🎓 Unacademy का 50 करोड़ रुपये का ESOP बायबैक,

Unacademy

एडटेक कंपनी Unacademy ने अपने कर्मचारियों के लिए 50 करोड़ रुपये का ESOP (Employee Stock Ownership Plan) बायबैक प्रोग्राम शुरू किया है। कंपनी के सह-संस्थापक Gaurav Munjal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी घोषणा की।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एडटेक सेक्टर पोस्ट-पैंडेमिक दौर में चुनौतियों का सामना कर रहा है और कई स्टार्टअप्स अपने बिजनेस मॉडल को पुनर्गठित (strategic reset) कर रहे हैं।


💰 कर्मचारियों को कितना फायदा?

गौरव मुंजाल के अनुसार, इस बायबैक प्रोग्राम के जरिए:

  • 8 कर्मचारियों को 1 करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे।
  • 17 कर्मचारियों को 50 लाख रुपये से ज्यादा प्राप्त होंगे।
  • 38 कर्मचारियों को 10 लाख रुपये से अधिक की राशि मिलने की संभावना है।

यह कार्यक्रम कर्मचारियों को उनके वेस्टेड ESOPs के बदले नकद (cash liquidity) प्रदान करेगा।

मुंजाल ने कहा कि कंपनी के बोर्ड ने कर्मचारियों के लिए एक कैश पूल तैयार किया है, भले ही वर्तमान वैल्यूएशन कंपनी के पिछले फंडरेज़ की तुलना में काफी कम है।


📉 कम वैल्यूएशन के बावजूद बायबैक

Unacademy का मौजूदा वैल्यूएशन उसके पिछले फंडिंग राउंड्स से कम बताया जा रहा है।

फिर भी कंपनी ने कर्मचारियों को लिक्विडिटी देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम में ESOP बायबैक एक महत्वपूर्ण टूल माना जाता है, क्योंकि यह कर्मचारियों को उनके योगदान का वास्तविक आर्थिक लाभ देता है, खासकर तब जब IPO या बड़े अधिग्रहण की संभावना निकट न हो।


🕒 पूर्व कर्मचारियों के लिए 30 दिन की विंडो

हाल ही में गौरव मुंजाल ने ESOP एक्सरसाइज टर्म्स और वैल्यूएशन पर कंपनी का रुख स्पष्ट किया था।

Unacademy ने पूर्व कर्मचारियों के लिए एक बार का 30 दिन का विंडो पीरियड दिया, जिसमें वे अपने वेस्टेड स्टॉक ऑप्शंस एक्सरसाइज कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि:

  • मौजूदा वैल्यूएशन पिछले फंडिंग राउंड्स से कम है।
  • प्रेफरेंस शेयरहोल्डर्स को इक्विटी होल्डर्स पर प्राथमिकता प्राप्त है।

इसका मतलब यह है कि किसी लिक्विडेशन इवेंट या एग्जिट की स्थिति में पहले प्रेफरेंस निवेशकों को भुगतान किया जाएगा।


🔄 एडटेक सेक्टर में रणनीतिक बदलाव

कोविड-19 महामारी के दौरान एडटेक कंपनियों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई थी। ऑनलाइन लर्निंग की मांग में भारी उछाल आया, जिससे Unacademy जैसी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर फंडिंग जुटाई और विस्तार किया।

लेकिन महामारी के बाद स्थिति बदल गई। ऑफलाइन शिक्षा की वापसी, बढ़ती लागत और घटती मांग ने कई एडटेक कंपनियों को अपने मॉडल की समीक्षा करने पर मजबूर किया।

Unacademy भी इस दौर से गुजर रही है और कंपनी ने हाल ही में अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव की घोषणा की है।


🏫 ऑफलाइन सेंटर्स से फ्रेंचाइजी मॉडल की ओर

कंपनी ने अपने स्वयं संचालित (company-run) ऑफलाइन लर्निंग सेंटर्स को फ्रेंचाइजी-आधारित मॉडल में बदलने की योजना बनाई है।

इसका उद्देश्य है:

  • लागत में कमी लाना
  • यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार
  • ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाना

फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए कंपनी पूंजीगत खर्च (capex) कम कर सकती है और जोखिम को साझेदारों के साथ साझा कर सकती है।


🤝 अधिग्रहण वार्ता और विफल सौदा

Unacademy ने हाल के महीनों में कंसोलिडेशन (consolidation) के अवसर भी तलाशे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की upGrad के साथ संभावित अधिग्रहण को लेकर बातचीत चल रही थी।

हालांकि, दोनों पक्ष वैल्यूएशन पर सहमत नहीं हो सके और यह वार्ता अंततः समाप्त हो गई।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में एडटेक कंपनियों के लिए सही वैल्यूएशन पर सौदा करना चुनौतीपूर्ण है।


📊 ESOP बायबैक का व्यापक महत्व

ESOP बायबैक केवल वित्तीय लेनदेन नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के मनोबल और भरोसे को मजबूत करने का एक तरीका भी है।

स्टार्टअप्स में कर्मचारी अक्सर कम वेतन के बदले ESOPs स्वीकार करते हैं, इस उम्मीद में कि भविष्य में कंपनी की वैल्यू बढ़ने पर उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा।

ऐसे में बायबैक प्रोग्राम कर्मचारियों को उनके योगदान का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ देता है और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को बढ़ाता है।


🔮 आगे की राह

Unacademy का 50 करोड़ रुपये का ESOP बायबैक प्रोग्राम ऐसे समय में आया है जब कंपनी रणनीतिक पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है।

कम वैल्यूएशन और बाजार की चुनौतियों के बावजूद, कर्मचारियों को लिक्विडिटी देना एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

हालांकि, कंपनी के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं—जैसे लाभप्रदता में सुधार, बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना और प्रतिस्पर्धा से निपटना।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Unacademy अपने नए फ्रेंचाइजी मॉडल और लागत नियंत्रण रणनीति के जरिए स्थिरता और विकास की नई राह बना पाती है या नहीं।

फिलहाल, ESOP बायबैक ने कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय अवसर जरूर प्रदान किया है। 🎓💼

Read more:🚗 FY25 में Cars24 India की रफ्तार धीमी,

🚗 FY25 में Cars24 India की रफ्तार धीमी,

Cars24

यूज्ड कार मार्केटप्लेस Cars24 India के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) चुनौतीपूर्ण रहा। FY24 में 25% साल-दर-साल वृद्धि दर्ज करने के बाद कंपनी की ऑपरेटिंग स्केल FY25 में 10% घट गई। इसी दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा भी 9% बढ़कर ₹543 करोड़ तक पहुंच गया।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल समेकित वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY25 में कंपनी का ग्रॉस रेवेन्यू ₹6,910 करोड़ से घटकर ₹6,233 करोड़ रह गया।


📉 कार बिक्री से आय में गिरावट

Cars24 की कुल आय का लगभग 92% हिस्सा कारों की बिक्री—ऑक्शन बिजनेस और रिटेल—से आता है।

FY25 में यह आय 11% घटकर ₹5,733 करोड़ रह गई, जो FY24 में ₹6,432 करोड़ थी।

यह गिरावट बताती है कि सेकेंड-हैंड कार बाजार में मांग और सप्लाई के बीच संतुलन, कीमतों में उतार-चढ़ाव और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव का असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ा।


💳 Loans24 से ब्याज आय

कंपनी की फाइनेंशियल सर्विसेज वर्टिकल Loans24 के जरिए भी आय होती है। यह यूनिट थर्ड-पार्टी लोन की सुविधा देती है।

FY25 में ब्याज से होने वाली आय लगभग ₹215 करोड़ रही।

इसके अलावा, कंपनी सर्विस फीस, पार्किंग फीस, इंश्योरेंस असिस्टेंस और वारंटी जैसी सेवाओं से भी आय अर्जित करती है।


💰 नॉन-ऑपरेटिंग आय का सहारा

गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में ₹125 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग आय भी दर्ज की।

यह आय बैंक डिपॉजिट्स, कमर्शियल पेपर्स, डिबेंचर्स और अन्य स्रोतों से ब्याज के रूप में आई।

इसे जोड़ने पर FY25 में Cars24 India की कुल आय ₹6,358 करोड़ तक पहुंच गई।


🌏 सिंगापुर होल्डिंग और ग्लोबल उपस्थिति

Cars24 की होल्डिंग कंपनी सिंगापुर में पंजीकृत है और भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और थाईलैंड में 12 सहायक कंपनियों को नियंत्रित करती है।

ध्यान देने योग्य है कि सिंगापुर स्थित होल्डिंग इकाई के वित्तीय आंकड़े भारतीय इकाई द्वारा RoC में दाखिल आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।


📊 खर्चों का विश्लेषण

Cars24 के लिए कारों की खरीद (procurement) सबसे बड़ा खर्च केंद्र बना रहा।

  • यह कुल खर्च का 81% था।
  • FY25 में यह खर्च 9% घटकर ₹5,555 करोड़ रहा, जो FY24 में अधिक था।

हालांकि, कुछ अन्य खर्चों में बढ़ोतरी हुई:

  • कर्मचारी लाभ खर्च 15% बढ़कर ₹604 करोड़ हो गया।
  • इसमें ₹36.5 करोड़ ESOP (Employee Stock Ownership Plan) लागत शामिल थी।
  • मार्केटिंग और विज्ञापन खर्च 25% घटकर ₹106 करोड़ रह गया।

टेक्नोलॉजी, लीगल फीस, ब्रोकर कमीशन, वित्तीय परिसंपत्तियों पर इम्पेयरमेंट लॉस और अन्य ओवरहेड्स मिलाकर कंपनी का कुल खर्च ₹6,898 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹7,488 करोड़ से कम है।


📉 घाटा और मार्जिन पर दबाव

ऑपरेशन में 10% की गिरावट का सीधा असर कंपनी के घाटे पर पड़ा।

FY25 में शुद्ध घाटा 9% बढ़कर ₹543 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹498 करोड़ था।

  • ROCE (Return on Capital Employed) -21.13% रहा।
  • EBITDA मार्जिन -6.77% तक बिगड़ गया।

यूनिट इकॉनॉमिक्स के स्तर पर कंपनी ने FY25 में ₹1 कमाने के लिए ₹1.11 खर्च किए—यानि प्रति रुपये पर 11 पैसे का घाटा।


🏦 बैलेंस शीट की स्थिति

मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹1,988 करोड़ के करंट एसेट्स थे।

  • इसमें ₹155 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल थे।

यह दर्शाता है कि कंपनी के पास परिचालन जारी रखने के लिए पर्याप्त तरलता है, लेकिन लाभप्रदता की दिशा में सुधार जरूरी है।


🚀 FY26 में सुधार के संकेत?

SoftBank समर्थित इस कंपनी ने दावा किया है कि FY26 की पहली छमाही में उसका एडजस्टेड नेट रेवेन्यू 18% बढ़कर ₹651 करोड़ हो गया।

साथ ही एडजस्टेड EBITDA घाटा 36% घटकर ₹162 करोड़ रह गया।

यह संकेत देता है कि कंपनी लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल दक्षता पर काम कर रही है।


🔄 हालिया अधिग्रहण

Cars24 ने हाल ही में वाहन सूचना और मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म CarInfo का अधिग्रहण किया।

इससे पहले कंपनी ऑटोमोटिव कम्युनिटी प्लेटफॉर्म Team-BHP का भी अधिग्रहण कर चुकी है।

इन अधिग्रहणों के जरिए कंपनी अपने इकोसिस्टम को मजबूत करने और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने की कोशिश कर रही है।


💵 फंडिंग और निवेशक

Cars24 ने पिछले तीन वर्षों में कोई बाहरी फंडिंग नहीं जुटाई है।

दिसंबर 2021 में कंपनी ने $450 मिलियन जुटाए थे, उस समय उसका वैल्यूएशन $3.3 बिलियन था।

इसके प्रमुख निवेशकों में SoftBank, Alpha Wave, Tencent और DST Global शामिल हैं।


🔍 आगे की राह

यूज्ड कार बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है और उपभोक्ता अब बेहतर कीमत, पारदर्शिता और आसान फाइनेंस विकल्प चाहते हैं।

Cars24 के लिए FY25 चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन FY26 की शुरुआती झलक कुछ सुधार के संकेत देती है।

कंपनी को लाभप्रदता हासिल करने के लिए लागत प्रबंधन, टेक्नोलॉजी इनोवेशन और फाइनेंशियल सर्विसेज विस्तार पर फोकस करना होगा।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Cars24 अपनी ग्रोथ की रफ्तार फिर से पकड़ पाता है और घाटे को कम कर पाता है या नहीं। 🚗📊

Read more :🏢 Table Space की IPO की तैयारी,

🏢 Table Space की IPO की तैयारी,

Table Space

भारत के तेजी से बढ़ते फ्लेक्सी-वर्कस्पेस बाजार में एक और बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। मैनेज्ड वर्कस्पेस स्टार्टअप Table Space ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी शुरू कर दी है।

सूत्रों और नियामकीय फाइलिंग्स के अनुसार, कंपनी का IPO लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक के फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और साथ में ऑफर फॉर सेल (OFS) घटक का मिश्रण हो सकता है।


💰 प्री-IPO में 200 करोड़ रुपये जुटाए

पब्लिक इश्यू से पहले कंपनी ने 200 करोड़ रुपये का प्री-IPO फंडरेज़ निजी प्लेसमेंट (Private Placement) के जरिए सफलतापूर्वक पूरा किया है।

यह प्रस्ताव पिछले महीने आयोजित एक असाधारण आम बैठक (EGM) में मंजूर किया गया था।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, यह प्री-IPO राउंड प्रस्तावित फ्रेश इश्यू साइज का लगभग 20% है। इससे संकेत मिलता है कि IPO में फ्रेश इश्यू का आकार करीब 1,000 करोड़ रुपये हो सकता है।


🚀 2017 में हुई थी शुरुआत

Table Space की स्थापना 2017 में Amit Banerji ने की थी।

कंपनी कॉरपोरेट क्लाइंट्स के लिए कस्टमाइज्ड को-वर्किंग और मैनेज्ड ऑफिस स्पेस उपलब्ध कराती है।

स्टार्टअप का दावा है कि उसके पास 1 करोड़ वर्ग फुट (10 मिलियन स्क्वायर फीट) से अधिक क्षमता है और वह 7 शहरों—जिनमें बेंगलुरु प्रमुख है—में 290 से अधिक यूनिक क्लाइंट्स को सेवा दे रहा है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन में जोरदार उछाल

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में Table Space ने राजस्व के मामले में बड़ी छलांग लगाई।

  • कंपनी का रेवेन्यू 50% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹906 करोड़ से बढ़कर ₹1,360 करोड़ हो गया।
  • इस दौरान कंपनी ने ₹1,000 करोड़ के राजस्व का आंकड़ा पार कर लिया।

यदि एक्सेप्शनल आइटम (असाधारण मद) को अलग कर दिया जाए, तो कंपनी का शुद्ध लाभ लगभग तीन गुना बढ़कर ₹14.6 करोड़ तक पहुंच गया।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि फ्लेक्सी-वर्कस्पेस की बढ़ती मांग का कंपनी को अच्छा लाभ मिल रहा है।


⚠️ एक्सेप्शनल आइटम का क्या मतलब?

हालांकि, कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट में ₹1,568 करोड़ का एक “एक्सेप्शनल आइटम” भी दर्ज है।

यह राशि उसके CCPS-A इंस्ट्रूमेंट्स (Compulsorily Convertible Preference Shares) की फेयर वैल्यूएशन में हुए नॉन-कैश लॉस से संबंधित है।

इन प्रेफरेंस शेयरों की संरचना ऐसी है कि ये केवल लिक्विडेशन इवेंट—जैसे IPO—से ठीक पहले या निवेशकों की सहमति से पहले इक्विटी में परिवर्तित होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक अकाउंटिंग एडजस्टमेंट है और कंपनी के परिचालन प्रदर्शन को सीधे प्रभावित नहीं करता।


🏙️ तेजी से बदलता फ्लेक्सी-वर्कस्पेस बाजार

भारत में हाइब्रिड वर्क मॉडल और स्टार्टअप संस्कृति के बढ़ने से फ्लेक्सी-वर्कस्पेस की मांग तेजी से बढ़ी है।

कंपनियां लंबी अवधि के लीज़ एग्रीमेंट के बजाय फ्लेक्सिबल और कस्टमाइज्ड ऑफिस सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दे रही हैं।

इस बाजार में पहले से कई लिस्टेड कंपनियां मौजूद हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • WeWork India Management
  • Smartworks Coworking Spaces
  • IndiQube Spaces
  • Awfis Space Solutions

इनमें से WeWork India को राजस्व और स्केल के आधार पर सेक्टर का प्रमुख खिलाड़ी माना जाता है और हाल के IPO ट्रेंड में इसकी अहम भूमिका रही है।


📊 निवेशकों के लिए क्या मायने?

Table Space का IPO ऐसे समय आ रहा है जब भारतीय शेयर बाजार में रियल एस्टेट और ऑफिस स्पेस से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

कंपनी का मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और लाभ में सुधार संभावित निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

हालांकि, प्रतिस्पर्धा और बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को कंपनी के मार्जिन, कैश फ्लो और विस्तार रणनीति का बारीकी से विश्लेषण करना होगा।


🔮 आगे की राह

Table Space का IPO न केवल कंपनी के लिए पूंजी जुटाने का अवसर होगा, बल्कि यह उसके ब्रांड वैल्यू और बाजार स्थिति को भी मजबूत करेगा।

फ्रेश इश्यू से जुटाई गई राशि का उपयोग संभवतः नए शहरों में विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और कर्ज चुकाने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

फ्लेक्सी-वर्कस्पेस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार का आकार भी तेजी से विस्तार कर रहा है।

यदि कंपनी अपनी 50% वार्षिक वृद्धि दर को बरकरार रख पाती है और लाभप्रदता में सुधार जारी रखती है, तो यह IPO भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण इवेंट साबित हो सकता है।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि Table Space का पब्लिक इश्यू निवेशकों के बीच कितनी मांग पैदा करता है और क्या यह फ्लेक्स-वर्कस्पेस सेक्टर में एक नई दिशा तय कर पाता है। 🚀

Read more :💼 Info Edge ने लॉन्च किया 250 करोड़ रुपये

💼 Info Edge ने लॉन्च किया 250 करोड़ रुपये

Info Edge

भारत की प्रमुख इंटरनेट कंपनी Info Edge ने स्टार्टअप निवेश के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 250 करोड़ रुपये की पूंजी प्रतिबद्धता (capital commitment) के साथ एक नया ग्रोथ-स्टेज इन्वेस्टमेंट फंड लॉन्च किया है। यह कंपनी का पहला समर्पित (dedicated) फंड होगा, जो खास तौर पर लेटर-स्टेज यानी ग्रोथ-फेज कंपनियों में निवेश करेगा।

इस नए निवेश वाहन का नाम B8 Fund-I रखा गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि यह फंड बाहरी निवेशकों (external sponsors) से भी पूंजी जुटा सकता है, जिससे इसका कुल कॉर्पस शुरुआती 250 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।


📊 अब तक चार अर्ली-स्टेज प्लेटफॉर्म

Info Edge पहले से ही चार अर्ली-स्टेज निवेश प्लेटफॉर्म संचालित कर रही है। इनमें प्रमुख हैं:

  • Info Edge Ventures – जिसने तीन फंड्स के जरिए कुल 2,300 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
  • Capital 2B – जिसका कॉर्पस 280 करोड़ रुपये है।
  • Redstart Labs – जो AI-आधारित स्टार्टअप्स पर केंद्रित है।
  • बैलेंस शीट के जरिए डायरेक्ट निवेश।

इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कंपनी ने शुरुआती चरण में कई सफल स्टार्टअप्स का समर्थन किया है।


🚀 किन स्टार्टअप्स में किया निवेश?

Info Edge ने अपने वेंचर प्लेटफॉर्म्स के जरिए कई उभरती कंपनियों में निवेश किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • Gnani AI
  • Ixigo
  • Shiprocket
  • Zingbus
  • Truemeds

इसके अलावा, कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट के माध्यम से शुरुआती वर्षों में Zomato और Policybazaar जैसी दिग्गज कंपनियों में निवेश किया था, जो बाद में सफल IPO तक पहुंचीं।


🏢 अब ग्रोथ-स्टेज पर फोकस

नया 250 करोड़ रुपये का फंड मुख्य रूप से भारत में टेक-इनेबल्ड (tech-enabled) ग्रोथ-स्टेज कंपनियों में निवेश करेगा। कंपनी ने नियामक फाइलिंग में कहा है कि यह फंड उन कंपनियों को समर्थन देगा, जो भारत में संचालित हैं या जिनका मुख्य फोकस भारतीय बाजार है।

यह फंड भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ कैटेगरी II वैकल्पिक निवेश फंड (Alternative Investment Fund) के रूप में पंजीकृत है।

इस फंड की अवधि (tenure) पहले क्लोजिंग से आठ वर्ष होगी।


📈 संस्थागत निवेश की दिशा में रणनीति

पिछले वर्ष मई में Info Edge ने घोषणा की थी कि उसके शेयरधारकों ने कंपनी की निवेश रणनीति को संस्थागत स्वरूप देने के लिए Info Edge Ventures के तीसरे फंड में 1,000 करोड़ रुपये तक निवेश की योजना को मंजूरी दी है।

Info Edge Ventures के फंड्स का प्रबंधन 50:50 साझेदारी में सिंगापुर के संप्रभु संपत्ति कोष Temasek के साथ किया जाता है।

यह साझेदारी Info Edge को न केवल वित्तीय मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक निवेश अनुभव और नेटवर्क का भी लाभ प्रदान करती है।


💰 वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत

दिसंबर 31 को समाप्त तिमाही में Info Edge का प्रदर्शन भी मजबूत रहा।

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू बढ़कर 819 करोड़ रुपये हो गया।
  • शुद्ध लाभ (Net Profit) साल-दर-साल 10% बढ़कर 317 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 288 करोड़ रुपये था।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी का कोर बिजनेस भी स्थिर और लाभदायक बना हुआ है, जिससे उसे नए निवेश फंड लॉन्च करने का आत्मविश्वास मिलता है।


🔍 क्यों अहम है B8 Fund-I?

भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम अब परिपक्व हो रहा है। शुरुआती चरण के निवेश के बाद कंपनियों को स्केल-अप के लिए बड़े और धैर्यपूर्ण पूंजी की जरूरत होती है।

B8 Fund-I के जरिए Info Edge इस गैप को भरने की कोशिश कर रही है।

ग्रोथ-स्टेज निवेश का मतलब है कि कंपनी उन स्टार्टअप्स में निवेश करेगी जो पहले ही अपने बिजनेस मॉडल को साबित कर चुके हैं और अब विस्तार के चरण में हैं।

इससे जोखिम अपेक्षाकृत कम और रिटर्न की संभावना अधिक संतुलित रहती है।


🌱 स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर

Info Edge पहले ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है।

Zomato और Policybazaar जैसी कंपनियों में शुरुआती निवेश ने यह साबित किया है कि कंपनी लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ निवेश करती है।

अब ग्रोथ-स्टेज फंड के जरिए वह उन कंपनियों का समर्थन करेगी, जो अगले कुछ वर्षों में IPO या बड़े अधिग्रहण की दिशा में बढ़ सकती हैं।


🔮 आगे की राह

250 करोड़ रुपये का यह नया फंड Info Edge की निवेश रणनीति में एक महत्वपूर्ण विस्तार है।

अगर बाहरी निवेशकों से अतिरिक्त पूंजी जुटाई जाती है, तो इसका आकार और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।

भारत में टेक-इनेबल्ड कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और ग्रोथ-स्टेज निवेश की मांग भी बढ़ रही है।

ऐसे में B8 Fund-I Info Edge को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक और मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित कर सकता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी किन ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स को समर्थन देती है और क्या वह अपनी पिछली निवेश सफलताओं को दोहरा पाती है। 🚀

Read more :🌸 Ferns N Petals (FNP) की FY25 में 22% ग्रोथ,

🌸 Ferns N Petals (FNP) की FY25 में 22% ग्रोथ,

Ferns N Petals

भारत की प्रमुख गिफ्टिंग और फ्लोरल रिटेल कंपनी Ferns N Petals (FNP) ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी ने जहां अपने रेवेन्यू में 22% की बढ़ोतरी की, वहीं घाटे को भी कम करने में सफलता हासिल की। हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के दबाव के बीच मुनाफे की राह अभी भी आसान नहीं दिखती।


📈 22% बढ़ा ऑपरेटिंग रेवेन्यू

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FNP का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में बढ़कर ₹861.5 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹705 करोड़ था।

कंपनी की आय में यह बढ़ोतरी उसके ओमनी-चैनल मॉडल की मजबूती को दर्शाती है। FNP अपनी वेबसाइट, थर्ड-पार्टी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, कंपनी-स्वामित्व वाले स्टोर्स और फ्रेंचाइजी नेटवर्क के माध्यम से केक, फूल और कस्टमाइज्ड गिफ्टिंग सॉल्यूशंस बेचती है।


🎂🌹 प्रोडक्ट सेल्स से आता है 91% रेवेन्यू

FNP की कमाई का मुख्य स्रोत केक, फूल और गिफ्ट प्रोडक्ट्स की बिक्री है।

  • इन प्रोडक्ट्स से FY25 में ₹781 करोड़ की आय हुई, जो पिछले वर्ष ₹641 करोड़ थी।
  • कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू में इनकी हिस्सेदारी 91% रही।

इसके अलावा कंपनी डिलीवरी चार्ज, कंवीनियंस फीस, पैकेजिंग चार्ज और फ्रेंचाइजी से होने वाली आय (ऑनबोर्डिंग फीस और मासिक रॉयल्टी) से भी कमाई करती है।

सर्विसेज से होने वाली आय 25% बढ़कर ₹80 करोड़ हो गई।

अगर ₹7.5 करोड़ की अन्य आय जोड़ दी जाए, तो कंपनी की कुल आय FY25 में ₹869 करोड़ तक पहुंच गई, जो FY24 में ₹712 करोड़ थी।


💸 खर्चों में भी हुई बढ़ोतरी

राजस्व बढ़ने के साथ-साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि दर्ज की गई।

  • मटेरियल कॉस्ट कुल खर्च का 43% रही और 21.5% बढ़कर ₹379 करोड़ हो गई (FY24 में ₹312 करोड़)।
  • विज्ञापन खर्च 17% बढ़कर ₹184 करोड़ पहुंच गया।
  • कर्मचारी लाभ खर्च 18% बढ़कर ₹146 करोड़ हो गया।
  • किराया खर्च ₹15 करोड़ रहा।
  • डिप्रिसिएशन बढ़कर ₹16 करोड़ हो गया।

कुल मिलाकर FNP का कुल खर्च FY25 में 21% बढ़कर ₹890 करोड़ हो गया।


📉 घाटे में 8.3% की कमी

सकारात्मक पक्ष यह रहा कि कंपनी ने अपने घाटे को कम किया।

FY25 में FNP का घाटा 8.3% घटकर ₹22 करोड़ रह गया।

हालांकि, EBITDA मार्जिन -1.25% और ROCE -29.13% रहा, जो यह दर्शाता है कि कंपनी अभी भी मुनाफे के मोर्चे पर संघर्ष कर रही है।

यूनिट इकॉनॉमिक्स के स्तर पर देखें तो कंपनी ने एक रुपये कमाने के लिए ₹1.03 खर्च किए — यानी अभी भी प्रति रुपये पर हल्का घाटा हो रहा है।


💰 बैलेंस शीट की स्थिति

FY25 के अंत में कंपनी के पास ₹74 करोड़ का कैश और बैंक बैलेंस था।

  • करंट एसेट्स ₹138 करोड़
  • कुल एसेट्स ₹225 करोड़

यह संकेत देता है कि कंपनी के पास परिचालन जारी रखने और ग्रोथ योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।


💵 अब तक $27 मिलियन की फंडिंग

FNP अब तक लगभग $27 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में Lighthouse शामिल है।

कंपनी केवल गिफ्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि हॉस्पिटैलिटी और वेडिंग सेगमेंट में भी सक्रिय है। यह Udman Hotels और FNP Weddings and Events के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार कर चुकी है।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा

गिफ्टिंग और फ्लोरल सेगमेंट में FNP को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

इसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में IGP, FlowerAura, Winni और Archies शामिल हैं।

इसके अलावा, क्विक-कॉमर्स और इंस्टेंट डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी तेजी से गिफ्टिंग और केक-फूल डिलीवरी स्पेस में एंट्री कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और तीव्र हो रही है।


🔎 क्या मुनाफे की राह आसान है?

हालांकि FNP का घाटा कंपनी के आकार के हिसाब से बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कंपनी भविष्य में अपनी लाभप्रदता में बड़ा सुधार कर पाएगी?

फिलहाल कंपनी “इन्क्रिमेंटल गेंस” यानी छोटे-छोटे सुधारों के जरिए आगे बढ़ रही है।

लेकिन क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता दबाव और ग्राहकों की बदलती अपेक्षाएं इसे चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

अगर कंपनी को अपने मार्जिन बेहतर करने हैं, तो उसे सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन और हाई-मार्जिन कैटेगरी में विस्तार पर ध्यान देना होगा।


🚀 निष्कर्ष

FY25 में 22% की ग्रोथ और घाटे में कमी FNP के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

कंपनी ने अपने ब्रांड, नेटवर्क और ओमनी-चैनल मॉडल के दम पर मजबूत पकड़ बनाई है।

लेकिन मुनाफे की दिशा में निर्णायक कदम उठाने के लिए उसे लागत नियंत्रण और प्रतिस्पर्धी रणनीति पर और अधिक फोकस करना होगा।

आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या FNP तेजी से बदलते गिफ्टिंग बाजार में अपनी बढ़त बनाए रख पाती है या नहीं।

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🤖 AI-ड्रिवन B2B मार्केटिंग स्टार्टअप Gushwork ने जुटाए $9 मिलियन,

Gushwork

भारत का AI और B2B मार्केटिंग इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। इसी कड़ी में बेंगलुरु स्थित AI-ड्रिवन स्टार्टअप Gushwork ने $9 मिलियन (करीब ₹75 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Susquehanna Asia VC ने किया, जबकि Lightspeed, B Capital, Seaborne Capital, Beenext, Sparrow Capital और 2.2 Capital ने भी भागीदारी की।

यह निवेश ऐसे समय आया है जब कंपनियां AI-आधारित मार्केटिंग टूल्स के जरिए ज्यादा सटीक और रिजल्ट-ओरिएंटेड लीड जनरेशन की तलाश कर रही हैं।


📈 पहले भी मिल चुका है निवेश

Gushwork इससे पहले जुलाई 2023 में $2.1 मिलियन की प्री-सीड फंडिंग जुटा चुका है, जिसका नेतृत्व Lightspeed ने किया था। उस राउंड में भी B Capital, Sparrow Capital, Seaborne Capital और Beenext शामिल थे।

लगातार निवेशकों का भरोसा यह संकेत देता है कि स्टार्टअप के मॉडल में स्केलेबिलिटी और मजबूत ग्रोथ की संभावनाएं हैं।


💡 फंड का इस्तेमाल कैसे होगा?

कंपनी के अनुसार, नई पूंजी का उपयोग इन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • प्रोडक्ट डेवलपमेंट को तेज करना
  • AI एजेंट्स की एक्युरेसी (accuracy) बढ़ाना
  • इंजीनियरिंग टीम का विस्तार
  • Go-to-Market (GTM) ऑपरेशंस को स्केल करना

Gushwork का लक्ष्य अपने AI प्लेटफॉर्म को इतना सक्षम बनाना है कि वह B2B कंपनियों को ऑर्गेनिक सर्च और AI प्लेटफॉर्म्स से सीधे क्वालिफाइड लीड्स दिला सके।


🚀 क्या करता है Gushwork?

2023 में Nayrhit Bhattacharya और Adithya Venkatesh द्वारा स्थापित Gushwork एक AI-ड्रिवन B2B मार्केटिंग प्लेटफॉर्म है।

यह मुख्य रूप से छोटे और मझोले व्यवसायों (SMBs) और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को AI-assisted SEO के जरिए नए ग्राहक हासिल करने में मदद करता है।

कंपनी Generative AI और human expertise का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब संभावित ग्राहक ChatGPT, Gemini या Google जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सवाल पूछें, तो संबंधित बिजनेस वेबसाइट्स रिकमेंड हों।


🌍 ग्लोबल ग्राहक आधार

कंपनी का दावा है कि 300 से अधिक बिजनेस ग्लोबली उसके प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, जबकि 800 से अधिक कंपनियां वेटलिस्ट पर हैं।

Gushwork के AI एजेंट्स कंटेंट और SEO स्ट्रेटेजी को इस तरह ऑप्टिमाइज़ करते हैं कि वेबसाइट्स को ज्यादा विजिबिलिटी मिले और वे संभावित खरीदारों तक सही समय पर पहुंच सकें।


📊 ग्राहकों को क्या मिल रहा है फायदा?

कंपनी के मुताबिक, किसी भी ग्राहक को प्लेटफॉर्म पर जुड़ने के तीन से चार महीनों के भीतर औसतन 10–15 क्वालिफाइड सेल्स इन्क्वायरी मिलने लगती हैं।

ये इन्क्वायरी लगभग 1 से 2 लाख इम्प्रेशंस से आती हैं, जो Gushwork द्वारा बनाए गए कंटेंट के जरिए जनरेट होते हैं।

इन इन्क्वायरी में से 3–4 डील्स कन्वर्ट हो जाती हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक को लगभग $1,500–$2,000 के मासिक निवेश पर $30,000–$50,000 तक का रिटर्न मिल सकता है।

कंपनी का यह भी दावा है कि 80% ग्राहकों को 60 दिनों के भीतर वेबसाइट इम्प्रेशंस में 500% तक की वृद्धि और इनबाउंड लीड्स में 50% तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है।


💰 सब्सक्रिप्शन मॉडल और भविष्य की योजना

फिलहाल Gushwork सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करता है। इसकी मासिक फीस $800 से $2,500 के बीच है, जो इस बात पर निर्भर करती है कि कितने पेज बनाए और मैनेज किए जा रहे हैं।

भविष्य में कंपनी सब्सक्रिप्शन के साथ performance-linked pricing मॉडल भी जोड़ने की योजना बना रही है।

इसका मतलब है कि अगर ग्राहक को बेहतर परिणाम मिलते हैं, तो कंपनी को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा — यानी एक win-win मॉडल।


📢 AI मार्केटिंग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

AI-ड्रिवन SEO और B2B मार्केटिंग सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

कई SaaS कंपनियां ऑटोमेशन और AI टूल्स के जरिए कंटेंट जनरेशन और लीड मैनेजमेंट सॉल्यूशन दे रही हैं।

लेकिन Gushwork का दावा है कि उसका hybrid मॉडल — यानी AI + human expertise — उसे बेहतर और अधिक सटीक परिणाम देने में सक्षम बनाता है।


🔮 आगे की राह

$9 मिलियन की नई फंडिंग Gushwork को अपने AI एजेंट्स को और मजबूत बनाने और ग्लोबल विस्तार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगी।

B2B कंपनियों के लिए ऑर्गेनिक और AI-आधारित लीड जनरेशन का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

यदि कंपनी अपने दावों के अनुरूप लगातार बेहतर RoI देती रहती है, तो यह AI-ड्रिवन मार्केटिंग स्पेस में एक बड़ा नाम बन सकती है।

अब देखने वाली बात होगी कि Gushwork अपनी वेटलिस्ट में शामिल 800 कंपनियों को कितनी जल्दी ऑनबोर्ड करता है और क्या वह आने वाले वर्षों में B2B SEO मार्केट में अपनी अलग पहचान बना पाता है। 🚀

Read more :💳 Debt Relief स्टार्टअप FREED ने जुटाए ₹60 करोड़,

💳 Debt Relief स्टार्टअप FREED ने जुटाए ₹60 करोड़,

FREED

भारत में बढ़ते पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया के बीच debt relief और financial counselling सेगमेंट तेजी से उभर रहा है। इसी कड़ी में debt resolution प्लेटफॉर्म FREED ने ₹60 करोड़ (करीब $6.5 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Aavishkaar Capital ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक Sorin Investments, Piper Serica और Sattva Ventures ने भी भागीदारी की।

यह नया निवेश ऐसे समय आया है जब FREED अपनी ग्रोथ और स्केल को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।


📊 दो साल बाद नई फंडिंग

FREED ने इससे पहले दो साल पहले अपनी Series A राउंड में भी ₹60 करोड़ जुटाए थे, जिसका नेतृत्व Sorin Investments और Multiply Venture ने किया था।

इसके अलावा मई 2022 में कंपनी ने $2.8 मिलियन की प्री-Series A फंडिंग Inflection Point Ventures के नेतृत्व में जुटाई थी।

लगातार निवेशकों का भरोसा यह दर्शाता है कि debt resolution का बाजार निवेशकों के लिए आकर्षक बनता जा रहा है।


💡 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, ताजा पूंजी का उपयोग इन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • ऑपरेशंस को स्केल करना
  • नए शहरों और राज्यों में विस्तार
  • अंडरराइटिंग और प्रोडक्ट क्षमताओं को मजबूत करना
  • संस्थागत साझेदारियों को गहरा करना

FREED का लक्ष्य अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और काउंसलिंग मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा तनावग्रस्त (stressed) ग्राहकों तक पहुंचा जा सके।


🏦 FREED कैसे काम करता है?

2020 में स्थापित FREED उन लोगों की मदद करता है जो कर्ज के दबाव में हैं लेकिन भुगतान करने की क्षमता रखते हैं।

कंपनी financial counselling, negotiated settlements और structured repayment plans की सुविधा देती है।

यह trustee-managed special purpose accounts के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया को व्यवस्थित करता है, जिससे ग्राहकों और लेंडर्स दोनों के लिए पारदर्शिता बनी रहती है।

जो उधारकर्ता (borrowers) पूरी तरह डिफॉल्ट में नहीं हैं बल्कि repayment-capable हैं, उनके लिए FREED regulated lending partners के साथ मिलकर structured consolidation loans की व्यवस्था भी करता है।


📈 अब तक का प्रदर्शन

कंपनी का दावा है कि उसने अब तक 20 लाख से अधिक ग्राहकों को काउंसलिंग दी है।

वर्तमान में FREED के पास 1.2 लाख से अधिक सक्रिय अकाउंट्स हैं और वह ₹3,200 करोड़ से ज्यादा के debt under management की निगरानी कर चुका है।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में debt management और settlement की मांग तेजी से बढ़ रही है।


🎯 18 महीनों में बड़ा लक्ष्य

FREED ने अगले 18 महीनों में करीब $1 बिलियन (लगभग ₹8,000 करोड़ से अधिक) के stressed debt enrollment का लक्ष्य रखा है।

कंपनी का कहना है कि पिछले एक साल में उसकी CAGR ग्रोथ करीब 19% रही है और यूनिट इकॉनॉमिक्स में भी सुधार देखने को मिला है।

यानी हर नए ग्राहक के साथ कंपनी की लागत और आय का संतुलन बेहतर हो रहा है, जो लंबे समय में लाभप्रदता की दिशा में सकारात्मक संकेत है।


🏁 बढ़ती प्रतिस्पर्धा

Debt settlement और relief सेगमेंट में FREED अकेला खिलाड़ी नहीं है।

इस क्षेत्र में Loan Settlement, Single Debt और CreditQ जैसी कंपनियां भी सक्रिय हैं।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियों को बेहतर टेक्नोलॉजी, पारदर्शिता और ग्राहक विश्वास पर फोकस करना होगा।


📉 भारत में क्यों बढ़ रही है जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल लेंडिंग, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की पहुंच बढ़ी है।

लेकिन इसके साथ ही डिफॉल्ट और repayment stress के मामले भी बढ़े हैं।

कई ग्राहक उच्च ब्याज दर और multiple loans के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में debt counselling और settlement प्लेटफॉर्म उनके लिए एक संरचित समाधान प्रदान करते हैं।

यह सेगमेंट न केवल ग्राहकों को राहत देता है बल्कि बैंकों और NBFCs को भी NPA कम करने में मदद करता है।


🔮 आगे की राह

₹60 करोड़ की नई फंडिंग FREED के लिए विस्तार का अवसर लेकर आई है।

यदि कंपनी अपने अंडरराइटिंग मॉडल, टेक्नोलॉजी और साझेदारियों को प्रभावी ढंग से स्केल करती है, तो वह debt relief बाजार में मजबूत स्थिति बना सकती है।

भारत में बढ़ते कर्ज और वित्तीय जागरूकता की जरूरत को देखते हुए यह सेगमेंट आने वाले वर्षों में और बड़ा हो सकता है।

अब देखना होगा कि FREED अपने $1 बिलियन के लक्ष्य को कितनी तेजी से हासिल कर पाता है और क्या वह इस प्रतिस्पर्धी बाजार में खुद को लीडर के रूप में स्थापित कर पाएगा।

स्टार्टअप, फंडिंग और फिनटेक से जुड़ी ऐसी ही गहराई वाली खबरों के लिए जुड़े रहें FundingRaised के साथ। 🚀

Read more :💰 Prayaan Capital ने जुटाए ₹110 करोड़,

💰 Prayaan Capital ने जुटाए ₹110 करोड़,

Prayaan Capital

भारत के MSME लेंडिंग सेक्टर में एक नया और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन खिलाड़ी तेजी से उभर रहा है। Prayaan Capital ने अपनी Series A फंडिंग राउंड में ₹110 करोड़ जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया है।

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि इस पूंजी का इस्तेमाल एक मजबूत लेंडिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने, टीम का विस्तार करने और भारत के प्रमुख MSME बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए किया जाएगा।


👤 कौन हैं Rangarajan Krishnan?

Prayaan Capital का नेतृत्व Rangarajan Krishnan कर रहे हैं, जिन्हें इंडस्ट्री में Ranga के नाम से जाना जाता है।

वह पहले publicly listed NBFC Five-Star Business Finance के Joint Managing Director (JMD) और CEO रह चुके हैं।

हाल ही में Rangarajan Krishnan ने Prayaan Capital में कंट्रोलिंग स्टेक हासिल किया है। उनका लक्ष्य कंपनी को एक “new-age MSME lending platform” में बदलना है, जो छोटे कारोबारियों तक क्रेडिट की पहुंच को आसान और तेज बनाए।


🎯 MSME सेक्टर में $300 बिलियन का क्रेडिट गैप

भारत का MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद छोटे और मझोले उद्योगों को आज भी पर्याप्त फाइनेंसिंग नहीं मिल पाती।

अनुमानों के अनुसार, भारत में MSME सेक्टर में लगभग $300 बिलियन का क्रेडिट गैप है।

यानी लाखों छोटे बिजनेस ऐसे हैं जिन्हें समय पर और सही मात्रा में लोन नहीं मिल पाता। Prayaan Capital इसी गैप को भरने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।


🏦 टेक्नोलॉजी और ग्राउंड अंडरराइटिंग का कॉम्बिनेशन

Prayaan Capital का मॉडल पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का मिश्रण होगा।

कंपनी का कहना है कि वह branch-led distribution की proven ताकत को technology-enabled operating model के साथ जोड़ेगी।

इसका मतलब है कि जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर अंडरराइटिंग और ग्राहक समझ पर फोकस रहेगा, वहीं दूसरी ओर sourcing, underwriting और collections में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

Ranga का मानना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण बाजार में केवल डिजिटल मॉडल काफी नहीं है। ऑन-ग्राउंड मौजूदगी और स्थानीय बिजनेस की समझ बेहद जरूरी है।


📲 टेक-फर्स्ट अप्रोच से होगा विस्तार

Prayaan Capital डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर लोन प्रोसेसिंग को तेज और पारदर्शी बनाने की योजना बना रहा है।

AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए बेहतर रिस्क असेसमेंट, तेज अंडरराइटिंग और प्रभावी कलेक्शन मैकेनिज्म विकसित किया जाएगा।

इससे छोटे कारोबारियों को कम समय में लोन अप्रूवल और डिस्बर्सल मिल सकेगा।

कंपनी का उद्देश्य केवल लोन देना नहीं, बल्कि एक मजबूत और टिकाऊ संस्थान बनाना है जो लंबे समय तक MSME इकोसिस्टम की सेवा कर सके।


📈 Peak XV Partners का भरोसा

Series A राउंड का नेतृत्व करने वाली Peak XV Partners भारत की प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्मों में से एक है।

पिछले 20 वर्षों में इस फर्म ने 16 फंड्स के जरिए $10 बिलियन से अधिक कैपिटल मैनेज की है और 450 से ज्यादा कंपनियों में निवेश किया है।

इसके पोर्टफोलियो में 35 से अधिक IPO और कई सफल M&A डील्स शामिल हैं।

Prayaan Capital में निवेश यह दर्शाता है कि निवेशक MSME लेंडिंग सेक्टर में बड़ी संभावनाएं देख रहे हैं।


🏢 MSME लेंडिंग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत में डिजिटल NBFC और फिनटेक कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

बड़े बैंक और NBFC भी MSME लेंडिंग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में Prayaan Capital को अपनी अलग पहचान बनानी होगी।

Ranga का अनुभव और Peak XV का समर्थन कंपनी को शुरुआती बढ़त दे सकता है।


💡 क्या हो सकती है रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि Prayaan Capital छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा फोकस कर सकता है, जहां क्रेडिट की कमी ज्यादा है।

Branch-led मॉडल के जरिए स्थानीय उद्यमियों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाया जा सकता है, जबकि टेक्नोलॉजी से लागत और समय दोनों कम किए जा सकते हैं।

यदि कंपनी जोखिम प्रबंधन और कलेक्शन पर सही नियंत्रण रख पाती है, तो आने वाले वर्षों में यह MSME लेंडिंग सेगमेंट में एक बड़ा नाम बन सकती है।


🔮 आगे की राह

₹110 करोड़ की Series A फंडिंग Prayaan Capital के लिए सिर्फ शुरुआत है।

कंपनी का असली परीक्षण तब होगा जब वह अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को स्केल करेगी और हजारों MSME ग्राहकों तक पहुंचेगी।

भारत में छोटे कारोबारियों की संख्या करोड़ों में है और यदि सही रणनीति अपनाई जाए, तो यह बाजार बेहद बड़ा अवसर साबित हो सकता है।

Rangarajan Krishnan के अनुभव और Peak XV Partners के समर्थन के साथ Prayaan Capital MSME लेंडिंग सेक्टर में एक नई कहानी लिखने की तैयारी में है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह नया खिलाड़ी भारत के $300 बिलियन क्रेडिट गैप को भरने में कितना सफल होता है। 🚀

Read more :🎓 upGrad ने Internshala का किया अधिग्रहण,

🎓 upGrad ने Internshala का किया अधिग्रहण,

upGrad

भारत की leading skilling और workforce development कंपनी upGrad ने early-talent marketplace Internshala का अधिग्रहण कर लिया है। यह डील एक stock swap ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी की गई, जिसमें कुल सौदे की लगभग 90% राशि शेयरों के रूप में संरचित की गई है।

हालांकि डील की सटीक रकम सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार Internshala का वैल्यूएशन करीब ₹100 करोड़ के आसपास आंका गया है।


🚀 18–24 महीनों में रेवेन्यू दोगुना करने का लक्ष्य

upGrad ने स्पष्ट किया है कि वह Internshala में अतिरिक्त निवेश करेगा, ताकि प्रोडक्ट इनोवेशन, AI-आधारित talent matching और enterprise hiring मॉडल को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके।

कंपनी का लक्ष्य अगले 18 से 24 महीनों में Internshala की रेवेन्यू को मौजूदा ₹45 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ या उससे अधिक तक पहुंचाना है।

यह रणनीति दर्शाती है कि upGrad केवल अधिग्रहण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि Internshala को अपने इकोसिस्टम का एक मजबूत ग्रोथ इंजन बनाना चाहता है।


🤝 Learners और Employers दोनों को मिलेगा फायदा

इस अधिग्रहण के बाद upGrad के मौजूदा learners को Internshala पर उपलब्ध internships और job listings तक सीधा एक्सेस मिलेगा।

वहीं Internshala के यूज़र्स को upGrad के कोर्सेज, अपस्किलिंग प्रोग्राम्स और enterprise कनेक्शंस का लाभ मिलेगा।

Internshala अब upGrad के enterprise बिजनेस का फायदा उठाकर कंपनियों के साथ learning & development (L&D) सेगमेंट में और गहराई से काम करेगी।

इससे Internshala का फोकस केवल internship प्लेटफॉर्म तक सीमित न रहकर enterprise-focused hiring मॉडल की ओर शिफ्ट होगा।


🏢 स्वतंत्र ब्रांड के रूप में जारी रहेगा संचालन

महत्वपूर्ण बात यह है कि Internshala अपनी पहचान और ब्रांडिंग बरकरार रखेगी।

कंपनी अपने संस्थापक और CEO Sarvesh Agrawal के नेतृत्व में स्वतंत्र ब्रांड के रूप में काम करती रहेगी।

हालांकि, वह upGrad के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्केल का लाभ उठाकर अपने प्रोडक्ट्स और यूज़र बेस का विस्तार करेगी।


📚 Internshala की शुरुआत और मौजूदा स्थिति

Internshala की स्थापना 2011 में Sarvesh Agrawal ने की थी। इसका उद्देश्य कॉलेज छात्रों को internships और fresher jobs के जरिए real-world experience दिलाना था।

आज Gurugram आधारित यह प्लेटफॉर्म दावा करता है कि उसके पास 3.4 करोड़ (34 million) से अधिक registered users हैं और लगभग 4.5 लाख (450,000) employers जुड़े हुए हैं।

हर साल करीब 30 लाख (3 million) active applicants इस प्लेटफॉर्म के जरिए अवसर तलाशते हैं।

एक दिलचस्प आंकड़ा यह भी है कि Internshala के 40% से अधिक यूज़र्स भारत के tier-II और tier-III शहरों से आते हैं।

यह दर्शाता है कि प्लेटफॉर्म ने मेट्रो शहरों से बाहर के युवाओं तक भी अपनी मजबूत पहुंच बनाई है।


🎯 upGrad की बड़ी रणनीति

upGrad पिछले कुछ वर्षों से अपने स्किलिंग और workforce development मॉडल को मजबूत करने के लिए कई अधिग्रहण और साझेदारियां कर चुका है।

Internshala का अधिग्रहण उसके broader vision का हिस्सा है, जिसमें learning से लेकर hiring तक एक end-to-end ecosystem बनाना शामिल है।

अब upGrad अपने learners को केवल सर्टिफिकेट या डिग्री तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें सीधे internship और job opportunities से जोड़ेगा।

इससे छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए “learn and earn” मॉडल को और मजबूती मिलेगी।


💬 Unacademy डील क्यों नहीं हुई?

दिलचस्प बात यह है कि upGrad हाल ही में test-prep कंपनी Unacademy के अधिग्रहण को लेकर भी बातचीत कर रहा था।

हालांकि, दोनों कंपनियां वैल्यूएशन को लेकर सहमति नहीं बना सकीं और यह बातचीत रुक गई।

Internshala की डील से साफ है कि upGrad फिलहाल ऐसे अधिग्रहणों पर ध्यान दे रहा है जो उसके core skilling और employment ecosystem को सीधे मजबूत करें।


📈 Early-Talent Market में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत में internships, fresher hiring और early-career skilling का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।

कॉलेज से निकलने वाले लाखों छात्र practical experience और verified internships की तलाश में रहते हैं।

ऐसे में Internshala जैसे प्लेटफॉर्म की मांग लगातार बनी हुई है।

upGrad के टेक्नोलॉजी, AI और enterprise नेटवर्क के जुड़ने से Internshala की प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत हो सकती है।


🔮 आगे की राह

Internshala की रेवेन्यू को अगले दो वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य ambitious जरूर है, लेकिन upGrad के संसाधनों और नेटवर्क के साथ यह संभव भी दिखता है।

AI-आधारित talent matching, बेहतर hiring analytics और enterprise partnerships Internshala को केवल internship पोर्टल से आगे बढ़ाकर एक comprehensive early-career platform बना सकते हैं।

यह डील भारतीय edtech और workforce development सेक्टर में consolidation की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

अब देखना होगा कि upGrad और Internshala मिलकर किस तरह learning से लेकर employment तक की पूरी journey को seamless बना पाते हैं।

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Read more :💰 Stable Money का FY25 में ₹104 करोड़ ग्रॉस रेवेन्यू,

💰 Stable Money का FY25 में ₹104 करोड़ ग्रॉस रेवेन्यू,

Stable Money

भारत की तेजी से उभरती wealthtech स्टार्टअप Stable Money ने हाल ही में $25 मिलियन की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड की अगुवाई Fundamentum Partnership ने की, जबकि Z47 और RTP Global ने भी इसमें भाग लिया।

हालांकि इस नई फंडिंग का पूरा असर FY26 और FY27 के ग्रोथ नंबरों में दिखेगा, लेकिन FY25 के वित्तीय नतीजे कंपनी की तेज़ स्केलिंग और बढ़ते खर्चों की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।


📊 FY25 में ग्रॉस रेवेन्यू ₹104.4 करोड़

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Stable Money ने FY25 में ₹104.4 करोड़ का ग्रॉस रेवेन्यू दर्ज किया। यह FY24 के मात्र ₹1.3 करोड़ की तुलना में बड़ी छलांग है।

हालांकि, यहां एक अहम बात यह है कि कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू केवल ₹4.3 करोड़ रही।

विश्लेषण से संकेत मिलता है कि कंपनी ने करीब ₹100 करोड़ के बॉन्ड खरीदे और उन्हें ₹104.4 करोड़ में बेचा। यानी लगभग ₹4.3 करोड़ का अंतर कंपनी की नेट इनकम या बॉन्ड सेल पर कमीशन के रूप में सामने आया।

कंपनी ने इस ₹4.3 करोड़ को “Sale of Services” के तहत दर्ज किया है, लेकिन इसके अंदर विस्तृत ब्रेकअप साझा नहीं किया गया।


💵 नॉन-ऑपरेटिंग इनकम से बढ़ी कुल आय

Stable Money को केवल ऑपरेशनल गतिविधियों से ही नहीं, बल्कि अन्य स्रोतों से भी आय हुई।

कंपनी ने बैंक डिपॉजिट्स पर ब्याज, बॉन्ड इनकम और म्यूचुअल फंड डिविडेंड से ₹7.63 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग इनकम दर्ज की।

इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय ₹112 करोड़ तक पहुंच गई।

हालांकि, मीडिया प्लेटफॉर्म Entrackr ने कंपनी से इन वित्तीय आंकड़ों को लेकर कई बार संपर्क किया, लेकिन कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।


🏦 Stable Money क्या करती है?

Stable Money की स्थापना 2022 में Saurabh Jain और Harish Reddy ने की थी।

यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को सुरक्षित और फिक्स्ड-रिटर्न निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है। इसके प्रमुख प्रोडक्ट्स में शामिल हैं:

  • Fixed Deposits (FDs)
  • Recurring Deposits
  • Secured Credit Cards
  • Bonds
  • Gold & Silver

कंपनी का दावा है कि 40 लाख से अधिक यूज़र्स उसके प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं और वे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा की राशि FDs, Stable Bonds और अन्य सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर चुके हैं।


📉 खर्चों में बड़ा इजाफा

जहां रेवेन्यू में उछाल दिखा, वहीं खर्चों में भी तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।

FY25 में बॉन्ड खरीद कंपनी का सबसे बड़ा खर्च रहा, जो ₹100 करोड़ तक पहुंच गया। चूंकि कंपनी का बिज़नेस मॉडल बॉन्ड खरीद और बिक्री पर आधारित है, इसलिए यह लागत स्वाभाविक रूप से बड़ी रही।

इसके अलावा, विज्ञापन और प्रमोशनल खर्च ₹25.33 करोड़ रहा। यह दर्शाता है कि कंपनी यूज़र अधिग्रहण (customer acquisition) पर आक्रामक रूप से निवेश कर रही है।


👨‍💻 कर्मचारी खर्च 2.5 गुना बढ़े

Stable Money का Employee Benefits Expense FY25 में 2.5 गुना बढ़कर ₹21.8 करोड़ हो गया। इसमें लगभग ₹5 करोड़ का ESOP खर्च शामिल है।

इसके अलावा, सॉफ्टवेयर खर्च, लीगल और प्रोफेशनल फीस, ट्रैवल, रिक्रूटमेंट और अन्य ओवरहेड्स ने कुल खर्च को बढ़ाकर ₹160 करोड़ तक पहुंचा दिया।


🔻 घाटा 3.5X बढ़कर ₹44.8 करोड़

बढ़ते खर्चों का असर सीधे कंपनी के घाटे पर दिखा।

Stable Money का नेट लॉस FY25 में 3.5 गुना बढ़कर ₹44.8 करोड़ हो गया, जबकि FY24 में यह ₹12.8 करोड़ था।

हालांकि कंपनी ने ₹100 करोड़ से अधिक का ग्रॉस रेवेन्यू पार किया, लेकिन बॉन्ड खरीद, आक्रामक मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी व टीम में निवेश के कारण घाटा बढ़ गया।

यह संकेत देता है कि कंपनी फिलहाल प्रॉफिट से ज्यादा ग्रोथ पर फोकस कर रही है।


💸 अब तक $65 मिलियन जुटाए

Stable Money अब तक कुल $65 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है।

हाल ही में उठाए गए $25 मिलियन राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया, जिसमें कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $175 मिलियन आंका गया।

इससे पहले जून 2025 में कंपनी ने $20 मिलियन का राउंड Fundamentum की अगुवाई में जुटाया था।


🚀 आगे की राह

Stable Money की रणनीति साफ दिखती है — पहले बड़े पैमाने पर यूज़र बेस बनाना और मजबूत ब्रांड उपस्थिति स्थापित करना, फिर धीरे-धीरे प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ना।

भारत में सुरक्षित और फिक्स्ड-रिटर्न निवेश विकल्पों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में Stable Money के पास बड़ा अवसर है।

हालांकि, बढ़ते घाटे और ऊंचे मार्केटिंग खर्च यह भी दिखाते हैं कि कंपनी को आने वाले वर्षों में संतुलन बनाना होगा।

अब नजर FY26 और FY27 पर होगी, जहां नई फंडिंग का प्रभाव कंपनी के रेवेन्यू, मार्जिन और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी पर दिख सकता है।

क्या Stable Money तेजी से स्केल करते हुए प्रॉफिटेबल भी बन पाएगी?

इस सवाल का जवाब आने वाले वित्तीय वर्षों में मिलेगा।

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