🏨 Bloom Hotels को मिला ₹77.7 करोड़ का निवेश 🌟

Bloom Hotels

तेजी से बढ़ते हॉस्पिटैलिटी ब्रांड का विस्तार अब और होगा मजबूत

दिल्ली स्थित हॉस्पिटैलिटी चेन Bloom Hotels ने साल 2025 की अपनी पहली फंडिंग राउंड में ₹77.7 करोड़ (लगभग $9 मिलियन) जुटा लिए हैं। इस फंडिंग में Samena Capital Limited और Ikonika Holdings जैसे रणनीतिक निवेशकों ने भाग लिया है।

Bloom Hotels का कहना है कि इस निवेश का उपयोग कंपनी की विस्तार योजनाओं और विकास को गति देने के लिए किया जाएगा।


🧾 RoC में किया गया विशेष प्रस्ताव

कंपनी ने Registrar of Companies (RoC) के साथ फाइलिंग में बताया कि बोर्ड ने 7.77 करोड़ अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर (CCPS) जारी करने का विशेष प्रस्ताव पारित किया है, जिसके जरिए यह फंड जुटाया गया है।

इस फंडिंग से Bloom Hotels को अपने होटल नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी अपग्रेड में काफी मदद मिलेगी।


🏨 Bloom Hotels: बढ़ती पहचान वाला ब्रांड

Bloom Hotels देश के कई प्रमुख शहरों में अपनी पहचान बना चुका है। इसके प्रमुख ब्रांड्स में शामिल हैं:

  • 🌼 Bloom Hotel
  • 🌸 Bloom Hub
  • 🏢 BloomSuites
  • 🛏️ Bloomrooms

वर्तमान में Bloom Hotels के पास 50 से अधिक होटल्स हैं, जो मुंबई, पुणे, उदयपुर, जयपुर और NCR जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हैं।


💼 बड़ी फंडिंग की तैयारी में Bloom Hotels

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Bloom Hotels कुल ₹400 करोड़ जुटाने की योजना पर काम कर रहा है और इसके लिए उसने General Atlantic जैसे प्राइवेट इक्विटी निवेशकों से संपर्क भी किया है।

अब तक कंपनी ने Samena Capital से ₹362 करोड़ (लगभग $45 मिलियन) का निवेश जुटा लिया है। इस निवेश के बाद Samena Capital अब Bloom Hotels में बहुमत हिस्सेदारी रखने वाला निवेशक बन गया है।


📈 दो साल में 5X ग्रोथ – राजस्व में बड़ा उछाल

भले ही Bloom Hotels ने FY25 के वित्तीय आंकड़े अभी दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन कंपनी का विकास प्रदर्शन बेहद सराहनीय रहा है

पिछले वर्षों का राजस्व प्रदर्शन:

  • 📊 FY22 में राजस्व: ₹49 करोड़
  • 📈 FY24 में राजस्व: ₹250 करोड़
  • 💰 FY24 में शुद्ध लाभ: ₹14 करोड़

इसका मतलब है कि पिछले दो वर्षों में कंपनी ने 5 गुना से अधिक की ग्रोथ दर्ज की है। यह सफलता हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में Bloom Hotels की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।


🤝 प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ा

Bloom Hotels का मुकाबला भारत के अन्य तेजी से बढ़ते हॉस्पिटैलिटी स्टार्टअप्स और ब्रांड्स से है, जैसे:

  • 🏨 Treebo Hotels – FY24 में ₹88.6 करोड़ का राजस्व
  • 🏨 FabHotels – FY24 में ₹224 करोड़ का राजस्व
  • 🆕 Salt Stayz – उभरता हुआ नया खिलाड़ी
  • 🏢 Oyo (Sunday Hotels ब्रांड के जरिए) – बड़ा ब्रांड और बड़ा नेटवर्क

इसके बावजूद, Bloom Hotels ने अपनी ब्रांडिंग, कस्टमर एक्सपीरियंस और यूनिक प्रॉपर्टी डिजाइन के बल पर खुद को प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ा किया है।


🌍 क्या है Bloom Hotels की रणनीति?

Bloom Hotels अपने होटल अनुभव को आधुनिक, सस्ती कीमतों में और ट्रैवलर-फ्रेंडली बनाना चाहता है। इसकी रणनीति में शामिल हैं:

  • ✅ टियर 1 और टियर 2 शहरों में तेजी से विस्तार
  • ✅ आधुनिक तकनीक और डिज़ाइन-फोकस्ड होटल इंफ्रास्ट्रक्चर
  • ✅ फोकस्ड ऑनलाइन बुकिंग और डायरेक्ट कंज़्यूमर अप्रोच
  • ✅ बिजनेस और लीजर दोनों ट्रैवल सेगमेंट को टारगेट करना

📊 निवेशकों की दिलचस्पी क्यों?

Samena Capital और Ikonika Holdings जैसे निवेशकों ने Bloom Hotels में अपनी हिस्सेदारी क्यों बढ़ाई? इसके पीछे कई कारण हैं:

  • 📌 तेजी से बढ़ती राजस्व ग्रोथ
  • 📌 मुनाफे में प्रवेश (₹14 करोड़ का FY24 नेट प्रॉफिट)
  • 📌 बाजार में विस्तार की स्पष्ट योजना
  • 📌 कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण हॉस्पिटैलिटी समाधान
  • 📌 भारत में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग

🛎️ भारत का हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र: एक नजर

भारत में हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है, खासकर पोस्ट-कोविड दौर में। जैसे-जैसे डोमेस्टिक ट्रैवल और बिजनेस ट्रैवल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे किफायती लेकिन स्टाइलिश होटल ब्रांड्स की मांग भी बढ़ रही है।

Bloom Hotels जैसे ब्रांड इस अवसर का भरपूर लाभ उठा रहे हैं और उन्हें निवेशकों का साथ भी मिल रहा है।


✍️ निष्कर्ष: Bloom Hotels की उड़ान अब और तेज़

Bloom Hotels ने ₹77.7 करोड़ जुटाकर यह साफ कर दिया है कि वह भारत के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में एक लंबी रेस का घोड़ा है।

वित्तीय मजबूती, मुनाफे में प्रवेश, और ब्रांड विस्तार की स्पष्ट रणनीति के साथ, Bloom Hotels अब Treebo, FabHotels और Oyo जैसे दिग्गजों को सीधी टक्कर देने के लिए तैयार है।


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Read more:📚 अधिग्रहण की बड़ी खबर Drishti IAS का PhysicsWallah के साथ विलय रद्द, 🇮🇳❌

📚 अधिग्रहण की बड़ी खबर Drishti IAS का PhysicsWallah के साथ विलय रद्द, 🇮🇳❌

PhysicsWallah

देश के सबसे चर्चित एजुकेशन टेक स्टार्टअप PhysicsWallah द्वारा प्रसिद्ध UPSC कोचिंग संस्थान Drishti IAS का अधिग्रहण अब नहीं होगा। यह सौदा लगभग फाइनल स्टेज में था, लेकिन कई कारणों की वजह से यह संपन्न नहीं हो पाया, दो विश्वसनीय सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है।


🤝 अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी बातचीत

Entrackr ने अप्रैल 2025 में एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था कि PhysicsWallah UPSC कोचिंग सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए Drishti IAS समेत कई संस्थानों का अधिग्रहण करने की योजना बना रहा है। इस संभावित डील का अनुमानित मूल्य ₹2,500 से ₹3,000 करोड़ के बीच बताया गया था।

🏫 अधिग्रहण की सूची में थे ये नाम:

  • Drishti IAS
  • Chaitanya Academy
  • Rau’s IAS Study Circle
  • Sarrthi IAS

इन सभी को संभावित अधिग्रहण के लिए प्राथमिकता दी जा रही थी।


🚫 क्यों नहीं हुआ सौदा?

सूत्रों के अनुसार, Drishti IAS को PhysicsWallah की तरफ से अधिग्रहण का प्रस्ताव मिला था, लेकिन संस्थान ने अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और स्वतंत्र ब्रांड वैल्यू को देखते हुए किसी भी तरह की बाहरी फंडिंग या अधिग्रहण से इनकार कर दिया

एक सूत्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया:

“Drishti IAS ने प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया था, लेकिन कंपनी की मौजूदा रेवेन्यू और मुनाफा मजबूत होने के कारण, उन्होंने स्वतंत्र रूप से कार्य करना ही बेहतर समझा।”


📈 Drishti IAS का प्रदर्शन

1999 में स्थापित Drishti IAS ने विशेष रूप से हिंदी माध्यम के छात्रों के बीच एक भरोसेमंद और लोकप्रिय नाम बनाया है। दिल्ली मुख्यालय वाला यह संस्थान UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में अग्रणी माना जाता है।

FY24 (वित्त वर्ष 2023-24) में संस्थान का प्रदर्शन:

  • 🔹 राजस्व (Revenue) – ₹405 करोड़
  • 🔹 शुद्ध लाभ (Profit after Tax) – ₹90 करोड़

सूत्रों के अनुसार, संस्थान FY25 में भी बेहतर ग्रोथ के साथ राजस्व और मुनाफे में बढ़त दर्ज करने की दिशा में अग्रसर है।


🧑‍🏫 PhysicsWallah की रणनीति

PhysicsWallah ने अपनी पहचान सस्ते और गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन कोचिंग के रूप में बनाई है, विशेषकर इंजीनियरिंग (JEE) और मेडिकल (NEET) परीक्षाओं के लिए। हाल ही में कंपनी ने UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी कदम बढ़ाए हैं।

Drishti IAS का अधिग्रहण PhysicsWallah की ऑफलाइन विस्तार नीति और डायवर्सिफिकेशन के लिए एक रणनीतिक चाल मानी जा रही थी। इसके जरिए कंपनी UPSC कोचिंग सेगमेंट में एक मजबूत स्थिति बना सकती थी।


📉 डील रद्द होने का असर

इस अधिग्रहण के रद्द होने से दोनों कंपनियों के ऑपरेशन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं होगा। जहां Drishti IAS स्वतंत्र रूप से विस्तार करता रहेगा, वहीं PhysicsWallah अन्य विकल्पों के जरिए UPSC सेगमेंट में अपनी जगह बनाने की कोशिश जारी रखेगा।

🤫 कोई आधिकारिक बयान नहीं

  • PhysicsWallah ने इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार किया
  • वहीं, Drishti IAS ने प्रकाशन के समय तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी

📊 IPO की तैयारी में PhysicsWallah

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, PhysicsWallah ने मार्च 2025 में ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल किए हैं ताकि कंपनी ₹4,600 करोड़ का IPO ला सके। अगर यह IPO सफल रहता है, तो PhysicsWallah स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाला पहला भारतीय एजटेक यूनिकॉर्न बन जाएगा।

इस लिहाज से Drishti IAS का अधिग्रहण कंपनी की प्री-IPO रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था।


🔎 भविष्य की राह

Drishti IAS:

  • स्वतंत्र रूप से अपने विस्तार की योजना पर काम करता रहेगा
  • हिंदी मीडियम के छात्रों के बीच अपने कंटेंट, टेस्ट सीरीज और ऑफलाइन सेंटरों को और मजबूत करेगा
  • डिजिटल और क्षेत्रीय विस्तार की ओर भी बढ़ सकता है

PhysicsWallah:

  • UPSC सेगमेंट में अपनी उपस्थिति के लिए अन्य अधिग्रहण या पार्टनरशिप तलाश सकता है
  • IPO की तैयारी में तेजी लाएगा
  • अपने ऑफलाइन कोचिंग मॉडल और डिजिटल लर्निंग प्रोडक्ट्स को और बेहतर बनाने पर फोकस करेगा

📚 निष्कर्ष

भारत में एजटेक और कोचिंग इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है। जहां एक ओर PhysicsWallah जैसे स्टार्टअप्स नए सेगमेंट में प्रवेश कर रहे हैं, वहीं Drishti IAS जैसे पारंपरिक संस्थान अपनी स्वतंत्रता और गुणवत्तापूर्ण कंटेंट के बल पर मजबूती से टिके हुए हैं।

इस डील का रद्द होना यह दर्शाता है कि सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि ब्रांड वैल्यू, स्वायत्तता और शैक्षणिक मिशन भी किसी संस्थान की दिशा तय करते हैं।


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Vecmocon

दिल्ली स्थित इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपोनेंट्स और व्हीकल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Vecmocon Technologies ने अपने मौजूदा निवेशकों और नए पार्टनर Aavishkaar Capital से ₹74 करोड़ (लगभग $8.7 मिलियन) की फंडिंग जुटाई है। यह फंडिंग Series A राउंड के विस्तार के रूप में की गई है, जिसका मूल राउंड कंपनी ने नवंबर 2023 में $10 मिलियन जुटाकर पूरा किया था।


📈 फंडिंग स्ट्रक्चर: प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों ट्रांजैक्शन

इस राउंड में ₹50.4 करोड़ की प्राइमरी कैपिटल और ₹23.7 करोड़ की सेकेंडरी शेयर बिक्री शामिल है।

🔹 प्राइमरी इन्वेस्टमेंट:

कंपनी के बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसके तहत 12,067 प्रेफरेंस और इक्विटी शेयर जारी कर ₹50.4 करोड़ जुटाए जाएंगे। इसमें:

  • Ecosystem Integrity Fund (EIF) निवेश करेगा ₹21 करोड़
  • बाकी राशि Aavishkaar Capital निवेश करेगा

🔹 सेकेंडरी ट्रांजैक्शन:

इस राउंड में पुराने निवेशक Tessellate Tech Ventures ने अपनी पूरी 2.97% हिस्सेदारी ₹15.85 करोड़ में बेच दी, जिससे उन्हें शुरुआती ₹1.5 करोड़ निवेश पर 10 गुना से ज्यादा रिटर्न मिला।

इसके अलावा, एंजल इन्वेस्टर्स टीना गोयल, निशित अग्रवाल और सत्यम धर्मोरा ने भी अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। वहीं, संस्थापकों ने भी आंशिक हिस्सेदारी बेची है। ये सभी शेयर Blume Ventures और Aavishkaar Capital को सेकेंडरी डील में ₹7.85 करोड़ में बेचे गए हैं।


💰 वैल्यूएशन और निवेशकों की हिस्सेदारी

इस लेनदेन के बाद, Vecmocon की वैल्यूएशन लगभग ₹533 करोड़ ($63 मिलियन) पहुंच गई है। Tiger Global समर्थित इस कंपनी ने अब तक कुल $15.7 मिलियन से अधिक जुटाए हैं।

📊 प्रमुख निवेशकों की हिस्सेदारी (नई फंडिंग के बाद):

  • Blume Ventures – 13.27% (सबसे बड़ा बाहरी शेयरहोल्डर)
  • Ecosystem Integrity Fund (EIF) – 12.6%
  • Aavishkaar Capital – 7.51%
  • Tiger Global – 7.17%

🔧 Vecmocon क्या करता है?

Vecmocon Technologies इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्मार्ट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन मुहैया कराता है। इसकी सेवाएं और उत्पाद खास तौर पर EV मैन्युफैक्चरर्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

🛠️ इसके मुख्य उत्पादों में शामिल हैं:

  • 🔋 Battery Management Systems (BMS)
  • 🚘 Vehicle Intelligence Modules
  • 📟 Instrument Clusters
  • 🔌 EV Chargers

इसके अलावा कंपनी फ्लीट मैनेजमेंट और मेंटेनेंस सपोर्ट जैसी सेवाएं भी प्रदान करती है, जो लॉजिस्टिक्स और EV ऑपरेटरों के लिए बेहद फायदेमंद हैं।


📊 कारोबार में तेजी से ग्रोथ

Vecmocon ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में अपनी ऑपरेटिंग रेवेन्यू को पिछले साल के मुकाबले 4 गुना बढ़ाकर ₹15.87 करोड़ तक पहुंचाया। हालांकि, कंपनी ने इस दौरान ₹6 करोड़ का घाटा भी दर्ज किया है।

यह घाटा विकास की प्रक्रिया में अपेक्षित है, खासकर जब कंपनी लगातार R&D, टीम विस्तार और मार्केट एक्सपैंशन में निवेश कर रही है।


🌍 EV सेक्टर में तेजी और Vecmocon का रोल

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। सरकार की EV को लेकर नीतियों, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते:

  • 🚘 दोपहिया और तिपहिया EVs की मांग बढ़ रही है
  • 🔋 EV कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स को बड़े मौके मिल रहे हैं
  • 🏭 लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को बढ़ावा मिल रहा है

Vecmocon इस पूरे इकोसिस्टम में एक अहम टेक्नोलॉजिकल कड़ी के रूप में उभर रहा है। इसकी बैटरी मैनेजमेंट और व्हीकल इंटेलिजेंस तकनीक EV कंपनियों को ज्यादा सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ वाहन बनाने में मदद कर रही है।


🔮 आगे की योजनाएँ

Vecmocon इस फंडिंग का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में करेगी:

  • 👨‍💻 टीम विस्तार – इंजीनियरिंग, सेल्स और सपोर्ट टीम को मजबूत करना
  • 🧪 प्रोडक्ट इनोवेशन – नए EV कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेयर टूल्स पर R&D
  • 🌐 मार्केट एक्सपैंशन – भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
  • 🔧 कस्टमर सपोर्ट और फील्ड सर्विसेस को स्केल करना

🔚 निष्कर्ष

Vecmocon Technologies ने इस फंडिंग राउंड के जरिए न सिर्फ पूंजी हासिल की है, बल्कि अपने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है। EV इंडस्ट्री में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में ऐसे स्टार्टअप्स की भूमिका बेहद अहम है।

कंपनी का स्पष्ट फोकस है — “इनोवेशन के जरिए भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में आत्मनिर्भर बनाना।”

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🌱Stride Green ने जुटाए $3.5 मिलियन,⚡🚛

Stride Green

गुरुग्राम-स्थित क्लाइमेट-टेक प्लेटफॉर्म Stride Green ने हाल ही में $3.5 मिलियन (लगभग ₹29 करोड़) की सीड फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Micelio Technology Fund और Incubate Fund Asia ने किया है, जिसमें कुछ अन्य रणनीतिक निवेशकों ने भी भागीदारी की।

इस ताज़ा निवेश से Stride Green को अपनी टेक्नोलॉजी को बेहतर करने, टीम को विस्तार देने और भारत में स्वच्छ ऊर्जा बदलाव से जुड़े क्षेत्रों — जैसे कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, और रिन्यूएबल एनर्जी — में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।


🧠 किन्होंने शुरू किया Stride Green?

Stride Green की स्थापना की गई थी ईशप्रीत गांधी और विवेक जैन द्वारा। दोनों फाउंडर्स का फोकस भारत की तेजी से बढ़ती ग्रीन इकोनॉमी को सस्टेनेबल फाइनेंसिंग और डेटा-संचालित समाधानों के ज़रिए मजबूती देना है।

इस स्टार्टअप का उद्देश्य है भारत में उन कंपनियों को सहयोग देना जो क्लीनटेक सॉल्यूशंस अपना रही हैं – विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में।


💼 क्या करता है Stride Green?

Stride Green एक एसेट फाइनेंसिंग और लाइफसाइकल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, जो खासतौर पर सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल्स के लिए तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म अपने इन-हाउस टेक स्टैक के ज़रिए:

  • 📊 रीयल-टाइम एनालिटिक्स और अलर्ट्स प्रदान करता है
  • 🔧 ऑपरेशनल इनसाइट्स देता है ताकि एसेट की परफॉर्मेंस और जीवनकाल बेहतर हो
  • 💰 लीजिंग और फाइनेंसिंग विकल्प मुहैया कराता है ताकि ग्रीन सेक्टर की कंपनियाँ आसानी से स्केल कर सकें

Stride Green वर्तमान में 3,000 से अधिक क्लीनटेक एसेट्स का प्रबंधन करता है और इनका संचालन ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के साथ मिलकर करता है।


💸 फंडिंग का होगा ऐसा इस्तेमाल

कंपनी द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस फंडिंग से वह निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश करेगी:

  • 👨‍💻 टीम एक्सपेंशन: नई टेक और ऑपरेशंस टीम्स को जोड़ा जाएगा
  • 💻 टेक्नोलॉजी अपग्रेड: मालिकाना प्लेटफॉर्म को और स्मार्ट बनाया जाएगा
  • 🌎 बिज़नेस विस्तार: नई जियोग्राफिकल लोकेशंस और सेक्टर्स में एंट्री
  • 🔋 क्लीनटेक सप्लाई चेन को सपोर्ट: खासकर EV और बैटरी-आधारित समाधान

🔌 भारत की क्लाइमेट-टेक क्रांति में योगदान

Stride Green ऐसे समय में फंडिंग जुटा रहा है जब भारत तेजी से क्लाइमेट एक्शन की ओर बढ़ रहा है। सरकार के कई मिशन जैसे:

  • 🌿 नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन (NEMMP)
  • FAME इंडिया स्कीम
  • ☀️ 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य

इन सबके लिए फाइनेंसिंग और एसेट मैनेजमेंट का मजबूत इकोसिस्टम बहुत ज़रूरी है — और Stride Green इसी जरूरत को पूरा करता है।


🧩 क्यों ज़रूरी है ऐसा प्लेटफॉर्म?

भारत में EV और रिन्यूएबल सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन छोटे और मिड-साइज़ कंपनियों के लिए सस्टेनेबल एसेट्स की खरीद और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है।

यहीं पर Stride Green का रोल अहम हो जाता है:

✅ ये कंपनियों को लीजिंग ऑप्शन और आसान फाइनेंसिंग देता है
✅ उन्हें अपने एसेट्स की रीयल-टाइम परफॉर्मेंस देखने और सुधारने का टूल देता है
✅ लॉन्ग टर्म में एसेट की वैल्यू बढ़ाने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में मदद करता है


🌍 भविष्य की योजना: और ऊंची उड़ान

Stride Green निकट भविष्य में अपने बिज़नेस को न केवल और शहरों तक फैलाने की योजना बना रहा है, बल्कि वह नए वर्टिकल्स – जैसे:

  • ग्रिड लेवल स्टोरेज
  • हाइड्रोजन मोबिलिटी
  • ऑफ-ग्रिड रिन्यूएबल एसेट्स

जैसे क्षेत्रों में भी एंट्री की तैयारी कर रहा है।


👥 निवेशकों की क्या है राय?

Micelio Technology Fund के पार्टनर ने कहा:
“Stride Green जैसी कंपनियाँ भारत में ग्रीन मोबिलिटी और रिन्यूएबल ट्रांज़िशन को मजबूती देने के लिए ज़रूरी हैं। इनका टेक-फर्स्ट एप्रोच इनोवेशन को गति देता है।”

वहीं Incubate Fund Asia ने कहा कि Stride Green का स्केलेबल मॉडल और ग्राउंड लेवल प्रभाव इसे क्लाइमेट-टेक सेक्टर का प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है।


📈 निष्कर्ष

Stride Green की यह फंडिंग न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे भारत के ग्रीन इकोनॉमी इकोसिस्टम के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

✅ फाइनेंसिंग + टेक + सस्टेनेबिलिटी का मेल
✅ EV और क्लीन एनर्जी कंपनियों के लिए एंड-टू-एंड सपोर्ट
✅ इनवेस्टर्स का भरोसा और रणनीतिक साझेदारियाँ

इससे साफ है कि Stride Green निकट भविष्य में भारत के क्लाइमेट-टेक स्पेस में एक बड़ा नाम बन सकता है।


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Read News:🌾Khari Foods ने जुटाए ₹3 करोड़,🚀🥗

🌾Khari Foods ने जुटाए ₹3 करोड़,🚀🥗

Khari Foods

दिल्ली-स्थित क्लीन लेबल स्नैकिंग ब्रांड ‘Khari Foods ने हाल ही में ₹3 करोड़ (लगभग $350,000) की सीड फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया Meri Punji IMF Private Limited ने।

यह निवेश ब्रांड के उत्पाद नवाचार, मार्केटिंग, टीम विस्तार और देशभर में वितरण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद करेगा, खासतौर पर टियर-1 और टियर-2 शहरों पर फोकस करते हुए।


👨‍🍳 कौन हैं Khari Foods के पीछे?

Khari Foods की शुरुआत 2022 में यश और सुनील बंसल ने की थी। यह ब्रांड आज के स्वास्थ्य के प्रति सजग युवाओं के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है, जो स्वाद के साथ सेहत भी चाहते हैं।

ब्रांड का फोकस है – ‘No Palm Oil, No Maida’, यानी बिना ताड़ के तेल और बिना मैदा के हेल्दी स्नैक्स।


🥣 क्या खास बनाता है Khari Foods को?

Khari Foods ऐसे यूज़र्स को टारगेट करता है जो हेल्दी, बिना केमिकल वाले, नैचुरल स्नैक्स की तलाश में रहते हैं। इसकी कुछ प्रमुख उत्पाद श्रृंखलाएं हैं:

  • 🌾 रागी क्रिस्पीज़ (Ragi Crispies)
  • 🌾 ओट्स क्रिस्पीज़ (Oats Crispies)
  • 🌽 ज्वार पफ्स (Jowar Puffs)
  • 🌴 डेट्स-बेस्ड स्नैक्स (Dates-based Snacks)

ये सभी प्रोडक्ट्स खासतौर पर 20 से 40 वर्ष की आयु वाले शहरी और अर्ध-शहरी उपभोक्ताओं के लिए बनाए गए हैं, जो स्वाद से समझौता किए बिना सेहतमंद जीवनशैली अपनाना चाहते हैं।


💸 इस फंडिंग से क्या बदलेगा?

Khari Foods के अनुसार, ₹3 करोड़ की यह नई फंडिंग कंपनी को इन प्रमुख क्षेत्रों में मदद करेगी:

🔬 R&D में निवेश – नए उत्पादों की खोज और हेल्दी सामग्री पर रिसर्च
📦 नई प्रोडक्ट कैटेगरी की लॉन्चिंग
📈 डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और मार्केटिंग को स्केल करना
👨‍💼 टीम का विस्तार
📍 टियर-1 और टियर-2 शहरों में ब्रांड उपस्थिति को मजबूत बनाना

कंपनी का कहना है कि वह अब डिजिटल और रिटेल दोनों प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पकड़ और ब्रांडिंग को तेज़ी से बढ़ाएगी।


🏭 अपने मैन्युफैक्चरिंग से बनती है खास

Khari Foods की खास बात यह है कि कंपनी:

  • 🏗️ हरियाणा में अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चलाती है
  • 🔄 सप्लाई चेन पर पूरा नियंत्रण रखती है

इससे यह सुनिश्चित होता है कि हर उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहे और कोई भी मिलावट या केमिकल इसमें न हो।


📊 ग्रोथ का रोडमैप: FY25 में 208% ARR ग्रोथ का टारगेट

Khari Foods ने फंडिंग से पहले तक बूटस्ट्रैप तरीके से काम किया और फायदे में रही।

अब कंपनी का लक्ष्य है कि FY25 तक अपना वार्षिक रेवेन्यू रन रेट (ARR) 208% तक बढ़ाना।

इसके पीछे कारण हैं:

  • उपभोक्ताओं में हेल्दी स्नैकिंग की मांग का बढ़ना
  • टियर-2 शहरों में हेल्थ अवेयरनेस की तेज़ी से वृद्धि
  • ऑनलाइन ग्रॉसरी और हेल्थ पोर्टल्स की पहुँच में इज़ाफा

🧑‍🎓 क्या कहते हैं फाउंडर्स?

यश बंसल, को-फाउंडर, कहते हैं:
“हमने Khari Foods को इसलिए शुरू किया क्योंकि मार्केट में हेल्दी और ट्रस्टेड स्नैक्स की भारी कमी थी। हमारी प्राथमिकता गुणवत्ता है – बिना ताड़ तेल, बिना मैदा और बिना किसी मिलावट के.”

उनके अनुसार, इस फंडिंग से कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और प्रोडक्ट इनोवेशन को और मज़बूत बनाएगी।


🛒 कहाँ मिलते हैं Khari Foods प्रोडक्ट?

Khari Foods अपने उत्पाद डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर (D2C) मॉडल और कई ई-कॉमर्स पोर्टल्स जैसे:

  • Amazon
  • Flipkart
  • BigBasket
  • Jiomart
  • और खुद के वेबसाइट के ज़रिए बेचती है।

साथ ही, कंपनी अब ऑफलाइन किराना और हेल्थ फूड स्टोर्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।


📈 हेल्दी स्नैकिंग मार्केट का भविष्य

भारत में हेल्दी स्नैकिंग इंडस्ट्री लगातार तेज़ी से बढ़ रही है।

  • अनुमान है कि 2028 तक यह बाज़ार ₹30,000 करोड़ से ज्यादा का हो जाएगा।
  • कोविड के बाद लोगों में हेल्थ और न्यूट्रिशन को लेकर सजगता काफी बढ़ गई है।
  • Urban के साथ अब Semi-Urban यूज़र्स भी हेल्दी चॉइस को अपनाने लगे हैं।

ऐसे में Khari Foods जैसे ब्रांड इस स्पेस को लीड करने की पूरी क्षमता रखते हैं।


📌 निष्कर्ष

Khari Foods की ये ताज़ा फंडिंग केवल एक निवेश नहीं, बल्कि भारत के हेल्दी फूड इकोसिस्टम में भरोसे की एक नई शुरुआत है।

✅ अपने ही प्लांट में प्रोडक्शन
✅ क्लीन लेबल और नो-मैदा प्रॉडक्ट्स
✅ टियर-2 यूज़र्स पर विशेष ध्यान
✅ लगातार ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी

ऐसे में यह स्टार्टअप जल्द ही हेल्दी स्नैक्स इंडस्ट्री का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।


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आपकी भाषा में, आपके बिजनेस की बात। 🇮🇳✨

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🧳 The Tarzan Way को ₹2 करोड़ की फंडिंग

The Tarzan Way

नोएडा स्थित ट्रैवलटेक स्टार्टअप The Tarzan Way (TTW) ने हाल ही में ₹2 करोड़ (लगभग $2.33 लाख) की सीड फंडिंग जुटाई है। इस निवेश दौर का नेतृत्व किया Inflection Point Ventures (IPV) ने, और इसमें कई अन्य बड़े नाम भी शामिल रहे।

इस स्टार्टअप का लक्ष्य है—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़रिए भारतीयों का ट्रैवल प्लानिंग अनुभव पूरी तरह बदल देना।


💰 कौन-कौन निवेशक बने?

TTW की इस फंडिंग राउंड में कई जाने-माने निवेशकों ने हिस्सा लिया:

🔹 Inflection Point Ventures (IPV) – लीड इन्वेस्टर
🔹 Your Trips Limited (UK)
🔹 Prateek Maheshwari – PhysicsWallah के को-फाउंडर
🔹 और कई अन्य एंजल निवेशक

इस फंडिंग से स्टार्टअप को बिजनेस ऑपरेशंस और तकनीकी इनोवेशन को और मजबूत करने का मौका मिलेगा।


📊 पैसा कहां खर्च होगा?

कंपनी ने साफ-साफ बताया है कि यह फंड कितने प्रतिशत किस काम के लिए इस्तेमाल होगा:

  • 🛠️ 35% – प्रोडक्ट डेवलपमेंट
  • ⚙️ 25% – ऑपरेशंस
  • 📢 20% – मार्केटिंग
  • 👥 15% – HR और एडमिन
  • 📦 5% – अन्य कार्य

इसका मकसद है ट्रैवल टेक्नोलॉजी को इतना सहज और स्मार्ट बनाना कि यूज़र्स चंद सेकंड में अपनी ट्रिप प्लान कर सकें।


🧠 क्या है The Tarzan Way?

The Tarzan Way की शुरुआत 2020 में शिखर चड्ढा और शिवांक त्रिपाठी ने की थी।

यह एक AI-आधारित ट्रैवलटेक प्लेटफॉर्म है जो उपयोगकर्ताओं को हाइपर-पर्सनलाइज्ड यात्रा अनुभव प्रदान करता है। यानी, आपकी पसंद, बजट, और शौक के अनुसार ट्रिप की पूरी योजना कुछ ही सेकंड में तैयार हो जाती है।


📱 जल्द आ रहा है ‘Exploration App’

कंपनी अब जल्द ही अपना नया ‘Exploration App’ लॉन्च करने जा रही है। इस ऐप के ज़रिए:

🔹 AI-बेस्ड बुकिंग इंजन
🔹 वन-क्लिक बुकिंग फीचर
🔹 24×7 कंसीयर्ज सपोर्ट

जैसी सुविधाएं यूज़र्स को मिलेंगी, जिससे यात्रा योजना पहले से कहीं आसान और तेज़ हो जाएगी।


📈 प्रदर्शन की झलक: जबरदस्त ग्रोथ!

The Tarzan Way अब तक का जो परफॉर्मेंस रहा है, वो काफी प्रभावशाली है:

  • 💰 ₹13.5 करोड़ की ग्रॉस बुकिंग वैल्यू
  • 📈 300% साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ
  • 🚀 70% महीने-दर-महीने (MoM) यूज़र ग्रोथ
  • 🌐 35,000+ सोशल मीडिया फॉलोअर्स
  • 👀 1 करोड़ से ज़्यादा कंटेंट व्यूज़

ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ट्रैवल मार्केट में इस स्टार्टअप की पकड़ तेज़ी से मज़बूत हो रही है।


🌍 इंडस्ट्री ग्रोथ में बड़ा मौका

भारत में टूरिज्म इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि यह सेक्टर:

📊 2028 तक $512 बिलियन (₹43 लाख करोड़ से ज़्यादा) तक पहुंच जाएगा।

इसके साथ ही, आज के उपभोक्ता पर्सनलाइज्ड और टेक-ड्रिवन अनुभवों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। The Tarzan Way जैसे प्लेटफॉर्म इसी मांग को ध्यान में रखकर नए इनोवेशन ला रहे हैं।


🧳 क्यों खास है The Tarzan Way?

  1. 🤖 AI-Driven Customization – यूज़र्स के इंटरेस्ट, बजट और ट्रैवल स्टाइल के अनुसार पर्सनलाइज्ड प्लान
  2. ⏱️ सेकंड्स में इटिनरेरी जनरेट
  3. 📞 24×7 कंसीयर्ज सपोर्ट
  4. 🌐 फुल-स्पेक्ट्रम ट्रैवल सर्विस – होटल, फ्लाइट, अनुभव, एक्टिविटी बुकिंग आदि

यह स्टार्टअप “स्मार्ट ट्रैवलिंग” की उस जरूरत को पूरा कर रहा है जो आज के डिजिटल युग में हर यात्री चाहता है।


🔮 आगे की रणनीति

The Tarzan Way अब भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में भी सोच रहा है। इसके लिए कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को AI, ML और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए और भी स्मार्ट बनाने में जुटी है।


📝 निष्कर्ष

The Tarzan Way की इस ताज़ा फंडिंग से यह साफ़ हो गया है कि ट्रैवल और टेक्नोलॉजी का संगम भारत में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो:

  • ✅ स्मार्ट ट्रैवलिंग को बढ़ावा दे,
  • ✅ यूज़र्स के लिए हर कदम आसान बनाए,
  • ✅ और भारतीय टूरिज्म को नई पहचान दे,

वो आने वाले समय में AI-ट्रैवल टेक सेक्टर का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।


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Read more :💼 Syfe ने जुटाए $80 मिलियन

💼 Syfe ने जुटाए $80 मिलियन

Syfe

एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में संचालित डिजिटल वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म Syfe ने हाल ही में अपनी Series C फंडिंग राउंड में कुल $80 मिलियन (लगभग ₹660 करोड़) की पूंजी जुटाई है। इस फंडिंग में हालिया $53 मिलियन का Series C2 ऑल-इक्विटी राउंड भी शामिल है, जिसका नेतृत्व दो ब्रिटिश फैमिली ऑफिसेस ने किया।

इससे पहले अगस्त 2024 में कंपनी ने Series C1 राउंड में $27 मिलियन जुटाए थे, जिससे कुल मिलाकर Series C राउंड का आकार $80 मिलियन तक पहुंच गया है।


💸 किसने किया निवेश?

Syfe की इस फंडिंग राउंड में पुराने निवेशकों का भी भरोसा बरकरार रहा।

🔹 Unbound और
🔹 Valar Ventures (PayPal के को-फाउंडर Peter Thiel द्वारा समर्थित)

ने भी इस राउंड में भागीदारी की।

कंपनी ने साफ किया है कि यह एक पूरी तरह इक्विटी आधारित निवेश है, जिससे कंपनी पर कर्ज का कोई बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रोथ पर सीधा फोकस रहेगा।


🌍 कहां खर्च होगा यह फंड?

Syfe ने कहा कि इस नई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से सिंगापुर, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया में अपने संचालन को विस्तार देने के लिए किया जाएगा। इसके साथ-साथ:

🔧 गुरुग्राम (भारत) स्थित टेक हेडक्वार्टर में इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीमों को और मजबूत किया जाएगा।
🤖 AI-आधारित टूल्स के विकास,
कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने और
📈 प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को विस्तारित करने पर विशेष जोर रहेगा।


🏦 Syfe $10 अरब से ज्यादा की संपत्तियों का प्रबंधन

Syfe वर्तमान में $10 बिलियन (₹83,000 करोड़ से अधिक) की संपत्तियों का प्रबंधन करता है, जो इसे एशिया की प्रमुख डिजिटल वेल्थ टेक कंपनियों में से एक बनाता है।

📈 कंपनी ने दावा किया कि:

  • 2025 में हांगकांग में इसका कारोबार दोगुना हुआ,
  • और पिछले एक साल में कंपनी की कुल ग्रोथ भी लगभग दोगुनी रही।

🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया में अधिग्रहण और विस्तार

हाल ही में Syfe ने ऑस्ट्रेलिया की पॉपुलर ऑनलाइन ब्रोकरेज फर्म Selfwealth का अधिग्रहण किया है, जिससे कंपनी को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में मजबूत प्रवेश मिला है।

इसके ज़रिए Syfe अब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है जो निवेशकों को स्टॉक्स, ETF, रिटायरमेंट प्लानिंग, और AI आधारित पोर्टफोलियो मैनेजमेंट जैसी सेवाएं देता है।


👨‍💼 सीनियर टैलेंट की भरती में तेजी

Syfe ने हाल ही में कई वरिष्ठ अधिकारियों को अपने साथ जोड़ा है:

  • संजीव मलिक (पूर्व में BlackRock)
  • डेन रिकेट्स (पूर्व में Procter & Gamble और Grab)

यह दिखाता है कि कंपनी न केवल तकनीकी विस्तार पर ध्यान दे रही है, बल्कि लीडरशिप लेवल पर भी ग्लोबल टैलेंट ला रही है।


🇮🇳 भारत में 15% हेडकाउंट ग्रोथ

भारत में कंपनी का फोकस तेजी से बढ़ रहा है:

  • Syfe ने अपनी गुरुग्राम टेक टीम का हेडकाउंट पिछले राउंड के बाद 15% तक बढ़ाया है।
  • कंपनी आगे भी स्टैटेजिक रूप से हायरिंग करती रहेगी।

भारत न केवल कंपनी का टेक हब है, बल्कि यहां से एशिया और अन्य वैश्विक बाजारों के लिए इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवेलपमेंट भी किया जाता है।


🌏 60 देशों में मौजूदगी, अब एशियाई अमीर वर्ग पर फोकस

Syfe वर्तमान में:

  • सिंगापुर, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया में रजिस्टर्ड और लाइसेंस प्राप्त फिनटेक कंपनी है,
  • और इसके उपयोगकर्ता 60 से अधिक देशों में फैले हुए हैं।

अब कंपनी का ध्यान विशेष रूप से “Mass Affluent” यानी मध्यम से उच्च-आय वर्ग के निवेशकों पर है, जो एशिया में तेजी से बढ़ रहा है। Syfe उन्हें व्यक्तिगत निवेश, रिटायरमेंट, टैक्स प्लानिंग, और ETF-बेस्ड सेवाएं देने की तैयारी में है।


🤖 AI और फिनटेक का संगम

Syfe आने वाले महीनों में:

  • AI-असिस्टेड निवेश टूल्स लॉन्च करेगा
  • कस्टमर्स को ज़्यादा पर्सनलाइज्ड पोर्टफोलियो और
  • रीयल-टाइम एडवाइजरी सर्विसेस देगा।

यह उसे बाकी पारंपरिक फाइनेंशियल फर्मों से अलग बनाता है।


📝 निष्कर्ष

Syfe की यह ताज़ा फंडिंग एक अहम संकेत है कि एशिया के फिनटेक सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बरकरार है।

  • भारत में इंजीनियरिंग टैलेंट पर फोकस,
  • AI-आधारित वेल्थ प्रोडक्ट्स का विस्तार,
  • और रणनीतिक अधिग्रहण जैसे कदम,

Syfe को एक ग्लोबल वेल्थटेक लीडर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं।


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⚖️ VerSe Innovation ने Builder.ai के साथ राजस्व घोटाले के आरोपों को किया खारिज,

VerSe

Dailyhunt और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप्स की पैरेंट कंपनी VerSe Innovation ने हाल ही में UK आधारित सॉफ़्टवेयर प्लेटफॉर्म Builder.ai से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोपों को सख्ती से खारिज किया है। कंपनी ने इन आरोपों को “तथ्यहीन, आधारहीन, मानहानिकारक और भ्रामक” करार दिया है।

इस विवाद ने भारतीय स्टार्टअप जगत में हलचल मचा दी है, लेकिन VerSe ने सबूतों के साथ जवाब देकर अपना पक्ष साफ़ कर दिया है।


📞 CEO उमंग बेदी ने दिए तकनीकी साक्ष्य

Entrackr को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में VerSe Innovation के को-फाउंडर और CEO उमंग बेदी ने आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कई तकनीकी और वित्तीय सबूत साझा किए। इनमें शामिल हैं:

  • AWS पोर्टल पर वास्तविक मासिक उपयोग की जानकारी
  • Builder.ai द्वारा जारी मासिक इनवॉइस की प्रतियां
  • क्लाउड सेवाओं के लिए उठाए गए Jira टिकट्स
  • कस्टम ऐप डेवेलपमेंट के प्रमाण (Builder Home Portal पर आधारित)
  • 26+ वर्ज़न रिलीज़ और 18+ सॉफ्टवेयर अपडेट
  • ऐड सर्वर कैम्पेन डेटा जिसमें व्यूएबिलिटी और CTR मेट्रिक्स भी शामिल हैं
  • Builder.ai को दिए गए विज्ञापन सेवाओं के इनवॉइस

VerSe का दावा है कि ये सभी इनवॉइस और सेवाएं उनकी वित्तीय रिपोर्टिंग से मेल खाती हैं और पूरी तरह से ऑडिटेबल हैं।


🚫 “हमने कोई गड़बड़ी नहीं की” – VerSe का आधिकारिक बयान

कंपनी की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया:

“Builder.ai के साथ मिलकर राजस्व बढ़ाने, बिना सेवा के बिलिंग करने या इनवॉइस में हेरफेर करने का कोई भी आरोप पूरी तरह झूठा और गैर-जिम्मेदाराना है।”

VerSe ने स्पष्ट किया कि पिछले 5 वर्षों में उन्होंने Builder.ai से $80 मिलियन (₹665 करोड़) की सेवाएं लीं, जिनमें शामिल थे:

  • AWS इन्फ्रास्ट्रक्चर
  • क्लाउड सर्विस
  • सिस्टम माइग्रेशन
  • कस्टम ऐप डेवेलपमेंट

इसी दौरान Builder.ai ने VerSe से $53 मिलियन (₹440 करोड़) की विज्ञापन और मार्केटिंग सेवाएं लीं। कंपनी का कहना है कि यह सौदा व्यापारिक असंतुलन दिखाता है, जिससे किसी भी “मिलभगत” की आशंका स्वतः समाप्त हो जाती है।


✅ वित्तीय ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई

VerSe ने यह भी स्पष्ट किया कि FY24 के स्टैच्यूटरी ऑडिट के दौरान Builder.ai से जुड़े हर एक ट्रांजैक्शन की गहन जांच हुई थी।

  • सभी लेन-देन को सत्यापित किया गया
  • तीसरे पक्ष के ऑडिटर्स द्वारा समीक्षा की गई
  • ऑडिट रिपोर्ट में “अनमॉडिफाइड ओपिनियन” दिया गया – मतलब सभी आंकड़े सही और पारदर्शी पाए गए

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ आंतरिक नियंत्रण (internal control) कमज़ोरियों की बात कही गई, लेकिन VerSe का कहना है कि इसका कोई असर वित्तीय सटीकता पर नहीं पड़ा


⚖️ झूठ फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

VerSe ने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर मानहानि का मुकदमा भी दायर कर सकती है।

“हम पारदर्शिता और कानूनी मानकों के तहत काम करते हैं। हमारे सारे रिकॉर्ड किसी भी जांच को सहने में सक्षम हैं,” कंपनी के प्रवक्ता ने कहा।


🔮 आगे की रणनीति: FY26 की दूसरी छमाही तक ब्रेकइवन लक्ष्य

VerSe ने कहा कि अब यह विवाद पीछे छूट चुका है और कंपनी का ध्यान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने पर केंद्रित है।

कंपनी का फोकस अब निम्नलिखित उत्पादों पर होगा:

  • NexVerse.ai – AI आधारित प्रोडक्ट सूट
  • Dailyhunt Premium – सब्सक्रिप्शन-आधारित कंटेंट
  • Josh Audio Calling & Stories – शॉर्ट वीडियो के साथ ऑडियो कनेक्ट
  • VerSe Collab – कंटेंट क्रिएटर और ब्रांड्स को जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म

VerSe को उम्मीद है कि इन प्रोडक्ट्स के ज़रिए FY26 की दूसरी छमाही तक कंपनी ब्रेकइवन तक पहुंच सकती है, यानी राजस्व और खर्च बराबर हो जाएंगे।


📌 निष्कर्ष: पारदर्शिता बनाम अफवाह

इस पूरे विवाद में VerSe Innovation ने अपने बचाव में स्पष्ट सबूत और डेटा प्रस्तुत किए हैं। वित्तीय पारदर्शिता, तीसरे पक्ष के ऑडिट और स्पष्ट बयानबाज़ी से यह साफ़ है कि कंपनी अपने रिकॉर्ड्स को लेकर आत्मविश्वास में है।

VerSe का अगला पड़ाव है – लाभदायक वृद्धि, AI-फोकस्ड इनोवेशन और यूज़र-ओरिएंटेड प्लेटफॉर्म्स पर ध्यान केंद्रित करना।


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🚫 Zepto का IPO अब 2026 तक टला:

Zepto

भारत की प्रमुख क्विक कॉमर्स स्टार्टअप Zepto ने अब अपने IPO (Initial Public Offering) की योजना को 2026 तक स्थगित कर दिया है। पहले कंपनी के सह-संस्थापक और CEO आदित पालिचा ने 2025 में IPO लाने की बात कही थी, लेकिन अब आंतरिक समीक्षा के बाद कंपनी ने इसे एक साल आगे खिसका दिया है।

👉 Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, Zepto आने वाले महीनों में भले ही अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) दाखिल कर दे, लेकिन 2025 में लिस्टिंग अब लगभग असंभव मानी जा रही है।


📉 क्यों टला IPO?

Zepto के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कंपनी इस वक्त अपने वित्तीय आँकड़ों को मजबूत करने में लगी है। मौजूदा समय में:

  • कंपनी का कैश बर्न (नकदी खर्च) ज़्यादा है
  • मुनाफे की स्थिति तक पहुँचने में अभी वक्त लगेगा
  • पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार ज़रूरी है

इसलिए कंपनी ने IPO की जल्दबाज़ी न करते हुए मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया है।


🔁 पहले भी बदली जा चुकी है IPO टाइमलाइन

Zepto ने 2023 और 2024 में भी अपने IPO की समय-सीमा को कई बार संशोधित किया था। पहले जहां लिस्टिंग 2024 के अंत तक मानी जा रही थी, बाद में इसे 2025 बताया गया, और अब 2026 तक के लिए टाल दिया गया है।

📌 यह इंडिकेशन देता है कि स्टार्टअप सेक्टर में निवेशकों का भरोसा अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि मुनाफे और स्थायित्व पर भी निर्भर है।


🏚️ Zepto Café: छोटे शहरों में बंद हुए कई यूनिट्स

Zepto की फूड सर्विस यूनिट Zepto Café को भी बड़े झटके लगे हैं। उत्तर भारत के कई छोटे शहरों जैसे:

  • आगरा
  • चंडीगढ़
  • मेरठ
  • मोहाली
  • अमृतसर

…में लगभग 44 कैफे अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। इन बंदियों से 400 से अधिक कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।

📊 खर्च की बड़ी चुनौती

रिपोर्टों के मुताबिक, Zepto पिछले साल के अंत में हर महीने ₹250 करोड़ से ₹300 करोड़ तक खर्च कर रही थी। यह खर्च कंपनी के तेज़ी से विस्तार और ऑपरेशनल खर्च की वजह से हो रहा था, जिसमें वेयरहाउस, डिलीवरी, राइडर इनसेंटिव्स और कैफे यूनिट्स शामिल हैं।


💸 नया फाइनेंसिंग प्लान: ₹1,500 करोड़ की डेब्ट डील

IPO से पहले कंपनी अपने भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी उद्देश्य से Zepto:

  • Edelweiss Alternative Asset और अन्य निवेशकों के साथ मिलकर
  • करीब ₹1,500 करोड़ (लगभग $175 मिलियन) की structured debt deal फाइनल कर रही है

इस फंड का उपयोग कंपनी अपने विदेशी निवेशकों से शेयर वापस खरीदने (Buyback) के लिए करेगी। इससे IPO से पहले कंपनी में भारतीय हिस्सेदारी को बढ़ाया जा सकेगा, जो सेबी के नियमों के तहत फायदेमंद माना जाता है।


🔍 Zepto का परिचय: तेज़ डिलीवरी की पहचान

Zepto की शुरुआत 2021 में आदित पालिचा और कौशल वार्धन ने की थी। मात्र 10 मिनट में ग्रोसरी और डेली नीड्स की डिलीवरी ने इस स्टार्टअप को तेजी से लोकप्रिय बना दिया।

  • 📍 प्रमुख शहरों में 200+ डार्क स्टोर
  • 📦 ग्रॉसरी, डेयरी, फल-सब्जी और डेली यूज़ प्रोडक्ट्स
  • 🛵 अत्याधुनिक सप्लाई चेन और राइडर नेटवर्क

Zepto ने Y Combinator, Glade Brook Capital, Nexus Venture Partners, और StepStone Group जैसे नामी निवेशकों से अब तक $560 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।


📉 लेकिन मुनाफा अभी दूर…

तेज़ी से ग्रोथ के बावजूद Zepto अब भी प्रॉफिटबिलिटी से दूर है। भारी डिस्काउंट्स, प्रचार खर्च, और कैफे यूनिट्स जैसे नए एक्सपेरिमेंट्स ने लागत बढ़ा दी है।

📉 रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • अब कंपनी कैफे जैसी गैर-मूल सेवाओं को बंद कर रही है
  • कोर ग्रोसरी डिलीवरी ऑपरेशंस पर फोकस बढ़ा रही है
  • क्लस्टर ऑप्टिमाइज़ेशन के ज़रिए डार्क स्टोर नेटवर्क को री-ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है

🧠 एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि Zepto का IPO टालना एक रणनीतिक कदम है:

“IPO मार्केट अब सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ नहीं, बल्कि प्रॉफिटेबिलिटी को भी तवज्जो दे रहा है। ऐसे में Zepto जैसे हाई-बर्न स्टार्टअप्स को खुद को स्थिर साबित करना होगा।” — Startup Analyst


🔮 आगे की रणनीति

  • कैश बर्न कम करना
  • प्रॉफिटबिलिटी हासिल करना
  • भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाना
  • ✅ 2026 तक IPO के लिए तैयारी पूरी करना

Zepto यदि इन मोर्चों पर सफल रहता है, तो 2026 में इसका IPO भारत के सबसे चर्चित टेक लिस्टिंग्स में से एक बन सकता है।


📌 निष्कर्ष

Zepto की कहानी भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक झलक पेश करती है—जहां गति ज़रूरी है, लेकिन स्थिरता और मुनाफा अब निवेशकों की पहली प्राथमिकता बन चुके हैं।

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Read more :🥦 Handpickd को मिला ₹21.7 करोड़ का फंड

🥦 Handpickd को मिला ₹21.7 करोड़ का फंड

Handpickd

फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम करने वाला Bengaluru स्थित स्टार्टअप Handpickd (पहले नाम Sorted) ने अपने Seed राउंड को आगे बढ़ाते हुए ₹21.7 करोड़ (लगभग $2.5 मिलियन) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग का नेतृत्व Nitin Gupta और Genesia Ventures ने किया, जिसमें BEENEXT, Stargazer Ventures, Eximius Ventures, और Sunrise Sunset Family Trust जैसे नामी निवेशकों ने भी भाग लिया।


💰 फंडिंग डिटेल्स: किसने कितना निवेश किया?

Registrar of Companies (RoC) में दर्ज मार्च 2025 की फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने कुल 10,547 Series Seed B CCPS शेयर ₹20,566 प्रति शेयर की दर से जारी करने की मंज़ूरी दी है, जिसके ज़रिए ₹21.7 करोड़ की पूंजी जुटाई जा रही है।

मुख्य निवेश इस प्रकार हैं:

  • 🧑‍💼 Nitin Gupta (GG Enterprises): ₹6.48 करोड़
  • 🌍 Genesia Ventures: ₹6 करोड़
  • 🌱 BEENEXT (पहले से मौजूदा निवेशक): ₹2.16 करोड़
  • 👨‍👩‍👦 Sunrise Sunset Family Office: ₹2 करोड़
  • 🤝 Eximius Ventures, Stargazer Ventures, Infinyte Club Angel Fund और Ankit Agarwal: शेष राशि का योगदान

अब तक कंपनी को ₹10.16 करोड़ की राशि मिल चुकी है, और बाकी फंड निकट भविष्य में आने की उम्मीद है।


📊 कंपनी का वैल्यूएशन और प्रोफाइल

इस फंडिंग राउंड के बाद Handpickd का अनुमानित वैल्यूएशन करीब ₹300 करोड़ (लगभग $35 मिलियन) है, जो दर्शाता है कि निवेशक इसके व्यवसाय मॉडल और स्केलेबिलिटी पर भरोसा कर रहे हैं।


🌾 Handpickd क्या करता है?

Handpickd, जिसकी स्थापना Anant Goel, Nitin Gupta और Sahil Madan ने की है, एक B2B2C मॉडल पर काम करता है। यह स्टार्टअप किसानों और छोटे विक्रेताओं से सीधे फलों और सब्जियों की ख़रीद करता है, और इन्हें अपने टेक्नोलॉजी-चालित सप्लाई चेन के ज़रिए ग्राहकों तक पहुँचाता है।

🧑‍🌾 कंपनी का यूनिक मॉडल स्थानीय माइक्रो-एंटरप्रेन्योर्स को जोड़ता है, जो अंतिम मील (last-mile) डिलीवरी की कुशलता से ज़िम्मेदारी निभाते हैं।


📈 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में शानदार ग्रोथ

डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, FY24 (मार्च 2024 तक) में कंपनी ने:

  • ₹17.5 करोड़ की ऑपरेटिंग इनकम दर्ज की — FY23 के ₹7.4 करोड़ की तुलना में 2.3 गुना ज़्यादा
  • घाटा लगभग ₹2.1 करोड़ रहा — पिछले साल के बराबर

यह साफ़ दर्शाता है कि कंपनी लागत नियंत्रण के साथ-साथ तेज़ी से रेवेन्यू ग्रोथ कर रही है।


🤝 पुराने निवेशक कौन-कौन?

Handpickd को अब तक कुल $9 मिलियन (₹75 करोड़ से ज़्यादा) की फंडिंग मिल चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • 🌟 BEENEXT
  • 🌱 Blume Ventures
  • 💼 Kunal Bahl और Rohit Bansal (Snapdeal के सह-संस्थापक)

🧺 किससे है मुकाबला?

Handpickd का सीधा मुकाबला उन स्टार्टअप्स से है जो farm-to-fork मॉडल पर काम करते हैं:

  • 🥕 Otipy – अब तक $49 मिलियन जुटा चुका है
  • 🥬 Fraazo$61 मिलियन फंडिंग के बाद भी ऑपरेशन बंद कर चुका है
  • 🍅 Deep Rooted$20 मिलियन उठाने के बावजूद संघर्ष कर रहा है
  • 🍏 Pluckk – करीना कपूर समर्थित स्टार्टअप जो अब $10 मिलियन जुटाने की तैयारी में है

📌 इन सभी के मुकाबले Handpickd का lean model और ग्रासरूट सप्लाई चेन इसे अलग बनाता है।


🌱 क्यों है Handpickd की ग्रोथ खास?

  • 🚛 माइक्रो-लॉजिस्टिक्स नेटवर्क: अंतिम मील की डिलीवरी को तेज़ और किफायती बनाता है
  • 📲 टेक इंटीग्रेशन: किसानों, डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स और ग्राहकों के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म
  • 🏪 स्थानीय सस्टेनेबिलिटी: छोटे विक्रेताओं को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

🔮 भविष्य की राह

नए फंड का उपयोग कंपनी टेक्नोलॉजी अपग्रेड, सप्लाई चेन विस्तार, और नए शहरों में एंट्री के लिए करेगी। B2B2C मॉडल को और गहराई देने की योजना के साथ, Handpickd खुद को एक फ्यूचर-रेडी एग्री स्टार्टअप के रूप में स्थापित कर रहा है।


✍️ निष्कर्ष

जहां एक ओर कई farm-to-fork स्टार्टअप्स फंडिंग के बावजूद टिक नहीं पाए, वहीं Handpickd का संतुलित ग्रोथ, मुनाफा नियंत्रण और मजबूत माइक्रो-इकोनॉमी इकोसिस्टम इसको एक स्थायी मॉडल की तरह पेश करता है।

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