💊 AI-आधारित ड्रग डिस्कवरी स्टार्टअप Peptris ने जुटाए ₹70 करोड़,

Peptris

भारत के हेल्थटेक और बायोटेक सेक्टर से एक अहम फंडिंग अपडेट सामने आया है। ड्रग डिस्कवरी पर काम करने वाली बेंगलुरु आधारित कंपनी Peptris ने Series A फंडिंग राउंड में ₹70 करोड़ (करीब $7.7 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व IAN Alpha Fund और Speciale Invest ने संयुक्त रूप से किया। इसके अलावा Tenacity Ventures, BYT Ventures और अन्य निवेशकों ने भी भागीदारी की।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में दवाओं की खोज की प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।


🚀 फंड का उपयोग कहां होगा?

Peptris के अनुसार, इस ताजा पूंजी का उपयोग अगले 24 महीनों में कंपनी के मौजूदा प्रोग्राम्स को क्लिनिकल रेडीनेस की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा। साथ ही, कंपनी अपनी पाइपलाइन का विस्तार करेगी और बायोलॉजी, केमिस्ट्री, डेटा साइंस और AI टीमों को मजबूत करेगी।

ड्रग डेवलपमेंट एक लंबी और महंगी प्रक्रिया है। ऐसे में AI आधारित मॉडल्स का उपयोग करके समय और लागत दोनों कम करना कंपनी का मुख्य लक्ष्य है।


🧠 2019 में हुई थी शुरुआत

Peptris की स्थापना 2019 में नारायणन वेंकटसुब्रमणियन, श्रीधर नारायणन, आनंद बुडनी और अमित महाजन ने की थी। कंपनी ने ऐसे AI मॉडल विकसित किए हैं जो नई और अनोखी अणुओं (molecules) को डिजाइन करने के साथ-साथ ड्रग डेवलपमेंट से जुड़े महत्वपूर्ण पैरामीटर्स की भविष्यवाणी भी कर सकते हैं।

इस तकनीक की मदद से कंपनी Novel Chemical Entities (NCEs) की खोज करने में सफल रही है। इसके अलावा, Peptris दवाओं के पुनः उपयोग (drug repurposing) और पहले से रुके हुए प्रोग्राम्स को दोबारा शुरू करने (drug rescue) के अवसर भी तलाशती है।


⚠ ड्रग डिस्कवरी की बड़ी चुनौती

वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद, ड्रग डिस्कवरी आज भी धीमी, महंगी और जोखिम भरी प्रक्रिया मानी जाती है। खासकर प्री-क्लिनिकल स्टेज में कई संभावित दवाएं समय, पूंजी और वैज्ञानिक अनिश्चितताओं के कारण आगे नहीं बढ़ पातीं।

Peptris का मानना है कि AI के जरिए इस शुरुआती चरण में ही संभावित जोखिमों की पहचान कर ली जाए तो फेलियर रेट को कम किया जा सकता है। इससे फार्मा कंपनियों को बेहतर और तेज निर्णय लेने में मदद मिलती है।


🔬 AI से मिल रही बढ़त

Peptris का प्लेटफॉर्म सिर्फ नए molecules तैयार नहीं करता, बल्कि यह यह भी अनुमान लगाता है कि कोई दवा शरीर में कैसे काम करेगी, उसके संभावित साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं और उसकी सफलता की संभावना कितनी है।

इस डेटा-ड्रिवन अप्रोच से कंपनी को कई NCE प्रोग्राम्स को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। कुछ प्रोग्राम अब क्लिनिकल डेवलपमेंट की दिशा में बढ़ रहे हैं।


📈 अगले 24 महीनों की योजना

कंपनी आने वाले दो वर्षों में:

  • कई नए NCE प्रोग्राम्स शुरू करेगी
  • Drug repurposing और rescue प्रोग्राम्स पर काम करेगी
  • अन्य कंपनियों द्वारा छोड़ी गई क्लिनिकल स्टेज दवाओं को फिर से विकसित करेगी

यह रणनीति न केवल समय बचाती है बल्कि पहले से किए गए रिसर्च और निवेश का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करती है।


🤝 B2B मॉडल पर काम

Peptris का बिज़नेस मॉडल B2B है। यानी कंपनी सीधे उपभोक्ताओं को दवा नहीं बेचती, बल्कि फार्मा, बायोटेक और चुनिंदा FMCG कंपनियों के साथ मिलकर काम करती है। यह लाइसेंसिंग और को-डेवलपमेंट मॉडल के तहत अपने एसेट्स और तकनीक उपलब्ध कराती है।

इससे कंपनी को राजस्व के साथ-साथ रिसर्च सहयोग भी मिलता है।


🏥 किन क्षेत्रों पर फोकस?

Peptris का फोकस उन चिकित्सीय क्षेत्रों पर है जहां आज भी बड़ी unmet medical needs मौजूद हैं। इनमें शामिल हैं:

  • Rare diseases
  • Inflammation
  • Oncology (कैंसर)
  • Women’s health

इन क्षेत्रों में नई और प्रभावी दवाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।


🌍 हेल्थकेयर सेक्टर के लिए क्या मायने?

AI आधारित ड्रग डिस्कवरी मॉडल हेल्थकेयर इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। पारंपरिक ड्रग डेवलपमेंट में जहां 10–15 साल और अरबों डॉलर खर्च हो जाते हैं, वहीं AI इस प्रक्रिया को काफी हद तक तेज और सस्ता बना सकता है।

Peptris का यह निवेश दर्शाता है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब ग्लोबल हेल्थकेयर चुनौतियों को हल करने की दिशा में भी मजबूत कदम उठा रहे हैं।


🏁 निष्कर्ष

₹70 करोड़ की Series A फंडिंग के साथ Peptris अब अपने AI-आधारित ड्रग डिस्कवरी प्लेटफॉर्म को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। क्लिनिकल रेडीनेस की दिशा में बढ़ते प्रोग्राम्स और नई पाइपलाइन इस बात का संकेत हैं कि कंपनी दीर्घकालिक प्रभाव डालने की योजना बना रही है।

ड्रग डेवलपमेंट की जटिल दुनिया में जहां असफलता की दर बहुत अधिक है, वहां AI और डेटा साइंस आधारित अप्रोच नई उम्मीद जगा रही है। आने वाले वर्षों में Peptris का प्रदर्शन इस बात को तय करेगा कि भारत से उभर रही यह तकनीक वैश्विक हेल्थकेयर पर कितना प्रभाव डाल पाती है।

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🎧GoBoult Audio की steady ग्रोथ,

GoBoult

भारत का wearables बाजार अब अपनी hyper-growth फेज से आगे निकल चुका है। पिछले कुछ वर्षों में जहां स्मार्टवॉच और वायरलेस ईयरबड्स की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था, वहीं अब बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और मांग के सामान्य होने से ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो गई है। ऐसे माहौल में जहां बड़े खिलाड़ी राजस्व में ठहराव या गिरावट का सामना कर रहे हैं, वहीं GoBoult Audio ने एक अलग रणनीति अपनाकर अपनी ग्रोथ को बरकरार रखा है।


📊 FY25 में 10% की ग्रोथ

Registrar of Companies से प्राप्त वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, GoBoult Audio का ऑपरेशंस से रेवेन्यू FY25 में 10% बढ़कर ₹763 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹697 करोड़ था।

हालांकि यह ग्रोथ FY24 की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी है, लेकिन मौजूदा बाजार परिस्थितियों में डबल-डिजिट ग्रोथ भी खास मानी जा रही है। जब कई ब्रांड्स की बिक्री ठहर गई है, उस समय 10% की वृद्धि कंपनी की स्थिर रणनीति को दर्शाती है।


🏭 2017 में हुई थी स्थापना

2017 में स्थापित GoBoult Audio वायरलेस ईयरबड्स, हेडफोन्स, स्मार्टवॉच और स्पीकर्स डिजाइन और बेचती है। कंपनी की आय का एकमात्र स्रोत इन प्रोडक्ट्स की बिक्री है। यानी इसका पूरा बिज़नेस मॉडल हार्डवेयर प्रोडक्ट्स पर आधारित है।


💰 लागत पर कड़ा नियंत्रण बना ताकत

जहां कई कंपनियां आक्रामक मार्केटिंग और भारी खर्च के जरिए स्केल हासिल करने की कोशिश करती रहीं, वहीं GoBoult ने लागत नियंत्रण पर खास ध्यान दिया।

📦 मटेरियल कॉस्ट सबसे बड़ा हिस्सा

कंपनी की कुल लागत में मटेरियल खर्च सबसे बड़ा घटक रहा, जो पूरी तरह आयात (import) पर निर्भर है। FY25 में मटेरियल खर्च 2.7% घटकर ₹391 करोड़ रह गया, जो FY24 में ₹402 करोड़ था। यह कुल खर्च का लगभग 53% हिस्सा है।

ऐसे समय में जब आयात लागत और वैश्विक सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव बना रहा, लागत में कमी कंपनी की बेहतर नेगोशिएशन और सप्लाई मैनेजमेंट को दिखाती है।


👩‍💼 कर्मचारी और विज्ञापन खर्च में बढ़ोतरी

Employee benefit expenses 29.6% बढ़कर ₹35 करोड़ हो गए। इससे साफ है कि कंपनी ने टीम को मजबूत करने पर निवेश किया है।

वहीं विज्ञापन और प्रमोशनल खर्च 9.3% बढ़कर ₹177 करोड़ हो गया। इसका मतलब है कि ब्रांड विजिबिलिटी बनाए रखने के लिए मार्केटिंग पर खर्च जारी रहा।

इन सबके अलावा पोस्ट-सप्लाई डिस्काउंट, फ्रेट, किराया, लीगल और अन्य ओवरहेड खर्च जोड़ने के बाद FY25 में कंपनी का कुल खर्च ₹731 करोड़ रहा।


📈 मुनाफे में जबरदस्त उछाल

मॉडरेट रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, सख्त लागत प्रबंधन ने कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा सुधार किया।

GoBoult का नेट प्रॉफिट FY25 में बढ़कर ₹24 करोड़ हो गया, जो FY24 में मात्र ₹2.5 करोड़ था। यानी मुनाफा लगभग 10 गुना बढ़ा है।

कंपनी का EBITDA मार्जिन 6.6% रहा। यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से देखें तो FY25 में कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹0.96 खर्च किए। यानी मार्जिन भले बहुत बड़ा न हो, लेकिन बिज़नेस अब स्थिर और टिकाऊ दिशा में है।


🚫 बिना फंडिंग के भी मजबूत प्रदर्शन

दिलचस्प बात यह है कि GoBoult Audio अब तक unfunded रही है। जहां इस कैटेगरी में कई प्रतिस्पर्धी वेंचर कैपिटल फंडिंग के सहारे तेजी से स्केल हुए, वहीं GoBoult ने आत्मनिर्भर मॉडल अपनाया।

यह दिखाता है कि केवल भारी निवेश ही सफलता की गारंटी नहीं है। अनुशासित खर्च और मार्जिन पर ध्यान देकर भी टिकाऊ बिज़नेस बनाया जा सकता है।


🆚 प्रतिस्पर्धियों का प्रदर्शन

तुलना करें तो wearables बाजार के दो बड़े नामों का प्रदर्शन अलग रहा है।

boAt ने FY24 में ₹3,073 करोड़ का फ्लैट रेवेन्यू दर्ज किया और ₹60.4 करोड़ का मुनाफा कमाया। यानी ग्रोथ नहीं हुई, लेकिन लाभप्रदता बरकरार रही।

दूसरी ओर, Noise का रेवेन्यू 24% घटकर ₹1,048 करोड़ रह गया। हालांकि लागत में कटौती के बाद कंपनी ₹3.2 करोड़ के मामूली मुनाफे में आ गई।

इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार में ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ चुकी है और कंपनियां अब मार्जिन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।


📉 बदलता हुआ बाजार परिदृश्य

भारत का wearables बाजार अब “हर कीमत पर स्केल” की दौड़ से बाहर निकल रहा है। शुरुआती वर्षों में भारी डिस्काउंट, आक्रामक विज्ञापन और कम मार्जिन के जरिए मार्केट शेयर हासिल करने की रणनीति अपनाई गई थी।

लेकिन अब फोकस बदल चुका है:

  • मार्जिन की सुरक्षा
  • सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन
  • टिकाऊ प्रॉफिट मॉडल

GoBoult का FY25 प्रदर्शन इसी बदलाव को दर्शाता है।


🔎 आगे की राह

GoBoult के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आयात-निर्भर मटेरियल कॉस्ट, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलती उपभोक्ता मांग भविष्य में दबाव बना सकती हैं।

हालांकि, कंपनी ने यह दिखा दिया है कि संतुलित ग्रोथ और सख्त लागत नियंत्रण के जरिए भी इस बाजार में मजबूती से टिके रहना संभव है।


🏁 निष्कर्ष

जहां wearables बाजार में तेज रफ्तार ग्रोथ अब अतीत की बात हो चुकी है, वहीं GoBoult Audio ने FY25 में यह साबित किया है कि स्थिरता और अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

रेवेन्यू भले धीमी गति से बढ़ा हो, लेकिन मुनाफे में कई गुना उछाल इस बात का संकेत है कि कंपनी ने अपने बिज़नेस मॉडल को सही दिशा में मोड़ दिया है। मौजूदा माहौल में, टिकाऊ और लाभप्रद ग्रोथ ही असली सफलता मानी जा रही है — और GoBoult का प्रदर्शन इसी बदलाव का प्रतीक है।

Read more :💰 Stable Money ने जुटाए $25 मिलियन,

💰 Stable Money ने जुटाए $25 मिलियन,

Stable Money

भारत के तेजी से बढ़ते wealthtech सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग देखने को मिली है। बेंगलुरु आधारित फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Stable Money ने प्री-सीरीज़ C राउंड में $25 मिलियन (लगभग ₹208 करोड़) की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड में कंपनी की वैल्यूएशन $175 मिलियन आंकी गई है, जो इसके बढ़ते बिज़नेस और निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है।

इस निवेश राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया, जबकि इसमें Z47, RTP Global और Fundamentum Partnership जैसे निवेशकों ने भी भाग लिया।


📊 पहले भी जुटा चुकी है $40 मिलियन

यह Stable Money के लिए पहली बड़ी फंडिंग नहीं है। इससे पहले कंपनी करीब $40 मिलियन जुटा चुकी है, जिसमें Fundamentum Partnership Fund, Matrix Partners (अब Z47), RTP Global और Lightspeed India जैसे निवेशकों ने हिस्सा लिया था। लगातार निवेश मिलना इस बात का संकेत है कि कंपनी का बिज़नेस मॉडल निवेशकों को मजबूत और भरोसेमंद लग रहा है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस नई पूंजी का उपयोग तीन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  1. कोर टेक प्लेटफॉर्म को मजबूत करना
  2. सेविंग्स और फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाना
  3. टीम का विस्तार करना

Stable Money अपने प्लेटफॉर्म को और ज्यादा यूज़र-फ्रेंडली और स्केलेबल बनाना चाहती है। इसके साथ ही, कंपनी बैंक और NBFC पार्टनरशिप्स को मजबूत कर ग्राहकों को बेहतर रेट और ज्यादा विकल्प देने की योजना बना रही है।


🏦 क्या करता है Stable Money?

2022 में सौरभ जैन और हरीश रेड्डी द्वारा स्थापित Stable Money एक डिजिटल फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म है। यह यूज़र्स को फिक्स्ड डिपॉजिट, Stable Bonds और अन्य लो-रिस्क इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने की सुविधा देता है।

प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि यहां यूज़र अलग-अलग बैंकों द्वारा ऑफर किए जा रहे फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना कर सकते हैं और एक ही जगह से निवेश व मैनेजमेंट कर सकते हैं। यानी पारंपरिक बैंकिंग के झंझट से बाहर निकलकर डिजिटल तरीके से सुरक्षित रिटर्न कमाने का विकल्प।


🗣 फाउंडर्स का क्या कहना है?

कंपनी के को-फाउंडर्स सौरभ जैन और हरीश रेड्डी का कहना है:

“पिछले कुछ वर्षों में हमें सबसे ज्यादा खुशी इस बात से मिली है कि लाखों भारतीय परिवार बिना किसी समझौते के डिजिटल तरीके से अपनी सेविंग्स मैनेज कर रहे हैं। हम अपने निवेशकों के आभारी हैं, जिनका हमारे विजन पर लगातार भरोसा बना हुआ है। यह फंडिंग इस मिशन में दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाती है कि हम भारत के लिए एक भरोसेमंद और आधुनिक सेविंग्स प्लेटफॉर्म बना सकें।”


🌍 बैंक और NBFC के साथ गहरी साझेदारी

Stable Money का अगला फोकस बैंकों और NBFCs के साथ डायरेक्ट पार्टनरशिप को मजबूत करना है। कंपनी स्थापित और उभरते दोनों प्रकार के वित्तीय संस्थानों के साथ काम कर रही है ताकि:

  • ग्राहकों को बेहतर ब्याज दरें मिल सकें
  • रेट डिस्कवरी ज्यादा स्मार्ट हो
  • नए इनोवेटिव प्रोडक्ट लॉन्च किए जा सकें

इसके अलावा कंपनी भारत के प्रमुख शहरों में अपनी ऑन-ग्राउंड उपस्थिति भी बढ़ा रही है ताकि ग्राहकों के साथ फेस-टू-फेस रिलेशनशिप बनाई जा सके।


📈 40 लाख यूज़र्स और ₹5,000 करोड़ से अधिक निवेश

Stable Money का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर 40 लाख से अधिक यूज़र्स जुड़ चुके हैं। इन यूज़र्स ने अब तक ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश फिक्स्ड डिपॉजिट, Stable Bonds और अन्य सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट्स में किया है।

यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय निवेशक अब पारंपरिक बैंक ब्रांच के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा करने लगे हैं, खासकर जब बात सुरक्षित और स्थिर रिटर्न की हो।


💹 वित्तीय प्रदर्शन: रेवेन्यू में जबरदस्त उछाल

मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में Stable Money ने ₹104 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया। यह FY24 के ₹1.3 करोड़ की तुलना में कई गुना अधिक है — यानी कंपनी ने एक साल में जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है।

हालांकि, इसी अवधि में कंपनी का घाटा भी बढ़ा है। FY25 में कंपनी का लॉस ₹44.8 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹12.8 करोड़ से अधिक है। यह दर्शाता है कि कंपनी फिलहाल ग्रोथ और एक्सपेंशन पर ज्यादा खर्च कर रही है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम में यह आम बात है कि शुरुआती चरण में कंपनियां तेज ग्रोथ के लिए निवेश करती हैं और मुनाफा बाद के चरण में लक्ष्य बनता है।


🔎 क्या कहता है यह निवेश?

Stable Money की यह फंडिंग कई संकेत देती है:

  • भारत में फिक्स्ड इनकम और सुरक्षित निवेश की मांग मजबूत है
  • डिजिटल सेविंग्स प्लेटफॉर्म तेजी से अपनाए जा रहे हैं
  • निवेशक wealthtech सेक्टर में लंबी अवधि का अवसर देख रहे हैं

बढ़ती महंगाई और बाजार की अस्थिरता के बीच, ऐसे प्लेटफॉर्म जो सुरक्षित और स्थिर रिटर्न का वादा करते हैं, निवेशकों और आम ग्राहकों दोनों के लिए आकर्षक बन रहे हैं।


🏁 निष्कर्ष

Stable Money का $25 मिलियन का यह प्री-सीरीज़ C राउंड न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय wealthtech सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। तेज रेवेन्यू ग्रोथ, लाखों यूज़र्स और मजबूत निवेशकों का समर्थन इस स्टार्टअप को आने वाले वर्षों में एक बड़ा खिलाड़ी बना सकता है।

अब देखना होगा कि कंपनी अपने बढ़ते घाटे को कैसे संतुलित करती है और क्या वह भारत के सेविंग्स मार्केट में एक भरोसेमंद डिजिटल ब्रांड के रूप में खुद को स्थापित कर पाती है या नहीं।

Read more :🚀 GenAI स्टार्टअप CraftifAI ने जुटाए $3 मिलियन,

🚀 GenAI स्टार्टअप CraftifAI ने जुटाए $3 मिलियन,

CraftifAI

बेंगलुरु स्थित मल्टी-एजेंट GenAI प्लेटफॉर्म CraftifAI ने अपने Seed Funding राउंड में 3 मिलियन डॉलर (लगभग 27.2 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस निवेश राउंड की अगुवाई Ankur Capital ने की, जबकि इसमें IvyCap Ventures, Capital-A, Antler और अन्य निवेशकों ने भी भागीदारी की।

स्टार्टअप ने प्रेस रिलीज में बताया कि यह ताज़ा फंडिंग मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और गो-टू-मार्केट (GTM) टीम्स में हायरिंग बढ़ाने और ग्लोबल मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।


🧠 क्या करता है CraftifAI?

CraftifAI की स्थापना 2025 में Pratik Sharda और Yashwant Dagar द्वारा की गई थी। यह एक R&D-फोकस्ड कंपनी है, जो Generative AI (GenAI) और Agentic AI आधारित प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है।

कंपनी का फोकस है – Silicon-agnostic प्लेटफॉर्म बनाना। यानी ऐसा AI प्लेटफॉर्म जो किसी खास चिप या हार्डवेयर पर निर्भर न हो, बल्कि अलग-अलग सिस्टम पर आसानी से काम कर सके।

CraftifAI एंबेडेड सिस्टम्स, IoT और Edge AI डिवाइसेज़ के लिए तेज और किफायती डेवलपमेंट सॉल्यूशन देता है। इसका उद्देश्य है कि रोबोटिक्स, ड्रोन और ऑटोमेशन जैसी इंडस्ट्रीज़ में AI मॉडल डेवलपमेंट को आसान और सस्ता बनाया जाए।


⚙️ Edge AI और Embedded Systems पर फोकस

आज के समय में Edge AI तेजी से बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि AI मॉडल सीधे डिवाइस पर चलते हैं, न कि सिर्फ क्लाउड पर। इससे स्पीड बढ़ती है और डेटा प्राइवेसी भी बेहतर रहती है।

CraftifAI का प्लेटफॉर्म एंबेडेड प्रोडक्ट डेवलपमेंट को तेज करता है। कंपनी का दावा है कि उसकी कोर टेक्नोलॉजी एक GenAI और Agentic AI वर्कफ्लो पर आधारित है, जो मॉडल ऑप्टिमाइजेशन, क्वांटाइजेशन और डिप्लॉयमेंट को आसान बनाती है।

सरल शब्दों में कहें तो, यह प्लेटफॉर्म डेवलपर्स को AI मॉडल को जल्दी तैयार करने और डिवाइस पर तैनात (deploy) करने में मदद करता है।


🏭 किन इंडस्ट्रीज़ को टारगेट कर रहा है स्टार्टअप?

CraftifAI मुख्य रूप से इन सेक्टर्स को टारगेट कर रहा है:

  • IoT (Internet of Things)
  • Robotics
  • Surveillance
  • Industrial Automation
  • Autonomous Systems

इन इंडस्ट्रीज़ में हार्डवेयर मैन्युफैक्चरर्स को सॉफ्टवेयर और AI मॉडल बनाने में काफी समय और लागत लगती है। CraftifAI का कहना है कि उसका प्लेटफॉर्म इस प्रक्रिया को तेज बनाता है और Time-to-Market कम करता है।


🔗 Fragmented Toolchains की समस्या का समाधान

Embedded सिस्टम डेवलपमेंट में अक्सर अलग-अलग टूल्स और फ्रेमवर्क्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे डेवलपमेंट प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो जाती है।

CraftifAI का प्लेटफॉर्म इन बिखरे हुए टूलचेन को एक सिंगल AI-ड्रिवन वर्कफ्लो में जोड़ता है। इससे पूरा एंबेडेड सॉफ्टवेयर लाइफसाइकल ऑटोमेट हो जाता है।

प्लेटफॉर्म कई लोकप्रिय फ्रेमवर्क्स को सपोर्ट करता है, जिनमें GStreamer, ROS2, Android और Agentic AI शामिल हैं। इसका मतलब है कि डेवलपर्स को अलग-अलग सिस्टम के लिए अलग से मेहनत नहीं करनी पड़ती।


🌍 ग्लोबल एक्सपेंशन की तैयारी

कंपनी का कहना है कि वह इंजीनियरिंग और GTM टीम्स में हायरिंग बढ़ाकर इंटरनेशनल मार्केट्स में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। AI और Edge टेक्नोलॉजी की ग्लोबल डिमांड तेजी से बढ़ रही है, खासकर रोबोटिक्स और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन में।

Seed Funding के जरिए CraftifAI अपने प्रोडक्ट को और मजबूत करने और नए क्लाइंट्स जोड़ने पर फोकस करेगा।


🤝 पायलट प्रोजेक्ट्स भी शुरू

CraftifAI ने दावा किया है कि उसने कई भारतीय Original Equipment Manufacturers (OEMs) के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स हासिल किए हैं। ये OEMs रोबोटिक्स, ड्रोन, IoT और AI कैमरा जैसे डोमेन में काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, कंपनी ने एक अमेरिकी सूचीबद्ध सेमीकंडक्टर कंपनी के साथ भी पायलट सुरक्षित किया है। यह स्टार्टअप के लिए बड़ा संकेत है कि उसकी टेक्नोलॉजी ग्लोबल लेवल पर भी स्वीकार की जा रही है।


📈 क्यों महत्वपूर्ण है यह फंडिंग?

भारत में AI स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन Embedded AI और Silicon-agnostic प्लेटफॉर्म पर काम करने वाली कंपनियां अभी भी सीमित हैं। CraftifAI का मॉडल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच की खाई को कम करने की कोशिश कर रहा है।

यह फंडिंग इस बात का संकेत है कि निवेशक अब सिर्फ SaaS या कंज्यूमर ऐप्स में ही नहीं, बल्कि डीप-टेक और AI इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप्स में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।


🔮 आगे की राह

CraftifAI का लक्ष्य है कि वह एंबेडेड प्रोडक्ट डेवलपमेंट को पूरी तरह AI-ड्रिवन और ऑटोमेटेड बनाए। यदि कंपनी अपने विज़न को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो यह भारत से निकलकर ग्लोबल Edge AI मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकती है।

3 मिलियन डॉलर की यह शुरुआती फंडिंग कंपनी के लिए सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि CraftifAI अपने टेक प्लेटफॉर्म को किस तेजी से स्केल करता है और कितनी जल्दी बड़े एंटरप्राइज क्लाइंट्स जोड़ पाता है।

भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम लगातार विकसित हो रहा है, और CraftifAI जैसी कंपनियां इस बदलाव की अगली लहर का प्रतिनिधित्व करती हैं। 🚀

Read more :🛡️Udtara Ventures ने लॉन्च किया ₹250 करोड़ का Growth Fund

🛡️Udtara Ventures ने लॉन्च किया ₹250 करोड़ का Growth Fund

Udtara Ventures

भारत में डिफेंस, एयरोस्पेस और डीप-टेक सेक्टर में तेजी से इनोवेशन हो रहा है। इसी मौके को भुनाने के लिए दिल्ली स्थित वेंचर कैपिटल फर्म Udtara Ventures ने ₹250 करोड़ का नया Udtara Growth Fund लॉन्च किया है।

यह फंड खासतौर पर उन ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स में निवेश करेगा जो पेटेंटेड और कमर्शियल तौर पर लागू की जा सकने वाली टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य ऐसे स्टार्टअप्स को मजबूत करना है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और भारत से टेक्नोलॉजी आधारित समाधान दुनिया तक पहुंचा सकें।


🎯 8–10 ग्रोथ स्टेज कंपनियों में निवेश की योजना

Udtara Growth Fund 8 से 10 ग्रोथ स्टेज कंपनियों में निवेश करेगा। ये कंपनियां मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में काम कर रही होंगी:

  • डिफेंस टेक्नोलॉजी
  • एयरोस्पेस
  • ड्यूल-यूज (Dual-Use) टेक्नोलॉजी

ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी का मतलब ऐसी टेक्नोलॉजी से है जिसका इस्तेमाल सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में किया जा सकता है।

फंड उन कंपनियों पर फोकस करेगा जिनका Product Market Fit (PMF) स्थापित हो चुका है और जिनके पास कन्फर्म्ड ऑर्डर बुक है। यानी यह फंड शुरुआती प्रयोगात्मक स्टार्टअप्स में नहीं बल्कि उन कंपनियों में निवेश करेगा जो स्केल-अप फेज में हैं और तेजी से विस्तार करना चाहती हैं।


💰 Equity और Debt का मिश्रण

इस फंड की खास बात यह है कि यह केवल इक्विटी निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। Udtara Ventures कंपनियों को Equity और Debt दोनों का मिश्रण उपलब्ध कराएगा।

इसका फायदा यह होगा कि:

  • कंपनियां कम डायल्यूशन के साथ पूंजी जुटा सकेंगी
  • ग्रोथ के दौरान फाइनेंशियल स्ट्रक्चर मजबूत रहेगा
  • बड़े ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए वर्किंग कैपिटल उपलब्ध रहेगा

डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई-चेन सेटअप के लिए भारी पूंजी की जरूरत होती है। ऐसे में यह हाइब्रिड फाइनेंसिंग मॉडल स्टार्टअप्स के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।


🤝 सिर्फ निवेश नहीं, लंबी अवधि की साझेदारी

Udtara Ventures का कहना है कि वह केवल निवेशक की भूमिका नहीं निभाएगा, बल्कि लंबी अवधि का स्ट्रैटेजिक पार्टनर बनेगा।

फर्म अपनी ऑपरेटिंग एक्सपर्टीज, इंडस्ट्री नेटवर्क और एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटी के जरिए पोर्टफोलियो कंपनियों को सपोर्ट करेगी। इसमें शामिल हैं:

  • मैन्युफैक्चरिंग रेडीनेस
  • सप्लाई-चेन डेवलपमेंट
  • रेगुलेटरी अलाइनमेंट
  • ग्लोबल मार्केट एक्सेस

डिफेंस सेक्टर में रेगुलेटरी अप्रूवल और इंटरनेशनल एक्सपोर्ट परमिशन एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में एक अनुभवी निवेशक का सपोर्ट स्टार्टअप्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।


🌍 प्रोटोटाइप से ग्लोबल एक्सपेंशन तक

फंड का उद्देश्य केवल शुरुआती ग्रोथ तक सीमित नहीं है। Udtara Ventures का कहना है कि वह कंपनियों को एक्सपेरिमेंटेशन और प्रोटोटाइपिंग स्टेज से लेकर ग्लोबल एक्सपेंशन तक सपोर्ट करेगा।

इसके लिए फर्म अपने डोमेन एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्रियल पार्टनर्स और इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का उपयोग करेगी।

यह रणनीति खासतौर पर उन डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए अहम है जिन्हें R&D, टेस्टिंग और बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए समय और पूंजी दोनों की जरूरत होती है।


🇮🇳 भारत से वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियां बनाने का लक्ष्य

Udtara Growth Fund का मुख्य उद्देश्य भारत से ऐसी मिशन-क्रिटिकल कंपनियां बनाना है जो वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना सकें।

फंड का विजन है कि भारतीय टेक्नोलॉजी आधारित समाधान केवल घरेलू जरूरतों को ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग को भी पूरा करें।

यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार ‘Make in India’ और ‘Atmanirbhar Bharat’ पर जोर दे रही है, खासकर डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में।


🏢 2019 में हुई थी Udtara Ventures की शुरुआत

Udtara Ventures की स्थापना 2019 में Ankit Lakhotia द्वारा की गई थी। यह दिल्ली स्थित वेंचर कैपिटल फर्म और मल्टी-फैमिली ऑफिस है, जो हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में सीड और सीरीज A स्टेज पर निवेश करती रही है।

पिछले पांच दशकों से अधिक अनुभव वाले एक बड़े कॉन्ग्लोमरेट का समर्थन इस फर्म को प्राप्त है।

अब तक यह फर्म Fintech, Edtech, SaaS और Consumer Goods जैसे सेक्टर्स में निवेश करती रही है।

इसके पोर्टफोलियो में Eql और Junio जैसी कंपनियां शामिल हैं।


🔄 रणनीति में बड़ा बदलाव

अब तक Udtara Ventures शुरुआती चरण (Seed और Series A) के स्टार्टअप्स में निवेश करता रहा है। लेकिन नए Growth Fund के जरिए फर्म ग्रोथ-स्टेज डीप-टेक और डिफेंस कंपनियों पर फोकस कर रही है।

यह रणनीतिक बदलाव बताता है कि फर्म भारतीय डीप-टेक इकोसिस्टम में उभरते अवसरों को गंभीरता से देख रही है।

डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर में एंट्री बैरियर ऊंचा होता है, लेकिन एक बार कंपनी स्थापित हो जाए तो लंबी अवधि की स्थिरता और बड़े ऑर्डर की संभावना रहती है।


📊 भारत में डीप-टेक निवेश का बढ़ता ट्रेंड

हाल के वर्षों में भारत में डीप-टेक और डिफेंस स्टार्टअप्स में निवेश बढ़ा है। ड्रोन, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए स्टार्टअप्स उभर रहे हैं।

ऐसे में ₹250 करोड़ का यह Growth Fund भारतीय डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत संकेत है कि निवेशक अब लॉन्ग-टर्म और हाई-इम्पैक्ट टेक्नोलॉजी कंपनियों पर दांव लगाने को तैयार हैं।


✍️ निष्कर्ष

Udtara Ventures का ₹250 करोड़ का Growth Fund भारतीय डिफेंस और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। Equity और Debt के मिश्रण, ऑपरेशनल सपोर्ट और ग्लोबल नेटवर्क के साथ यह फंड केवल पूंजी नहीं बल्कि रणनीतिक मार्गदर्शन भी देगा।

अगर यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत से कई मिशन-क्रिटिकल टेक्नोलॉजी कंपनियां उभर सकती हैं, जो वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएंगी। 🚀

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🤖 AI कंसल्टिंग स्टार्टअप Navikenz को $7.5 मिलियन की नई फंडिंग,

Navikenz

भारत में Artificial Intelligence (AI) आधारित सॉल्यूशंस की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी ट्रेंड के बीच AI कंसल्टिंग कंपनी Navikenz ने $7.5 मिलियन (लगभग 62 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग जुटाई है। यह राउंड Sekar PRC और Sudip Nandy द्वारा co-lead किया गया, जबकि कंपनी के मौजूदा निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया।

इससे पहले नोएडा स्थित इस कंपनी ने Sudip Nandy और अन्य निवेशकों से $8 मिलियन की फंडिंग हासिल की थी। अब तक जुटाई गई कुल पूंजी Navikenz को अपने अगले ग्रोथ फेज में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगी।


💰 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से टीम विस्तार और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए किया जाएगा।

AI सेक्टर में टैलेंट की भारी डिमांड है और कंपनियों के लिए स्किल्ड इंजीनियर्स व डेटा साइंटिस्ट्स को हायर करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। Navikenz इस फंडिंग के जरिए:

  • अपनी AI और डेटा साइंस टीम को मजबूत करेगी
  • नए डिजिटल फ्रेमवर्क और प्लेटफॉर्म विकसित करेगी
  • एंटरप्राइज क्लाइंट्स के लिए कस्टम AI सॉल्यूशंस को और बेहतर बनाएगी

कंपनी का फोकस केवल प्रोडक्ट बेचने पर नहीं बल्कि क्लाइंट्स के साथ लंबी अवधि की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनरशिप बनाने पर है।


🚀 2020 में हुई थी शुरुआत

Navikenz की स्थापना 2020 में Anjan Lahiri और Samit Deb ने की थी। दोनों फाउंडर्स का टेक और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में लंबा अनुभव रहा है।

कंपनी का उद्देश्य एंटरप्राइजेज को AI-ड्रिवन सॉल्यूशंस अपनाने में मदद करना है ताकि वे अपने बिजनेस प्रोसेस को अधिक कुशल, डेटा-आधारित और ऑटोमेटेड बना सकें।

Navikenz का मानना है कि केवल मशीन लर्निंग ही पर्याप्त नहीं है — मानव अनुभव और इंट्यूशन को भी टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा जाना चाहिए। यही इसकी रणनीति का मुख्य आधार है।


🧠 कौन-कौन से AI सॉल्यूशंस देती है कंपनी?

Navikenz विभिन्न इंडस्ट्रीज के लिए AI-आधारित सॉल्यूशंस प्रदान करती है। इसके प्रमुख प्रोडक्ट और फ्रेमवर्क हैं:

  • RetailBOT – रिटेल कंपनियों के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने का टूल
  • HR Data Analytics – HR प्रोसेस को डेटा से बेहतर बनाने के लिए
  • Spend Analytics – खर्चों के विश्लेषण और ऑप्टिमाइजेशन के लिए
  • NaviKATOR Methodology – डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए कंपनी की खुद की प्रोपाइरटरी मेथडोलॉजी

इन सॉल्यूशंस के जरिए कंपनियां अपने ऑपरेशंस को स्मार्ट, ऑटोमेटेड और कॉस्ट-एफिशिएंट बना सकती हैं।


🌍 भारत से अमेरिका तक मौजूदगी

Navikenz के करीब 250 कर्मचारी हैं और इसके ऑफिस नोएडा और बेंगलुरु में स्थित हैं। इसके अलावा कंपनी की मौजूदगी Princeton, New Jersey (अमेरिका) में भी है।

यह इंटरनेशनल प्रेजेंस कंपनी को ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ काम करने और नए मार्केट्स में एंट्री लेने में मदद करती है।

स्टार्टअप का दावा है कि वह फार्मा और लाइफ साइंसेज सेक्टर की टॉप तीन कंपनियों के साथ काम कर रही है। इसके अलावा कंपनी इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर के क्लाइंट्स को भी सर्विस देती है।


📈 रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी

Navikenz ने अपने पहले साल में ही $1 मिलियन से अधिक का रेवेन्यू जनरेट किया था। कंपनी का दावा है कि उसने हर साल अपना रेवेन्यू दोगुना किया है।

मार्च 31, 2024 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी ने 17.2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी अपने तीसरे वर्ष में EBITDA पॉजिटिव हो गई थी और उसी साल की अंतिम तिमाही में प्रॉफिट भी दर्ज किया।

आज के स्टार्टअप इकोसिस्टम में जहां कई कंपनियां लंबे समय तक घाटे में रहती हैं, वहां Navikenz का शुरुआती वर्षों में ही लाभप्रद बनना निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत है।


🏗️ Pod Structure मॉडल पर काम

Navikenz का ऑपरेटिंग मॉडल भी काफी अलग है। कंपनी “Pod Structure” पर काम करती है।

इस मॉडल में छोटी-छोटी एक्सपर्ट टीम्स बनाई जाती हैं, जिनमें कंसल्टिंग, आर्किटेक्चर और इम्प्लीमेंटेशन स्किल्स शामिल होती हैं।

इसका फायदा यह होता है कि:

  • क्लाइंट को एंड-टू-एंड सॉल्यूशन मिलता है
  • प्रोजेक्ट डिलीवरी तेज और एफिशिएंट होती है
  • कस्टमाइजेशन बेहतर तरीके से किया जा सकता है

यह स्ट्रक्चर एंटरप्राइज AI प्रोजेक्ट्स के लिए काफी प्रभावी माना जाता है।


📊 AI कंसल्टिंग मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत में AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी IT सर्विस कंपनियां भी AI में भारी निवेश कर रही हैं।

ऐसे माहौल में Navikenz जैसे स्पेशलाइज्ड AI कंसल्टिंग स्टार्टअप्स के लिए अवसर भी हैं और प्रतिस्पर्धा भी।

कंपनी का फोकस निचे (niche) एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और डोमेन-ड्रिवन AI एप्लिकेशन पर है, जो इसे पारंपरिक IT कंपनियों से अलग बनाता है।


🔮 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के साथ Navikenz अब:

  • अपने टेक प्लेटफॉर्म को स्केल करेगी
  • नए इंडस्ट्री वर्टिकल्स में एंट्री ले सकती है
  • ग्लोबल क्लाइंट बेस को मजबूत करेगी
  • AI फ्रेमवर्क और ऑटोमेशन टूल्स को और उन्नत बनाएगी

यदि कंपनी अपनी ग्रोथ रफ्तार बनाए रखती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के उभरते AI कंसल्टिंग लीडर्स में शामिल हो सकती है।


✍️ निष्कर्ष

Navikenz की यह $7.5 मिलियन की फंडिंग केवल पूंजी जुटाने की खबर नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारतीय AI कंसल्टिंग सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

रेवेन्यू ग्रोथ, शुरुआती प्रॉफिटेबिलिटी और मजबूत एंटरप्राइज क्लाइंट बेस के साथ Navikenz एक ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब कंपनियां तेजी से AI अपनाने की ओर बढ़ रही हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह स्टार्टअप अपने AI-ड्रिवन विजन को किस तरह अगले स्तर तक ले जाता है। 🚀

Read more :Fibe की FY25 में दमदार ग्रोथ 🚀

Fibe की FY25 में दमदार ग्रोथ 🚀

Fibe

कंज्यूमर लेंडिंग प्लेटफॉर्म Fibe (पूर्व में EarlySalary) ने FY25 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। हाल ही में International Finance Corporation (IFC) के नेतृत्व में 35 मिलियन डॉलर की Series F फंडिंग जुटाने वाली इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 50% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है।

हालांकि इस नई फंडिंग का पूरा असर FY26 में दिखेगा, लेकिन FY25 के आंकड़े ही यह संकेत दे रहे हैं कि Fibe लगातार स्केल और मुनाफे दोनों में आगे बढ़ रही है।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Fibe का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में 49% बढ़कर 1,228 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो FY24 में 824 करोड़ रुपये था।


📊 1,000 करोड़ पार सिर्फ ब्याज से कमाई

Fibe की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत रहा — लोन पर मिलने वाला ब्याज।

  • कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 80% से ज्यादा हिस्सा
  • FY25 में ब्याज आय 46% बढ़ी
  • 1,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार

कंपनी पर्सनल लोन, लॉन्ग-टर्म लोन, म्यूचुअल फंड के खिलाफ लोन और हेल्थकेयर, एजुकेशन व सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन के लिए फाइनेंसिंग उपलब्ध कराती है।

2015 में अक्षय मेहरोत्रा और आशीष गोयल द्वारा स्थापित Fibe अब तक 90 लाख से ज्यादा लोन डिस्बर्स कर चुकी है। कंपनी का दावा है कि 8,500 से अधिक लेंडर्स के जरिए 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कुल डिस्बर्समेंट किया गया है।


🤝 बैंक और NBFC पार्टनरशिप से मजबूती

Fibe ने कई बैंकों और NBFCs के साथ साझेदारी की है, जिनमें Northern Arc Capital, InCred Finance और Tata Capital शामिल हैं।

कंपनी लेंडिंग पार्टनर्स की ओर से लोन कलेक्शन और एडमिनिस्ट्रेशन संभालती है, जिससे उसे सर्विसिंग फीस इनकम भी मिलती है।

इसके अलावा, गारंटी प्रीमियम से हुई कमाई — यानी डिफॉल्ट प्रोटेक्शन के लिए वसूली गई फीस — FY25 में 83% बढ़कर 104 करोड़ रुपये रही।

बाकी आय मार्केटिंग इनकम, कमीशन और अन्य ऑपरेटिंग स्रोतों से आई।


💸 कुल आय 1,269 करोड़ रुपये

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा, Fibe ने 41 करोड़ रुपये नॉन-ऑपरेटिंग स्रोतों (जैसे ब्याज आय और निवेश बिक्री से लाभ) से भी कमाए।

इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय 1,269 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


📉 खर्च में भी तेज बढ़ोतरी

जहां रेवेन्यू बढ़ा, वहीं खर्च भी तेजी से बढ़े।

सबसे बड़ा खर्च रहा — फाइनेंस कॉस्ट।

  • FY25 में फाइनेंस कॉस्ट: 691 करोड़ रुपये
  • कुल खर्च का 62% से अधिक हिस्सा
  • FY24 में 373 करोड़ से बढ़कर 85% की वृद्धि

इसमें 257 करोड़ रुपये लोन राइट-ऑफ और 207 करोड़ रुपये गारंटी लॉस शामिल थे।

यह दर्शाता है कि लेंडिंग बिजनेस में रिस्क फैक्टर अभी भी अहम भूमिका निभाता है।


📢 मार्केटिंग और कर्मचारियों पर खर्च

विज्ञापन और प्रमोशन पर कंपनी ने 128 करोड़ रुपये खर्च किए।

कर्मचारी लाभ खर्च 34% बढ़कर 111 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 9.2 करोड़ रुपये ESOP खर्च शामिल थे।

कमीशन, लीगल, प्रोफेशनल फीस, ट्रैवल और अन्य खर्चों को मिलाकर कुल व्यय FY25 में 1,112 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो FY24 में 706 करोड़ रुपये था।


🎉 मुनाफा 13% बढ़कर 114 करोड़

तेजी से बढ़ते खर्चों के बावजूद Fibe ने मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की।

FY25 में कंपनी का शुद्ध लाभ 13% बढ़कर 114 करोड़ रुपये हो गया।

FY24 में यह आंकड़ा 101 करोड़ रुपये के आसपास था।

नॉन-ऑपरेटिंग इनकम में वृद्धि (18 करोड़ से बढ़कर 41 करोड़) ने मुनाफा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।


📈 यूनिट इकॉनॉमिक्स क्या कहती है?

FY25 में Fibe ने 1 रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू कमाने के लिए 0.91 रुपये खर्च किए।

यह संकेत देता है कि कंपनी की यूनिट इकॉनॉमिक्स सकारात्मक दिशा में है।

मार्च 2025 तक कंपनी की कुल करंट एसेट्स 3,135 करोड़ रुपये थीं।

इसमें 259 करोड़ रुपये कैश और बैंक बैलेंस शामिल हैं — जो मजबूत लिक्विडिटी पोजिशन को दर्शाता है।


💵 अब तक 265 मिलियन डॉलर जुटाए

Fibe अब तक 265 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुकी है।

  • 90 मिलियन डॉलर की Series E (TR Capital, Trifecta Capital, Amara Partners के नेतृत्व में)
  • 35 मिलियन डॉलर की हालिया Series F (IFC के नेतृत्व में)
  • अगस्त में 250 करोड़ रुपये का डेट फंडिंग

यह पूंजी कंपनी को FY26 में और आक्रामक विस्तार की ताकत दे सकती है।


🔍 FundingRaised Insight: क्या Fibe बन रही है अगली फिनटेक दिग्गज?

Fibe की FY25 रिपोर्ट एक दिलचस्प कहानी बताती है —

✔ मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ
✔ ब्याज आय में स्थिरता
✔ बढ़ती पार्टनरशिप
✔ डबल डिजिट प्रॉफिट

हालांकि फाइनेंस कॉस्ट और लोन राइट-ऑफ अभी भी बड़ा जोखिम हैं, लेकिन 114 करोड़ का मुनाफा यह दिखाता है कि कंपनी जोखिम और ग्रोथ के बीच संतुलन बना रही है।

IFC की एंट्री से Fibe की विश्वसनीयता और बढ़ी है।

अगर कंपनी डिफॉल्ट रेट को नियंत्रित रखते हुए लेंडिंग पोर्टफोलियो का विस्तार करती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के डिजिटल लेंडिंग सेक्टर की अग्रणी कंपनियों में शामिल हो सकती है।


🚀 निष्कर्ष

FY25 Fibe के लिए ग्रोथ और स्थिरता दोनों का साल रहा।

1,200 करोड़ से ज्यादा ऑपरेटिंग रेवेन्यू, 114 करोड़ का मुनाफा और 35 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग — ये संकेत हैं कि कंपनी मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है।

अब नजर FY26 पर रहेगी, जहां IFC की फंडिंग का असली असर दिखेगा।

Indian fintech ecosystem में Fibe की यह रफ्तार आने वाले समय में और बड़ी कहानी लिख सकती है। 💰📈

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Kutumb

Tiger Global समर्थित कम्युनिटी सोशल प्लेटफॉर्म Kutumb ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी की ऑपरेटिंग स्केल 2.7 गुना बढ़ी है और सबसे बड़ी बात — यह स्टार्टअप अब मुनाफे में आ गया है।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Kutumb का ऑपरेशंस से रेवेन्यू FY25 में 173% बढ़कर 128.6 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो FY24 में 47.2 करोड़ रुपये था।

यह तेज उछाल मुख्य रूप से इसके सोशल मीडिया ऐप Crafto से आने वाली सब्सक्रिप्शन इनकम की वजह से हुआ है।


🚀 क्या करती है Kutumb?

साल 2020 में स्थापित Kutumb एक मल्टीलिंगुअल कम्युनिटी सोशल प्लेटफॉर्म है। कंपनी सोशल, एस्ट्रोलॉजी, लाइफस्टाइल और यूटिलिटी कैटेगरी में कई ऐप्स ऑपरेट करती है।

इसके पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • Crafto
  • Zuno
  • Tarot99
  • Astro99
  • Digi God
  • Piku
  • Digital Baby

इनमें से Crafto कंपनी का सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर बनकर उभरा है।


✨ Crafto से आई असली तेजी

Crafto एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां यूजर्स रीजनल भाषाओं में पर्सनलाइज्ड कोट्स और शुभकामनाएं (wishes) बना और शेयर कर सकते हैं।

यूजर्स WhatsApp जैसे सोशल ऐप्स पर इन कोट्स को शेयर करते हैं।

Crafto की पेड सब्सक्रिप्शन सर्विस ने FY25 में जबरदस्त ग्रोथ दिखाई, जिससे Kutumb का रेवेन्यू 173% बढ़ गया।

कंपनी का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से दो स्तंभों पर आधारित है:

  1. सोशल मीडिया एनेबलर ऐप्स की सब्सक्रिप्शन
  2. प्लेटफॉर्म पर एडवर्टाइजिंग सर्विस

💰 कुल आय 146.7 करोड़ रुपये

Kutumb ने सिर्फ ऑपरेटिंग रेवेन्यू से ही नहीं, बल्कि नॉन-ऑपरेटिंग इनकम से भी कमाई की।

कंपनी ने ब्याज आय (Interest Income) जैसे स्रोतों से 18 करोड़ रुपये कमाए।

इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय बढ़कर 146.7 करोड़ रुपये हो गई।


📢 खर्च में भी तेज बढ़ोतरी

हालांकि रेवेन्यू में तेज वृद्धि हुई, लेकिन खर्च भी बढ़े।

सबसे बड़ा खर्च विज्ञापन और प्रमोशन पर हुआ।

  • FY25 में एडवरटाइजिंग और प्रमोशनल खर्च 84.6 करोड़ रुपये रहा।
  • यह कुल खर्च का 62% से ज्यादा है।
  • FY24 के मुकाबले यह 2.8 गुना बढ़ा।

कंपनी ने यूजर एक्विजिशन और ब्रांड बिल्डिंग पर आक्रामक निवेश किया।


👩‍💻 कर्मचारियों पर खर्च

कर्मचारी लाभ (Employee Benefits) खर्च भी 2.4 गुना बढ़कर 27.7 करोड़ रुपये हो गया।

इसमें 11.63 करोड़ रुपये ESOP और ESPP खर्च शामिल थे, जो नॉन-कैश नेचर के होते हैं।

टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भी 15% बढ़कर 18 करोड़ रुपये पहुंच गया।


📊 कुल खर्च दोगुना

बेंगलुरु स्थित इस कंपनी का कुल खर्च FY25 में बढ़कर 135.8 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 63 करोड़ रुपये था।

हालांकि, रेवेन्यू की ग्रोथ खर्च से ज्यादा रही — और यही कंपनी को मुनाफे में ले आई।


🎉 12 करोड़ रुपये का मुनाफा

FY24 में 3 करोड़ रुपये का घाटा उठाने वाली Kutumb ने FY25 में 12 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (Net Profit) दर्ज किया।

इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने ‘Indicorn’ स्टेटस हासिल किया।

Indicorn शब्द Titan Capital द्वारा गढ़ा गया है और इसका मतलब है — 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक रेवेन्यू और मुनाफा कमाने वाला भारतीय स्टार्टअप।


📈 मार्जिन और रेशियो में सुधार

कंपनी का ROCE और EBITDA मार्जिन भी बेहतर हुआ।

  • ROCE: -3.77%
  • EBITDA मार्जिन: -5.54%

यूनिट इकॉनॉमिक्स के स्तर पर, FY25 में Kutumb ने 1 रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू कमाने के लिए 1.06 रुपये खर्च किए।

यह संकेत देता है कि कंपनी ब्रेक-ईवन के करीब है और आने वाले समय में मार्जिन और बेहतर हो सकते हैं।


💼 बैलेंस शीट की स्थिति

मार्च 2025 तक कंपनी की कुल करंट एसेट्स 150.5 करोड़ रुपये थीं।

इसमें 10.5 करोड़ रुपये कैश और बैंक बैलेंस के रूप में मौजूद थे।

मजबूत कैश पोजीशन कंपनी को भविष्य की ग्रोथ योजनाओं में मदद कर सकती है।


💸 अब तक 28.5 मिलियन डॉलर जुटाए

Kutumb अब तक लगभग 28.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुका है।

इसके निवेशकों में शामिल हैं:

  • Tiger Global
  • Quiet Capital
  • Peak XV Partners
  • Rocketship.vc

जून 2021 में कंपनी ने 26 मिलियन डॉलर की Series A फंडिंग जुटाई थी, जिसके बाद इसका वैल्यूएशन करीब 170 मिलियन डॉलर आंका गया था।


🌈 नए सेगमेंट में एंट्री

हाल ही में Kutumb ने ऑनलाइन डेटिंग सेगमेंट में भी कदम रखा है।

कंपनी ने Polo नाम से एक डेडिकेटेड गे डेटिंग ऐप लॉन्च किया है।

यह कदम दिखाता है कि कंपनी सोशल और कम्युनिटी स्पेस में अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रही है।


🔍 आगे की राह

Kutumb के लिए FY25 एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है।

2.7 गुना स्केल ग्रोथ और मुनाफे में वापसी यह संकेत देती है कि कंपनी का सब्सक्रिप्शन मॉडल काम कर रहा है।

हालांकि, विज्ञापन खर्च अभी भी बड़ा हिस्सा है, लेकिन अगर यूजर बेस स्थिर और लॉयल बना रहता है, तो भविष्य में मार्केटिंग खर्च का प्रतिशत कम हो सकता है।

सोशल और कम्युनिटी ऐप्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कड़ी है, लेकिन रीजनल कंटेंट और पर्सनलाइजेशन पर फोकस Kutumb को अलग पहचान देता है।

कुल मिलाकर, Crafto की सफलता ने Kutumb को घाटे से मुनाफे तक पहुंचा दिया है। अब देखना होगा कि कंपनी आने वाले वर्षों में अपने ‘Indicorn’ स्टेटस को बनाए रखते हुए यूनिकॉर्न क्लब की ओर कदम बढ़ा पाती है या नहीं। 🚀

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💰 AI से बदलेगा निवेश का खेल! Otto Money ने जुटाए $1.3 Million

Otto Money

भारत के तेजी से बढ़ते वेल्थटेक (Wealthtech) सेक्टर में एक और नया स्टार्टअप चर्चा में आ गया है। AI-powered वेल्थ गाइडेंस प्लेटफॉर्म Otto Money ने प्री-सीड राउंड में 1.3 मिलियन डॉलर (करीब 10–11 करोड़ रुपये) की फंडिंग जुटाई है। इस राउंड को Pravega Ventures ने लीड किया।

इसके अलावा एंजेल इन्वेस्टर्स में Rishi Kohli (Jio BlackRock AMC), अमित गुप्ता, अमित अग्रवाल और मोहित आरोन सहित कई मौजूदा निवेशकों ने भी भाग लिया।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत में रिटेल इन्वेस्टर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और लोग म्यूचुअल फंड, स्टॉक्स और अन्य एसेट क्लास में सक्रिय रूप से निवेश कर रहे हैं।


🚀 फंडिंग का पैसा कहां होगा इस्तेमाल?

Otto Money ने कहा है कि अगले 12–18 महीनों में यह पूंजी मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में खर्च की जाएगी:

  • अपने AI मॉडल्स को और मजबूत बनाना
  • पर्सनलाइजेशन फीचर्स को बेहतर करना
  • गोल-बेस्ड एडवाइजरी कैपेबिलिटी बढ़ाना
  • इंजीनियरिंग और डेटा साइंस टीम का विस्तार
  • टियर-1 शहरों में गो-टू-मार्केट रणनीति को तेज करना

स्टार्टअप का फोकस सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं, बल्कि यूजर एक्सपीरियंस और स्केलेबल ग्रोथ पर भी है।


🧠 कौन हैं Otto Money के फाउंडर्स?

Otto Money की स्थापना 2025 में अपूर्व गुप्ता और अंकुर लाहोटी ने की थी।

दोनों फाउंडर्स का मानना है कि भारत में रिटेल निवेशक तेजी से डिजिटल हो रहे हैं, लेकिन उन्हें डेटा-ड्रिवन और unbiased फाइनेंशियल गाइडेंस की कमी महसूस होती है।

यही वजह है कि Otto Money खुद को एक AI-powered wealth guidance platform के रूप में पेश कर रहा है, जो निवेशकों को समझदारी से फैसले लेने में मदद करे।


🤖 क्या है Otto Money का मॉडल?

Otto Money का मॉडल पारंपरिक फाइनेंशियल एडवाइजरी से थोड़ा अलग है।

यह प्लेटफॉर्म खुद कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट (जैसे म्यूचुअल फंड या इंश्योरेंस) नहीं बेचता।

बल्कि यह मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो गाइडेंस देता है — यानी स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड्स जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करने वाले यूजर्स को डेटा के आधार पर सुझाव देता है।

इसका उद्देश्य है:

  • इनफॉर्मेशन गैप को कम करना
  • पोर्टफोलियो का एकीकृत व्यू देना
  • रिएक्टिव (भावनात्मक) निवेश फैसलों से बचाना

आज के समय में कई निवेशक सोशल मीडिया या ट्रेंड के आधार पर निवेश करते हैं। Otto Money इस समस्या को AI के जरिए हल करना चाहता है।


📊 वेल्थटेक सेक्टर में बढ़ रही है रफ्तार

भारत का वेल्थटेक सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है।

Entrackr के डेटा के मुताबिक, 2024 और 2025 के दौरान भारतीय वेल्थटेक स्टार्टअप्स ने 51 डील्स के जरिए 634 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटाई।

सिर्फ इस साल की बात करें तो:

  • AssetPlus ने Nexus Venture Partners के नेतृत्व में 19.3 मिलियन डॉलर जुटाए।
  • Wint Wealth ने Vertex Ventures Southeast Asia & India के नेतृत्व में 28 मिलियन डॉलर की Series B फंडिंग हासिल की।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि निवेशक इस सेक्टर में बड़ी संभावनाएं देख रहे हैं।


📱 डिजिटल निवेशकों पर फोकस

Otto Money खासतौर पर उन निवेशकों को टारगेट कर रहा है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव हैं।

आज की युवा पीढ़ी मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए निवेश कर रही है, लेकिन उनके पास हमेशा प्रोफेशनल गाइडेंस नहीं होती।

Otto का लक्ष्य है कि AI की मदद से हर निवेशक को ऐसा अनुभव दिया जाए जैसे उसके पास अपना पर्सनल वेल्थ एडवाइजर हो।


🏙️ टियर-1 शहरों में विस्तार की तैयारी

फिलहाल Otto Money शुरुआती डिप्लॉयमेंट फेज में है।

कंपनी आने वाले कुछ वर्षों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना बना रही है।

टियर-1 शहरों में निवेशकों की संख्या और टिकट साइज दोनों ज्यादा होते हैं, इसलिए यहां विस्तार कंपनी के लिए अहम कदम होगा।


🔍 AI + Wealth = भविष्य का फॉर्मूला?

वेल्थ मैनेजमेंट इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

AI न सिर्फ डेटा एनालिसिस तेज करता है, बल्कि यह यूजर के निवेश व्यवहार, रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल गोल्स के आधार पर कस्टमाइज्ड सुझाव दे सकता है।

अगर Otto Money अपने AI मॉडल्स को मजबूत करने में सफल रहता है, तो यह पारंपरिक एडवाइजरी मॉडल को चुनौती दे सकता है।


📈 आगे की राह

Otto Money अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन सही निवेशकों का समर्थन और मजबूत टेक्नोलॉजी विजन इसे आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।

भारत में रिटेल निवेशकों की संख्या हर साल बढ़ रही है, डीमैट अकाउंट्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं और लोग अब सिर्फ बचत नहीं, बल्कि स्मार्ट इन्वेस्टमेंट पर फोकस कर रहे हैं।

ऐसे में Otto Money जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़ा मौका है।

हालांकि प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। कई वेल्थटेक और फिनटेक कंपनियां पहले से बाजार में मौजूद हैं। ऐसे में Otto को अपनी अलग पहचान बनानी होगी — खासकर भरोसे, डेटा सटीकता और यूजर एक्सपीरियंस के मामले में।

कुल मिलाकर, 1.3 मिलियन डॉलर की यह प्री-सीड फंडिंग दिखाती है कि निवेशक AI-ड्रिवन वेल्थ गाइडेंस मॉडल पर भरोसा कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि Otto Money आने वाले 12–18 महीनों में अपने वादों को कितना सफलतापूर्वक पूरा कर पाता है और क्या यह भारत के वेल्थटेक सेक्टर में अगला बड़ा नाम बन पाएगा। 🚀

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🚀 AI Data Center C2i Semiconductors ने जुटाए $15 Million

C2i Semiconductors

भारत के सेमीकंडक्टर और डीपटेक इकोसिस्टम से एक बड़ी खबर सामने आई है। बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप C2i Semiconductors ने 15 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये) की ताजा फंडिंग हासिल की है। इस राउंड को Peak XV Partners ने लीड किया, जबकि Yali Deeptech और TDK Ventures ने भी निवेश किया।

AI डेटा सेंटर की बढ़ती डिमांड के बीच यह डील काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी पावर मैनेजमेंट में ऐसी टेक्नोलॉजी ला रही है जो डेटा सेंटर की बिजली खपत को कम कर सकती है और परफॉर्मेंस बढ़ा सकती है।


💰 पहले भी मिल चुका है निवेश, अब तेज होगी रफ्तार

C2i ने इससे पहले नवंबर 2024 में 4 मिलियन डॉलर जुटाए थे। अब नई फंडिंग के साथ कंपनी ग्लोबल एक्सपेंशन की तैयारी में है।

कंपनी ने साफ कहा है कि इस कैपिटल का इस्तेमाल:

  • अमेरिका में ऑफिस खोलने
  • बड़े एंटरप्राइज ग्राहकों के करीब जाने
  • ताइवान में इंजीनियरिंग टीम बनाने
  • और ग्लोबल मार्केट में एंट्री मजबूत करने के लिए किया जाएगा

यह कदम दिखाता है कि स्टार्टअप शुरुआत से ही खुद को सिर्फ भारतीय नहीं, बल्कि ग्लोबल प्लेयर के रूप में देख रहा है।


🧠 कौन हैं इसके पीछे के दिमाग?

C2i Semiconductors की स्थापना जून 2024 में अनुभवी टेक लीडर्स ने मिलकर की थी।

इनमें राम अनंत, विक्रम गाखर, प्रीतम ताडेपरथी, दत्तात्रेय सूर्यनारायण, हर्षा एस बी और मुथुसुब्रमणियन एन वी शामिल हैं।

यह टीम पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर डिजाइन में गहरा अनुभव रखती है और अब AI डेटा सेंटर के लिए अगली पीढ़ी के सॉल्यूशंस तैयार कर रही है।


⚡ AI Data Center में बिजली की असली लड़ाई

AI मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए हाई-परफॉर्मेंस GPU और प्रोसेसर की जरूरत होती है। ये सिस्टम बहुत ज्यादा बिजली खपत करते हैं।

यहीं C2i की टेक्नोलॉजी काम आती है। कंपनी का दावा है कि उसकी सिस्टम-लेवल आर्किटेक्चर:

  • 8–10% तक पावर एफिशिएंसी बढ़ा सकती है
  • GPU परफॉर्मेंस लगभग 3% तक सुधार सकती है
  • सर्वर की लाइफ बढ़ा सकती है

AI डेटा सेंटर ऑपरेटर्स के लिए यह बड़ी बात है, क्योंकि बिजली उनकी सबसे बड़ी लागत होती है।


📊 10% एफिशिएंसी का मतलब करोड़ों की बचत

अगर एक सर्वर ट्रे में 10% एफिशिएंसी बढ़ती है, तो लगभग 1 किलोवॉट पावर की बचत हो सकती है।

अब अगर किसी बड़े डेटा सेंटर में हजारों सर्वर लगे हों, तो यह बचत सैकड़ों किलोवॉट तक पहुंच सकती है।

इसका सीधा असर ऑपरेशनल कॉस्ट और ROI (Return on Investment) पर पड़ेगा।

यानी C2i की टेक्नोलॉजी सिर्फ परफॉर्मेंस नहीं बढ़ाती, बल्कि बिजनेस के लिए भी फायदेमंद हो सकती है।


🏭 तेजी से Design से Silicon तक

C2i अब तेजी से अपने प्रोडक्ट्स को बाजार में लाने की तैयारी कर रही है।

  • पहला चिप अप्रैल में “टेपआउट” होगा
  • दूसरा प्रोडक्ट जुलाई में टेपआउट के लिए शेड्यूल है

पहली चिप इज़राइल की Tower Semiconductor में बनेगी, जबकि दूसरी GlobalFoundries में मैन्युफैक्चर होगी, जो सिंगापुर या डलास में हो सकती है।

यह दिखाता है कि कंपनी शुरुआत से ही इंटरनेशनल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क के साथ काम कर रही है।


🌍 AI इंफ्रास्ट्रक्चर में आ रहा है ट्रिलियन डॉलर मौका

मार्केट रिसर्च के मुताबिक, अगले 12–18 महीनों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 500–600 बिलियन डॉलर तक का खर्च हो सकता है।

2030 तक यह आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

इसका मतलब है कि आने वाले सालों में AI डेटा सेंटर, क्लाउड और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में जबरदस्त निवेश होगा।

C2i इसी ग्रोथ वेव को पकड़ने की कोशिश कर रही है।


🤝 बड़े एंटरप्राइज ग्राहकों से बातचीत

कंपनी पहले से ही 3–4 बड़े एंटरप्राइज सर्वर ग्राहकों से बातचीत कर रही है।

इनके साथ मिलकर अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी कंपोनेंट्स डिजाइन किए जा रहे हैं।

अगर ये डील्स फाइनल होती हैं, तो C2i की मार्केट एंट्री और भी मजबूत हो सकती है।


🇮🇳 भारत के डीपटेक इकोसिस्टम के लिए बड़ा संकेत

भारत सरकार सेमीकंडक्टर और AI सेक्टर को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में C2i जैसी कंपनियों का उभरना दिखाता है कि भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स अब ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।

AI की दुनिया में जहां अमेरिका और चीन का दबदबा है, वहीं भारत से निकल रही यह कंपनी पावर मैनेजमेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाना चाहती है।


🔮 आगे क्या?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि C2i अपने प्रोडक्ट्स को समय पर लॉन्च कर पाती है या नहीं और बड़े एंटरप्राइज कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर पाती है या नहीं।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तेज है।

अगर कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक स्केल कर पाती है, तो आने वाले सालों में यह भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर की बड़ी सफलता की कहानी बन सकती है।

कुल मिलाकर, C2i Semiconductors की यह 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग डील बताती है कि भारत का डीपटेक इकोसिस्टम अब सिर्फ सर्विस आधारित नहीं, बल्कि कोर टेक्नोलॉजी और हार्डवेयर इनोवेशन में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 🚀

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