👓 Lenskart IPO से पहले SBI Mutual Fund ने लगाया ₹100 करोड़ का दांव

Lenskart

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस समय Lenskart IPO सबसे चर्चित ऑफर में से एक बन गया है। IPO खुलने से ठीक पहले देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में से एक, SBI Mutual Fund ने Lenskart में बड़ा निवेश किया है।


💰 IPO से पहले SBI Mutual Fund का ₹100 करोड़ का निवेश

SBI Mutual Fund ने अपने दो फंड्स — SBI Optimal Equity Fund (AIF) और SBI Emergent Fund (AIF) — के ज़रिए Lenskart में ₹100 करोड़ का सेकेंडरी निवेश किया है।

यह निवेश 28 अक्टूबर 2025 को किया गया, जब फंड ने कंपनी की को-फाउंडर नेहा बंसल से ₹402 प्रति शेयर की दर पर 24.87 लाख शेयर (2,487,561 shares) खरीदे।

यह डील Lenskart में लगभग 0.15% की हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करती है (fully diluted basis पर)।


👩‍💼 को-फाउंडर नेहा बंसल ने बेचे शेयर

IPO से पहले, नेहा बंसल ने अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच दी है। उन्होंने कुल मिलाकर 2.24 मिलियन (22.38 लाख) शेयर ₹402 प्रति शेयर की दर से Shrikanta R. Damani (DMart के फाउंडर राधाकिशन दामानी की पत्नी) को बेचे।

यह ट्रांजेक्शन करीब ₹90 करोड़ का था, जो Lenskart के RHP फाइलिंग (25 अक्टूबर) से ठीक पहले हुआ।

इन लेनदेन के बाद नेहा बंसल की हिस्सेदारी 0.15% घटकर अब 7.46% रह गई है।


📈 Lenskart IPO की डिटेल — ₹7,178 करोड़ का इश्यू

Lenskart ने SEBI के पास दाखिल किए गए RHP (Red Herring Prospectus) में बताया है कि कंपनी कुल ₹7,178 करोड़ का IPO ला रही है।

  • ₹2,150 करोड़ का हिस्सा Fresh Issue के रूप में जुटाया जाएगा।
  • जबकि ₹5,128 करोड़ का हिस्सा Offer For Sale (OFS) के ज़रिए मौजूदा शेयरहोल्डर्स बेचेंगे।

हालांकि, SBI Mutual Fund और अन्य हालिया ट्रांजेक्शन्स के बाद OFS का साइज घटाकर ₹5,028 करोड़ कर दिया गया है।


🧠 Lenskart में कौन-कौन से बड़े निवेशक हैं?

Lenskart की शेयरहोल्डिंग में कई नामचीन ग्लोबल और इंडियन निवेशक शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • Premji Invest
  • Schroders Capital
  • Temasek Holdings
  • SoftBank Vision Fund
  • Kedaara Capital
  • Chiratae Ventures

इन निवेशकों ने शुरुआती दौर में Lenskart में निवेश किया था, और अब IPO के ज़रिए इन्हें अपने निवेश पर 4x से लेकर 17x तक के रिटर्न मिलने की उम्मीद है।


🕶️ Lenskart: भारत का आईवियर यूनिकॉर्न

2010 में Peyush Bansal, Amit Chaudhary और Neha Bansal द्वारा स्थापित Lenskart ने भारतीय रिटेल और ई-कॉमर्स सेक्टर में क्रांति ला दी है।

यह कंपनी आज भारत का सबसे बड़ा eyewear ब्रांड बन चुकी है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनल्स के ज़रिए चश्मे, लेंस और सनग्लासेस बेचती है।

Lenskart के पास —

  • 2,500 से अधिक स्टोर्स,
  • भारत के 175 से ज़्यादा शहरों में उपस्थिति,
  • और अंतरराष्ट्रीय बाजारों जैसे सिंगापुर, UAE, और सऊदी अरब में भी मजबूत उपस्थिति है।

📊 IPO से पहले कंपनी का प्रदर्शन और ग्रोथ

Lenskart ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार किया है —

  • FY25 में कंपनी का Revenue ₹2,400 करोड़ से अधिक तक पहुंच गया।
  • कंपनी ने EBITDA प्रोफिटेबल स्थिति हासिल की है।
  • ऑनलाइन सेल्स के साथ-साथ, फ्रेंचाइज़ मॉडल ने भी कंपनी की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई है।

इसके अलावा, Lenskart ने पिछले दो वर्षों में Owndays (जापान) जैसी विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण कर अपने ग्लोबल एक्सपैंशन की शुरुआत की है।


📍 SBI Mutual Fund की एंट्री का महत्व

IPO से ठीक पहले किसी बड़े संस्थागत निवेशक का निवेश हमेशा मार्केट को सकारात्मक संकेत देता है।

SBI Mutual Fund का ₹100 करोड़ का निवेश इस बात का प्रमाण है कि

  • Lenskart का बिज़नेस मॉडल मज़बूत है,
  • इसका वैल्यूएशन निवेशकों को आकर्षक लग रहा है,
  • और कंपनी की ग्रोथ स्टोरी पर संस्थागत भरोसा कायम है।

यह निवेश आने वाले IPO में खुदरा निवेशकों का भी उत्साह बढ़ा सकता है।


💸 IPO से होने वाले लाभ और संभावित रिटर्न्स

Lenskart के IPO से इसके प्रमोटर्स और शुरुआती निवेशकों को बड़ा फायदा होगा —

  • Promoters (Peyush & Neha Bansal) को करीब ₹1,000 करोड़ तक की राशि प्राप्त होने की उम्मीद है।
  • वहीं, Premji Invest, Temasek, और SoftBank जैसे निवेशकों को उनके शुरुआती निवेश पर 4x–17x तक का मल्टीपल रिटर्न मिलने की संभावना है।

यह IPO भारतीय यूनिकॉर्न्स के लिए एक माइलस्टोन साबित हो सकता है, जैसा कि पहले Zomato, Nykaa, और Mamaearth के साथ देखा गया था।


🏁 निष्कर्ष — SBI के निवेश से Lenskart के IPO को नई गति

SBI Mutual Fund का Lenskart में ₹100 करोड़ का निवेश IPO से पहले कंपनी में भरोसे का एक मजबूत संकेत है।
अब जबकि Lenskart का IPO 31 अक्टूबर 2025 से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहा है, मार्केट एक्सपर्ट्स इसे “most awaited IPOs of 2025” में से एक मान रहे हैं।

अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह IPO भारतीय पूंजी बाजार में एक और सफल स्टार्टअप लिस्टिंग की कहानी लिख सकता है।

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🎧 boAt IPO Update ₹1,500 करोड़ के IPO के साथ बाजार में उतरेगा boAt, घटाई

Boat Office

भारत का लोकप्रिय कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड boAt अब पब्लिक मार्केट में अपनी एंट्री की तैयारी में है। कंपनी ने SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के साथ अपना Updated Draft Red Herring Prospectus (UDRHP) दाखिल किया है, जिसमें उसने अपने IPO का आकार ₹2,000 करोड़ से घटाकर ₹1,500 करोड़ कर दिया है।


💰 IPO का नया स्ट्रक्चर – ₹500 करोड़ का Fresh Issue और ₹1,000 करोड़ का OFS

नए ड्राफ्ट के अनुसार, boAt के ₹1,500 करोड़ के IPO में से ₹500 करोड़ का हिस्सा नया इक्विटी इश्यू (Fresh Issue) होगा, जबकि ₹1,000 करोड़ का हिस्सा Offer for Sale (OFS) के ज़रिए मौजूदा शेयरहोल्डर्स और को-फाउंडर्स बेचेंगे।

OFS के तहत सबसे बड़ी बिक्री South Lake Investment (Warburg Pincus) करेगी, जो अपने ₹500 करोड़ के शेयर ऑफलोड करेगी। इसके अलावा, Fireside Ventures ₹150 करोड़ और Qualcomm Ventures ₹50 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

कंपनी के को-फाउंडर्स भी OFS में हिस्सा लेंगे —

  • Sameer Mehta अपने ₹75 करोड़ के शेयर बेचेंगे।
  • वहीं Aman Gupta, जो कंपनी के CMO हैं, ₹225 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

📊 IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल

boAt अपने Fresh Issue से जुटाए ₹500 करोड़ का उपयोग तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए करेगी —

  1. ₹225 करोड़ – Working Capital यानी कंपनी के दिन-प्रतिदिन के ऑपरेशन्स के लिए।
  2. ₹150 करोड़ – Branding और Marketing गतिविधियों को बढ़ाने के लिए।
  3. बाकी राशि – General Corporate उद्देश्यों के लिए।

🏢 कंपनी की Ownership और प्रमुख निवेशक

boAt के मौजूदा शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में सबसे बड़ा हिस्सा South Lake Investment Ltd (Warburg Pincus) के पास है, जिसकी हिस्सेदारी 39.35% है।

  • Sameer Mehta – 24.75%
  • Aman Gupta – 24.76%
  • Fireside Ventures – 3.28%
  • Qualcomm Ventures – 2.28%
  • Malabar Select Fund – 1.20%

इस शेयर वितरण से साफ है कि कंपनी में संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ संस्थापक जोड़ी की भी मजबूत पकड़ बनी हुई है।


🎧 boAt की शुरुआत और बिज़नेस मॉडल

2016 में Aman Gupta और Sameer Mehta द्वारा शुरू किया गया boAt आज भारत का सबसे लोकप्रिय D2C (Direct-to-Consumer) ब्रांड बन चुका है।
कंपनी की सफलता की सबसे बड़ी वजह इसका affordable yet stylish प्रोडक्ट रेंज है —

  • Audio products (earbuds, headphones, speakers)
  • Smart wearables (smartwatches, fitness bands)
  • और मोबाइल accessories

boAt अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री Amazon, Flipkart, Myntra जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस के साथ-साथ अपनी official website और देशभर के ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स के ज़रिए करती है।


🚀 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस – FY25 में मुनाफे की वापसी

boAt ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी की Operating Revenue ₹3,073 करोड़ रही, जबकि उसने ₹61 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया — जो FY24 के ₹79.6 करोड़ के नुकसान से एक बड़ा टर्नअराउंड है।

FY26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में भी कंपनी ने बेहतरीन शुरुआत की है —

  • Revenue: ₹628 करोड़
  • Net Profit: ₹21.35 करोड़

इससे साफ है कि boAt अब लगातार प्रॉफिटेबल ग्रोथ के रास्ते पर है।


📈 boAt का IPO क्यों महत्वपूर्ण है?

boAt का IPO भारतीय D2C और कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा मोमेंट माना जा रहा है।

  • कंपनी का ब्रांड युवा उपभोक्ताओं के बीच बेहद मजबूत है।
  • ऑडियो और वियरेबल्स कैटेगरी में boAt का मार्केट शेयर 30% से अधिक है।
  • ब्रांड ने लगातार डिज़ाइन, टेक्नोलॉजी और वैल्यू पर ध्यान देकर अपनी पहचान बनाई है।

अगर IPO सफल रहता है, तो यह भारत के D2C ब्रांड्स को पब्लिक मार्केट में नई दिशा दे सकता है।


🧠 boAt के लिए आगे का रास्ता

कंपनी अब अपने मार्केटिंग नेटवर्क, R&D कैपेबिलिटीज और ग्लोबल एक्सपैंशन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इसके साथ ही boAt की योजना है कि वह अपनी वियरेबल और स्मार्ट डिवाइस लाइनअप को और भी मज़बूत करे, ताकि वह Apple, Noise, Fire-Boltt जैसे प्रतिस्पर्धियों से आगे रह सके।


🏁 निष्कर्ष — IPO से पहले ही मजबूत स्थिति में boAt

boAt का IPO न केवल निवेशकों के लिए एक आकर्षक मौका है, बल्कि यह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की परिपक्वता का भी संकेत है।
Aman Gupta और Sameer Mehta की यह जोड़ी अब अपने ब्रांड को पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।

👉 अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो boAt का IPO 2025 के अंत तक या 2026 की शुरुआत में मार्केट में आ सकता है।

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🧠 Mem0 ने जुटाए $24 मिलियन!

Mem0

AI एजेंट्स के लिए अगली पीढ़ी की मेमोरी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लेटफ़ॉर्मMem0 ने अपनी Series A फंडिंग राउंड में $24 मिलियन (लगभग ₹200 करोड़) जुटाए हैं।
यह राउंड Basis Set Ventures के नेतृत्व में हुआ, जिसमें Peak XV Partners, Kindred Ventures, GitHub Fund, और Y Combinator जैसे बड़े नामों ने भाग लिया।

कंपनी की यह फंडिंग न केवल इसके उत्पाद को स्केल करने के लिए अहम है, बल्कि यह AI दुनिया में “मेमोरी लेयर” की नई दिशा भी तय कर रही है।


💰 किसने किया निवेश और क्यों?

इस राउंड में Strategic Investors के रूप में कई टॉप टेक कंपनियों के एग्जीक्यूटिव्स शामिल रहे —
जिनमें Datadog, Supabase, PostHog, GitHub, और Weights & Biases के अधिकारी शामिल हैं।

कंपनी ने बताया कि जुटाई गई राशि का उपयोग वह तीन प्रमुख लक्ष्यों के लिए करेगी:

  1. इंजीनियरिंग टीम का विस्तार,
  2. एंटरप्राइज डिप्लॉयमेंट्स को बढ़ावा, और
  3. AI प्लेटफॉर्म्स व डेवलपर टूल्स के साथ नई पार्टनरशिप्स स्थापित करना।

डेवलपर्स के लिए Mem0 की सेवाएं इसके API और ओपन-सोर्स रिपॉज़िटरी (www.mem0.ai) पर उपलब्ध हैं।


🧩 क्या है Mem0 और कैसे करता है काम?

2023 में तारनजीत सिंह और देशराज यादव द्वारा स्थापित, Mem0 एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफ़ॉर्म है जो AI एजेंट्स को इंसानों जैसी मेमोरी क्षमता देता है।

साधारण शब्दों में कहें तो यह एक “ब्रेन लेयर” की तरह है — जो यूजर की बातचीत से जानकारी निकालता है, उसे सुरक्षित रखता है, पुराने तथ्यों से तुलना करता है, और ज़रूरत पड़ने पर सटीक संदर्भ (context) वापस देता है।

डेवलपर्स के लिए Mem0 को कुछ ही लाइनों के कोड में अपने एप्लिकेशन में जोड़ा जा सकता है।
यह सिस्टम स्वतः:

  • यूजर इंटरैक्शन से डेटा एक्सट्रैक्ट करता है,
  • कन्फ्लिक्टिंग फैक्ट्स को रिज़ॉल्व करता है,
  • कॉन्फिडेंस स्कोरिंग अप्लाई करता है, और
  • रिलेवेंट कॉन्टेक्स्ट को रिकॉल करता है।

यही टेक्नोलॉजी AI चैटबॉट्स और पर्सनल असिस्टेंट्स को लगातार स्मार्ट और “स्मरणशील” बनाती है।


🚀 रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ: 41,000 GitHub स्टार्स और 14 मिलियन डाउनलोड

Mem0 की लोकप्रियता डेवलपर समुदाय में तेजी से बढ़ रही है।
कंपनी के अनुसार, अब तक प्लेटफ़ॉर्म को:

  • 41,000 GitHub स्टार्स,
  • 14 मिलियन Python पैकेज डाउनलोड्स, और
  • API कॉल्स में जबरदस्त उछाल — Q1 के 35 मिलियन से Q3 2025 में 186 मिलियन कॉल्स तक — मिला है।

यह दर्शाता है कि हजारों डेवलपर टीमें — चाहे स्टार्टअप हों या एंटरप्राइज़ कंपनियाँ — अपने AI एजेंट्स में Mem0 को प्रोडक्शन लेवल पर इस्तेमाल कर रही हैं।


🧱 प्रमुख इंटीग्रेशन और पार्टनरशिप्स

Mem0 को पहले से ही कई लोकप्रिय AI फ्रेमवर्क्स ने इंटीग्रेट किया है —
जैसे CrewAI, Flowise, और Langflow

सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि Amazon Web Services (AWS) ने अपने Agent SDK के लिए Mem0 को डिफॉल्ट मेमोरी प्रोवाइडर के रूप में चुना है।

यह साझेदारी Mem0 को वैश्विक स्तर पर AI डेवलपर्स के बीच और भी प्रमुख बनाएगी।


🧠 डेवलपर्स के लिए कैसे है फायदेमंद?

AI एप्लिकेशन्स में अक्सर सबसे बड़ी चुनौती होती है — “पर्सिस्टेंट मेमोरी”
यानी, यूजर के साथ पुरानी बातचीत या डेटा को याद रखकर पर्सनलाइजेशन बनाना।

Mem0 इस समस्या को हल करता है —
अब डेवलपर्स को कस्टम डेटा पाइपलाइन या डेटाबेस सेटअप बनाने की ज़रूरत नहीं होती।
वे सीधे Mem0 API से अपने LLM ऐप्स (जैसे ChatGPT या Claude आधारित प्रोडक्ट्स) में “मेमोरी लेयर” जोड़ सकते हैं।

Mem0 खुद को AI इंफ्रास्ट्रक्चर का कोर कंपोनेंट मानता है — जैसे ऑथेंटिकेशन या डेटाबेस, वैसे ही “मेमोरी” अब हर AI सिस्टम की रीढ़ बनती जा रही है।


🌐 Mem0 की फिलॉसफी: “AI without memory is like a brain without past”

Mem0 के को-फाउंडर तारनजीत सिंह ने कहा,

“हम मानते हैं कि AI एजेंट्स तभी सच में इंसान जैसे बन सकते हैं, जब उन्हें याददाश्त मिले।
Mem0 उस कमी को पूरा कर रहा है — एक यूनिवर्सल मेमोरी लेयर बनाकर।”

उनका लक्ष्य है कि AI एप्लिकेशन्स केवल जवाब देने वाले सिस्टम न रहें, बल्कि समझने और याद रखने वाले साथी बनें।


💡 निवेशकों का विश्वास और भविष्य की दिशा

Basis Set Ventures ने कहा कि Mem0 का दृष्टिकोण पारंपरिक “डेटा स्टोरेज” से आगे बढ़कर एक “कॉन्टेक्स्ट-इंजीन” बनाने का है — जो आने वाले वर्षों में AI एजेंट्स की स्थायी बुद्धिमत्ता (Persistent Intelligence) को शक्ति देगा।

Peak XV Partners और GitHub Fund के अनुसार, ओपन-सोर्स मॉडल और API-फर्स्ट दृष्टिकोण ने Mem0 को डेवलपर कम्युनिटी में एक भरोसेमंद नाम बना दिया है।

आगे कंपनी का फोकस एंटरप्राइज-लेवल इंटीग्रेशन, डेवलपर टूल्स के साथ पार्टनरशिप, और AI डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क्स पर रहेगा।


🧩 निष्कर्ष

Mem0 सिर्फ एक मेमोरी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि AI सिस्टम्स के लिए “ब्रेन” बन रहा है।
Series A में जुटाए गए $24 मिलियन इसकी तकनीकी क्षमता और मार्केट ट्रस्ट दोनों को मजबूती देंगे।

जैसे-जैसे AI एजेंट्स हमारे रोज़मर्रा के कामों में घुलमिल रहे हैं — Mem0 जैसी कंपनियाँ यह सुनिश्चित कर रही हैं कि वे हमारी तरह सीखें, याद रखें और बेहतर निर्णय लें।

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💰 Urban Money ने बढ़ाई रफ्तार FY25 में 58% ग्रोथ के साथ Square Yards

Square Yards

भारत के प्रॉपटेक यूनिकॉर्न Square Yards की डिजिटल लेंडिंग और मॉर्टगेज डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट Urban Money ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने बीते वित्त वर्ष में 58% साल-दर-साल (YoY) की दमदार ग्रोथ दर्ज की है, जो इसे भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बना देती है।


📈 तीन साल में 10 गुना बढ़ा राजस्व

Urban Money का राजस्व FY25 में बढ़कर ₹714 करोड़ हो गया, जबकि FY24 में यह ₹454 करोड़ और FY23 में ₹233 करोड़ था।
सिर्फ तीन साल में कंपनी का टॉपलाइन ग्रोथ 10 गुना से ज्यादा हुआ है। यह तेजी मुख्य रूप से इसके लेंडिंग नेटवर्क के विस्तार और हाउसिंग लोन की बढ़ती डिमांड की वजह से आई है।


💳 लोन ट्रांजैक्शन वैल्यू में 59% की छलांग

Urban Money के ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू (GTV) में भी FY25 के दौरान 59% की वृद्धि दर्ज की गई है — जो $5.7 बिलियन तक पहुंच गई, जबकि FY24 में यह $3.6 बिलियन थी।
वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने कुल 1.55 लाख लोन ट्रांजैक्शन पूरे किए, जो इसके स्केलेबल बिजनेस मॉडल और मजबूत पार्टनर नेटवर्क को दर्शाता है।


🏡 Uber-जैसा नेटवर्क मॉडल: 1.5 लाख से ज्यादा चैनल पार्टनर्स

Urban Money ने अपने पैरेंट Square Yards के विशाल रियल एस्टेट नेटवर्क का फायदा उठाया है।
कंपनी ने रियल एस्टेट एजेंट्स और फाइनेंशियल एडवाइजर्स को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर Uber-जैसा नेटवर्क मॉडल बनाया है। इस मॉडल से ये पार्टनर्स अब सीधे डिजिटल सिस्टम के ज़रिए होम लोन ऑरिजिनेट कर सकते हैं।

प्लेटफॉर्म के पास आज 1.5 लाख से ज्यादा चैनल पार्टनर्स हैं, जो 95 से अधिक बैंक और NBFCs से जुड़े हुए हैं।
डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, कंपनी के लगभग 87% बिजनेस का सोर्स इसके पार्टनर्स हैं, जबकि 13% ट्रांजैक्शन Urban Money खुद करती है — यह इसके टेक-लेड और एसेट-लाइट डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को साबित करता है।


⚙️ API-इंटीग्रेशन से डिजिटल लेंडिंग में बढ़त

Urban Money ने अपने पार्टनर बैंकों के Loan Origination Systems (LOS) के साथ सीधा इंटीग्रेशन किया है।
यह सिस्टम API-आधारित KYC, इनकम और क्रेडिट स्कोर वेरिफिकेशन, और प्रत्येक बैंक की क्रेडिट पॉलिसी के अनुसार इंस्टेंट एलिजिबिलिटी चेक जैसी सुविधाएं देता है।

इससे कंपनी को तेजी से डिजिटाइज हो रहे मॉर्टगेज लेंडिंग मार्केट में एक मजबूत टेक्नोलॉजिकल एडवांटेज मिला है।
हाल ही में कंपनी ने अपना रियल एस्टेट डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जो रियल-टाइम प्रॉपर्टी वैल्यूएशन और ऑटोमेटेड टाइटल वेरिफिकेशन के ज़रिए लोन अप्रूवल प्रोसेस को तेज करता है।


💼 Square Yards के लिए फाइनेंस वर्टिकल बना ग्रोथ ड्राइवर

FY25 में Square Yards की कंसॉलिडेटेड इनकम ₹1,410 करोड़ रही, जो FY24 के ₹1,001 करोड़ से 41% अधिक है।
कंपनी ने पहली बार EBITDA पॉजिटिव ₹46 करोड़ का ऑपरेशनल प्रॉफिट भी दर्ज किया।

यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि Urban Money अब Square Yards के लिए सिर्फ एक सब-ब्रांड नहीं, बल्कि एक मुख्य रेवेन्यू ड्राइवर बन चुका है।


🔄 रियल एस्टेट से प्रॉप-फिनटेक की ओर स्क्वेयर यार्ड्स का ट्रांजिशन

Square Yards ने अब अपने बिजनेस मॉडल को रियल एस्टेट ब्रोकरेज से बढ़ाकर एक फुल-स्टैक प्रॉप-फिनटेक प्लेटफॉर्म में तब्दील कर दिया है।
Urban Money की सफलता ने इस बदलाव को और मजबूती दी है।

FY26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में कंपनी का राजस्व ₹378 करोड़ तक पहुंच गया, जो 45% YoY ग्रोथ दर्शाता है।
इस अवधि में कंपनी ने ₹70 करोड़ का EBITDA प्रॉफिट भी दर्ज किया — जो इसके बिजनेस मॉडल की मजबूती को दिखाता है।


⚠️ चुनौतियाँ और आगे की राह

हालांकि Urban Money की ग्रोथ शानदार है, लेकिन कंपनी का बिजनेस अब भी रियल एस्टेट डिमांड साइकिल्स और इंटरेस्ट रेट फ्लक्चुएशन्स पर निर्भर है।
आगे की सफलता के लिए कंपनी को कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन, टेक्नोलॉजी-लेड एफिशिएंसीज़, और लेंडर पार्टनरशिप्स को गहराई देने पर ध्यान देना होगा।


🏁 निष्कर्ष

डिजिटल लेंडिंग के तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में, Square Yards की Urban Money एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरी है।
अपनी टेक्नोलॉजी, पार्टनर नेटवर्क और डेटा इंटेलिजेंस के सहारे, कंपनी आने वाले वर्षों में भारत के टॉप मॉर्टगेज डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स में अपनी जगह और मजबूत कर सकती है।

Read more :🚗 CarTrade के Q2 FY26 नतीजे: मुनाफे में दो गुना उछाल, राजस्व में 25% की बढ़ोतरी! 📈

🚗 CarTrade के Q2 FY26 नतीजे: मुनाफे में दो गुना उछाल, राजस्व में 25% की बढ़ोतरी! 📈

CarTrade

ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड्स प्लेटफॉर्म CarTrade ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में अपने राजस्व में 25% सालाना वृद्धि दर्ज की है, जबकि मुनाफा दो गुना से अधिक बढ़कर ₹64 करोड़ तक पहुंच गया है। 👏


💰 राजस्व में दमदार ग्रोथ

CarTrade का ऑपरेशनल रेवेन्यू (Revenue from Operations) Q2 FY25 के ₹154.2 करोड़ से बढ़कर Q2 FY26 में ₹193.41 करोड़ हो गया है। यानी कंपनी ने एक साल में 25% की मजबूत ग्रोथ दिखाई है।

इसके अलावा, कंपनी ने ₹28.73 करोड़ की अन्य आय (Other Income) भी दर्ज की, जिससे कुल आय (Total Income) Q2 FY26 में ₹222.14 करोड़ तक पहुंच गई।


🧩 तीन प्रमुख सेगमेंट से मजबूत परफॉर्मेंस

CarTrade का बिजनेस तीन प्रमुख सेगमेंट्स में बंटा है — Consumer, Remarketing और Classifieds। इन तीनों क्षेत्रों में कंपनी ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है।

  • Consumer Segment: यह सेगमेंट कंपनी की कुल आय का 39.4% हिस्सा रखता है। इस तिमाही में इसकी आमदनी बढ़कर ₹76.24 करोड़ हो गई, जो पिछले साल के ₹55.62 करोड़ से काफी अधिक है।
  • Remarketing Segment: इस सेगमेंट से कंपनी ने ₹62.62 करोड़ की आमदनी दर्ज की।
  • Classifieds Segment: इस तिमाही में इस श्रेणी से कंपनी को ₹55.5 करोड़ की आय हुई।

📊 इन तीनों सेगमेंट्स के बेहतर प्रदर्शन ने CarTrade की ग्रोथ को मजबूत किया है और कंपनी को स्थायी लाभ की दिशा में आगे बढ़ाया है।


🧾 खर्चों पर नियंत्रण से मुनाफे में उछाल

CarTrade ने अपने खर्चों को कंट्रोल में रखते हुए मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हासिल की है।

  • कर्मचारियों से जुड़ी लागत (Employee Benefits) कंपनी के कुल खर्च का लगभग 55% हिस्सा रही, जो पिछले साल की तुलना में 11% बढ़कर ₹77.5 करोड़ तक पहुंची।
  • अन्य खर्चों को मिलाकर कंपनी का कुल व्यय ₹142.2 करोड़ रहा, जो केवल 5% की मामूली वृद्धि है।

💹 खर्चों पर नियंत्रण और राजस्व में उछाल के संयोजन ने कंपनी के मुनाफे को लगभग दो गुना बढ़ाकर ₹64 करोड़ तक पहुंचा दिया — जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹30.7 करोड़ था।


📆 हाफ-ईयरली परफॉर्मेंस भी दमदार

CarTrade के पहले छह महीनों (H1 FY26) का प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा।

  • कुल राजस्व ₹366.45 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल 24% की वृद्धि है।
  • कंपनी का मुनाफा भी दो गुना से अधिक बढ़कर ₹111.13 करोड़ हो गया है।

यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि CarTrade की विकास रणनीति और कुशल संचालन उसे मजबूत वित्तीय स्थिति की ओर ले जा रहे हैं।


👔 नए Chief Strategy Officer की नियुक्ति

CarTrade ने अपने लीडरशिप टीम को और मजबूत करते हुए वरुण सांघी (Varun Sanghi) को Chief Strategy Officer (CSO) और सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल के रूप में नियुक्त किया है।

उनकी जिम्मेदारी कंपनी की दीर्घकालिक रणनीतियों को मजबूत करना, विस्तार योजनाओं का नेतृत्व करना और नए बिजनेस अवसरों की पहचान करना होगा। यह कदम CarTrade की तेज़ी से बढ़ती मार्केट स्थिति को और मज़बूती देगा। 💼


🎯 कर्मचारियों के लिए नए ESOPs

CarTrade ने अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए नए Employee Stock Options (ESOPs) जारी किए हैं।

कंपनी ने अपने ESOP 2021 (I) स्कीम के तहत 60,000 नए स्टॉक ऑप्शंस जारी किए हैं। मौजूदा शेयर मूल्य ₹2,830 के आधार पर इन ESOPs का अनुमानित मूल्य करीब ₹16.98 करोड़ है।

यह पहल कंपनी के कर्मचारियों को उसके दीर्घकालिक विकास सफर का हिस्सा बनने का मौका देती है, जिससे मनोबल और उत्पादकता दोनों बढ़ेंगे। 🚀


🌐 CarTrade की ग्रोथ स्टोरी जारी

CarTrade का यह प्रदर्शन न केवल ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड्स सेक्टर में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कंपनी टेक्नोलॉजी और डेटा-संचालित रणनीतियों के माध्यम से अपने बिजनेस मॉडल को लगातार सुदृढ़ कर रही है।

🔹 बेहतर खर्च नियंत्रण
🔹 स्थिर सेगमेंट ग्रोथ
🔹 कुशल नेतृत्व
🔹 और कर्मचारियों के लिए इनामदायक नीतियां

इन सभी कारकों ने CarTrade को FY26 में एक मजबूत शुरुआत दी है।


🚀 निष्कर्ष: मुनाफे की राह पर CarTrade

CarTrade का Q2 FY26 प्रदर्शन निवेशकों और उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
राजस्व में 25% की उछाल, मुनाफे का दोगुना होना और सीमित खर्च कंपनी की वित्तीय अनुशासन और रणनीतिक स्थिरता को दर्शाता है।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा —
👉 “CarTrade अब केवल ऑटो क्लासिफाइड्स प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक प्रॉफिट मशीन बन चुकी है!” 💪

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🏠 Stanza Living ने उठाए ₹283 करोड़! Accel और Motilal Oswal के नेतृत्व में नई फंडिंग से मिली नई रफ्तार 🚀

Stanza Living

भारत की सबसे तेजी से बढ़ती managed accommodation startup — Stanza Living ने एक बार फिर निवेशकों का भरोसा जीता है। कंपनी ने अपने Series B फंडिंग राउंड में लगभग ₹282.76 करोड़ (करीब $32 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व किया है मौजूदा निवेशक Accel ने, जबकि Motilal Oswal ने भी पहली बार कंपनी के कैप टेबल में एंट्री ली है।


💰 Accel ने किया बड़ा निवेश, Motilal Oswal ने दिखाई नई दिलचस्पी

Regulatory filings के मुताबिक, Stanza Living के बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया है जिसके तहत कंपनी ने 5,313 Series E CCPS शेयर जारी किए हैं, जिनकी कीमत ₹5,32,205.8 प्रति शेयर तय की गई।

इस फंडिंग के जरिए कंपनी ने कुल ₹282.76 करोड़ जुटाए हैं —

  • 💼 Accel ने डाला ₹222.78 करोड़ (लगभग $25.3 मिलियन)
  • 💸 Motilal Oswal ने निवेश किया ₹60 करोड़ (लगभग $6.8 मिलियन)

कंपनी को Accel से फंड मिल चुके हैं, जबकि Motilal Oswal का निवेश जल्द ही आने की उम्मीद है।


🏦 Debt funding के बाद नई इक्विटी पूंजी

इससे पहले अगस्त 2025 में, Stanza Living ने Alteria Capital और Innoven Capital से ₹60 करोड़ की debt funding जुटाई थी, जिसकी रिपोर्ट Entrackr ने सबसे पहले दी थी।

अब इस नई equity फंडिंग के साथ कंपनी अपने विस्तार और स्थिरता दोनों पर फोकस कर रही है।


📉 Valuation में 28% की गिरावट

हालांकि यह फंडिंग कंपनी के लिए पूंजी जुटाने के लिहाज से राहत लेकर आई है, लेकिन Entrackr के अनुमान के अनुसार Stanza Living का मूल्यांकन करीब 28% गिरकर ₹2,812 करोड़ ($320 मिलियन) रह गया है।
पिछले साल मई 2024 में जब कंपनी ने $13 मिलियन जुटाए थे, तब इसका वैल्यूएशन ₹3,900 करोड़ ($470 मिलियन) था।

यह गिरावट दर्शाती है कि भारतीय स्टार्टअप ईकोसिस्टम में अब निवेशक लाभप्रदता और वित्तीय अनुशासन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।


🏙️ Stanza Living क्या करता है?

2017 में स्थापित, दिल्ली स्थित Stanza Living एक managed accommodation प्लेटफॉर्म है जो students और young professionals के लिए आधुनिक और झंझट-रहित रहने की सुविधा प्रदान करता है।

यह कंपनी पारंपरिक PG (Paying Guest) मॉडल को tech-driven housing experience में बदल रही है, जिसमें शामिल हैं:

  • 🔑 Fully furnished rooms
  • 🍽️ Meals & housekeeping services
  • 📶 Wi-Fi, laundry, और security
  • 📱 App-based management और support

आज Stanza Living भारत के 24 शहरों में 75,000+ बेड्स का संचालन कर रहा है — जिससे यह भारत का सबसे बड़ा को-लिविंग नेटवर्क बन गया है।


💡 अब तक जुटाए गए निवेश

इस फंडिंग राउंड से पहले तक Stanza Living ने कुल $240 मिलियन से अधिक जुटाए हैं, जिनमें debt और equity rounds दोनों शामिल हैं। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • 🌐 Accel
  • 🏦 Alpha Wave
  • 💼 Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia Capital India)
  • 💰 Z47

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी फंडिंग का उपयोग विस्तार, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने में किया है।


📊 FY24 की वित्तीय स्थिति: नुकसान घटा, रेवेन्यू बढ़ा

FY24 के लिए Stanza Living ने अपने वित्तीय नतीजों में बताया था कि कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹584 करोड़ रहा, जो कि साल-दर-साल मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।

सबसे अहम बात — कंपनी ने अपने नुकसानों में 45% की कमी की। FY24 में इसका घाटा घटकर ₹273 करोड़ रह गया, जो FY23 में इससे कहीं अधिक था।

इन आंकड़ों से साफ है कि Stanza Living अब प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है, खासकर तब जब निवेशक अब सस्टेनेबल ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।


🧩 कंपनी का बिज़नेस मॉडल और विस्तार रणनीति

Stanza Living का मॉडल tech-enabled hospitality पर आधारित है।
कंपनी अपने रेसिडेंस को इस तरह डिजाइन करती है कि युवाओं को “घर जैसा आराम और हॉस्टल जैसा कम्युनिटी एक्सपीरियंस” मिले।

इस फंडिंग के जरिए कंपनी का लक्ष्य होगा —

  • 🏗️ नए शहरों में विस्तार
  • 📲 टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना
  • 💡 डिजिटल बुकिंग और मेंटेनेंस सिस्टम को बेहतर करना
  • 🏘️ नई co-living properties और premium student housing सुविधाओं का लॉन्च

💬 Stanza Living पर निवेशकों का भरोसा

Accel का यह लगातार निवेश दर्शाता है कि कंपनी में अब भी लंबी अवधि की क्षमता है।
Accel भारत के कुछ सबसे सफल स्टार्टअप्स जैसे Flipkart, Freshworks और Swiggy में शुरुआती निवेशक रहा है।

Motilal Oswal का एंट्री लेना यह दर्शाता है कि भारतीय रियल एस्टेट और अल्टरनेटिव लिविंग सेगमेंट में अब institutional investors की रुचि बढ़ रही है।


📈 आगे की राह: स्थिरता और प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस

Stanza Living अब अपने अगले चरण में है, जहां इसका प्राथमिक लक्ष्य ऑपरेशनल एफिशिएंसी, टेक्नोलॉजी इनोवेशन और कैश फ्लो में सुधार लाना है।

कंपनी का फोकस होगा कि आने वाले वित्तीय वर्षों में —

  • 🔹 नुकसान और कम किया जाए
  • 🔹 occupancy rate बढ़ाया जाए
  • 🔹 और asset-light expansion के ज़रिए ज्यादा शहरों में उपस्थिति बनाई जाए

🏁 निष्कर्ष: ‘Living Redefined’ का नया अध्याय

Stanza Living ने भारत में स्टूडेंट और प्रोफेशनल हाउसिंग मार्केट को एक नया रूप दिया है।
इस नई फंडिंग से कंपनी को न सिर्फ अपने विस्तार के लिए पूंजी मिलेगी, बल्कि सस्टेनेबल ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की राह भी मजबूत होगी।

🏡 Accel और Motilal Oswal के भरोसे के साथ, Stanza Living अब भारत के युवाओं के लिए “रहने का स्मार्ट, सुरक्षित और आधुनिक तरीका” बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है।

Stanza Living — सिर्फ रहने की जगह नहीं, एक एक्सपीरियंस है!

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🛒 Amazon ने भारत से पार किया $20 बिलियन एक्सपोर्ट का आंकड़ा — 2030 तक $80 बिलियन के लक्ष्य की ओर बढ़ाया कदम 🚀

Amazon

भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा — Amazon ने घोषणा की है कि उसने अपने Global Selling Program के तहत भारत से $20 बिलियन (लगभग ₹1.67 लाख करोड़) के ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स पूरे कर लिए हैं। कंपनी ने यह लक्ष्य अपने तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है और अब इसका अगला लक्ष्य है — 2030 तक $80 बिलियन का कुल निर्यात सक्षम करना।


🌏 Amazon Global Selling Program: भारत से दुनिया तक ‘Made in India’ की पहुंच

Amazon ने अपना Global Selling Program वर्ष 2015 में शुरू किया था। इस प्रोग्राम के तहत भारतीय MSMEs, मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स को मौका मिलता है कि वे अपने Made-in-India प्रोडक्ट्स को दुनिया के विभिन्न 18+ Amazon मार्केटप्लेस पर बेच सकें, जिनमें शामिल हैं —

🇺🇸 अमेरिका (US)
🇬🇧 यूनाइटेड किंगडम (UK)
🇦🇪 यूएई (UAE)
🇸🇦 सऊदी अरब (Saudi Arabia)
🇨🇦 कनाडा (Canada)
🇩🇪 जर्मनी (Germany)
…और कई अन्य प्रमुख ग्लोबल मार्केट्स।

पिछले एक साल में ही Amazon ने इस प्रोग्राम में 2 लाख से अधिक भारतीय एक्सपोर्टर्स को जोड़ा है, जो 33% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।

इन भारतीय विक्रेताओं ने अब तक दुनिया भर के ग्राहकों को 75 करोड़ से अधिक ‘Made in India’ प्रोडक्ट्स बेचे हैं — जो भारतीय MSME सेक्टर की वैश्विक सफलता की एक शानदार मिसाल है।


🏭 भारत के कौन से राज्य आगे हैं?

Amazon के मुताबिक, भारत के कई राज्यों ने इस निर्यात अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

📍 Delhi, Rajasthan, Gujarat, Uttar Pradesh, Tamil Nadu, Maharashtra, और Haryana — ये राज्य Amazon Global Selling प्रोग्राम में सबसे आगे रहे हैं।

इसके अलावा, छोटे शहरों और टियर-2 टियर-3 हब्स जैसे —
🏙️ Karur, Erode, Panipat, Junagadh, Anand, और Haridwar — ने भी 2024 में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां एक्सपोर्ट वैल्यू $22 मिलियन से $147 मिलियन तक दर्ज की गई।

इससे साफ है कि अब भारत के छोटे उद्योग और स्थानीय निर्माता भी ग्लोबल डिजिटल ट्रेड का हिस्सा बन रहे हैं।


📦 कौन से प्रोडक्ट्स की सबसे ज़्यादा मांग है?

Amazon ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में कुछ प्रोडक्ट कैटेगरीज़ ने शानदार Compound Annual Growth Rate (CAGR) दर्ज की है —

💊 Health & Personal Care: 45%
💅 Beauty Products: 45%
🧸 Toys: 44%
🏠 Home Products: 39%
👕 Apparel: 37%
🪑 Furniture: 36%

ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक ग्राहक भारतीय क्वालिटी प्रोडक्ट्स को लेकर भरोसा जता रहे हैं और भारत की लाइफस्टाइल, वेलनेस और हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री तेजी से इंटरनेशनल स्तर पर लोकप्रिय हो रही है।


💬 Amazon India के हेड का बयान

Srinidhi Kalvapudi, जो Amazon Global Selling India के प्रमुख हैं, ने कहा —

“हमने भारत से $20 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। यह भारतीय MSMEs की मेहनत और Amazon की वैश्विक पहुंच का नतीजा है। अब हमारा फोकस तकनीक, क्षमता निर्माण और साझेदारियों के ज़रिए निर्यात को और आगे बढ़ाने पर रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि Amazon भारत में छोटे और मध्यम कारोबारों को टेक्नोलॉजी, कंप्लायंस, लॉजिस्टिक्स, पेमेंट्स और क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशंस में आसानी दिलाने पर काम जारी रखेगा।


📘 Exports Digest 2025: भारत के ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स की झलक

Amazon ने यह भी घोषणा की है कि वह जल्द ही “Exports Digest 2025” जारी करेगा।
इस रिपोर्ट में भारत से ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स के डेटा, इनसाइट्स और ट्रेंड्स को विस्तार से साझा किया जाएगा, जिससे नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स और MSMEs को नई रणनीतियों की दिशा मिलेगी।


🌍 ‘Make in India’ का नया अध्याय — Amazon के साथ ग्लोबल सफर

Amazon का यह प्रोग्राम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और ‘Make in India’ मिशन को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।
अब भारत के छोटे शहरों के हैंडलूम उत्पाद, ज्वेलरी, होम डेकोर, ऑर्गेनिक आइटम्स और फैशन प्रोडक्ट्स न सिर्फ भारत में बल्कि अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

इसके ज़रिए —
🔹 भारत के कारीगरों और MSMEs को वैश्विक पहचान मिल रही है,
🔹 विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ रहा है,
🔹 और भारत की डिजिटल निर्यात क्षमता मजबूत हो रही है


🪙 2030 का लक्ष्य: $80 बिलियन का बड़ा सपना

अब जबकि Amazon ने $20 बिलियन का आंकड़ा हासिल कर लिया है, कंपनी का अगला मिशन और भी बड़ा है —
📈 2030 तक भारत से $80 बिलियन एक्सपोर्ट सक्षम करना।

इसके लिए Amazon का फोकस होगा —
💡 नई टेक्नोलॉजी में निवेश,
🚚 सप्लाई चेन को तेज़ और पारदर्शी बनाना,
🤝 सरकार और इंडस्ट्री बॉडीज़ के साथ साझेदारी,
और 🌐 भारतीय उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड के रूप में प्रमोट करना।


🏁 निष्कर्ष: भारत से दुनिया तक — Amazon बना MSMEs का ग्लोबल साथी

Amazon Global Selling Program ने दिखा दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भारत के छोटे व्यापारों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकते हैं
$20 बिलियन एक्सपोर्ट्स सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और उद्यमशीलता की कहानी है।

अगर Amazon अपनी रफ्तार इसी तरह बनाए रखता है, तो 2030 तक $80 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य केवल संभव ही नहीं, बल्कि निश्चित भी लगता है।

🌟 ‘Made in India, Sold to the World’ — यही है Amazon का विज़न और भारत के MSMEs की नई ताकत!

Read more : VerSe Innovation ने नियुक्त किया नया Group CFO — IPO तैयारी में तेज़ी,

📰 VerSe Innovation ने नियुक्त किया नया Group CFO — IPO तैयारी में तेज़ी,

VerSe Innovation

🚀 बेंगलुरु स्थित डिजिटल मीडिया और AI टेक कंपनी VerSe Innovation, जो Dailyhunt, Josh, NexVerse.ai, VerSe Collab, Magzter, और ValueLeaf जैसे प्लेटफॉर्म की पैरेंट कंपनी है, ने Prakashan Manikoth को अपना Group Chief Financial Officer (Group CFO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति कंपनी की अगली बड़ी रणनीतिक चाल—IPO की तैयारी—के लिहाज से एक अहम कदम मानी जा रही है।


💼 Prakashan Manikoth का अनुभव और भूमिका

Prakashan Manikoth के पास 25 से अधिक वर्षों का समृद्ध अनुभव है, जिसमें उन्होंने Wipro, TCS, Tata Teleservices, और LeadSquared जैसी बड़ी कंपनियों में वित्तीय नेतृत्व की भूमिकाएं निभाई हैं।

  • Wipro में उन्होंने कंपनी के ग्लोबल फाइनेंस ऑपरेशंस को संभाला,
  • TCS में उन्होंने इमर्जिंग मार्केट्स और कोर बैंकिंग बिज़नेस यूनिट्स के लिए वित्तीय प्रबंधन का नेतृत्व किया,
  • और LeadSquared में CFO के रूप में उन्होंने कंपनी के ग्लोबल ऑपरेशंस के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अब VerSe Innovation में Group CFO के रूप में, Manikoth की जिम्मेदारियों में शामिल होंगे —
🔹 ग्लोबल फाइनेंस मैनेजमेंट
🔹 स्ट्रैटेजिक प्लानिंग और इन्वेस्टर रिलेशन
🔹 M&A और कैपिटल एलोकेशन
🔹 और सबसे अहम — IPO की तैयारी, फाइनेंशियल डिसिप्लिन और रिस्क मैनेजमेंट को मज़बूत करना


🌐 VerSe Innovation: भारतीय डिजिटल कंटेंट का अग्रणी खिलाड़ी

VerSe Innovation भारत की उन चुनिंदा यूनिकॉर्न कंपनियों में से है जिसने स्थानीय भाषाओं में कंटेंट डिलीवरी और AI टेक्नोलॉजी को जोड़कर एक विशाल डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया है।

कंपनी के प्रमुख प्लेटफॉर्म इस प्रकार हैं —

📱 Dailyhunt – भारत का सबसे बड़ा लोकल लैंग्वेज न्यूज़ और कंटेंट ऐप, जो देशभर में 350 मिलियन+ यूज़र्स तक पहुंच रखता है।
🎥 Josh – भारत का अग्रणी शॉर्ट वीडियो ऐप, जो देश के क्रिएटर्स को डिजिटल पहचान और कमाई के नए अवसर देता है।
🤖 NexVerse.ai – कंपनी का AI-पावर्ड टेक्नोलॉजी वेंचर, जो डिजिटल कंटेंट और ऑटोमेशन को नई दिशा दे रहा है।
💡 VerSe Collab, Magzter और ValueLeaf – ये सब मिलकर VerSe के कंटेंट, एडटेक और AI टूल्स इकोसिस्टम को और मजबूत बनाते हैं।


📊 VerSe की वित्तीय स्थिति: FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ

TheKredible के अनुसार, VerSe Innovation का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में ₹1,930 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY24 के ₹1,029 करोड़ से लगभग दोगुना है।

📈 कंपनी का कहना है कि वह FY25 की दूसरी छमाही में ग्रुप-लेवल पर प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की राह पर है।

यह तेज़ ग्रोथ मुख्य रूप से AI-पावर्ड कंटेंट इंजन, क्रिएटर मॉनेटाइजेशन टूल्स, और विज्ञापन राजस्व में वृद्धि से आई है। VerSe के लिए FY25 बेहद अहम साल है क्योंकि कंपनी न केवल अपने यूज़र बेस को बढ़ा रही है, बल्कि ग्लोबल कंटेंट मार्केट्स में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है।


💰 IPO की तैयारी और इन्वेस्टर्स का भरोसा

VerSe Innovation फिलहाल अपने IPO की तैयारी में जुटी हुई है।
Prakashan Manikoth की नियुक्ति इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, ताकि कंपनी का फाइनेंशियल स्ट्रक्चर, ऑडिट प्रोसेस और गवर्नेंस IPO के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।

कंपनी के पास पहले से ही कई ग्लोबल इन्वेस्टर्स का मजबूत समर्थन है, जिनमें शामिल हैं —
🏦 CPP Investments
🏦 Ontario Teachers’ Pension Plan
🏦 Qatar Investment Authority (QIA)
🏦 Carlyle Group
🏦 Baillie Gifford
🏦 Goldman Sachs
🏦 Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India)

VerSe ने अब तक $1.5 बिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है और इसकी वैल्यूएशन लगभग $5 बिलियन (₹41,000 करोड़) तक पहुंच चुकी है।


🔍 AI और कंटेंट टेक्नोलॉजी में नया अध्याय

VerSe Innovation का विज़न सिर्फ डिजिटल न्यूज़ या वीडियो ऐप तक सीमित नहीं है — कंपनी AI, कंटेंट इंटेलिजेंस और ग्लोबल क्रिएटर इकॉनमी के संगम पर एक नया भविष्य गढ़ रही है।

NexVerse.ai और Dailyhunt Premium जैसे प्रोडक्ट्स इस दिशा में इसके प्रयोग हैं, जो AI के ज़रिए
📊 यूज़र एक्सपीरियंस को पर्सनलाइज़ करते हैं,
💬 लोकल लैंग्वेज कंटेंट को और सटीक बनाते हैं,
और 🎯 ब्रांड्स को डेटा-ड्रिवन मार्केटिंग सॉल्यूशंस प्रदान करते हैं।


🏁 निष्कर्ष: IPO की राह पर तेज़ी से बढ़ता VerSe Innovation

Prakashan Manikoth की नियुक्ति के साथ VerSe Innovation ने यह संकेत दिया है कि कंपनी अब अपने अगले बड़े पड़ाव — IPO लॉन्च — की ओर तेज़ी से बढ़ रही है।
उनका व्यापक अनुभव कंपनी को वित्तीय अनुशासन, गवर्नेंस और इन्वेस्टर रिलेशन के क्षेत्र में और सशक्त बनाएगा।

VerSe के लिए आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे यह AI-चालित डिजिटल मीडिया यूनिकॉर्न न केवल भारत बल्कि वैश्विक बाजारों में अपनी कहानी और कंटेंट टेक्नोलॉजी को नई ऊंचाइयों तक ले जाता है।

Read more : Wealthy ने FY25 में 72% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की, लेकिन घाटा भी बढ़कर ₹35 करोड़ तक पहुंचा 

💰 Wealthy ने FY25 में 72% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की, लेकिन घाटा भी बढ़कर ₹35 करोड़ तक पहुंचा 📈

Wealthy

भारत के तेजी से बढ़ते wealth management सेक्टर में एक और नाम लगातार सुर्खियाँ बटोर रहा है — Wealthy
AWI-backed यह निवेश सलाह और वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में अपने revenue scale में शानदार 72% साल-दर-साल (YoY) वृद्धि दर्ज की है।

यह ग्रोथ कंपनी के FY24 में दर्ज दो गुना विस्तार के बाद आई है, जिससे यह साबित होता है कि Wealthy अब निरंतर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। 🚀


💹 FY25 में ₹25 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू

कंपनी के Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Wealthy का operating revenue FY25 में ₹25 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY24 के ₹14.5 करोड़ से 72% की वृद्धि दर्शाता है।

Wealthy मुख्य रूप से retail investors को investment management tools, portfolio tracking, और advisory services प्रदान करता है। कंपनी का उद्देश्य है कि आम निवेशकों को प्रोफेशनल-ग्रेड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस उपलब्ध कराए जाएँ — वह भी डिजिटल और आसान रूप में। 💼📊


🏦 Brokerage से हुई सबसे अधिक कमाई

FY25 में Wealthy की आय का सबसे बड़ा हिस्सा brokerage services से आया, जिसने कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 56% योगदान दिया।
यह आय पिछले साल के ₹6.3 करोड़ से बढ़कर ₹14 करोड़ तक पहुँच गई — यानी 2.2 गुना से अधिक की वृद्धि!

दूसरी ओर, advisory services से कंपनी को ₹9 करोड़ की आय हुई, जो पिछले साल की तुलना में 24% की बढ़ोतरी है।
वहीं commission income ने भी शानदार प्रदर्शन किया — यह FY25 में ₹2 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY24 की तुलना में 110% अधिक है।

कुल मिलाकर, Wealthy का non-operating income भी FY25 में ₹10 करोड़ रहा, जिससे कंपनी की total income ₹35 करोड़ तक पहुँच गई। 💰


👥 Employee Benefit Expense सबसे बड़ा खर्चा

ज्यादातर fintech और investment advisory कंपनियों की तरह Wealthy का भी सबसे बड़ा खर्च कर्मचारी वेतन और बेनिफिट्स पर हुआ।
FY25 में यह लागत ₹37 करोड़ रही, जो कंपनी के कुल खर्च का 53% से अधिक हिस्सा है।

यह खर्च पिछले वित्त वर्ष के ₹30 करोड़ से 23% बढ़ा है।
इसके अलावा, कंपनी के अन्य खर्चे भी तेजी से बढ़े हैं —

  • ⚖️ Legal और professional fees: ₹9 करोड़ (FY24 में ₹4.3 करोड़)
  • 💸 Commission costs: ₹7.6 करोड़ (69% वृद्धि)
  • 📢 Advertising और marketing: ₹2.5 करोड़ (92% उछाल)

कुल मिलाकर, Wealthy का total expenditure FY25 में ₹70 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹49.5 करोड़ से 41% अधिक है।


📉 घाटा बढ़कर ₹35 करोड़ हुआ

हालांकि कंपनी की revenue growth काफी मजबूत रही, लेकिन खर्चों की तेज़ रफ्तार ने profitability पर दबाव डाला।
FY25 में Wealthy का net loss ₹35 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY24 के ₹24 करोड़ के घाटे से 46% ज्यादा है।

कंपनी का ROCE (-155.17%) और EBITDA margin (-152%) दर्शाता है कि फिलहाल कंपनी profitability की दिशा में संघर्ष कर रही है।

फिर भी, कंपनी का unit economics बेहतर हुआ है —
FY25 में Wealthy ने हर ₹1 की आय पर ₹2.8 खर्च किए, जो FY24 के ₹3.41 प्रति ₹1 से कम है।
इसका मतलब है कि कंपनी धीरे-धीरे efficiency सुधार रही है। ⚙️📉


🏢 कंपनी की वित्तीय स्थिति

FY25 के अंत तक, Bengaluru-स्थित Wealthy के पास ₹17.5 करोड़ के current assets थे, जिनमें से ₹7 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस के रूप में रखे गए थे।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने खर्चों को नियंत्रित रखते हुए अपनी नकदी स्थिति स्थिर बनाए रखी है, ताकि आगे के विस्तार की तैयारी की जा सके। 💵


🌐 Wealthy का बिजनेस मॉडल

Wealthy का core model भारत के retail investors के लिए बनाया गया है।
प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स को निम्नलिखित सेवाएँ मिलती हैं —

  • 📊 Investment tracking tools
  • 🧠 Expert advisory services
  • 💼 Goal-based investment planning
  • 🧾 Real-time portfolio analytics

कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य है कि भारत में financial planning और wealth management को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाया जाए।


💡 निवेशकों का भरोसा और फंडिंग

Wealthy को AWI (Alpha Wave Incubation) जैसे प्रतिष्ठित निवेशकों का समर्थन प्राप्त है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने कई दौरों में फंड जुटाकर अपने प्लेटफॉर्म को AI-driven advisory tools और data analytics के साथ अपग्रेड किया है।

हालांकि FY25 में घाटा बढ़ा है, लेकिन निवेशकों का मानना है कि यह “growth phase losses” हैं — यानी कंपनी अभी user acquisition और tech infrastructure में निवेश कर रही है।


📈 आगे की राह: ग्रोथ के साथ मुनाफे की ओर

Wealthy ने अपने FY25 के नतीजों से यह साबित कर दिया है कि उसकी revenue engine मजबूत हो रही है।
भले ही घाटा अभी चिंता का विषय है, लेकिन लगातार unit cost में गिरावट और revenue diversification यह दर्शाता है कि कंपनी मुनाफे की दिशा में बढ़ रही है।

फिनटेक सेक्टर के जानकारों का मानना है कि अगर Wealthy इसी रफ्तार से अपने customer base और technology integration को बढ़ाता है, तो अगले दो वर्षों में यह कंपनी break-even तक पहुँच सकती है। 🚀


🧭 निष्कर्ष

Wealthy ने FY25 में भले घाटा झेला हो, लेकिन उसका ग्रोथ ट्रैक रेकॉर्ड और बेहतर होती operational efficiency यह संकेत देती है कि कंपनी का भविष्य उज्ज्वल है।

भारत में financial literacy और digital investment adoption के बढ़ने के साथ Wealthy जैसी कंपनियाँ करोड़ों नए निवेशकों को स्मार्ट वित्तीय निर्णय लेने में मदद करेंगी।

📊

“Wealth creation अब सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं रही — Wealthy जैसे प्लेटफॉर्म इसे हर भारतीय तक पहुँचा रहे हैं।” 💫

Read more : Dunzo के को-फाउंडर Kabeer Biswas ने छोड़ा Flipkart Minutes का साथ, अब BigBasket से जुड़ने की तैयारी! 

⚡ Dunzo के को-फाउंडर Kabeer Biswas ने छोड़ा Flipkart Minutes का साथ, अब BigBasket से जुड़ने की तैयारी! 🛒

Flipkart Minutes

भारत के quick commerce सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Dunzo के co-founder और पूर्व CEO, Kabeer Biswas ने अब Flipkart में अपनी भूमिका से इस्तीफा दे दिया है। वे Flipkart में Vice President (Quick Commerce) के तौर पर Flipkart Minutes प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे थे।

Flipkart ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की है कि अब इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व Kunal Gupta, जो कंपनी के एक पुराने और अनुभवी वाइस प्रेसिडेंट हैं, संभालेंगे। 🙌


🏁 एक साल से भी कम समय में Exit

Kabeer Biswas ने जनवरी 2025 में Flipkart से जुड़कर कंपनी की 10-मिनट डिलीवरी सर्विस “Flipkart Minutes” को लॉन्च और स्केल करने की जिम्मेदारी संभाली थी।
लेकिन अब उन्होंने इस पद से एक साल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया, जिससे Flipkart के new commerce push में एक और leadership change दर्ज हुआ है।

Flipkart का यह initiative कंपनी की traditional e-commerce operations से आगे बढ़ने की कोशिश का हिस्सा था, ताकि वह Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे स्थापित quick commerce खिलाड़ियों से मुकाबला कर सके। ⚔️


🚀 अब BigBasket में नई भूमिका की चर्चा

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, Biswas अब BigBasket से जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
स्रोतों के मुताबिक, BigBasket ने उन्हें एक औपचारिक offer letter भी भेजा है।

सूत्रों ने बताया,

“Discussions advanced stage में हैं और Biswas BigBasket के quick commerce vertical को लीड करेंगे। यह भूमिका कंपनी के fast delivery business को बढ़ाने पर केंद्रित होगी।”

अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह Biswas के करियर का एक नया अध्याय साबित होगा — Dunzo से Flipkart और अब BigBasket तक की यात्रा! 🧭


🧑‍💼 कौन हैं Kabeer Biswas?

Kabeer Biswas भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का एक जाना-पहचाना नाम हैं।
उन्होंने 2014 में Dunzo की सह-स्थापना की थी — जो भारत की शुरुआती hyperlocal delivery कंपनियों में से एक रही है।

Dunzo ने “pick up & drop anything” मॉडल के जरिए बड़ी लोकप्रियता हासिल की और बाद में Google, Reliance Retail, Lightbox जैसे निवेशकों से भी बड़ी फंडिंग जुटाई। 🚴‍♂️

हालांकि हाल के वर्षों में Dunzo को funding crunch और operational challenges का सामना करना पड़ा, जिसके बाद Biswas ने 2023 के अंत में CEO पद से इस्तीफा दिया था।


🏢 Flipkart Minutes क्या है?

Flipkart Minutes को 2025 की शुरुआत में लॉन्च किया गया था — एक 10-minute grocery and essentials delivery platform, जो Flipkart के लिए new commerce category में प्रवेश का पहला बड़ा कदम था।

कंपनी का मकसद था कि वह अपने मजबूत logistics network और customer base का उपयोग करके ultra-fast delivery बाजार में प्रवेश करे।

Kabeer Biswas के नेतृत्व में Flipkart Minutes ने Bengaluru और Hyderabad में pilot phase शुरू किया था और आगे कई अन्य शहरों में विस्तार की योजना थी।

लेकिन Biswas के अचानक इस्तीफे ने इस प्रोजेक्ट की दिशा और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 🤔


👨‍💼 अब जिम्मेदारी Kunal Gupta के कंधों पर

Flipkart ने कहा है कि Kunal Gupta, जो कंपनी के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं, अब “Flipkart Minutes” की steering संभालेंगे।

कंपनी ने बयान में कहा —

“हम Kabeer के योगदान की सराहना करते हैं। अब Kunal Gupta इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे ताकि बिजनेस और ऑपरेशंस सुचारू रूप से चलते रहें।”

Kunal Gupta पहले भी Flipkart के कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे हैं और माना जा रहा है कि वे इस डिवीजन को stabilize करने पर फोकस करेंगे।


🧩 Quick Commerce Sector में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत में quick commerce बाजार फिलहाल Zomato-backed Blinkit, Zepto, और Swiggy Instamart के बीच सिमटा हुआ है।
Flipkart का इसमें प्रवेश late but ambitious move माना गया था।

वहीं BigBasket भी अपनी BB Now और BB Express सेवाओं के जरिए इस सेगमेंट में तेजी से ग्रोथ कर रहा है।
अगर Biswas BigBasket से जुड़ते हैं, तो कंपनी को उनके अनुभव का बड़ा फायदा मिल सकता है — खासकर fast delivery और last-mile operations के क्षेत्र में। 🚚💨


📊 Quick Commerce का विस्तार और चुनौतियाँ

  • भारत का quick commerce बाजार 2025 तक $5 बिलियन से अधिक का होने का अनुमान है।
  • लेकिन इस सेगमेंट में unit economics, delivery cost, और supply chain optimization जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • कई स्टार्टअप्स को funding की कमी के कारण स्केल करने में दिक्कत आई है।

इस बीच, Flipkart और BigBasket जैसी बड़ी कंपनियाँ अपने मजबूत बैकएंड नेटवर्क और कैश फ्लो के दम पर इस सेक्टर को स्थायी बनाने की कोशिश में हैं। 💼


🧭 निष्कर्ष: नया मोड़, नया मौका

Kabeer Biswas का Flipkart से जाना और BigBasket में संभावित जुड़ाव भारत के quick commerce sector में power reshuffle जैसा कदम है।
Biswas का अनुभव, execution skills और Dunzo जैसी कंपनी बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें इस क्षेत्र में एक key player बनाता है।

अब देखना यह होगा कि क्या वह BigBasket को Blinkit और Zepto जैसी कंपनियों के मुकाबले में और मजबूत बना पाएंगे या नहीं।

📌 लेकिन एक बात तय है — Quick Commerce की रफ्तार भारत में थमने वाली नहीं है, और Kabeer Biswas जैसे दिग्गज इस रेस को और भी रोमांचक बना रहे हैं! ⚡🛍️

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