🧴 Skincare Startup Be Clinical ने जुटाए ₹6 करोड़,

Be Clinical

भारत के तेजी से बढ़ते skincare और beauty market में एक और उभरता हुआ ब्रांड निवेशकों का भरोसा जीतने में कामयाब रहा है। Mumbai-based skincare brand Be Clinical ने अपने seed funding round में ₹6 करोड़ जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व V3 Ventures ने किया, जबकि इसमें Titan Capital ने भी भाग लिया है।

खास बात यह है कि Titan Capital, जिसकी स्थापना Kunal Bahl और Rohit Bansal ने की है, ने इस राउंड में एक बार फिर निवेश किया है, यानी उन्होंने Be Clinical पर अपना भरोसा और मजबूत किया है।


💰 पहले भी जुटा चुकी है फंडिंग

Be Clinical इससे पहले इसी funding round में ₹2 करोड़ जुटा चुकी थी। उस समय यह निवेश Titan Capital के नेतृत्व में हुआ था, जिसमें P-TAL के founder Aditya Agarwal ने भी भाग लिया था।

अब नए निवेश के साथ, Be Clinical का लक्ष्य अपने products, research और manufacturing capabilities को अगले स्तर पर ले जाना है।


🔬 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस ताज़ा फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से research और product development पर किया जाएगा। इसमें शामिल हैं:

  • 🧪 In-house formulation capabilities को मजबूत करना
  • 🧑‍⚕️ Clinical testing और in-vivo trials
  • 👵 Ageing से जुड़ी समस्याओं के लिए targeted solutions
  • 👩‍🦳 Face, body और scalp ageing पर फोकस

Be Clinical का कहना है कि वह केवल cosmetic claims पर नहीं, बल्कि clinically tested और measurable results देने वाले products बनाना चाहती है।


🌿 Be Clinical क्या अलग करता है?

Be Clinical की शुरुआत मई 2024 में Hemangi Dhir द्वारा की गई थी। यह ब्रांड खुद को एक evidence-led और science-first skincare brand के रूप में पेश करता है।

कंपनी का दावा है कि उसके सभी products:

  • Indian skin और Indian climate को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं
  • Dermatologically active ingredients का इस्तेमाल करते हैं
  • Clinical trials और in-vivo testing से गुजरते हैं

भारत में कई skincare brands international formulations को local market में बेचते हैं, लेकिन Be Clinical का फोकस खासतौर पर Indian skin की जरूरतों पर है।


🇮🇳 Indian Skincare Market में मौजूद गैप

Be Clinical के अनुसार, भारतीय skincare market में अभी भी एक बड़ा gap मौजूद है। ज्यादातर brands या तो:

  • Purely cosmetic हैं
  • Transparent नहीं हैं
  • Clinical validation पर कम ध्यान देते हैं

Be Clinical इस gap को भरने का दावा करता है। ब्रांड का कहना है कि वह:

  • Transparency
  • Education
  • Science-backed skincare

को अपने core philosophy में रखता है, ताकि customers को पता हो कि वे क्या लगा रहे हैं और उसका असर क्या है।


📈 शुरुआती दौर में ही मजबूत traction

हालांकि Be Clinical एक नया ब्रांड है, लेकिन कंपनी का दावा है कि उसने बहुत कम समय में अच्छी growth दिखाई है।

अब तक ब्रांड:

  • 👥 25,000 से ज्यादा customers को serve कर चुका है
  • 🛒 Direct-to-consumer (D2C) model के जरिए adoption देखा है
  • 👍 Clinically driven approach के कारण consumer trust हासिल किया है

यह शुरुआती traction निवेशकों के confidence को और मजबूत करता है।


🏭 Manufacturing और Packaging पर भी निवेश

Be Clinical आने वाले समय में अपनी manufacturing facility को भी expand करने की योजना बना रहा है। इसके तहत:

  • Advanced machinery जोड़ी जाएगी
  • Production capacity बढ़ाई जाएगी
  • Quality control और consistency को बेहतर बनाया जाएगा

साथ ही, कंपनी अपने packaging formats को भी upgrade करना चाहती है। इसका मकसद है:

  • Ingredients की efficacy को लंबे समय तक preserve करना
  • Functional और protective packaging देना
  • Brand को premium और clinical-grade positioning देना

⚔️ Competition काफी मजबूत

Anti-ageing skincare category में Be Clinical को कड़ी competition का सामना करना पड़ रहा है। इस segment में पहले से ही कई established players मौजूद हैं, जैसे:

  • 🧴 Olay
  • 💧 Neutrogena
  • 🌿 Clinique
  • 🇮🇳 Dr. Sheth

हालांकि, Be Clinical का मानना है कि उसकी India-specific, clinically validated और transparent approach उसे इन brands से अलग बनाती है।


🔮 आगे की रणनीति

आने वाले महीनों में Be Clinical का फोकस रहेगा:

  • In-house R&D को और मजबूत करना
  • New age-defying solutions launch करना
  • Education-led marketing के जरिए customer awareness बढ़ाना
  • Trust और long-term brand loyalty बनाना

अगर execution सही रहा, तो Be Clinical भारतीय skincare market में एक credible, science-backed anti-ageing brand के रूप में उभर सकता है।


🏁 निष्कर्ष

₹6 करोड़ की seed funding Be Clinical के लिए सिर्फ पूंजी नहीं, बल्कि उसके vision और product philosophy की validation है। ऐसे समय में जब skincare market claims से भरा हुआ है, Be Clinical का clinical, transparent और India-focused approach इसे अलग पहचान दिला सकता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Be Clinical बड़े international brands को टक्कर देते हुए भारतीय consumers के बीच एक भरोसेमंद skincare नाम बन पाता है या नहीं।

Read more :⚡ EV Charging Startup RoadGrid ने जुटाए ₹12 करोड़

⚡ EV Charging Startup RoadGrid ने जुटाए ₹12 करोड़

RoadGrid

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसी कड़ी में EV charging infrastructure startup RoadGrid ने अपने Pre-Series A funding round में ₹12 करोड़ (करीब $1.33 मिलियन) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Venture Catalysts ने किया, जबकि इसमें कई strategic और angel investors ने भी भाग लिया।

इस राउंड में निवेश करने वालों में Kamal Puri (Skyline Group), IPV, FAAD Network, LetsVenture, Vrinda Goyal (Pace Group), Haresh Patel (Arthanomics) और Maneesh Shrivastav (Alpha Value) जैसे नाम शामिल हैं। निवेशकों की यह मजबूत सूची दिखाती है कि RoadGrid के business model और EV charging vision पर मार्केट का भरोसा बढ़ रहा है।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

RoadGrid ने बताया कि इस ताज़ा फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 🏭 Manufacturing capacity को scale करना
  • 💻 Software integrations को मजबूत करना
  • 🇮🇳 देशभर में EV charging stations का तेज़ rollout

कंपनी का फोकस सिर्फ चार्जर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक end-to-end EV charging ecosystem तैयार करना चाहती है, जिसमें hardware और software दोनों का गहरा integration हो।


🔌 RoadGrid क्या बनाता है?

RoadGrid एक ऐसी EV infrastructure कंपनी है जो patented universal EV chargers विकसित कर रही है। इन चार्जर्स की खास बात यह है कि ये:

  • 🛵 Two-wheelers
  • 🛺 Three-wheelers
  • 🚗 Four-wheelers

तीनों categories के इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ काम करते हैं। यानी अलग-अलग गाड़ियों के लिए अलग चार्जर लगाने की जरूरत कम हो जाती है, जिससे cost efficiency और scalability दोनों बेहतर होती है।


☁️ Hardware के साथ Software पर भी फोकस

RoadGrid सिर्फ hardware कंपनी नहीं है। इसके साथ-साथ स्टार्टअप एक cloud-based software platform भी विकसित कर रहा है, जो:

  • Charging stations की monitoring
  • Energy usage tracking
  • Remote diagnostics
  • User experience optimization

जैसे कामों को आसान बनाता है। इस software platform की मदद से fleet operators, businesses और public charging station owners अपने operations को ज्यादा efficiently manage कर सकते हैं।


🧩 दो हिस्सों में बंटा है RoadGrid का बिजनेस

RoadGrid का business model मुख्य रूप से दो segments में काम करता है:

1️⃣ EV OEMs के लिए चार्जर सप्लाई

इस segment में RoadGrid:

  • EV manufacturers (OEMs)
  • Fleet operators

को off-board chargers और fast DC chargers सप्लाई करता है। ये चार्जर्स खासतौर पर commercial और high-usage scenarios के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

2️⃣ Public और Commercial Charging Stations

दूसरे segment में कंपनी खुद:

  • Public EV charging stations
  • Commercial charging hubs

setup और operate करती है। यह segment EV adoption बढ़ने के साथ-साथ RoadGrid के लिए recurring revenue का बड़ा स्रोत बन सकता है।


📍 कहां-कहां active है RoadGrid?

RoadGrid ने पहले ही कई प्रमुख locations पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा ली है। कंपनी के अनुसार, इसके active deployments शामिल हैं:

  • 🏙️ Indore
  • 🏢 Noida
  • IOCL (Indian Oil) sites

इसके अलावा, RoadGrid का दावा है कि उसके पास 1,000 से ज्यादा chargers का confirmed pipeline है, जो आने वाले महीनों में install किए जाएंगे।


🤝 EV कंपनियों और Fleet Operators के साथ साझेदारी

RoadGrid केवल standalone charging stations तक सीमित नहीं है। यह स्टार्टअप:

  • EV manufacturers
  • Fleet operators

के साथ मिलकर भी काम कर रहा है। कंपनी के चार्जर्स का इस्तेमाल Euler Motors और VinFast के India network जैसी कंपनियों के deployments में किया जा रहा है।

यह partnerships RoadGrid को EV value chain में एक मजबूत position देती हैं।


🇮🇳 भारत के EV मिशन में RoadGrid की भूमिका

भारत सरकार EV adoption को बढ़ावा देने के लिए लगातार policies और incentives ला रही है। लेकिन EVs की growth का सबसे बड़ा bottleneck आज भी charging infrastructure माना जाता है।

RoadGrid इसी gap को fill करने की कोशिश कर रहा है:

  • Universal chargers से compatibility issues कम होंगे
  • Public charging stations से range anxiety घटेगी
  • Software integration से charging experience बेहतर होगा

🔮 आगे की रणनीति

इस Pre-Series A funding के बाद RoadGrid की strategy साफ दिखती है:

  • Manufacturing को तेजी से scale करना
  • Strategic locations पर charging stations लगाना
  • OEMs और fuel companies के साथ partnerships बढ़ाना
  • Software-driven charging management को मजबूत करना

अगर execution सही रहा, तो RoadGrid आने वाले समय में भारत के leading EV charging infrastructure players में शामिल हो सकता है।


🏁 निष्कर्ष

₹12 करोड़ की यह फंडिंग RoadGrid के लिए सिर्फ पूंजी नहीं, बल्कि market validation भी है। Universal chargers, dual business model और मजबूत investor backing के साथ यह स्टार्टअप भारत के EV transition में एक अहम भूमिका निभा सकता है।

जैसे-जैसे EV adoption बढ़ेगा, वैसे-वैसे RoadGrid जैसे infrastructure-focused startups की demand भी तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में इसके nationwide rollout पर industry की खास नजर रहने वाली है।

Read more :🏠 PropTech Startup Flent ने जुटाए ₹21 करोड़

🏠 PropTech Startup Flent ने जुटाए ₹21 करोड़

Flent

बेंगलुरु-आधारित proptech startup Flent ने अपने Pre-Series A funding round में कुल ₹21 करोड़ (करीब $2.5 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग में ₹17 करोड़ equity और ₹4 करोड़ debt शामिल है। इस राउंड का नेतृत्व Incubate Fund Asia ने किया है, जबकि इसमें WEH Ventures, Twin & Bull Family Office, Stride Ventures, 91Ventures, Untitled VC और कई angel investors ने भाग लिया है।

खास बात यह है कि इस राउंड में BlackBuck के co-founder Rajesh Yabaji ने भी angel investor के रूप में निवेश किया है। इसके अलावा, Flent के प्लेटफॉर्म से जुड़े 40 से ज्यादा landlords और tenants ने मिलकर ₹1 करोड़ का निवेश किया, जो इस स्टार्टअप के मॉडल पर यूजर्स के भरोसे को साफ दिखाता है।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Flent ने बताया कि इस ताजा फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से geographic expansion और नए product offerings लॉन्च करने में किया जाएगा।

कंपनी की योजना है कि:

  • 📍 बेंगलुरु के बाहर विस्तार किया जाए
  • 🏙️ मुंबई और गुरुग्राम को अगले बड़े markets के रूप में launch किया जाए
  • 🧠 AI-led tools और rental journey से जुड़े नए features पेश किए जाएं

इन नए फीचर्स में शामिल होंगे:

  • Flatmate discovery
  • Landlords के लिए vacancy protection
  • AI-based location और budget discovery tools

🚀 Flent क्या करता है?

Flent एक full-stack rental platform है, जो खासतौर पर urban professionals और modern renters को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह platform fully furnished, move-in-ready homes उपलब्ध कराता है, वो भी flexible lease terms के साथ।

Flent की खास बात यह है कि यह सिर्फ listing platform नहीं है, बल्कि पूरे rental lifecycle को manage करता है, जिसमें शामिल हैं:

  • 🛋️ Home design और furnishing
  • 👤 Tenant onboarding और screening
  • 🛠️ Maintenance और repairs
  • 💸 Rent assurance
  • ❌ Brokerage और भारी security deposit की जरूरत खत्म करना

इस मॉडल का मकसद है कि किराएदारों और landlords—दोनों के लिए renting को simple, transparent और stress-free बनाया जाए।


👥 Founders और शुरुआत की कहानी

Flent की स्थापना अक्टूबर 2023 में Mayank Lalwani, Rishabh Agnihotri और Shail Daswani ने की थी। तीनों founders ने मिलकर यह महसूस किया कि भारत में renting experience आज भी काफी हद तक outdated और fragmented है।

Founders के मुताबिक:

  • Tenants को brokerage, security deposit और poor maintenance जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है
  • वहीं landlords को vacancy risk, unreliable tenants और property management की दिक्कत होती है

Flent इसी gap को भरने की कोशिश कर रहा है—एक ऐसा platform बनाकर जो trust, technology और operational excellence पर आधारित हो।


📊 बेंगलुरु में मजबूत पकड़

फिलहाल Flent का मुख्य फोकस बेंगलुरु पर है, जहां कंपनी:

  • 🏠 140 premium homes में
  • 🛏️ 350 rooms manage कर रही है

कंपनी के अनुसार:

  • Occupancy level 90–95% के बीच रहती है
  • Average customer stay करीब 14 महीने का है

ये आंकड़े दिखाते हैं कि Flent का model सिर्फ attractive नहीं, बल्कि commercially sustainable भी है।


🏗️ Supply Side पर NRI और Investors पर फोकस

Supply side पर Flent खासतौर पर high-value residential properties को target कर रहा है। इनमें शामिल हैं:

  • Real estate investors
  • NRI landlords
  • Premium apartments और villas

इन segments में professional property management अब भी काफी हद तक fragmented है। Flent landlords को end-to-end management देकर उन्हें hassle-free rental income का भरोसा देता है।


🤝 Landlords और Tenants का निवेश: Strong Signal

इस funding round की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि 40+ landlords और tenants ने खुद Flent में निवेश किया। यह किसी भी startup के लिए एक powerful validation माना जाता है।

इसका मतलब साफ है:

  • Users product से खुश हैं
  • Platform पर भरोसा है
  • लोग इसे long-term solution के तौर पर देखते हैं

🏙️ Mumbai और Gurugram क्यों अहम हैं?

Mumbai और Gurugram जैसे cities में:

  • Rents काफी ऊंचे हैं
  • Brokerage और deposits बहुत ज्यादा होते हैं
  • Working professionals की population बड़ी है

Flent का flexible, fully-managed rental model इन cities के लिए perfect fit माना जा रहा है।


🔮 आगे की राह

इस Pre-Series A funding के बाद Flent से उम्मीद की जा रही है कि:

  • वह बड़े metros में तेजी से scale करेगा
  • AI-driven rental discovery को मजबूत बनाएगा
  • Renting को ownership-like experience में बदलेगा

अगर execution सही रहा, तो Flent आने वाले समय में India का leading managed rental platform बन सकता है।


🏁 निष्कर्ष

Flent की ₹21 करोड़ की फंडिंग यह दिखाती है कि भारत में proptech और rental housing एक बड़ा opportunity बन चुका है। बदलती lifestyle, migration और flexibility की मांग के साथ ऐसे platforms की जरूरत और बढ़ेगी।

Landlords और tenants—दोनों का भरोसा, मजबूत occupancy और clear expansion plan Flent को इस race में strong contender बनाते हैं। आने वाले महीनों में Mumbai और Gurugram में इसकी entry पर सबकी नजरें रहेंगी।

Read more :🎙️ Voice AI Startup Arrowhead ने जुटाए $3 मिलियन

🎙️ Voice AI Startup Arrowhead ने जुटाए $3 मिलियन

Arrowhead

बेंगलुरु-आधारित voice AI startup Arrowhead ने अपने seed funding round में $3 मिलियन (करीब ₹25 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Stellaris Venture Partners ने किया है, जबकि इसमें कई जाने-माने angel investors ने भी भाग लिया है।

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फंडिंग राउंड में CRED, M2P, Turtlemint और Kissht जैसी fintech कंपनियों से जुड़े founders और senior executives ने निवेश किया है। यह निवेश न सिर्फ Arrowhead की तकनीक में भरोसे को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि voice AI अब fintech sales का अगला बड़ा ट्रेंड बनने जा रहा है।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Arrowhead ने बताया कि इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी मुख्य रूप से तीन अहम क्षेत्रों में करेगी:

  • 🧠 AI models को और गहराई देने के लिए
  • 👨‍💻 Technology और go-to-market teams को expand करने के लिए
  • 🌏 Voice AI solutions की बड़े पैमाने पर deployment को सपोर्ट करने के लिए

कंपनी का लक्ष्य है कि वह अपनी voice AI technology को pilot stage से आगे ले जाकर full-scale enterprise adoption तक पहुंचाए।


🚀 Arrowhead क्या करता है?

Arrowhead एक advanced human-like voice AI platform तैयार करता है, जो खासतौर पर financial services sector के लिए डिजाइन किया गया है।

यह startup ऐसे AI voice agents बनाता है जो:

  • लंबी और जटिल sales conversations कर सकते हैं
  • इंसानों जैसी natural बातचीत कर सकते हैं
  • customer objections को समझकर जवाब दे सकते हैं
  • high-performing sales agents के behavior को replicate कर सकते हैं

Arrowhead का दावा है कि उसके AI agents सिर्फ scripted calls नहीं करते, बल्कि context समझकर, real-time decisions लेते हैं—बिल्कुल एक experienced sales executive की तरह।


🏦 Banks, NBFCs और Fintechs के लिए क्यों जरूरी?

भारत और Southeast Asia में banks, NBFCs और fintech कंपनियां हर दिन हजारों sales calls करती हैं—credit cards, personal loans, insurance, BNPL और दूसरे financial products के लिए।

लेकिन इस process में कई challenges होते हैं:

  • Skilled sales agents की कमी
  • High attrition rate
  • Training cost ज्यादा
  • Inconsistent sales pitch
  • Low conversion ratio

Arrowhead का voice AI इन समस्याओं को हल करने का दावा करता है। कंपनी के मुताबिक, उसका प्लेटफॉर्म top-performing human sales agents के patterns को analyze करके AI में embed करता है, जिससे हर customer को consistent और effective sales experience मिलता है।


📈 Pilot से Full-Scale Adoption की ओर

Arrowhead ने बताया कि उसकी technology अब सिर्फ pilot projects तक सीमित नहीं है। कई financial institutions अब इसके voice AI solutions को full-scale integration की दिशा में ले जा रही हैं।

इसका मतलब यह है कि:

  • AI agents real customers से live calls कर रहे हैं
  • Sales funnel के critical हिस्सों को automate किया जा रहा है
  • Conversion rates में measurable improvement देखा जा रहा है

यह adoption दिखाता है कि voice AI अब experimental tech नहीं रही, बल्कि business-critical tool बनती जा रही है।


🌏 India और Southeast Asia पर फोकस

Arrowhead फिलहाल India और Southeast Asia के markets में अपने customers को serve करता है। ये दोनों regions fintech growth के लिहाज से बेहद अहम हैं:

  • Large, mobile-first population
  • तेजी से बढ़ता digital lending और insurance market
  • Cost-efficient automation की strong demand

Voice-first sales automation खासतौर पर इन markets में प्रभावी मानी जाती है, जहां फोन कॉल अब भी customer acquisition का सबसे बड़ा जरिया है।


👩‍💼 Founders के बारे में

Arrowhead की स्थापना Devyani Gupta और Vengadanathan Srinivasan ने की है।

  • Devyani Gupta का background product और business strategy में रहा है
  • Vengadanathan Srinivasan deep-tech और AI systems पर मजबूत पकड़ रखते हैं

दोनों founders का मानना है कि आने वाले समय में AI sales agents इंसानों की जगह नहीं लेंगे, बल्कि उन्हें scale करने में मदद करेंगे

उनका विज़न है कि हर fintech कंपनी के पास एक ऐसा AI sales force हो, जो 24×7 काम करे और performance में top human agents के बराबर या उससे बेहतर हो।


🤝 Investors का भरोसा क्या दिखाता है?

Stellaris Venture Partners और fintech founders का Arrowhead में निवेश यह दिखाता है कि:

  • Voice AI fintech का अगला बड़ा differentiator बन सकता है
  • Sales automation में अभी बहुत बड़ा untapped opportunity है
  • Arrowhead की technology practical और scalable है

Fintech founders खुद इस समस्या को ground level पर समझते हैं, इसलिए उनका निवेश strong validation माना जा सकता है।


🔮 आगे की राह

इस seed funding के बाद Arrowhead से उम्मीद की जा रही है कि:

  • वह अपने AI models को और ज्यादा natural बनाएगा
  • नए fintech use-cases को explore करेगा
  • Enterprise-grade deployments को तेज करेगा

अगर execution सही रहा, तो Arrowhead आने वाले वर्षों में India का leading voice AI sales platform बन सकता है।


🏁 निष्कर्ष

Arrowhead की $3 मिलियन seed funding यह साफ संकेत देती है कि voice AI अब सिर्फ future की बात नहीं, बल्कि present की जरूरत बन चुकी है। Banks और fintechs के लिए sales scale करना अब बिना AI के मुश्किल होता जा रहा है।

Human-like conversations, बेहतर conversion और scalable sales—Arrowhead इन्हीं तीन pillars पर अपनी growth story बना रहा है। आने वाले समय में यह startup fintech sales automation space का बड़ा नाम बन सकता है।

Read more :💳 BankBazaar की FY25 में मजबूत वापसी Revenue में 33% उछाल,

💳 BankBazaar की FY25 में मजबूत वापसी Revenue में 33% उछाल,

BankBazaar

ऑनलाइन फाइनेंशियल मार्केटप्लेस BankBazaar ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में अपने बिज़नेस परफॉर्मेंस में साफ सुधार दिखाया है। कंपनी ने जहां एक तरफ revenue में 33% सालाना बढ़ोतरी दर्ज की, वहीं दूसरी ओर अपने losses को भी कम करने में सफलता हासिल की है।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल की गई consolidated financial statements के मुताबिक, BankBazaar का यह प्रदर्शन बताता है कि कंपनी अब धीरे-धीरे growth के साथ profitability की दिशा में आगे बढ़ रही है।


📈 Revenue Growth: ₹187 करोड़ से ₹249 करोड़ तक

FY25 में BankBazaar की operating revenue ₹249 करोड़ रही, जो कि FY24 में ₹187 करोड़ थी। यानी कंपनी ने एक साल में 33% year-on-year growth हासिल की।

इसके अलावा, अगर non-operating income ₹5 करोड़ को भी जोड़ दिया जाए, तो FY25 में BankBazaar की total income ₹254 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि FY24 में यह आंकड़ा ₹188 करोड़ था।

यह growth ऐसे समय में आई है जब fintech सेक्टर में competition काफी बढ़ चुका है और customer acquisition cost भी ऊंची बनी हुई है।


🏦 BankBazaar का बिज़नेस मॉडल क्या है?

BankBazaar खुद को एक online financial marketplace के तौर पर पेश करता है। कंपनी का मुख्य फोकस:

  • Co-branded credit cards
  • Credit score checking
  • Third-party loans
  • Insurance products की cross-selling

कंपनी की income का मुख्य स्रोत banks से मिलने वाला commission है, जो loan disbursal और credit card issuance पर मिलता है। यानी BankBazaar कोई loan खुद नहीं देता, बल्कि banks और customers के बीच एक digital bridge की तरह काम करता है।


💬 Credit Cards और Subscription पर नया फोकस

पिछले साल एक मीडिया इंटरव्यू में BankBazaar के CEO Adil Shetty ने बताया था कि:

  • कंपनी ने करीब ₹210 करोड़ की recurring revenue सिर्फ co-branded credit card distribution से कमाई
  • BankBazaar ने दोबारा अपना फोकस credit card distribution और credit health monitoring subscription business पर किया है

इस रणनीति का असर FY25 के numbers में साफ दिखाई देता है, जहां revenue steady growth दिखा रहा है।


💸 Expenses में बढ़ोतरी, लेकिन कंट्रोल भी

BankBazaar की financial statements में खर्चों का detailed breakup नहीं दिया गया है, लेकिन कुछ अहम आंकड़े सामने आए हैं।

📊 Operating Expenses:

  • FY25: ₹165 करोड़
  • FY24: ₹100 करोड़
  • यानी 65% की बढ़ोतरी
  • कुल खर्चों का करीब 59% हिस्सा

👨‍💼 Employee Benefit Expenses:

  • FY25: ₹61 करोड़
  • FY24 से 8% की गिरावट

📢 Advertising & Marketing:

  • खर्च ₹14 करोड़ पर स्थिर रहा

💰 Finance Cost:

  • FY25: ₹14 करोड़
  • FY24 से 40% की बढ़ोतरी

कुल मिलाकर, BankBazaar का total cost FY25 में ₹278 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹215 करोड़ था। यानी 29% की सालाना बढ़ोतरी


📉 Loss में कमी: सही दिशा में कदम

जहां एक तरफ खर्च बढ़े, वहीं दूसरी तरफ BankBazaar ने अपने net loss को कम करने में सफलता पाई।

  • FY25 Net Loss: ₹23 करोड़
  • FY24 Net Loss: ₹26.5 करोड़
  • यानी करीब 13% की गिरावट

यह दर्शाता है कि कंपनी की growth अब loss-controlled तरीके से हो रही है, जो investors के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।


📐 Key Financial Ratios और Unit Economics

FY25 में BankBazaar के कुछ अहम financial ratios इस प्रकार रहे:

  • ROCE (Return on Capital Employed): -9.86%
  • EBITDA Margin: -4.42%

🔍 Unit Economics:

  • FY25 में BankBazaar ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.12 खर्च किए
  • यह FY24 की तुलना में बेहतर स्थिति मानी जा सकती है

💼 Balance Sheet Snapshot:

  • Current Assets: ₹140 करोड़
  • Cash & Bank Balance: ₹11 करोड़

यह बताता है कि कंपनी के पास अभी भी पर्याप्त liquidity मौजूद है।


💼 Funding और Investors का भरोसा

Startup data platform TheKredible के मुताबिक, BankBazaar अब तक कुल $133 मिलियन (करीब ₹1,100+ करोड़) की funding जुटा चुका है।

🚀 प्रमुख Investors:

  • Peak XV (पूर्व Sequoia Capital India)
  • Amazon
  • Walden International

इतने बड़े investors का लंबे समय तक साथ बने रहना यह दिखाता है कि BankBazaar के बिज़नेस मॉडल और long-term potential पर भरोसा कायम है।


🔮 आगे की राह

FY25 के numbers यह साफ संकेत देते हैं कि BankBazaar अब:

✅ Revenue growth पर फोकस कर रहा है
✅ Losses को धीरे-धीरे कम कर रहा है
✅ Credit cards और subscription जैसे high-margin segments पर दांव लगा रहा है

अगर आने वाले वर्षों में cost control और बेहतर unit economics हासिल होती है, तो BankBazaar के लिए profitability की राह ज्यादा दूर नहीं लगती


🏁 निष्कर्ष

FY25 BankBazaar के लिए stabilisation और strategic refocus का साल रहा। 33% revenue growth और loss में कमी दिखाती है कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत के तेजी से बढ़ते fintech market में BankBazaar एक बार फिर खुद को मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

Read more :🌱 Climate Deeptech Startup Ecozen को ₹95 करोड़ का नया Debt Funding,

🌱 Climate Deeptech Startup Ecozen को ₹95 करोड़ का नया Debt Funding,

Ecozen

जलवायु (Climate) समाधान पर काम करने वाली पुणे स्थित deeptech स्टार्टअप Ecozen ने एक बार फिर अपने विस्तार की रफ्तार तेज कर दी है। कंपनी Momentum Capedge Limited से ₹95 करोड़ (करीब $10.7 मिलियन) का नया debt funding जुटा रही है। यह पिछले 12 महीनों में Ecozen द्वारा लिया गया तीसरा debt investment है, जो कंपनी के मजबूत business model और बढ़ते scale को दर्शाता है।

Ecozen ने यह फंडिंग ऐसे समय में जुटाई है, जब भारत में climate-smart और solar-powered solutions की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर agriculture और cold storage जैसे सेक्टर्स में।


📑 Board Resolution और NCD Details

Registrar of Companies (RoC) में की गई फाइलिंग के अनुसार, Ecozen के बोर्ड ने Special Resolution पास करते हुए Series E Non-Convertible Debentures (NCDs) जारी करने की मंजूरी दी है।

👉 मुख्य डिटेल्स:

  • कुल 950 NCDs
  • प्रत्येक NCD की face value: ₹10 लाख
  • कुल फंडिंग: ₹95 करोड़
  • Green shoe option: ₹25 करोड़ तक
  • ब्याज दर: 11.5% प्रति वर्ष
  • अवधि (Tenure): 27 महीने

कंपनी ने बताया है कि इस debt funding का इस्तेमाल immediate capital requirements और business growth को support करने के लिए किया जाएगा।


💰 पिछले 12 महीनों में लगातार Debt Funding

Ecozen ने बीते एक साल में लगातार debt के जरिए capital raise किया है। इससे पहले:

  • $12.5 मिलियन का debt UTI International और Spark Capital से
  • $23 मिलियन का debt responsAbility Investments AG, Northern Arc Capital Limited और अन्य निवेशकों से

Startup data intelligence platform TheKredible के मुताबिक, Ecozen अब तक $76 मिलियन से ज्यादा की funding (debt + equity) जुटा चुकी है।


🚜 Ecozen क्या करता है?

Ecozen की स्थापना Devendra Gupta ने की थी। यह स्टार्टअप climate-smart deeptech solutions पर काम करता है, जो खासतौर पर solar power, IoT, motor control systems और energy storage technologies पर आधारित हैं।

🔧 Ecozen के प्रमुख प्रोडक्ट्स:

  • Ecotron – Solar pump controller
  • Ecofrost – Solar-powered cold storage solution
  • Solar AC systems
  • Solar panels और energy solutions

Ecozen के solutions खासतौर पर farmers, agribusinesses और rural supply chains के लिए बनाए गए हैं, जिससे energy cost कम होती है और carbon footprint भी घटता है।


📈 Financial Performance: Revenue और Profit में जबरदस्त उछाल

Ecozen की financial growth भी उतनी ही मजबूत रही है जितनी इसकी funding story।

📊 FY25 Performance:

  • Revenue: ₹889 करोड़
  • FY24 Revenue: ₹377 करोड़
  • यानी 2.3 गुना से ज्यादा growth

💹 Profit Growth:

  • FY25 Profit: ₹95 करोड़
  • Profit में 4.7 गुना उछाल

यह growth दर्शाती है कि Ecozen न सिर्फ scale कर रही है, बल्कि profitability के साथ growth हासिल कर रही है, जो Indian startup ecosystem में अभी भी कम देखने को मिलता है।


🤝 Investors का भरोसा बरकरार

Ecozen में Nuveen Global और Omnivore जैसे बड़े investors का समर्थन है। Omnivore खासतौर पर agritech और climate-focused startups में निवेश के लिए जाना जाता है, जिससे Ecozen की strategic positioning और मजबूत होती है।

लगातार debt funding मिलना यह भी दिखाता है कि lenders को कंपनी की cash flow visibility, asset base और repayment capacity पर भरोसा है।


⚔️ Market Competition

Climate-tech और solar-powered agri solutions के क्षेत्र में Ecozen को कड़ी competition का सामना करना पड़ता है। इसके प्रमुख competitors हैं:

  • Powerflex
  • Inficold
  • Khetworks

हालांकि, Ecozen की व्यापक product range, मजबूत distribution और तेजी से बढ़ता revenue इसे competitors से अलग पहचान देता है।


🔍 क्यों अहम है यह Funding?

Ecozen की यह debt funding कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

✅ Climate और sustainability sector में investor confidence
✅ Solar और energy-efficient solutions की बढ़ती मांग
✅ Profitable growth के साथ scale करने की क्षमता
✅ Agriculture और rural economy पर सकारात्मक प्रभाव

भारत में climate change और energy transition जैसे मुद्दों के बीच Ecozen जैसी कंपनियाँ sustainable development का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही हैं।


🏁 निष्कर्ष

₹95 करोड़ की यह नई debt funding Ecozen को अपने अगले growth phase में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगी। मजबूत financials, proven products और climate-first vision के साथ Ecozen भारतीय deeptech ecosystem में एक leading player बनता जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Ecozen किस तरह अपनी solar-powered technologies को और ज्यादा किसानों, businesses और global markets तक पहुंचाता है।

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🥗 Urban Harvest का बड़ा कदम

Urban Harvest

B2B फ्रेश-प्रोड्यूस और फूड सप्लाई स्टार्टअप Urban Harvest ने प्रीमियम गॉरमेट फूड ब्रांड Cocosutra का अधिग्रहण कर लिया है। यह डील ₹2.5 करोड़ की all-cash transaction के जरिए पूरी हुई है। इस अधिग्रहण के साथ Urban Harvest अब केवल ताज़ी सब्ज़ियों और कच्चे माल की सप्लाई तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि value-added और high-margin food categories में भी अपनी मौजूदगी मज़बूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

यह कदम खासतौर पर restaurants, cloud kitchens और HoReCa (Hotels, Restaurants, Cafés) सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जहां premium और gourmet food products की मांग लगातार बढ़ रही है।


🍽️ Urban Harvest की रणनीति: High-margin products पर फोकस

Urban Harvest का कहना है कि इस अधिग्रहण से उसके पोर्टफोलियो में ऐसे प्रोडक्ट्स जुड़ेंगे जिनकी margins ज्यादा हैं और जिनकी मांग पहले से ही उसके मौजूदा restaurant ग्राहक आधार में मौजूद है।

कंपनी के अनुसार, Cocosutra के gourmet और premium packaged food products को Urban Harvest के B2B नेटवर्क के जरिए तेज़ी से scale किया जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कंपनी को नए ग्राहक बनाने में ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा, बल्कि मौजूदा demand base का ही बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा।


🔄 Integration process शुरू, 2 महीने में पूरा होगा consolidation

Urban Harvest ने बताया कि Cocosutra के साथ integration process पहले ही शुरू हो चुका है। इसमें:

  • systems का integration
  • teams का alignment
  • और operations का consolidation शामिल है

कंपनी को उम्मीद है कि अगले दो महीनों के भीतर यह पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद Cocosutra पूरी तरह से Urban Harvest के प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन जाएगा, हालांकि ब्रांड की पहचान को बरकरार रखा जाएगा।


🥥 Cocosutra: Premium gourmet segment का जाना-माना नाम

Cocosutra की शुरुआत एक gourmet food brand के रूप में हुई थी और यह premium packaged food category में काम करता है। इसके प्रोडक्ट्स आमतौर पर high-quality ingredients और बेहतर processing standards के लिए जाने जाते हैं, जो premium restaurants और foodservice businesses की जरूरतों को पूरा करते हैं।

अधिग्रहण के बाद Urban Harvest की योजना है कि:

  • Cocosutra के distribution network को बढ़ाया जाए
  • supply chain efficiencies के जरिए pricing को और competitive बनाया जाए
  • और unit economics को बेहतर किया जाए

यह सब Urban Harvest के मौजूदा procurement और logistics network के दम पर किया जाएगा।


📈 अधिग्रहण से पहले ही दिखने लगे नतीजे

Urban Harvest का दावा है कि जैसे ही acquisition process शुरू हुआ, वैसे ही Cocosutra के बिजनेस में तीन गुना (3x) की ग्रोथ देखने को मिली।

कंपनी के मुताबिक, यह ग्रोथ मुख्य रूप से:

  • wider customer base तक पहुंच
  • और backend operations में सुधार की वजह से हुई है

इससे यह साफ संकेत मिलता है कि Urban Harvest का B2B प्लेटफॉर्म Cocosutra जैसे premium ब्रांड को तेज़ी से scale करने में मदद कर सकता है।


🎯 ₹100 करोड़ ब्रांड बनाने का लक्ष्य

Urban Harvest ने एक बड़ा लक्ष्य भी सामने रखा है। कंपनी का कहना है कि वह अगले 24 महीनों में Cocosutra को ₹100 करोड़ revenue brand बनाना चाहती है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी:

  • अपने restaurant और HoReCa relationships का उपयोग करेगी
  • B2B distribution infrastructure को leverage करेगी
  • और demand forecasting व inventory management को और बेहतर बनाएगी

अगर यह योजना सफल होती है, तो Cocosutra B2B gourmet food space में एक बड़ा नाम बन सकता है।


🚚 Urban Harvest का बिजनेस मॉडल

Urban Harvest मुख्य रूप से एक B2B fresh produce और food supplier के तौर पर काम करता है। इसके ग्राहक हैं:

  • restaurants
  • cloud kitchens
  • foodservice businesses

कंपनी ताज़ी सब्ज़ियों, फलों और अन्य food products की supply chain को technology और logistics के जरिए optimize करने पर फोकस करती है। अब Cocosutra के जुड़ने से इसका दायरा केवल raw ingredients तक सीमित न रहकर processed और premium food products तक फैल गया है।


🏷️ Brand identity रहेगी बरकरार

Urban Harvest ने साफ किया है कि Cocosutra की brand positioning में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। ब्रांड अपने मौजूदा नाम और पहचान के साथ ही operate करता रहेगा।

हालांकि, backend से लेकर distribution तक सभी प्रक्रियाएं Urban Harvest के प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएंगी, जिससे scale और efficiency दोनों बढ़ेंगी।


🔍 इंडस्ट्री के लिए क्या मायने रखता है यह सौदा?

यह अधिग्रहण इस बात का संकेत है कि B2B food startups अब:

  • केवल volume-driven low-margin business पर निर्भर नहीं रहना चाहते
  • बल्कि premium और value-added categories में भी मौके तलाश रहे हैं

HoReCa सेगमेंट में gourmet products की मांग बढ़ रही है और ऐसे में Urban Harvest–Cocosutra जैसी डील्स आने वाले समय में और देखने को मिल सकती हैं।


🧠 निष्कर्ष

Urban Harvest द्वारा Cocosutra का अधिग्रहण एक strategic और well-timed move माना जा सकता है। इससे न सिर्फ कंपनी के margins बेहतर होने की उम्मीद है, बल्कि यह उसे B2B food ecosystem में एक ज्यादा diversified और मजबूत player भी बनाता है।

अगर Urban Harvest अपने execution और integration को सही तरीके से संभाल पाता है, तो Cocosutra का ₹100 करोड़ ब्रांड बनने का सपना आने वाले दो सालों में हकीकत बन सकता है।

Read more :🔍 GainBitcoin Crypto Scam ED की जांच तेज,

🔍 GainBitcoin Crypto Scam ED की जांच तेज,

GainBitcoin

क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक GainBitcoin scam में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मुंबई की एक विशेष PMLA कोर्ट ने ED द्वारा दाखिल की गई supplementary chargesheet का संज्ञान लेते हुए कारोबारी राज कुंद्रा को समन जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने कुंद्रा को 19 जनवरी 2026 को पेश होने के लिए कहा है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब ED देशभर में crypto-based financial crimes पर सख्ती बढ़ा रही है। GainBitcoin मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है और इसे भारत का सबसे बड़ा कथित Bitcoin Ponzi scheme माना जाता है।


🪙 क्या है GainBitcoin Scam?

GainBitcoin एक Bitcoin आधारित निवेश स्कीम थी, जिसे कथित तौर पर अमित भारद्वाज और उनके भाई विवेक भारद्वाज चला रहे थे। इस स्कीम में निवेशकों को Bitcoin mining और high returns का लालच दिया गया था।

हालांकि, बाद में यह स्कीम एक बड़े Ponzi operation के रूप में सामने आई, जिसमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जा रहा था। अनुमान है कि इस घोटाले में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अमित भारद्वाज का जनवरी 2022 में निधन हो चुका है, लेकिन ED की जांच अभी भी जारी है और इससे जुड़े कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।


👤 राज कुंद्रा पर ED का क्या आरोप है?

ED के मुताबिक, राज कुंद्रा इस घोटाले से उत्पन्न पैसों के beneficiary रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:

  • 2017 में मुख्य आरोपी की ओर से कुंद्रा को 285 Bitcoins मिले थे
  • ये Bitcoins कथित तौर पर यूक्रेन में Bitcoin mining operation स्थापित करने के लिए दिए गए थे

हालांकि, जांच एजेंसी का कहना है कि यह mining project कभी शुरू ही नहीं हुआ।


📂 डॉक्यूमेंट्स और Wallet Details पर सवाल

ED का आरोप है कि राज कुंद्रा:

  • संबंधित crypto wallet addresses उपलब्ध नहीं करा पाए
  • और यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं दे सके कि वे केवल एक facilitator थे

कुंद्रा की ओर से यह दलील दी गई है कि उनकी भूमिका सिर्फ एक मध्यस्थ की थी और उन्हें इस स्कीम की धोखाधड़ी के बारे में जानकारी नहीं थी। लेकिन ED का कहना है कि उपलब्ध सबूत कुछ और ही कहानी बताते हैं।


⚖️ “Beneficial Owner” क्यों मान रही है ED?

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला है कि राज कुंद्रा का उन Bitcoins पर नियंत्रण (control) था। इसी आधार पर ED ने उन्हें Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत “beneficial owner” माना है।

आज के मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से, इन 285 Bitcoins की कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जो इस मामले को और गंभीर बनाती है।


🏠 पहले भी हो चुकी है संपत्ति जब्ती

यह पहला मौका नहीं है जब ED ने इस मामले में राज कुंद्रा के खिलाफ कार्रवाई की हो। इससे पहले एजेंसी:

  • 97 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर चुकी है
  • इनमें मुंबई का एक रिहायशी प्रॉपर्टी और crypto assets शामिल हैं

ये सभी जब्तियां GainBitcoin scam से जुड़े पैसों के कथित उपयोग के आधार पर की गई थीं।


🗣️ राज कुंद्रा की सफाई

राज कुंद्रा ने लगातार इन आरोपों से इनकार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका कहना है कि:

  • उन्हें GainBitcoin स्कीम की fraudulent nature की जानकारी नहीं थी
  • वे किसी भी तरह के money laundering में शामिल नहीं रहे

हालांकि, ED का दावा है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और डिजिटल सबूतों के आधार पर कुंद्रा की भूमिका केवल एक passive participant की नहीं लगती।


🚨 Crypto Crimes पर ED की सख्ती

राज कुंद्रा को जारी किया गया कोर्ट समन यह दिखाता है कि ED अब crypto-related financial crimes को लेकर और अधिक आक्रामक रुख अपना रही है।

GainBitcoin केस उन चुनिंदा मामलों में से है, जिसमें:

  • कई राज्यों में जांच चली
  • कई आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई
  • और बड़े पैमाने पर assets attach किए गए

यह केस भारत में crypto regulation और enforcement की दिशा में भी एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।


🔮 आगे क्या?

अब सभी की नजरें 19 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब राज कुंद्रा को PMLA कोर्ट में पेश होना है। कोर्ट में उनकी पेशी के बाद:

  • जांच की दिशा और स्पष्ट हो सकती है
  • और ED आगे की कानूनी कार्रवाई तय कर सकती है

GainBitcoin scam अभी भी पूरी तरह बंद मामला नहीं है और आने वाले समय में इससे जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।


🧠 निष्कर्ष

GainBitcoin क्रिप्टो घोटाला भारत के डिजिटल फाइनेंस इतिहास का सबसे बड़ा विवादित अध्याय बन चुका है। राज कुंद्रा को कोर्ट से जारी समन इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसियां अब किसी भी हाई-प्रोफाइल नाम को लेकर नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं।

यह मामला न सिर्फ crypto investors के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत में money laundering और crypto fraud पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।

Read more :💄 BellaVita ने किया बड़ा turnaround FY25 में ₹25 करोड़ का मुनाफा,

💄 BellaVita ने किया बड़ा turnaround FY25 में ₹25 करोड़ का मुनाफा,

BellaVita

गुरुग्राम स्थित beauty और personal care brand BellaVita ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹25 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा turnaround है, क्योंकि FY24 में BellaVita को ₹40 करोड़ का नुकसान हुआ था।

कंपनी की यह मजबूत वापसी तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर cost efficiency की वजह से संभव हो पाई है। Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, BellaVita का operating revenue FY25 में 2.5 गुना बढ़कर ₹456 करोड़ पहुंच गया, जो FY24 में ₹184 करोड़ था।


📈 रेवेन्यू ग्रोथ ने बदली तस्वीर

BellaVita की कमाई का मुख्य स्रोत उसके fragrances, skincare और personal care products हैं। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को:

  • Online marketplaces
  • और अपने direct-to-consumer (D2C) channels

के ज़रिए बेचती है। FY25 में कंपनी की पूरी की पूरी कमाई इन्हीं प्रोडक्ट्स की बिक्री से आई, यानी कोई secondary revenue stream नहीं थी।

तेज़ी से बढ़ती brand recognition, aggressive online presence और perfumes की मजबूत demand ने BellaVita को FY25 में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।


🧴 Perfume brand होने का असर: Raw material cost सबसे बड़ा खर्च

BellaVita एक perfume-dominated brand है और यही वजह है कि इसका cost of materials सबसे बड़ा expense बना रहा। FY25 में:

  • Raw material cost कुल खर्च का 39% रहा
  • यह लागत ₹64 करोड़ से बढ़कर ₹171 करोड़ पहुंच गई, यानी 2.7 गुना की बढ़त

इसके बावजूद कंपनी ने अपने खर्चों को कंट्रोल में रखा, जिससे profitability हासिल करना संभव हुआ।


📢 Advertising, commission और logistics पर खर्च

Beauty और personal care इंडस्ट्री में marketing एक बड़ा हथियार होती है और BellaVita भी इससे अलग नहीं है। FY25 में:

  • Advertising expenses कुल खर्च का 21% रहे
  • यह खर्च 37% बढ़कर ₹90 करोड़ हो गया

इसके अलावा:

  • Commission expenses बढ़कर ₹64 करोड़
  • Shipping और logistics cost ₹42 करोड़ रही

इन आंकड़ों से साफ है कि BellaVita ने growth के लिए खर्च किया, लेकिन यह खर्च revenue growth के मुकाबले संतुलित रहा।


👥 Employees और अन्य खर्च

FY25 में BellaVita के:

  • Employee benefit expenses ₹42 करोड़ रहे
  • Other overheads ₹28.5 करोड़ रहे

कुल मिलाकर, कंपनी का total expense FY25 में 92% बढ़कर ₹437.5 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹228 करोड़ था।

हालांकि खर्च बढ़े, लेकिन रेवेन्यू की रफ्तार उससे कहीं तेज रही — और यही profitability की सबसे बड़ी वजह बनी।


💰 घाटे से मुनाफे तक का सफर

FY25 में BellaVita ने:

  • ₹25 करोड़ का net profit दर्ज किया
  • जबकि FY24 में ₹40 करोड़ का नुकसान हुआ था

इस दौरान कंपनी का EBITDA margin 4.61% रहा, जो beauty D2C space के लिहाज से एक healthy संकेत माना जा सकता है।


📊 Unit economics में साफ सुधार

BellaVita की unit economics में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है।

  • FY25 में कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹0.96 खर्च किए
  • FY24 में यही आंकड़ा ₹1.24 था

यह दिखाता है कि BellaVita अब scale के साथ efficiency भी हासिल कर रही है, जो किसी भी D2C brand के लिए critical होता है।


🏦 Balance sheet की स्थिति

Balance sheet के मोर्चे पर भी BellaVita की स्थिति मजबूत हुई है:

  • Current assets बढ़कर ₹119 करोड़ हो गए
  • Cash और bank balance ₹4 करोड़ रहा,
    • जो FY24 में ₹1 करोड़ था

हालांकि cash reserves अभी बहुत बड़े नहीं हैं, लेकिन profitability आने से आगे की स्थिति और बेहतर हो सकती है।


💸 अब तक कितनी funding जुटा चुकी है BellaVita?

TheKredible के मुताबिक, BellaVita अब तक कुल $58 मिलियन (करीब ₹480 करोड़) की funding जुटा चुकी है।
कंपनी के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Sanjeev Kumar Taparia
  • Ashutosh Taparia

इन निवेशकों का भरोसा और लगातार operational push कंपनी के turnaround में अहम भूमिका निभा रहा है।


🌟 FY26 के लिए बड़ी चुनौती और बड़ा मौका

BellaVita की profitability एक अहम milestone है, खासकर ऐसे सेक्टर में जहां कई brands ने सिर्फ expensive advertising के दम पर topline खरीदी है।

₹500 करोड़ के करीब रेवेन्यू और मुनाफे के साथ growth बनाए रखना आसान नहीं होगा, लेकिन अगर BellaVita:

  • advertising spends को smart तरीके से manage करती है
  • product innovation जारी रखती है
  • और brand pull को मजबूत बनाती है

तो यह आने वाले सालों में India की सबसे मजबूत personal care brands में से एक बन सकती है।


🏁 निष्कर्ष

FY25 में BellaVita ने साबित कर दिया है कि:

  • तेज growth और profitability साथ-साथ चल सकते हैं
  • D2C beauty brands सिर्फ burn नहीं, बल्कि return भी दे सकते हैं

₹456 करोड़ की revenue, ₹25 करोड़ का मुनाफा और बेहतर unit economics के साथ BellaVita अब सिर्फ एक fast-growing startup नहीं, बल्कि एक serious consumer brand बन चुकी है। आने वाले सालों में यह brand Indian personal care space में और बड़ा नाम बन सकता है।

Read more :🏥 Even Healthcare ने जुटाए $20 मिलियन,

🏥 Even Healthcare ने जुटाए $20 मिलियन,

Even Healthcare

बेंगलुरु स्थित managed care provider Even Healthcare ने एक नए फंडिंग राउंड में $20 मिलियन (करीब ₹165 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व कंपनी के मौजूदा निवेशकों Lachy Groom और Alpha Wave ने किया, जबकि Sharrp Ventures ने भी इसमें भागीदारी की है।

यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब Even Healthcare ने महज 15 महीने पहले अक्टूबर 2024 में $30 मिलियन की Series A फंडिंग जुटाई थी। नए निवेश के साथ कंपनी की कुल फंडिंग $70 मिलियन तक पहुंच गई है और बीते एक साल में इसका valuation दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।


💰 कहां इस्तेमाल होगा नया फंड?

Even Healthcare ने बताया कि इस ताजा पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से दो बड़े उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

  • बेंगलुरु में अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के लिए
  • अपने managed-care hospital model को बड़े पैमाने पर स्केल करने के लिए

कंपनी का मानना है कि भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में सिर्फ नए अस्पताल बनाने की नहीं, बल्कि care delivery के तरीके को बदलने की जरूरत है, और यही Even का फोकस है।


🧠 Even Healthcare का अलग हेल्थकेयर मॉडल

2020 में स्थापित Even Healthcare एक membership-based healthcare model पर काम करता है। इसमें मरीजों को एक तय शुल्क के बदले:

  • Primary care (डॉक्टर कंसल्टेशन)
  • Diagnostics (टेस्ट और जांच)
  • Hospital services

तीनों सुविधाएं एक ही integrated सिस्टम के तहत मिलती हैं।

Even का मॉडल पारंपरिक अस्पतालों से काफी अलग है। जहां ज्यादातर अस्पताल:

  • ज्यादा admissions
  • लंबे hospital stay
  • ज्यादा procedures

पर ध्यान देते हैं, वहीं Even Healthcare का फोकस है:
👉 continuity of care और patient recovery


🔄 Admission नहीं, Recovery है प्राथमिकता

Even Healthcare में care teams सिर्फ एक consultation या surgery तक सीमित नहीं रहते।

  • वही टीम diagnosis से लेकर
  • hospitalisation
  • और discharge के बाद home recovery तक मरीज की जिम्मेदारी संभालती है

इसका सीधा फायदा यह होता है कि:

  • अनावश्यक admissions कम होते हैं
  • मरीज जल्दी recover करता है
  • और complications की संभावना घटती है

कंपनी का दावा है कि उसका मॉडल patient outcomes को बेहतर बनाता है, न कि सिर्फ hospital occupancy बढ़ाने पर केंद्रित रहता है।


🏨 पहला अस्पताल, 6 महीने में break-even

Even Healthcare ने मई 2025 में अपना पहला अस्पताल लॉन्च किया था। कंपनी के अनुसार, यह अस्पताल लॉन्च के सिर्फ छह महीने के भीतर operating break-even पर पहुंच गया।

यह उपलब्धि भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर में खास मानी जा रही है, जहां नए अस्पतालों को profitability तक पहुंचने में आमतौर पर कई साल लग जाते हैं।


📊 डेटा से साबित हो रहा मॉडल का असर

Even Healthcare ने अपने नेटवर्क में मरीजों के outcomes को ट्रैक किया है और कुछ अहम आंकड़े साझा किए हैं:

  • 350 से ज्यादा surgeries के बाद
    • 0% unplanned 30-day readmissions
  • Post-operative infections: शून्य
  • 200 से ज्यादा hospitalisations avoided,
    • monitored home recovery की वजह से
  • Average length of hospital stay लगभग 40% कम,
    • जब इसे traditional hospitals से तुलना की गई

ये आंकड़े दिखाते हैं कि Even का मॉडल न सिर्फ cost-effective है, बल्कि clinically भी बेहतर outcomes दे रहा है।


🏥 भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में क्यों जरूरी है ऐसा मॉडल?

भारत में हेल्थकेयर की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं:

  • Fragmented care
  • Rising costs
  • Overcrowded hospitals
  • Poor post-discharge follow-up

Even Healthcare का मॉडल इन सभी समस्याओं को address करने की कोशिश करता है।

  • मरीज को अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत नहीं
  • डॉक्टर और care team accountable रहती है
  • Recovery को hospital के बाहर भी monitor किया जाता है

यह approach खासतौर पर urban working population और families के लिए आकर्षक बन रही है।


📈 निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ रहा है?

निवेशकों के लिए Even Healthcare तीन वजहों से मजबूत दांव बनता दिख रहा है:

  1. Clear differentiation – traditional hospital chains से अलग मॉडल
  2. Early proof of profitability – पहला अस्पताल जल्दी break-even
  3. Scalable structure – membership + managed care

इसी वजह से मौजूदा निवेशकों ने दोबारा कंपनी पर भरोसा जताया है और valuation में तेज उछाल देखने को मिला है।


🔮 आगे क्या है Even Healthcare की रणनीति?

आने वाले समय में Even Healthcare:

  • बेंगलुरु में और managed-care hospitals लॉन्च करेगा
  • Membership base को तेजी से बढ़ाएगा
  • Data और outcomes के जरिए insurers और employers के साथ partnerships मजबूत करेगा

कंपनी का लक्ष्य सिर्फ एक hospital chain बनना नहीं, बल्कि भारत में healthcare delivery को fundamentally बदलना है।


🏁 निष्कर्ष

Even Healthcare की $20 मिलियन की ताजा फंडिंग यह दिखाती है कि निवेशक अब ऐसे हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जो:

  • Sustainable हों
  • Patient-centric हों
  • और measurable outcomes दिखा सकें

अगर Even अपने मॉडल को बड़े स्तर पर replicate करने में सफल रहता है, तो यह भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर के लिए एक नया benchmark सेट कर सकता है।

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