AppsForBharat ने जुटाए ₹175 करोड़,

AppsForBharat

भारत में श्रद्धा और तकनीक के संगम का सबसे नया उदाहरण है बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप AppsForBharat, जो अपने भक्ति आधारित प्लेटफॉर्म Sri Mandir के ज़रिए लाखों श्रद्धालुओं को डिजिटल सेवा दे रहा है। अब इस स्टार्टअप ने ₹175 करोड़ (लगभग $20 मिलियन) की Series C फंडिंग जुटाई है। यह फंडिंग राउंड Susquehanna Asia Venture Capital ने लीड किया, जिसमें मौजूदा निवेशकों जैसे Nandan Nilekani की Fundamentum, Elevation Capital और Peak XV Partners ने भी भाग लिया।

यह निवेश ऐसे समय पर हुआ है जब कंपनी ने पिछले 12 महीनों में अपार वृद्धि दर्ज की है।


📱 Sri Mandir की लोकप्रियता: 4 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड्स

Sri Mandir ऐप अब तक 4 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को भारत के 70 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों में ऑनलाइन पूजा, चढ़ावा, प्रसाद वितरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है।

पिछले एक साल में, 12 लाख से अधिक यूज़र्स ने ऐप के माध्यम से 52 लाख से अधिक पूजा-अर्चनाएं और चढ़ावे किए हैं। इनमें से लगभग 20% उपयोगकर्ता विदेशों (जैसे अमेरिका, यूके, यूएई, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड) से हैं, जो दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति की डिजिटल पहुँच कितनी वैश्विक हो चुकी है।


💸 अब तक $50 मिलियन से अधिक जुटा चुका है स्टार्टअप

सितंबर 2024 में $18 मिलियन की सीरीज़ B फंडिंग के बाद यह नया राउंड स्टार्टअप के लिए और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। अब तक कंपनी ने कुल मिलाकर $50 मिलियन (₹415 करोड़ से अधिक) की पूंजी जुटाई है।


🧭 विस्तार की योजना: अयोध्या से हरिद्वार तक

Sri Mandir अब भारत के 20 से अधिक प्रमुख तीर्थ स्थलों में विस्तार करने की योजना बना रहा है, जिनमें अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन और हरिद्वार शामिल हैं। इन शहरों में कंपनी लॉजिस्टिक्स हब, सेवा केंद्र, और स्थानीय स्टाफ की नियुक्ति करेगी ताकि प्रसाद वितरण और पूजा सेवाएं समय पर पहुंचाई जा सकें।


🔍 AI-आधारित फीचर्स: डिजिटल भक्ति को और सरल बनाएगा

AppsForBharat अब AI-आधारित तकनीक विकसित कर रहा है जो उपयोगकर्ताओं को उनके भक्ति रुचियों के आधार पर कंटेंट सजेशन देगा, पूजा विधियों की जानकारी देगा, और सवालों के उत्तर देगा। इससे यूज़र्स को धार्मिक रीति-रिवाज़ों की बेहतर समझ मिलेगी और अनुभव ज्यादा सहज होगा।


🙌 कुंभ में सेवा, लाखों तक पहुंच

महाकुंभ मेला 2025 के दौरान, Sri Mandir ने Vedashram Trust के साथ साझेदारी करके 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को डिजिटल सेवा दी। इनमें डिजिटल पूजा, प्रसाद वितरण और त्रिवेणी संगम जल की आपूर्ति जैसी सेवाएं शामिल थीं।


📈 कमाई में भी बढ़ोतरी: मंदिरों की आमदनी में 25-30% इजाफा

कंपनी का दावा है कि ऑनलाइन पूजा बुकिंग के चलते मंदिरों की आय में 25-30% तक की वृद्धि हुई है। साथ ही, प्रसाद और पूजा सामग्री की मांग बढ़ने से स्थानीय विक्रेताओं को भी रोज़गार और आय के नए स्रोत मिले हैं।


💼 कंपनी की टीम और नेतृत्व

2020 में स्थापित यह स्टार्टअप प्रशांत सचान (CEO) के नेतृत्व में काम कर रहा है। प्रशांत के साथ टीम में Pulkit Pujara (पूर्व AirBlack फाउंडर) और Ayush Chamaria (पूर्व Matrix Partners) जैसे अनुभवी सदस्य शामिल हैं।

कंपनी ने इस साल की शुरुआत में 25 कर्मचारियों के लिए ESOP बायबैक भी किया था।


📊 राजस्व में उछाल, घाटे में नियंत्रण

वित्त वर्ष 2024 में AppsForBharat ने ₹18.53 करोड़ का परिचालन राजस्व दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹3.53 करोड़ के मुकाबले 5 गुना अधिक है। वहीं, कंपनी ने अपने घाटे को ₹44.97 करोड़ से घटाकर ₹39 करोड़ तक सीमित कर दिया है।

FY25 के वित्तीय आंकड़े अभी घोषित नहीं हुए हैं।


🏁 प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य

वर्तमान में AppsForBharat का मुकाबला अन्य धार्मिक और भक्ति ऐप्स जैसे:

  • DevDham
  • Utsav App
  • Sutradhar
  • Ghar Mandir
  • 27 Mantra

से है। हालांकि Sri Mandir की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता और निवेश इसे आगे निकलने की स्थिति में ला रही है।


🔮 भविष्य की दिशा: श्रद्धा और तकनीक का संगम

AppsForBharat भारतीय धार्मिक अनुभव को डिजिटल रूप में परिवर्तित कर रहा है। पूजा-पाठ, चढ़ावा, भक्ति संगीत और प्रसाद जैसी सेवाएं अब मोबाइल के एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। इससे भारतीय संस्कृति की पहुंच वैश्विक स्तर पर हो रही है और मंदिरों की आय में भी स्थायीत्व और वृद्धि देखी जा रही है।


✍️ निष्कर्ष

AppsForBharat ने दिखा दिया है कि भारत की परंपराओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर व्यवसायिक सफलता और सांस्कृतिक प्रभाव दोनों हासिल किए जा सकते हैं। ₹175 करोड़ की नई फंडिंग के साथ कंपनी अब और बड़े स्तर पर सेवा देने के लिए तैयार है।

Sri Mandir जैसे प्लेटफॉर्म न केवल श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हैं, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था, मंदिर प्रशासन, और धार्मिक पर्यटन को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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⚡ जून 2025 में TVS बना EV बाज़ार का राजा, Ola Electric की गिरावट जारी

ola electric

भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले Ola Electric इस सेगमेंट में राज कर रही थी, अब TVS Motor Company लगातार तीसरे महीने भी टॉप पोजिशन पर बनी हुई है। जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार, TVS ने 25,274 यूनिट्स की बिक्री की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 80% अधिक है। इसने कंपनी को 24% मार्केट शेयर दिलाया है।

📊 TVS ने लगातार तीसरे महीने टॉप पोजिशन हासिल की

वाहन पोर्टल से 1 जुलाई को संकलित आंकड़ों के अनुसार, TVS Motor Company अब भारत की इलेक्ट्रिक दोपहिया श्रेणी में अग्रणी बन गई है। मई 2025 में लीड लेने के बाद, जून में इसने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

🚀 साल दर साल बिक्री में 80% की वृद्धि

  • जून 2025: 25,274 यूनिट्स
  • मार्केट शेयर: 24%
  • स्थिति: लगातार तीसरे महीने नंबर 1

🛵 Bajaj Auto की तेज़ी बरकरार

Bajaj Auto ने भी जबरदस्त वृद्धि दिखाई और जून में 23,004 यूनिट्स बेचकर 22% मार्केट शेयर प्राप्त किया। यह पिछले साल की तुलना में 154% अधिक है।

  • मई 2025 में बिक्री: 21,940 यूनिट्स
  • जून 2025: 23,004 यूनिट्स
  • मार्केट स्थिति: दूसरा स्थान

TVS और Bajaj की बढ़त यह दिखाती है कि पारंपरिक ऑटो निर्माता अब स्टार्टअप्स को पछाड़ते हुए EV मार्केट में दबदबा बना रहे हैं।

🧯 Ola Electric की गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही

एक समय भारत की EV रेस में सबसे आगे चल रही Ola Electric की स्थिति अब कमजोर होती जा रही है। कंपनी ने जून 2025 में 20,189 यूनिट्स की बिक्री की, जो जून 2024 के मुकाबले 45% कम है।

  • जून 2024 में मार्केट शेयर: 46%
  • जून 2025 में मार्केट शेयर: 19%
  • स्थिति: तीसरा स्थान

📉 शेयर बाज़ार में भी गिरावट

Ola Electric की शेयर कीमत भी लगातार गिर रही है। एक साल पहले लिस्टिंग के समय ₹76 पर लिस्ट हुआ शेयर अब ₹43 पर ट्रेड कर रहा है — यानी 43% की गिरावट

❌ Hyundai और Kia ने Ola से निकाला हाथ

Hyundai Motor और Kia Corporation ने Ola Electric में अपनी पूरी हिस्सेदारी ₹690 करोड़ में बेच दी है। यह डील ब्लॉक ट्रांजैक्शन के जरिए हुई।

⚡ Ather Energy की मजबूत वापसी

Ather Energy ने जून में 14,512 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल के मुकाबले 133% अधिक है। कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 14% हो गई है।

  • पोजिशन: चौथा स्थान
  • शेयर बाजार में लिस्टिंग: मई 2025 में हुई

🏍️ Hero MotoCorp का प्रभाव बढ़ा

Hero MotoCorp, जो पारंपरिक बाइक्स के लिए जाना जाता है, अब EV बाजार में भी मजबूती से प्रवेश कर चुका है। जून में कंपनी ने 7,664 यूनिट्स की बिक्री की — 149% की साल-दर-साल ग्रोथ के साथ।

  • मार्केट शेयर: 7% (पिछले साल 4%)
  • स्थिति: पांचवां स्थान

📉 Ola की गिरावट बनाम TVS और Bajaj का उत्थान

इन आंकड़ों से यह साफ है कि भारत के ईवी टू-व्हीलर बाजार में बड़ा बदलाव हो रहा है। एक समय स्टार्टअप आधारित लीड में चल रही Ola Electric अब पीछे हो रही है, और वहीं TVS और Bajaj जैसे स्थापित ब्रांड अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

यह ट्रेंड यह दर्शाता है कि अब उपभोक्ता भरोसेमंद, सर्विस नेटवर्क से लैस, और गुणवत्ता आधारित ब्रांड को प्राथमिकता दे रहे हैं।

🔮 EV मार्केट का भविष्य: किस दिशा में जा रहा है भारत?

भारत का EV बाजार अब स्टेबल और प्रतिस्पर्धात्मक होता जा रहा है। जहां स्टार्टअप्स ने इस मार्केट को गति दी थी, वहीं अब पारंपरिक कंपनियां तकनीक, निवेश और डीलरशिप नेटवर्क के दम पर आगे निकल रही हैं।

संभावित ट्रेंड्स:

  • Ola और अन्य स्टार्टअप्स को सर्विस क्वालिटी और भरोसे में सुधार करना होगा।
  • TVS, Bajaj और Hero जैसे ब्रांड भविष्य में ज्यादा EV वेरिएंट्स ला सकते हैं।
  • ग्राहक अब परफॉर्मेंस, बैटरी लाइफ और सर्विस नेटवर्क को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं।

📌 निष्कर्ष

TVS Motor Company की जून 2025 में शीर्ष स्थान पर मौजूदगी, और Bajaj Auto की तेज़ ग्रोथ यह दिखाती है कि भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर क्षेत्र में अब पारंपरिक कंपनियां निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। दूसरी ओर, Ola Electric की गिरती बिक्री और शेयर मूल्य यह संकेत देती है कि बाज़ार में टिके रहने के लिए सिर्फ शुरुआती लीड काफी नहीं है — निरंतर इनोवेशन, गुणवत्ता और उपभोक्ता संतुष्टि की ज़रूरत है।

आने वाले महीनों में EV मार्केट में और भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

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🍳 Eggoz ने उठाए ₹125 करोड़ की Series C फंडिंग,

Eggoz

अंडों की प्रीमियम कंज़्यूमर ब्रांड Eggoz ने अपने Series C फंडिंग राउंड में ₹125 करोड़ (लगभग $14.7 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Gaja Capital ने किया है, जिसमें मौजूदा निवेशक IvyCap Ventures और Redbright Partners ने भी भागीदारी की।


🏦 फंडिंग ब्रेकअप और वैल्यूएशन

Eggoz की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी ने 1 इक्विटी शेयर और 15,334 Series C प्रेफरेंस शेयर ₹81,511 प्रति शेयर की कीमत पर जारी किए हैं, जिससे कुल ₹125 करोड़ जुटाए गए हैं।

  • 🟢 Gaja Capital – ₹100 करोड़
  • 🟣 IvyCap Ventures – ₹20.95 करोड़
  • 🔵 Redbright Partners – ₹4.05 करोड़

Entrackr के अनुमानों के अनुसार, इस निवेश के बाद Eggoz की वैल्यूएशन ₹480-500 करोड़ ($55-58 मिलियन) हो गई है, जो इसके पिछले राउंड की तुलना में 60% अधिक है।


🐔 Eggoz क्या करता है?

Eggoz की शुरुआत 2017 में बिहार से हुई थी, जिसकी स्थापना अभिषेक नेगी, आदित्य सिंह और उत्तम कुमार ने मिलकर की थी। कंपनी एक asset-light, किसान-आधारित मॉडल पर काम करती है, जहां से ताजे अंडे 24 घंटे के भीतर रिटेलर्स तक पहुंचाए जाते हैं।

Eggoz का फोकस केवल अंडे बेचने तक सीमित नहीं है। अब ब्रांड ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बढ़ाते हुए ready-to-cook फूड आइटम्स जैसे:

  • 🥟 मोमोज़
  • 🍔 बर्गर पैटीज़
  • 🍗 नगेट्स

जैसे उत्पादों को बाज़ार में उतारा है, जो अंडा-आधारित हैं और शहरी ग्राहकों के स्वाद और सुविधा के अनुसार बनाए गए हैं।


🏙️ शहरों में विस्तार और पहुंच

Eggoz ने अब तक दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, कोलकाता, जयपुर, लखनऊ सहित कई नॉन-मेट्रो शहरों में भी अपनी पकड़ बनाई है।

इसका उद्देश्य भारत के मिडल क्लास और न्यू एज कंज़्यूमर्स को हाई-क्वालिटी, न्यूट्रिशस और ब्रांडेड अंडे उपलब्ध कराना है—वो भी फार्म-टू-फोर्क मॉडल के जरिए।


📊 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

Eggoz ने अपने FY25 के आँकड़े अभी फाइल नहीं किए हैं, लेकिन FY24 में कंपनी का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा।

  • रेवेन्यू: ₹73.1 करोड़ – 33.6% सालाना बढ़ोतरी
  • लॉस: ₹25 करोड़ – 24% की कमी

इससे पता चलता है कि कंपनी तेज़ी से ग्रोथ कर रही है, और साथ ही अपने घाटे को भी कंट्रोल कर रही है।


💰 अब तक की कुल फंडिंग

Eggoz अब तक $27 मिलियन (लगभग ₹225 करोड़ से अधिक) की कुल फंडिंग जुटा चुका है:

  • Series B – $8.8 मिलियन (नेतृत्व: IvyCap Ventures)
  • Series A – $3.5 मिलियन
  • Seed Funding – ₹3.7 करोड़

🗣️ संस्थापकों का विज़न

Eggoz के सह-संस्थापकों का मानना है कि भारत में प्रोटीन डिफिशिएंसी एक गंभीर मुद्दा है और अंडे एक किफायती, पोषण-समृद्ध समाधान हो सकते हैं।

“हमारा लक्ष्य है कि भारत में हर घर तक ब्रांडेड और ताज़ा अंडे पहुँचें। Gaja Capital के साथ इस नई फंडिंग से हम अपने टेक्नोलॉजी, आपूर्ति श्रृंखला और उत्पाद पोर्टफोलियो को और मज़बूत करेंगे,” — संस्थापक टीम।


🌱 आगे की रणनीति

फंडिंग के बाद Eggoz निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान देगा:

  1. किसानों के साथ मजबूत नेटवर्क बनाना
  2. ब्रांड विस्तार के लिए एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग
  3. रीटेल नेटवर्क को गांवों से शहरी बाजार तक फैलाना
  4. नई कैटेगरीज में प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन
  5. टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड ट्रैकिंग और क्वालिटी कंट्रोल

📉 क्या है मार्केट इम्पैक्ट?

भारत में अंडों का बाज़ार तेजी से बढ़ रहा है, और उपभोक्ता अब सिर्फ सस्ते अंडे नहीं बल्कि साफ, पौष्टिक और भरोसेमंद ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की तलाश में हैं। Eggoz जैसे स्टार्टअप इस गेप को भर रहे हैं।

इसके अलावा, Eggoz का किसान-केंद्रित मॉडल ग्रामीण भारत में रोज़गार और आय में वृद्धि का माध्यम भी बनता जा रहा है।


🔚 निष्कर्ष

Eggoz की ताज़ा ₹125 करोड़ की फंडिंग से यह स्पष्ट है कि भारत में एग बेस्ड कंज़्यूमर ब्रांड्स के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। कंपनी ने जिस तरह से फार्म-टू-किचन मॉडल, उत्पाद विविधता और मजबूत ब्रांड बिल्डिंग पर ध्यान केंद्रित किया है, वह इसे अपने सेगमेंट में एक लीडर ब्रांड बनने की दिशा में तेजी से आगे ले जा रहा है।

📍 ऐसे ही स्टार्टअप और फंडिंग से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहिए — FundingRaised.in, हिंदी में, विस्तार से।

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Wakefit 9 महीनों में ₹971 करोड़ की कमाई,

Wakefit

होम और स्लीप सॉल्यूशंस ब्रांड Wakefit ने अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास IPO (Initial Public Offering) के लिए जमा कर दिया है। इस कदम से संकेत मिलता है कि Wakefit अब सार्वजनिक निवेशकों से पूंजी जुटाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके वित्तीय दस्तावेजों में कुछ अहम टिप्पणियां भी देखने को मिली हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।


📊 9 महीने में ₹971 करोड़ की कमाई

FY25 की पहली तीन तिमाहियों (यानि 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2024) में Wakefit ने ₹971 करोड़ की ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज की, जो FY24 की पूरी आय ₹986 करोड़ के लगभग बराबर है। कंपनी की टॉपलाइन का 97% हिस्सा मैन्युफैक्चर किए गए प्रोडक्ट्स की बिक्री से आया, जो ₹951 करोड़ रही। अन्य रेवेन्यू ट्रे़डेड गुड्स और अन्य स्रोतों से आई, जिससे कुल आय ₹994 करोड़ तक पहुंची।


💸 खर्च और घाटा

इन 9 महीनों में कंपनी का कुल खर्च ₹1,003 करोड़ रहा, जो पिछले पूरे वित्त वर्ष FY24 में ₹1,032 करोड़ था। इसमें प्रमुख खर्च इस प्रकार थे:

  • 🔩 मटेरियल कॉस्ट: ₹433 करोड़ (कुल खर्च का 43%)
  • 👩‍💼 एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: ₹126 करोड़
  • 📢 विज्ञापन खर्च: ₹82 करोड़
  • 🚚 डिलीवरी खर्च: ₹75 करोड़
  • 🖥️ आईटी, डिप्रीसिएशन और अन्य ओवरहेड्स

कुल मिलाकर, कंपनी ने FY25 की शुरुआती तीन तिमाहियों में ₹9 करोड़ का घाटा दर्ज किया, जो FY24 के ₹15 करोड़ के घाटे से कम है।


📈 EBITDA और ROCE

हालांकि नेट घाटा रहा, लेकिन Wakefit ने इस अवधि में ₹76 करोड़ का सकारात्मक EBITDA दर्ज किया, जो इसके 7.65% के EBITDA मार्जिन को दर्शाता है। कंपनी का ROCE (Return on Capital Employed) 1.33% रहा।

यूनिट लेवल पर देखें तो Wakefit ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.03 खर्च किए। इसके पास ₹577 करोड़ के करेंट एसेट्स हैं, जिसमें से ₹19 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस में हैं।


🚨 ऑडिटर्स की चेतावनियाँ

Wakefit के DRHP में ऑडिटर्स ने कुछ अहम मुद्दों पर चिंता जताई:

  • 📄 फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स और बैंक फाइलिंग्स के बीच मेल नहीं
  • GST सहित कुछ टैक्स पेमेंट्स में देरी या विवाद
  • आंतरिक ऑडिट सिस्टम की कमी
  • 💾 अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में अनिवार्य ऑडिट ट्रेल फीचर का अभाव
  • 💸 पिछले तीन वर्षों में लगातार कैश घाटा

हालांकि इन टिप्पणियों से वित्तीय आंकड़ों में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन Wakefit ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी टिप्पणियाँ कंपनी की प्रतिष्ठा और निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।


🧮 गैर-मानक मेट्रिक्स की बात

Wakefit ने DRHP में यह भी स्पष्ट किया है कि वह EBITDA, Adjusted EBITDA और ROCE जैसे गैर-GAAP (Generally Accepted Accounting Principles) मेट्रिक्स का उपयोग प्रदर्शन मापने के लिए करती है। कंपनी ने यह स्वीकार किया कि ये मेट्रिक्स उद्योग में मानकीकृत नहीं हैं और प्रतिस्पर्धियों से तुलना योग्य नहीं हो सकते।

इसीलिए, कंपनी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल इन वैकल्पिक मेट्रिक्स पर भरोसा न करें, बल्कि स्टैच्युटरी अकाउंटिंग नॉर्म्स के तहत ऑडिटेड फाइनेंशियल्स को प्राथमिकता दें।


🏠 Wakefit का बिज़नेस मॉडल

Wakefit की पहचान भारत के अग्रणी स्लीप और होम सॉल्यूशंस ब्रांड के रूप में है। कंपनी की रेंज में शामिल हैं:

  • ✅ मैट्रेसेज़
  • ✅ बेड्स और फर्नीचर
  • ✅ पिलो और कुशन
  • ✅ स्टडी टेबल्स, सोफा, डाइनिंग सेट आदि

कंपनी ऑनलाइन चैनल्स के ज़रिए डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) मॉडल पर काम करती है और अपनी ब्रांड वैल्यू, क्वालिटी प्रोडक्ट्स और ग्राहक अनुभव के कारण एक मजबूत यूज़र बेस बना चुकी है।


📈 IPO से क्या उम्मीद?

Wakefit का IPO भारत के D2C होम ब्रांड्स के लिए एक उदाहरण बन सकता है। अगर यह सफल रहता है, तो यह संकेत देगा कि भारत के घरेलू ब्रांड अब सिर्फ प्राइवेट फंडिंग पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि पब्लिक मार्केट से पूंजी जुटाने के लिए भी तैयार हैं।

हालांकि, ऑडिटर्स की चेतावनियों और मुनाफे में सुधार की सीमित गति को देखते हुए, निवेशकों को सतर्कता से निवेश निर्णय लेना होगा


📢 निष्कर्ष

Wakefit का IPO DRHP एक तरफ कंपनी की तेजी से बढ़ती टॉपलाइन और मुनाफे की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है, तो दूसरी ओर ऑडिटर्स की चिंताएं कंपनी के गवर्नेंस और ऑडिट सिस्टम में सुधार की आवश्यकता बताती हैं।

अगर Wakefit पारदर्शिता बनाए रखे और अपने ऑडिट फ्रेमवर्क को मजबूत करे, तो यह IPO ना सिर्फ कंपनी के लिए, बल्कि पूरे D2C सेक्टर के लिए एक प्रेरक कदम हो सकता है।

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Utopia Therapeutics को मिला $1.5 मिलियन का फंड,

Utopia Therapeutics

हैदराबाद स्थित बायोटेक स्टार्टअप Utopia Therapeutics ने मोटापा और मेटाबॉलिक बीमारियों के इलाज के लिए अगली पीढ़ी की वैक्सीन विकसित करने हेतु $1.5 मिलियन (लगभग ₹12.5 करोड़) की सीड फंडिंग हासिल की है। यह निवेश अमेरिकी इन्वेस्टमेंट फर्म Whale Tank द्वारा किया गया है। इस फंडिंग का उपयोग कंपनी अपने प्रमुख वैक्सीन कैंडिडेट UT009 के प्रीक्लिनिकल विकास को तेज़ करने के लिए करेगी।


💡 क्या है Utopia Therapeutics?

Utopia Therapeutics की स्थापना वर्ष 2024 में उदय सक्सेना और गोपी कडियाला ने मिलकर की थी। यह स्टार्टअप मोटापा (Obesity) और उससे जुड़ी क्रॉनिक मेटाबॉलिक बीमारियों जैसे टाइप 2 डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर डिज़ीज के इलाज** के लिए इम्यूनोथेरेपी आधारित अगली पीढ़ी की वैक्सीन पर काम कर रहा है।


🧬 UT009: मोटापे के खिलाफ पहली वैक्सीन?

Utopia Therapeutics का प्रमुख उत्पाद UT009, एक इम्यूनोथेरेप्यूटिक वैक्सीन है, जिसे वज़न बढ़ने की जड़ में जाकर समाधान देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। यह वैक्सीन शरीर में लिपिड-असोसिएटेड एंटीजन को निशाना बनाकर फैट जमा होने की प्रक्रिया को धीमा या समाप्त करने में सक्षम है।

कंपनी का दावा है कि UT009 न केवल मोटापा कम करने में सहायक होगी, बल्कि मेटाबॉलिक हेल्थ सुधारने में भी मदद करेगी। यह मौजूदा दवाओं से अलग है, जो अक्सर केवल भूख कम करने या वज़न घटाने तक सीमित होती हैं।


🧪 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, Whale Tank से प्राप्त फंड का उपयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

  • UT009 के प्रीक्लिनिकल परीक्षणों को तेज़ करना
  • Regulatory toxicology studies की तैयारी
  • IND (Investigational New Drug) फ़ाइलिंग के लिए ज़रूरी मील के पत्थर तक पहुँचना
  • मानव परीक्षणों (Phase I clinical trials) के लिए तैयारी

🧫 नवाचार के ज़रिए समाधान

Utopia Therapeutics के सह-संस्थापकों का मानना है कि मोटापा एक वैश्विक महामारी बन चुका है और वर्तमान में उपलब्ध उपचार विकल्प सीमित हैं।

उदय सक्सेना और गोपी कडियाला ने कहा:

“मोटापा सिर्फ एक जीवनशैली की समस्या नहीं, बल्कि एक जटिल बायोलॉजिकल डिसऑर्डर है। हमारी वैक्सीन मोटापे की मूल वजहों को निशाना बनाती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक समाधान मिल सके। Whale Tank का यह निवेश हमें इस विज्ञान को लैब से अस्पतालों तक पहुंचाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद करेगा।”


🧪 क्या है UT018 प्रोडक्ट लाइन?

UT009 के अलावा, कंपनी अपनी UT018-बेस्ड रीजेनेरेटिव प्रोडक्ट लाइन पर भी काम कर रही है, जो GRAS-क्वालिफाइड (Generally Recognized As Safe) और नॉन-फार्मास्युटिकल एप्लिकेशन्स के अंतर्गत आती है।

UT018 उत्पादों को स्केल-अप और कमर्शियलाइज़ करने की योजना भी तैयार की जा रही है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए नेचुरल और सुरक्षित समाधान पेश किए जा सकें।


🌍 मोटापे की वैश्विक चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, विश्वभर में हर 3 में से 1 व्यक्ति मोटापे से प्रभावित है, और भारत भी इस महामारी से अछूता नहीं है। मोटापा न केवल डायबिटीज़ और हृदय रोग जैसी बीमारियों को बढ़ावा देता है, बल्कि इससे कामकाजी जीवन और आर्थिक उत्पादकता पर भी बुरा असर पड़ता है।

ऐसे में Utopia Therapeutics जैसे स्टार्टअप्स का आगे आना, एक आशाजनक बदलाव की ओर संकेत करता है।


📈 बायोटेक सेक्टर में बढ़ती दिलचस्पी

भारत में बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। खासकर हेल्थकेयर और मेटाबॉलिक डिजीज जैसे सेक्टर्स में नवाचार आधारित समाधान की मांग तेजी से बढ़ रही है। Whale Tank जैसे निवेशकों का Utopia Therapeutics में निवेश करना इस बात का प्रमाण है कि नए वैज्ञानिक दृष्टिकोणों को अब बाज़ार में वास्तविक संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है


📌 निष्कर्ष

Utopia Therapeutics का UT009 भारत और दुनिया के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। मोटापे जैसी गंभीर बीमारी के लिए वैक्सीन आधारित उपचार अब तक केवल एक सपना था, जिसे अब वैज्ञानिक सच्चाई में बदला जा रहा है।

Whale Tank से मिली फंडिंग न केवल स्टार्टअप को आगे बढ़ने का रास्ता देगी, बल्कि भविष्य में भारत को क्रॉनिक बीमारियों के इलाज में वैश्विक लीडर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम हो सकती है।


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📱 PhonePe IPO की तैयारी में जुटी, $15 बिलियन वैल्यूएशन पर जुटा सकती है $1.5 बिलियन

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भारत की प्रमुख फिनटेक यूनिकॉर्न PhonePe जल्द ही IPO (Initial Public Offering) के लिए ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल करने की योजना बना रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अगस्त 2025 तक DRHP (Draft Red Herring Prospectus) दाखिल कर सकती है और इसका लक्ष्य है $1.5 बिलियन तक जुटाने का, जिसकी संभावित वैल्यूएशन $15 बिलियन आंकी जा रही है।


🧑‍💼 कंपनी का नेतृत्व और निवेशक प्रोफाइल

PhonePe की स्थापना समीर निगम के नेतृत्व में हुई थी और आज यह देश की सबसे बड़ी UPI भुगतान कंपनी बन चुकी है। दिसंबर 2023 में, PhonePe ने $1 बिलियन की फंडिंग राउंड का हिस्सा बनते हुए $100 मिलियन की पूंजी जुटाई थी, तब इसकी प्री-मनी वैल्यूएशन $12 बिलियन थी।

PhonePe के मुख्य निवेशकों में शामिल हैं:

  • Walmart (मुख्य शेयरधारक)
  • Microsoft
  • General Atlantic
  • Tiger Global
  • Ribbit Capital
  • TVS Capital
  • Tencent
  • Qatar Investment Authority

💳 भारत में सबसे बड़ा UPI खिलाड़ी

PhonePe वर्तमान में भारत में सबसे बड़ा UPI ऐप है, जो हर दिन 310 मिलियन से अधिक UPI ट्रांजेक्शन प्रोसेस करता है। कंपनी का बाजार में 46.7% से अधिक हिस्सेदारी है, जो इसे भारतीय डिजिटल भुगतान परिदृश्य में निर्विवाद नेता बनाता है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 की झलक

FY24 (वित्त वर्ष 2023-24) में PhonePe ने शानदार प्रदर्शन किया:

  • 📊 राजस्व (Revenue): ₹5,000 करोड़ से अधिक
  • 📉 नुकसान में कमी: FY23 की तुलना में 28.6% की गिरावट के साथ ₹1,996 करोड़ का घाटा

यह सुधार दर्शाता है कि PhonePe अपनी ग्रोथ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के बीच संतुलन बनाने में सफल रहा है।


🌍 ‘रिवर्स फ्लिप’: भारत वापसी की रणनीति

PhonePe ने IPO की तैयारी के तहत अक्टूबर 2022 में अपना डोमिसाइल (मुख्यालय) सिंगापुर से भारत स्थानांतरित कर लिया था। यह कदम Flipkart से अलग होकर स्वतंत्र संचालन की दिशा में एक निर्णायक पहल थी।

PhonePe उन भारतीय स्टार्टअप्स में शामिल है जिन्होंने ‘रिवर्स फ्लिप’ के ज़रिए अपनी कंपनियों को भारत में दोबारा रजिस्टर किया है। इससे पहले Razorpay, Groww, Zepto और Meesho जैसे स्टार्टअप भी यह कदम उठा चुके हैं।


🛡️ PhonePe का बिजनेस विस्तार: पेमेंट्स से परे

हालांकि PhonePe की मुख्य आय UPI और डिजिटल पेमेंट्स से आती है, कंपनी ने हाल के वर्षों में अपने बिजनेस मॉडल का विस्तार किया है:

  • 💳 क्रेडिट (लोन) सर्विसेस
  • 🛡️ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स
  • 📈 स्टॉक ब्रोकिंग और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म

इन नई पेशकशों के ज़रिए PhonePe फिनटेक सेक्टर के व्यापक हिस्से को कवर कर रहा है और अपने रेवेन्यू के स्रोतों को विविध बना रहा है।


🧾 IPO की रणनीति और संभावित असर

PhonePe का IPO भारत के फिनटेक स्टार्टअप्स के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। $1.5 बिलियन के लक्ष्य के साथ यह 2025 का सबसे बड़ा IPO में से एक बन सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि:

  • भारत में डिज़िटल भुगतान की भारी वृद्धि ने PhonePe को जबरदस्त स्केल पर पहुंचा दिया है।
  • ✅ IPO से प्राप्त पूंजी कंपनी को क्रेडिट और इंश्योरेंस जैसी नई श्रेणियों में और तेज़ी से निवेश करने का अवसर देगी।
  • ✅ भारत सरकार की फिनटेक-सहायक नीतियों और डिजिटल इंडिया अभियान के कारण ऐसी कंपनियों को पूंजी बाजार में मजबूत समर्थन मिल रहा है।

💡 विशेषज्ञों की राय

वित्तीय जानकारों के अनुसार, PhonePe की IPO योजना दो कारणों से खास है:

  1. स्थिर उपयोगकर्ता आधार और ट्रांजेक्शन वॉल्यूम के कारण कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं।
  2. डिजिटल क्रांति और UPI इकोसिस्टम में उसकी लीडरशिप, इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है।

🔍 निष्कर्ष

PhonePe का IPO सिर्फ एक और पब्लिक लिस्टिंग नहीं है, बल्कि यह भारत के फिनटेक स्टार्टअप्स की परिपक्वता और वैश्विक निवेशकों के भरोसे का प्रतीक भी है। कंपनी की तकनीकी मजबूती, विविध रेवेन्यू मॉडल और तेज़ी से बढ़ते उपयोगकर्ता आधार को देखते हुए यह पेशकश निश्चित रूप से निवेशकों की नज़रों में रहेगी।

जैसे-जैसे अगस्त 2025 नज़दीक आएगा, सभी की निगाहें इस IPO पर टिकी रहेंगी।


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Read more :🏠 PharmEasy के पूर्व को-फाउंडर्स ने लॉन्च किया ‘All Home’

🏠 PharmEasy के पूर्व को-फाउंडर्स ने लॉन्च किया ‘All Home’

PharmEasy

भारत के हेल्थटेक यूनिकॉर्न PharmEasy के तीन पूर्व को-फाउंडर्स — धर्मिल शेट्ठ, धवल शाह और हार्दिक देधिया — ने अब कंज्यूमर स्पेस में एक नई शुरुआत की है। उन्होंने मिलकर लॉन्च किया है All Home, जो एक वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म है आर्किटेक्चरल और इंटीरियर डिज़ाइन प्रोडक्ट्स के लिए।

All Home का उद्देश्य भारत के बिखरे हुए होम इंटीरियर सेक्टर को संगठित और टेक्नोलॉजी से सशक्त बनाना है, ताकि उपभोक्ताओं को सैनिटरीवेयर, फर्नीचर, किचन, वॉर्डरोब, फर्निशिंग, लाइटिंग और हार्डवेयर जैसी तमाम ज़रूरतों का समाधान एक ही जगह पर मिल सके।


🛋️ क्या है All Home और इसका विज़न?

All Home अपने प्लेटफॉर्म के ज़रिए मजबूत और लाभदायक होम इंप्रूवमेंट ब्रांड्स को जोड़ रहा है। यह इन ब्रांड्स को टेक्नोलॉजी, डिज़ाइनर इनसाइट्स, और इंटरनेट-चालित मैन्युफैक्चरिंग व डिस्ट्रीब्यूशन में सहयोग करता है।

स्टार्टअप पहले से ही Colour Coats, House of W और Fiamarc जैसे ब्रांड्स के साथ लाइव हो चुका है, और आने वाले समय में और भी ब्रांड्स जुड़ने वाले हैं।

कंपनी का दावा है कि वह पिछले छह महीनों से स्टील्थ मोड में ऑपरेट कर रही थी, और इस दौरान ही उसने ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी और स्केल हासिल कर लिया है।


💬 फाउंडर्स का बयान: “अब ‘मकान’ की बारी है”

तीनों को-फाउंडर्स ने एक साझा बयान में कहा:

“रोटी और कपड़ा के बाद भारत का अगला कंज्यूमर बूम ‘मकान’ में है। All Home के ज़रिए हम ऐसे ब्रांड्स बना रहे हैं जो भारत के घरों, ऑफिसों और शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भरोसेमंद समाधान पेश करें। आज के उपभोक्ता अपने रहने और काम करने की जगहों में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही प्रोडक्ट्स और चैनल्स नहीं मिलते। All Home इसी गैप को भरने का काम करेगा।”


💰 Bessemer के नेतृत्व में $120 मिलियन वैल्यूएशन पर फंडिंग

All Home ने हाल ही में एक गोपनीय फंडिंग राउंड भी क्लोज़ किया है, जिसका नेतृत्व किया है Bessemer Venture Partners ने। यह निवेश कंपनी के $120 मिलियन से अधिक वैल्यूएशन पर हुआ है।

इस राउंड में कई जाने-माने एंजल इन्वेस्टर्स ने भी भाग लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • सिद्धार्थ शाह (PharmEasy)
  • निकेत शाह (Motilal Oswal)
  • शालिभद्र शाह (Motilal Oswal)
  • कबीर नरंग (B Capital)
  • अंकुर गुलाटी (Warburg Pincus)

हालांकि कंपनी ने फंडिंग का सटीक आंकड़ा नहीं बताया, लेकिन Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक यह राशि लगभग $20 मिलियन हो सकती है।


📉 PharmEasy छोड़ने के 5 महीने बाद नई शुरुआत

यह डिवेलपमेंट ऐसे समय आया है जब धर्मिल शेट्ठ, धवल शाह और हार्दिक देधिया ने PharmEasy को पूरी तरह से अलविदा कह दिया है। उन्होंने करीब 5 महीने पहले फार्मईज़ी से औपचारिक रूप से अलग होकर अपने इस नए वेंचर की नींव रखी थी।

गौरतलब है कि PharmEasy की हालत पिछले वित्तीय वर्ष यानी FY24 में खराब रही, जहां कंपनी को राजस्व में गिरावट और वैल्यूएशन में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। FY25 के आंकड़े अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

अब कंपनी की कमान सिद्धार्थ शाह के पास है, जो पहले PharmEasy के को-फाउंडर्स में शामिल थे और अब CEO की भूमिका में हैं।


🏡 क्यों है All Home पर नज़र रखना ज़रूरी?

भारत में होम इम्प्रूवमेंट इंडस्ट्री तेजी से विकसित हो रही है। उपभोक्ता अब सिर्फ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि अनुभव और डिजाइन की भी तलाश कर रहे हैं। लेकिन इस क्षेत्र में अब तक कोई बड़ा ब्रांडेड और टेक्नोलॉजी-समर्थित समाधान नहीं था।

All Home इस गैप को भरने की दिशा में एक सशक्त और संगठित प्रयास है। यह न सिर्फ ब्रांड्स को डिजिटल रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी एक सुविधाजनक और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म प्रदान कर रहा है।


📊 इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि All Home जैसी पहल भारत के शहरी और सेमी-अर्बन इलाकों में होम रेनोवेशन और डिज़ाइन मार्केट को नया आकार दे सकती है। खासकर ऐसे समय में जब डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन और डाइरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।


🔚 निष्कर्ष

All Home केवल एक नया स्टार्टअप नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘मकान’ फोकस्ड कंज्यूमर बूम को दिशा देने वाला अगला बड़ा ब्रांड बन सकता है। PharmEasy के अनुभवी को-फाउंडर्स द्वारा शुरू किया गया यह वेंचर अब एक संगठित, डिज़ाइन-फोकस्ड और टेक्नोलॉजी-सपोर्टेड होम इंटीरियर इकोसिस्टम बनाने की ओर अग्रसर है।

आने वाले महीनों में, All Home की ग्रोथ और नए ब्रांड पार्टनरशिप्स इस इंडस्ट्री के भविष्य को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं।


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Read more :🏥 Pristyn Care का तेज़ी से बढ़ता अस्पताल

🏥 Pristyn Care का तेज़ी से बढ़ता अस्पताल

Pristyn Care

हेल्थटेक स्टार्टअप Pristyn Care ने भारत के तीन प्रमुख शहरों — गुड़गांव, हैदराबाद और कोच्चि — में अपने तीन नए डिजिटल इंटीग्रेटेड अस्पतालों के लॉन्च के साथ अपने हॉस्पिटल नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। इस कदम के साथ ही Pristyn Care की खुद की अस्पतालों की कुल संख्या 8 हो गई है — और ये सब सिर्फ चार महीनों के अंदर हुआ है।

यह विस्तार Pristyn Care की दक्षिण भारत में पहली एंट्री को भी चिह्नित करता है। कंपनी का कहना है कि वह अब 200,000 वर्ग फुट के क्लिनिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को संचालित कर रही है, जिसमें शामिल हैं:

  • 400 बेड
  • 20 से अधिक मॉड्यूलर ऑपरेटिंग थिएटर
  • 50+ आईसीयू बेड्स
  • 550+ मेडिकल प्रोफेशनल्स की टीम

📍 फरवरी में हुआ था पहला लॉन्च, अब चार महीने में 8 अस्पताल

Pristyn Care ने फरवरी 2025 में पहली बार अपने 5 अस्पताल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में लॉन्च किए थे, जो कि कंपनी की अब तक की एसेट-लाइट मॉडल से एक बड़ा बदलाव था। इससे पहले Pristyn Care अलग-अलग हॉस्पिटल पार्टनर्स के साथ मिलकर सर्जरी सेवाएं देती थी, लेकिन अब कंपनी खुद की सुविधाओं में इलाज दे रही है।

अब कंपनी ने गुड़गांव, हैदराबाद और कोच्चि में 90,000 स्क्वायर फीट का नया इन्फ्रास्ट्रक्चर जोड़ा है, जो डिजिटल टूलिंग और बेहतर क्लिनिकल इंटीग्रेशन के साथ लैस है।


💡 क्या है Pristyn Care के डिजिटल अस्पतालों की खासियत?

Pristyn Care का हर अस्पताल कंपनी के मालिकाना डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा है, जिसमें शामिल हैं:

  • 📲 रियल-टाइम क्लिनिकल अलर्ट
  • 📁 EMRs (Electronic Medical Records)
  • ⏱️ तेज़ डिस्चार्ज प्रोसेस
  • वन-टैप इंश्योरेंस अप्रूवल

Pristyn Care के को-फाउंडर डॉ. वैभव कपूर ने कहा:

“हम नई शुरुआत नहीं कर रहे हैं — हमारी तकनीक पहले से बनी और लाइव है। अब हमारा लक्ष्य इसे हर नए अस्पताल में एकीकृत करना है, ताकि मरीजों को कम प्रतीक्षा समय, स्पष्ट संवाद और एकीकृत देखभाल का अनुभव मिल सके।”


🏥 शहर-विशेष सेवाएं: हर अस्पताल की अपनी विशेषज्ञता

  1. गुड़गांव (NCR) – महिलाओं के स्वास्थ्य और नवजात देखभाल पर फोकस; NCR में Pristyn Care की यह छठी सुविधा है।
  2. हैदराबाद24×7 ट्रॉमा केयर, हाई-टेक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी और आपातकालीन सेवाएं।
  3. कोच्चिएमरजेंसी केयर के साथ एक अनूठा रिवरसाइड रिहैब विंग, खासतौर पर केरल के मरीजों के लिए।

📈 पहला अस्पताल बना मुनाफे का मॉडल

दिल्ली में Pristyn Care का पहला अस्पताल लॉन्च के सिर्फ 8 हफ्तों में प्रॉफिटेबल हो गया था। कंपनी का कहना है कि यह डबल डिजिट मुनाफे तक पहुंच गया है, जो किसी भी हेल्थकेयर स्टार्टअप के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।


🎯 FY28 तक 50 अस्पतालों का लक्ष्य

Pristyn Care अब भारत भर में अपने अस्पताल नेटवर्क को तेज़ी से बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY28 तक कुल 50 अस्पताल शुरू किए जाएं। आगामी लॉन्च के लिए मुंबई, बेंगलुरु और पुणे को चुना गया है।


💬 विशेषज्ञों की राय

हेल्थटेक इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि Pristyn Care का यह बदलाव भारत में सर्जिकल हेल्थकेयर डिलिवरी मॉडल को दोबारा परिभाषित कर सकता है। डिजिटल इंटीग्रेशन के ज़रिए मरीजों को:

  • 📉 कम प्रतीक्षा समय,
  • 🧾 पारदर्शी बिलिंग,
  • 🔄 बेहतर फॉलो-अप केयर मिलती है।

🔚 निष्कर्ष

Pristyn Care ने चार महीनों में 8 अस्पताल शुरू कर एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। कंपनी का फोकस अब देशव्यापी नेटवर्क स्थापित करने पर है, जो तकनीक से समर्थित हो और बेहतर रोगी अनुभव प्रदान करे। गुड़गांव से लेकर कोच्चि तक, Pristyn Care न केवल अस्पताल बना रहा है बल्कि भारत में हेल्थकेयर का भविष्य भी रच रहा है।


📌 अपडेट रहें — आने वाले महीनों में मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में Pristyn Care के नए अस्पतालों की लॉन्चिंग की खबरें भी सामने आएंगी।

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✈️ MakeMyTrip जुटाए $2.5 बिलियन

MakeMyTrip

ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म MakeMyTrip ने एक बड़ी वित्तीय रणनीति की घोषणा की है। कंपनी $2.5 बिलियन (लगभग ₹20,000 करोड़) से अधिक जुटाने जा रही है, जिसका मकसद चीन आधारित निवेशक Trip.com Group से आंशिक हिस्सेदारी वापस खरीदना है। यह कदम MakeMyTrip के चीनी प्रभाव को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


💼 क्या है पूरा मामला?

MakeMyTrip ने अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज NASDAQ में फाइलिंग करते हुए जानकारी दी है कि कंपनी 1.4 करोड़ इक्विटी शेयरों का प्राइमरी ऑफरिंग लॉन्च कर रही है। इसके अलावा, कंपनी $1.25 बिलियन के कन्वर्टिबल नोट्स भी जारी करेगी।

यह फंडिंग दो मुख्य हिस्सों में होगी:

  1. इक्विटी शेयरों से लगभग $1.27–1.3 बिलियन की राशि जुटने की संभावना है, अगर ये मौजूदा शेयर प्राइस ($100.88) से 10% डिस्काउंट पर बिकते हैं।
  2. $1.25 बिलियन के कन्वर्टिबल नोट्स, जिन्हें भविष्य में इक्विटी में बदला जा सकता है।

दोनों मिलाकर MakeMyTrip के पास लगभग $2.5 बिलियन की राशि उपलब्ध होगी, जो विशेष रूप से Trip.com से Class B शेयरों को वापस खरीदने में इस्तेमाल की जाएगी।


🇨🇳 क्यों घटा रही है MakeMyTrip चीनी निवेश?

Trip.com, जो कि शंघाई स्थित ग्लोबल OTA कंपनी है, फिलहाल MakeMyTrip में सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है। उसके पास:

  • 1.07 करोड़ ऑर्डिनरी शेयर
  • 3.96 करोड़ क्लास B सीरीज शेयर

कुल मिलाकर, Trip.com के पास MakeMyTrip के 45.34% वोटिंग अधिकार हैं।

अब MakeMyTrip की योजना है:

  • Trip.com की हिस्सेदारी को लगभग आधा कर देना (20% से थोड़ा अधिक)
  • इससे कंपनी को मिलेगा भारतीय स्वामित्व की स्पष्टता और रणनीतिक स्वतंत्रता

🔍 Trip.com ने कब और कैसे निवेश किया?

Trip.com ने पहली बार 2016 में MakeMyTrip में निवेश किया था। लेकिन इसका प्रभाव तब और बढ़ गया जब 2019 में Naspers के साथ हुए इक्विटी स्वैप में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 49% तक पहुंच गई। Naspers ने यह हिस्सेदारी तब ली थी जब उसने Ibibo Group को MakeMyTrip के साथ मर्ज किया था।


🇮🇳 भारत में कंपनियों द्वारा चीनी निवेश में कटौती का ट्रेंड

MakeMyTrip की यह रणनीति भारतीय टेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक चलन को दर्शाती है, जहां कंपनियाँ चीनी निवेशकों के प्रभाव को कम करने की दिशा में सक्रिय हो गई हैं

कुछ प्रमुख उदाहरण:

  • Paytm ने Alibaba के Ant Group की हिस्सेदारी 25% से घटाकर 5% कर दी
  • Zomato ने Alibaba और Fosun से पूरी तरह से एग्जिट दिलवाया
  • Delhivery, BigBasket और Pratilipi ने भी अपने चीनी निवेशकों को निकासी का अवसर दिया

यह बदलाव भारत के भूराजनीतिक और नियामकीय वातावरण में हुए परिवर्तनों के कारण सामने आया है, जिसमें डेटा सुरक्षा और विदेशी स्वामित्व को लेकर चिंताएं प्रमुख हैं।


📈 MakeMyTrip की मजबूत वापसी

MakeMyTrip ने COVID-19 महामारी के बाद जबरदस्त रिकवरी दिखाई है।

FY25 की प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • कुल राजस्व $978 मिलियन, जो कि पिछले वर्ष से 25% अधिक है
  • मुनाफा $95.2 मिलियन, जो महामारी से पहले के स्तर से भी बेहतर है
  • भारत में ट्रैवल डिमांड में तेजी – ‘revenge travel’ ट्रेंड और बिजनेस ट्रैवल की वापसी ने कंपनी को लाभ पहुँचाया

🔍 रणनीतिक दृष्टिकोण से क्यों अहम है यह फैसला?

Trip.com जैसे ग्लोबल दिग्गज के साथ साझेदारी होने के बावजूद, MakeMyTrip अब एक आत्मनिर्भर और स्केलेबल ब्रांड बन चुका है।

इस डील के संभावित फायदे:

  • चीनी नियंत्रण में कमी
  • भारतीय निवेशकों और रेगुलेटर्स के बीच भरोसे में वृद्धि
  • भविष्य में IPO या स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप की आज़ादी
  • कॉर्पोरेट गवर्नेंस में पारदर्शिता

हालांकि, Trip.com अब भी कुछ हिस्सेदारी रखेगा, लेकिन MakeMyTrip अब उससे किसी रणनीतिक निर्भरता में नहीं रहेगा।


📌 निष्कर्ष: MakeMyTrip का आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

MakeMyTrip का यह कदम ना सिर्फ वित्तीय दृष्टि से मजबूत है, बल्कि यह भारत में चल रहे ‘स्वदेशी नियंत्रण’ और विदेशी निर्भरता से बाहर निकलने के रुझान को भी दर्शाता है।

आने वाले महीनों में देखें:

  • इस फंडरेज़िंग का बाजार पर क्या असर पड़ता है
  • Trip.com की शेष हिस्सेदारी को लेकर भविष्य की रणनीति
  • MakeMyTrip की नई ग्रोथ योजनाएं – घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

✈️ भारत के ट्रैवल टेक क्षेत्र की यह कहानी आगे भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है। ऐसे ही अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए FundingRaised.in के साथ।

Read more :🇮🇳 Meta इंडिया को मिला नया लीडर Arun Srinivas बने नए मैनेजिंग डायरेक्टर

🇮🇳 Meta इंडिया को मिला नया लीडर Arun Srinivas बने नए मैनेजिंग डायरेक्टर

Arun Srinivas

सोशल मीडिया दिग्गज Meta (पूर्व में Facebook) ने भारत में अपनी नेतृत्व टीम को नया रूप देते हुए Arun Srinivas को मेटा इंडिया का नया मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड नियुक्त किया है। वर्तमान में वे मेटा के भारत में एडवरटाइजिंग बिज़नेस के डायरेक्टर और हेड के रूप में कार्यरत हैं और 1 जुलाई 2025 से अपनी नई भूमिका निभाएंगे।


👤 कौन हैं Arun Srinivas?

Arun Srinivas भारत के कॉर्पोरेट और टेक्नोलॉजी जगत में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने Unilever, Ola, और WestBridge Capital जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ भूमिकाएं निभाई हैं।

उनके करियर की प्रमुख झलकियाँ:

  • Unilever में वाइस प्रेसिडेंट के रूप में लंबा कार्यकाल
  • WestBridge Capital में कंज्यूमर सेक्टर के इन्वेस्टमेंट लीडर
  • Ola में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) और ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर
  • Meta India में 2022 से एडवर्टाइजिंग बिज़नेस हेड के रूप में कार्यरत

🎯 मेटा इंडिया में नई जिम्मेदारियां

अरुण श्रीनिवास अब मेटा इंडिया के सभी प्लेटफॉर्म्स – Facebook, Instagram, WhatsApp और Threads – के बिज़नेस ग्रोथ, रेवन्यू स्ट्रेटेजी और पब्लिक एंगेजमेंट की निगरानी करेंगे।

वे कंपनी के भारत में AI आधारित समाधानों, Reels और मैसेजिंग बिजनेस को और आगे बढ़ाने पर फोकस करेंगे।

उनका मुख्य फोकस होगा:

  • भारतीय मार्केट में मेटा की हिस्सेदारी को मजबूत करना
  • कंटेंट क्रिएटर्स और विज्ञापनदाताओं के साथ नई साझेदारियाँ
  • AI और Reels के माध्यम से यूजर एंगेजमेंट को बढ़ाना
  • बिजनेस और कम्युनिटी बिल्डिंग में मेटा के टूल्स का विस्तार

🧭 किसे रिपोर्ट करेंगे अरुण श्रीनिवास?

वे इस नई भूमिका में भी संध्या देवनाथन को रिपोर्ट करेंगे, जो वर्तमान में मेटा की इंडिया उपाध्यक्ष हैं और हाल ही में उन्हें साउथईस्ट एशिया बिजनेस की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

यह बदलाव मेटा के भारत और एशिया-पैसिफिक स्तर पर रणनीतिक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।


🏛️ भारत में Meta के सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं

अरुण श्रीनिवास की यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब मेटा भारत सरकार और रेग्युलेटरी बॉडीज़ के साथ टकराव के दौर से गुजर रहा है।

प्रमुख विवाद:

  • Competition Commission of India (CCI) ने मेटा पर प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार को लेकर जुर्माना लगाया था
  • WhatsApp को डेटा शेयरिंग पर पांच वर्षों के लिए सीमित किया गया
  • निजता और यूज़र डेटा के उपयोग पर उठे सवाल

इन चुनौतियों के बीच मेटा को एक ऐसे लीडर की ज़रूरत थी जो बिजनेस के साथ-साथ रेग्युलेटरी लैंडस्केप को भी बेहतर ढंग से समझे। अरुण श्रीनिवास का अनुभव इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।


📊 भारत में मेटा का महत्व

भारत मेटा के लिए दुनिया के सबसे बड़े यूज़र बेस में से एक है।

  • Facebook – भारत में 300 मिलियन से अधिक यूज़र्स
  • Instagram – युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स का फेवरेट प्लेटफॉर्म
  • WhatsApp – देश का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप
  • Threads – Twitter/X का अल्टरनेटिव बनने की कोशिश में

अरुण की नई जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगा कि ये सभी प्लेटफॉर्म भारत में सुरक्षित, रेग्युलेटेड और कमर्शियल रूप से सफल बनें।


🗣️ क्या बोले मेटा के अधिकारी?

मेटा एशिया-पैसिफिक प्रमुख डैन नीरी (Dan Neary) ने कहा:

“अरुण श्रीनिवास का अनुभव और नेतृत्व भारत जैसे विविध और जटिल मार्केट में मेटा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हम उनके नए रोल की घोषणा करते हुए उत्साहित हैं।”


🔮 आगे की राह

भारत जैसे बाजार में जहां डेटा सुरक्षा, यूज़र प्राइवेसी और टेक कंपनियों की जवाबदेही पर चर्चा बढ़ रही है, वहां कॉर्पोरेट नेतृत्व की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।

अरुण श्रीनिवास को न सिर्फ कंपनी के बिज़नेस को स्केल करना होगा, बल्कि सरकार, रेग्युलेटर, कंटेंट क्रिएटर्स और यूज़र्स के साथ संतुलन भी साधना होगा।


📌 निष्कर्ष: मेटा इंडिया के लिए नए युग की शुरुआत

अरुण श्रीनिवास की नियुक्ति को मेटा इंडिया की रणनीतिक दिशा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। उनके पास कंज्यूमर मार्केट, डिजिटल एडवर्टाइजिंग और बिजनेस ऑपरेशंस में गहरा अनुभव है, जो उन्हें इस नई भूमिका के लिए पूरी तरह उपयुक्त बनाता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि वह कैसे भारत में मेटा को एक इनोवेटिव, रेग्युलेटरी कम्प्लायंट और यूज़र-फर्स्ट ब्रांड के रूप में स्थापित करते हैं।


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