🐟 Captain Fresh को मिला ₹120 करोड़ का नया निवेश,

Captain Fresh

ग्लोबल पैकेज्ड सीफूड सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Captain Fresh एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी ने हाल ही में अपने IPO (Initial Public Offering) से जुड़े ड्राफ्ट पेपर्स वापस लेने के बाद अब एक नया ₹120 करोड़ (लगभग $13.3 मिलियन) का इक्विटी फंडिंग राउंड जुटाने की तैयारी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस निवेश राउंड का नेतृत्व खुद कंपनी के फाउंडर और सीईओ Utham Gowda कर रहे हैं। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ाना है।


💰 फाउंडर खुद करेंगे सबसे बड़ा निवेश

सूत्रों के अनुसार इस नए फंडिंग राउंड में लगभग ₹100 करोड़ का निवेश Utham Gowda खुद करेंगे। यह निवेश उनकी निजी इकाई Tigerlily Properties के माध्यम से किया जाएगा।

फिलहाल Captain Fresh में Utham Gowda की हिस्सेदारी करीब 17% है। इस निवेश के बाद उनकी हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 19% तक पहुंच सकती है।

इस राउंड में बाकी पूंजी अन्य निवेशकों द्वारा दी जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • Avanti Feeds
  • Veer Growth Fund
  • और कुछ अन्य निवेशक

हालांकि इन निवेशकों के निवेश की सटीक राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।


🌍 हाल ही में मिला ₹290 करोड़ का सस्टेनेबिलिटी फाइनेंस

इस नए निवेश से पहले Captain Fresh ने हाल ही में एक और बड़ी फंडिंग हासिल की थी। कंपनी को ₹290 करोड़ का sustainability-linked financing मिला था।

यह निवेश वैश्विक इम्पैक्ट निवेशक Blue Earth Capital की ओर से किया गया था।

इस तरह पिछले कुछ समय में कंपनी ने कई बड़े निवेश हासिल किए हैं, जिससे उसके विस्तार की योजनाओं को मजबूती मिली है।


🏢 क्या करता है Captain Fresh?

साल 2020 में स्थापित Captain Fresh एक टेक-ड्रिवन B2B सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म है, जो पैकेज्ड सीफूड के व्यापार को डिजिटल तरीके से संचालित करता है।

यह प्लेटफॉर्म मछली और अन्य सीफूड उत्पादों को:

  • फिशरीज
  • सप्लायर्स
  • प्रोसेसिंग यूनिट्स
  • और ग्लोबल खरीदारों

के बीच कनेक्ट करता है।

कंपनी का ऑपरेशन केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसके नेटवर्क का विस्तार कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हो चुका है, जैसे:

  • अमेरिका
  • यूरोप
  • मिडिल ईस्ट
  • भारत

इस ग्लोबल नेटवर्क की वजह से कंपनी तेजी से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।


📈 IPO की तैयारी और DRHP वापसी

Captain Fresh पहले भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा था। कंपनी ने IPO के लिए ₹1,700 करोड़ जुटाने की योजना बनाई थी।

इसके लिए कंपनी ने Securities and Exchange Board of India (SEBI) के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) भी दाखिल किया था।

हालांकि हाल ही में कंपनी ने अपने IPO ड्राफ्ट पेपर्स वापस ले लिए।

कंपनी के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि वह फिलहाल एक नई कंपनी के अधिग्रहण (acquisition) को पूरा करने पर ध्यान दे रही है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका IPO प्लान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी दोबारा IPO के लिए नए सिरे से आवेदन करेगी।


💵 IPO से पहले जुटाई थी प्री-IPO फंडिंग

IPO से पहले Captain Fresh ने ₹250 करोड़ की प्री-IPO फंडिंग भी जुटाई थी।

इस राउंड का नेतृत्व कई बड़े निवेशकों ने किया था, जिनमें शामिल हैं:

  • Prosus Ventures
  • Accel
  • Tiger Global

इन निवेशकों का समर्थन कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति में अहम भूमिका निभा रहा है।


🌐 अधिग्रहण के जरिए बढ़ा ग्लोबल विस्तार

Captain Fresh ने हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का अधिग्रहण भी किया है।

इनमें प्रमुख हैं:

  • CenSea – अमेरिका की एक सीफूड इम्पोर्ट कंपनी
  • Senecrus – फ्रांस की सीफूड कंपनी
  • Koral – पोलैंड की सैल्मन कंपनी

इन अधिग्रहणों की मदद से Captain Fresh ने यूरोप और अमेरिका के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की है।


📊 FY25 में शानदार ग्रोथ

वित्त वर्ष 2025 (FY25) में Captain Fresh ने तेज ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी का Gross Merchandise Value (GMV) 145% बढ़कर ₹3,421 करोड़ तक पहुंच गया।

यह तेज वृद्धि मुख्य रूप से हाल के अधिग्रहणों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग के कारण हुई है।


🔎 आगे की रणनीति

नए निवेश और अधिग्रहण के साथ Captain Fresh की रणनीति स्पष्ट है — वैश्विक सीफूड सप्लाई चेन में एक प्रमुख टेक-प्लेटफॉर्म बनना

अगर कंपनी अपनी ग्रोथ और अधिग्रहण की रणनीति को इसी तरह जारी रखती है, तो आने वाले वर्षों में यह ग्लोबल सीफूड मार्केट में एक बड़ा खिलाड़ी बन सकती है।

IPO की योजना फिलहाल टली जरूर है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब कंपनी दोबारा IPO के लिए आवेदन करेगी, तब निवेशकों की रुचि काफी अधिक हो सकती है।

क्योंकि टेक-ड्रिवन सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म और ग्लोबल फूड ट्रेड सेक्टर में Captain Fresh की मजबूत मौजूदगी इसे निवेश के लिए एक आकर्षक कंपनी बनाती है।

Read more :📚 मैथ्स लर्निंग प्लेटफॉर्म Bhanzu की तेज ग्रोथ,

📚 मैथ्स लर्निंग प्लेटफॉर्म Bhanzu की तेज ग्रोथ,

Bhanzu

भारत के एडटेक सेक्टर में एक बार फिर मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है। मैथ्स लर्निंग पर फोकस करने वाला एडटेक स्टार्टअप Bhanzu ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू लगभग चार गुना बढ़कर ₹109.5 करोड़ तक पहुंच गया है।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने अपने खर्चों को काफी हद तक नियंत्रित रखा, जिसके चलते उसकी घाटा (Loss) में भी 42% की कमी आई है।

हैदराबाद स्थित इस एडटेक स्टार्टअप के वित्तीय आंकड़े Registrar of Companies के पास दाखिल किए गए कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स से सामने आए हैं।


🚀 FY25 में जबरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ

FY25 में Bhanzu का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹109.5 करोड़ रहा, जबकि FY24 में यह ₹29.4 करोड़ था। यानी कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 3.7 गुना वृद्धि दर्ज की है।

यह तेज ग्रोथ इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन एजुकेशन, खासकर स्किल-बेस्ड और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।

कंपनी की पूरी ऑपरेटिंग आय उसके मैथ्स लर्निंग कोर्सेस की बिक्री से आती है।


🧠 बच्चों के लिए एक्सपीरिएंशियल मैथ्स लर्निंग

साल 2020 में स्थापित Bhanzu बच्चों को गणित सीखने का एक अलग तरीका प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म 5 से 16 साल की उम्र के बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कोर्स उपलब्ध कराता है।

कंपनी का लक्ष्य सिर्फ मैथ्स सिखाना नहीं बल्कि बच्चों की कॉग्निटिव और लॉजिकल सोच को बेहतर बनाना है।

Bhanzu के कोर्स इस तरह बनाए गए हैं कि बच्चे गणित को डर या दबाव के बजाय मज़ेदार और इंटरैक्टिव तरीके से सीख सकें

कंपनी के अनुसार अब तक 50,000 से ज्यादा छात्र इसके विभिन्न कोर्सेस के जरिए प्रशिक्षण ले चुके हैं।


🌍 अंतरराष्ट्रीय बाजार से सबसे ज्यादा कमाई

Bhanzu की ग्रोथ में अंतरराष्ट्रीय बाजार की बड़ी भूमिका रही है।

कंपनी अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है।

FY25 में कंपनी की कुल आय का लगभग 69% हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आया

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार से रेवेन्यू: ₹75.7 करोड़
  • भारतीय बाजार से रेवेन्यू: ₹33.9 करोड़

अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाला रेवेन्यू 4.3 गुना बढ़ा, जबकि भारत से आने वाला रेवेन्यू लगभग तीन गुना बढ़ा

यह दर्शाता है कि भारतीय एडटेक कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर भी तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं।


💼 खर्चों में स्थिरता, कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खर्च

Bhanzu के कुल खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा कर्मचारियों से जुड़े खर्च (Employee Benefits) का रहा।

FY25 में यह खर्च कुल खर्च का लगभग 50% रहा। हालांकि यह खर्च पिछले साल की तुलना में घट गया।

  • FY24: ₹115.4 करोड़
  • FY25: ₹96.3 करोड़

इस गिरावट का मुख्य कारण ESOP (Employee Stock Option Plan) से जुड़ा खर्च कम होना रहा।

FY24 में ESOP खर्च ₹25.8 करोड़ था, जो FY25 में घटकर ₹11.7 करोड़ रह गया।


📢 मार्केटिंग और ट्रेनिंग पर बढ़ा निवेश

कंपनी ने FY25 में सेल्स और मार्केटिंग पर भी काफी निवेश किया।

  • सेल्स और मार्केटिंग खर्च: ₹40.8 करोड़
  • साल-दर-साल वृद्धि: 46%

इसके अलावा कंपनी ने ट्रेनिंग और भर्ती (Training & Recruitment) पर भी अधिक खर्च किया।

  • ट्रेनिंग और भर्ती खर्च: ₹28.6 करोड़
  • वृद्धि: 2.4 गुना

यह दिखाता है कि कंपनी अपने बिजनेस को स्केल करने के लिए नई टीम और बेहतर ट्रेनिंग पर ध्यान दे रही है।


🖥 अन्य खर्च

कंपनी के अन्य ऑपरेशनल खर्चों में शामिल हैं:

  • आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
  • लीगल और प्रोफेशनल फीस
  • किराया
  • अन्य प्रशासनिक खर्च

इन सभी खर्चों को मिलाकर FY25 में कुल ₹27.9 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हुआ।

कुल मिलाकर कंपनी का कुल खर्च FY24 के ₹174.4 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹193.6 करोड़ हो गया, जो लगभग 11% की वृद्धि है।


📉 घाटे में 42% की कमी

रेवेन्यू में तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनी अपने घाटे को कम करने में सफल रही।

FY25 में Bhanzu का कुल घाटा ₹79 करोड़ रहा, जबकि FY24 में यह ₹135.5 करोड़ था।

इस प्रकार कंपनी ने अपने घाटे में 42% की कमी दर्ज की।

इसके अलावा:

  • EBITDA लॉस: ₹83 करोड़
  • EBITDA मार्जिन: -75.8%

हालांकि कंपनी अभी भी घाटे में है, लेकिन घाटे में तेज कमी इस बात का संकेत है कि कंपनी धीरे-धीरे बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स की ओर बढ़ रही है।


💰 मजबूत कैश पोजिशन

मार्च 2025 तक कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत दिखाई देती है।

  • कुल करंट एसेट्स: ₹179.5 करोड़
  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹167.5 करोड़

यह मजबूत कैश पोजिशन कंपनी द्वारा FY25 के दौरान जुटाई गई फंडिंग का परिणाम है।

Bhanzu को निवेश फर्म Epiq Capital के नेतृत्व में $16.5 मिलियन की Series B फंडिंग प्राप्त हुई थी।

इसके अलावा कंपनी में पहले से Lightspeed जैसे बड़े निवेशकों का भी समर्थन है।


🔎 निष्कर्ष

कुल मिलाकर FY25 Bhanzu के लिए ग्रोथ का साल साबित हुआ। कंपनी ने जहां एक ओर अपने रेवेन्यू को लगभग चार गुना बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर खर्चों को नियंत्रित रखते हुए घाटे को भी काफी कम किया।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग, बच्चों के लिए एक्सपीरिएंशियल लर्निंग मॉडल और मजबूत फंडिंग सपोर्ट Bhanzu को आने वाले वर्षों में और आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि कंपनी अभी पूरी तरह लाभदायक नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से इसका रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है और घाटा घट रहा है, उससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में Bhanzu एडटेक सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो सकता है।

Read More :Yes Madam होम सैलून सर्विस स्टार्टअप ने FY25 में दोगुना किया रेवेन्यू,

Yes Madam होम सैलून सर्विस स्टार्टअप ने FY25 में दोगुना किया रेवेन्यू,

Yes Madam

भारत में ऑन-डिमांड होम सर्विसेस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसी सेगमेंट में काम करने वाला स्टार्टअप Yes Madam लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। वित्त वर्ष 2025 (FY25) में कंपनी ने शानदार ग्रोथ दर्ज करते हुए अपने ऑपरेटिंग रेवेन्यू को लगभग दोगुना कर लिया है। खास बात यह है कि तेज ग्रोथ के बावजूद कंपनी मुनाफे में बनी हुई है, जो इस सेक्टर में काफी दुर्लभ माना जाता है।

FY25 में दोगुना हुआ रेवेन्यू

नोएडा स्थित इस स्टार्टअप ने FY25 में ₹92.5 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 के ₹45.8 करोड़ की तुलना में लगभग दोगुना है। कंपनी के वित्तीय दस्तावेज़ों के अनुसार यह जानकारी Registrar of Companies के साथ दाखिल की गई फाइलिंग से सामने आई है।

इस तेज वृद्धि से साफ है कि भारत में घर पर मिलने वाली ब्यूटी और वेलनेस सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है और Yes Madam इस अवसर का अच्छी तरह लाभ उठा रही है।

क्या है Yes Madam का बिजनेस मॉडल?

साल 2016 में स्थापित Yes Madam एक एट-होम ब्यूटी और वेलनेस सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए ग्राहक अपने घर पर ही कई तरह की सेवाएं बुक कर सकते हैं, जैसे:

  • हेयरकट
  • फेशियल
  • वैक्सिंग
  • मसाज
  • स्किन केयर ट्रीटमेंट

ग्राहक इन सेवाओं को कंपनी के मोबाइल ऐप या वेबसाइट के माध्यम से बुक करते हैं। इसके बाद कंपनी प्रशिक्षित ब्यूटी प्रोफेशनल्स को ग्राहक के घर भेजती है।

कंपनी की कमाई मुख्य रूप से हर बुकिंग पर मिलने वाले कमीशन से होती है। इसके अलावा यह अपने प्लेटफॉर्म पर ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री से भी आय अर्जित करती है।

प्रोडक्ट सेल्स से आई सबसे ज्यादा कमाई

FY25 में कंपनी की कुल ऑपरेटिंग आय का बड़ा हिस्सा प्रोडक्ट्स की बिक्री से आया।

  • प्रोडक्ट्स की बिक्री: ₹50 करोड़
  • सर्विसेस से आय: ₹42.5 करोड़

कुल मिलाकर कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू का लगभग 54% हिस्सा प्रोडक्ट सेल्स से आया। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है।

वहीं सर्विस से आने वाली आय में कई स्रोत शामिल हैं, जैसे:

  • सर्विस बुकिंग पर कमीशन
  • सब्सक्रिप्शन इनकम
  • रॉयल्टी इनकम

इसके अलावा कंपनी ने नॉन-ऑपरेटिंग स्रोतों से भी लगभग ₹2 करोड़ की आय अर्जित की। इसमें मुख्य रूप से पेनल्टी चार्ज और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज शामिल है।

इन सभी को मिलाकर FY25 में कंपनी की कुल आय ₹94.5 करोड़ तक पहुंच गई।

खर्चों में भी बढ़ोतरी

तेजी से बढ़ते बिजनेस के साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि हुई है। FY25 में Yes Madam का सबसे बड़ा खर्च प्रोडक्ट्स की खरीद (Procurement) रहा।

  • प्रोडक्ट खरीद खर्च: ₹31.4 करोड़
  • बिजनेस प्रमोशन खर्च: ₹27 करोड़
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स खर्च: ₹18.14 करोड़

प्रोडक्ट खरीद पर खर्च कंपनी के कुल खर्च का लगभग 34% रहा और यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना हो गया।

वहीं मार्केटिंग और प्रमोशन पर कंपनी का खर्च 3.7 गुना बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया। इससे पता चलता है कि कंपनी अपने ब्रांड को तेजी से विस्तार देने पर ध्यान दे रही है।

कर्मचारियों से जुड़े खर्च भी बढ़े हैं। FY24 में जहां यह खर्च लगभग ₹12 करोड़ था, वहीं FY25 में यह बढ़कर ₹18.14 करोड़ हो गया।

इसके अलावा कंपनी के अन्य खर्चों में शामिल हैं:

  • आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
  • कैशबैक और ऑफर
  • प्रोफेशनल और कंसल्टेंसी फीस
  • किराया और अन्य प्रशासनिक खर्च

इन सभी कारणों से कंपनी का कुल खर्च FY24 के ₹45.5 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹92.4 करोड़ हो गया।

मुनाफे में बनी रही कंपनी

तेजी से बढ़ते खर्चों के बावजूद Yes Madam FY25 में भी लाभ में रही।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में ₹1.8 करोड़ का शुद्ध लाभ (Profit) दर्ज किया।

इसके अलावा कंपनी के प्रमुख वित्तीय संकेतक इस प्रकार रहे:

  • ROCE: 2.29%
  • EBITDA मार्जिन: 0.57%

हालांकि ये मार्जिन बहुत अधिक नहीं हैं, लेकिन इस सेक्टर में लाभ कमाना ही बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

यूनिट इकॉनॉमिक्स और कैश पोजिशन

FY25 में कंपनी की यूनिट इकॉनॉमिक्स भी काफी संतुलित रही। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए लगभग ₹1 खर्च किया

वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी के पास:

  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹5.5 करोड़
  • करंट एसेट्स: ₹21.4 करोड़

यह दर्शाता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति फिलहाल स्थिर है।

प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चुनौतियां

होम सर्विसेस का बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है। इस क्षेत्र में कई बड़े प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जिनमें सबसे बड़ा नाम Urban Company है।

दिलचस्प बात यह है कि Yes Madam इस सेगमेंट में उन कुछ कंपनियों में से है जो बड़े स्तर पर काम करते हुए भी मुनाफा कमा रही हैं।

कंपनी के रेवेन्यू में प्रोडक्ट सेल्स का बड़ा योगदान भी इसकी सफलता का एक अहम कारण माना जा रहा है। यही रणनीति हाल के वर्षों में Urban Company ने भी अपनाई है ताकि वह लाभप्रदता हासिल कर सके।

हालांकि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। स्टार्टअप इकोसिस्टम में मौजूदा फंडिंग माहौल थोड़ा अनिश्चित है। ऐसे में अगर Yes Madam भविष्य में नया फंडिंग राउंड उठाना चाहती है तो उसे उचित वैल्यूएशन हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी आने वाले वर्षों में अपनी ग्रोथ को थोड़ा संतुलित रख सकती है और बाजार के स्थिर होने का इंतजार कर सकती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर FY25 Yes Madam के लिए काफी सफल वर्ष रहा। कंपनी ने न केवल अपने रेवेन्यू को दोगुना किया बल्कि मुनाफे में भी बनी रही।

तेजी से बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म, घर पर मिलने वाली सेवाओं की बढ़ती मांग और प्रोडक्ट सेल्स पर फोकस ने इस स्टार्टअप को मजबूत स्थिति में ला दिया है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या Yes Madam आने वाले वर्षों में भी इसी तरह ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी का संतुलन बनाए रख पाती है या नहीं।

Read more :🚀 ग्रामीण रिटेल स्टार्टअप Rozana ने जुटाए ₹290 करोड़,

🚀 ग्रामीण रिटेल स्टार्टअप Rozana ने जुटाए ₹290 करोड़,

Rozana

भारत के तेजी से बढ़ते रूरल कॉमर्स (Rural Commerce) सेक्टर में काम करने वाला स्टार्टअप Rozana अब निवेशकों का ध्यान तेजी से आकर्षित कर रहा है। कंपनी ने अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹290 करोड़ (लगभग $31.6 मिलियन) जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Bertelsmann India Investments ने किया है।

इस फंडिंग राउंड में कई अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया, जिनमें Fireside Ventures, Spark Growth Ventures, Bikaji Family Office, और FE Securities सहित कई फैमिली ऑफिस शामिल हैं। इस नए निवेश के साथ कंपनी अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने और ग्रामीण बाजार में तेजी से विस्तार की योजना बना रही है।


📦 क्या करता है Rozana स्टार्टअप?

Rozana एक रूरल ओमनीचैनल रिटेल प्लेटफॉर्म है, जो गांवों में रहने वाले ग्राहकों को डिजिटल और फिजिकल दोनों माध्यमों से सामान खरीदने की सुविधा देता है।

इस स्टार्टअप की स्थापना 2021 में Ankur Dahiya, Adwait Vikram Singh और Mukesh Christopher ने मिलकर की थी।

कंपनी का बिजनेस मॉडल थोड़ा अलग है। यह केवल एक ऐप आधारित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह रिटेल एक्सपीरियंस सेंटर, लोकल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और डिजिटल ऐप का मिश्रण है। इस मॉडल की वजह से गांवों में रहने वाले लोग भी आसानी से FMCG और अन्य जरूरी सामान खरीद सकते हैं।


🏬 75 से ज्यादा रिटेल एक्सपीरियंस सेंटर

Rozana ने ग्रामीण इलाकों में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने के लिए 75 से ज्यादा रिटेल एक्सपीरियंस सेंटर स्थापित किए हैं।

इन स्टोर्स के जरिए ग्राहक प्रोडक्ट्स को देख सकते हैं, समझ सकते हैं और फिर खरीद सकते हैं। यह मॉडल गांवों में ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित हो रहा है।

इसके अलावा कंपनी के पास एक मजबूत डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क भी है, जो उत्पादों को तेजी से ग्राहकों तक पहुंचाता है।


👩 35,000 से ज्यादा महिला पार्टनर

Rozana के बिजनेस मॉडल का सबसे खास पहलू इसकी महिला पार्टनर नेटवर्क है।

कंपनी के साथ 35,000 से ज्यादा महिला पार्टनर जुड़ी हुई हैं, जो अपने-अपने गांवों में लास्ट-माइल डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करती हैं।

ये महिलाएं स्थानीय समुदाय का हिस्सा होती हैं, इसलिए ग्राहकों के साथ उनका भरोसा भी मजबूत होता है। इससे कंपनी को गांवों में तेजी से विस्तार करने में मदद मिलती है और साथ ही महिला रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है।


🌾 21,000 गांवों तक पहुंच

कंपनी का कहना है कि उसने अपने हाइब्रिड कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर को अब तक 21,000 गांवों तक पहुंचा दिया है।

ये गांव मुख्य रूप से गंगा के मैदानी इलाकों (Gangetic Plains) में स्थित हैं, जहां भारत की लगभग 50% ग्रामीण आबादी रहती है।

वर्तमान में Rozana उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 10 लाख से ज्यादा सक्रिय घरों (active households) को सेवा दे रहा है।


📈 आगे क्या है कंपनी की योजना?

Series B फंडिंग मिलने के बाद कंपनी अब तेजी से विस्तार करने की तैयारी में है।

Rozana की योजना है कि आने वाले समय में:

  • अपने स्टोर्स की संख्या 200 से ज्यादा करे
  • उत्तरी भारत के 2-3 नए राज्यों में एंट्री ले
  • और लंबी अवधि में 1.3 लाख गांवों तक अपनी पहुंच बनाए

इसके अलावा कंपनी प्राइवेट लेबल प्रोडक्ट्स भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। इससे कंपनी को बेहतर मार्जिन मिलेगा और ग्राहकों को सस्ते विकल्प मिलेंगे।


💰 ग्रामीण बाजार में बड़ा अवसर

भारत का ग्रामीण बाजार तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश का रूरल कंजम्प्शन मार्केट $2 ट्रिलियन से ज्यादा का हो सकता है।

भारत में 200 मिलियन से ज्यादा ग्रामीण परिवार हर महीने लगभग ₹20,000 या उससे ज्यादा खर्च करते हैं।

यह खर्च मुख्य रूप से इन कैटेगरी में होता है:

  • किराना और स्टेपल फूड
  • FMCG प्रोडक्ट्स
  • पर्सनल केयर
  • घरेलू सामान
  • कपड़े
  • और अन्य रोजमर्रा की जरूरतें

इसी वजह से कई स्टार्टअप अब ग्रामीण बाजार पर ध्यान दे रहे हैं।


💵 अब तक कितनी फंडिंग जुटाई?

नए Series B राउंड के साथ Rozana अब तक लगभग $60 मिलियन की कुल फंडिंग जुटा चुका है।

इससे पहले:

  • मार्च 2024 में कंपनी ने $22.5 मिलियन की Series A फंडिंग जुटाई थी
  • इस राउंड का नेतृत्व भी Bertelsmann India Investments ने किया था
  • इसमें Fireside Ventures ने भी निवेश किया था

वहीं अप्रैल 2022 में कंपनी ने $2.5 मिलियन की Pre-Series A फंडिंग जुटाई थी, जिसमें 3one4 Capital और IEG Investment Banking Group ने निवेश किया था।


🔎 निष्कर्ष

भारत में डिजिटल कॉमर्स तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी ग्रामीण इलाकों में इसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में Rozana जैसे स्टार्टअप्स टेक्नोलॉजी और लोकल नेटवर्क के जरिए इस अंतर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

नई फंडिंग के साथ कंपनी के पास अब अपने नेटवर्क को मजबूत करने, नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने और ग्रामीण बाजार में तेजी से विस्तार करने का मौका है। अगर कंपनी अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक लागू कर पाती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के सबसे बड़े रूरल रिटेल प्लेटफॉर्म्स में से एक बन सकती है।

Read more :👕 Bonkers Corner को मिला ₹95 करोड़ का निवेश,

👕 Bonkers Corner को मिला ₹95 करोड़ का निवेश,

Bonkers Corner

भारत के तेजी से बढ़ते Direct-to-Consumer (D2C) फैशन सेगमेंट में एक और बड़ा निवेश सामने आया है। मुंबई आधारित ओमnichannel क्लोदिंग ब्रांड Bonkers Corner ने अपने Series A funding round में करीब ₹95 करोड़ (लगभग $10.5 मिलियन) जुटाए हैं।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व India SME Investments ने किया, जबकि इसमें Namita Thapar, Radhakrishna Ramnarain Pvt Ltd सहित 20 से अधिक निवेशकों ने भाग लिया।

कंपनी इस निवेश का उपयोग अपने ब्रांड विस्तार, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत करने और ओमnichannel उपस्थिति बढ़ाने के लिए करेगी।


💰 Series A फंडिंग राउंड की पूरी जानकारी

कंपनी की पैरेंट फर्म Bad Brains Streetstyle Pvt Ltd ने इस फंडिंग राउंड के तहत 3,12,644 Series A Compulsorily Convertible Preference Shares (CCPS) जारी किए।

इन शेयरों का इश्यू प्राइस ₹3,038 प्रति शेयर तय किया गया, जिसके जरिए कुल ₹95 करोड़ जुटाए गए।

इस राउंड में सबसे बड़ा निवेश India SME Investments ने किया, जिसने करीब ₹64.5 करोड़ (लगभग $7.15 मिलियन) लगाए।

इसके अलावा:

  • Radhakrishna Ramnarain Pvt Ltd ने करीब ₹17.8 करोड़ का निवेश किया
  • निवेशक Rajesh Raheja ने करीब ₹3 करोड़ लगाए
  • Namita Thapar ने अपनी ₹1.5 करोड़ की निवेश प्रतिबद्धता पूरी की

गौरतलब है कि Namita Thapar ने यह निवेश Thapar Vision LLP के माध्यम से किया। इसके अलावा करीब 20 एंजेल निवेशकों ने भी इस राउंड में हिस्सा लिया।


📊 कंपनी का वैल्यूएशन और शेयरहोल्डिंग

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस निवेश के बाद Bonkers Corner का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब ₹430 करोड़ (लगभग $48 मिलियन) तक पहुंच गया है।

नए शेयर अलॉटमेंट के बाद कंपनी की शेयरहोल्डिंग इस प्रकार है:

  • India SME Investments – लगभग 15% हिस्सेदारी
  • Radhakrishna Ramnarain Pvt Ltd – करीब 4.14%
  • Namita Thapar – लगभग 0.37%
  • फाउंडर Sanjay Gupta और उनकी पत्नी Reena Gupta – करीब 70.62% हिस्सेदारी

इससे साफ है कि कंपनी में अभी भी संस्थापकों की मजबूत पकड़ बनी हुई है।


👗 2020 में शुरू हुआ Bonkers Corner

Bonkers Corner की शुरुआत 2020 में Shubham Gupta ने की थी। यह ब्रांड मुख्य रूप से streetwear फैशन सेगमेंट में काम करता है और युवाओं को ध्यान में रखकर अपने प्रोडक्ट डिजाइन करता है।

कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • Oversized graphic T-shirts
  • Hoodies
  • Sweatshirts
  • Gym wear
  • Co-ord sets
  • Casual streetwear apparel

ब्रांड पुरुष और महिला दोनों ग्राहकों के लिए फैशन प्रोडक्ट बेचता है और खासतौर पर Gen-Z और युवा ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

Bonkers Corner की रणनीति ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचने की है, जिससे इसे एक Omnichannel ब्रांड के रूप में पहचान मिल रही है।


📈 FY25 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY25 में Bonkers Corner ने शानदार ग्रोथ दर्ज की

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू: ₹123 करोड़
  • साल-दर-साल वृद्धि: 23%
  • शुद्ध लाभ: ₹4.3 करोड़

यह आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी सिर्फ तेजी से बढ़ ही नहीं रही बल्कि प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में भी आगे बढ़ रही है


🛍️ D2C फैशन मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा

भारत में D2C फैशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और इसमें कई नए ब्रांड सामने आ रहे हैं।

इस सेगमेंट में Bonkers Corner को कई कंपनियों से प्रतिस्पर्धा मिल रही है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • Snitch
  • Rare Rabbit
  • MyDesignation
  • Bewakoof
  • The Souled Store

इनमें से कई कंपनियां हाल के वर्षों में बड़े फंडिंग राउंड भी जुटा चुकी हैं, जिससे इस मार्केट में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

हालांकि Bonkers Corner की खासियत इसकी unique streetwear positioning और युवाओं को टारगेट करने वाली ब्रांडिंग है।


🚀 आगे की रणनीति

नए निवेश के बाद कंपनी की योजना है कि वह:

  • नए फैशन प्रोडक्ट लॉन्च करे
  • अपने ऑफलाइन स्टोर्स और ओमnichannel नेटवर्क का विस्तार करे
  • ब्रांड मार्केटिंग को मजबूत बनाए
  • टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को बेहतर बनाए

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में Gen-Z और युवा ग्राहकों के बीच streetwear की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे इस सेगमेंट में काम करने वाले ब्रांड्स के लिए बड़े अवसर बन रहे हैं।


📊 FundingRaised Insight

भारत का D2C फैशन इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और Bonkers Corner जैसे ब्रांड इस बदलाव का फायदा उठा रहे हैं।

₹95 करोड़ की यह नई फंडिंग न केवल कंपनी की ब्रांड ग्रोथ और विस्तार को गति देगी, बल्कि यह भी दिखाती है कि निवेशक अभी भी नए-युग के डिजिटल फैशन ब्रांड्स में मजबूत संभावनाएं देख रहे हैं।

यदि कंपनी अपनी ब्रांड पहचान, डिजाइन और ओमnichannel रणनीति को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाती है, तो आने वाले वर्षों में Bonkers Corner भारतीय D2C फैशन बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकता है।

Read more :🪑 IPO की तैयारी में Rentomojo! प्राइवेट से पब्लिक कंपनी बना स्टार्टअप

🪑 IPO की तैयारी में Rentomojo! प्राइवेट से पब्लिक कंपनी बना स्टार्टअप

Rentomojo

भारत के तेजी से बढ़ते consumer tech और lifestyle स्टार्टअप्स में शामिल Rentomojo अब अपने अगले बड़े कदम की ओर बढ़ रहा है। बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने अपने initial public offering (IPO) की तैयारी शुरू कर दी है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कंपनी ने खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल लिया है।

कंपनी के बोर्ड और शेयरहोल्डर्स ने एक विशेष प्रस्ताव पास करते हुए “Rentomojo Private Limited” का नाम बदलकर “Rentomojo Limited” कर दिया है। यानी कंपनी के नाम से “Private” शब्द हटा दिया गया है। यह बदलाव आमतौर पर उन कंपनियों द्वारा किया जाता है जो आने वाले समय में स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रही होती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Rentomojo अगले कुछ वर्षों में अपना IPO लॉन्च करने की योजना बना रहा है और कंपनी FY27 के आसपास पब्लिक लिस्टिंग का लक्ष्य रख रही है।


🚀 2014 में शुरू हुआ था Rentomojo का सफर

Rentomojo की स्थापना साल 2014 में हुई थी। कंपनी का बिजनेस मॉडल भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहे rental economy पर आधारित है।

यह प्लेटफॉर्म ग्राहकों को फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण किराए पर उपलब्ध कराता है। यानी लोगों को महंगे सामान खरीदने की जरूरत नहीं होती, बल्कि वे इन्हें मासिक किराए पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

आज के समय में खासकर मेट्रो शहरों और युवा प्रोफेशनल्स के बीच यह मॉडल काफी लोकप्रिय हो चुका है, क्योंकि बहुत से लोग बार-बार शहर बदलते हैं और महंगा फर्नीचर खरीदना उनके लिए व्यावहारिक नहीं होता।


🏙️ 23 शहरों में मौजूदगी, लाखों ग्राहक

वर्तमान में Rentomojo भारत के 23 शहरों में अपनी सेवाएं दे रहा है।

कंपनी के अनुसार:

  • इसके पास 2.2 लाख से अधिक एक्टिव सब्सक्राइबर हैं
  • प्लेटफॉर्म पर 7.7 लाख से ज्यादा रेंटल आइटम्स मैनेज किए जा रहे हैं
  • देशभर में 71 एक्सपीरियंस स्टोर्स संचालित किए जा रहे हैं

इन स्टोर्स के जरिए ग्राहक प्रोडक्ट को देख सकते हैं और फिर उसे रेंट पर बुक कर सकते हैं।

कंपनी ने समय के साथ अपने प्रोडक्ट कैटेगरी को भी बढ़ाया है। अब यह सिर्फ फर्नीचर ही नहीं बल्कि appliances, mattresses, water purifiers और अन्य घरेलू सामान भी किराए पर उपलब्ध कराती है।


📊 FY25 में मजबूत फाइनेंशियल ग्रोथ

पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने बिजनेस को तेजी से बढ़ाया है।

कंपनी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, FY23 से FY25 के बीच Rentomojo के net rental revenue में 48.24% का CAGR दर्ज किया गया है।

वहीं EBITDA यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी मजबूत सुधार देखने को मिला है।

  • FY25 EBITDA: ₹118.41 करोड़
  • FY24 EBITDA: ₹78.23 करोड़

यह बढ़ोतरी बताती है कि कंपनी का operating leverage बेहतर हो रहा है और बिजनेस मॉडल धीरे-धीरे ज्यादा लाभदायक बनता जा रहा है।


💰 रेवेन्यू और प्रॉफिट में भी जबरदस्त उछाल

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार Rentomojo ने FY25 में मजबूत प्रदर्शन किया।

  • FY25 Operating Revenue: ₹266 करोड़
  • FY24 Operating Revenue: ₹193 करोड़

यानी कंपनी की आय में 38% की वृद्धि दर्ज की गई।

सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, बल्कि कंपनी का नेट प्रॉफिट भी तेजी से बढ़ा है।

  • FY25 Net Profit: लगभग ₹43 करोड़
  • FY24 के मुकाबले वृद्धि: 92%

यह संकेत देता है कि कंपनी न सिर्फ तेजी से बढ़ रही है बल्कि profitability की दिशा में भी मजबूत प्रगति कर रही है।


💸 650 करोड़ रुपये से ज्यादा फंडिंग जुटा चुकी है कंपनी

अपने विकास के दौरान Rentomojo ने कई बड़े निवेशकों से फंडिंग भी जुटाई है।

अब तक कंपनी ₹650 करोड़ से अधिक की पूंजी विभिन्न फंडिंग राउंड्स के माध्यम से जुटा चुकी है।

हाल ही में कंपनी ने $25 मिलियन की फंडिंग भी हासिल की थी, जिसका नेतृत्व Edelweiss ने किया था।

कंपनी के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Accel
  • Chiratae Ventures
  • Bain Capital
  • Edelweiss Discovery Fund
  • ValueQuest S.C.A.L.E. Fund

इसके अलावा कई बैंकों और NBFCs का भी कंपनी को समर्थन मिला हुआ है।


📈 IPO की दिशा में अगला बड़ा कदम

किसी भी स्टार्टअप के लिए प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदलना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है।

यह कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब कंपनी IPO के लिए कानूनी और कॉर्पोरेट संरचना तैयार कर रही होती है।

अगर Rentomojo की IPO योजना सफल होती है, तो यह भारत की रेंटल इकोनॉमी में काम करने वाली पहली बड़ी लिस्टेड कंपनियों में से एक बन सकती है।

IPO के जरिए कंपनी को नए निवेश, विस्तार और ब्रांड विश्वसनीयता का फायदा मिल सकता है।


🔎 FundingRaised Insight

भारत में subscription और rental economy तेजी से बढ़ रही है। युवा उपभोक्ता अब ownership की बजाय access मॉडल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

Rentomojo इसी ट्रेंड का फायदा उठाकर अपने बिजनेस को तेजी से स्केल कर रहा है।

अगर कंपनी अगले कुछ वर्षों में अपनी ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को इसी तरह बनाए रखती है, तो इसका संभावित IPO भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा माइलस्टोन साबित हो सकता है।

स्टार्टअप और बिजनेस से जुड़ी ऐसी ही लेटेस्ट खबरों के लिए जुड़े रहिए FundingRaised के साथ। 🚀

Read more :🇮🇳 12 स्टार्टअप्स की ₹640 करोड़ से ज्यादा कमाई

🇮🇳 12 स्टार्टअप्स की ₹640 करोड़ से ज्यादा कमाई

स्टार्टअप्स

भारत के F&B सेक्टर में नई लहर 🚀

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में भले ही पिछले कुछ समय से Funding Winter की चर्चा हो रही हो, लेकिन Food & Beverage (F&B) सेक्टर में कई नए स्टार्टअप तेजी से ग्रो कर रहे हैं।

हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 12 स्टार्टअप्स ने मिलकर ₹640 करोड़ से ज्यादा का संयुक्त रेवेन्यू हासिल किया है।
ये कंपनियां भारत के किचन और फूड मार्केट को तेजी से बदल रही हैं।

इनमें से कुछ कंपनियां अपने यूनिक प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट-बेस्ड ब्रांडिंग के कारण तेजी से आगे बढ़ रही हैं।


⭐ तेजी से बढ़ते 5 प्रमुख स्टार्टअप

1️⃣ Sid’s Farm – शुद्ध दूध का भरोसा

💰 Revenue: ₹167.59 करोड़

Sid’s Farm ने दूध के मार्केट में Zero-Adulteration (बिना मिलावट) का भरोसा बनाया।

हर बैच पर 26+ क्वालिटी टेस्ट

अपनी सप्लाई चेन खुद कंट्रोल

प्रीमियम डेयरी ब्रांड के रूप में पहचान

इसी भरोसे के कारण यह कंपनी तेजी से नए शहरों में विस्तार कर रही है।


2️⃣ ZOFF – मसालों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

💰 Revenue: ₹102.70 करोड़

ZOFF ने मसालों के बाजार में Air-Grinding Technology का इस्तेमाल किया।

इस तकनीक से मसाले कम तापमान पर पिसते हैं, जिससे उनकी खुशबू और ऑयल बरकरार रहता है।

Shark Tank से पहचान

Quick-commerce प्लेटफॉर्म पर मजबूत बिक्री

इसी रणनीति से कंपनी ने ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार किया।


3️⃣ Potful – क्ले पॉट बिरयानी का अनोखा मॉडल

💰 Revenue: ₹58.72 करोड़

Potful ने Clay-Pot Biryani को अपना मुख्य प्रोडक्ट बनाया।

ऑर्डर के बाद ताज़ा बिरयानी तैयार

क्लाउड किचन मॉडल

प्रीमियम फैमिली मील ब्रांड

इस मॉडल ने कंपनी को तेजी से बढ़ने में मदद की।


4️⃣ GO DESi – देसी कैंडी को नया रूप

💰 Revenue: ₹55.65 करोड़

GO DESi ने पारंपरिक भारतीय फ्लेवर को आधुनिक पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा।

उदाहरण:

इमली पॉप

आम पन्ना फ्लेवर

इससे छोटे शहरों की यादों को बड़े शहरों की मार्केट में लाया गया।


5️⃣ Blue Tea – सोशल मीडिया से बनी ग्लोबल ब्रांड

💰 Revenue: ₹36.69 करोड़

Blue Tea ने Butterfly Pea Flower से बनी प्राकृतिक नीली चाय लॉन्च की।

Instagram-friendly प्रोडक्ट

वेलनेस ड्रिंक के रूप में पोजिशनिंग

इंटरनेशनल एक्सपोर्ट

इससे यह ब्रांड तेजी से ग्लोबल मार्केट में भी पहुंच गया।


📊 इस ग्रोथ से क्या सीख मिलती है?

इन सभी कंपनियों में कुछ चीजें कॉमन हैं:

✅ एक ही कैटेगरी पर फोकस
✅ सप्लाई चेन पर मजबूत कंट्रोल
✅ प्रोडक्ट में स्पष्ट अलग पहचान
✅ ब्रांड में भरोसा

आज के समय में केवल प्रोडक्ट बेचना काफी नहीं है — ट्रस्ट और क्वालिटी सबसे बड़ा फैक्टर बन गया है।


✔️ FundingRaised Insight:
भारत के नए F&B स्टार्टअप्स अब सिर्फ फूड नहीं बेच रहे, बल्कि ट्रस्ट, क्वालिटी और अनुभव बेच रहे हैं। यही आने वाले समय में सफल ब्रांड का फॉर्मूला बन सकता है।

Read more :♻️ Reusable Packaging Startup InfinityBox ने जुटाए ₹14.1 करोड़,

♻️ Reusable Packaging Startup InfinityBox ने जुटाए ₹14.1 करोड़,

InfinityBox

बेंगलुरु स्थित reusable packaging स्टार्टअप InfinityBox ने अपने Pre-Series A funding round में ₹14.1 करोड़ जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Rainmatter ने की, जबकि मौजूदा निवेशकों AAR EM Ventures और Capital-A ने भी इसमें भाग लिया।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत में sustainable packaging और single-use plastic alternatives की मांग तेजी से बढ़ रही है। फूड डिलीवरी और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में reusable packaging मॉडल को तेजी से अपनाया जा रहा है, और InfinityBox इसी बदलाव को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।


💰 कंपनी ने जारी किए प्रेफरेंस शेयर

कंपनी के Registrar of Companies (RoC) में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, InfinityBox के बोर्ड ने 26,394 Pre-Series A compulsorily convertible cumulative preference shares जारी करने की मंजूरी दी है। इन शेयरों का issue price ₹5,342 प्रति शेयर तय किया गया है, जिसके जरिए कंपनी ने कुल ₹14.09 करोड़ जुटाए हैं।

इस फंडिंग राउंड में Rainmatter ने सबसे बड़ा निवेश किया और करीब ₹12 करोड़ लगाए। इसके अलावा:

  • AAR EM Ventures LLP ने लगभग ₹1.5 करोड़ का निवेश किया
  • Capital-A (Manjushree Capital Advisors) ने ₹50 लाख निवेश किए
  • एंजेल निवेशक Dhyanesh Shah ने लगभग ₹9.98 लाख का निवेश किया

इस निवेश के साथ कंपनी को अपने बिजनेस को तेजी से स्केल करने और नए प्रोडक्ट विकसित करने में मदद मिलेगी।


📈 कंपनी की वैल्यूएशन में बड़ा उछाल

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म Entrackr के अनुमान के मुताबिक, इस नए निवेश के बाद InfinityBox की post-money valuation लगभग ₹87 करोड़ तक पहुंच गई है।

यह पिछले फंडिंग राउंड की तुलना में काफी अधिक है। पिछली बार कंपनी की वैल्यूएशन करीब ₹48 करोड़ थी। यानी इस राउंड के बाद कंपनी की वैल्यूएशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।


🚀 क्या करता है InfinityBox?

InfinityBox की स्थापना Shashwat Gangwal और Keshav Godala ने की थी। कंपनी एक reusable packaging platform चलाती है, जो खास तौर पर food delivery कंपनियों और रेस्टोरेंट्स के लिए बनाया गया है।

आम तौर पर फूड डिलीवरी में single-use plastic containers का इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। InfinityBox इस समस्या का समाधान एक circular packaging system के जरिए करता है।

इस मॉडल में:

  • रेस्टोरेंट reusable containers में खाना पैक करते हैं
  • ग्राहक खाना खाने के बाद कंटेनर वापस कर देता है
  • कंटेनर को साफ करके दोबारा इस्तेमाल किया जाता है

इस तरह यह मॉडल waste कम करने और sustainable supply chain बनाने में मदद करता है।


🧾 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी ने बताया कि इस नए निवेश से मिली पूंजी का इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • बिजनेस का expansion
  • product development
  • capital expenditure
  • working capital requirements

InfinityBox का लक्ष्य आने वाले समय में ज्यादा शहरों में अपनी सेवा शुरू करना और ज्यादा रेस्टोरेंट्स व फूड डिलीवरी पार्टनर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।


📊 FY25 में मजबूत ग्रोथ

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो InfinityBox ने पिछले साल शानदार ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी की operating revenue FY25 में 3.1 गुना बढ़कर ₹17.81 करोड़ हो गई, जबकि FY24 में यह ₹5.70 करोड़ थी।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने अपने घाटे को भी काफी हद तक कम किया है।

  • FY24 में कंपनी का नुकसान ₹3.45 करोड़ था
  • FY25 में यह घटकर सिर्फ ₹63.3 लाख रह गया

यानी कंपनी ने revenue बढ़ाने के साथ-साथ loss control करने में भी सफलता हासिल की है।


📊 निवेश के बाद शेयरहोल्डिंग

इस नए निवेश के बाद कंपनी के शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में भी बदलाव हुआ है।

फंडिंग के बाद Rainmatter कंपनी का सबसे बड़ा बाहरी निवेशक बन जाएगा, जिसकी हिस्सेदारी करीब 13.78% होगी।

इसके अलावा:

  • Capital-A के पास लगभग 3.36% हिस्सेदारी होगी
  • AAR EM Ventures LLP के पास 3.11% हिस्सेदारी होगी
  • एंजेल निवेशक Dhyanesh Shah के पास 0.11% हिस्सेदारी रहेगी

यह निवेश InfinityBox को आगे के फंडिंग राउंड और विस्तार के लिए मजबूत आधार देगा।


🌱 भारत में बढ़ रही Sustainable Packaging की मांग

भारत में environment-friendly packaging की मांग तेजी से बढ़ रही है। ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी इंडस्ट्री के बढ़ने के साथ-साथ single-use plastic waste भी बढ़ा है।

ऐसे में reusable और circular packaging solutions स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर बनते जा रहे हैं। InfinityBox इसी ट्रेंड का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

अगर कंपनी अपने मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू करने में सफल रहती है, तो यह भारत में sustainable food delivery ecosystem बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


📢 स्टार्टअप फंडिंग, बिजनेस और टेक्नोलॉजी से जुड़ी ऐसी ही ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — FundingRaised के साथ।

Read more :💰 फिनटेक कंपनी Moneyview लाएगी ₹1,500 करोड़ का IPO,

💰 फिनटेक कंपनी Moneyview लाएगी ₹1,500 करोड़ का IPO,

Moneyview

भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर से एक और बड़ी खबर सामने आई है। बेंगलुरु स्थित डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Moneyview ने ₹1,500 करोड़ का Initial Public Offering (IPO) लाने के लिए भारतीय बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर दिया है।

कंपनी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत में फिनटेक कंपनियां तेजी से सार्वजनिक बाजार (stock market) की ओर बढ़ रही हैं। IPO के जरिए Moneyview अपने बिजनेस को और तेजी से बढ़ाने और लोन वितरण को मजबूत करने की योजना बना रही है।


📑 IPO की संरचना क्या होगी?

DRHP के अनुसार, Moneyview का प्रस्तावित IPO दो हिस्सों में होगा।

पहला हिस्सा ₹1,500 करोड़ का fresh issue होगा, जिसमें कंपनी नए शेयर जारी करके पूंजी जुटाएगी।

दूसरा हिस्सा Offer For Sale (OFS) का होगा, जिसमें मौजूदा निवेशक और प्रमोटर अपने कुछ शेयर बेचेंगे। इस OFS के तहत 13.6 करोड़ तक equity shares बेचे जा सकते हैं।

इस ऑफर में कंपनी के co-founder और promoter Puneet Agarwal भी हिस्सा लेंगे। उनके साथ शुरुआती निवेशकों में शामिल Accel, Ribbit Capital और Apis Partners भी अपने कुछ शेयर बेच सकते हैं।


💼 Pre-IPO Placement की भी योजना

IPO से पहले Moneyview लगभग ₹300 करोड़ तक का pre-IPO placement भी कर सकती है।

Pre-IPO placement का मतलब है कि कंपनी कुछ चुनिंदा निवेशकों को पहले ही शेयर जारी कर सकती है। इससे कंपनी को IPO से पहले अतिरिक्त पूंजी मिल जाती है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है।


🏦 कौन संभाल रहा है IPO?

DRHP के अनुसार, इस IPO को मैनेज करने के लिए कई प्रमुख निवेश बैंक नियुक्त किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • Axis Capital
  • IIFL Capital Services
  • BofA Securities India
  • Kotak Mahindra Capital Company

जबकि इस इश्यू के Registrar के रूप में MUFG Intime India काम करेगा।


📊 IPO से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कैसे होगा?

Moneyview ने साफ किया है कि IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने लेंडिंग बिजनेस को मजबूत करने के लिए करेगी।

फ्रेश इश्यू से प्राप्त ₹1,500 करोड़ में से:

  • ₹650 करोड़ का इस्तेमाल loan disbursals को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा। यह Default Loss Guarantee (DLG) व्यवस्था के तहत होगा।
  • ₹450 करोड़ कंपनी अपनी NBFC इकाई Whizdm Finance में निवेश करेगी ताकि उसकी पूंजी मजबूत हो सके।
  • बाकी रकम general corporate purposes के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

यह रणनीति कंपनी को अपने लेंडिंग ऑपरेशंस को तेजी से विस्तार देने में मदद करेगी।


🚀 2014 में हुई थी Moneyview की शुरुआत

Moneyview की स्थापना साल 2014 में Puneet Agarwal और Sanjay Aggarwal ने की थी।

कंपनी एक credit-led digital financial services platform चलाती है, जो ग्राहकों को कई तरह की फाइनेंशियल सेवाएं प्रदान करती है।

Moneyview के प्रमुख प्रोडक्ट्स में शामिल हैं:

  • Personal Loans
  • Credit Score Tracking
  • Insurance Distribution
  • अन्य डिजिटल फाइनेंशियल सेवाएं

कंपनी का मुख्य फोकस भारत के उन ग्राहकों पर है जो “new-to-credit” हैं या जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होती।


📱 12.5 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का नेटवर्क

Moneyview का दावा है कि उसका प्लेटफॉर्म 125 मिलियन (12.5 करोड़) से ज्यादा यूजर्स तक पहुंच चुका है।

कंपनी की खास बात यह है कि इसका बड़ा यूजर बेस Tier II और छोटे शहरों में मौजूद है।

इन क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हैं, इसलिए डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।


🤝 40 से ज्यादा वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी

Moneyview अपने प्लेटफॉर्म पर लोन और अन्य सेवाएं देने के लिए 40 से ज्यादा financial institutions के साथ साझेदारी करता है।

इनमें शामिल हैं:

  • Banks
  • NBFCs
  • Insurance Companies

इन साझेदारियों के जरिए कंपनी ग्राहकों को अलग-अलग वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराती है।


📈 Revenue और Profit में तेज़ ग्रोथ

फाइनेंशियल प्रदर्शन की बात करें तो Moneyview ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी की operating revenue FY25 में लगभग ₹2,379 करोड़ रही। इसी अवधि में कंपनी का net profit ₹240 करोड़ रहा।

वहीं FY26 के पहले नौ महीनों (April–December 2025) में कंपनी का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा।

  • Revenue: ₹2,409 करोड़
  • Net Profit: ₹245 करोड़

इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है और यह लाभदायक भी बन चुका है।


🇮🇳 भारत में Fintech IPO की बढ़ती लहर

भारत में हाल के वर्षों में कई fintech startups सार्वजनिक बाजार की ओर बढ़ रहे हैं।

डिजिटल लेंडिंग, पेमेंट्स और फाइनेंशियल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ने के कारण निवेशकों की दिलचस्पी भी इस सेक्टर में बढ़ रही है।

Moneyview का IPO भी इसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है। अगर यह IPO सफल रहता है, तो यह कंपनी के विस्तार और भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


✍️ स्टार्टअप, IPO और फंडिंग से जुड़ी ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए जुड़े रहें — FundingRaised के साथ। 🚀

Read more :⚡ Battery Smart को Pre-Series C Funding में $7 मिलियन से ज्यादा निवेश,

⚡ Battery Smart को Pre-Series C Funding में $7 मिलियन से ज्यादा निवेश,

Battery Smart

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज़ी से बढ़ावा देने वाली Battery Smart ने अपने Pre-Series C funding round की शुरुआत कर दी है। इस राउंड में कंपनी को अब तक $7 मिलियन (लगभग ₹66 करोड़) से ज्यादा का निवेश मिल चुका है।

यह निवेश Acacia Inclusion, Blume Ventures और PC-SBI Kurashi Visionary Fund जैसे प्रमुख निवेशकों ने किया है। यह जानकारी कंपनी की Regulatory Filings से सामने आई है।

दिलचस्प बात यह है कि अभी इस राउंड का कुल आकार (total round size) सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती निवेश से साफ है कि निवेशकों को भारत के EV battery swapping market में बड़ा अवसर दिखाई दे रहा है।


📑 Regulatory Filing में क्या जानकारी सामने आई?

कंपनी की Registrar of Companies (RoC) में दाखिल की गई फाइलिंग के अनुसार, Battery Smart के बोर्ड ने 12,158 Pre-Series C Compulsory Convertible Preference Shares (CCPS) जारी करने के लिए विशेष प्रस्ताव पास किया है।

इन शेयरों की कीमत ₹54,407 प्रति शेयर तय की गई है, जिससे कंपनी ने कुल मिलाकर ₹66 करोड़ (लगभग $7.4 मिलियन) जुटाए हैं।

निवेशकों का योगदान इस प्रकार रहा:

  • Acacia Inclusion: ₹36.3 करोड़
  • PC-SBI Kurashi Visionary Fund: ₹17.8 करोड़
  • Blume Ventures: ₹12 करोड़

हालांकि, जब इस निवेश के बारे में कंपनी से संपर्क किया गया तो Battery Smart ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।


⚡ Battery Smart क्या करती है?

Battery Smart भारत में electric two-wheelers और three-wheelers के लिए battery swapping network चलाती है।

कंपनी का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी दो बड़ी समस्याओं को हल करना है:

  • Range anxiety (बैटरी खत्म होने का डर)
  • बैटरी की ऊंची कीमत

Battery Smart ने इसका समाधान Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल के जरिए निकाला है।

इस मॉडल में EV यूजर को बैटरी खरीदने की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय वे कंपनी के battery swapping stations पर जाकर कुछ ही मिनटों में अपनी बैटरी बदल सकते हैं।


🚕 खास तौर पर Gig Economy Drivers को फायदा

Battery Smart का यह मॉडल खासतौर पर उन ड्राइवरों के लिए फायदेमंद है जो gig economy में काम करते हैं, जैसे:

  • EV ऑटो ड्राइवर
  • डिलीवरी पार्टनर
  • लास्ट माइल लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर

इन ड्राइवरों को महंगी बैटरी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनकी शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है

साथ ही, बैटरी स्वैपिंग में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, जिससे उनका काम बंद नहीं होता और कमाई पर असर नहीं पड़ता।


💰 अब तक $192 मिलियन से ज्यादा की फंडिंग

Battery Smart अब तक निवेशकों से करीब $192 मिलियन की कुल फंडिंग जुटा चुकी है।

इसमें शामिल हैं:

  • $65 मिलियन Series B funding
  • $29 मिलियन extended Series B round

कंपनी के निवेशकों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं जैसे:

  • Tiger Global
  • Blume Ventures
  • Ecosystem Integrity Fund

इन निवेशकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का EV ecosystem काफी तेजी से बढ़ेगा और battery swapping इसमें अहम भूमिका निभाएगा।


📊 Battery Smart का Revenue तेजी से बढ़ रहा

फाइनेंशियल प्रदर्शन की बात करें तो Battery Smart ने हाल के वर्षों में तेज़ ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी की operating revenue FY25 में 52% बढ़कर ₹249 करोड़ हो गई, जबकि FY24 में यह ₹164 करोड़ थी।

यह दिखाता है कि भारत में electric mobility adoption तेजी से बढ़ रही है और battery swapping services की मांग भी लगातार बढ़ रही है।


📈 EBITDA Positive भी हुई कंपनी

हाल ही में Battery Smart ने यह भी घोषणा की कि कंपनी ने operating break-even हासिल कर लिया है और अब EBITDA positive बन गई है।

स्टार्टअप दुनिया में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है क्योंकि कई EV स्टार्टअप अभी भी भारी घाटे में काम कर रहे हैं।

EBITDA positive होने का मतलब है कि कंपनी का core business अब मुनाफे की दिशा में बढ़ रहा है


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Regulatory filing के अनुसार, इस नए निवेश का इस्तेमाल कंपनी कई अहम क्षेत्रों में करेगी:

  • नए शहरों में business expansion
  • battery swapping infrastructure को बढ़ाना
  • capital expenditure
  • working capital requirements
  • अन्य general corporate purposes

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में EV adoption बढ़ने के साथ battery swapping नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी होगा।


🇮🇳 भारत में EV बैटरी स्वैपिंग का बढ़ता बाजार

भारत सरकार भी electric vehicles को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।

खासतौर पर two-wheelers और three-wheelers सेगमेंट में EV adoption तेजी से बढ़ रहा है।

ऐसे में battery swapping मॉडल कई कारणों से लोकप्रिय हो रहा है:

  • कम चार्जिंग समय
  • कम शुरुआती लागत
  • बेहतर वाहन उपयोग

Battery Smart इसी अवसर को पकड़ने की कोशिश कर रही है।


🔎 आगे क्या है Battery Smart की योजना?

EV इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ते अवसरों को देखते हुए Battery Smart आने वाले समय में अपने battery swapping stations का नेटवर्क और मजबूत करना चाहती है।

कंपनी का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा शहरों में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि EV ड्राइवरों को तेज़ और सस्ती बैटरी सुविधा मिल सके।

अगर कंपनी इसी गति से विस्तार करती है, तो आने वाले वर्षों में Battery Smart भारत के EV infrastructure ecosystem का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।


✍️ स्टार्टअप और फंडिंग से जुड़ी ऐसी ही ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — FundingRaised के साथ।

Read more :🏠 10 मिनट में होम सर्विस Pronto ने Series B में जुटाए $25 मिलियन,