💰 Saarathi Finance ने पहले ही फंडिंग राउंड में जुटाए ₹475 करोड़,

Saarathi

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) Saarathi Finance ने अपने पहले फंडिंग राउंड में ₹475 करोड़ जुटाए हैं। यह सीरीज A निवेश राउंड प्रमुख रूप से TVS Capital Funds, Lok Capital, Evolvence Equity Partners और Paragon Partners ने लीड किया, जिनके साथ कुछ एंजेल इन्वेस्टर्स ने मिलकर करीब ₹350 करोड़ निवेश किया। बाकी की रकम Vivek Bansal और Sunil Daga ने कंपनी में खुद निवेश की।

इस ताज़ा फंडिंग के बाद Saarathi Finance की वैल्यूएशन ₹900 करोड़ से अधिक आँकी जा रही है, जो इसे भारत के NBFC सेक्टर में एक उभरता हुआ यूनिकॉर्न बनाने की दिशा में ले जाती है।


📍 लक्ष्य: ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में MSMEs को सशक्त बनाना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से Saarathi Finance को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) को वित्तीय सहायता प्रदान करने के मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। Saarathi Finance फिलहाल तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय है।

इन राज्यों के छोटे उद्यमियों को पारंपरिक बैंकों और संस्थागत ऋणदाताओं से अक्सर ऋण नहीं मिल पाता। Saarathi Finance इन ‘क्रेडिट अंडरसर्व्ड’ उद्यमियों को टारगेट कर रही है जो विकास की क्षमता रखते हैं लेकिन पूंजी की कमी से पीछे रह जाते हैं।


🧠 टेक्नोलॉजी और लोकल अंडरस्टैंडिंग का कॉम्बिनेशन

Saarathi Finance का बिज़नेस मॉडल एक अनूठा मिश्रण है – तकनीक-आधारित समाधान और स्थानीय बाजारों की गहरी समझ। कंपनी:

  • सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों प्रकार के लोन उपलब्ध कराती है
  • लोन प्रोसेसिंग को तेजी से पूरा करती है
  • इनकम असेसमेंट को फ्लेक्सिबल रखती है, जिससे अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के उद्यमियों को भी मौका मिलता है

यह मॉडल उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो बैंकों की कठोर प्रक्रियाओं के कारण फाइनेंसिंग से वंचित रह जाते हैं।


💬 फाउंडर का विज़न: “सिर्फ लोन नहीं, पार्टनरशिप चाहिए भारत को”

Saarathi Finance के फाउंडर और सीईओ विवेक बंसल ने इस उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा:

“हम भारत के उद्यमियों को सिर्फ क्रेडिट नहीं, बल्कि एक ऐसा सहयोग देना चाहते हैं जो उनके विकास की यात्रा में सच्चा भागीदार बने। यह फंडिंग हमारे मिशन को रफ्तार देगी। हम सभी निवेशकों, दोस्तों और परिवार का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस सफर को मुमकिन बनाया। अब हम और ज़्यादा जोश के साथ आगे बढ़ेंगे।”

बंसल के इस विज़न से साफ है कि Saarathi Finance खुद को केवल एक NBFC नहीं, बल्कि “विकास का साथी” मानती है।


🚀 MSME सेक्टर में क्रेडिट गैप को भरने की कोशिश

भारत में MSME सेक्टर देश के GDP का 30% और रोज़गार का 40% हिस्सा योगदान करता है, लेकिन इनका सबसे बड़ा संकट है — क्रेडिट की कमी। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में MSMEs के लिए लगभग ₹25 लाख करोड़ का क्रेडिट गैप है।

Saarathi Finance जैसे NBFCs इस गैप को भरने के लिए आगे आ रहे हैं। कंपनी:

  • छोटे व्यापारियों को उनकी जरूरतों के हिसाब से कस्टम लोन प्रोडक्ट देती है
  • क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कर्मचारियों के ज़रिये ग्राहक से जुड़ाव बढ़ाती है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसान डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस मुहैया कराती है

📈 निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है

TVS Capital Funds, Lok Capital, Evolvence Equity Partners, और Paragon Partners जैसे संस्थानों का इस शुरुआती राउंड में निवेश करना यह दर्शाता है कि Saarathi Finance के मॉडल में दीर्घकालिक ग्रोथ की संभावना है।

NBFC सेक्टर, खासकर जो MSMEs को सर्विस करता है, अब निवेशकों की नई पसंद बनता जा रहा है। Saarathi Finance की रणनीति में:

  • जोखिम प्रबंधन (risk management) के स्मार्ट टूल्स
  • स्केलेबल टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर
  • ग्राउंड लेवल कस्टमर कनेक्ट

जैसी खूबियां हैं जो निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।


📊 आगे की राह: विस्तार, टेक अपग्रेड और प्रोफिटेबिलिटी

इस फंडिंग के साथ Saarathi Finance अब अपने विस्तार की योजना पर काम कर रही है। अगले 12-18 महीनों में कंपनी:

  • और राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी
  • टेक्नोलॉजी में अपग्रेड करेगी — जैसे AI-ड्रिवन लोन असेसमेंट
  • और नए MSME प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी जो सेक्टर की बदलती जरूरतों को पूरा करें

कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2026 तक प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में तेजी से बढ़े।


✅ निष्कर्ष: भारत के छोटे व्यापारियों को मिला एक नया साथी

Saarathi Finance की इस फंडिंग राउंड ने यह साबित किया है कि भारत के MSME फाइनेंस सेक्टर में अब भी अपार संभावनाएं हैं। जब बड़े बैंक अब भी क्रेडिट एक्सेस के मामले में सुस्त हैं, Saarathi जैसे NBFCs ‘भारत के उद्यमियों’ के असली साथी बनकर उभर रहे हैं।

अब देखना य>ह है कि कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल कितनी कुशलता से करती है, और क्या वह अपने वादे के अनुसार ‘सिर्फ लोन नहीं, पार्टनरशिप’ का विज़न पूरा कर पाती है।

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🏥 Medikabazaar ने FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू में की 50% की छलांग,

Medikabazaar

बी2बी मेडिकल सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Medikabazaar ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में जोरदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग ग्रॉस रेवेन्यू 50% बढ़कर ₹1,355.6 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही FY23 में ₹908.5 करोड़ था। हालांकि, तेज़ी से बढ़ती लागतों और डिफॉल्ट रिस्क के कारण कंपनी का कुल घाटा 30% बढ़कर ₹394.8 करोड़ हो गया।


📊 मजबूत ग्रोथ के बावजूद घाटे की मार

Medikabazaar ने FY23 में अपने रेवेन्यू में 41% की गिरावट देखी थी, लेकिन FY24 में कंपनी ने उस झटके से वापसी करते हुए मजबूत प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की कुल आमदनी ₹1,407 करोड़ रही, जिसमें ₹51.3 करोड़ की इनकम फिक्स्ड डिपॉजिट्स, बॉन्ड्स और अन्य निवेशों से हुई है।

लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का स्केल बढ़ा, वैसे-वैसे खर्चे भी बढ़ते गए। FY24 में कुल खर्च ₹1,621 करोड़ रहा, जो FY23 के ₹1,126.5 करोड़ से 44% अधिक है।


🧪 कंपनी कैसे काम करती है?

Medikabazaar एक B2B प्लेटफॉर्म है जो अस्पतालों और क्लीनिक्स को मेडिकल इक्विपमेंट, डायग्नोस्टिक डिवाइस, कंज़्यूमेबल्स और डेंटल टूल्स जैसी वस्तुएं रियल-टाइम में ढूंढने, उनकी तुलना करने और ऑर्डर करने में मदद करता है।

FY24 में कंपनी की 98% आय यानी ₹1,328.6 करोड़ केवल इन प्रोडक्ट्स की बिक्री से हुई है। इसका मतलब है कि कंपनी का मॉडल अब भी पूरी तरह इन सप्लाई पर निर्भर है।


🛒 सबसे बड़ी लागत: मेडिकल सप्लाई की खरीद

Medikabazaar के खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा मेडिकल इक्विपमेंट और सप्लाई की खरीदारी का रहा, जो कि कुल खर्च का 79% था। यह लागत FY24 में ₹1,279 करोड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 43% ज़्यादा है।

इसके अलावा कर्मचारी लाभ (Employee Benefit Expenses) FY24 में 40% बढ़कर ₹140 करोड़ तक पहुँच गए। कंपनी की टीम और इसके संचालन में हो रहे विस्तार के चलते यह खर्च भी तेज़ी से बढ़ा है।


⚠️ रिस्क फैक्टर: डाउटफुल डेब्ट्स और एडवांस

FY24 में Medikabazaar ने ₹66.5 करोड़ की नॉन-कैश बुकिंग ‘संभावित डाउटफुल डेब्ट्स और एडवांस’ के तहत की है। यह दर्शाता है कि क्रेडिट पर बेचे गए मेडिकल सप्लाई के भुगतान में देरी या डिफॉल्ट हो सकता है। यह हेल्थकेयर सप्लाई जैसे बी2बी बिजनेस में एक आम चुनौती है।


📣 मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य खर्च

कंपनी ने FY24 में एडवर्टाइजिंग, लीगल सर्विस, ट्रैवल, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोफेशनल फीस जैसे खर्चों पर भी बड़ा निवेश किया। ये सारे खर्च मिलाकर ऑपरेटिंग खर्चों को ₹1,621 करोड़ तक ले गए।

इन सबके चलते, कंपनी का घाटा FY23 के ₹303.4 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹394.5 करोड़ हो गया।


❗ एक्सेप्शनल खर्चों की मार

FY24 में कंपनी ने ₹178.65 करोड़ के एक्सेप्शनल खर्च भी दर्ज किए, जिनमें शामिल हैं:

  • डाउटफुल डेब्ट्स और एडवांस के लिए अलाउंस
  • इन्वेंट्री राइट-ऑफ्स
  • बैलेंस शीट की सफाई (write-offs)
  • ₹88.6 करोड़ के अनक्लासिफाइड खर्च

इन एकमुश्त खर्चों ने भी घाटे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।


🧾 यूनिट इकॉनॉमिक्स: हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.2 खर्च

FY24 में Medikabazaar ने हर ₹1 की ऑपरेटिंग इनकम के लिए ₹1.2 खर्च किए, यानी कंपनी की यूनिट इकॉनॉमिक्स अभी भी निगेटिव बनी हुई है। हालांकि, इस तरह की लागत उच्च-वॉल्यूम B2B कारोबारों में सामान्य मानी जाती है — खासकर जब कंपनी विस्तार मोड में हो।


💰 फाइनेंशियल हेल्थ: कैश रिजर्व और एसेट्स

FY24 के अंत तक, Medikabazaar के टोटल करंट एसेट्स ₹1,176.56 करोड़ तक पहुंच गए, जिनमें से ₹62.76 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस के रूप में उपलब्ध हैं। यह दर्शाता है कि कंपनी के पास अब भी संचालन के लिए पर्याप्त पूंजी है, लेकिन घाटे की भरपाई के लिए उसे जल्द प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में कदम उठाने होंगे।


🧠 निष्कर्ष: ग्रोथ की रफ्तार बनी, लेकिन घाटा चिंता का विषय

Medikabazaar ने FY24 में रेवेन्यू ग्रोथ के मोर्चे पर शानदार वापसी की है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च और क्रेडिट रिस्क की वजह से घाटा अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। FY25 में कंपनी को अगर यूनिट इकॉनॉमिक्स सुधारने और घाटे को घटाने की दिशा में काम करना है, तो उसे:

  • क्रेडिट साइकिल को सुधारना होगा
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ानी होगी
  • खर्चों को कम करने की रणनीति बनानी होगी

B2B हेल्थटेक सेक्टर में जब कॉम्पिटिशन और पेमेंट डिफॉल्ट की समस्याएं बढ़ रही हैं, तब Medikabazaar का यह वित्तीय प्रदर्शन उद्योग के लिए एक अहम केस स्टडी बन सकता है।

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💳 तीन साल बाद CRED ने फिर जुटाई फंडिंग, वैल्यूएशन में 45% की गिरावट

CRED

नई दिल्ली, 26 मई 2025: फिनटेक यूनिकॉर्न CRED ने लगभग तीन साल के अंतराल के बाद एक बार फिर से फंडिंग जुटाई है। कंपनी को अपने मौजूदा निवेशकों से $75 मिलियन (लगभग ₹625 करोड़) का निवेश मिला है। सूत्रों के अनुसार, इस इंटरनल राउंड में CRED के फाउंडर कुणाल शाह खुद भी लगभग $20 मिलियन का निवेश कर रहे हैं।


🏦 कौन-कौन निवेशक हैं इस राउंड में?

इस राउंड का नेतृत्व GIC (Government of Singapore Investment Corporation) कर रहा है, जो Lathe Investment के ज़रिए निवेश कर रही है। साथ ही, इस राउंड में RTP Global और Sofina जैसी पुरानी निवेशक कंपनियाँ भी भाग ले रही हैं।

“डील के सभी टर्म्स फाइनल हो चुके हैं और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है,” — एक सूत्र ने Entrackr को बताया।


📉 वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट

2022 में CRED ने GIC के नेतृत्व में $140 मिलियन जुटाए थे और उस समय कंपनी की वैल्यूएशन $6.4 बिलियन थी। लेकिन इस बार की फंडिंग डील के बाद CRED की वैल्यूएशन घटकर $3.5 बिलियन रह गई है — यानी करीब 45% की गिरावट


💰 अब तक कितना निवेश मिला है?

CRED ने अब तक 9 फंडिंग राउंड्स में लगभग $1 बिलियन की कुल पूंजी जुटाई है। TheKredible के आंकड़ों के मुताबिक:

  • PeakXV Partners कंपनी के सबसे बड़े बाहरी शेयरहोल्डर हैं — 10.4% हिस्सेदारी
  • इसके बाद Ribbit Capital, Tiger Global जैसे दिग्गज निवेशक शामिल हैं
  • संस्थापक कुणाल शाह की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 22.8% है, जो उनकी QED Innovation Labs के साथ मिलकर है

📈 कंपनी अब मुनाफे की ओर?

सूत्रों के मुताबिक, CRED ने FY26 की शुरुआती दो महीनों में मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है। कंपनी अब पूरे वित्त वर्ष में पूर्ण लाभप्रदता (Full-year Profitability) का लक्ष्य लेकर चल रही है।

यह संकेत कंपनी की रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है, खासतौर पर ऐसे समय में जब भारत में कई ग्रोथ-स्टेज और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स फंडिंग संकट से जूझ रहे हैं।


🧾 CRED क्या सेवाएं देता है?

CRED एक फिनटेक ऐप है जो मुख्य रूप से क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके प्रमुख फीचर्स में शामिल हैं:

  • क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट
  • क्रेडिट स्कोर ट्रैकिंग
  • छिपे हुए चार्ज की पहचान
  • बिल पेमेंट रिमाइंडर
  • कैशबैक और रिवॉर्ड्स
  • ऑनलाइन शॉपिंग और ट्रैवल पैकेज
  • व्हीकल इंश्योरेंस, FASTag मैनेजमेंट
  • पहले यह P2P लेंडिंग सेवा भी देता था, जिसे हाल ही में RBI के नए दिशा-निर्देशों के बाद बंद कर दिया गया है।

📊 FY24 में घाटा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू में जबरदस्त उछाल

FY24 (मार्च 2024 तक के वित्तीय वर्ष) में CRED ने:

  • ₹1,644 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जो FY23 के मुकाबले 22% अधिक है
  • यह घाटा मुख्य रूप से ESOP और टैक्स से संबंधित खर्चों की वजह से बढ़ा
  • इसी दौरान कंपनी का राजस्व 66% बढ़कर ₹2,473 करोड़ हो गया, जो कंपनी की टॉपलाइन ग्रोथ को दर्शाता है

🌐 डाउन राउंड्स का दौर

CRED अकेली नहीं है जो डाउन राउंड (नीची वैल्यूएशन पर फंडिंग) का सामना कर रही है। मौजूदा फंडिंग माहौल में कई बड़े स्टार्टअप्स को इसी तरह के हालात से गुजरना पड़ रहा है:

  • Spinny ने हाल ही में $131 मिलियन जुटाए लेकिन उसी वैल्यूएशन पर
  • Euler Motors, Udaan ने भी फ्लैट वैल्यूएशन पर फंडिंग की
  • Pratilipi, Stanza Living, CityMall, The Good Glamm Group जैसे स्टार्टअप्स कम वैल्यूएशन पर निवेश की बातचीत कर रहे हैं

🧠 आगे का रास्ता

CRED अब अपने बिजनेस मॉडल को ऑप्टिमाइज़ कर रहा है और घाटे को कम करके प्लेटफॉर्म की कमाई और उपयोगकर्ता एंगेजमेंट पर ध्यान दे रहा है। कंपनी का “फिनटेक से सुपरऐप” बनने का सपना अब लाभप्रदता और टिकाऊ ग्रोथ के रास्ते से होकर गुजर रहा है।


🔚 निष्कर्ष

तीन साल के अंतराल के बाद CRED की वापसी यह दिखाती है कि फंडिंग भले ही मुश्किल हो, लेकिन मजबूत ब्रांड, उपयोगकर्ता आधार और विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के दम पर कंपनियाँ फिर से निवेशकों का भरोसा जीत सकती हैं।

हालांकि वैल्यूएशन में 45% की कटौती स्टार्टअप यूनिवर्स के लिए एक स्पष्ट संकेत है — अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, सस्टेनेबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी ही फंडिंग की असली कसौटी हैं।

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🚚 Fleetx को मिला ₹113 करोड़ का फंडिंग बूस्ट, IPO की तैयारी में जुटी कंपनी

Fleetx

गुरुग्राम, 26 मई 2025: भारत की तेजी से बढ़ती लॉजिस्टिक्स SaaS स्टार्टअप Fleetx ने अपने सीरीज C फंडिंग राउंड में ₹113 करोड़ (लगभग $13.2 मिलियन) जुटाए हैं। यह निवेश कंपनी के मौजूदा निवेशकों IndiaMART Intermesh और BEENEXT’s Accelerate Fund ने लीड किया है। इस राउंड में प्राइमरी और सेकेंडरी, दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं।


💸 Fleetx को पहले भी मिल चुकी है बड़ी फंडिंग

Fleetx ने फरवरी 2022 में सीरीज B राउंड में $19.4 मिलियन जुटाए थे, जिसे IndiaMART ने लीड किया था। उस राउंड में IndiaQuotient और BEENEXT भी शामिल हुए थे। अब दो साल बाद, कंपनी ने एक और फंडिंग राउंड के साथ अपने विस्तार को नई दिशा दी है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

Fleetx ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए
  • मिड-मार्केट और एंटरप्राइज सेगमेंट में अपनी बाज़ार मौजूदगी को बढ़ाने के लिए
  • प्रॉफिटेबिलिटी और IPO-readiness को ध्यान में रखते हुए परिचालन ढांचे को मजबूत करने के लिए

🧠 AI और IoT के इंटीग्रेशन से बने स्मार्ट सॉल्यूशन

Fleetx की स्थापना 2017 में की गई थी। इसे विनीत शर्मा, अभय जीत गुप्ता, उद्भव राय, प्रवीन कटारिया और विशाल मिश्रा ने मिलकर शुरू किया था। कंपनी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) को जोड़कर लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री को डिजिटल और स्मार्ट बना रही है।

Fleetx के प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • Fleet Management
  • Fuel Analytics
  • Video Telematics
  • Transport ERP
  • TMS (Transport Management System)

📊 IPO की तैयारी और ARR डबल करने का लक्ष्य

Fleetx अब अगले दो वर्षों में IPO के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है:

  • प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना
  • वार्षिक रीकरींग रेवेन्यू (ARR) को डबल करना
  • मजबूत प्रोडक्ट स्टैक और टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार करना

Fleetx के सीईओ विनीत शर्मा ने कहा:

“हमारे पास लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री का विशाल डेटा है, और हम AI की मदद से इस क्षेत्र की सबसे जटिल समस्याओं को हल करने की स्थिति में हैं। हमारा फोकस एक प्रभावशाली, टिकाऊ और ग्राहक-केन्द्रित व्यवसाय तैयार करने पर है।”


📈 4 गुना ग्रोथ और 2000+ ग्राहक

Fleetx का दावा है कि उसने 2022 के बाद से 4 गुना ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी ने हाल ही में ₹100 करोड़ से अधिक ARR पार कर लिया है और फिलहाल 2000 से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे रही है। इनमें से 100 से ज्यादा ग्राहक बड़े एंटरप्राइज अकाउंट्स हैं।


🏭 किन सेक्टर्स को कर रही है सर्विस?

Fleetx के ग्राहक कई इंडस्ट्रीज़ से आते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सीमेंट (Cement)
  • FMCG
  • खनन (Mining)
  • ट्रांसपोर्टेशन
  • मैन्युफैक्चरिंग

🏢 प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं:

  • Ultratech Cement
  • Adani Group
  • Unilever
  • Godrej
  • Shree Cement
  • Maersk
  • Panasonic

📉 घाटे में बड़ी कटौती

Fleetx ने FY24 (मार्च 2024 समाप्त वित्तीय वर्ष) में:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹56.58 करोड़ दर्ज किया, जो FY23 में ₹41.63 करोड़ था। यानी 36% सालाना ग्रोथ
  • वहीं कंपनी ने घाटा 55% से अधिक घटाकर ₹24.21 करोड़ कर दिया है, जो FY23 में कहीं अधिक था।

FY25 की वार्षिक रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं की गई है।


🧭 Fleetx का भविष्य कैसा दिखता है?

Fleetx का टेक्नोलॉजी-फर्स्ट दृष्टिकोण और विविध इंडस्ट्री कस्टमर बेस इसे लॉजिस्टिक्स SaaS सेक्टर में तेजी से उभरते मार्केट लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है।

फंडिंग, प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार, ARR ग्रोथ और IPO की योजना जैसे कारक कंपनी के भविष्य को और भी रोशन बना रहे हैं।


📌 निष्कर्ष

Fleetx ने अपनी नवीनतम सीरीज C फंडिंग से यह साबित कर दिया है कि वह केवल सर्वाइव नहीं कर रही, बल्कि स्केल और इनोवेशन दोनों पर फोकस करके इंडस्ट्री में लीड करना चाहती है

भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में जहां डिजिटल परिवर्तन की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं Fleetx जैसी कंपनियाँ AI और डेटा ड्रिवन समाधानों के जरिए बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।

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💍 Shark Tank वाली Palmonas को जल्द मिलेगा ₹55 करोड़ का निवेश,

Palmonas

पुणे, मई 2025: डमी-फाइन ज्वेलरी ब्रांड Palmonas, जो हाल ही में Shark Tank India Season 4 में नज़र आया था, अब अपने पहले बड़े इंस्टीट्यूशनल फंडिंग राउंड को अंतिम रूप देने जा रहा है। इस साल यह स्टार्टअप का दूसरा फंडिंग राउंड होगा।

सूत्रों के अनुसार, Vertex Ventures इस ₹55 करोड़ के सीरीज़ A फंडिंग राउंड का नेतृत्व कर रहा है। इस निवेश के साथ Palmonas का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹550 करोड़ (लगभग $65 मिलियन) तक पहुंच जाएगा।


💡 Palmonas: ज्वेलरी की दुनिया का नया नाम

Palmonas की स्थापना 2022 में अमोल पाटवारी और पल्लवी मोहाडिकर ने की थी। यह स्टार्टअप खासतौर पर डमी-फाइन ज्वेलरी (demi-fine jewellery) पर केंद्रित है। इनके प्रोडक्ट्स में स्टेनलेस स्टील से बनी और 18 कैरेट गोल्ड वर्मील कोटिंग वाली नेकलेस, रिंग्स, ब्रेसलेट्स, ईयररिंग्स और मंगलसूत्र शामिल हैं।

इस कैटेगरी का उद्देश्य है – सस्ती कीमतों पर खूबसूरत, टिकाऊ और स्किन-फ्रेंडली ज्वेलरी उपलब्ध कराना, खासतौर पर भारत की युवा, शहरी महिलाओं को टारगेट करते हुए।


🦈 Shark Tank से मिला था बड़ा बूस्ट

Palmonas को फरवरी 2025 में Shark Tank India Season 4 में बड़ा फाइनेंशियल और ब्रांडिंग बूस्ट मिला था, जब इसे ₹1.26 करोड़ का निवेश मिला था। यह निवेश मशहूर शार्क्स नमिता थापर और रितेश अग्रवाल (OYO) ने किया था, और उस समय कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹126 करोड़ था।

इससे पहले, Palmonas ने एक एंजल फंडिंग राउंड में ₹6 करोड़ जुटाए थे।


🎬 श्रद्धा कपूर बनीं को-फाउंडर

Palmonas ने मार्च 2024 में एक बड़ा ब्रांडिंग कदम उठाते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर को अपना को-फाउंडर बनाया। इससे न केवल Palmonas की ब्रांड वैल्यू बढ़ी, बल्कि सोशल मीडिया पर इसकी मौजूदगी और ग्राहक जुड़ाव में भी उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ।

श्रद्धा के जुड़ने के बाद Palmonas ने “सस्टेनेबल, मिनिमलिस्ट और स्टाइलिश ज्वेलरी” को लेकर अपने ब्रांड मैसेज को और मजबूत किया।


📈 फाइनेंशियल प्रदर्शन: राजस्व में ग्रोथ, लेकिन घाटा बरकरार

Palmonas ने वित्तीय वर्ष FY24 (मार्च 2024 को समाप्त) में ₹5.38 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल FY23 के ₹3.83 करोड़ के मुकाबले लगभग 40% की वृद्धि है।

हालांकि, कंपनी को अभी भी ₹1.24 करोड़ का घाटा हो रहा है। FY25 की वार्षिक रिपोर्ट फिलहाल दाखिल नहीं हुई है।


📊 Vertex Ventures का भरोसा

Vertex Ventures इस सीरीज़ A डील का नेतृत्व कर रहा है। यह वेंचर कैपिटल फर्म टेमासेक समर्थित है और 2023 में इसने $541 मिलियन का पांचवां फंड क्लोज किया था, जिसका उद्देश्य प्री-सीरीज़ A से लेकर सीरीज़ B स्टार्टअप्स में निवेश करना है।

Palmonas से पहले, Vertex Ventures ने SpotDraft (डॉक्यूमेंट लाइफसाइकल मैनेजमेंट), Spyne (AI बेस्ड फोटोग्राफी और एडिटिंग), और D2C इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड Nuuk जैसे स्टार्टअप्स में भी निवेश किया है।


🤝 डील फाइनल, जल्द होगा ऐलान

सूत्रों के अनुसार, Palmonas और Vertex Ventures के बीच डील की सभी शर्तें तय हो चुकी हैं और कंपनी अगले कुछ हफ्तों में इस फंडिंग का आधिकारिक ऐलान कर सकती है

हालांकि, Palmonas और Vertex Ventures ने इस खबर पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है।


🛒 Palmonas का D2C मॉडल: डिजिटल इंडिया के अनुरूप

Palmonas पूरी तरह से डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) मॉडल पर काम करता है। कंपनी की वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों पर इसका काफ़ी मजबूत प्रेजेंस है। Palmonas इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और रील्स कैंपेन के जरिए अपनी ज्वेलरी को प्रमोट करता है।

अर्थव्यवस्था में बढ़ते डिजिटल ट्रेंड्स और युवा महिलाओं की फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते Palmonas जैसे ब्रांड्स को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।


🔮 आगे की योजना: मेट्रो से लेकर Tier II शहरों तक विस्तार

नई फंडिंग Palmonas को अपने प्रोडक्ट रेंज बढ़ाने, स्टॉक मैनेजमेंट सुधारने और मेट्रो से लेकर Tier II शहरों में मार्केट विस्तार करने में मदद करेगी।

कंपनी अपनी ज्वेलरी लाइन में नई कैटेगरीज़ जैसे बच्चों के लिए मिनी ज्वेलरी, कस्टमाइज़्ड नाम वाली ज्वेलरी और शादी-पार्टी थीम कलेक्शन लॉन्च करने की भी योजना बना रही है।


🧠 निष्कर्ष

Palmonas ने बहुत ही कम समय में भारत के D2C ज्वेलरी सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। Shark Tank से मिली मान्यता, श्रद्धा कपूर की ब्रांड एंबेसडर और अब Vertex Ventures जैसे बड़े निवेशक का भरोसा — इन सभी फैक्टर्स ने इसे एक हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप बना दिया है।

जहाँ पारंपरिक ज्वेलरी कंपनियां ऑफलाइन मोड में उलझी हुई हैं, Palmonas जैसे डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स भारत में अगली जेनरेशन की कस्टमर्स को बेहतर विकल्प दे रहे हैं।

क्या Palmonas ₹1000 करोड़ वैल्यूएशन क्लब में पहुंच पाएगा? यह देखने वाली बात होगी।

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🌿Lifechart ने Guttify ब्रांड के लिए $3.6 लाख जुटाए,

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नई दिल्ली, अप्रैल 2025: हेल्थटेक स्टार्टअप Lifechart ने अपने गट-वेलनेस ब्रांड Guttify के लिए एक एक्सटेंडेड सीड राउंड में $3.6 लाख (करीब ₹3 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व Prajay Advisors ने किया है, जो Unichem Labs के फाउंडर्स प्रकाश मोदी और जयंन्द्र शाह का फैमिली ऑफिस है।

यह निवेश अक्टूबर 2024 में हुए $5 लाख सीड फंडिंग राउंड के बाद आया है, जिसे Expert Dojo, Agility Ventures, Sunn91 Ventures, सरकारी सीड योजनाओं और एंजल निवेशकों जैसे नितीश मिटरसैन (Nazara Technologies) और आहाना गौतम (Open Secret) ने सपोर्ट किया था।

इस नए फंडिंग राउंड के साथ, Lifechart की कुल फंडिंग अब $1 मिलियन से अधिक हो चुकी है।


🧪Guttify : आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संयोजन

Lifechart की स्थापना 2022 में मुकुल शाह और मानसी शर्मा ने मिलकर की थी। इनकी ब्रांड Guttify, शहरी भारत (Tier I से लेकर Tier III शहरों) के लोगों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।

Guttify एक “डायग्नोसिस-फर्स्ट” यानी जाँच पहले, इलाज बाद में की नीति पर काम करती है। इसका उद्देश्य है – हर भारतीय को सटीक, किफायती और पर्सनलाइज्ड गट हेल्थ समाधान उपलब्ध कराना, जो आधुनिक साइंस, टेक्नोलॉजी और आयुर्वेद का मिश्रण हो।


🏠 घर बैठे टेस्टिंग: ₹99 से शुरू होने वाले DIY किट

Guttify का पहला प्रोडक्ट, pH स्लाइवा टेस्टिंग किट, जो एसिडिटी की जांच के लिए है, पहले से ही मार्केट में उपलब्ध है। यह एक DIY (Do It Yourself) किट है जिसे उपयोगकर्ता घर बैठे इस्तेमाल कर सकते हैं।

स्टार्टअप जल्द ही ₹99 से शुरू होने वाले और भी कई किफायती टेस्टिंग किट्स लॉन्च करने जा रहा है। इन किट्स के माध्यम से यूज़र्स अपने पेट से जुड़े समस्याओं की पहचान खुद ही कर सकेंगे, जिससे डॉक्टर के पास जाने की जरूरत से पहले एक स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।


📊 गट हेल्थ संकट: भारत में 60% लोग प्रभावित

मार्केट रिसर्च के अनुसार, भारत में गट वेलनेस मार्केट $18 बिलियन का है, और करीब 60% भारतीय पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। फिर भी यह एक ऐसा सेक्टर है जिसे अब तक हेल्थटेक स्टार्टअप्स ने पूरी तरह से टारगेट नहीं किया।

Lifechart इसी गैप को भरने की कोशिश कर रहा है। उनका उद्देश्य है एक “फुल-स्टैक गट हेल्थ इकोसिस्टम” बनाना, जिसमें टेस्टिंग से लेकर समाधान तक सब कुछ एक प्लेटफॉर्म पर मिले।


💡 फाउंडर्स की सोच: विज्ञान और परंपरा का संगम

Guttify की को-फाउंडर मानसी शर्मा बताती हैं, “भारत में लोग पेट की समस्या को तब तक नजरअंदाज करते हैं जब तक वह बड़ी बीमारी न बन जाए। हम चाहते हैं कि लोग खुद अपने स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी लें। हमारी तकनीक, साइंस और आयुर्वेद का संयोजन उन्हें वह शक्ति देगा।”

वहीं, मुकुल शाह का मानना है कि “गट हेल्थ पूरे शरीर की सेहत की नींव है। अगर हम इसे सुलझा लें, तो जीवन की गुणवत्ता कई गुना बेहतर हो सकती है।”


🌐 टेक्नोलॉजी से जुड़ी सुविधा, आसान उपयोग

Guttify का ऐप आधारित सिस्टम यूज़र्स को न केवल किट मंगवाने, बल्कि रिपोर्ट देखने, सिफारिशें पाने और आयुर्वेदिक समाधानों तक पहुंचने में मदद करता है।

कंपनी आने वाले समय में AI-सपोर्टेड हेल्थ रेकमेंडेशन, नुट्रिशन गाइड, और कस्टमाइज्ड गट डाइट प्लान्स जैसे फीचर्स लॉन्च करने की भी योजना बना रही है।


🛒 भारत में डिजिटल हेल्थ के लिए अनोखा मॉडल

जहां ज़्यादातर हेल्थटेक स्टार्टअप केवल मेडिकल कंसल्टेशन या फार्मेसी तक सीमित हैं, Guttify ने एक न्यूट्रिशन-फर्स्ट और प्रीवेंटिव हेल्थ अप्रोच अपनाई है। इसके ज़रिए यह स्टार्टअप हेल्थकेयर सेक्टर में एक नई दिशा प्रस्तुत कर रहा है – बीमारी से पहले की रोकथाम।


💰 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की राह

Unichem Labs के संस्थापक परिवार से मिले नए निवेश से यह साफ हो गया है कि हेल्थ और न्यूट्रिशन आधारित मॉडल पर निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

Prajay Advisors ने एक बयान में कहा, “भारत में गट हेल्थ एक अनदेखा संकट है। Guttify ने जिस साइंटिफिक और भारतीय दृष्टिकोण से इसका समाधान ढूंढा है, वह आने वाले समय में करोड़ों लोगों की मदद करेगा।”


🧠 निष्कर्ष

Lifechart और Guttify ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो भारत जैसे देश में न सिर्फ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेगा, बल्कि जनता को खुद के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सक्षम भी बनाएगा।

सस्ती किट्स, घरेलू जांच, और आयुर्वेद का समावेश – यह सब मिलकर Guttify को एक भरोसेमंद, विज्ञान आधारित और लोकल फ्रेंडली ब्रांड बनने की ओर ले जा रहे हैं।

यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह न केवल भारत में बल्कि अन्य विकासशील देशों में भी हेल्थटेक की दिशा बदल सकता है।

Read more :👴 GenWise ने कर्मचारियों की छंटनी की,

👴 GenWise ने कर्मचारियों की छंटनी की,

GenWise

नई दिल्ली, अप्रैल 2025: वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए एक ऑनलाइन ऐप आधारित सोशल क्लब चलाने वाली GenWise ने हाल ही में कई विभागों में कर्मचारियों की छंटनी की है। यह कदम कंपनी द्वारा लंबे समय से फंडिंग जुटाने में असफल रहने और अपेक्षित यूज़र ग्रोथ न होने के कारण उठाया गया।

GenWise ने अपनी कुल वर्कफोर्स का लगभग 20% (15-20 कर्मचारी) कम कर दिया है। छंटनी टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग, प्रोडक्ट, डिज़ाइन, बिजनेस और ऑपरेशंस जैसे विभिन्न विभागों में की गई है।


💸 फंडिंग जुटाने की कोशिशें नाकाम रहीं

सूत्रों के अनुसार, कंपनी बीते कई महीनों से नए निवेश जुटाने के लिए मौजूदा निवेशकों और नए पार्टनर्स से बातचीत कर रही थी। हालांकि, वह पिछले साल किए गए वादों और अनुमानित ग्रोथ को पूरा नहीं कर पाई, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।

GenWise ने जून 2023 में $3.5 मिलियन (लगभग ₹29 करोड़) की सीड फंडिंग जुटाई थी, जिसे Z47 (पूर्व में Matrix Partners India) ने लीड किया था। इस फंडिंग राउंड में DBR Ventures, Climber Capital और कुछ एंजेल इन्वेस्टर्स जैसे Kunal Shah (CRED), Suhail Sameer (पूर्व BharatPe CEO), और Achal Mittal ने भी भाग लिया था।


👨‍👩‍👧‍👦 बुजुर्गों के लिए कम्युनिटी और मेंटल हेल्थ सपोर्ट

GenWise की स्थापना BharatPe के पूर्व अधिकारियों – गीतांशु सिंगला, नेहुल मल्होत्रा और रजत जैन ने मिलकर की थी। यह एक ऐसा ऐप है जो वरिष्ठ नागरिकों को दोस्तों से जोड़ता है, उन्हें दैनिक गतिविधियों में भाग लेने और प्रशिक्षित काउंसलर्स से मानसिक और भावनात्मक सहयोग लेने का मौका देता है।

कंपनी का दावा है कि उसने अब तक 20 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों की एक कम्युनिटी तैयार की है, जो कि भारत के बढ़ते बुजुर्ग वर्ग को एक डिजिटल स्पेस देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


📲 UPI लॉन्च के बाद खर्चों में उछाल

GenWise ने नवंबर 2024 में Axis Bank के साथ साझेदारी में अपने ऐप पर UPI पेमेंट्स की सुविधा शुरू की थी। उम्मीद थी कि इससे यूज़र्स की गतिविधियों और एंगेजमेंट में इज़ाफा होगा।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि UPI रोलआउट के बाद कंपनी के खर्च तेजी से बढ़ गए, लेकिन इसके बदले में अपेक्षित यूज़र ग्रोथ नहीं मिली। कंपनी का मुख्य यूज़र बेस यानी बुजुर्ग वर्ग डिजिटल पेमेंट को धीमी गति से अपना रहा है, जिससे कि मासिक एक्टिव यूज़र (MAU) में सिर्फ मामूली वृद्धि देखने को मिली।


💼 ऑपरेशनल खर्च घटाने के लिए ली गई कठोर कार्रवाई

बढ़ते खर्चों और सीमित यूज़र ग्रोथ के चलते GenWise को मजबूरन अपने संचालन व्ययों को कम करने के लिए स्टाफ कटौती जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा।

कंपनी की योजना है कि वह भविष्य में डिजिटल पेमेंट्स के अलावा बुजुर्गों के लिए अन्य फिनटेक सॉल्यूशंस भी पेश करेगी, जो उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को आसान बना सकें।

GenWise ने इस विषय में भेजे गए सवालों का समाचार प्रकाशन तक कोई उत्तर नहीं दिया।


🧓 Elder-Tech सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

GenWise अकेली कंपनी नहीं है जो बुजुर्गों के लिए डिजिटल सेवाएं दे रही है। इस सेगमेंट में SeniorWorld, GetSetUp, 60Plus India, ElderAid Wellness, और Goodfellows जैसी कई कंपनियां भी सक्रिय हैं। इन सभी का उद्देश्य एक ही है—भारत के बढ़ते सीनियर सिटीज़न वर्ग के लिए स्मार्ट, भरोसेमंद और इंसानियत भरी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना।


🧾 साल 2025 में अब तक सिर्फ 5 बड़ी छंटनी

Entrackr के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 के पहले चार महीनों में, भारत में (Zomato और Ola Electric जैसी लिस्टेड कंपनियों को छोड़कर) सिर्फ 5 स्टार्टअप्स ने बड़े स्तर पर छंटनी की है, जिनमें कुल 550 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

यह ट्रेंड 2023 और 2024 की तुलना में थोड़ा बेहतर है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि स्टार्टअप सेक्टर में ग्रोथ की रफ्तार और निवेशकों का भरोसा अभी भी सीमित है।


🧠 निष्कर्ष

GenWise की छंटनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यूज़र ग्रोथ और फाइनेंशियल स्थिरता के बीच संतुलन बनाना किसी भी स्टार्टअप के लिए कितना अहम है। खासकर ऐसे समय में जब निवेशक ROI और स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर बनाई गई GenWise जैसी ऐप्स की जरूरत भारत जैसे देश में लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके बिजनेस मॉडल को व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनाना जरूरी है।

अब देखना होगा कि GenWise अपने मौजूदा यूज़र बेस को बनाए रखते हुए नई सेवाओं के साथ बाज़ार में फिर से स्थिरता और ग्रोथ ला पाता है या नहीं।

Read more :💼 DMI Finance ने बढ़ाया ESOP पूल, कर्मचारियों को मिलेगा 306 करोड़ रुपये का स्टॉक बेनिफिट

💼 DMI Finance ने बढ़ाया ESOP पूल, कर्मचारियों को मिलेगा 306 करोड़ रुपये का स्टॉक बेनिफिट

DMI Finance

नई दिल्ली, अप्रैल 2025: भारत की अग्रणी डिजिटल लेंडिंग कंपनी DMI Finance ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने अपने मौजूदा ESOP प्लान (DMI ESOP Plan 2018 – Extended) में बड़े पैमाने पर विस्तार करते हुए 1.18 करोड़ से ज्यादा नए स्टॉक ऑप्शंस जोड़ दिए हैं।

कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) में दायर की गई रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, इस निर्णय के बाद DMI Finance का कुल ESOP पूल बढ़कर 3.44 करोड़ ऑप्शंस का हो गया है।


📈 ESOP का मूल्य 892 करोड़ रुपये के पार

जानकारी के अनुसार, DMI Finance द्वारा जोड़े गए नए ESOPs का अनुमानित मूल्य लगभग 306.6 करोड़ रुपये (करीब $36 मिलियन) है। वहीं, पूरे ESOP पूल की वैल्यू 892 करोड़ रुपये (करीब $105 मिलियन) बताई जा रही है।

यह वैल्यूएशन कंपनी की पिछली फंडिंग राउंड पर आधारित है, जिसमें जापान के MUFG बैंक के नेतृत्व में DMI Finance ने $400 मिलियन (लगभग 3,300 करोड़ रुपये) की फंडिंग जुटाई थी। यह फंडिंग प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के ट्रांजैक्शनों से की गई थी।


👨‍💼 कंपनी में दो नए स्वतंत्र निदेशक नियुक्त

ESOP विस्तार के साथ ही, DMI Finance ने अपने बोर्ड में दो नए स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की नियुक्ति भी की है। अब Arjun Malhotra और Tammir Amr कंपनी के निदेशक मंडल का हिस्सा बन चुके हैं।

इससे कंपनी के गवर्नेंस स्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने का संकेत मिलता है, खासकर तब जब कंपनी विस्तार और पारदर्शिता की दिशा में अग्रसर है।


🏦 क्या है DMI Finance?

DMI Finance की स्थापना 2008 में शिवाशीष चटर्जी और युवराज सिंह द्वारा की गई थी। यह एक प्रमुख डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, जो भारतीय ग्राहकों को पर्सनल लोन, कंजंप्शन लोन और MSME लोन प्रदान करता है।

कंपनी भारत की कई बड़ी डिजिटल कंपनियों जैसे कि Samsung, Google Pay और Airtel के साथ पार्टनरशिप में Embedded Finance सेवाएं देती है। इसके माध्यम से उपभोक्ता सीधा ऐप के माध्यम से लोन ले सकते हैं।


⚠️ RBI की रोक और उसका समाधान

अक्टूबर 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चार NBFCs, जिनमें DMI Finance भी शामिल थी, पर लोन मंजूरी और वितरण पर रोक लगा दी थी। यह कार्रवाई उच्च ब्याज दरें और असंतुलित इंटरेस्ट स्प्रेड जैसे कारणों से की गई थी।

हालांकि, जनवरी 2025 में RBI ने यह रोक हटा ली, जिससे कंपनी ने फिर से अपनी लोन सेवाएं शुरू कर दीं।


💰 FY24 में शानदार प्रदर्शन, 60% रेवेन्यू ग्रोथ

DMI Finance ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 60% सालाना वृद्धि के साथ ₹2,654 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया। इसके साथ ही कंपनी ने ₹397 करोड़ का मुनाफा भी कमाया, जो इसके बिजनेस मॉडल की मजबूती को दर्शाता है।

FY25 के आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन FY24 के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि कंपनी ने RBI की रोक के बावजूद शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है।


🎯 क्यों महत्वपूर्ण है यह ESOP विस्तार?

ESOP यानी Employee Stock Option Plan एक ऐसा लाभ है, जिसके तहत कंपनी अपने कर्मचारियों को कंपनी के शेयर खरीदने का अवसर देती है। यह न केवल कर्मचारी को आर्थिक रूप से जोड़ता है, बल्कि कंपनी की सफलता में सीधे हिस्सेदार भी बनाता है।

DMI Finance का यह कदम इंगित करता है कि वह अपने कर्मचारियों को दीर्घकालिक रूप से साथ रखने और उन्हें मोटिवेटेड रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

ESOP का विस्तार खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद होगा जो टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, और लेंडिंग ऑपरेशन्स जैसे क्षेत्रों में कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं।


🧠 निष्कर्ष

DMI Finance का ESOP पूल बढ़ाना एक ऐसा कदम है जो कर्मचारियों के विश्वास को मजबूत करता है और उन्हें कंपनी की ग्रोथ से जोड़ता है। साथ ही, यह इंडस्ट्री में कंपनी के सकारात्मक दृष्टिकोण और ग्रोथ अप्रोच को भी दर्शाता है।

जहां एक ओर कई NBFCs बाजार में संघर्ष कर रही हैं, वहीं DMI Finance ने RBI की चुनौती के बाद भी रिकवर करते हुए, मजबूत रेवेन्यू, मुनाफा और कर्मचारियों की भागीदारी को प्राथमिकता दी है।

अब देखना यह होगा कि ESOP विस्तार का यह फैसला कंपनी की भविष्य की प्रतिभा बनाए रखने और आकर्षित करने में कितना कारगर साबित होता है।

Read more :🚖 Evera Cabs ने BluSmart की 500 इलेक्ट्रिक टैक्सियों पर किया कब्ज़ा,

🚖 Evera Cabs ने BluSmart की 500 इलेक्ट्रिक टैक्सियों पर किया कब्ज़ा,

Evera Cabs

नई दिल्ली, अप्रैल 2025 — भारत के प्रमुख इलेक्ट्रिक कैब सेवा प्रदाताओं में से एक Evera Cabs (Prakriti Mobility) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए BluSmart द्वारा संचालित 500 इलेक्ट्रिक टैक्सियों को पुनः अधिग्रहित (repossess) करना शुरू कर दिया है। यह कदम BluSmart द्वारा प्रमुख शहरों में अपनी सेवाएं स्थगित करने के बाद उठाया गया है।

अब तक Evera ने 220 टैक्सियों को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है, जबकि बाकी 280 टैक्सियां आने वाले दिनों में उनके पास वापस आ जाएंगी। इस अधिग्रहण के साथ ही Evera देश की सबसे अग्रणी इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, विशेषकर एयरपोर्ट मोबिलिटी सेगमेंट में।


📉 BluSmart की गिरावट, Evera के लिए अवसर

BluSmart, जिसे BP Ventures और Mayfield जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन प्राप्त था, हाल के महीनों में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में अपनी सेवाएं स्थगित करने को मजबूर हो गई। इसके साथ ही कंपनी को अपने ड्राइवर पार्टनर्स की नाराजगी, बकाया भुगतान और नौकरी छूटने जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ा।

ऐसे मुश्किल हालातों में Evera ने मौके को भांपते हुए BluSmart की टैक्सियों को अपने नेटवर्क में शामिल करने की रणनीति बनाई है।


🚗 1,000 BluSmart टैक्सियों को टारगेट कर रहा है Evera

Evera ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि वह BluSmart की कुल 1,000 टैक्सियों को अधिग्रहण करने की योजना पर काम कर रहा है। इस समय कंपनी का फोकस दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र, खासकर इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर केंद्रित है।

Evera ने बताया कि यह अधिग्रहण एक मल्टी-स्टेज स्ट्रैटेजिक प्लान का हिस्सा है, जिससे कंपनी दिल्ली-एनसीआर में एयरपोर्ट कैब सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।


✈️ एयरपोर्ट सर्विस पर फोकस

Evera Cabs एक ऑल-इलेक्ट्रिक, ऐप-आधारित टैक्सी सेवा है जो 2022 से B2B सेगमेंट में काम कर रही है। वर्तमान में कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 से अपनी सेवाएं देती है, लेकिन अब BluSmart की टैक्सियों को शामिल करने के बाद, Evera का लक्ष्य सभी टर्मिनलों पर सेवा देने का है।

यह कदम कंपनी की टर्नअराउंड टाइम सुधारने और यात्रियों को बेहतर गाड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा बदलाव लाएगा।


👨‍✈️ ड्राइवर भी कर रहे हैं Evera में ट्रांजिशन

सिर्फ गाड़ियों का अधिग्रहण ही नहीं, बल्कि Evera ने BluSmart के ड्राइवरों को भी अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया है। अब तक लगभग 150 पूर्व BluSmart ड्राइवर Evera के लिए ट्रिप्स कंप्लीट कर चुके हैं। कंपनी का कहना है कि यह संख्या अगले चरण में और बढ़ेगी।

इस ट्रांजिशन से ना सिर्फ Evera को अनुभवी ड्राइवर मिल रहे हैं, बल्कि BluSmart के ड्राइवरों को भी नई नौकरी और आय का अवसर मिल रहा है।


🔧 क्या है Evera की रणनीति?

Evera की इस योजना के दो प्रमुख चरण हैं:

चरण 1:

  • BluSmart की टैक्सियों का अधिग्रहण
  • एयरपोर्ट ऑपरेशन को तुरंत मजबूत बनाना
  • टर्मिनल 3 से शुरू करके अन्य टर्मिनलों पर विस्तार

चरण 2:

  • सभी एयरपोर्ट टर्मिनलों पर सेवा देना
  • बेड़े में नई गाड़ियों के साथ पूरे NCR में विस्तार
  • यात्रियों के लिए बेहतर सर्विस एक्सपीरियंस देना

📊 क्या कहता है बाजार?

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर सरकारी स्तर पर भी जोर दिया जा रहा है। EV नीति, FAME स्कीम, और बैटरी स्वैपिंग पॉलिसीज़ जैसी पहलों के चलते इलेक्ट्रिक कैब सर्विसेज़ का भविष्य उज्जवल नजर आता है।

ऐसे में Evera का यह कदम उसे मार्केट लीडरशिप की ओर ले जा सकता है, खासकर तब जब BluSmart जैसी कंपनियां चुनौतियों से जूझ रही हैं।


🧠 निष्कर्ष

Evera Cabs का BluSmart की 500 इलेक्ट्रिक टैक्सियों का अधिग्रहण करना केवल एक व्यवसायिक सौदा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विस्तार है। यह कदम दिल्ली-एनसीआर के तेजी से बढ़ते एयरपोर्ट मोबिलिटी मार्केट में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।

जहां एक ओर BluSmart अपनी सेवाएं समेट रही है, वहीं दूसरी ओर Evera उसे मौके में बदलते हुए न सिर्फ गाड़ियों को, बल्कि ड्राइवरों और ग्राहकों को भी अपने साथ जोड़ने में लगी है।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Evera इस अधिग्रहण को स्मूदली स्केल कर पाती है, और क्या यह उसे भारत की नंबर 1 इलेक्ट्रिक टैक्सी कंपनी बना पाती है।

Read more :🔋 Battery Smart की रफ्तार तेज़, राजस्व तीन गुना लेकिन घाटा भी दोगुना

🔋 Battery Smart की रफ्तार तेज़, राजस्व तीन गुना लेकिन घाटा भी दोगुना

Battery Smart

गुरुग्राम, अप्रैल 2025 — भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट के लिए बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनी battery smart ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹164 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष ₹56 करोड़ था — यानी 193% की छलांग

हालांकि, तेज़ी से स्केल करने की रणनीति के चलते कंपनी का घाटा भी दोगुना होकर ₹140 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹61 करोड़ था।


⚙️ बिज़नेस मॉडल: बैटरी-एज़-ए-सर्विस

Battery Smart का मुख्य व्यवसाय बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क ऑपरेट करना है, जो खासकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहनों के लिए काम करता है। कंपनी “Battery-as-a-Service” मॉडल के तहत वाहन निर्माताओं को बैटरियों की अदला-बदली (swapping) की सुविधा देती है। यही इसका प्रमुख राजस्व स्रोत है।

FY24 में कंपनी ने ब्याज और अन्य वित्तीय स्रोतों से ₹23 करोड़ की अतिरिक्त आय अर्जित की, जिससे कुल आय ₹187 करोड़ तक पहुंच गई।


📈 Battery Smart आय में तीन गुना बढ़ोतरी

Battery Smart की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू (मुख्य व्यवसाय से आय): ₹164 करोड़ (193% वृद्धि)
  • कुल आय: ₹187 करोड़ (जिसमें ₹23 करोड़ ब्याज से)
  • FY23 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू: ₹56 करोड़

इसका मतलब है कि कंपनी ने ग्राहकों और बाजार में तेज़ी से जगह बनाई है और इसकी सर्विसेज को व्यापक स्वीकृति मिल रही है।


💸 खर्चों में ज़बरदस्त उछाल

जहां आय में भारी इजाफा हुआ, वहीं खर्चों में भी बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई। कंपनी के कुल खर्च FY24 में ₹327 करोड़ हो गए, जो पिछले वर्ष ₹125 करोड़ थे — यानी 2.6 गुना वृद्धि।

विस्तृत खर्च विश्लेषण:

  • डिप्रिसिएशन (Depreciation): ₹85 करोड़ (3.8 गुना वृद्धि)
  • फाइनेंस कॉस्ट (ब्याज खर्च): ₹45 करोड़ (3.75 गुना वृद्धि)
  • कर्मचारी लाभ व्यय (Employee Benefits): ₹41 करोड़ (95.2% वृद्धि)
  • विज्ञापन खर्च: ₹8 करोड़ (60% की गिरावट)

यह स्पष्ट है कि कंपनी ने मानव संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है, जबकि विज्ञापन में कटौती की गई है।


📉 घाटा भी हुआ दोगुना

हालांकि टॉप-लाइन (राजस्व) में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली, लेकिन बॉटम-लाइन यानी नेट लॉस भी काफी बढ़ा। FY24 में कंपनी ने ₹140 करोड़ का घाटा दर्ज किया, जो कि FY23 के ₹61 करोड़ से 2.3 गुना अधिक है।

कुछ महत्वपूर्ण संकेतक:

  • EBITDA मार्जिन: -5.35%
  • ROCE (Return on Capital Employed): -18.34%
  • प्रति ₹1 कमाई पर खर्च: ₹1.99

इसका मतलब है कि Battery Smart को हर एक रुपए की ऑपरेटिंग आय पर लगभग दो रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।


💼 संपत्ति और नकदी स्थिति

मार्च 2024 तक, कंपनी की कुल चालू संपत्ति ₹328 करोड़ थी। इसमें से:

  • नकद और बैंक बैलेंस: ₹107 करोड़

कंपनी के पास फिलहाल पर्याप्त नकदी है, जिससे निकट भविष्य में संचालन और निवेश करने की गुंजाइश बनी हुई है।


🔍 क्या कहती है रिपोर्ट?

Battery Smart की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कंपनी तेजी से अपने नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल कर रही है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इस विस्तार की कीमत उसे घाटे के रूप में चुकानी पड़ रही है।

जहां डिप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट में भारी वृद्धि हुई, वहीं ऑपरेशनल खर्चों में नियंत्रण लाना अब कंपनी के लिए अगली चुनौती बन सकता है।


🔋 बैटरी स्वैपिंग बाजार में Battery Smart की स्थिति

भारत में EV (इलेक्ट्रिक वाहन) क्रांति के साथ-साथ बैटरी-स्वैपिंग मॉडल को भविष्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। Battery Smart इस सेगमेंट में अग्रणी खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरी है।

इसके प्रमुख लाभ:

  • कम चार्जिंग समय
  • अधिक व्हीकल अपटाइम
  • लोअर फ्यूल कॉस्ट

ऐसे में कंपनी का मौजूदा घाटा दीर्घकालिक निवेश के रूप में भी देखा जा सकता है।


🔚 निष्कर्ष

Battery Smart ने FY24 में गति और विस्तार दोनों को प्राथमिकता दी, जिससे राजस्व में तेज़ ग्रोथ देखने को मिली। हालांकि इस ग्रोथ के साथ आया भारी खर्च और घाटा कंपनी के लिए अलार्मिंग संकेत हो सकता है अगर यह ट्रेंड अगले कुछ वर्षों तक जारी रहा।

लेकिन बाजार में इसकी मजबूत उपस्थिति, कैश रिज़र्व और बैटरी-एज़-ए-सर्विस की मांग को देखते हुए, Battery Smart भारत के EV इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार दिख रही है

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