💰 Wealthy ने FY25 में 72% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की, लेकिन घाटा भी बढ़कर ₹35 करोड़ तक पहुंचा 📈

Wealthy

भारत के तेजी से बढ़ते wealth management सेक्टर में एक और नाम लगातार सुर्खियाँ बटोर रहा है — Wealthy
AWI-backed यह निवेश सलाह और वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में अपने revenue scale में शानदार 72% साल-दर-साल (YoY) वृद्धि दर्ज की है।

यह ग्रोथ कंपनी के FY24 में दर्ज दो गुना विस्तार के बाद आई है, जिससे यह साबित होता है कि Wealthy अब निरंतर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। 🚀


💹 FY25 में ₹25 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू

कंपनी के Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Wealthy का operating revenue FY25 में ₹25 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY24 के ₹14.5 करोड़ से 72% की वृद्धि दर्शाता है।

Wealthy मुख्य रूप से retail investors को investment management tools, portfolio tracking, और advisory services प्रदान करता है। कंपनी का उद्देश्य है कि आम निवेशकों को प्रोफेशनल-ग्रेड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस उपलब्ध कराए जाएँ — वह भी डिजिटल और आसान रूप में। 💼📊


🏦 Brokerage से हुई सबसे अधिक कमाई

FY25 में Wealthy की आय का सबसे बड़ा हिस्सा brokerage services से आया, जिसने कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 56% योगदान दिया।
यह आय पिछले साल के ₹6.3 करोड़ से बढ़कर ₹14 करोड़ तक पहुँच गई — यानी 2.2 गुना से अधिक की वृद्धि!

दूसरी ओर, advisory services से कंपनी को ₹9 करोड़ की आय हुई, जो पिछले साल की तुलना में 24% की बढ़ोतरी है।
वहीं commission income ने भी शानदार प्रदर्शन किया — यह FY25 में ₹2 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY24 की तुलना में 110% अधिक है।

कुल मिलाकर, Wealthy का non-operating income भी FY25 में ₹10 करोड़ रहा, जिससे कंपनी की total income ₹35 करोड़ तक पहुँच गई। 💰


👥 Employee Benefit Expense सबसे बड़ा खर्चा

ज्यादातर fintech और investment advisory कंपनियों की तरह Wealthy का भी सबसे बड़ा खर्च कर्मचारी वेतन और बेनिफिट्स पर हुआ।
FY25 में यह लागत ₹37 करोड़ रही, जो कंपनी के कुल खर्च का 53% से अधिक हिस्सा है।

यह खर्च पिछले वित्त वर्ष के ₹30 करोड़ से 23% बढ़ा है।
इसके अलावा, कंपनी के अन्य खर्चे भी तेजी से बढ़े हैं —

  • ⚖️ Legal और professional fees: ₹9 करोड़ (FY24 में ₹4.3 करोड़)
  • 💸 Commission costs: ₹7.6 करोड़ (69% वृद्धि)
  • 📢 Advertising और marketing: ₹2.5 करोड़ (92% उछाल)

कुल मिलाकर, Wealthy का total expenditure FY25 में ₹70 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹49.5 करोड़ से 41% अधिक है।


📉 घाटा बढ़कर ₹35 करोड़ हुआ

हालांकि कंपनी की revenue growth काफी मजबूत रही, लेकिन खर्चों की तेज़ रफ्तार ने profitability पर दबाव डाला।
FY25 में Wealthy का net loss ₹35 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY24 के ₹24 करोड़ के घाटे से 46% ज्यादा है।

कंपनी का ROCE (-155.17%) और EBITDA margin (-152%) दर्शाता है कि फिलहाल कंपनी profitability की दिशा में संघर्ष कर रही है।

फिर भी, कंपनी का unit economics बेहतर हुआ है —
FY25 में Wealthy ने हर ₹1 की आय पर ₹2.8 खर्च किए, जो FY24 के ₹3.41 प्रति ₹1 से कम है।
इसका मतलब है कि कंपनी धीरे-धीरे efficiency सुधार रही है। ⚙️📉


🏢 कंपनी की वित्तीय स्थिति

FY25 के अंत तक, Bengaluru-स्थित Wealthy के पास ₹17.5 करोड़ के current assets थे, जिनमें से ₹7 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस के रूप में रखे गए थे।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने खर्चों को नियंत्रित रखते हुए अपनी नकदी स्थिति स्थिर बनाए रखी है, ताकि आगे के विस्तार की तैयारी की जा सके। 💵


🌐 Wealthy का बिजनेस मॉडल

Wealthy का core model भारत के retail investors के लिए बनाया गया है।
प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स को निम्नलिखित सेवाएँ मिलती हैं —

  • 📊 Investment tracking tools
  • 🧠 Expert advisory services
  • 💼 Goal-based investment planning
  • 🧾 Real-time portfolio analytics

कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य है कि भारत में financial planning और wealth management को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाया जाए।


💡 निवेशकों का भरोसा और फंडिंग

Wealthy को AWI (Alpha Wave Incubation) जैसे प्रतिष्ठित निवेशकों का समर्थन प्राप्त है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने कई दौरों में फंड जुटाकर अपने प्लेटफॉर्म को AI-driven advisory tools और data analytics के साथ अपग्रेड किया है।

हालांकि FY25 में घाटा बढ़ा है, लेकिन निवेशकों का मानना है कि यह “growth phase losses” हैं — यानी कंपनी अभी user acquisition और tech infrastructure में निवेश कर रही है।


📈 आगे की राह: ग्रोथ के साथ मुनाफे की ओर

Wealthy ने अपने FY25 के नतीजों से यह साबित कर दिया है कि उसकी revenue engine मजबूत हो रही है।
भले ही घाटा अभी चिंता का विषय है, लेकिन लगातार unit cost में गिरावट और revenue diversification यह दर्शाता है कि कंपनी मुनाफे की दिशा में बढ़ रही है।

फिनटेक सेक्टर के जानकारों का मानना है कि अगर Wealthy इसी रफ्तार से अपने customer base और technology integration को बढ़ाता है, तो अगले दो वर्षों में यह कंपनी break-even तक पहुँच सकती है। 🚀


🧭 निष्कर्ष

Wealthy ने FY25 में भले घाटा झेला हो, लेकिन उसका ग्रोथ ट्रैक रेकॉर्ड और बेहतर होती operational efficiency यह संकेत देती है कि कंपनी का भविष्य उज्ज्वल है।

भारत में financial literacy और digital investment adoption के बढ़ने के साथ Wealthy जैसी कंपनियाँ करोड़ों नए निवेशकों को स्मार्ट वित्तीय निर्णय लेने में मदद करेंगी।

📊

“Wealth creation अब सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रही — Wealthy जैसे प्लेटफॉर्म इसे हर भारतीय तक पहुँचा रहे हैं।” 💫

Read more : Dunzo के को-फाउंडर Kabeer Biswas ने छोड़ा Flipkart Minutes का साथ, अब BigBasket से जुड़ने की तैयारी! 

⚡ Dunzo के को-फाउंडर Kabeer Biswas ने छोड़ा Flipkart Minutes का साथ, अब BigBasket से जुड़ने की तैयारी! 🛒

Flipkart Minutes

भारत के quick commerce सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Dunzo के co-founder और पूर्व CEO, Kabeer Biswas ने अब Flipkart में अपनी भूमिका से इस्तीफा दे दिया है। वे Flipkart में Vice President (Quick Commerce) के तौर पर Flipkart Minutes प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे थे।

Flipkart ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की है कि अब इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व Kunal Gupta, जो कंपनी के एक पुराने और अनुभवी वाइस प्रेसिडेंट हैं, संभालेंगे। 🙌


🏁 एक साल से भी कम समय में Exit

Kabeer Biswas ने जनवरी 2025 में Flipkart से जुड़कर कंपनी की 10-मिनट डिलीवरी सर्विस “Flipkart Minutes” को लॉन्च और स्केल करने की जिम्मेदारी संभाली थी।
लेकिन अब उन्होंने इस पद से एक साल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया, जिससे Flipkart के new commerce push में एक और leadership change दर्ज हुआ है।

Flipkart का यह initiative कंपनी की traditional e-commerce operations से आगे बढ़ने की कोशिश का हिस्सा था, ताकि वह Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे स्थापित quick commerce खिलाड़ियों से मुकाबला कर सके। ⚔️


🚀 अब BigBasket में नई भूमिका की चर्चा

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, Biswas अब BigBasket से जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
स्रोतों के मुताबिक, BigBasket ने उन्हें एक औपचारिक offer letter भी भेजा है।

सूत्रों ने बताया,

“Discussions advanced stage में हैं और Biswas BigBasket के quick commerce vertical को लीड करेंगे। यह भूमिका कंपनी के fast delivery business को बढ़ाने पर केंद्रित होगी।”

अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह Biswas के करियर का एक नया अध्याय साबित होगा — Dunzo से Flipkart और अब BigBasket तक की यात्रा! 🧭


🧑‍💼 कौन हैं Kabeer Biswas?

Kabeer Biswas भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का एक जाना-पहचाना नाम हैं।
उन्होंने 2014 में Dunzo की सह-स्थापना की थी — जो भारत की शुरुआती hyperlocal delivery कंपनियों में से एक रही है।

Dunzo ने “pick up & drop anything” मॉडल के जरिए बड़ी लोकप्रियता हासिल की और बाद में Google, Reliance Retail, Lightbox जैसे निवेशकों से भी बड़ी फंडिंग जुटाई। 🚴‍♂️

हालांकि हाल के वर्षों में Dunzo को funding crunch और operational challenges का सामना करना पड़ा, जिसके बाद Biswas ने 2023 के अंत में CEO पद से इस्तीफा दिया था।


🏢 Flipkart Minutes क्या है?

Flipkart Minutes को 2025 की शुरुआत में लॉन्च किया गया था — एक 10-minute grocery and essentials delivery platform, जो Flipkart के लिए new commerce category में प्रवेश का पहला बड़ा कदम था।

कंपनी का मकसद था कि वह अपने मजबूत logistics network और customer base का उपयोग करके ultra-fast delivery बाजार में प्रवेश करे।

Kabeer Biswas के नेतृत्व में Flipkart Minutes ने Bengaluru और Hyderabad में pilot phase शुरू किया था और आगे कई अन्य शहरों में विस्तार की योजना थी।

लेकिन Biswas के अचानक इस्तीफे ने इस प्रोजेक्ट की दिशा और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 🤔


👨‍💼 अब जिम्मेदारी Kunal Gupta के कंधों पर

Flipkart ने कहा है कि Kunal Gupta, जो कंपनी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं, अब “Flipkart Minutes” की steering संभालेंगे।

कंपनी ने बयान में कहा —

“हम Kabeer के योगदान की सराहना करते हैं। अब Kunal Gupta इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे ताकि बिजनेस और ऑपरेशंस सुचारू रूप से चलते रहें।”

Kunal Gupta पहले भी Flipkart के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे हैं और माना जा रहा है कि वे इस डिवीजन को stabilize करने पर फोकस करेंगे।


🧩 Quick Commerce Sector में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत में quick commerce बाजार फिलहाल Zomato-backed Blinkit, Zepto, और Swiggy Instamart के बीच सिमटा हुआ है।
Flipkart का इसमें प्रवेश late but ambitious move माना गया था।

वहीं BigBasket भी अपनी BB Now और BB Express सेवाओं के जरिए इस सेगमेंट में तेजी से ग्रोथ कर रहा है।
अगर Biswas BigBasket से जुड़ते हैं, तो कंपनी को उनके अनुभव का बड़ा फायदा मिल सकता है — खासकर fast delivery और last-mile operations के क्षेत्र में। 🚚💨


📊 Quick Commerce का विस्तार और चुनौतियाँ

  • भारत का quick commerce बाजार 2025 तक $5 बिलियन से अधिक का होने का अनुमान है।
  • लेकिन इस सेगमेंट में unit economics, delivery cost, और supply chain optimization जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • कई स्टार्टअप्स को funding की कमी के कारण स्केल करने में दिक्कत आई है।

इस बीच, Flipkart और BigBasket जैसी बड़ी कंपनियाँ अपने मजबूत बैकएंड नेटवर्क और कैश फ्लो के दम पर इस सेक्टर को स्थायी बनाने की कोशिश में हैं। 💼


🧭 निष्कर्ष: नया मोड़, नया मौका

Kabeer Biswas का Flipkart से जाना और BigBasket में संभावित जुड़ाव भारत के quick commerce sector में power reshuffle जैसा कदम है।
Biswas का अनुभव, execution skills और Dunzo जैसी कंपनी बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें इस क्षेत्र में एक key player बनाता है।

अब देखना यह होगा कि क्या वह BigBasket को Blinkit और Zepto जैसी कंपनियों के मुकाबले में और मजबूत बना पाएंगे या नहीं।

📌 लेकिन एक बात तय है — Quick Commerce की रफ्तार भारत में थमने वाली नहीं है, और Kabeer Biswas जैसे दिग्गज इस रेस को और भी रोमांचक बना रहे हैं! ⚡🛍️

Read more : Lenskart IPO 7,278 करोड़ रुपये का मेगा ऑफर, निवेशकों को मिलेगा 17X तक रिटर्न! 

😎 Lenskart IPO 7,278 करोड़ रुपये का मेगा ऑफर, निवेशकों को मिलेगा 17X तक रिटर्न! 💰

Lenskart

भारत की जानी-मानी omnichannel eyewear retailer कंपनी Lenskart अब IPO के ज़रिए शेयर बाज़ार में कदम रखने जा रही है। कंपनी का ₹7,278 करोड़ का IPO 31 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। यह इश्यू निवेशकों और प्रमोटर्स दोनों के लिए एक bumper payday लेकर आ रहा है — क्योंकि कुछ शुरुआती निवेशक यहां से 4X से लेकर 17X तक के शानदार रिटर्न कमाने जा रहे हैं! 🚀


💼 IPO का Structure: Fresh Issue + OFS का कॉम्बो

Lenskart ने अपने Red Herring Prospectus (RHP) में बताया है कि कंपनी ₹2,150 करोड़ जुटाएगी fresh issue के ज़रिए। वहीं, मौजूदा शेयरधारक (existing shareholders) ₹5,128 करोड़ के शेयर offer-for-sale (OFS) के ज़रिए बेचेंगे।

कुल मिलाकर, कंपनी की वैल्यूएशन करीब ₹70,000 करोड़ (लगभग $8 बिलियन) तक पहुंच जाएगी। इस IPO का upper price band ₹402 प्रति शेयर तय किया गया है।


🧑‍💼 प्रमोटर्स की बड़ी कमाई: Peyush Bansal होंगे मुख्य आकर्षण

इस IPO से Lenskart के promoters और early founders को बड़ी रकम मिलने वाली है।

  • Co-founder और CEO Peyush Bansal करीब ₹824 करोड़ के शेयर बेचेंगे।
  • Co-founder Neha Bansal ₹41 करोड़ के शेयर बेचेंगी।
  • इसके अलावा उन्होंने IPO से पहले ही DMart के फाउंडर राधाकिशन दमानी की पत्नी, श्रीकांता आर. दमानी को ₹90 करोड़ के शेयर (22.38 लाख शेयर @₹402 प्रति शेयर) बेचे थे।

👥 शुरुआती टीम भी करेगी कैश-आउट

कंपनी के Co-founder Amit Chaudhary और founding team member Sumeet Kapahi भी IPO के ज़रिए अपने कुछ शेयर बेचेंगे। दोनों ही ₹115 करोड़-₹115 करोड़ के शेयरों का OFS करेंगे।


💸 विदेशी निवेशकों का Jackpot — SoftBank, Schroders, Premji Invest बने सबसे बड़े विजेता

इस IPO में Lenskart के शुरुआती निवेशकों को multi-bagger returns मिलने वाले हैं 👇

  • SoftBank Vision Fund: लगभग ₹1,026 करोड़ के शेयर बेचेगा।
    • Average cost: ₹74.26 प्रति शेयर
    • Return: 5.4X 📈
  • Schroders Capital: ₹766 करोड़ के शेयर बेचेगा।
    • Average cost: ₹40.9 प्रति शेयर
    • Return: लगभग 10X 🔥
  • Premji Invest: ₹350 करोड़ के शेयर बेचेगा।
    • Average cost: ₹24.14 प्रति शेयर
    • Return: 17X तक का record-breaking profit! 💥
  • Temasek: ₹316 करोड़ के शेयर बेचेगा।
    • Return: 4.1X
  • Kedaara Capital: ₹296 करोड़, return around 5.4X
  • Alpha Wave Ventures: ₹268 करोड़, return around 3.8X

इन सबके लिए Lenskart IPO एक golden exit opportunity साबित होने जा रहा है। 🪙


🏢 Lenskart की वैल्यूएशन और Growth Journey

Gurugram स्थित यह eyewear unicorn पिछले कुछ वर्षों में भारत की सबसे सफल consumer tech कंपनियों में से एक बन गई है।
कंपनी ने online और offline दोनों channels पर मजबूत उपस्थिति बनाई है — जिससे यह एक सच्चा “omnichannel success story” बन गया है।

Lenskart भारत के अलावा सिंगापुर, यूएई और सऊदी अरब जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से विस्तार कर रही है।
कंपनी के पास अब 2,500+ स्टोर्स हैं और यह AI-based lens recommendation technology और 3D face scanning जैसे इनोवेशन से ग्राहकों को बेहतर अनुभव दे रही है। 🕶️✨


💹 IPO से क्या होगा?

Lenskart इस IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए करेगी —

  • अपने manufacturing और supply chain इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए
  • technology investments और नए प्रोडक्ट लॉन्च के लिए
  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार को गति देने के लिए

इससे कंपनी की भारत और विदेश दोनों जगह ब्रांड वैल्यू और revenue base बढ़ने की उम्मीद है। 🌍📈


🧾 क्यों है यह IPO खास?

  1. High returns for investors – Early backers को multiple returns मिल रहे हैं।
  2. Strong growth fundamentals – Revenue और profitability दोनों में सुधार।
  3. Brand recall – Eyewear category में Lenskart का customer base 2 करोड़ से ज़्यादा।
  4. Tech-led business model – AI और AR-based fitting solutions से बेहतर experience।

📊 निष्कर्ष: क्या निवेशकों के लिए सही मौका है?

Lenskart IPO न सिर्फ भारत की consumer tech space में एक milestone है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि Indian startups अब sustainable, profitable और globally scalable बन रहे हैं।

₹7,278 करोड़ का यह मेगा IPO निवेशकों के लिए eye-catching opportunity है। 😄
जिन्होंने शुरुआती दौर में कंपनी पर भरोसा किया, अब वे 4X से 17X तक का शानदार रिटर्न हासिल करने जा रहे हैं।

📅 IPO Date: 31 अक्टूबर 2025 से खुलेगा सब्सक्रिप्शन
📍 Price Band: ₹402 प्रति शेयर
💰 Total Issue Size: ₹7,278 करोड़


👓 Bottom Line:
Lenskart ने जिस तरह tech और retail का perfect blend बनाया है, वह इसे भारत की सबसे मजबूत D2C success stories में शामिल करता है। अब IPO के ज़रिए इसकी कहानी एक नए chapter में प्रवेश करने जा रही है — और निवेशकों के लिए ये मौका “देखने लायक” है! 😉✨

Read more :💰 Thyrocare में बड़ा बदलाव! Docon Technologies ने बेचे ₹667.7 करोड़ के शेयर, हिस्सेदारी 71% से घटकर 61% 📉

💰 Thyrocare में बड़ा बदलाव! Docon Technologies ने बेचे ₹667.7 करोड़ के शेयर, हिस्सेदारी 71% से घटकर 61% 📉

Thyrocare

भारतीय डायग्नोस्टिक सेक्टर की प्रमुख कंपनी Thyrocare Technologies से जुड़ी एक बड़ी डील इस हफ्ते बाजार में सुर्खियों में रही।
कंपनी के प्रमोटर एंटिटी Docon Technologies Pvt Ltd ने 53.33 लाख इक्विटी शेयर, यानी कंपनी की कुल पेड-अप कैपिटल का लगभग 10%, ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के ज़रिए बेच दिए।

यह ब्लॉक डील 24 अक्टूबर 2025 को हुई, जिसकी कुल वैल्यू रही ₹667.7 करोड़, यानी प्रति शेयर औसत कीमत ₹1,252 रही।
यह जानकारी कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में साझा की है।


📊 Docon की हिस्सेदारी 71% से घटकर 61% — अब भी प्रमोटर की भूमिका में बना रहेगा 🤝

इस डील के बाद Docon Technologies की हिस्सेदारी Thyrocare में 71% से घटकर 61% रह गई है।
फिर भी, कंपनी अब भी Thyrocare की प्रमोटर एंटिटी बनी रहेगी और उसके पास अब भी 3.2 करोड़ शेयर मौजूद हैं।

Docon Technologies, दरअसल, PharmEasy की प्रमोटर एंटिटी है, जो Thyrocare की पेरेंट कंपनी API Holdings के अधीन आती है।


🏦 Mutual Funds की जोरदार भागीदारी — ICICI और Aditya Birla सबसे बड़े खरीदार 💼

इस ब्लॉक सेल में भारतीय म्यूचुअल फंड्स ने बड़ी दिलचस्पी दिखाई।
मुख्य खरीदारों में शामिल रहे देश के कई बड़े निवेश संस्थान 👇

  • 🏦 ICICI Prudential Mutual Fund – 17.49 लाख शेयर खरीदे, वैल्यू ₹218.9 करोड़
  • 💼 Aditya Birla Sun Life Mutual Fund – 10.33 लाख शेयर, वैल्यू ₹129.3 करोड़
  • 🌏 HSBC Mutual Fund Midcap Fund – 6.66 लाख शेयर, ₹83.4 करोड़
  • 🏢 HDFC Mutual Fund – 4.44 लाख शेयर, ₹55.5 करोड़
  • 💹 Eastspring Investments India Consumer Equity Open Ltd – 3.19 लाख शेयर, ₹40 करोड़

इनके अलावा कई अन्य संस्थागत निवेशकों ने भी इस ओपन मार्केट सेल में हिस्सेदारी खरीदी।

यह निवेश संस्थागत विश्वास को दर्शाता है कि Thyrocare का बिज़नेस मॉडल और विकास रफ्तार लंबे समय तक टिकाऊ है।


🧭 Leadership Transition: PharmEasy-Thyrocare ग्रुप में अहम बदलाव 🔄

यह स्टेक सेल ऐसे समय हुई है जब PharmEasy-Thyrocare ग्रुप के अंदर लीडरशिप ट्रांज़िशन चल रहा है।
अगस्त 2025 में, PharmEasy के को-फाउंडर और CEO सिद्धार्थ शाह ने अपने एग्जीक्यूटिव रोल से इस्तीफा देकर Vice Chairman की भूमिका संभाली थी।

उनके बाद Thyrocare के CEO राहुल गুহा (Rahul Guha) को API Holdings — जो PharmEasy और Thyrocare दोनों की पेरेंट कंपनी है — का नया MD और CEO नियुक्त किया गया।

राहुल गুহा अब Thyrocare का नेतृत्व जारी रख रहे हैं, साथ ही API के अधीन व्यवसायों को भी संभाल रहे हैं।
इसे निवेशकों ने सकारात्मक नेतृत्व बदलाव के रूप में देखा है, जिससे कंपनी के फोकस और ग्रोथ स्ट्रैटेजी और मज़बूत होने की उम्मीद है।


📈 Thyrocare की मजबूत तिमाही — रेवेन्यू 22% बढ़ा, प्रॉफिट में 81% की छलांग 🚀

स्टेक सेल के साथ ही Thyrocare ने अपनी FY26 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) के वित्तीय नतीजे भी घोषित किए, जो बेहद मजबूत रहे।

  • 💵 रेवेन्यू: Q2 FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹216.5 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹177.36 करोड़ से 22% ज्यादा है।
  • 📈 प्रॉफिट: Thyrocare का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) Q2 FY26 में 81% बढ़कर ₹47.9 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹26.4 करोड़ था।

💹 H1 FY26 में भी शानदार प्रदर्शन — मुनाफा 71% बढ़ा 💥

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही (H1 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन बेहद सकारात्मक रहा।
Thyrocare ने इस अवधि में ₹86.1 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले वर्ष ₹50.4 करोड़ (H1 FY25) की तुलना में 71% की वृद्धि दर्शाता है।

कंपनी की निरंतर वृद्धि यह साबित करती है कि कोविड के बाद डायग्नोस्टिक इंडस्ट्री ने सस्टेनेबल ग्रोथ ट्रैक पकड़ लिया है।


🧬 Thyrocare की रणनीति: टेक्नोलॉजी और रीच पर फोकस 🔬

Thyrocare लंबे समय से अपने टेक-ड्रिवन डायग्नोस्टिक मॉडल और वाइड नेटवर्क के लिए जानी जाती है।
कंपनी अब डिजिटल डायग्नोस्टिक्स और होम कलेक्शन सेगमेंट में भी विस्तार कर रही है।

  • 🧪 PharmEasy के इकोसिस्टम से जुड़ने के बाद, Thyrocare ने डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स और AI-सपोर्टेड डायग्नोस्टिक रिपोर्टिंग पर फोकस बढ़ाया है।
  • 📦 साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाकर कंपनी नए ग्राहक समूहों तक पहुँच रही है।

💼 बाजार दृष्टिकोण: Promoter Stake Sale को निवेशक देख रहे हैं सकारात्मक संकेत 📊

मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, Docon द्वारा हिस्सेदारी घटाने का यह कदम PharmEasy-Thyrocare ग्रुप की कैपिटल री-स्ट्रक्चरिंग स्ट्रैटेजी का हिस्सा है।
कई निवेशक इसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

कंपनी के स्टॉक में इस घोषणा के बाद हल्का उतार-चढ़ाव जरूर देखा गया, लेकिन लंबी अवधि में ग्रोथ आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।


🔍 निष्कर्ष: Thyrocare का हेल्थ चेकअप रिपोर्ट — “Strong & Stable” 🧠

कुल मिलाकर, Docon Technologies की हिस्सेदारी में यह कमी ग्रुप के भीतर एक वित्तीय समायोजन के रूप में देखी जा रही है, न कि किसी संकट संकेत के रूप में।
कंपनी का लगातार बढ़ता रेवेन्यू, मजबूत प्रॉफिट और टेक्नोलॉजी-फर्स्ट अप्रोच इसे भारत के सबसे भरोसेमंद डायग्नोस्टिक ब्रांड्स में बनाए रखता है।

📊 अगर कंपनी इसी तरह ग्रोथ और प्रॉफिट दोनों में संतुलन बनाए रखती है, तो आने वाले क्वार्टरों में Thyrocare के लिए और भी उजला भविष्य नजर आ रहा है। 🌟


🔗 पढ़ते रहिए FundingRaised.in — जहाँ हम लाते हैं हर हफ्ते की सबसे बड़ी Startup, IPO, और Funding Updates हिंदी में, आसान भाषा में! 🚀

Read more : इस हफ्ते सिर्फ 8 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $347.4 मिलियन , पिछले हफ्ते से 50% गिरावट 

🇮🇳 इस हफ्ते सिर्फ 8 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $347.4 मिलियन 💸, पिछले हफ्ते से 50% गिरावट 📉

भारतीय स्टार्टअप्स

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में फंडिंग एक्टिविटी कुछ धीमी रही।
कुल 8 स्टार्टअप्स ने मिलाकर $347.44 मिलियन (करीब ₹2,900 करोड़) जुटाए — जिनमें 3 ग्रोथ-स्टेज और 5 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं।

पिछले हफ्ते के मुकाबले यह आँकड़ा लगभग 50% की गिरावट दर्शाता है, क्योंकि 30 स्टार्टअप्स ने तब करीब $694.75 मिलियन फंडिंग जुटाई थी।


💼 Growth-Stage Deals: Uniphore की धमाकेदार $260M फंडिंग ने मचाया धमाल 🚀

इस हफ्ते ग्रोथ और लेट-स्टेज कैटेगरी में कुल $326 मिलियन जुटाए गए।
इसमें सबसे बड़ी डील रही Conversational Automation Platform Uniphore की, जिसने अपने Series F राउंड में $260 मिलियन जुटाए।

इस राउंड में NVIDIA, AMD, Snowflake, Databricks जैसे दिग्गज टेक निवेशकों ने हिस्सा लिया।
यह भारतीय SaaS इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा बूस्ट माना जा रहा है।

दूसरी बड़ी डील रही UnifyApps की, जिसने WestBridge Capital के नेतृत्व में $50 मिलियन की Series B फंडिंग हासिल की। इसमें ICONIQ Capital समेत अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया।

वहीं Healthy Snacking Brand Wonderland Foods ने भी अपनी पहली फंडिंग में ₹140 करोड़ ($16 मिलियन) जुटाए, जिसका नेतृत्व Asha Ventures और British International Investment (BII) ने किया।


🌱 Early-Stage Deals: पाँच उभरते स्टार्टअप्स को शुरुआती फंडिंग 🌟

इस हफ्ते पाँच अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा 👇

  • 💸 CapitalXB: ट्रेड फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म ने $15 मिलियन (इक्विटी + डेब्ट) जुटाए।
  • 🌊 Megaliter Varunaa: वेस्टवॉटर मैनेजमेंट स्टार्टअप ने ₹15 करोड़ ($1.7 मिलियन) की सीड फंडिंग पाई।
  • 🤖 Fundamento: एजेंटिक AI प्लेटफॉर्म ने IIFL Fintech Fund की अगुवाई में $1.9 मिलियन (₹16 करोड़) जुटाए।
  • 👕 Stylox Fashion: डेनिम और कैज़ुअल वियर ब्रांड ने Fashion Entrepreneur Fund (FEF) से ₹3 करोड़ जुटाए।
  • 🏏 Michezo Sport: स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप ने $2.5 मिलियन हासिल किए।

🏙️ City-Wise Deals: बेंगलुरु और दिल्ली-NCR में सबसे ज्यादा हलचल 💼

शहरवार आँकड़ों के अनुसार —

  • Bengaluru और Delhi-NCR ने इस हफ्ते 3-3 डील्स दर्ज कीं।
  • Mumbai और Hyderabad से एक-एक स्टार्टअप ने फंडिंग जुटाई।

🤖 Segment-Wise Deals: AI स्टार्टअप्स का दबदबा जारी! 🧠

इस हफ्ते सबसे आगे रहे AI सेक्टर के स्टार्टअप्स, जिनमें 3 बड़ी डील्स हुईं।
इसके अलावा Foodtech, Fintech, Cleantech, E-commerce और Sportstech सेगमेंट्स ने भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।


💡 Series-Wise Deals Breakdown 📊

  • Seed Rounds: 4 डील्स
  • Series B & Pre-Series A: 2 डील्स
  • Series F: 1 बड़ी डील (Uniphore)

इससे साफ है कि निवेशक अभी भी शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स पर भरोसा जता रहे हैं।


📉 साप्ताहिक तुलना: Funding में 50% की गिरावट 📊

इस हफ्ते फंडिंग $347.4 मिलियन रही, जबकि पिछले हफ्ते यह $694.75 मिलियन थी — यानी 50% की कमी
पिछले आठ हफ्तों का औसत देखें तो प्रति सप्ताह लगभग $322 मिलियन और 25 डील्स दर्ज की गईं।


👥 Key Hirings & Departures: बड़े बदलाव टेक और पेमेंट सेक्टर में 🔄

  • BharatPe ने अपने नए Chief Technology Officer (CTO) के रूप में Ajit Kumar को नियुक्त किया है।
  • ONDC (Open Network for Digital Commerce) ने पूर्व Paytm एक्जीक्यूटिव Rohit Lohia को Chief Business Officer (CBO) बनाया है।
  • वहीं MobiKwik के COO (Consumer Payments) Mohit Narain ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया।

💰 Fund Launches: India Quotient ने ₹1,132 करोड़ का नया Fund V लॉन्च किया 🚀

अर्ली-स्टेज वेंचर कैपिटल फर्म India Quotient ने अपना पाँचवाँ फंड लॉन्च किया है, जिसमें $129 मिलियन (₹1,132 करोड़) जुटाए गए।
यह फंड pre-seed, seed और idea-stage स्टार्टअप्स में निवेश करेगा, जिनमें शामिल होंगे:

  • SaaS
  • Fintech
  • D2C ब्रांड्स
  • Agritech
  • Content Platforms

इस फंड के तहत निवेश टिकट ₹1 करोड़ से ₹15 करोड़ तक होंगे।


🤝 नई पार्टनरशिप्स और लॉन्चेज 🔔

  • 💳 CCAvenue x Ujjivan SFB: पेमेंट गेटवे सॉल्यूशंस पार्टनरशिप
  • Bolt.Earth x Atul Greentech: होम चार्जिंग प्रोग्राम लॉन्च
  • 🔐 NOVA x Tata Elxsi: “Kavach 4.0” डेवलपमेंट पार्टनरशिप
  • 💰 Jar x Atlys: डिजिटल गोल्ड रेफ़रल रिवार्ड प्रोग्राम
  • 💸 Zoho Pay: जल्द ही लॉन्च होगा कंज्यूमर पेमेंट्स ऐप

📊 Financial Results इस हफ्ते: कई स्टार्टअप्स ने दिखाया दम 💼

  • Qure.ai: घाटा 87% बढ़कर ₹90 करोड़
  • Yubi: ₹660 करोड़ का रेवेन्यू; EBITDA में 55% सुधार
  • Furlenco: ₹130 करोड़ के घाटे से मुनाफे में वापसी
  • Homelane: ₹748 करोड़ रेवेन्यू, अनुमान से कम
  • Beardo: रेवेन्यू ₹200 करोड़ पार; प्रॉफिट 3.6X बढ़ा
  • Easebuzz: रेवेन्यू 2.3X, PAT ₹19 करोड़
  • Innoviti: ₹143 करोड़ रेवेन्यू, ₹62 करोड़ घाटा

News Flash: बड़ी सुर्खियाँ इस हफ्ते की 📰

  • 💥 WazirX 16 महीने बाद 24 अक्टूबर से ट्रेडिंग दोबारा शुरू करेगा
  • 🇮🇳 MeitY ने AI और Deepfake कंटेंट के लिए नए लेबलिंग रूल्स प्रस्तावित किए
  • Ola Electric ने अपने CEO पर FIR को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया
  • 🚛 Shadowfax को ₹2,500 करोड़ के IPO के लिए SEBI की मंजूरी
  • 💸 Zoho Pay जल्द लाएगा कंज्यूमर पेमेंट ऐप

🧾 सारांश: फंडिंग घटी लेकिन इनोवेशन बरकरार 🔥

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $347.44 मिलियन जुटाए, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले आधे से भी कम है।
फिर भी, Uniphore, Yubi, और India Quotient जैसी खबरों ने इकोसिस्टम में जोश बनाए रखा।

🔗 पढ़ते रहिए FundingRaised.in — भारत के स्टार्टअप्स, फंडिंग, और इनोवेशन की हर बड़ी अपडेट सबसे पहले! 🚀

Read more : Fintech यूनिकॉर्न Yubi ने बढ़ाई रफ्तार! FY25 में 36% Revenue Growth, घाटा भी घटा 

💰 Fintech यूनिकॉर्न Yubi ने बढ़ाई रफ्तार! FY25 में 36% Revenue Growth, घाटा भी घटा 🚀

Yubi

भारत की तेजी से बढ़ती Fintech कंपनियों में से एक Yubi (पहले CredAvenue) ने FY25 में शानदार प्रदर्शन दिखाया है। कंपनी ने अपने ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 36% की साल-दर-साल (YoY) वृद्धि दर्ज की है और साथ ही अपनी EBITDA हानि को 55% तक कम कर दिया है। यानी कंपनी ने न सिर्फ कमाई बढ़ाई, बल्कि अपने घाटे को भी घटाया है।


📈 रेवेन्यू में 36% की छलांग

Yubi की Revenue from Operations FY25 में ₹660 करोड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 के ₹484 करोड़ से काफी अधिक है।
यह वृद्धि कंपनी के डेब्ट मार्केटप्लेस बिजनेस में बढ़ती डिमांड और पार्टनरशिप्स का नतीजा है।

कंपनी का कहना है कि उसके प्लेटफ़ॉर्म पर बैंकों और NBFCs के बीच बड़ी संख्या में ट्रांज़ैक्शंस हुईं, जिससे कुल रेवेन्यू में उछाल आया।


🏦 Yubi क्या करती है?

Yubi एक Debt Marketplace और Infrastructure Platform है जो एंटरप्राइजेज को बैंकों और NBFCs से जोड़ता है
इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए कंपनियाँ

  • टर्म लोन,
  • वर्किंग कैपिटल,
  • और अन्य डेब्ट प्रोडक्ट्स के लिए फंडिंग प्राप्त कर सकती हैं।

कंपनी का मुख्य रेवेन्यू सोर्स है ट्रांज़ैक्शन फीस, जो सफल लोन क्लोजर पर मिलती है। FY25 में यह हिस्सा कुल रेवेन्यू का 48% (₹318 करोड़) रहा, जिसमें 55% की वृद्धि दर्ज की गई।


💼 अन्य इनकम सोर्स भी मजबूत

FY25 में Yubi ने कई अन्य स्रोतों से भी कमाई की —

  • Platform Services: ₹98 करोड़
  • Collection Services: ₹181 करोड़
  • Corporate Database Services: ₹66 करोड़
  • Interest Income: ₹53 करोड़

इन सबको जोड़कर कंपनी की कुल इनकम ₹713 करोड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वर्ष ₹562 करोड़ थी।


💸 खर्चे और घाटे की स्थिति

Yubi के लिए सबसे बड़ा खर्च रहा Employee Benefits, जो कुल खर्च का लगभग 40% है।
FY25 में यह खर्च ₹439 करोड़ तक बढ़ गया, जिसमें ₹160 करोड़ का ESOP (Employee Stock Option) खर्च शामिल है।

इसके अलावा,

  • IT Cost: ₹103 करोड़
  • Sales & Marketing: ₹32 करोड़

कुल मिलाकर कंपनी का Total Expenditure FY25 में ₹1,116 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹939 करोड़ से ज्यादा है।

इस कारण कंपनी ने ₹416 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया, लेकिन अगर नॉन-कैश खर्च (जैसे ESOP, डिप्रिसिएशन आदि) को हटाया जाए, तो कंपनी का Adjusted EBITDA Loss 55% घटकर ₹68.8 करोड़ रह गया।


🌍 इंटरनेशनल एक्सपैंशन में जबरदस्त ग्रोथ

Yubi अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी का कहना है कि उसका MENA (Middle East and North Africa) बिजनेस 200% बढ़ा है।
साथ ही कंपनी अब Southeast Asia में तेजी से विस्तार कर रही है और आने वाले साल में अमेरिका (U.S.) में भी एंट्री की तैयारी में है।

कंपनी का प्लेटफ़ॉर्म हर दिन करीब 80,000 Loan Transactions प्रोसेस करता है — जो इसकी स्केलेबिलिटी और भरोसे को दर्शाता है।


🦄 Unicorn Journey और निवेशक

Yubi ने अब तक $250 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।
इसमें उसका बड़ा राउंड था $135 मिलियन का Series B, जिसने कंपनी को Unicorn Club में पहुंचा दिया था।

Yubi के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं —

  • Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India)
  • TVS Capital
  • Lightspeed
  • B Capital
  • Lightrock
  • Insight Luxembourg
  • Vivitri Capital

इन सभी निवेशकों का विश्वास इस बात को दर्शाता है कि Yubi भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम में लंबी दौड़ का खिलाड़ी बनने की राह पर है।


🧭 आगे की रणनीति

कंपनी का फोकस अब प्रॉफिटेबिलिटी और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्केलिंग पर है।
Yubi आने वाले समय में अपने प्लेटफॉर्म को और अधिक ऑटोमेटेड और डेटा-सेंट्रिक बनाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि

  • लोन अप्रूवल्स तेज़ हों,
  • बैंक-एंटरप्राइज कनेक्शन बेहतर बने,
  • और क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन आसान हो सके।

🏁 निष्कर्ष

FY25 Yubi के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ —
जहाँ कंपनी ने न केवल अपनी Revenue Growth 36% तक बढ़ाई, बल्कि EBITDA घाटा 55% घटाने में भी सफलता हासिल की।

यह प्रदर्शन दिखाता है कि भारतीय Fintech सेक्टर में अब प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में मजबूत कदम उठाए जा रहे हैं।
Yubi की यह ग्रोथ स्टोरी आने वाले समय में भारतीय फिनटेक इंडस्ट्री के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है। 🚀

Read more : Qure.ai ने FY25 में बढ़ाई रफ्तार, पर घाटे ने बढ़ाई चिंता! 

🧠 Qure.ai ने FY25 में बढ़ाई रफ्तार, पर घाटे ने बढ़ाई चिंता! 💸

Qure.ai

📊 रेवेन्यू 24.5% बढ़ा, लेकिन लॉस 87% उछलकर ₹90 करोड़ पहुंचा

मुंबई स्थित AI-हेल्थटेक स्टार्टअप Qure.ai ने वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) में अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, लेकिन कंपनी का घाटा लगभग दोगुना होकर ₹90 करोड़ तक पहुंच गया। यह साफ दिखाता है कि भले ही कंपनी का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा हो, पर उसके खर्चों का दबाव अब भी बना हुआ है।


💰 रेवेन्यू में 24.5% की बढ़ोतरी

कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 24.5% की वृद्धि हुई और यह FY24 के ₹141 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹175.5 करोड़ हो गया।
📦 Qure.ai की मुख्य आय उसके AI-ड्रिवन रेडियोलॉजी सॉल्यूशंस से आती है, जिनसे डॉक्टरों को टीबी, फेफड़ों के कैंसर, स्ट्रोक जैसी बीमारियों का निदान करने में मदद मिलती है।

इन सॉल्यूशंस की बिक्री FY25 में ₹151 करोड़ तक पहुंची, जो कुल रेवेन्यू का 86% हिस्सा रही।
बाकी रेवेन्यू हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स की बिक्री से आया।


🌍 इंटरनेशनल मार्केट बनी ताकत

Qure.ai की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन रहा उसका ग्लोबल मार्केट

  • भारत के बाहर से कंपनी ने FY25 में ₹174 करोड़ की कमाई की, जो 39.6% YoY ग्रोथ दर्शाती है।
  • कुल रेवेन्यू का 99% हिस्सा ओवरसीज मार्केट्स से आया।
  • वहीं, भारतीय बाजार से आय में 80% की गिरावट आई — FY24 के मुकाबले FY25 में यह सिर्फ ₹1.3 करोड़ रही।

इससे साफ है कि Qure.ai फिलहाल भारत की तुलना में विदेशों में ज्यादा मजबूत पकड़ बना चुका है।


🧾 खर्चों का बोझ बढ़ता जा रहा है

कंपनी के कुल खर्च FY25 में ₹279 करोड़ रहे, जो FY24 के ₹201 करोड़ से 39% अधिक हैं।
सबसे बड़ा हिस्सा Employee Benefits पर गया —

  • कर्मचारियों से जुड़ा खर्च FY25 में ₹133 करोड़ तक पहुंच गया (FY24 में ₹109 करोड़)।
  • यानी कुल खर्च का 48% हिस्सा सिर्फ वेतन और स्टाफ खर्चों पर गया।

अन्य प्रमुख खर्चों में —

  • ⚖️ Legal & Professional Fees: ₹37 करोड़
  • ☁️ Cloud Computing Charges: ₹18 करोड़ (लगभग दोगुना)
  • 🏗️ Depreciation: ₹22 करोड़ (FY24 के ₹12 करोड़ से लगभग 83% की बढ़ोतरी)

💡 कुल मिलाकर, कंपनी का खर्च उसकी आय से कहीं ज्यादा तेज़ी से बढ़ा है।


📉 घाटे में 87% की छलांग

कुल खर्च बढ़ने के कारण Qure.ai का घाटा FY25 में ₹90 करोड़ पहुंच गया, जो FY24 के ₹48 करोड़ से लगभग 87.5% ज्यादा है।

  • कंपनी का EBITDA मार्जिन -45.3% पर रहा (अब भी गहरा घाटा)।
  • ROCE -20.99%, जो बताता है कि निवेश पर रिटर्न अभी भी नकारात्मक है।

💸 कंपनी ने FY25 में हर ₹1 की ऑपरेटिंग इनकम के लिए ₹1.59 खर्च किए, यानी ग्रोथ के साथ एफिशिएंसी अब भी चुनौती बनी हुई है।


🏦 बैलेंस शीट पर स्थिति

FY25 में कंपनी के पास ₹406 करोड़ के करेंट एसेट्स थे, जिनमें शामिल हैं —

  • ₹35 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस
  • बाकी रकम रिसीवेबल्स और अन्य एसेट्स में

यह दर्शाता है कि कंपनी के पास अगले कुछ वर्षों के लिए ऑपरेशनल स्थिरता बनाए रखने की पर्याप्त क्षमता है।


💸 निवेश और ओनरशिप स्ट्रक्चर

TheKredible के मुताबिक, Qure.ai अब तक कुल $121 मिलियन (लगभग ₹1,000 करोड़) फंडिंग जुटा चुकी है।
इसके प्रमुख निवेशक हैं —

  • Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India)
  • HealthQuad
  • Novo Holdings

कंपनी के संस्थापक और CEO, प्रशांत वारियर (Prashant Warier) के पास कंपनी की 3.55% हिस्सेदारी है।


🧬 Qure.ai क्या करती है?

Qure.ai का AI प्लेटफॉर्म डॉक्टरों को एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य रेडियोलॉजी रिपोर्ट्स में तेज़ और सटीक विश्लेषण करने में मदद करता है।
कंपनी के प्रोडक्ट्स दुनिया भर के अस्पतालों, NGOs और सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियों में इस्तेमाल हो रहे हैं।

इनके प्रमुख सॉल्यूशंस —

  • qXR: फेफड़ों की बीमारियों और टीबी के निदान में मदद
  • qER: स्ट्रोक, हेमरेज और अन्य न्यूरोलॉजिकल स्कैन के लिए
  • qQuant: कैंसर स्कैन और प्रोग्नोसिस मॉनिटरिंग में सहायक

🌐 कंपनी के क्लाइंट्स में WHO, Gates Foundation और कई अंतरराष्ट्रीय हेल्थ संस्थाएं शामिल हैं।


🧩 FundingRaised विश्लेषण

मेट्रिकFY25FY24बदलाव
ऑपरेटिंग रेवेन्यू₹175.5 करोड़₹141 करोड़🔼 +24.5%
कुल खर्च₹279 करोड़₹201 करोड़🔼 +39%
नेट लॉस₹90 करोड़₹48 करोड़🔼 +87.5%
EBITDA मार्जिन-45.3%-34.1%⚠️ गिरावट
ROCE-20.99%-14.8%⚠️ नकारात्मक

🔍 निष्कर्ष

Qure.ai का FY25 प्रदर्शन बताता है कि कंपनी की ग्लोबल मौजूदगी मजबूत है और AI-ड्रिवन हेल्थकेयर सॉल्यूशंस में इसकी पकड़ गहरी हो रही है।
लेकिन दूसरी तरफ, बढ़ते खर्च और बढ़ता घाटा कंपनी के प्रॉफिटेबिलिटी रोडमैप के लिए बड़ी चुनौती हैं।

💬 अगर Qure.ai को अगले स्तर पर जाना है, तो उसे अपने खर्चों को नियंत्रित कर स्केलेबल रेवेन्यू मॉडल अपनाना होगा।
AI-हेल्थ सेक्टर में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, और ऐसे में फाइनेंशियल हेल्थ को मजबूत रखना ही सफलता की कुंजी होगी।

Read more: Innoviti Technologies ने FY25 में दिखाई रफ्तार! 

💳 Innoviti Technologies ने FY25 में दिखाई रफ्तार! 🚀

Innoviti Technologies

📈 35% बढ़ी रेवेन्यू, लेकिन घाटा अब भी ₹62 करोड़

फिनटेक और पेमेंट गेटवे सेक्टर में अपनी पहचान बना चुकी Innoviti Technologies ने वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) में आखिरकार ग्रोथ की रफ्तार पकड़ ली है। कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू 35% बढ़कर ₹143 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 में ₹106 करोड़ थी। हालांकि, कंपनी का घाटा अब भी बड़ा है — FY25 में ₹62 करोड़ का नेट लॉस, जो पिछले साल की तुलना में 11% कम है।


💰 रेवेन्यू में उछाल, घाटे में थोड़ी कमी

Innoviti के Revenue Growth का मुख्य कारण रहा इसके पेमेंट गेटवे और पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) सेवाओं की मांग में बढ़ोतरी। कंपनी की सर्विस फीस से आय में जबरदस्त उछाल देखने को मिला —

  • सर्विस फीस FY24 के ₹84 करोड़ से बढ़कर ₹123 करोड़ तक पहुंच गई (47% ग्रोथ)।
  • कुल रेवेन्यू में इसका हिस्सा 86% रहा।
  • वहीं, बाकी 14% रेवेन्यू लीज रेंटल्स (₹19 करोड़) से आया।

अगर कंपनी की टोटल इनकम (Non-operating activities समेत) देखें तो FY25 में यह ₹144 करोड़ पर रही।


🧾 खर्चों का दबाव बरकरार

रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद Innoviti के खर्चों में भी इज़ाफा हुआ। कंपनी का कुल खर्च FY25 में ₹207 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹180 करोड़ था — यानी करीब 15% की बढ़ोतरी।

इन खर्चों में सबसे बड़ा योगदान रहा:

  • सबवेंशन और सर्विस फीस: कुल खर्च का 40% हिस्सा, FY25 में ₹82.5 करोड़ (FY24 में ₹44 करोड़ से 88% की वृद्धि)
  • कर्मचारी लाभ खर्च (Employee Benefits): FY25 में ₹43 करोड़, जो FY24 के ₹53 करोड़ से 19% घटा
  • डिप्रिसिएशन (Depreciation): ₹33 करोड़, जो पिछले वर्ष से 32% अधिक
  • Advertisement, Sub-contractor और Overheads: कुल ₹49 करोड़

💡 इन्वेस्टर्स के अनुसार, खर्चों पर नियंत्रण के बावजूद कंपनी को अब भी अपनी कॉस्ट स्ट्रक्चर को और हल्का करने की जरूरत है।


📉 घाटा कम हुआ लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं

Innoviti ने FY25 में नेट लॉस 11% घटाकर ₹62 करोड़ कर दिया (FY24 में ₹70 करोड़)।

  • कंपनी का EBITDA लॉस ₹26 करोड़ रहा।
  • EBITDA मार्जिन -18.2% (FY24 के -32.1% से बेहतर)।
  • वहीं, ROCE (Return on Capital Employed) -62.77% पर रहा।

कंपनी ने बताया कि घाटे में कमी का कारण ऑपरेशनल एफिशिएंसी और Employee Cost में कटौती रही।


🏦 बैलेंस शीट पर नजर

FY25 में Innoviti की कुल एसेट्स ₹128 करोड़ पर स्थिर रहीं।

  • करंट एसेट्स ₹100 करोड़, जिनमें
    • ₹41 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल हैं।

💬 यह दर्शाता है कि कंपनी के पास आने वाले महीनों में ऑपरेशनल स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी है।


💸 निवेश और ओनरशिप स्ट्रक्चर

TheKredible के अनुसार, Innoviti अब तक कुल $158 मिलियन (लगभग ₹1,300 करोड़) फंडिंग जुटा चुकी है।

  • इसके प्रमुख निवेशक हैं Bessemer Venture Partners और FMO
  • कंपनी के फाउंडर राजीव अग्रवाल (Rajeev Agrawal) के पास 10% ओनरशिप है।

🏁 IPO की तैयारी में जुटी कंपनी

राजीव अग्रवाल ने हाल ही में बताया कि Innoviti अगले दो क्वार्टर में ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की उम्मीद कर रही है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी का IPO प्लानिंग स्टेज पर है और 12 महीनों के अंदर पब्लिक होने का लक्ष्य तय किया गया है।

💬 “हमारा फोकस है कि Innoviti अगले साल तक प्रॉफिट में आए और निवेशकों के लिए वैल्यू क्रिएट करे,” — राजीव अग्रवाल, फाउंडर & CEO, Innoviti Technologies


⚔️ लेकिन चुनौतियां बरकरार…

भले ही आंकड़े उम्मीद जगाते हों, लेकिन फिनटेक सेक्टर में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं ज्यादा तीव्र हो चुकी है।
Razorpay, Pine Labs, Cashfree जैसे दिग्गज खिलाड़ी पहले से मजबूत पोजीशन में हैं। Innoviti के लिए चुनौती होगी कि वह

  • अपने मार्जिन सुधार सके,
  • और रेवेन्यू ग्रोथ को लगातार बनाए रखे

कंपनी के पास कैश रिजर्व जरूर है, लेकिन लंबी रेस की तैयारी के लिए यह पर्याप्त नहीं माना जा रहा।


📊 FundingRaised विश्लेषण

  • Revenue Growth: +35%
  • ⚠️ Loss: ₹62 करोड़ (अब भी हाई)
  • 📈 EBITDA Margin: -18.2% (सुधरा लेकिन नेगेटिव)
  • 💰 Funding: $158 मिलियन जुटाए
  • 🏁 IPO Target: अगले 12 महीनों में

🔍 निष्कर्ष

Innoviti Technologies ने FY25 में ग्रोथ की दिशा में स्पष्ट प्रगति दिखाई है — रेवेन्यू बढ़ा है, घाटा घटा है, और IPO की तैयारी जारी है।
लेकिन दो दशक पुराने इस स्टार्टअप के लिए असली चुनौती अब शुरू होती है — सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना और बाजार में अपनी पोजीशन मजबूत रखना।

फिनटेक की इस रेस में अब सिर्फ सर्वाइव करना नहीं, बल्कि विन करना होगा! 🏆

Read more : इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $694.75 मिलियन — Zepto, Kuku FM और Dezerv ने मारी बाज़ी!

🚀 इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $694.75 मिलियन — Zepto, Kuku FM और Dezerv ने मारी बाज़ी!

भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम के लिए यह हफ्ता बेहद जोशभरा रहा 🎉।
30 भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $694.75 मिलियन (लगभग ₹5,800 करोड़) की फंडिंग जुटाई, जिसमें 6 ग्रोथ-स्टेज और 22 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं।
वहीं, 2 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया।

पिछले हफ्ते जहां कुल $310.72 मिलियन की फंडिंग हुई थी, वहीं इस बार निवेश में 2.2 गुना से ज्यादा उछाल देखने को मिला है। 📈


💰 ग्रोथ-स्टेज डील्स में Zepto की धूम

ग्रोथ और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स ने इस हफ्ते $621.5 मिलियन की फंडिंग जुटाई।
सबसे बड़ा आकर्षण रहा Zepto का $450 मिलियन का राउंड, जिसने कंपनी का वैल्यूएशन $7 बिलियन तक पहुंचा दिया।

इसके अलावा —

  • 🎧 Kuku FM ने $85 मिलियन जुटाए Granite Asia के नेतृत्व में,
  • 💼 Dezerv ने $40 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग हासिल की Premji Invest और Accel से।

अन्य प्रमुख नामों में HouseEazy, SpeakX और Two Brothers Organic Farms शामिल रहे।


🌱 अर्ली-स्टेज में GoodScore ने लीड किया

अर्ली-स्टेज फ्रंट पर कुल 22 स्टार्टअप्स ने $73.25 मिलियन की फंडिंग हासिल की।
इनमें सबसे आगे रहा फिनटेक स्टार्टअप GoodScore, जिसने $13 मिलियन जुटाए Peak XV Partners के नेतृत्व में।

इसके अलावा इस सूची में शामिल रहे —
🚚 Airbound (Logistics), 🤖 Smallest AI, 🏥 Everbright Health, 🔐 Matters.AI (Data Security), ⚙️ Chara Technologies (Deeptech), और CIMCON (SaaS)

वहीं CoinDCX और Alensured (AI firm) ने भी इस हफ्ते फंडिंग जुटाई, लेकिन राशि का खुलासा नहीं किया गया।


🏙️ शहरवार डील्स — बेंगलुरु सबसे आगे

शहरवार डील काउंट के हिसाब से,

  • बेंगलुरु रहा टॉप पर — 12 डील्स के साथ,
  • दिल्ली-NCR ने 6 डील्स पूरी कीं,
  • मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद ने भी इस हफ्ते एक्टिविटी दिखाई।

📊 सेगमेंट-वाइज देखें तो —

  • E-commerce स्टार्टअप्स ने 5 डील्स के साथ बढ़त बनाई,
  • Deeptech और AI सेक्टर ने क्रमशः 4 और 3 डील्स दर्ज कीं।
    इसके अलावा Fintech, Healthtech, OTT और अन्य क्षेत्रों में भी निवेश जारी रहा।

💸 Series-wise Funding Snapshot

सीड राउंड्स ने इस हफ्ते भी फंडिंग एक्टिविटी में लीड की, कुल 15 डील्स के साथ।
इसके बाद Pre-seed में 3 डील्स हुईं।
Series D, Series B, Series A और Series H जैसे लेट-स्टेज राउंड्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

👉 Series-wise डील ब्रेकअप और पूरी लिस्ट देखने के लिए TheKredible पर विजिट करें।


📈 फंडिंग ट्रेंड — आठ हफ्तों का औसत $315M

पिछले आठ हफ्तों का औसत फंडिंग स्तर $315.1 मिलियन रहा, जबकि इस हफ्ते यह आंकड़ा लगभग $695 मिलियन तक जा पहुंचा।
इससे यह साफ है कि निवेशक भारतीय स्टार्टअप्स में दोबारा तेज़ी से भरोसा जता रहे हैं। 🇮🇳✨


👥 Key Hirings — दो बड़ी नियुक्तियाँ

इस हफ्ते दो अहम नियुक्तियाँ भी हुईं —

  • 🔬 Olee.Space (Photonics & Defence Tech firm) ने Venkateswara Gowtama Mannava (Ex-Chairman, BEL) को Strategic Advisor नियुक्त किया।
  • 🛡️ Zscaler ने Hemant Dabke को VP & MD (India & SAARC) बनाया।

💼 Fund Launches — नए निवेश मंचों की शुरुआत

  • IIMA Ventures और Jaivel Aerospace ने मिलकर एक नया Aerospace & Defence Acceleration Fund लॉन्च किया है, जो 8–10 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स को सपोर्ट करेगा।
  • Artha India Ventures (AIV) ने अपने दूसरे माइक्रो VC फंड — Artha Venture Fund II का ₹250 करोड़ का पहला क्लोज़ हासिल किया है, जो 36 सीड-स्टेज स्टार्टअप्स में निवेश करेगा।

🔄 M&A — Pepperfry का अधिग्रहण

टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म TCC Concept Limited ने Pepperfry में 95.18% हिस्सेदारी खरीदी है।
यह डील ₹659.44 करोड़ के वैल्यूएशन पर हुई, जो शेयर स्वैप के ज़रिए पूरी की गई।


Shutdown — Swiggy ने बंद किया Pyng

फूडटेक दिग्गज Swiggy ने घोषणा की है कि वह Pyng, अपने Professional Services Marketplace, को इस महीने के अंत तक बंद कर देगा।
यह प्लेटफॉर्म लगभग छह महीने पहले लॉन्च हुआ था।


🤝 नई साझेदारियाँ और लॉन्च

  • 🎙️ Apna.co ने लॉन्च किया BlueMachines.ai, एक नया Voice AI Vertical
  • ETO Motors ने APCRDA के साथ साझेदारी की — अमरावती में EV लॉन्च के लिए।
  • 💄 Nykaa & Snapchat ने शुरू किया GenZ Beauty Creator Incubator Programme
  • 🛒 Simple Energy ने Amazon और Flipkart के साथ ई-कॉमर्स पार्टनरशिप की।
  • 🚖 Rapido ने Goibibo, redBus, और ConfirmTkt के साथ गठजोड़ किया।
  • 🧠 WeWork India ने लॉन्च किया AI-driven mobile app
  • 📚 PhysicsWallah ने BSF परिवारों के लिए शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम शुरू किया।
  • 👩‍💼 Lxme ने लॉन्च किया भारत का पहला महिलाओं के लिए UPI प्लेटफॉर्म — LxmePay
  • 💳 Juspay & HSBC ने मिलकर शुरू किया Full-stack Payment Acquiring Solution

📊 वित्तीय परिणाम — बड़ी कंपनियों की रिपोर्ट कार्ड

  • 💬 ShareChat का FY25 रेवेन्यू ₹723 करोड़; EBITDA लॉस 72% घटा।
  • 💸 Razorpay का रेवेन्यू 65% बढ़कर ₹3,783 करोड़; ग्रॉस प्रॉफिट ₹1,200 करोड़ पार।
  • 🏠 Livspace का FY25 रेवेन्यू ₹1,460 करोड़; घाटा 42% घटा।
  • 🧪 Thyrocare का Q2FY26 रेवेन्यू ₹216 करोड़; प्रॉफिट 81% बढ़ा।
  • 🌾 Nutrifresh ने ₹145 करोड़ रेवेन्यू पर ₹14 करोड़ का PAT दर्ज किया।

📰 News Flash — Fintech और UPI पर नज़र

  • 📱 PhonePe और GPay के UPI ट्रांजैक्शन घटे सितंबर में।
  • 📈 Groww ने 26.28% मार्केट शेयर के साथ स्टॉकब्रोकिंग में लीड बरकरार रखी।
  • 🏦 ED ने Flipkart को FEMA केस सुलझाने के लिए compounding option ऑफर किया।
  • 💰 Arali Ventures ने FinBox से 26X रिटर्न हासिल किया अपने एग्जिट पर।

🔚 सारांश: निवेशकों का भरोसा लौट रहा है 🇮🇳

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में जो जोश देखने को मिला, वह साफ दिखाता है कि फंडिंग सीजन दोबारा गर्म हो रहा है।
Zepto, Kuku FM और Dezerv जैसी बड़ी डील्स ने मार्केट में नई ऊर्जा भरी है, जबकि अर्ली-स्टेज इन्वेस्टमेंट्स दर्शाते हैं कि निवेशक भविष्य के यूनिकॉर्न्स पर दांव लगा रहे हैं।

Read more : Darwinbox की तेज़ उड़ान: FY25 में 50% रेवेन्यू ग्रोथ, ग्लोबल मार्केट्स से आई नई रफ़्तार!

🚀 Darwinbox की तेज़ उड़ान: FY25 में 50% रेवेन्यू ग्रोथ, ग्लोबल मार्केट्स से आई नई रफ़्तार!

Darwinbox

भारत की मशहूर HR Tech Unicorn कंपनी Darwinbox ने वित्त वर्ष FY25 में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 50% की वार्षिक वृद्धि के साथ बढ़कर ₹533.9 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 के ₹334 करोड़ से कहीं ज्यादा है।
यह ग्रोथ मुख्यतः कंपनी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार (global expansion) और मौजूदा बाजारों में गहरी पैठ (deep market penetration) की वजह से आई है।


🌍 इंटरनेशनल मार्केट बना ग्रोथ इंजन

Darwinbox के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कंपनी की नई बिक्री (new sales) में 63% योगदान रहा।
सबसे खास बात यह रही कि ओवरसीज़ रेवेन्यू (Overseas Revenue) में 83% साल-दर-साल (YoY) की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई — यह लगातार दूसरा साल है जब Darwinbox ने विदेशों में 80% से अधिक की वृद्धि हासिल की है।

📈 कंपनी का कहना है कि अमेरिका (U.S.) में इसका बिज़नेस, जो सिर्फ दो साल पहले शुरू हुआ था, अब मजबूत पकड़ बना रहा है।
इसके साथ ही South East Asia (SEA) और Middle East & North Africa (MENA) क्षेत्रों में भी Darwinbox के सॉल्यूशंस को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।


💼 घाटे में सुधार, कुशल प्रबंधन का असर

Darwinbox ने अपने adjusted net loss (शुद्ध घाटे) में 12% सुधार दर्ज किया है (ESOP जैसे non-cash खर्चों को छोड़कर)।
अगर कंपनी के U.S. ऑपरेशंस में किए गए निवेश को अलग किया जाए, तो Darwinbox का समायोजित घाटा 42% तक घट गया है।

इस सुधार का श्रेय कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी, बेहतर लागत नियंत्रण और राजस्व विविधीकरण (revenue diversification) को दिया जा रहा है।


☁️ क्या करती है Darwinbox?

हैदराबाद स्थित Darwinbox एक क्लाउड-आधारित HR मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, जो कंपनियों को उनकी पूरी ह्यूमन रिसोर्स प्रोसेस को डिजिटल रूप से संभालने में मदद करता है।
इसके प्लेटफॉर्म पर कई ज़रूरी फीचर्स मौजूद हैं जैसे 👇

  • 👥 Recruitment & Onboarding (भर्ती प्रक्रिया और नए कर्मचारियों का ऑनबोर्डिंग)
  • 💰 Payroll Management (तनख्वाह और टैक्स प्रबंधन)
  • 📈 Employee Engagement & Talent Management
  • 🔍 Analytics & Performance Insights

कंपनी के पास अब 1,016 से अधिक एंटरप्राइज क्लाइंट्स हैं, जो इसके प्लेटफॉर्म का उपयोग वैश्विक स्तर पर कर रहे हैं।


🌏 भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया बना प्रमुख बाजार

हालांकि Darwinbox ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से विस्तार किया है, कंपनी का सबसे बड़ा रेवेन्यू हिस्सा अभी भी भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया (SEA) से आता है।
इन दोनों क्षेत्रों में HR टेक्नोलॉजी की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के प्रबंधन के लिए AI और क्लाउड-आधारित सॉल्यूशंस अपना रही हैं।

Darwinbox की सफलता का एक बड़ा कारण इसका लोकलाइज्ड एप्रोच भी है — यानी हर क्षेत्र के अनुसार टूल्स को कस्टमाइज़ करना, जिससे क्लाइंट्स को बेहतर अनुभव मिलता है।


💸 फंडिंग की ताकत — अब तक $290 मिलियन जुटाए

Startup data platform TheKredible के अनुसार, Darwinbox ने अब तक विभिन्न राउंड्स के ज़रिए $290 मिलियन (लगभग ₹2,400 करोड़) जुटाए हैं।
इसमें मार्च 2025 में हुआ $140 मिलियन का बड़ा फंडिंग राउंड भी शामिल है, जिसका नेतृत्व Partners Group और KKR ने किया था।

इन निवेशों ने कंपनी को न केवल प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंटरनेशनल एक्सपैंशन के लिए पूंजी दी, बल्कि इसे भारत की तेज़ी से बढ़ती HR-Tech यूनिकॉर्न्स में भी शामिल किया।


🎁 कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफ़ा — ₹86 करोड़ का ESOP बायबैक और $21 मिलियन का ग्रांट

Darwinbox ने हाल ही में अपने कर्मचारियों के लिए ₹86 करोड़ ($10 मिलियन) का ESOP बायबैक प्रोग्राम पूरा किया था।
इसके बाद कंपनी ने $21 मिलियन (लगभग ₹175 करोड़) के नए ESOP ग्रांट्स भी जारी किए हैं — जो कर्मचारियों को कंपनी की ग्रोथ में हिस्सेदारी का मौका देता है।

यह कदम यह दर्शाता है कि Darwinbox अपने टैलेंट रिटेंशन और एम्प्लॉयी ओनरशिप कल्चर को लेकर बेहद गंभीर है।


🔮 आगे की राह — Global HR Tech में भारतीय झंडा बुलंद

Darwinbox अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर Workplace Digitalization का चेहरा बनता जा रहा है।
कंपनी का फोकस अगले कुछ वर्षों में है 👇

  • 🌍 अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करना,
  • 🤖 AI और एनालिटिक्स के जरिए HR टेक्नोलॉजी को और स्मार्ट बनाना,
  • 💼 और भारत के SME सेगमेंट के लिए affordable HR solutions लॉन्च करना।

कंपनी के सह-संस्थापक (co-founders) ने कहा कि,

“हमारा मिशन है कि हर संगठन को एक ऐसा प्लेटफॉर्म मिले जो उसके कर्मचारियों को अधिक सक्षम, खुश और प्रोडक्टिव बनाए।”


🧠 निचोड़

Darwinbox ने FY25 में यह साबित कर दिया है कि स्मार्ट प्रबंधन, डेटा-ड्रिवन रणनीति और ग्लोबल माइंडसेट के साथ भारतीय स्टार्टअप्स भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमदार प्रदर्शन कर सकते हैं।

जहाँ एक ओर कंपनी की आय 50% बढ़ी है, वहीं घाटे में भी निरंतर सुधार देखा गया है — जो संकेत देता है कि Darwinbox अब लॉस से प्रॉफिट की राह पर है।

अगर कंपनी इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में Darwinbox दुनिया की अग्रणी HR-Tech कंपनियों में से एक बन सकती है। 🌟

Read more : Dezerv ने जुटाए ₹352 करोड़ Premji Invest और Accel की अगुवाई में हुआ Series C फंडिंग राउंड