💡 Infibeam Avenues अब बनेगा AvenuesAI Ltd

Infibeam Avenues

भारत की डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Infibeam Avenues ने अपने बिज़नेस मॉडल में बड़े बदलाव की घोषणा की है। कंपनी अब अपना नाम बदलकर AvenuesAI Ltd करने की योजना बना रही है। यह कदम कंपनी की नई AI-ड्रिवन डिजिटल पेमेंट्स और फिनटेक स्ट्रैटेजी को दर्शाता है।

नाम बदलने का प्रस्ताव बोर्ड द्वारा मंज़ूर कर लिया गया है, और अब यह आगे चलकर वैधानिक और रेगुलेटरी मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा।


🤖 क्यों बदल रही है कंपनी अपनी पहचान?

Infibeam Avenues का कहना है कि उसकी नई पहचान AI Powered Fintech Company के रूप में उभरने की दिशा को मजबूत करेगी।
पहले कंपनी की पहचान एक पेमेंट और ई-कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर के रूप में थी। लेकिन अब कंपनी AI को अपने हर प्रोडक्ट, सर्विस और बिज़नेस मॉडल का केंद्र बनाकर आगे बढ़ना चाहती है।

इस बदलाव का मकसद—

  • AI आधारित पेमेंट सिस्टम बनाना
  • ग्लोबल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना
  • तेज़ी से बढ़ते फिनटेक मार्केट में नई पहचान बनाना

🧑‍💼 बड़े स्तर पर लीडरशिप बदलाव भी घोषित

नाम बदलने के साथ कंपनी ने अपने नेतृत्व (Leadership) में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।

👉 विश्‍वास पटेल

वर्तमान में Joint Managing Director
➡ अब बनेंगे Managing Director और CEO

👉 विशाल मेहता

Chairman और Managing Director
➡ आगे भी Chairman बने रहेंगे,
लेकिन उनका मुख्य फोकस होगा—

  • लंबी अवधि की रणनीति
  • AI आधारित रोडमैप

इन बदलावों का उद्देश्य कंपनी को अगले चरण की AI फिनटेक ग्रोथ के लिए तैयार करना है।


👩‍💼 नई Women Director की नियुक्ति

उसी बोर्ड मीटिंग में एक और बड़ा निर्णय हुआ—
नेहरिका वोहरा को कंपनी ने Additional Women Director (Non-Executive, Independent) के रूप में नियुक्त किया है।
उनका कार्यकाल 5 साल का होगा और 11 दिसंबर 2025 से शुरू होगा।

नेहरिका वोहरा का अनुभव

  • IIMA Ventures में उद्यमिता कार्यक्रमों में नेतृत्व
  • स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम से गहरा जुड़ाव

कंपनी का कहना है कि उनकी विशेषज्ञता नए AI आधारित बिज़नेस ट्रांसफॉर्मेशन को सही दिशा देगी।


🌍 भारत से लेकर विदेशों तक फैला है Infibeam का नेटवर्क

Infibeam Avenues भारत ही नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी काम करता है। कंपनी की मौजूदगी इन देशों में है—

  • 🇦🇪 UAE
  • 🇸🇦 सऊदी अरब
  • 🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया
  • 🇺🇸 अमेरिका
  • 🇴🇲 ओमान (कई प्रमुख बैंकों के साथ पार्टनरशिप)

कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पेमेंट मार्केट में बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स मिलते हैं। नए ब्रांड AvenuesAI के तहत कंपनी अपना वैश्विक विस्तार और मजबूत करना चाहती है।


📈 शानदार वित्तीय प्रदर्शन — FY26 में जबरदस्त ग्रोथ

Infibeam Avenues ने अपने आधे साल (H1 FY26) के वित्तीय नतीजों में काफी मजबूत प्रदर्शन दिखाया है।

🔹 84% Revenue Growth (Year-on-Year)

🔹 26% TPV (Total Payment Volume) Growth

पेमेंट गेटवे यूनिट CCAvenue कंपनी का मुख्य ब्रांड बना रहेगा।
CCAvenue वर्तमान में—

  • 200+ बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ काम करती है
  • लाखों व्यापारियों को ऑनलाइन पेमेंट सर्विस प्रदान करती है

💳 कितने ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए कंपनी ने?

FY25 में Infibeam Avenues ने कुल—

💰 ₹8.67 ट्रिलियन

(यानि 8.67 लाख करोड़ रुपये)
के ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए।

कंपनी के पास—

👥 1 करोड़ से अधिक व्यापारी (Merchants)

और

🏢 Enterprise Customers

जुड़े हुए हैं।

यह डेटा बताता है कि कंपनी भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक बन चुकी है।


🤖 AvenuesAI — भविष्य की ओर कदम

कंपनी का दावा है कि नए AI-फोकस्ड मॉडल के ज़रिए—

  • पेमेंट्स और फिनटेक सर्विसेज़ और स्मार्ट होंगी
  • रिस्क मैनेजमेंट और फ्रॉड डिटेक्शन बेहतर होगा
  • व्यापारी और बैंक अधिक दक्षता (Efficiency) के साथ काम कर पाएंगे
  • ग्लोबल बिज़नेस तेज़ी से बढ़ेगा

AI और पेमेंट टेक्नोलॉजी को मिलाकर कंपनी खुद को अगली पीढ़ी का Fintech Leader बनाने की तैयारी कर रही है।


🏁 निष्कर्ष

Infibeam Avenues का AvenuesAI Ltd बनना, सिर्फ नाम बदलने की औपचारिकता नहीं है—
यह कंपनी की नई रणनीति का स्पष्ट संकेत है कि वह भविष्य की फिनटेक दुनिया में AI को केंद्र में रखकर काम करना चाहती है।

मजबूत नेतृत्व बदलाव, नए बोर्ड मेंबर जोड़ना, शानदार वित्तीय परिणाम और ग्लोबल विस्तार—
ये सभी कदम दर्शाते हैं कि कंपनी अपने AI-ड्रिवन मिशन को लेकर गंभीर है।

भारत और दुनिया में डिजिटल पेमेंट्स का भविष्य तेज़ी से बदल रहा है, और AvenuesAI इस बदलाव की अगुवाई करने की ओर बढ़ रही है।

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🤖✨ NeoSapien ने जुटाए $2 मिलियन

NeoSapien

बेंगलुरु स्थित AI वियरेबल स्टार्टअप NeoSapien ने अपने सीड फंडिंग राउंड में 2 मिलियन डॉलर (करीब ₹18 करोड़) जुटाए हैं। यह निवेश Merak Ventures के नेतृत्व में हुआ, जिसमें कई नामी एंजल निवेशकों ने भाग लिया—
Pixxel के फाउंडर Awais Ahmed, Shaadi.com के संस्थापक Anupam Mittal, boAt के को-फाउंडर Sameer Mehta, Shark Tank की जज Namita Thapar, TaxiForSure के को-फाउंडर Aprameya Radhakrishna और कई अन्य निवेशक शामिल रहे।

इससे पहले NeoSapien ने Namita Thapar और अन्य निवेशकों से $92.4K की शुरुआती पूंजी जुटाई थी।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल किस लिए होगा?

स्टार्टअप ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि नई आई पूंजी का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में किया जाएगा—

  • प्रोडक्ट डेवलपमेंट को तेज़ करना
  • मार्केट विज़िबिलिटी बढ़ाना
  • टीम को मज़बूत करना

कंपनी अब तेज़ी से अपने AI-पावर्ड वियरेबल्स को मार्केट में उतारने और बड़े पैमाने पर अपनाई जाने वाली तकनीक बनाने की तैयारी में है।


🧠⚡ NeoSapien — अगली पीढ़ी का AI wearable स्टार्टअप

2024 में धनंजय यादव और आर्यन यादव द्वारा स्थापित, NeoSapien खुद को “Future of Wearable Intelligence” के रूप में प्रस्तुत करता है। इसका लक्ष्य एक ऐसे AI इकोसिस्टम का निर्माण करना है जो मानव अंतर्ज्ञान (intuition) और मशीन की अनुकूली बुद्धिमत्ता को एक साथ जोड़ सके।

NeoSapien का प्रमुख प्रोडक्ट है—

Neo 1 — AI Native Wearable

यह एक ऐसा वियरेबल है जो आपके रोज़मर्रा के संवादों और गतिविधियों को Actionable Insights में बदल देता है। कंपनी इसे “Second Brain” कहती है।


🧠 Neo 1: आपका “Second Brain” कैसे काम करता है?

Neo 1 एक Always-On AI Assistant है। इसका काम सिर्फ आवाज़ सुनना नहीं, बल्कि लगातार सीखना और समझना भी है।

इसमें मौजूद फीचर्स—

🔹 Persistent Memory:

डिवाइस समय के साथ आपकी पसंद, आदतें, और पैटर्न सीखता है और उसी आधार पर सुझाव देता है।

🔹 Proactive Intelligence:

Neo 1 आपको उस समय जानकारी देता है जब आपको उसकी जरूरत है, बिना किसी कमांड के।

🔹 Real-Time Insights:

आपकी बातचीत, आइडिया, टास्क और गतिविधियाँ—सबको रीयल-टाइम में कैप्चर कर, प्रोसेस और ऑर्गनाइज़ करता है।

🔹 100+ भाषाओं का सपोर्ट:

कन्नड़ से लेकर मंदारिन तक, Neo 1 100 से ज्यादा भाषाओं में काम करता है। यह इसे भारत जैसे बहुभाषी देशों के लिए बेहद उपयोगी बनाता है।


🌍 NeoSapien का बड़ा विज़न — AI Assistants का Operating System बनना

कंपनी का लक्ष्य केवल एक वियरेबल बेचना नहीं है, बल्कि पूरा AI-आधारित ईकोसिस्टम बनाना है।

NeoSapien कहता है कि वह हर तरह के AI Assistant Hardware के लिए Operating System लेयर बनाना चाहता है —

  • स्मार्ट ग्लास
  • स्मार्ट पेंडेंट
  • स्मार्टवॉच
  • स्मार्ट रिंग्स

इसके लिए कंपनी ने अपना NeoCore SDK तैयार किया है, जिसके जरिए अन्य कंपनियां NeoSapien की AI Intelligence लेयर पर अपने ऐप्स और सर्विसेज़ बना सकेंगी।

यानी, NeoSapien सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि AI Wearable Tech का भविष्य तैयार कर रहा है।


🏢 Merak Ventures — क्यों किया निवेश?

Merak Ventures, जिसे मनु रिक्हे और शीलत बहल मैनेज करते हैं, एक सेक्टर-अग्नोस्टिक एंजल फंड है।

उनका फोकस है—

  • B2B स्टार्टअप्स
  • इम्पैक्ट-ड्रिवन टेक कंपनियां
  • अगली पीढ़ी की तकनीक

NeoSapien का विज़न—AI और वियरेबल इंटेलिजेंस को मिलाकर एक नई कैटेगरी बनाना—Merak Ventures की रणनीति से मेल खाता है।

निवेशकों को विश्वास है कि NeoSapien आने वाले वर्षों में भारत और वैश्विक स्तर पर AI-Powered Wearables को पुनर्परिभाषित करेगा।


📱 Indian AI Wearable Market में NeoSapien का संभावित प्रभाव

भारत में स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड्स का मार्केट बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन अभी तक किसी बड़े खिलाड़ी ने—

  • Persistent Memory
  • Contextual AI
  • Real-Time Reasoning

जैसे फीचर्स को एक वियरेबल में इंटीग्रेट नहीं किया है।

Neo 1 इस खाली जगह को भर सकता है और भारत में AI Wearables का नया ट्रेंड शुरू कर सकता है।


🔮 भविष्य — AI-driven Human Augmentation

NeoSapien का कहना है कि आने वाले समय में वियरेबल्स सिर्फ फिटनेस डेटा ट्रैक नहीं करेंगे, बल्कि—

  • हमारे विचार
  • दैनिक आदतें
  • बातचीत
  • इरादे

सबको समझकर हमारी Productivity बढ़ाएंगे, Decision Making बेहतर करेंगे, और Humans को Augment करेंगे।

NeoSapien खुद को इसी नई तकनीकी क्रांति के केंद्र में देखता है।


🏁 निष्कर्ष

NeoSapien की $2 मिलियन सीड फंडिंग भारतीय AI Wearable Ecosystem के लिए एक बड़ा मोमेंट है।
Neo 1 जैसे AI-नेेटिव डिवाइसेज़ हमें उस भविष्य की ओर ले जा रहे हैं जहां वियरेबल्स सिर्फ गैजेट नहीं, बल्कि हमारा डिजिटल दूसरा दिमाग बन जाएंगे।

कई बड़ी हस्तियों का निवेश NeoSapien के विज़न में विश्वास दिखाता है, और यह साफ है कि कंपनी आने वाले समय में AI-पावर्ड पर्सनल टेक्नोलॉजी को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।

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☕🚀 Toffee Coffee Roasters ने जुटाए ₹5 करोड़

Toffee Coffee Roasters

भारत का स्पेशलिटी कॉफी मार्केट लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, और इसी ट्रेंड को मजबूत करते हुए Toffee Coffee Roasters ने अपने Pre-Series A राउंड में ₹5 करोड़ जुटाए हैं। यह राउंड IPV द्वारा लीड किया गया, जबकि 66 Bridge Partners, Abhijit Vemuganti और Invesst ने भी इसमें हिस्सा लिया।

यह वही स्टार्टअप है जिसे Shark Tank India पर भी फीचर किया गया था और जिसे OYO के फाउंडर रितेश अग्रवाल ने भी सपोर्ट किया है।

नई फंडिंग ब्रांड के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है क्योंकि भारत का प्रीमियम कॉफी मार्केट 20%+ CAGR पर तेजी से बढ़ रहा है और ग्राहक अब घरेलू स्तर पर high-quality roasted coffee को अपनाने लगे हैं।


💸 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार नई जुटाई गई राशि का उपयोग इन प्रमुख क्षेत्रों में होगा:

  • 🔧 Operations Expansion
  • 🏭 Backend Roastery को मजबूत बनाना
  • 📦 Packaging Quality में सुधार
  • 🆕 नई Coffee Products डेवलप करना
  • ⚙️ Production Capacity बढ़ाना

यानी यह फंडिंग सिर्फ कैपिटल नहीं, बल्कि Toffee Coffee Roasters के pan-India coffee leadership की दिशा में अहम कदम है।


📍 2019 का मुंबई कैफे → Pan-India Coffee Brand बनने तक की यात्रा

Toffee Coffee Roasters की शुरुआत 2019 में रिषभ निगम और नंदिनी श्रीवास्तव ने एक स्पेशलिटी कॉफी कैफे के रूप में मुंबई में की थी।

लेकिन फिर आया 2020 का लॉकडाउन—और वहीं से ब्रांड ने बड़ा pivot किया:

  • Fresh roasted coffee delivery मुंबई में शुरू की
  • जल्दी ही demand बढ़ने पर पूरे भारत में डिलीवरी शुरू
  • आज यह ब्रांड मार्केटप्लेस, वेबसाइट और quick commerce प्लेटफॉर्म्स पर लाखों ग्राहकों तक पहुँचता है

📦 अब तक की ग्रोथ

  • 👥 2 लाख+ ग्राहक
  • 🏭 10,000 sq ft roastery
  • 🌱 “Farm-to-Cup” मॉडल — सीधे sourcing, processing, roasting और delivery
  • 🛒 Strong presence across marketplaces + website + quick commerce

कंपनी का फुल-स्टैक मॉडल उसे consistent quality और बेहतर pricing देने में सक्षम बनाता है।


🌍 भारत और दुनिया का कॉफी मार्केट कितना बड़ा है?

मार्केट रिसर्च के अनुसार:

  • 🌎 Global Coffee Market: $150–200 billion
  • 🇮🇳 India Coffee Market: लगभग $2 billion
  • 📈 CAGR: 20%+

यह बताता है कि भारत में गुणवत्ता वाली कॉफी की मांग अभी शुरू ही हुई है—और आगे इसमें बहुत बड़ी संभावनाएं हैं।


क्या खास है Toffee Coffee Roasters में?

कंपनी दुनिया भर से premium-grade कॉफी beans sourcing करती है और:

  • 🌱 sourcing
  • 🔥 roasting
  • 🌀 blending
  • 🚚 direct delivery

सब कुछ इन-हाउस करती है।
इस lean supply chain मॉडल से:

  • Middlemen हट जाते हैं
  • Quality बेहतर मिलती है
  • Customers को fresher coffee मिलती है
  • Prices competitive रहती हैं

ब्रांड का दावा है कि उनकी coffee freshly roasted होती है और roast-to-delivery model उन्हें बाकी brands से आगे रखता है।


📊 Production & Consumption: एक महीने में 3-4 लाख कप कॉफी!

Toffee Coffee Roasters के ताज़ा आंकड़े बेहद प्रभावशाली हैं:

  • 🔥 5 tonnes से अधिक coffee प्रति माह production
  • 📦 40,000+ units महीने में consumption
  • ☕ देशभर में लगभग 3–4 लाख cups/month घरों में बनाए जाते हैं

यह दिखाता है कि ब्रांड ने सिर्फ metro cities नहीं, बल्कि tier-2 और tier-3 दर्शकों तक भी अच्छी penetration हासिल कर ली है।


🎯 अगला लक्ष्य: 50 tonnes production!

कंपनी अब अपनी production capacity को 10X बढ़ाने की योजना बना रही है:

नया लक्ष्य:

  • 🏭 50 tonnes प्रति माह production capacity
  • 💰 ₹8–10 करोड़ annualised revenue
  • 👥 8–10 लाख customers तक पहुंच

यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो Toffee Coffee Roasters भारतीय स्पेशलिटी कॉफी मार्केट में एक शीर्ष खिलाड़ी बन सकता है।


🏆 Shark Tank से लेकर Investors का भरोसा — ब्रांड क्यों पसंद किया जा रहा है?

कई कारण हैं:

  • 📦 Premium quality
  • 🌱 Freshly roasted beans
  • 🏭 Integrated roastery
  • 👨‍🔬 In-house product innovation
  • 📈 Fast scaling
  • 🛒 Multi-channel distribution

इसलिए IPV + 66 Bridge Partners + Invesst जैसे निवेशकों का भरोसा ब्रांड को मजबूत position पर ला रहा है।


🔚 निष्कर्ष: भारत की Specialty Coffee Revolution का अगला बड़ा ब्रांड?

Toffee Coffee Roasters ने:

  • मजबूत unit economics
  • high-quality production
  • lean supply chain
  • तेजी से बढ़ते customer base

के दम पर खुद को एक promising coffee startup के रूप में स्थापित किया है।

नई फंडिंग के साथ कंपनी:

  • अपनी roastery expand करेगी
  • नए products launch करेगी
  • pan-India presence बढ़ाएगी

और specialty coffee की rising wave को और आगे ले जाएगी।

भारत में home-brewed coffee culture तेजी से grow हो रहा है, और Toffee Coffee Roasters इस नए कॉफी क्रांति का एक मजबूत चेहरा बनकर उभर रहा है। ☕🔥

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🌾💸 AgroStar ने जुटाए $30 Million! Agritech सेक्टर में फिर जगी उम्मीद

AgroStar

भारत के अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप AgroStar ने एक और महत्वपूर्ण फंडिंग हासिल की है। क्लाइमेट-फोकस्ड निवेश फर्म Just Climate की अगुवाई में कंपनी ने $30 million (₹265.47 करोड़) का नया राउंड सफलतापूर्वक बंद किया। इस राउंड में Accel, Aavishkaar Capital, Bertelsmann, Evolvence India, Chiratae Ventures और Hero Enterprises जैसे मौजूदा निवेशकों ने भी भाग लिया।

यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब भारत का एग्रीटेक क्षेत्र कठिन चुनौतियों से गुजर रहा है। स्टार्टअप्स के बंद होने, funding slump और layoffs के बीच AgroStar का यह राउंड सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत देता है।


💰 फंडिंग का पूरा ब्रेकअप: कौन कितना लाया?

Entrackr द्वारा देखी गई RoC filings के अनुसार:

🟢 पहला ट्रांचा (April 2025)

  • ₹3,965.34 प्रति शेयर के भाव से
  • 126,636 Series E CCPS + 63,046 Equity Shares
  • $8.5 million (लगभग ₹75 करोड़) जुटाए गए

🟢 दूसरा और बड़ा ट्रांचा

  • 6,01,784 Series E5 CCPS
  • ₹3,161.85 प्रति शेयर
  • ₹190.27 करोड़ ($21.6 million) जुटाए गए

📌 कुल जुटी राशि: ₹265.47 करोड़ ≈ $30 million


🌍 Just Climate की बड़ी एंट्री – सबसे बड़ा निवेशक

इस राउंड में निवेश का वितरण:

  • Just Climate: ₹190 करोड़ ($21.6M)
  • Aavishkaar Capital: ₹25 करोड़
  • Accel India: ₹13 करोड़
  • अन्य निवेशकों — Bertelsmann, Evolvence, Chiratae, Hero Enterprises — ने बाकी हिस्सा पूरा किया

AgroStar अब उन चुनिंदा भारतीय एग्रीटेक कंपनियों में शामिल हो गई है जिनमें global climate investors ने इतना बड़ा दांव लगाया है।


📊 Valuation स्थिर — न बढ़ी, न घटी

Entrackr के विश्लेषण के अनुसार AgroStar का post-money valuation लगभग ₹2,190 करोड़ ($250M) ही बना हुआ है।
यह वही वैल्यूएशन है जो कंपनी ने Series E (May 2022) में हासिल की थी।

यानी फंडिंग मिली है लेकिन वैल्यूएशन नहीं बढ़ी, जो मौजूदा बाजार परिस्थितियों का संकेत है।


🧮 कुल निवेश अब $150 Million पहुँचा

डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार:

  • AgroStar अब तक $150M जुटा चुकी है
  • इसमें शामिल है 2021 का $70M Series D राउंड (Evolvence, Schroders Capital, Hero Enterprise से)

नई फंडिंग के बाद कंपनी की shareholding भी दिलचस्प है:

🏢 सबसे बड़े शेयरहोल्डर्स

  • Schroders Capital — 14.75%
  • Chiratae Ventures — 12.01%
  • Accel India — 10.36%
  • Just Climate — 8.63% (नया निवेशक)
  • Co-founders Sitanshu & Shardul Sheth — ~7.8%

🌾 AgroStar क्या करता है? किसानों तक tech और inputs पहुँचाने का बड़ा नेटवर्क

2013 में सितांशु शेट्ठ और शार्दुल शेट्ठ द्वारा शुरू किया गया AgroStar एक हाइब्रिड ऑनलाइन–ऑफलाइन मॉडल पर काम करता है।

कंपनी किसानों को देती है:

  • Agri-inputs (बीज, खाद, कीटनाशक आदि)
  • Digital farm advisory
  • On-ground retail touchpoints
  • Tech-based crop guidance

AgroStar का ऐप और retail नेटवर्क मिलकर किसानों को modern कृषि समाधान और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराता है।


📈 FY24 का प्रदर्शन: Revenue बढ़ा, नुकसान जस का तस

FY24 में AgroStar ने:

  • Revenue: ₹747 करोड़ (18% YoY वृद्धि)
  • Losses: ₹327 करोड़ (लगभग flat)

FY25 के financial results अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।


🧩 Agritech सेक्टर की मुश्किलें — Funding कम, स्टार्टअप बंद

हाल के वर्षों में भारतीय एग्रीटेक क्षेत्र ने केवल $389 million जुटाए हैं।
2020 से अब तक agritech सिर्फ 2% venture funding का हिस्सा है — यह साफ दिखाता है कि sector भारी दबाव में है।

कई कंपनियों ने:

  • अपने operations बंद किए
  • कई कर्मचारियों को layoff किया
  • Funding winter का सामना किया

Entrackr की विशेष रिपोर्ट “Agritech startups account for only 2% of venture funding since 2020” इसी संकट को विस्तार से बताती है।


🌱 पर फिर भी उम्मीद: नए सौदे, नई फंडिंग्स

हाल के महीनों में sector में activity फिर बढ़ी है:

  • AgroStar ने $30M जुटाया
  • Eeki और BigHaat ने नए राउंड क्लोज किए
  • Unnati Agri + Gramophone का merger announced हुआ
  • नया संयुक्त entity reportedly बड़ा फंडिंग राउंड तैयार कर रही है

ये घटनाएं sector में एक संभावित revival की ओर इशारा करती हैं।


🚀 AgroStar का आगे का प्लान — Expansion और Climate Innovation

नई फंडिंग के साथ AgroStar:

  • अपने online + offline marketplace को मजबूत करेगा
  • किसानों तक बेहतर advisory और inputs पहुँचाएगा
  • ग्रामीण स्तर पर retail और tech expansion करेगा
  • Climate-resilient agriculture को बढ़ावा देने वाली technologies में निवेश करेगा

🔚 निष्कर्ष

AgroStar का यह $30 million का फंडिंग राउंड भारतीय agritech sector में नई उम्मीद जगाता है।
जब पूरे sector में funding slowdown और बंद होते startups की खबरें हैं, वहीं AgroStar जैसी कंपनियों में global climate investors की दिलचस्पी इस बात का संकेत है कि भारत की कृषि में tech-driven बदलाव अभी भी पूरी ताकत से आगे बढ़ सकता है।

AgroStar के लिए यह फंडिंग सिर्फ growth capital नहीं, बल्कि भारतीय किसान-तकनीक इकोसिस्टम में भरोसे का एक बड़ा वोट भी है। 🌱💡

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🧬 Inito ने जुटाए $29 Million

🧬 Inito

भारत का हेल्थटेक सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसी रफ़्तार को और मजबूत बनाया है Inito नाम की एक उभरती हुई at-home diagnostics स्टार्टअप ने। कंपनी ने हाल ही में Series B फंडिंग राउंड में $29 मिलियन जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Bertelsmann India Investments (BII) ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक Fireside Ventures ने भी अपनी भागीदारी निभाई।

इस नई फंडिंग के साथ, Inito की कुल इक्विटी फंडिंग बढ़कर $45 मिलियन हो गई है। यह कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और इनके आगामी तकनीकी विस्तार को एक नई गति देने वाली है।


🚀 Series B फंडिंग: किसने कितना निवेश किया?

  • Lead Investor: Bertelsmann India Investments
  • Existing Investor: Fireside Ventures (पहले भी Series A में निवेश कर चुका है)
  • Total Funding Raised So Far: $45 Million
  • Latest Round Amount: $29 Million

इस फंडिंग का उपयोग Inito नई तकनीकों के विकास और अपनी हेल्थ टेस्टिंग कैटेगरी को fertility से आगे बढ़ाने में करेगा।


🧪 Inito: घर बैठे हेल्थ टेस्टिंग का आसान समाधान

Inito की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब कंपनी ने अपना पहला at-home fertility monitoring device लॉन्च किया। यह डिवाइस चार महत्वपूर्ण hormone markers को मापता है और AI-बेस्ड मॉडल्स की मदद से परिणामों की 정확 और तुरंत व्याख्या प्रदान करता है।

कंपनी के अनुसार, उनका fertility device अब तक 30 मिलियन से अधिक डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस कर चुका है—जो इस बात का संकेत है कि उपयोगकर्ता इसका भरोसेमंद तरीके से उपयोग कर रहे हैं।


🧠 अब Fertility से आगे: AI-Enabled Health Diagnostics

Series B फंडिंग के बाद कंपनी अब सिर्फ fertility सॉल्यूशन्स तक सीमित नहीं है। Inito अब व्यापक हेल्थ डायग्नोस्टिक्स कैटेगरी में उतर रहा है जैसे:

  • 🧬 Testosterone testing
  • 🦋 Thyroid testing
  • 💊 Vitamin level detection
  • 🫀 General health biomarkers

इसका मकसद है कि घर बैठे लोगों को ऐसे टेस्ट करने की सुविधा मिले जो पहले सिर्फ क्लीनिक या लैब में होते थे।


🧫 कंपनी की असली ताकत: Computational Protein Design

Inito ने जो सबसे बड़ा कदम उठाया है, वह है synthetic antibodies बनाना।
यह कैसे खास है?

🔬 पारंपरिक एंटीबॉडी vs Inito की Synthetic Antibodies

Traditional AntibodySynthetic Antibody (Inito)
Animals से बनाई जाती हैComputer-based design के ज़रिए
Manual screening की ज़रूरतAI और protein engineering
Inconsistent productionHigh stability & accuracy

Co-founders Aayush Rai और Varun AV के अनुसार, computational protein design से Inito ऐसी antibodies तैयार कर रहा है जो ज्यादा स्थिर और क्लीनिकल-ग्रेड टेस्टिंग के लिए परफेक्ट हैं। यही तकनीक Inito को एक नए लेवल के डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म में बदल सकती है।


🌍 Global Presence & Patent Strength

Inito न सिर्फ भारत में बल्कि ग्लोबल टेक टीमों के साथ काम कर रहा है:

  • 🇮🇳 Bengaluru (India HQ)
  • 🇦🇪 Dubai
  • 🇬🇧 London

कंपनी के पास 20+ patents हैं, जो उसके hardware और AI testing models को मजबूत सुरक्षा देते हैं। यह दिखाता है कि Inito सिर्फ एक device कंपनी नहीं, बल्कि गहरी रिसर्च-आधारित हेल्थटेक कंपनी है।


🏥 Why Inito is the Next Big Thing in Home Diagnostics?

✔ AI-powered accurate testing

✔ Multi-hormone measurement capability

✔ Global-scale data processing

✔ Synthetic antibody technology

✔ At-home, affordable & accessible health monitoring

भारत में at-home diagnostics की डिमांड तेजी से बढ़ रही है—और Inito उस wave को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख नामों में शामिल हो चुका है।


🔮 Future Plans: क्या आने वाला है?

Series B के पैसों से Inito इन बड़े प्लान्स पर फोकस करेगा—

  • 🧪 और अधिक hormone-based टेस्ट लॉन्च करना
  • ⚙ R&D में निवेश बढ़ाना
  • 🌐 Global expansion तेज करना
  • 🧠 AI और computational biology capabilities बढ़ाना
  • 🏠 Home health monitoring को आसान और सस्ता बनाना

कंपनी का लक्ष्य है कि लोग घर बैठे ऐसी जांच कर सकें जो आज केवल लैब में संभव है।


📝 निष्कर्ष

Inito की नई फंडिंग न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय हेल्थटेक सेक्टर के लिए एक मजबूत संकेत है कि AI-enabled at-home diagnostics का भविष्य बहुत बड़ा है

फर्टिलिटी से लेकर पूरे शरीर की हेल्थ मॉनिटरिंग तक—Inito अपने smart, portable और AI-powered devices के जरिए एक नए हेल्थकेयर ecosystem की शुरुआत कर रहा है।

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🚀 WorkIndia को मिलेगा ₹114.35 करोड़ का नया फंडिंग बूस्ट

WorkIndia

भारत के blue और grey-collar जॉब मार्केट को बदलने वाले प्लेटफॉर्म WorkIndia के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी जल्द ही ₹114.35 करोड़ (लगभग $13 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाने जा रही है। इस राउंड में हिस्सा लेंगे—

  • Aavishkaar Capital (नया निवेशक)
  • Beenext (मौजूदा निवेशक)
  • कंपनी के को-फाउंडर्स: निलेश दुंगरवाल और मोइज़ अर्सीवाला

यह फंडिंग कंपनी के लिए बेहद अहम इसलिए भी है क्योंकि WorkIndia ने पिछले 3 सालों में कोई बड़ी पूंजी नहीं जुटाई थी। जनवरी 2023 में कंपनी ने SBI Holdings और Nintendo founding family के नेतृत्व में $12 मिलियन का फंड उठाया था।


💸 कैसे जुटाए जा रहे हैं ₹114.35 करोड़?

Registrar of Companies (RoC) के साथ की गई फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने नए फंड को जुटाने के लिए बोर्ड स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया है।

✔️ पहला हिस्सा: ₹72 करोड़

कंपनी जारी करेगी—

  • 3,067 Compulsory Convertible Preference Shares (CCPS)
  • 100 Equity Shares
    प्रति शेयर कीमत — ₹2,27,369

इस हिस्से में:

  • Aavishkaar Capital निवेश करेगा ₹50 करोड़
  • Beenext निवेश करेगा ₹22 करोड़

✔️ दूसरा हिस्सा: ₹42.35 करोड़

WorkIndia अपने को-फाउंडर्स

  • निलेश दुंगरवाल
  • मोइज़ अर्सीवाला

को 1,869 partly paid-up CCPS जारी करेगी।

👉 इस तरह कुल फंडिंग राउंड का आकार होता है ₹114.35 करोड़ (लगभग $13 मिलियन)


📈 Valuation में 35% की बढ़त — WorkIndia का नया मूल्यांकन ₹803 करोड़

Entrackr के अनुमान के मुताबिक, इस नए निवेश राउंड के बाद WorkIndia का मूल्यांकन—

  • ₹590 करोड़ से बढ़कर ₹803 करोड़
  • डॉलर में लगभग $91.25 मिलियन

यह कंपनी के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब blue-collar जॉब मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है।

Beenext, जो WorkIndia का सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है, इस राउंड से पहले 11.31% हिस्सेदारी रखता है, जबकि Xiaomi के पास 7.3% स्टेक है।

कंपनी के तीनों को-फाउंडर्स संयुक्त रूप से 32.1% हिस्सेदारी रखते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि WorkIndia अब भी संस्थापकों के मजबूत नियंत्रण में है।


🧑‍🏭 WorkIndia क्या करता है? — लाखों blue & grey-collar वर्कर्स के लिए भरोसेमंद प्लेटफॉर्म

WorkIndia की स्थापना कुनाल पाटिल, निलेश दुंगरवाल और मोइज़ अर्सीवाला ने मिलकर की थी। कंपनी एक ऐसा डिजिटल जॉब प्लेटफॉर्म है जो blue और grey-collar वर्कर्स को उचित नौकरी ढूंढने में मदद करता है।

प्लेटफॉर्म पर 50 से अधिक कैटेगरी में नौकरियां दी जाती हैं—

  • टेली-कालिंग
  • फील्ड सेल्स
  • डिलीवरी जॉब्स
  • रिटेल
  • BPO
  • सिक्योरिटी
  • ड्राइविंग
    और कई अन्य क्षेत्रों में।

भारत का यह सेक्टर बेहद बड़ा है, लेकिन अभी भी काफी हद तक अनऑर्गनाइज़्ड है। WorkIndia इस पूरे मार्केट को तकनीक के ज़रिए सुव्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा है।


💼 अब तक कितनी फंडिंग उठाई है WorkIndia ने?

TheKredible के अनुसार, अभी तक WorkIndia ने लगभग—
👉 $30 मिलियन जुटाए हैं।

इसके निवेशकों की लिस्ट में शामिल हैं—

  • BEENEXT
  • Xiaomi
  • SBI Holdings
  • Insitor
  • और अन्य इंवेस्टर्स

नई फंडिंग कंपनी को तेजी से स्केल करने में मदद करेगी, खासकर उस समय जब blue-collar hiring तेजी से डिजिटल हो रही है और कंपनियां विश्वसनीय प्लेटफ़ॉर्म की तलाश में हैं।


📊 FY25 की वित्तीय रिपोर्ट — Revenue बढ़ा, Losses घटे

वित्तीय वर्ष FY25 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा।

✔️ Revenue में 25% की बढ़त

  • FY25: ₹78.7 करोड़
  • FY24: लगभग ₹63 करोड़

✔️ Losses में 25% की कमी

  • FY25 में नुकसान: ₹23.06 करोड़
  • FY24 की तुलना में 25% सुधार

यह संकेत देता है कि WorkIndia का business model operational efficiency और better monetisation की ओर बढ़ रहा है।


🚀 क्यों यह फंडिंग WorkIndia के लिए Game Changer साबित होगी?

इस नए फंड से WorkIndia—

  • अपनी technology को और मजबूत करेगा
  • employer–worker matching को तेज़ व accurate बनाएगा
  • hiring automation और workforce analytics टूल्स को और बेहतर करेगा
  • Tier 2–3 शहरों में अपनी पहुंच मजबूत करेगा

Blue-collar hiring का future डिजिटल है, और WorkIndia इस transformation का एक प्रमुख चेहरा बनने की तैयारी में है।


🏁 निष्कर्ष: WorkIndia के लिए एक नई शुरुआत

₹114.35 करोड़ की यह ताज़ा फंडिंग WorkIndia को मजबूत वित्तीय आधार देगी।
Blue और grey-collar workforce भारत की आर्थिक backbone है, और WorkIndia इसी लाखों लोगों के रोजगार भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

Revenue ग्रोथ, loss reduction और investor confidence दर्शाते हैं कि कंपनी आने वाले समय में और बड़ी छलांग लगाने को तैयार है।

WorkIndia अब सिर्फ एक जॉब पोर्टल नहीं, बल्कि भारत के blue-collar workforce के लिए एक digital ecosystem बनता जा रहा है।

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🚀 BYT Capital ने लॉन्च किया ₹180 करोड़ का Early-Stage Fund

BYT Capital

भारत के deep-tech स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। BYT Capital ने ₹180 करोड़ का नया early-stage फंड लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य उन स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना है जो research labs और advanced engineering ecosystems से उभर रहे IP-driven प्रोडक्ट्स पर काम करते हैं।

यह Category II AIF भारत में deep-tech उद्यमिता को तेज़ी से आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि फंड का आधे से अधिक हिस्सा पहले ही सब्सक्राइब हो चुका है, और फर्म Q3 2026 तक इसका फाइनल क्लोज करने की उम्मीद कर रही है।


🧪 क्या है BYT Capital का फोकस?

BYT Capital, जिसे Amit Chand और Dinesh Kumar ने मिलकर शुरू किया है, उन स्टार्टअप्स पर दांव लगा रहा है जो—

  • cutting-edge engineering,
  • lab-stage research,
  • और high intellectual property (IP) आधारित solutions

पर काम कर रहे हैं।

फंड का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में 18–20 deep-tech स्टार्टअप्स में निवेश करना है।

💰 Investment Strategy

  • Initial cheque size: ₹3–6 करोड़
  • 55% फंड reserved: Follow-on rounds के लिए
    यानी BYT Capital केवल शुरुआती निवेश ही नहीं करेगा, बल्कि promising startups को आगे भी सपोर्ट करता रहेगा।

🌌 कौन-कौन से सेक्टर्स को मिलेगा फंड?

फर्म ने पहले ही कुछ sectors में early commitments कर दिए हैं, जिनमें शामिल हैं—

🔭 1. Space Tech

भारत में space-tech का ecosystem तेजी से उभर रहा है। PSLV ridesharing, satellite manufacturing और space-data analytics जैसे क्षेत्रों में भारी संभावनाएं हैं।

🧬 2. Life Sciences

Biotech, genomics, diagnostics और synthetic biology में भारत के शोध काफी आगे हैं।

🤖 3. Robotics & Automation

Industrial robotics, humanoids, warehouse automation और precision engineering startups को बड़ा फायदा मिल सकता है।

⚡ 4. Clean Energy & Climate Tech

Green hydrogen, battery tech, EV components, alternative fuels और carbon capture जैसी तकनीकों का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

BYT Capital स्पष्ट कर रहा है कि वह उन startups को सपोर्ट करेगा जो lab से निकलकर global markets में अपने product की मांग पैदा कर सकते हैं।


🎙️ “India is entering a new scientific entrepreneurship era” — BYT Capital

BYT Capital के को-फाउंडर Amit Chand के अनुसार—

“भारत एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां scientific entrepreneurship वैश्विक स्तर पर असर डालने वाली कंपनियां बना सकता है। Deep-tech देश की industrial capacity और strategic capabilities को reshape करेगा — विशेषकर materials, quantum, defense और energy जैसे सेक्टर्स में।”

यह बयान साफ दर्शाता है कि BYT Capital सिर्फ financial investment नहीं कर रहा, बल्कि India-led frontier tech revolution को आगे बढ़ाना चाहता है।


🏗️ Fund का विज़न: Lab से Global Commercialisation तक

BYT Capital का मानना है कि भारत में हजारों research labs, IITs, IISc, DRDO labs, और private R&D centers मौजूद हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम innovations बाज़ार तक पहुँच पाते हैं।

BYT Capital इसी गैप को भरने की कोशिश कर रहा है—

🔹 Researchers को entrepreneurship तक लाना

🔹 Early experiments को real-world products में बदलना

🔹 Engineering-led solutions को global markets में scale करना

यह फंड एक long-term deep-tech platform बनाने पर काम करेगा ताकि भारत innovation-consumption economy से innovation-creation economy की ओर बढ़ सके।


🇮🇳 भारत में Deep-Tech का Future क्यों Strong है?

भारत के deep-tech सेक्टर के तेजी से बढ़ने के 5 बड़े कारण हैं—

1️⃣ Strong R&D Foundation

IITs, IISc और research labs top-quality engineering research कर रहे हैं।

2️⃣ Global Talent Pool

भारत का engineering और scientific टैलेंट दुनिया में सबसे बड़ा है।

3️⃣ Manufacturing Growth

Make in India, PLI schemes और semiconductor push deep-tech startups को बढ़ावा दे रहे हैं।

4️⃣ Strategic Sectors का Rise

Defense tech, space exploration और clean energy में भारत तेज़ी से निवेश कर रहा है।

5️⃣ Investors का बढ़ता Confidence

Deep-tech पर अब VC funds ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, जो ecosystem को accelerate कर रहा है।

BYT Capital का नया फंड इसी बढ़ते momentum को और आगे बढ़ाएगा।


📊 Startup Funding: कैसा दिखेगा BYT Capital का Portfolio?

फंड अगले 5 वर्षों में—

  • 18–20 deep-tech startups में निवेश करेगा
  • हर स्टार्टअप में औसतन ₹3–6 करोड़ शुरुआती निवेश
  • 55% फंड follow-on निवेशों के लिए रखा गया है

फर्म early-stage से late-stage scale तक स्टार्टअप्स के साथ रहने का प्लान बना रही है।


🏁 निष्कर्ष: Indian Deep-Tech के लिए बड़ा मोड़

BYT Capital का ₹180 करोड़ का early-stage फंड भारत के deep-tech ecosystem के लिए एक game changer साबित हो सकता है।

यह फंड उन founders को support करेगा जो—

  • labs में futuristic tech बना रहे हैं
  • global markets को target कर रहे हैं
  • engineering-led innovations के जरिए real-world problems solve कर रहे हैं

भारत अब सिर्फ software और IT services तक सीमित नहीं है —
भारत frontier tech innovation powerhouse बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और BYT Capital इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है।

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🎓 Unacademy 10 साल पूरे होने पर बोले Gaurav Munjal

Unacademy

भारत की प्रमुख एडटेक कंपनी Unacademy ने अपने 10 साल पूरे होने पर बड़े संकेत दिए हैं। सह-संस्थापक गौरव मुंजाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि कंपनी M&A (Merger & Acquisition) बातचीत में है, और अगर कोई ऐसा विकल्प मिलता है जो दोनों पक्षों के लिए फ़ायदेमंद हो, तो Unacademy आगे बढ़ेगी।

उनका यह बयान तब आया है जब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि upGrad, जो कि एक उच्च शिक्षा और स्किलिंग प्लेटफॉर्म है, वह Unacademy को $300–$320 मिलियन के वैल्यूएशन पर अधिग्रहित करने की बातचीत में है। यह वैल्यूएशन Unacademy के $3.5 बिलियन (2021) के पीक वैल्यूएशन से लगभग 90% कम है।


🕰️ एक YouTube चैनल से भारत के बड़े एडटेक ब्रांड तक—Unacademy की पूरी कहानी

गौरव मुंजाल ने अपनी पोस्ट में Unacademy की यात्रा को विस्तार से बताया।
यह कहानी शुरू हुई 2010 में, जब मुंजाल कॉलेज में थे और अपने दोस्तों को कंप्यूटर साइंस समझाने के लिए एक YouTube चैनल शुरू किया।

  • 📌 2015: प्लेटफॉर्म को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया
  • 📌 शुरुआत में ध्यान था फ्री कंटेंट और मजबूत educator community पर
  • 📌 टेक-फ़र्स्ट लैर्निंग मॉडल ने तेजी से ग्रोथ दी

Unacademy ने बेहद कम समय में देशभर के लाखों विद्यार्थियों को जोड़ने में सफलता पाई और एक मज़बूत डिजिटल लर्निंग ब्रांड बन गया।


📈 सब्सक्रिप्शन मॉडल ने दिलाई जबरदस्त उड़ान—कोरोना के दौरान रिकॉर्ड ग्रोथ

2019 से 2021 के बीच कंपनी की ग्रोथ अपने चरम पर रही।

  • 🚀 सब्सक्रिप्शन प्रोडक्ट लॉन्च हुआ
  • 🚀 Paid subscribers करीब 10 लाख तक पहुंचे
  • 🚀 कई बड़े निवेशक जुड़े
  • 🚀 कुल $700 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई

इस दौरान Unacademy भारतीय एडटेक सेक्टर का पोस्टर-बॉय बन गया था।


📉 लेकिन फिर आई गिरावट—ऑफलाइन कोचिंग की वापसी और कैश बर्न ने धक्का दिया

गौरव मुंजाल की पोस्ट में स्पष्ट लिखा था कि Covid के बाद सीखने वालों का तेजी से वापस ऑफलाइन कोचिंग की ओर लौट जाना कंपनी के लिए बड़ा झटका था।

साथ ही:

  • 🔻 कंपनी का कैश बर्न आक्रामक रूप से बढ़ चुका था
  • 🔻 कम कीमत वाले नए प्रतिस्पर्धी मार्केट में तेजी से आ रहे थे
  • 🔻 छात्रों की भुगतान क्षमता बदल रही थी

इन सब कारणों से Unacademy का बिजनेस मॉडल दबाव में आ गया, और कंपनी की वैल्यूएशन भी नीचे आने लगी।


🏷️ $3.5 बिलियन से गिरकर $500 मिलियन से भी कम?—मुंजाल ने माना बड़ा झटका

मुंजाल ने खुले शब्दों में माना कि कंपनी आज $500 मिलियन से भी कम वैल्यूएशन पर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पहले की “valuation chase” यानी ऊँची वैल्यूएशन के पीछे भागने से कंपनी ने कुछ रणनीतिक गलतियाँ कीं, जिसका असर अब दिखाई दे रहा है।


✂️ तीन साल में बड़ा बदलाव—खर्चों में भारी कटौती

पिछले तीन वर्षों में Unacademy ने खुद को lean और sustainable बनाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।

🔧 कंपनी के प्रमुख बदलाव:

  • वार्षिक कैश बर्न ₹1,400 करोड़ (2022) से घटाकर
    ₹175 करोड़ (2025) कर दिया
  • प्राइसिंग में कटौती
  • प्रोडक्ट को फिर से कंटेंट और सब्सक्रिप्शन-फोकस्ड बनाया
  • टीम और ऑपरेशनल लागत कम की

ये कदम कंपनी को लंबे समय तक टिकने लायक बनाने के लिए उठाए गए हैं।


📊 FY25 का प्रदर्शन—नुकसान में कमी लेकिन अभी भी चुनौतियाँ

FY25 में Unacademy ने:

  • Revenue: ₹826 करोड़
  • Net Loss: ₹436 करोड़ (31% YoY कमी)

हालाँकि कंपनी अभी भी घाटे में है, लेकिन नुकसान तेजी से कम हो रहा है।
यह दर्शाता है कि कंपनी का restructuring सफल रही है और ऑपरेशंस अधिक Sustainable हो रहे हैं।


🔄 M&A की चर्चा—क्या upGrad से हो सकता है बड़ा डील?

हाल के मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि upGrad Unacademy को $300–$320 मिलियन के बीच वैल्यूएशन पर खरीदने की बातचीत कर रही है।

यह कदम भारतीय एडटेक सेक्टर के लिए एक बड़ा Consolidation साबित हो सकता है।
अगर ये डील होती है:

  • दो बड़े प्लेयर्स की ताकत एकजुट होगी
  • प्रोडक्ट ऑफरिंग काफी विस्तृत होगी
  • ऑपरेशनल लागत कम हो सकती है
  • मार्केट शेयर मजबूत हो सकता है

मुंजाल ने कहा कि कंपनी किसी भी ऐसे अवसर के लिए खुली है जो दोनों पक्षों को फायदा पहुँचाये।


🎯 अब Unacademy किस दिशा में जा रही है?—Sustainable Edtech का नया दौर

गौरव मुंजाल ने यह साफ किया कि कंपनी अब “valuation game” नहीं खेल रही।
अब फोकस है:

  • मजबूत यूनिट इकॉनॉमिक्स
  • Sustainable प्रोडक्ट्स
  • कंटेंट-फोकस्ड ग्रोथ
  • कम खर्च में बेहतर परिणाम
  • और लंबी अवधि की स्थिरता

यानी, Unacademy अब 2021 की तेजी वाली एडटेक कंपनी नहीं, बल्कि एक परिपक्व और स्थिर मॉडल की ओर बढ़ रही है।


📝 निष्कर्ष: 10 साल बाद Unacademy एक नए अध्याय की शुरुआत में

Unacademy की यात्रा उतार–चढ़ाव से भरी रही है—YouTube चैनल से unicorn बनने तक, और अब M&A चर्चाओं तक।

कंपनी आज भी लाखों छात्रों का भरोसेमंद नाम है, लेकिन बाजार की वास्तविकता ने इसे नए सिरे से खुद को पुनर्गठित करने पर मजबूर किया है।

क्या upGrad इसे अधिग्रहित करेगा?
यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

लेकिन इतना निश्चित है कि Unacademy अब तेज ग्रोथ से ज्यादा स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है और यही इसकी अगले दशक की रणनीति होगी।

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🛏️ Wakefit IPO को मिला मिला-जुला रिस्पॉन्स

Wakefit

होम और स्लीप सॉल्यूशंस ब्रांड Wakefit का IPO निवेशकों के बीच मिला-जुला प्रदर्शन करता दिखा। कंपनी को कुल 2.52 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिसमें रिटेल निवेशक (3.17x) और QIBs (3.04x) ने मजबूत रुचि दिखाई, जबकि NIIs ने केवल 1.05x बोली लगाई।

IPO 8 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच खुला था और इसकी प्राइस बैंड ₹185–₹195 प्रति शेयर तय की गई थी, जिसमें 76 शेयरों का एक लॉट और ₹14,175 की न्यूनतम निवेश राशि थी।


📊 किसने कितना सब्सक्राइब किया?—रिटेल निवेशकों ने दिखाया दम

एक्सचेंज डेटा के अनुसार:

  • 👥 Retail Investors: 3.17x
  • 🏦 QIBs (Qualified Institutional Buyers): 3.04x
  • 💼 NIIs (Non-Institutional Investors): 1.05x

इन आंकड़ों से साफ है कि IPO की मांग मुख्य रूप से रिटेल और संस्थागत निवेशकों से आई। वहीं, HNI श्रेणी ने उम्मीद से कम रुचि दिखाई।


📅 अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखें

Wakefit का शेयर अलॉटमेंट 11 दिसंबर को होने की उम्मीद है।
कंपनी 15 दिसंबर को BSE और NSE पर लिस्ट होगी।

IPO में प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर ₹195 पर भारी बोली दिखाई दी है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार कंपनी को एक प्रीमियम पर स्वीकार करने को तैयार है।


💰 IPO से कितना फंड जुटाना चाहती है Wakefit?

कंपनी के RHP (Red Herring Prospectus) के अनुसार:

  • Fresh Issue: ₹377.2 करोड़
  • Offer for Sale (OFS): 4.68 करोड़ शेयर
  • OFS Value: ₹911.7 करोड़
  • कुल अनुमानित वैल्यूएशन: ₹6,400 करोड़ ($719 मिलियन)

Wakefit अब घरेलू D2C (Direct-to-Consumer) ब्रांड्स में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रही है, और यह IPO इसकी ग्रोथ स्टोरी का महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।


📈 निवेशकों के लिए बड़ा रिटर्न — Peak XV को 10X फायदा

OFS में कई शुरुआती निवेशकों ने बड़ी कमाई की है।

प्रमुख निवेशकों का रिटर्न:

  • Peak XV Partners: लगभग ₹397 करोड़ की निकासी (10x रिटर्न)
  • Verlinvest: लगभग ₹199 करोड़
  • Paramark KB Fund: करीब ₹50 करोड़

Peak XV के 10x रिटर्न ने स्टार्टअप जगत में Wakefit की पकड़ और स्केलेबिलिटी की क्षमता को और मजबूती से स्थापित किया है।


🧲 Anchor Investors से ₹580 करोड़ जुटाए — बड़ी संस्थाओं की मजबूत मौजूदगी

IPO खुलने से पहले Wakefit ने 2.97 करोड़ शेयरों को एंकर निवेशकों को आवंटित करके ₹580 करोड़ जुटाए थे। यह बुक ₹195 के ऊपरी प्राइस बैंड पर पूरी तरह भरी गई।

Anchor Investors में कई बड़े नाम शामिल थे:

  • HDFC Mutual Fund
  • Axis MF
  • Mahindra MF
  • Edelweiss MF
  • Tata MF
  • अन्य प्रमुख फंड

इतनी बड़ी संस्थागत रुचि से IPO के प्रति निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।


🏬 Wakefit फंड का उपयोग कहाँ करेगी?—स्पष्ट विस्तार योजना

Fresh Issue से जुटाई गई रकम का उपयोग कंपनी कई क्षेत्रों में करेगी।

🚩 कंपनी का फंड उपयोग:

  • नए स्टोर खोलने और COCO (Company-Owned Company-Operated) स्टोर स्थापित करने में
  • स्टोर से जुड़ी leasing लागतों में
  • मार्केटिंग और ब्रांड एडवर्टाइजिंग में
  • प्रोडक्शन के लिए उपकरण खरीदने में
  • और कुछ राशि General Corporate Purposes के लिए रखी जाएगी

इससे यह स्पष्ट है कि Wakefit अब सिर्फ ऑनलाइन D2C ब्रांड ही नहीं, बल्कि एक मजबूत ऑफलाइन-ऑनलाइन हाइब्रिड रिटेल मॉडल की ओर बढ़ रही है।


📉 FY26 और FY25 का वित्तीय प्रदर्शन—क्या है कंपनी की ग्रोथ स्टोरी?

Wakefit ने FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में:

  • Revenue: ₹724 करोड़
  • Net Profit: ₹35.57 करोड़

यह प्रदर्शन कंपनी के स्थिर और लगातार बढ़ते व्यवसाय को दर्शाता है।

FY25 में:

  • Revenue: ₹1,274 करोड़ (लगभग 30% YoY ग्रोथ)
  • FY24 Revenue था ₹986 करोड़
  • लेकिन FY25 में कंपनी को ₹35 करोड़ का नेट लॉस हुआ

यह दर्शाता है कि भले ही कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मार्केटिंग, स्टोर विस्तार और लॉजिस्टिक्स पर भारी खर्च कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं।


🛒 Wakefit की ग्रोथ का राज़: D2C + Offline stores का मजबूत मिश्रण

Wakefit ने एक छोटे ऑनलाइन मैट्रेस स्टार्टअप के रूप में शुरुआत की थी।
आज कंपनी:

  • Furniture
  • Home Décor
  • Sleep Solutions
  • Home Utility Products

जैसे कई कैटेगरी में तेजी से विस्तार कर चुकी है।
ऑनलाइन के साथ-साथ कंपनी अब बड़े शहरों में फिजिकल एक्सपीरियंस स्टोर भी खोल रही है ताकि ग्राहक प्रोडक्ट्स को टेस्ट कर सकें।


📝 निष्कर्ष: Wakefit IPO — स्टेबल लेकिन Overhyped नहीं

Wakefit का IPO:

  • न बहुत धमाकेदार
  • न बहुत कमजोर
  • बल्कि एक संतुलित और स्टेबल रिस्पॉन्स लेकर आया है

रिटेल और QIBs की मजबूत भागीदारी से IPO अच्छा दिख रहा है, लेकिन NIIs की ठंडी प्रतिक्रिया इशारा करती है कि वैल्यूएशन कुछ निवेशकों को ऊँचा लगा।

फिर भी, Wakefit की मजबूत ब्रांड वैल्यू, बढ़ता ऑफलाइन विस्तार, और एंकर फंडिंग की बड़ी लिस्ट कंपनी के भविष्य को सकारात्मक दिशा में ले जाती है।

लिस्टिंग डे (15 दिसंबर) पर बाजार से स्टॉक की चाल देखने लायक होगी।

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💳 GoDutch ने जुटाए €3.6 मिलियन Seed फंडिंग

GoDutch

एम्स्टर्डम (नीदरलैंड्स) स्थित फिनटेक स्टार्टअप GoDutch ने अपने Seed फंडिंग राउंड में €3.6 मिलियन (लगभग ₹32 करोड़) जुटाए हैं। यह फंडिंग स्टार्टअप की यूरोप भर में तेजी से विस्तार करने की योजना को मजबूत करेगी।

फंडिंग राउंड का नेतृत्व Luxembourg Finance House ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक QuantumLeap Capital ने भी इसमें हिस्सा लिया।

GoDutch छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMEs) के लिए एक आधुनिक फाइनेंस ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म है, जो अकाउंटिंग से लेकर पेमेंट तक पूरी प्रक्रिया को आसान बनाता है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी ने बतााया है कि जुटाई गई राशि का उपयोग तीन प्रमुख लक्ष्यों में किया जाएगा:

🔹 1. प्रोडक्ट सूट का विस्तार

GoDutch अपने प्लेटफॉर्म पर कई नए फीचर्स जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसमें शामिल हैं:

  • Payroll सेवाएं
  • Lending solutions (Loan सुविधा)
  • Treasury मैनेजमेंट टूल्स

इन फीचर्स के आने से GoDutch SMEs के लिए एक ऑल-इन-वन फाइनेंस प्लेटफॉर्म बन जाएगा।

🔹 2. यूरोप में तेजी से विस्तार

स्टार्टअप का लक्ष्य है कि वह डच और यूरोपीय बाजारों में और तेजी से अपनी पकड़ बनाए।
कंपनी 1 दिसंबर से Belgian IBANs लॉन्च कर रही है, जिससे बेल्जियम मार्केट में एंट्री आसान होगी।
इसके बाद GoDutch कई और यूरोपीय देशों में विस्तार की तैयारी कर रहा है।

🔹 3. टेक्नोलॉजी को और अधिक स्मार्ट बनाना

कंपनी अपने AI और ऑटोमेशन टूल्स को और उन्नत करने पर जोर दे रही है, ताकि SMEs की मैनुअल वर्कलोड को और कम किया जा सके।


🧩 GoDutch क्या करता है? SMEs के लिए ऑल-इन-वन फाइनेंसिंग समाधान

जून 2024 में CEO थॉमस व्लेस (Thomas Vles) द्वारा लॉन्च किया गया GoDutch, छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए एक फाइनेंस मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है।

यह सिर्फ एक डिजिटल बिजनेस अकाउंट नहीं है—यह एक ऐसा सिस्टम है जो बिजनेस की रोज़मर्रा की फाइनेंशियल जरूरतें खुद ही मैनेज कर सकता है।

✔️ GoDutch की प्रमुख सेवाएं:

  • बिजनेस बैंक अकाउंट
  • टीम कार्ड्स (कर्मचारियों के लिए)
  • Expense Management Tools
  • Automated Accounts Payable & Receivable
  • Smart AI Tools for Admin Reduction

यह सब मिलकर GoDutch को SMEs के लिए एक फाइनेंस ऑटोमेशन हब बनाते हैं।


🤖 AI और ऑटोमेशन से कम हुआ बिजनेस का झंझट

कई छोटे व्यवसाय अकाउंटिंग, पेमेंट, इनवॉइसिंग और खर्च मैनेजमेंट में काफी समय गंवाते हैं।
GoDutch इन सभी कामों को ऑटोमेट कर देता है।

AI कैसे मदद करता है?

  • इनवॉइस को खुद पढ़कर एंट्री कर देता है
  • पेमेंट रिमाइंडर अपने आप भेजता है
  • गलतियों की पहचान करता है
  • खर्चों का सही कैटेगरीकरण कर देता है
  • टीम की स्पेंडिंग पर रियल-टाइम कंट्रोल देता है

इस तरह GoDutch उन कामों में समय बचाता है जहाँ SMEs अक्सर सबसे ज्यादा समय खो देते हैं।


📈 तेजी से बढ़ रहा है GoDutch: 12,500 से ज्यादा बिजनेस यूजर्स

लॉन्च के सिर्फ कुछ महीनों में ही कंपनी की ग्रोथ काफी मजबूत रही है।

📊 GoDutch के वर्तमान आंकड़े:

  • 12,500+ एक्टिव बिजनेस यूजर्स
  • €1.5 बिलियन (₹13,500 करोड़) से ज्यादा का वार्षिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम
  • लगातार बढ़ती टीम और प्रोडक्ट डेवलपमेंट
  • यूरोप भर में बढ़ती ब्रांड पहचान

इस तरह कम समय में इतनी बड़ी यूजर बेस हासिल करना दिखाता है कि SME फिनटेक स्पेस में GoDutch की जरूरत कितनी ज्यादा है।


🌍 यूरोप में SME फिनटेक का बढ़ता बाजार

यूरोप में SMEs की संख्या करोड़ों में है और इनमें से 60% से अधिक अभी भी मैनुअल और पुराने सिस्टम पर चल रहे हैं।
GoDutch जैसे प्लेटफॉर्म इन व्यवसायों को:

  • तेज़ पेमेंट
  • बेहतर खर्च नियंत्रण
  • आसान अकाउंटिंग
  • और कम मैनुअल काम

देते हैं—जो उनकी प्रोडक्टिविटी को कई गुना बढ़ा देता है।

यही वजह है कि निवेशक यूरोप के SME फिनटेक सेक्टर में लगातार निवेश कर रहे हैं।


🧭 GoDutch का आगे का प्लान: बड़ा विस्तार + बेहतर सेवाएं

फंडिंग के साथ कंपनी के अगले लक्ष्य इस प्रकार हैं:

🔹 यूरोपभर में IBAN विस्तार

Belgian IBAN लॉन्च के बाद फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में भी विस्तार होगा।

🔹 SME Loans और Payroll services

GoDutch 2025 की शुरुआत में आसान बिजनेस लोन और पेरोल सेवाएं लॉन्च करेगा।

🔹 All-in-one Business Finance Hub

कंपनी का अंतिम लक्ष्य है एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना जो:

  • बैंकिंग
  • पेमेंट
  • अकाउंटिंग
  • खर्च प्रबंधन
  • टीम कार्ड
  • इनवॉइसिंग

सब कुछ एक ही जगह पर दे सके।


📝 निष्कर्ष

GoDutch की €3.6 मिलियन Seed फंडिंग यूरोप के SME फिनटेक सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
तेजी से बढ़ते यूजर बेस, मजबूत प्रोडक्ट और स्पष्ट विज़न के साथ GoDutch आने वाले वर्षों में यूरोपियन SME मार्केट का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।

यह फंडिंग कंपनी को नए फीचर्स, नए देशों और नए ग्राहकों तक पहुँचने में बड़ी मदद करेगी।
SMEs के लिए यह एक ऐसा टूल है जो न सिर्फ समय बचाता है, बल्कि बेहतर फाइनेंशियल कंट्रोल भी देता है।

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