🏢💥 IPO आया, लेकिन धमाका नहीं! Indiqube की फीकी शुरुआत

IndiQube

💼 फ्लेक्सिबल ऑफिस प्रोवाइडर IndiQube ने शेयर बाजार में की एंट्री, लेकिन 9% के नुकसान के साथ!

📉 लिस्टिंग डे पर निराशा! ₹237 का शेयर ₹216 पर खुला

IndiQube Spaces का IPO तो ज़बरदस्त रहा — 12 गुना ओवरसब्सक्राइब, लेकिन जब बुधवार को NSE पर लिस्टिंग हुई, तो निवेशकों को झटका लगा। शेयर का इश्यू प्राइस था ₹237, लेकिन यह खुला सिर्फ ₹216 पर यानी करीब 9% की गिरावट


💸 फिर भी निवेशकों ने लगाई बोली में आग 🔥

  • रिटेल इनवेस्टर्स ने दिखाई शानदार दिलचस्पी — 13 गुना सब्सक्रिप्शन
  • HNI यानी हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स ने भी 8 गुना तक बोली लगाई।
  • कुल मिलाकर, ₹700 करोड़ का IPO रहा हिट — ₹650 करोड़ फ्रेश इश्यू और ₹50 करोड़ पुराने निवेशकों की बिक्री से।

🧑‍💼 कौन है IndiQube? क्या करता है ये स्टार्टअप?

2015 में शुरू हुआ Bengaluru-बेस्ड यह स्टार्टअप फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस प्रदान करता है। यानी स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े एंटरप्राइजेस के लिए पूरी तरह से मॅनेज्ड ऑफिस स्पेस।

आज यह कई बड़े शहरों में एक्टिव है और तेजी से अपना नेटवर्क बढ़ा रहा है।


📈 फाइनेंशियल्स की बात करें तो… 💹

  • FY25 में कंपनी ने कमाए ₹1,059 करोड़ — पिछले साल FY24 के मुकाबले 27.5% ज्यादा
  • सबसे बड़ी बात — घाटा हुआ 59% कम!
    FY24 में जहां कंपनी को ₹341.5 करोड़ का नुकसान था, वो FY25 में घटकर ₹139.5 करोड़ रह गया।

💰 पैसे का होगा क्या इस्तेमाल?

IndiQube कहता है कि IPO से मिली रकम का इस्तेमाल किया जाएगा:

  • कर्ज चुकाने के लिए
  • नए ऑफिस खोलने (CapEx) के लिए
  • जनरल कॉर्पोरेट कामों के लिए

🏁 प्रतियोगिता भी कम नहीं! Smartworks और Awfis दे रहे टक्कर

  • Awfis ने पिछले साल मई में शानदार लिस्टिंग की थी — 13% प्रीमियम पर।
  • Smartworks ने इसी महीने 7% प्रीमियम के साथ डेब्यू किया।

इन दोनों के मुकाबले इंडिक्यूब की शुरुआत थोड़ी फीकी जरूर रही, लेकिन दौड़ अभी बाकी है!


🧭 आगे की राह: उम्मीदें भी हैं और जोखिम भी…

✅ पॉजिटिव्स:

  • रेवेन्यू ग्रोथ दिखा रही है कंपनी
  • घाटा भी तेजी से घटा
  • बड़े एंकर निवेशकों का सपोर्ट

⚠️ चैलेंजेस:

  • IPO के बाद मार्केट में निवेशकों का भरोसा जीतना
  • फ्लेक्सिबल ऑफिस सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
  • प्रॉफिट में जल्दी आना होगा

📌 निष्कर्ष: धीमी शुरुआत, लेकिन रेस लंबी है 🏃‍♂️💨

IndiQube की लिस्टिंग भले ही उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, लेकिन कंपनी के पास एक मज़बूत मॉडल, फंडिंग सपोर्ट और बाजार की जरूरत को पूरा करने की क्षमता है।

अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या कंपनी आने वाले क्वार्टर्स में प्रॉफिटेबिलिटी, स्केलेबिलिटी और ग्राहक बेस में दमदार प्रदर्शन कर पाती है या नहीं।


📍 यह रिपोर्ट FundingRaised.in के पाठकों के लिए एक्सक्लूसिव है — जहां हर स्टार्टअप स्टोरी होती है दिलचस्प अंदाज़ में पेश!

© FundingRaised | 2025

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🚀 IPO की तैयारी में जुटा Zetwerk,

Zetwerk

बेंगलुरु स्थित B2B ई-कॉमर्स यूनिकॉर्न Zetwerk ने अपने IPO की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने प्रमोटर्स से ₹600 करोड़ (लगभग $70 मिलियन) जुटाने का फैसला किया है। यह निवेश Zetwerk के सह-संस्थापकों द्वारा शुरू की गई एक नई कंपनी Creovate Innovation Private Limited के ज़रिए किया जा रहा है।


💰 6.46 करोड़ प्रेफरेंस शेयर होंगे जारी

Zetwerk के बोर्ड ने एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास करते हुए करीब 6.46 करोड़ प्रेफरेंस शेयर जारी करने की मंजूरी दी है, ताकि इस पूंजी निवेश को पूरा किया जा सके। यह जानकारी Entrackr द्वारा देखे गए कॉर्पोरेट डॉक्युमेंट्स में सामने आई है।


👨‍💼 प्रमोटर्स की नई कंपनी: Creovate Innovation

मार्च 2025 में स्थापित की गई Creovate Innovation को Zetwerk के दो सह-संस्थापकों — अमृत प्रतीक आचार्य और श्रीनाथ रामकृष्णन — ने मिलकर शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार, इस निवेश राउंड में दोनों सह-संस्थापक बराबर की हिस्सेदारी डाल रहे हैं।


🏦 डेब्ट के जरिए ₹650 करोड़ और जुटा रही है Creovate

Entrackr के अनुसार, Creovate Innovation कंपनी Avendus, RV Capital और 100 से अधिक अन्य निवेशकों के साथ मिलकर ₹650 करोड़ का डेब्ट फंडिंग राउंड भी ला रही है। इसमें से अब तक कंपनी को ₹497 करोड़ (करीब $58.4 मिलियन) की राशि प्राप्त हो चुकी है।


📈 इन्वेस्टमेंट का उद्देश्य

निवेश का उद्देश्य Zetwerk की विकास योजनाओं, फंड आवश्यकताओं और सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों को पूरा करना है। कंपनी द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, इस फंड का उपयोग पूंजीगत खर्च (Capex) सहित विभिन्न कार्यों के लिए किया जाएगा।


📊 IPO की तैयारी तेज, लक्ष्य $400–500 मिलियन

Zetwerk इस समय अपने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की दिशा में सक्रियता से काम कर रहा है। कंपनी की योजना $400–500 मिलियन के आईपीओ की है, जिससे लगभग $5 बिलियन का वैल्यूएशन मिलने की उम्मीद है।


🏗️ Zetwerk का बिज़नेस मॉडल

Zetwerk एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो खरीदारों को मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सप्लायर्स से जोड़ता है। कंपनी ऐसे वेंडर्स के साथ पार्टनरशिप करती है जो फैब्रिकेशन, मशीनिंग, कास्टिंग, फोर्जिंग और गैल्वनाइजिंग जैसे निर्माण कार्यों में माहिर हैं।

Zetwerk के संचालन क्षेत्र में शामिल हैं:

  • 🇮🇳 भारत
  • 🇺🇸 अमेरिका
  • 🌍 मिडल ईस्ट
  • 🌏 साउथईस्ट एशिया

💸 अब तक जुटाई गई कुल फंडिंग: $800 मिलियन+

Zetwerk अब तक $800 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटा चुका है, जिसमें इक्विटी और डेब्ट दोनों शामिल हैं। दिसंबर 2024 में Khosla Ventures के नेतृत्व में हुए $70 मिलियन के सीरीज F राउंड में कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन $3 बिलियन आंका गया था।


📅 FY24 में 26% की सालाना राजस्व वृद्धि

भले ही कंपनी ने FY25 के आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन FY24 में Zetwerk ने:

  • ₹14,436 करोड़ का ग्रॉस रेवेन्यू हासिल किया है,
  • जो FY23 के ₹11,449 करोड़ के मुकाबले 26% अधिक है।

यह ग्रोथ ट्रेंड Zetwerk के स्केलेबल और टिकाऊ बिजनेस मॉडल को दर्शाता है।


⚔️ प्रतिस्पर्धा: Infra.Market, OfBusiness और Moglix

Zetwerk की प्रतिस्पर्धा भारत में तेजी से बढ़ते अन्य B2B स्टार्टअप्स से है, जैसे कि:

  • Infra.Market, जिसने हाल ही में Mars Growth Capital से $150 मिलियन जुटाए हैं,
  • OfBusiness, जो अपने खुद के IPO की तैयारी में है,
  • और Moglix, जो बीते कुछ वर्षों में स्थिर ग्रोथ दिखा रहा है।

इन सभी कंपनियों के बीच Zetwerk ने खुद को एक इनोवेटिव और AI-संचालित सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में स्थापित किया है।


🧠 रणनीतिक कदम: प्रमोटर्स से निवेश क्यों?

Zetwerk का अपने प्रमोटर्स के जरिए निवेश जुटाना एक रणनीतिक कदम है। इससे कंपनी:

  • बाहरी निवेशकों पर निर्भरता कम कर सकती है,
  • अपने नियंत्रण को बनाए रख सकती है,
  • और IPO से पहले पूंजीगत जरूरतों को कुशलता से पूरा कर सकती है।

🔚 निष्कर्ष: Zetwerk IPO से पहले मजबूत स्थिति में

IPO से पहले Zetwerk जिस तरह से पूंजी जुटा रहा है और अपने बिजनेस को विस्तारित कर रहा है, वह इसे एक मजबूत पोजिशन में लाता है। प्रमोटर्स का सीधा निवेश, बढ़ते रेवेन्यू आंकड़े और वैश्विक विस्तार योजनाएं इस बात का संकेत हैं कि Zetwerk आने वाले समय में भारतीय B2B मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप्स की अगली बड़ी कहानी बन सकता है।



📝 प्रस्तुति: FundingRaised Hindi Startup Desk

Read more : ट्रैवल स्टार्टअप Passprt Trips को मिला $500K प्री-सीड फंड,

🌍 ट्रैवल स्टार्टअप Passprt Trips को मिला $500K प्री-सीड फंड,

Passprt Trips

नई तकनीकों से लैस ट्रैवल सेक्टर में एक और नया नाम तेजी से उभर रहा है – Passprt Trips। इस पर्सनल ट्रैवल एडवाइजर प्लेटफॉर्म ने हाल ही में $500,000 (लगभग ₹4.2 करोड़) की प्री-सीड फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Aroa Venture Partners ने किया है, जो पहले भी कई सफल स्टार्टअप्स में निवेश कर चुका है।


🚀 फंडिंग का उद्देश्य: प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंटरनेशनल एक्सपेंशन

Passprt Trips इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट को बेहतर बनाने, यात्रियों की कम्युनिटी को मजबूत करने, और APAC (एशिया पैसिफिक)मिडल ईस्ट के 20 डेस्टिनेशन्स में तीन महीनों के भीतर परिचालन शुरू करने में करेगा।

इस ट्रैवल स्टार्टअप की योजना एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की है, जो यात्रियों को यात्रा की प्लानिंग से लेकर बुकिंग और ऑन-ट्रिप सपोर्ट तक की संपूर्ण सुविधा एक ही प्लेटफॉर्म पर दे सके।


🧑‍💼 किसने शुरू किया Passprt Trips?

Passprt Trips की स्थापना 2023 में दो सह-संस्थापकों – उज्ज्वल गर्ग और मनोज राय – द्वारा की गई थी। दोनों संस्थापक तकनीक और ट्रैवल इंडस्ट्री में गहरी समझ रखते हैं। इस स्टार्टअप का उद्देश्य यात्रियों को एक रीयल-टाइम पर्सनल ट्रैवल एडवाइजर देना है, जो उन्हें:

  • यात्रा की प्रेरणा देने से लेकर,
  • रूट प्लानिंग करने,
  • ट्रिप बुक करने,
  • और यात्रा के दौरान सहायता प्रदान करने तक,

हर स्तर पर एक सहज और स्मार्ट अनुभव प्रदान कर सके।


🧠 तकनीक से सशक्त: एआई-पावर्ड ट्रैवल एक्सपीरियंस

Passprt Trips एक वर्टिकल AI स्टैक बना रहा है, जो कम्युनिटी-कॉन्ट्रिब्यूटेड डेटा और गहराई से इंटीग्रेटेड सप्लाई नेटवर्क के माध्यम से काम करता है। इसका मतलब यह है कि हर यूज़र को हाइपर-पर्सनलाइज्ड, लचीले और भरोसेमंद ट्रैवल ऑप्शन मिलते हैं – वो भी एक ही इंटरफेस पर।

यह प्लेटफॉर्म fragmented ट्रैवल जर्नी को एकत्रित करता है — जैसे कि:

  • ट्रैवल आइडिया की खोज,
  • बुकिंग्स की सुविधा,
  • और यात्रा के दौरान लाइव सहायता —

सब कुछ एक ही डिजिटल अनुभव के तहत उपलब्ध कराता है।


🌐 आगामी योजना: इंटरनेशनल स्केल पर पहुंचना

Passprt Trips आने वाले तीन महीनों में 20 नए डेस्टिनेशन में प्रवेश करने की तैयारी में है। इन डेस्टिनेशन्स में मुख्य रूप से APAC क्षेत्र (जैसे कि इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम आदि) और Middle East (जैसे दुबई, अबूधाबी, कतर) शामिल हैं।

इस विस्तार से कंपनी को ना केवल नए बाजार मिलेंगे, बल्कि उनकी ट्रैवल कम्युनिटी और डेटा मॉडल को भी अधिक विविधता मिलेगी — जिससे उनका AI स्टैक और अधिक स्मार्ट बन सकेगा।


🧳 ट्रैवल सेक्टर में बढ़ती संभावनाएं

ट्रैवल इंडस्ट्री में लगातार इनोवेशन की मांग बढ़ रही है, खासकर AI, डेटा इंटीग्रेशन, और पर्सनलाइजेशन के क्षेत्रों में। Passprt Trips जैसे स्टार्टअप्स इस गैप को भरने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आज की नई पीढ़ी सिर्फ बुकिंग प्लेटफॉर्म से संतुष्ट नहीं है, उन्हें चाहिए:

  • वैयक्तिक समाधान,
  • स्थानीय अनुभव की जानकारी,
  • और एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी यात्रा की योजना।

Passprt Trips इन सभी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक AI-बेस्ड कम्युनिटी ड्रिवन ट्रैवल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है।


💼 Aroa Venture Partners की ट्रैक रिकॉर्ड

Passprt Trips में निवेश करने वाला Aroa Venture Partners एक जाना-माना वेंचर कैपिटल फर्म है, जिसने पहले भी Unacademy, Urban Company, CRED, Pine Labs, Magicpin, MPL और Cars24 जैसे चर्चित स्टार्टअप्स में निवेश किया है।

फरवरी 2024 में Aroa ने ₹400 करोड़ ($50 मिलियन) का नया फंड लॉन्च किया था, और Passprt Trips उसी फंड से निवेश पाने वाला एक प्रमुख ट्रैवल स्टार्टअप बन गया है।


🔍 निष्कर्ष: ट्रैवल टेक में नया खिलाड़ी तैयार

Passprt Trips का फोकस सिर्फ ट्रैवल बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यात्रा की संपूर्ण प्रक्रिया को तकनीक और डेटा की मदद से आसान, स्मार्ट और पर्सनलाइज्ड बनाना चाहता है।

स्टार्टअप के शुरुआती परिणामों और एरोआ वेंचर जैसे निवेशकों के समर्थन से यह स्पष्ट है कि Passprt Trips आने वाले समय में ट्रैवल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकता है।

📝 प्रस्तुति: FundingRaised Hindi Startup Desk

Read more : Go Digit General Insurance को हुआ ₹194 करोड़ का अंडरराइटिंग घाटा,

📉 Go Digit General Insurance को हुआ ₹194 करोड़ का अंडरराइटिंग घाटा,

Go Digit

भारतीय जनरल इंश्योरेंस सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में से एक, Go Digit General Insurance Limited ने Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) के लिए अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की है। हालांकि कंपनी ने इस तिमाही में ₹121 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, लेकिन ऑपरेटिंग रेवेन्यू यानी नेट प्रीमियम में 17% की गिरावट और अंडरराइटिंग घाटा बढ़कर ₹194 करोड़ तक पहुंच गया है।


📊 कुल राजस्व में मामूली बढ़त, लेकिन ऑपरेटिंग रेवेन्यू में गिरावट

Q1 FY26 में Go Digit का नेट प्रीमियम ₹1,865 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही यानी Q1 FY25 में यह ₹2,247 करोड़ था। यानी साल-दर-साल तुलना में 17% की गिरावट देखी गई। वहीं, नेट प्रीमियम रिटन (NPW) भी ₹2,027 करोड़ से घटकर ₹1,951 करोड़ पर आ गया – लगभग 4% की गिरावट

वहीं दूसरी ओर, कुल आय (Total Income) ₹2,077 करोड़ से बढ़कर ₹2,179 करोड़ हो गई है, जो कि करीब 5% की बढ़त है।


📈 निवेश से अच्छी कमाई

Go Digit को अपने निवेश पोर्टफोलियो से अच्छा फायदा हुआ। कंपनी की इन्वेस्टमेंट इनकम Q1 FY26 में बढ़कर ₹314 करोड़ रही, जो Q1 FY25 में ₹253 करोड़ थी। यह वृद्धि बाजार की अनुकूल स्थितियों और बेहतर पोर्टफोलियो प्रदर्शन के कारण संभव हो सकी।


💸 खर्चों में भी भारी बढ़ोतरी

Q1 FY26 में कंपनी के कुल खर्च ₹2,058 करोड़ तक पहुंच गए, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में ये ₹1,957 करोड़ थे।
इसमें मुख्य रूप से दो मदों में बढ़ोतरी हुई:

  • कमीशन व ब्रोकरेज खर्च: ₹514 करोड़ से बढ़कर ₹572 करोड़
  • कर्मचारी लाभ खर्च (Employee Benefits): ₹90 करोड़

🚑 क्लेम पेआउट में उछाल

बीमा कंपनियों की सेहत को क्लेम पेआउट से भी मापा जाता है। Go Digit ने इस तिमाही में ₹903 करोड़ के क्लेम का भुगतान किया, जबकि Q1 FY25 में यह आंकड़ा ₹718 करोड़ था। हालांकि, बकाया क्लेम की राशि ₹567 करोड़ से घटकर ₹409 करोड़ पर आ गई है, जो कि कंपनी के दायित्व प्रबंधन की सकारात्मक दिशा में इशारा करता है।


📉 अंडरराइटिंग घाटा बढ़ा

हालांकि कंपनी की टोटल इनकम बढ़ी है, लेकिन अंडरराइटिंग घाटा Q1 FY25 में ₹170 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹194 करोड़ हो गया – जो कि 15% की वृद्धि को दर्शाता है। यह घाटा कंपनी की बीमा पॉलिसी संचालन लागत और प्रीमियम के बीच के अंतर को दर्शाता है।


📈 मुनाफा 46% बढ़ा, शेयर में स्थिरता

इन सभी आंकड़ों के बावजूद, Go Digit का शुद्ध मुनाफा ₹121 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹83 करोड़ की तुलना में 46% की वृद्धि है। यह बढ़त मुख्य रूप से निवेश आय में उछाल और खर्चों के सख्त नियंत्रण के कारण संभव हुई है।

वित्तीय नतीजों के दिन कंपनी का शेयर मूल्य ₹349 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा था, जिससे इसका मार्केट कैप ₹32,254 करोड़ तक पहुंच गया।


🔍 Go Digit की स्थिति और भविष्य

Go Digit के लिए यह तिमाही मिश्रित रही — एक तरफ नेट प्रीमियम और अंडरराइटिंग घाटे में गिरावट ने चिंता बढ़ाई, वहीं दूसरी ओर निवेश इनकम, क्लेम कंट्रोल और नेट प्रॉफिट में बढ़त ने भरोसा जगाया है।

FY26 के आने वाले क्वार्टरों में कंपनी को अपने अंडरराइटिंग घाटे को कम करने, प्रेमियम संग्रह बढ़ाने और मार्केट शेयर को मजबूत करने की आवश्यकता है। खासतौर पर तब जब बाजार में कई नई इंश्योरटेक कंपनियां तेज़ी से उभर रही हैं।


🧾 निष्कर्ष

Go Digit General Insurance ने चुनौतीपूर्ण माहौल में भी मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि की है, लेकिन इसके लिए कंपनी को अपने बीमा मॉडल और प्राइसिंग रणनीतियों पर दोबारा ध्यान देने की आवश्यकता है। निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर अब कंपनी की अगली तिमाही पर टिकी रहेगी कि क्या यह ग्रोथ कायम रख पाएगी।

📝 भाषा: FundingRaised Hindi Startup Desk

Read More: Zepto को Elcid Investment से ₹7.5 करोड़ की फंडिंग,

⚡ Zepto को Elcid Investment से ₹7.5 करोड़ की फंडिंग,

Zepto

तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स स्टार्टअप Zepto ने FY25 में ₹11,110 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया


📦 Elcid Investment से मिला नया निवेश

भारत के तेजी से उभरते क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto को ₹7.5 करोड़ की नई फंडिंग प्राप्त हुई है। यह निवेश Elcid Investment के जरिए किया गया है, जिसकी जानकारी Zepto ने अपनी स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से दी है।

इस डील के तहत, Elcid Investment ने 22,55,639 इक्विटी शेयर Zepto में खरीदे हैं, जिसकी प्रति शेयर कीमत ₹33.23 रखी गई है। यह निवेश कंपनी में 0.039% इक्विटी हिस्सेदारी को दर्शाता है।


💸 $500 मिलियन फंडिंग राउंड की तैयारी

इस छोटे निवेश के साथ ही, Zepto अब एक बड़े $500 मिलियन फंडिंग राउंड की तैयारी में भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राउंड General Catalyst, Avenir और अन्य मौजूदा निवेशकों की अगुवाई में किया जाएगा।

इस राउंड के बाद Zepto की संभावित वैल्यूएशन $7 बिलियन (लगभग ₹58,000 करोड़) तक पहुंच सकती है। हालांकि यह सब अभी शुरुआती बातचीत के चरण में है।


📉 वैल्यूएशन में 50% की गिरावट

हालिया निवेश के समय Zepto की वैल्यूएशन ₹19,231 करोड़ (लगभग $2.26 बिलियन) आंकी गई है। यह पिछले साल अगस्त 2023 में हुए $340 मिलियन फंडरेज़ के समय की $5 बिलियन वैल्यूएशन से लगभग 50% कम है।

इस गिरावट का कारण बदलते मार्केट ट्रेंड्स, घाटे में चल रही यूनिट इकॉनॉमिक्स और IPO की देरी को माना जा रहा है।


📈 FY25 में 2.5X रेवेन्यू ग्रोथ

बावजूद इसके, Zepto ने अपने टर्नओवर में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है।

वित्तीय वर्षटर्नओवर (₹ करोड़ में)
FY23₹2,024.4 करोड़
FY24₹4,454.5 करोड़
FY25₹11,110 करोड़

FY25 में Zepto का कुल कारोबार 2.5 गुना बढ़ा, जो FY24 के ₹4,454.5 करोड़ के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। लगातार तीन वर्षों से कंपनी की आय लगभग दोगुनी होती जा रही है, जो इसके मजबूत ग्राहक आधार और वितरण नेटवर्क को दर्शाता है।


🏠 अब भारत में रजिस्टर, IPO टला FY26 तक

Zepto ने हाल ही में अपना डोमिसाइल (मुख्यालय) सिंगापुर से भारत शिफ्ट कर लिया है। यह कदम संभावित IPO (Initial Public Offering) की तैयारी के तहत उठाया गया था।

हालांकि, ताज़ा जानकारी के अनुसार अब कंपनी ने अपना IPO FY26 तक टाल दिया है। मार्केट कंडीशन और वैल्यूएशन में गिरावट इसके पीछे की वजह मानी जा रही है।


🆚 बढ़ती प्रतिस्पर्धा: Blinkit और Swiggy Instamart

Zepto को भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी चुनौती मिल रही है:

🔶 Blinkit

  • मालिक: Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal
  • प्रदर्शन: FY26 की पहली तिमाही (Q1) में ₹2,400 करोड़ का रेवेन्यू
  • दिलचस्प बात: Blinkit का यह रेवेन्यू Eternal की फूड डिलीवरी सेगमेंट से भी ज्यादा था

🔷 Swiggy Instamart

  • अब तक अपने Q1 FY26 के वित्तीय परिणाम साझा नहीं किए हैं
  • लेकिन Zepto और Blinkit से सीधे टक्कर में है

Zepto, Blinkit और Swiggy के बीच चल रही इस रेस में, रेवेन्यू ग्रोथ तो Zepto के पक्ष में है, लेकिन मार्केट हिस्सेदारी और ब्रांड स्थायित्व में अभी काफी मेहनत बाकी है।


📦 क्या है Zepto का बिज़नेस मॉडल?

Zepto एक 10 मिनट डिलीवरी आधारित क्विक कॉमर्स स्टार्टअप है, जो ग्रॉसरी, डेली एसेंशियल्स, और FMCG प्रोडक्ट्स को यूज़र्स के दरवाजे तक तेजी से पहुंचाता है।

इसका संचालन भारत के कई बड़े शहरों में डार्क स्टोर मॉडल के जरिए होता है। इसका लक्ष्य तेजी से ग्रोथ करते कंज्यूमर ऑन-डिमांड सेगमेंट में लीडर बनना है।


🔮 आगे की राह

  • ₹11,000+ करोड़ के टर्नओवर के साथ Zepto ने मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत की है
  • IPO के टलने और वैल्यूएशन में गिरावट कंपनी के लिए शॉर्ट टर्म में चुनौती है
  • लेकिन $500 मिलियन की संभावित फंडिंग और मौजूदा ऑपरेशनल ग्रोथ भविष्य में नए अवसर खोल सकती है

📌 निष्कर्ष

Zepto का सफर निवेश, विकास और प्रतिस्पर्धा से भरा रहा है। जहां एक ओर इसका रेवेन्यू तीन वर्षों में लगातार दोगुना हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वैल्यूएशन में गिरावट और IPO में देरी जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Zepto अपने नए फंडिंग राउंड और ऑपरेशनल स्केलिंग के ज़रिए अपने मार्केट पोजीशन को और मजबूत कर पाता है।

Read more : CarTrade ने Q1 FY26 में मुनाफा किया दोगुना,

🚗 CarTrade ने Q1 FY26 में मुनाफा किया दोगुना,

CarTrade

ऑपरेशनल दक्षता और तीन सेगमेंट्स की मजबूती से कंपनी को मिला जबरदस्त फाइनेंशियल ग्रोथ


📊 तिमाही नतीजों में दमदार प्रदर्शन

ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड्स प्लेटफॉर्म CarTrade Tech Ltd ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के लिए अपने अनऑडिटेड वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 22% सालाना वृद्धि के साथ ₹173 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया है, जो कि Q1 FY25 में ₹142 करोड़ था।

वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹47 करोड़ रहा है, जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही (Q1 FY25) में ₹23 करोड़ था। यानी मुनाफे में सीधा 2 गुना उछाल देखा गया है।


💼 कुल आय और सेगमेंट वाइज प्रदर्शन

CarTrade की कुल आय (Total Income) Q1 FY26 में बढ़कर ₹199 करोड़ हो गई, जो Q1 FY25 में ₹157 करोड़ थी। कंपनी की कमाई तीन प्रमुख सेगमेंट्स से होती है:

1️⃣ कंज़्यूमर सेगमेंट

  • इस सेगमेंट से आय ₹66 करोड़ रही (Q1 FY25 में ₹51 करोड़)
  • कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 38% रही

2️⃣ रीमार्केटिंग सेगमेंट

  • इस सेगमेंट से कंपनी ने ₹59 करोड़ की आय अर्जित की

3️⃣ क्लासिफाइड सेगमेंट

  • इस सेगमेंट से रेवेन्यू ₹48 करोड़ रहा

तीनों सेगमेंट्स ने मिलकर कंपनी को मजबूत राजस्व देने में सहयोग किया है।


💰 खर्च पर नियंत्रण, मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी

👥 कर्मचारी खर्च

Q1 FY26 में कंपनी का कुल खर्च ₹142 करोड़ रहा, जिसमें से सबसे बड़ी हिस्सेदारी कर्मचारी लाभ खर्च (Employee Benefits Expense) की रही। यह ₹75 करोड़ रहा, जो कि कुल खर्च का 53% है। यह खर्च पिछले वर्ष की तुलना में केवल 6% की वृद्धि पर रहा, जो अच्छी लागत-प्रबंधन रणनीति को दर्शाता है।

🧾 अन्य खर्च

अन्य परिचालन खर्चों के साथ कंपनी का कुल व्यय Q1 FY25 के ₹131 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹142 करोड़ हो गया, यानी लगभग 8% की वृद्धि

💹 मुनाफा दोगुना

खर्चों पर नियंत्रण और रेवेन्यू ग्रोथ की वजह से कंपनी का शुद्ध लाभ ₹47 करोड़ रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है।


📈 शेयर बाज़ार में प्रदर्शन

CarTrade का शेयर Q1 रिज़ल्ट के दिन ₹1,871 पर ट्रेड कर रहा था (10:56 AM तक)। कंपनी की बाज़ार पूंजी ₹8,886 करोड़ (लगभग $1.03 बिलियन) तक पहुंच गई है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।


🏢 CarTrade किस क्षेत्र में काम करती है?

CarTrade एक प्रमुख ऑनलाइन ऑटोमोबाइल प्लेटफॉर्म है जो नई और पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री, रिव्यू, ऑक्शन और फाइनेंसिंग जैसी सेवाएं देती है। इसका संचालन मुख्य रूप से तीन बिज़नेस यूनिट्स में होता है:

  • कंज़्यूमर प्लेटफॉर्म: जहां यूज़र्स गाड़ियाँ ब्राउज़ और खरीद सकते हैं
  • रीमार्केटिंग प्लेटफॉर्म: जहां डीलर्स और कंपनियां वाहनों की बोली और बिक्री करती हैं
  • क्लासिफाइड्स: ऑटो लिस्टिंग, बायर-सेलर कनेक्शन और डिजिटल विज्ञापन

📌 क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नतीजे?

CarTrade ने IPO के बाद अपने प्रदर्शन में स्थिरता लाई है और Q1 FY26 के नतीजे दिखाते हैं कि कंपनी ऑपरेशनल रूप से मजबूत, खर्च नियंत्रण में सक्षम और मार्केट में कॉम्पिटिटिव बनी हुई है।

  • बढ़ता रेवेन्यू यह दर्शाता है कि उपभोक्ता वर्ग में कंपनी की पकड़ मजबूत हो रही है
  • मुनाफे में उछाल से निवेशकों का भरोसा और भी बढ़ेगा
  • स्थिर ग्रोथ, मार्केट कैप और कम खर्च इसे भारत के डिजिटल ऑटो क्लासिफाइड सेक्टर का लीडर बना रहे हैं

📅 आगे क्या?

CarTrade की अगली तिमाही पर नज़रें रहेंगी कि क्या यह प्रदर्शन बरकरार रहेगा। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और EV सेक्टर की ग्रोथ को देखते हुए कंपनी का डिजिटल इनोवेशन और सेगमेंट डाइवर्सिफिकेशन इसकी सफलता की कुंजी बनेगा।


निष्कर्ष:
CarTrade का Q1 FY26 प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि कंपनी अपने व्यवसाय मॉडल को न सिर्फ स्थिर रखे हुए है, बल्कि निरंतर मुनाफे और ग्रोथ की ओर भी अग्रसर है। आने वाले समय में यह भारत की डिजिटल ऑटोमोबाइल इकोनॉमी में और बड़ी भूमिका निभा सकती है।

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📈 IPO की राह पर Lenskart ₹2,150 करोड़ जुटाने को मिली मंज़ूरी,

Lenskart

📌 कंपनी ने AGM में लिया बड़ा फैसला

भारत की प्रमुख आईवियर रिटेलर Lenskart ने अपने आगामी Initial Public Offering (IPO) की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। 26 जुलाई 2025 को आयोजित 17वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी ने ₹2,150 करोड़ के फ्रेश इश्यू को मंज़ूरी दी है। यह प्रस्ताव कंपनी के शेयरधारकों द्वारा पास किया गया।


💼 मौजूदा निवेशकों के लिए भी OFS का विकल्प

कंपनी इस IPO के ज़रिए न सिर्फ फ्रेश फंड जुटाएगी, बल्कि Offer-for-Sale (OFS) के ज़रिए मौजूदा निवेशकों को भी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। हालांकि अभी OFS के आकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।


💰 IPO के ज़रिए $1 बिलियन जुटाने की योजना

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Lenskart इस IPO से लगभग $1 बिलियन (₹8,300 करोड़) जुटाने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य है लगभग ₹83,000 करोड़ ($10 बिलियन) की वैल्यूएशन हासिल करना, जो इसे भारत की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप IPO में से एक बना सकता है।


🏢 प्राइवेट से पब्लिक बनी कंपनी

IPO से पहले, कंपनी ने खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल लिया है। इस रणनीतिक बदलाव की जानकारी सबसे पहले Entrackr ने रिपोर्ट की थी।


📈 पिछली वैल्यूएशन और निवेशक अपडेट

पिछले साल जून 2024 में Lenskart की वैल्यूएशन $5 बिलियन थी जब कंपनी ने $200 मिलियन का सेकेंडरी डील किया था। हाल ही में Fidelity ने इस वैल्यूएशन को बढ़ाकर $6.1 बिलियन कर दिया है।


🎯 ESOP 2025: कर्मचारियों के लिए नई योजना

कंपनी ने अपने कर्मचारियों को जोड़ने और प्रोत्साहित करने के लिए ESOP 2025 योजना शुरू की है। इसके तहत कुल 72.8 लाख स्टॉक ऑप्शन्स आवंटित किए गए हैं, जो कंपनी के 0.43% पूरी डायल्यूटेड इक्विटी के बराबर हैं।

👤 कौन होंगे लाभार्थी?

इसमें से 21.84 लाख ऑप्शन्स को जनरल मैनेजर और उससे ऊपर के स्तर के कर्मचारियों के लिए रिज़र्व किया गया है।


🧑‍💼 लीडरशिप की सैलरी भी उजागर

AGM में कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की सालाना सैलरी भी सामने आई:

  • Peyush Bansal (CEO): ₹6 करोड़ प्रति वर्ष
  • Neha Bansal (डायरेक्टर): ₹3 करोड़ प्रति वर्ष
  • Amit Chaudhary (को-फाउंडर): ₹3 करोड़ प्रति वर्ष

👥 नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति

IPO से पहले बोर्ड को और मजबूत करते हुए कंपनी ने दो नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स नियुक्त किए हैं:

  • Sayali Karanjkar (PaySense की को-फाउंडर)
  • Ashish Kashyap (IndWealth के फाउंडर और Goibibo के पूर्व सीईओ)

📊 FY25 का वित्तीय प्रदर्शन

Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, Lenskart ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कुल ₹6,415 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष ₹5,427 करोड़ से 18% की वृद्धि है। इसके साथ ही कंपनी के पास $200 मिलियन से अधिक की नकद राशि मौजूद है।


🏦 बड़े निवेशकों का समर्थन

Lenskart को जिन प्रमुख निवेशकों का समर्थन प्राप्त है, उनमें शामिल हैं:

  • SoftBank
  • Fidelity
  • Temasek
  • Alpha Wave
  • Kedaara Capital

इन निवेशकों की मौजूदगी कंपनी के IPO को और अधिक आकर्षक बनाती है।


📌 निष्कर्ष: IPO की राह पर बड़ा कदम

Lenskart का आगामी IPO भारतीय स्टार्टअप जगत के लिए एक और बड़ा माइलस्टोन बनने जा रहा है। ₹2,150 करोड़ का फ्रेश इश्यू, ESOP योजना, अनुभवी बोर्ड, और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन—ये सभी संकेत करते हैं कि कंपनी निवेशकों के भरोसे पर खरी उतर सकती है।

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Lenskart IPO की डेट क्या होगी और यह सार्वजनिक बाज़ार में किस तरह का रिस्पॉन्स हासिल करता है।ते हैं। इससे न सिर्फ इसके मौजूदा निवेशकों को फायदा होगा, बल्कि यह भारत के स्टार्टअप IPO स्पेस में एक नई ऊर्जा भी भर सकता है।


📍 और पढ़ें: FundingRaised.in पर स्टार्टअप IPO, फंडिंग और फाइनेंशियल अपडेट्स की लेटेस्ट कवरेज।

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🇮🇳 भारतीय स्टार्टअप्स फंडिंग अपडेट (22-26 जुलाई): दोगुना हुआ निवेश, $202.79 मिलियन की कुल फंडिंग 🚀

भारतीय स्टार्टअप्स

पिछले हफ्ते की तुलना में इस सप्ताह भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम ने ज़बरदस्त उछाल दर्ज किया है। इस बार 24 स्टार्टअप्स ने मिलाकर कुल $202.79 मिलियन की फंडिंग जुटाई, जिसमें 4 ग्रोथ-स्टेज और 16 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं। वहीं 4 स्टार्टअप्स ने अपने फंडिंग आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए।

📈 भारतीय स्टार्टअप्स ग्रोथ-स्टेज डील्स: Gupshup, IndiQube और SuperK छाए रहे

इस हफ्ते ग्रोथ और लेट-स्टेज फंडिंग का कुल आंकड़ा $119.7 मिलियन तक पहुँचा।

  • Gupshup ने $60 मिलियन से अधिक इक्विटी और डेब्ट फंडिंग जुटाई, जिसमें Globespan और EvolutionX प्रमुख निवेशक रहे।
  • IndiQube ने अपने ₹700 करोड़ के IPO से पहले ₹374 करोड़ एंकर निवेशकों से जुटाए।
  • SuperK, जो छोटे शहरों के लिए रिटेल चेन है, ने ₹100 करोड़ की सीरीज़ B फंडिंग हासिल की, जिसका नेतृत्व 3STATE Ventures ने किया।
  • Pristyn Care ने अपने हॉस्पिटल एक्सपेंशन के लिए $4 मिलियन जुटाए।

🌱 अर्ली-स्टेज डील्स: AI और सेमीकंडक्टर में जोश

16 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने मिलकर $83.09 मिलियन की फंडिंग जुटाई।

  • Composio ने अपनी सीरीज़ A राउंड में $25 मिलियन जुटाए, जिसमें Lightspeed लीड इन्वेस्टर रहा।
  • Netrasemi, एक सेमीकंडक्टर स्टार्टअप, ने ₹107 करोड़ ($12.5 मिलियन) जुटाए, जिसमें Zoho Corporation और Unicorn India Ventures प्रमुख रहे।
  • इसके अलावा, Kluisz.ai (AI इंफ्रास्ट्रक्चर), Edufund (edtech), EVeez (electric mobility) और Enlite (infra-tech) जैसे स्टार्टअप्स ने भी फंडिंग जुटाई।
  • Magma, Coluxe (lab-grown diamonds) जैसे स्टार्टअप्स ने भी निवेश हासिल किया, लेकिन रकम सार्वजनिक नहीं की।

🏙️ शहर और सेगमेंट वाइज डील्स

  • शहर: बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहाँ 9 डील्स हुईं। इसके बाद दिल्ली-NCR में 5, मुंबई, अहमदाबाद और चेन्नई में भी डील्स हुईं।
  • सेगमेंट: इस हफ्ते AI स्टार्टअप्स ने सबसे ज्यादा 5 डील्स कीं। इसके बाद ई-कॉमर्स और हेल्थटेक में 3-3 डील्स रहीं।

🌀 सीरीज़ वाइज डील्स

  • Seed फंडिंग सबसे ज्यादा 9 डील्स के साथ टॉप पर रही।
  • इसके बाद Series A में 8 डील्स हुईं।
  • प्री-सीड, Series F और अन्य भी इस हफ्ते सक्रिय रहे।

📊 हफ्तावार निवेश ट्रेंड

इस हफ्ते फंडिंग में दोगुना उछाल आया — पिछले हफ्ते के $97.45 मिलियन के मुकाबले इस बार $202.79 मिलियन फंडिंग हुई।

  • पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग आंकड़ा $200 मिलियन/हफ्ता रहा, जिसमें हर हफ्ते औसतन 23 डील्स होती हैं।

🧑‍💼 प्रमुख नियुक्तियां

  • Raise Financial Services (Dhan) ने Amit Gupta को ग्रुप CFO नियुक्त किया।
  • Leap India ने IPO से पहले Harinarayanan Nair और Sanjiv Gupta को स्वतंत्र निदेशक बनाया।
  • Shadowfax ने IPO से पहले अपने बोर्ड में Bijou Kurien, Ruchira Shukla, Pirojshaw Sarkari और Dinkar Gupta को शामिल किया।

🤝 मर्जर और अधिग्रहण

  • मानसिक स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म LISSUN ने अमेरिका स्थित Being Cares Inc का अधिग्रहण किया, जिससे भारत में बच्चों के लिए AI-बेस्ड बिहेवियरल हेल्थकेयर मजबूत होगा।

💰 नया फंड लॉन्च

  • वेंचर कैपिटल फर्म Yali Capital ने ₹893 करोड़ ($103.2 मिलियन) का डीपटेक-केंद्रित फंड क्लोज किया है। यह फंड चिप डिज़ाइन, रोबोटिक्स, AI, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, जीनोमिक्स आदि क्षेत्रों में निवेश करेगा।

🛑 शटडाउन

  • EV फाइनेंसिंग स्टार्टअप Ohm Mobility ने 5 साल बाद अपने ऑपरेशंस बंद करने की घोषणा की।

🔮 संभावित डील्स

  • Captain Fresh ने IPO से पहले डेब्ट फंडिंग की तैयारी की है।
  • Bonito Designs जल्द ही Tomorrow Capital से $9.5 मिलियन जुटा सकता है।

🆕 लॉन्च व साझेदारी

  • Reliance ने फैशन क्विक कॉमर्स स्पेस में Ajio Rush के साथ एंट्री की।
  • Grip Invest ने नया ऑटो-कंपाउंडिंग इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट लॉन्च किया।
  • UKHI और DCGpac ने सस्टेनेबल पैकेजिंग के लिए साझेदारी की।
  • PhonePe और SBI Card ने मिलकर को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया।
  • Freshworks बना McLaren Formula 1 का IT पार्टनर।
  • Spyne ने ऑटो डीलरशिप के लिए पहला AI असिस्टेंट Vinnie लॉन्च किया।

📉 वित्तीय नतीजे

  • Tata 1mg का FY25 में रेवेन्यू ₹2,400 करोड़ के पास पहुंचा, घाटा घटा।
  • BigBasket की B2C यूनिट का घाटा बढ़ा, कुल रेवेन्यू घटा।
  • Ideaforge का Q1 FY26 रेवेन्यू 85% गिरा।
  • Paytm ने Q1 FY26 में ₹1,918 करोड़ रेवेन्यू और ₹123 करोड़ प्रॉफिट दर्ज किया।
  • Milky Mist का FY25 रेवेन्यू ₹2,349 करोड़, प्रॉफिट 2.4 गुना बढ़ा।
  • Zomato की पैरेंट Eternal का Q1 FY26 रेवेन्यू ₹7,167 करोड़, प्रॉफिट 90% घटा।
  • IndiQube ने FY25 में ₹1,000 करोड़ पार किया और घाटा 58% घटाया।

🗞️ बड़ी खबरें

  • PhysicsWallah को IPO के लिए SEBI की मंजूरी मिली।
  • Simpl पर ₹913 करोड़ के FDI उल्लंघन मामले में ED की नजर।
  • Good Glamm Group के ब्रांड्स अलग-अलग बेचे जा रहे हैं।
  • Myntra पर ₹1,654 करोड़ के विदेशी निवेश नियम उल्लंघन पर FEMA केस।
  • सरकार ने Ullu, ALTT समेत 25 OTT ऐप्स पर अश्लील कंटेंट को लेकर बैन लगाया।

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Read more : Amagi Media Labs: ₹1,020 करोड़ जुटाने की योजना,

📺 Amagi Media Labs: ₹1,020 करोड़ जुटाने की योजना,

Amagi

क्लाउड-आधारित SaaS प्लेटफॉर्म Amagi Media Labs ने अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास दाखिल कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी जल्द ही IPO (Initial Public Offering) के माध्यम से सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करने जा रही है।

इस IPO के तहत बेंगलुरु स्थित कंपनी ₹1,020 करोड़ की नई इक्विटी शेयरों के माध्यम से पूंजी जुटाएगी। इसके साथ ही कंपनी के मौजूदा निवेशक करीब 3.4 करोड़ शेयर Offer For Sale (OFS) के ज़रिए बेचेंगे।


🏦 कौन बेच रहा है हिस्सेदारी? – OFS में ये निवेशक होंगे शामिल

DRHP के अनुसार, Amagi के मौजूदा निवेशक जैसे कि:

  • Accel (Accel India VI और Accel Growth VI के माध्यम से) – 60 लाख से अधिक शेयर
  • Norwest Venture Partners – 79 लाख शेयर
  • PI Opportunities Fund – 99 लाख शेयर
  • Avataar Venture Partners (AVP I Fund) – लगभग 18 लाख शेयर

ये सभी इस OFS के तहत आंशिक हिस्सेदारी बेचेंगे। इसके अतिरिक्त, Trudy Holdings, Prem Gupta, Rahul Garg, Rajesh Ramaiah जैसे व्यक्तिगत शेयरधारक भी ऑफर फॉर सेल में भाग लेंगे।


🧠 Amagi क्या करती है?

2008 में स्थापित, Amagi एक cloud-native SaaS कंपनी है जो TV प्रसारण और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए समाधान प्रदान करती है। यह कंटेंट मालिकों को उनके live linear चैनल को लॉन्च, डिस्ट्रीब्यूट और मोनेटाइज़ करने में मदद करती है।

Amagi के ग्राहक दुनिया भर के media brands और FAST (Free Ad-Supported Streaming TV) प्लेटफॉर्म्स हैं। कंपनी की सबसे बड़ी बाजार अमेरिका है, जो उसके राजस्व में बड़ी हिस्सेदारी रखती है।


💰 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

IPO के तहत जो ₹1,020 करोड़ जुटाए जाएंगे, उनका उपयोग मुख्य रूप से:

  • तकनीकी और उत्पाद विकास में
  • बिजनेस विस्तार में
  • कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

कंपनी IPO से पहले ₹204 करोड़ तक का प्री-IPO प्लेसमेंट भी कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो नए शेयरों की संख्या उसी के अनुपात में घटा दी जाएगी।


📈 Amagi के वित्तीय प्रदर्शन पर नज़र

Amagi ने FY25 में ₹1,163 करोड़ का राजस्व दर्ज किया है, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 में ₹879 करोड़ था – यानी 32% की सालाना वृद्धि

सिर्फ राजस्व ही नहीं, Amagi ने अपने घाटे को भी 72% तक कम कर लिया है:

  • FY24 में घाटा: ₹245 करोड़
  • FY25 में घाटा: ₹68.7 करोड़

यह सुधार दर्शाता है कि कंपनी अपने ऑपरेशन्स को बेहतर कर रही है और IPO के लिए सही स्थिति में पहुंच रही है।


🚀 अब तक कितनी फंडिंग मिली है?

TheKredible के अनुसार, Amagi ने अब तक $340 मिलियन (लगभग ₹2,800 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Accel
  • Premji Invest
  • General Atlantic
  • Norwest Ventures
  • Avataar Ventures

🇮🇳 भारत के SaaS स्टार्टअप्स की IPO की होड़

Amagi का IPO ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय SaaS कंपनियाँ तेज़ी से सार्वजनिक बाजारों की ओर बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए:

  • Freshworks पहले ही Nasdaq पर लिस्ट होकर वैश्विक स्तर पर नाम कमा चुका है।
  • Unicommerce ने अगस्त 2024 में भारत में IPO लॉन्च किया।
  • Capillary Technologies ने भी अपना IPO दोबारा सक्रिय किया है।

Amagi का IPO इस चलन को और मजबूत करने वाला कदम साबित हो सकता है।


📑 IPO का मैनेजमेंट कौन कर रहा है?

Amagi के इस सार्वजनिक निर्गम का संचालन निम्नलिखित इन्वेस्टमेंट बैंकों के समूह द्वारा किया जा रहा है:

  • Kotak Mahindra Capital
  • Citigroup
  • Goldman Sachs
  • IIFL Capital
  • Avendus

🔍 निष्कर्ष

Amagi Media Labs का IPO भारतीय SaaS स्पेस में एक और बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, वैश्विक क्लाइंट बेस और अनुभवी निवेशकों की भागीदारी इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक पेशकश बना सकती है।

जैसे ही कंपनी लिस्टिंग की ओर बढ़ेगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि Amagi भारतीय और वैश्विक पूंजी बाजारों में कैसा प्रदर्शन करती है


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Read more : Ohm Mobility ने बंद किया संचालन

⚡ Ohm Mobility ने बंद किया संचालन

Ohm Mobility

भारत के EV (इलेक्ट्रिक वाहन) फिनटेक क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप Ohm Mobility ने आधिकारिक रूप से अपनी संचालन बंद करने की घोषणा कर दी है। पांच साल तक विभिन्न बिजनेस मॉडल्स के साथ प्रयोग करने और स्केलेबल मॉडल तलाशने के प्रयासों के बाद, कंपनी अब अपने दरवाज़े बंद कर रही है।

Ohm Mobility के को-फाउंडर और CEO निखिल नायर ने लिंक्डइन पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने टीम के साथ मिलकर कई तरह के बिजनेस मॉडल्स आज़माए, लेकिन स्थायी ग्रोथ हासिल नहीं कर पाए।


🚗 शुरुआत एक मजबूत विज़न के साथ

Ohm Mobility की स्थापना 2020 में निखिल नायर द्वारा की गई थी। इस स्टार्टअप का उद्देश्य EV (Electric Vehicle) इकोसिस्टम में क्रांति लाना था, खासतौर पर उन फ्लीट ऑपरेटर्स, मैन्युफैक्चरर्स और बैटरी कंपनियों के लिए जो बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स से पूंजी जुटाना चाहते थे।

कंपनी ने IoT डेटा का उपयोग करके EV के प्रदर्शन और जोखिम का मूल्यांकन करना शुरू किया, ताकि फाइनेंसिंग विकल्पों को और बेहतर बनाया जा सके। इस तकनीकी दृष्टिकोण ने Ohm Mobility को एक अभिनव स्टार्टअप के रूप में पहचान दिलाई।


🤝 निवेश और साझेदारी

कंपनी ने अब तक लगभग ₹5 करोड़ का निवेश जुटाया था, जिसमें Antler India, Blume Ventures, Catalyst Fund और कुछ एंजेल निवेशकों का योगदान रहा।

2022 में, IT समाधान कंपनी Onfido के पूर्व कार्यकारी निखिल सैगल ने Ohm Mobility को जॉइन किया और वह को-फाउंडर और Chief Business Officer (CBO) बने।

Ohm Mobility की टीम ने EV और फिनटेक सेक्टर में कई प्रयोग किए, जिससे उन्हें इंडस्ट्री में एक विशेष स्थान मिला।


🔁 Ohm Daily के रूप में पिवट की कोशिश

2024 की शुरुआत में, Ohm Mobility ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए Ohm Daily के नाम से रीब्रांडिंग की। इस पिवट का उद्देश्य था:

  • गिग वर्कर्स (जैसे ऑटो ड्राइवर, कैब ऑपरेटर्स) के लिए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना
  • मोबाइल वर्कफोर्स के लिए बीमा, ऋण और सेविंग्स समाधान पेश करना

हालांकि, इस रणनीति के बावजूद स्टार्टअप को वह ट्रैक्शन नहीं मिला जिसकी उन्हें अपेक्षा थी। न तो उपयोगकर्ताओं की संख्या में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई, और न ही रेवेन्यू में।


😞 आखिरकार, बंद करने का फैसला

CEO निखिल नायर ने लिखा:

“हमने अनेक बिजनेस मॉडल्स पर काम किया और टीम ने लगातार नवाचार किया, लेकिन दुर्भाग्य से हम एक स्केलेबल और टिकाऊ बिजनेस मॉडल नहीं बना पाए। अब समय है इस अध्याय को बंद करने का।”

कंपनी ने अपने कर्मचारियों और निवेशकों का आभार जताया और अपने इस सफर को एक सीख के रूप में स्वीकार किया है।


📉 स्टार्टअप बंद होने का सिलसिला जारी

Ohm Mobility का बंद होना भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में हाल ही में हुए कई शटडाउन की एक कड़ी है। इसके पहले भी कई स्टार्टअप्स ने बाजार की कठिनाइयों या बिजनेस मॉडल की असफलता के चलते ऑपरेशंस बंद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Altigreen
  • Blip
  • ANS Commerce
  • O’Be Cocktails
  • Subtl.ai

इनमें से कुछ स्टार्टअप्स को अच्छा फंडिंग बैकअप मिला था, लेकिन बाजार की बदलती मांग और ग्रोथ की चुनौतियों ने उन्हें भी प्रभावित किया।


🔍 क्या कहता है यह ट्रेंड?

भारत में स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती निवेश जुटाना पहले के मुकाबले आसान हुआ है, लेकिन लंबी अवधि तक टिके रहना और मुनाफे की ओर बढ़ना अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर EV और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में जहां रेगुलेशन, टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर बिहेवियर तेजी से बदल रहे हैं।

Ohm Mobility का केस यह दिखाता है कि:

  • सिर्फ इनोवेशन ही काफी नहीं है, बाजार अपनाने की क्षमता भी जरूरी है।
  • फंडिंग से अधिक महत्वपूर्ण है ग्राहक जरूरतों को गहराई से समझना और लंबे समय तक टिक सकने वाली स्ट्रेटजी बनाना।
  • हर पिवट सफल नहीं होता; कभी-कभी संघर्ष का ईमानदारी से अंत भी जरूरी होता है।

🛣️ आगे का रास्ता

Ohm Mobility की टीम के सदस्यों के पास अब अपने अनुभवों से सीखी गई बातों को नए उद्यमों में बदलने का अवसर है। भारत में EV और गिग इकॉनमी से जुड़े मुद्दों को हल करने वाले स्टार्टअप्स के लिए अभी भी बहुत अवसर हैं

ऐसे बंद होते स्टार्टअप्स भी इकोसिस्टम में जरूरी भूमिका निभाते हैं — वे दूसरों को यह दिखाते हैं कि कौन सी रणनीतियाँ काम नहीं करतीं और किन क्षेत्रों में अभी सुधार की आवश्यकता है।


📌 निष्कर्ष

Ohm Mobility की यात्रा एक नवाचारपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण सफर रही। पांच सालों में उन्होंने जो प्रयास किए, वो भारत के EV फिनटेक स्पेस को बेहतर समझने में मदद करते हैं। यह स्टार्टअप भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इसके पीछे की कोशिशें और सीखें आगे आने वाले उद्यमियों को प्रेरित करती रहेंगी।

✍️ लेखक: FundingRaised.in संपादकीय टीम
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