📊 Union Budget 2026–27: स्टार्टअप,

Union Budget

Union Budget 2026–27 में सरकार ने स्टार्टअप्स, MSMEs और SMEs को केंद्र में रखते हुए कई अहम घोषणाएँ की हैं। इस बजट का फोकस साफ तौर पर फंडिंग की उपलब्धताक्रेडिट सपोर्टमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, और रेगुलेटरी आसानियाँ देने पर रहा है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धी माहौल को देखते हुए यह बजट भारत के उद्यमशील इकोसिस्टम को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

🚀 स्टार्टअप्स के लिए ₹10,000 करोड़ का नया फंड

बजट 2026–27 की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है Fund of Funds for Startups (FFS) के लिए ₹10,000 करोड़ का नया आवंटन। यह राशि SEBI-रजिस्टर्ड वेंचर कैपिटल और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश की जाएगी।

इस फंड का उद्देश्य खासतौर पर:

  • अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स को शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराना
  • ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को स्केल करने में मदद करना
  • प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करना

सरकार की यह रणनीति स्टार्टअप्स में सीधे निवेश करने के बजाय प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स के जरिए पूंजी पहुंचाने की है, जिससे निवेश ज्यादा प्रभावी और बाजार-उन्मुख बन सके।

🏭 MSMEs के लिए ग्रोथ और रेज़िलिएंस फंड

MSME सेक्टर को मजबूत करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ का MSME Growth and Resilience Fund प्रस्तावित किया गया है। इस फंड का मकसद MSMEs को वैश्विक व्यापार दबावसप्लाई चेन डिसरप्शन, और आर्थिक झटकों से निपटने में मदद करना है।

खास तौर पर वे स्टार्टअप्स जो:

  • MSME के तहत रजिस्टर्ड हैं
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे हैं
  • एक्सपोर्ट-लिंक्ड बिजनेस मॉडल पर आधारित हैं

उन्हें इस फंड से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। यह पहल भारत को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने के विज़न के अनुरूप है।

🧬 बायोफार्मा सेक्टर के लिए ‘Biopharma Shakti’

सरकार ने Biopharma Shakti नाम से ₹10,000 करोड़ का एक विशेष प्रोग्राम लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य भारत में डोमेस्टिक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

इस कार्यक्रम के तहत:

  • रिसर्च और इनोवेशन को फंडिंग
  • पायलट प्रोजेक्ट्स से लेकर कमर्शियल स्केल-अप तक सपोर्ट
  • मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन फैसिलिटीज की स्थापना

भारत पहले ही जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक पहचान बना चुका है। यह पहल भारत को हाई-वैल्यू बायोफार्मा और इनोवेटिव ड्रग डेवलपमेंट में भी आगे ले जाने की कोशिश है।

🔌 इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने Electronic Component Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत आवंटन को लगभग दोगुना करते हुए ₹40,000 करोड़ करने की घोषणा की है। पिछले साल इस योजना के लिए ₹22,919 करोड़ स्वीकृत किए गए थे।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने India Semiconductor Mission के दूसरे चरण की शुरुआत की भी घोषणा की। पहले चरण के तहत घोषित फंड्स अब लगभग समाप्त होने के करीब हैं, ऐसे में यह कदम भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

☁️ डेटा सेंटर और क्लाउड सेक्टर को टैक्स राहत

एक अहम और दूरगामी घोषणा के तहत सरकार ने भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करने वाले विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव रखा है।

इस कदम से:

  • भारत में डेटा सेंटर निवेश बढ़ेगा
  • क्लाउड और AI स्टार्टअप्स को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा
  • भारत डिजिटल इकोनॉमी का ग्लोबल हब बन सकता है

🎨 क्रिएटर इकोनॉमी और ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर फोकस

बजट में Indian Institute of Creative Technologies, मुंबई को सपोर्ट देने की घोषणा भी की गई है। इसके तहत:

  • 15,000 स्कूलों और
  • 500 कॉलेजों में AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics) और कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी

सरकार का लक्ष्य 2030 तक 20 लाख नौकरियाँ पैदा करने का है, जिससे ऑरेंज इकोनॉमी यानी क्रिएटिव और डिजिटल कंटेंट सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

🔍 कुल मिलाकर बजट क्या संकेत देता है?

यूनियन बजट 2026–27 साफ संकेत देता है कि सरकार:

  • स्टार्टअप्स को आर्थिक मजबूती देना चाहती है
  • MSMEs को ग्लोबल प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है
  • मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और क्रिएटिव सेक्टर को भविष्य का इंजन मान रही है

हालांकि, इन योजनाओं की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि फंड्स का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है। अगर सही तरीके से लागू किया गया, तो यह बजट भारत के स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। 🇮🇳✨

Read more :🚚 Delhivery के Q3 FY26 नतीजे 18% रेवेन्यू ग्रोथ और 59% मुनाफे की छलांग 📈

🚚 Delhivery के Q3 FY26 नतीजे 18% रेवेन्यू ग्रोथ और 59% मुनाफे की छलांग 📈

Delhivery

भारत की प्रमुख लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन कंपनी Delhivery ने शनिवार को अपने Q3 FY26 के वित्तीय नतीजों की घोषणा की। नतीजे साफ संकेत देते हैं कि कंपनी न सिर्फ रेवेन्यू के मोर्चे पर मजबूत हो रही है, बल्कि मुनाफे में भी लगातार सुधार कर रही है। इस तिमाही में Delhivery ने 18% साल-दर-साल रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, वहीं कंपनी का मुनाफा 59% बढ़कर ₹40 करोड़ तक पहुंच गया। 💰

📊 रेवेन्यू में मजबूत उछाल

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दाखिल वित्तीय विवरणों के अनुसार, Delhivery का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में ₹2,805 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹2,378 करोड़ था। यह बढ़ोतरी भारत में ई-कॉमर्स, डी2सी ब्रांड्स और ओम्नी-चैनल रिटेल की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

कंपनी ने सिर्फ ऑपरेशंस से ही नहीं, बल्कि नॉन-ऑपरेटिंग गतिविधियों से भी ₹77 करोड़ की कमाई की। इस तरह Delhivery का कुल रेवेन्यू ₹2,882 करोड़ तक पहुंच गया। 💼

🚛 लॉजिस्टिक्स सेवाएं बनीं कमाई की रीढ़

Delhivery की आय का बड़ा हिस्सा उसकी कोर लॉजिस्टिक्स सेवाओं से आता है, जिनमें शामिल हैं:

  • वेयरहाउसिंग 🏬
  • लास्ट-माइल डिलीवरी 🚚
  • लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम्स का डिजाइन और संचालन

इन सेवाओं की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, खासकर ऑनलाइन शॉपिंग, क्विक कॉमर्स और बी2बी सप्लाई चेन के विस्तार के चलते।

💸 खर्चों पर कंट्रोल बनी सफलता की कुंजी

रेवेन्यू बढ़ने के साथ-साथ Delhivery ने खर्चों पर भी सख्त नियंत्रण रखा, जिसका सीधा फायदा मुनाफे में देखने को मिला।

  • फ्रेट हैंडलिंग और सर्विसिंग कॉस्ट कुल खर्च का लगभग 70% रही और इसमें 7.4% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹1,980 करोड़ तक पहुंच गई।
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च में हल्की गिरावट आई और यह 4% घटकर ₹410 करोड़ रह गया।
  • डिप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन का खर्च ₹187 करोड़ रहा।
  • लीगल, फाइनेंस और अन्य ओवरहेड्स मिलाकर खर्च ₹243 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल 4% की बढ़ोतरी है।

📉 खर्चों को संतुलित रखने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने की वजह से कंपनी ने बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी हासिल की।

📈 मुनाफे में 59% की जबरदस्त बढ़त

18% की रेवेन्यू ग्रोथ और नियंत्रित खर्चों का नतीजा यह रहा कि Delhivery का मुनाफा Q3 FY26 में ₹40 करोड़ हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह ₹25 करोड़ था।
खास बात यह है कि पिछली तिमाही में कंपनी को ₹50 करोड़ का नुकसान हुआ था, ऐसे में यह तिमाही Delhivery के लिए एक बड़ा टर्नअराउंड मानी जा रही है। 🔄

🗓️ पूरे वित्त वर्ष की झलक

अगर पूरे वित्त वर्ष FY26 के पहले नौ महीनों की बात करें, तो:

  • ऑपरेशंस से रेवेन्यू 13% से ज्यादा बढ़कर ₹7,658 करोड़ रहा
  • कुल मुनाफा ₹88 करोड़ दर्ज किया गया

यह दिखाता है कि कंपनी सिर्फ तिमाही आधार पर नहीं, बल्कि सालाना स्तर पर भी अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत कर रही है।

👩‍💼 कर्मचारियों के लिए ESOPs

Delhivery ने अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए 70,900 ESOPs (Employee Stock Options) भी जारी किए हैं, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹3 करोड़ बताई गई है। यह कदम कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ में कर्मचारियों को भागीदार बनाने की रणनीति को दर्शाता है। 🤝

📉 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

पिछले ट्रेडिंग सेशन के अंत में Delhivery का शेयर ₹426.35 पर बंद हुआ। इसके साथ ही कंपनी का मार्केट कैप ₹31,903 करोड़ (लगभग $3.54 बिलियन) हो गया। 📊

🔮 आगे की राह

Delhivery के Q3 FY26 नतीजे यह संकेत देते हैं कि कंपनी अब ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच बेहतर संतुलन बना रही है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और सप्लाई चेन डिजिटाइजेशन के बढ़ते ट्रेंड के बीच Delhivery आने वाले समय में भारत की लॉजिस्टिक्स रीढ़ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

📌 निवेशकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए यह एक अहम संकेत है कि सही रणनीति, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और खर्चों पर नियंत्रण के साथ लॉजिस्टिक्स जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में भी मुनाफा संभव है।

Read more :🇮🇳 Indian Startup Weekly Wrap फंडिंग में 58% गिरावट,

🇮🇳 Indian Startup Weekly Wrap फंडिंग में 58% गिरावट,

Weekly Wrap

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए यह हफ्ता मिक्स्ड सिग्नल्स लेकर आया। एक तरफ जहां फंडिंग में तेज़ गिरावट देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर निवेश, फाइनेंशियल रिज़ल्ट्स, IPO मूवमेंट, M&A और बड़े हायरिंग‑लेऑफ्स ने पूरे हफ्ते को काफ़ी एक्टिव बनाए रखा।

इस हफ्ते 23 भारतीय स्टार्टअप्स Weekly Wrap ने कुल $147.64 मिलियन (करीब ₹1,225 करोड़) की फंडिंग जुटाई। इसमें 4 ग्रोथ‑स्टेज और 19 अर्ली‑स्टेज डील्स शामिल रहीं, जबकि 3 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग डिटेल्स डिस्क्लोज नहीं कीं

इसके मुकाबले, पिछले हफ्ते 47 स्टार्टअप्स ने मिलकर करीब $354 मिलियन जुटाए थे, यानी वीक‑ऑन‑वीक आधार पर फंडिंग में 58% की गिरावट दर्ज की गई।


🚀 ग्रोथ‑स्टेज डील्स: $77.8 मिलियन की फंडिंग

इस हफ्ते ग्रोथ‑स्टेज फंडिंग $77.8 मिलियन रही, जो 4 डील्स के ज़रिए आई।

  • Easy Home Finance (मुंबई):
    होम लोन लेंडर ने Series C में $30 मिलियन जुटाए। इस राउंड का नेतृत्व Investcorp ने किया।
  • JJG Aero:
    एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप ने Norwest Venture Partners से $30 मिलियन (Series B) फंडिंग हासिल की।
  • 4baseCare:
    प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी स्टार्टअप ने Series B के पहले क्लोज़ में ₹90 करोड़ ($9.8 मिलियन) जुटाए। यह राउंड आशीष कचोलिया और लाशित संघवी द्वारा को‑लीड किया गया।
  • SpotDraft:
    लीगल‑टेक स्टार्टअप ने Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की Series B एक्सटेंशन फंडिंग उठाई।

🌱 अर्ली‑स्टेज फंडिंग: 19 डील्स में $69.84 मिलियन

अर्ली‑स्टेज में इस हफ्ते $69.84 मिलियन की फंडिंग हुई।

  • The Guild (पूर्व में EtherealX):
    स्पेसटेक स्टार्टअप ने Series A में $20.5 मिलियन, TDK Ventures और BIG Capital के नेतृत्व में जुटाए।
  • Agrani Labs (बेंगलुरु):
    AI सेमीकंडक्टर स्टार्टअप ने Seed राउंड में $8 मिलियन, Peak XV Partners के नेतृत्व में हासिल किए।

इसके अलावा:

  • Nivaan Care (Healthtech)
  • Vimag Labs (Deeptech)
  • Cava Athleisure (Everyday-wear brand)

जैसे कई स्टार्टअप्स को भी फंडिंग मिली।
वहीं SBC LLP (Legaltech), TakeTwo (AI) और Sanyark Space (Spacetech) ने भी फंडिंग जुटाई, हालांकि रकम सार्वजनिक नहीं की गई।


🏙️ शहर और सेगमेंट के हिसाब से ट्रेंड

📍 City-wise

  • बेंगलुरु: 14 डील्स (सबसे आगे)
  • Delhi-NCR: 5 डील्स
  • Hyderabad: 2 डील्स
  • Mumbai और Chennai: 1‑1 डील

🧠 Segment-wise

  • Deeptech: 6 डील्स
  • AI: 4 डील्स
  • Healthtech, Fintech, Aerospace, Legaltech, E‑commerce सहित अन्य सेगमेंट्स में भी निवेश हुआ।

📊 Series‑wise फंडिंग

  • Seed Rounds: 8 डील्स
  • Series A और Pre‑Seed: 5‑5 डील्स
  • Series B, Series C और Pre‑Series A में भी कुछ डील्स दर्ज हुईं।

📉 फंडिंग ट्रेंड: गिरावट लेकिन स्थिर औसत

  • इस हफ्ते फंडिंग: $147.64 मिलियन
  • पिछले हफ्ते: $353.81 मिलियन
  • पिछले 8 हफ्तों का औसत:
    👉 $192.27 मिलियन प्रति हफ्ता, लगभग 24 डील्स

यह दिखाता है कि भले ही इस हफ्ते स्लोडाउन रहा, लेकिन ओवरऑल एक्टिविटी बनी हुई है।


👔 Key Hirings और Departures

  • Jungle Ventures ने Amrit Raj को पहला Partner और CMO नियुक्त किया।
  • Easebuzz ने Parimal Kumar Shivendu को Executive Director और Board Member बनाया।
  • Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद कंपनी से इस्तीफा दिया।

🤝 M&A अपडेट

  • Macobs Technologies (Menhood की पैरेंट कंपनी) ने
    Getmymettle में 50.01% हिस्सेदारी ₹10.5 करोड़ में खरीदने का एग्रीमेंट साइन किया।
    इससे कंपनी प्रोटीन सप्लीमेंटेशन सेगमेंट में एंट्री कर रही है।

⚠️ Layoffs की खबरें

  • Zupee (Gaming Startup):
    लगभग 200 कर्मचारियों की छंटनी, यानी 40% वर्कफोर्स।
  • Ola Electric:
    फ्रंट‑एंड ऑपरेशंस में ऑटोमेशन बढ़ाने के चलते 5% स्टाफ कटौती

💰 Fund Launches

  • Navam Capital ने अपना पहला फंड
    👉 Navam Venture Fund‑I
    👉 ₹250 करोड़ का फाइनल क्लोज़, ग्रीन शू ऑप्शन के साथ ₹315 करोड़+
  • Red Vanda Partners (Aizawl) ने
    Bana Kaih Venture Capital Fund लॉन्च किया, टारगेट ₹100 करोड़

📌 निष्कर्ष

इस हफ्ते भले ही स्टार्टअप फंडिंग में 58% की गिरावट दर्ज हुई हो, लेकिन:

  • IPO फाइलिंग
  • फाइनेंशियल रिज़ल्ट्स
  • फंड लॉन्च
  • M&A और
  • सेगमेंट‑लेवल शिफ्ट्स

यह साफ दिखाते हैं कि Indian Startup Ecosystem अभी भी मजबूत और एक्टिव है। आने वाले हफ्तों में फंडिंग में रिकवरी और नई ग्रोथ स्टोरीज़ देखने को मिल सकती हैं।

Read more :👔 D2C मेंसवियर ब्रांड Snitch की तेज़ रफ्तार

👔 D2C मेंसवियर ब्रांड Snitch की तेज़ रफ्तार

Snitch

भारतीय D2C (Direct-to-Consumer) फैशन इंडस्ट्री में Snitch तेजी से उभरते हुए ब्रांड्स में शामिल हो चुका है। FY24 में 2.3 गुना ग्रोथ दर्ज करने के बाद, FY25 में Snitch ने अपनी ग्रोथ को न सिर्फ बरकरार रखा, बल्कि दोगुना स्केल करते हुए ₹500 करोड़ के आय स्तर को भी पार कर लिया। खास बात यह रही कि इतनी तेज़ ग्रोथ के बावजूद कंपनी ब्रेकईवन के बेहद करीब बनी रही।


📊 FY25 में मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के अनुसार:

  • FY25 में Snitch का ऑपरेटिंग रेवेन्यू: ₹498 करोड़
  • FY24 में रेवेन्यू: ₹241 करोड़

यानि कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर 2X से ज्यादा ग्रोथ दर्ज की। यह उपलब्धि D2C फैशन जैसे हाई-कॉम्पिटिशन सेक्टर में Snitch की मजबूत ब्रांड पकड़ को दर्शाती है।


🧑‍💼 2020 में हुई थी शुरुआत

Snitch की स्थापना 2020 में सिद्धार्थ डूंगरवाल ने की थी। कंपनी:

  • ट्रेंडी और अफोर्डेबल मेंसवियर
  • फैशन-फॉरवर्ड डिज़ाइन
  • डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच

के लिए जानी जाती है। Snitch अपने प्रोडक्ट्स को खुद की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए बेचती है, जिससे उसे कस्टमर डेटा और मार्जिन दोनों पर बेहतर कंट्रोल मिलता है।

फिलहाल, कपड़े और एक्सेसरीज़ ही कंपनी की एकमात्र आय का स्रोत हैं, हालांकि हाल ही में Snitch ने क्विक कॉमर्स सेगमेंट में भी एंट्री की है, जो भविष्य में ग्रोथ को और रफ्तार दे सकता है।


💸 खर्चों में भी हुआ इजाफा

तेज़ ग्रोथ के साथ कंपनी के खर्चों में भी स्वाभाविक रूप से बढ़ोतरी हुई। FY25 में:

🔹 Procurement Cost

  • कुल खर्च का लगभग 45%
  • ₹230 करोड़, जो FY24 की तुलना में दोगुने से ज्यादा है

🔹 Employee Benefits

  • ₹65 करोड़

🔹 Advertising & Marketing

  • ₹83 करोड़, जो ब्रांड बिल्डिंग और कस्टमर एक्विज़िशन पर फोकस को दर्शाता है

इसके अलावा:

  • किराया
  • टेलीफोन खर्च
  • मार्केटप्लेस फीस
  • अन्य ऑपरेशनल ओवरहेड्स

ने मिलकर कुल खर्च को ₹508 करोड़ तक पहुंचा दिया, जो FY24 में ₹236 करोड़ था।


⚖️ मुनाफे और नुकसान की स्थिति

हालांकि FY25 में Snitch को ₹4 करोड़ के FY24 प्रॉफिट के बाद हल्का नुकसान हुआ, लेकिन बड़ी बात यह रही कि:

  • कंपनी ब्रेकईवन के बेहद करीब बनी रही
  • ROCE: -5.8%
  • EBITDA मार्जिन: -1%

यूनिट इकॉनॉमिक्स के स्तर पर:

  • Snitch ने हर ₹1 कमाने के लिए सिर्फ ₹1.02 खर्च किए,
  • जो D2C सेक्टर के हिसाब से काफी हेल्दी माना जाता है

FY25 के अंत तक:

  • कंपनी के कुल करंट एसेट्स: ₹226 करोड़

यह मजबूत बैलेंस शीट भविष्य की ग्रोथ के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।


💰 फंडिंग और निवेशकों का भरोसा

Startup data intelligence platform TheKredible के अनुसार:

  • Snitch अब तक $53 मिलियन से ज्यादा फंडिंग जुटा चुका है
  • इसमें $40 मिलियन की Series B राउंड शामिल है
  • यह राउंड जून 2024 में 360 ONE Asset के नेतृत्व में हुआ था

यह फंडिंग कंपनी को:

  • सप्लाई चेन मजबूत करने
  • नए कैटेगरी लॉन्च
  • टेक और क्विक कॉमर्स एक्सपैंशन

में मदद कर रही है।


🧵 कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला D2C फैशन मार्केट

Snitch ऐसे मार्केट में काम कर रहा है जहां प्रतिस्पर्धा बेहद तेज़ है। इसके प्रमुख कॉम्पिटिटर्स में शामिल हैं:

  • The Souled Store – FY25 में ₹492 करोड़ रेवेन्यू (36% ग्रोथ)
  • Rare Rabbit – हाल ही में $6 मिलियन फंडिंग, ₹1,000 करोड़ का टारगेट
  • Wrogn – स्थापित मेंसवियर ब्रांड

इसके बावजूद Snitch का तेज़ स्केल और कंट्रोल्ड लॉसेज़ इसे अलग बनाते हैं।


🔮 आगे की राह

Snitch ने यह साबित कर दिया है कि:

  • तेज़ ग्रोथ और
  • फाइनेंशियल डिसिप्लिन

दोनों एक साथ संभव हैं।

अगर कंपनी:

  • क्विक कॉमर्स को सही तरीके से स्केल करती है
  • ब्रांड लॉयल्टी बनाए रखती है
  • मार्जिन्स को थोड़ा और सुधारती है

तो आने वाले वर्षों में Snitch भारत के टॉप D2C फैशन ब्रांड्स में अपनी जगह पक्की कर सकता है।


✨ निष्कर्ष

Snitch की FY25 की परफॉर्मेंस यह दिखाती है कि डिजिटल-फर्स्ट, ब्रांड-ड्रिवन और डेटा-बेस्ड अप्रोच के साथ भारतीय D2C स्टार्टअप्स भी बड़े पैमाने पर सफल हो सकते हैं — वो भी बिना भारी नुकसान उठाए।

Read more :📊 CarTrade Tech में Tata Mutual Fund की हिस्सेदारी 5% के पार

📊 CarTrade Tech में Tata Mutual Fund की हिस्सेदारी 5% के पार

CarTrade

भारतीय शेयर बाजार और स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। Tata Mutual Fund ने डिजिटल ऑटो प्लेटफॉर्म CarTrade Tech में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए 5% का महत्वपूर्ण आंकड़ा पार कर लिया है। यह कदम न केवल CarTrade के लिए एक बड़ा कॉन्फिडेंस बूस्ट है, बल्कि बाजार के अन्य निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।


🏦 ओपन मार्केट से की गई खरीदारी

रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, Tata Asset Management Company ने अपने विभिन्न म्यूचुअल फंड स्कीम्स की ओर से 28 जनवरी 2026 को CarTrade Tech के 90,522 इक्विटी शेयर खुले बाजार से खरीदे।

इस खरीद के बाद:

  • Tata Mutual Fund की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 23,99,962 शेयर हो गई
  • जो कि कंपनी की कुल इक्विटी का 5.0163% है

इससे पहले Tata Mutual Fund के पास:

  • 23,09,440 शेयर थे
  • जो कंपनी की 4.8271% हिस्सेदारी को दर्शाते थे

यानी यह खरीदारी रणनीतिक रूप से 5% की सीमा पार करने के लिए की गई मानी जा रही है।


📌 किन स्कीम्स के जरिए हुआ निवेश?

यह निवेश किसी एक स्कीम तक सीमित नहीं था, बल्कि Tata Mutual Fund की कई प्रमुख स्कीम्स ने इसमें हिस्सा लिया। इनमें शामिल हैं:

  • Tata Balanced Advantage Fund
  • Tata Digital India Fund
  • Tata India Consumer Fund
  • Tata Small Cap Fund
  • Tata Value Fund

इन सभी स्कीम्स का CarTrade Tech में निवेश यह दिखाता है कि कंपनी को अलग-अलग निवेश थीम्स — जैसे डिजिटल, कंज़्यूमर, वैल्यू और स्मॉल-कैप — सभी के लिहाज़ से आकर्षक माना जा रहा है।


🚗 CarTrade Tech: क्या है कंपनी का बिज़नेस?

CarTrade Tech भारत की प्रमुख ऑनलाइन ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड और ऑक्शन प्लेटफॉर्म कंपनियों में से एक है। यह कंपनी:

  • नई और पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री
  • डीलर नेटवर्क
  • ऑटो ऑक्शन
  • डिजिटल ऑटो सॉल्यूशंस

जैसी सेवाएं देती है। इसके प्लेटफॉर्म्स ऑटो डीलर्स, OEMs और कस्टमर्स को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ते हैं।


📈 Q3 FY26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन

Tata Mutual Fund की हिस्सेदारी बढ़ने का समय भी काफी अहम है। यह कदम CarTrade Tech के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद आया है।

कंपनी के Q3 FY26 के नतीजों के अनुसार:

  • रेवेन्यू बढ़कर ₹210 करोड़ पहुंच गया
  • जबकि Q3 FY25 में रेवेन्यू ₹176 करोड़ था

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने लगभग 19% की ग्रोथ दर्ज की।


💰 मुनाफे में भी जबरदस्त उछाल

रेवेन्यू के साथ-साथ CarTrade Tech की प्रॉफिटेबिलिटी में भी बड़ा सुधार देखने को मिला।

  • Q3 FY26 में नेट प्रॉफिट: ₹61.5 करोड़
  • जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में काफी बेहतर है

यह दर्शाता है कि कंपनी न केवल ग्रोथ पर ध्यान दे रही है, बल्कि अपने ऑपरेशंस को ज्यादा एफिशिएंट बनाकर मुनाफा भी बढ़ा रही है।


🔍 Tata Mutual Fund का दांव क्यों अहम है?

भारतीय बाजार में Tata Group का नाम विश्वास, लॉन्ग-टर्म सोच और मजबूत गवर्नेंस का प्रतीक माना जाता है। जब Tata Mutual Fund किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाता है, तो इसका मतलब होता है कि:

  • कंपनी के बिज़नेस मॉडल पर भरोसा
  • भविष्य की ग्रोथ की स्पष्ट संभावना
  • मैनेजमेंट और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर विश्वास

5% से ज्यादा हिस्सेदारी पार करना यह भी दिखाता है कि Tata Mutual Fund अब CarTrade Tech को स्ट्रैटेजिक लॉन्ग-टर्म निवेश के तौर पर देख रहा है।


📉 बाजार और निवेशकों के लिए क्या मायने?

इस निवेश के बाद:

  • रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है
  • अन्य इंस्टीट्यूशनल निवेशक भी CarTrade Tech पर दोबारा नज़र डाल सकते हैं
  • शेयर की लिक्विडिटी और ट्रैकिंग बढ़ने की संभावना रहती है

साथ ही, मजबूत तिमाही नतीजों और Tata जैसे बड़े निवेशक की मौजूदगी कंपनी की मार्केट साख को और मजबूत करती है।


🧠 निष्कर्ष

CarTrade Tech में Tata Mutual Fund की हिस्सेदारी का 5% के पार जाना सिर्फ एक रेगुलेटरी अपडेट नहीं है, बल्कि यह कंपनी की बिज़नेस स्ट्रेंथ और ग्रोथ स्टोरी पर एक मजबूत मुहर है।

मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, बढ़ता मुनाफा और Tata जैसे भरोसेमंद निवेशक का साथ — ये सभी संकेत देते हैं कि CarTrade Tech आने वाले समय में भी निवेशकों के लिए चर्चा में बनी रह सकती है।

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🌸 फेमिनिन हाइजीन ब्रांड Plush तेज़ ग्रोथ,

Plush

भारत में फेमिनिन हाइजीन से जुड़ी बातचीत पिछले कुछ वर्षों में काफी बदली है। जो विषय पहले टैबू माना जाता था, आज उस पर खुले तौर पर बात हो रही है। इसी बदलाव का फायदा उठाने वाले ब्रांड्स में से एक है Plush। यह डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर (D2C) फेमिनिन हाइजीन ब्रांड लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और FY25 में कंपनी ने रेवेन्यू में 2.3 गुना की ग्रोथ दर्ज की है।

हालांकि, इस तेज़ ग्रोथ के साथ कंपनी का नुकसान भी बढ़ा है, लेकिन स्टार्टअप इकोसिस्टम में इसे “growth-first phase” का स्वाभाविक हिस्सा माना जा रहा है।


📈 FY25 में रेवेन्यू दोगुने से भी ज्यादा

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार,
Plush का ऑपरेशंस से रेवेन्यू FY24 में ₹29 करोड़ था, जो FY25 में बढ़कर ₹66 करोड़ हो गया। यानी एक साल में कंपनी ने 2.3X ग्रोथ हासिल की।

इसके अलावा, ब्याज से प्राप्त करीब ₹1 करोड़ की अन्य आय को जोड़ने के बाद, FY25 में कंपनी की कुल आय ₹67 करोड़ रही। यह आंकड़ा दिखाता है कि Plush ने बहुत कम समय में अपने प्रोडक्ट्स के लिए मजबूत कंज़्यूमर डिमांड तैयार की है।


🧴 कोर बिज़नेस: पर्सनल केयर और फेमिनिन हाइजीन

Plush की कमाई का मुख्य स्रोत इसके फेमिनिन हाइजीन और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स हैं।
इनमें सैनिटरी पैड्स, इंटीमेट केयर और महिलाओं की डेली हाइजीन से जुड़े प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

भारत जैसे बड़े और तेजी से बदलते बाज़ार में, जहां जागरूकता बढ़ रही है और महिलाएं ब्रांडेड व क्वालिटी प्रोडक्ट्स की ओर शिफ्ट कर रही हैं, Plush को इसका सीधा फायदा मिल रहा है।


💸 खर्चों में भी तेज़ बढ़ोतरी

जैसे-जैसे कंपनी का स्केल बढ़ा, वैसे-वैसे इसके खर्चों में भी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली।

  • Raw material cost:
    कुल खर्च का 34%,
    FY24 में ₹11 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹25 करोड़ (127% की बढ़ोतरी)
  • Advertising और Marketing खर्च:
    96% की छलांग के साथ ₹21.5 करोड़
    (ब्रांड बिल्डिंग और कस्टमर एक्विज़िशन पर भारी निवेश)
  • Employee benefit expenses:
    67% बढ़कर ₹4 करोड़
  • Shipping और Delivery खर्च:
    ₹2.6 करोड़

इन सभी को मिलाकर, Plush के कुल खर्च FY25 में ₹74 करोड़ रहे, जो FY24 के ₹34 करोड़ के मुकाबले 118% ज्यादा हैं।


📉 घाटा बढ़ा, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार

तेज़ ग्रोथ और बढ़ते खर्चों के कारण Plush का नुकसान FY25 में ₹7 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹4 करोड़ था। यानी घाटे में 75% की बढ़ोतरी

कंपनी के:

  • ROCE: -93.75%
  • EBITDA Margin: -11.23%

हालांकि, पॉजिटिव संकेत यह है कि यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार हुआ है।
FY25 में Plush ने:

  • हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.12 खर्च किए,
    जबकि FY24 में यह आंकड़ा ₹1.17 था।

यह दिखाता है कि कंपनी धीरे-धीरे ऑपरेशनल एफिशिएंसी की ओर बढ़ रही है।


🏦 कैश पोज़िशन और बैलेंस शीट

मार्च 2025 तक:

  • Plush के पास ₹3 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस था
  • Current assets की वैल्यू ₹29.5 करोड़ रही

यह कंपनी को शॉर्ट-टर्म ऑपरेशंस चलाने और ग्रोथ को सपोर्ट करने में मदद करता है।


🎯 ₹200 करोड़ रेवेन्यू रन रेट का लक्ष्य

कंपनी का कहना है कि वह मौजूदा कैलेंडर ईयर में ₹200 करोड़ के रेवेन्यू रन रेट तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रही है।
अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो Plush भारत के फेमिनिन हाइजीन सेगमेंट में एक बड़ा प्लेयर बन सकता है।


💼 फंडिंग और निवेशकों का भरोसा

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के मुताबिक, Plush अब तक कुल $8 मिलियन (करीब ₹65+ करोड़) की फंडिंग जुटा चुका है।

हाल ही में कंपनी ने:

  • ₹40 करोड़ की Series B फंडिंग
  • जिसका नेतृत्व किया Rahul Garg (Managing Partner, Ignite Growth) ने

इस राउंड में अन्य निवेशक शामिल रहे:
Ajay Kumar Aggarwal, Careernet Technologies, OTP Ventures, Blume Founders Fund और अन्य।


🔍 निष्कर्ष

Plush की कहानी यह दिखाती है कि:

  • भारत में फेमिनिन हाइजीन एक तेज़ी से बढ़ता हुआ मार्केट है
  • शुरुआती दौर में घाटा, लेकिन मजबूत ग्रोथ D2C ब्रांड्स के लिए सामान्य रणनीति है
  • बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स और बढ़ता स्केल भविष्य में प्रॉफिटेबिलिटी की राह खोल सकता है

अगर कंपनी खर्चों को कंट्रोल करते हुए ग्रोथ बनाए रखती है, तो आने वाले वर्षों में Plush एक सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल ब्रांड बन सकता है।

Read more :🚀 फिनटेक यूनिकॉर्न CRED FY25 में मजबूत ग्रोथ,

🚀 फिनटेक यूनिकॉर्न CRED FY25 में मजबूत ग्रोथ,

CRED

भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम की चर्चित यूनिकॉर्न कंपनी CRED ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में यह साबित कर दिया है कि कंपनी अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल बिज़नेस पर फोकस कर रही है 💡।
कंपनी की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, FY25 में CRED की ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹2,735 करोड़ रही, जो साल-दर-साल आधार पर 16% की बढ़त दिखाती है 📈।

सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इसी दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग लॉस 51% घटकर ₹298 करोड़ रह गया, जो मैनेजमेंट की cost-control strategy को दिखाता है ✅।


📉 नेट लेवल पर घाटा, लेकिन स्थिति पहले से बेहतर

हालांकि CRED ने ऑपरेटिंग स्तर पर बड़ा सुधार किया है, फिर भी कंपनी नेट बेसिस पर घाटे में बनी हुई है। FY25 में कंपनी का कुल नुकसान ₹1,457 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 11.5% कम है ⬇️।

इस नेट लॉस में ESOPs (Employee Stock Options) और डिप्रिसिएशन जैसे नॉन-ऑपरेटिंग खर्च शामिल हैं। कंपनी का मानना है कि ये खर्च लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और टैलेंट रिटेंशन के लिए ज़रूरी हैं 👥।


💰 70% ग्रॉस मार्जिन: बिज़नेस मॉडल की ताकत

FY25 में CRED का ग्रॉस मार्जिन करीब 70% रहा 💪।
यह दिखाता है कि कंपनी का डिजिटल बिज़नेस मॉडल मजबूत है और स्केल बढ़ने के साथ प्रॉफिटेबिलिटी की संभावना और बेहतर हो सकती है।


👥 यूज़र ग्रोथ और एंगेजमेंट में जबरदस्त उछाल

CRED की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन उसका एक्टिव यूज़र बेस रहा है 🔥।

  • Monthly Transacting Users (MTUs) बढ़कर 1.26 करोड़ हो गए (+14.5%)
  • प्रति यूज़र ट्रांजैक्शन फ्रीक्वेंसी 34% बढ़कर 14.4 ट्रांजैक्शन/महीना हो गई 🔁
  • प्लेटफॉर्म पर प्रोसेस हुआ कुल पेमेंट वैल्यू ₹8.5 लाख करोड़, जिसमें 23% YoY ग्रोथ दर्ज की गई 💳

ये आंकड़े बताते हैं कि यूज़र्स सिर्फ ऐप डाउनलोड नहीं कर रहे, बल्कि एक्टिवली इस्तेमाल भी कर रहे हैं।


📊 मल्टी-प्रोडक्ट यूज़ से बेहतर मॉनेटाइजेशन

FY25 में CRED की मॉनेटाइजेशन स्ट्रैटेजी और मजबूत हुई 💡।
कंपनी के अनुसार:

  • 45% एक्टिव मेंबर्स ने 3 या उससे ज्यादा प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए
  • इससे ARPU (Average Revenue Per User) बढ़कर करीब ₹2,000 हो गया 💸

यह साफ दिखाता है कि CRED अब एक ऑल-इन-वन पर्सनल फाइनेंस प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है।


🏦 लेंडिंग बनी सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर

CRED के लिए FY25 में भी लेंडिंग बिज़नेस सबसे अहम रेवेन्यू सोर्स रहा 🔑।
कंपनी का Managed AUM बढ़कर ₹22,000 करोड़ तक पहुंच गया।

साल के दौरान लॉन्च किए गए प्रमुख प्रोडक्ट्स:

  • 📱 CRED Money
  • 📊 Credit Score & Card Management Tools
  • 💼 PPI Wallet
  • 💵 CRED Cash+

इसके अलावा, कंपनी के इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म CRED Garage में नए इंश्योरर्स जुड़े, जिससे इंश्योरेंस रेवेन्यू में भी ग्रोथ देखने को मिली 🛡️।


💸 फंडिंग और वैल्यूएशन का सच

डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के मुताबिक, CRED अब तक 9 फंडिंग राउंड्स में $1 बिलियन+ जुटा चुका है 🌍।

मई 2025 में GIC के नेतृत्व में $72 मिलियन का डाउन राउंड हुआ, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन:

  • 📉 $6.4B (2022) से घटकर
  • 📊 $3.64B रह गया

हालांकि यह गिरावट आई, लेकिन कंपनी इसे लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी की दिशा में जरूरी कदम मानती है।


🎯 FY26 में मुनाफे का लक्ष्य

CRED का कहना है कि वह FY26 में फुल प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है 🏁।
ऑपरेटिंग लॉस में कमी, मजबूत यूज़र एंगेजमेंट और बेहतर मॉनेटाइजेशन इस लक्ष्य को संभव बनाते हैं।


🔍 निष्कर्ष

CRED की FY25 की परफॉर्मेंस यह दिखाती है कि भारतीय फिनटेक यूनिकॉर्न्स अब “Growth at all costs” से आगे बढ़कर Profit + Sustainability की सोच अपना रहे हैं 🌱।
अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो FY26 में CRED का मुनाफे में आना कोई हैरानी की बात नहीं होगी ✨।

Read more :🏠 Easy Home Finance ने Series C में जुटाए $30 Million

🏠 Easy Home Finance ने Series C में जुटाए $30 Million

Easy Home Finance

मुंबई स्थित home loan lender Easy Home Finance ने अपने Series C funding round में $30 million (करीब ₹250 करोड़) जुटाए हैं।
इस funding round का नेतृत्व Investcorp ने किया है, जबकि कंपनी के मौजूदा निवेशक Claypond Capital और SMBC Asia Fund ने भी इसमें भागीदारी की है।

इस ताज़ा फंडिंग के साथ ही Easy Home Finance की total funding करीब $130 million तक पहुंच गई है, जो भारत के affordable housing finance सेक्टर में बढ़ते investor confidence को दर्शाता है।


💰 Funding का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, Series C से मिले फंड्स का उपयोग मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • New markets में expansion
  • Technology platform को और मजबूत करने में
  • Distribution network को scale up करने में

Easy Home Finance का फोकस आने वाले समय में:

  • Loan book को तेज़ी से grow करने
  • और metro cities से बाहर अपनी मौजूदगी बढ़ाने
    पर रहेगा, क्योंकि भारत में affordable housing finance की मांग लगातार बढ़ रही है।

📈 Affordable Housing Finance की बढ़ती मांग

भारत में:

  • Urbanisation तेज़ हो रहा है
  • Middle-income families का home ownership सपना मजबूत हो रहा है
  • Government-backed housing schemes से demand को support मिल रहा है

इन सभी factors के चलते:
👉 Affordable home loans की मांग tier-2 और tier-3 cities में तेजी से बढ़ रही है।

Easy Home Finance इसी trend को capitalize करने की रणनीति पर काम कर रहा है।


🧑‍💼 Easy Home Finance क्या करता है?

2017 में स्थापित, Easy Home Finance एक tech-led housing finance company है, जो:

  • Faster loan approvals
  • Lower documentation
  • Digital-first process

पर फोकस करती है।

🎯 Target Customers:

  • Middle-income borrowers
  • Salaried और self-employed individuals
  • First-time home buyers

कंपनी:

  • Mortgage-backed home loans
  • Largely digital process के जरिए
    प्रदान करती है, जिससे customers को branch visits और paperwork से काफी हद तक राहत मिलती है।

⚙️ Technology-Driven Lending Model

Easy Home Finance का मानना है कि:

  • Traditional housing finance process slow और paperwork-heavy होता है
  • Technology की मदद से इसे ज्यादा efficient बनाया जा सकता है

🖥️ Key Features:

  • Digital onboarding
  • Faster credit assessment
  • Streamlined approval workflows

इस tech-led approach की वजह से:

  • Loan processing time कम होता है
  • Operational costs घटती हैं
  • Customer experience बेहतर बनता है

🌍 Metro Cities से बाहर विस्तार की रणनीति

Easy Home Finance की एक बड़ी रणनीति है:
👉 Non-metro और semi-urban markets में penetration बढ़ाना।

इन markets में:

  • Formal housing finance की पहुंच अभी भी सीमित है
  • Credit demand तेज़ी से बढ़ रही है
  • Competition metros की तुलना में कम है

कंपनी Series C funding का इस्तेमाल करके:

  • New branches खोलेगी
  • Local distribution partners जोड़ेगी
  • On-ground sales teams को मजबूत करेगी

🔁 Previous Funding Rounds की झलक

Easy Home Finance इससे पहले भी कई बड़े funding rounds जुटा चुका है:

  • नवंबर 2024
    👉 $35 million funding
    👉 Led by Claypond Capital (Ranjan Pai family office)
    👉 Participation: Sumitomo Mitsui Banking Corporation’s Asia Rising Fund
  • 2021
    👉 $15 million Series A
    👉 Led by Xponentia Capital

इन rounds ने कंपनी को:

  • Product development
  • Initial market expansion
  • Risk management framework
    बनाने में मदद की।

🏦 Housing Finance Sector में बढ़ती निवेश गतिविधि

Easy Home Finance की Series C funding ऐसे समय में आई है, जब:
👉 Housing finance और mortgage lending space में निवेश गतिविधियां तेज़ हो रही हैं।

📊 Recent Funding Highlights:

  • Weaver Services (tech-driven housing finance platform)
    👉 2025 में $170 million funding
    👉 Led by Lightspeed और Premji Invest
  • Altum Credo
    👉 $19 million funding
  • Vastu Housing Finance
    👉 $100 million investment from Prosus
  • Basic Home Loan
    👉 $10.6 million funding

यह दिखाता है कि investors को:

  • Affordable housing demand
  • Stable asset-backed lending
  • Long-term growth potential

पर मजबूत भरोसा है।


🧠 Investors का भरोसा क्यों बढ़ रहा है?

Housing finance startups में निवेश बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं:

  • Secured lending model (property-backed loans)
  • Relatively lower default risk
  • Predictable cash flows
  • Strong regulatory oversight

Easy Home Finance जैसी companies:

  • Technology के जरिए efficiency ला रही हैं
  • Credit access को underserved segments तक पहुंचा रही हैं

जिससे investors को long-term value creation दिख रहा है।


🚀 आगे की राह: Growth के साथ Sustainability

Series C funding के बाद Easy Home Finance के सामने अगली चुनौतियां होंगी:

  • Rapid expansion के साथ asset quality बनाए रखना
  • Technology investments को scalable बनाना
  • Distribution growth और risk management में balance रखना

अगर कंपनी:

  • Tier-2 और tier-3 markets में execution सही रखती है
  • Digital advantage को maintain करती है

तो आने वाले वर्षों में Easy Home Finance affordable housing finance space में एक मजबूत player बन सकती है।


🧾 Bottom Line

Easy Home Finance की $30 million Series C funding यह संकेत देती है कि:

  • Affordable housing finance भारत में एक बड़ा opportunity बना हुआ है
  • Tech-led lending models को investor support मिल रहा है

Metro से बाहर expanding demand और मजबूत funding backing के साथ, Easy Home Finance का अगला growth phase भारतीय housing finance ecosystem के लिए काफ़ी अहम साबित हो सकता है।

Read more :⚙️ Deep-Tech Startup Vimag Labs ने जुटाए $5 Million,

⚙️ Deep-Tech Startup Vimag Labs ने जुटाए $5 Million,

Vimag Labs

भारत के deep-tech और electric mobility ecosystem से जुड़ी Bengaluru-based startup Vimag Labs ने अपने लेटेस्ट funding round में $5 million (करीब ₹41–42 करोड़) जुटाए हैं।
इस funding round का नेतृत्व Accel ने किया है, जबकि Chakra Growth Fund और Thinkuvate ने भी इसमें भागीदारी की है।

कंपनी ने एक press release में बताया कि इस फंडिंग का इस्तेमाल वह अपने patented virtual magnet synchronous motor platform के commercialisation को तेज़ करने, साथ ही engineering और manufacturing capabilities को विस्तार देने में करेगी।


🚗 Rare Earth Metals पर निर्भरता कम करने की कोशिश

Electric vehicles (EVs) और industrial motors में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक permanent magnet motors में बड़े पैमाने पर rare earth metals (जैसे neodymium) की जरूरत होती है।
ये metals:

  • महंगे होते हैं
  • Supply-chain risk से जुड़े होते हैं
  • Geopolitical uncertainty से प्रभावित रहते हैं

👉 Vimag Labs का लक्ष्य है इन समस्याओं का समाधान करना — magnet-free electric motor technology के जरिए।


🧠 Vimag Labs क्या करता है?

सितंबर 2025 में स्थापित, Vimag Labs की co-founding की है:

  • Manish Seth
  • Piyush Desai

यह startup high-efficiency electric motors विकसित कर रहा है, जिनमें:

  • Rare earth magnets का इस्तेमाल नहीं होता
  • Performance magnet-based motors जैसी ही मिलती है

🎯 Target Applications:

  • Electric Vehicles (EVs) – खासकर two-wheeler और three-wheeler
  • Industrial machinery
  • HVAC systems
  • Refrigeration
  • Defence applications

⚡ Software-Defined Motors: Vimag की Core Technology

Vimag Labs का कहना है कि उसके motors largely software-defined हैं।

🔬 Technology कैसे काम करती है?

पारंपरिक motors में permanent magnets इस्तेमाल होते हैं, जबकि Vimag:

  • Advanced power electronics
  • Control software
  • Algorithm-driven magnetic field generation

का उपयोग करता है।

👉 यानी motor के अंदर magnetic field electronically generate की जाती है, न कि physical magnets से।

इस approach से:

  • Magnet-based motors के सारे फायदे मिलते हैं
  • लेकिन rare earth metals से जुड़ी दिक्कतें खत्म हो जाती हैं

💡 Cost, Supply Chain और Scalability का Solution

Vimag Labs के मुताबिक, उसकी technology:

  • Cost volatility को कम करती है
  • Supply-chain constraints से राहत देती है
  • Motors को ज्यादा scalable और sustainable बनाती है

EV manufacturers के लिए यह खास तौर पर अहम है, क्योंकि:

  • Global EV demand बढ़ रही है
  • Rare earth metals की availability सीमित है

🛵 EV Focus: Two और Three Wheelers से शुरुआत

फिलहाल Vimag Labs अपनी technology को:

  • Two-wheeler EVs
  • Three-wheeler EVs

में commercialise करने पर फोकस कर रहा है।

यह segment:

  • भारत में सबसे तेज़ी से grow कर रहा है
  • Price sensitivity ज्यादा है
  • Cost-effective motor solutions की मांग ऊंची है

इसके बाद कंपनी:

  • Industrial HVAC
  • Refrigeration
  • Defence sector

जैसे बड़े और long-cycle markets में भी विस्तार करना चाहती है।


🧪 Real-World Testing और TRL-7 Stage

Vimag Labs ने बताया कि उसकी technology:

  • Real-world vehicle testing के दौर से गुजर रही है
  • Technology Readiness Level (TRL) 7 पर पहुंच चुकी है

👉 TRL-7 का मतलब है कि:

  • Technology prototype stage से आगे निकल चुकी है
  • Operational environment में उसका testing हो रहा है

इसके अलावा, startup:

  • अपने electronics stack के कुछ हिस्सों का commercialisation शुरू कर चुका है
  • India और overseas के कई बड़े OEMs (Original Equipment Manufacturers) के साथ काम कर रहा है

🏭 Automakers के लिए Plug-and-Play Solution

Vimag Labs का एक बड़ा दावा यह है कि उसका solution:

  • Plug-and-play
  • Drop-in replacement

के रूप में design किया गया है।

🚘 इसका मतलब:

  • Automakers को existing manufacturing lines में
    कोई बड़ा बदलाव नहीं करना पड़ेगा
  • Vehicle platforms को redesign करने की जरूरत नहीं होगी

यह approach:

  • Adoption को आसान बनाती है
  • Time-to-market कम करती है
  • OEMs के लिए risk घटाती है

💰 Funding का इस्तेमाल कहां होगा?

$5 million की इस funding का उपयोग Vimag Labs करेगा:

  • Patented motor platform के commercialisation को तेज़ करने में
  • Engineering team को मजबूत करने में
  • Manufacturing capabilities के विस्तार में
  • OEM partnerships को scale करने में

Accel जैसे global investor की मौजूदगी से कंपनी को:

  • Strategic guidance
  • Global market access
  • Long-term scaling support

मिलने की उम्मीद है।


🌍 Big Picture: EV और Deep-Tech Ecosystem के लिए अहम

भारत में:

  • EV adoption तेज़ हो रहा है
  • Local manufacturing पर ज़ोर बढ़ रहा है
  • Rare earth dependency एक strategic concern बन चुकी है

ऐसे में Vimag Labs जैसी companies:

  • Atmanirbhar Bharat vision को support करती हैं
  • Clean mobility को ज्यादा sustainable बनाती हैं
  • Deep-tech innovation को आगे बढ़ाती हैं

🧠 Bottom Line

Vimag Labs अभी early-stage में है, लेकिन:

  • Strong deep-tech IP
  • Clear market need
  • OEM partnerships
  • Top-tier investors का समर्थन

इसे India के EV और industrial motor ecosystem में एक promising player बनाते हैं।

अगर कंपनी अपनी technology को scale करने और cost competitiveness साबित करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में Vimag Labs rare earth-free electric motors के क्षेत्र में एक game-changer बन सकती है।

Read more :🌱 AI Startup EarthSync ने Pre-Seed Round में जुटाए $1 Million

🌱 AI Startup EarthSync ने Pre-Seed Round में जुटाए $1 Million

EarthSync

भारत के renewable energy और AI space से जुड़ी Bengaluru-based startup EarthSync ने अपने pre-seed funding round में $1 million (करीब ₹8.3 करोड़) जुटाए हैं।
इस funding round का नेतृत्व Theia Ventures ने किया, जबकि Eximius Ventures ने भी इसमें भागीदारी की।

EarthSync ने एक press release में बताया कि इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपने AI-enabled clean energy modelling platform, forecasting engine, और project marketplace को मजबूत करने में करेगी।


🤖 EarthSync क्या करता है?

EarthSync एक unified artificial intelligence platform है, जो renewable energy से जुड़े planning, procurement और operations को एक ही system में लाने का काम करता है।

स्टार्टअप की स्थापना 2024 में Rajat Singh और Mehul Kumar ने की थी।
कंपनी का उद्देश्य है कि renewable energy decision-making को ज्यादा clear, data-driven और efficient बनाया जाए।


⚡ Fragmented Process को एक Single Platform में बदलने की कोशिश

आज renewable energy projects में:

  • Regulatory approvals
  • Financial modelling
  • Energy forecasting
  • Techno-economic analysis

ये सभी processes अलग-अलग tools और consultants के जरिए किए जाते हैं, जिससे complexity और delay बढ़ जाता है।

👉 EarthSync का platform इन सभी को:

  • Regulatory intelligence
  • Real-time simulation
  • Techno-economic modelling

के साथ एक single workflow में integrate करता है।

इससे:

  • Data scattered नहीं रहता
  • Decision-making तेज़ होती है
  • Capital investment से पहले risks बेहतर तरीके से समझे जा सकते हैं

🏭 किन Customers के लिए बना है EarthSync?

EarthSync का platform खासतौर पर इन stakeholders को target करता है:

  • Independent Power Producers (IPPs)
  • Commercial & Industrial (C&I) enterprises
  • Energy advisors
  • Utilities

ये वे organizations हैं जो:

  • Large-scale solar और wind projects
  • Open access या captive energy models
  • Multi-location energy planning

जैसी complex requirements के साथ काम करते हैं।


📊 AI + Big Data से Clean Energy Decisions आसान

EarthSync का कहना है कि वह big data systems और advanced AI models का इस्तेमाल करके:

  • Energy transition को तेज़ करना चाहता है
  • Cloud-first clean energy finance modelling उपलब्ध कराना चाहता है

🧠 Platform की Key Capabilities:

  • Techno-economic modelling
  • Regulatory data integration
  • Real-time simulations
  • Advanced AI-based forecasting

इन tools की मदद से users:

  • Multiple project options compare कर सकते हैं
  • Returns optimize कर सकते हैं
  • Forecasting improve कर सकते हैं
  • Capital commit करने से पहले confident decisions ले सकते हैं

🔋 10 GW Solar-Wind और 4 GWh BESS Simulations पहले ही पूरे

EarthSync के अनुसार, उसका platform अभी शुरुआती stage में होने के बावजूद impressive traction दिखा रहा है।

🚀 Pilot Projects Highlights:

  • 10 GW solar और wind capacity की simulations
  • 4 GWh Battery Energy Storage Systems (BESS) simulations

ये pilots:

  • Key IPPs
  • Large C&I consumers

के साथ run किए गए हैं।

इन simulations की मदद से decision-makers:

  • 200 MW से ज्यादा solar और wind projects
  • 100 MWh से ज्यादा BESS projects

के लिए strategy बना चुके हैं और bidding process में हिस्सा ले चुके हैं।


🏗️ Current Clients और Future Expansion Plan

फिलहाल EarthSync की services का उपयोग कर रहे हैं:

  • Independent Power Producers (IPPs)
  • Large, energy-intensive C&I enterprises
    • जिनके पास multi-site open access
    • या captive energy requirements हैं

🔮 आगे की योजना:

EarthSync आने वाले समय में expand करना चाहता है:

  • Heavy industries
  • Data centers
  • Large commercial portfolios

जहाँ renewable energy planning और optimization एक critical business requirement बनती जा रही है।


🆚 Competition: Consultants बनाम Point Software Tools

EarthSync खुद को दो तरह के competitors के बीच position करता है:

1️⃣ Traditional Energy Consultants

  • Slow process
  • People-heavy models
  • Spreadsheet-driven analysis
  • Limited scalability

2️⃣ Fragmented Software Tools

  • Isolated problems solve करते हैं
  • End-to-end visibility नहीं देते

👉 EarthSync का दावा है कि उसका platform:

  • Consulting models की जगह ले सकता है
  • Multiple point tools को replace कर सकता है

क्योंकि यह:

  • Regulatory intelligence
  • Forecasting
  • Asset lifecycle workflows

को एक ही platform में integrate करता है।


💡 Funding का इस्तेमाल कहां होगा?

EarthSync के अनुसार, $1 million pre-seed funding का उपयोग किया जाएगा:

  • AI-enabled clean energy modelling engine के development में
  • Advanced forecasting capabilities बनाने में
  • Policy-enabled techno-economic optimization tools में
  • Project marketplace को scale करने में

इसका मकसद है कि users को end-to-end renewable energy decision-making का एक मजबूत digital system मिले।


🌍 Big Picture: Energy Transition में AI की भूमिका

भारत में:

  • Renewable energy adoption तेज़ हो रहा है
  • Corporate decarbonization targets बढ़ रहे हैं
  • Data-driven energy decisions की demand बढ़ रही है

ऐसे में EarthSync जैसे platforms:

  • Energy transition को accelerate कर सकते हैं
  • Capital allocation को efficient बना सकते हैं
  • Clean energy projects की success rate बढ़ा सकते हैं

🧠 Bottom Line

EarthSync अभी एक early-stage startup है, लेकिन:

  • Strong tech-first vision
  • Clear problem statement
  • Real-world pilots और early traction

इसे India के clean energy + AI ecosystem में एक promising player बनाते हैं।

अगर कंपनी अपने platform को scale करने और large enterprises तक पहुंच बनाने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में EarthSync renewable energy planning और optimization space में एक अहम नाम बन सकता है।

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