💰 Dezerv ने जुटाए ₹352 करोड़ Premji Invest और Accel की अगुवाई में हुआ Series C फंडिंग राउंड

Dezerv

भारत की तेजी से बढ़ती Wealth-Tech स्टार्टअप कंपनी Dezerv ने हाल ही में अपने Series C फंडिंग राउंड में ₹352 करोड़ (लगभग $40 मिलियन) जुटाने की घोषणा की है। इस राउंड का नेतृत्व Premji Invest और Accel ने संयुक्त रूप से किया, जबकि Elevation Capital और Z47 (पूर्व में Matrix Partners India) ने भी इसमें भाग लिया।


🚀 निवेश के पीछे की डिटेल्स

हालांकि कंपनी ने अपनी वैल्यूएशन और शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया,

Dezerv के बोर्ड ने Registrar of Companies (RoC) के साथ दाखिल दस्तावेज़ों में बताया कि कंपनी ने ₹82,961 प्रति शेयर की दर से 42,427 Series C CCPS जारी कर कुल ₹352 करोड़ जुटाए।

इस निवेश में —

  • 💼 Premji Invest ने ₹157.73 करोड़ ($18 मिलियन) लगाए,
  • 🚀 Accel ने ₹140.2 करोड़ ($16 मिलियन),
  • 📈 Elevation Capital ने ₹35.2 करोड़, और
  • 💡 Z47 (Matrix Partners) ने ₹1.3 करोड़ का निवेश किया।

🧾 निवेश के बाद शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, अब तक Dezerv ने कुल $100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) फंडिंग हासिल की है।
नवीनतम राउंड के बाद शेयरहोल्डिंग कुछ इस प्रकार है 👇

  • 🟢 Accel — 15.95%
  • 🔵 Premji Invest — 15.91%
  • 🟣 Elevation Capital — 14.64%
  • 🟠 Z47 (Matrix Partners) — 12.96%
  • 👨‍💼 Co-founders (Vaibhav Porwal, Sandeep Jethwani, Sahil Contractor) — लगभग 30%

💼 Dezerv क्या करती है?

2021 में लॉन्च हुई Dezerv एक tech-driven portfolio management services (PMS) प्लेटफॉर्म है जो पेशेवर लोगों को स्मार्ट और एक्सपर्ट फाइनेंशियल एडवाइस प्रदान करती है।
कंपनी का उद्देश्य है —
👉 निवेशकों को direct bonds, startup angel investments और PMS/AIF portfolios तक एक्सेस देना,
👉 ताकि वे बेहतर और diversified wealth management का अनुभव ले सकें।

वर्तमान में Dezerv ₹14,000 करोड़ से अधिक की एसेट्स (PMS, AIF और Distribution) को मैनेज कर रही है — जो इसके बढ़ते भरोसे और निवेशकों की दिलचस्पी का बड़ा संकेत है।


📊 FY24 में राजस्व और घाटे का हाल

वित्त वर्ष FY24 में Dezerv का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹26.25 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY23 के ₹10.20 करोड़ की तुलना में लगभग 2.5 गुना ज्यादा है।

हालांकि कंपनी का घाटा भी बढ़कर ₹74.53 करोड़ हो गया — जो पिछले साल के ₹38.20 करोड़ से 95% अधिक है।
इससे स्पष्ट है कि कंपनी फिलहाल अपने ग्रोथ फेज़ में निवेश और स्केलिंग पर ज्यादा फोकस कर रही है।

कंपनी ने अभी तक FY25 के वित्तीय नतीजे सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन उद्योग के जानकारों के मुताबिक, FY25 में कंपनी की Revenue Run Rate काफी बेहतर रहने की उम्मीद है।


🏆 निवेशकों का बढ़ता भरोसा

Premji Invest (जो Wipro के चेयरमैन अजीम प्रेमजी का इन्वेस्टमेंट ऑफिस है) और Accel जैसी बड़ी निवेश फर्मों का इस राउंड में हिस्सा लेना यह दर्शाता है कि भारतीय Wealth-tech सेक्टर में बड़ा पोटेंशियल है।
Dezerv का tech-first मॉडल, user-centric एप्रोच और निवेशकों को curated investment options देने की रणनीति इसे बाकी प्लेटफॉर्म्स से अलग बनाती है।


⚔️ प्रतिस्पर्धा और मार्केट पोज़िशन

Dezerv का मुकाबला अब भारत के कई बड़े Wealth-tech प्लेयर्स से है — जिनमें शामिल हैं:

  • 💹 Wint Wealth
  • 🏦 Grip Invest
  • 📊 Peak XV-backed Smallcase
  • 💰 Groww

इन सभी के बीच, Dezerv अपनी expert-led portfolio management approach के जरिए अलग पहचान बना रही है।


🔮 आगे की राह — स्मार्ट वेल्थ के नए दौर की शुरुआत

Dezerv के को-फाउंडर्स वैभव पोरवाल, संदीप जेतवानी और साहिल कॉन्ट्रैक्टर का कहना है कि कंपनी का अगला लक्ष्य है अपने यूज़र्स के लिए और भी एडवांस्ड निवेश विकल्प लाना और भारतीय Wealth-tech इकोसिस्टम को ग्लोबल लेवल पर ले जाना।

उनके अनुसार, “भारत में मिडल-क्लास प्रोफेशनल्स के लिए personalized wealth management की बहुत बड़ी ज़रूरत है — और हम टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता के साथ उस गैप को भर रहे हैं।”


🧠 निचोड़

इस Series C फंडिंग के साथ, Dezerv ने अपने ग्रोथ गेम को अगले स्तर पर पहुंचा दिया है।
जहाँ एक ओर कंपनी का घाटा फिलहाल जारी है, वहीं दूसरी ओर इसका रेवेन्यू, निवेशकों का भरोसा और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट लगातार बढ़ रहे हैं।

👉 अगर यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले 2 सालों में Dezerv भारत का अग्रणी Wealth-tech ब्रांड बन सकता है — जो लोगों के निवेश के तरीके को बदलने की ताकत रखता है। 🚀

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💳 Razorpay ने दिखाया दम! FY25 में ₹3,783 करोड़ की कमाई, लेकिन ESOP खर्चों से हुआ घाटा 📉

Razorpay

भारत के प्रमुख पेमेंट्स और बिज़नेस बैंकिंग प्लेटफ़ॉर्म Razorpay ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है। कंपनी की कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 65% बढ़कर ₹3,783 करोड़ पर पहुँच गई, जो पिछले साल (FY24) में ₹2,296 करोड़ थी। 💥📈

Razorpay ने बताया कि यह ग्रोथ उसके पेमेंट गेटवे, बैंकिंग, POS (Point of Sale) और इंटरनेशनल बिज़नेस यूनिट्स में मजबूत परफॉर्मेंस के कारण हासिल हुई है।


🚀 FY25 बना Razorpay के लिए टर्निंग पॉइंट

कंपनी के सह-संस्थापक और CEO हर्षिल माथुर ने कहा —

“FY25 हमारे लिए एक महत्वपूर्ण साल रहा। हमने मज़बूत एक्ज़िक्यूशन के ज़रिए शानदार टॉप-लाइन ग्रोथ दी और साथ ही ग्रॉस मार्जिन्स में भी सुधार किया। अब ऑनलाइन पेमेंट्स बिज़नेस EBITDA-पॉज़िटिव है, जबकि हमारे नए बिज़नेस वर्टिकल्स तेज़ी से स्केल हो रहे हैं।”

कंपनी के अनुसार, उसका ग्रॉस प्रॉफिट 41% बढ़कर ₹1,277 करोड़ हो गया है, जो FY24 में ₹906 करोड़ था।
लेकिन, इतनी तेज़ ग्रोथ के बावजूद Razorpay को इस साल ESOP (Employee Stock Ownership Plan) से जुड़े खर्चों और टैक्स रीस्ट्रक्चरिंग की वजह से घाटा दर्ज करना पड़ा।


💸 ₹1,209 करोड़ के ESOP खर्च बने नुकसान की वजह

कंपनी के मुताबिक, Razorpay को FY25 में ₹1,209 करोड़ के ESOP-रिलेटेड खर्च उठाने पड़े, जिससे उसका नेट प्रॉफिट घाटे में चला गया।
यह नुकसान इसलिए भी हुआ क्योंकि कंपनी ने हाल ही में अपना मुख्यालय भारत में रीडोमिसाइल (Reverse Flip) किया है — यानी अब Razorpay पूरी तरह से भारत में रजिस्टर्ड एंटिटी बन चुकी है। 🇮🇳

CFO अर्पित चुग ने कहा कि कंपनी अब हर प्रोडक्ट लेवल पर financial discipline लागू कर रही है ताकि मुनाफ़े वाले और नए ग्रोथ वर्टिकल्स के बीच बैलेंस बना रहे।


🏦 कंपनी की मजबूत कैश पोज़िशन और भविष्य की प्लानिंग

Razorpay ने कहा कि उसकी कैश पोज़िशन मजबूत है, जिससे वह इनोवेशन और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ में निवेश जारी रख सकेगी।
आगे कंपनी का फोकस इन क्षेत्रों पर रहेगा:

  • 💻 AI-first प्रोडक्ट डेवलपमेंट
  • 💳 कोर फिनटेक स्टैक को और मजबूत बनाना
  • 🌏 इंटरनेशनल एक्सपेंशन, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया (Malaysia, Singapore) जैसे बाजारों में

Razorpay पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में अपनी पेमेंट सेवाएं शुरू कर चुकी है और अब वह ग्लोबल पेमेंट टेक लीडर बनने की दिशा में बढ़ रही है। 🌐


👨‍💻 Razorpay की शुरुआत और सफर

Razorpay की स्थापना 2014 में IIT Roorkee के पूर्व छात्र शशांक कुमार और हर्षिल माथुर ने की थी।
उस समय भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में डिजिटल पेमेंट्स की शुरुआत ही हो रही थी।
आज Razorpay लाखों बिज़नेस को ऑनलाइन पेमेंट, पेरोल, और बैंकिंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराता है।

अब तक कंपनी ने $800 मिलियन से ज़्यादा फंडिंग जुटाई है, जिसमें Lightspeed, Tiger Global, Peak XV Partners और GIC जैसे दिग्गज निवेशक शामिल हैं। 💰


🔁 भारत में वापसी और IPO की तैयारी

FY25 का एक और बड़ा माइलस्टोन था Razorpay का Reverse Flip to India, यानी कंपनी ने खुद को विदेशी रजिस्टर्ड एंटिटी से बदलकर अब पूरी तरह भारतीय कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड कर लिया है।
इस कदम के बाद अप्रैल 2025 में Razorpay ने पब्लिक लिमिटेड एंटिटी का दर्जा हासिल किया।

इस कदम को IPO (Initial Public Offering) की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि Razorpay FY27 तक स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। 📊📈


💥 Razorpay का अधिग्रहण और मार्केट पोजिशनिंग

हाल ही में कंपनी ने ₹250 करोड़ ($30 मिलियन) में POP नाम की रिवॉर्ड-बेस्ड UPI ऐप को खरीदा है।
इस अधिग्रहण से Razorpay अपने पेमेंट इकोसिस्टम को और विस्तार देना चाहती है, जिससे ग्राहकों को ज्यादा वैल्यू और इनाम-आधारित अनुभव मिल सके। 🎁

साथ ही, कंपनी ने FY25 में एक क्लटर-ब्रेकिंग ब्रांड कैंपेन भी लॉन्च किया, जिसमें उसके बड़े ई-कॉमर्स क्लाइंट्स जैसे Meesho, Swiggy, और Nykaa ने खुद टेस्टिमोनियल दिए — जिसने मार्केट में Razorpay की ब्रांडिंग को और मजबूत किया। 🏆


⚔️ प्रतिस्पर्धियों के बीच सबसे आगे Razorpay

जहाँ कई पेमेंट कंपनियाँ FY25 में फ्लैट ग्रोथ दिखा रही थीं, वहीं Razorpay ने लगातार बेहतर प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया।
कंपनी का टेक्नोलॉजी-ड्रिवन अप्रोच, मजबूत क्लाइंट बेस, और नए इनोवेशन उसे भारत की सबसे भरोसेमंद फिनटेक कंपनी बना रहे हैं।

Razorpay अब उस मुकाम पर पहुँच चुकी है जहाँ वह न सिर्फ डिलीवर कर रही है बल्कि अपने बिज़नेस पोटेंशियल को पूरी तरह से क्रैक कर रही है। 🔓💪


🧩 निष्कर्ष: Razorpay — भारत की Fintech Growth की अगली कहानी

FY25 के परिणाम साफ दिखाते हैं कि Razorpay सिर्फ एक पेमेंट गेटवे नहीं, बल्कि भारत की फिनटेक क्रांति का इंजन बन चुका है।
भविष्य में अगर यह रफ्तार बरकरार रहती है, तो Razorpay IPO भारत की स्टार्टअप इंडस्ट्री के लिए एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। 🚀🇮🇳

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🎙️ Kuku FM ने मचाया धमाल! ₹710 करोड़ की नई फंडिंग से ऑडियो कंटेंट की दुनिया में बढ़ाया जलवा

Kuku FM,

भारत के सबसे तेजी से बढ़ते ऑडियो और वीडियो कंटेंट प्लेटफॉर्म Kuku FM ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी ने अपने Series D फंडिंग राउंड में $85 मिलियन (करीब ₹710 करोड़) जुटाए हैं। यह राउंड Granite Asia (पहले GGV Capital) के नेतृत्व में हुआ है, जिसमें primary capital के साथ-साथ secondary share sales भी शामिल रही। 🎧💰


💼 कौन-कौन से निवेशकों ने किया भरोसा?

इस राउंड में Kuku FM के मौजूदा निवेशक — Vertex Growth Fund, Krafton, IFC, Paramark, Tribe Capital India और Bitkraft — ने भी अपनी भागीदारी निभाई।
इन ताज़ा निवेशों के साथ, कंपनी का कुल फंडिंग अमाउंट अब $156 मिलियन (लगभग ₹1,300 करोड़) तक पहुँच गया है।

याद दिला दें कि अक्टूबर 2023 में Kuku FM ने $25 मिलियन की Series C फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व International Finance Corporation (IFC) और नंदन नीलेकणी के Fundamentum Partnership ने किया था। उस समय कंपनी की वैल्यूएशन लगभग $185 मिलियन थी। 📈


🚀 नए फंड का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि यह फंडिंग उसके अगले ग्रोथ फेज़ के लिए बेहद अहम होगी।
Kuku FM इन पैसों का इस्तेमाल इन क्षेत्रों में करने वाली है:

  • नए content creators को जोड़ने में 🎙️
  • प्लेटफ़ॉर्म की टेक्नोलॉजी को और मज़बूत बनाने में 💻
  • Bharat audience यानी छोटे शहरों और कस्बों तक पहुँच बढ़ाने में 🌆
  • और अधिक original audio & video content लॉन्च करने में 🎬

👨‍💻 2018 में शुरू हुआ था Kuku FM का सफर

Kuku FM की शुरुआत 2018 में तीन दोस्तों — लालचंद बिसू, विकास गोयल और विनोद कुमार मीणा — ने मिलकर की थी।
उनका मकसद था कि भारत में भी ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाया जाए जहाँ लोग knowledge और entertainment को सुनकर सीखें

आज Kuku FM पर आपको audiobooks, podcasts, courses, और short stories जैसे ढेरों जॉनर्स में कंटेंट मिलता है —
बिज़नेस 📊, सेल्फ-हेल्प 🌱, फाइनेंस 💸, हिस्ट्री 🏰, धर्म 🙏, फिटनेस 🏋️‍♀️ और एंटरटेनमेंट 🎭 — हर किसी के लिए कुछ न कुछ है!


🎧 कई भाषाओं में कंटेंट, पूरे भारत के लिए प्लेटफ़ॉर्म

Kuku FM सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी तक सीमित नहीं है। यह प्लेटफ़ॉर्म कई भारतीय भाषाओं में ऑडियोबुक्स और पॉडकास्ट उपलब्ध कराता है।
इससे कंपनी ने भारत के tier-2 और tier-3 शहरों के श्रोताओं के बीच गहरी पैठ बना ली है। 📻
अब कंपनी का लक्ष्य है कि भारत के हर राज्य में अपने regional creators को बढ़ावा दे, ताकि हर भाषा में quality content पहुंचाया जा सके।


📊 कमाई बढ़ी, घाटा घटा — शानदार प्रदर्शन FY24 में

TheKredible के अनुसार, Kuku FM की operational revenue FY23 के ₹41 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹88 करोड़ पहुँच गई — यानी 2.1x की शानदार ग्रोथ! 🚀
वहीं, कंपनी ने FY24 में अपने घाटे को भी 18% तक घटाकर ₹96 करोड़ कर दिया है।
हालांकि FY25 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स अभी दाखिल नहीं हुए हैं, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी जल्द ही profitability के करीब पहुँच सकती है। 💹


🥊 कौन हैं Kuku FM के बड़े प्रतिद्वंद्वी?

भारत का ऑडियो कंटेंट मार्केट अब बेहद हॉट बन चुका है।
Kuku FM इस समय टक्कर ले रहा है —
🎧 Pocket FM,
🎙️ Awaz,
🎤 Headfone, और
📚 Pratilipi जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स से।

हालांकि अब एक नया रुझान उभर रहा है — micro-drama content का।
इसी सेगमेंट में WinZO और Zupee जैसे real-money gaming प्लेटफ़ॉर्म्स भी उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
इससे आने वाले समय में ऑडियो एंटरटेनमेंट की दुनिया में जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगा। ⚔️


🌟 ‘Suno, Seekho aur Badho’ — Kuku FM का विज़न

Kuku FM सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि self-growth और knowledge sharing का भी माध्यम है।
कंपनी का फोकस है कि भारत का हर युवा सिर्फ वीडियो नहीं देखे, बल्कि कहानियों और ज्ञान को सुने भी
जैसे-जैसे कंटेंट कंजम्प्शन का ट्रेंड बदल रहा है, वैसे-वैसे Kuku FM भारत को एक audio-first nation बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 🇮🇳🎧


🔚 निष्कर्ष: Kuku FM बना भारत का ‘Voice of Bharat’

नए $85 मिलियन की फंडिंग के साथ, Kuku FM ने यह साबित कर दिया है कि ऑडियो और पॉडकास्ट इंडस्ट्री का भविष्य बेहद उज्जवल है।
तेज़ी से बढ़ती रेवेन्यू, घटते घाटे, और बढ़ते श्रोताओं के साथ Kuku FM अब सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि भारत की आवाज़ बन चुका है। 🔥🎤


अगर आप भी बिज़नेस, मोटिवेशन या स्टोरीज़ सुनना पसंद करते हैं, तो Kuku FM ऐप ज़रूर ट्राय करें —
क्योंकि यहाँ हर आवाज़ में है एक नई कहानी! 🎧📱

Read more : Eternal (पूर्व में Zomato) की Q2 FY26 रिपोर्ट मुनाफे में 63% की गिरावट, लेकिन राजस्व में 2.8 गुना उछाल 

🍔 Eternal (पूर्व में Zomato) की Q2 FY26 रिपोर्ट मुनाफे में 63% की गिरावट, लेकिन राजस्व में 2.8 गुना उछाल 🚀

Eternal

भारत की जानी-मानी फूडटेक और क्विक कॉमर्स कंपनी Eternal (पहले Zomato) ने गुरुवार को अपनी Q2 FY26 (जुलाई-सितंबर 2025) की वित्तीय रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का मुनाफा 63% घटकर ₹65 करोड़ रह गया, जबकि इसी अवधि में राजस्व लगभग तीन गुना बढ़कर ₹13,590 करोड़ तक पहुंच गया। 📉💰


📊 मुनाफे में गिरावट, लेकिन राजस्व में ज़बरदस्त उछाल

कंपनी की कंसॉलिडेटेड रिपोर्ट, जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दाखिल की गई है, के अनुसार Eternal की ऑपरेटिंग रेवेन्यू पिछले साल के ₹4,799 करोड़ से बढ़कर ₹13,590 करोड़ हो गई — यानी 2.8 गुना वृद्धि

हालांकि, अगर अन्य आय (₹352 करोड़) और ब्याज लागत (₹86 करोड़) को छोड़ दें, तो कंपनी का EBIT (Earnings Before Interest and Tax) नकारात्मक रहा — ₹137 करोड़ के घाटे के साथ। 😬


Blinkit बना Eternal की ग्रोथ का इंजन

इस बार राजस्व में आई उछाल का सबसे बड़ा श्रेय Blinkit को जाता है।
कंपनी ने बताया कि Blinkit ने अपने बिज़नेस मॉडल को पूरी तरह बदल दिया है — मार्केटप्लेस मॉडल से इन्वेंट्री-लेड मॉडल की ओर।

👉 इसका मतलब है कि अब Blinkit की आय में पूरे उत्पादों के मूल्य (Gross Merchandise Value) को शामिल किया जा रहा है, पहले की तरह सिर्फ कमीशन को नहीं।
इस बदलाव के कारण Blinkit का राजस्व 8.5 गुना बढ़ गया! ⚡


🍕 फूड डिलीवरी बिज़नेस (Zomato) से मिला 18% रेवेन्यू

Eternal की कुल आय में से 18% हिस्सा फूड डिलीवरी बिज़नेस (Zomato) से आया।

  • Zomato का राजस्व ₹2,012 करोड़ से बढ़कर ₹2,485 करोड़ हुआ — यानी 23% की वृद्धि
  • वहीं Blinkit का रेवेन्यू ₹1,156 करोड़ से बढ़कर ₹9,891 करोड़ हो गया — 8.5X उछाल
  • लेकिन Eternal का B2B सप्लाई प्लेटफॉर्म Hyperpure पिछली तिमाही की तुलना में 30.5% घटकर ₹1,023 करोड़ रह गया।

इसके अलावा, ‘Going-out’ और अन्य गैर-ऑपरेटिंग आय के ज़रिए कंपनी की कुल रेवेन्यू ₹13,942 करोड़ तक पहुंची।


📅 हाफ-ईयर प्रदर्शन: 2.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

FY26 के पहले छह महीनों में Eternal का कुल राजस्व ₹9,005 करोड़ से बढ़कर ₹20,757 करोड़ हो गया — यानी 2.3 गुना वृद्धि
यह दर्शाता है कि Eternal ने न सिर्फ तिमाही बल्कि हाफ-ईयर स्केल पर भी मजबूत ग्रोथ दिखाई है। 💹


💸 खर्चों में भी 2.8 गुना बढ़ोतरी

राजस्व बढ़ा तो खर्च भी तेज़ी से बढ़े।
कंपनी का कुल व्यय (Total Expenditure) ₹4,783 करोड़ से बढ़कर ₹13,813 करोड़ हो गया — यानी 2.8 गुना
मुख्य खर्चों का विवरण इस प्रकार है 👇

  • 🏗️ कच्चे माल की लागत (Cost of Material):
    ₹1,334 करोड़ से बढ़कर ₹7,742 करोड़ — यानी 5.8 गुना उछाल, जो कुल खर्च का 56% है।
  • 🛵 डिलीवरी व संबंधित खर्च:
    ₹1,400 करोड़ से बढ़कर ₹2,213 करोड़ — 58% की बढ़ोतरी
  • 👩‍💼 कर्मचारी वेतन व लाभ:
    ₹593 करोड़ से बढ़कर ₹865 करोड़ — 46% की वृद्धि
  • 📢 विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च:
    ₹404 करोड़ से बढ़कर ₹806 करोड़ — लगभग दोगुना

कंपनी ने बताया कि Blinkit के इन्वेंट्री मॉडल के कारण कच्चे माल की लागत में भारी उछाल हुआ है, जिसने मुनाफे को प्रभावित किया।


📉 मुनाफे में 63% की गिरावट

Eternal का शुद्ध मुनाफा ₹176 करोड़ से घटकर ₹65 करोड़ रह गया — यानी 63% की गिरावट
इसका मुख्य कारण था —

  • मटेरियल कॉस्ट में उछाल,
  • डिलीवरी खर्च में बढ़ोतरी, और
  • मार्केटिंग पर बढ़ता निवेश

प्रति यूनिट आधार पर देखें तो कंपनी ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.02 खर्च किए, यानी मार्जिन अब बेहद पतले हो गए हैं। 💧


🧩 Eternal का बिजनेस पोर्टफोलियो

Eternal Group कई प्रमुख बिज़नेस यूनिट्स चलाता है —

  1. Zomato (Food Marketplace) 🍔
  2. Blinkit (Quick Commerce)
  3. Hyperpure (B2B सप्लाई चेन) 🧺
  4. Going-out (Dine-out & Events) 🎉

इनमें से Blinkit अब सबसे बड़ा राजस्व स्रोत बन गया है, जिसने Eternal को फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से एक डाइवर्सिफाइड टेक कंपनी में बदल दिया है।


📈 शेयर मार्केट में Eternal का प्रदर्शन

गुरुग्राम-आधारित Eternal का शेयर इस समय (15:14 बजे तक) ₹342.85 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹3,32,985 करोड़ (लगभग $37.9 बिलियन) तक पहुंच गई है।
यह Eternal को भारत की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनियों में से एक बना देता है। 💼📊


💬 FundingRaised की राय:

“Eternal (पूर्व में Zomato) का यह तिमाही प्रदर्शन बताता है कि कंपनी अब सिर्फ फूड डिलीवरी नहीं, बल्कि एक संपूर्ण डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम बन चुकी है। हालांकि Blinkit की ग्रोथ प्रभावशाली है, लेकिन लागत नियंत्रण और Hyperpure की रिकवरी आने वाली तिमाहियों के लिए चुनौती बनी रहेगी।”


🔍 निष्कर्ष — ग्रोथ हाई, प्रॉफिट लो!

Eternal की यह रिपोर्ट साफ करती है कि कंपनी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बढ़ती लागतें उसकी प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बना रही हैं।
अगर Blinkit का मॉडल आने वाले महीनों में और स्थिर हुआ, तो Eternal अपने प्रॉफिट को फिर से ट्रैक पर ला सकती है।

📌 #Eternal #Zomato #Blinkit #QuickCommerce #FundingRaisedHindi #StartupNews #FinancialResults

Read more : Zepto ने जुटाए $450 मिलियन! IPO की तैयारी में भारतीय क्विक कॉमर्स दिग्गज 

🛒 Zepto ने जुटाए $450 मिलियन! IPO की तैयारी में भारतीय क्विक कॉमर्स दिग्गज 🚀

Zepto

भारत की तेज़ी से उभरती क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने एक और शानदार फंडिंग राउंड के साथ बाज़ार में धमाल मचा दिया है! कंपनी ने $450 मिलियन (करीब ₹3,760 करोड़) की नई फंडिंग जुटाई है, जिसका नेतृत्व California Public Employees’ Retirement System (CalPERS) ने किया है — जो अमेरिका का एक प्रमुख पेंशन फंड है और Zepto में यह उसका पहला निवेश है। 💸


💰 Zepto को मिला नया फंडिंग बूस्ट

यह फंडिंग राउंड प्राइमरी और सेकेंडरी इन्वेस्टमेंट्स का मिश्रण था।
इस राउंड में पुराने निवेशकों ने भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई, जिनमें शामिल हैं —

  • Avenir
  • Avra Capital
  • Lightspeed Venture Partners
  • Glade Brook Capital
  • The Stepstone Group
  • Nexus Venture Partners

Zepto की इस ताज़ा फंडिंग के बाद अब कंपनी अगले साल IPO (Initial Public Offering) लाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। 📈


🦄 $7 बिलियन वैल्यूएशन की ओर कदम

हालांकि कंपनी ने अपने ताज़ा वैल्यूएशन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक Zepto हाल ही में $7 बिलियन के वैल्यूएशन पर निवेश जुटाने के लिए बातचीत कर रही थी।
अगर यह आंकड़ा सही साबित होता है, तो यह Zepto को भारत के सबसे महंगे कंज्यूमर टेक यूनिकॉर्न्स में शामिल कर देगा। 🇮🇳✨


👨‍💼 Zepto के CEO बोले — “ग्रोथ अब रुकने वाली नहीं”

Zepto के सह-संस्थापक और CEO आदित पालीचा (Aadit Palicha) ने कहा कि कंपनी ने पिछले कुछ क्वार्टरों में जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है।

“पांच क्वार्टर पहले जहां हम रोज़ाना लगभग 5 लाख ऑर्डर पूरे कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या 17 लाख ऑर्डर प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है। हमें भरोसा है कि आने वाले महीनों में यह रफ्तार और तेज़ होगी।”

Zepto की तेज़ डिलीवरी सर्विस और लगातार बढ़ती कवरेज ने इसे भारत की सबसे पसंदीदा क्विक कॉमर्स कंपनियों में शामिल कर दिया है। ⚡


🏦 Motilal Oswal से मिला था $48 मिलियन

इस राउंड से पहले, Zepto ने हाल ही में Motilal Oswal Alternates से ₹400 करोड़ (लगभग $48 मिलियन) की फंडिंग जुटाई थी।
यह निवेश कंपनी के IPO से पहले कैपिटल एक्सपैंशन प्लान का हिस्सा था।

Zepto अब तक कुल $2.3 बिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है — जिसमें से $1.8 बिलियन सिर्फ पिछले डेढ़ साल (जनवरी 2024 से) में आई है।
यह निवेशक समुदाय के कंपनी पर भरोसे और उसके मजबूत बिजनेस मॉडल का सबूत है। 💪


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 और FY25 के आंकड़े

Zepto का वित्तीय प्रदर्शन भी निवेशकों के लिए आकर्षक रहा है।

  • FY24 में Zepto की राजस्व (Revenue) ₹4,454 करोड़ रही, जो FY23 के ₹2,026 करोड़ से दोगुनी है।
  • FY24 में कंपनी का घाटा मामूली रूप से घटकर ₹1,249 करोड़ रह गया, जबकि FY23 में यह ₹1,272 करोड़ था।
  • FY25 के लिए Zepto ने ₹11,110 करोड़ (लगभग $1.3 बिलियन) का टर्नओवर दर्ज किया है, हालांकि पूरी वित्तीय रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

इन आंकड़ों से साफ है कि Zepto अब वॉल्यूम और एफिशिएंसी दोनों में सुधार कर रही है — और लॉस को कंट्रोल करते हुए ग्रोथ बनाए रख रही है। 📈💼


🏥 अब ग्रोसरी से आगे — Zepto Pharmacy की एंट्री

जहां पहले Zepto सिर्फ ग्रोसरी और फूड आइटम्स पर फोकस करती थी, अब कंपनी ने मेडिसिन डिलीवरी सेगमेंट में भी कदम रख दिया है।
Zepto ने Zepto Pharmacy नाम से नई सर्विस लॉन्च की है, जो फिलहाल चुनिंदा शहरों —
मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली NCR और हैदराबाद — में उपलब्ध है।

इस कदम के साथ Zepto अब अपने प्रतिद्वंद्वियों जैसे Swiggy Instamart, Blinkit और Flipkart Minutes को सीधी टक्कर दे रही है। 💊⚡


🌍 क्विक कॉमर्स सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत का क्विक कॉमर्स बाजार (Quick Commerce Market) तेजी से बढ़ रहा है और अब यह $5 बिलियन से ज्यादा का उद्योग बन चुका है।
Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart के बीच मुकाबला बेहद कड़ा है — लेकिन Zepto की खासियत है इसका

  • डिलीवरी नेटवर्क का सटीक प्रबंधन,
  • 15 मिनट की औसत डिलीवरी टाइम, और
  • हाई ऑर्डर फ्रीक्वेंसी वाले यूज़र्स पर ध्यान

इन्हीं कारणों से Zepto ने Tier-1 और Tier-2 शहरों में मजबूत पकड़ बना ली है।


📅 IPO की तैयारी — अगला बड़ा कदम

Zepto का अगला फोकस अब पब्लिक लिस्टिंग (IPO) पर है।
साल 2026 की शुरुआत में कंपनी अपने शेयर मार्केट डेब्यू की योजना बना रही है।
सूत्रों के अनुसार, Zepto ने पहले ही इन्वेस्टमेंट बैंक्स और लीगल एडवाइज़र्स से बातचीत शुरू कर दी है ताकि वह IPO के लिए दस्तावेज़ दाखिल कर सके।

अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो Zepto भारत की पहली क्विक कॉमर्स कंपनी बन सकती है जो स्टॉक मार्केट में लिस्ट होगी। 📊✨


💬 निष्कर्ष — Zepto की रफ्तार अब थमने वाली नहीं!

Zepto ने सिर्फ चार सालों में जो ग्रोथ दिखाई है, वह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए प्रेरणादायक है।
CalPERS जैसे ग्लोबल निवेशक का विश्वास, मजबूत राजस्व ग्रोथ, और IPO की तैयारी — ये सभी संकेत बताते हैं कि Zepto अब एक ग्लोबल ब्रांड बनने की दिशा में बढ़ रही है। 🌎


🔥 FundingRaised की राय:

“Zepto सिर्फ क्विक डिलीवरी नहीं, बल्कि भारत की नई स्टार्टअप स्पीड का प्रतीक बन चुकी है — तेज़, इनोवेटिव और निवेशकों के लिए भरोसेमंद।”


📌 #Zepto #FundingNews #IPO #QuickCommerce #FundingRaisedHindi #IndianStartups

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🪙 CoinDCX को मिला Coinbase का निवेश, वैल्यूएशन पहुंचा $2.45 बिलियन! 🚀

CoinDCX

भारत की सबसे बड़ी क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX ने एक बार फिर बड़ा निवेश हासिल किया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि उसे अमेरिकी क्रिप्टो दिग्गज Coinbase से एक अघोषित निवेश (undisclosed investment) मिला है, जिससे कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन अब $2.45 बिलियन तक पहुंच गया है। 💰


💡 Coinbase और CoinDCX का पुराना रिश्ता

Coinbase और CoinDCX का रिश्ता नया नहीं है। Coinbase साल 2020 से ही CoinDCX में निवेशक है।
कंपनी ने बताया कि यह नया निवेश पिछले राउंड का एक्सटेंशन है।
अगर पीछे देखें तो अप्रैल 2022 में CoinDCX ने $135 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी, जिसमें Coinbase ने भी भाग लिया था। उस समय कंपनी का वैल्यूएशन $2 बिलियन से ज्यादा था।

CoinDCX ने अगस्त 2021 में यूनिकॉर्न क्लब में एंट्री की थी, जब उसने $90 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग हासिल की थी। 🦄


🌐 फंडिंग का उपयोग — नए प्रोडक्ट्स और इंटरनेशनल विस्तार

CoinDCX ने कहा है कि यह फंडिंग कंपनी को अपने प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ऑन-चेन उपयोग मामलों (on-chain use cases) और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार में मदद करेगी।
इसके साथ ही कंपनी अपने दो अहम क्षेत्रों — कंप्लायंस (compliance) और क्रिप्टो एजुकेशन (education) पर भी निवेश जारी रखेगी।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा,

“हम भारत और वैश्विक स्तर पर Web3 को अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। Coinbase जैसे रणनीतिक पार्टनर का समर्थन हमारे लिए एक बड़ा कदम है।”


🏢 CoinDCX का सफर — भारत से MENA तक

CoinDCX की स्थापना 2018 में हुई थी और आज यह भारत में 2 करोड़ से ज्यादा यूज़र्स (20 million users) को क्रिप्टो ट्रेडिंग और निवेश समाधान दे रही है।
प्लेटफ़ॉर्म पर 500 से अधिक क्रिप्टो एसेट्स और 200 ट्रेडिंग पेयर्स मौजूद हैं, जिससे यह रिटेल और इंस्टिट्यूशनल दोनों प्रकार के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन चुका है।

2024 में कंपनी ने MENA क्षेत्र (Middle East & North Africa) में प्रवेश किया, जब उसने BitOasis का अधिग्रहण किया। 🌍

CoinDCX DCX Group के तहत काम करती है, जिसमें दो और इकाइयाँ शामिल हैं —

  • CoinDCX Ventures, जो Web3 स्टार्टअप्स में निवेश करती है
  • Okto, जो एक Web3 वॉलेट प्लेटफॉर्म है और इसके भी 20 मिलियन से ज्यादा यूज़र्स हैं।

👥 लीडरशिप में बदलावों का दौर

साल 2025 CoinDCX के लिए सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि लीडरशिप परिवर्तन का साल भी रहा है।

  • जून 2025 में कंपनी के CTO (Chief Technology Officer) और Head of Legal ने इस्तीफा दिया।
  • सितंबर 2025 में Chief Human Resources Officer (Mudita Chauhan) और Chief Information Security Officer (Sridhar G) ने भी कंपनी छोड़ी।
  • वहीं जुलाई 2025 में कंपनी ने नई नियुक्तियाँ कीं —
    • Amol Wanjari बने Head of Engineering
    • Sangeeth Aloysius बने Head of Product

ये बदलाव कंपनी की नई रणनीति और टेक्नोलॉजिकल रिन्यूअल का संकेत देते हैं। ⚙️


🇮🇳 Coinbase की भारत में वापसी

CoinDCX में निवेश के साथ ही एक और बड़ी खबर आई है —
Coinbase ने तीन साल बाद भारत में दोबारा वापसी (relaunch) की है।
कंपनी ने 3 अक्टूबर 2025 को अपने “Early Access Program” के तहत चुनिंदा भारतीय यूज़र्स के लिए प्लेटफॉर्म को फिर से लॉन्च किया है।

Coinbase ने मार्च 2025 में भारत की Financial Intelligence Unit (FIU) में रजिस्ट्रेशन कराया था ताकि वह देश के Anti-Money Laundering (AML) नियमों का पालन कर सके।
इस कदम से यह साफ है कि Coinbase भारत को एक रणनीतिक बाजार के रूप में देख रहा है और अब धीरे-धीरे अपना यूज़र बेस बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है। 🇮🇳💼


📊 CoinDCX की वर्तमान स्थिति

CoinDCX भारत के तेजी से बढ़ते Web3 और क्रिप्टो इकोसिस्टम में अग्रणी बनी हुई है।
जहां एक तरफ नियामक (regulatory) वातावरण अब भी स्पष्ट नहीं है, वहीं CoinDCX लगातार कंप्लायंस, इनोवेशन और निवेशकों की सुरक्षा पर ध्यान दे रही है।

इस नए निवेश के साथ कंपनी अब केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर भारतीय क्रिप्टो टैलेंट को पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। 🌏✨


🚀 निष्कर्ष

CoinDCX और Coinbase की यह नई साझेदारी भारतीय क्रिप्टो सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
एक ओर Coinbase का भारत में फिर से ऑपरेशन शुरू करना एक बड़ा भरोसे का संकेत है, वहीं CoinDCX का $2.45 बिलियन वैल्यूएशन इस बात का सबूत है कि भारतीय Web3 सेक्टर अब वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा है।

💬 FundingRaised की राय:

“CoinDCX का यह कदम सिर्फ एक निवेश डील नहीं, बल्कि भारत में क्रिप्टो ट्रस्ट और इनोवेशन के नए अध्याय की शुरुआत है।”


#CoinDCX #Coinbase #CryptoIndia #Web3 #FundingRaisedHindi

Read more : QRG Investment ने बेचा Awfis में अपना 82% हिस्सा, ₹141 करोड़ की बड़ी डील! 

🏢 QRG Investment ने बेचा Awfis में अपना 82% हिस्सा, ₹141 करोड़ की बड़ी डील! 💰🔥

Awfis

भारत के तेजी से बढ़ते co-working space सेक्टर में एक बड़ी डील देखने को मिली है।
QRG Investment and Holdings Limited, जो QRG Group की NBFC इकाई है, ने co-working solutions firm Awfis में अपनी 82% हिस्सेदारी बेच दी है।

📊 National Stock Exchange (NSE) पर किए गए corporate disclosure के मुताबिक, QRG Investment ने 24,07,800 शेयर ₹585.14 प्रति शेयर की दर से बेचकर ₹140.9 करोड़ जुटाए हैं।


💼 पहले भी किया था हिस्सेदारी का आंशिक विक्रय

यह QRG का Awfis से पहला एग्ज़िट नहीं है।
इससे पहले, कंपनी ने सितंबर 2025 में 3,67,408 शेयर बेचकर ₹22 करोड़ की राशि हासिल की थी।

इस ताज़ा डील के बाद QRG ने अब तक कुल 94% हिस्सेदारी बेच दी है, यानी लगभग पूरे निवेश से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है।

मार्च 2025 तक QRG के पास Awfis के 29,39,074 शेयर थे, जो कंपनी की कुल 4.11% हिस्सेदारी के बराबर थे।


🏦 QRG Investment कौन है?

QRG Investment and Holdings Limited, QRG Group की promoter holding arm है और एक मिड-टियर NBFC (Non-Banking Financial Company) के रूप में काम करती है।
यह कंपनी लंबे समय से strategic investments और venture deals में सक्रिय रही है।

Awfis में QRG का शुरुआती निवेश भी लंबी अवधि के पूंजी विस्तार के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन अब कंपनी ने धीरे-धीरे पूरी हिस्सेदारी से एग्ज़िट करने का फैसला लिया है।


🧾 डील के खरीदार: HSBC Mutual Fund ने दिखाया भरोसा 💼

QRG के शेयर बेचने के साथ ही, HSBC Mutual Fund ने Awfis में नई एंट्री ली है।
डिस्क्लोज़र के अनुसार, HSBC Mutual Fund ने 9,18,300 शेयर ₹585 प्रति शेयर के भाव से खरीदे हैं — यानी करीब ₹53.72 करोड़ की डील

यह कदम बताता है कि संस्थागत निवेशक Awfis की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा जता रहे हैं।


💸 Awfis में पहले भी हुआ बड़ा stake sale

इससे पहले VBAP Holdings Private Limited ने भी इस महीने की शुरुआत में Awfis में अपनी 23.6% हिस्सेदारी ₹56.8 करोड़ में बेच दी थी।

लगातार हो रही इन bulk deals से संकेत मिलता है कि Awfis का शेयर बाजार में ट्रेडिंग इंटरेस्ट तेजी से बढ़ रहा है, और कंपनी के शेयरों की मांग भी मजबूत है।


📈 Awfis की शानदार ग्रोथ: Revenue और Profit दोनों में उछाल 🚀

Awfis का बिजनेस परफॉर्मेंस निवेशकों को काफी आकर्षक लग रहा है।
कंपनी के FY26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के वित्तीय नतीजे बेहद मजबूत रहे —

  • 🧾 Revenue from Operations: ₹335 करोड़ (FY25 Q1 के ₹258 करोड़ से 30% की बढ़ोतरी)
  • 💹 Net Profit: ₹10 करोड़ (पिछले साल ₹2.8 करोड़ से 3.5X उछाल)

यह आंकड़े दिखाते हैं कि Awfis सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि profitability के रास्ते पर भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।


🏢 Awfis: भारत का तेजी से बढ़ता co-working ecosystem 🌐

Awfis आज भारत में co-working revolution का चेहरा बन चुका है।
कंपनी ने पिछले कुछ सालों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में अपना मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है।

👉 इसकी सेवाओं में शामिल हैं —

  • Premium co-working spaces
  • Meeting & conference rooms
  • Flexible office solutions
  • Enterprise workspace design

कंपनी का उद्देश्य है affordable yet premium workspaces प्रदान करना, खासकर startups और SMEs को, ताकि वे बड़े खर्च के बिना बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पा सकें।


💰 शेयर बाजार में Awfis का प्रदर्शन

Awfis का शेयर ₹577 प्रति शेयर (10:50 AM तक) के स्तर पर ट्रेड हो रहा था,
जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹4,126 करोड़ ($494 मिलियन) पहुंच गया है। 📊

शेयर लिस्टिंग के बाद से कंपनी ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत बना हुआ है।


🌱 निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?

Awfis में QRG के एग्ज़िट के बावजूद, HSBC जैसे बड़े फंड्स की एंट्री बताती है कि
लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी अभी बाकी है।

🏦 विशेषज्ञों के अनुसार:

“भारत का ऑफिस स्पेस सेक्टर पोस्ट-पैंडेमिक के बाद रिबाउंड कर रहा है।
Flexi-working और hybrid culture के कारण co-working solutions की डिमांड तेजी से बढ़ रही है।”

यानी आने वाले समय में Awfis जैसे प्लेयर्स के पास विकास और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों के बड़े अवसर हैं।


🔍 आगे की राह

Awfis अपनी अगली तिमाही में और तेजी से विस्तार करने की तैयारी में है।
कंपनी का लक्ष्य है:

  • 2026 तक देशभर में 200+ लोकेशन पर ऑपरेशंस
  • कस्टमर एक्सपीरियंस में टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन
  • और प्रॉफिट मार्जिन को दोगुना करना

निवेशक और विश्लेषक दोनों ही उम्मीद कर रहे हैं कि FY26 के अंत तक कंपनी ₹1,200 करोड़ वार्षिक रेवेन्यू का आंकड़ा पार कर सकती है।


🧾 निष्कर्ष

QRG Investment का Awfis से एग्ज़िट भले ही एक युग का अंत लगे, लेकिन इस डील ने कंपनी के शेयरों में नए संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।

📊 बढ़ती रेवेन्यू ग्रोथ, मजबूत प्रॉफिट, और coworking सेक्टर में बढ़ती मांग —
इन सब कारकों से यह साफ है कि Awfis अभी अपने सर्वश्रेष्ठ ग्रोथ फेज में है।

🚀💼 Awfis अब सिर्फ एक co-working कंपनी नहीं, बल्कि भारत के नए कार्य-संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।


#Awfis #QRGInvestment #FundingRaised #StartupNews #IndianStartups #CoworkingSpaces #HSBCMutualFund #BulkDeal #BusinessNews

Read more : StackBox का बड़ा कदम Bengaluru की लॉजिस्टिक्स टेक स्टार्टअप ने ₹23.18 करोड़ जुटाए! 

🚛 StackBox का बड़ा कदम Bengaluru की लॉजिस्टिक्स टेक स्टार्टअप ने ₹23.18 करोड़ जुटाए! 💰📦

StackBox

भारत के तेजी से बढ़ते लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक और बड़ी डील हुई है। Bengaluru स्थित लॉजिस्टिक्स टेक स्टार्टअप StackBox ने अपने Series A फंडिंग राउंड में करीब ₹23.18 करोड़ (लगभग $2.63 मिलियन) जुटाए हैं।
इस राउंड में प्रमुख निवेशक के रूप में Enrission India Capital और White Whale Ventures ने भाग लिया है। 🚀


💸 Stackbox फंडिंग डील का पूरा विवरण

कंपनी के Registrar of Companies (RoC) में दायर रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, StackBox के बोर्ड ने 1,005 Series A Compulsory Convertible Preference Shares (CCPS) को मंजूरी दी है, जिनकी कीमत ₹2,30,713 प्रति शेयर तय की गई है।

इस फंडिंग राउंड के तहत:

  • Enrission India Capital से पहले ही ₹13.2 करोड़ मिल चुके हैं।
  • White Whale Ventures से बाकी राशि जल्द आने की उम्मीद है।

यह राउंड StackBox की अब तक की सबसे बड़ी संस्थागत फंडिंग डील मानी जा रही है। 💼


🏗️ StackBox क्या करता है?

StackBox, जिसकी स्थापना 2019 में हुई थी, एक क्लाउड-बेस्ड लॉजिस्टिक्स टेक स्टार्टअप है जो सप्लाई चेन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को ऑटोमेट और ऑप्टिमाइज करने में मदद करता है।

कंपनी के SaaS (Software-as-a-Service) प्लेटफॉर्म का उपयोग FMCG, रिटेल और ई-कॉमर्स सेक्टर में बड़ी संख्या में कंपनियां कर रही हैं।

इसके प्रमुख प्रोडक्ट्स में शामिल हैं 👇

  • 🏢 Warehouse Management System (WMS)
  • 🚚 Transport Management System (TMS)
  • 📦 Order Management System (OMS)
  • 📊 Route-to-Market (RTM) Solutions

इन सभी टूल्स का उद्देश्य है – ऑर्डर की सटीक ट्रैकिंग, लागत में कमी, और सप्लाई चेन की पूरी विज़िबिलिटी देना।


📈 StackBox की ग्रोथ स्टोरी

StackBox ने अपनी शुरुआत 2019 में की थी और कम समय में ही यह B2B लॉजिस्टिक्स टेक सेगमेंट में एक भरोसेमंद नाम बन गया।
डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के मुताबिक, StackBox ने अब तक $2 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।

इसमें अगस्त 2021 में हुआ $1.2 मिलियन का सीड राउंड भी शामिल है, जिसका नेतृत्व Ecosystem Ventures ने किया था।


💹 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में मजबूत प्रदर्शन दिखाया है।

  • StackBox का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹25.7 करोड़ रहा।
  • वहीं, कंपनी ने ₹6 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया — यानी कंपनी न सिर्फ ग्रोथ कर रही है, बल्कि लाभ में भी है। 💪

FY25 के वित्तीय आंकड़े फिलहाल सामने नहीं आए हैं, लेकिन निवेशकों के अनुसार कंपनी की रेवेन्यू रन रेट दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।


🧠 क्यों खास है StackBox का बिजनेस मॉडल?

भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर का बाजार तेजी से डिजिटल हो रहा है।
जहां पहले पारंपरिक ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर निर्भरता थी, अब कंपनियां AI, क्लाउड और डेटा एनालिटिक्स की मदद से अपनी सप्लाई चेन को स्मार्ट बना रही हैं।

StackBox का फोकस इन्हीं टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस पर है —
👉 AI-Driven Routing
👉 Real-time Shipment Tracking
👉 Predictive Inventory Planning
👉 Multi-Channel Order Management

इसी वजह से यह स्टार्टअप FMCG और ई-कॉमर्स दिग्गजों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।


💬 निवेशकों का भरोसा क्यों?

Enrission India Capital और White Whale Ventures दोनों ने StackBox के स्केलेबल मॉडल और मजबूत यूनिट इकॉनॉमिक्स को ध्यान में रखते हुए निवेश किया है।

Enrission India Capital के एक प्रतिनिधि ने कहा —

“StackBox भारतीय सप्लाई चेन सेक्टर में डिजिटल परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। इसका फोकस ऑटोमेशन और एफिशिएंसी पर है, जो आने वाले वर्षों में इसे यूनिकॉर्न स्टेटस की ओर ले जा सकता है।”


🌍 भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर की संभावनाएं

भारत का लॉजिस्टिक्स सेक्टर आने वाले पांच वर्षों में $380 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है।
सरकार की PM GatiShakti योजना और Digital Freight Corridors जैसे कदमों से इस सेक्टर में बड़े बदलाव आ रहे हैं।

ऐसे माहौल में StackBox जैसी टेक-ड्रिवन कंपनियां सप्लाई चेन को स्मार्ट और सस्टेनेबल बना रही हैं।


🚀 आगे की राह: क्या है StackBox की अगली योजना?

नए फंड का उपयोग StackBox इन क्षेत्रों में करेगी:

  1. प्रोडक्ट डेवलपमेंट और टेक इनोवेशन
  2. AI-आधारित प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स
  3. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार (South-East Asia और Middle East)
  4. सेल्स और कस्टमर सपोर्ट टीम को बढ़ाना

कंपनी का लक्ष्य है अगले दो वर्षों में ₹100 करोड़ का रेवेन्यू पार करना और APAC रीजन की प्रमुख लॉजिस्टिक्स SaaS फर्म बनना। 🌏


🧾 निष्कर्ष

StackBox की यह नई फंडिंग भारत के लॉजिस्टिक्स टेक सेक्टर में तेज गति से हो रहे डिजिटलीकरण का स्पष्ट संकेत है।
कंपनी की तकनीकी क्षमता, प्रॉफिटेबिलिटी और निवेशकों का भरोसा बताता है कि StackBox आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स इनोवेशन का नया चेहरा बनने को तैयार है।

🚚💡 “हर पैकेज के पीछे अब एक स्मार्ट StackBox है।”


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Read more : Tractor Junction ने तोड़ी रफ्तार की सभी सीमाएं! FY25 में 100 करोड़ पार की कमाई 

🌾 Tractor Junction ने तोड़ी रफ्तार की सभी सीमाएं! FY25 में 100 करोड़ पार की कमाई 🚜💥

Tractor Junction

भारत के ग्रामीण मार्केटप्लेस सेक्टर में अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले Tractor Junction ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम 1.7 गुना बढ़कर ₹106.43 करोड़ तक पहुंच गई है — यानी Tractor Junction ने पहली बार ₹100 करोड़ का माइलस्टोन पार कर लिया! 👏

पिछले वित्त वर्ष (FY24) में कंपनी ने ₹62 करोड़ की कमाई की थी, जिसका मतलब है कि FY25 में कंपनी ने करीब 70% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है।


🚜 Tractor Junction क्या करता है?

Tractor Junction एक ग्रामीण वाहन मार्केटप्लेस है जो किसानों और ग्रामीण खरीदारों के लिए नए और पुराने ट्रैक्टर, फार्म इक्विपमेंट, और ग्रामीण कमर्शियल व्हीकल्स की खरीद-बिक्री को आसान बनाता है।
इसके अलावा, यह प्लेटफॉर्म फाइनेंसिंग, इंश्योरेंस, रिव्यू और प्राइस कम्पैरिजन जैसी सेवाएं भी देता है ताकि खरीदारों को ट्रांसपेरेंट डील मिल सके। 🌱


💰 FY25 में Tractor Junction की कमाई का पूरा ब्रेकडाउन

कंपनी के फाइनेंशियल रिपोर्ट (RoC फाइलिंग) के अनुसार,

  • ट्रैक्टर और इक्विपमेंट सेल्स से कुल रेवेन्यू का 80% आया, जो FY25 में ₹85.14 करोड़ रहा।
  • वहीं, सर्विसेस और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से ₹21.29 करोड़ की कमाई हुई।

कंपनी का कहना है कि उसका फाइनेंशियल सर्विस सेगमेंट 10 गुना बढ़ा है और यूज्ड व्हीकल बिजनेस में भी 1.8x ग्रोथ हुई है।
यह सब संभव हुआ है इसके 65 COCO आउटलेट्स (Company Owned, Company Operated) के जरिए, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हैं। 🌾


📈 Non-Operating Income और Total Earnings

Tractor Junction ने ₹12.44 करोड़ की Non-Operating Income भी अर्जित की — जिसमें कमीशन और फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट शामिल हैं।
इससे कंपनी की कुल आय (Total Income) FY25 में ₹118.8 करोड़ तक पहुंच गई।


🧾 खर्चों में भी बड़ा उछाल

जहां कमाई बढ़ी, वहीं खर्चे भी तेज़ी से बढ़े

  • मटीरियल कॉस्ट ₹80.26 करोड़ तक पहुंच गई, जो कुल खर्चों का 63% है।
  • एम्प्लॉई बेनिफिट कॉस्ट ₹22 करोड़ रही, जो 47% की वृद्धि दिखाती है।
  • एडवर्टाइजिंग, कॉन्ट्रैक्ट वेजेज़, इंश्योरेंस और RTO खर्चों में भी भारी उछाल देखने को मिला।

कुल मिलाकर, कंपनी का टोटल एक्सपेंस FY24 के ₹72.7 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹127.53 करोड़ हो गया — यानी लगभग 75% की बढ़ोतरी। 📊


😕 घाटे में बढ़ोतरी, लेकिन ग्रोथ बरकरार

भले ही Tractor Junction की रेवेन्यू तेजी से बढ़ी हो, लेकिन खर्चों में उछाल के कारण कंपनी को ₹9.08 करोड़ का घाटा (FY25) हुआ, जो पिछले साल के ₹3.67 करोड़ से 2.5 गुना ज्यादा है।
कंपनी की EBITDA Margin -18.03% और ROCE -70.3% रही।

यानी हर ₹1 कमाने के लिए कंपनी को ₹1.2 खर्च करने पड़े। 💸


🏦 कंपनी की बैलेंस शीट की झलक

मार्च 2025 तक कंपनी के करंट एसेट्स ₹70.43 करोड़ के थे, जिनमें ₹13.76 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल है।


🌱 भविष्य की योजना: मुनाफे की ओर कदम

Tractor Junction अब FY26 में भी डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रख रही है।
कंपनी अपने COCO आउटलेट नेटवर्क को 100 तक बढ़ाने और प्रॉफिटेबिलिटी पर अधिक ध्यान देने की योजना बना रही है।


💡 निवेश और ग्रोथ की कहानी

डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Tractor Junction ने अब तक करीब $6 मिलियन फंडिंग जुटाई है।
इसमें अप्रैल 2022 में हुआ $5.7 मिलियन का सीड राउंड शामिल है, जिसे Info Edge Ventures और Omnivore ने को-लीड किया था।

यह निवेश कंपनी की तकनीकी क्षमता, ग्रामीण नेटवर्क, और किसानों के भरोसे को और मजबूत करने में अहम रहा है। 🌾


🧠 निष्कर्ष

Tractor Junction का ग्रोथ जर्नी दिखाती है कि कैसे भारत का ग्रामीण सेक्टर टेक्नोलॉजी के सहारे तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भले ही कंपनी को फिलहाल घाटा झेलना पड़ रहा है, लेकिन उसकी स्ट्रॉन्ग ग्रोथ ट्रेजेक्टरी, बढ़ते आउटलेट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट इसे अगले कुछ वर्षों में प्रॉफिट की दिशा में ले जा सकते हैं।

Tractor Junction अब सिर्फ ट्रैक्टर मार्केट नहीं, बल्कि भारत के ग्रामीण डिजिटल इकोसिस्टम की नई रफ्तार बन चुका है। 🚜💪


क्या आपको लगता है कि Tractor Junction जैसे एग्रीटेक स्टार्टअप्स भारत के किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल सकते हैं?
अपने विचार कमेंट में बताएं! 💬👇

Read more : Ixigo में नई हलचल! निवेशक 16% हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में 

✈️ Ixigo में नई हलचल! निवेशक 16% हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में 🚀

Ixigo

ट्रैवल-टेक कंपनी Le Travenues Technology Limited (Ixigo) में एक संभावित निवेशक 16% तक की हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। यह सौदा primary और secondary दोनों transactions के जरिए होने की संभावना है। कंपनी ने मंगलवार को यह जानकारी एक regulatory filing के ज़रिए साझा की। 📄💼

📢 BSE और NSE को दी गई जानकारी

Ixigo ने अपने BSE और NSE disclosure में बताया कि कंपनी को एक संभावित निवेशक की ओर से interest expression मिला है, जो या तो खुद या अपनी affiliate कंपनियों के जरिए शेयर खरीदना चाहता है।

हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अभी तक कोई final agreement या binding arrangement नहीं हुआ है। यानी बातचीत शुरुआती चरण में है।

👉 Filing में निवेशक के बयान के अनुसार:

“प्रस्तावित अधिग्रहण primary और secondary acquisitions के माध्यम से किया जाएगा, और कंपनी की प्रस्तावित फंडरेज़िंग तथा secondary deals के बाद हमारी कुल हिस्सेदारी 16% से अधिक नहीं होगी।”

💹 IPO के बाद बढ़ी investor interest

Ixigo में निवेशकों की रुचि इसके शानदार IPO डेब्यू के बाद काफी बढ़ गई है। जून 2024 में कंपनी ने शेयर बाज़ार में जबरदस्त शुरुआत की थी और मजबूत लिस्टिंग के बाद से ही global investors की नज़र इस पर बनी हुई है। 💥📈

हाल ही में, Global asset manager Schroder Investment Management ने भी Le Travenues Technology Limited (Ixigo) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो कंपनी के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

💰 सौदे का असर

अगर यह डील होती है, तो यह Ixigo के लिस्टिंग के बाद सबसे बड़ा secondary share transaction हो सकता है।
इस संभावित निवेश के जरिए कंपनी को fresh funds मिल सकते हैं और मौजूदा निवेशकों को liquidity का अवसर मिलेगा।

📊 फिलहाल Ixigo का शेयर ₹307.8 पर ट्रेड कर रहा है, जबकि कंपनी का कुल market capitalization ₹12,012 करोड़ (लगभग $1.36 बिलियन) है।

📈 वित्तीय प्रदर्शन में जबरदस्त ग्रोथ

Ixigo के Q1 FY26 के वित्तीय नतीजे कंपनी की मजबूत स्थिति को दिखाते हैं।

  • कंपनी की revenue from operations 72.5% बढ़कर ₹314 करोड़ पहुँच गई, जो पिछले साल के Q1 FY25 में ₹182 करोड़ थी।
  • वहीं net profit भी 27% बढ़कर ₹19 करोड़ हो गया, जो Q1 FY25 में ₹15 करोड़ था।

इस शानदार ग्रोथ से निवेशकों का भरोसा और भी बढ़ा है, और कंपनी अब tech-driven travel sector में तेजी से अपना market share बढ़ा रही है। 💼📊

🧭 Ixigo का सफर और सफलता की कहानी

2007 में स्थापित Ixigo ने भारत के ट्रैवल-टेक स्पेस में इनोवेशन और कस्टमर-केंद्रित अप्रोच के जरिए मजबूत पहचान बनाई है।
कंपनी का app अब train, flight, hotel bookings, bus travel और trip planning जैसी पूरी travel journey को simplify करता है।

📱 Ixigo का USP इसकी AI-driven recommendations, low-cost travel deals और seamless user experience है।
इसका customer base आज करोड़ों यूज़र्स तक पहुंच चुका है, जो इसे भारत के सबसे भरोसेमंद travel platforms में से एक बनाता है।

🧩 Deal के मायने

यह संभावित 16% हिस्सेदारी वाली डील Ixigo के लिए strategic signal है कि मार्केट में इसके बिज़नेस मॉडल पर मजबूत विश्वास बना हुआ है।

  • Primary acquisition से कंपनी को fresh capital मिल सकती है, जिसका इस्तेमाल growth initiatives में होगा।
  • Secondary acquisition से मौजूदा निवेशकों को आंशिक exit का मौका मिलेगा।

निवेशकों के लिए यह मौका होगा तेजी से बढ़ते travel-tech सेक्टर में एक profit-making और publicly listed player का हिस्सा बनने का। 🌍💸

📊 Market और valuation पर नजर

Ixigo की market capitalization ₹12,000 करोड़ के पार जा चुकी है।
कंपनी अब EaseMyTrip, MakeMyTrip जैसे established players के साथ compete कर रही है, लेकिन इसका tech-first और regional approach इसे unique बनाता है।

भारत में travel demand में तेजी आने और digital adoption बढ़ने से Ixigo जैसी tech-led कंपनियों के लिए growth के बड़े मौके बन रहे हैं।

🔍 Expert की राय

Market analysts का कहना है कि अगर यह 16% निवेश deal पूरी होती है, तो यह Ixigo के लिए दो बड़े फायदे लाएगी —

  1. Market credibility में मजबूती
  2. Capital inflow से tech और marketing में विस्तार

Analysts मानते हैं कि IPO के बाद company ने जिस तरह steady performance दिया है, उससे यह deal investors के confidence को और बढ़ाएगी।

🏁 निष्कर्ष

Ixigo अब सिर्फ एक travel app नहीं, बल्कि भारत के travel ecosystem का एक मजबूत tech brand बन चुका है।
संभावित 16% हिस्सेदारी वाली यह deal कंपनी के लिए एक strategic milestone हो सकती है, जिससे इसके investors और public shareholders दोनों को लाभ होगा।

📊 बढ़ती revenue, मजबूत IPO performance और बढ़ते investor trust के साथ, Ixigo आने वाले वर्षों में travel-tech सेक्टर में एक market leader बनने की ओर बढ़ रहा है।

👉 अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह IPO के बाद का सबसे बड़ा secondary transaction होगा — और यह भारत के travel-tech sector की confidence story को एक नया chapter देगा। ✨

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