SPRY Therapeutics ने $15 मिलियन का फंड जुटाया, यूएस में विस्तार की योजना

SPRY Therapeutics

नई दिल्ली – फिजिकल थेरेपी प्रोफेशनल्स के लिए एक SaaS प्लेटफ़ॉर्म, Spry Therapeutics ने प्रमुख निवेशकों Flourish Ventures, Together Fund, Fidelity’s Eight Roads और F-prime Capital के नेतृत्व में $15 मिलियन का फंडिंग राउंड पूरा किया है। इस नवीनतम फंडिंग के साथ SPRY की कुल फंडिंग $25 मिलियन हो गई है, जो कंपनी की शुरुआत के बाद से लगातार बढ़ती रही है।

कंपनी ने इससे पहले जून 2022 में Eight Roads Ventures और F-Prime Capital के नेतृत्व में $7 मिलियन जुटाए थे, जिसमें मौजूदा निवेशकों ने भी हिस्सा लिया था। इस फंड का उपयोग SPRY के यूएस बाजार में विस्तार के लिए किया जाएगा, जहां कंपनी पहले से ही तेजी से बढ़ रही है।

कंपनी की स्थापना और उद्देश्य

SPRY Therapeutics की स्थापना बृजराज भुप्तानी, जो पहले Ola के CTO रह चुके हैं, और रियाज़ रहमान ने मिलकर 2021 में की थी। कंपनी का उद्देश्य फिजिकल थेरेपी क्लीनिक्स के लिए एक व्यापक समाधान प्रदान करना है, जो जटिल बिलिंग प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है और मरीजों के साथ बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित करता है। SPRY ने पारंपरिक क्लाउड समाधानों और बेसिक मशीन लर्निंग आधारित बिलिंग सिस्टम्स से आगे बढ़ते हुए एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है जो न केवल क्लिनिकल आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि जटिल बिलिंग प्रक्रियाओं को भी आसान बनाता है।

प्लेटफ़ॉर्म की विशेषताएँ और सेवाएँ

SPRY एक ऑल-इन-वन क्लिनिक मैनेजमेंट सॉल्यूशन है, जो फिजिकल थेरेपी प्रोफेशनल्स के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्लेटफ़ॉर्म छोटे सोलो प्रैक्टिशनर्स से लेकर बड़े क्लिनिक्स तक की ज़रूरतों को पूरा करता है। इसका मुख्य फोकस बीमा भुगतान (insurance reimbursements) और नकदी प्रवाह प्रबंधन (cash flow management) जैसे प्रमुख मुद्दों पर है, जो कई चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौतियां साबित होती हैं। इसके अलावा, SPRY का सॉफ़्टवेयर डेटा एंट्री और रिपोर्ट जेनरेशन को भी आसान बनाता है, जिससे चिकित्सक अधिक समय अपने मरीजों पर केंद्रित कर सकते हैं।

कंपनी का विकास और विस्तार

SPRY Therapeutics ने बेहद कम समय में अपनी जगह बनाई है। कंपनी के अनुसार, पिछले 18 महीनों में उसने 105 से अधिक क्लिनिक्स के साथ साझेदारी की है, जो 30 अमेरिकी राज्यों में फैले हुए हैं। इस प्लेटफ़ॉर्म ने फिजिकल थेरेपी सॉफ़्टवेयर समाधान के क्षेत्र में काफी मान्यता प्राप्त की है। G2 की समर और फॉल एडिशन रिपोर्ट्स में इसे टॉप फिजिकल थेरेपी सॉफ़्टवेयर सॉल्यूशन का दर्जा दिया गया है, जो इसके प्रभावी उत्पाद और सेवाओं को दर्शाता है।

संस्थापकों के बारे में

SPRY Therapeutics के सह-संस्थापक बृजराज भुप्तानी के पास टेक्नोलॉजी और प्रबंधन के क्षेत्र में गहरा अनुभव है। Ola के CTO के रूप में, उन्होंने जटिल समस्याओं का हल ढूंढने और बड़े पैमाने पर संचालन का प्रबंधन करने का अनुभव प्राप्त किया। उनके साथी, रियाज़ रहमान, भी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुशल हैं और उन्होंने क्लिनिक प्रबंधन के क्षेत्र में SPRY की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति

SPRY ने 2021 में लॉन्च होने के बाद अब तक कुल $25 मिलियन का फंड जुटाया है। इसकी नवीनतम फंडिंग $15 मिलियन की है, जो यूएस बाजार में इसके विस्तार को गति देगी। इससे पहले 2022 में, कंपनी ने Eight Roads Ventures और F-prime Capital से $7 मिलियन जुटाए थे।

फंडिंग का उपयोग और भविष्य की योजनाएँ

इस ताजा फंडिंग से SPRY Therapeutics अपने प्लेटफ़ॉर्म को और उन्नत बनाने और अमेरिकी बाजार में विस्तार करने की योजना बना रहा है। कंपनी का उद्देश्य फिजिकल थेरेपी प्रोफेशनल्स के लिए और भी बेहतर सेवाएं प्रदान करना है, जिससे उनकी प्रक्रियाएं और अधिक स्वचालित और कुशल हो सकें। इसके साथ ही, कंपनी नए फीचर्स और टेक्नोलॉजी के माध्यम से अपने प्लेटफ़ॉर्म को और बेहतर बनाएगी, जिससे उसके ग्राहक लाभान्वित हो सकें।

बाजार में प्रतिस्पर्धा और संभावनाएँ

फिजिकल थेरेपी सॉफ़्टवेयर सॉल्यूशन के क्षेत्र में SPRY की तेज़ी से बढ़ती पहचान ने इसे प्रमुख खिलाड़ियों में से एक बना दिया है। हालांकि, यह एक प्रतिस्पर्धात्मक क्षेत्र है, जिसमें अन्य कंपनियाँ भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। SPRY की तकनीकी उत्कृष्टता और मजबूत ग्राहक संबंध इसके प्रतिस्पर्धियों पर इसे बढ़त दिला सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी बाजार में अपनी जड़ें जमाने और नए क्लिनिक्स के साथ साझेदारी करने से कंपनी की स्थिति और भी मजबूत हो सकती है।

निष्कर्ष

SPRY Therapeutics ने अपने अभिनव समाधान और तेज़ी से बढ़ते क्लाइंट बेस के माध्यम से फिजिकल थेरेपी सॉफ़्टवेयर सॉल्यूशन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। इसके संस्थापक बृजराज भुप्तानी और रियाज़ रहमान के नेतृत्व में, कंपनी ने तेजी से विकास किया है और आने वाले समय में भी अपनी स्थिति को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। $15 मिलियन की नई फंडिंग से कंपनी को अमेरिकी बाजार में और विस्तार करने में मदद मिलेगी, जिससे यह अपने ग्राहकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकेगी।

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पाइन लैब्स का भारतीय यूनिट: राजस्व स्थिर, लेकिन FY24 में तीन गुना बढ़े नुकसान

पाइन लैब्स

नई दिल्ली स्थित मर्चेंट कॉमर्स और पेमेंट्स प्लेटफ़ॉर्म पाइन लैब्स ने वित्तीय वर्ष 2024 में अपने राजस्व में मामूली वृद्धि दर्ज की, लेकिन इस अवधि के दौरान कंपनी के घाटे में तीन गुना वृद्धि हुई। कंपनी ने FY24 में 1,317 करोड़ रुपये का परिचालन राजस्व कमाया, जो पिछले वर्ष FY23 में 1,281 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी की आमदनी में मामूली वृद्धि के बावजूद, उसके नुकसान में भारी इजाफा देखा गया।

कंपनी का परिचालन राजस्व और मुख्य स्रोत

Pine Labs के भारतीय यूनिट का मुख्य राजस्व स्रोत ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग और सेटलमेंट रहा, जो इसके कुल परिचालन राजस्व का 61% हिस्सा बनाता है। इस श्रेणी से FY24 में कंपनी ने 805 करोड़ रुपये कमाए, जो FY23 के मुकाबले मात्र 1.5% की वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, कंपनी ने पेट्रोलियम आउटलेट्स पर प्रदान की गई डिजिटल सेवाओं से 67 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।

पाइन लैब्स अपने गिफ्टिंग समाधानों के लिए भी जाना जाता है, जो Qwikcilver, Pine Perks और Google Wallet के माध्यम से ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है। हालांकि, इस श्रेणी से आय में FY24 में 44.5% की भारी गिरावट आई, जिससे यह घटकर 111 करोड़ रुपये रह गई।

राजस्व में गिरावट और अन्य स्रोत

कंपनी ने डिवाइस बिक्री, प्लास्टिक कार्ड और अन्य साधनों से भी आय अर्जित की, जिससे उसका कुल राजस्व FY24 में 1,384 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि FY23 में यह आंकड़ा 1,328 करोड़ रुपये था। लेकिन इसके बावजूद, कंपनी के प्रमुख गिफ्टिंग समाधानों की आय में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा।

बढ़ते नुकसान: प्रमुख कारण

पाइन लैब्स के नुकसान में तीन गुना वृद्धि एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। कंपनी ने FY23 की तुलना में FY24 में अपने घाटे को बढ़ते हुए देखा, जो इसके परिचालन व्यय में वृद्धि और राजस्व वृद्धि में ठहराव का परिणाम हो सकता है। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने लाभ मार्जिन में सुधार करना और खर्चों को नियंत्रण में रखना होगी।

संस्थापक और कंपनी की यात्रा

पाइन लैब्स की स्थापना 1998 में रजुल गर्ग द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापारियों को डिजिटल पेमेंट समाधान प्रदान करना था। समय के साथ, कंपनी ने अपने उत्पादों और सेवाओं का विस्तार किया और आज यह भारत के सबसे प्रमुख मर्चेंट पेमेंट और गिफ्टिंग समाधान प्लेटफ़ॉर्म में से एक है।

वित्तीय प्रदर्शन और चुनौतियाँ

पाइन लैब्स के वित्तीय प्रदर्शन को देखें तो FY24 में कंपनी ने अपने परिचालन राजस्व में मामूली वृद्धि दर्ज की है, लेकिन इसकी लागत और अन्य वित्तीय चुनौतियों ने कंपनी के लाभ पर भारी दबाव डाला है। कंपनी को अपने खर्चों का प्रबंधन करने और नए राजस्व स्रोतों की पहचान करने की आवश्यकता है ताकि वह वित्तीय स्थिरता प्राप्त कर सके।

भविष्य की संभावनाएं

पाइन लैब्स के सामने आने वाली चुनौतियों के बावजूद, कंपनी के पास भविष्य में उन्नति के कई अवसर हैं। भारत में डिजिटल पेमेंट्स का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, और कंपनी इस उभरते बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए पाइन लैब्स को अपने मौजूदा उत्पादों और सेवाओं को और बेहतर बनाना होगा, साथ ही नए तकनीकी समाधानों को अपनाकर ग्राहकों की बदलती मांगों को पूरा करना होगा।

कंपनी के उत्पाद और सेवाएं

पाइन लैब्स न केवल पेमेंट प्रोसेसिंग समाधान प्रदान करती है, बल्कि इसके गिफ्टिंग समाधान भी काफी लोकप्रिय हैं। Qwikcilver और Pine Perks के माध्यम से, कंपनी कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत ग्राहकों को गिफ्ट कार्ड और वाउचर समाधान प्रदान करती है। कंपनी ने डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए लगातार नए उत्पाद और सेवाएं विकसित की हैं।

सकारात्मक और नकारात्मक पहलू

सकारात्मक पहलू: पाइन लैब्स के राजस्व में मामूली वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी का व्यवसाय स्थिर है। इसके गिफ्टिंग समाधान और पेट्रोलियम आउटलेट्स में डिजिटल सेवाएं इसे अन्य प्रतिस्पर्धियों से अलग करती हैं।

नकारात्मक पहलू: कंपनी के नुकसान में भारी वृद्धि ने इसके वित्तीय स्वास्थ्य पर सवाल खड़े किए हैं। इसके अलावा, गिफ्टिंग समाधानों से आय में गिरावट से कंपनी की भविष्य की रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

पाइन लैब्स, जो भारतीय मर्चेंट कॉमर्स और पेमेंट्स सेक्टर में एक प्रमुख खिलाड़ी है, को FY24 में कई वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, कंपनी के पास अपनी तकनीकी क्षमताओं और विविध सेवाओं के बल पर आने वाले वर्षों में वित्तीय स्थिरता और मुनाफे की ओर बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। कंपनी को खर्चों पर नियंत्रण रखते हुए नए अवसरों की तलाश करनी होगी ताकि यह प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।

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B2B पैकेजिंग समाधान प्लेटफार्म DCGpac ने FY24 में 100 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य हासिल किया

DCGpac

गुरुग्राम स्थित B2B पैकेजिंग समाधान कंपनी DCGpac ने वित्तीय वर्ष 2024 में अपने राजस्व को करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंचाया, जो कि 2023 के 79.5 करोड़ रुपये के मुकाबले 21.4% की वृद्धि है। कंपनी ने केवल 20 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने के बावजूद इस वर्ष मुनाफा भी कमाया है। इस वित्तीय वर्ष में कंपनी का संचालन राजस्व 96.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो इसकी निरंतर विकास दर को दर्शाता है।

कंपनी का परिचय और सेवाएं

DCGpac मुख्य रूप से पैकेजिंग सामग्रियों की आपूर्ति करता है और इसके उत्पादों में कॉरुगेटेड बॉक्सेस, कूरियर बैग्स, बबल फिल्म्स, डिजाइनर बॉक्सेस शामिल हैं। इसके साथ ही कंपनी “डिजाइन टू डिस्ट्रीब्यूशन” सेवाएं भी प्रदान करती है। इसके प्रमुख ग्राहक मिंत्रा, डेल्हीवरी, ब्लिंकिट, शिपरॉकेट, DHL और शैडोफैक्स जैसे बड़े ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स प्लेटफार्म हैं। कंपनी का दावा है कि इसके पास 50,000 से अधिक ग्राहक हैं, जो इसके उत्पादों और सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

वित्तीय वृद्धि और खर्च

DCGpac ने FY24 में मुख्य रूप से पैकेजिंग सामग्रियों की बिक्री से राजस्व अर्जित किया। वित्तीय वर्ष 2024 में कंपनी का कुल खर्च 96.7 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सबसे अधिक 80.4 करोड़ रुपये का खर्च सामग्री की लागत पर हुआ। FY23 के मुकाबले इसमें 19% की वृद्धि हुई है, जिससे कंपनी की कुल लागत में भी इजाफा हुआ।

कंपनी के अन्य खर्चों में विज्ञापन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रिंटिंग और अन्य ऑपरेटिंग ओवरहेड्स शामिल हैं, जो कंपनी के कुल खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं। कर्मचारी लाभों पर FY24 में 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कंपनी की संचालन लागत का एक बड़ा हिस्सा रहा।

मुनाफा और लागत प्रबंधन

DCGpac ने वित्तीय वर्ष 2024 में मुनाफा कमाने में सफलता हासिल की। FY23 में 1.67 करोड़ रुपये के घाटे के मुकाबले FY24 में कंपनी ने 19 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। यह वृद्धि मुख्य रूप से इसके मजबूत लागत प्रबंधन और स्थिर राजस्व वृद्धि के कारण संभव हो पाई। कंपनी का ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉइड) 3.34% और EBITDA मार्जिन 1.19% रहा।

कंपनी ने हर एक रुपये के ऑपरेटिंग राजस्व के लिए FY24 में 1 रुपये खर्च किए, जो उसके कुशल लागत प्रबंधन को दर्शाता है।

संस्थापक और कंपनी की यात्रा

DCGpac की स्थापना कुछ साल पहले पैकेजिंग उद्योग में एक व्यवस्थित समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। संस्थापकों ने इस प्लेटफ़ॉर्म को इस तरह से डिज़ाइन किया है कि यह न केवल बड़े ग्राहकों के लिए, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी किफायती और प्रभावी पैकेजिंग समाधान उपलब्ध करा सके।

बाजार में स्थिति

पैकेजिंग उद्योग में DCGpac की स्थिति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि कंपनी ने ग्राहकों की बदलती जरूरतों को समझते हुए अपने उत्पाद और सेवाओं को लगातार अपडेट किया है। जहां ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए पैकेजिंग की मांग लगातार बढ़ रही है, DCGpac जैसे प्लेटफार्म इन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सकारात्मक और नकारात्मक पहलू

DCGpac की सकारात्मकता उसकी लगातार बढ़ती राजस्व दर और लागत प्रबंधन की रणनीति में झलकती है, जिसने उसे वित्तीय वर्ष 2024 में मुनाफा कमाने में मदद की। कंपनी की मुनाफा दर भले ही कम हो, लेकिन यह उसके लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

नकारात्मक पक्ष यह है कि कंपनी की खर्च वृद्धि भी इसके राजस्व वृद्धि के साथ-साथ बढ़ी है, जो भविष्य में एक चुनौती बन सकती है। इसके अलावा, 83% खर्च केवल सामग्री की लागत में जाना दर्शाता है कि कंपनी को लागत कम करने के नए उपायों पर ध्यान देना होगा।

भविष्य की संभावनाएं

DCGpac ने FY24 में अपनी वृद्धि और मुनाफा दर को स्थिर किया है। भविष्य में कंपनी का लक्ष्य अपनी सेवाओं और उत्पादों की रेंज को और विस्तारित करना है। कंपनी के पास पैकेजिंग उद्योग में और भी ऊंचाइयों को छूने की अपार संभावनाएं हैं, विशेष रूप से ऐसे समय में जब ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।

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Fairwork India Ratings 2024 रिपोर्ट :ओला, उबर और पोर्टर ने गिग वर्कर्स के लिए काम करने की स्थिति में सबसे निचला स्थान पाया

Fairwork India Ratings 2024

भारतीय प्लेटफॉर्म इकोनॉमी में काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हाल ही में जारी की गई Fairwork India Ratings 2024 के अनुसार, ओला, उबर, और लॉजिस्टिक्स कंपनी पोर्टर ने गिग वर्कर्स के लिए कार्य स्थितियों में सबसे कम अंक हासिल किए हैं। यह रिपोर्ट भारतीय गिग इकोनॉमी में श्रम मानकों की कमी और इसमें सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

According to the recently released Fairwork India Ratings 2024, Ola, Uber, and logistics company Porter have received the lowest scores in terms of working conditions for gig workers in the Indian platform economy. This report highlights the challenging situation faced by gig workers in the Indian platform economy, emphasizing the need for improvement in labor standards.

Fairwork India Ratings का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों में काम करने वाले गिग वर्कर्स की कार्य स्थितियों का आकलन करना है। इस रिपोर्ट में 11 प्रमुख प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन किया गया, जिनमें लॉजिस्टिक्स, फूड डिलीवरी, और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी कंपनियाँ शामिल हैं। इनमें अमेजन फ्लेक्स, बिगबास्केट, ब्लूस्मार्ट, Flipkart,ओला, पोर्टर, स्विगी, उबर, अर्बन कंपनी, जेप्टो और जोमाटो जैसी कंपनियों का विश्लेषण किया गया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, ओला, उबर, और पोर्टर ने गिग वर्कर्स के लिए सबसे खराब प्रदर्शन किया है, जबकि बिगबास्केट, स्विगी, अर्बन कंपनी और जोमाटो ने बेहतर अंक प्राप्त किए हैं। इन चार कंपनियों ने 6 अंक हासिल किए, जो कि Fairwork Index में सबसे अच्छा स्कोर है।

Fairwork India Team और रिपोर्ट का प्रकाशन

इस रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान बेंगलुरु (IIIT-B) के Centre for IT and Public Policy (CITAPP) द्वारा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से प्रकाशित किया गया है। Fairwork India Team का नेतृत्व करते हुए, इस रिपोर्ट ने भारत के गिग वर्कर्स की वास्तविक स्थिति और उनके अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कई कंपनियों में श्रम मानकों की कमी है और उन्हें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

गिग वर्कर्स के लिए चुनौतीपूर्ण स्थितियाँ

गिग वर्कर्स, जोकि अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित कार्य करते हैं, उनके पास अक्सर स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार नहीं होते। उन्हें सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ, सामाजिक सुरक्षा, या अन्य प्रकार की सुरक्षा नहीं मिलती, जो एक स्थायी कर्मचारी को मिलती है। खासकर ओला, उबर, और पोर्टर जैसी कंपनियों में काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है।

रिपोर्ट के अनुसार सुधार की आवश्यकता

Fairwork India की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की प्लेटफॉर्म इकोनॉमी में कार्यरत गिग वर्कर्स के लिए श्रम मानकों में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि कंपनियों को गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य बीमा, और अन्य सुरक्षा उपायों की पेशकश करनी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, बिगबास्केट, स्विगी, अर्बन कंपनी, और जोमाटो ने अपने वर्कर्स के लिए बेहतर कामकाजी स्थिति प्रदान की है, जिससे इन कंपनियों को Fairwork Index में शीर्ष स्थान मिला है। इन कंपनियों ने श्रम मानकों और अधिकारों के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसके परिणामस्वरूप इन्हें उच्च अंक प्राप्त हुए।

कंपनियों की प्रतिक्रिया

हालांकि रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कुछ कंपनियों ने अपने गिग वर्कर्स के लिए बेहतर उपाय किए हैं, लेकिन ओला, उबर, और पोर्टर जैसे प्लेटफॉर्म्स को अपनी कार्य स्थितियों में सुधार करने की आवश्यकता है। इन कंपनियों ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उम्मीद है कि रिपोर्ट के बाद ये कंपनियाँ अपने गिग वर्कर्स की स्थिति सुधारने के लिए कुछ कदम उठाएंगी।

कंपनी का परिचय और संस्थापक

Ola और Uber जैसी कंपनियाँ दुनिया भर में लोकप्रिय मोबिलिटी प्लेटफॉर्म्स हैं, जो कैब सेवा प्रदान करती हैं। Ola की स्थापना 2010 में भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी ने की थी, जबकि Uber की स्थापना 2009 में Garrett Camp और Travis Kalanick ने की थी। Porter, जो कि लॉजिस्टिक्स और ऑन-डिमांड ट्रांसपोर्ट सेवा प्रदान करता है, की स्थापना 2014 में उत्पल मट्टू, प्रणय जी, वरुण बडोला और अन्य संस्थापकों द्वारा की गई थी।

ये कंपनियाँ भारतीय और वैश्विक बाजारों में बड़े पैमाने पर काम कर रही हैं, लेकिन Fairwork India की रिपोर्ट के अनुसार, उनके श्रम मानकों में सुधार की बहुत आवश्यकता है।

कंपनी के वित्तीय विवरण

Ola, Uber, और Porter जैसी कंपनियों ने भारतीय बाजार में व्यापक निवेश किया है और बड़े पैमाने पर अपने कारोबार का विस्तार किया है। Ola और Uber की मोबिलिटी सेवाओं से संबंधित राजस्व में हाल के वर्षों में वृद्धि देखी गई है, लेकिन श्रम मानकों की अनदेखी से इन कंपनियों के संचालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

आगे की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

Fairwork India Ratings 2024 की रिपोर्ट ने गिग वर्कर्स के लिए बेहतर कार्य स्थितियों की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा है। अगर ओला, उबर, और पोर्टर जैसी कंपनियाँ अपने श्रम मानकों में सुधार करती हैं, तो यह न केवल उनके वर्कर्स के लिए लाभकारी होगा, बल्कि उनके ब्रांड की प्रतिष्ठा और बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत करेगा।

भविष्य में, इन कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए बेहतर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

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Leegality ने 87% वृद्धि के साथ मुनाफे का नया मुकाम हासिल किया FY24

Leegality

डिजिटल डॉक्युमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म Leegality ने वित्तीय वर्ष 2024 (FY24) में अपने विकास की गति को बनाए रखा है। IIFL फिनटेक फंड द्वारा समर्थित इस कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023 में 100% राजस्व वृद्धि हासिल करने के बाद, वित्तीय वर्ष 2024 में भी 87% की बढ़त दर्ज की है। कंपनी के वित्तीय विवरणों के अनुसार, Leegality की ऑपरेशनल आय FY24 में बढ़कर 62 करोड़ रुपये हो गई, जो कि पिछले वर्ष 35.51 करोड़ रुपये थी।

Leegality ने डिजिटल हस्ताक्षर (eSign) और ई-स्टांपिंग (eStamping) जैसी सेवाओं के माध्यम से फिजिकल पेपरवर्क को खत्म करने का काम किया है। कंपनी का लक्ष्य विशेष रूप से उधार देने वाले व्यवसायों के लिए डॉक्युमेंट लॉजिस्टिक्स को डिजिटल रूप से ट्रांसफॉर्म करना है। FY24 में, इन सेवाओं की बिक्री कंपनी की एकमात्र संग्रहण का स्रोत रही। इसके अलावा, कंपनी ने बैंक डिपॉजिट्स से 4.2 करोड़ रुपये की ब्याज आय अर्जित की, जिससे कुल आय 66.41 करोड़ रुपये हो गई, जो FY23 में 35.51 करोड़ रुपये थी।

कंपनी का परिचय और सेवाएँ

Leegality एक प्रमुख डॉक्युमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफार्म है जो कंपनियों को डिजिटल सॉल्यूशंस प्रदान करता है, ताकि वे कागजी कार्यवाही को पूरी तरह से खत्म कर सकें। कंपनी विशेष रूप से डिजिटल हस्ताक्षर (eSign) और ई-स्टांपिंग (eStamping) जैसी सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करती है, जो उधार देने वाले व्यवसायों के लिए फायदेमंद साबित होती हैं। इसके डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से कई उद्योग अपने डॉक्युमेंटेशन प्रोसेस को तेज और सुरक्षित कर सकते हैं। Leegality का मुख्य उद्देश्य फिजिकल डॉक्युमेंट्स की बजाय डिजिटल प्रक्रियाओं का उपयोग कर कंपनियों के समय और संसाधनों की बचत करना है।

वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में मजबूत वृद्धि

Leegality ने FY24 में अपने संचालन से 62 करोड़ रुपये की राजस्व वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक बड़ा उछाल है। इसके साथ ही, बैंक डिपॉजिट्स पर 4.2 करोड़ रुपये की ब्याज आय भी अर्जित की, जिससे कुल आय 66.41 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह FY23 के 35.51 करोड़ रुपये की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि है, जो दर्शाता है कि कंपनी तेजी से अपने बाजार को विस्तार कर रही है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ रही है।

खर्चों में वृद्धि

Leegality के लिए FY24 में प्रमुख खर्चों में कर्मचारी लाभ सबसे बड़ा घटक रहा, जो कुल खर्च का 56% था। FY24 में कर्मचारी लाभ खर्च 62.5% बढ़कर 36.4 करोड़ रुपये हो गया, जो FY23 में 22.4 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, ई-साइन चार्जेस 15% खर्च में शामिल थे, जो 9.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गए। टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भी बढ़कर 6.6 करोड़ रुपये हो गया, जो कुल खर्च का 10% था। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि Leegality अपने व्यवसाय का विस्तार करने और अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने में निवेश कर रही है।

कंपनी के संस्थापक और उनकी दृष्टि

Leegality की स्थापना अभिजीत पराशर द्वारा की गई थी, जिनका उद्देश्य कंपनियों के लिए डिजिटल डॉक्युमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना था। अभिजीत के नेतृत्व में, Leegality ने विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों को पेपरलेस प्रक्रिया अपनाने में मदद की है। कंपनी के उत्पाद और सेवाएं पूरी तरह से भारत में निर्मित और डिज़ाइन की गई हैं, जो डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के साथ मेल खाती हैं।

Leegality की सेवाओं की मांग और भविष्य की संभावनाएँ

Leegality का मुख्य व्यवसाय मॉडल फिजिकल डॉक्युमेंटेशन को पूरी तरह से खत्म करना और इसे डिजिटल सॉल्यूशंस से बदलना है। उधार देने वाले व्यवसायों और अन्य उद्योगों में Leegality की सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत बना रही है। कंपनी के डिजिटल हस्ताक्षर और ई-स्टांपिंग समाधान ने विभिन्न उद्योगों में परिचालन को कुशल और सुरक्षित बनाया है।

IIFL Fintech Fund का समर्थन और Leegality की वृद्धि

IIFL Fintech Fund का समर्थन Leegality की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह फंड कंपनी को नए क्षेत्रों में विस्तार करने और डिजिटल डॉक्युमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है। FY23 और FY24 में, Leegality ने अपने राजस्व में लगातार वृद्धि की है, जो कंपनी की स्थिरता और बाजार में बढ़ती मांग का संकेत देती है।

कंपनी के वित्तीय आँकड़े

Leegality ने FY24 में कुल 66.41 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जिसमें 62 करोड़ रुपये ऑपरेशनल आय से और 4.2 करोड़ रुपये ब्याज आय से आए। इसके साथ ही, कंपनी ने FY24 में खर्चों में वृद्धि देखी, जिसमें कर्मचारी लाभ, ई-साइन चार्जेस, और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल थे। कंपनी के वित्तीय आँकड़े यह दिखाते हैं कि Leegality न केवल अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रही है, बल्कि अपनी सेवाओं की मांग को भी तेजी से बढ़ा रही है।

Leegality की भविष्य की योजना

आगे बढ़ते हुए, Leegality का लक्ष्य अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाना और नए बाजारों में प्रवेश करना है। कंपनी भविष्य में भी डिजिटल डॉक्युमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग को पूरा करने के लिए नए सॉल्यूशंस और तकनीकी अपग्रेड्स पर ध्यान केंद्रित करेगी। Leegality की निरंतर वृद्धि और IIFL Fintech Fund का समर्थन कंपनी को भारतीय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

सकारात्मक और नकारात्मक पहलू

Leegality की वृद्धि के सकारात्मक पहलू में कंपनी की तेजी से बढ़ती आय और बाजार में बढ़ती मांग शामिल हैं। इसके अलावा, IIFL Fintech Fund का समर्थन कंपनी के विस्तार को और मजबूत करता है। वहीं, नकारात्मक पक्ष पर, कंपनी के खर्चों में तेज वृद्धि हो रही है, विशेष रूप से कर्मचारी लाभ और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर, जिसे नियंत्रित करना कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

निष्कर्ष

Leegality ने FY24 में एक प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, जिसमें आय में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। कंपनी का डिजिटल डॉक्युमेंटेशन सॉल्यूशंस बाजार में तेजी से बढ़ रहा है और भविष्य में भी इसकी संभावनाएँ प्रबल दिखाई देती हैं।

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ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर मिला CCPA का नोटिस

ओला इलेक्ट्रिक CCPA नोटिस

ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के आरोपों के कारण केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) से शो-कॉज नोटिस प्राप्त हुआ है। यह नोटिस उन उपभोक्ता शिकायतों में बढ़ोतरी के बाद जारी किया गया है, जिनमें उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें प्रमुख थीं।

शेयर मूल्य में गिरावट और विवाद

यह खबर तब आई जब ओला इलेक्ट्रिक के शेयर मूल्य में 9% की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण कंपनी के सीईओ भाविश अग्रवाल और कॉमेडियन कुनाल कामरा के बीच ग्राहक समस्याओं पर सोशल मीडिया पर हुए विवाद को माना जा रहा है। इस गिरावट के साथ ही कंपनी का बाजार हिस्सेदारी भी सितंबर में घटकर 27% रह गई, जबकि जुलाई में यह 39% थी।

CCPA का नोटिस और जवाब

ओला इलेक्ट्रिक CCPA नोटिस

ओला इलेक्ट्रिक के अनुसार, CCPA ने उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के आरोपों के चलते यह नोटिस जारी किया है। कंपनी को इस नोटिस का जवाब 15 दिनों के भीतर देना है। ओला इलेक्ट्रिक ने इस मामले में कहा है कि नोटिस से कंपनी के वित्तीय या परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है, और वे सभी आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि उपभोक्ता शिकायतों का समाधान हो सके।

उपभोक्ता शिकायतों की बढ़ती संख्या

हाल के एक रिपोर्ट के अनुसार, ओला इलेक्ट्रिक को प्रति माह लगभग 80,000 उपभोक्ता शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों में ग्राहकों की असंतुष्टि और उनकी समस्याओं का समाधान न होने जैसी समस्याएँ शामिल हैं। इस प्रकार की शिकायतों में वृद्धि कंपनी की प्रतिष्ठा और ब्रांड मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

सीक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर का इस्तीफा

सोमवार को ओला इलेक्ट्रिक के सीक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर ने निजी कारणों और प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कंपनी पहले से ही कानूनी और ग्राहक समस्याओं का सामना कर रही है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति

हालांकि कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ता नोटिस से उनकी वित्तीय स्थिति पर कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ है, लेकिन शेयर बाजार में इसकी गिरावट जारी है। सोमवार को ओला इलेक्ट्रिक के शेयर की कीमत 89.01 रुपये थी और कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 39,256 करोड़ रुपये (लगभग $4.6 बिलियन) रहा।

ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक और वित्तीय संरचना

ओला इलेक्ट्रिक की स्थापना 2017 में ओला के सह-संस्थापक भाविश अग्रवाल द्वारा की गई थी। कंपनी का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया में नई क्रांति लाना और भारत को ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) क्षेत्र में अग्रणी बनाना था। ओला इलेक्ट्रिक ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के माध्यम से बाजार में काफी लोकप्रियता हासिल की है, लेकिन हाल ही में ग्राहक शिकायतों और सेवा की गुणवत्ता को लेकर कंपनी विवादों में घिरी हुई है।

कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में काफी धनराशि जुटाई है, जिसमें प्रमुख निवेशकों से $300 मिलियन की फंडिंग शामिल है। हालांकि, वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए कंपनी को अपने संचालन और ग्राहक सेवा को सुधारने पर ध्यान देना होगा, ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे।

भविष्य की चुनौतियाँ

ओला इलेक्ट्रिक के सामने आने वाले समय में कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें उपभोक्ताओं की शिकायतों को ठीक तरह से संभालना, बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखना, और कानूनी परेशानियों का हल निकालना प्रमुख है। इसके अलावा, कंपनी को नए निवेशकों का विश्वास जीतने और अपने ऑपरेशनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी काम करना होगा।

निष्कर्ष

ओला इलेक्ट्रिक के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, लेकिन कंपनी के पास अभी भी अपने ग्राहकों और निवेशकों का विश्वास वापस पाने का मौका है। CCPA के नोटिस का जवाब देते हुए, कंपनी को अपनी उपभोक्ता सेवाओं में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि वे भविष्य में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें।

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Whatfix ने कर्मचारियों और निवेशकों के लिए $58 मिलियन का लिक्विडिटी प्रोग्राम लॉन्च किया

whatfix

बेंगलुरु स्थित डिजिटल एडॉप्शन प्लेटफॉर्म Whatfix ने अपने कर्मचारियों और निवेशकों के लिए $58 मिलियन का लिक्विडिटी प्रोग्राम शुरू किया है। यह कंपनी द्वारा चौथा Employee Stock Option (ESOP) बायबैक है, जिससे मौजूदा और पूर्व कर्मचारी अपनी वेस्टेड यूनिट्स को बेहतरीन मूल्यांकन पर बेच सकते हैं। इस पहल के माध्यम से कर्मचारियों को अपने निवेश पर लाभ प्राप्त करने का मौका मिलेगा।

कर्मचारियों के लिए लाभकारी पहल

Whatfix के इस नवीनतम लिक्विडिटी प्रोग्राम का उद्देश्य कर्मचारियों और निवेशकों को अधिक वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करना है। कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि वे इस बायबैक प्रोग्राम के तहत कर्मचारियों के लिए प्रीमियम मूल्यांकन की पेशकश करेंगे, जो उनके Series D के मूल्यांकन से कहीं अधिक है। इसके अंतर्गत मौजूदा और पूर्व कर्मचारी अपनी वेस्टेड यूनिट्स का एक हिस्सा बेच सकेंगे, जिससे उन्हें वित्तीय लाभ होगा।

Series E फंडिंग राउंड और कंपनी का मूल्यांकन

Whatfix के इस लिक्विडिटी प्रोग्राम की घोषणा ऐसे समय में आई है, जब कंपनी ने हाल ही में $125 मिलियन का Series E फंडिंग राउंड पूरा किया है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Warburg Pincus ने किया, जिसमें SoftBank Vision Fund 2 जैसे मौजूदा निवेशकों ने भी योगदान दिया। इस नई फंडिंग के बाद कंपनी का मूल्यांकन $600 मिलियन से बढ़कर $900 मिलियन हो गया।

Whatfix का ESOP बायबैक इतिहास

यह चौथा मौका है जब Whatfix ने ESOP बायबैक की पेशकश की है। कंपनी ने पहली बार जुलाई 2021 में $4.3 मिलियन का ESOP बायबैक स्कीम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके योगदान का वित्तीय लाभ प्रदान करना था। हालांकि, कंपनी ने दूसरे और तीसरे बायबैक की घोषणा मीडिया में नहीं की थी। इस बार, बायबैक का आकार और भी बड़ा है, जो कंपनी के वित्तीय स्थायित्व और विकास की ओर इशारा करता है।

Whatfix की स्थापना और कंपनी का विकास

Whatfix की स्थापना ख़ादिम बट्टी और वारा कुमार ने की थी। यह कंपनी एक डिजिटल एडॉप्शन प्लेटफॉर्म (DAP) प्रदान करती है, जो वेब एप्लिकेशंस और सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स के लिए इन-ऐप गाइडेंस और परफॉर्मेंस सपोर्ट प्रदान करता है। इसके उपकरणों का उपयोग बड़ी कंपनियां अपनी उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने के लिए करती हैं। Whatfix के इन टूल्स का उपयोग दुनियाभर की कई बड़ी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है, जिससे यह एक अग्रणी डिजिटल एडॉप्शन प्लेटफार्म बन चुका है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति और निवेश

Whatfix ने अब तक $265 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है। कंपनी के पिछले फंडिंग राउंड्स में Series D राउंड शामिल था, जिसमें कंपनी का मूल्यांकन $600 मिलियन था। इसके बाद, Series E फंडिंग राउंड के माध्यम से कंपनी ने अपनी विकास यात्रा को और गति दी। Whatfix के निवेशकों में Warburg Pincus और SoftBank Vision Fund 2 जैसे प्रमुख निवेशक शामिल हैं, जो इसके भविष्य की संभावनाओं पर विश्वास रखते हैं।

Whatfix के उत्पाद और सेवाएं

Whatfix के उत्पाद मुख्य रूप से वेब एप्लिकेशंस और सॉफ्टवेयर के उपयोगकर्ताओं के लिए बनाए गए हैं। यह प्लेटफॉर्म कंपनियों को उनके डिजिटल टूल्स को तेजी से अपनाने और कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करता है। इसके इन-ऐप गाइडेंस फीचर के माध्यम से उपयोगकर्ता बिना किसी प्रशिक्षण के आसानी से सॉफ़्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं, जिससे कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ती है और समय की बचत होती है।

Whatfix के क्लाइंट्स में बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, जो अपनी प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करती हैं।

कर्मचारियों के लिए ESOP योजना का महत्व

कर्मचारियों के लिए ESOP (Employee Stock Option Plan) न केवल उन्हें कंपनी की सफलता में हिस्सा लेने का मौका देता है, बल्कि इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी फायदा होता है। Whatfix के इस चौथे ESOP बायबैक से यह स्पष्ट होता है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को उनकी मेहनत और योगदान के लिए पुरस्कृत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह की योजनाएं कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाती हैं और उन्हें कंपनी के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने के लिए प्रेरित करती हैं।

निष्कर्ष

Whatfix का $58 मिलियन का लिक्विडिटी प्रोग्राम कंपनी के विकास और वित्तीय स्थायित्व का प्रतीक है। यह पहल न केवल कर्मचारियों को आर्थिक लाभ प्रदान करती है, बल्कि यह कंपनी के भविष्य के प्रति निवेशकों का विश्वास भी दिखाती है। Whatfix की फंडिंग और बायबैक की यह रणनीति कंपनी को एक मजबूत और स्थायी भविष्य की ओर ले जाने में मदद कर रही है।

Whatfix के संस्थापक ख़ादिम बट्टी और वारा कुमार ने अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिस तरह से कंपनियों की कार्यक्षमता में सुधार किया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि Whatfix का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। ESOP बायबैक के माध्यम से कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने की यह पहल एक प्रेरणादायक कदम है, जो इसे अन्य स्टार्टअप्स के लिए एक आदर्श उदाहरण बनाती है।

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इन्फ़ो एज इंडिया लिमिटेड (आईईएल) के Q2 FY25 के नतीजे

Info Edge

इन्फ़ो एज इंडिया लिमिटेड (आईईएल) के Q2 FY25 के नतीजे ये रहे: कुल आय: 625.85 करोड़ रुपये, ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट: 224.81 करोड़ रुपये, टैक्स के बाद का प्रॉफ़िट: 205.13 करोड़ रुपये, ऑपरेटिंग मार्जिन: 35.92.

इन्फ़ो एज इंडिया लिमिटेड (आईईएल) के Q2 FY25 के नतीजेके Q2 FY24 के नतीजे: राजस्व में 14.3% की वृद्धि, Naukri.com और 99acres से महत्वपूर्ण योगदान

Total income: ₹676.71 Cr, a 2.93% increase

Operating profit: ₹200.24 Cr, a 529.79% increase

Profit after tax: ₹232.90 Cr, a 285.67% increase

Operating margin: 29.59% 

नई दिल्ली स्थित Info Edge, जो Naukri.com और 99acres जैसे लोकप्रिय प्लेटफार्मों की मूल कंपनी है, ने वित्तीय वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही (Q2 FY24) के लिए अपने अनऑडिटेड परिणाम जारी किए हैं। कंपनी ने इस अवधि में 14.3% की वृद्धि दर्ज की है, जिसमें संचालन से राजस्व ₹650.3 करोड़ रहा है, जो Q2 FY24 में ₹569 करोड़ था।

इन्फ़ो एज कंपनी की राजस्व वृद्धि और विभाजन
Info Edge का अधिकांश राजस्व इसके भर्ती समाधान प्लेटफार्म Naukri.com से आता है, जो कुल राजस्व का 75.65% है। Q2 FY24 में Naukri.com से राजस्व ₹492 करोड़ था, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ₹431.4 करोड़ से 14.04% अधिक है। इसके अलावा, 99acres, जो कंपनी की रियल एस्टेट वेबसाइट है, ने इस तिमाही में ₹107.4 करोड़ का योगदान दिया। अन्य प्लेटफार्मों जैसे Jeevansathi और Shiksha ने ₹50.9 करोड़ का योगदान दिया है।

पहली छमाही में कंपनी का प्रदर्शन
Info Edge ने FY24 की पहली छमाही में कुल ₹1,229.6 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष (FY24) की पहली छमाही के ₹1,092.1 करोड़ से 12.59% अधिक है। कंपनी ने FY24 की पहली तिमाही में ₹715.8 करोड़ का राजस्व पोस्ट किया था, जिसमें ₹232.2 करोड़ का शुद्ध लाभ शामिल था।

शेयर बाजार में Info Edge का प्रदर्शन
जहां कंपनी ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार किया है, वहीं Info Edge के शेयर बाजार में थोड़ा गिरावट देखी गई है। सुबह 11:31 बजे तक, Info Edge के शेयर ₹8,038.3 पर ट्रेड कर रहे थे, जो खुले बाजार मूल्य ₹8,308.90 से 2% कम है। कंपनी की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹1,04,013 करोड़ या लगभग $12.38 बिलियन है।

कंपनी और संस्थापक
Info Edge की स्थापना 1995 में संजीव बिकचंदानी द्वारा की गई थी, जो अब भारतीय डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफार्मों के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम बन चुकी है। Naukri.com, 99acres, Jeevansathi, और Shiksha जैसी वेबसाइट्स भारतीय ऑनलाइन सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। Info Edge का प्रमुख राजस्व स्रोत Naukri.com है, जो भारत की सबसे बड़ी जॉब पोर्टल है और रोजगार समाधान प्रदान करती है।

वित्तीय स्थिति और भविष्य की रणनीति
Info Edge की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में स्थिर वृद्धि दिखाई है। FY24 में Info Edge का कुल राजस्व ₹2,500 करोड़ था और शुद्ध लाभ ₹500 करोड़ था। कंपनी की रणनीति नई टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफार्मों में निवेश करके अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाना है। कंपनी का लक्ष्य भर्ती समाधान और रियल एस्टेट सेगमेंट में अपने बाजार हिस्सेदारी को और बढ़ाना है।

सकारात्मक पक्ष
Info Edge के लिए सकारात्मक पहलू यह है कि Naukri.com जैसे प्रमुख प्लेटफार्म के जरिए इसे मजबूत राजस्व मिलता है। कंपनी ने FY24 की दूसरी तिमाही में राजस्व वृद्धि दर्ज की है, और इसके विभिन्न प्लेटफार्मों से स्थिर आय मिल रही है। इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर में 99acres की मजबूत पकड़ भी Info Edge के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

नकारात्मक पक्ष
हालांकि Info Edge की राजस्व वृद्धि सकारात्मक है, लेकिन शेयर बाजार में इसके शेयरों की कीमत में गिरावट ने निवेशकों को चिंतित किया है। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफार्मों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के लिए एक चुनौती हो सकती है।

भविष्य की संभावनाएँ

Info Edge की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, कंपनी के पास आने वाले समय में और अधिक विकास की संभावनाएँ हैं। नौकरी.com और 99acres जैसे प्लेटफार्मों में वृद्धि जारी रहेगी, जबकि Jeevansathi और Shiksha को भी नई संभावनाओं के साथ और अधिक सुधार की आवश्यकता है। यदि कंपनी अपनी मौजूदा रणनीतियों को सही ढंग से लागू करती है, तो यह न केवल भारतीय बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी और अधिक सफलता हासिल कर सकती है।

कुल मिलाकर, Info Edge की वित्तीय स्थिति मजबूत है, और इसके संस्थापक और नेतृत्व के चलते कंपनी को भविष्य में और भी बड़े अवसरों का लाभ उठाने की संभावना है।

ज़ोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल की ‘मानवीय’ पहल: डिलीवरी पार्टनर्स के लिए आवाज उठाई

Startup News

ज़ोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल ने हाल ही में एक अनोखी पहल की है जो उनके नेतृत्व कौशल और संवेदनशीलता को दर्शाती है। गुरुग्राम में एक मॉल में खाद्य वितरण करते समय उन्होंने जो अनुभव किया, उसने उन्हें डिलीवरी पार्टनर्स की चुनौतियों के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। गोयल ने अपनी पत्नी ग्रेसिया मुनोज़ (जो अब इंस्टाग्राम पर गिया गोयल के नाम से जानी जाती हैं) के साथ मिलकर डिलीवरी पार्टनर्स की भूमिका निभाई। इस अनुभव ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि मॉल्स को डिलीवरी पार्टनर्स के प्रति अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। यह घटना न केवल ज़ोमैटो के भीतर बल्कि पूरे फूड डिलीवरी उद्योग में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गई है।

दीपिंदर गोयल का डिलीवरी पार्टनर अनुभव: एक नज़दीकी नज़र

दीपिंदर गोयल ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में जो वीडियो शेयर किया, वह काफी चर्चा में रहा। इस वीडियो में गोयल को ज़ोमैटो की लाल यूनिफॉर्म में एक मॉल के प्रवेश द्वार पर पहुंचते हुए देखा जा सकता है। उनका सुरक्षा गार्ड्स के साथ संक्षिप्त वार्तालाप दिखाया गया है, जिसमें उन्हें एक साइड स्टेयरकेस की ओर निर्देशित किया जाता है।

गोयल का मॉल अनुभव: चुनौतियाँ और प्रतिक्रियाएँ

गोयल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मेरे दूसरे ऑर्डर के दौरान, मुझे एहसास हुआ कि हमें सभी डिलीवरी पार्टनर्स के लिए काम करने की स्थिति में सुधार लाने के लिए मॉल्स के साथ और अधिक निकटता से काम करने की आवश्यकता है। और मॉल्स को भी डिलीवरी पार्टनर्स के प्रति अधिक मानवीय होने की ज़रूरत है।”

इस अनुभव ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया:

  • सुविधाओं का अभाव: गोयल को पता चला कि डिलीवरी पार्टनर्स के लिए कोई विशेष लिफ्ट या सुविधाएँ नहीं थीं।
  • भेदभाव का सामना: उन्हें मॉल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई और सीधे सीढ़ियों का उपयोग करने के लिए कहा गया।
  • शारीरिक श्रम: तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्हें सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ीं, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।

गोयल की पहल का प्रभाव और उद्योग की प्रतिक्रिया

गोयल की यह पहल उद्योग में व्यापक चर्चा का विषय बन गई। कई विशेषज्ञों और उद्योग के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की:

  • सकारात्मक प्रतिक्रिया: कई लोगों ने गोयल की इस पहल की सराहना की, जिसमें उन्होंने अपने कर्मचारियों की समस्याओं को समझने का प्रयास किया।
  • सुधार की मांग: कई लोगों ने मॉल्स और अन्य सार्वजनिक स्थानों से डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने की मांग की।
  • नीतिगत बदलाव: कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को हल करने के लिए नीतिगत स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है।

गोयल की पहल का दीर्घकालिक प्रभाव

दीपिंदर गोयल की यह पहल केवल एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है:

  • जागरूकता बढ़ाना: इस घटना ने डिलीवरी पार्टनर्स की समस्याओं के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाई है।
  • नीतिगत परिवर्तन: यह पहल मॉल्स और अन्य सार्वजनिक स्थानों में डिलीवरी पार्टनर्स के लिए नए नियम और सुविधाओं को लागू करने का कारण बन सकती है।
  • उद्योग मानक: यह घटना फूड डिलीवरी उद्योग में नए मानकों को स्थापित करने का कारण बन सकती है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों और सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।

ज़ोमैटो की व्यावसायिक रणनीति और वित्तीय प्रदर्शन

ज़ोमैटो ने हाल के वर्षों में अपनी व्यावसायिक रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसका सीधा प्रभाव कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर देखा जा सकता है। कंपनी ने अपने मुख्य खाद्य वितरण व्यवसाय के साथ-साथ क्विक कॉमर्स सेगमेंट पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

ज़ोमैटो का वित्तीय प्रदर्शन: एक विश्लेषण

ज़ोमैटो के वित्तीय आंकड़े कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं:

  • लाभ में वृद्धि: वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ बढ़कर 253 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कई गुना अधिक है।
  • राजस्व में उछाल: परिचालन से प्राप्त राजस्व में 74% की वृद्धि देखी गई, जो 4,206 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि ज़ोमैटो न केवल अपने बाजार हिस्से को बढ़ा रहा है, बल्कि लाभप्रदता में भी सुधार कर रहा है।

ब्लिंकिट: ज़ोमैटो की क्विक कॉमर्स रणनीति

ज़ोमैटो ने अपने क्विक कॉमर्स वर्टिकल ब्लिंकिट पर विशेष ध्यान दिया है:

  • तेज़ विकास: ब्लिंकिट ने कंपनी के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • नए बाज़ार: इस सेगमेंट ने ज़ोमैटो को ग्रॉसरी और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के वितरण बाज़ार में प्रवेश करने में मदद की है।
  • प्रतिस्पर्धा: यह सेवा ज़ोमैटो को स्विगी जैसे प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाती है।

ज़ोमैटो की भविष्य की रणनीति

कंपनी अपने राजस्व को और मजबूत करने के लिए कई नई पहल कर रही है:

  • गोइंग-आउट बिजनेस: ज़ोमैटो इस सेगमेंट पर विशेष ध्यान दे रहा है, जो रेस्तरां बुकिंग और इवेंट टिकटिंग जैसी सेवाओं को शामिल करता है।
  • पेटीएम अधिग्रहण: कंपनी ने पेटीएम की इवेंट और मूवी टिकटिंग सहायक कंपनियों का अधिग्रहण किया है।
  • नई सुविधाएँ: ज़ोमैटो ने ‘बुक नाउ, सेल एनीटाइम’ फीचर लॉन्च किया है, जो उपयोगकर्ताओं को ज़ोमैटो ऐप के माध्यम से खरीदे गए किसी भी लाइव इवेंट के टिकट बेचने की अनुमति देता है।

ज़ोमैटो का सामाजिक प्रभाव और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी

दीपिंदर गोयल के नेतृत्व में ज़ोमैटो ने अपने व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता दी है। कंपनी का मानना है कि व्यावसायिक सफलता और सामाजिक प्रभाव एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

ज़ोमैटो की श्रमिक कल्याण नीतियाँ

ज़ोमैटो ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई पहल की हैं:

  • स्वास्थ्य बीमा: कंपनी ने अपने सभी डिलीवरी पार्टनर्स के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम: नियमित रूप से सुरक्षा और कौशल विकास प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं।
  • लचीले काम के घंटे: डिलीवरी पार्टनर्स को अपने काम के घंटे चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।

ये नीतियाँ न केवल कर्मचारियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती हैं, बल्कि कंपनी के प्रति उनकी निष्ठा भी बढ़ाती हैं।

पर्यावरण संरक्षण के प्रयास

ज़ोमैटो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कई कदम उठाए हैं:

  • इको-फ्रेंडली पैकेजिंग: कंपनी ने पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग सामग्री का उपयोग शुरू किया है।
  • कार्बन फुटप्रिंट कम करना: इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि डिलीवरी के दौरान कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।

ज़ोमैटो की सामुदायिक पहलों

ज़ोमैटो ने सामाजिक विकास के लिए कुछ विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत की है:

  • खाद्य संकट पर ध्यान: ज़ोमैटो ने ‘फूड फॉर ऑल’ नामक पहल शुरू की है, जिसमें जरूरतमंद लोगों को भोजन प्रदान किया जाता है।
  • स्थानीय उत्पादकों का समर्थन: कंपनी स्थानीय खाद्य उत्पादकों और किसानों के साथ जुड़कर उनकी बिक्री में सहायता करती है।

ये कदम ज़ोमैटो की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

D2C Insider ने लॉन्च किया Super Angels Fund: नई पीढ़ी के उपभोक्ता स्टार्टअप्स को मिलेगा वित्तीय और रणनीतिक समर्थन

Startup News

भारत में तेजी से बढ़ रहे Direct-to-Consumer (D2C) स्टार्टअप्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से D2C Insider ने Super Angels Fund लॉन्च किया है। D2C Insider, जोकि एक व्यापक D2C समुदाय है और इसमें 10,000 से अधिक संस्थापक सदस्य हैं, ने इस ऑपरेटर फंड को विशेष रूप से नई पीढ़ी के उपभोक्ता क्षेत्र के लिए तैयार किया है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, उद्योग के विशेषज्ञों की सलाह, और रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।

Super Angels Fund: उद्देश्य और विशेषताएँ

Super Angels Fund का कोष Rs 25 करोड़ का है, जोकि लगभग 20-25 शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश करने की योजना बना रहा है। फंड का ध्यान pre-seed और seed स्टेज के D2C स्टार्टअप्स पर केंद्रित है, जिन्हें यह फंड न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करेगा बल्कि अनुभवी ऑपरेटर्स और निवेशकों से मार्गदर्शन भी देगा।

इस फंड की खास बात यह है कि इसके पीछे 50 से अधिक D2C संस्थापक हैं, जिनमें Aneesh Seth (Dr. Seth’s), Vedang Patel (Souled Store), Soumya Kant (Clovia), Kunal Bahl (Snapdeal), और Vivek Biyani (Broadway) जैसे उद्योग के दिग्गज शामिल हैं। इन अनुभवी संस्थापकों का समर्थन और उनकी विशेषज्ञता स्टार्टअप्स को रणनीतिक विकास में मदद करेगी।

Elevate Program: एक मजबूत प्रशिक्षण प्लेटफ़ॉर्म

D2C Insider ने अपने फ्लैगशिप Elevate Program का तीसरा कोहॉर्ट भी लॉन्च किया है। यह एक संरचित 12-सप्ताह का हाइब्रिड बूट कैंप है, जिसमें 25 से अधिक उद्योग विशेषज्ञों की देखरेख में D2C स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण दिया जाता है। इनमें Aditya Sharma (The Souled Store), Karthik Reddy (Blume Ventures), और Gaurav Khatri (Noise) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, जो उद्यमियों को अपने अनुभव और मार्गदर्शन से लाभान्वित करते हैं।

यह प्रोग्राम स्टार्टअप्स को न केवल एक मजबूत बुनियादी ढांचा प्रदान करता है बल्कि उन्हें बाजार में अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रभावी ढंग से स्थापित करने में भी मदद करता है।

फंड का निवेश दृष्टिकोण और रणनीति

Super Angels Fund का उद्देश्य pre-seed और seed स्टार्टअप्स में Rs 1 करोड़ के औसत चेक के साथ निवेश करना है। फंड के माध्यम से इन स्टार्टअप्स को पूंजी के साथ-साथ मार्गदर्शन और विशेषज्ञता प्रदान की जाएगी, ताकि वे तेजी से अपने उत्पाद और व्यवसाय को स्केल कर सकें। यह फंड अपने निवेशकों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से अन्य प्रमुख फंडों के साथ साझेदारी और सह-निवेश करने की योजना बना रहा है, जिससे स्टार्टअप्स को बहुआयामी समर्थन प्राप्त हो सके।

प्रारंभिक निवेश और पहले क्लोज की जानकारी

Super Angels Fund ने पहले ही Rs 10 करोड़ का पहला क्लोज कर लिया है और इसमें नौ स्टार्टअप्स में निवेश किया गया है। इन स्टार्टअप्स में Basil, PiknDel, Samosa Party, Crest, Assembly, Futwork, The Solved Skin, Business On Bot, और Snackibl जैसे स्टार्टअप्स शामिल हैं।

इन निवेशों के माध्यम से D2C Insider ने यह स्पष्ट किया है कि वे न केवल फंडिंग बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी स्टार्टअप्स का समर्थन करेंगे। यह सभी कंपनियाँ उपभोक्ता क्षेत्र में नवाचार कर रही हैं और उनके पास अपनी श्रेणियों में अग्रणी बनने की संभावनाएं हैं।

D2C Insider: कंपनी का परिचय

D2C Insider एक D2C संस्थापकों की बड़ी और सक्रिय समुदाय है, जो सीधे उपभोक्ताओं को सेवाएं और उत्पाद प्रदान करने वाले स्टार्टअप्स को समर्थन देती है। यह प्लेटफ़ॉर्म D2C संस्थापकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान, नेटवर्किंग, और व्यवसाय विकास में मदद करने के लिए बनाया गया है।

इसका मुख्य लक्ष्य D2C उद्यमियों को उनके व्यवसाय के विभिन्न चरणों में समर्थन देना और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करना है। समुदाय के माध्यम से संस्थापकों को विशेषज्ञ सलाह, नेटवर्किंग के अवसर, और फंडिंग तक पहुंच प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने स्टार्टअप्स को तेजी से बढ़ा सकें।

संस्थापक और उनकी दृष्टि

D2C Insider की स्थापना आशुतोष लवणिया और गौरव गुलाटी ने की थी। दोनों संस्थापकों का उद्देश्य भारत में D2C इकोसिस्टम को मजबूत बनाना और नए उद्यमियों को आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करना है। उनकी दृष्टि है कि D2C स्टार्टअप्स के लिए एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जाए, जहाँ उन्हें व्यवसाय शुरू करने से लेकर उसे बड़ा करने तक सभी चरणों में मदद मिले।

Super Angels Fund के माध्यम से ये संस्थापक नई पीढ़ी के D2C स्टार्टअप्स को उनके शुरुआती चरण में आवश्यक वित्तीय और रणनीतिक सहायता प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।

वित्तीय जानकारी

Super Angels Fund के पास Rs 25 करोड़ का कोष है, जिसे वे प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे। पहले ही Rs 10 करोड़ का क्लोज हो चुका है, और शेष राशि को भी आगामी स्टार्टअप्स में निवेश करने की योजना बनाई गई है।

फंड का फोकस D2C स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण में महत्वपूर्ण पूंजी और रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना है, ताकि वे तेजी से विकास कर सकें। फंड का दृष्टिकोण अन्य फंडों और निवेशकों के साथ साझेदारी करके स्टार्टअप्स को सर्वांगीण समर्थन देना है।

निष्कर्ष

D2C Insider का Super Angels Fund नई पीढ़ी के D2C स्टार्टअप्स के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। फंड का उद्देश्य न केवल शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, बल्कि उन्हें उद्योग के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और नेटवर्किंग के अवसर भी देना है।

इसके अलावा, Elevate Program जैसे संरचित कार्यक्रम D2C संस्थापकों को अपने व्यवसाय को सही दिशा में ले जाने में मदद करेंगे। Super Angels Fund और D2C Insider के माध्यम से, भारत में D2C इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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