोड़ रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 30% अधिक है। इससे साफ है कि कंपनी अब भी निवेश मोड में है और प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने में समय लगेगा।


🏁 निष्कर्ष

SuperK भारत के छोटे शहरों के लिए एक संगठित और आधुनिक रिटेल अनुभव देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ₹100 करोड़ की इस नई फंडिंग से कंपनी को अपने ऑपरेशंस, टैलेंट, और टेक्नोलॉजी विस्तार के लिए जरूरी बूस्ट मिलेगा।

भारत के छोटे शहरों की बड़ी ग्रोसरी डिमांड, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और भरोसेमंद फ्रैंचाइज़ मॉडल के साथ SuperK के पास एक मज़बूत ग्रोथ रोडमैप है। अब देखना ये है कि कंपनी इस मौक़े को कैसे भुनाती है और आने वाले वर्षों में Costco जैसा ब्रांड बनने के अपने लक्ष्य तक कितनी तेजी से पहुंचती है।

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🐟 Captain Fresh ने जुटाए ₹45 करोड़: IPO से पहले निवेशकों का भरोसा

Captain Fresh

B2B सीफ़ूड सप्लाई चेन कंपनी Captain Fresh ने अपने आने वाले IPO से पहले ₹45 करोड़ (लगभग $5.3 मिलियन) की डेब्ट फंडिंग जुटाई है। यह निवेश Lighthouse Canton और Stride Ventures से मिला है। बेंगलुरु स्थित यह स्टार्टअप हाल ही में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में तब्दील हुआ है, जो इसकी IPO योजना की दिशा में एक बड़ा कदम है।


📌 कंपनी का परिचय: क्या है Captain Fresh?

Captain Fresh की शुरुआत वर्ष 2019 में उथम गौड़ा द्वारा की गई थी। यह कंपनी सीफ़ूड सप्लाई चेन को टेक्नोलॉजी की मदद से कुशल बनाने का काम करती है। इसका प्लेटफॉर्म मल्टी-स्पीशीज़ सीफ़ूड जैसे कि मछली, झींगे, केकड़े, और लॉबस्टर की सोर्सिंग और डिलीवरी की सुविधा देता है।


💸 डील डिटेल्स: कैसे जुटाई गई फंडिंग?

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, Captain Fresh के बोर्ड ने 4,500 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को मंजूरी दी है, जिनकी फेस वैल्यू ₹1,00,000 प्रति यूनिट है। इससे कंपनी को ₹45 करोड़ जुटाने में मदद मिली है।

Lighthouse Canton से ₹30 करोड़ पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जबकि बाकी रकम जल्द ही आनी तय है।


🎯 IPO की रणनीति: अगस्त में दाखिल होंगे पेपर्स

Captain Fresh अगस्त 2025 में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की योजना बना रही है। कंपनी $400 मिलियन (लगभग ₹3,300 करोड़) के आईपीओ की तैयारी कर रही है और इसके पहले एक $50–75 मिलियन की प्री-IPO फंडिंग जुटाने की योजना भी है।

इस बड़े इश्यू के लिए Axis Capital और Bank of America (BofA) को मुख्य निवेश बैंकर के रूप में जोड़ा गया है।


👨‍💼 कौन हैं संस्थापक और क्या है बिज़नेस मॉडल?

Captain Fresh के संस्थापक उथम गौड़ा ने सप्लाई चेन में मौजूद असंगठितता और ताजगी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से यह कंपनी शुरू की थी। कंपनी B2B मॉडल पर काम करती है, जहाँ यह किसानों/फिशरों से सीधे सीफ़ूड लेकर होटल, रिटेलर्स और रेस्तरां तक पहुँचाती है।


📈 अब तक कितनी फंडिंग मिली है?

Startup data platform TheKredible के अनुसार, Captain Fresh अब तक $200 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है। इनमें से $30 मिलियन की फंडिंग जनवरी 2025 में Prosus, Accel, Tiger Global, और अन्य निवेशकों से प्री-IPO राउंड में मिली थी।


🧾 FY24 में कैसा रहा फाइनेंशियल परफॉर्मेंस?

Captain Fresh ने FY24 में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है:

  • Gross Revenue (GMV): ₹817 करोड़ से बढ़कर ₹1,395 करोड़ — यानी 71% की वृद्धि
  • Net Loss: ₹294 करोड़ से घटकर ₹229 करोड़ — यानी 22% की कमी

इससे कंपनी की ग्रोथ क्षमता और ऑपरेशनल एफिशिएंसी का अंदाजा लगाया जा सकता है।


🧱 कंपनी की अगली चाल: SeaFood से आगे प्रोटीन मार्केट

Captain Fresh अब केवल सीफ़ूड तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी का फोकस अब एनिमल प्रोटीन कैटेगरी को और व्यापक बनाने पर है, जिसमें पोल्ट्री, मीट, और अन्य हाई प्रोटीन सोर्स भी शामिल किए जाएंगे।


🏦 किन-किन निवेशकों ने अब तक पैसा लगाया?

Captain Fresh को अब तक जिन प्रमुख निवेशकों का साथ मिला है, उनमें शामिल हैं:

  • Tiger Global
  • Accel
  • Prosus
  • Matrix Partners
  • Ankur Capital
  • Stride Ventures
  • Lighthouse Canton

इन सभी ने कंपनी की ग्रोथ और बिज़नेस मॉडल में गहरी रुचि दिखाई है।


⚔️ मार्केट में मुकाबला: किन कंपनियों से है चुनौती?

Captain Fresh को बाजार में FreshToHome, Licious, और Meatigo जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ता है। हालांकि, B2B फोकस और मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क इसे विशिष्ट बनाता है।


📅 आगे क्या? IPO और विस्तार की योजना

Captain Fresh का लक्ष्य है कि अगले 6-8 महीनों में वह IPO के जरिए पब्लिक इन्वेस्टर्स को साथ जोड़े। साथ ही कंपनी अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार और नई प्रोडक्ट कैटेगरी में कदम रखने की योजना पर भी काम कर रही है।


🔚 निष्कर्ष: IPO से पहले Captain Fresh की मजबूती

Captain Fresh ने IPO से पहले अपनी नींव मजबूत कर ली है। तेजी से बढ़ती GMV, घटता हुआ घाटा और मजबूत निवेशक विश्वास इसके उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करते हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह कंपनी जल्द ही भारत की अगली सफल B2B स्टार्टअप लिस्टिंग बन सकती है।

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📢 IPO के लिए तैयार IndiQube ₹700 करोड़ जुटाने की योजना, FY25 में घाटा 58% घटा

IndiQube

🔷 परिचय:
बेंगलुरु स्थित IndiQube, जो एक प्रमुख मैनेज्ड वर्कस्पेस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है, ने हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया है। कंपनी ने आगामी ₹700 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए यह कदम उठाया है।

कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, FY25 में उसका नेट लॉस 58% घटकर ₹141 करोड़ रह गया, जो कि FY24 में ₹341 करोड़ था। इस गिरावट का प्रमुख कारण रहा राजस्व में वृद्धि और लागत पर नियंत्रण।


📈 FY25 में दमदार वित्तीय प्रदर्शन:
IndiQube की ऑपरेशन से होने वाली आय FY25 में ₹1,059 करोड़ तक पहुँच गई, जो कि FY24 के ₹830 करोड़ के मुकाबले 28% अधिक है।

  • ₹870 करोड़, यानी 82% से अधिक आय रेंटल सेवाओं से हुई।
  • अन्य स्रोतों में शामिल हैं:
    • गुड्स की बिक्री: ₹66 करोड़
    • मेंटेनेन्स चार्जेस: ₹51 करोड़
    • बिजली चार्जेस: ₹33 करोड़
    • अन्य सेवाएं: ₹39 करोड़

इसके अतिरिक्त, ₹44 करोड़ की आय गैर-ऑपरेशनल स्रोतों से हुई, जिससे कुल राजस्व FY25 में बढ़कर ₹1,103 करोड़ तक पहुँच गया।


💸 खर्च का विश्लेषण:
IndiQube की FY25 में कुल लागत ₹1,260 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष के ₹1,252 करोड़ के लगभग बराबर रही।
सबसे बड़ी लागतें रहीं:

  • लीज पर डिप्रिसिएशन (घटती मूल्य): ₹487 करोड़ (कुल खर्च का 39%)
  • फाइनेंस कॉस्ट्स (वित्तीय लागतें): ₹330 करोड़
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: ₹76 करोड़
  • मैटेरियल कॉस्ट: ₹52 करोड़

👉 हालांकि खर्च लगभग स्थिर रहे, परन्तु राजस्व में बढ़ोतरी के चलते IndiQube ने घाटे में उल्लेखनीय कटौती की।


📊 वित्तीय मजबूती और प्रभावी नियंत्रण:

  • FY25 में कंपनी ने प्रत्येक ₹1 की ऑपरेटिंग आय के लिए ₹1.2 का खर्च किया, जो इंगित करता है कि कंपनी अब ब्रेक-ईवन के करीब पहुँच रही है।
  • कंपनी के वर्तमान एसेट्स की वैल्यू ₹210 करोड़ थी, जिसमें से ₹61 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस में था।

इसका मतलब है कि कंपनी अब अपने आर्थिक मॉडल को अधिक कुशल बनाने में सफल रही है।


🏢 कंपनी प्रोफाइल: IndiQube क्या करता है?
IndiQube एक मैनेज्ड वर्कस्पेस प्लेटफॉर्म है, जो स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े एंटरप्राइजेज के लिए फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस प्रदान करता है।
यह कंपनियों को:

  • रेडी-टू-मूव ऑफिस
  • मैनेज्ड सर्विसेस
  • टेक इंटीग्रेशन
  • कस्टमाइज़ेबल इंफ्रास्ट्रक्चर
    उपलब्ध कराता है, जिससे वे अपनी कोर बिजनेस एक्टिविटीज पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

📅 IPO की Timeline और लिस्टिंग डिटेल्स:

  • IPO सब्सक्रिप्शन ओपन डेट: 23 जुलाई 2025
  • IPO क्लोज डेट: 25 जुलाई 2025
  • Anchor Investors के लिए बुक ओपन: 22 जुलाई 2025
  • कंपनी के शेयर NSE और BSE दोनों पर लिस्ट होंगे।

यह पहली बार है जब IndiQube जैसे वर्कस्पेस मैनेजमेंट सेक्टर का स्टार्टअप पब्लिक मार्केट में उतर रहा है।


🔍 बाजार में IndiQube की स्थिति:
IndiQube ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई है:

  • कई प्रमुख शहरों में ऑफिस स्पेस उपलब्ध
  • वर्क फ्रॉम होम के बाद ऑफिस रिटर्न ट्रेंड से फायदा
  • स्टार्टअप्स और फ्रीलांसर से लेकर बड़े कॉरपोरेट्स तक इसके ग्राहक

कंपनी ने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग करते हुए ऑपरेशंस को स्केलेबल बनाया है।


🌟 क्या कहता है यह IPO निवेशकों के लिए?

  • घाटा कम होना और राजस्व का मजबूत ग्रोथ निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं
  • कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बेहतर हुई है
  • ₹700 करोड़ जुटाकर कंपनी अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं को और मजबूत कर सकती है
  • वर्तमान ट्रेंड्स और प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा को देखते हुए, यह IPO निवेश के लिहाज़ से आकर्षक हो सकता है

📌 निष्कर्ष:
IndiQube का IPO भारतीय शेयर बाजार में वर्कस्पेस इनोवेशन और मैनेज्ड सर्विसेस को एक नई पहचान देने जा रहा है।
राजस्व में निरंतर वृद्धि, खर्चों पर नियंत्रण और मजबूत वित्तीय संकेतकों के साथ, कंपनी ने यह दिखा दिया है कि वह अब पब्लिक इन्वेस्टमेंट के लिए तैयार है।

बाजार में निवेशकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की नजर इस IPO पर टिकी है, जो एक उभरते हुए सेक्टर को सार्वजनिक निवेश के लिए खोलने जा रहा है।


📚 और पढ़ें:
IndiQube की ताज़ा फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और IPO अपडेट पर।

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Fractal Analytics ने सेकेंडरी शेयर सेल के ज़रिए जुटाए ₹1,461 करोड़,

Fractal Analytics

AI और एडवांस्ड एनालिटिक्स सॉल्यूशंस मुहैया कराने वाली प्रमुख भारतीय कंपनी Fractal Analytics ने हाल ही में $170 मिलियन (लगभग ₹1,461 करोड़) की पूंजी एक सेकेंडरी शेयर सेल के ज़रिए जुटाई है। इस डील के बाद कंपनी का मूल्यांकन $2.44 बिलियन पर पहुँच गया है। यह डेवलपमेंट ऐसे समय आया है जब Fractal आने वाले महीनों में अपना IPO लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।


🔁 कौन सी हिस्सेदारी बिकी?

इस लेनदेन में Apax Partners ने अपनी हिस्सेदारी का लगभग 6% हिस्सा बेचा है, जो 22 से अधिक निवेशकों—जैसे कि Trust Investment Advisors—द्वारा खरीदा गया। चूंकि यह सेकेंडरी सेल है, इसलिए Fractal को सीधे कोई पूंजी प्राप्त नहीं हुई, लेकिन इसने कंपनी को अगले चरण की योजनाओं को गति देने के लिए अनुकूल स्थिति में ला दिया है।

Fractal ने इस फंडिंग के ज़रिए:

  • रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देने
  • वैश्विक जनरेटिव AI (GenAI) उत्पादों के विस्तार
  • और ऋण भुगतान (debt pre-payment) जैसे प्रमुख उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की बात कही है।

🚀 IPO की तैयारी में तेजी

Fractal ने अपने प्रस्तावित IPO के तहत $400–$500 मिलियन जुटाने की योजना बनाई है, जिसमें कंपनी का मूल्यांकन $3 बिलियन तक होने की उम्मीद है। इस सार्वजनिक निर्गम के लिए कंपनी ने:

  • Morgan Stanley
  • Kotak Securities
  • और Axis Securities

को मुख्य इनवेस्टमेंट बैंकर्स नियुक्त किया है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी जल्द ही अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) दाखिल कर सकती है।


🧠 Fractal: एक ग्लोबल AI लीडर

2000 में श्रीकांत वेलमाकन्नी (Srikanth Velamakanni) और प्रणय अग्रवाल (Pranay Agrawal) द्वारा स्थापित Fractal आज एक अग्रणी वैश्विक AI और एनालिटिक्स कंपनी बन चुकी है। कंपनी के प्रमुख डोमेन:

  • मशीन लर्निंग
  • जनरेटिव AI
  • कंप्यूटर विजन
  • क्वांटम कंप्यूटिंग
  • और कॉग्निटिव ऑटोमेशन

Fractal की कुल आय का 70% हिस्सा अमेरिका से आता है, जिससे उसकी मजबूत अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का संकेत मिलता है।


🔍 जनरेटिव AI में तेजी से कदम

Fractal ने हाल ही में जनरेटिव AI की दुनिया में कदम रखते हुए कई इनोवेटिव प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं:

  • Fractal GPT – कंपनी की GPT आधारित इंटरनल AI तकनीक
  • Flyfish – एक डिजिटल सेल्स सलाहकार
  • Arya – डेटा साइंस के लिए AI एजेंट
  • Kalaido.ai – भारत का पहला मल्टीलिंगुअल टेक्स्ट-टू-इमेज मॉडल (2024 में लॉन्च)

ये सभी उत्पाद Fractal को GenAI स्पेस में प्रतिस्पर्धी बढ़त दिलाते हैं और उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धियों जैसे OpenAI, Anthropic और Hugging Face के समकक्ष खड़ा करते हैं।


📈 वित्तीय प्रदर्शन और निवेश इतिहास

वर्षराजस्व (भारत)घाटा
FY24₹2,196 करोड़₹54.7 करोड़

Fractal ने अब तक कुल $855 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है। इनमें से सबसे प्रमुख:

  • $360 मिलियन राउंड (जिसमें कंपनी यूनिकॉर्न बनी थी)
  • मार्च 2025 में $20 मिलियन का निवेश Asper.ai (कंज़्यूमर गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग के लिए AI प्लेटफॉर्म) में किया गया।

🌍 वैश्विक उपस्थिति

Fractal के 5,000+ कर्मचारी दुनिया भर के 18 देशों में कार्यरत हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अमेरिका
  • कनाडा
  • यूके
  • नीदरलैंड
  • यूक्रेन
  • भारत
  • सिंगापुर
  • दक्षिण अफ्रीका
  • यूएई
  • ऑस्ट्रेलिया

इसकी बहु-भाषीय और बहु-सांस्कृतिक टीमें GenAI और डेटा साइंस में लगातार नई खोजों में लगी हुई हैं।


🆚 प्रतिस्पर्धा और चुनौतियाँ

Fractal को वैश्विक स्तर पर IBM, Accenture, Palantir, और Snowflake जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलती है। भारत में यह TCS, Infosys, और Mu Sigma जैसे बड़े डेटा एनालिटिक्स खिलाड़ियों से भी मुकाबला कर रही है। हालांकि, GenAI और डीपटेक में Fractal की विशेषज्ञता उसे विशिष्ट बनाती है।


🔮 निष्कर्ष: IPO से पहले बनी मजबूत ज़मीन

Fractal Analytics ने अपनी सेकेंडरी फंडिंग और मजबूत टेक्नोलॉजिकल पोर्टफोलियो के ज़रिए IPO से पहले एक ठोस आधार बना लिया है। Apax Partners जैसे पुराने निवेशकों की आंशिक एग्ज़िट और नए निवेशकों की एंट्री कंपनी में विश्वास का प्रतीक है।

अब देखना यह होगा कि कंपनी IPO में निवेशकों का कितना ध्यान खींच पाती है और क्या वह AI-ड्रिवन भारत के यूनिकॉर्न क्लब में अगली सफल लिस्टिंग बनती है।

आगे की रणनीति में R&D, वैश्विक विस्तार और जनरेटिव AI को प्राथमिकता मिलने वाली है — जो आने वाले समय में Fractal को वैश्विक AI इनोवेशन लीडर के रूप में स्थापित कर सकती है।

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📉 Ola Electric की कमाई में 50% की भारी गिरावट,

ola electric

भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी Ola Electric के लिए वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1 FY26) झटका देने वाली रही है। कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 50% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि घाटा 23.3% बढ़ गया है। ये आंकड़े Ola Electric के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर पेश किए गए कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट से सामने आए हैं।


📊 Ola Electric का कमजोर तिमाही प्रदर्शन

Ola Electric का रेवेन्यू Q1 FY25 में ₹1,644 करोड़ था, जो Q1 FY26 में घटकर ₹828 करोड़ रह गया। जब कंपनी की अन्य आय (बैटरी और ऑटोमोबाइल संबंधित) को भी जोड़ा जाए, तब कुल रेवेन्यू ₹896 करोड़ बनता है। लेकिन ये भी पिछले साल की इसी तिमाही के ₹1,718 करोड़ से 47.8% की गिरावट दर्शाता है।

📌 Ola Electric का मुख्य रेवेन्यू स्रोत अब भी इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री ही है, जबकि बैटरियों की बिक्री से सिर्फ मामूली आय हुई है।


💸 बढ़ता खर्च और घाटा

कंपनी का कुल खर्च Q1 FY26 में ₹1,065 करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें से सबसे बड़ा हिस्सा यानी ₹614 करोड़ (58%) केवल प्रोक्योरमेंट कॉस्ट में गया है। इसके अलावा कर्मचारियों के लाभ, तकनीकी सहयोग, ब्रांडिंग और विज्ञापन जैसे मदों में खर्च में भी इजाफा हुआ।

इससे Ola Electric का शुद्ध घाटा बढ़कर ₹428 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह घाटा ₹347 करोड़ था।

हालांकि, यदि तिमाही-दर-तिमाही तुलना की जाए (Q4 FY25 की तुलना में), तो घाटा 50.8% कम हुआ है, और रेवेन्यू में 35% की बढ़त देखी गई है। यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है कि कंपनी ने अपने खर्चों पर कुछ हद तक नियंत्रण पाने की कोशिश की है।


📉 शेयर बाजार में गिरावट, 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर

Ola Electric के कमजोर प्रदर्शन का असर इसके शेयर बाजार मूल्यांकन पर भी साफ दिखा:

  • 🟡 सोमवार सुबह 11:25 बजे, कंपनी के शेयर की कीमत ₹39.95 पर ट्रेड कर रही थी।
  • 🔻 यह कंपनी का 52-हफ्तों का सबसे निचला स्तर है।
  • 🏦 मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹17,612 करोड़ (लगभग $2.1 बिलियन) तक गिर गया है।
  • 📉 यह अगस्त 2024 में ₹67,000 करोड़ ($8.1 बिलियन) के उच्चतम मूल्यांकन से 75.6% की गिरावट है।

🛵 Ola Electric का मुख्य व्यवसाय

Ola Electric ने भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में एक आक्रामक शुरुआत की थी। इसके स्कूटर मॉडल्स जैसे S1 और S1 Pro ने मार्केट में हलचल मचाई थी। लेकिन प्रोडक्शन, बैटरी क्वालिटी, डिलीवरी में देरी और सर्विसिंग से जुड़े मुद्दों के कारण कंपनी को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा।

हाल ही में कंपनी ने IPO की तैयारी के तहत भी कई पहल की हैं, लेकिन इस गिरती वित्तीय स्थिति से उसके सार्वजनिक पेशकश (IPO) की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।


📅 पिछली कुछ प्रमुख घटनाएं

  • FY25 Q4 में, Ola Electric का घाटा ₹870 करोड़ के आस-पास था, जो Q1 FY26 में घटकर ₹428 करोड़ हुआ — यह एक तिमाही सुधार की ओर इशारा करता है।
  • कंपनी ने हाल ही में अपने बैटरी और कंपोनेंट यूनिट में निवेश बढ़ाया है, जिससे लंबी अवधि में लागत कम करने की उम्मीद है।
  • Ola ने डीलरशिप मॉडल को अपनाने का भी ऐलान किया है, जिससे बिक्री और सर्विसिंग नेटवर्क को मजबूती मिल सके।

🤔 अब आगे क्या?

कंपनी के ताजा नतीजे यह दर्शाते हैं कि Ola Electric को अब केवल बिक्री नहीं, मुनाफे पर भी ध्यान देना होगा। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि Ola को अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कस्टमर एक्सपीरियंस दोनों में सुधार लाना होगा।

कंपनी को यदि भविष्य में IPO की योजना सफल बनानी है, तो उसे अपनी वित्तीय स्थिति को स्थिर करने की जरूरत होगी। साथ ही, प्रतियोगी कंपनियों जैसे Ather Energy, TVS iQube, और Bajaj Chetak से मिल रही प्रतिस्पर्धा भी Ola की राह मुश्किल बना रही है।


📝 निष्कर्ष

Ola Electric की FY26 की पहली तिमाही उसके लिए चिंता का कारण बनकर आई है:

  • रेवेन्यू में लगभग 50% की गिरावट
  • घाटा 23.3% तक बढ़ा
  • शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों का भरोसा कमजोर।

हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही सुधार संकेत देता है कि Ola Electric ने अपने अंदर संभावना की कुछ चिंगारी बचा रखी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में इस गिरावट के ग्राफ को ऊपर की ओर मोड़ पाती है या नहीं।

📍 ऐसे और स्टार्टअप्स, EV, और फंडिंग से जुड़े अपडेट्स के लिए पढ़ते रहिए
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🧳 EaseMyTrip के को-फाउंडर Prashant Pitti ने गिरवी रखे 9 करोड़ शेयर,

EaseMyTrip

भारत की प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी EaseMyTrip के को-फाउंडर और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रशांत पिट्टी (Prashant Pitti) ने अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा Motilal Oswal Financial Services के पास गिरवी रखा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई हालिया रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, पिट्टी ने 9 करोड़ शेयर गिरवी रखे हैं।


📌 गिरवी रखे गए शेयर: आंकड़े और कीमत

EaseMyTrip की कुल इक्विटी के अनुसार, यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का करीब 2.54% है।
➡️ मौजूदा शेयर प्राइस के अनुसार, गिरवी रखे गए इन शेयरों की कुल कीमत लगभग ₹94.5 करोड़ आंकी गई है।

इस गिरवीकरण की तारीख 26 जून, 2025 बताई गई है और दस्तावेज़ों में इसे “व्यक्तिगत उपयोग के लिए” बताया गया है। हालांकि, व्यक्तिगत उपयोग का उद्देश्य साफ नहीं किया गया है।


😟 निवेशकों की चिंता: लिक्विडिटी और स्थिरता पर सवाल

इस तरह की प्रवर्तक (promoter) द्वारा बड़ी मात्रा में हिस्सेदारी गिरवी रखना निवेशकों के बीच अक्सर लिक्विडिटी संकट और भविष्य की हिस्सेदारी स्थिरता को लेकर चिंता पैदा करता है।

ऐसे कदम यह संकेत देते हैं कि प्रवर्तक को निजी फंडिंग की जरूरत है या फिर किसी अन्य व्यक्तिगत परियोजना के लिए पूंजी जुटाई जा रही है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।


🧹 हालिया विवाद: Mahadev Betting App से किया था इंकार

EaseMyTrip हाल ही में एक और विवाद में भी घिर गई थी, जब अप्रैल 2025 में Mahadev Betting App मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई जगहों पर छापे मारे।

➡️ इस दौरान, EaseMyTrip का नाम भी अटकलों में आया, जिसके बाद कंपनी ने स्पष्ट रूप से किसी भी सट्टेबाजी ऐप से संबंध न होने की बात कही और कहा कि वह पूरी तरह से एथिकल बिज़नेस प्रैक्टिस के प्रति प्रतिबद्ध है।

EaseMyTrip ने यह भी कहा था कि वह अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है


📉 वित्तीय प्रदर्शन: FY25 में मामूली गिरावट

EaseMyTrip का वित्तीय वर्ष 2025 (FY25) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा, लेकिन चौथी तिमाही (Q4FY25) में कंपनी की राजस्व में हल्की गिरावट देखी गई:

  • 🔹 Q4 FY25 राजस्व: ₹139 करोड़
  • 🔹 Q4 FY24 राजस्व: ₹164 करोड़
  • 🔹 पूरे FY25 का परिचालन राजस्व: ₹587 करोड़
  • 🔹 FY25 में प्री-टैक्स लाभ: ₹143 करोड़

यह आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी का कोर बिज़नेस अभी भी संतुलित स्थिति में है, लेकिन ग्रोथ की गति थोड़ी धीमी रही है।


📈 शेयर की मौजूदा स्थिति

EaseMyTrip के शेयर आज (सुबह 10:53 बजे तक) ₹10.43 पर ट्रेड हो रहे थे। कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) लगभग ₹3,696 करोड़ (लगभग $435 मिलियन) बताया गया है।


🧠 विशेषज्ञों की राय: क्या हो सकते हैं संकेत?

मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि:

  • शेयर गिरवी रखने का उद्देश्य अगर निजी निवेश या व्यक्तिगत ऋण निपटान है, तो यह कंपनी की कोर फाइनेंशियल हेल्थ पर असर नहीं डालता
  • लेकिन अगर इस कदम के पीछे कोई व्यापक पूंजी संकट है या प्रवर्तक के पास सीमित नकदी है, तो यह संकेत हो सकता है कि कंपनी के भविष्य की योजनाओं में कई वित्तीय चुनौतियाँ हो सकती हैं।

🧳 EaseMyTrip: एक नज़र में

बिंदुविवरण
🏢 कंपनीEaseMyTrip
🧑‍💼 को-फाउंडरप्रशांत पिट्टी
💰 गिरवी शेयर9 करोड़ (₹94.5 करोड़ मूल्य)
🏦 गिरवी के लिए संस्थानMotilal Oswal Financial Services
📅 तारीख26 जून, 2025
🎯 उद्देश्यव्यक्तिगत उपयोग (विवरण नहीं दिया गया)
📉 Q4 FY25 राजस्व₹139 करोड़
💼 FY25 प्री-टैक्स लाभ₹143 करोड़
📊 शेयर प्राइस₹10.43
💸 मार्केट कैप₹3,696 करोड़

🔮 आगे क्या?

EaseMyTrip की अगली तिमाही रिपोर्ट और कंपनी की रणनीतिक घोषणाएं यह तय करेंगी कि यह शेयर गिरवी रखने की घटना:

  • सिर्फ एक व्यक्तिगत वित्तीय कदम है
    या
  • कोई बड़ा रणनीतिक बदलाव या वित्तीय दबाव का संकेत है।

अगर EaseMyTrip अपने ऑपरेशनल प्रदर्शन को स्थिर बनाए रखती है और पारदर्शिता से कार्य करती है, तो निवेशकों का विश्वास बना रहेगा।


📢 निष्कर्ष
EaseMyTrip के को-फाउंडर द्वारा शेयर गिरवी रखने की यह खबर निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत हो सकती है, लेकिन जब तक कंपनी के ऑपरेशनल आंकड़े और कॉर्पोरेट गवर्नेंस संतुलित बने रहते हैं, तब तक कोई तत्काल खतरा नहीं दिखता।

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🕶️ Lenskart का बड़ा कदम स्मार्ट ग्लास की दुनिया में उतरा,

Lenskart

भारत की अग्रणी आईवियर ब्रांड Lenskart ने मुंबई आधारित डीप-टेक स्टार्टअप Ajna Lens में रणनीतिक निवेश की घोषणा की है। यह कदम कंपनी के AI-सक्षम स्मार्ट ग्लास सेगमेंट में कदम बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रयास माना जा रहा है।

Ajna Lens को 2023 में CES Innovation Award से सम्मानित किया गया था, उसके अत्याधुनिक AjnaXR मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट के लिए, जिसे इंडस्ट्री का सबसे एडवांस XR डिवाइस कहा गया।


🤝 साझेदारी का मकसद: स्मार्ट ग्लास को बनाना आम आदमी के लिए सुलभ

Lenskart का कहना है कि यह निवेश और साझेदारी, कंपनी की स्मार्ट ग्लास डिवाइसेज़ को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है। Lenskart अपने फ्रेम डिज़ाइन और इंजीनियरिंग में अनुभव के साथ-साथ टेक्नोलॉजी-फर्स्ट अप्रोच को मिलाकर स्मार्ट ग्लास तैयार करना चाहता है जो यूज़र्स की लाइफस्टाइल जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करें।

Lenskart के पास आज 14 देशों में ओम्नीचैनल उपस्थिति है, जिससे उसे ग्लोबल उपभोक्ता इनसाइट्स मिलते हैं। कंपनी इन्हीं डेटा पॉइंट्स के सहारे अपने उत्पाद विकास और नवाचार रणनीति को मजबूत कर रही है।


📢 Peyush Bansal का बयान

Lenskart के सह-संस्थापक और सीईओ Peyush Bansal ने इस डील को लेकर कहा:

“हम पिछले कुछ वर्षों से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अपने ग्राहकों को एक अनोखा और उपयोगी आईवियर अनुभव देने पर काम कर रहे हैं। यह निवेश हमारे स्मार्ट ग्लास सफर का अगला अध्याय है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2024 में Phonic (ऑडियो ग्लास) के लॉन्च के साथ हुई थी। Smart Glass सेगमेंट में तेजी से हो रही ग्रोथ को देखते हुए, Ajna Lens के साथ यह साझेदारी हमें इस क्षेत्र में नवाचार को तेज़ करने में मदद करेगी।”


🧠 Ajna Lens: टेक्नोलॉजी से इंसानी बुद्धि को दे रहा विस्तार

2014 में स्थापित Ajna Lens एक Deep-Tech स्टार्टअप है, जो स्पेशियल कंप्यूटिंग, AI विज़न और एक कम्प्लीट XR स्टैक के जरिए इमर्सिव टेक्नोलॉजी डेवलप करता है।

Ajna Lens का उद्देश्य है – फिजिकल और डिजिटल दुनिया के बीच की खाई को भरना, ताकि यूज़र्स इंट्यूटिव और प्रभावशाली तरीके से डिजिटल कंटेंट के साथ इंटरैक्ट कर सकें।

Ajna Lens खास तौर पर डिफेंस, एजुकेशन और एंटरप्राइज जैसे क्षेत्रों में अपने प्रोडक्ट्स की पेशकश करता है। इसके स्मार्ट XR ग्लासेस पहले ही रक्षा मंत्रालय और कुछ बड़े कॉर्पोरेट्स द्वारा अपनाए जा चुके हैं।


👓 Lenskart का Smart Glass सफर

Lenskart ने दिसंबर 2024 में अपने पहले ऑडियो स्मार्ट ग्लास ‘Phonic’ को लॉन्च किया था, जो ब्लूटूथ इनेबल्ड थे और कॉलिंग, म्यूजिक सुनने, वॉयस असिस्टेंट सपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस थे।

अब Ajna Lens की टेक्नोलॉजी और Lenskart की डिजाइन विशेषज्ञता मिलकर AI-सक्षम, विज़ुअल एक्सपीरियंस पर केंद्रित अगली पीढ़ी के स्मार्ट ग्लास तैयार करने की दिशा में काम करेंगी।


🌍 ग्लोबल रणनीति: भारत से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक

Lenskart और Ajna Lens की यह साझेदारी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगी। Lenskart अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए इन स्मार्ट ग्लासेस को दुबई, सिंगापुर, अमेरिका और यूके जैसे बाजारों में ले जाना चाहता है।

Ajna Lens की मिलिट्री-ग्रेड तकनीक और Lenskart की कंज़्यूमर इंटरफेस और मार्केटिंग एक्सपर्टीज मिलकर आने वाले वर्षों में XR सेगमेंट में एक नया ब्रांड स्टैंडर्ड स्थापित कर सकते हैं।


🔍 एक्सपर्ट व्यू: स्मार्ट ग्लास इंडस्ट्री में भारत का उभरता रोल

स्मार्ट ग्लास और XR टेक्नोलॉजी का उपयोग अब केवल गेमिंग या मेटावर्स तक सीमित नहीं है। अब ये एजुकेशन, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग, और रिटेल जैसे क्षेत्रों में तेजी से अपनाए जा रहे हैं।

भारत में भी इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स और कॉरपोरेट्स तेजी से निवेश कर रहे हैं। Lenskart और Ajna Lens की यह साझेदारी भारत को इस नई तकनीकी क्रांति में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकती है।


🚀 आगे की दिशा: क्या उम्मीद कर सकते हैं?

  • 📅 2025 के अंत तक Lenskart-Ajna Lens साझेदारी से पहला AI-सक्षम स्मार्ट ग्लास लॉन्च हो सकता है
  • 📲 वॉयस, विज़न और AR इंटीग्रेशन के साथ एक कंज़्यूमर-फ्रेंडली XR डिवाइस की उम्मीद
  • 🛒 लेंसकार्ट के स्टोर्स, वेबसाइट और ऐप के जरिए इन प्रोडक्ट्स की बिक्री
  • 🧑‍🎓 एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर के लिए कस्टमाइज़्ड वर्ज़न भी संभावित

📌 निष्कर्ष

Lenskart और Ajna Lens की साझेदारी सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक तकनीकी युग की शुरुआत है जहां चश्मा सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि जानकारी एक्सेस करने और डिजिटल दुनिया से जुड़ने का माध्यम बन जाएगा।

यह डील भारत की Deep-Tech और Consumer-Tech स्टार्टअप्स के बीच संभावनाओं की झलक देती है, और दिखाती है कि भारत अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार में अग्रणी खिलाड़ी बनने की ओर बढ़ रहा है।

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