🎮 SuperGaming ने Web3 और Global Expansion पर किया बड़ा दांव!

SuperGaming

भारत की प्रमुख गेमिंग कंपनी SuperGaming ने अपने Series B फंडिंग राउंड में $15 मिलियन (लगभग ₹125 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Skycatcher और Steadview Capital ने किया, जो इसके मौजूदा निवेशक भी हैं। इस राउंड में a16z’s Speedrun, Bandai Namco के 021 Fund, Polygon Ventures, Neowiz, GFR Fund, IVC Japan, Loud.GG जैसे नामचीन निवेशकों और Polygon के सह-संस्थापक संदीप नेलवाल जैसे एंजल इन्वेस्टर्स ने भी भाग लिया।


🌍 इंडस गेम का इंटरनेशनल लॉन्च, सबसे पहले लैटिन अमेरिका में

SuperGaming अपने प्रमुख बैटल रॉयल गेम “Indus” का अंतरराष्ट्रीय लॉन्च करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत लैटिन अमेरिका से होगी, जहां कंपनी ने ब्राज़ील की ई-स्पोर्ट्स कंपनी Loud.GG के साथ साझेदारी की है। कंपनी ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि इस फंड का उपयोग इंटरनेशनल मार्केट में विस्तार और गेम डेवेलपमेंट एवं पब्लिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।


📈 वैल्यूएशन $100 मिलियन के पार

2017 में नवनीत वरैच, संकते नाधानी, अविनाश पांडे, श्रीजीत जयनथन और रोबी जॉन द्वारा स्थापित Pune-based SuperGaming इससे पहले 2021 में Series A राउंड में $5.5 मिलियन जुटा चुकी है। इस नए निवेश के बाद, कंपनी ने दावा किया है कि उसका वैल्यूएशन $100 मिलियन (₹835 करोड़ से अधिक) को पार कर गया है।


🎯 लोकप्रिय गेम्स और SuperPlatform

SuperGaming के पोर्टफोलियो में कई हिट मोबाइल गेम्स शामिल हैं, जैसे:

  • MaskGun
  • Tower Conquest
  • Silly Royale

इन सभी को मिलाकर अब तक 200 मिलियन से ज्यादा इंस्टॉल हो चुके हैं। कंपनी का अपना रियल-टाइम मल्टीप्लेयर प्लेटफॉर्म भी है जिसे SuperPlatform कहा जाता है, जो Web2 और Web3 दोनों यूज़र्स को सपोर्ट करता है।


🔗 Web3 की दुनिया में SuperGaming की एंट्री

Web3 गेमिंग को ध्यान में रखते हुए, SuperGaming ने B3 GameChain के साथ साझेदारी की है। B3 एक Layer-3 ब्लॉकचेन है जो Base (Coinbase द्वारा इनक्यूबेटेड Ethereum Layer-2 नेटवर्क) पर बनाया गया है। इस साझेदारी से SuperGaming अब Web2 और Web3 दोनों तरह के खिलाड़ियों के लिए अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।

👉 गेमर्स के लिए इसका मतलब है:

  • Asset continuity (गेम एसेट्स एक से दूसरे गेम में ले जाना)
  • Interoperable progression (एक ही अकाउंट से कई गेम्स में प्रगति)
  • Digital ownership (डिजिटल आइटम्स पर मालिकाना हक)

SuperGaming का लोकप्रिय गेम Silly Royale अब B3 पर लाइव है और Web3 की इन सभी खूबियों को सपोर्ट करता है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में ₹43.4 करोड़ की कमाई

मार्च 2024 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY24) में SuperGaming ने:

  • ₹43.4 करोड़ की राजस्व कमाई
  • और ₹3.9 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया

यह मुनाफा Web3 में निवेश और नए बाजारों में प्रवेश के बावजूद आया है, जो कंपनी की सस्टेनेबल ग्रोथ रणनीति को दर्शाता है।


🕹️ भारत में गेमिंग इंडस्ट्री का भविष्य उज्ज्वल

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गेमिंग मार्केट FY29 तक $9.2 बिलियन (₹76,000 करोड़ से अधिक) तक पहुंच सकता है। SuperGaming जैसी कंपनियां इस ग्रोथ की अगुआई कर रही हैं, जो इनोवेशन, तकनीक और गेमर्स की जरूरतों को समझकर गेमिंग का भविष्य गढ़ रही हैं।


🔮 आगे का रास्ता: भारत से ग्लोबल तक

SuperGaming की रणनीति अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अब यह कंपनी:

  • लैटिन अमेरिका, MENA और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे इंटरनेशनल मार्केट्स को टारगेट कर रही है।
  • Web3 के ज़रिए गेमिंग में ट्रांसपेरेंसी और डिजिटल ओनरशिप को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
  • इंटरनेशनल पार्टनरशिप्स और इनोवेटिव टेक्नोलॉजी के ज़रिए गेमिंग इंडस्ट्री को एक नई दिशा देने की कोशिश कर रही है।

🧠 निष्कर्ष

SuperGaming ने Series B फंडिंग के साथ न केवल अपना वेल्यूएशन $100 मिलियन से ऊपर पहुंचाया है, बल्कि एक स्पष्ट मैसेज दिया है कि भारत में बनी कंपनियां भी वैश्विक स्तर पर गेमिंग का भविष्य तय कर सकती हैं। Web3 में एंट्री, इंडस का इंटरनेशनल लॉन्च और मजबूत वित्तीय परफॉर्मेंस इस बात का प्रमाण हैं कि SuperGaming अब गेम चेंजर बन चुकी है।

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Read more : Bluestone का IPO छोटा हुआ, घाटा 56% बढ़ा

💍 Bluestone का IPO छोटा हुआ, घाटा 56% बढ़ा

Bluestone

प्रमुख आभूषण ब्रांड Bluestone ने अपने आरंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) का आकार घटा दिया है। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के अनुसार, यह कटौती प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों हिस्सों में की गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में Bluestone का घाटा 56% बढ़ गया, जो कंपनी की कमाई में हुई 40% की वृद्धि से कहीं अधिक है।


💰 राजस्व में 40% की वृद्धि, लेकिन घाटा और तेज़

Bluestone की ऑपरेटिंग इनकम FY25 में ₹1,770 करोड़ रही, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 के ₹1,266 करोड़ के मुकाबले 40% अधिक है। कंपनी के लिए आय का एकमात्र स्रोत रहा — हीरे, सोने, प्लेटिनम, मणि और मोती के आभूषणों की बिक्री। FY25 में औसत ऑर्डर वैल्यू (AOV) ₹47,671 रही।

यह ग्रोथ स्टोर मैच्योरिटी और विस्तारित प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के कारण आई है। मार्च 2025 तक Bluestone के देशभर में 275 स्टोर थे जो 117 शहरों और 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।


🌐 ऑनलाइन बिक्री का योगदान केवल 6.66%

ऑनलाइन बिक्री का कंपनी की कुल बिक्री में सिर्फ 6.66% योगदान रहा, बाकी की कमाई स्टोर्स और अन्य चैनलों से हुई।


📈 खर्चों में भारी उछाल

  • Bluestone के मटेरियल कॉस्ट में 46% की वृद्धि हुई, जो ₹1,098 करोड़ तक पहुंच गई। यह कंपनी के कुल खर्चों का 54% है।
  • कर्मचारी लाभ खर्च ₹203 करोड़ रहा, जिसमें 47% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • विज्ञापन और प्रचार खर्च ₹159 करोड़ रहा, जो FY24 से 28% अधिक है।
  • अन्य ऑपरेशनल और वित्तीय खर्चों ने ₹643 करोड़ जोड़े।

कुल मिलाकर, Bluestone के कुल खर्च FY25 में 42% बढ़कर ₹2,050 करोड़ हो गए, जो FY24 में ₹1,446 करोड़ थे।


📉 नेट घाटा 56% बढ़कर ₹222 करोड़ हुआ

खर्चों की तेजी से वृद्धि के चलते Bluestone का नेट लॉस FY25 में ₹222 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY24 में ₹142 करोड़ था। हालांकि, कंपनी ने ₹133 करोड़ का पॉजिटिव EBITDA दर्ज किया और EBITDA मार्जिन 7.27% रहा।

हर ₹1 की ऑपरेटिंग इनकम के लिए कंपनी ने ₹1.16 खर्च किए, जो दर्शाता है कि कंपनी अभी भी आर्थिक रूप से कुशलता पाने की प्रक्रिया में है।


💵 ब्लूस्टोन के पास हैं मजबूत संपत्तियाँ

मार्च 2025 तक Bluestone के पास ₹2,130 करोड़ की करेंट एसेट्स थीं, जिनमें से ₹187 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस में थे। यह कंपनी की लिक्विडिटी स्थिति को दर्शाता है।


🤝 FY25 में दो रणनीतिक निवेश

  1. Bluestone ने Ethereal House Private Limited (EHPL) में ₹17 करोड़ में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी।
  2. साथ ही Redefine Fashion Private Limited में ₹11 करोड़ के शेयर खरीदे।

हालांकि, EHPL के पास कोई ऑपरेशनल बिजनेस या महत्वपूर्ण एसेट्स नहीं थे। इसलिए इस अधिग्रहण को कॉर्पोरेट कंट्रोल ट्रांजैक्शन माना गया, और इसमें गुडविल या एसेट रिवैल्यूएशन शामिल नहीं था।

इस कारण, FY25 के आंकड़े कंसॉलिडेटेड हैं जबकि FY24 के आंकड़े स्टैंडअलोन बैलेंस शीट को दर्शाते हैं।


📉 IPO घटाने का कारण क्या?

Bluestone ने अभी अपने IPO के कटौती का कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते घाटे, ऑनलाइन बिक्री की सीमित हिस्सेदारी, और IPO के प्रति निवेशकों की सतर्कता इसके पीछे के प्रमुख कारण हो सकते हैं।


📊 निष्कर्ष

हालांकि Bluestone ने FY25 में राजस्व के स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन तेजी से बढ़ता हुआ घाटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। कंपनी ने एक सकारात्मक संकेत के रूप में EBITDA लाभ और संपत्ति स्थिरता दिखाई है, लेकिन ऑपरेशनल दक्षता और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर अभी और सुधार की ज़रूरत है।

IPO में की गई कटौती से यह संकेत मिलता है कि कंपनी खुद भी अपने मूल्यांकन को लेकर सतर्क है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Bluestone कैसे डिजिटल बिक्री को मजबूत, खर्च नियंत्रण और लाभप्रदता के रास्ते पर आगे बढ़ती है।


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🏥 IPO से पहले Practo की ऐतिहासिक वापसी

Practo

✍️ विशेष रिपोर्ट | www.FundingRaised.in

भारत की प्रमुख डिजिटल हेल्थटेक कंपनी Practo ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में पहली बार पूरे वर्ष का ऑपरेटिंग EBITDA प्रॉफिट दर्ज किया है, जो उसके आने वाले IPO से पहले एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। कंपनी ने अमेरिका में पायलट लॉन्च कर दिया है, जहां 50 से अधिक ग्राहक पहले ही जुड़ चुके हैं।

📊 घाटे से मुनाफे की ओर Practo की उड़ान

Bengaluru स्थित Practo ने FY25 में ₹15 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष FY24 में उसे ₹17 करोड़ का घाटा हुआ था। इसका मतलब है कि Practo ने एक साल के अंदर ही खुद को लाभ की स्थिति में पहुंचा दिया।

  • FY25 में कंपनी की ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹234 करोड़ रही।
  • कुल GMV (Gross Merchandise Value) ₹3,500 करोड़ पर स्थिर रही।
  • कंपनी ने सकारात्मक कैश फ्लो भी दर्शाया — यह संकेत है कि कंपनी अब पूंजी के प्रबंधन में सक्षम हो चुकी है।

🧠 टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हेल्थकेयर: AI से स्मार्ट ट्रीटमेंट

Practo की सफलता के पीछे एक बड़ा कारण है उसका टेक्नोलॉजी पर फोकस। कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इंटीग्रेट किया है जिससे:

  • मरीजों को जल्दी और सटीक इलाज तक पहुंच मिले,
  • डॉक्टरों को बेहतर डेटा और स्मार्ट वर्कफ्लो उपलब्ध हो।

Practo के अनुसार, कंपनी के पास 4 करोड़ से ज्यादा स्ट्रक्चर्ड डेटा पॉइंट्स हैं जिनके ज़रिए वह AI आधारित हेल्थ इनसाइट्स दे पा रही है।

📈 तीन सालों में 109% सुधार

FY22 में Practo को ₹162 करोड़ का घाटा हुआ था। तीन साल बाद FY25 में उसने ₹15 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया। यानी 109% का सुधार — यह भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक प्रेरणा है।

वर्षEBITDAराजस्वGMVलाभ/घाटा
FY22₹162 करोड़ घाटा
FY24₹-17 करोड़₹—₹—घाटा
FY25₹15 करोड़ मुनाफा₹234 करोड़₹3,500 करोड़लाभ

🏥 Care Navigation मॉडल बना सफलता की कुंजी

Practo की कोर स्ट्रैटेजी है ‘Care Navigation’ — इसमें मरीजों को सही डॉक्टर, सही इलाज और सही समय पर कनेक्ट किया जाता है।

  • ग्रॉस मार्जिन FY25 में 30% CAGR से बढ़ा।
  • Contribution Margin FY24 में 40% से बढ़कर FY25 में 46% हो गया।

📢 Patient Outcome रिपोर्ट: भारत में पहली बार

Practo ने भारत की पहली डिजिटल हेल्थ फर्म बनकर Patient Reported Outcome Metrics (PROMs) जारी किए हैं:

  • 78% टेलीमेडिसिन यूज़र ने 3 हफ्ते में रिकवरी की सूचना दी।
  • 80% फिजिकल कंसल्टेशन यूज़र ने भी रिकवरी की पुष्टि की।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि Practo की सेवाएं सिर्फ डिजिटल नहीं, बल्कि प्रभावी और नतीजादायक भी हैं।

🌍 UAE और USA में बढ़ता Practo

मई 2025 में Practo ने अपना कंज़्यूमर प्लेटफॉर्म UAE में लॉन्च किया:

  • कुछ ही हफ्तों में 50,000 एक्टिव यूज़र्स जुड़ गए।
  • ₹100 करोड़ का GMV रन रेट भी पार कर लिया।

अब Practo ने अमेरिका में पायलट लॉन्च भी कर दिया है। शुरुआती फेज़ में ही 50-60 पेड कस्टमर साइन अप कर चुके हैं। ये आंकड़े कंपनी की ग्लोबल स्ट्रैटेजी की मजबूती को दर्शाते हैं।

🌐 अंतरराष्ट्रीय विस्तार का लक्ष्य

Practo का उद्देश्य है कि:

  • अगले कुछ वर्षों में इंटरनेशनल रेवेन्यू को दोगुना किया जाए,
  • साथ ही प्रॉफिटेबिलिटी और स्केलेबिलिटी बनाए रखी जाए।

🔚 निष्कर्ष: Practo IPO के लिए तैयार?

Practo का मुनाफा, AI इंटीग्रेशन, मरीजों के सकारात्मक अनुभव और इंटरनेशनल विस्तार ये सभी संकेत देते हैं कि कंपनी अब IPO के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि Practo इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो वह भारत की सबसे बड़ी ग्लोबल हेल्थटेक कंपनियों में शुमार हो सकता है।


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✍️ रिपोर्ट: FundingRaised Hindi Team | July 2025

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🚀 IPO से पहले फाउंडर्स का बड़ा दांव

IPO

भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स इस साल संभावित IPO से पहले अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने में जुटे हुए हैं। यह चलन इस समय कई लेट-स्टेज स्टार्टअप्स में देखा जा रहा है, जहां फाउंडर्स बढ़ा हुआ आत्मविश्वास और कंट्रोल की इच्छा दिखा रहे हैं।

SEBI के नए रेगुलेशंस के बाद यह ट्रेंड और भी तेजी से उभर रहा है, जिससे अब फाउंडर्स को पब्लिक लिस्टिंग से पहले ESOP का उपयोग करना और हिस्सेदारी बढ़ाना आसान हो गया है।


🟡 Lenskart: IPO से पहले Peyush Bansal की बड़ी वापसी

सबसे चर्चित उदाहरण Lenskart का है, जहां को-फाउंडर Peyush Bansal ने Rs 222 करोड़ में 2.5% हिस्सेदारी वापस खरीदी है। यह हिस्सेदारी उन्होंने SoftBank और Chiratae जैसे निवेशकों से खरीदी है।

  • 📉 सबसे खास बात: यह डील $1 बिलियन वैल्यूएशन पर हुई, जबकि कंपनी की पिछली प्राइवेट मार्केट वैल्यूएशन $10 बिलियन थी।
  • 🎯 यह कदम Lenskart के संभावित IPO फाइलिंग से ठीक पहले आया है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े फाउंडर-बायबैक ट्रांजेक्शनों में से एक बन गया है।

🏗️ Zetwerk: फाउंडर्स ने लिया कर्ज और बढ़ाई हिस्सेदारी

Zetwerk के को-फाउंडर्स Amrit Acharya और Srinath Ramakkrushnan ने ₹600 करोड़ का व्यक्तिगत कर्ज लेकर कंपनी में निवेश किया है। इस कदम से उनकी सम्मिलित हिस्सेदारी में करीब 2% की बढ़ोतरी हुई है।

📌 यह दर्शाता है कि फाउंडर्स IPO से पहले अपने भरोसे को दर्शाने के लिए वित्तीय जोखिम उठाने को तैयार हैं।


📺 Amagi और 📱 InMobi: DRHP से पहले फाउंडर सपोर्ट

Amagi में भी फाउंडर्स ने ₹9 करोड़ मूल्य के शेयर्स खरीदे हैं। वहीं InMobi ने ₹32 करोड़ जुटाए हैं जो फाउंडर्स Naveen Tewari, Abhay Singhal, Piyush Shah और Mohit Saxena द्वारा लगाए गए हैं। इसमें Singapore आधारित निवेशक Vatera Pte Ltd भी शामिल हैं।

दोनों कंपनियां IPO की तैयारी कर रही हैं और जल्द ही DRHP दाखिल करने की योजना में हैं


📦 Meesho: ESOP से बढ़ाया फाउंडर होल्डिंग

Meesho के फाउंडर्स Vidit Aatrey और Sanjeev Barnwal ने ESOP के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी में इज़ाफा किया है।

  • 📈 Aatrey को 20.65 लाख शेयर
  • 📈 Barnwal को 6.59 लाख शेयर

SEBI के जून में आए बदलावों के बाद यह allotment और आसान हुआ, जिससे फाउंडर्स के लिए हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।


📜 पुराना ट्रेंड, नया जोश: Zomato, Delhivery और Swiggy का उदाहरण

फाउंडर्स के शेयरहोल्डिंग बढ़ाने का यह ट्रेंड नया नहीं है:

  • 🥗 Zomato (2021): Deepinder Goyal को IPO से पहले 368 मिलियन स्टॉक ऑप्शंस दिए गए।
  • 📦 Delhivery (2021): Sahil Barua और Kapil Bharati को ₹25 करोड़ के शेयर्स अलॉट किए गए।
  • 💻 PB Fintech: Yashish Dahiya और Alok Bansal को 1.02 करोड़ शेयर्स दिए गए।
  • 🍔 Swiggy (2023): $271 मिलियन का ESOP प्लान, जिसमें $200 मिलियन सिर्फ फाउंडर Sriharsha Majety के लिए था।

Swiggy ने अपना IPO नवंबर 2024 में लॉन्च किया था।


💹 क्यों फाउंडर्स कर रहे हैं निवेश?

  • 🎯 मार्केट को सिग्नल देना: जब फाउंडर्स खुद निवेश करते हैं, तो यह निवेशकों को भरोसा देता है कि कंपनी IPO के बाद भी परफॉर्म करेगी।
  • 🔁 कंट्रोल बनाए रखना: IPO के बाद फाउंडर हिस्सेदारी कम हो जाती है। इससे पहले उन्हें हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलता है।
  • 💰 पहले से हो चुकी लिक्विडिटी: कई फाउंडर्स ने पहले ही बड़े अमाउंट में लिक्विडिटी पा ली थी, जिससे उनके पास दोबारा निवेश करने के लिए पर्याप्त पूंजी है।

🤔 लेकिन ये चाल हर बार काम नहीं करती

IPO के बाद स्टॉक की वैल्यू गिरने पर फाउंडर निवेश आमतौर पर ज्यादा असर नहीं डालता। साथ ही, जो फाउंडर्स IPO के बाद ऊंची कीमत पर निवेश करते हैं, वो अब भी बहुत कम उदाहरण हैं।

कंपनी के ग्रोथ फेज के आखिरी पायदान पर यह निवेश बाजार को मजबूत सिग्नल देता है — खासकर Lenskart जैसे यूनिकॉर्न IPOs के लिए।


📌 निष्कर्ष: IPO की तैयारी में फाउंडर्स का आत्मविश्वास झलक रहा

इन सभी उदाहरणों से साफ है कि भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स IPO से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने के मूड में हैं। वे न सिर्फ अपने निवेश से भरोसा दिखा रहे हैं, बल्कि मार्केट को यह संकेत दे रहे हैं कि वे अपने विज़न और कंपनी की दिशा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

📊 फाउंडर रिइनवेस्टमेंट का यह दौर हमें बताता है:

  • IPO सिर्फ पैसे जुटाने का नहीं, बाज़ार में फाउंडर विश्वास का भी इम्तिहान है।
  • निवेशकों के लिए यह संकेत है कि फाउंडर्स अब भी “स्किन इन द गेम” रखते हैं।
  • आने वाले महीनों में और स्टार्टअप्स इस राह पर चल सकते हैं।

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Read more : TBO का Q1 FY26 रेवेन्यू में 22% की उछाल,

✈️ TBO का Q1 FY26 रेवेन्यू में 22% की उछाल,

TBO

गुरुग्राम स्थित ट्रैवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म Travel Boutique Online (TBO) ने वित्तीय वर्ष FY26 की पहली तिमाही (Q1) के अनऑडिटेड नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान 22% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, हालांकि मुनाफा लगभग स्थिर बना रहा।

कंपनी की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹511 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 में ₹418 करोड़ थी। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त रिपोर्ट में दर्ज है।


📈 रेवेन्यू ग्रोथ: होटल और पैकेज बुकिंग बना प्रमुख स्त्रोत

TBO की रेवेन्यू ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान होटल और ट्रैवल पैकेज बुकिंग से आया, जो कि कंपनी की कुल आय का 83% हिस्सा बना।

  • 🏨 होटल व पैकेज बुकिंग से आय: ₹423 करोड़ (32% YoY वृद्धि)
  • ✈️ एयर टिकटिंग से आय: ₹78 करोड़
  • 💼 अन्य सेवाएं (एड-ऑन आदि): ₹10 करोड़

Q1 FY25 में होटल और पैकेज बुकिंग से ₹321 करोड़ की आय हुई थी, जिससे यह सेगमेंट सबसे तेजी से बढ़ने वाला बना।


💸 लागत में भी 27% की वृद्धि, सर्विस फीस रहा सबसे बड़ा खर्च

जैसे-जैसे होटल व पैकेज बुकिंग बढ़ी, वैसा ही असर कंपनी के खर्चों पर भी पड़ा। Q1 FY26 में कंपनी का कुल खर्च ₹456 करोड़ रहा, जो कि Q1 FY25 के ₹358 करोड़ से 27% अधिक है।

  • 🧾 सर्विस फीस: ₹178 करोड़ (कुल खर्च का 39%)
  • 👩‍💻 कर्मचारी लाभ लागत: ₹103 करोड़
  • ⚙️ अन्य ऑपरेशनल खर्चे: ₹175 करोड़ (अनुमानित)

🗣️ “मार्केट में ट्रैवल डिमांड के रिवाइवल के साथ हमने अपने होटल व पैकेज सेगमेंट को स्केल किया है। हमारा ध्यान मार्जिन बनाए रखते हुए ग्रोथ पर केंद्रित रहेगा।” — TBO प्रवक्ता


📊 प्रॉफिट्स स्थिर लेकिन सकारात्मक

जहां रेवेन्यू और खर्च दोनों बढ़े, वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) लगभग स्थिर रहा।

  • 💹 Q1 FY26 प्रॉफिट: ₹63 करोड़
  • 💹 Q1 FY25 प्रॉफिट: ₹61 करोड़
  • 🔍 वृद्धि: महज़ 3% YoY

यह मामूली वृद्धि बताती है कि कंपनी अब खर्च प्रबंधन और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान दे रही है।


🏦 शेयर बाजार में प्रदर्शन: मार्केट कैप ₹15,117 करोड़ पार

TBO Tek का शेयर 29 जुलाई की दोपहर (3:20 बजे) तक ₹1,405 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे इसका कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹15,117 करोड़ हो गया है।

💡 यह आंकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों में कंपनी को लेकर भरोसा बना हुआ है, भले ही प्रॉफिट स्थिर रहा हो।


🧭 ट्रैवल सेक्टर में TBO की अहम भूमिका

TBO एक B2B ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म है, जो दुनियाभर के ट्रैवल एजेंट्स को होटल, फ्लाइट, पैकेज, ट्रांसफर जैसी सुविधाएं मुहैया कराता है।

कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय और ग्लोबल ट्रैवल सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाई है और डिजिटलीकरण के इस दौर में एसेट-लाइट, टेक-ड्रिवन मॉडल को अपनाकर ग्रोथ को बरकरार रखा है।

🌍 TBO की मौजूदगी:

  • 100+ देशों में B2B ग्राहक
  • लाखों होटल्स और ट्रैवल ऑप्शंस
  • मल्टी-करेन्सी और मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट

🔮 आगे की रणनीति: एक्सपेंशन और SaaS-आधारित सॉल्यूशंस

TBO का फोकस अब भारत के अलावा Southeast Asia, Middle East और यूरोप में भी अपनी सेवाएं बढ़ाने पर है। साथ ही, कंपनी AI-बेस्ड प्राइसिंग, इंटेलिजेंट ट्रैवल इंजन और SaaS टूल्स पर भी काम कर रही है।

💡 संभावित विकास क्षेत्र:

  • स्मार्ट होटल रेटिंग एल्गोरिद्म
  • डायनामिक पैकेजिंग टूल्स
  • एजेंट-सेंट्रिक मोबाइल ऐप्स
  • इंटरनेशनल ट्रैवल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन

📝 निष्कर्ष: स्थिर प्रॉफिट्स के साथ मजबूत ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है TBO

TBO Tek का Q1 FY26 रिपोर्ट दर्शाता है कि कंपनी रेवेन्यू में निरंतर वृद्धि और स्टेबल प्रॉफिट के जरिए एक मजबूत, टिकाऊ बिज़नेस मॉडल तैयार कर रही है।

📌 प्रमुख हाइलाइट्स:

  • ✅ 22% रेवेन्यू ग्रोथ
  • ✅ होटल बुकिंग से 83% रेवेन्यू
  • ✅ 27% खर्च में वृद्धि
  • ✅ 3% प्रॉफिट ग्रोथ
  • ✅ ₹15,117 करोड़ मार्केट कैप

बिज़नेस-ट्रैवल सेगमेंट में बढ़ती मांग के साथ TBO भविष्य में भारत की अग्रणी ट्रैवल SaaS कंपनियों में शामिल हो सकता है।


EV और ट्रैवल जैसे उभरते सेक्टर की ताज़ा रिपोर्ट्स के लिए पढ़ते रहिए — FundingRaised.in 🚀

Read more : Ather Energy का Q1 FY26 79% की जबरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ,

⚡ Ather Energy का Q1 FY26 79% की जबरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ,

Ather Energy

बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Ather Energy ने वित्तीय वर्ष FY26 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी ने 79% की साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे में 3% की कमी भी दर्शाई है।

💰 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में ₹645 करोड़ की छलांग

Ather Energy का Q1 FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹645 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही (Q1 FY25) में यह ₹360 करोड़ था। यह 79% की शानदार बढ़त को दर्शाता है।

यह डेटा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दर्ज Ather की रिपोर्ट से सामने आया है।

💬 “FY26 की शुरुआत हमारे लिए काफी मज़बूत रही है। रेवेन्यू में बढ़त और घाटे में गिरावट से हमारा फोकस स्केलेबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दिखता है,”तरुण मेहता, सह-संस्थापक और CEO, Ather Energy

📉 लागत का बढ़ता बोझ, फिर भी घाटा घटा

कंपनी की कुल लागत Q1 FY26 में ₹851 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 के ₹551 करोड़ से 54% अधिक है।

  • मटेरियल कॉस्ट (बैटरी और कंपोनेंट्स): ₹518 करोड़ (74% YoY वृद्धि)
  • कर्मचारी लाभ लागत: ₹119 करोड़ (37% YoY वृद्धि)
  • डिप्रीसिएशन व अमॉर्टाइज़ेशन: ₹48 करोड़ (20% वृद्धि)
  • अन्य ऑपरेशनल खर्चे: ₹166 करोड़ (31% वृद्धि)

इन सबके बावजूद, Ather ने अपने घाटे को 3% तक घटाकर ₹178 करोड़ कर लिया, जो कि Q1 FY25 में ₹183 करोड़ था।

📊 मुख्य फाइनेंशियल आंकड़े – Q1 FY26

पैरामीटरQ1 FY26Q1 FY25बदलाव (%)
ऑपरेटिंग रेवेन्यू₹645 करोड़₹360 करोड़+79%
कुल खर्च₹851 करोड़₹551 करोड़+54%
नेट घाटा₹178 करोड़₹183 करोड़-3%
मटेरियल कॉस्ट₹518 करोड़₹297 करोड़+74%
कर्मचारी लागत₹119 करोड़₹87 करोड़+37%

🛵 जुलाई में बिक्री बढ़ी, मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँचा

Ather ने जुलाई 2025 में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि जून की तुलना में 10.59% ज़्यादा है (जून में 14,677 यूनिट्स)। इस वृद्धि के साथ Ather ने भारत के EV टू-व्हीलर मार्केट में चौथे स्थान को बनाए रखा और इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँच गया।

🔹 मार्केट पोजिशन: 4th
🔹 जुलाई में बिक्री: 16,231 यूनिट्स
🔹 जून में बिक्री: 14,677 यूनिट्स
🔹 MoM वृद्धि: 10.59%


📈 शेयर बाजार में मजबूती | मार्केट कैप $1.5 बिलियन पार

Ather Energy ने 6 मई 2025 को NSE पर लिस्टिंग की थी, जिसकी लिस्टिंग कीमत ₹328 प्रति शेयर थी।

वर्तमान में इसका शेयर (29 जुलाई को दोपहर 2:51 बजे) ₹375 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹13,723 करोड़ ($1.5 बिलियन) पहुंच गया है।

📌 यह लिस्टिंग Ola Electric और अन्य EV कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में Ather की पकड़ को मजबूत करती है।


🆚 Ola Electric vs Ather Energy: कौन आगे?

जहां Ather ने FY26 की पहली तिमाही में ग्रोथ दर्ज की, वहीं उसकी प्रमुख प्रतिस्पर्धी Ola Electric को इस दौरान झटका लगा:

Ola Electric की Q1 FY26 रिपोर्ट:

  • टॉपलाइन में 50% की गिरावट
  • घाटा 23% बढ़ा

इस तुलना में, Ather की रेवेन्यू ग्रोथ और घाटे में कमी उसे एक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाली कंपनी बनाती है।

कंपनीरेवेन्यू YoYघाटा YoY
Ather+79%-3%
Ola Electric-50%+23%

🔮 आगे की रणनीति: ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट एक्सपेंशन

Ather का ध्यान अब भारत के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपने उत्पादों को स्केल करने पर है। कंपनी ने हाल ही में अपने स्मार्टस्कूटर मॉडल्स को अपग्रेड किया है और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी सुधार लाया है।

संभावित फोकस क्षेत्र:

  • सप्लाई चेन ऑप्टिमाइज़ेशन
  • स्मार्ट बैटरी R&D
  • इंटरनेशनल लॉन्चेस (SEA, यूरोप)
  • डिजिटल इनोवेशन (Ather App, OTA अपडेट्स)

📝 निष्कर्ष: EV मार्केट में Ather की पकड़ मज़बूत हो रही है

Ather Energy की पहली तिमाही की रिपोर्ट FY26 के लिए एक सकारात्मक संकेत देती है।

✅ रेवेन्यू में दमदार ग्रोथ
✅ घाटे में गिरावट
✅ बिक्री में स्थिर उछाल
✅ शेयर बाजार में मजबूत प्रदर्शन

जबकि Ola Electric जैसे प्रतिस्पर्धी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, Ather अपनी टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट इनोवेशन और फाइनेंशियल एफिशिएंसी के दम पर भारत के EV सेगमेंट में एक मज़बूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।


Ather की अगली चालों और EV इंडस्ट्री के ट्रेंड्स के लिए जुड़े रहें FundingRaised.in के साथ! 🚀बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Ather Energy ने वित्तीय वर्ष FY26 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी ने 79% की साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे में 3% की कमी भी दर्शाई है।

💰 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में ₹645 करोड़ की छलांग

Ather Energy का Q1 FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹645 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही (Q1 FY25) में यह ₹360 करोड़ था। यह 79% की शानदार बढ़त को दर्शाता है।

यह डेटा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दर्ज Ather की रिपोर्ट से सामने आया है।

💬 “FY26 की शुरुआत हमारे लिए काफी मज़बूत रही है। रेवेन्यू में बढ़त और घाटे में गिरावट से हमारा फोकस स्केलेबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दिखता है,”तरुण मेहता, सह-संस्थापक और CEO, Ather Energy

📉 लागत का बढ़ता बोझ, फिर भी घाटा घटा

कंपनी की कुल लागत Q1 FY26 में ₹851 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 के ₹551 करोड़ से 54% अधिक है।

  • मटेरियल कॉस्ट (बैटरी और कंपोनेंट्स): ₹518 करोड़ (74% YoY वृद्धि)
  • कर्मचारी लाभ लागत: ₹119 करोड़ (37% YoY वृद्धि)
  • डिप्रीसिएशन व अमॉर्टाइज़ेशन: ₹48 करोड़ (20% वृद्धि)
  • अन्य ऑपरेशनल खर्चे: ₹166 करोड़ (31% वृद्धि)

इन सबके बावजूद, Ather ने अपने घाटे को 3% तक घटाकर ₹178 करोड़ कर लिया, जो कि Q1 FY25 में ₹183 करोड़ था।

📊 मुख्य फाइनेंशियल आंकड़े – Q1 FY26

पैरामीटरQ1 FY26Q1 FY25बदलाव (%)
ऑपरेटिंग रेवेन्यू₹645 करोड़₹360 करोड़+79%
कुल खर्च₹851 करोड़₹551 करोड़+54%
नेट घाटा₹178 करोड़₹183 करोड़-3%
मटेरियल कॉस्ट₹518 करोड़₹297 करोड़+74%
कर्मचारी लागत₹119 करोड़₹87 करोड़+37%

🛵 जुलाई में बिक्री बढ़ी, मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँचा

Ather ने जुलाई 2025 में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि जून की तुलना में 10.59% ज़्यादा है (जून में 14,677 यूनिट्स)। इस वृद्धि के साथ Ather ने भारत के EV टू-व्हीलर मार्केट में चौथे स्थान को बनाए रखा और इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँच गया।

🔹 मार्केट पोजिशन: 4th
🔹 जुलाई में बिक्री: 16,231 यूनिट्स
🔹 जून में बिक्री: 14,677 यूनिट्स
🔹 MoM वृद्धि: 10.59%


📈 शेयर बाजार में मजबूती | मार्केट कैप $1.5 बिलियन पार

Ather Energy ने 6 मई 2025 को NSE पर लिस्टिंग की थी, जिसकी लिस्टिंग कीमत ₹328 प्रति शेयर थी।

वर्तमान में इसका शेयर (29 जुलाई को दोपहर 2:51 बजे) ₹375 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹13,723 करोड़ ($1.5 बिलियन) पहुंच गया है।

📌 यह लिस्टिंग Ola Electric और अन्य EV कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में Ather की पकड़ को मजबूत करती है।


🆚 Ola Electric vs Ather Energy: कौन आगे?

जहां Ather ने FY26 की पहली तिमाही में ग्रोथ दर्ज की, वहीं उसकी प्रमुख प्रतिस्पर्धी Ola Electric को इस दौरान झटका लगा:

Ola Electric की Q1 FY26 रिपोर्ट:

  • टॉपलाइन में 50% की गिरावट
  • घाटा 23% बढ़ा

इस तुलना में, Ather की रेवेन्यू ग्रोथ और घाटे में कमी उसे एक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाली कंपनी बनाती है।

कंपनीरेवेन्यू YoYघाटा YoY
Ather+79%-3%
Ola Electric-50%+23%

🔮 आगे की रणनीति: ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट एक्सपेंशन

Ather का ध्यान अब भारत के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपने उत्पादों को स्केल करने पर है। कंपनी ने हाल ही में अपने स्मार्टस्कूटर मॉडल्स को अपग्रेड किया है और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी सुधार लाया है।

संभावित फोकस क्षेत्र:

  • सप्लाई चेन ऑप्टिमाइज़ेशन
  • स्मार्ट बैटरी R&D
  • इंटरनेशनल लॉन्चेस (SEA, यूरोप)
  • डिजिटल इनोवेशन (Ather App, OTA अपडेट्स)

📝 निष्कर्ष: EV मार्केट में Ather की पकड़ मज़बूत हो रही है

Ather Energy की पहली तिमाही की रिपोर्ट FY26 के लिए एक सकारात्मक संकेत देती है।

✅ रेवेन्यू में दमदार ग्रोथ
✅ घाटे में गिरावट
✅ बिक्री में स्थिर उछाल
✅ शेयर बाजार में मजबूत प्रदर्शन

जबकि Ola Electric जैसे प्रतिस्पर्धी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, Ather अपनी टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट इनोवेशन और फाइनेंशियल एफिशिएंसी के दम पर भारत के EV सेगमेंट में एक मज़बूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।


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Read more: इस हफ्ते 21 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $130.49 मिलियन Safe Security बना हाइलाइट 

📊 इस हफ्ते 21 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $130.49 मिलियन Safe Security बना हाइलाइट 🌐

भारतीय स्टार्टअप्स

इस सप्ताह भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में कुल 21 स्टार्टअप्स ने मिलाकर $130.49 मिलियन (लगभग ₹1,087 करोड़) जुटाए, जिनमें 3 ग्रोथ-स्टेज और 15 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं। वहीं 3 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग डिटेल्स सार्वजनिक नहीं कीं।

🔝 ग्रोथ-स्टेज डील्स: Safe Security ने मारी बाज़ी 🔐

ग्रोथ और लेट-स्टेज फंडिंग का कुल आंकड़ा $90.88 मिलियन रहा।

  • Safe Security (पूर्व में Lucideus) ने $70 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग जुटाई, जिसे Avataar Ventures ने लीड किया।
  • Navi Technologies ने ₹170 करोड़ (लगभग $20 मिलियन) का डेब्ट राउंड हासिल किया, जिसमें PhillipCapital, NDX Finserve जैसे नाम शामिल रहे।
  • Zepto ने ₹7.5 करोड़ की फंडिंग Elcid Investment से पाई।

🚀 अर्ली-स्टेज फंडिंग: Metaforms और STAN सबसे आगे 🤖🎮

15 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने इस हफ्ते कुल $39.6 मिलियन जुटाए।

  • Metaforms (AI स्टार्टअप) ने $9 मिलियन की Series A फंडिंग Peak XV Partners से जुटाई।
  • अन्य प्रमुख डील्स:
    • STAN (गेमिंग स्टार्टअप)
    • Arivihan (ऑनलाइन लर्निंग)
    • Bhindi.io (Agentic AI प्लेटफॉर्म)
    • Sharpsell.ai (SaaS स्टार्टअप)

👉 Acko, Vahan AI, और Optipro ने भी फंडिंग हासिल की, लेकिन आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए।

🏙️ शहर और सेक्टर वार ब्रेकडाउन 📍

  • बेंगलुरु: 8 डील्स के साथ टॉप पर
  • दिल्ली-NCR: 6 डील्स
  • मुंबई, गुवाहाटी और अन्य शहरों से भी डील्स हुईं

📌 सेक्टर ट्रेंड:

  • AI स्टार्टअप्स सबसे आगे (3 डील्स)
  • SaaS और ई-कॉमर्स: 3-3 डील्स
  • फिनटेक, गेमिंग, साइबरसिक्योरिटी और अन्य सेक्टर भी शामिल

💰 स्टेज-वाइज़ डील्स

स्टेजडील्स की संख्या
सीड फंडिंग6
प्री-सीरीज़ A3
सीरीज़ A3
अन्य (C, F, डेब्ट)शेष

📉 साप्ताहिक गिरावट: 35.65% कम हुआ निवेश 📆

पिछले सप्ताह के मुकाबले इस सप्ताह निवेश में भारी गिरावट रही:

  • पिछला सप्ताह: $202.70 मिलियन
  • यह सप्ताह: $130.49 मिलियन
  • गिरावट: 35.65%

👉 पिछले 8 हफ्तों का औसत निवेश: $188.9 मिलियन / सप्ताह


👔 प्रमुख नियुक्तियाँ और इस्तीफे

  • GoKwik ने Vargab Bakshi को Chief Growth Officer नियुक्त किया
  • VerSe Innovation (Dailyhunt, Josh की पैरेंट कंपनी) ने Rohit Sandal को CHRO बनाया
  • Magenta Mobility ने Ankur Bhandari को Head of Finance नियुक्त किया

🛑 इस्तीफ़े:

  • Maya John ने VerSe Innovation में CPO पद छोड़ा
  • Raheel Shah ने Eduvanz में Chief Business Officer का पद छोड़ा

🔄 मर्जर और एक्विजिशन 🤝

  • Vahan.ai ने L.earn (GoodWorker द्वारा बनाई गई) को खरीदा
  • Zaggle ₹22 करोड़ में Rio.Money (Rivpe Technology) को खरीदने जा रहा है

💼 नए फंड लॉन्च 💸

  • W Health Ventures ने $70 मिलियन का हेल्थकेयर-फोकस्ड फंड लॉन्च किया
  • Neo Asset Management ने ₹2,000 करोड़ के सेकंडरी फंड का पहला क्लोज ₹750 करोड़ पर किया
  • Inflection Point Ventures ने $110 मिलियन का IPV International Fund लॉन्च किया

❌ बंद हुए स्टार्टअप्स और छंटनी 🔻

  • Astra (AI sales automation स्टार्टअप) ने संचालन बंद किया
  • Plus Gold (Shark Tank-featured डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म) भी बंद हुआ

✂️ Krutrim AI ने 100+ कर्मचारियों की छंटनी की — “लीन टीम” और “स्ट्रैटेजिक रियलाइन्मेंट” के तहत


🔮 संभावित डील्स और आगामी गतिविधियां

  • Baaz Bikes, Zetwerk, P-Tal, The Sleep Company फंडिंग जुटाने को तैयार
  • Info Edge, Ghar Mandir में $2.5 मिलियन निवेश की तैयारी में
  • Powerplay की वैल्यूएशन में गिरावट

🆕 लॉन्च और प्रोडक्ट साझेदारियाँ

  • Kombai (Stellaris-समर्थित) ने पहला डोमेन-स्पेसिफिक AI कोडिंग एजेंट लॉन्च किया फ्रंटेंड डेवेलपर्स के लिए

📈 कंपनियों के वित्तीय नतीजे

  • Swiggy: ₹4,961 Cr राजस्व, घाटा 96% बढ़ा
  • Mobikwik: घाटा 6X बढ़ा
  • PB Fintech: ₹1,348 Cr राजस्व, मुनाफा 42% बढ़ा
  • Freshworks: $205 Mn राजस्व, घाटा 80% घटा
  • Lenskart: ₹6,653 Cr राजस्व, ₹297 Cr मुनाफा
  • Go Digit: राजस्व 17% गिरा, मुनाफा 46% बढ़ा
  • CarTrade: ₹173 Cr राजस्व, मुनाफा दोगुना

⚡भारतीय स्टार्टअप्स न्यूज़ फ्लैश

  • TVS जुलाई में EV सेक्टर में आगे रहा (2W सेगमेंट)
  • UPI ट्रांजेक्शंस ने रिकॉर्ड बनाया: 19.47 बिलियन ट्रांजेक्शंस
  • Swiggy अपने Rapido निवेश से बाहर निकलने की योजना बना रहा
  • Lenskart ने ₹2,150 Cr IPO के लिए DRHP फाइल किया
  • Peyush Bansal ने IPO से पहले ₹222 Cr में शेयर बायबैक किया

🔚 निष्कर्ष

इस सप्ताह स्टार्टअप निवेश में गिरावट रही, लेकिन सेक्टर डाइवर्सिटी, AI और SaaS जैसे उभरते क्षेत्रों की मजबूती और नए फंड लॉन्च संकेत दे रहे हैं कि इंडियन स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत बना हुआ है। अगले सप्ताह और रोमांचक अपडेट्स के लिए जुड़े रहें FundingRaised.in के साथ! 🚀

Read more : Delhivery का शानदार तिमाही प्रदर्शन: Q1 FY26 में ₹91 करोड़ का मुनाफा,

📦 Delhivery का शानदार तिमाही प्रदर्शन: Q1 FY26 में ₹91 करोड़ का मुनाफा,

Delhivery

🚚 परिचय: लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मजबूती से आगे बढ़ती Delhivery

भारत की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी ने इस तिमाही में ₹91 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 67% अधिक है। इसके साथ ही कंपनी का कुल राजस्व ₹2,423.8 करोड़ तक पहुंच गया।


📈 राजस्व में मामूली लेकिन स्थिर वृद्धि

Gurugram स्थित Delhivery ने Q1 FY26 में ₹2,294 करोड़ का परिचालन राजस्व कमाया, जो Q1 FY25 के ₹2,172.3 करोड़ की तुलना में 5.6% अधिक है।

  • कंपनी की मुख्य आय लॉजिस्टिक्स सेवाओं से हुई है जिसमें वेयरहाउसिंग, लास्ट-माइल डिलीवरी, और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम की सेवाएं शामिल हैं।
  • इसके अलावा, Delhivery ने ₹129.8 करोड़ की आय गैर-परिचालन स्रोतों से अर्जित की।

💰 खर्चों पर नियंत्रण, लेकिन चुनौती बनी हुई

कंपनी ने Q1 FY26 में ₹2,326.6 करोड़ का कुल खर्च किया, जो साल-दर-साल 4.7% की मामूली वृद्धि को दर्शाता है।

  • Freight handling और servicing खर्च कंपनी के कुल खर्च का 70.4% हिस्सा (₹1,566 करोड़) रहा।
  • Employee benefit खर्च 6% बढ़कर ₹352.65 करोड़ हो गया।
  • इसके अलावा, लीगल फीस, डिप्रीसिएशन, और अन्य ऑपरेशनल खर्चों ने कुल खर्च में योगदान दिया।

📊 शुद्ध लाभ में जबरदस्त उछाल

इस तिमाही में Delhivery ने ₹91 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹54 करोड़ था। यानी कंपनी ने 67% की बढ़त के साथ मुनाफा कमाया है। यह लाभ कंपनी के संतुलित खर्च प्रबंधन और स्थिर राजस्व वृद्धि का परिणाम है।


📉 शेयर बाजार में प्रदर्शन

आज के शेयर बाजार के क्लोजिंग सेशन में Delhivery का शेयर ₹429.05 प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ। इससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹32,032.5 करोड़ (लगभग $3.76 बिलियन) हो गया।

  • निवेशकों ने कंपनी के मजबूत नतीजों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
  • कंपनी का स्टॉक पिछले कुछ महीनों से धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है, और अब मिडकैप सेगमेंट में एक स्थिर खिलाड़ी बन चुका है।

📦 Delhivery की सेवाओं का दायरा

Delhivery केवल एक कोरियर कंपनी नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बन चुकी है। इसके प्रमुख सर्विस सेगमेंट हैं:

  • Express Parcel Delivery
  • Heavy Goods Transportation
  • Warehousing & Fulfilment
  • Supply Chain SaaS Solutions
  • Cross-border Logistics

इस तकनीकी-आधारित दृष्टिकोण के कारण Delhivery को विशेष रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों और D2C ब्रांड्स से भारी मांग मिलती है।


🛠️ भविष्य की रणनीति

Delhivery अब अपने संचालन को और अधिक कुशल बनाने और मुनाफा बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है:

  • AI और मशीन लर्निंग आधारित लॉजिस्टिक्स समाधान।
  • छोटे शहरों और टियर-2, टियर-3 मार्केट्स में विस्तार।
  • मल्टी-मोडल नेटवर्क के माध्यम से समय और लागत में कटौती।
  • B2B सेगमेंट में गहराई से प्रवेश।

📌 निष्कर्ष: टिकाऊ ग्रोथ की ओर Delhivery का बढ़ता कदम

Delhivery ने Q1 FY26 में अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि कंपनी लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सिर्फ विस्तार ही नहीं, बल्कि लाभदायक संचालन के लिए भी प्रतिबद्ध है।

  • 5.6% की राजस्व वृद्धि भले ही छोटी लगे, लेकिन ₹91 करोड़ का मुनाफा दर्शाता है कि कंपनी ने लागत नियंत्रण और प्रभावी रणनीति के बल पर स्थिरता हासिल की है।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद, Delhivery का प्रदर्शन निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए विश्वसनीयता और स्थायित्व का संकेत है।

🔎 बाजार और निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रदर्शन?

  • कंपनी का EBITDA और मुनाफा लगातार बढ़ रहा है।
  • खर्चों को नियंत्रित करने की क्षमता इसे प्रतिस्पर्धियों से आगे रखती है।
  • मार्केट में Delhivery की स्थिति और मजबूत होगी यदि यही ट्रेंड अगले कुछ तिमाहियों तक बना रहा।

📢 निष्कर्ष में एक बात साफ है — Delhivery अब केवल डिलीवरी तक सीमित नहीं, यह भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का मजबूत स्तंभ बनती जा रही है।


📰 यह विशेष रिपोर्ट FundingRaised.in द्वारा तैयार की गई है।

Read more : Ghar Mandir का डिजिटल चमत्कार Info Edge से ₹20 करोड़ जुटाने की तैयारी,

🛕 Ghar Mandir का डिजिटल चमत्कार Info Edge से ₹20 करोड़ जुटाने की तैयारी,

Ghar Mandir

📱 ऑनलाइन भक्ति का बढ़ता प्रभाव
भारत की श्रद्धा-tech इंडस्ट्री में एक और बड़ा कदम आने वाला है। डिजिटल पूजा और मंदिर सेवाएं देने वाला प्लेटफॉर्म Ghar Mandir अब अपने पहले निवेश दौर में $2.5 मिलियन (लगभग ₹20 करोड़) जुटाने की तैयारी में है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व भारत की जानी-मानी निवेश कंपनी Info Edge कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, Info Edge जल्द ही टर्म शीट जारी कर सकती है और डील के लिए फाइनल ड्यू डिलिजेंस स्टेज में पहुंच गई है। यह Info Edge की 2025 में पहली प्रमुख मंदिर-tech या श्रद्धा-tech निवेश पहल होगी।


👥 कौन हैं Ghar Mandir के संस्थापक?
Ghar Mandir की स्थापना सम्या मित्तल और अपूर्व शाह ने अगस्त 2023 में की थी। यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को देश भर के मंदिरों में ऑनलाइन प्रसाद बुकिंग, पारंपरिक पूजा, और संस्कार सेवाएं प्रदान करता है।

  • यूज़र्स सिर्फ ₹101 से पूजा बुक कर सकते हैं।
  • 50+ मंदिरों और पुजारियों के साथ साझेदारी है।
  • सेवा का वीडियो रिकॉर्डिंग भी भेजा जाता है।
  • अब तक 1 लाख+ यूज़र्स को सेवा दे चुका है।

💰 फंडिंग का उपयोग किसमें होगा?
फंडिंग मिलने के बाद Ghar Mandir निम्नलिखित क्षेत्रों में विस्तार करेगा:

  • प्रोडक्ट डेवलपमेंट: ऐप को और अधिक यूज़र-फ्रेंडली बनाना।
  • टेक्नोलॉजी अपग्रेड: AI और ऑटोमेशन का समावेश।
  • नए मंदिरों से भागीदारी: छोटे और बड़े मंदिरों को जोड़ना।
  • वीडियो स्ट्रीमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना।

📈 अनुमानित वैल्यूएशन और डील की स्थिति
Ghar Mandir की वैल्यूएशन $10–15 मिलियन (₹80 से ₹120 करोड़) के बीच हो सकती है, यदि डील सफलतापूर्वक फाइनल हो जाती है।
डील पर काम कर रहे एक व्यक्ति ने बताया, “ड्यू डिलिजेंस अंतिम चरण में है और Info Edge जल्द ही टर्म शीट साझा कर सकता है।”


⚔️ प्रतियोगिता तेज़: कौन-कौन है इस दौड़ में?
Faith-tech स्पेस में अब घमासान मुकाबला चल रहा है। हाल ही में, Ghar Mandir के प्रमुख प्रतिद्वंदी AppsForBharat (Sri Mandir का पैरेंट कंपनी) ने $20 मिलियन की Series C फंडिंग हासिल की थी।
इस सेक्टर में अन्य खिलाड़ियों में शामिल हैं:

  • DevDham
  • Vama
  • Utsav App
  • Sutradhar
  • 27 Mantra

इन सभी का उद्देश्य एक ही है – आस्था को डिजिटल बनाना


📊 श्रद्धा-Tech का तेजी से बढ़ता बाजार
भारत में डिजिटल भक्ति सेवाओं की डिमांड दिन-ब-दिन बढ़ रही है। भक्त अब अपने मोबाइल फोन से ही पूजा, हवन, प्रार्थना और दान जैसी सेवाएं बुक कर रहे हैं।

  • COVID-19 के बाद यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा।
  • Tier 2 और Tier 3 शहरों में भी भारी डिमांड देखी जा रही है।
  • 2025 तक इस सेक्टर का साइज ₹2,000 करोड़ से अधिक होने की संभावना है।

🎥 Ghar Mandir की Unique सेवाएं

  • वीडियो के माध्यम से Live या रिकॉर्डेड पूजा दर्शन
  • विशेष पर्व और व्रतों के लिए थीम आधारित पूजा पैकेज
  • यूज़र्स को डिजिटल ई-प्रसाद सर्टिफिकेट भी भेजा जाता है।
  • पंडित ऑन-डिमांड जैसी सेवा का भी परीक्षण चल रहा है।

🤝 Info Edge की रणनीति
Info Edge ने पहले Zomato, Policybazaar, Naukri जैसे कई यूनिकॉर्न्स में निवेश किया है। अब कंपनी धार्मिक टेक्नोलॉजी में भी अपनी जगह बना रही है।

  • यह निवेश केवल वित्तीय नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम है।
  • Info Edge के इस कदम से श्रद्धा-tech सेक्टर को वैधता और निवेशकों का भरोसा मिलेगा।

🔮 आगे क्या?
अगर यह डील फाइनल होती है, तो Ghar Mandir अपने प्लेटफॉर्म को और विस्तार देने के लिए तैयार है।

  • नए मंदिर और तीर्थस्थल जोड़ने की योजना है।
  • विदेशों में बसे भारतीयों को भी यह सेवा देने पर विचार किया जा रहा है।
  • प्लग-इन मॉडल के तहत पूजा सेवाओं को मंदिर वेबसाइट्स या ऐप्स में एम्बेड करने की तैयारी है।

📌 निष्कर्ष
भारत में आस्था अब केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है — डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उतनी ही मजबूत है। Ghar Mandir का संभावित निवेश और Info Edge जैसी कंपनी का सपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धा-tech सेक्टर में भविष्य की जबरदस्त संभावनाएं छिपी हैं।

📱 अब भक्ति भी डिजिटल है – और इसमें निवेश भी।
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी कंपनी इस आध्यात्मिक दौड़ में आगे निकलती है।


🔗 Source: FundingRaised.in के लिए विशेष रिपोर्ट

Read more : इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की रेस में TVS फिर से नंबर 1, Ola Electric की हालत सबसे खराब!

🚀 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की रेस में TVS फिर से नंबर 1, Ola Electric की हालत सबसे खराब!

ola electric

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट की जुलाई 2025 की बिक्री रिपोर्ट आ चुकी है और इसके नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं। TVS Motor ने एक बार फिर बाज़ी मारी है, वहीं Ola Electric की गिरती पकड़ और घटती बिक्री ने उसे संकट में डाल दिया है।


📉 TVS की बिक्री में गिरावट, फिर भी मार्केट लीडर!

TVS Motor ने जुलाई महीने में कुल 22,225 यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की, जिससे उसका 21.6% मार्केट शेयर बना रहा। हालांकि यह जून 2025 के मुकाबले लगभग 12.73% की गिरावट है, जब कंपनी ने 25,468 यूनिट्स बेचे थे।

TVS के स्थिर प्रदर्शन ने यह दिखाया है कि ब्रांड पर ग्राहकों का भरोसा बना हुआ है, भले ही कुल बिक्री में थोड़ी कमी आई हो।


⚡ Bajaj ने भी झेला झटका, पर दूसरा स्थान बरकरार

Bajaj Auto ने जुलाई में 19,650 यूनिट्स की बिक्री की, जिससे उसका 19.10% मार्केट शेयर रहा। लेकिन यह भी जून के 23,161 यूनिट्स के मुकाबले 15.16% की गिरावट है।

इस गिरावट के बावजूद Bajaj अपनी जगह पर कायम रहा है, और TVS के बाद सबसे ज़्यादा भरोसेमंद ब्रांड बना हुआ है।


😞 Ola Electric की भारी गिरावट, मार्केट शेयर हुआ आधे से भी कम

कभी EV टू-व्हीलर मार्केट की बादशाह कही जाने वाली Ola Electric अब मुश्किलों से घिरी हुई है। जुलाई 2025 में Ola ने केवल 17,848 यूनिट्स बेचीं, जो कि 2024 की तुलना में 57.29% की गिरावट है (जुलाई 2024 में 41,802 यूनिट्स बिकी थीं)। इसका मार्केट शेयर भी 38.83% से घटकर सिर्फ 17.35% रह गया।

💸 इतना ही नहीं, Ola Electric के शेयर की कीमत भी बुरी तरह गिरी है:

  • लिस्टिंग प्राइस: Rs 76
  • मौजूदा कीमत: Rs 41.2
  • ऑल टाइम हाई: Rs 157.4
  • मार्केट कैप में गिरावट: Rs 33,521 करोड़ से Rs 18,190 करोड़ तक (~45% की गिरावट)

उपयोगकर्ताओं की शिकायतें और लगातार घटती बिक्री इस गिरावट के मुख्य कारण हैं।


🔼 Ather Energy की वापसी, बिक्री में अच्छी बढ़त

Ather Energy ने जुलाई में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो जून के 14,677 यूनिट्स के मुकाबले 10.59% की वृद्धि है। इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुंच गया है।

स्टॉक मार्केट में Ather के शेयर भी स्थिरता दिखा रहे हैं:

  • लिस्टिंग प्राइस: Rs 328
  • मौजूदा प्राइस: Rs 353.75

यह संकेत देता है कि कंपनी को निवेशकों का भरोसा मिल रहा है।


🔼 Hero MotoCorp का जोरदार कमबैक

Hero MotoCorp जुलाई में पांचवे स्थान पर रहा, लेकिन इसकी बिक्री में सबसे ज़्यादा ग्रोथ दर्ज की गई — 36.27% की बढ़त के साथ 10,489 यूनिट्स की बिक्री। इसका मार्केट शेयर भी 10.20% तक पहुंच गया है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा संकेत है कि ग्राहकों में फिर से भरोसा बढ़ रहा है।


📊 अन्य कंपनियों का प्रदर्शन भी दिलचस्प

  • Greaves Electric Mobility: जुलाई में 4.08% मार्केट शेयर के साथ छठे स्थान पर रहा।
  • Pure EV (IPO की तैयारी में): 1.64% शेयर के साथ सातवें स्थान पर, बिक्री में 18.12% ग्रोथ
  • River Mobility: 20.4% महीने-दर-महीने वृद्धि
  • Kinetic Green: 59.92% की भारी ग्रोथ, और पहली बार टॉप 10 में शामिल।

📌 EV मार्केट में क्या ट्रेंड बन रहा है?

  1. ब्रांड की विश्वसनीयता और सर्विस नेटवर्क अब ग्राहकों की प्राथमिकता बन रही है।
  2. Ola जैसे हाई-वैल्यू स्टार्टअप्स की गिरावट इस बात का संकेत है कि केवल मार्केटिंग से लंबी रेस नहीं जीती जा सकती।
  3. Hero, Ather और Kinetic जैसी कंपनियों की वापसी दिखाती है कि इनोवेशन और ग्राहक फीडबैक पर ध्यान देना ज़रूरी है।

🔮 भविष्य का क्या अनुमान है?

EV टू-व्हीलर सेक्टर में अगले कुछ महीनों में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां Ola अपने प्रदर्शन को सुधारने की कोशिश करेगी, वहीं Hero, Ather और TVS जैसे ब्रांड अपनी स्थिति और मजबूत करने की ओर अग्रसर हैं।


निष्कर्ष:

TVS और Bajaj ने बाज़ी मार ली है, लेकिन Ola Electric की गिरावट पूरे EV सेक्टर के लिए एक चेतावनी है। ग्राहक अब सिर्फ ब्रांडिंग नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, गुणवत्ता और आफ्टर सेल्स सर्विस को भी ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं।

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