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OrbitAID

चेन्नई स्थित spacetech स्टार्टअप OrbitAID (OrbitAID) ने अपने प्री-सीड फंडिंग राउंड में $1.5 मिलियन जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Unicorn India Ventures ने किया, जिसमें तमिलनाडु सरकार के TANSIM ने भी भाग लिया।


OrbitAID फंडिंग का उपयोग और कंपनी की योजनाएं

OrbitAID इस फंडिंग का उपयोग स्पेस ऑपरेशंस में उन्नति और सुविधाओं के विस्तार के लिए करेगी। कंपनी ने निम्नलिखित लक्ष्यों की घोषणा की है:

  1. इन-स्पेस डेमोंस्ट्रेशन: अंतरिक्ष में डॉकिंग और रीफ्यूलिंग ऑपरेशंस का प्रदर्शन करना।
  2. ऑन-ऑर्बिट सर्विसिंग ऑपरेशंस: इन सेवाओं को और अधिक उन्नत करने के लिए सुविधाओं का विस्तार।
  3. SIDRP तकनीक को व्यावसायिक रूप से तैयार करना: कंपनी की स्टैंडर्ड इंटरफेस डॉकिंग एंड रीफ्यूलिंग पोर्ट (SIDRP) तकनीक को बाजार में उतारने के लिए तैयार करना।
  4. टीम का विस्तार: स्पेसटेक ऑपरेशंस को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों की भर्ती।

ऑर्बिटएआईडी का उद्देश्य और फोकस

सस्टेनेबल स्पेस ऑपरेशंस

2021 में स्थापित, ऑर्बिटएआईडी का उद्देश्य अंतरिक्ष में सतत संचालन को बढ़ावा देना है। कंपनी ऑर्बिट में रीफ्यूलिंग सॉल्यूशंस के माध्यम से एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रही है, जिसमें विभिन्न कक्षाओं (orbits) में ईंधन स्टेशन स्थापित किए जाएं।

इनोवेशन के लिए प्रतिबद्धता

  • ऑर्बिटएआईडी ने स्पेस ऑपरेशंस को अधिक कुशल और किफायती बनाने के लिए उन्नत तकनीकों का विकास किया है।
  • कंपनी की पेटेंटेड SIDRP तकनीक इसका प्रमुख उदाहरण है।

SIDRP तकनीक: एक नई दिशा

परीक्षण और सफलता

ऑर्बिटएआईडी ने हाल ही में अपनी SIDRP तकनीक का फ्लोरिडा में ज़ीरो-ग्रैविटी फ्लाइट के दौरान सफल परीक्षण किया।

  • इस तकनीक ने डॉकिंग और रीफ्यूलिंग टेस्ट में Technology Readiness Level (TRL) 7 तक पहुंच बनाई है।
  • यह तकनीक अंतरिक्ष में वाहनों को दोबारा ईंधन भरने और डॉकिंग के लिए बेहतर समाधान प्रदान करती है।

फायदे

  • सस्टेनेबल ऑपरेशंस: यह तकनीक अंतरिक्ष यान के मिशन जीवन को बढ़ाती है।
  • लागत प्रभावी: ईंधन स्टेशनों के नेटवर्क के माध्यम से अंतरिक्ष अभियानों की लागत कम होगी।
  • प्रत्येक ऑर्बिट में एक्सेस: SIDRP तकनीक विभिन्न कक्षाओं में स्थापित की जा सकती है, जिससे वैश्विक स्पेस ऑपरेशंस को लाभ होगा।

पिछले 12 महीनों में प्रगति

कंपनी ने बीते वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति की है:

  1. तकनीकी विकास: डॉकिंग और रीफ्यूलिंग परीक्षणों में TRL 7 हासिल किया।
  2. पार्टनरशिप: कई महत्वपूर्ण साझेदारियां और सहयोग किए।
  3. पेटेंटेड तकनीक का प्रदर्शन: अपनी तकनीक का सफल परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।

फाउंडर्स और उनकी सोच

सक्थिकुमार आर, निखिल बालासुब्रमण्यम, और मनो बालाजी

  • ऑर्बिटएआईडी के तीनों संस्थापकों ने स्पेसटेक इंडस्ट्री में क्रांति लाने का लक्ष्य रखा है।
  • उनकी सोच है कि भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को अधिक किफायती और सस्टेनेबल बनाया जा सके।
  • कंपनी ने अपने आरंभ से ही उच्च तकनीकी नवाचार और व्यावसायिक दृष्टिकोण पर जोर दिया है।

स्पेस में फ्यूल स्टेशन का नेटवर्क

फाउंडर्स का मानना है कि भविष्य में अंतरिक्ष में फ्यूल स्टेशनों का नेटवर्क एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।


फंडिंग का महत्व और निवेशकों का योगदान

यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स का दृष्टिकोण

यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स ने ऑर्बिटएआईडी की तकनीकी क्षमताओं और उसके मिशन को पहचाना।

  • निवेशक मानते हैं कि ऑर्बिटएआईडी सस्टेनेबल स्पेस ऑपरेशंस के क्षेत्र में एक अग्रणी कंपनी बन सकती है।

TANSIM की भागीदारी

तमिलनाडु सरकार के TANSIM ने इस फंडिंग में भाग लेकर भारतीय स्पेसटेक स्टार्टअप्स को समर्थन दिया है।

  • यह भारत में नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भारत में स्पेसटेक इंडस्ट्री का भविष्य

सस्टेनेबल स्पेसटेक की बढ़ती मांग

  • अंतरिक्ष में ईंधन भरने और डॉकिंग तकनीक की बढ़ती मांग को देखते हुए, ऑर्बिटएआईडी जैसे स्टार्टअप्स के पास अपार संभावनाएं हैं।
  • भारत के पास वैश्विक स्पेसटेक इंडस्ट्री में अग्रणी बनने का अवसर है।

सरकार और निजी क्षेत्र का सहयोग

  • TANSIM जैसी सरकारी एजेंसियों का सहयोग स्पेसटेक स्टार्टअप्स के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • निजी निवेश और सरकारी भागीदारी से भारत की स्पेसटेक इंडस्ट्री में तेजी से विकास होगा।

निष्कर्ष

ऑर्बिटएआईडी ने प्री-सीड फंडिंग में $1.5 मिलियन जुटाकर सस्टेनेबल स्पेस ऑपरेशंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

  • कंपनी की SIDRP तकनीक और अंतरिक्ष में फ्यूल स्टेशनों का नेटवर्क अंतरिक्ष अभियानों को किफायती और प्रभावी बनाएगा।
  • भारत में स्पेसटेक इंडस्ट्री के विकास के लिए ऑर्बिटएआईडी जैसे स्टार्टअप्स प्रेरणास्रोत साबित होंगे।
  • यह फंडिंग न केवल ऑर्बिटएआईडी के लिए बल्कि भारत के स्पेसटेक इकोसिस्टम के लिए भी एक मील का पत्थर है।

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