📚 PhysicsWallah ने Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीदी,

PhysicsWallah

भारत के सबसे चर्चित एडटेक स्टार्टअप्स में से एक PhysicsWallah (PW) ने UPSC कोचिंग संस्थान Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीद ली है। यह डील करीब ₹250 करोड़ वैल्यूएशन पर हुई है। इस निवेश के साथ PW ने UPSC और सिविल सर्विसेज की तैयारी के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर ली है।


🤝 डील के बाद भी Sarrthi IAS रहेगा स्वतंत्र

सूत्रों के अनुसार, Sarrthi IAS स्वतंत्र रूप से काम करता रहेगा, लेकिन PhysicsWallah की टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाएगा। यह कदम UPSC टेस्ट प्रेप मार्केट में तेजी से हो रही कंसोलिडेशन (Consolidation) का हिस्सा माना जा रहा है।

👉 इस डील की जानकारी सबसे पहले Entrackr ने अप्रैल में एक्सक्लूसिव रूप से रिपोर्ट की थी।


🏛 Sarrthi IAS की खासियत

Sarrthi IAS की स्थापना वरुण जैन और डॉ. शिविन चौधरी ने की थी। यह संस्थान खासतौर पर मेंटॉरशिप-फोकस्ड कोर्सेज के लिए जाना जाता है।

इनके कोर्सेज में शामिल हैं:

  • GS Foundation
  • Mains Modules
  • Prelims Revision
  • Interview Guidance

यानी यह प्लेटफ़ॉर्म UPSC की तैयारी के हर चरण को कवर करता है और छात्रों को पर्सनलाइज्ड गाइडेंस प्रदान करता है।


📊 डील से बढ़ेगा रेवेन्यू

PhysicsWallah पहले से ही PWOnlyIAS के जरिए UPSC की तैयारी के क्षेत्र में मौजूद है।

  • इस डील के बाद PWOnlyIAS और Sarrthi IAS का कंबाइंड रेवेन्यू FY26 में ₹350 करोड़ से पार होने की उम्मीद है।
  • इसका मतलब है कि PW अब सिविल सर्विसेज प्रेपरेशन मार्केट का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनने की ओर बढ़ रहा है।

🌐 PhysicsWallah की रणनीति

PW का यह निवेश UPSC और अन्य स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन एग्ज़ाम्स की तैयारी वाले सेगमेंट में उसकी पोज़िशन को और मजबूत करेगा।

  • खासतौर पर ऑफ़लाइन प्रेज़ेंस बढ़ाने में यह डील मददगार होगी।
  • PW इससे पहले Drishti IAS जैसे बड़े अधिग्रहण की कोशिश भी कर चुका था, लेकिन वह डील पूरी नहीं हो पाई।

🏦 IPO से पहले बड़ा कदम

PhysicsWallah ने हाल ही में SEBI से IPO के लिए DRHP फाइल करने की मंजूरी प्राप्त कर ली है।

  • कंपनी का लक्ष्य है कि ₹4,500 करोड़ का फंड IPO के जरिए जुटाया जाए।
  • Sarrthi IAS में यह निवेश IPO से पहले अपनी स्ट्रेंथ और मार्केट पोज़िशन दिखाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

💰 फंडिंग और वैल्यूएशन

  • अब तक PW ने कुल $312 मिलियन (करीब ₹2,600 करोड़) फंडिंग जुटाई है।
  • इसमें सबसे बड़ा राउंड $210 मिलियन का Series B था, जिसका नेतृत्व Hornbill Capital ने किया था।
  • इस राउंड में Lightspeed, GSV और WestBridge Capital जैसे बड़े निवेशक भी शामिल थे।
  • उस समय कंपनी की वैल्यूएशन $2.8 बिलियन आंकी गई थी।

📈 FY25 के फाइनेंशियल्स

PhysicsWallah ने हाल ही में अपने FY25 के वित्तीय नतीजे साझा किए:

  • रेवेन्यू: ₹3,000 करोड़ (55% साल-दर-साल वृद्धि)
  • लॉस: लगभग 80% तक कम हुए

👉 यानी कंपनी न सिर्फ ग्रोथ कर रही है बल्कि घाटे को भी तेजी से कंट्रोल कर रही है।


🔎 मार्केट पर असर

UPSC कोचिंग मार्केट लंबे समय से ऑफलाइन प्लेयर्स जैसे Drishti IAS, Vision IAS और Vajiram & Ravi पर निर्भर रहा है।
लेकिन PW और Sarrthi IAS जैसी न्यू-एज एडटेक कंपनियां टेक्नोलॉजी, मेंटॉरशिप और हाइब्रिड मॉडल के जरिए इस मार्केट को बदल रही हैं।

  • छात्रों को सस्ती और क्वालिटी गाइडेंस मिल रही है।
  • ऑनलाइन-ऑफलाइन का कॉम्बिनेशन नए जमाने के छात्रों की जरूरतों को पूरा कर रहा है।

📌 निष्कर्ष

Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीदकर PhysicsWallah ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ JEE और NEET तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि UPSC और सरकारी नौकरी परीक्षाओं के क्षेत्र में भी दबदबा बनाना चाहता है।

  • IPO से पहले यह कदम निवेशकों और छात्रों, दोनों के लिए बड़ा संदेश है।
  • आने वाले वर्षों में PW और Sarrthi IAS का संयुक्त मॉडल UPSC की तैयारी को और ज्यादा डिजिटल, किफायती और प्रभावी बना सकता है।

👉 कुल मिलाकर, यह डील UPSC प्रेप इंडस्ट्री में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

Read more: boAt ने FY25 में ₹60 करोड़ का मुनाफा कमाया,

🎧 boAt ने FY25 में ₹60 करोड़ का मुनाफा कमाया,

Boat Office

भारत की प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी boAt (Imagine Marketing) ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में ₹60 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह कंपनी के लिए बड़ा टर्नअराउंड है, क्योंकि पिछले वर्षों में उसे भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा था। कंपनी ने लागत में कटौती और संचालन में सुधार कर यह उपलब्धि हासिल की है।


📊 राजस्व में हल्की गिरावट, लेकिन मुनाफे की वापसी

boAt की FY25 में कुल आय ₹3,073 करोड़ रही, जो पिछले साल (FY24) के ₹3,118 करोड़ से मामूली कम है। हालांकि, कंपनी घाटे से मुनाफे में लौट आई, जो निवेशकों और बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

  • प्रोडक्ट सेल्स: ₹3,070.4 करोड़ (इयरबड्स, स्पीकर्स, एयरडोप्स और वॉयरलेस डिवाइस)
  • ऑपरेटिंग इनकम: ₹2.9 करोड़
  • कुल राजस्व (नॉन-ऑपरेटिंग इनकम सहित): ₹3,098 करोड़

🌍 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बिक्री

  • भारत: ₹3,050.5 करोड़ की बिक्री (कोर मार्केट)
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार: 44% साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹20 करोड़

यह साफ दर्शाता है कि boAt की पकड़ अब सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ रही है।


🎶 ऑडियो सेगमेंट का दबदबा, वियरेबल्स में गिरावट

boAt के लिए ऑडियो प्रोडक्ट्स (इयरबड्स, हेडफोन, स्पीकर्स) अब भी सबसे बड़ा राजस्व जनरेटर बने हुए हैं।

  • ऑडियो सेगमेंट: ₹2,586 करोड़ (5% की वृद्धि)
  • वियरेबल्स सेगमेंट: ₹330.4 करोड़ (40% की गिरावट)

👉 वियरेबल्स में यह गिरावट बताती है कि boAt को इस कैटेगरी में कड़ी प्रतिस्पर्धा और मांग में कमी का सामना करना पड़ रहा है।


💸 लागत प्रबंधन ने बचाया खेल

FY25 में boAt ने अपने कुल खर्च को 6% घटाकर ₹3,040 करोड़ कर दिया।

  • स्टॉक-इन-ट्रेड खरीदारी: ₹2,070 करोड़ (FY24 में ₹2,271 करोड़ से 8.9% कम)
  • एडवरटाइजिंग खर्च: ₹390 करोड़ (7% की बढ़ोतरी)
  • एम्प्लॉयी कॉस्ट: ₹135 करोड़ (3.1% की वृद्धि)

इससे साफ है कि कंपनी ने मार्केटिंग में आक्रामक रुख बनाए रखा, जबकि सप्लाई चेन और स्टॉक की लागत पर नियंत्रण किया।


📈 निवेश और प्रमुख स्टेकहोल्डर्स

boAt ने अब तक $170 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।

  • 2023 में Warburg Pincus और Malabar Investments से $60 मिलियन जुटाए गए थे।
  • TheKredible के मुताबिक, Warburg Pincus सबसे बड़ा एक्सटर्नल स्टेकहोल्डर है, इसके बाद Fireside Ventures और Qualcomm का नाम आता है।

🏦 IPO की तैयारी

boAt की पेरेंट कंपनी Imagine Marketing ने IPO के लिए SEBI की मंजूरी हासिल कर ली है।

  • कंपनी ₹2,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है।
  • इसमें से ₹900 करोड़ का हिस्सा नया इश्यू होगा।
  • boAt भारत की पहली D2C इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी बनने जा रही है जो पब्लिक होगी।

यह IPO कंपनी के लिए न सिर्फ पूंजी जुटाने का साधन होगा, बल्कि निवेशकों को भी boAt की ग्रोथ स्टोरी में हिस्सा लेने का मौका देगा।


📌 नतीजा: boAt की अगली मंज़िल

FY25 में boAt ने घाटे से मुनाफे की वापसी कर दी है।

  • कंपनी ने दिखा दिया है कि सही लागत प्रबंधन और मजबूत प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी से मुश्किल हालात बदले जा सकते हैं।
  • अब असली परीक्षा IPO के दौरान होगी, जहाँ निवेशक देखेंगे कि boAt लंबे समय तक मुनाफे में टिक पाती है या नहीं।

👉 कुल मिलाकर, boAt का यह टर्नअराउंड भारतीय D2C स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो बड़े घाटे से जूझ रही हैं।

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🚀 UPI ने तोड़ा नया रिकॉर्ड: अगस्त 2025 में पहली बार 20 अरब लेन-देन पार

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अगस्त 2025 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस महीने UPI ने 20.01 अरब लेन-देन पूरे किए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेन-देन के मूल्य के लिहाज से भी, UPI ने अगस्त में ₹24.85 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किया।


📈 जून से अगस्त तक का सफर

UPI का यह माइलस्टोन किसी एक महीने की उछाल नहीं, बल्कि लगातार हो रही मजबूत वृद्धि का नतीजा है।

  • जून 2025 → 18.40 अरब लेन-देन, मूल्य ₹24.04 लाख करोड़
  • जुलाई 2025 → 19.47 अरब लेन-देन (5.8% बढ़त), मूल्य ₹25.08 लाख करोड़
  • अगस्त 2025 → 20.01 अरब लेन-देन (2.8% बढ़त), मूल्य ₹24.85 लाख करोड़

हालांकि अगस्त में लेन-देन के कुल मूल्य में जुलाई के मुकाबले 0.9% की मामूली गिरावट दर्ज हुई, लेकिन यह अब भी जून से काफी ऊपर रहा।


📊 UPI साल-दर-साल शानदार ग्रोथ

अगस्त 2024 की तुलना में इस साल UPI ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।

  • वॉल्यूम (संख्या) में 34% की बढ़त
  • वैल्यू (मूल्य) में 21% की वृद्धि

औसतन, हर दिन 645 मिलियन (64.5 करोड़) लेन-देन हुए, जिनका मूल्य लगभग ₹80,177 करोड़ रहा। खास बात यह है कि 2 अगस्त को UPI ने एक ही दिन में 700 मिलियन से अधिक लेन-देन का नया रिकॉर्ड बनाया।


🎮 गेमिंग बैन के बावजूद ग्रोथ

यह उछाल ऐसे समय आया है जब रीयल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया गया है। 21 अगस्त को संसद द्वारा Online Gaming Bill, 2025 पास होने के बाद अधिकांश गेमिंग प्लेटफॉर्म बंद हो गए। चूंकि ये प्लेटफॉर्म UPI लेन-देन का बड़ा हिस्सा बन चुके थे, इसके बावजूद रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ यह दर्शाती है कि UPI का इस्तेमाल अब असली और रोज़मर्रा के पेमेंट्स में तेजी से बढ़ रहा है।


📌 UPI: भारत के डिजिटल पेमेंट्स की रीढ़

आज UPI केवल P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स यानी दुकानों, रेस्टोरेंट्स और ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे भरोसेमंद साधन बन गया है।

🏆 टॉप प्लेयर्स (जुलाई 2025 डेटा के अनुसार):

  • PhonePe → 8.93 अरब लेन-देन (45.88% शेयर), मूल्य का 48.64% हिस्सा
  • Google Pay → 6.92 अरब लेन-देन (35.56% शेयर), मूल्य का 35.53% हिस्सा

यानी, UPI ट्रांजैक्शन का लगभग 80% हिस्सा सिर्फ इन दो कंपनियों के पास है।


🛒 कौन से सेक्टर सबसे आगे?

UPI का इस्तेमाल सिर्फ बिल पेमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोज़मर्रा की खरीदारी और लाइफस्टाइल खर्चों में भी सबसे पसंदीदा बन गया है।

  • ग्रोसरी और सुपरमार्केट → 3.03 अरब लेन-देन, मूल्य ₹64,882 करोड़
  • फास्ट फूड आउटलेट्स → 1.22 अरब लेन-देन
  • रेस्टोरेंट्स → 1.15 अरब लेन-देन
  • डिजिटल गुड्स और गेमिंग → 351.24 मिलियन लेन-देन, मूल्य ₹10,076 करोड़

🔮 आगे का रास्ता

UPI की लगातार बढ़ती ग्रोथ यह साबित करती है कि भारत में डिजिटल पेमेंट्स की पैठ अब छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में:

  • क्रेडिट लाइन और UPI लिंक्ड लोन जैसी सुविधाएं UPI को और ताकत देंगी।
  • NPCI के नए इनोवेशन जैसे UPI लाइट और UPI इंटरनेशनल, इसका इस्तेमाल और भी बढ़ाएंगे।
  • फोनपे और गूगल पे जैसे बड़े प्लेयर्स के बीच प्रतिस्पर्धा यूज़र्स को और बेहतर अनुभव देगी।

🌟 निष्कर्ष

अगस्त 2025 का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल क्रांति की सफलता की गवाही है। 20 अरब से अधिक लेन-देन यह बताते हैं कि UPI अब हर भारतीय की जेब में बैंक बन चुका है। चाहे छोटी चाय की दुकान हो या बड़ी सुपरमार्केट चेन – UPI आज भारत की डिजिटल इकॉनमी की धड़कन बन चुका है।


👉 यह लेख www.fundingraised.in के लिए लिखा गया है, जहां आपको मिलती है स्टार्टअप्स, फंडिंग, फिनटेक और डिजिटल इकॉनमी की हर ताज़ा अपडेट।

Read more : अगस्त में EV रेस: TVS ने बरकरार रखा नंबर-1 स्थान, Ola electric ने Bajaj को पछाड़ा

🚴‍♂️ अगस्त में EV रेस: TVS ने बरकरार रखा नंबर-1 स्थान, Ola electric ने Bajaj को पछाड़ा

ola electric

भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) बाजार अगस्त 2025 में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। TVS Motor ने 23.09% मार्केट शेयर के साथ अपनी नेतृत्व की स्थिति बनाए रखी, जबकि Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर Bajaj को पीछे छोड़ दिया।


📊 EV उद्योग की अगस्त रिपोर्ट

Vahan पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में कुल 1,04,306 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स रजिस्टर हुए, जो जुलाई की तुलना में 1.4% की बढ़त दर्शाता है। इसमें सबसे बड़ा योगदान चार प्रमुख कंपनियों – TVS, Ola, Ather और Hero MotoCorp – का रहा।


🏆 TVS Motor: मजबूती से शीर्ष पर

  • रजिस्ट्रेशन: 24,087 यूनिट्स
  • बढ़त: जुलाई की तुलना में 8.38% वृद्धि
  • मार्केट शेयर: 23.09%

TVS ने लगातार तीसरे महीने अपने मार्केट शेयर को बढ़ाया और अगस्त में भी नंबर-1 की स्थिति बनाए रखी। कंपनी की iQube सीरीज़ की बढ़ती मांग ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया।


⚡ Ola Electric: तेजी से बढ़ता दबदबा

  • रजिस्ट्रेशन: 18,972 यूनिट्स
  • बढ़त: 6.3%
  • मार्केट शेयर: 18.19%

Ola Electric ने अगस्त में Bajaj Auto को पछाड़ते हुए दूसरी पोज़िशन हासिल की। इस उपलब्धि का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखा, जो 11% चढ़कर ₹60.2 तक पहुंच गए। अब Ola की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹26,465 करोड़ (लगभग $3 बिलियन) पर पहुंच गई।


🚀 Ather Energy: तीसरे स्थान पर मजबूत पकड़

  • रजिस्ट्रेशन: 17,856 यूनिट्स
  • बढ़त: 10%
  • मार्केट शेयर: 17.12%

Ather Energy ने Ola से अंतर कम किया और साल-दर-साल आधार पर 60% से अधिक ग्रोथ दर्ज की। कंपनी के शेयर ₹475 पर ट्रेड हो रहे हैं, जिससे इसका मार्केट कैप ₹17,654 करोड़ ($2 बिलियन) तक पहुंच गया है।


🛵 Hero MotoCorp: मजबूत वापसी

  • रजिस्ट्रेशन: 13,313 यूनिट्स
  • बढ़त: 26.92% (MoM)
  • मार्केट शेयर: 12.76%

Hero MotoCorp ने इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में दमदार वापसी की और चौथे स्थान पर पहुंच गया। इसकी ग्रोथ जुलाई के मुकाबले लगभग 27% रही, जो EV सेगमेंट में बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।


📉 Bajaj Auto: बड़ी गिरावट

  • रजिस्ट्रेशन: 11,730 यूनिट्स
  • गिरावट: 40.3%
  • मार्केट शेयर: 11.25%

Bajaj Auto, जो जुलाई में दूसरी पोज़िशन पर था, अगस्त में पांचवें स्थान पर फिसल गया। कंपनी के मार्केट शेयर में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई।


🔎 अन्य प्रमुख खिलाड़ी

  • Greaves Electric Mobility: 7.17% ग्रोथ
  • Pure EV (IPO-bound): 5.39% ग्रोथ
  • BGauss: 7.97% ग्रोथ
  • River Mobility: 9.23% ग्रोथ
  • Kinetic Green: 23.51% ग्रोथ

इन कंपनियों ने भी अगस्त में अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी उपस्थिति को मज़बूत बनाया। खासकर Kinetic Green ने 23% से अधिक की ग्रोथ हासिल की।


🔮 EV इंडस्ट्री का भविष्य

भारत का EV मार्केट लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है।

  • सरकारी सब्सिडी और EV पॉलिसी: ग्राहकों के लिए EV खरीद को आकर्षक बना रही है।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे उपयोगकर्ताओं की चिंता कम हो रही है।
  • स्टार्टअप्स की एंट्री: Ola और Ather जैसे स्टार्टअप्स पारंपरिक दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 2-3 सालों में भारत का EV बाजार दोगुना हो सकता है।


📌 निष्कर्ष

अगस्त का महीना भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग के लिए बेहद खास रहा।

  • TVS ने अपनी बादशाहत कायम रखी।
  • Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर मजबूत संदेश दिया।
  • Ather और Hero MotoCorp ने भी तेजी से ग्रोथ दिखाई।
  • वहीं, Bajaj Auto को भारी झटका लगा।

भारत का EV बाजार अब स्पष्ट रूप से प्रतिस्पर्धी और रोमांचक दौर में प्रवेश कर चुका है।भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) बाजार अगस्त 2025 में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। TVS Motor ने 23.09% मार्केट शेयर के साथ अपनी नेतृत्व की स्थिति बनाए रखी, जबकि Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर Bajaj को पीछे छोड़ दिया।


📊 EV उद्योग की अगस्त रिपोर्ट

Vahan पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में कुल 1,04,306 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स रजिस्टर हुए, जो जुलाई की तुलना में 1.4% की बढ़त दर्शाता है। इसमें सबसे बड़ा योगदान चार प्रमुख कंपनियों – TVS, Ola, Ather और Hero MotoCorp – का रहा।


🏆 TVS Motor: मजबूती से शीर्ष पर

  • रजिस्ट्रेशन: 24,087 यूनिट्स
  • बढ़त: जुलाई की तुलना में 8.38% वृद्धि
  • मार्केट शेयर: 23.09%

TVS ने लगातार तीसरे महीने अपने मार्केट शेयर को बढ़ाया और अगस्त में भी नंबर-1 की स्थिति बनाए रखी। कंपनी की iQube सीरीज़ की बढ़ती मांग ने इस ग्रोथ में अहम योगदान दिया।


⚡ Ola Electric: तेजी से बढ़ता दबदबा

  • रजिस्ट्रेशन: 18,972 यूनिट्स
  • बढ़त: 6.3%
  • मार्केट शेयर: 18.19%

Ola Electric ने अगस्त में Bajaj Auto को पछाड़ते हुए दूसरी पोज़िशन हासिल की। इस उपलब्धि का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखा, जो 11% चढ़कर ₹60.2 तक पहुंच गए। अब Ola की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹26,465 करोड़ (लगभग $3 बिलियन) पर पहुंच गई।


🚀 Ather Energy: तीसरे स्थान पर मजबूत पकड़

  • रजिस्ट्रेशन: 17,856 यूनिट्स
  • बढ़त: 10%
  • मार्केट शेयर: 17.12%

Ather Energy ने Ola से अंतर कम किया और साल-दर-साल आधार पर 60% से अधिक ग्रोथ दर्ज की। कंपनी के शेयर ₹475 पर ट्रेड हो रहे हैं, जिससे इसका मार्केट कैप ₹17,654 करोड़ ($2 बिलियन) तक पहुंच गया है।


🛵 Hero MotoCorp: मजबूत वापसी

  • रजिस्ट्रेशन: 13,313 यूनिट्स
  • बढ़त: 26.92% (MoM)
  • मार्केट शेयर: 12.76%

Hero MotoCorp ने इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में दमदार वापसी की और चौथे स्थान पर पहुंच गया। इसकी ग्रोथ जुलाई के मुकाबले लगभग 27% रही, जो EV सेगमेंट में बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।


📉 Bajaj Auto: बड़ी गिरावट

  • रजिस्ट्रेशन: 11,730 यूनिट्स
  • गिरावट: 40.3%
  • मार्केट शेयर: 11.25%

Bajaj Auto, जो जुलाई में दूसरी पोज़िशन पर था, अगस्त में पांचवें स्थान पर फिसल गया। कंपनी के मार्केट शेयर में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई।


🔎 अन्य प्रमुख खिलाड़ी

  • Greaves Electric Mobility: 7.17% ग्रोथ
  • Pure EV (IPO-bound): 5.39% ग्रोथ
  • BGauss: 7.97% ग्रोथ
  • River Mobility: 9.23% ग्रोथ
  • Kinetic Green: 23.51% ग्रोथ

इन कंपनियों ने भी अगस्त में अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी उपस्थिति को मज़बूत बनाया। खासकर Kinetic Green ने 23% से अधिक की ग्रोथ हासिल की।


🔮 EV इंडस्ट्री का भविष्य

भारत का EV मार्केट लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है।

  • सरकारी सब्सिडी और EV पॉलिसी: ग्राहकों के लिए EV खरीद को आकर्षक बना रही है।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे उपयोगकर्ताओं की चिंता कम हो रही है।
  • स्टार्टअप्स की एंट्री: Ola और Ather जैसे स्टार्टअप्स पारंपरिक दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 2-3 सालों में भारत का EV बाजार दोगुना हो सकता है।


📌 निष्कर्ष

अगस्त का महीना भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग के लिए बेहद खास रहा।

  • TVS ने अपनी बादशाहत कायम रखी।
  • Ola Electric ने बाज़ार में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनकर मजबूत संदेश दिया।
  • Ather और Hero MotoCorp ने भी तेजी से ग्रोथ दिखाई।
  • वहीं, Bajaj Auto को भारी झटका लगा।

भारत का EV बाजार अब स्पष्ट रूप से प्रतिस्पर्धी और रोमांचक दौर में प्रवेश कर चुका है।

Read more : CityMall ने जुटाए ₹334 करोड़ की नई फंडिंग,

🛒 CityMall ने जुटाए ₹334 करोड़ की नई फंडिंग,

CityMall

गुरुग्राम स्थित ग्रॉसरी-फोकस्ड सोशल ई-कॉमर्स स्टार्टअप सिटीमॉल (CityMall) ने अपने विकास और विस्तार को तेज़ करने के लिए Series D राउंड में ₹334 करोड़ (लगभग $38 मिलियन) जुटाने की घोषणा की है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Accel ने किया है, जिसमें उसके मौजूदा निवेशक — Waterbridge Ventures, Elevation Capital, Norwest Capital, Citius, और General Catalyst — ने भी हिस्सा लिया है।

यह कंपनी का 3.5 साल बाद पहला बड़ा फंडिंग राउंड है। इससे पहले मार्च 2022 में CityMall ने Series C राउंड में $75 मिलियन जुटाए थे।


💰 निवेश का ब्योरा

कंपनी के RoC (Registrar of Companies) में दाखिल दस्तावेज़ों के मुताबिक, बोर्ड ने 7,278 Series D CCPS और एक इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दी है, जिनकी कीमत ₹4,58,716 प्रति शेयर तय की गई है।

  • Accel: ₹173.2 करोड़ ($19.7 मिलियन)
  • Waterbridge Ventures: ₹52 करोड़ ($5.9 मिलियन)
  • Citius: ₹48.38 करोड़ ($5.5 मिलियन)
  • Norwest Capital: ₹25.96 करोड़ ($2.95 मिलियन)
  • Elevation Capital: ₹21.65 करोड़
  • General Catalyst: ₹8.67 करोड़
  • एंजल इन्वेस्टर रोहित अग्रवाल: ₹4 करोड़

कंपनी इस राशि का उपयोग कैपिटल एक्सपेंडिचर, मार्केटिंग और अन्य कॉर्पोरेट आवश्यकताओं के लिए करेगी।


📊 वैल्यूएशन और भविष्य की योजनाएँ

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस राउंड के बाद भी कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹2,780 करोड़ ($316 मिलियन) पर स्थिर रहा है। हालाँकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले चरणों में CityMall और फंड जुटा सकती है, जिससे वैल्यूएशन बढ़ने की संभावना है।


🏬 CityMall का बिज़नेस मॉडल

2020 में स्थापित, CityMall एक सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो मुख्य रूप से ग्रॉसरी, FMCG और होम व किचन प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराता है। कंपनी का फोकस टियर-II और टियर-III शहरों पर है, जहाँ यह कम्युनिटी रिसेलर्स के नेटवर्क के माध्यम से उत्पाद बेचती है।

अब CityMall ब्यूटी और एक्सेसरीज़ जैसी नई कैटेगरी में भी विस्तार करने की तैयारी कर रही है, ताकि छोटे शहरों के उपभोक्ताओं को भी बड़े शहरों जैसी प्रोडक्ट चॉइस मिल सके।


📈 अब तक की फंडिंग और निवेश

TheKredible के आँकड़ों के अनुसार, CityMall अब तक $110 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटा चुकी है। Accel जैसी ग्लोबल वीसी फर्म का लगातार समर्थन यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल और उसके स्केल-अप पोटेंशियल पर भरोसा है।


💹 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

कंपनी ने अभी तक FY25 के वित्तीय आँकड़े दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन FY24 की रिपोर्ट के अनुसार:

  • ग्रॉस रेवेन्यू (GMV): ₹427 करोड़ (FY23 में ₹346.4 करोड़ की तुलना में 23% वृद्धि)
  • नेट लॉस: ₹159 करोड़ (FY23 में ₹144 करोड़ से 10% अधिक)

यह दर्शाता है कि जहाँ कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ तेज़ है, वहीं लॉस भी बढ़ रहा है, जो विस्तार और मार्केटिंग खर्च की वजह से है।


🌐 छोटे शहरों पर बड़ा फोकस

CityMall का उद्देश्य सिर्फ ग्रॉसरी और FMCG तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के छोटे और मध्यम शहरों में ई-कॉमर्स की पहुँच बढ़ाने का है। भारत में Amazon और Flipkart जैसे बड़े प्लेटफॉर्म का दबदबा ज़्यादातर मेट्रो और बड़े शहरों में है। वहीं, CityMall का फोकस है कि छोटे कस्बों और शहरों के ग्राहकों को भी सस्ती और क्वालिटी प्रोडक्ट्स आसानी से उपलब्ध हों।

इस रणनीति ने इसे स्थानीय ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बनाया है और कम्युनिटी-बेस्ड मॉडल ने विश्वास बनाने में मदद की है।


🚀 निष्कर्ष

CityMall का यह ₹334 करोड़ का नया फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है। हालाँकि घाटे की चुनौती बनी हुई है, लेकिन टियर-II और टियर-III शहरों पर फोकस और नई कैटेगरी में एंट्री से कंपनी अपने राजस्व और ग्राहक आधार को मज़बूत करने की दिशा में बढ़ रही है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि CityMall कितनी तेज़ी से अपने बिज़नेस को स्केल कर पाता है और क्या यह बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ियों को छोटे शहरों में कड़ी टक्कर दे पाएगा।

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🏦 Kiwi ने सीरीज़ B राउंड में जुटाए ₹208 करोड़,

Kiwi

भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। फिनटेक स्टार्टअप Kiwi ने अपने सीरीज़ B फंडिंग राउंड में $24 मिलियन (लगभग ₹208 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Vertex Ventures Southeast Asia & India ने किया, जबकि मौजूदा निवेशकों Nexus Venture Partners, Stellaris Venture Partners और Omidyar Network ने भी भागीदारी की।

💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि इस निवेश से उसका ध्यान तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:

  1. प्रोडक्ट रोडमैप को तेज करना – नई सुविधाएँ और टेक्नोलॉजी अपग्रेड लॉन्च करना।
  2. यूनिट इकॉनॉमिक्स को मजबूत करना – लाभप्रदता और लागत नियंत्रण पर ध्यान।
  3. कस्टमर एक्विज़िशन बढ़ाना – अधिक से अधिक नए यूज़र्स को जोड़ना।

📱 Kiwi का बिज़नेस मॉडल

Kiwi की शुरुआत साल 2022 में सिद्धार्थ मेहता, मोहित बेदी और अनुप अग्रवाल ने की थी। यह प्लेटफ़ॉर्म यूज़र्स को RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक करने की सुविधा देता है।

  • इसका मतलब है कि अब ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी उसी तरह कर सकते हैं, जैसे डेबिट कार्ड से UPI पेमेंट्स करते हैं।
  • इससे क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति (acceptance) नेटवर्क काफी बड़ा हो जाता है, क्योंकि भारत में हर जगह UPI व्यापारी (merchants) मौजूद हैं।

📊 अब तक का प्रदर्शन

  • Kiwi ने लॉन्च के बाद से अब तक 2 लाख से अधिक RuPay क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं।
  • वर्तमान में यह स्टार्टअप 600 शहरों में सक्रिय है।
  • हर महीने 50 लाख से ज्यादा मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करता है।
  • Kiwi ने YES Bank और AU Small Finance Bank के साथ पार्टनरशिप की है और इस वित्त वर्ष में दो और बड़े बैंकों को जोड़ने की योजना बना रहा है।

🎯 आने वाला लक्ष्य

कंपनी ने बड़ा विज़न रखा है – साल 2027 तक 10 लाख RuPay क्रेडिट कार्ड जारी करने का लक्ष्य।
यह ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में फिनटेक सेक्टर UPI आधारित क्रेडिट एक्सेस को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

📈 क्यों है Kiwi का मॉडल खास?

भारत में फिलहाल 350 मिलियन से ज्यादा यूनिक UPI यूज़र्स हैं, जो कि क्रेडिट कार्ड यूज़र्स की संख्या से 8–10 गुना अधिक है।

  • पारंपरिक क्रेडिट कार्ड की तुलना में UPI पर क्रेडिट की acceptance network 35 गुना बड़ा है।
  • इसीलिए Kiwi का मॉडल निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए आकर्षक माना जा रहा है।

🧑‍🤝‍🧑 शेयरहोल्डिंग और निवेशकों की दिलचस्पी

स्टार्टअप डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के मुताबिक:

  • सीरीज़ A राउंड के बाद सिद्धार्थ मेहता, अनुप अग्रवाल और मोहित बेदी के पास लगभग 16.2% हिस्सेदारी थी।
  • वहीं Nexus Venture Partners सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है।
  • सीरीज़ B राउंड के बाद संस्थापकों ने कितनी हिस्सेदारी डायल्यूट की है, यह देखना दिलचस्प होगा।

🌍 प्रतिस्पर्धा और उद्योग का माहौल

भारत में कई फिनटेक कंपनियाँ इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं:

  • LazyPay, OneCard, Uni और Slice जैसी कंपनियाँ भी UPI के जरिए क्रेडिट एक्सेस का विस्तार कर रही हैं।
  • बढ़ते डिजिटल पेमेंट यूज़र्स के चलते इस मार्केट में आने वाले सालों में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है।

📌 नतीजा

Kiwi का फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि भारत का फिनटेक इकोसिस्टम अभी भी निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक है।

  • क्रेडिट कार्ड और UPI का मेल आने वाले समय में ग्राहकों की क्रेडिट उपयोग की आदतों को पूरी तरह बदल सकता है।
  • अगर Kiwi अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेता है, तो यह भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में Game Changer साबित हो सकता है। 🚀

👉 यह फंडिंग न सिर्फ Kiwi के लिए, बल्कि भारत के फिनटेक सेक्टर के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले वर्षों में क्रेडिट ऑन UPI का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

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🏠 Altum Credo Home Finance ने BII से जुटाए ₹170 करोड़,

Altum Credo

सस्ते हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में काम करने वाली Altum Credo Home Finance ने अपने मौजूदा निवेशक British International Investment (BII) से ₹170 करोड़ (लगभग $19.5 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाई है। यह निवेश कंपनी की बैलेंस शीट को और मजबूत करेगा और दक्षिण तथा पश्चिम भारत के बाजारों में इसके विस्तार को गति देगा।


💸 कंपनी की फंडिंग हिस्ट्री

Altum Credo की फंडिंग यात्रा काफी सक्रिय रही है। अप्रैल 2023 में कंपनी ने $40 मिलियन जुटाए थे, जिसमें Z3Partners और Oikocredit प्रमुख निवेशक रहे।

  • अब तक कंपनी ने लगभग $80 मिलियन (₹660 करोड़ से अधिक) फंडिंग जुटाई है।
  • इस ताज़ा निवेश से कंपनी की मार्केट पोज़िशन और मजबूत होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां हाउसिंग फाइनेंस की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

🏡 बिजनेस मॉडल – अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर को हाउसिंग सपोर्ट

Altum Credo की स्थापना 2016 में हुई थी। कंपनी का फोकस उन ग्राहकों पर है जिनकी आय अनौपचारिक (informal) या सेमी-फॉर्मल है और जिन्हें अक्सर बड़े बैंकों से होम लोन लेने में दिक्कत होती है।

  • कंपनी लॉन्ग-टेन्योर होम लोन देती है ताकि मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास ग्राहकों को सस्ते घर खरीदने में मदद मिल सके।
  • इसका मॉडल टेक-इनेबल्ड ओरिजिनेशन और अंडरराइटिंग प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें ज़मीन पर मौजूद टीम का सपोर्ट भी शामिल है।
  • इस स्ट्रक्चर से कंपनी ऑपरेशनल कॉस्ट कम रख पाती है और ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना लेती है।

📊 ग्राहक आधार और प्रदर्शन

  • Altum Credo अब तक 15,000 से अधिक ग्राहकों को होम लोन उपलब्ध करा चुकी है।
  • कंपनी की Assets Under Management (AUM) ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा है।
  • यह छह राज्यों में सक्रिय है, जिसमें दक्षिण और पश्चिम भारत इसके मुख्य फोकस मार्केट हैं।

📈 वित्तीय प्रदर्शन

Altum Credo का वित्तीय ग्राफ लगातार बेहतर हो रहा है।

  • वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू 67% बढ़कर ₹112.87 करोड़ हो गई।
  • इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा दोगुना होकर ₹20 करोड़ पर पहुंच गया।
  • यह मजबूत ग्रोथ कंपनी के बिजनेस मॉडल और स्केलेबिलिटी की सफलता को दिखाती है।

🌏 इंडस्ट्री में बढ़ती हलचल

पिछले कुछ महीनों में हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में कई बड़े सौदे हुए हैं।

  • Weaver Services ने हाल ही में $170 मिलियन जुटाए, जिसका नेतृत्व Lightspeed और Premji Invest ने किया।
  • Vastu Housing ने $100 मिलियन जुटाए, जिसमें Prosus प्रमुख निवेशक रहा।
  • Easy Home Finance ने $35 मिलियन की फंडिंग हासिल की, जिसमें Ranjan Pai Family Office सहित अन्य निवेशक शामिल थे।

Altum Credo का नया राउंड भी इसी ट्रेंड को मज़बूत करता है और यह दर्शाता है कि भारत का हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर तेज़ी से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।


🚀 altum credo भविष्य की रणनीति

Altum Credo अब नई फंडिंग के सहारे इन रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेगी:

  1. मौजूदा मार्केट में गहराई से विस्तार – खासकर दक्षिण और पश्चिम भारत में।
  2. टेक्नोलॉजी को और अपग्रेड करना ताकि लोन प्रोसेसिंग और कस्टमर सर्विस आसान हो सके।
  3. नए ग्राहक सेगमेंट को टारगेट करना जो अभी तक पारंपरिक बैंकों से वंचित हैं।

🔎 निष्कर्ष

Altum Credo Home Finance का ₹170 करोड़ का यह नया निवेश भारतीय हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है। भारत जैसे देश में जहां हर साल लाखों लोगों को सस्ती हाउसिंग की ज़रूरत होती है, Altum Credo जैसे प्लेटफॉर्म्स एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।

इस निवेश से कंपनी न केवल अपने बिजनेस को विस्तार दे पाएगी बल्कि उन परिवारों तक भी पहुंच सकेगी जिनके लिए घर का सपना अब तक अधूरा था।

➡️ साफ है कि आने वाले समय में Affordable Housing Finance सेक्टर निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन साबित होगा।

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PokerBaazi पर Real-Money Gaming बंद किया

PokerBaazi

भारत के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में बड़ा झटका लगा है। Nazara Technologies की एसोसिएट कंपनी Moonshine Technologies, जो PokerBaazi प्लेटफ़ॉर्म ऑपरेट करती है, ने अपने Real-Money Gaming ऑपरेशन्स को सस्पेंड कर दिया है। यह कदम संसद द्वारा Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025 पारित किए जाने के बाद उठाया गया है।


⚖️ सरकार का नया कानून और असर

इस नए बिल के तहत ऑनलाइन गेमिंग में किसी भी तरह के पैसों की हिस्सेदारी (Real-Money Games) को पूरी तरह से प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया है।

  • जो कंपनियाँ इस नियम का उल्लंघन करेंगी, उन्हें 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
  • बिल पारित होते ही कई कंपनियों ने तुरंत अपने ऑपरेशन्स बंद करने शुरू कर दिए।

Moonshine ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि उन्होंने यह कदम “abundant caution” के तौर पर और सरकार के आदेश का सम्मान करते हुए उठाया है।


💼 Nazara Technologies पर प्रभाव

Nazara Technologies के पास Moonshine में 46.07% हिस्सेदारी है। हालांकि, Nazara ने कई बार कहा है कि वह Moonshine की revenue numbers consolidate नहीं करती, लेकिन अगर यह बैन लंबे समय तक जारी रहा तो:

  • PokerBaazi में किया गया निवेश शून्य (Zero Valuation) हो सकता है।
  • ब्रोकरेज फर्म्स ने पहले ही चेतावनी दी है कि Moonshine की वैल्यू गिरकर 0 तक जा सकती है।
  • निवेशकों की चिंता बढ़ने से Nazara के शेयर पिछले हफ्ते में 20% से ज्यादा टूट चुके हैं

🎲 Real-Money Gaming कंपनियों पर संकट

Moonshine अकेली कंपनी नहीं है जिसने यह कदम उठाया है। बिल पास होने के बाद कई अन्य बड़ी कंपनियाँ भी प्रभावित हुई हैं:

  • MPL (Mobile Premier League)
  • Dream11
  • Zupee
  • My11Circle
  • Gameskraft
  • Probo

इन सभी ने या तो अपने Real-Money Games बंद कर दिए हैं या फिर ऑपरेशन्स सस्पेंड कर दिए हैं


📉 इंडस्ट्री पर असर

भारत की ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पहले ही तेजी से बढ़ रही थी और इसमें 400 से ज्यादा कंपनियाँ काम कर रही थीं।

  • इस सेक्टर में लगभग 2 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
  • अब इस बैन के चलते mass layoffs (छंटनी) की आशंका गहराई है।
  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूज़र्स अब illegal offshore gaming platforms की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे सरकार के लिए रेवेन्यू लॉस और कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ सकती है।

🌍 कंपनियों की नई रणनीति

कई गेमिंग कंपनियाँ अब अपनी रणनीति बदल रही हैं:

  • Free-to-Play Games की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
  • Esports और Gaming as Entertainment पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
  • कुछ कंपनियाँ अब विदेशी बाजारों (International Markets) की ओर बढ़ रही हैं ताकि अपने बिज़नेस को बचा सकें।

📊 निवेशकों की नजर

निवेशक इस समय काफी सतर्क हो गए हैं।

  • जो कंपनियाँ केवल Real-Money Gaming पर निर्भर थीं, उनकी वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।
  • वहीं, जिन कंपनियों के पास विविधतापूर्ण बिज़नेस मॉडल हैं (जैसे Esports, Gaming Content, Tech Development), वे इस संकट से बेहतर तरीके से निकल सकती हैं।

🚨 निष्कर्ष

PokerBaazi का ऑपरेशन बंद होना भारत की Gaming Economy के लिए बड़ा झटका है। Nazara Technologies जैसे बड़े ब्रांड पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

  • एक तरफ सरकार User Protection और Responsible Gaming के लिए कानून बना रही है।
  • वहीं दूसरी ओर, रोजगार और निवेशकों का भरोसा इस बैन से प्रभावित हो रहा है।

अब नजर इस बात पर है कि कंपनियाँ नए कानून के हिसाब से अपने मॉडल को कैसे एडजस्ट करती हैं और सरकार क्या इंडस्ट्री के साथ मिलकर कोई संतुलित समाधान ढूँढ पाती है।


👉 यह मामला आने वाले समय में तय करेगा कि भारत का Gaming Sector एक Global Hub बन पाएगा या नियमन की वजह से पीछे रह जाएगा

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📢 Smartworks ने Cleanmax में अपनी हिस्सेदारी घटाई,

Smartworks

मैनेज्ड ऑफिस स्पेस प्रोवाइडर Smartworks ने अपनी एसोसिएट कंपनी Cleanmax (Cleanmax DOS Pvt Ltd) में हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया है। कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी 24.82% से घटाकर 9.08% कर दी है। यह जानकारी Smartworks द्वारा स्टॉक एक्सचेंज में दी गई फाइलिंग से सामने आई है।

फाइलिंग के अनुसार, Smartworks ने Clean Max Enviro Energy Solutions Limited को यह हिस्सेदारी करीब ₹99 लाख में बेची है। यह डील एक हफ्ते के भीतर पूरी होने की संभावना है।


✅ डील की अहम बातें

  • Smartworks की हिस्सेदारी Cleanmax में 24.82% से घटकर 9.08% रह जाएगी।
  • खरीदार Clean Max Enviro Energy Solutions Limited है, जो Smartworks के प्रमोटर ग्रुप से संबंधित नहीं है।
  • इस कारण, यह डील Related Party Transaction की श्रेणी में नहीं आती।
  • हिस्सेदारी घटने के बाद Cleanmax अब Smartworks की Associate Company नहीं रहेगी।

📊 Smartworks का वित्तीय प्रदर्शन

Smartworks ने हाल ही में अपने Q1 FY26 के नतीजे घोषित किए थे।

  • कंपनी की Revenue सालाना आधार पर 21% बढ़कर ₹379 करोड़ पर पहुंच गई।
  • वहीं, कंपनी का घाटा 82% कम होकर ₹4.1 करोड़ रह गया।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि Smartworks अपने बिज़नेस को लगातार मज़बूत कर रही है और घाटे को कम करने की दिशा में सही कदम उठा रही है।


📈 स्टॉक मार्केट में हालिया प्रदर्शन

Smartworks ने पिछले महीने स्टॉक मार्केट में शानदार डेब्यू किया था।

  • IPO इश्यू प्राइस ₹407 के मुकाबले शेयरों की लिस्टिंग करीब 7% प्रीमियम पर हुई।
  • कंपनी ने IPO से कुल ₹445 करोड़ फ्रेश इश्यू और ₹137.5 करोड़ OFS (Offer for Sale) से जुटाए।
  • गुरुवार के सेशन में कंपनी का शेयर ₹476 पर बंद हुआ।
  • मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से Smartworks का मार्केट कैप लगभग ₹5,432.65 करोड़ ($632 मिलियन) है।

🏢 Smartworks का बिज़नेस मॉडल

Smartworks देश की अग्रणी मैनेज्ड ऑफिस स्पेस प्रोवाइडर कंपनियों में से एक है। यह कॉर्पोरेट्स और स्टार्टअप्स को फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है।

  • कंपनी का लक्ष्य है कि बदलते वर्ककल्चर और हाइब्रिड मॉडल की मांग को पूरा किया जाए।
  • Smartworks अपने क्लाइंट्स को हाई-टेक ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर, को-वर्किंग सॉल्यूशंस और एंड-टू-एंड मैनेजमेंट सुविधाएं देती है।

🔎 डील का महत्व

Smartworks द्वारा Cleanmax में हिस्सेदारी कम करने के पीछे कई रणनीतिक कारण हो सकते हैं।

  • कंपनी अपनी कोर बिज़नेस एक्टिविटीज़ पर अधिक फोकस करना चाहती है।
  • Cleanmax से हिस्सेदारी घटाकर Smartworks वर्कस्पेस बिज़नेस में विस्तार और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने पर ध्यान दे सकती है।
  • वहीं, Clean Max Enviro Energy Solutions Limited द्वारा इस हिस्सेदारी की खरीद यह दिखाता है कि कंपनी क्लीन एनर्जी सेक्टर में आक्रामक विस्तार की ओर बढ़ रही है।

🌍 मार्केट एक्सपर्ट्स की राय

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Smartworks का यह कदम रणनीतिक डाइवेस्टमेंट (Strategic Divestment) है।

  • कंपनी का फोकस अब अपने कोर ऑपरेशंस पर होगा।
  • IPO के बाद, Smartworks का मकसद निवेशकों का विश्वास बनाए रखना और राजस्व वृद्धि को स्थिर रखना है।
  • आने वाले समय में कंपनी के शेयर प्राइस में और मजबूती देखने को मिल सकती है।

📌 निष्कर्ष

Smartworks ने Cleanmax में हिस्सेदारी घटाकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने मुख्य बिज़नेस यानी मैनेज्ड ऑफिस स्पेस पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है।
कंपनी के लिए यह कदम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे बिज़नेस स्ट्रक्चर और फोकस और भी मजबूत होगा।

💡 आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Smartworks IPO के बाद अपने एक्सपैंशन और प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे संतुलित करती है और निवेशकों को लंबी अवधि में क्या रिटर्न देती है।

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🚀 Edgehax ने जुटाया ₹1.39 करोड़ का Seed फंडिंग,

Edgehax

भारत में Edge AI टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है और इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Edgehax ने Seed राउंड में ₹1.39 करोड़ (लगभग $165K) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Inflection Point Ventures (IPV) ने किया है। कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग को स्केल करने, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट में तेजी लाने और भारत समेत अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक्सपैंशन के लिए करेगी।


🌟 Edgehax की शुरुआत और विज़न

Edgehax की स्थापना 2025 में प्रभु स्तवरमठ और सवित्री पाटिल ने मिलकर की थी। यह स्टार्टअप एक फुल-स्टैक Edge AI हार्डवेयर प्लेटफॉर्म पर काम करता है जो कंप्यूटिंग, कनेक्टिविटी और स्टोरेज को एक ही मॉड्यूल पर उपलब्ध कराता है।

👉 इसका विज़न है कि Edge AI को सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित न रखकर स्टूडेंट्स, स्टार्टअप्स और कंज्यूमर एप्लायंसेज तक भी पहुंचाया जाए।


🛠️ Edgehax के प्रोडक्ट्स और यूज़ केसेस

Edgehax के हार्डवेयर और डेवलपर किट्स का इस्तेमाल कई एडवांस टेक्नोलॉजी डोमेन में किया जा रहा है, जैसे:

  • Industrial Gateways
  • Humanoid Robots
  • Autonomous Vehicles
  • Drones
  • Defence Systems
  • NavIC-based Tracking Solutions

📦 अब तक कंपनी 5,000 से ज्यादा Edge Gateway Boards शिप कर चुकी है और 2025 के दिसंबर तक 10,000 Compute Modules कंज्यूमर अप्लायंसेज के लिए लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।


🤝 पार्टनरशिप और इकोसिस्टम में योगदान

Edgehax पहले ही 150 से ज्यादा स्टार्टअप्स, OEMs और बड़ी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर चुका है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने डेवलपर किट्स के जरिए 30 यूनिवर्सिटीज और IITs में 1 लाख स्टूडेंट्स और फैकल्टी को Edge AI टेक्नोलॉजी का एक्सेस दिया है।

यह दिखाता है कि स्टार्टअप सिर्फ हार्डवेयर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे Edge AI इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।


🌍 Edgehax बनाम ग्लोबल प्लेयर्स

Edgehax जिस डोमेन में काम कर रहा है, वहां पहले से ही बड़े ग्लोबल प्लेयर्स मौजूद हैं जैसे:

  • Raspberry Pi
  • Nvidia Jetson
  • Google Coral
  • Qualcomm AI Boards

लेकिन Edgehax का फोकस भारत में लोकल इनोवेशन और अफोर्डेबल Edge AI हार्डवेयर देने पर है। इसका उद्देश्य है कि देशी कंपनियां और डेवलपर्स ग्लोबल लेवल पर कंपटीशन कर सकें।


💡 Inflection Point Ventures (IPV) का विश्वास

Inflection Point Ventures, जिसने इस राउंड का नेतृत्व किया है, भारत के प्रमुख एंजेल इन्वेस्टमेंट नेटवर्क्स में से एक है। IPV का कहना है कि Edge AI आने वाले समय में AI एप्लिकेशंस को रियल-टाइम और ऑफलाइन लेवल पर सक्षम बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

इसलिए, Edgehax जैसी कंपनियों में शुरुआती निवेश भविष्य की टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


📊 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

जुटाए गए ₹1.39 करोड़ का इस्तेमाल इन प्रमुख क्षेत्रों में होगा:

  1. मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना
  2. नए Edge AI प्रोडक्ट्स डेवलप करना
  3. भारत और विदेशों में मार्केट एक्सपैंशन
  4. डेवलपर और यूनिवर्सिटी प्रोग्राम्स को स्केल करना

📈 भारतीय Edge AI मार्केट में संभावनाएँ

भारत में AI और IoT मार्केट पहले से ही तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 तक भारत का AI मार्केट $7 बिलियन से ऊपर पहुंच सकता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा Edge AI टेक्नोलॉजी का होगा।

Edgehax इस मौके को भुनाने के लिए तैयार है और इसका लोकल मैन्युफैक्चरिंग और यूनिवर्सिटी-फ्रेंडली मॉडल इसे भारतीय मार्केट में मजबूत पोजिशन दिला सकता है।


🔮 भविष्य की राह

Edgehax की टीम अब कंज्यूमर एप्लायंसेज, स्मार्ट डिवाइसेस और इंडस्ट्रियल IoT को टारगेट कर रही है। आने वाले समय में अगर यह कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को बड़े पैमाने पर डिप्लॉय कर पाती है, तो यह भारत की पहली ग्लोबल लेवल की Edge AI हार्डवेयर कंपनी बन सकती है।


निष्कर्ष
Edgehax की Seed फंडिंग सिर्फ एक स्टार्टअप की ग्रोथ की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की टेक इंडिपेंडेंस और AI इनोवेशन की दिशा में एक मजबूत कदम है। Inflection Point Ventures जैसे निवेशकों का सपोर्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय Edge AI हार्डवेयर कंपनियां अब ग्लोबल कंपटीशन के लिए तैयार हो रही हैं।

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