🎓 Varthana को मिला ₹159 करोड़ का निवेश,

Varthana

बेंगलुरु स्थित शिक्षा-आधारित नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) वर्थना (Varthana) ने कुल ₹159 करोड़ का कर्ज निवेश (debt investment) हासिल किया है। यह फंडिंग External Commercial Borrowing (ECB) और Non-Convertible Debentures (NCD) के ज़रिए जुटाई गई है। इस निवेश में शामिल तीन प्रमुख वैश्विक निवेशकों में BlueEarth Capital, Franklin Templeton AIF और ResponsAbility शामिल हैं।

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💸 फंडिंग ब्रेकअप: कौन-कितना निवेश लाया?

  • BlueEarth Capital ने ₹69 करोड़ का निवेश किया
  • ResponsAbility ने ₹65 करोड़ की भागीदारी की
  • Franklin Templeton AIF ने ₹25 करोड़ का निवेश किया

इससे पहले भी वर्थना ने $89.5 मिलियन (करीब ₹745 करोड़) की फंडिंग ओमिड्यार नेटवर्क (Omidyar Network) समेत अन्य निवेशकों से जुटाई थी।


🏫 varthana का मिशन: हर बच्चे तक पहुंचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

वर्थना की स्थापना 2013 में स्टीव हार्डग्रेव (Steve Hardgrave) और ब्रजेश मिश्रा ने की थी। इसका उद्देश्य देशभर के अफोर्डेबल प्राइवेट स्कूलों और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। वर्थना मुख्य रूप से निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करता है:

  • स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए लोन
  • शिक्षक प्रशिक्षण के लिए फंडिंग
  • छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण

वर्थना का फोकस है कि वह शिक्षा क्षेत्र में ऐसे स्कूलों और समुदायों के साथ साझेदारी करे जो आम तौर पर पारंपरिक बैंकिंग और फाइनेंस सिस्टम से वंचित रहते हैं।


🔋 अब स्कूलों में होगी सोलर एनर्जी की एंट्री

वर्थना ने अपने प्रेस रिलीज में कहा कि यह नई फंडिंग देशभर के अफोर्डेबल स्कूल नेटवर्क को बढ़ाने और स्कूलों में सौर ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी समाधान लाने में उपयोग की जाएगी।

यह कदम न केवल स्कूलों के बिजली खर्च को घटाएगा बल्कि पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी को भी दर्शाएगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि बिजली की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।


🌱 इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ता कदम

इस फंडिंग का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट के तहत आती है। इसमें वे निवेशक शामिल हैं जो केवल मुनाफा नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव भी देखना चाहते हैं। BlueEarth Capital, Franklin Templeton और ResponsAbility जैसे वैश्विक संस्थान इस बात का उदाहरण हैं कि भारतीय शिक्षा क्षेत्र में कैसे वैश्विक विश्वास बढ़ रहा है।


📈 10 वर्षों की यात्रा: 12,000+ स्कूलों को सपोर्ट

पिछले एक दशक में वर्थना ने:

  • 12,000 से अधिक अफोर्डेबल स्कूलों को वित्तीय सहायता दी
  • 19,000 से अधिक स्कूल लोन स्वीकृत किए
  • 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अपना ऑपरेशन फैलाया
  • 40 शाखाओं के नेटवर्क के ज़रिए टीयर II और टीयर III शहरों में अपनी मौजूदगी दर्ज की

इस तरह वर्थना भारत के ऐसे समुदायों तक पहुंच बना रही है जहां गुणवत्ता वाली शिक्षा की पहुंच सीमित रही है।


📣 CEO स्टीव हार्डग्रेव का बयान

“हम Blue Earth Capital, Franklin Templeton AIF और ResponsAbility के साथ साझेदारी कर शिक्षा क्षेत्र में प्रभावशाली बदलाव लाने के लिए बेहद उत्साहित हैं। हमारा उद्देश्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है, और यह निवेश उस दिशा में बड़ा कदम है।”

स्टीव हार्डग्रेव, सीईओ, वर्थना


🌍 शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय नवाचार का उदाहरण

वर्थना का यह प्रयास दिखाता है कि NBFC मॉडल को केवल रियल एस्टेट या ऑटो लोन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यदि सही दिशा में काम किया जाए, तो NBFCs भी सामाजिक परिवर्तन और समावेशी विकास का बड़ा माध्यम बन सकते हैं।

वर्थना ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा में निवेश न केवल ज़रूरी है, बल्कि यह एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट भी बन सकता है, जो दीर्घकालिक लाभ और सामाजिक उन्नति दोनों प्रदान करता है।


🔍 वर्थना के प्रतियोगी कौन?

वर्थना का मुकाबला उन NBFCs और फिनटेक कंपनियों से है जो शिक्षा ऋण या माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में काम कर रही हैं, जैसे:

  • Avanse Financial Services
  • InCred Education Loans
  • Eduvanz
  • Propelld

हालाँकि, वर्थना की विशिष्टता उसके स्कूल केंद्रित अप्रोच और सौर ऊर्जा इंटीग्रेशन में है, जिससे यह शिक्षा क्षेत्र में फंडिंग के लिए एक यूनिक प्लेटफॉर्म बन जाता है।


✍️ निष्कर्ष

वर्थना द्वारा जुटाई गई ₹159 करोड़ की यह फंडिंग न केवल उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि यह संकेत देती है कि भारत में शिक्षा के लिए वित्तीय सहयोग का दायरा अब तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में वर्थना का लक्ष्य है कि वह 150+ जिलों में अपनी पहुंच बढ़ाए और हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के मिशन को साकार करे।

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🇮🇳 CoinDCX में लीडरशिप बदलाव

CoinDCX

भारत की अग्रणी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज CoinDCX ने अपनी टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट रणनीति को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ की हैं। कंपनी ने अमोल वांजारी को हेड ऑफ इंजीनियरिंग और संगीथ एलोशियस को हेड ऑफ प्रोडक्ट नियुक्त किया है।

इन नई नियुक्तियों के ज़रिए CoinDCX अगले छह महीनों में अधिक से अधिक भारतीय निवेशकों को प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या में भी 15% की वृद्धि करने की योजना बना रही है।


👨‍💻 अमोल वांजारी: तकनीकी बुनियाद को मजबूत करने की जिम्मेदारी

CoinDCX के नए हेड ऑफ इंजीनियरिंग अमोल वांजारी अमेजन, अक्को और बिज़ोंगो जैसी दिग्गज कंपनियों में 20 वर्षों से अधिक का इंजीनियरिंग अनुभव लेकर आए हैं। उन्होंने Amazon Pay में भुगतान प्रणालियों और AI आधारित टूल्स पर कार्य किया है, साथ ही डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम, प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट, और इंफ्रास्ट्रक्चर डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल की है।

“मेरा फोकस CoinDCX की तकनीकी नींव को और मजबूत करने और प्लेटफॉर्म को सभी प्रकार के निवेशकों के लिए और अधिक सीमलेस, विश्वसनीय और यूजर-फ्रेंडली बनाने पर होगा,”
— अमोल वांजारी, हेड ऑफ इंजीनियरिंग, CoinDCX

उन्होंने आगे कहा कि कंपनी के पास 200 से अधिक इंजीनियरिंग पेशेवरों की एक मजबूत टीम है, जिससे CoinDCX बड़े पैमाने पर इनोवेशन करने के लिए तैयार है।


📱 संगीथ एलोशियस: यूजर एक्सपीरियंस और प्रोडक्ट डेवेलपमेंट को नई दिशा

CoinDCX में हेड ऑफ प्रोडक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे संगीथ एलोशियस इससे पहले Flipkart में सीनियर डायरेक्टर और हेड ऑफ प्रोडक्ट्स के रूप में काम कर चुके हैं। उनके पास 18 वर्षों का प्रोडक्ट मैनेजमेंट अनुभव है और वे उपभोक्ता अनुभव, मूल्य निर्धारण, लॉयल्टी प्रोग्राम और सप्लाई चेन डेवेलपमेंट जैसे क्षेत्रों में कार्य कर चुके हैं।

Indian School of Business (ISB) के पूर्व छात्र संगीथ एलोशियस अब CoinDCX में प्रोडक्ट रणनीति, नवाचार और उपयोगकर्ता-केंद्रित अनुभव पर ध्यान केंद्रित करेंगे।


📈 CoinDCX की भविष्य की योजना: भारत के लिए क्रिप्टो को और सरल बनाना

CoinDCX का लक्ष्य है कि वह भारत में क्रिप्टो निवेश को आसान, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाए। वर्तमान में कंपनी के पास 1.9 करोड़ से अधिक यूजर्स का विशाल आधार है और वह लगातार अपना प्लेटफॉर्म विस्तार कर रही है।

कंपनी अपनी आगामी रणनीति के तहत:

  • नए प्रोडक्ट्स और फीचर्स लाने,
  • यूजर इंटरफेस को और आसान बनाने,
  • ट्रेडिंग एक्सपीरियंस को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने,
  • और भारत के नए-नए इलाकों में यूजर्स तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

👥 हायरिंग और टीम विस्तार भी है प्राथमिकता

CoinDCX ने यह भी घोषणा की है कि वह अपनी वर्कफोर्स में 15% की वृद्धि करने जा रही है। इसका उद्देश्य है नए तकनीकी और उत्पाद नवाचारों को बेहतर ढंग से कार्यान्वित करना।

इस हायरिंग के तहत कंपनी को:

  • डेटा एनालिटिक्स,
  • साइबर सुरक्षा,
  • क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर,
  • और यूजर एक्सपीरियंस डिजाइन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की तलाश है।

🔐 निवेशकों के लिए सुरक्षित और प्रभावशाली प्लेटफॉर्म

CoinDCX अपनी तकनीकी क्षमताओं के ज़रिए निवेशकों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहता है जहां वे भरोसेमंद तरीके से क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग और निवेश कर सकें।

अमोल वांजारी और संगीथ एलोशियस जैसे अनुभवी लीडर्स की नियुक्ति इस दिशा में एक बड़ा कदम है।


📊 भारतीय क्रिप्टो मार्केट में CoinDCX की स्थिति

भारत में CoinDCX एक अग्रणी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म बन चुका है। Binance, WazirX, CoinSwitch जैसे प्रतियोगियों के बीच CoinDCX का फोकस यूजर-केंद्रित इनोवेशन और पारदर्शिता पर है।

पिछले कुछ वर्षों में, क्रिप्टो मार्केट को लेकर भले ही नियामक स्पष्टता की कमी रही हो, लेकिन CoinDCX ने लगातार SEBI और RBI के साथ संवाद बनाए रखा है, ताकि भविष्य में नियामकीय ढांचे के भीतर संचालन किया जा सके।


🧠 निष्कर्ष

CoinDCX की ये नई नियुक्तियाँ एक स्पष्ट संकेत हैं कि कंपनी आने वाले वर्षों में भारत को क्रिप्टो निवेश का हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

तकनीकी सुदृढ़ता, उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार, और पारदर्शी संचालन के ज़रिए CoinDCX भारतीय युवाओं, निवेशकों और व्यापारियों के लिए क्रिप्टो को एक आसान और सुरक्षित विकल्प बनाना चाहता है।

Read more :Zepto जल्द जुटा सकता है $500 मिलियन की फंडिंग

Zepto जल्द जुटा सकता है $500 मिलियन की फंडिंग

Zepto

मुंबई आधारित क्विक कॉमर्स स्टार्टअप Zepto एक बार फिर निवेशकों की नजरों में छाया हुआ है। Zepto $500 मिलियन (लगभग ₹4,160 करोड़) की एक नई फंडिंग राउंड के लिए जनरल कैटालिस्ट (General Catalyst), Avenir और अन्य मौजूदा निवेशकों के साथ उन्नत बातचीत में है।

इस फंडिंग राउंड के बाद कंपनी की वैल्यूएशन लगभग $7 बिलियन (₹58,000 करोड़) तक पहुंचने की संभावना है, जो कि इसके पिछले नवंबर 2024 के फंडिंग राउंड में मिली $5 बिलियन वैल्यूएशन से काफी अधिक है।


🚀 2024 में $1.35 बिलियन जुटा चुका है Zepto

Zepto ने साल 2024 में ही कुल मिलाकर $1.35 बिलियन की फंडिंग जुटाई थी। इसमें एक बड़ा हिस्सा $665 मिलियन की सीरीज़ F फंडिंग और फिर एक $340 मिलियन का टॉप-अप राउंड शामिल था।

कंपनी के को-फाउंडर आदित पालिचा (Aadit Palicha) के नेतृत्व में Zepto भारत में क्विक कॉमर्स का प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है।


📉 IPO को किया गया पोस्टपोन, फोकस में है प्रॉफिटेबिलिटी

इस फंडिंग की खबर ऐसे समय पर सामने आई है जब Zepto ने अपनी IPO योजना को 2026 तक स्थगित कर दिया है। हालांकि कंपनी ने जनवरी 2025 में ‘रिवर्स फ्लिप’ कर भारत में रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया है, जो एक आईपीओ की दिशा में जरूरी कदम माना जाता है।

अब कंपनी का पूरा ध्यान कैश बर्न कम करने और EBITDA स्तर पर लाभ कमाने पर है, जिससे IPO के वक्त मजबूत वित्तीय स्थिति प्रस्तुत की जा सके।


🛑 छोटे शहरों में Zepto Cafe अस्थायी रूप से बंद

लागतों में बढ़ोत्तरी के चलते Zepto ने अपने Zepto Cafe सेवा को उत्तर भारत के कुछ छोटे शहरों—जैसे कि आगरा, चंडीगढ़, मेरठ, मोहाली और अमृतसर—में अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह सेवा कंपनी के फूड सर्विस वर्टिकल का हिस्सा थी और यह निर्णय लागत कम करने की रणनीति का हिस्सा है।


⚔️ Blinkit और Swiggy से तीव्र प्रतिस्पर्धा

हालांकि Zepto तेज़ी से बढ़ रहा है, पर उसे Blinkit और Swiggy Instamart जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। ICICI Securities की एक रिपोर्ट के अनुसार, FY26 की पहली तिमाही में Blinkit और Instamart ने क्रमशः 25% और 22% की ग्रोथ दर्ज की, जो कि इस सेक्टर की औसतन 20% से कम ग्रोथ को पीछे छोड़ती है।


📦 $4 बिलियन GOV और EBITDA पॉज़िटिव डार्क स्टोर्स

Zepto के अनुसार, कंपनी अब सालाना $4 बिलियन की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) के नजदीक पहुंच चुकी है। पालिचा ने अप्रैल में बताया था कि कंपनी ने सिर्फ 8 महीनों में $1B से $3B तक का स्केल किया, जो कि 300% साल-दर-साल ग्रोथ को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि Zepto के अधिकांश डार्क स्टोर्स अगली तिमाही तक पूरी तरह EBITDA पॉज़िटिव हो जाएंगे, जिससे कंपनी का प्रॉफिटेबिलिटी मॉडल और मजबूत होगा।


🧠 फंडिंग का उपयोग: टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और विस्तार

इस आगामी फंडिंग का उपयोग Zepto:

  • अपने ऑपरेशनल स्केल को बढ़ाने,
  • टेक्नोलॉजी स्टैक को अपग्रेड करने,
  • और सप्लाई चेन एफिशिएंसी को मजबूत करने में करेगा।

कंपनी खास तौर पर मेट्रो शहरों और टियर-2, टियर-3 शहरों में विस्तार की योजना बना रही है, जिससे उसका यूजर बेस और बढ़ेगा।


📅 IPO टाइमलाइन: अब 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में संभावित

हालांकि पहले की रिपोर्ट्स में कहा गया था कि Zepto का IPO टल गया है, कंपनी ने अब स्पष्ट किया है कि IPO का लक्ष्य 2025 के अंत से 2026 की शुरुआत के बीच रखा गया है — यह भी मार्केट कंडीशन्स पर निर्भर करेगा।

साथ ही, कंपनी अब अपने कैप टेबल में घरेलू निवेशकों को भी शामिल करने पर काम कर रही है, ताकि भारत में लिस्टिंग की प्रक्रिया सरल और मजबूत हो सके।


🏁 Zepto का सफर: 2021 से 2025 तक

  • 2021 में शुरुआत हुई थी इस स्टार्टअप की।
  • शुरुआत से ही 15-20 मिनट में डिलीवरी के वादे ने युवा उपभोक्ताओं के बीच इसे पॉपुलर बनाया।
  • कंपनी ने तेजी से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में डार्क स्टोर्स खोलकर अपने नेटवर्क को बढ़ाया।
  • 2024 में यह भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्विक कॉमर्स स्टार्टअप बनकर उभरा।

🏆 प्रतियोगिता और संभावनाएं

Zepto वर्तमान में Blinkit (Zomato समर्थित), Swiggy Instamart, Tata-backed BigBasket जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला कर रहा है।

लेकिन Zepto की तेज़ ग्रोथ, लो कैश बर्न रणनीति और मजबूत सप्लाई चेन इसे लिस्टिंग से पहले एक आकर्षक विकल्प बना रही है।


🔚 निष्कर्ष

Zepto की $500 मिलियन फंडिंग की संभावित डील यह दर्शाती है कि भारत का क्विक कॉमर्स स्पेस निवेशकों के लिए अभी भी बहुत आकर्षक बना हुआ है।

IPO टालने के बावजूद, कंपनी की वित्तीय स्थिति, ग्रोथ रेट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी इस बात का संकेत देती हैं कि आने वाले समय में Zepto भारत का अगला यूनिकॉर्न स्टार बन सकता है — या शायद डेकाकॉर्न।

Read more :📉 भारतीय स्टॉक मार्केट में एक्टिव यूजर्स की संख्या घटी, Groww बना लीडर

📉 भारतीय स्टॉक मार्केट में एक्टिव यूजर्स की संख्या घटी, Groww बना लीडर

Groww

📊 भारतीय (groww) शेयर बाजार के रिटेल इन्वेस्टर्स के बीच ऐक्टिव यूजर बेस में गिरावट देखी गई है। जनवरी 2025 में 4.96 करोड़ (49.67 मिलियन) की पीक पर पहुंचने के बाद यह संख्या जून 2025 में घटकर 4.79 करोड़ (47.89 मिलियन) रह गई है। हालांकि, मई से जून के बीच इसमें 2% की मामूली बढ़ोतरी हुई है — मई में कुल 4.69 करोड़ एक्टिव यूजर्स थे।


🥇 Groww बना नंबर 1, लेकिन यूजर बेस में आई गिरावट

स्टॉक ब्रोकिंग एप्स में Groww ने 26.27% मार्केट शेयर के साथ अपनी लीडिंग पोज़िशन बरकरार रखी है। हालांकि, इसकी यूजर संख्या 12.79 मिलियन से घटकर जून में 12.58 मिलियन हो गई, जो कि 1.67% की गिरावट है।

Groww का तेजी से बढ़ता वर्चस्व 2023 के बाद शुरू हुआ था जब इसने युवा निवेशकों को डिजिटल-फर्स्ट एक्सपीरियंस के साथ आकर्षित किया। हालांकि अब इसके यूजर ग्रोथ में थोड़ी सुस्ती दिख रही है।


🥈 Zerodha दूसरे नंबर पर, Angel One नज़दीक

Zerodha, जो लम्बे समय तक बाजार में अग्रणी रहा, अब 15.58% मार्केट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके एक्टिव यूजर्स जून में 7.75 मिलियन से घटकर 7.58 मिलियन हो गए हैं — यानी 2.23% की गिरावट।

Zerodha का मुख्य फोकस अनुभवशील ट्रेडर्स और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स रहा है, लेकिन नए ग्राहकों को जोड़ने में इसकी पकड़ कमजोर हुई है।

Angel One, जो कि लगातार मजबूत हो रहा है, अब तीसरे स्थान पर 7.32 मिलियन यूजर्स और 15.28% मार्केट शेयर के साथ Zerodha के बेहद करीब पहुंच गया है। अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो अगले कुछ महीनों में Angel One Zerodha को पछाड़ सकता है।


📉 Upstox और ICICIdirect की स्थिति स्थिर

Upstox, जो रतन टाटा समर्थित प्लेटफॉर्म है, अब चौथे स्थान पर है। इसका मार्केट शेयर 5.37% है और यूजर बेस जून में घटकर 2.57 मिलियन रह गया — यानी 3.36% की गिरावट।

वहीं ICICIdirect ने स्थिरता दिखाई है। इसका यूजर बेस मई की तुलना में जून में लगभग समान रहा — 1.95 मिलियन, यानी कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं, लेकिन गिरावट भी नहीं।


🏛️ ट्रेडिशनल ब्रोकर्स का प्रदर्शन

परंपरागत ब्रोकर्स जैसे HDFC Securities और SBI Securities ने जून में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की है:

  • HDFC Securities: 1.58 मिलियन यूजर्स | 1.32% मासिक वृद्धि
  • SBI Securities: 1.01 मिलियन यूजर्स | 1.65% मासिक वृद्धि

इसके विपरीत, Kotak Securities और Motilal Oswal जैसे ब्रांड्स को गिरावट का सामना करना पड़ा:

  • Kotak: -0.86%
  • Motilal Oswal: -1.07%

इससे संकेत मिलता है कि परंपरागत ब्रोकिंग कंपनियों को डिजिटल स्पेस में और मजबूत पकड़ बनाने की आवश्यकता है।


🌱 उभरते ब्रोकर्स: Dhan, Paytm Money, Sharekhan

Dhan, जो एक उभरता हुआ प्लेटफॉर्म है, ने जून में अपनी 10वीं पोजीशन बनाए रखी। इसके पास 1 मिलियन यूजर्स हैं और इसका मार्केट शेयर 2.08% है।

Paytm Money, जिसने बीते वर्षों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, ने 2.74% की बढ़ोतरी दर्ज की और इसका यूजर बेस बढ़कर 7.24 लाख हो गया है।

वहीं दूसरी ओर, Sharekhan का यूजर बेस 2.46% गिरकर 6.25 लाख रह गया है।


📉 गिरावट पर Share.Market (PhonePe)

PhonePe द्वारा लॉन्च किया गया Share.Market ऐप फिलहाल कठिन समय से गुजर रहा है। जून 2025 में इसके यूजर्स की संख्या 3.52% घटकर 3.47 लाख रह गई है।

PhonePe जैसी बड़ी फिनटेक कंपनी के लिए यह चिंता का विषय है, खासकर तब जब ब्रोकिंग स्पेस में प्रतियोगिता तेज़ हो रही हो।


📉 एक्टिव यूजर्स में गिरावट का क्या मतलब है?

जनवरी से जून तक करीब 1.78 मिलियन एक्टिव यूजर्स के कम होने का मतलब है कि बाजार में रिटेल निवेशकों की सक्रियता थोड़ी धीमी हुई है। इसके पीछे संभावित कारण हो सकते हैं:

  • बाजार की अस्थिरता या करेक्शन
  • आईपीओ गतिविधियों में गिरावट
  • युवा निवेशकों की प्राथमिकता में बदलाव
  • या कुछ यूजर्स द्वारा एकाधिक प्लेटफॉर्म से हटकर एक को चुनना

हालांकि, जून में 2% की मासिक बढ़त यह भी दर्शाती है कि बाजार में वापसी का संकेत मिल रहा है।


🔮 आगे की संभावनाएं

भारत का ब्रोकिंग सेक्टर अब भी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते रिटेल इन्वेस्टमेंट स्पेस में से एक है। अगर कंपनियां अपने यूजर्स को बेहतर डिजिटल अनुभव, रिसर्च टूल्स और कम फीस मुहैया करवा सकें, तो आने वाले महीनों में एक्टिव यूजर्स की संख्या फिर से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।

Groww, Zerodha, Angel One जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब भी युवा निवेशकों की पहली पसंद माना जाता है, लेकिन नए खिलाड़ी जैसे Dhan और Paytm Money भी धीरे-धीरे अपना स्थान बना रहे हैं।


निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में सक्रिय रिटेल निवेशकों की संख्या में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन बाजार में फिर से सक्रियता बढ़ने की संभावना है। Groww और Angel One की मजबूत पकड़ को देखते हुए आने वाले महीनों में शीर्ष स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। परंपरागत ब्रोकर्स को अगर डिजिटल दुनिया में टिके रहना है तो उन्हें अपनी सेवाओं में इनोवेशन लाना होगा।

Read more :Redcliffe Labs ने FY25 में ₹419 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया,

Redcliffe Labs ने FY25 में ₹419 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया,

Redcliffe Labs

गुरुग्राम स्थित डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म रेडक्लिफ लैब्स (Redcliffe Labs) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में अपनी ऑपरेटिंग आय में 20% की वृद्धि दर्ज की है। कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उसका रेवेन्यू ₹419 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष (FY24) के ₹350 करोड़ से बढ़ा है।

इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने EBITDA घाटे (कमाई से पहले ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और परिशोधन) को -38% से घटाकर -21% कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रेडक्लिफ लाभप्रदता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है।


🧪 Redcliffe Labs सेवाओं का विस्तार और प्रभाव

रेडक्लिफ लैब्स की स्थापना आदित्य कंडोई द्वारा की गई थी। यह कंपनी भारतभर में 80 से अधिक लैब्स का नेटवर्क संचालित करती है और दावा करती है कि इसका घरों से सैंपल कलेक्शन देश में सबसे बड़ा है।

डायग्नोस्टिक सेवाओं से कंपनी को FY25 में 95% से अधिक रेवेन्यू प्राप्त हुआ, जबकि बाकी आय उत्पादों की बिक्री और अन्य संचालन स्रोतों से आई।

कंपनी का कहना है कि FY25 के दौरान उसने 25 लाख से अधिक मामलों का निदान किया और अब भी देश के पिछड़े और कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

आज, 70% से अधिक टेस्टिंग वॉल्यूम टियर-2 शहरों और उससे छोटे क्षेत्रों से आता है, जो भारत के हेल्थकेयर परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।


📈 लाभप्रदता और भविष्य की योजनाएं

कंपनी ने FY25 में 70% का ग्रॉस मार्जिन दर्ज किया और FY26 में इसे बढ़ाकर 74% करने का लक्ष्य रखा है।

इसके अलावा, रेडक्लिफ ने FY26 में ₹560 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य तय किया है, जिसे वह ऑर्गेनिक ग्रोथ (यानी बिना किसी विलय या अधिग्रहण के प्राकृतिक वृद्धि) और रणनीतिक अधिग्रहणों के माध्यम से प्राप्त करना चाहती है।

कंपनी के संस्थापक और CEO आदित्य कंडोई ने कहा:

“हम लोगों के जीवन में बदलाव ला रहे हैं और डायग्नोस्टिक्स को उन लाखों लोगों के लिए प्राथमिक समाधान बना रहे हैं, जो पहले तक उपेक्षित थे।”

रेडक्लिफ का लक्ष्य FY28 तक 150 लैब्स और 300 से अधिक शहरों में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना है।


💰 निवेश और अधिग्रहण गतिविधियां

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, रेडक्लिफ लैब्स ने अब तक कुल $113 मिलियन (लगभग ₹940 करोड़) जुटाए हैं।

इसमें प्रमुख $42 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग शामिल है, जिसका नेतृत्व LeapFrog Investments ने किया था।

रेडक्लिफ ने हाल ही में बेंगलुरु स्थित सेलारा डायग्नोस्टिक्स (Celara Diagnostics) को $7 मिलियन में अधिग्रहित किया है। इस अधिग्रहण से कंपनी की टेस्टिंग क्षमता और R&D क्षमताएं बढ़ी हैं।


🏁 प्रतिस्पर्धी परिदृश्य

रेडक्लिफ लैब्स को डायग्नोस्टिक क्षेत्र में कई प्रमुख खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसमें शामिल हैं:

  • Thyrocare (PharmEasy की स्वामित्व वाली): FY25 में ₹687 करोड़ का रेवेन्यू और ₹91 करोड़ का लाभ।
  • Tata 1mg: FY24 में ₹1,968 करोड़ की टॉपलाइन (कुल बिक्री) हासिल की।
  • Healthians: FY24 में ₹250 करोड़ की आय दर्ज की।

हालांकि, रेडक्लिफ की रणनीति इनसे अलग है। यह डिजिटल टेक्नोलॉजी, घर-घर टेस्टिंग पहुंच, और सेकेंडरी शहरों पर फोकस के जरिये एक अलग श्रेणी बना रही है।


🧠 टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

रेडक्लिफ का ध्यान सिर्फ स्केलेबिलिटी पर नहीं है, बल्कि वह AI और डेटा-संचालित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूर्वानुमानित हेल्थ एनालिटिक्स, कस्टमर एंगेजमेंट, और तेज़ सैंपल प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दे रहा है।

कंपनी अपने ऐप और वेबसाइट के माध्यम से यूज़र्स को रियल-टाइम रिपोर्ट्स, हेल्थ टिप्स और हॉस्पिटल-इंटीग्रेशन जैसी सेवाएं भी प्रदान करती है।


📝 निष्कर्ष

FY25 में रेडक्लिफ लैब्स ने न सिर्फ राजस्व बढ़ाया, बल्कि घाटे को भी घटाया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी मजबूत वित्तीय स्थिति की ओर बढ़ रही है।

टियर-2 और उससे छोटे शहरों पर फोकस, व्यापक लैब नेटवर्क, टेक-संचालित सेवाएं और रणनीतिक अधिग्रहण — ये सभी रेडक्लिफ को आने वाले वर्षों में एक डायग्नोस्टिक्स यूनिकॉर्न बनने की दिशा में ले जा सकते हैं।

भारत में डायग्नोस्टिक्स सेक्टर का भविष्य अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा — और रेडक्लिफ इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है।

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📚 Info Edge समर्थित NoPaperForms बना पब्लिक कंपनी,

NoPaperForms

भारत की शिक्षा प्रौद्योगिकी (EdTech) स्पेस में तेजी से उभर रही SaaS कंपनी NoPaperForms, जो अब Meritto के नाम से जानी जाती है, ने अपने पब्लिक डेब्यू की दिशा में एक अहम कदम उठा लिया है। कंपनी ने हाल ही में खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल लिया है और जल्द ही अपना IPO (Initial Public Offering) लाने की तैयारी कर रही है।


🔄 स्टेटस बदला, नाम में बदलाव

कंपनी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) में दर्ज रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, अपने नाम को “NoPaperForms Solutions Private Limited” से बदलकर अब “NoPaperForms Solutions Limited” कर लिया है।

इसके अलावा, बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर कंपनी को पब्लिक लिमिटेड एंटिटी में परिवर्तित कर दिया है, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए एक अनिवार्य कदम है।


💰 IPO की योजना: 500–600 करोड़ रुपये का इश्यू

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी 2025 के अंत तक लगभग ₹500 से ₹600 करोड़ मूल्य का IPO लाने की तैयारी कर रही है। इस पब्लिक इश्यू के साथ NoPaperForms की संभावित वैल्यूएशन ₹2,000 करोड़ ($235 मिलियन) आंकी गई है।

इसके लिए कंपनी ने IIFL Capital और SBI Capital को अपने इन्वेस्टमेंट बैंकर्स के तौर पर नियुक्त किया है।


🧑‍💻 कंपनी का परिचय: SaaS फोकस्ड एजुकेशन सॉल्यूशंस

NoPaperForms की स्थापना 2017 में नवीन गोयल द्वारा की गई थी। यह एक vertical SaaS और embedded payments प्लेटफ़ॉर्म है, जो खासतौर पर शैक्षणिक संस्थानों (Educational Institutions) की जरूरतों को पूरा करता है।

🛠️ प्रमुख प्रोडक्ट्स:

  1. Meritto:
    यह एक एंड-टू-एंड स्टूडेंट रीक्रूटमेंट मैनेजमेंट सॉल्यूशन है, जो लीड जनरेशन, एप्लिकेशन मैनेजमेंट, कम्युनिकेशन, एनालिटिक्स और स्टूडेंट लाइफसाइकल ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर देता है।
  2. Collexo:
    यह एक डिजिटल फीस और पेमेंट मैनेजमेंट सिस्टम है, जो संस्थानों को आसान पेमेंट प्लान्स, ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग और फाइनेंशियल एनालिटिक्स की सुविधा देता है।

📈 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में मुनाफे में पहुंची कंपनी

NoPaperForms ने वित्त वर्ष 2024 (FY24) में पहली बार मुनाफा दर्ज किया है।

  • ✅ FY23 में कंपनी को ₹15.6 करोड़ का घाटा हुआ था
  • ✅ FY24 में कंपनी को ₹4 लाख का शुद्ध लाभ हुआ
  • ✅ कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹48 करोड़ से बढ़कर ₹70 करोड़ हो गया, जो कि 45% की साल-दर-साल वृद्धि है

इस लाभप्रदता ने IPO की संभावनाओं को और मजबूत किया है।


📊 हिस्सेदारी का ब्योरा

Startup डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी Info Edge (Naukri.com की पैरेंट कंपनी) के पास है:

  • 🔹 Info Edge – 47.9%
  • 🔹 नवीन गोयल (संस्थापक) – 30.17%
  • 🔹 बाकी हिस्सेदारी अन्य एंजेल और वेंचर निवेशकों के पास है

📌 हाल के अन्य पब्लिक बनने वाले स्टार्टअप्स

NoPaperForms अब उन स्टार्टअप्स की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने हाल ही में पब्लिक एंटिटी का दर्जा हासिल किया है और IPO की ओर बढ़ रहे हैं:

  • Amagi
  • Milky Mist (डेयरी ब्रांड)
  • PhonePe, Pine Labs, Razorpay (फिनटेक सेक्टर)
  • Meesho (e-commerce, जिसने हाल ही में reverse flip पूरा किया है और DRHP फाइल किया है)

📍 IPO का महत्व: भारतीय SaaS सेक्टर की नई ऊंचाई

Vertical SaaS स्पेस में NoPaperForms का यह कदम इस बात का संकेत है कि भारत में सेक्टर-स्पेसिफिक SaaS कंपनियों को निवेशकों से बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है। EdTech में भरोसेमंद पेमेंट और मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म की जरूरत तेजी से बढ़ रही है, और Meritto इस दिशा में एक प्रभावशाली खिलाड़ी बन कर उभरा है।


🔮 आगे की रणनीति

कंपनी अब:

  • 📌 अधिक एजुकेशनल इंस्टिट्यूशंस के साथ पार्टनरशिप करने
  • 📌 अपने AI-सक्षम फीचर्स को और मजबूत बनाने
  • 📌 देश-विदेश में अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म Collexo को विस्तार देने
  • 📌 पब्लिक लिस्टिंग के ज़रिए ब्रांड वैल्यू और पूंजी को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है।

✍️ निष्कर्ष:

NoPaperForms (Meritto) का पब्लिक बनने और IPO लाने का निर्णय भारतीय SaaS स्टार्टअप इकोसिस्टम के परिपक्वता और निवेशकों के भरोसे का प्रतीक है। कंपनी ने जहां एक ओर वित्तीय रूप से खुद को मजबूत किया है, वहीं दूसरी ओर टेक्नोलॉजी और यूजर एक्सपीरियंस को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आगे बढ़ाया है

📢 यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में Meritto का IPO बाजार में कैसा प्रदर्शन करता है और क्या यह अन्य SaaS कंपनियों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन पाता है या नहीं।


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🍔 Swiggy में हलचल: Citi ने बेचे ₹12.2 करोड़ के शेयर,

Swiggy

अमेरिका की बैंकिंग दिग्गज Citigroup Inc. की ब्रोकरेज इकाई Citigroup Global Markets ने भारतीय फूड डिलीवरी यूनिकॉर्न Swiggy में अपनी कुछ हिस्सेदारी फ्रांस की बैंकिंग दिग्गज BNP Paribas Financial Markets को बेच दी है।

यह ट्रांजैक्शन ब्लॉक डील के ज़रिए हुआ, जिसमें Citi ने Swiggy के 3.2 लाख शेयर ₹381 प्रति शेयर की दर पर BNP Paribas को बेचे, जिसकी कुल वैल्यू ₹12.2 करोड़ रही।

यह डील उस समय सामने आई है जब Swiggy अपने ‘Minis’ डिजिटल स्टोरफ्रंट प्लेटफॉर्म को बंद करने की तैयारी कर रहा है।


🧾 Citi और BNP Paribas के बीच सौदा: क्या है डील की अहमियत?

  • 💼 बेचे गए शेयर: 3.2 लाख
  • 💰 प्रति शेयर कीमत: ₹381
  • 📈 कुल डील वैल्यू: ₹12.2 करोड़
  • 🏦 खरीदार: BNP Paribas Financial Markets
  • 🏛️ बिक्रीकर्ता: Citigroup Global Markets

यह सौदा भारतीय शेयर बाजार के बुल्क डील सेगमेंट में रिकॉर्ड किया गया है, जो आमतौर पर तब होता है जब एक निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर दूसरी फर्म को ट्रांसफर करता है।


🛑 Swiggy Minis: बंद होने की ओर

Swiggy अपने ‘Minis’ प्लेटफॉर्म को 10 अगस्त 2025 तक पूरी तरह से बंद कर देगा। यह प्लेटफॉर्म पिछले एक साल से Swiggy ऐप में एक्टिव नहीं था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि यह एक फेज़्ड शटडाउन की प्रक्रिया में था।

Minis ने यूज़र्स को छोटे विक्रेताओं से घरेलू खाने, गिफ्ट्स, बेकिंग मटेरियल्स और अन्य ‘नॉन-फूड’ प्रोडक्ट्स खरीदने की सुविधा दी थी। हालांकि, Swiggy की मुख्य प्राथमिकता अब दो क्षेत्रोंफूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स — पर केंद्रित होती जा रही है।


📊 Swiggy के ताज़ा वित्तीय आंकड़े

Swiggy ने FY25 की अंतिम तिमाही (जनवरी–मार्च) में निम्नलिखित वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया:

  • 💸 कुल रेवेन्यू: ₹4,410 करोड़
  • 📉 कुल घाटा: ₹1,081 करोड़
  • 🍽️ फूड डिलीवरी का योगदान: 37%
  • क्विक कॉमर्स का योगदान: शेष प्रमुख हिस्सा

Swiggy की फूड डिलीवरी सेवाएं अभी भी उसकी राजस्व की सबसे बड़ी धुरी हैं, जबकि क्विक कॉमर्स (Instamart जैसी सेवाएं) ने भी तेज़ी से ग्रोथ दर्ज की है।


💹 शेयर बाज़ार में Swiggy की स्थिति

  • 📍 वर्तमान शेयर मूल्य: ₹392.2 (11:42 AM, 4 जुलाई 2025 तक)
  • 🧮 मार्केट कैप: ₹96,030 करोड़

हालांकि Swiggy अभी भी लॉस मेकिंग कंपनी बनी हुई है, लेकिन कंपनी का वैल्यूएशन और बाजार में भरोसा कायम है। BNP Paribas जैसे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की दिलचस्पी इसी ट्रस्ट को दर्शाती है।


🧐 BNP Paribas का रणनीतिक मूव

BNP Paribas Financial Markets की ओर से Swiggy में यह निवेश दर्शाता है कि फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में अभी भी ग्रोथ की उम्मीद है। इस सौदे से BNP को Swiggy जैसे अग्रणी ब्रांड में हिस्सेदारी मिली, जो आने वाले IPO की तैयारी कर रहा है।

यह डील Citi की रणनीतिक एग्ज़िट को भी दर्शाती है, जो Swiggy में अपने निवेश से लाभ लेकर बाहर निकलने का संकेत हो सकता है।


🔮 Swiggy का आगे का रोडमैप

Swiggy आने वाले समय में इन पहलुओं पर फोकस कर सकता है:

  1. 📈 लाभप्रदता (Profitability) की दिशा में काम
  2. 🛒 Instamart और क्विक कॉमर्स सेगमेंट का विस्तार
  3. 📲 टेक्नोलॉजी और डिलीवरी ऑप्टिमाइज़ेशन
  4. 🧾 IPO की ओर कदम — Swiggy के IPO की अफवाहें पहले से ही चल रही हैं

हाल ही में, Swiggy ने अपने IPO के लिए DRHP दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस डील से पहले ही निवेशकों का मूड सकारात्मक दिख रहा है।


📣 निष्कर्ष

Citi द्वारा BNP Paribas को Swiggy के शेयर बेचना और Minis प्लेटफॉर्म का बंद होना, दोनों घटनाएं इस बात के संकेत हैं कि Swiggy अब अपने कोर बिज़नेस – फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स – पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है।

🔍 BNP Paribas का निवेश यह दिखाता है कि विदेशी निवेशक भारतीय उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों पर भरोसा बनाए हुए हैं, खासकर उन पर जो स्केलेबल और टेक-ड्रिवन हों।

💡 Swiggy जैसे यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के लिए अब लाभप्रदता की दिशा में बढ़ना और IPO की ओर सफर तय करना प्राथमिक लक्ष्य बनता जा रहा है। आने वाले महीनों में Swiggy के कदम भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए दिशा तय कर सकते हैं।

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FitFeast

प्रोटीन आधारित न्यूट्रिशन ब्रांड FitFeast ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹5.5 करोड़ (लगभग $642,000) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Inflection Point Ventures (IPV) ने किया, जिसमें Raghav Singhal (Swasthum Wellness), Santosh Govindaraju और Aabhas Khanna जैसे प्रतिष्ठित निवेशकों ने भी भाग लिया।

इस ताज़ा पूंजी से कंपनी D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) मॉडल को मज़बूत बनाएगी, मेट्रो और टियर-I शहरों में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क फैलाएगी, नए फ्लेवर-बेस्ड प्रोटीन प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी और मार्केटिंग में भी भारी निवेश करेगी।


🧑‍🍳 FitFeast: स्वाद के साथ सेहत का वादा

2021 में Aditya Poddar द्वारा स्थापित FitFeast एक न्यूट्रिशन-फर्स्ट ब्रांड है, जो भारतीय टेस्ट को ध्यान में रखते हुए हाई-प्रोटीन स्नैक्स की रेंज पेश करता है। इसके कुछ प्रमुख प्रोडक्ट्स हैं:

🍿 Protein Chips – स्वादिष्ट लेकिन हेल्दी स्नैक
🥤 Malai Kulfi Protein Shake – पारंपरिक स्वाद में फिटनेस का तड़का
🍫 Dessert-Inspired Protein Bars – मिठास भी और मसल्स भी
🥜 Flavoured Nut Butters – एनर्जी और टेस्ट दोनों से भरपूर

FitFeast का मानना है कि प्रोटीन सिर्फ बॉडीबिल्डर्स की ज़रूरत नहीं, बल्कि यह हर इंडियन डाइट का ज़रूरी हिस्सा होना चाहिए।


📦 डिजिटल विस्तार और 20,000+ पिनकोड में पहुंच

FitFeast का बिज़नेस मॉडल मुख्य रूप से Direct-to-Consumer (D2C) है। हालांकि, यह ज़ेप्टो, अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसे मार्केटप्लेस और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है।

  • 📍देशभर में 20,000 से ज्यादा पिनकोड में डिलीवरी
  • 🛒 ऑनलाइन बिक्री से तेज़ी से बढ़ रही मौजूदगी
  • 🧑‍💻 अब कंपनी डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया पर भी और ज़ोर दे रही है

📺 Shark Tank India से लेकर क्रिकेट पिच तक पहुंचा ब्रांड

FitFeast को व्यापक पहचान तब मिली जब यह Shark Tank India Season 4 में दिखाई दिया। वहां से मिली प्रसिद्धि ने न केवल ग्राहकों को जोड़ा, बल्कि क्रिकेटर्स Shane Watson और Axar Patel को भी आकर्षित किया, जो अब कंपनी में निवेशक और ब्रांड एंबेसडर दोनों बन चुके हैं।

🏏 शेन वॉटसन – अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और फिटनेस आइकन
🏏 अक्षर पटेल – इंडियन क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर

इन दो सितारों की मौजूदगी से ब्रांड को न सिर्फ प्रमोशन मिला है, बल्कि फिटनेस के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।


📈 तेज़ी से बढ़ता कारोबार और नई योजनाएं

  • 💸 मासिक राजस्व ₹50 लाख से पार
  • 🚀 पिछले 4 महीनों में 5x ग्रोथ
  • 🛍️ अब तक 1 करोड़ ग्राम से अधिक प्रोटीन की बिक्री
  • 📍मेट्रो और टियर-I शहरों में फिजिकल डिस्ट्रीब्यूशन को मज़बूत करने की योजना
  • 🧪 नए प्रोडक्ट्स और फ्लेवर वेरिएंट्स लॉन्च की तैयारी

Aditya Poddar का कहना है:

“हम FitFeast को ऐसा ब्रांड बनाना चाहते हैं जो हेल्थ और स्वाद दोनों को बैलेंस करे। हमारी कोशिश है कि प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व को हर घर तक स्वादिष्ट रूप में पहुंचाया जा सके।”


🧠 निवेश कहां और कैसे होगा इस्तेमाल?

फंडिंग से FitFeast इन प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करेगा:

  1. 📱 डिजिटल मार्केटिंग और कंटेंट क्रिएशन
  2. 🚚 सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स का विस्तार
  3. 🧪 नए प्रोडक्ट्स की R&D और फ्लेवर इनोवेशन
  4. 🏙️ मेट्रो और टियर-I शहरों में रिटेल चैनल की मजबूती
  5. 🤝 लीडरशिप और टीम विस्तार – अनुभव और एक्सपर्टाइज़ बढ़ाने पर ध्यान

🏋️‍♂️ प्रोटीन सेगमेंट में बढ़ती प्रतियोगिता

भारत में हेल्थ-फूड और प्रोटीन आधारित प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। FitFeast का सीधा मुकाबला इन ब्रांड्स से है:

  • MyFitness (Nut butters)
  • Max Protein (Protein Bars)
  • Yogabar
  • The Whole Truth
  • MuscleBlaze

हालांकि, FitFeast खुद को बाकी ब्रांड्स से अलग भारतीय स्वाद और मल्टी-फॉर्मेट प्रोटीन प्रोडक्ट्स के ज़रिए पोजिशन कर रहा है।


🔮 भविष्य की रणनीति: भारत से ग्लोबल तक

FitFeast की अगली योजना है:

  • 🇮🇳 भारत के टियर-II और टियर-III शहरों में भी पहुंच
  • 🌎 UAE और Southeast Asia जैसे इंटरनेशनल मार्केट्स की एक्सप्लोरेशन
  • 👩‍⚕️ न्यूट्रिशनिस्ट्स और फिटनेस एक्सपर्ट्स के साथ पार्टनरशिप
  • 📱 हेल्थ-ट्रैकिंग और डायट प्लान ऐप्स के साथ इंटीग्रेशन

🧾 निष्कर्ष

FitFeast का ₹5.5 करोड़ का सीड फंडिंग राउंड यह साबित करता है कि भारत में हेल्थ-फोकस्ड, टेस्ट-ड्रिवन ब्रांड्स की भारी डिमांड है।

क्रिकेट सितारों की मौजूदगी, डिजिटल स्केलेबिलिटी और स्वाद के साथ सेहत का अनोखा मेल FitFeast को इस भीड़ में अलग बनाता है। आने वाले समय में यह ब्रांड भारतीय फिटनेस फूड इंडस्ट्री में एक प्रमुख नाम बन सकता है।

FitFeast कहता है – अब स्वाद भी फिटनेस का हिस्सा है! 💪🍫🥜

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Luma Fertility

फर्टिलिटी-टेक स्टार्टअप Luma Fertility ने अपनी सीड फंडिंग राउंड में $4 मिलियन (लगभग ₹33 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners के Surge प्रोग्राम ने किया, जिसमें Ameera Shah (Metropolis Healthcare) और Vijay Taparia (B2V Ventures) जैसे प्रसिद्ध निवेशकों ने भी भाग लिया।

यह निवेश Luma को मुंबई में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने और अगले दो वर्षों में भारत के अन्य प्रमुख शहरों तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा।


👩‍⚕️ Neha K. Motwani की अगुवाई में नई उम्मीद

Luma Fertility की स्थापना Neha K. Motwani ने की है, जो इससे पहले फिटनेस मार्केटप्लेस Fitternity की संस्थापक रह चुकी हैं। Fitternity को Cult.fit ने फरवरी 2021 में अधिग्रहित किया था। अब Neha एक बार फिर हेल्थटेक की दुनिया में Luma के माध्यम से नई शुरुआत कर रही हैं।


🏥 Bandra में लॉन्च हुआ Luma का टेक-सक्षम क्लिनिक

Luma Fertility ने मुंबई के Bandra में अपना पहला और प्रमुख 6,000 वर्ग फुट का टेक-सक्षम क्लिनिक शुरू किया है। यह क्लिनिक पारंपरिक IVF सेवाओं से आगे बढ़कर एक “होलीस्टिक फर्टिलिटी सेंटर” की तरह कार्य करता है, जहां निम्न सेवाएं शामिल हैं:

  • IVF और IUI उपचार
  • अंडाणु और भ्रूण फ्रीज़िंग
  • फर्टिलिटी मूल्यांकन और प्रीकंसेप्शन केयर
  • पोषण, IV थेरेपी, एक्यूपंक्चर जैसी वैकल्पिक चिकित्सा
  • घर बैठे सीमेन टेस्टिंग

📱 टेक्नोलॉजी-समर्थित IVF ऐप और AI असिस्टेंट

Luma अपने मरीज़ों के लिए एक समर्पित मोबाइल ऐप भी प्रदान करता है जिसमें:

  • Journey Tracker: हर स्टेज पर रियल-टाइम अपडेट
  • Lab Reports: तुरंत मोबाइल पर
  • LumaAI: एक 24×7 AI असिस्टेंट जो मरीज़ों को दवाइयों, शेड्यूल और मार्गदर्शन में सहायता करता है
  • Transaparency First Policy: इलाज की हर प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता
  • Dedicated Care Team: हर मरीज़ के लिए एक विशेष टीम

📉 भारत में घटती फर्टिलिटी दर और बढ़ती IVF डिमांड

एक हालिया रिसर्च के अनुसार, भारत की कुल फर्टिलिटी दर 2.1 से घटकर 1.9 हो चुकी है — जो “replacement level” से नीचे है। इसके चलते:

  • IVF साइकल्स की संख्या 2024 में 3.2 लाख से बढ़कर 2028 तक 5.5 लाख तक पहुंचने की संभावना है।
  • खासकर शहरी मिलेनियल्स और Gen-Z की लाइफस्टाइल में देरी से पैरेंटहुड की योजना आम हो गई है, जिससे egg/embryo freezing जैसी सेवाओं की मांग बढ़ रही है।

Luma इन्हीं ज़रूरतों को ध्यान में रखकर “future fertility planning” पर फोकस कर रही है।


🎯 आगे की रणनीति: मुंबई से बाहर विस्तार

निवेश के बाद Luma Fertility की योजना है कि:

  • मुंबई में अधिक क्लिनिक खोले जाएं
  • अगले 2 वर्षों में दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद जैसे शहरों में विस्तार किया जाए
  • R&D और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को और सशक्त बनाया जाए
  • IVF सेवाओं के साथ-साथ egg/embryo freezing को भी केंद्र में लाया जाए

🌐 कौन हैं Luma के प्रमुख निवेशक?

निवेशक का नामभूमिका
Surge (Peak XV)लीड इन्वेस्टर
Ameera ShahMetropolis Healthcare की MD
Vijay TapariaB2V Ventures

इन सभी निवेशकों का स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्र में गहरा अनुभव है, जिससे Luma को रणनीतिक मार्गदर्शन भी मिलेगा।


📊 फर्टिलिटी-टेक स्पेस में बढ़ती स्पर्धा

भारत में IVF और फर्टिलिटी क्षेत्र में पहले से ही कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं, जैसे:

  • Nova IVF Fertility
  • Indira IVF
  • Cloudnine Fertility
  • Birla Fertility & IVF

हालांकि, Luma Fertility अपनी टेक्नोलॉजी-फर्स्ट अप्रोच, AI असिस्टेंट और पारदर्शिता आधारित मॉडल के कारण खुद को इस क्षेत्र में अलग पहचान दिलाने की कोशिश कर रही है।


🤝 “फर्टिलिटी” को बनाए सबके लिए सुलभ

संस्थापक Neha Motwani का मानना है कि:

“फर्टिलिटी एक व्यक्तिगत, भावनात्मक और जानकारी से भरपूर यात्रा है। हम चाहते हैं कि हर कपल को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और व्यक्तिगत केयर मिले। Luma का मकसद IVF को सामान्य बनाना और इसके चारों ओर फैले डर को कम करना है।”


🧪 निष्कर्ष

Luma Fertility का यह $4 मिलियन का निवेश भारतीय हेल्थटेक और फर्टिलिटी सेगमेंट के लिए सकारात्मक संकेत है। यह न केवल निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब उन क्षेत्रों में भी इनोवेशन ला रहे हैं जहां अब तक पारंपरिक सोच हावी थी।

Mumbai से शुरू होकर अब Luma Fertility देशभर में संभावनाओं के नए द्वार खोलने की तैयारी में है।

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🌊Cosma ने जुटाए $2.9 मिलियन 💰

Cosma

समुद्री जीवन और पर्यावरण के संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही Nice, France स्थित स्टार्टअप Cosma ने हाल ही में $2.9 मिलियन (लगभग ₹24 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। यह फंडिंग राउंड WIND और Ternel द्वारा लीड किया गया, जिसमें 50 Partners, Caisse d’Épargne Côte d’Azur, और IFREMER जैसे प्रमुख संस्थानों ने भी भाग लिया।

Cosma अब इस फंडिंग के जरिए अपने ऑपरेशन्स और वैश्विक विस्तार की योजनाओं को गति देगा।


🧠 Cosma क्या करता है?

Cosma एक “benthic monitoring startup” है—यानी यह समुद्र की गहराई (seafloor) पर मौजूद जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र की निगरानी करने वाला स्टार्टअप है। इसकी तकनीक का मकसद है:

  • समुद्री जीवन की मैपिंग करना
  • समुद्री जैव विविधता की तस्वीरें और डाटा तैयार करना
  • संरक्षित प्रजातियों (protected species) की पहचान करना

यह कार्य विशेष प्रकार के छोटे पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन (underwater drones) के जरिए होता है जो समुद्र की सतह से कुछ ही ऊपर तैरते हुए कई वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की मैपिंग करते हैं।


🧭 कैसे काम करता है Cosma का सिस्टम?

Cosma की तकनीक तीन मुख्य हिस्सों में बंटी है:

1️⃣ अंडरवाटर ड्रोन:

छोटे आकार के स्वचालित ड्रोन समुद्र की सतह के ठीक ऊपर उड़ते हुए फोटोग्राफिक मैपिंग करते हैं। ये ड्रोन कम लागत में बड़ा क्षेत्र कवर कर सकते हैं।

2️⃣ क्लाउड-नेटीव प्लेटफ़ॉर्म:

मैपिंग के बाद, सारी जानकारी Cosma के क्लाउड-आधारित सिस्टम में जाती है। यह प्लेटफ़ॉर्म अत्याधुनिक तकनीकों से फोटो, वीडियो और डाटा को प्रोसेस करता है।

3️⃣ AI टूलबॉक्स:

Cosma के पास एक खास AI आधारित टूलकिट है जो समुद्र की सतह की 3D मॉडलिंग, प्रजातियों की पहचान, और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी करता है।


🌍 किनके साथ काम करता है Cosma?

Cosma ने दुनिया की कुछ बड़ी संस्थाओं के साथ साझेदारी की है:

  • 🌱 WWF (World Wildlife Fund) – समुद्री जीवन के संरक्षण के लिए
  • 🔋 RWE – एक ऊर्जा कंपनी, जो समुद्री पवन ऊर्जा में काम करती है
  • 🏗️ EGIS – इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्लानिंग से जुड़ी कंपनी

इन ग्राहकों के साथ Cosma समुद्र के भीतर की जानकारी जुटाकर सतत विकास, ईको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर, और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद कर रहा है।


📈 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Cosma के CEO Frédéric Mittaine के अनुसार, यह फंडिंग कंपनी को इन क्षेत्रों में मदद करेगी:

  • ऑपरेशन्स का विस्तार – नए बाजारों में प्रवेश, जैसे भारत, दक्षिण एशिया और दक्षिण अमेरिका।
  • रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) – AI और मशीन लर्निंग क्षमताओं को और मज़बूत करना।
  • प्रोडक्ट डेप्लॉयमेंट – अधिक ड्रोन यूनिट्स का निर्माण और समुद्री मिशनों को स्केल करना।

🔬 भारत और अन्य देशों के लिए क्या मायने रखता है Cosma?

भारत जैसे समुद्री राष्ट्र के लिए Cosma की तकनीक कई मायनों में उपयोगी हो सकती है:

  • कोस्टल इकोसिस्टम की निगरानी (जैसे सुंदरबन या अंडमान निकोबार द्वीप)
  • ऑफशोर विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स के इकोलॉजिकल प्रभावों का आकलन
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में संसाधनों का बेहतर प्रबंधन
  • पर्यावरणीय आपदा (जैसे ऑयल स्पिल) के प्रभाव का तुरंत विश्लेषण

अगर Cosma भारत में अपने प्रोडक्ट और सेवाएं लाता है, तो यह ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) को नई दिशा दे सकता है।


🤖 स्टार्टअप्स में तकनीक का बढ़ता रोल

Cosma जैसे स्टार्टअप्स यह दिखाते हैं कि कैसे:

  • AI और डेटा एनालिटिक्स सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समुद्र जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी काम कर रहे हैं।
  • क्लाइमेट टेक और ओशनटेक जैसी नई श्रेणियों में इनोवेशन हो रहा है।
  • दुनियाभर में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में स्टार्टअप्स अहम भूमिका निभा रहे हैं।

📅 आगे का रोडमैप

Cosma ने बताया है कि:

  • पहले 20 यूनिट्स का निर्माण हो चुका है
  • ये यूनिट्स 2025 के अंत तक भारत समेत कई देशों में तैनात किए जाएंगे
  • कंपनी दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका में साझेदारियाँ तलाश रही है
  • भारत और अमेरिका में डायरेक्ट सेल्स मॉडल, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया में व्हाइट-लेबल डील्स पर काम होगा

🔚 निष्कर्ष

Cosma एक ऐसा उदाहरण है जो यह दिखाता है कि टेक्नोलॉजी का प्रयोग सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या ई-कॉमर्स तक सीमित नहीं है। पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिकी जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

भारत में ऐसे समाधानों की ज़रूरत और संभावनाएं दोनों मौजूद हैं। अब देखना यह है कि Cosma कब और कैसे भारतीय बाजार में प्रवेश करता है, और क्या वह भारत की ब्लू इकोनॉमी का हिस्सा बन पाता है या नहीं।

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