भारत की जानी-मानी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड boAt ने अपने अपडेटेड Draft Red Herring Prospectus (DRHP) में कई महत्वपूर्ण financial reporting और compliance से जुड़े lapses का खुलासा किया है। कंपनी के statutory auditors ने FY23, FY24 और FY25 के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है, जिसमें statements mismatch, गलत fund utilisation, governance issues और internal control की कमजोरियाँ शामिल हैं।
ये खुलासे ऐसे समय सामने आए हैं जब boAt अपनी IPO योजना को आगे बढ़ा रही है, जिससे ये मामले और भी संवेदनशील हो जाते हैं।
📉 Statements में mismatch: Auditors ने उठाए सवाल
DRHP के अनुसार, FY23 से लेकर FY25 तक कंपनी द्वारा बैंकों को भेजे गए quarterly returns और statements, कंपनी की books of accounts से मेल नहीं खाते थे।
यह mismatch किसी भी बड़ी कंपनी के लिए गंभीर माना जाता है, क्योंकि यह financial transparency और governance पर सवाल उठाता है।
इसके अलावा auditors ने यह भी पाया कि:
- FY23 और FY24 में short-term borrowings को long-term इस्तेमाल किया गया।
- यह standard financial discipline का सीधा उल्लंघन है और auditor’s report में इसे एक major red flag के रूप में देखा गया है।
⚠️ Governance lapses: Directors को दिया गया अधिक भुगतान
DRHP में governance से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी सामने आए, जैसे:
🔹 FY23 में directors को excess remuneration
कंपनी ने FY23 में अपने directors को उतना भुगतान किया, जितना Companies Act, Section 197 के तहत अनुमति नहीं है। यह कानूनन सीमाओं का उल्लंघन माना जाता है।
🔹 Statutory dues के arrears
Auditors ने FY23 और FY25 में undisputed statutory dues में arrears भी पकड़े।
🔹 Subsidiaries में electronic backups का अभाव
boAt की दो subsidiaries ने FY23 के लिए books of accounts का electronic backup ही नहीं बनाया। यह compliance दृष्टि से एक गंभीर कमी है।
🔹 Plant और equipment की physical verification नहीं हुई
FY23 में कंपनी अपने assets की physical verification नहीं कर पाई क्योंकि उस वर्ष verification policy में बदलाव किया गया था।
ये सभी बातें इस ओर संकेत करती हैं कि FY23 से FY25 के बीच boAt की internal controls और audit preparedness मजबूत नहीं थी।
🛠️ boAt ने उठाए corrective steps
कंपनी ने DRHP में स्वीकार किया है कि उसने इन lapses को address करने के लिए corrective actions लिए हैं:
- Revised statements को दोबारा फाइल किया गया
- Directors को दिए गए excess remuneration के लिए shareholder approval लिया गया
- Internal processes और compliance frameworks को मज़बूत किया जा रहा है
हालांकि कंपनी ने कदम उठाए हैं, लेकिन auditors के इन observations से IPO प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना है।
📉 IPO का आकार घटाया – अब ₹1,500 करोड़ का issue
boAt ने अक्टूबर में SEBI के पास अपना updated DRHP refile किया। कंपनी ने अपने IPO का आकार घटाकर ₹1,500 करोड़ कर दिया है।
इसमें शामिल हैं:
- ₹500 करोड़ के fresh equity shares
- ₹1,000 करोड़ का Offer for Sale (OFS), जिसमें existing shareholders और co-founders अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे
IPO का आकार घटाना इस बात का संकेत है कि कंपनी मार्केट की मौजूदा परिस्थितियों और internal audit findings के बीच एक संतुलित और सुरक्षित approach अपनाना चाहती है।
📊 Financial performance: FY24 के नुकसान से FY25 में profit
गड़बड़ियों के बावजूद, boAt का financial प्रदर्शन FY25 में बेहतर रहा है। कुछ मुख्य highlights:
📆 FY25 performance
- Operating Revenue: ₹3,073 करोड़
- Net Profit: ₹61 करोड़
FY24 में कंपनी को ₹79.6 करोड़ का net loss हुआ था, ऐसे में FY25 में boAt का लाभ में लौटना एक सकारात्मक संकेत है।
📆 Q1 FY26 performance
- Operating Revenue: ₹628 करोड़
- Net Profit: ₹21.35 करोड़
पहली तिमाही के ये अच्छे नतीजे कंपनी की operational recovery और बाजार में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाते हैं।
🎯 boAt के लिए आगे की राह
boAt भारत की सबसे तेजी से बढ़ती consumer electronics ब्रांड्स में से एक है, लेकिन DRHP में सामने आए lapses कंपनी की governance पर गंभीर सवाल उठाते हैं।
IPO की तैयारी कर रही कंपनी के लिए यह जरूरी है कि:
- Financial controls और internal audits को मजबूत किया जाए
- Governance norms को सख्ती से लागू किया जाए
- Investor trust को restore करने के लिए transparency बढ़ाई जाए
Financial performance अच्छा है, ब्रांड मजबूत है, लेकिन compliance और governance के मुद्दे कंपनी को सही दिशा में काम करने की जरूरत का संकेत देते हैं।
✍️ निष्कर्ष
boAt का नया DRHP एक ओर कंपनी की financial recovery और IPO की तैयारी दिखाता है, वहीं दूसरी ओर FY23–FY25 के बीच हुई financial और governance गड़बड़ियों को भी सामने लाता है।
कंपनी ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन इन lapses का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि boAt कैसे compliance standards को और मजबूत करता है और IPO से पहले investor confidence को बढ़ाता है।
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