👓 Lenskart Q3 FY26 Results रेवेन्यू 36% बढ़ा,

Lenskart

आईवियर ब्रांड Lenskart ने गुरुवार को FY26 की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ रेवेन्यू में 36% की वृद्धि दर्ज की, बल्कि मुनाफे में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 71 गुना (71X) बढ़कर ₹132.7 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में महज ₹1.85 करोड़ था।


📈 रेवेन्यू ₹2,308 करोड़ पहुंचा

NSE से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Lenskart का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹2,308 करोड़ हो गया, जो Q3 FY25 में ₹1,669 करोड़ था।

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने 36% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।


🇮🇳 भारत से 60% कमाई, 40% अंतरराष्ट्रीय बाजार से

कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार से आता है।

  • भारतीय बाजार से ₹1,385 करोड़ (60%)
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार से ₹936 करोड़ (40%)

इसके अलावा ₹14 करोड़ को इंटर-सेगमेंट रेवेन्यू के रूप में एडजस्ट किया गया।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि Lenskart अब सिर्फ भारतीय ब्रांड नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी बना चुका है।


💰 कुल आय ₹2,348 करोड़

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा कंपनी को ₹40 करोड़ की अन्य आय (Other Income) भी हुई।

इससे Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹2,348 करोड़ हो गई।


📊 नौ महीनों में ₹6,298 करोड़ का रेवेन्यू

दिसंबर 2025 तक समाप्त नौ महीने की अवधि (9M FY26) में Lenskart का कुल रेवेन्यू ₹6,298 करोड़ रहा।

यह पिछले साल की समान अवधि के ₹4,925 करोड़ के मुकाबले 28% अधिक है।

यह संकेत देता है कि कंपनी लगातार ग्रोथ ट्रैक पर बनी हुई है।


💸 खर्चों में भी बढ़ोतरी

तेजी से विस्तार के साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि हुई है।

🏭 कच्चे माल की लागत (Cost of Material)

यह कंपनी का सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल खर्च का 33% है।

  • Q3 FY26 में यह खर्च बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया
  • Q3 FY25 में यह ₹548 करोड़ था
  • यानी 31% की वृद्धि

👩‍💼 कर्मचारी लाभ खर्च

Employee benefit expense में सबसे तेज वृद्धि देखने को मिली।

  • यह 62.5% बढ़कर ₹528 करोड़ हो गया
  • पिछले साल यह ₹325 करोड़ था

यह बढ़ोतरी नए स्टोर्स, टेक टीम विस्तार और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस के कारण मानी जा रही है।

💳 अन्य खर्च

फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे ओवरहेड्स ने भी कुल खर्च में इजाफा किया।

कुल मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹2,163 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही से 28% अधिक है।


🚀 मुनाफे में ऐतिहासिक उछाल

Lenskart की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका मुनाफा रहा।

  • Q3 FY26 में शुद्ध लाभ ₹132.7 करोड़
  • Q3 FY25 में यह केवल ₹1.85 करोड़ था

यानी कंपनी का लाभ 71 गुना बढ़ गया।

तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंपनी का मुनाफा बढ़ा है।

  • Q2 FY26 में लाभ ₹103 करोड़ था
  • Q3 FY26 में यह बढ़कर ₹132.7 करोड़ हो गया
  • यानी 29% की वृद्धि

यह दर्शाता है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्जिन में सुधार हुआ है।


📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज के ट्रेडिंग सेशन के बाद Lenskart का शेयर प्राइस ₹473 प्रति शेयर पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹82,059 करोड़ (करीब $9 बिलियन) आंका गया।

यह वैल्यूएशन Lenskart को भारत की सबसे मूल्यवान कंज्यूमर टेक कंपनियों में शामिल करता है।


🌍 ऑनलाइन से ओमनी-चैनल मॉडल तक

Lenskart ने शुरुआत एक ऑनलाइन आईवियर प्लेटफॉर्म के रूप में की थी, लेकिन अब यह एक मजबूत ओमनी-चैनल ब्रांड बन चुका है।

कंपनी:

  • देशभर में सैकड़ों फिजिकल स्टोर्स चला रही है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही है

इस रणनीति ने उसे स्केल और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों दिलाने में मदद की है।


🔮 आगे की राह

मजबूत तिमाही प्रदर्शन के बाद Lenskart का फोकस अब:

  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार
  • प्राइवेट लेबल और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना
  • टेक्नोलॉजी और AI आधारित विजन टेस्टिंग
  • स्टोर नेटवर्क विस्तार

पर रहेगा।

अगर कंपनी इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह IPO या और बड़े वैश्विक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।


📌 निष्कर्ष

Q3 FY26 में Lenskart ने शानदार प्रदर्शन किया है।

  • 36% रेवेन्यू ग्रोथ
  • 71 गुना मुनाफे में वृद्धि
  • भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलित योगदान
  • मजबूत मार्केट कैप

ये सभी संकेत देते हैं कि कंपनी ग्रोथ के साथ-साथ मुनाफे पर भी फोकस कर रही है।

Lenskart का यह प्रदर्शन भारतीय कंज्यूमर ब्रांड्स के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो दिखाता है कि सही रणनीति और मजबूत ब्रांडिंग के साथ ग्लोबल स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

Read more :👗 Fashion Supply Chain स्टार्टअप Showroom B2B ने जुटाए ₹150 करोड़,

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Showroom

फैशन और अपैरल सेक्टर में काम करने वाली सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Showroom B2B ने अपने Series A फंडिंग राउंड में ₹150 करोड़ (करीब $17 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Cactus Partners ने किया, जिसमें इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण शामिल है।

इस राउंड में नए निवेशक Zephyr Peacock ने भी भाग लिया, जबकि मौजूदा निवेशक Jungle Ventures, Accion Venture Lab और NBD Ventures ने भी कंपनी में दोबारा निवेश किया।


📈 पहले भी जुटा चुकी है $6.5 मिलियन

Showroom B2B ने इससे पहले अक्टूबर 2023 में $6.5 मिलियन का प्री-Series A राउंड जुटाया था। उस दौर का नेतृत्व Jungle Ventures ने किया था, जिसमें Accion Venture Lab समेत अन्य निवेशकों ने हिस्सा लिया था।

नए फंडिंग राउंड के साथ कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि उसका बिज़नेस मॉडल निवेशकों के बीच भरोसेमंद बनता जा रहा है।


💡 फंड का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, ताज़ा जुटाई गई पूंजी का उपयोग कई प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • टेक्नोलॉजी-आधारित सप्लाई चेन को और मजबूत करना
  • बड़े एंटरप्राइज क्लाइंट्स के साथ साझेदारी बढ़ाना
  • मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग क्षमताओं का देशभर में विस्तार
  • प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करना ताकि जटिल सोर्सिंग आवश्यकताओं को मैनेज किया जा सके

विशेष रूप से, यह निवेश बड़े रिटेल चेन और इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों की जटिल मांगों को पूरा करने में मदद करेगा।


🏭 टेक-एनेबल्ड डिजाइन-टू-डिलीवरी मॉडल

गुरुग्राम स्थित Showroom B2B की स्थापना अभिषेक दुआ और शुभम गुप्ता ने की थी। यह एक टेक-एनेबल्ड अपैरल सोर्सिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म है, जो “डिजाइन से डिलीवरी” तक का एकीकृत समाधान प्रदान करता है।

कंपनी संगठित रिटेलर्स, अपैरल ब्रांड्स और बाइंग हाउसेज को सेवाएं देती है — भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी।


👖 कई कैटेगरी में काम

Showroom B2B का प्लेटफॉर्म कई अपैरल कैटेगरी में काम करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • डेनिम
  • निट्स
  • वूवन अपैरल
  • किड्सवियर

कंपनी अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ-साथ ऑडिटेड पार्टनर फैक्ट्री नेटवर्क का उपयोग करती है। इससे गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होती है।


🔗 फैशन सप्लाई चेन में टेक्नोलॉजी का रोल

भारत का फैशन और अपैरल बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी सप्लाई चेन अभी भी काफी हद तक पारंपरिक और बिखरी हुई है।

Showroom B2B टेक्नोलॉजी की मदद से इस सेक्टर में पारदर्शिता, ट्रैकिंग और एफिशिएंसी लाने का प्रयास कर रहा है।

कंपनी का लक्ष्य है:

  • ब्रांड्स को विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर उपलब्ध कराना
  • सोर्सिंग प्रक्रिया को डिजिटल बनाना
  • समय और लागत दोनों में बचत करना

💰 Cactus Partners का 12वां निवेश

यह निवेश Cactus Partners के पहले फंड का 12वां निवेश है।

फरवरी 2024 में Cactus Partners ने अपने पहले फंड का फाइनल क्लोज घोषित किया था। इस फंड का कुल कोष (Corpus) ₹630 करोड़ से अधिक है।

Showroom B2B में निवेश के जरिए Cactus Partners ने फैशन सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।


🌍 ग्लोबल और घरेलू बाजार पर नजर

Showroom B2B का मॉडल भारत के संगठित रिटेल और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड ब्रांड्स दोनों के लिए उपयोगी है।

भारत दुनिया के बड़े टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग हब्स में से एक है। ऐसे में टेक-एनेबल्ड प्लेटफॉर्म की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो ब्रांड्स को विश्वसनीय और स्केलेबल सप्लाई चेन प्रदान कर सके।


🚀 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के बाद कंपनी की रणनीति स्पष्ट है:

  • टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना
  • बड़े रिटेल चेन के साथ गहरे संबंध बनाना
  • उत्पादन क्षमता बढ़ाना
  • जटिल और बड़े ऑर्डर संभालने की क्षमता विकसित करना

अगर कंपनी अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो वह भारतीय फैशन सप्लाई चेन इकोसिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।


📌 निष्कर्ष

Showroom B2B का ₹150 करोड़ का Series A राउंड यह दर्शाता है कि निवेशक भारतीय फैशन सप्लाई चेन सेक्टर में बड़े अवसर देख रहे हैं।

टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मॉडल, मजबूत निवेशक समर्थन और तेजी से बढ़ते फैशन बाजार के साथ, कंपनी के पास आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Showroom B2B किस तरह अपने प्लेटफॉर्म को स्केल करता है और भारतीय व वैश्विक अपैरल ब्रांड्स के लिए एक विश्वसनीय सोर्सिंग पार्टनर के रूप में खुद को स्थापित करता है।

फैशन और टेक्नोलॉजी के इस संगम में Showroom B2B का यह नया निवेश एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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💻 Freshworks Q4 CY25 Results रेवेन्यू 15% बढ़कर $223 मिलियन,

Freshworks

NASDAQ में लिस्टेड SaaS कंपनी Freshworks ने कैलेंडर वर्ष 2025 (CY25) की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में साल-दर-साल (YoY) आधार पर 15% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है।

Q4 CY25 में Freshworks का रेवेन्यू बढ़कर $223 मिलियन पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q4 CY24) में $195 मिलियन था।


📈 तिमाही आधार पर 4% की वृद्धि

NASDAQ में दाखिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंपनी ने हल्की वृद्धि दर्ज की है।

Q3 CY25 में जहां रेवेन्यू $215 मिलियन था, वहीं Q4 में यह बढ़कर $223 मिलियन हो गया — यानी करीब 4% की वृद्धि

यह संकेत देता है कि वैश्विक SaaS बाजार में प्रतिस्पर्धा के बावजूद Freshworks स्थिर और निरंतर ग्रोथ बनाए हुए है।


💰 ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफा

Freshworks के लिए Q4 CY25 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कंपनी ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफे में आ गई।

  • Q4 CY25 में कंपनी ने GAAP ऑपरेटिंग इनकम $40 मिलियन दर्ज की
  • जबकि Q4 CY24 में कंपनी को $24 मिलियन का ऑपरेटिंग घाटा हुआ था

यानी एक साल में कंपनी ने घाटे से मुनाफे की ओर महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

यह बदलाव खर्च नियंत्रण, बेहतर मार्जिन और प्रोडक्ट एफिशिएंसी का परिणाम माना जा रहा है।


📊 पूरे साल 2025 का प्रदर्शन

पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 (CY25) के आंकड़ों पर नजर डालें तो Freshworks का प्रदर्शन और भी मजबूत रहा।

  • FY25 (CY25) में कुल रेवेन्यू $839 मिलियन रहा
  • 2024 में यह $720 मिलियन था
  • यानी साल-दर-साल 16% की वृद्धि

सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने पूरे साल में $13.2 मिलियन का GAAP ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि 2024 में कंपनी को $138.6 मिलियन का घाटा हुआ था।

यह संकेत देता है कि Freshworks अब ग्रोथ के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।


👥 ग्राहक आधार में विस्तार

Freshworks के ग्राहक आधार में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

कंपनी के अनुसार:

  • ऐसे ग्राहकों की संख्या, जो सालाना $5,000 से अधिक का recurring revenue देते हैं,
    10% बढ़कर 24,762 हो गई है।

इसके अलावा, कंपनी का Net Dollar Retention Rate (NDR) भी सुधरा है।

  • Q4 CY25 में NDR 108% रहा
  • Q4 CY24 में यह 103% था

108% का NDR दर्शाता है कि मौजूदा ग्राहक न केवल बने हुए हैं, बल्कि वे अपने खर्च में भी वृद्धि कर रहे हैं।


🤖 AI और अधिग्रहण पर फोकस

Q4 के दौरान Freshworks ने अपनी IT सर्विस मैनेजमेंट क्षमताओं को मजबूत करने के लिए FireHydrant का अधिग्रहण किया।

FireHydrant एक incident management प्लेटफॉर्म है, जिससे Freshworks अपने ITSM पोर्टफोलियो को और मजबूत करना चाहती है।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म:

  • Freshservice
  • Freshdesk

पर नई AI-आधारित फीचर्स लॉन्च किए हैं।

AI इंटीग्रेशन के जरिए कंपनी ग्राहकों को ऑटोमेशन, तेज रिस्पॉन्स टाइम और बेहतर कस्टमर एक्सपीरियंस देने का लक्ष्य रखती है।


👩‍💼 नई CMO की नियुक्ति

कंपनी ने इस तिमाही में Kady Srinivasan को अपना नया Chief Marketing Officer (CMO) नियुक्त किया है।

यह कदम कंपनी की ब्रांड पोजिशनिंग और ग्लोबल मार्केट में विस्तार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


🔮 2026 के लिए गाइडेंस

Freshworks ने आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक अनुमान जारी किया है।

  • मार्च 2026 तिमाही में रेवेन्यू $222–225 मिलियन रहने का अनुमान
  • पूरे वर्ष 2026 के लिए रेवेन्यू $952–960 मिलियन रहने की उम्मीद

यदि यह अनुमान सटीक साबित होते हैं, तो कंपनी पहली बार $1 बिलियन रेवेन्यू के करीब पहुंच सकती है।


🌍 SaaS सेक्टर में मजबूत स्थिति

Freshworks भारत में स्थापित एक ग्लोबल SaaS कंपनी है, जो कस्टमर सपोर्ट, IT सर्विस मैनेजमेंट और CRM सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

कंपनी की प्रतिस्पर्धा Salesforce, Zendesk और ServiceNow जैसे बड़े खिलाड़ियों से है। इसके बावजूद Freshworks का फोकस मिड-मार्केट और SMB सेगमेंट पर रहा है, जिससे उसे अलग पहचान मिली है।


📌 निष्कर्ष

Q4 CY25 के नतीजे दिखाते हैं कि Freshworks अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है — जहां ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों साथ चल रहे हैं।

  • रेवेन्यू में 15% वृद्धि
  • ऑपरेटिंग स्तर पर $40 मिलियन का मुनाफा
  • ग्राहक आधार और रिटेंशन में सुधार
  • AI और अधिग्रहण के जरिए प्रोडक्ट विस्तार

इन सभी संकेतकों से साफ है कि कंपनी अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक लागू कर रही है।

अगर 2026 में कंपनी अपने गाइडेंस के अनुसार प्रदर्शन करती है, तो Freshworks जल्द ही $1 बिलियन रेवेन्यू क्लब के करीब पहुंच सकती है — जो भारतीय मूल की SaaS कंपनियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

Read more :🌾 AgriTech स्टार्टअप BigHaat ने जुटाए $10 मिलियन,

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BigHaat

भारतीय एग्रीटेक कंपनी BigHaat ने अपने लेटेस्ट फंडिंग राउंड में $10 मिलियन (करीब 83 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Bidra Innovation Ventures ने किया, जो कि अमेरिका स्थित OCP Group की वेंचर कैपिटल शाखा है। OCP Group वैश्विक स्तर पर प्लांट न्यूट्रिशन सॉल्यूशंस में अग्रणी कंपनी मानी जाती है।

कंपनी की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस फंडिंग राउंड में मौजूदा निवेशक JM Financial और प्रसिद्ध निवेशक आशीष कचोलिया ने भी भाग लिया।


🤝 OCP Group के साथ रणनीतिक साझेदारी

BigHaat के CEO सतीश नुकाला ने कहा:

“OCP Group के साथ यह साझेदारी हमें भारतीय किसानों तक एडवांस एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस पहुंचाने में मदद करेगी और फार्मिंग इकोसिस्टम में हमारी भूमिका को और मजबूत बनाएगी।”

यह निवेश सिर्फ पूंजी जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक रणनीतिक सहयोग (Strategic Partnership) के रूप में देखा जा रहा है। OCP Group की वैश्विक विशेषज्ञता और BigHaat का स्थानीय किसान नेटवर्क मिलकर भारतीय कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।


📲 डिजिटल फार्मर इकोसिस्टम पर फोकस

कंपनी के अनुसार, यह नई पूंजी BigHaat की उस योजना को समर्थन देगी, जिसके तहत वह अपने डिजिटल किसान-केंद्रित इकोसिस्टम का विस्तार करना चाहती है।

BigHaat का लक्ष्य है:

  • किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बेहतर इनपुट्स उपलब्ध कराना
  • खेती से जुड़े डेटा को ट्रैसेबल बनाना
  • वैश्विक मानकों के अनुरूप (globally compliant) फूड वैल्यू चेन तैयार करना

इसका मतलब है कि खेत से लेकर बाजार तक की पूरी सप्लाई चेन को पारदर्शी और ट्रैकेबल बनाया जाएगा।


🌶️ मसाला वैल्यू चेन में मजबूत पकड़

पिछले कुछ वर्षों में BigHaat ने भारतीय मसाला (Spices) वैल्यू चेन में तेजी से विस्तार किया है।

कंपनी का दावा है कि उसने देश का सबसे बड़ा डायरेक्ट-टू-फार्मर नेटवर्क तैयार किया है। इसके जरिए वह सीधे किसानों के साथ जुड़कर उन्हें बेहतर कृषि इनपुट, तकनीकी सलाह और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराती है।


🌱 ESG और सस्टेनेबिलिटी पर जोर

BigHaat की खासियत यह है कि वह ESG (Environmental, Social, Governance) आधारित खेती और सोर्सिंग प्रैक्टिस अपनाती है।

कंपनी का फोकस है:

  • कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) कम करना
  • ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित करना
  • IPM (Integrated Pest Management) आधारित फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन करना

इससे न केवल किसानों की आय में सुधार होता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की स्वीकार्यता भी बढ़ती है।


🌍 Bidra Innovation Ventures का नजरिया

Bidra Innovation Ventures के CEO यासीन चेरकाउई ने इस साझेदारी को लेकर कहा:

“हमारा मानना है कि कृषि उत्पादकता में स्थायी सुधार स्थानीय स्तर पर विकसित समाधानों से ही संभव है। ऐसे समाधान जो किसानों की आय बढ़ाएं और साथ ही वैश्विक गुणवत्ता, फूड सेफ्टी और पर्यावरण मानकों को पूरा करें।”

इस बयान से साफ है कि यह निवेश दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ किया गया है।


💰 अब तक ₹300 करोड़ की फंडिंग

स्टार्टअप डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, इस राउंड के बाद BigHaat ने अब तक कुल मिलाकर लगभग ₹300 करोड़ की फंडिंग जुटा ली है।

यह फंडिंग कंपनी को टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और इंटरनेशनल मार्केट एक्सपेंशन में मदद करेगी।


📊 FY25 में ₹1,100 करोड़ का रेवेन्यू पार

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो BigHaat ने FY25 में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी ने:

  • ₹1,100 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल किया
  • साथ ही अपनी प्रॉफिटेबिलिटी मैट्रिक्स में सुधार किया

हालांकि विस्तृत मुनाफे के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन कंपनी का दावा है कि उसकी लाभप्रदता (profitability) में सुधार हुआ है।


🚜 भारतीय कृषि में डिजिटल बदलाव

भारत में एग्रीटेक सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, डेटा एनालिटिक्स और सस्टेनेबल फार्मिंग प्रैक्टिस के जरिए किसान अब बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं।

BigHaat का मॉडल इस बदलाव का एक अहम हिस्सा है, जहां:

  • किसान सीधे टेक्नोलॉजी से जुड़ते हैं
  • उन्हें बेहतर क्वालिटी इनपुट्स मिलते हैं
  • और उनकी उपज वैश्विक बाजार तक पहुंच सकती है

🔮 आगे की राह

OCP Group जैसी वैश्विक कंपनी के साथ साझेदारी BigHaat को न केवल वित्तीय मजबूती देगी, बल्कि इंटरनेशनल नेटवर्क और टेक्निकल विशेषज्ञता भी उपलब्ध कराएगी।

आने वाले समय में कंपनी:

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत करेगी
  • ट्रैसेबल फूड वैल्यू चेन बनाएगी
  • और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देगी

अगर कंपनी अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो BigHaat भारतीय एग्रीटेक सेक्टर में एक ग्लोबल प्लेयर के रूप में उभर सकती है।


📌 निष्कर्ष

BigHaat का यह $10 मिलियन फंडिंग राउंड सिर्फ पूंजी जुटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि को अधिक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

₹1,100 करोड़ से अधिक के रेवेन्यू और ₹300 करोड़ की कुल फंडिंग के साथ BigHaat अब एक मजबूत स्थिति में है। OCP Group के सहयोग से कंपनी भारतीय किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती है।

भारतीय एग्रीटेक सेक्टर के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो दिखाता है कि वैश्विक निवेशक अब भारतीय कृषि में बड़े अवसर देख रहे हैं।

Read more :💄 HUL के अधिग्रहण के बाद भी Minimalist की रफ्तार बरकरार,

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Minimalist

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के स्वामित्व वाली D2C स्किनकेयर ब्रांड Minimalist ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। जयपुर स्थित इस कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू साल-दर-साल 48% बढ़कर ₹514.8 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, 46 करोड़ रुपये के एकमुश्त (exceptional) खर्च के कारण कंपनी को शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त समेकित वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY24 में 347.4 करोड़ रुपये रहे रेवेन्यू के मुकाबले FY25 में यह आंकड़ा 514.8 करोड़ रुपये हो गया।


🌿 2020 में हुई शुरुआत, D2C मॉडल पर फोकस

Minimalist की स्थापना वर्ष 2020 में मोहित यादव और राहुल यादव ने की थी। यह ब्रांड स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स जैसे serums, toners, moisturizers आदि पेश करता है।

कंपनी अपने उत्पादों की बिक्री:

  • अपनी आधिकारिक वेबसाइट
  • Amazon
  • Nykaa
  • Flipkart

जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए करती है।

FY25 में कंपनी की पूरी आय केवल प्रोडक्ट सेल्स से आई, जो इसके मजबूत D2C (Direct-to-Consumer) मॉडल को दर्शाती है।


📊 कुल आय ₹517.6 करोड़

ऑपरेशंस से 514.8 करोड़ रुपये के अलावा कंपनी को ₹2.84 करोड़ नॉन-ऑपरेटिंग इनकम भी हुई। इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹517.6 करोड़ तक पहुंच गई।

यह ग्रोथ दर्शाती है कि Minimalist ने भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।


📢 विज्ञापन पर भारी खर्च

Minimalist ने FY25 में अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जमकर खर्च किया।

  • विज्ञापन और प्रमोशन पर ₹154 करोड़ खर्च किए गए
  • यह कंपनी के कुल खर्च का 30% से अधिक है
  • FY24 के मुकाबले इसमें 28% की वृद्धि हुई

D2C ब्रांड्स के लिए डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया प्रमोशन बेहद अहम होता है, और Minimalist ने इसी रणनीति पर जोर बनाए रखा।


🏭 मटेरियल और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च भी बढ़े

रेवेन्यू में बढ़ोतरी के साथ-साथ लागत भी बढ़ी।

  • मटेरियल कॉस्ट 57% बढ़कर ₹146.7 करोड़ हो गई (FY24: ₹93.7 करोड़)
  • डिस्ट्रीब्यूशन खर्च, जिसमें मार्केटप्लेस कमीशन शामिल है, ₹84.3 करोड़ रहा
  • कर्मचारी लाभ खर्च 29% बढ़कर ₹36.8 करोड़ हो गया

इसके अलावा, किराया, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, लीगल और प्रोफेशनल फीस जैसे अन्य ओवरहेड्स पर ₹82 करोड़ खर्च हुए।

इन सभी को मिलाकर FY25 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹504 करोड़ हो गया, जो FY24 में 333.2 करोड़ रुपये था। यानी खर्चों में 51% की वृद्धि दर्ज की गई।


📉 EBITDA पॉजिटिव, लेकिन शुद्ध घाटा

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का EBITDA ₹18 करोड़ पॉजिटिव रहा। यानी ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी लाभ में रही।

हालांकि, 46 करोड़ रुपये के एकमुश्त (exceptional) खर्च के कारण Minimalist को FY25 में ₹31.5 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।

इन exceptional items का विवरण वित्तीय दस्तावेजों में स्पष्ट नहीं किया गया है।


📈 मार्जिन और वित्तीय स्थिति

  • ROCE (Return on Capital Employed): 10.55%
  • EBITDA मार्जिन: 3.45%

FY25 में कंपनी ने हर 1 रुपये की ऑपरेटिंग आय कमाने के लिए ₹0.98 खर्च किए

मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹229 करोड़ के करंट एसेट्स थे, जिनमें से ₹48 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल हैं।


🤝 HUL ने खरीदी 90.5% हिस्सेदारी

जनवरी 2025 में FMCG दिग्गज Hindustan Unilever Limited (HUL) ने Minimalist में 90.5% हिस्सेदारी खरीदी।

यह सौदा ₹2,955 करोड़ (लगभग $350 मिलियन) के प्री-मनी वैल्यूएशन पर हुआ, जो हाल के वर्षों में D2C सेक्टर के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक है।

यह ट्रांजैक्शन FY26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में पूरा होने की उम्मीद है।


💰 निवेशकों की हिस्सेदारी

अधिग्रहण से पहले Minimalist ने कुल $17 मिलियन फंडिंग जुटाई थी।

  • Peak XV ने $15 मिलियन की Series A राउंड लीड की थी
  • Peak XV के पास 27.9% हिस्सेदारी है
  • को-फाउंडर्स मोहित और राहुल यादव के पास 62% हिस्सेदारी थी

🔮 HUL का प्रभाव अभी सीमित

अब तक Minimalist के वित्तीय नतीजों में HUL के अधिग्रहण का कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया है। यह कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है, क्योंकि ब्रांड को स्वतंत्र रूप से काम करने और अपनी रणनीति लागू करने का समय मिल रहा है।

HUL ने इस ब्रांड के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन चुकाया है, जिससे साफ है कि कंपनी Minimalist की ग्रोथ क्षमता पर भरोसा जता रही है।


📌 निष्कर्ष

Minimalist ने FY25 में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई और ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार किया। हालांकि, बढ़ते खर्च और exceptional items के कारण शुद्ध घाटा दर्ज हुआ, लेकिन ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी लाभ में बनी रही।

HUL के अधिग्रहण के बाद Minimalist के पास मजबूत वित्तीय बैकअप और वितरण नेटवर्क का फायदा होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Minimalist अपनी ग्रोथ को स्थायी मुनाफे में बदल पाती है या नहीं।

भारतीय D2C ब्यूटी मार्केट में Minimalist की यह यात्रा फिलहाल तेजी से आगे बढ़ती नजर आ रही है।

Read more :🏢 IndiQube Q3 FY26 Results रेवेन्यू में 45% की तेजी,

🏢 IndiQube Q3 FY26 Results रेवेन्यू में 45% की तेजी,

IndiQube

मैनेज्ड वर्कस्पेस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर IndiQube ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान ऑपरेशनल स्तर पर मजबूत ग्रोथ दर्ज की, लेकिन बढ़ती लागत और फाइनेंस खर्च के कारण उसका घाटा साल-दर-साल (YoY) बढ़ गया।

Ind AS के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45.5% बढ़ा, जबकि घाटे में 21% की वृद्धि दर्ज की गई।


📈 रेवेन्यू 390 करोड़ रुपये पहुंचा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध वित्तीय विवरण के मुताबिक, IndiQube का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर 390 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में 268 करोड़ रुपये था।

इस तरह कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 45% की वृद्धि दर्ज की।

इसके अलावा, कंपनी को नॉन-ऑपरेटिंग सोर्सेस से 21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, जिससे कुल आय Q3 FY26 में बढ़कर 411 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


📊 नौ महीनों में 38% की वृद्धि

अगर पूरे नौ महीने (अप्रैल से दिसंबर अवधि) की बात करें तो बेंगलुरु स्थित IndiQube ने FY26 के पहले नौ महीनों में 1,049 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।

यह पिछले साल की समान अवधि (FY25) में दर्ज 762 करोड़ रुपये के मुकाबले 38% की वृद्धि दर्शाता है।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने मैनेज्ड ऑफिस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मॉडल के जरिए लगातार विस्तार कर रही है।


💼 खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी

जहां एक तरफ कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं दूसरी तरफ खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

👩‍💼 कर्मचारी लाभ खर्च

Q3 FY26 में कर्मचारी लाभ से जुड़े खर्च 34% बढ़कर 23.5 करोड़ रुपये हो गए। यह बढ़ोतरी कंपनी के विस्तार और नए सेंटर्स जोड़ने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

💳 फाइनेंस कॉस्ट

कंपनी का सबसे बड़ा खर्च फाइनेंस कॉस्ट रहा, जो कुल खर्च का करीब 26% हिस्सा है।

यह खर्च Q3 FY26 में बढ़कर 112 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 86 करोड़ रुपये था। यानी इसमें 30% की वृद्धि दर्ज की गई।

🏗️ डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन

इसी तरह, डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन खर्च भी बढ़कर 144 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आमतौर पर नई प्रॉपर्टीज, इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स में निवेश के कारण बढ़ता है।


📉 कुल खर्च 434 करोड़ रुपये

इन सभी कारकों को मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 434 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 313 करोड़ रुपये था।

इस तरह कुल खर्च में साल-दर-साल आधार पर 39% की वृद्धि हुई।


🔻 घाटा 17 करोड़ रुपये

बढ़ते खर्चों के चलते IndiQube का घाटा भी बढ़ा।

Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध घाटा 17 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 14 करोड़ रुपये था। यानी घाटे में 21% की वृद्धि हुई।

हालांकि, एक सकारात्मक संकेत यह है कि तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के घाटे में कमी आई है।

Q2 FY26 में जहां कंपनी का घाटा 30 करोड़ रुपये था, वहीं Q3 में यह घटकर 17 करोड़ रुपये रह गया। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अपने खर्चों को धीरे-धीरे संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


📌 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में IndiQube का शेयर प्राइस 177 रुपये पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 3,751 करोड़ रुपये (करीब $414 मिलियन) रहा।


🏙️ विस्तार की रणनीति पर फोकस

IndiQube देशभर में मैनेज्ड ऑफिस स्पेस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस उपलब्ध कराती है। हाइब्रिड वर्क कल्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार के चलते इस सेक्टर में मांग लगातार बढ़ रही है।

कंपनी अपने नेटवर्क को बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते बिजनेस हब्स तक विस्तार देने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, इस विस्तार के साथ फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे खर्च भी बढ़ रहे हैं, जो फिलहाल मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं।


🔮 निष्कर्ष

कुल मिलाकर Q3 FY26 में IndiQube ने मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45% से अधिक बढ़ा है और नौ महीने की अवधि में भी शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।

हालांकि, बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण घाटा साल-दर-साल बढ़ा है। फिर भी, तिमाही आधार पर घाटे में कमी आना एक सकारात्मक संकेत है।

आने वाले समय में अगर कंपनी अपने खर्चों को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाती है और फाइनेंस कॉस्ट को नियंत्रित करती है, तो यह ग्रोथ को मुनाफे में बदलने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

IndiQube फिलहाल ग्रोथ और स्केल पर फोकस कर रही है, और निवेशक इसकी लागत प्रबंधन रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

Read more :⚡️ AI से बदलेगा एनर्जी सेक्टर लंदन की tem ने जुटाए $75 मिलियन,

⚡️ AI से बदलेगा एनर्जी सेक्टर लंदन की tem ने जुटाए $75 मिलियन,

tem

एनर्जी सेक्टर लंबे समय से जटिल कॉन्ट्रैक्ट्स, छुपे हुए चार्जेस और पुराने सिस्टम्स से जूझ रहा है। बिजली खरीदना और बेचना आज भी कई बिज़नेस के लिए एक confusing और महंगा प्रोसेस बना हुआ है, जहां जोखिम और inefficiency साफ नजर नहीं आते। लेकिन अब इस सेक्टर में AI आधारित टेक्नोलॉजी के जरिए बड़ा बदलाव आने वाला है।

लंदन स्थित एनर्जी टेक स्टार्टअप tem इसी समस्या को हल करने के मिशन पर काम कर रहा है। कंपनी ने हाल ही में अपने Series B फंडिंग राउंड में $75 मिलियन जुटाए हैं, जो कि oversubscribed रहा यानी निवेशकों की मांग उम्मीद से ज्यादा थी।


💰 Series B में Lightspeed की अगुवाई, कुल फंडिंग $94 मिलियन

tem के इस Series B राउंड का नेतृत्व Lightspeed Venture Partners ने किया है। इस राउंड के साथ Lightspeed के पार्टनर Paul Murphy कंपनी के बोर्ड में भी शामिल होंगे।

अन्य प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Hitachi Ventures
  • Voyager Ventures
  • Schroders Capital
  • AlbionVC
  • Atomico
  • Allianz

इस नए निवेश के बाद tem की कुल फंडिंग $94 मिलियन तक पहुंच गई है।


📈 2030 तक 165% बढ़ेगी एनर्जी डिमांड

डेटा सेंटर्स, AI, और बड़े पैमाने पर electrification की वजह से 2030 तक एनर्जी डिमांड में करीब 165% की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। ऐसे में मौजूदा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर इस बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम नहीं दिखता।

tem इसी gap को भरने के लिए AI-driven transaction infrastructure तैयार कर रहा है, जो एनर्जी खरीद-फरोख्त को उतना ही आसान और पारदर्शी बनाना चाहता है, जितना fintech ने बैंकिंग को बनाया।


🤖 Rosso AI और RED: tem का टेक्नोलॉजी मॉडल

tem का प्लेटफॉर्म दो मुख्य हिस्सों में काम करता है:

🔹 Rosso AI Engine

  • एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट्स को automate करता है
  • अनावश्यक fees को खत्म करता है
  • data-driven pricing के जरिए 30% तक लागत कम करता है

🔹 RED Neo-Utility Platform

  • बिज़नेस और ब्रोकर्स के लिए user-friendly इंटरफेस
  • बिजली खरीदने, बेचने और मैनेज करने की सुविधा
  • कोई hidden cost नहीं, पूरी transparency

कंपनी के मुताबिक, Rosso और RED मिलकर हर साल 2 TWh (टेरावॉट ऑवर) एनर्जी ट्रांजैक्शन मैनेज कर रहे हैं।


🏢 2,600 से ज्यादा UK ग्राहक, $300 मिलियन का GTV

2025 में tem ने:

  • $300 मिलियन का annual gross transaction value (GTV)
  • 2,600+ UK बिज़नेस कस्टमर

कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं:

  • Boohoo
  • Fever-Tree
  • Silverstone
  • Newcastle United FC

यह आंकड़े दिखाते हैं कि tem का मॉडल सिर्फ आइडिया नहीं, बल्कि commercially proven भी है।


🧠 फाउंडर्स का विज़न: “एनर्जी के लिए वही करेंगे जो Fintech ने बैंकिंग के लिए किया”

tem की स्थापना 2021 में Joe McDonald (CEO) ने अपने co-founders Jason Stocks, Bartlomiej Szostek और Ross Mackay के साथ मिलकर की थी। इन सभी ने पहले utility और energy trading सिस्टम्स की खामियों को करीब से देखा था।

tem के फाउंडर्स के अनुसार:

“हम एनर्जी इंडस्ट्री के transaction infrastructure को दोबारा बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि एनर्जी मार्केट भी transparent, efficient और scalable बने – ठीक वैसे ही जैसे fintech ने बैंकिंग को बदला।”


⚔️ प्रतिस्पर्धा: Enel X और Octopus Energy से मुकाबला

tem का मुकाबला:

  • Enel X से है, जो global energy management पर काम करता है
  • Octopus Energy से है, जो UK retail energy market में मजबूत है

हालांकि tem खुद को अलग इसलिए मानता है क्योंकि उसने शुरू से ही core infrastructure को नए सिरे से rebuild किया है, न कि पुराने सिस्टम पर नया लेयर जोड़ा है।


🌍 आगे क्या? UK से Texas और Australia तक विस्तार

इस $75 मिलियन की फंडिंग का इस्तेमाल tem:

  • UK में अपने operations को और मजबूत करने
  • Texas (USA) और Australia जैसे markets में entry
  • Rosso AI को ज्यादा कंपनियों के लिए available बनाने
  • Pricing accuracy बढ़ाने के लिए data pool expand करने

में करेगा।

फाउंडर्स का मानना है कि अगले 3–5 सालों में tem का infrastructure दुनिया भर की energy कंपनियां, neo-utilities और नए ब्रांड्स अपनाएंगे।


🔮 निष्कर्ष

AI, data और automation के दौर में tem एनर्जी सेक्टर को fair, clear और efficient बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। जिस तरह fintech ने बैंकिंग को आसान बनाया, उसी तरह tem आने वाले समय में एनर्जी इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकता है।

जैसे-जैसे एनर्जी डिमांड बढ़ेगी, tem जैसे प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और भी अहम होती जाएगी।

Read more :🔹 InCred Wealth का Future Plan और Growth Strategy

🔹 InCred Wealth का Future Plan और Growth Strategy

InCred Wealth

भारत में private wealth management सेक्टर तेज़ी से विस्तार कर रहा है। InCred Wealth यह सेक्टर FY24 में $1.1 ट्रिलियन से बढ़कर FY29 तक $2.3 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। यानी आने वाले कुछ सालों में यह इंडस्ट्री लगभग दोगुनी हो जाएगी।

इस तेज़ ग्रोथ के चलते बीते एक दशक में कई नए wealth platforms सामने आए हैं और इस सेक्टर में funding activity भी लगातार बढ़ी है।


🚀 InCred Wealth ने बनाया बड़ा मुकाम

इसी बदलते माहौल में Mumbai-based InCred Wealth ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कंपनी ने महज़ छह साल में $10 बिलियन (₹1 लाख करोड़ से ज्यादा) का Assets Under Management (AUM) पार कर लिया है।

मार्केट से जुड़े लोगों का मानना है कि InCred Wealth की इस तेज़ ग्रोथ के पीछे consistent execution और एक मज़बूत leadership व client-facing team की अहम भूमिका रही है।


🧠 Wealth Business में Talent सबसे अहम

Wealth management इंडस्ट्री में अक्सर कहा जाता है कि scale, talent के पीछे चलता है। InCred Wealth भी अपनी hiring strength को अपने founder Bhupinder Singh के अनुभव से जोड़ता है।

Bhupinder Singh ने 20 से अधिक साल Deutsche Bank में काम किया, जिसके बाद उन्होंने 2016 में InCred Group की स्थापना की। साल 2023 में InCred Finance के unicorn बनने से पूरे ग्रुप की credibility और भी मज़बूत हुई, जिससे senior professionals और high-net-worth clients का भरोसा बढ़ा।


👥 700 से ज्यादा Relationship Managers

कंपनी के मुताबिक, InCred Wealth के पास इस समय 700 से ज्यादा relationship managers हैं, जो:

  • Family Offices
  • Ultra High Net Worth Individuals (UHNI)
  • Emerging affluent ग्राहकों

को सेवाएं दे रहे हैं।

यह बड़ी टीम InCred Wealth को ग्राहकों के साथ long-term और personalized relationships बनाने में मदद करती है।


🌍 Global और Private Market तक पहुंच

InCred Wealth के CEO Nitin Rao के अनुसार, कंपनी सिर्फ traditional advisory तक सीमित नहीं है।

उन्होंने Entrackr से बातचीत में कहा:

“हमने अपने clients के लिए global और private market opportunities तक पहुंच बढ़ाई है। इसमें late-stage private companies, overseas themes और alternative strategies शामिल हैं।”

यानी InCred Wealth अपने ग्राहकों को सिर्फ Indian markets तक सीमित नहीं रखता, बल्कि global investment ideas भी ऑफर करता है।


👔 CEO Nitin Rao का अनुभव

Nitin Rao 2020 में InCred Wealth की शुरुआत से ही कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले वे:

  • HDFC Bank में private banking franchise बना चुके हैं
  • Reliance Wealth Management का नेतृत्व भी कर चुके हैं

Rao का कहना है कि InCred Wealth को “ground up” approach के साथ बनाया गया है, ताकि global-quality investment ideas को Indian wealth management में लाया जा सके।


📊 Open Architecture और Alternatives पर फोकस

InCred Wealth का बिज़नेस मॉडल open-architecture पर आधारित है। इसका मतलब है कि कंपनी किसी एक product या fund house तक सीमित नहीं रहती।

कंपनी का खास फोकस है:

  • Private Equity
  • Private Credit
  • Market-linked Debentures (MLDs)
  • अन्य alternative investment products

इस मॉडल को सपोर्ट करता है कंपनी का structured products desk और InCred Group की अन्य verticals, जैसे:

  • Broking
  • Institutional Research
  • Investment Banking
  • Capital Markets

🤝 Client Needs के करीब रहने की रणनीति

InCred Wealth की एक और खासियत है उसकी team का अनुभव। कंपनी के relationship managers का median experience करीब 20 साल का है।

यह अनुभव उन्हें clients की ज़रूरतों को बेहतर समझने और बदलते market conditions के हिसाब से सलाह देने में मदद करता है।


🌐 Offshore बिज़नेस भी मज़बूत

InCred Wealth सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी ने एक offshore platform भी खड़ा किया है, जिसका नाम है InCred Global Wealth

CEO Nitin Rao के मुताबिक:

“हम Singapore, Dubai और London में मौजूद teams के ज़रिए $3 बिलियन से ज्यादा के assets manage कर रहे हैं।”

इससे InCred Wealth को global investors और NRIs के बीच भी मजबूत पकड़ मिलती है।


🔮 आगे की राह

भारत में wealth creation तेज़ी से बढ़ रही है और इसके साथ ही professional wealth management की मांग भी। ऐसे माहौल में InCred Wealth का scale, experienced leadership और global outlook उसे एक मजबूत position में खड़ा करता है।

आने वाले वर्षों में कंपनी का फोकस संभवतः इन बातों पर रहेगा:

  • Alternative investments का विस्तार
  • Global markets में और गहराई
  • Technology-driven client experience
  • UHNI और family office segment में पकड़ मज़बूत करना

🧾 निष्कर्ष

भारत का private wealth management सेक्टर तेज़ी से बदल रहा है और InCred Wealth इस बदलाव का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरा है। सिर्फ छह साल में $10 बिलियन AUM तक पहुंचना, मज़बूत leadership, अनुभवी team और global सोच—ये सभी फैक्टर InCred Wealth को इंडस्ट्री में अलग पहचान देते हैं।

अगर wealth management में scale + talent + execution की बात की जाए, तो InCred Wealth इस फॉर्मूले पर पूरी तरह फिट बैठता है।

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📱 PhonePe की ग्रोथ पर सवाल

phonePe

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी PhonePe ने FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में 22% revenue growth दिखाई है। काग़ज़ों पर यह ग्रोथ मज़बूत लगती है, लेकिन जब कंपनी के Draft Red Herring Prospectus (DRHP) को ध्यान से देखा जाता है, तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है।

असल में, PhonePe की इस ग्रोथ का करीब 19% हिस्सा ऐसे revenue sources से आया है जो या तो अब बंद हो चुके हैं या फिर सरकारी incentives पर निर्भर हैं। यही वजह है कि IPO से पहले निवेशकों के लिए यह एक clear red flag माना जा रहा है।


📊 H1 FY26 में PhonePe का रेवेन्यू

DRHP के अनुसार, PhonePe ने सितंबर 2025 को खत्म हुई छह महीनों की अवधि में:

  • Revenue from operations: ₹3,918 करोड़

यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि से ज़्यादा है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह ग्रोथ किन स्रोतों से आई।


❌ किन रेवेन्यू सोर्स को हटाया गया

जब PhonePe के उन revenue streams को हटाया जाता है जो अब उसके core बिज़नेस का हिस्सा नहीं हैं, तो तस्वीर बदल जाती है।

निम्नलिखित तीन revenue sources को हटाया गया:

  • Rent और related payment services
  • Real Money Gaming (RMG)
  • Payment Infrastructure Development Fund (PIDF) incentives

इन तीनों को हटाने के बाद PhonePe का adjusted operating revenue घटकर ₹3,162 करोड़ रह जाता है।


💰 ₹756 करोड़ का फर्क कहां से आया

H1 FY26 में कुल ₹756 करोड़ का revenue इन non-core या policy-dependent sources से आया था:

  • ₹518.5 करोड़: Rent और related payment categories
  • ₹70.9 करोड़: Real Money Gaming (RMG)
  • ₹167 करोड़: PIDF incentives

इनमें से RMG और rent payments को कंपनी पहले ही regulatory दबाव के चलते या तो बंद कर चुकी है या काफी हद तक scale down कर चुकी है। वहीं PIDF एक सरकारी incentive scheme है, जो permanent income source नहीं माना जा सकता।


🚨 Core Payments बिज़नेस पर असर

इन adjustments के बाद PhonePe के core payments business की हालत कमजोर दिखाई देती है।

👤 Consumer Payments

  • Reported revenue: ₹2,200 करोड़
  • Adjusted revenue: ₹1,631 करोड़
  • गिरावट: 26%

Rent और gaming income हटने के बाद consumer payments से आने वाली कमाई में तेज़ गिरावट दिखती है।


🏪 Merchant Payments

  • Reported revenue: ₹1,206 करोड़
  • Adjusted revenue: ₹1,019 करोड़
  • गिरावट: लगभग 16%

यह गिरावट मुख्य रूप से PIDF incentives को हटाने की वजह से आई है।


🎮 Gaming और Rent का रोल

यह analysis साफ़ दिखाता है कि PhonePe की revenue growth में gaming और rent-related payments का बड़ा योगदान था। लेकिन चूंकि ये दोनों ही segments अब कंपनी के भविष्य के revenue profile का हिस्सा नहीं रहेंगे, इसलिए आगे की ग्रोथ पर सवाल उठते हैं।


🏦 Lending और Insurance ही राहत

एकमात्र segment जो इन adjustments से प्रभावित नहीं हुआ, वह है:

  • Lending और Insurance distribution revenue
  • Revenue: ₹513 करोड़

यह revenue पूरी तरह market-led है और policy incentives या बंद हो चुके बिज़नेस पर निर्भर नहीं है।

हालांकि, यहां भी चुनौतियां हैं:

  • Lending aggregation पर नए नियम
  • Growth की सीमित संभावनाएं
  • Insurance में अभी profitability दूर

Insurance को भविष्य का सबसे बड़ा opportunity माना जा रहा है, लेकिन वहां भी profits आने में समय लगेगा, क्योंकि कंपनियां अभी market share की लड़ाई में हैं।


🔴 नुकसान अब भी जारी

इन सभी adjustments के बावजूद PhonePe की bottom line में कोई सुधार नहीं होता।

  • Net loss (H1 FY26): ₹1,444.4 करोड़

यानी revenue growth दिखाने के बावजूद कंपनी अभी भी profitability से काफी दूर है।


📉 IPO से पहले क्यों अहम है यह विश्लेषण

DRHP में दिखाया गया 22% growth figure filing के लिहाज से ठीक हो सकता है, लेकिन जब discontinued और policy-driven income को हटाया जाता है, तो PhonePe की sustainable revenue base कमजोर नज़र आती है।

IPO से पहले यह distinction इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है क्योंकि:

  • Valuation scrutiny तेज़ होगी
  • Regulatory जांच बढ़ेगी
  • Investors sustainable growth देखना चाहेंगे

🧠 निवेशकों के लिए संकेत

Walmart-backed PhonePe एक बड़ा और भरोसेमंद नाम है, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि:

  • Core payments बिज़नेस दबाव में है
  • Non-recurring income ने growth को inflate किया है
  • Profitability अब भी दूर है

📌 निष्कर्ष

PhonePe की H1 FY26 revenue growth पहली नज़र में मजबूत दिखती है, लेकिन DRHP के अंदर छुपे आंकड़े बताते हैं कि असल ग्रोथ उतनी मज़बूत नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।

IPO से पहले निवेशकों के लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि PhonePe की मौजूदा ग्रोथ का बड़ा हिस्सा policy incentives और बंद हो चुके बिज़नेस से आया है, जबकि core बिज़नेस में गिरावट देखने को मिल रही है।

आने वाले समय में PhonePe के लिए असली चुनौती होगी —
sustainable revenue growth और profitability हासिल करना

Read more :🏠 Wakefit में नई CFO की एंट्री

🏠 Wakefit में नई CFO की एंट्री

Wakefit

होम और स्लीप सॉल्यूशंस कंपनी Wakefit Innovations Limited ने अपनी लीडरशिप टीम को और मज़बूत करते हुए Parul Gupta को कंपनी का नया Chief Financial Officer (CFO) नियुक्त किया है। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दाखिल की गई रेगुलेटरी फाइलिंग से सामने आई है।

Wakefit हाल ही में शेयर बाजार में लिस्ट हुई है और ऐसे समय में CFO की नियुक्ति को कंपनी के लिए एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


👩‍💼 Parul Gupta कौन हैं?

Parul Gupta के पास करीब 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में Strategic Finance, Business Partnering, Financial Planning और Compliance जैसे अहम क्षेत्रों में काम किया है।

Wakefit से पहले Parul Gupta कई बड़ी कंपनियों में सीनियर लीडरशिप रोल निभा चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Syngene International
  • Myntra
  • Jabong
  • Aircel
  • Airtel

इन कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने बड़े स्केल के बिज़नेस, तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट फाइनेंस स्ट्रक्चर को संभालने का अनुभव हासिल किया है।


🚀 Wakefit के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति

Wakefit इस समय IPO के बाद के फेज में है, जहां फाइनेंशियल डिसिप्लिन, इन्वेस्टर कम्युनिकेशन और ग्रोथ प्लानिंग बेहद ज़रूरी हो जाती है।

Parul Gupta की नियुक्ति से Wakefit को इन क्षेत्रों में मजबूती मिलने की उम्मीद है:

  • फाइनेंशियल प्लानिंग और कंट्रोल
  • रेगुलेटरी कंप्लायंस
  • ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी का बैलेंस
  • इन्वेस्टर रिलेशन मैनेजमेंट

कंपनी तेजी से स्केल कर रही है और ऐसे में एक अनुभवी CFO की भूमिका और भी अहम हो जाती है।


📊 Q3 FY26 में Wakefit का प्रदर्शन

Wakefit ने Q3 FY26 में अपने फाइनेंशियल नतीजे भी घोषित किए हैं, जो कंपनी की मज़बूत ग्रोथ की ओर इशारा करते हैं।

  • Revenue from Operations:
    Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹421 करोड़ हो गया
    (Q3 FY25 में यह ₹385 करोड़ था)
  • यानी साल-दर-साल आधार पर लगभग 9% की ग्रोथ

यह दिखाता है कि मैट्रेस, फर्नीचर और होम सॉल्यूशंस की डिमांड लगातार बनी हुई है।


💰 मुनाफे में ज़बरदस्त सुधार

Wakefit के लिए सबसे पॉज़िटिव संकेत उसकी प्रॉफिटेबिलिटी रही।

  • Q2 FY26 में प्रॉफिट: ₹16 करोड़
  • Q3 FY26 में प्रॉफिट: ₹32 करोड़

यानि एक ही तिमाही में कंपनी का मुनाफा डबल हो गया।

यह बताता है कि Wakefit सिर्फ ग्रोथ ही नहीं, बल्कि कॉस्ट कंट्रोल और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर भी काम कर रही है।


🛏️ Wakefit का बिज़नेस मॉडल

2016 में स्थापित Wakefit एक Direct-to-Consumer (D2C) ब्रांड है। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • मैट्रेस
  • पिलो और स्लीप एक्सेसरीज़
  • फर्नीचर
  • होम इम्प्रूवमेंट प्रोडक्ट्स

Wakefit ऑनलाइन चैनल के साथ-साथ ऑफलाइन एक्सपीरियंस सेंटर्स के ज़रिए भी ग्राहकों तक पहुंच बना रही है।


📉 IPO के बाद शेयर बाजार में प्रदर्शन

Wakefit ने हाल ही में शेयर बाजार में डेब्यू किया, लेकिन इसकी लिस्टिंग काफी शांत रही।

  • IPO Issue Price: ₹195
  • NSE पर लिस्टिंग: लगभग फ्लैट
  • BSE पर ओपनिंग: ₹194.10 (करीब 0.5% डिस्काउंट)

यानी लिस्टिंग के समय निवेशकों में ज्यादा उत्साह देखने को नहीं मिला।


📈 मौजूदा शेयर प्राइस और मार्केट कैप

हालांकि लिस्टिंग के बाद Wakefit के शेयर में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।

  • Current Share Price: ₹199 (13:33 PM पर)
  • Market Capitalization: ₹6,249 करोड़
    (लगभग $689 मिलियन)

यह दिखाता है कि निवेशक कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी पर नजर बनाए हुए हैं।


🔮 आगे की राह

Parul Gupta की CFO के रूप में नियुक्ति, बेहतर फाइनेंशियल प्रदर्शन और IPO के बाद की स्थिरता—ये सभी संकेत देते हैं कि Wakefit अब अगले ग्रोथ फेज की तैयारी में है।

आने वाले समय में कंपनी का फोकस हो सकता है:

  • प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने पर
  • ऑफलाइन और ऑनलाइन चैनल्स के बेहतर इंटीग्रेशन पर
  • इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस मज़बूत करने पर

🧾 निष्कर्ष

Wakefit Innovations के लिए Parul Gupta की CFO के रूप में नियुक्ति एक स्ट्रैटेजिक मूव है। मजबूत तिमाही नतीजों और बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी के साथ कंपनी यह संकेत दे रही है कि वह सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि सस्टेनेबल बिज़नेस बनाने पर भी फोकस कर रही है।

IPO के बाद का यह दौर Wakefit के लिए चुनौतीपूर्ण भी है और अवसरों से भरा भी—और नई CFO इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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