🚚 Fleetx को मिला ₹113 करोड़ का फंडिंग बूस्ट, IPO की तैयारी में जुटी कंपनी

Fleetx

गुरुग्राम, 26 मई 2025: भारत की तेजी से बढ़ती लॉजिस्टिक्स SaaS स्टार्टअप Fleetx ने अपने सीरीज C फंडिंग राउंड में ₹113 करोड़ (लगभग $13.2 मिलियन) जुटाए हैं। यह निवेश कंपनी के मौजूदा निवेशकों IndiaMART Intermesh और BEENEXT’s Accelerate Fund ने लीड किया है। इस राउंड में प्राइमरी और सेकेंडरी, दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं।


💸 Fleetx को पहले भी मिल चुकी है बड़ी फंडिंग

Fleetx ने फरवरी 2022 में सीरीज B राउंड में $19.4 मिलियन जुटाए थे, जिसे IndiaMART ने लीड किया था। उस राउंड में IndiaQuotient और BEENEXT भी शामिल हुए थे। अब दो साल बाद, कंपनी ने एक और फंडिंग राउंड के साथ अपने विस्तार को नई दिशा दी है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

Fleetx ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए
  • मिड-मार्केट और एंटरप्राइज सेगमेंट में अपनी बाज़ार मौजूदगी को बढ़ाने के लिए
  • प्रॉफिटेबिलिटी और IPO-readiness को ध्यान में रखते हुए परिचालन ढांचे को मजबूत करने के लिए

🧠 AI और IoT के इंटीग्रेशन से बने स्मार्ट सॉल्यूशन

Fleetx की स्थापना 2017 में की गई थी। इसे विनीत शर्मा, अभय जीत गुप्ता, उद्भव राय, प्रवीन कटारिया और विशाल मिश्रा ने मिलकर शुरू किया था। कंपनी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) को जोड़कर लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री को डिजिटल और स्मार्ट बना रही है।

Fleetx के प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • Fleet Management
  • Fuel Analytics
  • Video Telematics
  • Transport ERP
  • TMS (Transport Management System)

📊 IPO की तैयारी और ARR डबल करने का लक्ष्य

Fleetx अब अगले दो वर्षों में IPO के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है:

  • प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना
  • वार्षिक रीकरींग रेवेन्यू (ARR) को डबल करना
  • मजबूत प्रोडक्ट स्टैक और टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार करना

Fleetx के सीईओ विनीत शर्मा ने कहा:

“हमारे पास लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री का विशाल डेटा है, और हम AI की मदद से इस क्षेत्र की सबसे जटिल समस्याओं को हल करने की स्थिति में हैं। हमारा फोकस एक प्रभावशाली, टिकाऊ और ग्राहक-केन्द्रित व्यवसाय तैयार करने पर है।”


📈 4 गुना ग्रोथ और 2000+ ग्राहक

Fleetx का दावा है कि उसने 2022 के बाद से 4 गुना ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी ने हाल ही में ₹100 करोड़ से अधिक ARR पार कर लिया है और फिलहाल 2000 से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे रही है। इनमें से 100 से ज्यादा ग्राहक बड़े एंटरप्राइज अकाउंट्स हैं।


🏭 किन सेक्टर्स को कर रही है सर्विस?

Fleetx के ग्राहक कई इंडस्ट्रीज़ से आते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सीमेंट (Cement)
  • FMCG
  • खनन (Mining)
  • ट्रांसपोर्टेशन
  • मैन्युफैक्चरिंग

🏢 प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं:

  • Ultratech Cement
  • Adani Group
  • Unilever
  • Godrej
  • Shree Cement
  • Maersk
  • Panasonic

📉 घाटे में बड़ी कटौती

Fleetx ने FY24 (मार्च 2024 समाप्त वित्तीय वर्ष) में:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹56.58 करोड़ दर्ज किया, जो FY23 में ₹41.63 करोड़ था। यानी 36% सालाना ग्रोथ
  • वहीं कंपनी ने घाटा 55% से अधिक घटाकर ₹24.21 करोड़ कर दिया है, जो FY23 में कहीं अधिक था।

FY25 की वार्षिक रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं की गई है।


🧭 Fleetx का भविष्य कैसा दिखता है?

Fleetx का टेक्नोलॉजी-फर्स्ट दृष्टिकोण और विविध इंडस्ट्री कस्टमर बेस इसे लॉजिस्टिक्स SaaS सेक्टर में तेजी से उभरते मार्केट लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है।

फंडिंग, प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार, ARR ग्रोथ और IPO की योजना जैसे कारक कंपनी के भविष्य को और भी रोशन बना रहे हैं।


📌 निष्कर्ष

Fleetx ने अपनी नवीनतम सीरीज C फंडिंग से यह साबित कर दिया है कि वह केवल सर्वाइव नहीं कर रही, बल्कि स्केल और इनोवेशन दोनों पर फोकस करके इंडस्ट्री में लीड करना चाहती है

भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में जहां डिजिटल परिवर्तन की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं Fleetx जैसी कंपनियाँ AI और डेटा ड्रिवन समाधानों के जरिए बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।

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🏢 Awfis FY25 की चौथी तिमाही में 47% रेवेन्यू ग्रोथ और 8 गुना मुनाफा

Awfis

नई दिल्ली, 26 मई 2025: भारत की अग्रणी को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर कंपनी Awfis ने वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने 47% की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ और 8 गुना मुनाफे के साथ एक मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है।


📈 रेवेन्यू में ज़बरदस्त उछाल

National Stock Exchange (NSE) पर दायर अनऑडिटेड कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Awfis का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹340 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 में ₹232 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर 47% की बढ़ोतरी हुई है।

पूरे वित्तीय वर्ष (FY25) की बात करें तो कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,208 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 40% ज्यादा है।


💰 मुनाफे में 8 गुना उछाल

सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, कंपनी ने इस बार मुनाफे में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है। Q4 FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹11.2 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 में मात्र ₹1.4 करोड़ था — यानी 8 गुना से ज्यादा की बढ़त

पूरे साल के स्तर पर Awfis ने ₹68 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है, जो इसे पहली बार सालाना आधार पर लाभ में ले आया है।


🏬 को-वर्किंग से सबसे ज्यादा कमाई

Awfis की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 79% हिस्सा को-वर्किंग स्पेस रेंटल्स और उससे जुड़े सर्विसेस से आया है। इस सेगमेंट की कमाई 60% सालाना वृद्धि के साथ Q4 FY25 में ₹269 करोड़ रही, जबकि Q4 FY24 में यह ₹168 करोड़ थी।

अन्य स्रोतों से कंपनी ने निर्माण कार्य (construction & fit-outs), फैसिलिटी मैनेजमेंट, और खाने-पीने की चीज़ों की बिक्री से भी आय अर्जित की।

कंपनी ने इस तिमाही में ₹19.7 करोड़ की अन्य आय भी अर्जित की, जिससे कुल रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹359.4 करोड़ तक पहुंच गया।


🧾 खर्चों में भी इजाफा

जहाँ आय में भारी वृद्धि हुई है, वहीं खर्च भी बढ़े हैं। Awfis का कुल खर्च Q4 FY25 में ₹347.5 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹240 करोड़ था — यानी 45% की वृद्धि

  • डिप्रिशिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल खर्च का 23% था और ₹82 करोड़ तक पहुंच गया।
  • सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और ट्रेडेड गुड्स की खरीदारी में 27% की बढ़त के साथ यह खर्च ₹66 करोड़ रहा।
  • फाइनेंस कॉस्ट में 79% की वृद्धि हुई और यह ₹42.6 करोड़ रहा।
  • कर्मचारी लाभ खर्च में उल्टा 19% की गिरावट आई और यह ₹29.5 करोड़ रहा।

📊 मजबूत फाइनेंशियल स्थिति और शेयर प्रदर्शन

Awfis ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ शेयर बाजार में भी स्थिर प्रदर्शन किया है। 26 मई 2025 को कंपनी का शेयर ₹648.10 पर बंद हुआ, जिससे उसकी कुल मार्केट कैप ₹4,599 करोड़ (लगभग $541 मिलियन) हो गई है।


👨‍💼 नया CEO नियुक्त

Q4 FY25 के नतीजों के साथ-साथ Awfis ने अपने नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव भी किया है। कंपनी ने Sumit Lakhani को Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है।

Sumit इससे पहले कंपनी में Deputy CEO थे और उन्होंने 2015 में Chief Marketing Officer (CMO) के रूप में Awfis में जॉइन किया था।

Sumit की लीडरशिप में कंपनी ने ब्रांडिंग और ग्रोथ में कई मील के पत्थर हासिल किए हैं।


🧠 Awfis की रणनीति क्या है?

Awfis की स्थापना 2015 में की गई थी और तब से यह भारत के स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े कॉर्पोरेशनों के लिए कस्टमाइज़्ड ऑफिस स्पेस और ancillary services (जैसे F&B, IT support, इंटरनेट, फर्नीचर आदि) प्रदान करती आ रही है।

कंपनी का उद्देश्य सिर्फ एक को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर बनना नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण ऑफिस सॉल्यूशन इकोसिस्टम बनाना है जो स्केलेबल हो, टेक-सक्षम हो, और क्लाइंट्स की विविध ज़रूरतों को पूरा कर सके।


🔮 आगे की दिशा

इस मजबूत वित्तीय प्रदर्शन से Awfis ने यह संकेत दे दिया है कि वह आने वाले समय में भी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने में सक्षम है।

  • तेजी से बढ़ता को-वर्किंग कल्चर और हाइब्रिड वर्क मॉडल आने वाले वर्षों में कंपनी की ग्रोथ को और रफ्तार दे सकते हैं।
  • कंपनी को कॉस्ट मैनेजमेंट और मार्जिन सुधार पर ध्यान देना होगा ताकि यह लाभप्रदता बनाए रख सके।

📌 निष्कर्ष

Awfis ने FY25 में राजस्व और मुनाफे दोनों में शानदार छलांग लगाकर खुद को एक सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल बिज़नेस मॉडल के रूप में स्थापित किया है।

जहाँ दूसरी को-वर्किंग कंपनियाँ अभी भी घाटे से जूझ रही हैं, वहीं Awfis ने न सिर्फ लाभ कमाया है बल्कि खुद को मार्केट लीडरशिप की दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाया है।

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👶 FirstCry की पैरेंट कंपनी BrainBees का रिपोर्ट कार्ड जारी FY25 में रेवेन्यू बढ़ा,

FirstCry

नई दिल्ली, 26 मई 2025: बच्चों पर केंद्रित ओम्नीचैनल रिटेलर FirstCry की पैरेंट कंपनी BrainBees Solutions ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) की चौथी तिमाही (Q4) की रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि कंपनी ने मध्यम स्तर की ग्रोथ तो दर्ज की है, लेकिन साथ ही घाटा भी 74% बढ़कर ₹75 करोड़ पर पहुंच गया है।


📈 FirstCry रेवेन्यू में 16% की सालाना वृद्धि

National Stock Exchange (NSE) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, FirstCry का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹1,930 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 के ₹1,667 करोड़ से करीब 16% अधिक है।

वहीं पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो, BrainBees का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹7,660 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹6,481 करोड़ से 18% ज्यादा है।


🛒 कहां से आई कमाई?

FirstCry की आमदनी मुख्य रूप से ऑफलाइन स्टोर्स, वेबसाइट और इंटरनेशनल मार्केट में प्रोडक्ट्स की बिक्री से हुई, जो कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 69% हिस्सा है।

वहीं इसकी सब्सिडियरी कंपनी GlobalBees ने Q4 FY25 में ₹398 करोड़ की कमाई की। इसके अलावा, BrainBees को ₹48 करोड़ का ब्याज से प्राप्त हुआ, जिससे इसका कुल रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹1,979 करोड़ रहा, जबकि Q4 FY24 में यह ₹1,685 करोड़ था।


💸 खर्च भी बढ़े, खासतौर पर रॉ मटेरियल्स और कर्मचारी सैलरी में

कंपनी का खर्च भी रेवेन्यू के साथ-साथ बढ़ा है। रॉ मटेरियल की खरीद पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ, जो कुल खर्च का 58% था। यह खर्च Q4 FY24 में ₹1,055 करोड़ से बढ़कर Q4 FY25 में ₹1,206 करोड़ हो गया — यानी 14% की बढ़ोतरी

कर्मचारी लाभ (employee benefits) के तहत Q4 FY25 में ₹229 करोड़ खर्च हुए, जिसमें ₹82 करोड़ केवल ESOP (Employee Stock Ownership Plan) के रूप में शामिल हैं।


📊 कुल खर्च और घाटा

Q4 FY25 में कुल खर्च ₹2,060 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 में ₹1,737 करोड़ था। पूरे FY25 में कंपनी का कुल खर्च ₹7,992 करोड़ रहा।

घाटे की बात करें तो, BrainBees का Q4 FY25 में घाटा ₹75 करोड़ रहा — यह पिछले साल की तुलना में 74% ज्यादा है।

हालांकि, पूरे वित्तीय वर्ष के स्तर पर FY25 में कंपनी का घाटा ₹215 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹321 करोड़ से कम है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस आंकड़े में ₹37 करोड़ के exceptional items को शामिल नहीं किया गया है


📉 स्टॉक मार्केट पर असर

BrainBees ने स्टॉक एक्सचेंज पर ₹446 के इश्यू प्राइस पर लिस्टिंग की थी। लेकिन 26 मई 2025 को इसका शेयर ₹376.5 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹19,631 करोड़ पर आ गया है।

यह गिरावट निवेशकों के लिए थोड़ा निराशाजनक हो सकती है, खासकर तब जब घाटा बढ़ रहा हो और लाभप्रदता (profitability) की कोई स्पष्ट समयरेखा सामने न हो।


📌 क्या कहता है यह डेटा?

FirstCry का बिज़नेस मॉडल ओम्नीचैनल रिटेल पर आधारित है — यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म से बिक्री करना। भारत जैसे विविधता वाले देश में यह मॉडल काफी सफल रहा है, खासकर बच्चों की जरूरतों पर केंद्रित ब्रांड के लिए।

हालांकि, बढ़ते खर्च और लाभ में कमी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लॉन्ग टर्म स्केलेबिलिटी के लिए कंपनी को खर्चों पर नियंत्रण और प्रॉफिटेबल ग्रोथ पर ध्यान देना होगा।


🤔 आगे की राह

BrainBees ने अभी तक FY26 के लिए कोई भविष्यवाणी नहीं की है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए यह स्पष्ट है कि:

  • कंपनी को ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर काम करना होगा।
  • मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी खर्च को ऑप्टिमाइज़ करना ज़रूरी होगा।
  • GlobalBees जैसे सब्सिडियरी मॉडल्स से नए रेवेन्यू चैनल्स को और बेहतर बनाना होगा।

🧠 निष्कर्ष

FirstCry और उसकी पैरेंट कंपनी BrainBees ने बच्चों के रिटेल मार्केट में अपनी जगह पक्की की है, लेकिन अब अगला फोकस होना चाहिए — प्रॉफिटेबल ग्रोथ

एक तरफ रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है, दूसरी तरफ बढ़ते खर्च और घाटा कंपनी के सामने चुनौती के रूप में खड़े हैं।

क्या BrainBees आने वाले वर्षों में लाभ में बदलाव ला पाएगी? निवेशक और इंडस्ट्री दोनों की नजर इस पर टिकी है।

Read more :💍 Shark Tank वाली Palmonas को जल्द मिलेगा ₹55 करोड़ का निवेश,

💍 Shark Tank वाली Palmonas को जल्द मिलेगा ₹55 करोड़ का निवेश,

Palmonas

पुणे, मई 2025: डमी-फाइन ज्वेलरी ब्रांड Palmonas, जो हाल ही में Shark Tank India Season 4 में नज़र आया था, अब अपने पहले बड़े इंस्टीट्यूशनल फंडिंग राउंड को अंतिम रूप देने जा रहा है। इस साल यह स्टार्टअप का दूसरा फंडिंग राउंड होगा।

सूत्रों के अनुसार, Vertex Ventures इस ₹55 करोड़ के सीरीज़ A फंडिंग राउंड का नेतृत्व कर रहा है। इस निवेश के साथ Palmonas का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹550 करोड़ (लगभग $65 मिलियन) तक पहुंच जाएगा।


💡 Palmonas: ज्वेलरी की दुनिया का नया नाम

Palmonas की स्थापना 2022 में अमोल पाटवारी और पल्लवी मोहाडिकर ने की थी। यह स्टार्टअप खासतौर पर डमी-फाइन ज्वेलरी (demi-fine jewellery) पर केंद्रित है। इनके प्रोडक्ट्स में स्टेनलेस स्टील से बनी और 18 कैरेट गोल्ड वर्मील कोटिंग वाली नेकलेस, रिंग्स, ब्रेसलेट्स, ईयररिंग्स और मंगलसूत्र शामिल हैं।

इस कैटेगरी का उद्देश्य है – सस्ती कीमतों पर खूबसूरत, टिकाऊ और स्किन-फ्रेंडली ज्वेलरी उपलब्ध कराना, खासतौर पर भारत की युवा, शहरी महिलाओं को टारगेट करते हुए।


🦈 Shark Tank से मिला था बड़ा बूस्ट

Palmonas को फरवरी 2025 में Shark Tank India Season 4 में बड़ा फाइनेंशियल और ब्रांडिंग बूस्ट मिला था, जब इसे ₹1.26 करोड़ का निवेश मिला था। यह निवेश मशहूर शार्क्स नमिता थापर और रितेश अग्रवाल (OYO) ने किया था, और उस समय कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹126 करोड़ था।

इससे पहले, Palmonas ने एक एंजल फंडिंग राउंड में ₹6 करोड़ जुटाए थे।


🎬 श्रद्धा कपूर बनीं को-फाउंडर

Palmonas ने मार्च 2024 में एक बड़ा ब्रांडिंग कदम उठाते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर को अपना को-फाउंडर बनाया। इससे न केवल Palmonas की ब्रांड वैल्यू बढ़ी, बल्कि सोशल मीडिया पर इसकी मौजूदगी और ग्राहक जुड़ाव में भी उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ।

श्रद्धा के जुड़ने के बाद Palmonas ने “सस्टेनेबल, मिनिमलिस्ट और स्टाइलिश ज्वेलरी” को लेकर अपने ब्रांड मैसेज को और मजबूत किया।


📈 फाइनेंशियल प्रदर्शन: राजस्व में ग्रोथ, लेकिन घाटा बरकरार

Palmonas ने वित्तीय वर्ष FY24 (मार्च 2024 को समाप्त) में ₹5.38 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल FY23 के ₹3.83 करोड़ के मुकाबले लगभग 40% की वृद्धि है।

हालांकि, कंपनी को अभी भी ₹1.24 करोड़ का घाटा हो रहा है। FY25 की वार्षिक रिपोर्ट फिलहाल दाखिल नहीं हुई है।


📊 Vertex Ventures का भरोसा

Vertex Ventures इस सीरीज़ A डील का नेतृत्व कर रहा है। यह वेंचर कैपिटल फर्म टेमासेक समर्थित है और 2023 में इसने $541 मिलियन का पांचवां फंड क्लोज किया था, जिसका उद्देश्य प्री-सीरीज़ A से लेकर सीरीज़ B स्टार्टअप्स में निवेश करना है।

Palmonas से पहले, Vertex Ventures ने SpotDraft (डॉक्यूमेंट लाइफसाइकल मैनेजमेंट), Spyne (AI बेस्ड फोटोग्राफी और एडिटिंग), और D2C इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड Nuuk जैसे स्टार्टअप्स में भी निवेश किया है।


🤝 डील फाइनल, जल्द होगा ऐलान

सूत्रों के अनुसार, Palmonas और Vertex Ventures के बीच डील की सभी शर्तें तय हो चुकी हैं और कंपनी अगले कुछ हफ्तों में इस फंडिंग का आधिकारिक ऐलान कर सकती है

हालांकि, Palmonas और Vertex Ventures ने इस खबर पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है।


🛒 Palmonas का D2C मॉडल: डिजिटल इंडिया के अनुरूप

Palmonas पूरी तरह से डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) मॉडल पर काम करता है। कंपनी की वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों पर इसका काफ़ी मजबूत प्रेजेंस है। Palmonas इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और रील्स कैंपेन के जरिए अपनी ज्वेलरी को प्रमोट करता है।

अर्थव्यवस्था में बढ़ते डिजिटल ट्रेंड्स और युवा महिलाओं की फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते Palmonas जैसे ब्रांड्स को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।


🔮 आगे की योजना: मेट्रो से लेकर Tier II शहरों तक विस्तार

नई फंडिंग Palmonas को अपने प्रोडक्ट रेंज बढ़ाने, स्टॉक मैनेजमेंट सुधारने और मेट्रो से लेकर Tier II शहरों में मार्केट विस्तार करने में मदद करेगी।

कंपनी अपनी ज्वेलरी लाइन में नई कैटेगरीज़ जैसे बच्चों के लिए मिनी ज्वेलरी, कस्टमाइज़्ड नाम वाली ज्वेलरी और शादी-पार्टी थीम कलेक्शन लॉन्च करने की भी योजना बना रही है।


🧠 निष्कर्ष

Palmonas ने बहुत ही कम समय में भारत के D2C ज्वेलरी सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। Shark Tank से मिली मान्यता, श्रद्धा कपूर की ब्रांड एंबेसडर और अब Vertex Ventures जैसे बड़े निवेशक का भरोसा — इन सभी फैक्टर्स ने इसे एक हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप बना दिया है।

जहाँ पारंपरिक ज्वेलरी कंपनियां ऑफलाइन मोड में उलझी हुई हैं, Palmonas जैसे डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स भारत में अगली जेनरेशन की कस्टमर्स को बेहतर विकल्प दे रहे हैं।

क्या Palmonas ₹1000 करोड़ वैल्यूएशन क्लब में पहुंच पाएगा? यह देखने वाली बात होगी।

Read more :🌿Lifechart ने Guttify ब्रांड के लिए $3.6 लाख जुटाए,

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Guttify

नई दिल्ली, अप्रैल 2025: हेल्थटेक स्टार्टअप Lifechart ने अपने गट-वेलनेस ब्रांड Guttify के लिए एक एक्सटेंडेड सीड राउंड में $3.6 लाख (करीब ₹3 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व Prajay Advisors ने किया है, जो Unichem Labs के फाउंडर्स प्रकाश मोदी और जयंन्द्र शाह का फैमिली ऑफिस है।

यह निवेश अक्टूबर 2024 में हुए $5 लाख सीड फंडिंग राउंड के बाद आया है, जिसे Expert Dojo, Agility Ventures, Sunn91 Ventures, सरकारी सीड योजनाओं और एंजल निवेशकों जैसे नितीश मिटरसैन (Nazara Technologies) और आहाना गौतम (Open Secret) ने सपोर्ट किया था।

इस नए फंडिंग राउंड के साथ, Lifechart की कुल फंडिंग अब $1 मिलियन से अधिक हो चुकी है।


🧪Guttify : आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संयोजन

Lifechart की स्थापना 2022 में मुकुल शाह और मानसी शर्मा ने मिलकर की थी। इनकी ब्रांड Guttify, शहरी भारत (Tier I से लेकर Tier III शहरों) के लोगों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।

Guttify एक “डायग्नोसिस-फर्स्ट” यानी जाँच पहले, इलाज बाद में की नीति पर काम करती है। इसका उद्देश्य है – हर भारतीय को सटीक, किफायती और पर्सनलाइज्ड गट हेल्थ समाधान उपलब्ध कराना, जो आधुनिक साइंस, टेक्नोलॉजी और आयुर्वेद का मिश्रण हो।


🏠 घर बैठे टेस्टिंग: ₹99 से शुरू होने वाले DIY किट

Guttify का पहला प्रोडक्ट, pH स्लाइवा टेस्टिंग किट, जो एसिडिटी की जांच के लिए है, पहले से ही मार्केट में उपलब्ध है। यह एक DIY (Do It Yourself) किट है जिसे उपयोगकर्ता घर बैठे इस्तेमाल कर सकते हैं।

स्टार्टअप जल्द ही ₹99 से शुरू होने वाले और भी कई किफायती टेस्टिंग किट्स लॉन्च करने जा रहा है। इन किट्स के माध्यम से यूज़र्स अपने पेट से जुड़े समस्याओं की पहचान खुद ही कर सकेंगे, जिससे डॉक्टर के पास जाने की जरूरत से पहले एक स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।


📊 गट हेल्थ संकट: भारत में 60% लोग प्रभावित

मार्केट रिसर्च के अनुसार, भारत में गट वेलनेस मार्केट $18 बिलियन का है, और करीब 60% भारतीय पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। फिर भी यह एक ऐसा सेक्टर है जिसे अब तक हेल्थटेक स्टार्टअप्स ने पूरी तरह से टारगेट नहीं किया।

Lifechart इसी गैप को भरने की कोशिश कर रहा है। उनका उद्देश्य है एक “फुल-स्टैक गट हेल्थ इकोसिस्टम” बनाना, जिसमें टेस्टिंग से लेकर समाधान तक सब कुछ एक प्लेटफॉर्म पर मिले।


💡 फाउंडर्स की सोच: विज्ञान और परंपरा का संगम

Guttify की को-फाउंडर मानसी शर्मा बताती हैं, “भारत में लोग पेट की समस्या को तब तक नजरअंदाज करते हैं जब तक वह बड़ी बीमारी न बन जाए। हम चाहते हैं कि लोग खुद अपने स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी लें। हमारी तकनीक, साइंस और आयुर्वेद का संयोजन उन्हें वह शक्ति देगा।”

वहीं, मुकुल शाह का मानना है कि “गट हेल्थ पूरे शरीर की सेहत की नींव है। अगर हम इसे सुलझा लें, तो जीवन की गुणवत्ता कई गुना बेहतर हो सकती है।”


🌐 टेक्नोलॉजी से जुड़ी सुविधा, आसान उपयोग

Guttify का ऐप आधारित सिस्टम यूज़र्स को न केवल किट मंगवाने, बल्कि रिपोर्ट देखने, सिफारिशें पाने और आयुर्वेदिक समाधानों तक पहुंचने में मदद करता है।

कंपनी आने वाले समय में AI-सपोर्टेड हेल्थ रेकमेंडेशन, नुट्रिशन गाइड, और कस्टमाइज्ड गट डाइट प्लान्स जैसे फीचर्स लॉन्च करने की भी योजना बना रही है।


🛒 भारत में डिजिटल हेल्थ के लिए अनोखा मॉडल

जहां ज़्यादातर हेल्थटेक स्टार्टअप केवल मेडिकल कंसल्टेशन या फार्मेसी तक सीमित हैं, Guttify ने एक न्यूट्रिशन-फर्स्ट और प्रीवेंटिव हेल्थ अप्रोच अपनाई है। इसके ज़रिए यह स्टार्टअप हेल्थकेयर सेक्टर में एक नई दिशा प्रस्तुत कर रहा है – बीमारी से पहले की रोकथाम।


💰 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की राह

Unichem Labs के संस्थापक परिवार से मिले नए निवेश से यह साफ हो गया है कि हेल्थ और न्यूट्रिशन आधारित मॉडल पर निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

Prajay Advisors ने एक बयान में कहा, “भारत में गट हेल्थ एक अनदेखा संकट है। Guttify ने जिस साइंटिफिक और भारतीय दृष्टिकोण से इसका समाधान ढूंढा है, वह आने वाले समय में करोड़ों लोगों की मदद करेगा।”


🧠 निष्कर्ष

Lifechart और Guttify ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो भारत जैसे देश में न सिर्फ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेगा, बल्कि जनता को खुद के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सक्षम भी बनाएगा।

सस्ती किट्स, घरेलू जांच, और आयुर्वेद का समावेश – यह सब मिलकर Guttify को एक भरोसेमंद, विज्ञान आधारित और लोकल फ्रेंडली ब्रांड बनने की ओर ले जा रहे हैं।

यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह न केवल भारत में बल्कि अन्य विकासशील देशों में भी हेल्थटेक की दिशा बदल सकता है।

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GenWise

नई दिल्ली, अप्रैल 2025: वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए एक ऑनलाइन ऐप आधारित सोशल क्लब चलाने वाली GenWise ने हाल ही में कई विभागों में कर्मचारियों की छंटनी की है। यह कदम कंपनी द्वारा लंबे समय से फंडिंग जुटाने में असफल रहने और अपेक्षित यूज़र ग्रोथ न होने के कारण उठाया गया।

GenWise ने अपनी कुल वर्कफोर्स का लगभग 20% (15-20 कर्मचारी) कम कर दिया है। छंटनी टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग, प्रोडक्ट, डिज़ाइन, बिजनेस और ऑपरेशंस जैसे विभिन्न विभागों में की गई है।


💸 फंडिंग जुटाने की कोशिशें नाकाम रहीं

सूत्रों के अनुसार, कंपनी बीते कई महीनों से नए निवेश जुटाने के लिए मौजूदा निवेशकों और नए पार्टनर्स से बातचीत कर रही थी। हालांकि, वह पिछले साल किए गए वादों और अनुमानित ग्रोथ को पूरा नहीं कर पाई, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।

GenWise ने जून 2023 में $3.5 मिलियन (लगभग ₹29 करोड़) की सीड फंडिंग जुटाई थी, जिसे Z47 (पूर्व में Matrix Partners India) ने लीड किया था। इस फंडिंग राउंड में DBR Ventures, Climber Capital और कुछ एंजेल इन्वेस्टर्स जैसे Kunal Shah (CRED), Suhail Sameer (पूर्व BharatPe CEO), और Achal Mittal ने भी भाग लिया था।


👨‍👩‍👧‍👦 बुजुर्गों के लिए कम्युनिटी और मेंटल हेल्थ सपोर्ट

GenWise की स्थापना BharatPe के पूर्व अधिकारियों – गीतांशु सिंगला, नेहुल मल्होत्रा और रजत जैन ने मिलकर की थी। यह एक ऐसा ऐप है जो वरिष्ठ नागरिकों को दोस्तों से जोड़ता है, उन्हें दैनिक गतिविधियों में भाग लेने और प्रशिक्षित काउंसलर्स से मानसिक और भावनात्मक सहयोग लेने का मौका देता है।

कंपनी का दावा है कि उसने अब तक 20 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों की एक कम्युनिटी तैयार की है, जो कि भारत के बढ़ते बुजुर्ग वर्ग को एक डिजिटल स्पेस देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


📲 UPI लॉन्च के बाद खर्चों में उछाल

GenWise ने नवंबर 2024 में Axis Bank के साथ साझेदारी में अपने ऐप पर UPI पेमेंट्स की सुविधा शुरू की थी। उम्मीद थी कि इससे यूज़र्स की गतिविधियों और एंगेजमेंट में इज़ाफा होगा।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि UPI रोलआउट के बाद कंपनी के खर्च तेजी से बढ़ गए, लेकिन इसके बदले में अपेक्षित यूज़र ग्रोथ नहीं मिली। कंपनी का मुख्य यूज़र बेस यानी बुजुर्ग वर्ग डिजिटल पेमेंट को धीमी गति से अपना रहा है, जिससे कि मासिक एक्टिव यूज़र (MAU) में सिर्फ मामूली वृद्धि देखने को मिली।


💼 ऑपरेशनल खर्च घटाने के लिए ली गई कठोर कार्रवाई

बढ़ते खर्चों और सीमित यूज़र ग्रोथ के चलते GenWise को मजबूरन अपने संचालन व्ययों को कम करने के लिए स्टाफ कटौती जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा।

कंपनी की योजना है कि वह भविष्य में डिजिटल पेमेंट्स के अलावा बुजुर्गों के लिए अन्य फिनटेक सॉल्यूशंस भी पेश करेगी, जो उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को आसान बना सकें।

GenWise ने इस विषय में भेजे गए सवालों का समाचार प्रकाशन तक कोई उत्तर नहीं दिया।


🧓 Elder-Tech सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

GenWise अकेली कंपनी नहीं है जो बुजुर्गों के लिए डिजिटल सेवाएं दे रही है। इस सेगमेंट में SeniorWorld, GetSetUp, 60Plus India, ElderAid Wellness, और Goodfellows जैसी कई कंपनियां भी सक्रिय हैं। इन सभी का उद्देश्य एक ही है—भारत के बढ़ते सीनियर सिटीज़न वर्ग के लिए स्मार्ट, भरोसेमंद और इंसानियत भरी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना।


🧾 साल 2025 में अब तक सिर्फ 5 बड़ी छंटनी

Entrackr के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 के पहले चार महीनों में, भारत में (Zomato और Ola Electric जैसी लिस्टेड कंपनियों को छोड़कर) सिर्फ 5 स्टार्टअप्स ने बड़े स्तर पर छंटनी की है, जिनमें कुल 550 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

यह ट्रेंड 2023 और 2024 की तुलना में थोड़ा बेहतर है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि स्टार्टअप सेक्टर में ग्रोथ की रफ्तार और निवेशकों का भरोसा अभी भी सीमित है।


🧠 निष्कर्ष

GenWise की छंटनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यूज़र ग्रोथ और फाइनेंशियल स्थिरता के बीच संतुलन बनाना किसी भी स्टार्टअप के लिए कितना अहम है। खासकर ऐसे समय में जब निवेशक ROI और स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर बनाई गई GenWise जैसी ऐप्स की जरूरत भारत जैसे देश में लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके बिजनेस मॉडल को व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनाना जरूरी है।

अब देखना होगा कि GenWise अपने मौजूदा यूज़र बेस को बनाए रखते हुए नई सेवाओं के साथ बाज़ार में फिर से स्थिरता और ग्रोथ ला पाता है या नहीं।

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💼 DMI Finance ने बढ़ाया ESOP पूल, कर्मचारियों को मिलेगा 306 करोड़ रुपये का स्टॉक बेनिफिट

DMI Finance

नई दिल्ली, अप्रैल 2025: भारत की अग्रणी डिजिटल लेंडिंग कंपनी DMI Finance ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने अपने मौजूदा ESOP प्लान (DMI ESOP Plan 2018 – Extended) में बड़े पैमाने पर विस्तार करते हुए 1.18 करोड़ से ज्यादा नए स्टॉक ऑप्शंस जोड़ दिए हैं।

कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) में दायर की गई रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, इस निर्णय के बाद DMI Finance का कुल ESOP पूल बढ़कर 3.44 करोड़ ऑप्शंस का हो गया है।


📈 ESOP का मूल्य 892 करोड़ रुपये के पार

जानकारी के अनुसार, DMI Finance द्वारा जोड़े गए नए ESOPs का अनुमानित मूल्य लगभग 306.6 करोड़ रुपये (करीब $36 मिलियन) है। वहीं, पूरे ESOP पूल की वैल्यू 892 करोड़ रुपये (करीब $105 मिलियन) बताई जा रही है।

यह वैल्यूएशन कंपनी की पिछली फंडिंग राउंड पर आधारित है, जिसमें जापान के MUFG बैंक के नेतृत्व में DMI Finance ने $400 मिलियन (लगभग 3,300 करोड़ रुपये) की फंडिंग जुटाई थी। यह फंडिंग प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के ट्रांजैक्शनों से की गई थी।


👨‍💼 कंपनी में दो नए स्वतंत्र निदेशक नियुक्त

ESOP विस्तार के साथ ही, DMI Finance ने अपने बोर्ड में दो नए स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की नियुक्ति भी की है। अब Arjun Malhotra और Tammir Amr कंपनी के निदेशक मंडल का हिस्सा बन चुके हैं।

इससे कंपनी के गवर्नेंस स्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने का संकेत मिलता है, खासकर तब जब कंपनी विस्तार और पारदर्शिता की दिशा में अग्रसर है।


🏦 क्या है DMI Finance?

DMI Finance की स्थापना 2008 में शिवाशीष चटर्जी और युवराज सिंह द्वारा की गई थी। यह एक प्रमुख डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, जो भारतीय ग्राहकों को पर्सनल लोन, कंजंप्शन लोन और MSME लोन प्रदान करता है।

कंपनी भारत की कई बड़ी डिजिटल कंपनियों जैसे कि Samsung, Google Pay और Airtel के साथ पार्टनरशिप में Embedded Finance सेवाएं देती है। इसके माध्यम से उपभोक्ता सीधा ऐप के माध्यम से लोन ले सकते हैं।


⚠️ RBI की रोक और उसका समाधान

अक्टूबर 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चार NBFCs, जिनमें DMI Finance भी शामिल थी, पर लोन मंजूरी और वितरण पर रोक लगा दी थी। यह कार्रवाई उच्च ब्याज दरें और असंतुलित इंटरेस्ट स्प्रेड जैसे कारणों से की गई थी।

हालांकि, जनवरी 2025 में RBI ने यह रोक हटा ली, जिससे कंपनी ने फिर से अपनी लोन सेवाएं शुरू कर दीं।


💰 FY24 में शानदार प्रदर्शन, 60% रेवेन्यू ग्रोथ

DMI Finance ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 60% सालाना वृद्धि के साथ ₹2,654 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया। इसके साथ ही कंपनी ने ₹397 करोड़ का मुनाफा भी कमाया, जो इसके बिजनेस मॉडल की मजबूती को दर्शाता है।

FY25 के आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन FY24 के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि कंपनी ने RBI की रोक के बावजूद शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है।


🎯 क्यों महत्वपूर्ण है यह ESOP विस्तार?

ESOP यानी Employee Stock Option Plan एक ऐसा लाभ है, जिसके तहत कंपनी अपने कर्मचारियों को कंपनी के शेयर खरीदने का अवसर देती है। यह न केवल कर्मचारी को आर्थिक रूप से जोड़ता है, बल्कि कंपनी की सफलता में सीधे हिस्सेदार भी बनाता है।

DMI Finance का यह कदम इंगित करता है कि वह अपने कर्मचारियों को दीर्घकालिक रूप से साथ रखने और उन्हें मोटिवेटेड रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

ESOP का विस्तार खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद होगा जो टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, और लेंडिंग ऑपरेशन्स जैसे क्षेत्रों में कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं।


🧠 निष्कर्ष

DMI Finance का ESOP पूल बढ़ाना एक ऐसा कदम है जो कर्मचारियों के विश्वास को मजबूत करता है और उन्हें कंपनी की ग्रोथ से जोड़ता है। साथ ही, यह इंडस्ट्री में कंपनी के सकारात्मक दृष्टिकोण और ग्रोथ अप्रोच को भी दर्शाता है।

जहां एक ओर कई NBFCs बाजार में संघर्ष कर रही हैं, वहीं DMI Finance ने RBI की चुनौती के बाद भी रिकवर करते हुए, मजबूत रेवेन्यू, मुनाफा और कर्मचारियों की भागीदारी को प्राथमिकता दी है।

अब देखना यह होगा कि ESOP विस्तार का यह फैसला कंपनी की भविष्य की प्रतिभा बनाए रखने और आकर्षित करने में कितना कारगर साबित होता है।

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🔋 Battery Smart की रफ्तार तेज़, राजस्व तीन गुना लेकिन घाटा भी दोगुना

Battery Smart

गुरुग्राम, अप्रैल 2025 — भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट के लिए बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनी battery smart ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹164 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष ₹56 करोड़ था — यानी 193% की छलांग

हालांकि, तेज़ी से स्केल करने की रणनीति के चलते कंपनी का घाटा भी दोगुना होकर ₹140 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹61 करोड़ था।


⚙️ बिज़नेस मॉडल: बैटरी-एज़-ए-सर्विस

Battery Smart का मुख्य व्यवसाय बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क ऑपरेट करना है, जो खासकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहनों के लिए काम करता है। कंपनी “Battery-as-a-Service” मॉडल के तहत वाहन निर्माताओं को बैटरियों की अदला-बदली (swapping) की सुविधा देती है। यही इसका प्रमुख राजस्व स्रोत है।

FY24 में कंपनी ने ब्याज और अन्य वित्तीय स्रोतों से ₹23 करोड़ की अतिरिक्त आय अर्जित की, जिससे कुल आय ₹187 करोड़ तक पहुंच गई।


📈 Battery Smart आय में तीन गुना बढ़ोतरी

Battery Smart की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू (मुख्य व्यवसाय से आय): ₹164 करोड़ (193% वृद्धि)
  • कुल आय: ₹187 करोड़ (जिसमें ₹23 करोड़ ब्याज से)
  • FY23 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू: ₹56 करोड़

इसका मतलब है कि कंपनी ने ग्राहकों और बाजार में तेज़ी से जगह बनाई है और इसकी सर्विसेज को व्यापक स्वीकृति मिल रही है।


💸 खर्चों में ज़बरदस्त उछाल

जहां आय में भारी इजाफा हुआ, वहीं खर्चों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई। कंपनी के कुल खर्च FY24 में ₹327 करोड़ हो गए, जो पिछले वर्ष ₹125 करोड़ थे — यानी 2.6 गुना वृद्धि।

विस्तृत खर्च विश्लेषण:

  • डिप्रिसिएशन (Depreciation): ₹85 करोड़ (3.8 गुना वृद्धि)
  • फाइनेंस कॉस्ट (ब्याज खर्च): ₹45 करोड़ (3.75 गुना वृद्धि)
  • कर्मचारी लाभ व्यय (Employee Benefits): ₹41 करोड़ (95.2% वृद्धि)
  • विज्ञापन खर्च: ₹8 करोड़ (60% की गिरावट)

यह स्पष्ट है कि कंपनी ने मानव संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है, जबकि विज्ञापन में कटौती की गई है।


📉 घाटा भी हुआ दोगुना

हालांकि टॉप-लाइन (राजस्व) में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली, लेकिन बॉटम-लाइन यानी नेट लॉस भी काफी बढ़ा। FY24 में कंपनी ने ₹140 करोड़ का घाटा दर्ज किया, जो कि FY23 के ₹61 करोड़ से 2.3 गुना अधिक है।

कुछ महत्वपूर्ण संकेतक:

  • EBITDA मार्जिन: -5.35%
  • ROCE (Return on Capital Employed): -18.34%
  • प्रति ₹1 कमाई पर खर्च: ₹1.99

इसका मतलब है कि Battery Smart को हर एक रुपए की ऑपरेटिंग आय पर लगभग दो रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।


💼 संपत्ति और नकदी स्थिति

मार्च 2024 तक, कंपनी की कुल चालू संपत्ति ₹328 करोड़ थी। इसमें से:

  • नकद और बैंक बैलेंस: ₹107 करोड़

कंपनी के पास फिलहाल पर्याप्त नकदी है, जिससे निकट भविष्य में संचालन और निवेश करने की गुंजाइश बनी हुई है।


🔍 क्या कहती है रिपोर्ट?

Battery Smart की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कंपनी तेजी से अपने नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल कर रही है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इस विस्तार की कीमत उसे घाटे के रूप में चुकानी पड़ रही है।

जहां डिप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट में भारी वृद्धि हुई, वहीं ऑपरेशनल खर्चों में नियंत्रण लाना अब कंपनी के लिए अगली चुनौती बन सकता है।


🔋 बैटरी स्वैपिंग बाजार में Battery Smart की स्थिति

भारत में EV (इलेक्ट्रिक वाहन) क्रांति के साथ-साथ बैटरी-स्वैपिंग मॉडल को भविष्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। Battery Smart इस सेगमेंट में अग्रणी खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरी है।

इसके प्रमुख लाभ:

  • कम चार्जिंग समय
  • अधिक व्हीकल अपटाइम
  • लोअर फ्यूल कॉस्ट

ऐसे में कंपनी का मौजूदा घाटा दीर्घकालिक निवेश के रूप में भी देखा जा सकता है।


🔚 निष्कर्ष

Battery Smart ने FY24 में गति और विस्तार दोनों को प्राथमिकता दी, जिससे राजस्व में तेज़ ग्रोथ देखने को मिली। हालांकि इस ग्रोथ के साथ आया भारी खर्च और घाटा कंपनी के लिए अलार्मिंग संकेत हो सकता है अगर यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों तक जारी रहा।

लेकिन बाजार में इसकी मजबूत उपस्थिति, कैश रिज़र्व और बैटरी-एज़-ए-सर्विस की मांग को देखते हुए, Battery Smart भारत के EV इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार दिख रही है

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🚛 91Trucks को ₹42.9 करोड़ की फंडिंग, कंपनी का वैल्यूएशन 5.5 गुना बढ़ा

91Trucks

नई दिल्ली, अप्रैल 2025 — कमर्शियल वाहनों के लिए ऑनलाइन लिस्टिंग प्लेटफॉर्म 91Trucks ने अपने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में कुल ₹42.9 करोड़ ($5 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Arkam Ventures ने अपने एसोसिएट फंड Unitary Fund के ज़रिए किया। इस राउंड में Titan Capital, Sparrow Capital, और Atrium Angels जैसे इनवेस्टर्स ने भी भाग लिया।


💰 कौन-कितना निवेश लाया?

91Trucks की रेगुलेटरी फाइलिंग्स (Registrar of Companies से प्राप्त) के अनुसार, कंपनी ने सीरीज़ A राउंड में कुल 2,247 सीसीपीएस (Compulsorily Convertible Preference Shares) को ₹1,88,578 प्रति शेयर की दर से जारी किया। इस प्रक्रिया में कुल ₹42.9 करोड़ जुटाए गए।

निवेश वितरण इस प्रकार रहा:

  • Arkam Ventures – ₹25.2 करोड़ (लगभग $3 मिलियन)
  • Titan Capital – ₹15 करोड़
  • Sparrow Capital – ₹1.73 करोड़
  • Atrium Angels – ₹1 करोड़

यह जानकारी सबसे पहले Entrackr द्वारा रिपोर्ट की गई थी।


📈 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी ने अपनी फाइलिंग्स में बताया कि इस फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure), मार्केटिंग, और जनरल कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे 91Trucks को अपने प्लेटफॉर्म को और विस्तार देने, ब्रांडिंग मजबूत करने और यूज़र बेस बढ़ाने में मदद मिलेगी।


🏢 कंपनी का वैल्यूएशन कितना पहुंचा?

Entrackr के अनुमानों के अनुसार, 91Trucks का वैल्यूएशन अब ₹280 करोड़ ($33 मिलियन) तक पहुंच गया है — जो कि इसके सीड राउंड के समय ₹50.47 करोड़ था। यानी कंपनी का वैल्यूएशन करीब 5.5 गुना बढ़ा है।


🛻 91Trucks क्या करता है?

साल 2022 में लॉन्च हुई Gurugram-बेस्ड 91Trucks, एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो कमर्शियल वाहनों की जानकारी उपलब्ध कराता है। इसमें शामिल हैं:

  • नई और पुरानी ट्रक, बस, और ऑटो रिक्शा की जानकारी
  • कीमतों की तुलना (Price Comparison)
  • स्पेसिफिकेशन और फीचर्स
  • नजदीकी डीलर्स की लिस्ट

कंपनी के वेबसाइट के अनुसार, 91Trucks ने दिल्ली-एनसीआर और मेरठ में 5 ऑफलाइन स्टोर्स भी शुरू किए हैं, जहां किफायती दामों पर यूज़्ड कमर्शियल व्हीकल्स उपलब्ध हैं।


📊 निवेशकों की हिस्सेदारी

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, सीरीज़ A राउंड के बाद 91Trucks में निवेशकों की हिस्सेदारी कुछ इस प्रकार है:

  • Arkam Ventures – 9% (सबसे बड़ा बाहरी शेयरहोल्डर)
  • Titan Capital – 5.35%
  • Sparrow Capital – 4.94%

इससे साफ है कि कंपनी के मुख्य रणनीतिक फैसलों में इन निवेशकों की अहम भूमिका रहने वाली है।


📅 वित्तीय स्थिति कैसी है?

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 91Trucks ने ₹10.11 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया, जो कि पिछले वित्त वर्ष (FY23) के ₹3.95 करोड़ से करीब 2.5 गुना ज्यादा है।

हालांकि कंपनी अभी भी लाभ में नहीं है, लेकिन FY24 में इसका घाटा ₹1 करोड़ से कम रहा, जो कि एक शुरुआती स्टार्टअप के लिए मजबूत संकेत है।

कंपनी ने FY25 के आंकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं।


🛣️ आगे का रास्ता

91Trucks ने कमर्शियल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक ऐसे सेगमेंट को टारगेट किया है, जहां पारंपरिक मार्केटिंग और सेल्स मॉडल अब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर बढ़ रहे हैं। 91Trucks जैसे प्लेटफॉर्म से:

  • छोटे व्यवसायियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स को सुविधा होती है
  • उपयोगकर्ता तुलनात्मक रूप से बेहतर डील्स खोज सकते हैं
  • ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन (O2O) सेल्स मॉडल मजबूत होता है

अब जब कंपनी के पास नया फंड है, तो वह न सिर्फ अपनी तकनीकी क्षमता को बढ़ा पाएगी, बल्कि ग्रामीण और सेमी-अर्बन बाजारों में भी अपनी पहुंच बढ़ा सकेगी।


🔚 निष्कर्ष

91Trucks की इस लेटेस्ट फंडिंग से यह स्पष्ट है कि भारत में कमर्शियल व्हीकल सेक्टर अब टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनने को तैयार है। Arkam Ventures और Titan Capital जैसे अनुभवी निवेशकों का साथ मिलना कंपनी के लिए एक बड़ी मान्यता है।

अब देखना यह होगा कि 91Trucks इस फंडिंग का उपयोग कैसे करता है और आने वाले महीनों में किस प्रकार के नवाचार और विस्तार लेकर आता है।

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भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस हफ्ते (22-27 अप्रैल, 2025) कुल 25 स्टार्टअप्स ने लगभग $102.93 मिलियन (करीब ₹850 करोड़) की फंडिंग जुटाई। इनमें 5 ग्रोथ-स्टेज और 18 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स शामिल रहे, जबकि दो कंपनियों ने अपनी फंडिंग की राशि सार्वजनिक नहीं की।

💰 फंडिंग में हल्की गिरावट

पिछले हफ्ते की तुलना में इस बार स्टार्टअप फंडिंग में 8.35% की गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछले सप्ताह $112.35 मिलियन की फंडिंग हुई थी, वहीं इस हफ्ते यह आंकड़ा $102.93 मिलियन पर आकर ठहर गया।

📊 औसतन पिछले 8 हफ्तों में फंडिंग

• औसतन प्रति सप्ताह फंडिंग: $200.96 मिलियन
• औसतन डील्स: 24 प्रति सप्ताह


🚀 ग्रोथ-स्टेज फंडिंग डील्स

इस हफ्ते ग्रोथ और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल मिलाकर $30 मिलियन जुटाए। इनमें प्रमुख रहे:

  • Metafin (क्लीनटेक NBFC): $10 मिलियन (Series A)
  • QNu Labs (Quantum Cybersecurity): $7 मिलियन
  • Kaleidofin (Neobanking): $5 मिलियन
  • CollegeDekho (Edtech)
  • Sadhav Offshore (Marine Services)

🌱 अर्ली-स्टेज फंडिंग डील्स

18 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल $72.98 मिलियन जुटाए। इनमें प्रमुख डील्स रहीं:

  • Kult (Beauty Tech): $20 मिलियन
  • Fuze (SaaS): $12.2 मिलियन
  • HexaHealth (Healthcare)
  • Anveshan, Sedna (Foodtech)
  • Stimuler (AI-बेस्ड इंग्लिश लर्निंग)
  • Mugafi (Content Creation)

ekincare और Jamm ने भी फंडिंग प्राप्त की, लेकिन उन्होंने राशि सार्वजनिक नहीं की।


🏙️ शहरों और सेक्टर्स के अनुसार डील्स

🏢 शहरवार डील्स

  • Bengaluru और Delhi-NCR: 7-7 डील्स
  • Mumbai, Chennai समेत अन्य शहरों से भी फंडिंग डील्स हुईं।

🏭 सेक्टरवार डील्स

  • Healthtech: 4 डील्स (सर्वाधिक)
  • E-commerce और Foodtech: 3-3 डील्स
  • अन्य: Media & Entertainment, SaaS, Edtech, Proptech आदि

🔁 सीरीज़-वाइज डील्स

  • Series A और Seed Funding: 7-7 डील्स
  • इसके बाद Pre-Series A, Series B आदि चरणों की फंडिंग हुई।

👥 प्रमुख हायरिंग्स और बदलाव

  • Sahil Barua (Delhivery के CEO) ने Nestasia के बोर्ड में एंट्री ली
  • Abhishek Mishra (PhysicsWallah): GSV Ventures में पार्टनर नियुक्त
  • Rajan Chaudhary: Leap में को-फाउंडर बने

🔄 अधिग्रहण और मर्जर

  • Perfios ने IHX (Healthcare Info Exchange) का अधिग्रहण किया
  • The Souled Store ने Redwolf (Apparel Brand) को खरीदा

❌ शटडाउन अलर्ट

Zomato ने अपनी 15 मिनट वाली फूड डिलीवरी सेवा ‘Quick’ को लॉन्च के महज 4 महीने बाद अपने ऐप से हटा दिया है, जो एक रणनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है।


🆕 नए लॉन्च और पार्टनरशिप

  • Infibeam Avenues: ग्लोबल एजन्टिक AI मार्केटप्लेस लॉन्च करेगी
  • CoinSwitch: INR बेस्ड क्रिप्टो फ्यूचर्स लॉन्च
  • Razorpay: AI-सक्षम पेमेंट गेटवे पेश

📌 संभावित डील्स

  • Ultraviolette (ई-बाइक स्टार्टअप): नई फंडिंग राउंड में निवेश पाने के करीब

📈 वित्तीय परिणाम

  • Zomato (Eternal): Q4 FY25 में 64% रेवेन्यू ग्रोथ, PAT में 78% गिरावट
  • Libas: FY24 में 64% मुनाफा गिरा, ₹500 Cr के करीब रेवेन्यू
  • FarEye: FY24 में नुकसान 63% घटा
  • Urban Company: ₹846 Cr रेवेन्यू (9M FY25), लॉक्स और RO बिज़नेस 7X बढ़ा
  • Go Digit Insurance: Q4 FY25 में मुनाफा 2.2X हुआ
  • Nat Habit: FY24 में रेवेन्यू 80% बढ़ा, नुकसान स्थिर
  • WinZO: FY24 में ₹1,055 Cr रेवेन्यू, ₹315 Cr मुनाफा
  • Freshworks: Q1 CY25 में $196 Mn रेवेन्यू, ऑपरेटिंग लॉसेस 67% घटे

📰 इस हफ्ते की प्रमुख सुर्खियाँ

  • Zomato ने ‘Quick’ डिलीवरी सेवा बंद की
  • Zaakpay (MobiKwik) को RBI से पेमेंट एग्रीगेटर की मंजूरी
  • EV Policy 2025 (महाराष्ट्र): टोल माफ़ी, सब्सिडी को मंज़ूरी
  • Karnataka HC ने Ola, Uber, Rapido बाइक टैक्सी को 15 जून तक राहत दी
  • Oyo ने फूड बिज़नेस में फिर एंट्री की, Townhouse Café लॉन्च किया
  • UPI ट्रांजैक्शन अप्रैल में 17.89 बिलियन (2.24% गिरावट)
  • TVS Motor ने अप्रैल में 19,736 यूनिट्स बेचकर ईवी सेगमेंट में #1 स्थान पाया

🧾 निष्कर्ष

इस हफ्ते भले ही फंडिंग में थोड़ी गिरावट देखने को मिली हो, लेकिन 25 से अधिक स्टार्टअप्स में निवेश और कई प्रमुख अधिग्रहण दर्शाते हैं कि भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम गति में बना हुआ है। खासकर हेल्थटेक, SaaS और ई-कॉमर्स सेक्टरों में निवेशकों की दिलचस्पी बरकरार है। TVS की लीडरशिप और UPI ट्रांजैक्शन के आंकड़े तकनीक और वित्तीय नवाचार में भारत की गहराई को दिखाते हैं।

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