🚚 Shadowfax का IPO डेब्यू फीका लिस्टिंग इश्यू प्राइस से 9% नीचे

Shadowfax

लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी कंपनी Shadowfax Technologies ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में एंट्री तो ली, लेकिन इसकी शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक मजबूत नहीं रही। कंपनी के शेयर IPO इश्यू प्राइस से डिस्काउंट पर लिस्ट हुए, जिससे निवेशकों को पहले ही दिन हल्की निराशा का सामना करना पड़ा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर Shadowfax के शेयर ₹112–113 के आसपास लिस्ट हुए। यह IPO के ऊपरी प्राइस बैंड ₹124 के मुकाबले लगभग 9% कम है।


📉 IPO से जुटाए ₹1,907 करोड़

Shadowfax ने अपने Initial Public Offering (IPO) के जरिए कुल ₹1,907 करोड़ जुटाए थे। यह इश्यू 20 जनवरी से 22 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहा।

IPO में:

  • ₹1,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू
  • और करीब ₹907 करोड़ का Offer-For-Sale (OFS) शामिल था

हालांकि कंपनी का फंड रेज़िंग साइज बड़ा था, लेकिन बाजार में लिस्टिंग के दिन इसका उत्साह ठंडा नजर आया।


📊 सब्सक्रिप्शन रहा औसत

Shadowfax के IPO को मॉडरेट यानी औसत सब्सक्रिप्शन मिला। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक:

  • Qualified Institutional Buyers (QIBs) ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई और इश्यू को 3.8 गुना सब्सक्राइब किया
  • Retail investors की हिस्सेदारी 2.3 गुना रही
  • Employee quota को करीब 2 गुना सब्सक्रिप्शन मिला
  • वहीं Non-Institutional Investors (NIIs) ने सिर्फ 0.84 गुना सब्सक्रिप्शन किया

👉 NIIs की कमजोर भागीदारी को बाजार विश्लेषक IPO के प्रति सीमित उत्साह का संकेत मान रहे हैं।


💼 OFS से पुराने निवेशकों को बड़ा फायदा

IPO के Offer-For-Sale (OFS) हिस्से के जरिए Shadowfax के शुरुआती निवेशकों को अच्छा एग्जिट मिला है।

  • Flipkart, जो Shadowfax का शुरुआती निवेशक रहा है,
    • OFS के जरिए करीब ₹237 करोड़ के शेयर बेच रहा है
    • जिससे उसे लगभग 3 गुना रिटर्न मिलने की उम्मीद है
  • Eight Roads Investments (Fidelity से जुड़ा फंड)
    • करीब ₹197 करोड़ के शेयर बेच रहा है
    • और इसे लगभग 10 गुना रिटर्न मिलने की संभावना है

इससे साफ है कि भले ही लिस्टिंग कमजोर रही हो, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए Shadowfax एक सफल दांव साबित हुआ है


🧾 एंकर इन्वेस्टर्स से पहले ही जुटाए ₹850 करोड़

IPO से पहले Shadowfax ने Anchor Investors से भी बड़ी रकम जुटाई थी।

  • कंपनी ने 6.9 करोड़ इक्विटी शेयर
  • ₹124 प्रति शेयर के भाव पर
  • एंकर इन्वेस्टर्स को अलॉट किए

इससे Shadowfax ने ₹850 करोड़ पहले ही जुटा लिए थे, जिससे IPO को लेकर कंपनी की तैयारी मजबूत दिखी।


🚛 Shadowfax का बिज़नेस मॉडल

Shadowfax भारत के last-mile और hyperlocal logistics सेगमेंट में काम करती है। कंपनी की सेवाएं मुख्य रूप से:

  • E-commerce marketplaces
  • D2C brands
  • Quick commerce players

के लिए होती हैं।

यह कंपनी तेज डिलीवरी, हाई-वॉल्यूम ऑर्डर प्रोसेसिंग और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन नेटवर्क के दम पर अपनी पहचान बना चुकी है।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला सेक्टर

Shadowfax जिस सेगमेंट में काम करती है, वहां प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है। इसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं:

  • Delhivery
  • XpressBees
  • Ecom Express
  • Ekart (Flipkart की लॉजिस्टिक्स यूनिट)

यह सेक्टर:

  • कैपिटल-इंटेंसिव है
  • मार्जिन कम होते हैं
  • और लगातार नेटवर्क व टेक्नोलॉजी में निवेश की जरूरत होती है

इसी वजह से लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयर अक्सर लिस्टिंग के समय दबाव में रहते हैं।


💰 अब तक $246 मिलियन की फंडिंग

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार:

  • Shadowfax अब तक करीब $246 मिलियन (लगभग ₹2,000 करोड़) की फंडिंग जुटा चुका है

इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Eight Roads Ventures (सबसे बड़ा बाहरी शेयरहोल्डर)
  • Flipkart
  • NewQuest Asia
  • Nokia Growth Partners

📈 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में सुधार

हालांकि लिस्टिंग कमजोर रही, लेकिन कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़े धीरे-धीरे मजबूत हो रहे हैं

  • FY25 में Shadowfax का रेवेन्यू
    • 32% सालाना बढ़कर ₹2,485 करोड़ पहुंचा
  • इसी साल कंपनी ने ₹6.4 करोड़ का नेट प्रॉफिट भी दर्ज किया

वहीं FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में:

  • रेवेन्यू रहा ₹1,806 करोड़
  • और मुनाफा बढ़कर ₹21 करोड़ हो गया

👉 यह दिखाता है कि कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है


🔮 आगे क्या?

Shadowfax की कमजोर लिस्टिंग यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल

  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर
  • और कैपिटल-हेवी बिज़नेस मॉडल

को लेकर सतर्क है।

हालांकि,

  • लगातार बढ़ता रेवेन्यू
  • मुनाफे में सुधार
  • और ई-कॉमर्स व क्विक कॉमर्स की बढ़ती मांग

लॉन्ग टर्म में कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।

अब असली चुनौती Shadowfax के लिए यह होगी कि वह

  • खर्चों को नियंत्रित करे
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाए
  • और प्रतिस्पर्धी माहौल में सस्टेनेबल प्रॉफिट ग्रोथ दिखा सके।

Read more :🚗 CarTrade के Q3 FY26 नतीजे 19% रेवेन्यू ग्रोथ,

🚗 CarTrade के Q3 FY26 नतीजे 19% रेवेन्यू ग्रोथ,

CarTrade

ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड्स प्लेटफॉर्म CarTrade ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 19% सालाना (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, वहीं नेट प्रॉफिट ₹50 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है।

बुधवार को जारी किए गए इन नतीजों के अनुसार, CarTrade ने मजबूत बिज़नेस परफॉर्मेंस के साथ यह दिखाया है कि कंपनी नियंत्रित खर्च और स्थिर मांग के दम पर मुनाफे में लगातार सुधार कर रही है।


📊 रेवेन्यू में मजबूत बढ़त

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त unaudited financial results के मुताबिक,

  • Q3 FY26 में CarTrade का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹210 करोड़ हो गया
  • जबकि Q3 FY25 में यह ₹176 करोड़ था

इस तरह, कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर 19% की बढ़त दर्ज की है।

वहीं, कुल आय (Total Income) की बात करें तो:

  • Q3 FY26 में यह बढ़कर ₹228 करोड़ रही
  • Q3 FY25 में कुल आय ₹193 करोड़ थी

यानी कुल आय में भी कंपनी ने लगभग 18% की सालाना ग्रोथ हासिल की।


🧩 तीन सेगमेंट में फैला CarTrade का बिज़नेस

मुंबई स्थित CarTrade अपना बिज़नेस तीन प्रमुख सेगमेंट्स में संचालित करता है:

1️⃣ Consumer Segment

Consumer सेगमेंट कंपनी का सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर बना रहा।

  • इस सेगमेंट से आय ₹86 करोड़ रही
  • यह कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 41% हिस्सा है

यह सेगमेंट मुख्य रूप से व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए कार खरीदने-बेचने से जुड़ी सेवाओं पर आधारित है।


2️⃣ Remarketing Segment

Remarketing सेगमेंट में मुख्य रूप से

  • इस्तेमाल की गई गाड़ियों (used vehicles)
  • फ्लीट और इंस्टीट्यूशनल सेल्स

शामिल होती हैं।

  • Q3 FY26 में इस सेगमेंट से ₹66 करोड़ की आय दर्ज की गई

3️⃣ Classifieds Segment

Classifieds सेगमेंट से कंपनी को

  • ₹59 करोड़ का रेवेन्यू मिला

यह सेगमेंट ऑनलाइन लिस्टिंग, विज्ञापन और डीलर नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

👉 तीनों सेगमेंट्स ने मिलकर CarTrade को डायवर्सिफाइड और संतुलित रेवेन्यू प्रोफाइल देने में मदद की है।


💸 खर्चों पर कड़ा नियंत्रण

जहां रेवेन्यू में अच्छी बढ़त देखने को मिली, वहीं CarTrade ने खर्चों पर भी मजबूत नियंत्रण बनाए रखा।

  • Employee benefits expenses कुल खर्च का 53% रहे
  • कर्मचारी खर्च ₹76 करोड़ रहा, जो सिर्फ 4% की सालाना बढ़ोतरी दिखाता है

अन्य ऑपरेशनल खर्चों को जोड़ने के बाद:

  • कुल खर्च Q3 FY26 में ₹144 करोड़ रहा
  • Q3 FY25 में यह ₹139.5 करोड़ था

यानि कुल खर्चों में केवल 3% की बढ़ोतरी हुई, जो कंपनी की कॉस्ट डिसिप्लिन को दर्शाती है।


💰 मुनाफे में जबरदस्त उछाल

रेवेन्यू ग्रोथ और सीमित खर्चों का सीधा असर मुनाफे पर दिखा।

  • Q3 FY26 में CarTrade का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹61.5 करोड़ हो गया
  • जबकि Q3 FY25 में यह ₹45.5 करोड़ था

इस तरह, सालाना आधार पर कंपनी के मुनाफे में 35% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली।

हालांकि, अगर तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) तुलना करें तो:

  • Q2 FY26 में प्रॉफिट ₹64 करोड़ था
  • Q3 FY26 में इसमें 4% की मामूली गिरावट आई

इसके बावजूद, ₹50 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा कंपनी की मजबूत फाइनेंशियल स्थिति को दिखाता है।


🤝 CarDekho के साथ मर्जर की चर्चा हुई, लेकिन डील नहीं बनी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CarTrade भारत के ऑटोमोटिव क्लासिफाइड्स स्पेस में CarDekho के साथ संभावित मर्जर को लेकर शुरुआती बातचीत कर रही थी।

हालांकि,

  • दोनों कंपनियों ने आपसी सहमति से
  • इस प्रस्तावित कंसोलिडेशन को आगे न बढ़ाने का फैसला किया

इस फैसले के बाद CarTrade अब स्वतंत्र रूप से ग्रोथ पर फोकस बनाए रखे हुए है।


📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

शेयर बाजार में भी CarTrade की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

  • कंपनी का शेयर ₹2,333 पर ट्रेड कर रहा है (सुबह 11:36 बजे तक)
  • कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹11,163 करोड़ है
  • डॉलर में यह करीब $1.2 बिलियन के बराबर है

🔮 आगे की राह

CarTrade के Q3 FY26 के नतीजे यह संकेत देते हैं कि:

  • कंपनी का बिज़नेस मॉडल स्थिर है
  • अलग-अलग सेगमेंट्स से संतुलित आय आ रही है
  • और खर्चों पर नियंत्रण से मुनाफा लगातार बेहतर हो रहा है

ऑटोमोबाइल सेक्टर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, आने वाले क्वार्टरों में CarTrade से स्थिर ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की उम्मीद की जा सकती है।

हालांकि,

  • प्रतिस्पर्धा
  • ऑटो सेक्टर की साइक्लिक डिमांड
  • और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट

जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। फिर भी, मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि CarTrade भारत के ऑटो क्लासिफाइड्स मार्केट में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल खिलाड़ी बना हुआ है

Read more :⚡ Ola Electric की तेज रफ्तार पर ब्रेक,

⚡ Ola Electric की तेज रफ्तार पर ब्रेक,

ola electric

भारत का electric two-wheeler market बीते एक साल में तेजी से बदला है और इस बदलाव का सबसे बड़ा असर Bhavish Aggarwal के नेतृत्व वाली Ola Electric पर देखने को मिला है। एक समय EV सेगमेंट की undisputed leader रही Ola Electric, जिसकी 2024 के अंत तक बाजार में हिस्सेदारी 35% से ज्यादा थी, अब 6% से भी नीचे फिसल चुकी है।

यह गिरावट न सिर्फ कंपनी की बिक्री में दिख रही है, बल्कि इसका असर शेयर बाजार से लेकर ब्रांड इमेज तक साफ नजर आ रहा है।


📉 2024 बनाम 2025: Ola Electric का गिरता ग्राफ

अगर आंकड़ों की बात करें तो Ola Electric के लिए 2024 एक मजबूत साल रहा था। कंपनी ने उस साल:

  • 🚲 4.07 लाख यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की
  • 📊 35.47% मार्केट शेयर हासिल किया

लेकिन जनवरी 2025 से तस्वीर तेजी से बदलने लगी।

जनवरी 2025 से अब तक Ola Electric की:

  • कुल बिक्री: 2.04 लाख यूनिट्स
  • ओवरऑल मार्केट शेयर: 14.9%

यानी सिर्फ एक साल में Ola की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी लगभग आधी रह गई।


🗓️ जनवरी 2025: जब Ola अभी भी लीडर थी

Vahan data के मुताबिक, जनवरी 2025 में Ola Electric अभी भी EV two-wheeler सेगमेंट में नंबर वन थी:

  • Ola Electric: 24.8%
  • TVS Motor: 24.41%
  • Bajaj Auto: 21.81%
  • Ather Energy: 13.31%

इसके बाद Greaves Electric Mobility और Hero MotoCorp का नंबर आता है।

लेकिन यहीं से Ola Electric के लिए मुश्किलें शुरू हो गईं।


⚠️ शिकायतें, सेफ्टी इश्यू और सर्विस की कमजोरी

जनवरी 2025 के बाद Ola Electric लगातार विवादों में घिरती चली गई। ग्राहकों की ओर से:

  • ⚡ वाहन में technical defects
  • 🔥 safety concerns
  • 🛠️ कमजोर after-sales service
  • 📞 सर्विस सेंटर्स की कमी

जैसी शिकायतें लगातार सामने आने लगीं।

इसका सीधा असर फरवरी 2025 में दिखा, जब Ola का मार्केट शेयर गिरकर 11.31% रह गया।


🔄 बीच में आई हल्की रिकवरी, लेकिन टिक नहीं पाई

हालांकि 2025 के बीच के महीनों में Ola Electric ने थोड़ी वापसी की कोशिश जरूर की।

  • अप्रैल 2025 में मार्केट शेयर बढ़कर 21.42% पहुंचा
  • इसके बाद कुछ महीनों तक यह लगभग stable रहा

लेकिन यह रिकवरी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई।


📉 सितंबर 2025 के बाद फिर से गिरावट

सितंबर 2025 के बाद Ola Electric की स्थिति फिर कमजोर होने लगी।

  • नवंबर 2025: 7.16% मार्केट शेयर
  • जनवरी 2026: सिर्फ 5.87%

जनवरी 2026 में Ola Electric ने महज 5,488 यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की, जो कभी मार्केट लीडर रही कंपनी के लिए बड़ा झटका है।


🚀 Ather Energy की जबरदस्त उड़ान

जहां Ola Electric संघर्ष कर रही है, वहीं Ather Energy ने शानदार प्रदर्शन किया है।

Ather की:

  • 2024 बिक्री: 1.26 लाख यूनिट्स
  • 2025 बिक्री: 2.18 लाख यूनिट्स
    ➡️ 72% की ग्रोथ

मार्केट शेयर भी:

  • जनवरी 2025: 13.31%
  • जनवरी 2026: 18.16%

इतना ही नहीं, Ather ने:

  • Ola Electric को market capitalization में पीछे छोड़ा
  • Q2 FY26 में ₹899 करोड़ revenue दर्ज किया

Ather की मौजूदा market cap:

  • 💰 ₹23,712 करोड़ (~$2.63 billion)

🏍️ Legacy players: TVS और Bajaj की मजबूत पकड़

EV मार्केट में TVS Motor और Bajaj Auto जैसी legacy कंपनियां पूरे साल स्थिर बनी रहीं।

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच:

  • TVS Motor:
    • मार्केट शेयर: 23.75%
    • रजिस्ट्रेशन: 3.26 लाख यूनिट्स
  • Bajaj Auto:
    • मार्केट शेयर: 21.05%
    • रजिस्ट्रेशन: 2.89 लाख यूनिट्स

इन कंपनियों की मजबूत distribution, भरोसेमंद service नेटवर्क और brand trust ने इन्हें लगातार फायदा पहुंचाया।


📉 शेयर बाजार में भी Ola Electric की फिसलन

Ola Electric की गिरावट सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं रही। शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

  • 📉 आज शेयर प्राइस: ₹30.79 (All-time low)
  • 📈 Listing price (Aug 2024): ₹75
  • 📊 कुछ हफ्तों में peak: ₹150

मौजूदा market capitalization:

  • ₹14,115 करोड़ (~$1.56 billion)

यानी निवेशकों का भरोसा भी अब Ola Electric पर डगमगाता नजर आ रहा है।


🔮 आगे Ola Electric के लिए क्या चुनौती?

Ola Electric के सामने अब कई बड़े सवाल खड़े हैं:

  • क्या कंपनी अपनी service quality सुधार पाएगी?
  • क्या customer trust दोबारा जीत पाएगी?
  • क्या नए product launches गिरावट को थाम पाएंगे?

EV मार्केट अब पहले से ज्यादा competitive हो चुका है, जहां सिर्फ aggressive pricing नहीं, बल्कि quality, reliability और service सबसे बड़ा differentiator बन चुके हैं।


✨ निष्कर्ष

एक समय EV revolution का चेहरा बनी Ola Electric आज सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। वहीं Ather, TVS और Bajaj जैसी कंपनियां consistency और भरोसे के दम पर आगे निकल चुकी हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Ola Electric इस गिरावट से कैसे उबरती है — या फिर यह बाजार में अपनी पकड़ और खोती चली जाती है।

Read more :🧪 Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद लिया एग्जिट,

🧪 Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद लिया एग्जिट,

Healthians

भारत की जानी-मानी healthtech startup Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने करीब एक दशक तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद अब आधिकारिक तौर पर एग्जिट ले लिया है। Gurugram स्थित इस डायग्नोस्टिक स्टार्टअप के साथ अपने सफर को याद करते हुए Sahni ने LinkedIn पोस्ट के जरिए इस बड़े फैसले की जानकारी दी।

Deepak Sahni ने लिखा,

“Healthians में Founder और CEO के तौर पर 10 साल बिताने के बाद, नवंबर 2023 में मैंने Executive Chairman की भूमिका संभाली थी। पिछले एक साल में मैंने कंपनी की पहली truly professional management team को गाइड किया। मेरे लिए Healthians कभी सिर्फ एक कंपनी नहीं रही — यह एक मिशन था, एक ऐसी समस्या जिसे हल करना जरूरी था।”


🚀 ₹3,000 करोड़ वैल्यूएशन तक पहुंचाया Healthians

Deepak Sahni के नेतृत्व में Healthians ने भारतीय हेल्थ डायग्नोस्टिक सेक्टर में एक मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने बताया कि कंपनी को:

  • 💰 ₹3,000 करोड़ से ज्यादा के valuation तक स्केल किया गया
  • 🌍 300 से ज्यादा शहरों में विस्तार हुआ
  • 🏥 22+ डायग्नोस्टिक लैब्स बनाई गईं
  • 📈 बिना external investment bankers के 7 funding rounds पूरे किए

Sahni के मुताबिक, Healthians ने यह साबित किया कि भारत में large-scale diagnostics business “soul” के साथ भी खड़ा किया जा सकता है।


💸 अब तक $75 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है Healthians

Deepak Sahni के कार्यकाल में Healthians ने अब तक कुल $75 मिलियन (करीब ₹620 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। कंपनी के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • WestBridge Capital
  • BEENEXT
  • DG Ventures
  • YouWeCan

कंपनी में Deepak Sahni की हिस्सेदारी 6.5% बनी हुई है। हालांकि उन्होंने सभी executive responsibilities छोड़ दी हैं, लेकिन वे आगे भी एक shareholder के तौर पर जुड़े रहेंगे।


🧭 अब आगे क्या करेंगे Deepak Sahni?

Healthians से एग्जिट के बाद Deepak Sahni अब नए फोकस के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने बताया कि वे:

  • 💡 हेल्थकेयर से जुड़ी गहरी और जटिल समस्याओं पर काम करेंगे
  • 🚀 नए और promising founders को सपोर्ट करेंगे
  • 🤝 अपने ₹100 करोड़ के corpus commitment के जरिए अगली पीढ़ी के उद्यमियों में निवेश करेंगे

Sahni ने कहा कि वह अब ज्यादा clarity और courage के साथ नए ventures बनाने पर ध्यान देंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि

“इस महीने से मैंने सभी formal executive responsibilities छोड़ दी हैं। अब management team और investors कंपनी को आगे ले जाएंगे, और मैं sidelines से cheer करूंगा।”


📊 Healthians की FY25 Financial Performance

Deepak Sahni के एग्जिट के साथ ही Healthians के ताजा फाइनेंशियल आंकड़े भी सामने आए हैं, जो कंपनी की improving health को दर्शाते हैं।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल consolidated financial statements के मुताबिक:

🔹 Revenue Performance

  • FY25 Operating Revenue: ₹263 करोड़
  • FY24 Operating Revenue: ₹243 करोड़
    ➡️ 8% YoY growth

Non-operating income ₹7 करोड़ को जोड़ने के बाद:

  • Total Income FY25: ₹270 करोड़
    ➡️ 7% की कुल ग्रोथ

📉 घाटे में बड़ी कटौती, EBITDA पॉजिटिव

Healthians के लिए FY25 एक अहम साल रहा, क्योंकि कंपनी ने अपने घाटे को काफी हद तक कम कर लिया।

  • FY24 Loss: ₹45 करोड़
  • FY25 Loss: ₹5 करोड़
    ➡️ 89% की गिरावट

इतना ही नहीं, कंपनी ने:

  • ₹32 करोड़ का Positive EBITDA दर्ज किया
  • 📊 EBITDA Margin: 12.17%

यह संकेत देता है कि Healthians अब operational efficiency और cost control के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रही है।


🏠 250+ शहरों में At-Home Diagnostic Services

Healthians आज भारत के 250 से ज्यादा शहरों में at-home diagnostic services ऑफर करता है। कंपनी का दावा है कि वह अब तक:

  • 🧪 10 करोड़ से ज्यादा टेस्ट कर चुकी है

Covid के बाद बढ़ी preventive healthcare awareness और home-based testing की मांग ने Healthians जैसे प्लेटफॉर्म्स को मजबूती दी है।


🔮 आगे की तस्वीर: नया नेतृत्व, नई दिशा

Deepak Sahni के जाने के बाद Healthians अब पूरी तरह से professional management team के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। बेहतर financials, घाटे में कमी और EBITDA positivity यह संकेत देते हैं कि कंपनी अगले कुछ सालों में:

  • Profitability की ओर बढ़ सकती है
  • IPO या strategic investment जैसे विकल्पों पर काम कर सकती है

✨ निष्कर्ष

Healthians से Deepak Sahni का एग्जिट भारतीय startup ecosystem के लिए एक founder-to-mentor transition का मजबूत उदाहरण है। जहां एक तरफ कंपनी operational maturity की ओर बढ़ रही है, वहीं Sahni अब नए founders और healthcare innovation पर फोकस करेंगे।

Read more :🏢 WeWork India Q3 FY26 Results ₹17 करोड़ का मुनाफा,

🏢 WeWork India Q3 FY26 Results ₹17 करोड़ का मुनाफा,

WeWork India

Managed office space provider WeWork India ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी ने ₹17 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (Profit) दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में हुए भारी नुकसान के मुकाबले एक बड़ा टर्नअराउंड माना जा रहा है।

NSE से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, WeWork India का ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल-दर-साल 29% बढ़कर ₹634 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि Q3 FY25 में यह ₹492 करोड़ था। यह ग्रोथ कंपनी के लिए खास है क्योंकि पिछले कुछ सालों में को-वर्किंग स्पेस सेक्टर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।


📈 रेवेन्यू और इनकम: मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस

Q3 FY26 में WeWork India की कुल आय (Total Income) ₹644 करोड़ रही। इसमें ₹634 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू और ₹10 करोड़ की Other Income शामिल है।

वहीं अगर नौ महीने (April–December 2025) की बात करें, तो कंपनी का रेवेन्यू 24% की ग्रोथ के साथ ₹1,744 करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹1,410 करोड़ था।

यह दर्शाता है कि हाइब्रिड वर्क मॉडल और फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग का WeWork India को सीधा फायदा मिल रहा है।


💸 खर्चों का हाल: Lease और Finance Cost सबसे बड़ा बोझ

हालांकि कंपनी का रेवेन्यू मजबूत रहा, लेकिन खर्चों का स्तर भी ऊंचा बना हुआ है।

Q3 FY26 में प्रमुख खर्च:

  • 🏗️ Depreciation (Lease-related): ₹246 करोड़
  • 👥 Employee Benefits Expense: ₹52 करोड़
  • 💳 Finance Cost: ₹152 करोड़

इन सभी खर्चों को मिलाकर कंपनी का कुल खर्च ₹624.5 करोड़ रहा।

इसके बावजूद WeWork India ने इस तिमाही में प्रॉफिट दर्ज किया, जो इसकी बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ऑक्यूपेंसी लेवल्स में सुधार को दर्शाता है।


🔄 घाटे से मुनाफे तक का सफर

WeWork India की परफॉर्मेंस में सबसे बड़ा बदलाव नेट प्रॉफिट के मोर्चे पर देखने को मिला है।

  • Q3 FY25: ₹83 करोड़ का नुकसान
  • Q3 FY26: ₹17 करोड़ का मुनाफा

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने लगभग ₹100 करोड़ से ज्यादा का पॉजिटिव टर्नअराउंड किया है।

वहीं नौ महीने की अवधि में कंपनी का कुल मुनाफा ₹9 करोड़ रहा है, जो यह दिखाता है कि WeWork India धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है।


📊 शेयर बाजार में प्रदर्शन: फ्लैट लिस्टिंग, बाद में गिरावट

WeWork India ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में एंट्री की थी। हालांकि, इसका डेब्यू ज्यादा धमाकेदार नहीं रहा।

  • 📌 Issue Price: ₹648 प्रति शेयर
  • 📌 Listing Price: ₹650 (सिर्फ 0.3% प्रीमियम)
  • 📌 BSE पर ओपनिंग: ₹646.5

लिस्टिंग के बाद शेयर पर दबाव देखने को मिला।
11:12 AM तक शेयर ₹561.40 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹7,508 करोड़ (लगभग $817 मिलियन) हो गया है।


🏙️ WeWork India का बिज़नेस मॉडल क्यों खास है?

WeWork India भारत में Managed और Flexible Office Spaces उपलब्ध कराता है, जो खासतौर पर:

  • Startups
  • MSMEs
  • Large Enterprises
  • Hybrid Work अपनाने वाली कंपनियों

के लिए डिजाइन किए गए हैं।

भारत में जैसे-जैसे कंपनियां long-term leases की जगह flexible workspaces को प्राथमिकता दे रही हैं, WeWork जैसे प्लेयर्स के लिए ग्रोथ के नए मौके बन रहे हैं।


🔍 आगे की राह: क्या WeWork India ग्रोथ बरकरार रख पाएगा?

WeWork India के लिए आने वाले क्वार्टर कई मायनों में अहम होंगे:

  • बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट को कंट्रोल करना
  • ऑक्यूपेंसी रेट्स को और बेहतर बनाना
  • मुनाफे की निरंतरता बनाए रखना

अगर कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रेवेन्यू ग्रोथ को इसी तरह बनाए रखती है, तो आने वाले समय में यह भारत के को-वर्किंग सेक्टर में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल प्लेयर के रूप में उभर सकती है।


✨ निष्कर्ष

WeWork India का Q3 FY26 प्रदर्शन यह साफ संकेत देता है कि कंपनी घाटे के दौर से बाहर निकल रही है। हालांकि शेयर बाजार की प्रतिक्रिया फिलहाल ठंडी है, लेकिन फाइनेंशियल्स में आया सुधार लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए पॉजिटिव साइन माना जा सकता है।

Read more :🥗 Clean-Label Food Startup The Whole Truth की FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ,


🥗 Clean-Label Food Startup The Whole Truth की FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ,

The Whole Truth

Peak XV Partners द्वारा समर्थित clean-label food और nutrition startup The Whole Truth ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू जहां 3 गुना से ज्यादा बढ़ा, वहीं तेज़ विस्तार और बढ़ते operating व marketing खर्चों के चलते इसका नुकसान (loss) भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गया।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, The Whole Truth का revenue from operations FY25 में 232% उछलकर ₹216 करोड़ पहुंच गया, जो FY24 में ₹65 करोड़ था। यह ग्रोथ भारतीय consumer food startup ecosystem में कंपनी की मजबूत पकड़ को दर्शाती है।


📊 कुल आय ₹220 करोड़ के पार

The Whole Truth अपने सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री से ही रेवेन्यू कमाती है। इसमें शामिल हैं:

  • Protein bars
  • Peanut butter
  • Dark chocolates
  • Energy bars
  • Immunity balls
  • Muesli

FY25 में अन्य आय (other income) को जोड़कर कंपनी की कुल आय ₹220 करोड़ रही, जबकि FY24 में यह ₹71 करोड़ थी। यानी एक साल में कंपनी ने स्केल के मामले में बड़ी छलांग लगाई है।


💸 खर्च भी तेज़ी से बढ़े

तेज़ ग्रोथ के साथ खर्चों में भी तेज़ इजाफा हुआ। FY25 में कंपनी का total expense 2.6 गुना बढ़कर ₹248 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹96 करोड़ था।

सबसे बड़े खर्च कौन-से रहे?

🔹 Raw material / Cost of materials consumed

  • कुल खर्च का 53% हिस्सा
  • FY25 में ₹131 करोड़
  • FY24 में ₹38 करोड़
  • यानी 3.5 गुना बढ़ोतरी

🔹 Advertising और Marketing खर्च

  • FY25 में ₹41 करोड़
  • FY24 की तुलना में 2 गुना से ज्यादा
  • कुल खर्च का 16.5%

🔹 Employee benefit expenses

  • 114% की बढ़ोतरी
  • FY25 में ₹30 करोड़

🔹 Marketplace charges और Transportation खर्च

  • दोनों मिलाकर करीब ₹18 करोड़

इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी ने ब्रांड बिल्डिंग, टीम विस्तार और distribution पर जमकर निवेश किया है।


📉 नुकसान 17% बढ़ा, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स बेहतर

FY25 में The Whole Truth का loss ₹28 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹24 करोड़ था। यानी नुकसान में करीब 17% की बढ़ोतरी हुई।

हालांकि, अच्छी बात यह है कि unit economics में सुधार देखने को मिला है:

  • FY24 में कंपनी ₹1 कमाने के लिए ₹1.48 खर्च कर रही थी
  • FY25 में यह घटकर ₹1.15 रह गया

यह दिखाता है कि स्केल बढ़ने के साथ कंपनी की operational efficiency बेहतर हो रही है।


📉 Profitability Metrics अभी निगेटिव

FY25 में कंपनी के प्रमुख profitability indicators अभी भी निगेटिव रहे:

  • ROCE: -14.85%
  • EBITDA Margin: -13.43%

हालांकि growth-stage consumer startups के लिए यह असामान्य नहीं है, खासकर तब जब फोकस market capture और brand trust पर हो।


💰 Cash Position मजबूत, ग्रोथ के लिए पूरी तैयारी

31 मार्च 2025 तक:

  • Cash और bank balance: ₹141 करोड़
  • FY24 में यह ₹72 करोड़ था
  • यानी लगभग 2 गुना बढ़ोतरी

कंपनी के current assets ₹270 करोड़ रहे, जो बताता है कि The Whole Truth फिलहाल फाइनेंशियल रूप से आरामदायक स्थिति में है और आगे ग्रोथ के लिए पूंजी की कमी नहीं है।


🧾 अब तक $38 मिलियन की फंडिंग, Series D की तैयारी

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, The Whole Truth अब तक कुल $38 मिलियन (करीब ₹315 करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Peak XV Partners
  • Matrix Partners
  • Sauce

इसके अलावा, कंपनी Series D round में $34 मिलियन जुटाने की तैयारी कर रही है। इस डेवलपमेंट की एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग पहले Entrackr ने की थी।


🔮 आगे की राह: ₹500 करोड़ का टारगेट और बड़ी चुनौती

The Whole Truth फिलहाल ऐसी स्थिति में है जहां वह:

  • आराम से ग्रोथ कर सकती है
  • कुछ समय तक नुकसान सह सकती है
  • और brand purity के अपने वादे पर टिकी रह सकती है

कंपनी का clean-label और purity-first approach उसे premium consumer segment पर फोकस करने की आज़ादी देता है। इससे advertising cost भी लंबे समय में घट सकती है, क्योंकि भरोसेमंद ब्रांड खुद-ब-खुद repeat customers बनाता है।

लेकिन बड़ा सवाल यही है 👇

क्या The Whole Truth ₹500 करोड़ और उससे आगे की ग्रोथ हासिल कर पाएगी, बिना quality से समझौता किए?

जैसे-जैसे कंपनी profitable होने के करीब पहुंचेगी, competition भी तेज़ होगा। दूसरे ब्रांड उन high-margin segments में घुसने की कोशिश करेंगे, जिन्हें The Whole Truth ने identify किया है।


🧠 निष्कर्ष

The Whole Truth ने FY25 में यह साबित कर दिया है कि:

  • Strong brand + clean promise = तेज़ ग्रोथ
  • Costs पर कंट्रोल संभव है
  • लेकिन long-term success के लिए सिर्फ marketing काफी नहीं

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी scale, purity और profitability के बीच संतुलन कैसे बनाती है। यही संतुलन तय करेगा कि The Whole Truth भारत का अगला बड़ा food-nutrition ब्रांड बनता है या नहीं 🚀

Read more :⚖️ Legal-Tech Startup SpotDraft को Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की फंडिंग,

⚖️ Legal-Tech Startup SpotDraft को Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की फंडिंग,

SpotDraft

भारतीय legal-tech startup SpotDraft ने अपनी Series B extension के तहत $8 मिलियन (करीब ₹66 करोड़) की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Qualcomm Ventures ने किया है। यह निवेश ऐसे समय आया है जब SpotDraft एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI-powered contract management को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह फंडिंग कंपनी के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले SpotDraft ने फरवरी 2025 में अपने Series B round में $54 मिलियन जुटाए थे। वहीं, मार्च 2023 में कंपनी ने $26 मिलियन का Series A राउंड पूरा किया था। यानी अब तक SpotDraft ने निवेशकों का मजबूत भरोसा लगातार बनाए रखा है।


💡 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

SpotDraft इस नई फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में करेगा:

  • Product और AI capabilities को मजबूत करना
  • Enterprise ग्राहकों की संख्या बढ़ाना
  • Americas, EMEA और India जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार

कंपनी का फोकस ऐसे AI tools बनाने पर है जो privacy-first हों और बड़े एंटरप्राइज की जरूरतों के अनुसार काम करें।


🤖 Privacy-First AI: SpotDraft की सबसे बड़ी ताकत

SpotDraft को बाकी legal-tech startups से अलग बनाता है इसका on-device AI model। आमतौर पर AI-based legal platforms दस्तावेज़ों को cloud पर प्रोसेस करते हैं, जिससे डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

लेकिन SpotDraft का दावा है कि उसका AI:

  • Sensitive legal documents को cloud पर नहीं भेजता
  • On-device ही contract review और analysis करता है
  • Enterprise-grade data security प्रदान करता है

यही वजह है कि बड़े कॉर्पोरेट और global enterprises SpotDraft को तेजी से अपना रहे हैं।


🚀 Qualcomm Snapdragon Summit 2025 में दिखाई ताकत

SpotDraft ने हाल ही में Qualcomm Snapdragon Summit 2025 में अपनी तकनीक का लाइव डेमो दिया, जहां कंपनी ने दिखाया कि उसका AI मॉडल Snapdragon X Elite laptops पर बिना किसी cloud connectivity के काम कर सकता है।

यह डेमो Qualcomm Ventures के निवेश का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साबित हुआ कि SpotDraft का AI:

  • Lightweight है
  • Secure है
  • Enterprise-ready है

📈 तेज़ी से बढ़ता बिजनेस और यूज़र बेस

SpotDraft के ग्रोथ आंकड़े भी काफी मजबूत हैं:

  • Customers में 100% year-on-year growth
  • Contract volumes में 173% YoY increase
  • करीब 50,000 monthly active users
  • हर साल 10 लाख से ज्यादा contracts प्रोसेस

ये आंकड़े बताते हैं कि legal-tech सेक्टर में SpotDraft तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।


🏢 बड़े नामों को बना चुका है ग्राहक

SpotDraft के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई जानी-मानी कंपनियां कर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Apollo.io
  • Panasonic
  • Zeplin
  • Whatfix

इन ग्राहकों की मौजूदगी यह दिखाती है कि SpotDraft सिर्फ स्टार्टअप्स ही नहीं, बल्कि बड़े enterprises के लिए भी एक भरोसेमंद समाधान बन चुका है।


💰 Financial Performance: Revenue तीन गुना

वित्तीय मोर्चे पर भी SpotDraft ने अच्छा प्रदर्शन किया है:

  • FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹60 करोड़
  • FY23 में रेवेन्यू ₹20 करोड़ था
  • यानी तीन गुना ग्रोथ

हालांकि कंपनी का नुकसान ₹68 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा। FY25 के नतीजे अभी सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।


⚔️ Competitors से कड़ी टक्कर

भारत में legal-tech स्पेस तेजी से बढ़ रहा है और SpotDraft को कई खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ रहा है, जैसे:

  • Legistify
  • Leegality
  • Sirion
  • Vakilsearch

हालांकि SpotDraft का AI-first और privacy-centric approach इसे इस भीड़ में अलग पहचान देता है।


🔮 आगे की राह

Experts का मानना है कि आने वाले वर्षों में:

  • Enterprises legal automation को तेजी से अपनाएंगे
  • AI-based contract management की मांग बढ़ेगी
  • Data privacy सबसे बड़ा differentiator बनेगा

ऐसे में SpotDraft की रणनीति और Qualcomm Ventures जैसी global investor की backing इसे भारत ही नहीं, बल्कि global legal-tech मार्केट में भी एक मजबूत खिलाड़ी बना सकती है।


कुल मिलाकर, SpotDraft की यह नई फंडिंग भारतीय legal-tech ecosystem के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि अगर टेक्नोलॉजी, AI और privacy को सही तरीके से जोड़ा जाए, तो भारतीय स्टार्टअप्स ग्लोबल लेवल पर भी बड़ा खेल खेल सकते हैं 🚀

Read more :🌆 शहर ही समस्या नहीं, समाधान भी हैं 2150 VC की Sustainability Strategy

🌆 शहर ही समस्या नहीं, समाधान भी हैं 2150 VC की Sustainability Strategy

Sustainability Strategy

दुनिया की ज़्यादातर आर्थिक तरक्की शहरों में होती है। लेकिन यही शहर सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन, कचरा और संसाधनों की खपत के लिए भी जिम्मेदार हैं। इसी विरोधाभास को समझते हुए एक सोच ने जन्म लिया — क्या शहरी विकास टिकाऊ (sustainable urban) हो सकता है, बिना विकास की रफ्तार धीमी किए?

इसी सवाल का जवाब देने के लिए 2021 में लॉन्च हुआ 2150, एक ऐसा venture capital (VC) फर्म, जिसका लक्ष्य है urbanisation को समस्या से समाधान में बदलना


💶 €210 मिलियन का नया फंड, कुल AUM €500 मिलियन

2150 ने हाल ही में अपने दूसरे फंड (Fund II) को €210 मिलियन पर क्लोज़ किया है, जिससे इसकी कुल assets under management (AUM) अब €500 मिलियन तक पहुंच गई है।

इस नए फंड के साथ 2150 ने अपनी investor base को और मजबूत किया है। अब इसके निवेशक सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एशिया और नॉर्थ अमेरिका के बड़े institutional investors भी इसमें शामिल हैं। यह दिखाता है कि sustainable urban solutions अब global priority बन चुकी हैं।


🔄 Urbanisation को Problem से Solution बनाना

2150 की स्थापना Jacob Bro, Christian Jolck, Rahul Parekh और Christian Hernandez ने की थी। इनका मानना है कि शहरीकरण (urbanisation) को सिर्फ पर्यावरणीय संकट के रूप में देखना गलत है। सही टेक्नोलॉजी और सही निवेश के साथ, शहर ही climate change का समाधान बन सकते हैं।

2150 के co‑founder और partner Christian Jolck बताते हैं:

“चार साल में हमने €500 मिलियन जुटाए, 27 कंपनियों में निवेश किया और हर साल 10 लाख टन से ज्यादा CO₂e उत्सर्जन को कम करने में मदद की है। हमारे founders ऐसी scalable कंपनियां बना रहे हैं, जिनका कुल revenue $1 बिलियन से ज्यादा है और जिनमें 4,500 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं।”

यह आंकड़े साफ बताते हैं कि sustainability और profitability एक‑दूसरे के विरोधी नहीं हैं।


🏗️ 2150 किन Startups में निवेश करता है?

2150 उन startups को सपोर्ट करता है जो built environmentenergy systems और industrial supply chains को ज्यादा efficient और sustainable बना रहे हैं।

नए फंड से जिन कंपनियों को फायदा मिल रहा है, उनमें शामिल हैं:

  • AtmosZero – इंडस्ट्रियल हीट को electric बनाना
  • GetMobil – refurbished electronics के जरिए e‑waste कम करना
  • Metycle – circular metal trading platform
  • Mission Zero Technologies – direct air capture से carbon removal

इसके अलावा, 2150 के पास तीन और deals pipeline में हैं, जिनकी घोषणा अभी नहीं हुई है।


🌍 Global Thinking, Local Execution

2150 के co‑founder Christian Hernandez के मुताबिक, फर्म की investment thesis पहले जैसी ही है। यह मुख्य रूप से Series A stage की कंपनियों पर फोकस करता है, लेकिन seed और later stages में भी opportunistic investments करता है।

उनका कहना है:

“हम Atlantic के दोनों तरफ निवेश करते हैं। अमेरिका की टेक्नोलॉजी को यूरोप में लाते हैं और यूरोपीय कंपनियों को US में scale करते हैं। हमने ब्राज़ील, तुर्की और सिंगापुर जैसे देशों में भी निवेश किया है, क्योंकि कई बार solutions किसी और market में मिलते हैं।”

यह approach 2150 को सिर्फ एक यूरोपीय VC नहीं, बल्कि truly global climate investor बनाती है।


🌈 Diversity और Inclusion पर साफ सोच

आज के startup ecosystem में diversity सिर्फ एक buzzword नहीं, बल्कि performance driver मानी जाती है। 2150 इस बात को गंभीरता से लेता है।

Hernandez बताते हैं कि 2150 की एक public diversity policy है और यह Diversity VC जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम करता है। Portfolio कंपनियों में management diversity, inclusion metrics और due diligence के दौरान D&I को track किया जाता है।

सबसे अहम बात यह है कि investment के बाद भी founders के साथ मिलकर Board level पर diversity efforts को monitor किया जाता है


🚀 आगे क्या? (What’s Next for 2150)

Fund II के क्लोज़ होने के बाद, 2150 अब:

  • यूरोप में अपनी मौजूदगी और मजबूत करेगा
  • नॉर्थ अमेरिका और एशिया में aggressively expand करेगा
  • ऐसे founders को सपोर्ट करेगा जो बिना government subsidies के, cost‑competitive और scalable climate solutions बना रहे हैं

Hernandez के अनुसार, यही strategy 2150 को बदलती climate policies के बावजूद stable बनाती है, खासकर अमेरिका जैसे markets में।


🔚 निष्कर्ष

2150 यह साबित कर रहा है कि climate impact और venture returns एक साथ संभव हैं। शहरी विकास को धीमा करने की बजाय, उसे smarter और cleaner बनाना ही भविष्य की सही दिशा है।

भारत जैसे देश के लिए, जहां तेज़ी से urbanisation हो रहा है, 2150 का model एक बड़ा learning case बन सकता है — कि कैसे सही capital, सही founders और सही vision के साथ शहरों को sustainable growth engines बनाया जा सकता है।

Read more :🇫🇮 Finland यूरोप का तेजी से उभरता Startup Hub

🇫🇮 Finland यूरोप का तेजी से उभरता Startup Hub

Finland

पिछले कुछ वर्षों में Finland यूरोप के सबसे dynamic और भरोसेमंद startup hubs में से एक बनकर उभरा है। मजबूत सरकारी समर्थन, गहरी टेक्निकल टैलेंट पूल और collaborative innovation culture ने मिलकर यहां ऐसा ecosystem तैयार किया है, जो local founders के साथ‑साथ global entrepreneurs को भी आकर्षित कर रहा है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, R&D में भारी निवेश और transparent regulatory system फिनलैंड की सबसे बड़ी ताकत हैं। यही वजह है कि यहां से निकलने वाले startups शुरुआत से ही global scale के लिए तैयार होते हैं।


📊 Funding में रिकॉर्ड तेजी

PitchBook के अनुसार, 2025 में Finland के startups ने €1.5 बिलियन से ज्यादा की venture funding जुटाई। इस funding का बड़ा हिस्सा quantum computing, space tech, healthtech और enterprise software जैसे high‑impact sectors में गया।

इस momentum के साथ फिनलैंड अब Nordic region में एक ऐसा देश बन गया है, जो न सिर्फ शुरुआती stage के startups को सपोर्ट करता है, बल्कि उन्हें globally competitive scaleups बनने में भी मदद करता है।


💡 2026 में नजर रखने लायक 10 Finnish VC Firms

फिनलैंड के startup ecosystem को मजबूत बनाने में वहां के venture capital firms की बड़ी भूमिका है। नीचे ऐसे 10 Finnish VC firms दिए गए हैं, जो pre‑idea, pre‑seed और seed stage founders को funding, mentorship और network support प्रदान कर रहे हैं।


1️⃣ Voima Ventures

Founded: 2019 | Founders: Inka Mero, Mikko Kumpulainen

Voima Ventures Nordics की leading deeptech VC firm मानी जाती है। यह short‑term trends के बजाय scientific breakthroughs पर आधारित startups में निवेश करती है।

Life sciences, climate tech, quantum technology, advanced AI और synthetic biology इसके प्रमुख focus areas हैं।
हाल ही में इसने €100 मिलियन का Fund III लॉन्च किया, जिससे 25–30 deeptech startups को सपोर्ट किया जा रहा है।


2️⃣ Lifeline Ventures

Founded: 2009 | Founders: Timo Ahopelto, Petteri Koponen

Lifeline Ventures की पहचान है — बेहद शुरुआती stage पर founders को पहचानना। कई बार यह company बनने से पहले ही निवेश कर देता है।

इसके portfolio में Wolt, Supercell, Oura और ICEYE जैसे unicorns शामिल हैं। यह VC €100K से €2 मिलियन तक निवेश करता है और Europe के सबसे consistent unicorn producers में से एक है।


3️⃣ Business Finland

Founded: 2018 | State‑backed Organisation

Business Finland पारंपरिक VC नहीं है, बल्कि एक सरकारी innovation agency है। यह grants, loans और co‑investment के जरिए startups को बिना ज्यादा commercial pressure के risky ideas validate करने में मदद करती है।

Export programs, R&D incentives और global expansion support इसकी बड़ी strengths हैं। कई सफल Finnish startups की शुरुआत Business Finland के support से हुई है।


4️⃣ Redstone VC

Founded: 2014 | Founders: Samuli Sirén, Michael Brehm

Redstone एक unique model पर काम करता है। यह corporates और institutions के साथ मिलकर sector‑specific funds बनाता है, जैसे fintech, climate tech और digital health।

Complex और regulated markets में काम कर रहे founders के लिए Redstone एक मजबूत partner माना जाता है।


5️⃣ Kvanted Ventures

Founded: 2023

Kvanted traditional industries और tech startups के बीच पुल का काम करता है। यह industrial automation, sustainability और supply‑chain resilience पर फोकस करता है।

इसने €70 मिलियन का पहला fund बंद किया है और hardware‑software दोनों में निवेश करता है।


6️⃣ Wave Ventures

Founded: 2016 | Student‑driven VC

Wave Ventures यूरोप की पहली student‑driven VC firms में से एक है। यह idea या prototype stage पर founders को support करता है, खासकर first‑time entrepreneurs को।

Gen Z founders के बीच यह VC एक strong launchpad बन चुका है और early‑stage funding के साथ mentorship भी देता है।


7️⃣ Nostetta Ventures

Founded: 2020

Nostetta Ventures pre‑seed और early‑stage startups में निवेश करता है, खासकर software, climate और B2B tech पर काम करने वाले founders में।

यह practical innovation और जल्दी revenue potential वाले ideas को सपोर्ट करता है, जिससे startups market‑ready बन सकें।


8️⃣ NordicNinja VC

Founded: 2019

NordicNinja climate tech, robotics, mobility और industrial automation पर फोकस करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है Nordics और Asia (खासकर Japan) के बीच मजबूत नेटवर्क।

Bolt और Einride जैसे बड़े नाम इसके portfolio में शामिल हैं। यह VC Series A और B stages पर निवेश करता है।


9️⃣ Vendep Capital

Founded: 2013

Vendep Capital B2B SaaS और AI‑driven enterprise software में विशेषज्ञ है। हाल ही में इसने €80 मिलियन का fund raise किया है।

इसकी टीम में खुद former entrepreneurs शामिल हैं, जिससे founders को real scaling experience का फायदा मिलता है।


🔟 Maki.vc

Founded: 2018

Maki.vc pre‑seed से लेकर Series A तक startups को support करता है। इसका फोकस quantum computing, climate tech और green chemistry पर है।

यह सिर्फ capital नहीं, बल्कि storytelling, branding और go‑to‑market strategy में भी founders की मदद करता है।


🔚 निष्कर्ष

फिनलैंड आज सिर्फ एक European country नहीं, बल्कि global startup destination बन चुका है। मजबूत सरकारी support, world‑class VCs और innovation‑friendly culture ने इसे founders के लिए बेहद आकर्षक बना दिया है।

जो entrepreneurs deeptech, climate, AI या enterprise software में काम करना चाहते हैं, उनके लिए फिनलैंड आने वाले सालों में बड़े अवसर पेश कर सकता है।

Read more :🚗 Tata Siyara की Sale से Startups क्या सीख सकते हैं?

🚗 Tata Siyara की Sale से Startups क्या सीख सकते हैं?

Tata Siyara

जब भी कोई स्टार्टअप बहुत तेज़ी से ग्रो करता है, तो एक सवाल ज़रूर उठता है —
“इसकी strategy क्या थी?”

आज यही सवाल Tata Siyara की जबरदस्त बिक्री और चर्चा को देखकर पूछा जा रहा है। वजह साफ है — Siyara सिर्फ एक नई SUV नहीं है, बल्कि यह Tata Motors की तरफ से किया गया startup‑style execution है।

यही कारण है कि इस कार की चर्चा सिर्फ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि startup ecosystem, founders और investors के बीच भी हो रही है 🚀।


🎯 Product नहीं, Problem पर Focus

Startup दुनिया का सबसे पहला और सबसे बड़ा नियम है:
👉 Problem solve करो, product अपने आप बिकेगा।

Tata Siyara की सफलता की जड़ भी यही सोच है।
भारतीय ग्राहकों की समस्याएं बहुत साफ थीं:

  • 🛡️ Safety से कोई समझौता नहीं
  • 👨‍👩‍👧‍👦 Family के लिए आरामदायक कार
  • 🏢 Trusted brand
  • 💰 Long‑term value for money

Tata Motors ने flashy ads, over‑promises या fake hype का सहारा नहीं लिया।
उन्होंने quietly एक ऐसी SUV बनाई जो real Indian needs को solve करती है

बिल्कुल वैसा ही, जैसा successful startups करते हैं।


🧠 MVP Thinking – बिल्कुल Startup वाली सोच

Startup ecosystem में एक बहुत popular concept है —
MVP (Minimum Viable Product)

मतलब:
पहले वही बनाओ जो market को सच में चाहिए,
extra features बाद में add होते रहेंगे।

Tata Siyara भी इसी सोच से बनाई गई लगती है:

  • ✅ Proven safety image
  • 🎨 Simple लेकिन premium design
  • ⚙️ Over‑engineering नहीं
  • 📌 Clear value proposition

इसलिए buyers confused नहीं हैं।
लोग ये नहीं पूछ रहे कि “options इतने क्यों हैं?”
बल्कि पूछ रहे हैं — “Worth it है या नहीं?”

और इसका जवाब Siyara खुद दे रही है।


📈 Demand Ads से नहीं, Trust से बनी

आज कई startups marketing पर करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं 💸
लेकिन smart startups जानते हैं कि
👉 Trust‑based demand सबसे strong होती है।

Siyara के साथ भी बिल्कुल यही हुआ:

  • ℹ️ Limited information release
  • 🎯 Controlled promotions
  • 🚫 No unnecessary hype

Result?
लोग खुद search करने लगे:

  • Tata Siyara price
  • Tata Siyara features
  • Tata Siyara worth buying?

ये वही organic demand है, जिसके लिए startups तरसते हैं।


🔐 Trust ही असली Currency है

Startup world की एक कड़वी सच्चाई है:
“Marketing खरीदी जा सकती है, trust कमाया जाता है।”

Tata Motors का brand trust ही Siyara की सबसे बड़ी ताकत है 💪
Customers के मन में साफ सोच है:

“Tata है, तो safety और quality ठीक होगी।”

Startup founders के लिए यह एक बड़ा lesson है:

  • Trust overnight नहीं बनता
  • लेकिन जब बनता है, तो product को push नहीं करना पड़ता

⏱️ Right Timing = Half Success

बहुत से startups अच्छे idea के बावजूद fail हो जाते हैं 😕
क्यों?
👉 Timing गलत होती है।

Tata ने Siyara को launch किया:

  • 📊 जब SUV demand peak पर है
  • 🛡️ जब buyers safety conscious हो चुके हैं
  • 💎 जब premium feel affordable price में चाहिए

यह perfect market timing है।

Startup founders के लिए message बिल्कुल साफ है:
Idea से ज़्यादा सही समय important होता है।


💡 Siyara एक Startup Case Study क्यों है?

अगर कोई startup mentor real‑life example देना चाहे,
तो Tata Siyara एक perfect case study बन सकती है 📘।

इसमें सब कुछ है:

  • 🔍 Clear problem identification
  • 🎯 Defined target audience
  • 🤝 Strong trust backing
  • 📣 Controlled marketing
  • 🧭 Long‑term vision

यही वो बातें हैं जो investors किसी pitch deck में ढूंढते हैं।


😮 Startups और Founders इस पर ध्यान क्यों दे रहे हैं?

Startup founders अब ये समझ रहे हैं कि:

अगर Tata जैसी बड़ी company भी
startup mindset अपनाकर execution कर रही है,
तो early‑stage founders को और ज़्यादा disciplined होना पड़ेगा।

Siyara ये साबित करती है कि:

🚀 Size matter नहीं करता,
Strategy और execution matter करते हैं।


🔚 निष्कर्ष

Tata Siyara एक कार से कहीं ज़्यादा है।
यह एक reminder है कि
startup principles सिर्फ startups के लिए नहीं होते।

जो company customer को समझती है,
problem solve करती है
और trust बनाती है —
वही long‑term winner बनती है।

Read more :🤖 Artificial Intelligence दुनिया की सबसे बड़ी यूनिकॉर्न इंडस्ट्री 🚀