भारत में तेजी से बढ़ रहे पेटकेयर मार्केट के बीच बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप Supertails ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 68% की सालाना बढ़त के साथ ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया। हालांकि, आक्रामक विस्तार और मार्केटिंग खर्च के चलते कंपनी का घाटा भी 28% बढ़कर ₹52.5 करोड़ हो गया।
Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Supertails का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY25 में बढ़कर ₹108.3 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹64.6 करोड़ था। यह ग्रोथ दिखाती है कि भारत में पेट पैरेंट्स (Pet Parents) की संख्या और उनकी खर्च करने की क्षमता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।
🐾 क्या करती है Supertails?
साल 2021 में वरुण सदाना, अमन टेकरीवाल और विनीत खन्ना द्वारा स्थापित Supertails खुद को एक “फुल-स्टैक डिजिटल पेटकेयर प्लेटफॉर्म” के रूप में पेश करती है। कंपनी का फोकस पेट पैरेंट्स की बदलती जरूरतों को पूरा करने पर है।
Supertails ऐप पर 30,000 से ज्यादा पेटकेयर प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं, जिनमें पेट फूड, ट्रीट्स, एक्सेसरीज, हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। इन प्रोडक्ट्स की बिक्री से कंपनी को FY25 में ₹102.5 करोड़ की आय हुई, जो उसके कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू का लगभग 95% है।
इसके अलावा कंपनी वेटरनरी सर्विसेज भी देती है—जैसे ऑनलाइन और ऑफलाइन कंसल्टेशन, वैक्सीनेशन, ग्रूमिंग और प्रिवेंटिव केयर। हालांकि, इन सेवाओं से कंपनी को सिर्फ ₹2.65 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल आय के मुकाबले काफी कम है।
फ्रेंचाइजी फीस और विज्ञापन (Ad Monetisation) से भी कुछ आय हुई, जबकि निवेश पर लाभ और ब्याज आय जैसे नॉन-ऑपरेशनल स्रोतों से कंपनी ने ₹5 करोड़ कमाए। इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय ₹113.3 करोड़ रही।
📊 खर्च में भी तेज बढ़ोतरी
जहां रेवेन्यू में 68% की ग्रोथ हुई, वहीं खर्च भी तेजी से बढ़े। FY25 में कंपनी का कुल खर्च 53% बढ़कर ₹165.8 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹108.4 करोड़ था।
सबसे बड़ा खर्च “कॉस्ट ऑफ मटेरियल” रहा, जो कुल खर्च का लगभग 50% है। यह खर्च 45% बढ़कर ₹83.3 करोड़ हो गया। यह दर्शाता है कि कंपनी अपने प्रोडक्ट बिजनेस पर भारी निर्भर है।
एम्प्लॉयी बेनिफिट्स खर्च 15% बढ़कर ₹25.3 करोड़ पहुंच गया। मार्केटिंग और विज्ञापन पर कंपनी ने ₹22.9 करोड़ खर्च किए, जो पिछले साल की तुलना में 37% ज्यादा है। यह दिखाता है कि Supertails ब्रांड बिल्डिंग और कस्टमर एक्विजिशन पर आक्रामक तरीके से निवेश कर रही है।
इसके अलावा शिपिंग चार्जेज, वेयरहाउसिंग, लीगल और प्रोफेशनल फीस, और सॉफ्टवेयर खर्च मिलाकर ₹34.3 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
📉 घाटा बढ़ा, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार
हालांकि कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू खर्च से तेज गति से बढ़ा, फिर भी कुल घाटा 28% बढ़कर ₹52.5 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹41 करोड़ था।
कंपनी का ROCE -52.58% और EBITDA मार्जिन -48.9% रहा, जो दर्शाता है कि अभी कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी से काफी दूर है।
हालांकि एक सकारात्मक संकेत यह है कि FY25 में कंपनी ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.53 खर्च किए, जो FY24 की तुलना में थोड़ा बेहतर है। यानी यूनिट इकॉनॉमिक्स में मामूली सुधार दिख रहा है।
मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹39 करोड़ का कैश और बैंक बैलेंस था, जबकि कुल करंट एसेट्स ₹100 करोड़ के करीब थे। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के पास निकट भविष्य में ऑपरेशंस चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
💰 अब तक $51 मिलियन की फंडिंग
Supertails अब तक करीब $51 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है। हाल ही में कंपनी ने $30 मिलियन का फंडिंग राउंड उठाया, जिसका नेतृत्व Venturi Partners ने किया। इस राउंड में Nippon India, Titan Capital, Fireside Ventures और RPSG Capital Ventures सहित अन्य निवेशकों ने भाग लिया।
🧐 क्या प्रोडक्ट बिजनेस ही असली ताकत?
कंपनी के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि उसका प्रोडक्ट बिजनेस सबसे मजबूत है। कुल आय का 95% प्रोडक्ट सेल से आता है, जबकि सर्विसेज से बेहद सीमित योगदान है।
पेटकेयर सेक्टर की प्रकृति को देखते हुए, जहां पालतू जानवरों के लिए अक्सर फिजिकल वेट विजिट को प्राथमिकता दी जाती है, डिजिटल या फोन कंसल्टेशन का स्केल सीमित हो सकता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या कंपनी को अपने संसाधन मुख्य रूप से प्रोडक्ट बिजनेस पर केंद्रित करने चाहिए?
Supertails का सोर्सिंग कॉस्ट 50% से कम रहना इस बात का संकेत है कि प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बेहतर मार्जिन की संभावना है, खासकर अगर कंपनी क्यूरेटेड और हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे।
🏪 क्या आएगा कोई “डिस्काउंट डिसरप्टर”?
पिछले तीन सालों में पेटकेयर सेक्टर में कई स्टार्टअप्स और निवेश देखने को मिले हैं। लेकिन अब तक इस स्पेस में कोई बड़ा “नो-फ्रिल्स डिस्काउंट प्लेयर” सामने नहीं आया है, जबकि मौजूदा प्लेटफॉर्म्स पर भारी डिस्काउंटिंग देखने को नहीं मिलती।
अगर कोई कंपनी कम मार्जिन और हाई वॉल्यूम मॉडल अपनाती है, तो यह सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है। फिलहाल Supertails अपने मजबूत यूजर बेस और रिपीट कस्टमर्स के दम पर निवेशकों के लिए लंबी दौड़ का खिलाड़ी साबित हो सकता है—बशर्ते वह अपने बिजनेस मॉडल को और ज्यादा फोकस्ड और प्रॉफिटेबल बनाए।
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