भारत के Real-Money Gaming (RMG) सेक्टर में बड़े बदलावों के बीच, प्रमुख प्लेटफॉर्म Zupee ने लगभग 170 कर्मचारियों (करीब 30% वर्कफोर्स) को नौकरी से निकाल दिया है। यह कदम कंपनी ने सरकार द्वारा RMG प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए बैन के बाद अपने ऑपरेशंस को पुनर्गठित करने के लिए उठाया है।
📢 CEO का बयान: “कठिन लेकिन ज़रूरी फैसला”
Zupee के फाउंडर और CEO दिलशेर सिंह मल्ही ने कहा:
“यह हमारे लिए एक कठिन फैसला रहा है, लेकिन नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के हिसाब से खुद को ढालना ज़रूरी था। हमारे साथियों ने Zupee को बनाने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और हम हमेशा उनके आभारी रहेंगे।”
मल्ही ने आगे बताया कि कंपनी छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को पूरी मदद दे रही है ताकि वे अपने अगले करियर कदम आत्मविश्वास से ले सकें।
💸 कर्मचारियों के लिए सेपरेशन पैकेज
Zupee ने छंटनी झेल रहे कर्मचारियों के लिए एक मजबूत सपोर्ट पैकेज का ऐलान किया है:
- सेवरेंस पे: अधिकतम 6 महीने की सैलरी।
- हेल्थ बेनिफिट्स: एक्सटेंडेड मेडिकल इंश्योरेंस।
- सपोर्ट फंड: 1 करोड़ रुपये का मेडिकल सपोर्ट फंड।
- री-हायरिंग प्राथमिकता: भविष्य में कंपनी में अवसर आने पर इन्हीं कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह कदम दर्शाता है कि Zupee अपने पूर्व कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाने की कोशिश कर रहा है।
🔻 पूरी इंडस्ट्री पर बैन का असर
Zupee ही नहीं, बल्कि पूरे RMG सेक्टर में इस बैन का गहरा असर पड़ा है। पिछले कुछ हफ्तों में कई कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी की है:
- Head Digital Works (A23): करीब 500 कर्मचारियों की छंटनी (दो-तिहाई स्टाफ)।
- MPL (Mobile Premier League)
- Baazi Games
- Games24x7
यह सभी कंपनियाँ बैन के बाद भारी नुकसान झेल रही हैं और लागत घटाने के लिए मजबूरन कर्मचारियों को निकाल रही हैं।
🚀 Zupee की नई रणनीति: RMG से हटकर Social Gaming
2018 में दिलशेर सिंह मल्ही और सिद्धांत सौरभ द्वारा शुरू की गई Zupee, RMG सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में से एक थी। कंपनी के पास 150 मिलियन से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स का दावा था।
लेकिन अब RMG पर बैन के बाद Zupee ने अपने बिज़नेस मॉडल को बदलने की ओर कदम बढ़ाया है।
नई दिशा में कंपनी का फोकस होगा:
- Social और Casual Games
- Subscription प्रोडक्ट्स (जैसे Zupee Plus)
- Zupee Studio के तहत ओरिजिनल शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट
इस बदलाव से कंपनी एक “एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म” बनने की कोशिश कर रही है, ताकि यूजर्स सिर्फ गेमिंग ही नहीं बल्कि कंटेंट और सब्सक्रिप्शन सर्विसेज का भी आनंद ले सकें।
📊 Zupee का वित्तीय प्रदर्शन
बैन से पहले कंपनी की ग्रोथ और फाइनेंशियल्स काफी मजबूत दिख रहे थे।
- FY23 (2022-23): ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹832 करोड़
- FY24 (2023-24): ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,123 करोड़ (35% साल-दर-साल ग्रोथ)
- नेट प्रॉफिट: ₹146 करोड़ (FY24 में कंपनी पहली बार लाभ में)
FY25 के नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन RMG बैन के बाद अनुमान है कि कंपनी की आय और मुनाफे पर गहरा असर पड़ सकता है।
🏟️ पूरी इंडस्ट्री में बदलाव की लहर
RMG बैन के बाद इंडस्ट्री की लगभग सभी कंपनियाँ नए रास्ते तलाश रही हैं:
- WinZo: माइक्रोड्रामाज़ और कंटेंट प्रोडक्शन की ओर बढ़ा।
- Dream11 (Dream Sports): वेल्थ मैनेजमेंट ऐप Dream Money लॉन्च किया।
- Zupee: सोशल गेमिंग और सब्सक्रिप्शन मॉडल पर फोकस।
इससे साफ है कि कंपनियाँ अब एड-बेस्ड और सब्सक्रिप्शन-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल्स की तरफ शिफ्ट हो रही हैं।
🔮 भविष्य की राह
Zupee जैसी कंपनियों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है:
- यूजर्स को बनाए रखना – जो पहले RMG की वजह से जुड़ते थे।
- नए बिज़नेस मॉडल्स को स्केल करना – ताकि राजस्व का मजबूत स्रोत बन सके।
- इनोवेटिव प्रोडक्ट्स – सोशल और कैजुअल गेमिंग को और आकर्षक बनाना।
अगर Zupee अपने 150 मिलियन यूजर बेस को नए प्रोडक्ट्स से एंगेज रखने में सफल रहती है, तो यह भारतीय गेमिंग इंडस्ट्री में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।
📝 निष्कर्ष
Zupee की छंटनी सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय RMG सेक्टर की मुश्किल स्थिति को दर्शाती है। सरकार के बैन ने कंपनियों को मजबूर किया है कि वे नए बिज़नेस मॉडल्स की ओर शिफ्ट हों।
हालाँकि, अच्छी बात यह है कि Zupee जैसे स्टार्टअप्स तेजी से पिवोट कर रहे हैं और सोशल गेमिंग, सब्सक्रिप्शन और डिजिटल कंटेंट जैसी नई दिशाओं में प्रयोग कर रहे हैं।
अगर ये रणनीति सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में हम भारतीय गेमिंग सेक्टर को एक नए रूप में देख सकते हैं – जहाँ ध्यान केवल “रीयल मनी” पर नहीं बल्कि मनोरंजन और अनुभव पर होगा।
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