लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी कंपनी Shadowfax Technologies ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में एंट्री तो ली, लेकिन इसकी शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक मजबूत नहीं रही। कंपनी के शेयर IPO इश्यू प्राइस से डिस्काउंट पर लिस्ट हुए, जिससे निवेशकों को पहले ही दिन हल्की निराशा का सामना करना पड़ा।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर Shadowfax के शेयर ₹112–113 के आसपास लिस्ट हुए। यह IPO के ऊपरी प्राइस बैंड ₹124 के मुकाबले लगभग 9% कम है।
📉 IPO से जुटाए ₹1,907 करोड़
Shadowfax ने अपने Initial Public Offering (IPO) के जरिए कुल ₹1,907 करोड़ जुटाए थे। यह इश्यू 20 जनवरी से 22 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहा।
IPO में:
- ₹1,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू
- और करीब ₹907 करोड़ का Offer-For-Sale (OFS) शामिल था
हालांकि कंपनी का फंड रेज़िंग साइज बड़ा था, लेकिन बाजार में लिस्टिंग के दिन इसका उत्साह ठंडा नजर आया।
📊 सब्सक्रिप्शन रहा औसत
Shadowfax के IPO को मॉडरेट यानी औसत सब्सक्रिप्शन मिला। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक:
- Qualified Institutional Buyers (QIBs) ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई और इश्यू को 3.8 गुना सब्सक्राइब किया
- Retail investors की हिस्सेदारी 2.3 गुना रही
- Employee quota को करीब 2 गुना सब्सक्रिप्शन मिला
- वहीं Non-Institutional Investors (NIIs) ने सिर्फ 0.84 गुना सब्सक्रिप्शन किया
👉 NIIs की कमजोर भागीदारी को बाजार विश्लेषक IPO के प्रति सीमित उत्साह का संकेत मान रहे हैं।
💼 OFS से पुराने निवेशकों को बड़ा फायदा
IPO के Offer-For-Sale (OFS) हिस्से के जरिए Shadowfax के शुरुआती निवेशकों को अच्छा एग्जिट मिला है।
- Flipkart, जो Shadowfax का शुरुआती निवेशक रहा है,
- OFS के जरिए करीब ₹237 करोड़ के शेयर बेच रहा है
- जिससे उसे लगभग 3 गुना रिटर्न मिलने की उम्मीद है
- Eight Roads Investments (Fidelity से जुड़ा फंड)
- करीब ₹197 करोड़ के शेयर बेच रहा है
- और इसे लगभग 10 गुना रिटर्न मिलने की संभावना है
इससे साफ है कि भले ही लिस्टिंग कमजोर रही हो, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए Shadowfax एक सफल दांव साबित हुआ है।
🧾 एंकर इन्वेस्टर्स से पहले ही जुटाए ₹850 करोड़
IPO से पहले Shadowfax ने Anchor Investors से भी बड़ी रकम जुटाई थी।
- कंपनी ने 6.9 करोड़ इक्विटी शेयर
- ₹124 प्रति शेयर के भाव पर
- एंकर इन्वेस्टर्स को अलॉट किए
इससे Shadowfax ने ₹850 करोड़ पहले ही जुटा लिए थे, जिससे IPO को लेकर कंपनी की तैयारी मजबूत दिखी।
🚛 Shadowfax का बिज़नेस मॉडल
Shadowfax भारत के last-mile और hyperlocal logistics सेगमेंट में काम करती है। कंपनी की सेवाएं मुख्य रूप से:
- E-commerce marketplaces
- D2C brands
- Quick commerce players
के लिए होती हैं।
यह कंपनी तेज डिलीवरी, हाई-वॉल्यूम ऑर्डर प्रोसेसिंग और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन नेटवर्क के दम पर अपनी पहचान बना चुकी है।
⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला सेक्टर
Shadowfax जिस सेगमेंट में काम करती है, वहां प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है। इसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं:
- Delhivery
- XpressBees
- Ecom Express
- Ekart (Flipkart की लॉजिस्टिक्स यूनिट)
यह सेक्टर:
- कैपिटल-इंटेंसिव है
- मार्जिन कम होते हैं
- और लगातार नेटवर्क व टेक्नोलॉजी में निवेश की जरूरत होती है
इसी वजह से लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयर अक्सर लिस्टिंग के समय दबाव में रहते हैं।
💰 अब तक $246 मिलियन की फंडिंग
स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार:
- Shadowfax अब तक करीब $246 मिलियन (लगभग ₹2,000 करोड़) की फंडिंग जुटा चुका है
इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:
- Eight Roads Ventures (सबसे बड़ा बाहरी शेयरहोल्डर)
- Flipkart
- NewQuest Asia
- Nokia Growth Partners
📈 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में सुधार
हालांकि लिस्टिंग कमजोर रही, लेकिन कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़े धीरे-धीरे मजबूत हो रहे हैं।
- FY25 में Shadowfax का रेवेन्यू
- 32% सालाना बढ़कर ₹2,485 करोड़ पहुंचा
- इसी साल कंपनी ने ₹6.4 करोड़ का नेट प्रॉफिट भी दर्ज किया
वहीं FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में:
- रेवेन्यू रहा ₹1,806 करोड़
- और मुनाफा बढ़कर ₹21 करोड़ हो गया
👉 यह दिखाता है कि कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है।
🔮 आगे क्या?
Shadowfax की कमजोर लिस्टिंग यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल
- लॉजिस्टिक्स सेक्टर
- और कैपिटल-हेवी बिज़नेस मॉडल
को लेकर सतर्क है।
हालांकि,
- लगातार बढ़ता रेवेन्यू
- मुनाफे में सुधार
- और ई-कॉमर्स व क्विक कॉमर्स की बढ़ती मांग
लॉन्ग टर्म में कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।
अब असली चुनौती Shadowfax के लिए यह होगी कि वह
- खर्चों को नियंत्रित करे
- ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाए
- और प्रतिस्पर्धी माहौल में सस्टेनेबल प्रॉफिट ग्रोथ दिखा सके।











