💼 Darwinbox ने तीसरी बार किया ESOP बायबैक,

Darwinbox

हैदराबाद स्थित HR टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म Darwinbox ने अपने तीसरे ESOP बायबैक कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस बार कंपनी ने ₹86 करोड़ (लगभग $10 मिलियन) के शेयर वापस खरीदे हैं, जिससे 350 से अधिक कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है। यह बायबैक कार्यक्रम Darwinbox के पिछले चार वर्षों में तीसरा ऐसा प्रयास है, जो कर्मचारियों को उनके योगदान का प्रतिफल देने के लिए शुरू किया गया था।


🌏 वैश्विक स्तर पर फैला नेटवर्क

Darwinbox का संचालन अब भारत सहित 11 देशों में फैला हुआ है, जिनमें दक्षिण पूर्व एशिया, उत्तर अमेरिका और मध्य पूर्व प्रमुख हैं। कंपनी के अनुसार, इस ESOP बायबैक से इन सभी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को लाभ मिला है।


💰 निवेश और यूनिकॉर्न स्टेटस

इस ESOP बायबैक से कुछ ही समय पहले, Darwinbox ने मार्च 2025 में Partners Group और KKR के नेतृत्व में एक बड़े $140 मिलियन के फंडिंग राउंड को पूरा किया था। Darwinbox ने अब तक कुल $255 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है।

जनवरी 2022 में सीरीज D राउंड के दौरान Darwinbox ने $72 मिलियन जुटाए थे, जिससे वह भारत की HR SaaS यूनिकॉर्न कंपनियों में शामिल हो गई थी।


🤖 AI आधारित HR सॉल्यूशन

Darwinbox ने हाल ही में एक AI-पावर्ड प्रोडक्ट सूट लॉन्च किया है, जो टैलेंट एक्विजिशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, कर्मचारी जुड़ाव और प्रदर्शन मूल्यांकन जैसे प्रमुख HR कार्यों को कवर करता है। इसके अलावा, कंपनी अब AI-ड्रिवन एजेंट्स विकसित कर रही है जो HR पेशेवरों को निर्णय लेने और ऑपरेशन्स को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

Darwinbox का दावा है कि वह 1,000 से अधिक कंपनियों में 40 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा दे रहा है।


📊 राजस्व और वित्तीय प्रदर्शन

TheKredible के अनुसार, Darwinbox ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में ₹392.95 करोड़ का राजस्व अर्जित किया था, जबकि कंपनी को ₹191.82 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। हालांकि, कंपनी के लगातार विस्तार और उत्पाद नवाचार को देखते हुए आने वाले वर्षों में सुधार की उम्मीद की जा रही है।


📍 विस्तार की रणनीति

Darwinbox की मौजूदगी अब इंडोनेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, मलेशिया, वियतनाम और थाईलैंड तक फैल गई है। इसके अलावा, कंपनी ने सऊदी अरब, UAE और अमेरिका में भी अपने कार्यालय स्थापित किए हैं। कंपनी का मुख्य राजस्व स्रोत भारत और दक्षिण पूर्व एशिया है, जहां डिजिटल HR समाधान की मांग तेजी से बढ़ रही है।


📈 ESOP बायबैक की बढ़ती प्रवृत्ति

2025 में Darwinbox के अलावा कुछ अन्य स्टार्टअप्स जैसे कि Rapido, Univest, Deserve और Even Healthcare ने भी कुल $17 मिलियन के ESOP बायबैक, लिक्विडिटी और पेआउट कार्यक्रम लागू किए हैं। वहीं 2024 में 20 से अधिक स्टार्टअप्स ने $200 मिलियन के ESOP बायबैक किए।

2023 में ESOP बायबैक की कुल राशि $802 मिलियन थी, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इसकी तुलना में 2021 में $440 मिलियन और 2022 में $200 मिलियन के बायबैक हुए थे।


📜 SEBI की नई ESOP नीतियां

हाल ही में, भारतीय बाजार नियामक SEBI ने स्टार्टअप्स के IPO में ESOP से जुड़ी कुछ शर्तों को आसान कर दिया है। नई नीति के तहत, अब स्टार्टअप संस्थापक DRHP दाखिल करने से एक साल पहले तक दिए गए ESOPs को बनाए रख सकते हैं और IPO के समय उपयोग भी कर सकते हैं

यह कदम उन संस्थापकों के लिए बड़ा प्रोत्साहन है जो कंपनी की लिस्टिंग के दौरान स्वामित्व बनाए रखना चाहते हैं।


🗣️ संस्थापकों का नजरिया

Darwinbox के सह-संस्थापकों ने बयान में कहा:

“हमारे कर्मचारियों ने Darwinbox को एक वैश्विक HR SaaS ब्रांड बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह ESOP बायबैक हमारी उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि हम उनके योगदान को न केवल मान्यता देना चाहते हैं, बल्कि उसे वित्तीय रूप से लाभदायक भी बनाना चाहते हैं।”


✅ निष्कर्ष

Darwinbox का यह तीसरा ESOP बायबैक इस बात का प्रमाण है कि कंपनी अपने कर्मचारियों की सफलता में हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहती है। इससे न केवल कर्मचारियों का विश्वास बढ़ता है, बल्कि कंपनी की ब्रांड वैल्यू और प्रतिभा को बनाए रखने की क्षमता भी मजबूत होती है।

इसके अलावा, तेजी से बदलते HR टेक्नोलॉजी परिदृश्य में Darwinbox का AI-ड्रिवन नवाचार और वैश्विक विस्तार उसे प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाए हुए है।


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🏠 Urban Company की दमदार वापसी

Urban Company

📊 38.2% की सालाना वृद्धि, ₹3,115 करोड़ का लेनदेन मूल्य और ₹28.5 करोड़ का प्री-टैक्स मुनाफा — Urban Company ने वित्त वर्ष 2025 में जबरदस्त प्रदर्शन किया है।


🧾 कंपनी की सालाना रिपोर्ट से खुलासे

होम सर्विसेज मार्केटप्लेस Urban Company ने FY25 (मार्च 2025 में समाप्त वित्त वर्ष) में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹1,144 करोड़ की परिचालन आय दर्ज की, जो कि FY24 की तुलना में 38.2% अधिक है। इससे भी बड़ी बात यह रही कि कंपनी ने घाटे से उबरते हुए प्री-टैक्स मुनाफा ₹28.5 करोड़ कमाया, जबकि पिछले साल ₹92.7 करोड़ का घाटा था।


🔧 6.8 मिलियन सेवाएं और 17 सुपर कैटेगरी

Urban Company ने 51 शहरों में 6.8 मिलियन ग्राहक लेन-देन पूरे किए, जो कि 17 प्रमुख श्रेणियों में फैले हुए थे। इनमें शामिल हैं:

  • स्पा और सैलून सेवाएं
  • एसी रिपेयर
  • इलेक्ट्रिकल वर्क
  • पेंटिंग व दीवार पैनलिंग
  • पेस्ट कंट्रोल
  • और अन्य घरेलू सेवाएं

कंपनी न केवल सेवाएं देती है, बल्कि अपने ब्रांडेड वॉटर प्यूरिफायर और अन्य उत्पाद भी बेचती है, जिनसे अतिरिक्त आय होती है।


💰 राजस्व का ब्योरा

Platform Services अब भी Urban Company की सबसे बड़ी कमाई का स्रोत है, जिससे कंपनी को ₹742 करोड़ (कुल आय का 64.8%) की आमदनी हुई — यह FY24 की तुलना में 32.5% अधिक है।

कस्टमर मेंबरशिप से आय में हल्की वृद्धि (7.7%) देखी गई, जो ₹98 करोड़ तक पहुंची।

🧪 वॉटर प्यूरिफायर से 300% की छलांग

Urban Company के स्वदेशी वॉटर प्यूरिफायर उत्पाद से 300% की बढ़त हुई। FY24 में ₹29 करोड़ की तुलना में FY25 में यह आय ₹116 करोड़ पहुंच गई। इसके अलावा, सर्विस प्रोफेशनल्स को बेचे गए उत्पादों से ₹188 करोड़ की आय हुई।


🌍 भारत और विदेश — दोनों बाजारों में उपस्थिति

Urban Company भारत के अलावा UAE, सिंगापुर और सऊदी अरब (KSA) में भी काम करती है। FY25 में:

  • भारत से आय: ₹997 करोड़
  • अंतरराष्ट्रीय आय: ₹147 करोड़

कंपनी ने इसके अतिरिक्त म्यूचुअल फंड से मुनाफा व ब्याज से ₹117 करोड़ भी कमाए, जिससे कुल वार्षिक आय ₹1,261 करोड़ हो गई — FY24 में यह ₹928 करोड़ थी।


💼 खर्चों पर सख्त नियंत्रण

  • कर्मचारी लाभ: FY25 में कंपनी का सबसे बड़ा खर्च बना, जो ₹350 करोड़ (28.6% खर्च) रहा। इसमें ₹72.5 करोड़ का ESOP (स्टॉक विकल्प) खर्च शामिल है।
  • विज्ञापन व प्रचार खर्च: FY24 की तुलना में स्थिर रहा — ₹207 करोड़।

बाकी खर्चों में मटेरियल, प्रोफेशनल इंसेंटिव, लॉजिस्टिक्स, पेमेंट गेटवे शुल्क, आउटसोर्सिंग आदि शामिल रहे, जिनसे कुल खर्च FY25 में बढ़कर ₹1,223 करोड़ हो गया — FY24 में यह ₹1,021 करोड़ था।


📈 लाभ और हानि: कौनसा सेगमेंट कितना मजबूत?

  • India Consumer Services: ₹113 करोड़ का मुनाफा
  • वॉटर प्यूरिफायर बिजनेस: ₹38.7 करोड़ का घाटा
  • अंतरराष्ट्रीय परिचालन: ₹33.7 करोड़ का घाटा

इस तरह कंपनी की कुल मुनाफा स्थिति सकारात्मक बनी, खासतौर पर भारतीय बाजार की मजबूत स्थिति की बदौलत।


🔍 वित्तीय संकेतक (FY25):

संकेतकआंकड़ा
कुल राजस्व₹1,261 करोड़
प्री-टैक्स लाभ₹28.5 करोड़
ROCE (रेटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड)2.46%
EBITDA मार्जिन6.68%

🔮 आगे की राह

Urban Company का यह ट्रांसफॉर्मेशन — घाटे से मुनाफे की ओर — स्टार्टअप इकॉनॉमी के लिए प्रेरणादायक है। कंपनी ने न केवल अपने राजस्व स्रोतों में विविधता लाई, बल्कि खर्चों पर नियंत्रण रखते हुए निरंतर वृद्धि भी दिखाई।

भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार, नए प्रोडक्ट इनोवेशन और टेक्नोलॉजी ड्रिवन होम सर्विस मॉडल के चलते Urban Company आने वाले वर्षों में भी घरेलू सेवा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बना रह सकता है।


📌 निष्कर्ष:
Urban Company ने FY25 में जो फाइनेंशियल बेंचमार्क सेट किए हैं, वे यह दर्शाते हैं कि प्रॉडक्ट इनोवेशन, सेवा की गुणवत्ता और खर्च प्रबंधन के दम पर किसी भी होम सर्विस स्टार्टअप को लाभदायक और स्केलेबल बनाया जा सकता है। अब सभी की निगाहें कंपनी के अगले वित्तीय वर्ष और संभवतः IPO की दिशा में बढ़ते कदमों पर रहेंगी।


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👓 Lenskart की वैल्यूएशन पहुंची $6.1 बिलियन,

Lenskart

भारत के सबसे बड़े ओमनीचैनल आईवियर ब्रांड Lenskart को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Fidelity ने Lenskart की वैल्यूएशन को $6.1 बिलियन (लगभग ₹50,800 करोड़) तक अपडेट किया है। यह आंकड़ा Fidelity की अप्रैल 2025 की पोर्टफोलियो होल्डिंग रिपोर्ट में सामने आया है।

यह अपडेट ऐसे समय आया है जब कंपनी IPO की तैयारियों में जुटी है और इसे लेकर बाजार में खासा उत्साह भी देखा जा रहा है।


📈 नवंबर में थी $5.6 बिलियन की वैल्यूएशन

Economic Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, Fidelity ने नवंबर 2024 में Lenskart की वैल्यूएशन $5.6 बिलियन बताई थी। लेकिन अब यह आंकड़ा $500 मिलियन बढ़कर $6.1 बिलियन पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि Lenskart के प्रदर्शन और ग्रोथ पोटेंशियल को लेकर निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।


💰 अब तक जुटा चुका है $1 बिलियन से ज्यादा

2024 की पहली छमाही में, Lenskart ने दो प्रमुख निवेश राउंड्स में $220 मिलियन जुटाए थे:

  • $200 मिलियन सेकेंडरी राउंड के ज़रिए, जिसमें Fidelity ने भी हिस्सा लिया।
  • इसके बाद $20 मिलियन का एक और निवेश हुआ, जिसे Lenskart के CEO Peyush Bansal ने लीड किया।

इन डील्स के बाद कंपनी की वैल्यूएशन $5 बिलियन तक पहुंची थी, और अब Fidelity के मुताबिक यह आंकड़ा $6.1 बिलियन को पार कर गया है।


🚀 IPO की दिशा में तेजी से कदम

Lenskart की यह वैल्यूएशन अपडेट ऐसे समय में आई है जब कंपनी $10 बिलियन वैल्यूएशन पर $1 बिलियन का IPO लाने की योजना बना रही है।

इसके संकेत हाल ही में कंपनी द्वारा किए गए कुछ अहम बदलावों से भी मिलते हैं:

  • पिछले हफ्ते, Lenskart ने अपनी होल्डिंग एंटिटी को Private Limited से Public Limited में बदल दिया है।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस महीने के अंत तक SEBI के पास अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) गोपनीय रूप से फाइल कर सकती है।
  • इससे साफ है कि Lenskart जल्द ही पब्लिक मार्केट्स में अपनी लिस्टिंग की ओर बढ़ रहा है।

📊 वित्तीय स्थिति: घाटा घटा, रेवेन्यू बढ़ा

वित्तीय वर्ष 2023–24 (FY24) में Lenskart का प्रदर्शन बेहतर रहा:

  • कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹5,427.7 करोड़ रहा, जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 43% अधिक है।
  • वहीं घाटे की बात करें तो FY23 में ₹63 करोड़ का घाटा था, जो FY24 में घटकर सिर्फ ₹10 करोड़ रह गया — यानी 84% की गिरावट

FY25 के वित्तीय परिणाम अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन कंपनी की दिशा और गति दोनों ही सकारात्मक नजर आ रहे हैं।


🛰️ GeoIQ का अधिग्रहण कर सकती है कंपनी

Lenskart अब एक और रणनीतिक कदम की ओर बढ़ रही है — लोकेशन इंटेलिजेंस स्टार्टअप GeoIQ के अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रही है। GeoIQ, डेटा एनालिटिक्स और लोकेशन बेस्ड AI मॉडल्स के लिए जानी जाती है। अगर यह डील पूरी होती है, तो Lenskart अपने स्टोर एक्सपेंशन, सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन और ग्राहक टारगेटिंग में और मजबूती पा सकती है।


🔍 Lenskart का बिजनेस मॉडल

Lenskart भारत में चश्मों के बाज़ार में एक ओमनीचैनल अप्रोच पर काम करता है:

  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (वेबसाइट और ऐप)
  • ऑफलाइन स्टोर्स (1000+ से ज्यादा रिटेल स्टोर्स)
  • होम ट्रायल जैसी इनोवेटिव सेवाएं

इसके अलावा, कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिलीवरी तक की पूरी चेन को टेक्नोलॉजी से जोड़ रखा है।


🌍 ग्लोबल विस्तार की योजना

Lenskart ने पिछले कुछ वर्षों में भारत के बाहर भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं:

  • सिंगापुर, मिडिल ईस्ट, यूएस जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में विस्तार
  • वैश्विक ब्रांड Owndays का अधिग्रहण (2022)
  • अब, IPO से प्राप्त राशि का एक हिस्सा कंपनी इंटरनेशनल ग्रोथ पर भी लगा सकती है

📌 निष्कर्ष: क्या Lenskart बनेगा अगला बड़ा स्टॉक मार्केट स्टार?

Fidelity द्वारा वैल्यूएशन बढ़ाना यह दिखाता है कि Lenskart न केवल भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में बल्कि वैश्विक निवेशकों के बीच भी एक विश्वसनीय और हाई-पोटेंशियल ब्रांड बन चुका है।

IPO के ज़रिए यह कंपनी ना सिर्फ पूंजी जुटाएगी, बल्कि इसे ब्रांड एवेयरनेस, ग्लोबल एक्सपेंशन, और टेक्नोलॉजिकल अपग्रेड में भी मदद मिलेगी।

क्या यह IPO भारतीय निवेशकों के लिए Zomato या Nykaa जैसा मौका बन सकता है? यह तो आने वाले महीनों में ही साफ होगा।


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✍️ लेखक: FundingRaised हिंदी टीम

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💼 Paytm ने ₹215 करोड़ के ESOP ग्रांट्स किए जारी,

Paytm

भारत के प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म Paytm ने अपने कर्मचारियों को ₹215 करोड़ मूल्य के नए ESOP (Employee Stock Option Plan) ग्रांट्स देने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी अपने संचालन में स्थिरता और वित्तीय मजबूती लाने की दिशा में सक्रिय है।

वहीं दूसरी ओर, Mobikwik ने भी अपने कर्मचारियों को ₹9 करोड़ मूल्य के स्टॉक विकल्प दिए हैं, जिससे फिनटेक सेक्टर में टैलेंट रिटेंशन और मोटिवेशन की रणनीति और मजबूत होती दिख रही है।


🧾 क्या है ESOP और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

ESOP (Employee Stock Option Plan) वह योजना होती है जिसके अंतर्गत कंपनी अपने कर्मचारियों को एक निश्चित मूल्य पर अपने शेयर खरीदने का अधिकार देती है। यह:

  • कर्मचारियों को कंपनी से जोड़ने में सहायक होता है
  • प्रदर्शन को बेहतर करने की प्रेरणा देता है
  • कंपनी के विकास में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करता है

💰 Paytm ने ₹215 करोड़ के ESOP कैसे बांटे?

Paytm की पैरेंट कंपनी One97 Communications ने ESOP 2019 योजना के तहत 23.7 लाख स्टॉक विकल्प आवंटित किए हैं। एनएसई (NSE) में दी गई सूचना के अनुसार, इन शेयर विकल्पों की कुल बाजार कीमत ₹906 प्रति शेयर के हिसाब से लगभग ₹215 करोड़ बैठती है।

प्रत्येक स्टॉक ऑप्शन का एक्सरसाइज़ प्राइस ₹9 रखा गया है, यानी कर्मचारी ₹9 प्रति शेयर में यह विकल्प एक्सरसाइज़ कर सकते हैं।


🔁 कुछ विकल्प हुए लैप्स

Paytm ने यह भी खुलासा किया है कि ESOP 2019 योजना के अंतर्गत 3,46,746 विकल्प लैप्स (लुप्त) हो चुके हैं। यह आम तौर पर तब होता है जब कर्मचारी तय समय सीमा में विकल्प का उपयोग नहीं करते या कंपनी छोड़ देते हैं।


🧑‍💼 विजय शेखर शर्मा ने त्यागे ₹1,800 करोड़ के शेयर

इस ESOP घोषणा से कुछ महीने पहले ही Paytm के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने स्वेच्छा से 2.1 करोड़ शेयर (₹1,800 करोड़ मूल्य) कंपनी को लौटा दिए थे। इसका उद्देश्य कंपनी की लॉन्ग टर्म ग्रोथ और शेयरहोल्डर वैल्यू को मजबूत करना था।


🇨🇳 Ant Group ने बेची Paytm में 4% हिस्सेदारी

पिछले महीने चीन की अलीबाबा समूह से जुड़ी फाइनेंशियल इकाई Ant Group ने भी Paytm में अपनी लगभग 4% हिस्सेदारी ₹2,103 करोड़ में बेच दी। इससे यह संकेत मिला कि विदेशी निवेशक अब भारतीय फिनटेक बाजार में धीरे-धीरे अपने एक्सपोजर को घटा रहे हैं।


📉 Paytm का वित्तीय प्रदर्शन

हालिया तिमाही में Paytm के प्रदर्शन में मिश्रित परिणाम देखने को मिले:

  • Q4 FY25 में राजस्व ₹1,911 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16% कम है
  • लेकिन कंपनी का घाटा ₹23 करोड़ रह गया, जो 96% की गिरावट है — यह एक सकारात्मक संकेत है

पूरे वित्तीय वर्ष FY25 में:

  • कुल राजस्व: ₹6,900 करोड़
  • कुल घाटा: ₹663 करोड़

👨‍💻 Mobikwik ने भी दिए ESOP

Paytm की ही तरह, Mobikwik ने भी अपने कर्मचारियों को 3.27 लाख स्टॉक विकल्प आवंटित किए हैं। यह ESOP 2014 योजना के तहत हुआ है।

कंपनी के मौजूदा शेयर मूल्य ₹276 के आधार पर इन विकल्पों का कुल मूल्य ₹9 करोड़ बैठता है।


📊 Mobikwik का प्रदर्शन

Mobikwik के तिमाही और वार्षिक प्रदर्शन में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले:

  • Q4 FY25 में राजस्व: ₹268 करोड़
  • घाटा: ₹56 करोड़

पूरे FY25 में:

  • कुल राजस्व: ₹1,192 करोड़
  • घाटा: ₹121 करोड़

🧭 कंपनियों की रणनीति: टैलेंट बनाए रखने की पहल

इन दोनों कंपनियों के ESOP ग्रांट्स यह संकेत देते हैं कि भारतीय फिनटेक कंपनियां अपने कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने और उन्हें लंबी अवधि के लिए प्रेरित करने के लिए एग्रेसिव रणनीतियां अपना रही हैं।

ESOP का उपयोग न सिर्फ कर्मचारियों को कंपनी की ग्रोथ से जोड़ता है, बल्कि उन्हें वेल्थ क्रिएशन का अवसर भी देता है।


🔍 निष्कर्ष

Paytm और Mobikwik जैसे फिनटेक लीडर्स द्वारा कर्मचारियों को दिया गया यह ESOP इंसेंटिव एक ओर जहां मानव संसाधन रणनीति को मजबूत करता है, वहीं दूसरी ओर यह बताता है कि कंपनियां अपनी आंतरिक संरचना को कितना महत्व दे रही हैं।

Paytm ने जहां ₹215 करोड़ के ESOP देकर बड़े स्तर पर कर्मचारियों को जोड़ा है, वहीं Mobikwik ने भी अपने स्केल के अनुसार टैलेंट को मान्यता दी है। यह फिनटेक सेक्टर में एक सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब कंपनियां IPO या मुनाफे की ओर अग्रसर हैं।


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✍️ लेखक: FundingRaised हिंदी टीम

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💼 Inflexor Ventures जल्द ही लॉन्च करेगा ₹1,250 करोड़ का नया फंड 🚀

Inflexor Ventures

हेल्थटेक, EV बैटरी और LLM जैसे हाई-टेक सेक्टर्स में करेगा निवेश

भारत की अग्रणी अर्ली-स्टेज वेंचर कैपिटल फर्म Inflexor Ventures ने अपने Fund III के तहत $150 मिलियन (लगभग ₹1,250 करोड़) जुटाने की योजना बनाई है। कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के अंत तक इस फंड का पहला क्लोज करने की तैयारी में है।

इस फंड का उद्देश्य भारत के नवाचार और गहरे तकनीकी (deeptech) क्षेत्रों में उभरते स्टार्टअप्स को वित्तीय सहयोग प्रदान करना है।


🎯 किन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?

Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, Inflexor Ventures का Fund III उन क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा जो तकनीकी रूप से समृद्ध लेकिन निवेशकों की भीड़ से दूर हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • 🏥 हेल्थकेयर डिवाइसेज़
  • 🔋 इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी टेक्नोलॉजी
  • 🧠 फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs)

इस बदलाव के जरिए कंपनी तेजी से उभरते तकनीकी सेक्टरों में शुरुआती स्तर पर निवेश कर अधिक रिटर्न सुनिश्चित करना चाहती है।


💰 25-27 स्टार्टअप्स में होगा निवेश

Inflexor Ventures का लक्ष्य है कि वह Fund III के जरिए लगभग 25 से 27 स्टार्टअप्स में निवेश करे। यह निवेश मुख्यतः pre-Series A से लेकर Series A स्टेज तक के स्टार्टअप्स में होगा।

निवेश की प्रमुख बातें:

  • 💵 प्रति स्टार्टअप औसत निवेश: $2.5 से $3 मिलियन
  • 📊 हिस्सेदारी: लगभग 15%
  • 🎯 कुल पोर्टफोलियो: फंड III के बाद कंपनी का कुल पोर्टफोलियो 50+ स्टार्टअप्स तक पहुंचने की उम्मीद है।

📦 मौजूदा पोर्टफोलियो में कौन-कौन से स्टार्टअप्स हैं?

Inflexor Ventures के मौजूदा पोर्टफोलियो में कई इनोवेटिव और तेजी से बढ़ते भारतीय स्टार्टअप्स शामिल हैं:

  • ⚙️ Atomberg – स्मार्ट होम उपकरणों का निर्माता
  • 🚀 Bellatrix Aerospace – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप
  • 📊 CredFlow – बिजनेस कैश फ्लो मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म
  • 🌱 Bioprime Agrisolutions – एग्रीटेक और बायोटेक इनोवेशन

Fund III के जरिए ऐसे ही और उच्च तकनीकी समाधानों वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।


📢 Rs 350 करोड़ का ‘Opportunities Fund’ हुआ क्लोज ✅

Inflexor ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की — उसका ₹350 करोड़ का ‘Opportunities Fund’ अब पूरी तरह से क्लोज हो चुका है।

यह फंड Parampara Capital (Inflexor का पहला फंड) के पोर्टफोलियो के अधिग्रहण के जरिए तैयार किया गया, और इसका नेतृत्व किया HDFC Asset Management Company ने।

इससे पहले दौर के निवेशकों को जल्दी लिक्विडिटी मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है।


🧑‍💼 कौन हैं Inflexor Ventures के संस्थापक?

Inflexor Ventures की नींव तीन अनुभवी और दूरदर्शी निवेशकों ने मिलकर रखी:

  • वेंकट वल्लभनेनी (Venkat Vallabhaneni)
  • जतिन देसाई (Jatin Desai)
  • प्रतिप मजूमदार (Pratip Mazumdar)

कंपनी ने अब तक $120 मिलियन से अधिक की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ, 25 से अधिक स्टार्टअप्स में निवेश किया है।


🔍 किन क्षेत्रों में कर चुकी है अब तक निवेश?

Inflexor Ventures की अब तक की निवेश यात्रा काफी विविध रही है। इसके प्रमुख निवेश क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • 🧠 AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता)
  • 🔐 साइबर सुरक्षा (Cybersecurity)
  • 🚀 स्पेसटेक (Space Technology)
  • 🛒 कंज़्यूमर टेक्नोलॉजी (Consumer Tech)
  • ⚙️ डीपटेक इनोवेशन

इस विविध पोर्टफोलियो से साफ है कि कंपनी दीर्घकालिक तकनीकी रुझानों को पहचानने और शुरुआती चरण में निवेश करने में माहिर है।


🔮 भारत में डीपटेक निवेश का भविष्य

भारत में deeptech और frontier tech सेक्टर तेजी से उभर रहे हैं। 5G, EV, बायोटेक, और AI जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता है।

ऐसे में Inflexor जैसा फंड न केवल वित्तीय सहायता देता है, बल्कि स्ट्रैटेजिक गाइडेंस और नेटवर्क सपोर्ट भी उपलब्ध कराता है।


✍️ निष्कर्ष: फोकस्ड इनोवेशन के लिए फंड III तैयार

Inflexor Ventures का नया ₹1,250 करोड़ का फंड भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी राहत और संभावनाओं का संकेत है।

जहां ज्यादातर निवेशक भीड़ वाले कंज़्यूमर सेगमेंट्स पर फोकस कर रहे हैं, वहीं Inflexor उन क्षेत्रों में निवेश कर रहा है जहां तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन की असली ताकत छिपी है।


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🚀 Inflexor Ventures के Fund III से भारत के अगली पीढ़ी के यूनिकॉर्न्स को मिल सकती है नई उड़ान!

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⚡ Ola Electric को तगड़ा झटका: FY25 की चौथी तिमाही में 62% तक गिरी रेवेन्यू, घाटा दोगुना

ola electric

भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी Ola Electric को वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) में तगड़ा झटका लगा है। कंपनी की रेवेन्यू में वर्ष दर वर्ष (YoY) 62% की गिरावट दर्ज की गई, वहीं घाटा 106% तक बढ़ गया है। यह स्थिति साफ तौर पर कंपनी के सामने बढ़ती वित्तीय चुनौतियों को दर्शाती है।


📉 रेवेन्यू में भारी गिरावट

Ola Electric की रेवेन्यू Q4 FY25 में घटकर ₹611 करोड़ रह गई, जो कि एक साल पहले इसी तिमाही यानी Q4 FY24 में ₹1,598 करोड़ थी। यह जानकारी कंपनी के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेज़ों से सामने आई है।

पूरे वित्त वर्ष FY25 के लिए कंपनी की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹4,514 करोड़ रही, जबकि FY24 में यह ₹5,010 करोड़ थी — यानी सालाना आधार पर 10% की गिरावट


🛵 स्कूटर बिक्री पर ही निर्भर रही आमदनी

Ola Electric की आमदनी का लगभग पूरा हिस्सा इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री से आया। वहीं, बैटरियों की बिक्री से कंपनी को मामूली आमदनी हुई, खासकर पिछली तिमाही में।

Ola जैसे बड़े ब्रांड के लिए यह एक संकेत है कि डाइवर्सिफाइड रेवेन्यू मॉडल की कमी भविष्य में और वित्तीय दबाव बढ़ा सकती है।


💸 लागत और खर्चे: बढ़ती आग

कंपनी के कुल खर्चों में मैटेरियल (सामग्री) की खरीदारी सबसे बड़ा हिस्सा रहा, जो Q4 FY25 में ₹527 करोड़ (कुल लागत का 33%) रहा।

इसके अलावा अन्य बड़े खर्चों में शामिल हैं:

  • कर्मचारी लाभ
  • विज्ञापन और मार्केटिंग
  • तकनीकी सहायता

इस सबके चलते Q4 FY25 में Ola Electric का कुल खर्च ₹1,598 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, पूरे वित्त वर्ष FY25 में कंपनी का कुल खर्च ₹7,185 करोड़ रहा — जो कि एक अत्यधिक “कैश बर्न” की स्थिति दर्शाता है।


📉 घाटे में जबरदस्त उछाल

बिक्री में भारी गिरावट और खर्चों में वृद्धि के चलते, Ola Electric का घाटा Q4 FY25 में ₹862 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि Q4 FY24 में यह ₹418 करोड़ था। यानी घाटे में 106% की वृद्धि हुई है।

अगर पूरे वर्ष की बात करें, तो:

  • FY25 में घाटा ₹2,276 करोड़ रहा
  • जबकि FY24 में यह ₹1,584 करोड़ था

इस तरह, कंपनी का सालाना घाटा भी 43% से अधिक बढ़ा है।


💰 Ola Electric जुटाएगी ₹1,700 करोड़ का कर्ज

इन वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए, Ola Electric ने हाल ही में ₹1,700 करोड़ तक की धनराशि उधार (debt instruments के जरिए) जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। यह कदम कंपनी के लीडर भविश अग्रवाल के नेतृत्व में लिया गया है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी अपने कैश फ्लो को संभालने और ग्रोथ को बनाए रखने के लिए कर्ज का रास्ता अपना रही है।


🏁 मार्केट में TVS और Ather से मिल रही कड़ी टक्कर

अप्रैल 2025 में TVS Motor इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में मार्केट लीडर बनकर उभरी, जबकि Ola Electric को दूसरा स्थान मिला।

दिलचस्प बात यह है कि पहली बार Ather Energy ने Ola Electric को रेवेन्यू के मामले में पीछे छोड़ दिया है।

  • Q4 FY25 में Ather की ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹676 करोड़ रही
  • जबकि Ola Electric की ₹611 करोड़ ही रही

Ather ने 6 मई 2025 को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग की है, जिससे उसकी ग्रोथ और इनवेस्टमेंट में तेजी आई है।


📊 स्टॉक प्रदर्शन और वैल्यूएशन

आज के ट्रेडिंग सेशन की समाप्ति पर Ola Electric का शेयर मूल्य ₹53.20 रहा। इसके आधार पर कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹23,465 करोड़ रही।

हालांकि, इस वैल्यूएशन के मुकाबले कंपनी के घाटे और घटती रेवेन्यू के आंकड़े चिंता का विषय बन सकते हैं — खासकर उन निवेशकों के लिए जो भविष्य की स्थिरता और प्रॉफिटेबिलिटी को प्राथमिकता देते हैं।


📌 निष्कर्ष: Ola Electric के लिए चुनौतीपूर्ण मोड़

Ola Electric के लिए FY25 का चौथा क्वार्टर वित्तीय रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। बिक्री में तेज गिरावट, बढ़ते खर्च, घाटे में भारी इजाफा और बढ़ती प्रतिस्पर्धा — ये सभी संकेत देते हैं कि कंपनी को अपनी रणनीति पर पुनः विचार करने की आवश्यकता है।

EV बाजार में अब केवल ब्रांड या मार्केटिंग नहीं, बल्कि स्थिर ऑपरेशनल मॉडल, डाइवर्सिफाइड रेवेन्यू और तकनीकी दक्षता ही जीत दिला सकती है।

भविष्य में, Ola Electric के IPO प्लान्स, नए प्रोडक्ट लॉन्च, और R&D निवेश यह तय करेंगे कि कंपनी इस संकट से उबर पाएगी या नहीं।


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🤖 Neysa को मिला $30 मिलियन का निवेश,

Neysa

भारत की तेजी से उभरती जनरेटिव AI स्टार्टअप Neysa ने अपने सीरीज A फंडिंग राउंड में $30 मिलियन (करीब ₹252 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व NTT Venture Capital ने किया, वहीं अन्य निवेशकों में Nexus Venture Partners, Z47 (पूर्व में Matrix Partners India), Anchorage Capital और एंजेल इन्वेस्टर राजेश कुमार दुगर शामिल रहे।

कंपनी के संस्थापक और CEO शरद सांघी और CPO करन किर्पलानी ने भी इस राउंड में निजी रूप से निवेश किया है।


💸 Neysa निवेश का पूरा विवरण

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, Neysa के बोर्ड ने:

  • 1,11,532 Series A Compulsory Convertible Preference Shares (CCPS) ₹20,430 प्रति शेयर की दर से जारी किए
  • इसके साथ ही 12,592 इक्विटी शेयर भी आवंटित किए गए
  • कुल मिलाकर कंपनी ने ₹252 करोड़ ($30 मिलियन) जुटाए

इस राउंड में NTT Venture Capital ने ₹75.67 करोड़ ($8.9 मिलियन) का निवेश किया, उसके बाद:

  • Nexus Venture Partners और Z47 ने ₹67.26 करोड़ ($7.9 मिलियन)-₹₹ का योगदान किया
  • Anchorage Capital ने ₹16.8 करोड़ का निवेश किया
  • वहीं संस्थापक शरद सांघी ने ₹25.22 करोड़ के शेयर प्राप्त किए

बाकी राशि अन्य एंजेल निवेशकों और इंडिविजुअल्स द्वारा जुटाई गई।


🚀 फंडिंग से मिलेगी रफ्तार Gen AI इंफ्रास्ट्रक्चर को

Neysa ने बयान में बताया कि यह नया पूंजी निवेश कंपनी के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और आने वाले समय में Generative AI Acceleration Cloud Service लॉन्च करने में सहायक होगा।

कंपनी ने हाल ही में संस्थापक शरद सांघी और Anchorage Capital को ₹20 करोड़ के इक्विटी शेयर भी अलॉट किए हैं, जिससे शेयरहोल्डिंग और वैल्यूएशन की तस्वीर और स्पष्ट हो गई है।


📊 वैल्यूएशन: ₹1,090 करोड़ तक पहुंची Neysa

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, Series A शेयरों का कन्वर्जन रेशियो 1:2 होगा यानी एक CCPS के बदले दो इक्विटी शेयर मिलेंगे। इस आधार पर कंपनी की पोस्ट-अलॉटमेंट वैल्यूएशन करीब ₹1,090 करोड़ ($128 मिलियन) आंकी गई है।

यह भारत की AI और क्लाउड स्पेस में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जहां कंपनियाँ अब सिर्फ कोडिंग या SaaS से आगे बढ़कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा की ओर ध्यान दे रही हैं।


🧠 Neysa क्या करती है?

Neysa एक AI क्लाउड और प्लेटफ़ॉर्म-एज़-ए-सर्विस (PaaS) स्टार्टअप है, जो उपयोगकर्ताओं को Generative AI प्रोजेक्ट्स को स्केलेबल तरीके से क्लाउड पर मैनेज और डिप्लॉय करने की सुविधा देता है। इसके मुख्य प्रोडक्ट्स में शामिल हैं:

  1. Nebula – AI वर्कलोड को तैनात (deploy) और स्केल करने का प्लेटफॉर्म
  2. Palvera – नेटवर्क इंटेलिजेंस को ऑप्टिमाइज़ और ऑटोमेट करता है
  3. Aegis – AI/ML इकोसिस्टम को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया

Neysa का लक्ष्य है कि वह व्यवसायों को अपने Gen AI सॉल्यूशन्स को फास्ट, सेफ और स्केलेबल तरीके से अपनाने में मदद करे।


🧑‍💼 शरद सांघी: अनुभवी लीडर का नेतृत्व

Neysa के संस्थापक और CEO शरद सांघी भारत के डेटा सेंटर और क्लाउड टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अनुभवी लीडर माने जाते हैं। वह पहले Netmagic (NTT Group की सब्सिडियरी) के संस्थापक रहे हैं। उन्होंने AI के भविष्य को देखते हुए Neysa की शुरुआत की, और अब इसे एक ग्लोबल स्तर की AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।


📈 निवेशकों की रुचि क्यों?

Generative AI स्पेस में भारत का मार्केट तेजी से उभर रहा है, और कंपनियाँ अब केवल Chatbots से आगे बढ़कर सिक्योरिटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा गवर्नेंस पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

इस फंडिंग राउंड में:

  • NTT Venture Capital जैसे इंटरनेशनल प्लेयर की भागीदारी से साफ है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स भारत की AI क्षमताओं में भरोसा जता रहे हैं
  • Nexus, Z47, और Anchorage जैसी फर्म्स का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है, जो स्टार्टअप्स को लंबी अवधि की ग्रोथ देने में मदद करते हैं

🔮 आगे की राह

Neysa अब अपने Gen AI क्लाउड प्लेटफॉर्म को बाजार में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह भारत की पहली ऐसी सेवाओं में शामिल होगी जो बड़े पैमाने पर AI मॉडल्स को रन और मैनेज करने के लिए टूल्स और सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करेगी।

यह सर्विस खासतौर पर एंटरप्राइज ग्राहकों, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को टारगेट करेगी, जो अपने AI प्रोजेक्ट्स को स्केल करने में जूझ रहे हैं।


🧩 निष्कर्ष

Neysa की यह फंडिंग भारत में AI क्षेत्र के तेजी से बढ़ते महत्व को दर्शाती है। एक समय था जब भारतीय कंपनियाँ सिर्फ AI को इंटीग्रेट करती थीं, अब वो खुद AI इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म्स बना रही हैं।

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Read More:Ecom Express में 150 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा,

Ecom Express में 150 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा,

Ecom Express

भारत की ईकॉम लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Delhivery द्वारा Ecom Express के अधिग्रहण से ठीक पहले कंपनी के करीब 150 मिड-लेवल और रीजनल ऑपरेशंस कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार यह इस्तीफे स्वैच्छिक बताए जा रहे हैं, लेकिन आने वाले विलय से जुड़ी भूमिकाओं में दोहराव (redundancy) और कार्य संरचना में बदलाव (operational restructuring) के कारण यह कदम उठाया गया है।


🔄 45 दिनों में मिल सकती है CCI से मंज़ूरी

इस अधिग्रहण को लेकर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की मंज़ूरी अभी बाकी है, और उम्मीद है कि अगले 45 दिनों के भीतर यह अप्रूवल मिल जाएगा। Mint की रिपोर्ट के अनुसार, Ecom Express के CEO अजय चितकारा और अन्य सीनियर एक्जीक्यूटिव्स भी regulatory क्लियरेंस के बाद कंपनी से बाहर हो सकते हैं।


💰 ₹1,407 करोड़ में Delhivery का अधिग्रहण सौदा

Delhivery ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह Ecom Express Limited में 99.4% हिस्सेदारी खरीदेगी। यह डील ₹1,407 करोड़ (लगभग $169.5 मिलियन) के कैश ट्रांज़ैक्शन के रूप में की जा रही है।

इस अधिग्रहण के बाद Delhivery को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, ग्राहक आधार और पैन-इंडिया डिलीवरी क्षमता मिलेगी, जो उसे Amazon और Ekart जैसे दिग्गजों से मुकाबला करने में मदद करेगी।


🏢 Ecom Express: एक दशक पुराना लॉजिस्टिक्स ब्रांड

Ecom Express की स्थापना 2012 में हुई थी और इसका हेडक्वार्टर गुरुग्राम में स्थित है। यह कंपनी एक फुल-स्टैक, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन प्रोवाइडर है जो भारत भर में ईकॉमर्स कंपनियों को एंड-टू-एंड डिलीवरी सर्विस देती है।

अधिग्रहण से पहले Ecom Express ने लगभग $290 मिलियन (₹2,400 करोड़) से अधिक की फंडिंग जुटाई थी। इसके प्रमुख निवेशकों में Warburg Pincus, CDC Group और Partners Group जैसे नाम शामिल हैं।


📉 क्यों दे रहे हैं कर्मचारी इस्तीफा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारियों के इस्तीफे “स्वैच्छिक” (voluntary) बताए जा रहे हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि Delhivery के साथ प्रस्तावित एकीकरण के चलते:

  • भूमिकाओं में दोहराव (role overlap) बढ़ेगा
  • कई टीमों का री-स्ट्रक्चरिंग होगा
  • कुछ कर्मचारियों को ट्रांसफर या हटाने की नौबत आ सकती है

इसलिए, कई कर्मचारियों ने अधिग्रहण से पहले ही खुद हटने का निर्णय ले लिया।


🧑‍💼 टॉप मैनेजमेंट की भी होगी विदाई?

रिपोर्ट के अनुसार, Ecom Express के CEO अजय चितकारा के साथ-साथ कई सीनियर मैनेजमेंट लीडर्स भी regulatory अप्रूवल के बाद कंपनी छोड़ सकते हैं। यह कदम Delhivery द्वारा लाई जा रही नई रणनीतिक संरचना (strategic structure) के तहत लिया जा सकता है।


📈 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन

Entrackr द्वारा रिव्यू किए गए एक इंटरनल डॉक्युमेंट के मुताबिक, Ecom Express ने FY25 की पहली तीन तिमाहियों में ₹1,912 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। तुलना करें तो FY24 में कंपनी का कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹2,653 करोड़ था।

इससे स्पष्ट है कि कंपनी का प्रदर्शन स्थिर रहा है और उसकी मार्केट पोजिशन मजबूत बनी हुई है।


🚛 Delhivery को क्या मिलेगा इस डील से?

Delhivery, जो पहले ही भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन कंपनियों में से एक है, इस अधिग्रहण से:

  • पिन कोड कवरेज बढ़ा सकेगी
  • रूरल डिलीवरी नेटवर्क मजबूत कर पाएगी
  • एक्सप्रेस डिलीवरी सेवाओं में Ecom Express के अनुभव का लाभ मिलेगा
  • और कस्टमर बेस का तेजी से विस्तार हो सकेगा

यह अधिग्रहण Delhivery की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, खासकर ऐसे समय में जब ईकॉमर्स लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तेजी से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।


🤐 Delhivery ने टिप्पणी से किया इनकार

इस पूरी स्थिति पर Delhivery की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कंपनी ने मीडिया सवालों पर “No Comments” कहकर चुप्पी साध रखी है। यह संभवतः regulatory मंज़ूरी के कारण है, क्योंकि CCI की स्वीकृति के बाद ही सभी जानकारियाँ सार्वजनिक की जाएंगी।


🔍 निष्कर्ष: लॉजिस्टिक्स सेक्टर में Consolidation का संकेत

Ecom Express के अधिग्रहण और कर्मचारियों के इस्तीफों से साफ है कि भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर अब एक नए दौर के Consolidation की ओर बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियाँ अब छोटे-परंतु-मजबूत नेटवर्क्स को अपने में समाहित कर रही हैं, ताकि:

  • लागत को घटाया जाए
  • नेटवर्क प्रभाव (Network effect) बढ़ाया जाए
  • और सर्विस एफिशिएंसी में सुधार लाया जा सके

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Read more :🇮🇳 Razorpay ने पूरा किया ‘Reverse Flip’,

💸 Flipkart Internet को सिंगापुर पैरेंट से फिर मिले ₹2,225 करोड़,

Flipkart

वॉलमार्ट (Walmart) के स्वामित्व वाली भारत की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart Internet को उसकी सिंगापुर स्थित मूल कंपनी से एक बार फिर ₹2,225 करोड़ (लगभग $262 मिलियन) की इंटरनल फंडिंग प्राप्त हुई है। यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब कंपनी के IPO की तैयारी को लेकर चर्चाएं तेज़ हो रही हैं।

इससे दो महीने पहले ही, Flipkart Internet को ₹3,180 करोड़ ($382 मिलियन) की बड़ी फंडिंग मिली थी, जो कंपनी की मजबूत पूंजी रणनीति को दर्शाती है।


📑 RoC फाइलिंग से खुलासा, सिंगापुर यूनिट ने दिए शेयर

फ्लिपकार्ट के बोर्ड ने कंपनी की सिंगापुर स्थित इकाई Flipkart Marketplace Private Limited को ₹2,225 करोड़ के इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह जानकारी कंपनी की Registrar of Companies (RoC) में की गई कई फाइलिंग्स से सामने आई है।

यह ताजा निवेश दर्शाता है कि कंपनी ऑपरेशनल विस्तार और संभावित आईपीओ लॉन्च से पहले पूंजी सुदृढ़ करने में जुटी है।


👗 Myntra को भी मिला निवेश, फैशन सेगमेंट में भी होगा विस्तार

इस फंडिंग के साथ-साथ Flipkart की फैशन इकाई Myntra India को भी ₹1,040 करोड़ ($125 मिलियन) की फंडिंग मिली है, जो उसकी सिंगापुर स्थित पैरेंट कंपनी FK Myntra Holdings से आई है। इसका मतलब यह है कि Flipkart ग्रुप अपने सभी प्रमुख सेगमेंट को मजबूत करने की दिशा में रणनीतिक कदम उठा रहा है।


📈 IPO की तैयारी जोरों पर, $60-70 अरब की वैल्यूएशन का लक्ष्य

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Flipkart $60 से $70 बिलियन की वैल्यूएशन के साथ अपना IPO लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। इसी के तहत कंपनी अपने हेडक्वार्टर को सिंगापुर से भारत शिफ्ट करने की प्रक्रिया में भी है।

इस बदलाव के साथ Flipkart उन भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों की कतार में शामिल हो जाएगी जो अपना मुख्यालय भारत में स्थानांतरित कर रही हैं — जैसे:

  • Pine Labs
  • Zepto
  • Meesho
  • Razorpay

यह कदम IPO से पहले भारत में कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर और टैक्स रेग्युलेशन को सहज बनाने के लिए उठाया जा रहा है।


🧾 शेयरहोल्डर्स की जानकारी: Walmart है मुख्य मालिक

स्टार्टअप डाटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Flipkart Internet में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 85% है। कंपनी की अन्य सहायक इकाइयों में:

  • PhonePe
  • Myntra

शामिल हैं। अन्य प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Tencent
  • CPP Investments
  • GIC
  • SoftBank
  • Microsoft

इस समय Flipkart की वैल्यूएशन लगभग $36 बिलियन बताई जा रही है।


📊 FY24 में बेहतर परफॉर्मेंस: रेवेन्यू बढ़ा, घाटा घटा

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में Flipkart ने ₹17,907 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% की वृद्धि दर्शाता है। इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने घाटे को 41% घटाकर ₹2,359 करोड़ कर लिया है, जो स्पष्ट संकेत है कि Flipkart अब लाभप्रदता की ओर बढ़ रही है।

यह प्रदर्शन कंपनी की दक्षता, लॉजिस्टिक्स में सुधार और कस्टमर बेस के विस्तार का परिणाम माना जा रहा है।


🔍 रणनीति: लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और IPO के लिए तैयार

Flipkart की वर्तमान रणनीति इस प्रकार है:

  • IPO से पहले घरेलू रजिस्ट्रेशन करना, जिससे टैक्स और रेग्युलेशन में सुविधा हो
  • अपने ई-कॉमर्स ऑपरेशन को मजबूती देना, जिसमें ग्रॉसरी, फैशन, मोबाइल्स और होम डेकोर प्रमुख हैं
  • लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन में निवेश बढ़ाना
  • Myntra और अन्य वर्टिकल्स के ज़रिए सेगमेंटेड यूज़र बेस को टारगेट करना

🧠 Flipkart क्यों जुटा रहा है पूंजी?

IPO से पहले पूंजी जुटाना एक आम रणनीति होती है ताकि:

  1. कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत किया जा सके
  2. विस्तार योजनाओं में तेजी लाई जा सके
  3. संभावित निवेशकों को दिखाया जा सके कि कंपनी में ग्रोथ की संभावना है

Flipkart द्वारा दो महीनों में ₹5,400 करोड़ से अधिक जुटाना इस बात का संकेत है कि कंपनी बेहद आक्रामक विस्तार और रणनीतिक IPO प्लान की तैयारी में है।


✅ निष्कर्ष: Flipkart IPO की ओर बढ़ता हुआ अगला भारतीय दिग्गज

Flipkart की ये ताज़ा फंडिंग दर्शाती है कि भारत का ई-कॉमर्स मार्केट न केवल प्रतिस्पर्धी हो रहा है, बल्कि अब निवेशकों और वैश्विक बाजारों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। वॉलमार्ट जैसे दिग्गज का मजबूत सपोर्ट, ऑपरेशनल सुधार और IPO की संभावनाएं इसे भारत की अगली बड़ी लिस्टेड इंटरनेट कंपनी बना सकती हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि Flipkart IPO से पहले क्या और रणनीतिक कदम उठाती है — क्या इसमें निवेशकों को फायदा होगा? क्या यह ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बनेगा?


लेखक की टिप्पणी: यदि आप Flipkart IPO से जुड़ी खबरें, वैल्यूएशन रिपोर्ट, या निवेश विश्लेषण चाहते हैं तो हमें फॉलो करें और जुड़े रहें www.fundingraised.in के साथ।

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🚀 Blinkit का बड़ा कदम अब खुद रखेगा स्टॉक, बढ़ेगी कमाई की रफ्तार

Blinkit

Eternal Limited, जिसे पहले आप Zomato के नाम से जानते थे, अब अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। कंपनी अब खुद इन्वेंट्री (स्टॉक) रखने की योजना बना रही है — यानी अब प्रोडक्ट्स सीधे Eternal के पास होंगे, न कि थर्ड पार्टी सेलर्स के जरिए।

यह रणनीतिक बदलाव कंपनी के हाल ही में Indian-Owned and Controlled Company (IOCC) बनने के बाद संभव हुआ है। Eternal ने हाल ही में शेयरहोल्डर्स को भेजे एक लेटर में इसकी जानकारी दी।


📦 इन्वेंट्री मॉडल क्यों ज़रूरी है?

कंपनी का मानना है कि इन्वेंट्री को खुद कंट्रोल करना Blinkit को:

  • बेहतर मार्जिन दिलाएगा
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाएगा
  • और बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करेगा

Eternal का कहना है कि 100% इन्वेंट्री मॉडल को अपनाने के लिए उन्हें केवल ₹1,000 करोड़ की वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी — जो कि FY25 में Blinkit के अनुमानित ₹22,000 करोड़ Net Order Value (NOV) का सिर्फ 5% हिस्सा है।


💬 CFO ने क्या कहा?

जब कंपनी से पूछा गया कि इतनी बड़ी इन्वेंट्री केवल ₹1,000 करोड़ में कैसे संभव होगी, तो Eternal के CFO अक्षंत गोयल ने कहा:

“Quick commerce में इन्वेंट्री बहुत तेज़ी से मूव करती है। इसलिए वर्किंग कैपिटल की ज़रूरत बिज़नेस के कुल स्केल के मुकाबले कम रहती है।”

यानी Blinkit जितनी तेज़ी से सामान बेचता है, उसे उतनी ही तेज़ी से नए प्रोडक्ट्स लाने की जरूरत होती है — और यह साइकिल कम पूंजी में भी चल सकती है।


🏪 Blinkit की आक्रामक ग्रोथ

FY25 की चौथी तिमाही में Blinkit ने 294 नए स्टोर खोले और 10 लाख वर्ग फुट से ज्यादा वेयरहाउस स्पेस जोड़ा। इसके साथ ही कंपनी के कुल स्टोर की संख्या अब 1,301 हो गई है।

📈 लेकिन इस तेज़ ग्रोथ का एक दूसरा पहलू भी है — EBITDA (कमाई से पहले का लाभ) घाटा बढ़ा है:

  • Q3 FY25 में: ₹103 करोड़
  • Q4 FY25 में: ₹178 करोड़

यानि स्टोर और वेयरहाउस बढ़ाने से खर्च में भी बड़ा उछाल आया है।


💰 लॉन्ग टर्म में मुनाफे की उम्मीद

हालांकि Blinkit को अभी घाटा हो रहा है, लेकिन Eternal को लंबी अवधि में क्विक कॉमर्स से जबरदस्त मुनाफे की उम्मीद है

कंपनी अभी तो प्राइवेट लेबल (यानि अपने ब्रांड वाले प्रोडक्ट्स) लॉन्च करने की योजना नहीं बना रही है, लेकिन इन्वेंट्री कंट्रोल से उन्हें उम्मीद है कि EBITDA मार्जिन 5-6% से भी ऊपर जा सकता है।


🔄 इन्वेंट्री मॉडल बनाम मार्केटप्लेस मॉडल

अब तक Blinkit मार्केटप्लेस मॉडल पर काम करता था, जिसमें थर्ड पार्टी सेलर्स अपने प्रोडक्ट्स लिस्ट करते थे और Blinkit सिर्फ डिलीवरी करता था।

लेकिन अब इन्वेंट्री मॉडल अपनाने का मतलब है:

  • Blinkit खुद सामान खरीदेगा
  • वेयरहाउस में स्टॉक रखेगा
  • और ग्राहकों को सीधे डिलीवर करेगा

📌 इससे डिलीवरी टाइम घटेगा, मार्जिन बढ़ेगा और कस्टमर एक्सपीरियंस और बेहतर होगा।


🏁 भारत में क्विक कॉमर्स की रेस तेज़

क्विक कॉमर्स की दुनिया में Blinkit के अलावा Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket जैसे बड़े खिलाड़ी भी मैदान में हैं।

सभी का फोकस है:

  • 10-15 मिनट में डिलीवरी
  • किराना, फ्रेश फूड, हाउसहोल्ड और डेली यूज आइटम्स
  • बेहतर कस्टमर लॉयल्टी

इस तेजी से बढ़ते सेगमेंट में इन्वेंट्री कंट्रोल एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।


🧠 Eternal Limited: Zomato से आगे का सफर

Zomato ने जब Blinkit को अधिग्रहित किया था, तब यह एक अलग ही तरह की चुनौती थी। अब Eternal Limited बनकर कंपनी फूड डिलीवरी से आगे बढ़कर:

  • क्विक कॉमर्स
  • लॉजिस्टिक्स
  • और अन्य डिजिटल सर्विसेस में प्रवेश कर रही है।

Blinkit की यह इन्वेंट्री रणनीति Eternal को एक समग्र डिजिटल कॉमर्स ब्रांड बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।


📌 निष्कर्ष: बड़ा दांव, बड़ा मुनाफा?

Eternal Limited का इन्वेंट्री मॉडल अपनाना एक साहसिक लेकिन सोच-समझकर उठाया गया कदम है। ₹1,000 करोड़ जैसी सीमित पूंजी में इतने बड़े स्केल पर ऑपरेशन करना आसान नहीं होगा, लेकिन अगर कंपनी की रणनीति सफल रही, तो यह Blinkit को:

  • तेज़ ग्रोथ
  • बेहतर मार्जिन
  • और दीर्घकालिक स्थिरता

सब दिला सकता है।

अब देखना होगा कि यह मॉडल Blinkit को प्रतियोगियों से आगे निकालता है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि Eternal अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।

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