भारत के हेल्थटेक और बायोटेक सेक्टर से एक अहम फंडिंग अपडेट सामने आया है। ड्रग डिस्कवरी पर काम करने वाली बेंगलुरु आधारित कंपनी Peptris ने Series A फंडिंग राउंड में ₹70 करोड़ (करीब $7.7 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व IAN Alpha Fund और Speciale Invest ने संयुक्त रूप से किया। इसके अलावा Tenacity Ventures, BYT Ventures और अन्य निवेशकों ने भी भागीदारी की।
यह निवेश ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में दवाओं की खोज की प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
🚀 फंड का उपयोग कहां होगा?
Peptris के अनुसार, इस ताजा पूंजी का उपयोग अगले 24 महीनों में कंपनी के मौजूदा प्रोग्राम्स को क्लिनिकल रेडीनेस की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा। साथ ही, कंपनी अपनी पाइपलाइन का विस्तार करेगी और बायोलॉजी, केमिस्ट्री, डेटा साइंस और AI टीमों को मजबूत करेगी।
ड्रग डेवलपमेंट एक लंबी और महंगी प्रक्रिया है। ऐसे में AI आधारित मॉडल्स का उपयोग करके समय और लागत दोनों कम करना कंपनी का मुख्य लक्ष्य है।
🧠 2019 में हुई थी शुरुआत
Peptris की स्थापना 2019 में नारायणन वेंकटसुब्रमणियन, श्रीधर नारायणन, आनंद बुडनी और अमित महाजन ने की थी। कंपनी ने ऐसे AI मॉडल विकसित किए हैं जो नई और अनोखी अणुओं (molecules) को डिजाइन करने के साथ-साथ ड्रग डेवलपमेंट से जुड़े महत्वपूर्ण पैरामीटर्स की भविष्यवाणी भी कर सकते हैं।
इस तकनीक की मदद से कंपनी Novel Chemical Entities (NCEs) की खोज करने में सफल रही है। इसके अलावा, Peptris दवाओं के पुनः उपयोग (drug repurposing) और पहले से रुके हुए प्रोग्राम्स को दोबारा शुरू करने (drug rescue) के अवसर भी तलाशती है।
⚠ ड्रग डिस्कवरी की बड़ी चुनौती
वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद, ड्रग डिस्कवरी आज भी धीमी, महंगी और जोखिम भरी प्रक्रिया मानी जाती है। खासकर प्री-क्लिनिकल स्टेज में कई संभावित दवाएं समय, पूंजी और वैज्ञानिक अनिश्चितताओं के कारण आगे नहीं बढ़ पातीं।
Peptris का मानना है कि AI के जरिए इस शुरुआती चरण में ही संभावित जोखिमों की पहचान कर ली जाए तो फेलियर रेट को कम किया जा सकता है। इससे फार्मा कंपनियों को बेहतर और तेज निर्णय लेने में मदद मिलती है।
🔬 AI से मिल रही बढ़त
Peptris का प्लेटफॉर्म सिर्फ नए molecules तैयार नहीं करता, बल्कि यह यह भी अनुमान लगाता है कि कोई दवा शरीर में कैसे काम करेगी, उसके संभावित साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं और उसकी सफलता की संभावना कितनी है।
इस डेटा-ड्रिवन अप्रोच से कंपनी को कई NCE प्रोग्राम्स को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। कुछ प्रोग्राम अब क्लिनिकल डेवलपमेंट की दिशा में बढ़ रहे हैं।
📈 अगले 24 महीनों की योजना
कंपनी आने वाले दो वर्षों में:
- कई नए NCE प्रोग्राम्स शुरू करेगी
- Drug repurposing और rescue प्रोग्राम्स पर काम करेगी
- अन्य कंपनियों द्वारा छोड़ी गई क्लिनिकल स्टेज दवाओं को फिर से विकसित करेगी
यह रणनीति न केवल समय बचाती है बल्कि पहले से किए गए रिसर्च और निवेश का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करती है।
🤝 B2B मॉडल पर काम
Peptris का बिज़नेस मॉडल B2B है। यानी कंपनी सीधे उपभोक्ताओं को दवा नहीं बेचती, बल्कि फार्मा, बायोटेक और चुनिंदा FMCG कंपनियों के साथ मिलकर काम करती है। यह लाइसेंसिंग और को-डेवलपमेंट मॉडल के तहत अपने एसेट्स और तकनीक उपलब्ध कराती है।
इससे कंपनी को राजस्व के साथ-साथ रिसर्च सहयोग भी मिलता है।
🏥 किन क्षेत्रों पर फोकस?
Peptris का फोकस उन चिकित्सीय क्षेत्रों पर है जहां आज भी बड़ी unmet medical needs मौजूद हैं। इनमें शामिल हैं:
- Rare diseases
- Inflammation
- Oncology (कैंसर)
- Women’s health
इन क्षेत्रों में नई और प्रभावी दवाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
🌍 हेल्थकेयर सेक्टर के लिए क्या मायने?
AI आधारित ड्रग डिस्कवरी मॉडल हेल्थकेयर इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। पारंपरिक ड्रग डेवलपमेंट में जहां 10–15 साल और अरबों डॉलर खर्च हो जाते हैं, वहीं AI इस प्रक्रिया को काफी हद तक तेज और सस्ता बना सकता है।
Peptris का यह निवेश दर्शाता है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब ग्लोबल हेल्थकेयर चुनौतियों को हल करने की दिशा में भी मजबूत कदम उठा रहे हैं।
🏁 निष्कर्ष
₹70 करोड़ की Series A फंडिंग के साथ Peptris अब अपने AI-आधारित ड्रग डिस्कवरी प्लेटफॉर्म को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। क्लिनिकल रेडीनेस की दिशा में बढ़ते प्रोग्राम्स और नई पाइपलाइन इस बात का संकेत हैं कि कंपनी दीर्घकालिक प्रभाव डालने की योजना बना रही है।
ड्रग डेवलपमेंट की जटिल दुनिया में जहां असफलता की दर बहुत अधिक है, वहां AI और डेटा साइंस आधारित अप्रोच नई उम्मीद जगा रही है। आने वाले वर्षों में Peptris का प्रदर्शन इस बात को तय करेगा कि भारत से उभर रही यह तकनीक वैश्विक हेल्थकेयर पर कितना प्रभाव डाल पाती है।
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