🔐 IDfy ने जुटाए 476 करोड़ रुपये,

IDfy

डिजिटल युग में पहचान सत्यापन (Identity Verification), धोखाधड़ी रोकथाम (Fraud Detection) और डेटा गोपनीयता (Privacy Compliance) की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी बढ़ती जरूरत के बीच ट्रस्ट और रेगटेक प्लेटफॉर्म IDfy ने सीरीज F फंडिंग राउंड में 476 करोड़ रुपये (करीब 53 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं।

यह निवेश प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों प्रकार के लेनदेन का मिश्रण है। इस राउंड का नेतृत्व Neo Asset Management ने अपने Neo Secondaries Fund के जरिए किया। इसके अलावा मौजूदा निवेशकों Blume Ventures, Analog Capital, Elev8, IndiaMART और Kae Capital ने भी भागीदारी की।


💰 फंडिंग का उपयोग कैसे होगा?

इस फंडिंग के प्राइमरी हिस्से का उपयोग कंपनी तीन मुख्य उद्देश्यों के लिए करेगी:

  1. रणनीतिक अधिग्रहण (Strategic Acquisitions)
  2. नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार
  3. उत्पाद पोर्टफोलियो का और विकास

वहीं, सेकेंडरी हिस्से के जरिए शुरुआती निवेशकों और कर्मचारियों को आंशिक एग्जिट और लिक्विडिटी मिलेगी।


🏢 2011 में हुई थी शुरुआत

IDfy की स्थापना 2011 में हुई थी। कंपनी ने डिजिटल भरोसे (Digital Trust) को मजबूत करने के उद्देश्य से एक इंटीग्रेटेड “TrustStack” प्लेटफॉर्म विकसित किया है।

इस प्लेटफॉर्म के तहत कंपनी निम्न सेवाएं प्रदान करती है:

  • डिजिटल ऑनबोर्डिंग
  • जोखिम प्रबंधन (Risk Mitigation)
  • धोखाधड़ी पहचान (Fraud Detection)
  • डेटा गोपनीयता गवर्नेंस (Privacy Governance)

आज IDfy 10 से अधिक सेक्टर्स में 500 से ज्यादा एंटरप्राइज क्लाइंट्स को सेवा दे रही है। कंपनी हर साल 500 मिलियन से अधिक वेरिफिकेशन चेक्स करती है।


🌍 सात देशों में मौजूदगी

IDfy का संचालन सात देशों में फैला हुआ है, जिनमें भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के देश शामिल हैं।

डिजिटल ट्रांजैक्शन्स में तेजी, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार और रेगुलेटरी नियमों में बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर रेगटेक समाधान की मांग बढ़ी है।


📜 भारत में रेगटेक सेक्टर को मिला बढ़ावा

भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के लागू होने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट में बढ़ोतरी ने रेगटेक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सरकार की सख्ती ने कंपनियों को मजबूत पहचान सत्यापन और अनुपालन समाधान अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

ऐसे माहौल में IDfy जैसी कंपनियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।


📊 अब तक जुटा चुकी है 120 मिलियन डॉलर से ज्यादा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IDfy अब तक कुल 120 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है।

इससे पहले कंपनी ने 27 मिलियन डॉलर का एक राउंड भी जुटाया था, जिसमें Elev8, KB Investment और Tenacity जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।

लगातार मिल रही फंडिंग यह दर्शाती है कि निवेशकों को कंपनी के बिजनेस मॉडल और विकास क्षमता पर भरोसा है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन में सुधार

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में IDfy का परिचालन राजस्व 186 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 145 करोड़ रुपये से अधिक है।

सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने FY25 में 1.6 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसे घाटा हुआ था।

यह बदलाव दर्शाता है कि कंपनी न केवल राजस्व बढ़ा रही है, बल्कि लाभप्रदता की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।


🔍 क्यों बढ़ रही है पहचान सत्यापन की मांग?

डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं में तेज वृद्धि ने पहचान सत्यापन को बेहद जरूरी बना दिया है।

  • फर्जी अकाउंट्स
  • ऑनलाइन धोखाधड़ी
  • डेटा लीक
  • मनी लॉन्ड्रिंग

जैसी समस्याओं से निपटने के लिए कंपनियां एडवांस्ड टेक्नोलॉजी आधारित समाधान अपना रही हैं।

AI और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से अब पहचान सत्यापन और जोखिम विश्लेषण पहले से अधिक सटीक और तेज हो गया है।


🚀 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के साथ IDfy अपने प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाने की योजना बना रही है।

संभावित अधिग्रहणों के जरिए कंपनी नई टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता जोड़ सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार से उसका वैश्विक ग्राहक आधार बढ़ेगा।

रेगुलेटरी जरूरतें लगातार बदल रही हैं, ऐसे में लचीले और स्केलेबल समाधान देने वाली कंपनियों को बड़ा अवसर मिल सकता है।


✨ निष्कर्ष

IDfy द्वारा 476 करोड़ रुपये की ताजा फंडिंग जुटाना इस बात का संकेत है कि डिजिटल ट्रस्ट और रेगटेक सेक्टर में जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं।

डिजिटल ट्रांजैक्शन्स के बढ़ते दायरे और डेटा सुरक्षा कानूनों की सख्ती ने इस उद्योग को नई दिशा दी है।

मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, वैश्विक विस्तार और तकनीकी नवाचार के साथ IDfy आने वाले वर्षों में भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।

डिजिटल दुनिया में भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है — और IDfy उसी भरोसे को तकनीक के जरिए सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। 🔐📊

Read more :🍔Subway EverBrands ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

🍔Subway EverBrands ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

Subway

भारत में फूड और बेवरेज सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, खासकर शहरी इलाकों में। इसी कड़ी में Subway और Lavazza जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स का संचालन करने वाली कंपनी EverBrands ने 15 मिलियन डॉलर (लगभग 125 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग जुटाई है। इस निवेश का नेतृत्व Playbook Partners ने किया है।

यह पूंजी EverBrands की मल्टी-ब्रांड फूड और बेवरेज रणनीति को मजबूत करने और पूरे भारत में विस्तार को गति देने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।


📈 Subway India ने पार किया 1,000 स्टोर्स का आंकड़ा

फंडिंग ऐसे समय में आई है जब Subway India ने 1,000 स्टोर्स का अहम पड़ाव पार कर लिया है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने औसतन हर सप्ताह लगभग दो नए आउटलेट खोले हैं।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेगमेंट में Subway की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इसकी मौजूदगी तेजी से बढ़ी है।

शहरी उपभोक्ताओं में हेल्दी और फास्ट फूड के बढ़ते रुझान ने Subway को बड़ा अवसर दिया है।


☕ Lavazza और अन्य ब्रांड्स का संचालन

EverBrands भारत में Subway का संचालन Culinary Brands India Private Limited के माध्यम से करती है।

इसके अलावा, कंपनी Fresh and Honest Café Private Limited के जरिए:

  • Lavazza कॉफी
  • F&H Coffee
  • Dilmah Tea (डिस्ट्रीब्यूशन)

का प्रबंधन करती है।

इस तरह EverBrands ने खुद को एक मल्टी-ब्रांड फूड और बेवरेज प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया है, जो क्विक सर्विस रेस्टोरेंट और कैफे दोनों फॉर्मेट में काम करता है।


🏙️ शहरी उपभोक्ताओं पर फोकस

EverBrands का मुख्य लक्ष्य शहरी उपभोक्ता हैं। आज के युवा और कामकाजी वर्ग के बीच कैफे कल्चर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स, कॉलेज स्टूडेंट्स और मिलेनियल्स अब केवल खाने के लिए नहीं, बल्कि सोशलाइजिंग और मीटिंग्स के लिए भी कैफे और QSR आउटलेट्स को प्राथमिकता देते हैं।

ऐसे में मल्टी-ब्रांड रणनीति कंपनी को अलग-अलग ग्राहक वर्गों तक पहुंचने का अवसर देती है।


💼 Playbook Partners का निवेश

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Playbook Partners ने किया है। यह निवेश फर्म टेक्नोलॉजी-सक्षम विकास (technology-enabled growth) का लाभ उठाने वाली मिड-मार्केट कंपनियों में निवेश करती है।

Playbook Partners की स्थापना पूर्व Reliance Jio कार्यकारी विकास चौधरी ने की थी।

फर्म ने 250 मिलियन डॉलर के अपने फंड के पहले क्लोज के बाद भारत में यह तीसरा निवेश किया है।

Playbook Partners का फोकस उन कंपनियों पर है जिनमें तेजी से विस्तार करने की क्षमता हो और जो स्केलेबल बिजनेस मॉडल के साथ काम करती हों। EverBrands इस रणनीति में पूरी तरह फिट बैठती है क्योंकि यह पहले से ही मजबूत ब्रांड्स के साथ काम कर रही है और विस्तार की स्पष्ट योजना रखती है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कैसे होगा?

EverBrands इस नई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में करेगी:

  1. नए स्टोर्स खोलने के लिए
  2. सप्लाई चेन और ऑपरेशंस को मजबूत करने के लिए
  3. टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में निवेश के लिए
  4. ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए

भारत में फूड डिलीवरी और ऑनलाइन ऑर्डरिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन कंपनी की ग्रोथ को और तेज कर सकता है।


🍽️ भारत का बढ़ता QSR और कैफे बाजार

भारत में QSR और कैफे सेगमेंट लगातार विस्तार कर रहा है। बढ़ती आय, बदलती जीवनशैली और युवा आबादी इस वृद्धि के प्रमुख कारक हैं।

अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स भारत को एक बड़े विकास बाजार के रूप में देख रहे हैं। Subway और Lavazza जैसे ब्रांड्स की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक फूड चेन के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बन चुका है।


🔎 मल्टी-ब्रांड रणनीति क्यों महत्वपूर्ण?

एक ही ब्रांड पर निर्भर रहने के बजाय मल्टी-ब्रांड पोर्टफोलियो कंपनी को जोखिम कम करने में मदद करता है।

यदि किसी एक सेगमेंट में मांग कम होती है, तो दूसरा ब्रांड उस कमी को संतुलित कर सकता है।

उदाहरण के लिए:

  • Subway QSR सेगमेंट में मजबूत है।
  • Lavazza प्रीमियम कॉफी अनुभव प्रदान करता है।
  • Dilmah Tea पारंपरिक चाय बाजार में अपनी जगह रखता है।

इस विविधता से कंपनी को व्यापक ग्राहक आधार मिलता है।


📊 आगे की संभावनाएं

Subway के 1,000 स्टोर्स का आंकड़ा पार करने के बाद कंपनी अब और तेज विस्तार की योजना बना सकती है।

भारत में छोटे शहरों और उभरते बाजारों में अभी भी बड़े अवसर मौजूद हैं। साथ ही एयरपोर्ट, मॉल और कॉर्पोरेट पार्क जैसे हाई-फुटफॉल क्षेत्रों में भी विस्तार की संभावनाएं हैं।

Playbook Partners का निवेश EverBrands को पूंजी के साथ-साथ रणनीतिक मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा।


✨ निष्कर्ष

EverBrands द्वारा 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाना इस बात का संकेत है कि भारत का फूड और बेवरेज सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।

Subway के 1,000 स्टोर माइलस्टोन और Lavazza जैसे प्रीमियम ब्रांड्स की मौजूदगी कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि EverBrands अपनी मल्टी-ब्रांड रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित विस्तार के जरिए भारतीय बाजार में कितनी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत करती है। 🍕☕

Read more :🚕 Uber India Systems Pvt Ltd की आय में बड़ी गिरावट,

🚕 Uber India Systems Pvt Ltd की आय में बड़ी गिरावट,

Uber

भारत में राइड-हेलिंग सेवाएं देने वाली कंपनी Uber की भारतीय इकाई Uber India Systems Pvt Ltd के ताज़ा वित्तीय नतीजों ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कंपनी की राइड-हेलिंग से होने वाली शुद्ध आय (नेट रेवेन्यू) में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुल कमीशन आय (ग्रॉस रेवेन्यू) लगभग स्थिर रही।

कंपनी के 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष के समेकित वित्तीय विवरणों के अनुसार, राइड-हेलिंग से शुद्ध राजस्व FY24 के 807 करोड़ रुपये से गिरकर FY25 में केवल 88 करोड़ रुपये रह गया। यानी 89% की बड़ी गिरावट 📊।


💰 ग्रॉस रेवेन्यू स्थिर, फिर भी नेट रेवेन्यू क्यों गिरा?

दिलचस्प बात यह है कि राइड्स से मिलने वाला कुल कमीशन (ग्रॉस रेवेन्यू) FY25 में 2,604 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है।

तो फिर सवाल उठता है — जब कुल कमीशन आय स्थिर रही, तो शुद्ध आय इतनी तेजी से क्यों गिर गई? 🤔

इसका मुख्य कारण है — ड्राइवर इंसेंटिव और भारी छूट (डिस्काउंट) 🎁

FY25 में Uber ने इंसेंटिव और डिस्काउंट पर अपना खर्च 33% बढ़ाकर 2,516 करोड़ रुपये कर दिया। कंपनी की लेखा नीति के अनुसार ड्राइवरों को दिए जाने वाले इंसेंटिव को कुल आय से घटा दिया जाता है।

यानी जितना ज्यादा इंसेंटिव, उतनी कम दिखने वाली शुद्ध आय। यही वजह है कि ग्रॉस रेवेन्यू स्थिर रहने के बावजूद नेट रेवेन्यू लगभग खत्म हो गया।


⚔️ प्रतिस्पर्धा का असर: Rapido की चुनौती

भारतीय राइड-हेलिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। FY25 में Rapido ने जीरो-कमीशन और फ्लैट सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाया, जिससे बाजार में नया दबाव बना।

हालांकि दोनों कंपनियों के आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती, फिर भी Rapido ने FY25 में अपना शुद्ध घाटा 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 📉।

इसके विपरीत, Uber India को FY25 में 1,512 करोड़ रुपये का समेकित घाटा हुआ, जो FY24 के 89 करोड़ रुपये की तुलना में कई गुना अधिक है।

राइड-हेलिंग से जुड़े घाटे की बात करें तो यह FY24 के 330 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 1,407 करोड़ रुपये तक पहुंच गया — यानी चार गुना से ज्यादा वृद्धि 🚨।


📊 कुल परिचालन आय में हल्की बढ़त

राइड-हेलिंग से शुद्ध आय घटने के बावजूद Uber India की कुल परिचालन आय में 2.3% की मामूली बढ़ोतरी हुई।

FY25 में कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू 3,849 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 में 3,762 करोड़ रुपये था।

इस बढ़त का मुख्य स्रोत राइड-हेलिंग नहीं, बल्कि सपोर्ट सर्विसेज रहा 🏢। कंपनी ने अपनी मूल कंपनी और समूह इकाइयों को दी जाने वाली सेवाओं से 3,664 करोड़ रुपये कमाए, जो पिछले वर्ष के 2,936 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।

इसके अलावा, कंपनी ने शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं से 79 करोड़ रुपये की आय भी अर्जित की 🚐।


📉 बाजार की बदलती तस्वीर

पिछले दो वर्षों में भारतीय राइड-हेलिंग बाजार में बड़ा बदलाव आया है।

  • Rapido राइड्स की संख्या के आधार पर अग्रणी खिलाड़ी बनकर उभरा है।
  • Uber दूसरे स्थान पर है।
  • Ola तीसरे स्थान पर पहुंच गया है और उसकी बाजार हिस्सेदारी घट रही है।

डेटा एनालिटिक्स फर्म SensorTower के अनुसार मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं और डाउनलोड के मामले में Rapido की वृद्धि अधिक तेज रही है 📲।


🧾 लेखांकन नीति और असर

Uber की लेखा नीति के अनुसार ड्राइवरों को दिए गए इंसेंटिव को ऑपरेशनल रेवेन्यू से घटाया जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो — कंपनी जितना अधिक इंसेंटिव और छूट देती है, उतनी ही कम उसकी टॉपलाइन दिखाई देती है।

इस नीति ने FY25 में मोबिलिटी बिजनेस की आय को काफी हद तक कम कर दिया।


🏛️ आगे की चुनौतियां

सरकार समर्थित ‘भारत टैक्सी’ जैसे संभावित प्लेटफॉर्म की चर्चा भी हो रही है। अगर यह ऐप सफल होता है, तो मौजूदा एग्रीगेटर्स के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि राइड-हेलिंग बिजनेस का मॉडल अब दबाव में है:

  • बढ़ती प्रतिस्पर्धा
  • इंसेंटिव पर निर्भरता
  • सब्सक्रिप्शन मॉडल की ओर झुकाव
  • कम मार्जिन और स्थिर लागत

इन सब कारणों से यह व्यवसाय बेहद संवेदनशील बन गया है ⚖️।


🔍 क्या आगे सुधार संभव है?

Uber का कहना है कि भारत उसके लिए प्रमुख विकास बाजार बना हुआ है और प्लेटफॉर्म पर राइडर मांग मजबूत है।

लेकिन लगातार बढ़ते घाटे और इंसेंटिव आधारित रणनीति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा?

कई विश्लेषकों का मानना है कि ये कंपनियां डॉलर में खर्च करती हैं और रुपये में कमाई करती हैं 💵➡️💸 — और यही असंतुलन उनकी वित्तीय सेहत पर भारी पड़ रहा है।

अब देखना यह है कि आने वाले वर्षों में Uber भारत में अपने मॉडल को कैसे ढालती है और क्या वह घाटे से निकलकर मुनाफे की राह पकड़ पाती है या नहीं। 🚀

Read more :🌿 Honasa Consumer का Q3 FY26 में दमदार प्रदर्शन,

🌿 Honasa Consumer का Q3 FY26 में दमदार प्रदर्शन,

Honasa Consumer

पर्सनल केयर ब्रांड MamaEarth की पैरेंट कंपनी Honasa Consumer Limited ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे घोषित किए। गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन करते हुए 16.2% सालाना वृद्धि (YoY Growth) दर्ज की, जबकि कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) लगभग दोगुना होकर 93% बढ़ गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹602 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹518 करोड़ था। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी ने प्रतिस्पर्धी ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है।


📊 नौ महीनों में 13% से अधिक की ग्रोथ

अगर अप्रैल से दिसंबर 2025 तक की नौ महीने की अवधि को देखें, तो Honasa Consumer का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,735 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1,533 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर 13.2% की वृद्धि दर्ज की गई।

हालांकि कंपनी ने पिछली तिमाही के लिए अलग-अलग ब्रांड्स या चैनलों का रेवेन्यू ब्रेकअप साझा नहीं किया, लेकिन कुल प्रदर्शन से स्पष्ट है कि डिजिटल और ऑफलाइन दोनों चैनलों में मांग मजबूत बनी हुई है।


💰 अन्य आय से कुल राजस्व ₹622 करोड़

ऑपरेशनल रेवेन्यू के अलावा कंपनी को ₹21 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग इनकम भी प्राप्त हुई।

इससे Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹622 करोड़ हो गई।


💸 खर्चों में बढ़ोतरी, लेकिन नियंत्रण बना रहा

एक D2C (Direct-to-Consumer) ब्रांड होने के कारण Honasa के लिए प्रोडक्ट प्रोक्योरमेंट यानी उत्पाद खरीद लागत एक बड़ा खर्च है।

🏷️ प्रोक्योरमेंट कॉस्ट

  • कुल खर्च का 34% हिस्सा
  • Q3 FY26 में ₹189 करोड़
  • Q3 FY25 में ₹158 करोड़
  • यानी 19.6% की वृद्धि

कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग लागत में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी ने मार्जिन संतुलित रखने की कोशिश की है।

👩‍💼 कर्मचारी खर्च

  • Q3 FY26 में ₹71 करोड़
  • Q3 FY25 में ₹60 करोड़
  • यानी 18% की वृद्धि

यह वृद्धि कंपनी के विस्तार, नए हायरिंग और ब्रांड स्केलिंग से जुड़ी मानी जा सकती है।

📢 मार्केटिंग और अन्य ओवरहेड

मार्केटिंग, कानूनी खर्च, किराया और अन्य ओवरहेड्स को मिलाकर कुल खर्च Q3 FY26 में बढ़कर ₹550 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹507 करोड़ था।

यानी कुल खर्च में 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई।


📈 मुनाफा लगभग दोगुना

Honasa Consumer के लिए सबसे सकारात्मक संकेत उसका बढ़ता मुनाफा है।

  • Q3 FY26 में शुद्ध लाभ (PAT) ₹50 करोड़
  • Q3 FY25 में ₹26 करोड़
  • यानी लगभग 93% की वृद्धि

तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया:

  • Q2 FY25 में मुनाफा ₹39 करोड़
  • Q3 FY26 में बढ़कर ₹50 करोड़
  • यानी 28% की बढ़ोतरी

यह दिखाता है कि कंपनी न केवल रेवेन्यू बढ़ा रही है बल्कि लागत प्रबंधन और मार्जिन सुधार पर भी ध्यान दे रही है।


🧔 मेंस ग्रूमिंग मार्केट में एंट्री

Q3 FY26 के दौरान कंपनी ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया। Honasa ने South India-केंद्रित Reginald Men ब्रांड (जो BTM Ventures Pvt Ltd के स्वामित्व में है) में 95% हिस्सेदारी ₹195 करोड़ में अधिग्रहित की

यह अधिग्रहण सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के जरिए किया गया।

इस कदम के साथ Honasa ने तेजी से बढ़ते मेंस ग्रूमिंग मार्केट में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। भारत में पुरुषों के लिए ग्रूमिंग और पर्सनल केयर उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, और कंपनी इस अवसर का लाभ उठाना चाहती है।


👨‍💼 प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ी

तिमाही के दौरान कंपनी के को-फाउंडर और प्रमोटर वरुण आलघ ने भी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।

उन्होंने ₹50 करोड़ के ब्लॉक डील के जरिए अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाकर 32.45% कर ली।

यह कदम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, क्योंकि प्रमोटर का बढ़ता विश्वास कंपनी के भविष्य पर भरोसा दर्शाता है।


📉 शेयर बाजार में स्थिति

आज के ट्रेडिंग सत्र के अंत में Honasa Consumer (MamaEarth की पैरेंट कंपनी) का शेयर ₹298 पर ट्रेड कर रहा था।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹9,725 करोड़ (लगभग $1.1 बिलियन) है।


🌿 ब्रांड पोर्टफोलियो और रणनीति

Honasa Consumer केवल MamaEarth तक सीमित नहीं है। कंपनी के पोर्टफोलियो में कई डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड शामिल हैं, जो स्किनकेयर, हेयरकेयर, बेबी केयर और अब मेंस ग्रूमिंग जैसे सेगमेंट्स में सक्रिय हैं।

कंपनी की रणनीति मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर आधारित है:

  • डिजिटल और ओम्नी-चैनल विस्तार
  • नए उत्पाद लॉन्च
  • अधिग्रहण के जरिए नए सेगमेंट में प्रवेश
  • ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग

⚖️ चुनौतियां और आगे की राह

हालांकि कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन ब्यूटी और पर्सनल केयर इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है।

  • नए D2C ब्रांड्स का प्रवेश
  • बड़ी FMCG कंपनियों की मौजूदगी
  • बढ़ती मार्केटिंग लागत
  • कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

इन सभी कारकों के बीच मार्जिन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


🔮 निष्कर्ष

Q3 FY26 Honasa Consumer के लिए सकारात्मक तिमाही साबित हुई है।

  • 16% से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ
  • 93% मुनाफे में वृद्धि
  • मेंस ग्रूमिंग सेगमेंट में एंट्री
  • प्रमोटर की बढ़ती हिस्सेदारी

ये सभी संकेत बताते हैं कि कंपनी विस्तार और प्रॉफिटेबिलिटी के संतुलन पर काम कर रही है।

आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी नए अधिग्रहणों को कितनी प्रभावी तरीके से एकीकृत करती है और क्या वह अपनी ग्रोथ रफ्तार को बरकरार रख पाती है या नहीं।

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🚚 Shadowfax Q3 FY26 Results रेवेन्यू 65% बढ़ा,

Shadowfax

लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी कंपनी Shadowfax Technologies ने भारतीय शेयर बाजारों में लिस्टिंग के बाद Q3 FY26 के अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने तीसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 65% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जबकि मुनाफा बढ़कर ₹35 करोड़ रहा। यह तिमाही कंपनी के लिए खास इसलिए भी है क्योंकि पिछले क्वार्टर में ही उसने IPO के जरिए शेयर बाजार में कदम रखा था।

NSE से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹1,159 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹701 करोड़ था। यह तेज़ वृद्धि दर्शाती है कि ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में डिलीवरी की मांग लगातार बढ़ रही है।


📦 किस क्षेत्र में काम करती है Shadowfax?

Shadowfax लास्ट-माइल और हाइपरलोकल लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में काम करती है। कंपनी:

  • ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस
  • D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड्स
  • क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म

को डिलीवरी सेवाएं प्रदान करती है।

इस क्षेत्र में कंपनी का मुकाबला Delhivery, XpressBees, Ecom Express और Ekart जैसे बड़े खिलाड़ियों से है। यह सेगमेंट कड़ी प्रतिस्पर्धा और कम मार्जिन के लिए जाना जाता है, जहां ऑपरेशनल दक्षता ही सफलता की कुंजी होती है।


💰 कुल आय ₹1,166 करोड़

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा कंपनी को Q3 FY26 में ₹7 करोड़ की अन्य आय (Other Income) भी प्राप्त हुई।

इससे तिमाही की कुल आय बढ़कर ₹1,166 करोड़ हो गई।

अगर नौ महीनों (अप्रैल–दिसंबर 2025) की बात करें, तो कंपनी का कुल रेवेन्यू बढ़कर ₹2,965 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1,772 करोड़ था। यानी 9 महीने की अवधि में 67% की वृद्धि दर्ज की गई।


💸 खर्चों में भी तेज़ बढ़ोतरी

हालांकि कंपनी ने विस्तृत खर्च का पूरा ब्योरा साझा नहीं किया, लेकिन कुछ प्रमुख आंकड़े सामने आए हैं।

  • कुल खर्च Q3 FY26 में बढ़कर ₹1,131 करोड़ हो गया
  • Q3 FY25 में यह ₹700 करोड़ था
  • यानी कुल खर्च में 62% की वृद्धि

📊 फाइनेंस कॉस्ट में उछाल

  • फाइनेंस कॉस्ट बढ़कर ₹109 करोड़ हो गई
  • पिछले साल यह ₹66 करोड़ थी
  • यानी 65% की वृद्धि

इसके अलावा:

  • डिप्रिसिएशन कॉस्ट ₹32 करोड़
  • अन्य संबंधित खर्च ₹6 करोड़

तेजी से विस्तार और IPO के बाद पूंजी संरचना में बदलाव के कारण फाइनेंस कॉस्ट में वृद्धि देखी जा रही है।


📈 मुनाफे में 5 गुना उछाल

Shadowfax का सबसे बड़ा आकर्षण उसका मुनाफा रहा।

  • Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ ₹35 करोड़ रहा
  • Q3 FY25 में यह सिर्फ ₹7 करोड़ था

यानी मुनाफा 5 गुना (5X) बढ़ गया।

तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी कंपनी ने मजबूत सुधार दिखाया:

  • Q2 FY26 में मुनाफा ₹13 करोड़ था
  • Q3 FY26 में बढ़कर ₹35 करोड़ हो गया
  • यानी लगभग 2.7 गुना वृद्धि

यह संकेत देता है कि कंपनी ने अपने ऑपरेशनल मार्जिन और लागत प्रबंधन में सुधार किया है।


🏦 IPO और शेयर बाजार प्रदर्शन

Shadowfax ने जनवरी 20–22 के बीच IPO लॉन्च किया था, जिसके जरिए कंपनी ने ₹1,907 करोड़ जुटाए।

हालांकि लिस्टिंग के दिन कंपनी के शेयर ₹112–113 पर खुले, जो IPO के ऊपरी प्राइस बैंड ₹124 से लगभग 9% कम थे।

लेकिन बाद में शेयर ने रिकवरी दिखाई।

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में Shadowfax का शेयर ₹125 पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹6,249 करोड़ (लगभग $796 मिलियन) है।


🌍 ई-कॉमर्स बूम का फायदा

भारत में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और D2C ब्रांड्स की तेजी से बढ़ती मांग ने लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा किए हैं।

  • 10–15 मिनट डिलीवरी मॉडल
  • छोटे शहरों में ई-कॉमर्स का विस्तार
  • डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती आदत

इन सभी ट्रेंड्स ने Shadowfax जैसी कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद की है।


⚖️ चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि ग्रोथ मजबूत है, लेकिन लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कई चुनौतियां हैं:

  • कम मार्जिन
  • बढ़ती फ्यूल लागत
  • उच्च प्रतिस्पर्धा
  • तेज़ डिलीवरी के दबाव

कंपनी के लिए आगे की राह में सबसे बड़ी चुनौती होगी:

  • लागत पर नियंत्रण
  • फाइनेंस कॉस्ट कम करना
  • टेक्नोलॉजी और नेटवर्क को कुशल बनाना

अगर कंपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखती है, तो वह मुनाफे में और सुधार कर सकती है।


🔮 आगे की संभावनाएं

IPO के बाद Shadowfax के पास विस्तार के लिए पूंजी उपलब्ध है। कंपनी:

  • नए शहरों में विस्तार
  • टेक्नोलॉजी अपग्रेड
  • वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने

पर फोकस कर सकती है।

ई-कॉमर्स सेक्टर के लगातार बढ़ने से कंपनी के लिए दीर्घकालिक संभावनाएं सकारात्मक दिखाई देती हैं।


📌 निष्कर्ष

Q3 FY26 Shadowfax के लिए एक मजबूत तिमाही साबित हुई है।

  • 65% रेवेन्यू ग्रोथ
  • 5 गुना मुनाफा वृद्धि
  • IPO के बाद स्थिर बाजार प्रदर्शन

हालांकि खर्चों में वृद्धि और प्रतिस्पर्धा बड़ी चुनौती हैं, लेकिन कंपनी ने यह संकेत दिया है कि वह ग्रोथ के साथ प्रॉफिटेबिलिटी का संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आने वाली तिमाहियों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Shadowfax किस तरह अपने मार्जिन को और मजबूत करती है और तेजी से बदलते लॉजिस्टिक्स बाजार में अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाती है।

Read more :🌱 UKHI ने जुटाए ₹10.5 करोड़,

🌱 UKHI ने जुटाए ₹10.5 करोड़,

UKHI

भारत में सस्टेनेबल और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री विकसित करने वाली IP-आधारित बायोपॉलिमर कंपनी UKHI ने सीड फंडिंग राउंड में ₹10.5 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Venture Catalysts ने किया, जबकि इसमें 100 Unicorns, 888 VC और कंपनी के रणनीतिक औद्योगिक साझेदार DCG Pack ने भी भागीदारी की।

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग उसके प्रमुख उत्पाद EcoGran के उत्पादन को बढ़ाने, फॉर्मुलेशन और प्रोसेस से जुड़ी बौद्धिक संपदा (IP) को मजबूत करने और पैकेजिंग वैल्यू चेन में साझेदारियों को गहरा करने के लिए किया जाएगा।


🏭 2019 में हुई स्थापना, लक्ष्य—सर्कुलर इकोनॉमी

UKHI की स्थापना 2019 में विशाल विवेक, प्रियंका चौहान और संदीप कुमार त्यागी ने मिलकर की थी। यह एक बायोमैटेरियल स्टार्टअप है, जो पारंपरिक प्लास्टिक के स्थान पर सस्टेनेबल और कम्पोस्टेबल विकल्प विकसित करने पर काम कर रही है।

कंपनी का उद्देश्य एक सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की दिशा में बदलाव को तेज करना है। इसके लिए UKHI कृषि अवशेष (Agricultural Residues) और लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास (Lignocellulosic Biomass) का उपयोग कर उच्च-प्रदर्शन वाले बायो-आधारित पैकेजिंग मैटेरियल तैयार करती है।


🧪 पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी

UKHI का दावा है कि उसकी तकनीक पेटेंट-पेंडिंग है और इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस टेक्नोलॉजी की खासियतें हैं:

  • स्केलेबल (बड़े स्तर पर उत्पादन योग्य)
  • लागत-प्रभावी
  • पर्यावरण के अनुकूल
  • पारंपरिक प्लास्टिक जितनी मजबूत और कार्यक्षम

कंपनी का कहना है कि उसकी बायोपॉलिमर सामग्री ब्रांड्स को पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने में मदद करती है, बिना गुणवत्ता या मजबूती से समझौता किए।


🚀 छह महीनों में व्यावसायिक सफलता

UKHI के अनुसार, पिछले छह महीनों में उसने:

  • एक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable) बायोपॉलिमर प्लेटफॉर्म तैयार किया
  • अपनी खुद की मटेरियल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विकसित की
  • भारत के पैकेजिंग इकोसिस्टम में बाजार अपनापन (Market Adoption) शुरू किया

कंपनी ऐसे बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल मैटेरियल पर काम कर रही है, जो पारंपरिक प्लास्टिक का विकल्प बन सके और मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भी संगत रहे।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि नई तकनीक अपनाने में अक्सर कंपनियों को मशीनरी बदलनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। UKHI का समाधान इस चुनौती को कम करने की दिशा में काम करता है।


📦 EcoGran: कंपनी का प्रमुख उत्पाद

UKHI का फ्लैगशिप प्रोडक्ट लाइन EcoGran है।

EcoGran एक उच्च-प्रदर्शन बायोपॉलिमर है, जिसे पैकेजिंग उद्योग में पारंपरिक प्लास्टिक के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

जुटाए गए ₹10.5 करोड़ में से बड़ी राशि EcoGran के उत्पादन को स्केल करने में खर्च की जाएगी, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।


📊 शुरुआती ग्राहकों से मजबूत प्रतिक्रिया

कंपनी ने दावा किया है कि उसने कुछ ही महीनों में व्यावसायिक राजस्व हासिल कर लिया है।

  • शुरुआती एंकर क्लाइंट्स के साथ काम शुरू किया
  • अब तक दो लाख किलोग्राम से अधिक बायोपॉलिमर सामग्री बेची
  • ग्राहक पायलट प्रोजेक्ट्स में 90% से अधिक ट्रायल-टू-कमर्शियल कन्वर्जन दर्ज किया

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का उत्पाद बाजार की जरूरतों के अनुरूप है और ग्राहकों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।


🌍 अगले 12 महीनों की योजना

UKHI का लक्ष्य अगले 12 महीनों में:

  • 24 लाख किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक को रिप्लेस करना
  • उत्पादन क्षमता का विस्तार करना
  • पैकेजिंग वैल्यू चेन में मजबूत साझेदारियां बनाना

अगर कंपनी अपने इस लक्ष्य को हासिल कर लेती है, तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।


♻️ क्यों महत्वपूर्ण है बायोपॉलिमर?

भारत समेत पूरी दुनिया में सिंगल-यूज प्लास्टिक एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन चुका है।

  • प्लास्टिक कचरा समुद्रों और भूमि को प्रदूषित कर रहा है
  • रिसाइक्लिंग की सीमाएं हैं
  • पारंपरिक प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों साल लगते हैं

ऐसे में बायोपॉलिमर और कम्पोस्टेबल मैटेरियल भविष्य का समाधान माने जा रहे हैं।

सरकारें भी प्लास्टिक पर प्रतिबंध और सस्टेनेबल विकल्पों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।


💰 निवेशकों का भरोसा

Venture Catalysts, 100 Unicorns, 888 VC और DCG Pack जैसे निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि बाजार को UKHI की तकनीक और विजन पर भरोसा है।

DCG Pack का रणनीतिक औद्योगिक साझेदार के रूप में जुड़ना कंपनी के लिए अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है, क्योंकि इससे इंडस्ट्रियल स्केल और सप्लाई चेन सपोर्ट मिल सकता है।


🔮 आगे की संभावनाएं

अगर UKHI अपनी तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने में सफल होती है, तो वह भारत के पैकेजिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

  • FMCG कंपनियां
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
  • फूड डिलीवरी कंपनियां

सभी सस्टेनेबल पैकेजिंग की तलाश में हैं। UKHI के समाधान इस मांग को पूरा कर सकते हैं।


📌 निष्कर्ष

UKHI का ₹10.5 करोड़ का सीड फंडिंग राउंड न सिर्फ एक स्टार्टअप की फंडिंग खबर है, बल्कि यह भारत में सस्टेनेबल इनोवेशन की बढ़ती दिशा का संकेत भी है।

EcoGran जैसे उत्पाद और पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी के साथ UKHI प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

अगर कंपनी अपने उत्पादन और बाजार विस्तार की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के बायोमैटेरियल सेक्टर में एक प्रमुख नाम बन सकती है।

Read more :💊 USV ने Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी खरीदी,

💊 USV ने Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी खरीदी,

Wellbeing Nutrition

भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी USV ने भारत के तेजी से बढ़ते डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) न्यूट्रास्यूटिकल और वेलनेस बाजार में प्रवेश करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Nutritionalab Private Limited, जो कि Wellbeing Nutrition की पैरेंट कंपनी है, में 79% हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक निर्णायक समझौते (Definitive Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस सौदे में Wellbeing Nutrition का कुल मूल्यांकन लगभग ₹1,583 करोड़ आंका गया है। यह अधिग्रहण भारतीय हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में तेजी से हो रहे कंसोलिडेशन का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।


🌿 क्या है Wellbeing Nutrition?

साल 2019 में स्थापित Wellbeing Nutrition एक न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड है, जो स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स और वेलनेस प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है।

कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • विटामिन और मिनरल्स
  • प्रोटीन सप्लीमेंट
  • कोलेजन
  • ओमेगा सप्लीमेंट
  • अन्य हेल्थ और वेलनेस उत्पाद

ब्रांड अपने उत्पादों की बिक्री:

  • अपनी खुद की डिजिटल वेबसाइट के माध्यम से
  • ऑनलाइन मार्केटप्लेस (जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म)
  • ऑफलाइन रिटेल चैनल

के जरिए करता है।

कंपनी की मौजूदगी भारत के अलावा अमेरिका (US), यूनाइटेड किंगडम (UK) और UAE जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ प्लान

FY25 में Wellbeing Nutrition ने लगभग ₹170 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। हालांकि, इसी अवधि में कंपनी को लगभग ₹30 करोड़ का घाटा हुआ।

कंपनी का दावा है कि पिछले दो वर्षों में उसने 120% की ग्रोथ दर्ज की है।

अब उसका लक्ष्य है कि FY27 तक वह ₹450 करोड़ से अधिक का राजस्व हासिल करे।

यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दर्शाता है कि ब्रांड आने वाले वर्षों में आक्रामक विस्तार की योजना बना रहा है।


💰 निवेशकों को बड़ा रिटर्न

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Wellbeing Nutrition ने अब तक करीब $14 मिलियन (लगभग ₹115 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।

दिसंबर 2022 में कंपनी ने $10 मिलियन की Series B फंडिंग हासिल की थी, जिसका नेतृत्व Fireside Ventures और Hindustan Unilever (HUL) ने किया था।

इस अधिग्रहण के तहत मौजूदा निवेशक आंशिक या पूर्ण रूप से बाहर निकलेंगे।

  • HUL अपनी पूरी 19.8% हिस्सेदारी USV को लगभग ₹307 करोड़ में बेचेगा।
  • HUL ने Wellbeing Nutrition में करीब ₹70 करोड़ निवेश किया था।
  • इस एग्जिट से HUL को अपने निवेश पर चार गुना से अधिक रिटर्न मिला है।

Fireside Ventures और अन्य शुरुआती निवेशक भी अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे।


🏥 USV की रणनीति: प्रिस्क्रिप्शन से प्रिवेंटिव हेल्थ की ओर

USV भारतीय फार्मा बाजार में पिछले 60 वर्षों से सक्रिय है। कंपनी ओरल एंटी-डायबिटिक और कार्डियोवैस्कुलर थेरेपी में अग्रणी है।

इसके प्रमुख ब्रांड्स में शामिल हैं:

  • Glycomet GP
  • Ecosprin
  • Roseday

इसके अलावा USV भारत में Sebamed की एक्सक्लूसिव पार्टनर भी है।

अब Wellbeing Nutrition में निवेश के जरिए USV अपने पोर्टफोलियो को प्रिस्क्रिप्शन दवाओं से आगे बढ़ाकर प्रिवेंटिव हेल्थ और लाइफस्टाइल वेलनेस सेगमेंट में ले जा रही है।

आज के दौर में लोग बीमार होने के बाद इलाज से ज्यादा बीमारी से बचाव (Preventive Healthcare) पर ध्यान दे रहे हैं। इसी ट्रेंड को देखते हुए USV ने यह रणनीतिक कदम उठाया है।


📈 D2C सेक्टर में तेजी से बढ़ता कंसोलिडेशन

2026 में भारत के D2C स्पेस में यह दूसरा बड़ा अधिग्रहण है।

पिछले हफ्ते:

  • मुंबई स्थित FMCG कंपनी Marico ने प्लांट-बेस्ड प्रोटीन स्टार्टअप Cosmix में 60% हिस्सेदारी खरीदी।
  • इस सौदे में Cosmix का इक्विटी वैल्यूएशन ₹375 करोड़ था।

इसके अलावा, पिछले साल Hindustan Unilever Limited (HUL) ने स्किनकेयर ब्रांड Minimalist का अधिग्रहण किया था, जिसका प्री-मनी वैल्यूएशन ₹2,955 करोड़ था।

यह ट्रेंड दिखाता है कि बड़ी FMCG और फार्मा कंपनियां तेजी से बढ़ते D2C और हेल्थ ब्रांड्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रही हैं।


🔍 क्यों आकर्षक है न्यूट्रास्यूटिकल बाजार?

भारत में न्यूट्रास्यूटिकल और वेलनेस बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसके पीछे कई कारण हैं:

  • हेल्थ अवेयरनेस में वृद्धि
  • फिटनेस और न्यूट्रिशन पर बढ़ता फोकस
  • ई-कॉमर्स और D2C ब्रांड्स का विस्तार
  • युवा आबादी की बढ़ती क्रय शक्ति

इस बाजार में ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं हैं, खासकर प्रीमियम और साइंस-बेस्ड सप्लीमेंट सेगमेंट में।


🚀 आगे क्या?

USV के लिए यह अधिग्रहण सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव है।

Wellbeing Nutrition के जरिए कंपनी:

  • डिजिटल-फर्स्ट कंज्यूमर बेस तक पहुंचेगी
  • प्रिवेंटिव हेल्थ सेगमेंट में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार का लाभ उठा सकेगी

अगर कंपनी Wellbeing Nutrition की ग्रोथ को स्केल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह ब्रांड भारतीय वेलनेस सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।


📌 निष्कर्ष

USV द्वारा Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी का अधिग्रहण भारतीय हेल्थ और वेलनेस उद्योग में एक महत्वपूर्ण कदम है।

₹1,583 करोड़ के इस सौदे ने न सिर्फ निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि भारत में D2C न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड्स का भविष्य उज्ज्वल है।

बड़ी कंपनियों का इस क्षेत्र में बढ़ता निवेश यह दर्शाता है कि आने वाले समय में हेल्थ, न्यूट्रिशन और वेलनेस सेगमेंट भारतीय उपभोक्ता बाजार का एक अहम हिस्सा बनने जा रहा है।

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✈️ TBO Tek Q3 FY26 Results रेवेन्यू में 86% की छलांग,

TBO

बिज़नेस-फोकस्ड ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म Travel Boutique Online (TBO) Tek ने आज अपने Q3 FY26 के नतीजे घोषित किए। गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने तीसरी तिमाही में शानदार टॉपलाइन ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 86% बढ़ा, लेकिन मुनाफे की रफ्तार लगभग स्थिर रही।

NSE से प्राप्त अनऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट के अनुसार, TBO का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹784 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि (Q3 FY25) में ₹422 करोड़ था।

📊 होटल और पैकेज बुकिंग बनी ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह

TBO का बिज़नेस मॉडल मुख्य रूप से B2B ट्रैवल एजेंट्स और कॉर्पोरेट ग्राहकों को होटल, एयर टिकट और ट्रैवल पैकेज की बुकिंग सुविधा देने पर आधारित है।

इस तिमाही में कंपनी की कुल आय का सबसे बड़ा हिस्सा होटल और पैकेज बुकिंग से आया। यह सेगमेंट कुल रेवेन्यू का लगभग 84% रहा।

  • होटल और पैकेज से आय Q3 FY26 में बढ़कर ₹661 करोड़ हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹337 करोड़ थी।
  • यानी इस सेगमेंट में 96% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

इसके अलावा:

  • एयर टिकटिंग और अन्य सेवाओं से ₹82 करोड़ की आय हुई।
  • अन्य स्रोतों से ₹41 करोड़ का योगदान मिला।

स्पष्ट है कि होटल और पैकेज बुकिंग में आई तेज़ वृद्धि ने कंपनी की कुल ग्रोथ को आगे बढ़ाया है।

💰 खर्चों में भी तेज़ उछाल, मार्जिन पर दबाव

हालांकि रेवेन्यू में तेज़ वृद्धि हुई, लेकिन खर्च भी लगभग उसी रफ्तार से बढ़े।

होटल और पैकेज बुकिंग सबसे बड़ा रेवेन्यू स्रोत होने के कारण, इससे जुड़े सर्विस फीस भी सबसे बड़ा खर्च केंद्र बन गए।

  • सर्विस फीस Q3 FY26 में ₹301 करोड़ रही, जो कुल खर्च का लगभग 42% है।
  • कर्मचारी लाभ (Employee Benefits) खर्च ₹165 करोड़ रहा।

कुल मिलाकर कंपनी का कुल खर्च Q3 FY26 में बढ़कर ₹725 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹385 करोड़ था।
यानी खर्च में 88% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

यह लगभग रेवेन्यू ग्रोथ के बराबर है, जिससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ा।

📈 मुनाफे में मामूली बढ़त

खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी के कारण कंपनी के मुनाफे में बड़ी छलांग नहीं दिखी।

  • Q3 FY26 में TBO Tek का मुनाफा बढ़कर ₹54 करोड़ रहा।
  • Q3 FY25 में यह ₹50 करोड़ था।

इस तरह सालाना आधार पर मुनाफे में सिर्फ 8% की वृद्धि हुई।

नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो:

  • कंपनी का कुल मुनाफा ₹184 करोड़ रहा।
  • यह भी पिछले साल की तुलना में लगभग 8% अधिक है।

इससे साफ है कि कंपनी की टॉपलाइन मजबूत है, लेकिन प्रॉफिट ग्रोथ सीमित रही।

📉 स्टॉक पर क्या रहा असर?

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में TBO Tek का शेयर ₹1,539 पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹16,711 करोड़ (लगभग $1.8 बिलियन) है।

मार्केट ने कंपनी की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है, लेकिन सीमित प्रॉफिट ग्रोथ निवेशकों के लिए आगे की रणनीति को लेकर सवाल भी खड़े करती है।

🌍 B2B ट्रैवल सेगमेंट में मजबूत पकड़

TBO Tek का फोकस B2B ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन पर है, जहां यह ट्रैवल एजेंट्स, कॉर्पोरेट ट्रैवल मैनेजर्स और अन्य बिज़नेस क्लाइंट्स को होटल, फ्लाइट और पैकेज बुकिंग की सुविधा देता है।

पोस्ट-पैंडेमिक दौर में ट्रैवल इंडस्ट्री में तेज़ रिकवरी देखी गई है। खासकर इंटरनेशनल ट्रैवल और कॉर्पोरेट ट्रैवल में बढ़ोतरी से TBO को फायदा मिला है।

होटल और पैकेज बुकिंग में 96% की वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी ने इस सेगमेंट में मजबूत नेटवर्क और सप्लाई बेस तैयार किया है।

⚖️ आगे की चुनौती: मार्जिन मैनेजमेंट

हालांकि ग्रोथ प्रभावशाली है, लेकिन असली चुनौती मार्जिन मैनेजमेंट की है।

  • सर्विस फीस और ऑपरेटिंग खर्चों में तेज़ वृद्धि
  • कर्मचारी लागत में बढ़ोतरी
  • टेक्नोलॉजी और नेटवर्क विस्तार पर निवेश

इन सभी कारणों से प्रॉफिट ग्रोथ सीमित रही है।

आने वाली तिमाहियों में कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  • खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जाए
  • ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बढ़ाई जाए
  • हाई-मार्जिन सेगमेंट पर फोकस बढ़े

यदि कंपनी ऐसा करने में सफल रहती है, तो रेवेन्यू ग्रोथ के साथ मुनाफे में भी तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।

🔎 निष्कर्ष

Q3 FY26 में TBO Tek ने यह साबित किया है कि वह ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन स्पेस में तेजी से स्केल कर रही है।

  • रेवेन्यू में 86% की वृद्धि
  • होटल और पैकेज सेगमेंट में 96% की छलांग
  • लेकिन मुनाफे में सिर्फ 8% की बढ़त

यह तिमाही कंपनी के लिए “ग्रोथ बनाम मार्जिन” का संकेत देती है।

अगर कंपनी आने वाले क्वार्टर में खर्चों को नियंत्रित कर पाती है और सर्विस फीस स्ट्रक्चर को ऑप्टिमाइज़ करती है, तो यह अपने मजबूत रेवेन्यू बेस को बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी में बदल सकती है।

फिलहाल, TBO Tek तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन असली टेस्ट अब मार्जिन सुधार और सस्टेनेबल प्रॉफिट ग्रोथ का होगा।

Read more :👓 Lenskart Q3 FY26 Results रेवेन्यू 36% बढ़ा,

👓 Lenskart Q3 FY26 Results रेवेन्यू 36% बढ़ा,

Lenskart

आईवियर ब्रांड Lenskart ने गुरुवार को FY26 की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ रेवेन्यू में 36% की वृद्धि दर्ज की, बल्कि मुनाफे में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 71 गुना (71X) बढ़कर ₹132.7 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में महज ₹1.85 करोड़ था।


📈 रेवेन्यू ₹2,308 करोड़ पहुंचा

NSE से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Lenskart का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹2,308 करोड़ हो गया, जो Q3 FY25 में ₹1,669 करोड़ था।

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने 36% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।


🇮🇳 भारत से 60% कमाई, 40% अंतरराष्ट्रीय बाजार से

कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार से आता है।

  • भारतीय बाजार से ₹1,385 करोड़ (60%)
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार से ₹936 करोड़ (40%)

इसके अलावा ₹14 करोड़ को इंटर-सेगमेंट रेवेन्यू के रूप में एडजस्ट किया गया।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि Lenskart अब सिर्फ भारतीय ब्रांड नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी बना चुका है।


💰 कुल आय ₹2,348 करोड़

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा कंपनी को ₹40 करोड़ की अन्य आय (Other Income) भी हुई।

इससे Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹2,348 करोड़ हो गई।


📊 नौ महीनों में ₹6,298 करोड़ का रेवेन्यू

दिसंबर 2025 तक समाप्त नौ महीने की अवधि (9M FY26) में Lenskart का कुल रेवेन्यू ₹6,298 करोड़ रहा।

यह पिछले साल की समान अवधि के ₹4,925 करोड़ के मुकाबले 28% अधिक है।

यह संकेत देता है कि कंपनी लगातार ग्रोथ ट्रैक पर बनी हुई है।


💸 खर्चों में भी बढ़ोतरी

तेजी से विस्तार के साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि हुई है।

🏭 कच्चे माल की लागत (Cost of Material)

यह कंपनी का सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल खर्च का 33% है।

  • Q3 FY26 में यह खर्च बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया
  • Q3 FY25 में यह ₹548 करोड़ था
  • यानी 31% की वृद्धि

👩‍💼 कर्मचारी लाभ खर्च

Employee benefit expense में सबसे तेज वृद्धि देखने को मिली।

  • यह 62.5% बढ़कर ₹528 करोड़ हो गया
  • पिछले साल यह ₹325 करोड़ था

यह बढ़ोतरी नए स्टोर्स, टेक टीम विस्तार और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस के कारण मानी जा रही है।

💳 अन्य खर्च

फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे ओवरहेड्स ने भी कुल खर्च में इजाफा किया।

कुल मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹2,163 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही से 28% अधिक है।


🚀 मुनाफे में ऐतिहासिक उछाल

Lenskart की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका मुनाफा रहा।

  • Q3 FY26 में शुद्ध लाभ ₹132.7 करोड़
  • Q3 FY25 में यह केवल ₹1.85 करोड़ था

यानी कंपनी का लाभ 71 गुना बढ़ गया।

तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंपनी का मुनाफा बढ़ा है।

  • Q2 FY26 में लाभ ₹103 करोड़ था
  • Q3 FY26 में यह बढ़कर ₹132.7 करोड़ हो गया
  • यानी 29% की वृद्धि

यह दर्शाता है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्जिन में सुधार हुआ है।


📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज के ट्रेडिंग सेशन के बाद Lenskart का शेयर प्राइस ₹473 प्रति शेयर पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹82,059 करोड़ (करीब $9 बिलियन) आंका गया।

यह वैल्यूएशन Lenskart को भारत की सबसे मूल्यवान कंज्यूमर टेक कंपनियों में शामिल करता है।


🌍 ऑनलाइन से ओमनी-चैनल मॉडल तक

Lenskart ने शुरुआत एक ऑनलाइन आईवियर प्लेटफॉर्म के रूप में की थी, लेकिन अब यह एक मजबूत ओमनी-चैनल ब्रांड बन चुका है।

कंपनी:

  • देशभर में सैकड़ों फिजिकल स्टोर्स चला रही है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही है

इस रणनीति ने उसे स्केल और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों दिलाने में मदद की है।


🔮 आगे की राह

मजबूत तिमाही प्रदर्शन के बाद Lenskart का फोकस अब:

  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार
  • प्राइवेट लेबल और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना
  • टेक्नोलॉजी और AI आधारित विजन टेस्टिंग
  • स्टोर नेटवर्क विस्तार

पर रहेगा।

अगर कंपनी इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह IPO या और बड़े वैश्विक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।


📌 निष्कर्ष

Q3 FY26 में Lenskart ने शानदार प्रदर्शन किया है।

  • 36% रेवेन्यू ग्रोथ
  • 71 गुना मुनाफे में वृद्धि
  • भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलित योगदान
  • मजबूत मार्केट कैप

ये सभी संकेत देते हैं कि कंपनी ग्रोथ के साथ-साथ मुनाफे पर भी फोकस कर रही है।

Lenskart का यह प्रदर्शन भारतीय कंज्यूमर ब्रांड्स के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो दिखाता है कि सही रणनीति और मजबूत ब्रांडिंग के साथ ग्लोबल स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

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Showroom

फैशन और अपैरल सेक्टर में काम करने वाली सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Showroom B2B ने अपने Series A फंडिंग राउंड में ₹150 करोड़ (करीब $17 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Cactus Partners ने किया, जिसमें इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण शामिल है।

इस राउंड में नए निवेशक Zephyr Peacock ने भी भाग लिया, जबकि मौजूदा निवेशक Jungle Ventures, Accion Venture Lab और NBD Ventures ने भी कंपनी में दोबारा निवेश किया।


📈 पहले भी जुटा चुकी है $6.5 मिलियन

Showroom B2B ने इससे पहले अक्टूबर 2023 में $6.5 मिलियन का प्री-Series A राउंड जुटाया था। उस दौर का नेतृत्व Jungle Ventures ने किया था, जिसमें Accion Venture Lab समेत अन्य निवेशकों ने हिस्सा लिया था।

नए फंडिंग राउंड के साथ कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि उसका बिज़नेस मॉडल निवेशकों के बीच भरोसेमंद बनता जा रहा है।


💡 फंड का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, ताज़ा जुटाई गई पूंजी का उपयोग कई प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • टेक्नोलॉजी-आधारित सप्लाई चेन को और मजबूत करना
  • बड़े एंटरप्राइज क्लाइंट्स के साथ साझेदारी बढ़ाना
  • मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग क्षमताओं का देशभर में विस्तार
  • प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करना ताकि जटिल सोर्सिंग आवश्यकताओं को मैनेज किया जा सके

विशेष रूप से, यह निवेश बड़े रिटेल चेन और इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों की जटिल मांगों को पूरा करने में मदद करेगा।


🏭 टेक-एनेबल्ड डिजाइन-टू-डिलीवरी मॉडल

गुरुग्राम स्थित Showroom B2B की स्थापना अभिषेक दुआ और शुभम गुप्ता ने की थी। यह एक टेक-एनेबल्ड अपैरल सोर्सिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म है, जो “डिजाइन से डिलीवरी” तक का एकीकृत समाधान प्रदान करता है।

कंपनी संगठित रिटेलर्स, अपैरल ब्रांड्स और बाइंग हाउसेज को सेवाएं देती है — भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी।


👖 कई कैटेगरी में काम

Showroom B2B का प्लेटफॉर्म कई अपैरल कैटेगरी में काम करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • डेनिम
  • निट्स
  • वूवन अपैरल
  • किड्सवियर

कंपनी अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ-साथ ऑडिटेड पार्टनर फैक्ट्री नेटवर्क का उपयोग करती है। इससे गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होती है।


🔗 फैशन सप्लाई चेन में टेक्नोलॉजी का रोल

भारत का फैशन और अपैरल बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी सप्लाई चेन अभी भी काफी हद तक पारंपरिक और बिखरी हुई है।

Showroom B2B टेक्नोलॉजी की मदद से इस सेक्टर में पारदर्शिता, ट्रैकिंग और एफिशिएंसी लाने का प्रयास कर रहा है।

कंपनी का लक्ष्य है:

  • ब्रांड्स को विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर उपलब्ध कराना
  • सोर्सिंग प्रक्रिया को डिजिटल बनाना
  • समय और लागत दोनों में बचत करना

💰 Cactus Partners का 12वां निवेश

यह निवेश Cactus Partners के पहले फंड का 12वां निवेश है।

फरवरी 2024 में Cactus Partners ने अपने पहले फंड का फाइनल क्लोज घोषित किया था। इस फंड का कुल कोष (Corpus) ₹630 करोड़ से अधिक है।

Showroom B2B में निवेश के जरिए Cactus Partners ने फैशन सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।


🌍 ग्लोबल और घरेलू बाजार पर नजर

Showroom B2B का मॉडल भारत के संगठित रिटेल और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड ब्रांड्स दोनों के लिए उपयोगी है।

भारत दुनिया के बड़े टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग हब्स में से एक है। ऐसे में टेक-एनेबल्ड प्लेटफॉर्म की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो ब्रांड्स को विश्वसनीय और स्केलेबल सप्लाई चेन प्रदान कर सके।


🚀 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के बाद कंपनी की रणनीति स्पष्ट है:

  • टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना
  • बड़े रिटेल चेन के साथ गहरे संबंध बनाना
  • उत्पादन क्षमता बढ़ाना
  • जटिल और बड़े ऑर्डर संभालने की क्षमता विकसित करना

अगर कंपनी अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो वह भारतीय फैशन सप्लाई चेन इकोसिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।


📌 निष्कर्ष

Showroom B2B का ₹150 करोड़ का Series A राउंड यह दर्शाता है कि निवेशक भारतीय फैशन सप्लाई चेन सेक्टर में बड़े अवसर देख रहे हैं।

टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मॉडल, मजबूत निवेशक समर्थन और तेजी से बढ़ते फैशन बाजार के साथ, कंपनी के पास आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Showroom B2B किस तरह अपने प्लेटफॉर्म को स्केल करता है और भारतीय व वैश्विक अपैरल ब्रांड्स के लिए एक विश्वसनीय सोर्सिंग पार्टनर के रूप में खुद को स्थापित करता है।

फैशन और टेक्नोलॉजी के इस संगम में Showroom B2B का यह नया निवेश एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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