⚙️ Zetwerk को बड़ा झटका Electronics Division

Zetwerk

Manufacturing unicorn Zetwerk के electronics division में एक बड़ा leadership बदलाव देखने को मिला है। Industry से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, Josh Foulger, जो Zetwerk में Electronics Division के President थे, ने कंपनी से exit कर लिया है। यह फैसला उन्होंने personal reasons की वजह से लिया है।

Josh Foulger पिछले करीब दो साल से Zetwerk से जुड़े हुए थे और कंपनी के consumer और electronics manufacturing business को लीड कर रहे थे। उनके exit को Zetwerk के electronics vertical के लिए एक अहम बदलाव माना जा रहा है।


🏭 Electronics Business को Scale करने में अहम भूमिका

Josh Foulger ने Zetwerk में ऐसे समय पर जॉइन किया था जब कंपनी अपने electronics manufacturing vertical को scale करने की तैयारी में थी। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने:

  • Consumer electronics manufacturing को structured किया
  • Large OEM clients के साथ partnerships पर काम किया
  • Operational और process-level improvements किए

Zetwerk ने electronics को अपने core manufacturing segments में शामिल करते हुए इसे aerospace, defence और heavy engineering जैसे क्षेत्रों के साथ आगे बढ़ाया।


🧑‍💼 Bharat FIH में निभा चुके हैं बड़ी भूमिका

Zetwerk से पहले Josh Foulger का करियर भारत के electronics manufacturing ecosystem में काफी मजबूत रहा है। वह Bharat FIH (Foxconn group की subsidiary) में:

  • Country Head (India)
  • Managing Director

की भूमिका निभा चुके हैं। Bharat FIH में रहते हुए उन्होंने कंपनी को कई leading consumer electronics brands के लिए एक प्रमुख manufacturing partner बनाने में अहम योगदान दिया था।

Industry experts के मुताबिक, यही अनुभव Zetwerk के electronics business के लिए काफी valuable माना जा रहा था।


🗣️ Zetwerk की आधिकारिक पुष्टि

इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए Zetwerk के spokesperson ने Entrackr से कहा:

“Josh Foulger ने Zetwerk Electronics के शुरुआती और growth stages में अहम भूमिका निभाई है। Personal reasons की वजह से उन्होंने Chennai वापस जाने का फैसला लिया है। हम उनके योगदान के लिए आभारी हैं और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देते हैं।”

इस बयान से साफ है कि exit amicable रहा है और यह किसी strategic या performance-related कारण से नहीं हुआ है।


🔍 नए Leader की तलाश में Zetwerk

Industry sources के मुताबिक, Josh Foulger के exit के बाद Zetwerk अब electronics division के लिए नए leader की तलाश में है। कंपनी:

  • Siemens
  • Schneider Electric

जैसी global और established कंपनियों से जुड़े senior executives को evaluate कर रही है।

Zetwerk का electronics business आने वाले समय में उसके IPO और long-term growth strategy का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है, इसलिए leadership selection पर कंपनी का खास फोकस है।


🏗️ Zetwerk Electronics: एक तेजी से बढ़ता Vertical

2021 में स्थापित, Zetwerk Electronics, Zetwerk के larger manufacturing platform का हिस्सा है। Zetwerk खुद को एक managed marketplace for contract manufacturing के तौर पर position करता है, जहां:

  • Buyers (OEMs, global companies)
  • Manufacturers (Indian और international suppliers)

एक technology-driven platform के जरिए जुड़े होते हैं।

Zetwerk की आखिरी reported valuation $2.1 billion रही है, जिससे यह भारत के leading manufacturing unicorns में शामिल हो जाता है।


🏭 Bengaluru में नई Manufacturing Facility का उद्घाटन

Josh Foulger के exit की खबर के बीच Zetwerk ने हाल ही में एक बड़ा operational milestone भी हासिल किया है।

शनिवार को केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने Bengaluru में Zetwerk की नई manufacturing facility का उद्घाटन किया।

यह facility मुख्य रूप से इन segments पर फोकस करेगी:

  • ✈️ Aerospace
  • 🛡️ Defence
  • 🚗 Automotive

कंपनी के मुताबिक, यह unit full capacity पर 1,200 से ज्यादा लोगों को रोजगार देगी, जो “Make in India” और domestic manufacturing push के लिहाज से अहम मानी जा रही है।


📈 IPO की तैयारी में Zetwerk

Zetwerk फिलहाल initial public offering (IPO) की संभावनाओं को भी explore कर रही है। Media reports के मुताबिक, कंपनी:

  • ₹6,000–6,500 करोड़ ($750 million) के IPO पर विचार कर रही है

हालांकि, अभी तक कंपनी की तरफ से IPO timeline को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। Experts का मानना है कि electronics, aerospace और defence जैसे high-value segments Zetwerk की IPO story को मजबूत बना सकते हैं।


📉 Financial Performance पर नजर

अगर financials की बात करें, तो Zetwerk के लिए FY25 चुनौतीपूर्ण रहा।

  • 📊 GMV (Gross Merchandise Value): 11% की गिरावट
  • 💰 Operating revenue:
    • FY24: ₹14,443 करोड़
    • FY25: ₹12,798 करोड़

इसके अलावा, कंपनी ने FY25 में ₹371 करोड़ का loss भी report किया।

हालांकि, management का मानना है कि यह decline macro slowdown और selective order execution strategy की वजह से हुआ है, जबकि long-term fundamentals अब भी मजबूत बने हुए हैं।


🔮 आगे की राह

Josh Foulger का exit Zetwerk के electronics business के लिए एक short-term leadership gap जरूर पैदा करता है, लेकिन:

  • Strong manufacturing platform
  • Diversified segments
  • IPO ambitions

Zetwerk को long-term growth path पर बनाए रखते हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि Zetwerk electronics vertical के लिए किस तरह का नया leader चुनता है, और यह बदलाव IPO से पहले कंपनी की strategy को कैसे shape करता है।

Read more :💻 Capillary Technologies Q3 FY26 में Revenue 16% बढ़ा,

💻 Capillary Technologies Q3 FY26 में Revenue 16% बढ़ा,

Capillary Technologies

हाल ही में भारतीय stock exchanges पर लिस्ट हुई SaaS कंपनी Capillary Technologies ने IPO के बाद अपने पहले अहम तिमाही नतीजे घोषित कर दिए हैं। Q3 FY26 में कंपनी का revenue सालाना आधार पर 16% बढ़ा, लेकिन बढ़ते खर्चों की वजह से मुनाफा घटकर single digit में आ गया।

NSE से प्राप्त financial statements के मुताबिक, Capillary Technologies का revenue from operations Q3 FY26 में ₹184 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹159 करोड़ था।


📊 IPO के बाद Performance पर निवेशकों की नजर

Capillary Technologies ने पिछली तिमाही में भारतीय शेयर बाजार में एंट्री की थी। IPO के बाद यह पहला full-quarter result है, इसलिए investors और market analysts की नजर खासतौर पर इस बात पर थी कि कंपनी की growth trajectory और profitability किस दिशा में जा रही है।

Revenue growth मजबूत रही, लेकिन margin pressure साफ नजर आया।


🏢 Capillary Technologies क्या करती है?

2008 में स्थापित, Capillary Technologies एक cloud-native SaaS कंपनी है, जो brands को customer engagement बेहतर करने में मदद करती है। कंपनी की core offerings में शामिल हैं:

  • 🎯 Loyalty management solutions
  • 🤝 CRM (Customer Relationship Management) platforms
  • 📊 Customer engagement और analytics tools

Capillary वर्तमान में 46 देशों में 390 से ज्यादा brands को अपनी services दे रही है। Retail, FMCG, hospitality और consumer brands इसके प्रमुख ग्राहक हैं।


💰 Total Income और 9 महीने का Financial Snapshot

Q3 FY26 में सिर्फ operations से ही नहीं, बल्कि other income से भी ₹4 करोड़ की कमाई हुई। इसके साथ कंपनी की total income ₹188 करोड़ तक पहुंच गई।

वहीं अगर पूरे 9 महीने (April–December 2025) की बात करें, तो:

  • 📈 Revenue: ₹543 करोड़
  • 📉 पिछले साल (₹446 करोड़) के मुकाबले 22% growth

यह दिखाता है कि साल-दर-साल आधार पर कंपनी की topline growth मजबूत बनी हुई है।


👥 Employee Cost बना सबसे बड़ा Expense

Capillary Technologies के खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा employee benefit expenses का रहा।

  • 👨‍💻 Employee cost Q3 FY26: ₹90 करोड़
  • 👨‍💻 Employee cost Q3 FY25: ₹74 करोड़
  • 🔺 YoY growth: 22%

Employee expense कंपनी के total cost का लगभग 50% रहा, जो SaaS कंपनियों के लिए आम बात है, क्योंकि यह sector talent-intensive होता है।

इसके अलावा:

  • 🖥️ Software और server charges: ₹33 करोड़
  • 💸 Total expenses Q3 FY26: ₹179.5 करोड़
  • 💸 Total expenses Q3 FY25: ₹150.5 करोड़

यानि कुल खर्चों में 19% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।


📉 Profit में गिरावट, लेकिन Sequential Recovery

बढ़ते खर्चों का सीधा असर कंपनी के bottom line पर पड़ा।

  • 💰 Q3 FY25 profit: ₹10 करोड़
  • 💰 Q3 FY26 profit: ₹8 करोड़
  • 🔻 YoY गिरावट: 20%

हालांकि, sequential basis पर तस्वीर थोड़ी बेहतर दिखती है। Q2 FY26 में Capillary का मुनाफा सिर्फ ₹30 लाख था, जिसके मुकाबले Q3 में काफी तेज recovery देखने को मिली।

यह संकेत देता है कि पिछली तिमाही का profit dip संभवतः one-time या transitional factors की वजह से था।


📉 Stock Market Debut रहा फीका

Capillary Technologies का IPO debut बाजार में कुछ खास नहीं रहा

  • 📉 BSE पर listing price: ₹560
    • Issue price ₹577 के मुकाबले 3% discount
  • 📈 NSE पर opening: ₹571.9 (slightly higher)

हालांकि, listing के बाद stock ने धीरे-धीरे stability दिखाई।


📈 Market Capitalization ₹4,857 करोड़ पहुंचा

आज के trading session के अंत में:

  • 📊 Share price: ₹612
  • 🏦 Market capitalization: ₹4,857 करोड़
  • 🌍 Dollar terms में valuation: करीब $535 million

IPO discount listing के बावजूद, secondary market में stock ने recovery दिखाई है, जिससे long-term investors को कुछ राहत मिली है।


🔍 SaaS Sector में Capillary की Positioning

भारत का SaaS ecosystem फिलहाल:

  • Global expansion
  • Subscription-based recurring revenue
  • AI और data-driven customer engagement

जैसे trends से गुजर रहा है। Capillary का focus loyalty और CRM solutions पर है, जो brands के लिए revenue retention में बेहद अहम होते हैं।

हालांकि, company को:

  • Employee cost optimization
  • Margin improvement
  • Scalable profitability

पर आगे ज्यादा ध्यान देना होगा।


🔮 आगे की राह

Q3 FY26 के नतीजे बताते हैं कि Capillary Technologies की growth story intact है, लेकिन profitability पर दबाव बना हुआ है। IPO के बाद कंपनी से बाजार की expectations बढ़ गई हैं।

आने वाली तिमाहियों में निवेशक खासतौर पर इन बातों पर नजर रखेंगे:

  • EBITDA margin में सुधार
  • International markets से revenue contribution
  • Cost control और operational leverage

अगर कंपनी topline growth के साथ margins सुधारने में सफल रहती है, तो Capillary SaaS space में एक मजबूत listed player के तौर पर उभर सकती है।

Read more :🧵 Jain Cord Industries ने जुटाए ₹200 करोड़,

🧵 Jain Cord Industries ने जुटाए ₹200 करोड़,

Jain Cord

गुरुग्राम स्थित cotton और linen fabric manufacturer Jain Cord Industries ने अपने अब तक के सफर में पहली बार institutional funding जुटाई है। कंपनी ने Series A funding round में ₹200 करोड़ जुटाए हैं। यह निवेश Lohia Family Office द्वारा किया गया है, जिसे Indorama Capital Holdings Pte. Ltd. ऑपरेट करता है।

यह फंडिंग Jain Cord के लिए एक बड़ा milestone मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी पिछले छह दशकों से family-run और promoter-driven business के तौर पर काम कर रही थी।


📑 Regulatory Filing से सामने आए Investment Details

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल regulatory filing के मुताबिक, Jain Cord Industries के बोर्ड ने इस फंडिंग के तहत:

  • 31,79,550 Compulsorily Convertible Preference Shares (CCPS)
  • 100 equity shares

₹629 प्रति शेयर के issue price पर जारी किए हैं। इस entire allotment के जरिए कंपनी ने कुल ₹200 करोड़ जुटाए हैं।

Startup data और deal tracking estimates के मुताबिक, इस फंडिंग के बाद Jain Cord Industries की post-money valuation लगभग ₹829 करोड़ ($94.75 million) आंकी गई है।


💰 Funds का इस्तेमाल कहां होगा?

RoC filing के अनुसार, Jain Cord इस fresh capital का इस्तेमाल कई strategic उद्देश्यों के लिए करेगी, जिनमें शामिल हैं:

  • 🧾 Working capital requirements
  • 💳 Unsecured borrowings की repayment
  • 🏭 Capital expenditure (Capex)
  • 📈 Business expansion और capacity enhancement
  • ⚙️ General operating expenses को support करना

इससे साफ है कि कंपनी सिर्फ balance sheet मजबूत करने पर नहीं, बल्कि long-term growth और expansion पर फोकस कर रही है।


🏭 60 साल पुरानी Textile Company, End-to-End Manufacturing Capabilities

1960 में स्थापित Jain Cord Industries भारत की जानी-मानी vertically integrated textile manufacturers में से एक है। कंपनी fabric और garment manufacturing के पूरे value chain को in-house संभालती है।

Jain Cord की capabilities में शामिल हैं:

  • 🧶 Weaving
  • 🧵 Knitting
  • 🎨 Dyeing
  • ✨ Finishing
  • 👕 Garment manufacturing

कंपनी modern production technologies और process-driven operations पर काम करती है, जिससे consistency, quality और scalability बनी रहती है।


👖 Corduroy और Velveteen Fabrics में मजबूत पकड़

Jain Cord खासतौर पर अपने woven fabrics, जैसे corduroy और velveteen, के लिए जानी जाती है। ये fabrics fashion और apparel industry में premium और mid-premium segments में काफी demand में रहते हैं।

कंपनी:

  • 🇮🇳 Domestic apparel brands
  • 🌍 International fashion और garment brands

दोनों को fabrics और garments supply करती है। Jain Cord का जोर quality control, compliance standards और timely delivery पर रहता है, जो global clients के लिए बेहद अहम है।


📍 Gurugram और Kosi (Mathura) में Manufacturing Units

Jain Cord Industries की manufacturing facilities:

  • 🏭 Gurugram (Haryana)
  • 🏭 Kosi, Mathura के पास (Uttar Pradesh)

स्थित हैं। इन units में large-scale fabric और garment production की क्षमता है। कंपनी ने compliance, sustainability और operational efficiency को ध्यान में रखते हुए अपने plants को develop किया है।


🧾 Shareholding Structure में बदलाव

इस funding round के बाद Jain Cord Industries की ownership structure में भी बदलाव आया है।

  • 🏦 Indorama Capital Holdings Pte. Ltd. की हिस्सेदारी: 24.13%
  • 👨‍👩‍👧‍👦 Promoters की हिस्सेदारी:
    • पहले: 100%
    • अब: 75.87% (fully diluted basis पर)

हालांकि promoters अब भी majority stake अपने पास रखते हैं, जिससे management control बना रहेगा।


📈 Financial Performance: Revenue और Profit में तेज उछाल

Jain Cord Industries के financials भी इसकी growth story को मजबूत करते हैं।

💼 Revenue Performance

  • FY24: ₹537.37 करोड़
  • FY25: ₹783.33 करोड़

👉 यानी करीब 46% की year-on-year growth, जो textile sector के लिहाज से काफी मजबूत मानी जाती है।

💰 Profitability

  • FY24 profit: ₹12.52 करोड़
  • FY25 profit: ₹19.97 करोड़

Profit में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली है, जो operational efficiency और scale-up का संकेत देती है।


🧵 Textile Sector में Jain Cord की Strategic Positioning

भारत का textile और apparel sector फिलहाल:

  • Export demand recovery
  • China+1 strategy
  • Value-added fabrics की बढ़ती मांग

जैसे factors से लाभ उठा रहा है। ऐसे में Jain Cord जैसी vertically integrated और profitable textile companies निवेशकों के लिए आकर्षक बन रही हैं।

Lohia Family Office और Indorama Group का निवेश इस बात का संकेत है कि Indian textile manufacturing में long-term growth potential देखा जा रहा है।


🔍 आगे की राह

इस Series A funding के साथ Jain Cord Industries अब:

  • Production capacity बढ़ा सकती है
  • New clients और export markets पर फोकस कर सकती है
  • Technology upgradation और automation में निवेश कर सकती है

60 साल पुराने legacy business के लिए यह funding एक new growth chapter की शुरुआत मानी जा रही है।

Read more :🎓 CollegeDekho की Growth पर ब्रेक,

🎓 CollegeDekho की Growth पर ब्रेक,

CollegeDekho

हायर एजुकेशन सर्विसेज और कॉलेज एडमिशन प्लेटफॉर्म CollegeDekho के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) कुछ खास बेहतर नहीं रहा। जहां एक तरफ कंपनी की revenue growth लगभग flat रही, वहीं दूसरी तरफ बढ़ते खर्चों की वजह से कंपनी का नुकसान 19% बढ़कर ₹151 करोड़ तक पहुंच गया।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल consolidated financial statements के मुताबिक, CollegeDekho का operating revenue FY25 में ₹221.6 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹215.6 करोड़ के मुकाबले सिर्फ मामूली बढ़त दिखाता है।


📊 FY25 में Revenue लगभग स्थिर, लेकिन Profitability दबाव में

CollegeDekho की कुल revenue from operations FY25 में सिर्फ 2.7% बढ़ी। इसके अलावा कंपनी को interest और investment income से ₹6 करोड़ की कमाई हुई, जिससे कुल revenue ₹227.7 करोड़ तक पहुंच गया।

हालांकि, यह revenue growth इतनी मजबूत नहीं रही कि बढ़ते खर्चों की भरपाई कर सके। यही वजह रही कि कंपनी का bottom line और ज्यादा कमजोर हो गया।


🏫 CollegeDekho का Business Model क्या है?

2015 में स्थापित CollegeDekho एक higher education marketplace है, जो छात्रों और कॉलेजों के बीच एक सेतु की तरह काम करता है। कंपनी कई तरह की सेवाएं देती है, जिनमें शामिल हैं:

  • 🎯 Student counselling
  • 🏫 College admissions & lead generation
  • 🤝 University partnerships
  • 💳 Education loans
  • 📚 Test preparation
  • 🌍 Study abroad services

कंपनी का दावा है कि उसने अब तक 12 लाख से ज्यादा छात्रों को counselling दी है और 2,00,000 से ज्यादा छात्रों का enrollment कराया है। CollegeDekho की 2,000+ कॉलेजों के साथ partnerships हैं।


🧩 CollegeDekho के 7 Brands

CollegeDekho सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक multi-brand education group बन चुका है। इसके तहत 7 ब्रांड्स ऑपरेट होते हैं:

  1. GetMyUni
  2. ImaginXP
  3. PrepBytes
  4. Get GIS
  5. IELTSMaterial
  6. Unipto Education
  7. Assured

हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि कौन-सा ब्रांड कितना revenue generate करता है


💰 Revenue कहां से आती है?

CollegeDekho की कमाई के मुख्य sources हैं:

  • 🎓 Admissions पर commission
  • 📢 Marketing, promotion और advertising services
  • 📚 Online coaching और test prep
  • 🧠 Technology-based education solutions

Revenue diversification के बावजूद, कंपनी को अभी भी heavy marketing पर निर्भर रहना पड़ रहा है।


📢 Advertising बना सबसे बड़ा खर्च

FY25 में CollegeDekho का सबसे बड़ा cost center advertising और promotional expenses रहा।

  • 📊 Advertising खर्च: ₹126 करोड़
  • 🔺 YoY growth: 31%
  • 📌 Total expenses में हिस्सा: 33%

यह दिखाता है कि कंपनी ने FY25 में brand visibility और customer acquisition पर काफी aggressive spending की।


👥 Employee Cost में कटौती, Outsourcing में उछाल

जहां advertising खर्च बढ़ा, वहीं CollegeDekho ने employee benefit expenses में 25% की कटौती की।

  • 👨‍💼 Employee cost FY24: ₹156 करोड़
  • 👨‍💼 Employee cost FY25: ₹117 करोड़

इसमें ₹7.4 करोड़ ESOP cost भी शामिल है, जो non-cash nature का है।

इसके उलट, कंपनी का outsourcing और subcontracting खर्च दोगुना होकर ₹31.5 करोड़ पहुंच गया, जो operational restructuring की ओर इशारा करता है।


📈 Total Expenses और Losses का हाल

Legal fees, rent, travel, provisions for doubtful debts और अन्य operating costs की वजह से:

  • 💸 Total expenses FY25: ₹378.8 करोड़
  • 💸 Total expenses FY24: ₹348.9 करोड़

Flat revenue और बढ़ते खर्चों का सीधा असर नुकसान पर पड़ा।

  • 🔻 Net loss FY24: ₹127 करोड़
  • 🔻 Net loss FY25: ₹151 करोड़ (↑19%)

📉 Financial Ratios भी हुए कमजोर

CollegeDekho के key financial ratios भी FY25 में deteriorate हुए:

  • ❌ ROCE: -154.93%
  • ❌ EBITDA margin: -56.9%

Unit economics भी कमजोर रही —
👉 कंपनी को ₹1 कमाने के लिए ₹1.71 खर्च करने पड़े

FY25 के अंत में कंपनी के:

  • 🧾 Current assets: ₹176 करोड़
  • 💵 Cash & bank balance: ₹37 करोड़

💸 Funding और Investors

CollegeDekho अब तक $68 million से ज्यादा funding जुटा चुका है।
अप्रैल 2024 में कंपनी ने Recur Club से ₹40 करोड़ का debt funding भी लिया।

Startup data platform TheKredible के अनुसार:

  • 🏢 CarDekho कंपनी का सबसे बड़ा external stakeholder है
  • 🌍 इसके बाद Winter Capital का नाम आता है

⚔️ Competition का दबाव

CollegeDekho को education-tech space में कड़ी competition का सामना करना पड़ रहा है।

  • 🎓 Leverage Edu (Blume Ventures-backed): FY25 revenue ₹180+ करोड़
  • 🎓 Collegedunia (bootstrapped):
    • FY24 operating revenue ₹192 करोड़
    • Profitable company

यह comparison दिखाता है कि जहां peers profitability की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं CollegeDekho को अभी efficiency और cost control पर और काम करना होगा।


🔍 आगे की राह

FY25 के numbers साफ संकेत देते हैं कि CollegeDekho को:

  • Advertising spend को optimize करना होगा
  • Unit economics improve करनी होंगी
  • Revenue growth के नए sustainable channels ढूंढने होंगे

Education market में demand तो मजबूत है, लेकिन profitability तक पहुंचने की राह अभी लंबी नजर आ रही है।

Read more :🛒 Marico ने Cosmix में खरीदी 60% हिस्सेदारी,

🛒 Marico ने Cosmix में खरीदी 60% हिस्सेदारी,

Marico

भारत की जानी-मानी FMCG कंपनी Marico ने अपनी acquisition strategy को और तेज करते हुए plant-based protein supplements ब्रांड Cosmix में 60% majority stake खरीदने का ऐलान किया है। यह डील ऐसे समय पर सामने आई है जब Marico ने हाल ही में snacking brand 4700BC का भी अधिग्रहण किया था।

इस acquisition के साथ Marico ने अपने तेजी से बढ़ते D2C (Direct-to-Consumer) portfolio में एक और मजबूत और profitable brand जोड़ लिया है। Marico के D2C portfolio में पहले से ही Plix, True Elements, Just Herbs और Beardo जैसे digital-first ब्रांड शामिल हैं।


🌱 Cosmix: एक Profitable D2C Nutrition Brand

Cosmix की स्थापना 2019 में हुई थी और यह एक digital-first nutrition startup है, जो खास तौर पर plant-based protein और wellness products पर फोकस करता है। इसके product portfolio में:

  • 🥛 Plant-based protein powders
  • 🍫 Protein bars
  • 🥞 Protein pancakes
  • 💊 Multivitamins और immunity boosters

शामिल हैं। Cosmix अपने products को अपनी website और Amazon जैसे online marketplaces के जरिए बेचता है।

सबसे खास बात यह है कि Cosmix एक bootstrapped कंपनी है और अपनी शुरुआत से ही profitability बनाए रखने में सफल रही है, जो D2C सेक्टर में काफी दुर्लभ माना जाता है।


📈 FY25 में Revenue दोगुना, मुनाफा करीब तीन गुना

Regulatory filings के आधार पर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक:

  • FY25 में Cosmix का revenue
    👉 ₹24.2 करोड़ (FY24) से बढ़कर ₹50.93 करोड़ हो गया
  • यानी एक साल में revenue दो गुना से ज्यादा बढ़ा

Cosmix की पूरी operating income उसके products की बिक्री से ही आई। इसके अलावा कंपनी ने ₹25 लाख का interest income भी कमाया, जिससे:

  • Total income FY25 में ₹51.18 करोड़ पहुंच गई

कंपनी का दावा है कि उसने ₹100 करोड़ ARR (Annual Recurring Revenue) का स्तर भी हासिल कर लिया है।


📢 Advertising सबसे बड़ा खर्च, लेकिन Growth से पीछे

Cosmix के financials में एक अहम बात यह है कि:

  • 📣 Advertising खर्च
    👉 ₹13.52 करोड़ (FY25)
    👉 Total खर्च का करीब 34%

यह खर्च year-on-year दोगुना हुआ, जो brand-building और customer acquisition पर फोकस को दिखाता है।

इसके अलावा:

  • 🧱 Cost of materials: ₹11.2 करोड़
  • 👨‍💼 Employee benefits expense: ₹3.45 करोड़
    • जो कुल खर्च का सिर्फ 8.72% है

Marketplace management, logistics, courier, software maintenance और अन्य overheads को मिलाकर:

  • Total expenses FY25 में ₹39.52 करोड़ रहे

💰 Profitability ने खींचा Marico का ध्यान

Revenue growth खर्चों से तेज रही, जिसका सीधा असर profitability पर पड़ा:

  • FY24 में profit: ₹2.83 करोड़
  • FY25 में profit: ₹8.21 करोड़

यानी कंपनी का मुनाफा करीब तीन गुना बढ़ा।

इसके अलावा Cosmix के financial ratios भी काफी मजबूत नजर आते हैं:

  • 📊 EBITDA margin: 22.48%
  • 📊 ROCE: करीब 99%
  • 💸 Unit economics:
    👉 ₹1 कमाने के लिए खर्च सिर्फ ₹0.78

FY25 के अंत में कंपनी के पास:

  • 🏦 Cash और bank balance: ₹4.69 करोड़
  • 📦 Current assets: ₹16.45 करोड़

🧩 Marico के लिए Cosmix क्यों अहम?

Marico जैसी बड़ी FMCG कंपनी के लिए Cosmix का acquisition financial size के हिसाब से बहुत बड़ा नहीं है। FY25 में Marico का:

  • 📈 Revenue: ₹10,800 करोड़
  • 💰 PAT: ₹1,593 करोड़

इसके बावजूद Cosmix जैसी relatively छोटी कंपनी में majority stake लेना यह दिखाता है कि:

  • Marico को plant-based nutrition और premium wellness category में लंबी अवधि की growth दिख रही है
  • Digital-first brands भविष्य के FMCG growth engines माने जा रहे हैं

Cosmix जैसे profitable और fast-growing brand में निवेश promoter-level conviction को दर्शाता है।


🏭 FMCG Giants क्यों खरीद रहे हैं D2C Brands?

Marico अकेली कंपनी नहीं है। हाल के वर्षों में कई legacy FMCG कंपनियों ने D2C startups को acquire किया है:

  • 🧴 HUL → Minimalist
  • 🥗 ITC → Yoga Bar
  • 🧔 VLCC → Ustraa
  • 🧴 Emami → The Man Company

यह trend साफ दिखाता है कि बड़ी FMCG कंपनियां:

  • High-growth categories
  • Premium pricing
  • Online-native consumers

को capture करना चाहती हैं।


🚀 Cosmix के लिए आगे का रास्ता

Marico के साथ जुड़ने के बाद Cosmix को:

  • 🏗️ Large-scale distribution
  • 📦 Supply chain efficiencies
  • 📢 Marketing muscle
  • 🌍 Pan-India reach

का फायदा मिलेगा।

हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि Marico जैसी बड़ी कंपनी Cosmix टीम को startup जैसी flexibility और autonomy दे पाए या नहीं। अतीत में कई acquisitions bureaucratic processes की वजह से अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाईं।


📌 Bottom Line

Cosmix में Marico की 60% हिस्सेदारी न तो stock price को तुरंत हिलाने वाली डील है और न ही balance sheet को, लेकिन यह साफ संकेत है कि:

👉 Future FMCG growth D2C, health और plant-based nutrition में छिपी है।

अगर Marico और Cosmix के बीच सही तालमेल बैठा, तो यह acquisition आने वाले वर्षों में एक case study बन सकती है।

📢 ऐसे ही startup acquisitions, FMCG deals और D2C market insights के लिए जुड़े रहिए FundingRaised के साथ।

Read more :🚢 Marine Robotics Startup EyeROV ने जुटाए ₹13 करोड़,

🚢 Marine Robotics Startup EyeROV ने जुटाए ₹13 करोड़,

EyeROV

भारत के deep-tech और marine robotics ecosystem के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। marine robotics और underwater inspection सेक्टर में काम करने वाली भारतीय स्टार्टअप EyeROV ने अपने Pre-Series A funding round में ₹13 करोड़ ($1.44 million) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड में AWE Funds और Unicorn India Ventures ने co-investment किया है।

यह फंडिंग ऐसे समय पर आई है जब भारत में defence, infrastructure, ports और energy sector में advanced underwater inspection solutions की मांग तेजी से बढ़ रही है।


💰 कहां होगा नए फंड का इस्तेमाल?

EyeROV के अनुसार, इस fresh capital का इस्तेमाल मुख्य रूप से:

  • 🔬 Research & Development (R&D) को तेज करने
  • 🤖 नए robotic products और platforms डेवलप करने
  • 🌍 भारत और international markets में अपनी मौजूदगी बढ़ाने
  • 🛠️ AI-enabled inspection और testing technologies को और बेहतर बनाने

के लिए किया जाएगा।

कंपनी का फोकस high-precision underwater robotics systems बनाने पर है, जो complex marine environments में भी reliable inspection कर सकें।


🏗️ 2017 में हुई थी EyeROV की शुरुआत

EyeROV की स्थापना 2017 में की गई थी। स्टार्टअप marine robotics और underwater inspection सेगमेंट में काम करता है और:

  • Remotely Operated Vehicles (ROVs)
  • Unmanned Surface Vessels (USVs)

डिज़ाइन और डेवलप करता है।

इन robotic systems का इस्तेमाल खास तौर पर:

  • ⚡ Power projects
  • 🛢️ Oil & Gas infrastructure
  • ⚓ Ports और shipping
  • 🏗️ Large-scale infrastructure
  • 🛡️ Defence और government operations

में किया जाता है।


📊 150+ Projects, 80+ Clients का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड

EyeROV का दावा है कि अब तक वह:

  • ✔️ 150 से ज्यादा projects
  • ✔️ 80 से अधिक clients

के साथ काम कर चुका है।

इसके clients में भारत की कई बड़ी कंपनियां और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं, जैसे:

  • Tata Power
  • NHPC
  • Adani Group
  • ONGC
  • BPCL
  • Maersk

इसके अलावा, EyeROV ने Indian Navy, DRDO और Indian Coast Guard जैसे defence bodies के साथ भी projects execute किए हैं।


🇮🇳 Indian Navy से मिला ₹47 करोड़ का बड़ा ऑर्डर

EyeROV के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है Indian Navy से मिला ₹47 करोड़ का ऑर्डर। यह डील न केवल कंपनी की तकनीकी क्षमताओं को साबित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि:

  • भारत अब indigenous defence technologies पर भरोसा कर रहा है
  • Marine robotics जैसे niche sectors में Indian startups global standards तक पहुंच रहे हैं

यह ऑर्डर EyeROV को defence robotics segment में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।


🧠 Advanced Technology: AI + NDT Payloads

EyeROV अपने robotic systems में Non-Destructive Testing (NDT) payloads को integrate करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 🔊 Ultrasonic Testing (UT)
  • 📡 Sonar Imaging
  • 🤖 AI-based inspection tools

इन technologies की मदद से:

  • Underwater structures में cracks, corrosion और damage
  • Power plants के intake systems
  • Oil pipelines और offshore assets

की inspection बिना किसी manual diving के की जा सकती है, जिससे safety और efficiency दोनों बढ़ती हैं।


🔁 Product Sales + Robotics-as-a-Service (RaaS) Model

EyeROV का बिजनेस मॉडल केवल product sales तक सीमित नहीं है। कंपनी:

  • 🤝 Robotics-as-a-Service (RaaS)
  • 🛠️ Customized inspection solutions

भी ऑफर करती है।

इस मॉडल से clients को:

  • High-cost robotic systems खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती
  • Project-based या subscription-based services मिलती हैं
  • Operational costs कम होती हैं

यह मॉडल खासकर ports, oil & gas और government agencies के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।


🌊 तेजी से बढ़ता Marine Robotics Market

भारत में marine robotics market अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन:

  • Port modernization
  • Offshore renewable energy
  • Defence indigenisation
  • Smart infrastructure projects

की वजह से यह सेक्टर आने वाले वर्षों में तेजी से grow करने वाला है।

EyeROV जैसी कंपनियां इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं और भारत को global marine robotics map पर लाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।


🚀 आगे क्या है EyeROV की रणनीति?

नई फंडिंग के साथ EyeROV का लक्ष्य है:

  • 🌐 International markets में expansion
  • 🤖 More autonomous और AI-driven robotic systems
  • 🛡️ Defence और strategic projects में deeper integration
  • 🇮🇳 “Make in India” vision के तहत indigenous technology development

कंपनी आने वाले समय में भारत की marine, defence और energy infrastructure को सुरक्षित और smart बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।


📌 Bottom Line

₹13 करोड़ की Pre-Series A funding और Indian Navy का ₹47 करोड़ का ऑर्डर EyeROV के लिए एक बड़ा milestone है। यह न केवल स्टार्टअप की growth को accelerate करेगा, बल्कि भारत के deep-tech और defence startup ecosystem को भी मजबूत बनाएगा।

Read more :🏠 इंटीरियर डिज़ाइन स्टार्टअप Material Depot ने जुटाए $10 मिलियन,

🏠 इंटीरियर डिज़ाइन स्टार्टअप Material Depot ने जुटाए $10 मिलियन,

Material Depot

भारत में इंटीरियर डिज़ाइन और होम डेकोर सेक्टर तेजी से संगठित और टेक-ड्रिवन होता जा रहा है। इसी ट्रेंड को मजबूती देते हुए बेंगलुरु-आधारित स्टार्टअप Material Depot ने अपने लेटेस्ट फंडिंग राउंड में $10 मिलियन (करीब ₹83 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का co-lead निवेश Accel और Stellaris Venture Partners ने किया है।

इस फंडिंग राउंड में Whiteboard Capital, DeVC, Soma Capital और MyAsiaVC ने भी भागीदारी की। इसके अलावा, कई जाने-माने एंजल निवेशकों ने भी Material Depot पर दांव लगाया है।


💼 बड़े एंजल निवेशकों की मौजूदगी

इस फंडिंग राउंड में शामिल प्रमुख एंजल निवेशकों में शामिल हैं:

  • Ramakant Sharma (Founder, Livspace)
  • Ankit Nagori (Curefoods)
  • Shashvat Nakrani (Co-founder, BharatPe)
  • Niraj Singh (Founder, Spinny)
  • Abhishek Goyal और अन्य

इंटीरियर और कंज्यूमर स्पेस के अनुभवी फाउंडर्स की भागीदारी Material Depot के बिजनेस मॉडल और लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल में मजबूत भरोसा दिखाती है।


🌱 पहले भी उठा चुकी है फंडिंग

Material Depot की यह पहली फंडिंग नहीं है। इससे पहले स्टार्टअप ने Y Combinator और अन्य निवेशकों से $4 मिलियन से ज्यादा की पूंजी जुटाई थी। Y Combinator का बैकिंग मिलना ही कंपनी के शुरुआती दिनों में इसके ग्लोबल-लेवल बिजनेस अप्रोच को दर्शाता है।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस नई फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 🧠 Technology stack को मजबूत करने में
    • Supply chain management
    • Inventory planning
    • Assisted in-store selling tools
  • 🧱 Product portfolio और collections को और विस्तार देने में
  • 🏬 Offline presence को स्केल करने के लिए, यानी नए experience centres खोलने में

Material Depot का मानना है कि इंटीरियर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े फैसले high-involvement होते हैं, जहां टेक्नोलॉजी और फिजिकल एक्सपीरियंस का सही कॉम्बिनेशन जरूरी है।


🧑‍💼 Material Depot क्या करती है?

Material Depot की स्थापना 2021 में Sarthak Agrawal और Manish Reddy ने की थी। यह एक B2B और B2C दोनों सेगमेंट में काम करने वाला स्टार्टअप है, जो खुद को digital-first, one-stop shop के रूप में पोजिशन करता है।

यह प्लेटफॉर्म कंस्ट्रक्शन, इंटीरियर डिज़ाइन और होम डेकोर से जुड़ी सामग्री जैसे:

  • Tiles
  • Laminates
  • Plywood
  • Wall panels
  • Quartz

को एक ही जगह उपलब्ध कराता है।


🖥️ टेक-ड्रिवन प्लेटफॉर्म + 3D विज़ुअलाइजेशन

Material Depot सिर्फ एक ऑनलाइन कैटलॉग नहीं है। प्लेटफॉर्म पर:

  • 🎨 Curated collections उपलब्ध हैं
  • 🏠 3D visualisation tools दिए जाते हैं, जिससे ग्राहक यह देख सकें कि चुनी गई सामग्री उनके घर में कैसी दिखेगी
  • 🏭 Direct-from-manufacturer sourcing के जरिए कीमत और क्वालिटी दोनों पर कंट्रोल रखा जाता है

इससे न केवल डिजाइनर्स बल्कि आम होमओनर्स के लिए भी decision-making आसान हो जाती है।


🔄 Omnichannel मॉडल: ऑनलाइन से ऑफलाइन तक

Material Depot एक omnichannel मॉडल पर काम करती है। इसका मतलब है कि ग्राहक:

1️⃣ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट्स को discover करते हैं
2️⃣ फिर फिजिकल experience centres में जाकर

  • सामग्री को छू सकते हैं
  • महसूस कर सकते हैं
  • और तुलना कर सकते हैं

कंपनी का मानना है कि इंटीरियर और होम डेकोर जैसे कैटेगरी में touch & feel बहुत अहम भूमिका निभाता है।


🏬 प्राइवेट लेबल पर खास फोकस

Material Depot के प्लेटफॉर्म पर इस समय 3 लाख से ज्यादा मटीरियल्स लिस्टेड हैं। इनमें:

  • Tiles
  • Laminates
  • Wall panels
  • Quartz
  • अन्य इंटीरियर मटीरियल

शामिल हैं। खास बात यह है कि कंपनी के करीब 60% पोर्टफोलियो में private-label brands शामिल हैं। इससे कंपनी को बेहतर मार्जिन, कस्टमाइजेशन और सप्लाई चेन कंट्रोल मिलता है।


📍 वर्तमान स्थिति और आगे की योजना

फिलहाल Material Depot:

  • बेंगलुरु में 3 experience centres ऑपरेट करती है
  • लगभग 15,000 ग्राहकों को सर्व कर रही है

आने वाले 12–18 महीनों में कंपनी की योजना है:

  • 🏙️ 30+ experience centres खोलने की
  • 👥 ग्राहक संख्या को 50,000+ तक बढ़ाने की
  • कई नए शहरों में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों चैनलों के जरिए विस्तार करने की

📊 बदलता इंटीरियर और होम डेकोर बाजार

भारत में रियल एस्टेट, रिनोवेशन और होम इम्प्रूवमेंट पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन यह बाजार अब भी काफी हद तक fragmented और unorganised है। Material Depot जैसे स्टार्टअप इस सेक्टर को:

  • टेक्नोलॉजी
  • क्यूरेशन
  • और ओम्नीचैनल एक्सपीरियंस

के जरिए संगठित करने की कोशिश कर रहे हैं।


📌 निष्कर्ष

Material Depot की $10 मिलियन की फंडिंग यह साफ संकेत देती है कि इंटीरियर और होम डेकोर जैसे पारंपरिक सेगमेंट में भी डिजिटल-फर्स्ट और ओम्नीचैनल मॉडल तेजी से जगह बना रहे हैं। मजबूत निवेशकों का समर्थन, अनुभवी एंजल्स की भागीदारी और आक्रामक विस्तार योजना — ये सभी फैक्टर Material Depot को इस स्पेस का अहम खिलाड़ी बना सकते हैं।

Read more :👗 फैशन क्विक कॉमर्स स्टार्टअप ZILO ने जुटाए $15.3 मिलियन,

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ZILO

भारत में quick commerce का दायरा अब ग्रोसरी और फूड से आगे बढ़कर फैशन तक पहुंच चुका है। इसी ट्रेंड को आगे बढ़ाते हुए मुंबई स्थित fashion quick commerce startup ZILO ने अपने Series A फंडिंग राउंड में $15.3 मिलियन (करीब ₹140 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया, जिसने अकेले $8 मिलियन का निवेश किया।

इस राउंड में ZILO के मौजूदा निवेशक InfoEdge Ventures और Chiratae Ventures ने भी $2.5 मिलियन$2.5 मिलियन का निवेश जारी रखा, जो कंपनी के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ पर उनके भरोसे को दर्शाता है।


💼 डेट फंड और दिग्गज एंजल निवेशकों की भी भागीदारी

Series A राउंड में सिर्फ इक्विटी निवेशक ही नहीं, बल्कि डेट फंड्स और जाने-माने एंजल निवेशकों ने भी हिस्सा लिया। इसमें शामिल हैं:

  • Alteria Capital
  • Stride Ventures

इसके अलावा, कई बड़े एंजल इन्वेस्टर्स ने भी ZILO पर दांव लगाया, जिनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Lalit Keshre (CEO, Groww)
  • Kunal Shah (Founder, CRED)
  • Sachin Oswal
  • Ayyappan R
  • Abhishek Bansal
  • Sreevathsa Prabhakar
  • Preeta Sukhtankar

इन निवेशकों की मौजूदगी ZILO को न सिर्फ पूंजी बल्कि रणनीतिक मार्गदर्शन भी देगी।


🌱 पहले ही जुटा चुकी है Seed Funding

यह ZILO की पहली बड़ी फंडिंग नहीं है। इससे पहले जून 2024 में स्टार्टअप ने $4.5 मिलियन की Seed Funding जुटाई थी, जिसका नेतृत्व भी InfoEdge Ventures और Chiratae Ventures ने किया था।

यानि, करीब एक साल के भीतर ZILO ने लगातार निवेशकों का भरोसा जीता है और अब Series A तक पहुंच चुकी है।


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के मुताबिक, इस नई फंडिंग का इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 🏙️ ऑपरेशंस को स्केल करने के लिए
  • 🤖 टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाने में
  • 🌆 नए शहरों में विस्तार के लिए
  • 🚚 Supply chain और inventory management को बेहतर करने में

फिलहाल ZILO मुंबई में ऑपरेट करती है, लेकिन कंपनी की योजना है कि अगले 12–14 महीनों में वह कई अन्य बड़े शहरों में अपनी सेवाएं शुरू करे।


🧑‍💻 ZILO की स्थापना और बिजनेस मॉडल

ZILO की स्थापना Padmakumar Pal और Bhavik Jhaveri ने की है, जो इससे पहले Flipkart और Myntra जैसे दिग्गज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में काम कर चुके हैं। इनका अनुभव ZILO के ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक्स मॉडल में साफ नजर आता है।

ZILO एक fashion quick commerce platform है, जो ग्राहकों को 60 मिनट के भीतर कपड़ों की डिलीवरी का वादा करता है। यह मॉडल खास तौर पर उन यूजर्स को टारगेट करता है, जिन्हें तुरंत आउटफिट चाहिए — जैसे पार्टी, ऑफिस मीटिंग या इवेंट के लिए।


🏬 Dark Stores + Brand Outlets का वर्टिकली इंटीग्रेटेड मॉडल

ZILO का सबसे बड़ा डिफरेंशिएटर इसका vertically integrated model है। कंपनी:

  • 🏢 अपने dark stores का इस्तेमाल करती है
  • 🛍️ साथ ही brand outlets के साथ भी सीधे काम करती है

इससे ZILO को inventory पर बेहतर कंट्रोल मिलता है और डिलीवरी टाइमलाइन को मैनेज करना आसान होता है।

फिलहाल ZILO 200+ फैशन ब्रांड्स के साथ काम कर रही है।


🔄 Home Trials और Instant Returns जैसी सुविधाएं

फैशन ई-कॉमर्स में सबसे बड़ी चुनौती होती है — size, fit और look। ZILO इस समस्या को हल करने के लिए कुछ खास फीचर्स ऑफर करती है:

  • 👕 Home trials – ग्राहक घर पर ट्राय कर सकते हैं
  • 🔁 Instant returns – पसंद न आने पर तुरंत रिटर्न

ये फीचर्स ZILO को पारंपरिक ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से अलग बनाते हैं।


⚔️ बढ़ती प्रतिस्पर्धा: ZILO बनाम KNOT, Slikk और Myntra

फैशन क्विक कॉमर्स सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में:

  • Mumbai-based KNOT ने $5 मिलियन की फंडिंग जुटाई
  • Slikk भी इसी सेगमेंट में एक्टिव है
  • वहीं, Myntra ने भी अपने quick fashion delivery मॉडल को कई नए शहरों में एक्सपैंड किया है

हालांकि, ZILO का फोकस speed + experience दोनों पर है, जो इसे भीड़ से अलग पहचान दिला सकता है।


📊 Quick Fashion: अगला बड़ा ट्रेंड?

2024–25 में भारत में quick commerce का विस्तार जिस तेजी से हुआ है, उसने यह साबित कर दिया है कि कंज्यूमर convenience और speed के लिए प्रीमियम देने को तैयार है। फैशन जैसी कैटेगरी में यह मॉडल कितना स्केलेबल होगा, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन शुरुआती संकेत काफी मजबूत हैं।


📌 निष्कर्ष

ZILO की Series A फंडिंग यह दिखाती है कि fashion quick commerce अब सिर्फ एक प्रयोग नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ बिजनेस मॉडल बन चुका है। मजबूत फाउंडर बैकग्राउंड, बड़े निवेशकों का सपोर्ट और तेजी से बदलती कंज्यूमर हैबिट्स — ये सभी फैक्टर ZILO को आने वाले समय में इस सेगमेंट का अहम खिलाड़ी बना सकते हैं।

Read more :🥗 प्रिवेंटिव न्यूट्रिशन स्टार्टअप Good Monk ने जुटाए ₹33 करोड़,

🥗 प्रिवेंटिव न्यूट्रिशन स्टार्टअप Good Monk ने जुटाए ₹33 करोड़,

Good Monk

भारत में तेजी से बढ़ते प्रिवेंटिव न्यूट्रिशन सेगमेंट में काम कर रही बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Good Monk ने अपने pre-Series A फंडिंग राउंड में ₹33 करोड़ (लगभग $3.65 मिलियन) जुटाए हैं। यह फंडिंग राउंड RPSG Capital Ventures के नेतृत्व में हुआ, जिसमें Sharrp Ventures और Hyperscale Ventures ने भी भाग लिया।

इस राउंड में कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹175 करोड़ (लगभग $20 मिलियन) आंका गया है। खास बात यह है कि इस फंडिंग में फाउंडर्स के परिवारों ने भी निवेश किया है, जो कंपनी के बिजनेस मॉडल और भविष्य की ग्रोथ पर उनके भरोसे को दर्शाता है।


🦈 Shark Tank से मिली पहचान, Vineeta Singh का मिला समर्थन

Good Monk को हाल ही में Shark Tank India Season 4 में भी देखा गया था, जहां स्टार्टअप ने जजेस को अपने यूनिक न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स से प्रभावित किया। शो के दौरान Sugar Cosmetics की को-फाउंडर Vineeta Singh ने कंपनी में निवेश करने का फैसला किया, जिससे ब्रांड को जबरदस्त विजिबिलिटी और भरोसेमंद पहचान मिली।

Shark Tank में मिली यह पहचान Good Monk के लिए न सिर्फ ब्रांड बिल्डिंग में मददगार साबित हुई, बल्कि कंज्यूमर न्यूट्रिशन स्पेस में कंपनी की विश्वसनीयता भी बढ़ी।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस नए निवेश का इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 🔬 Research & Development (R&D) में निवेश, ताकि नए और बेहतर न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जा सकें
  • 🧃 नए न्यूट्रिशन फॉर्मैट्स का मूल्यांकन, जो भारतीय खाने की आदतों के साथ आसानी से फिट हो सकें
  • 🛒 Tier-II और Tier-III शहरों में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार
  • 📢 Brand awareness और consumer education, ताकि लोग रोजमर्रा की न्यूट्रिशन की अहमियत को बेहतर समझ सकें

कंपनी का मानना है कि भारत में न्यूट्रिशन की समस्या केवल सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि डेली फूड हैबिट्स में छोटे बदलाव से हल की जा सकती है।


🧑‍🍳 Good Monk क्या करती है?

Good Monk, Superfoods Valley की फ्लैगशिप ब्रांड है और इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है। इस स्टार्टअप की स्थापना Amarpreet Singh Anand और Sahiba Kaur ने की थी।

कंपनी preventive nutrition segment में काम करती है और इसके प्रोडक्ट्स का मुख्य फोकस है –
👉 Sprinkle-on Nutrition

यानी ऐसे न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स, जिन्हें रोजमर्रा के खाने जैसे दाल, सब्जी, चावल, पराठा या स्नैक्स पर आसानी से छिड़का (sprinkle) जा सकता है। इससे लोगों को अपनी डाइट बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि वही खाना खाते हुए न्यूट्रिशन बेहतर हो जाता है।


🛍️ कहां बिकते हैं Good Monk के प्रोडक्ट्स?

Good Monk अपने प्रोडक्ट्स को Direct-to-Consumer (D2C) मॉडल के जरिए बेचती है। कंपनी के प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं:

  • 🖥️ Good Monk की अपनी वेबसाइट
  • 🛒 बड़े ऑनलाइन मार्केटप्लेसेज़ जैसे Amazon और Flipkart

कंपनी का दावा है कि पिछले 18 महीनों में उसने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है और अब वह CM3 level पर contribution margin positive हो चुकी है, जो किसी भी कंज्यूमर ब्रांड के लिए एक अहम माइलस्टोन माना जाता है।


📈 बढ़ता प्रिवेंटिव न्यूट्रिशन मार्केट

भारत में हेल्थ और वेलनेस को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है। आज के कंज्यूमर केवल बीमारी के बाद इलाज पर नहीं, बल्कि बीमारी से पहले बचाव (prevention) पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

यही वजह है कि:

  • मल्टीविटामिन
  • फोर्टिफाइड फूड्स
  • और रोजमर्रा के खाने में मिलाए जाने वाले न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स

जैसे सेगमेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं। Good Monk इसी ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स बना रही है, जो Indian food habits के साथ आसानी से फिट हो जाएं।


🚀 आगे क्या है Good Monk की रणनीति?

नई फंडिंग के साथ Good Monk की योजना है कि वह:

  • अपने product portfolio को और बड़ा करे
  • बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग न्यूट्रिशन सॉल्यूशंस विकसित करे
  • डिजिटल चैनलों के जरिए देशभर में अपनी online reach को स्केल करे

Tier-II और Tier-III शहरों में हेल्थ अवेयरनेस बढ़ने के साथ, कंपनी को वहां से बड़े ग्रोथ अवसर मिलने की उम्मीद है।


📌 निष्कर्ष

Good Monk ने कम समय में यह साबित किया है कि अगर प्रोडक्ट सही समस्या को हल करता है और यूजर के लिए आसान है, तो कंज्यूमर उसे अपनाता है। मजबूत निवेशकों का समर्थन, Shark Tank से मिली पहचान और तेजी से बढ़ता प्रिवेंटिव न्यूट्रिशन मार्केट — ये सभी फैक्टर्स Good Monk को आने वाले वर्षों में एक मजबूत D2C हेल्थ ब्रांड बना सकते हैं।

Read more :💰Aye Finance का IPO ₹1,010 करोड़ जुटाने की तैयारी,

💰Aye Finance का IPO ₹1,010 करोड़ जुटाने की तैयारी,

Aye Finance

भारत के तेजी से बढ़ते MSME माइक्रोलेंडिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी Aye Finance अब शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने अपने आगामी Initial Public Offering (IPO) के लिए ₹122–129 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह जानकारी कंपनी द्वारा कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास दाखिल किए गए Red Herring Prospectus (RHP) में सामने आई है।

📅 IPO Timeline

  • IPO खुलेगा: 9 फरवरी
  • IPO बंद होगा: 11 फरवरी
  • Anchor investors के लिए ओपनिंग: 6 फरवरी

प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर Aye Finance की कुल वैल्यूएशन करीब $352 मिलियन (लगभग ₹2,900 करोड़) आंकी जा रही है।


📊 ₹1,010 करोड़ का पब्लिक इश्यू: Fresh Issue + OFS

RHP के मुताबिक, Aye Finance का IPO कुल ₹1,010 करोड़ का होगा, जिसमें दो हिस्से शामिल हैं:

  • 🔹 ₹710 करोड़ का Fresh Issue
  • 🔹 ₹300 करोड़ का Offer for Sale (OFS)

Fresh issue से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने लोन बुक को बढ़ाने, कैपिटल एडिक्वेसी मजबूत करने और ग्राउंड-लेवल MSME फाइनेंसिंग को स्केल करने में करेगी।

वहीं OFS के तहत कंपनी के मौजूदा निवेशक और प्रमोटर्स अपने कुछ शेयर बेचेंगे।


🧑‍💼 कौन बेच रहे हैं OFS में शेयर?

OFS के जरिए जिन बड़े शेयरहोल्डर्स और प्रमोटर्स के शेयर बाजार में आएंगे, उनमें शामिल हैं:

  • Co-founder Vikram Jetley
  • Alpha Wave India I LP
  • MAJ Invest Financial Inclusion Fund II
  • CapitalG LP
  • LGT Capital Invest Mauritius PCC (Cell E/VP)

यह IPO शुरुआती निवेशकों को आंशिक एग्जिट का मौका देगा, जबकि कंपनी को आगे की ग्रोथ के लिए मजबूत कैपिटल बेस मिलेगा।


🏦 IPO के लीड मैनेजर्स कौन हैं?

Aye Finance के इस पब्लिक इश्यू को मैनेज करने के लिए देश के बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक्स को नियुक्त किया गया है:

  • Axis Capital
  • IIFL Capital
  • Nuvama Wealth
  • JM Financial

SEBI से कंपनी को IPO की मंजूरी अप्रैल 2025 में ही मिल चुकी थी।


📌 शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर: कौन है सबसे बड़ा निवेशक?

RHP के अनुसार, IPO से पहले Aye Finance में सबसे बड़ी बाहरी हिस्सेदारी इन निवेशकों के पास है:

  • Elevation Capital – 16.03%
  • LGT Capital – 13.99%
  • Alpha Wave – 11.10%

इन बड़े ग्लोबल निवेशकों की मौजूदगी कंपनी के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ पोटेंशियल में मजबूत भरोसे को दिखाती है।


📈 Financial Performance: Revenue बढ़ा, Profit दबाव में

अगर कंपनी के FY26 Q1 (अप्रैल-जून) के फाइनेंशियल पर नजर डालें, तो तस्वीर थोड़ी मिक्स्ड दिखाई देती है।

🔹 Revenue Growth

  • Q1 FY26 Revenue: ₹407 करोड़
  • Q1 FY25 Revenue: ₹335 करोड़
  • 📈 सालाना बढ़ोतरी: 21.5%

यह ग्रोथ MSME लोन डिमांड और मजबूत डिस्बर्समेंट के कारण आई है।

🔹 Profit में गिरावट

  • Q1 FY26 Profit: ₹30.5 करोड़
  • Q1 FY25 Profit की तुलना में गिरावट: 50%

हालांकि, कंपनी का EBITDA ₹172 करोड़ पॉजिटिव रहा, जो यह दिखाता है कि ऑपरेशनल लेवल पर बिजनेस अभी भी मजबूत है। बढ़ती provisioning और फंडिंग कॉस्ट के कारण नेट प्रॉफिट पर दबाव देखने को मिला।


🏭 Aye Finance क्या करती है?

Aye Finance एक माइक्रोलेंडिंग NBFC है, जो खास तौर पर छोटे व्यापारियों, मैन्युफैक्चरर्स और MSMEs को collateral-free लोन प्रदान करती है। कंपनी पारंपरिक क्रेडिट स्कोर पर निर्भर रहने की बजाय डेटा-ड्रिवन अंडरराइटिंग मॉडल का इस्तेमाल करती है।

इसके प्रमुख ग्राहक हैं:

  • छोटे फैब्रिकेटर्स
  • ट्रेडर्स
  • मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
  • सर्विस MSMEs

भारत में जहां MSME सेक्टर को बैंकिंग क्रेडिट की भारी कमी झेलनी पड़ती है, वहां Aye Finance जैसी कंपनियां फाइनेंशियल इनक्लूजन में अहम भूमिका निभा रही हैं।


🔍 IPO निवेशकों के लिए क्या मायने?

Aye Finance का IPO ऐसे समय आ रहा है जब:

  • MSME क्रेडिट डिमांड लगातार बढ़ रही है
  • डिजिटल लेंडिंग और डेटा-आधारित NBFC मॉडल को बाजार का समर्थन मिल रहा है
  • हालांकि, ब्याज दरें और asset quality निवेशकों के लिए एक निगरानी का विषय बनी रहेंगी

कंपनी की मजबूत revenue growth, अनुभवी निवेशक बेस और स्पष्ट MSME फोकस इसे IPO बाजार का एक अहम इश्यू बनाता है।


📌 निष्कर्ष

Aye Finance का IPO भारतीय फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में एक महत्वपूर्ण पेशकश माना जा रहा है। भले ही शॉर्ट टर्म में प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव दिख रहा हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में MSME फाइनेंसिंग का पोटेंशियल कंपनी के लिए मजबूत ग्रोथ स्टोरी पेश करता है।

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