Edtech सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आई है। Klassroom ने अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) भारतीय पूंजी बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) के पास दाखिल कर दिया है। कंपनी Bombay Stock Exchange (BSE) के SME प्लेटफॉर्म पर अपना Initial Public Offering (IPO) लॉन्च करने की योजना बना रही है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब edtech सेक्टर फंडिंग स्लोडाउन के लंबे दौर के बाद धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ रहा है। Klassroom का IPO प्लान इस बात का संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा फिर से उभर रहा है — खासकर उन कंपनियों पर जो ग्रोथ के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी भी दिखा रही हैं।
💰 IPO में क्या होगा खास?
कंपनी द्वारा दाखिल DRHP के अनुसार, प्रस्तावित IPO में दो हिस्से होंगे:
1️⃣ Fresh Issue – नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे
2️⃣ Offer for Sale (OFS) – कुछ मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर आंशिक रूप से बेच सकेंगे
Fresh issue से मिलने वाली राशि का उपयोग कंपनी कई रणनीतिक उद्देश्यों के लिए करेगी:
- मौजूदा कर्ज (Debt) का भुगतान
- Technology stack को मजबूत करना
- AI/ML capabilities का विस्तार
- कंटेंट डेवलपमेंट
- मार्केटिंग और ब्रांड बिल्डिंग
वहीं OFS के जरिए कुछ प्रमोटर्स और शुरुआती निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच सकेंगे।
🏢 Public Company में बदली पहचान
Klassroom ने नवंबर पिछले साल खुद को पब्लिक लिमिटेड कंपनी में कन्वर्ट किया था। यह IPO की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम था। SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग से कंपनी को पूंजी जुटाने के साथ-साथ ब्रांड वैल्यू और निवेशक विश्वास भी मिलेगा।
🎓 Hybrid Learning Model पर दांव
2016 में स्थापित Klassroom एक Hybrid Learning Ecosystem पर काम करती है। इसका मॉडल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों को मिलाकर बनाया गया है।
कंपनी का फोकस मुख्य रूप से क्लास 8 से 12 तक के छात्रों पर है। यह छात्रों को:
- Recorded Classes
- Live Interactive Sessions
- AI-powered Education OTT Platform
के जरिए शिक्षा प्रदान करती है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ-साथ कंपनी ने ऑफलाइन पार्टनर सेंटर्स का नेटवर्क भी खड़ा किया है। यह Franchise-led, Asset-light Model पर काम करती है, जिससे कंपनी को तेजी से विस्तार करने में मदद मिलती है, जबकि कैपेक्स (Capital Expenditure) सीमित रहता है।
📊 मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
IPO फाइलिंग ऐसे समय में आई है जब कंपनी ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है।
FY25 में शानदार ग्रोथ
- ऑपरेटिंग रेवेन्यू 120% बढ़कर ₹10.1 करोड़
- FY24 में यह ₹4.6 करोड़ था
मुनाफे में बड़ी छलांग
- FY25 में नेट प्रॉफिट ₹2.9 करोड़
- FY24 में यह सिर्फ ₹34.4 लाख था
यानी कंपनी का मुनाफा लगभग 8 गुना बढ़ा है।
FY26 (सितंबर तक के 6 महीने)
- ऑपरेटिंग रेवेन्यू: ₹12.4 करोड़
- नेट प्रॉफिट: लगभग ₹4 करोड़
यह संकेत देता है कि कंपनी की ग्रोथ केवल एक साल की नहीं, बल्कि निरंतर बनी हुई है।
📉 Edtech सेक्टर में रिकवरी का संकेत?
पिछले दो वर्षों में edtech सेक्टर को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई कंपनियों ने लागत कम की, कर्मचारियों की छंटनी की और ग्रोथ से ज्यादा प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित किया।
ऐसे माहौल में Klassroom का IPO प्लान यह दिखाता है कि छोटे लेकिन मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां अब पब्लिक मार्केट की ओर बढ़ने का आत्मविश्वास रखती हैं।
जहां कई बड़े edtech स्टार्टअप अभी भी घाटे से जूझ रहे हैं, वहीं Klassroom ने सीमित संसाधनों में भी ग्रोथ और मुनाफे का संतुलन बनाया है।
🤖 AI और टेक्नोलॉजी पर फोकस
Fresh issue से मिलने वाली पूंजी का बड़ा हिस्सा कंपनी अपनी AI और ML capabilities को बेहतर बनाने में लगाएगी।
आज के प्रतिस्पर्धी edtech माहौल में:
- Personalized Learning
- Data-driven Performance Tracking
- Adaptive Content Delivery
जैसी टेक्नोलॉजी बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी हैं।
Klassroom का AI-powered OTT प्लेटफॉर्म इसी दिशा में एक कदम है, जो छात्रों को कस्टमाइज्ड लर्निंग अनुभव देने का दावा करता है।
🚀 आगे की रणनीति
IPO के बाद कंपनी की प्राथमिकताएं होंगी:
- टेक्नोलॉजी में निवेश
- कंटेंट लाइब्रेरी का विस्तार
- नए शहरों में ऑफलाइन नेटवर्क बढ़ाना
- मार्केटिंग के जरिए ब्रांड पहचान मजबूत करना
SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग से कंपनी को आगे चलकर मेन बोर्ड पर माइग्रेट करने का रास्ता भी मिल सकता है, यदि प्रदर्शन मजबूत रहता है।
🔎 निवेशकों के लिए क्या मायने?
Klassroom का IPO उन निवेशकों के लिए दिलचस्प हो सकता है जो:
- SME सेक्टर में अवसर तलाश रहे हैं
- प्रॉफिटेबल edtech कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं
- AI-आधारित शिक्षा मॉडल पर भरोसा रखते हैं
हालांकि, SME IPO में निवेश करते समय लिक्विडिटी और रिस्क फैक्टर को ध्यान में रखना जरूरी होता है।
📌 निष्कर्ष
Klassroom का DRHP दाखिल करना भारतीय edtech सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। कंपनी ने सीमित पैमाने पर लेकिन स्थिर और प्रॉफिटेबल ग्रोथ दिखाई है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि IPO को निवेशकों से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है और पब्लिक मार्केट में लिस्टिंग के बाद कंपनी अपने ग्रोथ ट्रैक को किस तरह आगे बढ़ाती है।
Edtech में एक नई पब्लिक कंपनी की एंट्री से सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
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