💰 Stable Money का FY25 में ₹104 करोड़ ग्रॉस रेवेन्यू,

Stable Money

भारत की तेजी से उभरती wealthtech स्टार्टअप Stable Money ने हाल ही में $25 मिलियन की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड की अगुवाई Fundamentum Partnership ने की, जबकि Z47 और RTP Global ने भी इसमें भाग लिया।

हालांकि इस नई फंडिंग का पूरा असर FY26 और FY27 के ग्रोथ नंबरों में दिखेगा, लेकिन FY25 के वित्तीय नतीजे कंपनी की तेज़ स्केलिंग और बढ़ते खर्चों की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।


📊 FY25 में ग्रॉस रेवेन्यू ₹104.4 करोड़

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Stable Money ने FY25 में ₹104.4 करोड़ का ग्रॉस रेवेन्यू दर्ज किया। यह FY24 के मात्र ₹1.3 करोड़ की तुलना में बड़ी छलांग है।

हालांकि, यहां एक अहम बात यह है कि कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू केवल ₹4.3 करोड़ रही।

विश्लेषण से संकेत मिलता है कि कंपनी ने करीब ₹100 करोड़ के बॉन्ड खरीदे और उन्हें ₹104.4 करोड़ में बेचा। यानी लगभग ₹4.3 करोड़ का अंतर कंपनी की नेट इनकम या बॉन्ड सेल पर कमीशन के रूप में सामने आया।

कंपनी ने इस ₹4.3 करोड़ को “Sale of Services” के तहत दर्ज किया है, लेकिन इसके अंदर विस्तृत ब्रेकअप साझा नहीं किया गया।


💵 नॉन-ऑपरेटिंग इनकम से बढ़ी कुल आय

Stable Money को केवल ऑपरेशनल गतिविधियों से ही नहीं, बल्कि अन्य स्रोतों से भी आय हुई।

कंपनी ने बैंक डिपॉजिट्स पर ब्याज, बॉन्ड इनकम और म्यूचुअल फंड डिविडेंड से ₹7.63 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग इनकम दर्ज की।

इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय ₹112 करोड़ तक पहुंच गई।

हालांकि, मीडिया प्लेटफॉर्म Entrackr ने कंपनी से इन वित्तीय आंकड़ों को लेकर कई बार संपर्क किया, लेकिन कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।


🏦 Stable Money क्या करती है?

Stable Money की स्थापना 2022 में Saurabh Jain और Harish Reddy ने की थी।

यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को सुरक्षित और फिक्स्ड-रिटर्न निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है। इसके प्रमुख प्रोडक्ट्स में शामिल हैं:

  • Fixed Deposits (FDs)
  • Recurring Deposits
  • Secured Credit Cards
  • Bonds
  • Gold & Silver

कंपनी का दावा है कि 40 लाख से अधिक यूज़र्स उसके प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं और वे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा की राशि FDs, Stable Bonds और अन्य सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर चुके हैं।


📉 खर्चों में बड़ा इजाफा

जहां रेवेन्यू में उछाल दिखा, वहीं खर्चों में भी तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।

FY25 में बॉन्ड खरीद कंपनी का सबसे बड़ा खर्च रहा, जो ₹100 करोड़ तक पहुंच गया। चूंकि कंपनी का बिज़नेस मॉडल बॉन्ड खरीद और बिक्री पर आधारित है, इसलिए यह लागत स्वाभाविक रूप से बड़ी रही।

इसके अलावा, विज्ञापन और प्रमोशनल खर्च ₹25.33 करोड़ रहा। यह दर्शाता है कि कंपनी यूज़र अधिग्रहण (customer acquisition) पर आक्रामक रूप से निवेश कर रही है।


👨‍💻 कर्मचारी खर्च 2.5 गुना बढ़े

Stable Money का Employee Benefits Expense FY25 में 2.5 गुना बढ़कर ₹21.8 करोड़ हो गया। इसमें लगभग ₹5 करोड़ का ESOP खर्च शामिल है।

इसके अलावा, सॉफ्टवेयर खर्च, लीगल और प्रोफेशनल फीस, ट्रैवल, रिक्रूटमेंट और अन्य ओवरहेड्स ने कुल खर्च को बढ़ाकर ₹160 करोड़ तक पहुंचा दिया।


🔻 घाटा 3.5X बढ़कर ₹44.8 करोड़

बढ़ते खर्चों का असर सीधे कंपनी के घाटे पर दिखा।

Stable Money का नेट लॉस FY25 में 3.5 गुना बढ़कर ₹44.8 करोड़ हो गया, जबकि FY24 में यह ₹12.8 करोड़ था।

हालांकि कंपनी ने ₹100 करोड़ से अधिक का ग्रॉस रेवेन्यू पार किया, लेकिन बॉन्ड खरीद, आक्रामक मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी व टीम में निवेश के कारण घाटा बढ़ गया।

यह संकेत देता है कि कंपनी फिलहाल प्रॉफिट से ज्यादा ग्रोथ पर फोकस कर रही है।


💸 अब तक $65 मिलियन जुटाए

Stable Money अब तक कुल $65 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है।

हाल ही में उठाए गए $25 मिलियन राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया, जिसमें कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $175 मिलियन आंका गया।

इससे पहले जून 2025 में कंपनी ने $20 मिलियन का राउंड Fundamentum की अगुवाई में जुटाया था।


🚀 आगे की राह

Stable Money की रणनीति साफ दिखती है — पहले बड़े पैमाने पर यूज़र बेस बनाना और मजबूत ब्रांड उपस्थिति स्थापित करना, फिर धीरे-धीरे प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ना।

भारत में सुरक्षित और फिक्स्ड-रिटर्न निवेश विकल्पों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में Stable Money के पास बड़ा अवसर है।

हालांकि, बढ़ते घाटे और ऊंचे मार्केटिंग खर्च यह भी दिखाते हैं कि कंपनी को आने वाले वर्षों में संतुलन बनाना होगा।

अब नजर FY26 और FY27 पर होगी, जहां नई फंडिंग का प्रभाव कंपनी के रेवेन्यू, मार्जिन और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी पर दिख सकता है।

क्या Stable Money तेजी से स्केल करते हुए प्रॉफिटेबल भी बन पाएगी?

इस सवाल का जवाब आने वाले वित्तीय वर्षों में मिलेगा।

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Read more :💳 BillDesk खरीदेगी Worldline का भारतीय पेमेंट बिजनेस $70.8 मिलियन की डील

💳 BillDesk खरीदेगी Worldline का भारतीय पेमेंट बिजनेस $70.8 मिलियन की डील

BillDesk

भारतीय डिजिटल पेमेंट्स कंपनी BillDesk ने फ्रांस की ग्लोबल पेमेंट्स दिग्गज Worldline SA के भारतीय पेमेंट ऑपरेशंस को खरीदने के लिए समझौता किया है। इस डील की अनुमानित इक्विटी वैल्यू लगभग 70.8 मिलियन डॉलर (करीब 590 करोड़ रुपये) बताई जा रही है।

यह सौदा भारतीय पेमेंट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे BillDesk को टेक्नोलॉजी और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स क्षमताओं में मजबूती मिलेगी।


📊 एंटरप्राइज वैल्यू $43.7 मिलियन

डील के तहत Worldline के भारतीय बिजनेस का एंटरप्राइज वैल्यू 43.7 मिलियन डॉलर तय किया गया है।

सौदे के हिस्से के रूप में, Worldline और BillDesk के बीच एक लंबी अवधि की टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर पार्टनरशिप भी होगी। इसके तहत BillDesk, Worldline के पेमेंट सॉफ्टवेयर का उपयोग जारी रखेगी।

इसका मतलब है कि भले ही स्वामित्व बदल जाएगा, लेकिन तकनीकी ढांचा काफी हद तक पहले जैसा रहेगा।


🌍 Worldline की रणनीति: यूरोप पर फोकस

Worldline ने स्पष्ट किया है कि यह बिक्री उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अब यूरोप में अपने कोर पेमेंट बिजनेस पर फोकस तेज करना चाहती है।

इस रणनीति के तहत वह गैर-प्रमुख बाजारों से बाहर निकलकर:

  • ऑपरेशंस को सरल बनाना
  • संसाधनों का बेहतर उपयोग करना
  • वित्तीय प्रोफाइल को मजबूत करना

चाहती है।

कंपनी को इस डील से मिलने वाली नकद राशि उसके कैपिटल रीडिप्लॉयमेंट प्लान में मदद करेगी।


🏦 RBI की मंजूरी और क्रॉस-बॉर्डर अवसर

मई 2024 में Worldline को Reserve Bank of India (RBI) से क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने की मंजूरी मिली थी।

इस अनुमति के तहत Worldline की भारतीय इकाई ऑनलाइन इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट ट्रांजैक्शंस को रेगुलेटेड फ्रेमवर्क में प्रोसेस कर सकती थी।

अब, अधिग्रहण के बाद BillDesk को यह टेक्नोलॉजी और रेगुलेटरी इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा। इससे BillDesk अपनी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सर्विसेज को और मजबूत कर सकती है।


📉 BillDesk का हालिया वित्तीय प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2024 (FY24) में BillDesk के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की गई थी।

  • FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू 2,334 करोड़ रुपये रहा
  • FY23 में यह 2,678 करोड़ रुपये था

इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा (Profit After Tax) भी घटकर 121 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 142 करोड़ रुपये था।

हालांकि, कंपनी के पास FY24 के अंत तक 930 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस मौजूद था, जो इसे अधिग्रहण जैसे बड़े कदम उठाने की वित्तीय क्षमता देता है।

FY25 के नतीजे अभी घोषित नहीं हुए हैं।


📊 Worldline India का प्रदर्शन

The Head and Tale रिपोर्ट के अनुसार, Worldline India ने FY25 में 694 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया।

हालांकि, कंपनी को 22.5 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय बाजार में मौजूदगी मजबूत होने के बावजूद कंपनी को प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था।


🔄 Worldline की अन्य डिवेस्टमेंट

Worldline ने पहले भी कई बिजनेस यूनिट्स बेचने की घोषणा की है, जिनमें:

  • MeTS
  • Worldline North America
  • Cetrel
  • PaymentIQ
  • भारत का बिजनेस

शामिल हैं।

इन सभी डील्स से कंपनी को 637.2 मिलियन डॉलर से 696.2 मिलियन डॉलर के बीच नेट कैश प्राप्त होने की उम्मीद है। यह राशि 2026 में प्राप्त होने की संभावना है।


⏳ डील कब पूरी होगी?

BillDesk और Worldline India के बीच यह ट्रांजैक्शन 2026 की दूसरी छमाही में पूरा होने की उम्मीद है।

जब यह डील क्लोज होगी, तब BillDesk भारतीय पेमेंट सेक्टर में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगी।


🚀 BillDesk के लिए क्या मायने?

यह अधिग्रहण BillDesk के लिए कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है:

1️⃣ क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट टेक्नोलॉजी तक पहुंच
2️⃣ मर्चेंट नेटवर्क का विस्तार
3️⃣ ग्लोबल पेमेंट सॉफ्टवेयर का उपयोग
4️⃣ पेमेंट इकोसिस्टम में मजबूत पोजिशन

भारत में डिजिटल पेमेंट्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है। UPI, कार्ड पेमेंट्स और ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस के विस्तार के साथ कंपनियां अपनी टेक्नोलॉजी और नेटवर्क मजबूत करने की होड़ में हैं।


📝 निष्कर्ष

BillDesk द्वारा Worldline के भारतीय पेमेंट ऑपरेशंस का अधिग्रहण भारतीय फिनटेक सेक्टर के लिए एक अहम घटनाक्रम है।

एक तरफ जहां Worldline यूरोप पर फोकस बढ़ा रही है, वहीं BillDesk इस मौके का फायदा उठाकर अपनी टेक्नोलॉजी और मार्केट शेयर को मजबूत कर रही है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अधिग्रहण BillDesk की ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को कितना बढ़ावा देता है।

अगर डील सफलतापूर्वक पूरी होती है, तो भारतीय पेमेंट्स इकोसिस्टम में BillDesk की स्थिति और भी मजबूत हो सकती है। 💳🚀

Read more :🏨 OYO की पैरेंट कंपनी PRISM ने पूर्व SEBI चेयरमैन अजय त्यागी को बनाया इंडिपेंडेंट डायरेक्टर,

🏨 OYO की पैरेंट कंपनी PRISM ने पूर्व SEBI चेयरमैन अजय त्यागी को बनाया इंडिपेंडेंट डायरेक्टर,

PRISM

OYO की पैरेंट कंपनी PRISM ने अपने बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व SEBI चेयरमैन Ajay Tyagi को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया है।

यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब कंपनी IPO की तैयारी में जुटी हुई है और अपने कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है। बाजार विशेषज्ञ इस कदम को पब्लिक लिस्टिंग से पहले निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।


👨‍⚖️ कौन हैं अजय त्यागी?

अजय त्यागी 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।

उन्होंने 2017 से 2022 तक Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन के रूप में कार्य किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के पूंजी बाजार, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, निवेशक सुरक्षा और प्राइमरी व सेकेंडरी मार्केट की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली।

उनके नेतृत्व में SEBI ने IPO नियमों, लिस्टिंग डिस्क्लोजर और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों को और सख्त बनाया।

SEBI से पहले त्यागी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) रह चुके हैं। वहां उन्होंने कैपिटल मार्केट, निवेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग और दिवालिया कानून (Bankruptcy Law) जैसे अहम क्षेत्रों को संभाला।

वर्तमान में वह कई कंपनियों के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में भी कार्यरत हैं।


🏢 PRISM के बोर्ड में कौन-कौन?

PRISM के बोर्ड में पहले से कई अनुभवी सदस्य शामिल हैं, जिनमें:

  • William Steve Albrecht
  • Troy Matthew Alstead
  • Deepa Malik
  • Bejul Somaia
  • Sumer Juneja
  • Aditya Ghosh

जैसे नाम शामिल हैं।

अजय त्यागी के जुड़ने से बोर्ड में रेगुलेटरी और गवर्नेंस एक्सपर्टीज और मजबूत होगी।


🌍 35+ देशों में मौजूदगी

PRISM, OYO ब्रांड के तहत दुनिया भर में होटल और होम स्टे ऑपरेशंस चलाती है।

कंपनी के पास:

  • 22,000 से अधिक होटल स्टोरफ्रंट्स
  • 1,23,000 से अधिक होम स्टोरफ्रंट्स
  • 35 से अधिक देशों में ऑपरेशन

यह वैश्विक उपस्थिति कंपनी को हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में एक बड़ा खिलाड़ी बनाती है।


📄 IPO की तैयारी

PRISM ने पिछले साल दिसंबर में SEBI के पास कॉन्फिडेंशियल ड्राफ्ट IPO पेपर्स दाखिल किए थे।

अब, पूर्व SEBI चेयरमैन को बोर्ड में शामिल करना इस दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

IPO से पहले कंपनियां आमतौर पर अपने बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों और अनुभवी पेशेवरों को शामिल करती हैं ताकि पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा बढ़ाया जा सके।


📊 Q1 FY26 में शानदार प्रदर्शन

वित्तीय मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया है।

जून 2025 को समाप्त तिमाही (Q1 FY26) में PRISM ने:

  • 2,019 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया
  • 200 करोड़ रुपये से अधिक का नेट प्रॉफिट कमाया

यह आंकड़े संकेत देते हैं कि कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर आगे बढ़ रही है, जो IPO से पहले एक सकारात्मक संकेत है।


🔎 क्यों अहम है यह नियुक्ति?

अजय त्यागी जैसे अनुभवी रेगुलेटर का बोर्ड में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

1️⃣ IPO प्रक्रिया में रेगुलेटरी मार्गदर्शन
2️⃣ निवेशकों का भरोसा मजबूत करना
3️⃣ कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाना
4️⃣ जोखिम प्रबंधन और अनुपालन (Compliance) को मजबूत करना

विशेषज्ञों का मानना है कि पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले यह कदम कंपनी की छवि को मजबूत करेगा।


🏨 OYO की वापसी की कहानी

पिछले कुछ वर्षों में OYO ने कई चुनौतियों का सामना किया — खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान।

लेकिन अब कंपनी ने लागत नियंत्रण, टेक्नोलॉजी अपग्रेड और बेहतर ऑपरेशनल स्ट्रक्चर के जरिए अपने बिजनेस मॉडल को फिर से मजबूत किया है।

Q1 FY26 में दर्ज मुनाफा इस बदलाव का संकेत देता है।


📝 निष्कर्ष

PRISM द्वारा अजय त्यागी को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर बनाना सिर्फ एक बोर्ड नियुक्ति नहीं, बल्कि IPO से पहले गवर्नेंस को मजबूत करने की रणनीतिक पहल है।

35 से अधिक देशों में मौजूदगी और हालिया मुनाफे के साथ कंपनी पब्लिक मार्केट में एंट्री के लिए खुद को तैयार कर रही है।

अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि PRISM कब औपचारिक रूप से अपना IPO लॉन्च करती है और निवेशकों से कितना रिस्पॉन्स मिलता है।

फिलहाल, यह नियुक्ति संकेत देती है कि कंपनी पारदर्शिता और नियामकीय मजबूती के साथ अपने अगले बड़े कदम की ओर बढ़ रही है। 🚀

Read more :📈 Wint Wealth की FY25 में 2.6X ग्रोथ,

📈 Wint Wealth की FY25 में 2.6X ग्रोथ,

Wint

बेंगलुरु आधारित डेब्ट इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Wint Wealth ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 2.6 गुना बढ़कर 44.5 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि उसका घाटा 60% से अधिक घटकर 8.2 करोड़ रुपये रह गया।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने FY24 में 17.2 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया था, जो FY25 में तेज उछाल के साथ 44.5 करोड़ रुपये हो गया।


🏦 क्या करती है Wint Wealth?

साल 2020 में स्थापित Wint Wealth रिटेल निवेशकों को फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स में निवेश करने का अवसर देती है। इनमें कॉर्पोरेट बॉन्ड, सिक्योरिटाइज्ड डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जैसे एसेट क्लास शामिल हैं।

कंपनी अपनी NBFC आर्म Wint Capital के जरिए B2B लोन भी प्रदान करती है।

इस तरह Wint Wealth ने खुद को इक्विटी-हैवी निवेश विकल्पों के मुकाबले एक सुरक्षित और अनुमानित रिटर्न देने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में पोजिशन किया है।


💰 69% आय ब्याज से

कंपनी की कुल ऑपरेटिंग आय का 69% हिस्सा ब्याज आय (Interest Income) से आया।

  • FY25 में यह आय 3.9 गुना बढ़कर 30.8 करोड़ रुपये पहुंच गई।
  • यह आय डेब्ट सिक्योरिटीज और NBFC आर्म के जरिए दिए गए लोन से प्राप्त हुई।
  • कंपनी Effective Interest Rate (EIR) मेथड के आधार पर ब्याज की गणना करती है।

इसके अलावा, कंपनी ने फाइनेंशियल इंटरमीडियरी सर्विसेज से 9 करोड़ रुपये की फीस आधारित आय अर्जित की।

सेकेंडरी मार्केट में डेब्ट सिक्योरिटीज के ट्रेडिंग से 4.7 करोड़ रुपये का नेट गेन हुआ।

गैर-ऑपरेटिंग स्रोतों और करंट इन्वेस्टमेंट से 2.3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, जिससे कुल आय बढ़कर 46.8 करोड़ रुपये हो गई।


📊 खर्चों में 32% की बढ़ोतरी

हालांकि कंपनी की आय में तेज उछाल आया, लेकिन खर्च भी बढ़े। FY25 में कुल खर्च 32% बढ़कर 54.7 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 41.5 करोड़ रुपये था।

👩‍💼 कर्मचारी खर्च सबसे बड़ा

एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च कुल लागत का 49% रहा।

  • यह खर्च 25.6% बढ़कर 27 करोड़ रुपये हो गया।
  • इसमें 4.7 करोड़ रुपये का ESOP खर्च भी शामिल है।

💳 ब्याज खर्च में बड़ी छलांग

कंपनी द्वारा चुकाया गया ब्याज कुल लागत का 34% रहा।

  • यह खर्च 4.4 गुना बढ़कर 18.6 करोड़ रुपये पहुंच गया।

तेजी से बढ़ते लोन बुक और फंडिंग संरचना के कारण ब्याज भुगतान में उछाल आया।

इसके अलावा विज्ञापन, लीगल और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों ने भी कुल लागत को ऊपर धकेला।


📉 घाटा 60% घटा

मजबूत ऑपरेटिंग ग्रोथ का असर सीधे बॉटम लाइन पर दिखा।

  • FY25 में कंपनी का घाटा घटकर 8.2 करोड़ रुपये रह गया।
  • FY24 में यह घाटा इससे काफी अधिक था।

यूनिट इकोनॉमिक्स के हिसाब से, कंपनी ने FY25 में 1 रुपये कमाने के लिए 1.23 रुपये खर्च किए।

मार्च 2025 तक कंपनी के पास 296 करोड़ रुपये के करंट एसेट्स थे, जिनमें 35 करोड़ रुपये कैश और बैंक बैलेंस शामिल थे।


💸 अब तक जुटाए $60 मिलियन

Wint Wealth अब तक लगभग 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है।

हाल ही में कंपनी ने 250 करोड़ रुपये (करीब 28 मिलियन डॉलर) का राउंड जुटाया था, जिसकी अगुवाई Vertex Ventures ने की।

इस राउंड में Eight Roads Ventures, Zerodha समर्थित Rainmatter, और 3one4 Capital ने भी भाग लिया।

Zerodha से जुड़ाव के कारण कंपनी को रिटेल निवेशक इकोसिस्टम में विश्वसनीयता और नेटवर्क का लाभ मिला है।


📈 भारत में Wealthtech सेक्टर की स्थिति

Entrackr के डेटा के अनुसार, 2024 और 2025 के दौरान भारतीय wealthtech स्टार्टअप्स ने 51 डील्स के जरिए 634 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई।

हालांकि बड़े टिकट राउंड्स सीमित रहे — केवल छह डील्स 30 मिलियन डॉलर या उससे अधिक की थीं।

इनमें शामिल हैं:

  • Syfe — 53 मिलियन डॉलर
  • Smallcase — 50 मिलियन डॉलर (Series D)
  • Neo — 48 मिलियन डॉलर
  • Dezerv — 40 मिलियन डॉलर

इससे स्पष्ट है कि निवेशक इस सेक्टर में चयनात्मक निवेश कर रहे हैं।


🔎 आगे की रणनीति

Wint Wealth के लिए आने वाला समय महत्वपूर्ण रहेगा।

कंपनी को:

  • ब्याज लागत को संतुलित रखना
  • NBFC बुक को सुरक्षित तरीके से विस्तार देना
  • रिटेल निवेशकों का भरोसा मजबूत करना
  • प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में तेजी से बढ़ना

जैसे कदम उठाने होंगे।

भारत में फिक्स्ड-इनकम निवेश की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन निवेशकों के बीच जो स्थिर और अनुमानित रिटर्न चाहते हैं।


📝 निष्कर्ष

Wint Wealth ने FY25 में मजबूत 2.6X रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है और घाटा 60% से अधिक घटाने में सफलता पाई है।

हालांकि खर्च, खासकर ब्याज भुगतान, तेजी से बढ़े हैं, लेकिन कंपनी की स्केलिंग क्षमता और निवेशकों का भरोसा इसे wealthtech सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है।

अगर कंपनी इसी गति से ग्रोथ और लागत नियंत्रण बनाए रखती है, तो आने वाले वर्षों में यह डेब्ट इन्वेस्टमेंट स्पेस में एक प्रमुख नाम बन सकती है। 🚀

Read more :🛏️ SleepyCat की FY25 में 44% ग्रोथ,

🛏️ SleepyCat की FY25 में 44% ग्रोथ,

SleepyCat

डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मैट्रेस ब्रांड SleepyCat ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44% बढ़कर 98 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो FY24 में 68 करोड़ रुपये था। खास बात यह रही कि तेजी से स्केलिंग के बावजूद कंपनी ने अपने घाटे को सिंगल डिजिट में बनाए रखा।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने ग्रोथ और खर्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।


📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 44% की उछाल

FY25 में SleepyCat का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44% बढ़कर 98 करोड़ रुपये हो गया। यह ग्रोथ D2C मॉडल की मजबूती और ऑनलाइन सेल्स चैनल्स पर बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।

कंपनी मुख्य रूप से अपनी वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए मैट्रेस और स्लीप एक्सेसरीज बेचती है।


🛒 89% रेवेन्यू तैयार उत्पादों की बिक्री से

कंपनी की कुल आय का 89% हिस्सा तैयार उत्पादों (Finished Goods) की बिक्री से आया।

  • तैयार उत्पादों से रेवेन्यू 39% बढ़कर 87 करोड़ रुपये हो गया।
  • ट्रेडेड गुड्स (Reselling Products) से आय लगभग दोगुनी होकर 9.8 करोड़ रुपये पहुंच गई।

यह दर्शाता है कि कंपनी अपने कोर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ-साथ अतिरिक्त प्रोडक्ट्स से भी ग्रोथ हासिल कर रही है।


💸 खर्चों में भी 44% की बढ़ोतरी

जहां रेवेन्यू बढ़ा, वहीं कंपनी के कुल खर्च भी 44% बढ़कर 108.5 करोड़ रुपये हो गए, जो FY24 में 75.5 करोड़ रुपये थे।

🔹 मटेरियल कॉस्ट

कंपनी की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा मटेरियल कॉस्ट से जुड़ा है।
यह खर्च 52% बढ़कर 54 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 35.6 करोड़ रुपये)।

🔹 विज्ञापन खर्च

ब्रांड बिल्डिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग पर कंपनी का फोकस जारी रहा।
एडवर्टाइजिंग खर्च 46% बढ़कर 14.6 करोड़ रुपये पहुंच गया।

🔹 कमीशन और लॉजिस्टिक्स

  • कमीशन खर्च 41% बढ़कर 11 करोड़ रुपये
  • डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स खर्च 56% बढ़कर 8.6 करोड़ रुपये

तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स ऑर्डर्स के कारण लॉजिस्टिक्स लागत में तेज उछाल देखा गया।

🔹 कर्मचारी लाभ खर्च

एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च 11% बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो गया।


📉 घाटा बढ़ा, लेकिन कंट्रोल में

स्केल बढ़ने के साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा।

  • FY25 में नेट लॉस 29% बढ़कर 9 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 7 करोड़ रुपये)।
  • EBITDA लॉस 9.6 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 6.7 करोड़ रुपये था।
  • EBITDA मार्जिन लगभग -9.80% पर स्थिर रहा।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कंपनी का घाटा अभी भी सिंगल डिजिट में है, जो D2C सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।


📊 ₹1 कमाने के लिए ₹1.11 खर्च

यूनिट इकोनॉमिक्स के आधार पर, कंपनी ने FY25 में 1 रुपये कमाने के लिए 1.11 रुपये खर्च किए।

यह अनुपात FY24 के समान ही रहा, जिससे संकेत मिलता है कि ग्रोथ के बावजूद लागत संरचना में बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

वित्त वर्ष के अंत में कंपनी के पास 3 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस था, जबकि करंट एसेट्स 18.6 करोड़ रुपये रहे।


💰 अब तक जुटाए 5 मिलियन डॉलर

SleepyCat अब तक लगभग 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है।

कंपनी के प्रमुख निवेशकों में DSG Consumer Partners शामिल है, जिसने इस ब्रांड की शुरुआती ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

D2C ब्रांड्स के लिए सीमित फंडिंग के बावजूद स्थिर ग्रोथ दिखाना कंपनी की रणनीति को दर्शाता है।


🏁 प्रतिस्पर्धा का दबाव

मैट्रेस और स्लीप सॉल्यूशन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है।

🛏️ The Sleep Company

प्रतिद्वंदी The Sleep Company का रेवेन्यू FY25 में 60% बढ़कर 499 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 312 करोड़ रुपये)।
कंपनी ने अपने EBITDA घाटे को घटाकर 39 करोड़ रुपये कर लिया।

🛌 Wakefit

सेक्टर की बड़ी कंपनी Wakefit ने हाल ही में स्टॉक एक्सचेंज पर एंट्री की, हालांकि उसकी लिस्टिंग अपेक्षाकृत कमजोर रही।

Wakefit ने Q3 FY26 में 421 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया और 34 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सेक्टर में बड़े खिलाड़ियों का दबदबा है, लेकिन मिड-साइज़ ब्रांड्स भी अपनी जगह बना रहे हैं।


🔎 आगे की राह

SleepyCat के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण रहेगा।

कंपनी को:

  • यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने
  • लॉजिस्टिक्स और मटेरियल कॉस्ट कंट्रोल करने
  • ब्रांड डिफरेंशिएशन मजबूत करने
  • ऑफलाइन चैनल्स में विस्तार करने

जैसे कदम उठाने होंगे।

D2C मैट्रेस मार्केट में ग्राहक अनुभव, प्रोडक्ट क्वालिटी और डिलीवरी स्पीड सबसे बड़ा फैक्टर बन चुके हैं।


📝 निष्कर्ष

SleepyCat ने FY25 में मजबूत 44% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है और 100 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। हालांकि घाटा बढ़ा है, लेकिन वह अभी भी सिंगल डिजिट में है, जो कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति को दर्शाता है।

तेजी से बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल में SleepyCat को अपनी ब्रांड पोजिशनिंग और प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस बढ़ाना होगा।

अगर कंपनी यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह D2C स्लीप सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बन सकती है। 🚀

Read more :🏗️ IPO से पहले Infra.Market जुटाएगी ₹1,250 करोड़ का कर्ज,

🏗️ IPO से पहले Infra.Market जुटाएगी ₹1,250 करोड़ का कर्ज,

Infra.Market

मुंबई स्थित कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स प्लेटफॉर्म Infra.Market एक बार फिर बड़े फाइनेंशियल कदम को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने IPO फाइल करने के कुछ ही महीनों बाद 1,250 करोड़ रुपये का डेब्ट (कर्ज) जुटाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यह फंडिंग कंपनी अपनी संपत्तियों और प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग को गिरवी रखकर जुटा रही है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी पहले ही पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी में जुटी हुई है।


📌 बोर्ड से मिली 1,25,000 NCDs जारी करने की मंजूरी

कंपनी के बोर्ड ने एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास कर 1,25,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने को मंजूरी दी है। हर डिबेंचर की फेस वैल्यू 1 लाख रुपये होगी।

इन डिबेंचर्स को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी किया जाएगा और इससे अधिकतम 1,250 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।

NCDs कन्वर्टिबल नहीं होते, यानी इन्हें इक्विटी में नहीं बदला जा सकता। इससे कंपनी की हिस्सेदारी डाइल्यूट नहीं होगी, लेकिन उसे तय ब्याज चुकाना होगा।


💰 Ascertis Credit से जुटाए 700 करोड़ रुपये

कुल प्रस्तावित राशि में से 700 करोड़ रुपये पहले ही जुटाए जा चुके हैं। यह निवेश सिंगापुर आधारित प्राइवेट क्रेडिट प्लेटफॉर्म Ascertis Credit से आया है।

इसके लिए कंपनी ने 70,000 NCDs जारी किए हैं।

विदेशी प्राइवेट क्रेडिट फंड्स का इस तरह भारतीय ग्रोथ-स्टेज कंपनियों में डेब्ट के जरिए निवेश करना यह संकेत देता है कि ग्लोबल निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।


🔒 प्रमोटर्स के शेयर और ग्रुप कंपनियों की हिस्सेदारी होगी गिरवी

इस डेब्ट को सुरक्षित करने के लिए कंपनी अपनी संपत्तियों के साथ-साथ प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी गिरवी रख रही है।

CEO Souvik Pulakesh Sengupta और COO Aaditya Gajendra Sharda की शेयरहोल्डिंग के अलावा अन्य प्रमोटर एंटिटीज की हिस्सेदारी भी प्लेज की जाएगी।

इसके साथ ही ग्रुप कंपनियों — RDC Concrete India Limited, Neptune Readymix Concrete Private Limited और Robo Quarries Private Limited — की हिस्सेदारी भी गिरवी रखी जाएगी।

यह दर्शाता है कि कंपनी इस फंडिंग को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी ऑफर कर रही है।


📊 IPO से पहले डेब्ट रेजिंग की क्या है रणनीति?

जनवरी 2026 में कंपनी को मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) से IPO आगे बढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है।

ऐसे में IPO से पहले इतना बड़ा कर्ज उठाने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:

  • वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करना
  • सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग को स्केल करना
  • बैलेंस शीट को स्ट्रक्चर करना
  • IPO से पहले ग्रोथ नंबर मजबूत दिखाना

डेब्ट के जरिए पूंजी जुटाने का फायदा यह है कि कंपनी की इक्विटी डाइल्यूशन नहीं होती। हालांकि, प्रमोटर शेयर गिरवी रखने से जोखिम भी जुड़ा होता है।


🚀 Series G में $83 मिलियन जुटा चुकी है कंपनी

सितंबर 2025 में Infra.Market ने अपना Series G राउंड पूरा किया था, जिसमें 83 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे।

इस राउंड की अगुवाई Silverline Homes ने की थी।

राउंड में Tiger Global, Accel, Nexus Venture Partners, NK Squared और Evolvence India जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।

इससे पहले भी कंपनी कई बड़े राउंड्स में पूंजी जुटा चुकी है और भारत के तेजी से बढ़ते कंस्ट्रक्शन टेक सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति बना चुकी है।


📈 FY25 में 27% बढ़ा GMV, लेकिन मुनाफा घटा

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY25 में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 27% बढ़कर 18,472 करोड़ रुपये (लगभग 2.1 बिलियन डॉलर) हो गया।

यह कंपनी की मजबूत डिमांड और तेजी से बढ़ते ऑपरेशंस को दर्शाता है।

हालांकि, शुद्ध लाभ लगभग 42% घटकर 220 करोड़ रुपये रह गया।


⚖️ मुनाफे में गिरावट की वजह क्या रही?

विश्लेषकों के अनुसार संभावित कारण हो सकते हैं:

  • विस्तार और नई यूनिट्स में निवेश
  • सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
  • लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी
  • नए बाजारों में एंट्री

IPO से पहले कंपनी के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी को स्थिर करे, क्योंकि पब्लिक मार्केट निवेशक ग्रोथ के साथ लाभप्रदता पर भी ध्यान देते हैं।


🔎 आगे क्या रहेगा फोकस?

Infra.Market फिलहाल तीन प्रमुख मोर्चों पर काम करती नजर आ रही है:

1️⃣ कैपिटल स्ट्रक्चर मजबूत करना
2️⃣ बिजनेस स्केल को और बढ़ाना
3️⃣ IPO से पहले निवेशकों का भरोसा मजबूत करना

अगर कंपनी IPO के जरिए मजबूत वैल्यूएशन हासिल करती है, तो डेब्ट मैनेजमेंट आसान हो सकता है।


📝 निष्कर्ष

Infra.Market का 1,250 करोड़ रुपये का डेब्ट प्लान यह दिखाता है कि कंपनी IPO से पहले अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करना चाहती है।

जहां एक ओर GMV में मजबूत ग्रोथ दिख रही है, वहीं मुनाफे में गिरावट चिंता का विषय है।

अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि IPO से पहले कंपनी अपने फाइनेंशियल मैट्रिक्स को किस हद तक बेहतर बना पाती है।

कुल मिलाकर, Infra.Market का यह कदम संकेत देता है कि कंपनी पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले अपनी तैयारी पूरी तरह मजबूत करना चाहती है। 🚀

Read more :🌍 South Africa की Coronation ने Ixigo में बढ़ाई हिस्सेदारी,

🌍 South Africa की Coronation ने Ixigo में बढ़ाई हिस्सेदारी,

Ixigo

ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म Le Travenues Technology Limited (Ixigo) में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती दिख रही है। ताजा रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका की एसेट मैनेजमेंट कंपनी Coronation Fund Managers Ltd ने Ixigo में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा दी है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है।


📊 ओपन मार्केट से खरीदे 1.83 लाख शेयर

Johannesburg Stock Exchange में सूचीबद्ध Coronation Fund Managers ने ओपन मार्केट से 1,83,322 इक्विटी शेयर खरीदे।

इस खरीद के बाद कंपनी की हिस्सेदारी 5% की अहम सीमा को पार कर गई।

ट्रांजैक्शन से पहले Coronation के पास 2,18,52,552 शेयर थे, जो Ixigo की कुल इक्विटी का 4.99% था। शेयर खरीद के बाद इसकी होल्डिंग बढ़कर 2,20,35,874 शेयर हो गई, जो कुल हिस्सेदारी का 5.03% है।

किसी भी लिस्टेड कंपनी में 5% से अधिक हिस्सेदारी पार करना निवेशक के भरोसे और दीर्घकालिक रणनीति का संकेत माना जाता है।


🤝 Prosus ने भी बढ़ाई हिस्सेदारी

Coronation से पहले वैश्विक टेक निवेशक Prosus ने भी Ixigo में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई थी। Prosus ने ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए लगभग 15% स्टेक हासिल किया।

इस डील के तहत Prosus ने 3.16% हिस्सेदारी Peak XV से और 1.9% हिस्सेदारी Elevation Capital से खरीदी।

इस तरह बड़े वैश्विक निवेशकों की बढ़ती भागीदारी Ixigo के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ पोटेंशियल पर मजबूत भरोसे को दर्शाती है।


🌍 स्पेन की Trenes में 60% हिस्सेदारी खरीदेगा Ixigo

विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी के बीच Ixigo ने हाल ही में एक अहम अधिग्रहण की घोषणा भी की है। कंपनी स्पेन स्थित ऑनलाइन ट्रेन टिकटिंग प्लेटफॉर्म Trenes में 60% बहुमत हिस्सेदारी लगभग 125 करोड़ रुपये में खरीदेगी।

साथ ही, कंपनी के पास भविष्य में शेष 40% हिस्सेदारी खरीदने का विकल्प भी रहेगा।

अधिग्रहण के बाद Trenes, Ixigo की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी के रूप में काम करेगी। यह कदम Ixigo के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


📈 Q3 FY26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन

Ixigo ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है।

  • ऑपरेशनल रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर 317.6 करोड़ रुपये हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह 242 करोड़ रुपये था।
  • कंपनी का मुनाफा 55% बढ़कर 24 करोड़ रुपये पहुंच गया।

यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब ट्रैवल इंडस्ट्री कोविड के बाद पूरी तरह रिकवर हो चुकी है और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय यात्रा में तेजी देखी जा रही है।


💹 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज सुबह 11:15 बजे के आंकड़ों के अनुसार Ixigo का शेयर 164.4 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इस कीमत पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 7,148 करोड़ रुपये (लगभग 786 मिलियन डॉलर) के आसपास है।

बढ़ते निवेश और मजबूत तिमाही नतीजों ने शेयर बाजार में कंपनी की स्थिति को मजबूती दी है।


🧳 Ixigo का बिजनेस मॉडल

Ixigo भारत का एक प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर है, जो ट्रेन, फ्लाइट और बस टिकट बुकिंग की सुविधा देता है। कंपनी AI-आधारित सर्च और प्राइस ट्रैकिंग फीचर्स के जरिए यूजर्स को बेहतर डील्स और किफायती यात्रा विकल्प प्रदान करती है।

भारत में डिजिटल ट्रैवल बुकिंग तेजी से बढ़ रही है, और Ixigo इस सेगमेंट में MakeMyTrip और अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।


🔎 निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ रहा है?

Coronation और Prosus जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत है कि Ixigo का ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड और विस्तार रणनीति उन्हें आकर्षित कर रही है।

  • लगातार रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ
  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार (Trenes अधिग्रहण)
  • मजबूत ब्रांड पहचान
  • डिजिटल ट्रैवल की बढ़ती मांग

ये सभी कारक निवेशकों के भरोसे को मजबूत करते हैं।


🔮 आगे की राह

Ixigo के सामने अब दोहरी चुनौती है — एक ओर घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा, और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय विस्तार को सफल बनाना।

Trenes का अधिग्रहण कंपनी को यूरोपीय बाजार में प्रवेश का मौका देगा। वहीं, बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी कंपनी को पूंजी और रणनीतिक समर्थन दोनों दे सकती है।

अगर कंपनी अपनी ग्रोथ रफ्तार बनाए रखती है और नए बाजारों में सफलतापूर्वक विस्तार करती है, तो आने वाले वर्षों में Ixigo भारतीय ऑनलाइन ट्रैवल इंडस्ट्री में और मजबूत स्थिति बना सकता है।

फिलहाल, Coronation का 5% से अधिक हिस्सेदारी तक पहुंचना और Prosus की बढ़ती भागीदारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि Ixigo अब वैश्विक निवेशकों के रडार पर मजबूती से आ चुका है।

Read more :💰 B2B Cross-Border Payments स्टार्टअप Xflow ने जुटाए $16.6 मिलियन,

💰 B2B Cross-Border Payments स्टार्टअप Xflow ने जुटाए $16.6 मिलियन,

Xflow

भारत के फिनटेक सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। B2B क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स स्टार्टअप Xflow ने अपने Series A राउंड में 16.6 मिलियन डॉलर (लगभग 138 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड में कंपनी की वैल्यूएशन 85 मिलियन डॉलर आंकी गई है।

इस फंडिंग राउंड की अगुवाई वैश्विक निवेश फर्म General Catalyst ने की। वहीं मौजूदा निवेशकों Square Peg, Stripe, Lightspeed और Moore Capital ने भी भागीदारी की। इसके अलावा PayPal Ventures इस राउंड में नए निवेशक के रूप में शामिल हुआ है।


📜 PA-CB लाइसेंस से मिला बड़ा बूस्ट

फंडिंग के साथ-साथ Xflow को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। कंपनी को एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट दोनों के लिए अंतिम PA-CB (Payment Aggregator – Cross Border) ऑथराइजेशन मिल गया है।

PA-CB Imports लाइसेंस के जरिए कंपनी अब विदेशी मर्चेंट्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स को सर्विस दे सकेगी। वहीं PA-CB Exports लाइसेंस कंपनी की मौजूदा पेशकश को और मजबूत करेगा।

यह लाइसेंसिंग मंजूरी Xflow को रेगुलेटरी स्तर पर मजबूत स्थिति प्रदान करती है और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में विश्वसनीयता बढ़ाती है।


📊 अब तक जुटाए $32 मिलियन

बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप ने अब तक कुल 32 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इससे पहले मई 2023 में कंपनी ने 10.2 मिलियन डॉलर का प्री-Series A राउंड पूरा किया था।

कंपनी के अनुसार, नई पूंजी का उपयोग ऑपरेशंस को स्केल करने और नए भौगोलिक बाजारों में विस्तार के लिए किया जाएगा।


👨‍💼 कौन हैं संस्थापक?

Xflow की स्थापना Anand Balaji, Ashwin Bhatnagar और Abhijit Chandrasekaran ने की थी। कंपनी SMEs (Small and Medium Enterprises), ITES कंपनियों और फंडेड स्टार्टअप्स के लिए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

Xflow का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शंस को अधिक तेज, किफायती और कंप्लायंट बनाना है। कंपनी फ्रीलांसर्स और स्टार्टअप्स से लेकर बड़े एंटरप्राइजेज तक को सर्विस देती है।


🌍 100 से ज्यादा देशों में पेमेंट कलेक्शन

2025 में Xflow ने भारतीय व्यवसायों को 100 से अधिक देशों से 25 से ज्यादा करेंसी में भुगतान एकत्र करने में सक्षम बनाया।

कंपनी का दावा है कि उसने सैकड़ों मिलियन डॉलर के ट्रांजैक्शंस प्रोसेस किए हैं। वर्तमान में Xflow 10,000 से अधिक व्यवसायों को सर्विस दे रही है, जबकि कुल यूजर बेस लगभग 15,000 तक पहुंच चुका है।

इनमें SaaS कंपनियां, GCCs (Global Capability Centres), IT सर्विस एक्सपोर्टर्स और गुड्स एक्सपोर्टर्स शामिल हैं।


🤝 फिनटेक कंपनियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर

Xflow केवल सीधे व्यवसायों को ही नहीं, बल्कि अन्य फिनटेक कंपनियों को भी अंतरराष्ट्रीय पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करती है।

इसके प्रमुख ग्राहकों में Drip Capital और Easebuzz जैसी कंपनियां शामिल हैं।

यह मॉडल Xflow को B2B2B कैटेगरी में भी मजबूत बनाता है, जहां वह अन्य फिनटेक्स को बैकएंड पेमेंट समाधान देती है।


🤖 FX AI Analyst: डेटा-ड्रिवन ट्रेजरी मैनेजमेंट

विदेशी मुद्रा (FX) में उतार-चढ़ाव व्यवसायों के लिए बड़ा जोखिम होता है। Xflow का ‘FX AI Analyst’ टूल कंपनियों को डेटा-आधारित ट्रेजरी निर्णय लेने में मदद करता है।

यह टूल विदेशी मुद्रा दरों का विश्लेषण कर बेहतर हेजिंग और कन्वर्जन रणनीति सुझाता है, जिससे कंपनियां अपने फॉरेक्स आउटकम को सुधार सकें।

SMEs और स्टार्टअप्स के लिए यह फीचर खासतौर पर उपयोगी है, क्योंकि उनके पास बड़े ट्रेजरी डिपार्टमेंट नहीं होते।


📈 क्यों अहम है यह फंडिंग?

भारत में SaaS और IT सर्विस एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहे हैं। हजारों स्टार्टअप्स और फ्रीलांसर्स ग्लोबल क्लाइंट्स से कमाई कर रहे हैं। ऐसे में तेज और सस्ती क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स की जरूरत बढ़ती जा रही है।

Xflow इसी जरूरत को पूरा कर रहा है।

Series A राउंड में General Catalyst और PayPal Ventures जैसे बड़े निवेशकों की एंट्री इस बात का संकेत है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल और ग्रोथ पोटेंशियल निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।


🔮 आगे की रणनीति

नई पूंजी के साथ Xflow अपनी तकनीकी क्षमता को और मजबूत करेगा और नए बाजारों में प्रवेश करेगा।

कंपनी का लक्ष्य है कि वह भारतीय SMEs के लिए अंतरराष्ट्रीय पेमेंट को उतना ही आसान बना दे, जितना घरेलू ट्रांजैक्शन करना।

PA-CB लाइसेंस के साथ रेगुलेटरी मजबूती और निवेशकों का भरोसा — दोनों Xflow को अगले ग्रोथ फेज के लिए तैयार कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, Xflow की यह फंडिंग डील दिखाती है कि भारत का B2B फिनटेक इकोसिस्टम तेजी से परिपक्व हो रहा है। अगर कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ रफ्तार को बनाए रखती है, तो आने वाले समय में यह भारतीय क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स सेगमेंट में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।

Read more :💰 AI चिप स्टार्टअप optoML ने जुटाए $1.8 मिलियन,

💰 AI चिप स्टार्टअप optoML ने जुटाए $1.8 मिलियन,

optoML

भारत के सेमीकंडक्टर और डीप-टेक सेक्टर में एक और अहम फंडिंग डील सामने आई है। SOC (System-on-Chip) आधारित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप optoML ने अपने प्री-Series A राउंड में 1.8 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Bluehill.VC और A99 ने की।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और AI चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रोत्साहन दे रही है। optoML की यह फंडिंग भारतीय चिप डिजाइन इकोसिस्टम के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।


🚀 12nm Tapeout पूरा, अब अगली पीढ़ी की चिप पर काम

कंपनी ने हाल ही में 12 नैनोमीटर (12nm) तकनीक पर अपना Tapeout सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो कि दुनिया की अग्रणी चिप निर्माता कंपनी TSMC के साथ किया गया। Tapeout का मतलब है कि चिप डिजाइन को फाइनल कर मैन्युफैक्चरिंग के लिए भेज दिया गया है।

इस नई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • टेक्निकल और इंजीनियरिंग टीम का विस्तार
  • अगली पीढ़ी की AI चिप्स के विकास की शुरुआत

कंपनी का लक्ष्य है कि वह अपनी इनोवेटिव AI SoC (System-on-Chip) तकनीक को और अधिक स्केलेबल और ऊर्जा-कुशल बनाए।


👨‍💻 कौन हैं संस्थापक?

optoML की स्थापना Saravana Maruthamuthu ने की है। कंपनी Analog-in-Memory Compute आर्किटेक्चर पर काम करती है, जिसमें Optical Interconnects का उपयोग किया जाता है। यह टेक्नोलॉजी विशेष रूप से AI वर्कलोड्स के लिए डिजाइन की गई है।

आज AI मॉडल्स को ट्रेन और रन करने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिससे ऊर्जा खपत भी काफी बढ़ जाती है। optoML का दावा है कि उसकी पेटेंटेड In-Memory Compute डिजाइन पारंपरिक डिजिटल एक्सीलरेटर की तुलना में 50 गुना तक अधिक ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) दे सकती है।


⚡ 50x अधिक ऊर्जा दक्षता का दावा

AI और डेटा सेंटर उद्योग में सबसे बड़ी चुनौती है — पावर कंजम्प्शन। बड़े AI मॉडल्स को रन करने के लिए भारी GPU और एक्सीलरेटर की जरूरत पड़ती है, जिससे बिजली की लागत और कार्बन फुटप्रिंट दोनों बढ़ते हैं।

optoML की टेक्नोलॉजी डेटा को मेमोरी के अंदर ही प्रोसेस करती है, जिससे डेटा मूवमेंट कम होता है और ऊर्जा की बचत होती है।

कंपनी के अनुसार, उसका डिजाइन इन उपयोग मामलों को टारगेट करता है:

  • Edge devices
  • Enterprise servers
  • Data centres

अगर कंपनी का 50x ऊर्जा दक्षता का दावा व्यावहारिक रूप से सफल साबित होता है, तो यह AI हार्डवेयर इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला सकता है।


🏭 Fabless मॉडल पर काम

optoML एक Fabless Semiconductor कंपनी के रूप में काम करती है। इसका मतलब है कि कंपनी खुद चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं चलाती, बल्कि डिजाइन पर फोकस करती है और मैन्युफैक्चरिंग के लिए TSMC जैसे वैश्विक फाउंड्री पार्टनर पर निर्भर रहती है।

कंपनी FinFET नोड्स पर आधारित स्केलेबल AI SoC प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। FinFET तकनीक उन्नत चिप डिजाइन में इस्तेमाल होती है, जो बेहतर प्रदर्शन और कम पावर खपत सुनिश्चित करती है।


🤝 Kaynes Semiconductor के साथ साझेदारी

मैन्युफैक्चरिंग के बाद चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग भी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। इस दिशा में optoML ने Kaynes Semiconductor के साथ एक MoU (समझौता ज्ञापन) साइन किया है।

जब TSMC से वेफर्स भारत पहुंचेंगे, तब Kaynes Semiconductor असेंबली और टेस्टिंग में सहयोग करेगी। इससे कंपनी को सप्लाई चेन को बेहतर ढंग से मैनेज करने और भारत में वैल्यू एडिशन बढ़ाने में मदद मिलेगी।


🎯 निवेशकों का फोकस Deep-Tech पर

इस राउंड का नेतृत्व करने वाली Bluehill.VC एक डीप-टेक फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म है। यह सेमीकंडक्टर, डिफेंस, एनर्जी और इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश करती है।

A99 भी शुरुआती चरण के टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में निवेश के लिए जानी जाती है।

इन निवेशकों का optoML में निवेश यह दर्शाता है कि भारतीय डीप-टेक और सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रहे हैं।


🌏 भारत का सेमीकंडक्टर अवसर

भारत लंबे समय से चिप डिजाइन में मजबूत रहा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग में पीछे रहा है। अब सरकार की PLI योजनाओं और वैश्विक सप्लाई चेन बदलाव के चलते भारत में सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स को नया मौका मिल रहा है।

AI की बढ़ती मांग के बीच ऊर्जा-कुशल चिप्स की जरूरत और भी बढ़ गई है। optoML जैसे स्टार्टअप्स इस गैप को भरने की कोशिश कर रहे हैं।


🔮 आगे की रणनीति

Pre-Series A फंडिंग के बाद optoML अब अपनी टीम को मजबूत कर अगली पीढ़ी की AI SoC चिप्स पर काम शुरू करेगी।

कंपनी का लक्ष्य है कि वह अपने प्रोडक्ट को Edge से लेकर बड़े डेटा सेंटर तक स्केल करे। अगर अगली चिप सफल रहती है, तो optoML भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकती है।

कुल मिलाकर, optoML की यह फंडिंग भारतीय डीप-टेक सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। AI और ऊर्जा दक्षता के संगम पर काम कर रही यह कंपनी आने वाले वर्षों में भारत को ग्लोबल AI हार्डवेयर मैप पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।

Read more :📉 Aakash Educational Services को FY24 में 2,443 करोड़ रुपये का भारी घाटा,

📉 Aakash Educational Services को FY24 में 2,443 करोड़ रुपये का भारी घाटा,

Aakash

देश की प्रमुख कोचिंग कंपनी Aakash Educational Services Ltd (AESL) ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 2,443 करोड़ रुपये का बड़ा शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह नुकसान मुख्य रूप से इसकी पैरेंट कंपनी Think & Learn Private Limited (Byju’s) से जुड़े exceptional items के कारण हुआ है।

कंपनी के कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेज, जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) से प्राप्त हुए हैं, बताते हैं कि भारी वित्तीय लागत, लोन डिफॉल्ट, पुनर्भुगतान और संबंधित पक्ष को दिए गए ऋण की राइट-ऑफ इस घाटे की प्रमुख वजह रहे।


📊 रेवेन्यू लगभग स्थिर, लेकिन मुनाफा गायब

FY24 में Aakash का ऑपरेशनल रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा।

  • FY24 में रेवेन्यू: 2,438 करोड़ रुपये
  • FY23 में रेवेन्यू: 2,399 करोड़ रुपये

यानी सालाना आधार पर मामूली बढ़त देखने को मिली।

Aakash मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET, IIT-JEE, Olympiads और NTSE के लिए क्लासरूम और डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम चलाती है।

कंपनी की कुल आय का 96% हिस्सा छात्रों से मिलने वाली फीस से आता है, जो FY24 में 2% बढ़कर 2,341 करोड़ रुपये हो गया।

वहीं फ्रेंचाइज़ी मॉडल से होने वाली आय 8.5% घटकर 97 करोड़ रुपये रह गई।


💰 नॉन-ऑपरेशनल आय से सहारा

FY24 में कंपनी ने 433 करोड़ रुपये की नॉन-ऑपरेशनल आय भी दर्ज की। इसमें मुख्य रूप से ब्याज आय, मैनपावर सेवाएं और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर डिस्काउंट के अनवाइंडिंग शामिल रहे।

इससे कंपनी की कुल आय 2,471 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

लेकिन बढ़ते खर्चों और एकमुश्त प्रावधानों ने पूरे वित्तीय संतुलन को बिगाड़ दिया।


📈 खर्चों में 14% की बढ़ोतरी

Aakash के लिए सबसे बड़ा खर्च कर्मचारी वेतन और फैकल्टी से जुड़ा रहा, जो कुल खर्च का 56% था।

  • कर्मचारी लाभ व्यय FY24 में 14% बढ़कर 1,411 करोड़ रुपये हो गया (FY23: 1,239 करोड़ रुपये)।
  • डिप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन खर्च 28% बढ़कर 259 करोड़ रुपये पहुंच गया।

इसके अलावा विज्ञापन, प्रमोशन, स्टडी मैटेरियल, लीगल और प्रोफेशनल फीस, IT खर्च और फ्रेंचाइज़ी फीस जैसी लागतों ने कुल खर्च को 14% बढ़ाकर 2,532 करोड़ रुपये कर दिया (FY23: 2,225 करोड़ रुपये)।


⚠️ 2,720 करोड़ रुपये के ‘Exceptional Items’ ने बिगाड़ी तस्वीर

सबसे बड़ा झटका 2,720 करोड़ रुपये के exceptional items से आया, जो मुख्य रूप से पैरेंट कंपनी Think & Learn (Byju’s) से जुड़े थे।

इनमें शामिल हैं:

  • 1,363 करोड़ रुपये ब्याज और लोन दायित्वों के लिए प्रावधान
  • 780 करोड़ रुपये के संबंधित पक्ष को दिए गए ऋण की राइट-ऑफ
  • 100 करोड़ रुपये का वन-टाइम टर्मिनेशन शुल्क (6 मई 2023 को Think & Learn के साथ सर्विस एग्रीमेंट खत्म होने के बाद)
  • 102 करोड़ रुपये की goodwill impairment
  • 300 करोड़ रुपये की intangible assets की write-down

इन भारी एकमुश्त खर्चों के कारण कंपनी को 2,443 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।

Entrackr द्वारा पूछे गए सवालों पर कंपनी ने इन exceptional items को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।


📌 ऑपरेशनल स्तर पर फिर भी EBITDA पॉजिटिव

हालांकि शुद्ध घाटा भारी रहा, लेकिन ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी EBITDA पॉजिटिव रही।

  • FY24 में EBITDA: 307 करोड़ रुपये
  • EBITDA मार्जिन घटकर 12.57% रह गया
  • ROCE गिरकर 6.76% पर आ गया

अगर exceptional items और डिफर्ड टैक्स को हटा दिया जाए, तो कंपनी का घाटा सिर्फ 61 करोड़ रुपये था, जबकि FY23 में 153 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

इससे साफ है कि मूल बिजनेस अभी भी पूरी तरह ढहा नहीं है, लेकिन पैरेंट कंपनी से जुड़ी वित्तीय उलझनों ने तस्वीर बिगाड़ दी।


📉 हर 1 रुपये कमाने में 1.04 रुपये खर्च

यूनिट इकॉनॉमिक्स की बात करें तो FY24 में कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.04 रुपये खर्च किए।

मार्च 2024 तक कंपनी के पास 315 करोड़ रुपये की करेंट एसेट्स थीं, जिनमें कैश और बैंक बैलेंस भी शामिल था।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद

हाल ही में Think & Learn (Byju’s) ने Aakash के 240 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने NCLAT द्वारा फंडरेज को मंजूरी देने के फैसले को चुनौती दी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और Aakash को इश्यू जारी रखने की अनुमति दे दी। साथ ही Think & Learn को अपनी शेयरहोल्डिंग के अनुपात में सब्सक्राइब करने का अधिकार दिया गया।

यह कानूनी लड़ाई Aakash के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।


🏫 मजबूत ब्रांड, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा

Aakash की स्थापना JC Chaudhry और उनकी टीम ने की थी, जिन्होंने इसे देश के सबसे भरोसेमंद कोचिंग ब्रांड्स में से एक बनाया। बाद में Byju’s ने लगभग 1 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर इसे अधिग्रहित किया।

आज जबकि Byju’s खुद वित्तीय संकट में है, Aakash उसके सबसे मूल्यवान एसेट्स में से एक माना जाता है।

हालांकि FY24 तक कंपनी ने अपनी मार्केट हिस्सेदारी को काफी हद तक बनाए रखा, लेकिन अब उसे PhysicsWallah जैसे उभरते प्रतिस्पर्धियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

FY25 के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि Aakash ने बाजार में अपनी पकड़ कितनी बरकरार रखी है।


🔮 आगे की राह आसान नहीं

डिजिटल क्लासरूम बंद करने जैसे कठिन फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनी कानूनी और वित्तीय उलझनों से बाहर निकलकर एक साफ शुरुआत कर पाए।

मौजूदा बड़े निवेशक Ranjan Pai के सामने कंपनी को फिर से पटरी पर लाने की जिम्मेदारी है।

ब्रांड फिलहाल दबाव में जरूर है, लेकिन Aakash ने अब तक कई मुश्किल दौर देखे हैं। सही रणनीति और स्थिर नेतृत्व के साथ यह फिर से मजबूती से वापसी कर सकता है।

फिलहाल FY24 के आंकड़े बताते हैं कि ऑपरेशनल बिजनेस में दम है, लेकिन पैरेंट कंपनी की समस्याओं का असर भारी पड़ा है। आने वाले वित्तीय वर्ष Aakash के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

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