गुरुग्राम स्थित ट्रैवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म Travel Boutique Online (TBO) ने वित्तीय वर्ष FY26 की पहली तिमाही (Q1) के अनऑडिटेड नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान 22% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, हालांकि मुनाफा लगभग स्थिर बना रहा।
कंपनी की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹511 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 में ₹418 करोड़ थी। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त रिपोर्ट में दर्ज है।
📈 रेवेन्यू ग्रोथ: होटल और पैकेज बुकिंग बना प्रमुख स्त्रोत
TBO की रेवेन्यू ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान होटल और ट्रैवल पैकेज बुकिंग से आया, जो कि कंपनी की कुल आय का 83% हिस्सा बना।
🏨 होटल व पैकेज बुकिंग से आय: ₹423 करोड़ (32% YoY वृद्धि)
✈️ एयर टिकटिंग से आय: ₹78 करोड़
💼 अन्य सेवाएं (एड-ऑन आदि): ₹10 करोड़
Q1 FY25 में होटल और पैकेज बुकिंग से ₹321 करोड़ की आय हुई थी, जिससे यह सेगमेंट सबसे तेजी से बढ़ने वाला बना।
💸 लागत में भी 27% की वृद्धि, सर्विस फीस रहा सबसे बड़ा खर्च
जैसे-जैसे होटल व पैकेज बुकिंग बढ़ी, वैसा ही असर कंपनी के खर्चों पर भी पड़ा। Q1 FY26 में कंपनी का कुल खर्च ₹456 करोड़ रहा, जो कि Q1 FY25 के ₹358 करोड़ से 27% अधिक है।
🧾 सर्विस फीस: ₹178 करोड़ (कुल खर्च का 39%)
👩💻 कर्मचारी लाभ लागत: ₹103 करोड़
⚙️ अन्य ऑपरेशनल खर्चे: ₹175 करोड़ (अनुमानित)
🗣️ “मार्केट में ट्रैवल डिमांड के रिवाइवल के साथ हमने अपने होटल व पैकेज सेगमेंट को स्केल किया है। हमारा ध्यान मार्जिन बनाए रखते हुए ग्रोथ पर केंद्रित रहेगा।” — TBO प्रवक्ता
📊 प्रॉफिट्स स्थिर लेकिन सकारात्मक
जहां रेवेन्यू और खर्च दोनों बढ़े, वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) लगभग स्थिर रहा।
💹 Q1 FY26 प्रॉफिट: ₹63 करोड़
💹 Q1 FY25 प्रॉफिट: ₹61 करोड़
🔍 वृद्धि: महज़ 3% YoY
यह मामूली वृद्धि बताती है कि कंपनी अब खर्च प्रबंधन और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान दे रही है।
🏦 शेयर बाजार में प्रदर्शन: मार्केट कैप ₹15,117 करोड़ पार
TBO Tek का शेयर 29 जुलाई की दोपहर (3:20 बजे) तक ₹1,405 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे इसका कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹15,117 करोड़ हो गया है।
💡 यह आंकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों में कंपनी को लेकर भरोसा बना हुआ है, भले ही प्रॉफिट स्थिर रहा हो।
🧭 ट्रैवल सेक्टर में TBO की अहम भूमिका
TBO एक B2B ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म है, जो दुनियाभर के ट्रैवल एजेंट्स को होटल, फ्लाइट, पैकेज, ट्रांसफर जैसी सुविधाएं मुहैया कराता है।
कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय और ग्लोबल ट्रैवल सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाई है और डिजिटलीकरण के इस दौर में एसेट-लाइट, टेक-ड्रिवन मॉडल को अपनाकर ग्रोथ को बरकरार रखा है।
🌍 TBO की मौजूदगी:
100+ देशों में B2B ग्राहक
लाखों होटल्स और ट्रैवल ऑप्शंस
मल्टी-करेन्सी और मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट
🔮 आगे की रणनीति: एक्सपेंशन और SaaS-आधारित सॉल्यूशंस
TBO का फोकस अब भारत के अलावा Southeast Asia, Middle East और यूरोप में भी अपनी सेवाएं बढ़ाने पर है। साथ ही, कंपनी AI-बेस्ड प्राइसिंग, इंटेलिजेंट ट्रैवल इंजन और SaaS टूल्स पर भी काम कर रही है।
💡 संभावित विकास क्षेत्र:
स्मार्ट होटल रेटिंग एल्गोरिद्म
डायनामिक पैकेजिंग टूल्स
एजेंट-सेंट्रिक मोबाइल ऐप्स
इंटरनेशनल ट्रैवल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन
📝 निष्कर्ष: स्थिर प्रॉफिट्स के साथ मजबूत ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है TBO
TBO Tek का Q1 FY26 रिपोर्ट दर्शाता है कि कंपनी रेवेन्यू में निरंतर वृद्धि और स्टेबल प्रॉफिट के जरिए एक मजबूत, टिकाऊ बिज़नेस मॉडल तैयार कर रही है।
📌 प्रमुख हाइलाइट्स:
✅ 22% रेवेन्यू ग्रोथ
✅ होटल बुकिंग से 83% रेवेन्यू
✅ 27% खर्च में वृद्धि
✅ 3% प्रॉफिट ग्रोथ
✅ ₹15,117 करोड़ मार्केट कैप
बिज़नेस-ट्रैवल सेगमेंट में बढ़ती मांग के साथ TBO भविष्य में भारत की अग्रणी ट्रैवल SaaS कंपनियों में शामिल हो सकता है।
EV और ट्रैवल जैसे उभरते सेक्टर की ताज़ा रिपोर्ट्स के लिए पढ़ते रहिए — FundingRaised.in 🚀
बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Ather Energyने वित्तीय वर्ष FY26 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी ने 79% की साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे में 3% की कमी भी दर्शाई है।
💰 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में ₹645 करोड़ की छलांग
Ather Energy का Q1 FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹645 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही (Q1 FY25) में यह ₹360 करोड़ था। यह 79% की शानदार बढ़त को दर्शाता है।
यह डेटा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दर्ज Ather की रिपोर्ट से सामने आया है।
💬 “FY26 की शुरुआत हमारे लिए काफी मज़बूत रही है। रेवेन्यू में बढ़त और घाटे में गिरावट से हमारा फोकस स्केलेबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दिखता है,” — तरुण मेहता, सह-संस्थापक और CEO, Ather Energy
📉 लागत का बढ़ता बोझ, फिर भी घाटा घटा
कंपनी की कुल लागत Q1 FY26 में ₹851 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 के ₹551 करोड़ से 54% अधिक है।
मटेरियल कॉस्ट (बैटरी और कंपोनेंट्स): ₹518 करोड़ (74% YoY वृद्धि)
कर्मचारी लाभ लागत: ₹119 करोड़ (37% YoY वृद्धि)
डिप्रीसिएशन व अमॉर्टाइज़ेशन: ₹48 करोड़ (20% वृद्धि)
अन्य ऑपरेशनल खर्चे: ₹166 करोड़ (31% वृद्धि)
इन सबके बावजूद, Ather ने अपने घाटे को 3% तक घटाकर ₹178 करोड़ कर लिया, जो कि Q1 FY25 में ₹183 करोड़ था।
📊 मुख्य फाइनेंशियल आंकड़े – Q1 FY26
पैरामीटर
Q1 FY26
Q1 FY25
बदलाव (%)
ऑपरेटिंग रेवेन्यू
₹645 करोड़
₹360 करोड़
+79%
कुल खर्च
₹851 करोड़
₹551 करोड़
+54%
नेट घाटा
₹178 करोड़
₹183 करोड़
-3%
मटेरियल कॉस्ट
₹518 करोड़
₹297 करोड़
+74%
कर्मचारी लागत
₹119 करोड़
₹87 करोड़
+37%
🛵 जुलाई में बिक्री बढ़ी, मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँचा
Ather ने जुलाई 2025 में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि जून की तुलना में 10.59% ज़्यादा है (जून में 14,677 यूनिट्स)। इस वृद्धि के साथ Ather ने भारत के EV टू-व्हीलर मार्केट में चौथे स्थान को बनाए रखा और इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँच गया।
🔹 मार्केट पोजिशन: 4th 🔹 जुलाई में बिक्री: 16,231 यूनिट्स 🔹 जून में बिक्री: 14,677 यूनिट्स 🔹 MoM वृद्धि: 10.59%
📈 शेयर बाजार में मजबूती | मार्केट कैप $1.5 बिलियन पार
Ather Energy ने 6 मई 2025 को NSE पर लिस्टिंग की थी, जिसकी लिस्टिंग कीमत ₹328 प्रति शेयर थी।
वर्तमान में इसका शेयर (29 जुलाई को दोपहर 2:51 बजे) ₹375 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹13,723 करोड़ ($1.5 बिलियन) पहुंच गया है।
📌 यह लिस्टिंग Ola Electric और अन्य EV कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में Ather की पकड़ को मजबूत करती है।
जहां Ather ने FY26 की पहली तिमाही में ग्रोथ दर्ज की, वहीं उसकी प्रमुख प्रतिस्पर्धी Ola Electric को इस दौरान झटका लगा:
Ola Electric की Q1 FY26 रिपोर्ट:
टॉपलाइन में 50% की गिरावट
घाटा 23% बढ़ा
इस तुलना में, Ather की रेवेन्यू ग्रोथ और घाटे में कमी उसे एक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाली कंपनी बनाती है।
कंपनी
रेवेन्यू YoY
घाटा YoY
Ather
+79%
-3%
Ola Electric
-50%
+23%
🔮 आगे की रणनीति: ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट एक्सपेंशन
Ather का ध्यान अब भारत के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपने उत्पादों को स्केल करने पर है। कंपनी ने हाल ही में अपने स्मार्टस्कूटर मॉडल्स को अपग्रेड किया है और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी सुधार लाया है।
संभावित फोकस क्षेत्र:
सप्लाई चेन ऑप्टिमाइज़ेशन
स्मार्ट बैटरी R&D
इंटरनेशनल लॉन्चेस (SEA, यूरोप)
डिजिटल इनोवेशन (Ather App, OTA अपडेट्स)
📝 निष्कर्ष: EV मार्केट में Ather की पकड़ मज़बूत हो रही है
Ather Energy की पहली तिमाही की रिपोर्ट FY26 के लिए एक सकारात्मक संकेत देती है।
✅ रेवेन्यू में दमदार ग्रोथ ✅ घाटे में गिरावट ✅ बिक्री में स्थिर उछाल ✅ शेयर बाजार में मजबूत प्रदर्शन
जबकि Ola Electric जैसे प्रतिस्पर्धी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, Ather अपनी टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट इनोवेशन और फाइनेंशियल एफिशिएंसी के दम पर भारत के EV सेगमेंट में एक मज़बूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
Ather की अगली चालों और EV इंडस्ट्री के ट्रेंड्स के लिए जुड़े रहेंFundingRaised.inके साथ! 🚀बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Ather Energy ने वित्तीय वर्ष FY26 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी ने 79% की साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे में 3% की कमी भी दर्शाई है।
💰 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में ₹645 करोड़ की छलांग
Ather Energy का Q1 FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹645 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही (Q1 FY25) में यह ₹360 करोड़ था। यह 79% की शानदार बढ़त को दर्शाता है।
यह डेटा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दर्ज Ather की रिपोर्ट से सामने आया है।
💬 “FY26 की शुरुआत हमारे लिए काफी मज़बूत रही है। रेवेन्यू में बढ़त और घाटे में गिरावट से हमारा फोकस स्केलेबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दिखता है,” — तरुण मेहता, सह-संस्थापक और CEO, Ather Energy
📉 लागत का बढ़ता बोझ, फिर भी घाटा घटा
कंपनी की कुल लागत Q1 FY26 में ₹851 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 के ₹551 करोड़ से 54% अधिक है।
मटेरियल कॉस्ट (बैटरी और कंपोनेंट्स): ₹518 करोड़ (74% YoY वृद्धि)
कर्मचारी लाभ लागत: ₹119 करोड़ (37% YoY वृद्धि)
डिप्रीसिएशन व अमॉर्टाइज़ेशन: ₹48 करोड़ (20% वृद्धि)
अन्य ऑपरेशनल खर्चे: ₹166 करोड़ (31% वृद्धि)
इन सबके बावजूद, Ather ने अपने घाटे को 3% तक घटाकर ₹178 करोड़ कर लिया, जो कि Q1 FY25 में ₹183 करोड़ था।
📊 मुख्य फाइनेंशियल आंकड़े – Q1 FY26
पैरामीटर
Q1 FY26
Q1 FY25
बदलाव (%)
ऑपरेटिंग रेवेन्यू
₹645 करोड़
₹360 करोड़
+79%
कुल खर्च
₹851 करोड़
₹551 करोड़
+54%
नेट घाटा
₹178 करोड़
₹183 करोड़
-3%
मटेरियल कॉस्ट
₹518 करोड़
₹297 करोड़
+74%
कर्मचारी लागत
₹119 करोड़
₹87 करोड़
+37%
🛵 जुलाई में बिक्री बढ़ी, मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँचा
Ather ने जुलाई 2025 में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि जून की तुलना में 10.59% ज़्यादा है (जून में 14,677 यूनिट्स)। इस वृद्धि के साथ Ather ने भारत के EV टू-व्हीलर मार्केट में चौथे स्थान को बनाए रखा और इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुँच गया।
🔹 मार्केट पोजिशन: 4th 🔹 जुलाई में बिक्री: 16,231 यूनिट्स 🔹 जून में बिक्री: 14,677 यूनिट्स 🔹 MoM वृद्धि: 10.59%
📈 शेयर बाजार में मजबूती | मार्केट कैप $1.5 बिलियन पार
Ather Energy ने 6 मई 2025 को NSE पर लिस्टिंग की थी, जिसकी लिस्टिंग कीमत ₹328 प्रति शेयर थी।
वर्तमान में इसका शेयर (29 जुलाई को दोपहर 2:51 बजे) ₹375 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹13,723 करोड़ ($1.5 बिलियन) पहुंच गया है।
📌 यह लिस्टिंग Ola Electric और अन्य EV कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में Ather की पकड़ को मजबूत करती है।
🆚 Ola Electric vs Ather Energy: कौन आगे?
जहां Ather ने FY26 की पहली तिमाही में ग्रोथ दर्ज की, वहीं उसकी प्रमुख प्रतिस्पर्धी Ola Electric को इस दौरान झटका लगा:
Ola Electric की Q1 FY26 रिपोर्ट:
टॉपलाइन में 50% की गिरावट
घाटा 23% बढ़ा
इस तुलना में, Ather की रेवेन्यू ग्रोथ और घाटे में कमी उसे एक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाली कंपनी बनाती है।
कंपनी
रेवेन्यू YoY
घाटा YoY
Ather
+79%
-3%
Ola Electric
-50%
+23%
🔮 आगे की रणनीति: ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केट एक्सपेंशन
Ather का ध्यान अब भारत के साथ-साथ इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपने उत्पादों को स्केल करने पर है। कंपनी ने हाल ही में अपने स्मार्टस्कूटर मॉडल्स को अपग्रेड किया है और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी सुधार लाया है।
संभावित फोकस क्षेत्र:
सप्लाई चेन ऑप्टिमाइज़ेशन
स्मार्ट बैटरी R&D
इंटरनेशनल लॉन्चेस (SEA, यूरोप)
डिजिटल इनोवेशन (Ather App, OTA अपडेट्स)
📝 निष्कर्ष: EV मार्केट में Ather की पकड़ मज़बूत हो रही है
Ather Energy की पहली तिमाही की रिपोर्ट FY26 के लिए एक सकारात्मक संकेत देती है।
✅ रेवेन्यू में दमदार ग्रोथ ✅ घाटे में गिरावट ✅ बिक्री में स्थिर उछाल ✅ शेयर बाजार में मजबूत प्रदर्शन
जबकि Ola Electric जैसे प्रतिस्पर्धी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, Ather अपनी टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट इनोवेशन और फाइनेंशियल एफिशिएंसी के दम पर भारत के EV सेगमेंट में एक मज़बूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
Ather की अगली चालों और EV इंडस्ट्री के ट्रेंड्स के लिए जुड़े रहेंFundingRaised.inके साथ! 🚀
🚚 परिचय: लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मजबूती से आगे बढ़ती Delhivery
भारत की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी ने इस तिमाही में ₹91 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 67% अधिक है। इसके साथ ही कंपनी का कुल राजस्व ₹2,423.8 करोड़ तक पहुंच गया।
📈 राजस्व में मामूली लेकिन स्थिर वृद्धि
Gurugram स्थित Delhivery ने Q1 FY26 में ₹2,294 करोड़ का परिचालन राजस्व कमाया, जो Q1 FY25 के ₹2,172.3 करोड़ की तुलना में 5.6% अधिक है।
कंपनी की मुख्य आय लॉजिस्टिक्स सेवाओं से हुई है जिसमें वेयरहाउसिंग, लास्ट-माइल डिलीवरी, और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम की सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, Delhivery ने ₹129.8 करोड़ की आय गैर-परिचालन स्रोतों से अर्जित की।
💰 खर्चों पर नियंत्रण, लेकिन चुनौती बनी हुई
कंपनी ने Q1 FY26 में ₹2,326.6 करोड़ का कुल खर्च किया, जो साल-दर-साल 4.7% की मामूली वृद्धि को दर्शाता है।
Freight handling और servicing खर्च कंपनी के कुल खर्च का 70.4% हिस्सा (₹1,566 करोड़) रहा।
Employee benefit खर्च 6% बढ़कर ₹352.65 करोड़ हो गया।
इसके अलावा, लीगल फीस, डिप्रीसिएशन, और अन्य ऑपरेशनल खर्चों ने कुल खर्च में योगदान दिया।
📊 शुद्ध लाभ में जबरदस्त उछाल
इस तिमाही में Delhivery ने ₹91 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹54 करोड़ था। यानी कंपनी ने 67% की बढ़त के साथ मुनाफा कमाया है। यह लाभ कंपनी के संतुलित खर्च प्रबंधन और स्थिर राजस्व वृद्धि का परिणाम है।
📉 शेयर बाजार में प्रदर्शन
आज के शेयर बाजार के क्लोजिंग सेशन में Delhivery का शेयर ₹429.05 प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ। इससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹32,032.5 करोड़ (लगभग $3.76 बिलियन) हो गया।
निवेशकों ने कंपनी के मजबूत नतीजों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
कंपनी का स्टॉक पिछले कुछ महीनों से धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है, और अब मिडकैप सेगमेंट में एक स्थिर खिलाड़ी बन चुका है।
Delhivery केवल एक कोरियर कंपनी नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बन चुकी है। इसके प्रमुख सर्विस सेगमेंट हैं:
Express Parcel Delivery
Heavy Goods Transportation
Warehousing & Fulfilment
Supply Chain SaaS Solutions
Cross-border Logistics
इस तकनीकी-आधारित दृष्टिकोण के कारण Delhivery को विशेष रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों और D2C ब्रांड्स से भारी मांग मिलती है।
🛠️ भविष्य की रणनीति
Delhivery अब अपने संचालन को और अधिक कुशल बनाने और मुनाफा बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है:
AI और मशीन लर्निंग आधारित लॉजिस्टिक्स समाधान।
छोटे शहरों और टियर-2, टियर-3 मार्केट्स में विस्तार।
मल्टी-मोडल नेटवर्क के माध्यम से समय और लागत में कटौती।
B2B सेगमेंट में गहराई से प्रवेश।
📌 निष्कर्ष: टिकाऊ ग्रोथ की ओर Delhivery का बढ़ता कदम
Delhivery ने Q1 FY26 में अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि कंपनी लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सिर्फ विस्तार ही नहीं, बल्कि लाभदायक संचालन के लिए भी प्रतिबद्ध है।
5.6% की राजस्व वृद्धि भले ही छोटी लगे, लेकिन ₹91 करोड़ का मुनाफा दर्शाता है कि कंपनी ने लागत नियंत्रण और प्रभावी रणनीति के बल पर स्थिरता हासिल की है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद, Delhivery का प्रदर्शन निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए विश्वसनीयता और स्थायित्व का संकेत है।
🔎 बाजार और निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रदर्शन?
कंपनी का EBITDA और मुनाफा लगातार बढ़ रहा है।
खर्चों को नियंत्रित करने की क्षमता इसे प्रतिस्पर्धियों से आगे रखती है।
मार्केट में Delhivery की स्थिति और मजबूत होगी यदि यही ट्रेंड अगले कुछ तिमाहियों तक बना रहा।
📢 निष्कर्ष में एक बात साफ है — Delhivery अब केवल डिलीवरी तक सीमित नहीं, यह भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का मजबूत स्तंभ बनती जा रही है।
📰 यह विशेष रिपोर्ट FundingRaised.in द्वारा तैयार की गई है।
📱 ऑनलाइन भक्ति का बढ़ता प्रभाव भारत की श्रद्धा-tech इंडस्ट्री में एक और बड़ा कदम आने वाला है। डिजिटल पूजा और मंदिर सेवाएं देने वाला प्लेटफॉर्म Ghar Mandir अब अपने पहले निवेश दौर में $2.5 मिलियन (लगभग ₹20 करोड़) जुटाने की तैयारी में है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व भारत की जानी-मानी निवेश कंपनी Info Edge कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, Info Edge जल्द ही टर्म शीट जारी कर सकती है और डील के लिए फाइनल ड्यू डिलिजेंस स्टेज में पहुंच गई है। यह Info Edge की 2025 में पहली प्रमुख मंदिर-tech या श्रद्धा-tech निवेश पहल होगी।
👥 कौन हैं Ghar Mandir के संस्थापक? Ghar Mandir की स्थापना सम्या मित्तल और अपूर्व शाह ने अगस्त 2023 में की थी। यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को देश भर के मंदिरों में ऑनलाइन प्रसाद बुकिंग, पारंपरिक पूजा, और संस्कार सेवाएं प्रदान करता है।
यूज़र्स सिर्फ ₹101 से पूजा बुक कर सकते हैं।
50+ मंदिरों और पुजारियों के साथ साझेदारी है।
सेवा का वीडियो रिकॉर्डिंग भी भेजा जाता है।
अब तक 1 लाख+ यूज़र्स को सेवा दे चुका है।
💰 फंडिंग का उपयोग किसमें होगा? फंडिंग मिलने के बाद Ghar Mandir निम्नलिखित क्षेत्रों में विस्तार करेगा:
प्रोडक्ट डेवलपमेंट: ऐप को और अधिक यूज़र-फ्रेंडली बनाना।
टेक्नोलॉजी अपग्रेड: AI और ऑटोमेशन का समावेश।
नए मंदिरों से भागीदारी: छोटे और बड़े मंदिरों को जोड़ना।
वीडियो स्ट्रीमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना।
📈 अनुमानित वैल्यूएशन और डील की स्थिति Ghar Mandir की वैल्यूएशन $10–15 मिलियन (₹80 से ₹120 करोड़) के बीच हो सकती है, यदि डील सफलतापूर्वक फाइनल हो जाती है। डील पर काम कर रहे एक व्यक्ति ने बताया, “ड्यू डिलिजेंस अंतिम चरण में है और Info Edge जल्द ही टर्म शीट साझा कर सकता है।”
⚔️ प्रतियोगिता तेज़: कौन-कौन है इस दौड़ में? Faith-tech स्पेस में अब घमासान मुकाबला चल रहा है। हाल ही में, Ghar Mandir के प्रमुख प्रतिद्वंदी AppsForBharat (Sri Mandir का पैरेंट कंपनी) ने $20 मिलियन की Series C फंडिंग हासिल की थी। इस सेक्टर में अन्य खिलाड़ियों में शामिल हैं:
DevDham
Vama
Utsav App
Sutradhar
27 Mantra
इन सभी का उद्देश्य एक ही है – आस्था को डिजिटल बनाना।
📊 श्रद्धा-Tech का तेजी से बढ़ता बाजार भारत में डिजिटल भक्ति सेवाओं की डिमांड दिन-ब-दिन बढ़ रही है। भक्त अब अपने मोबाइल फोन से ही पूजा, हवन, प्रार्थना और दान जैसी सेवाएं बुक कर रहे हैं।
COVID-19 के बाद यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा।
Tier 2 और Tier 3 शहरों में भी भारी डिमांड देखी जा रही है।
2025 तक इस सेक्टर का साइज ₹2,000 करोड़ से अधिक होने की संभावना है।
🎥 Ghar Mandir की Unique सेवाएं
वीडियो के माध्यम से Live या रिकॉर्डेड पूजा दर्शन।
विशेष पर्व और व्रतों के लिए थीम आधारित पूजा पैकेज।
यूज़र्स को डिजिटल ई-प्रसाद सर्टिफिकेट भी भेजा जाता है।
पंडित ऑन-डिमांड जैसी सेवा का भी परीक्षण चल रहा है।
🤝 Info Edge की रणनीति Info Edge ने पहले Zomato, Policybazaar, Naukri जैसे कई यूनिकॉर्न्स में निवेश किया है। अब कंपनी धार्मिक टेक्नोलॉजी में भी अपनी जगह बना रही है।
यह निवेश केवल वित्तीय नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम है।
Info Edge के इस कदम से श्रद्धा-tech सेक्टर को वैधता और निवेशकों का भरोसा मिलेगा।
🔮 आगे क्या? अगर यह डील फाइनल होती है, तो Ghar Mandir अपने प्लेटफॉर्म को और विस्तार देने के लिए तैयार है।
नए मंदिर और तीर्थस्थल जोड़ने की योजना है।
विदेशों में बसे भारतीयों को भी यह सेवा देने पर विचार किया जा रहा है।
प्लग-इन मॉडल के तहत पूजा सेवाओं को मंदिर वेबसाइट्स या ऐप्स में एम्बेड करने की तैयारी है।
📌 निष्कर्ष भारत में आस्था अब केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है — डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उतनी ही मजबूत है। Ghar Mandir का संभावित निवेश और Info Edge जैसी कंपनी का सपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धा-tech सेक्टर में भविष्य की जबरदस्त संभावनाएं छिपी हैं।
📱 अब भक्ति भी डिजिटल है – और इसमें निवेश भी। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी कंपनी इस आध्यात्मिक दौड़ में आगे निकलती है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट की जुलाई 2025 की बिक्री रिपोर्ट आ चुकी है और इसके नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं। TVS Motor ने एक बार फिर बाज़ी मारी है, वहीं Ola Electricकी गिरती पकड़ और घटती बिक्री ने उसे संकट में डाल दिया है।
📉 TVS की बिक्री में गिरावट, फिर भी मार्केट लीडर!
TVS Motor ने जुलाई महीने में कुल 22,225 यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की, जिससे उसका 21.6% मार्केट शेयर बना रहा। हालांकि यह जून 2025 के मुकाबले लगभग 12.73% की गिरावट है, जब कंपनी ने 25,468 यूनिट्स बेचे थे।
TVS के स्थिर प्रदर्शन ने यह दिखाया है कि ब्रांड पर ग्राहकों का भरोसा बना हुआ है, भले ही कुल बिक्री में थोड़ी कमी आई हो।
⚡ Bajaj ने भी झेला झटका, पर दूसरा स्थान बरकरार
Bajaj Auto ने जुलाई में 19,650 यूनिट्स की बिक्री की, जिससे उसका 19.10% मार्केट शेयर रहा। लेकिन यह भी जून के 23,161 यूनिट्स के मुकाबले 15.16% की गिरावट है।
इस गिरावट के बावजूद Bajaj अपनी जगह पर कायम रहा है, और TVS के बाद सबसे ज़्यादा भरोसेमंद ब्रांड बना हुआ है।
😞 Ola Electric की भारी गिरावट, मार्केट शेयर हुआ आधे से भी कम
कभी EV टू-व्हीलर मार्केट की बादशाह कही जाने वाली Ola Electric अब मुश्किलों से घिरी हुई है। जुलाई 2025 में Ola ने केवल 17,848 यूनिट्स बेचीं, जो कि 2024 की तुलना में 57.29% की गिरावट है (जुलाई 2024 में 41,802 यूनिट्स बिकी थीं)। इसका मार्केट शेयर भी 38.83% से घटकर सिर्फ 17.35% रह गया।
💸 इतना ही नहीं, Ola Electric के शेयर की कीमत भी बुरी तरह गिरी है:
लिस्टिंग प्राइस: Rs 76
मौजूदा कीमत: Rs 41.2
ऑल टाइम हाई: Rs 157.4
मार्केट कैप में गिरावट: Rs 33,521 करोड़ से Rs 18,190 करोड़ तक (~45% की गिरावट)
उपयोगकर्ताओं की शिकायतें और लगातार घटती बिक्री इस गिरावट के मुख्य कारण हैं।
🔼 Ather Energy की वापसी, बिक्री में अच्छी बढ़त
Ather Energy ने जुलाई में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो जून के 14,677 यूनिट्स के मुकाबले 10.59% की वृद्धि है। इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुंच गया है।
स्टॉक मार्केट में Ather के शेयर भी स्थिरता दिखा रहे हैं:
लिस्टिंग प्राइस: Rs 328
मौजूदा प्राइस: Rs 353.75
यह संकेत देता है कि कंपनी को निवेशकों का भरोसा मिल रहा है।
🔼 Hero MotoCorp का जोरदार कमबैक
Hero MotoCorp जुलाई में पांचवे स्थान पर रहा, लेकिन इसकी बिक्री में सबसे ज़्यादा ग्रोथ दर्ज की गई — 36.27% की बढ़त के साथ 10,489 यूनिट्स की बिक्री। इसका मार्केट शेयर भी 10.20% तक पहुंच गया है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा संकेत है कि ग्राहकों में फिर से भरोसा बढ़ रहा है।
📊 अन्य कंपनियों का प्रदर्शन भी दिलचस्प
Greaves Electric Mobility: जुलाई में 4.08% मार्केट शेयर के साथ छठे स्थान पर रहा।
Pure EV (IPO की तैयारी में): 1.64% शेयर के साथ सातवें स्थान पर, बिक्री में 18.12% ग्रोथ।
River Mobility: 20.4% महीने-दर-महीने वृद्धि।
Kinetic Green: 59.92% की भारी ग्रोथ, और पहली बार टॉप 10 में शामिल।
📌 EV मार्केट में क्या ट्रेंड बन रहा है?
ब्रांड की विश्वसनीयता और सर्विस नेटवर्क अब ग्राहकों की प्राथमिकता बन रही है।
Ola जैसे हाई-वैल्यू स्टार्टअप्स की गिरावट इस बात का संकेत है कि केवल मार्केटिंग से लंबी रेस नहीं जीती जा सकती।
Hero, Ather और Kinetic जैसी कंपनियों की वापसी दिखाती है कि इनोवेशन और ग्राहक फीडबैक पर ध्यान देना ज़रूरी है।
🔮 भविष्य का क्या अनुमान है?
EV टू-व्हीलर सेक्टर में अगले कुछ महीनों में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां Ola अपने प्रदर्शन को सुधारने की कोशिश करेगी, वहीं Hero, Ather और TVS जैसे ब्रांड अपनी स्थिति और मजबूत करने की ओर अग्रसर हैं।
निष्कर्ष:
TVS और Bajaj ने बाज़ी मार ली है, लेकिन Ola Electric की गिरावट पूरे EV सेक्टर के लिए एक चेतावनी है। ग्राहक अब सिर्फ ब्रांडिंग नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, गुणवत्ता और आफ्टर सेल्स सर्विस को भी ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं।
➡️ EV सेक्टर की इस दिलचस्प दौड़ में आने वाले महीने और भी बड़े मोड़ ला सकते हैं। FundingRaised पर जुड़े रहें ऐसी ही ख़बरों के लिए! 🚀⚡
भारत का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर हर महीने नई ऊंचाइयों को छू रहा है। National Payments Corporation of India (NPCI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, Unified Payments Interface (UPI) ने जुलाई 2025 में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस महीने कुल 19.47 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹25.08 लाख करोड़ रही।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान का परिदृश्य लगातार तेज़ी से विस्तार कर रहा है, और UPI इसमें एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
🔢 जून की तुलना में मजबूत बढ़त
जुलाई में दर्ज UPI ट्रांजैक्शन जून 2025 के मुकाबले 5.8% अधिक रहे। जून में कुल 18.40 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी वैल्यू ₹24.04 लाख करोड़ थी। वहीं ट्रांजैक्शन वैल्यू के लिहाज़ से 4.3% की ग्रोथ दर्ज की गई है।
📆 औसतन रोज़ाना 628 मिलियन ट्रांजैक्शन जुलाई में किए गए, जो अब तक की सबसे ऊँची दैनिक दरों में से एक है।
📊 सालाना वृद्धि भी दमदार
अगर हम सालाना तुलना करें, तो जुलाई 2024 की तुलना में जुलाई 2025 में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 35% की ग्रोथ हुई है, जबकि ट्रांजैक्शन वैल्यू में 22% की वृद्धि दर्ज की गई है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि UPI केवल शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि भारत के कोने-कोने में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
हालांकि जुलाई 2025 के लिए ऐप-वाइज ब्रेकडाउन अब तक जारी नहीं हुआ है, लेकिन जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार:
PhonePe ने 46.5% UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और लगभग 50% ट्रांजैक्शन वैल्यू को संभाला।
Google Pay ने 35.6% वॉल्यूम और 35% वैल्यू के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
Paytm तीसरे स्थान पर रहा, जिसके पास 6.9% वॉल्यूम और 5.6% वैल्यू की हिस्सेदारी थी।
📌 यह आंकड़े दिखाते हैं कि UPI सेगमेंट में PhonePe और Google Pay की पकड़ बेहद मज़बूत बनी हुई है, जबकि Paytm लगातार संघर्ष कर रहा है।
🌍 UPI का इंटरनेशनल विस्तार
भारत के इस डिजिटल चमत्कार ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। वर्तमान में UPI इन देशों में लाइव है:
भूटान
नेपाल
मॉरीशस
श्रीलंका
सिंगापुर
फ्रांस
ओमान
UAE
🗺️ NPCI अब कतर, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी UPI को विस्तारित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा UK, मालदीव, नामीबिया और ओमान जैसे देश भी UPI इंटीग्रेशन को एक्सप्लोर कर रहे हैं।
यह भारत की फिनटेक डिप्लोमेसी का हिस्सा है, जो डिजिटल इंडिया की ग्लोबल पहचान को मज़बूती दे रहा है।
💸 UPI पर अब शुल्क? ICICI Bank का नया कदम
अब तक UPI व्यापारियों के लिए एक फ्री पेमेंट मॉडल था, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
TheHeadandTale की रिपोर्ट के अनुसार, ICICI Bank ने अब बड़े मर्चेंट्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स से UPI लेन-देन पर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है।
यह कदम भारत के UPI इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक सरकार समर्थित नीति के तहत मर्चेंट्स से कोई चार्ज नहीं लिया जाता था।
💬 यह कदम भविष्य में अन्य बैंकों और कंपनियों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे मर्चेंट्स की लागत बढ़ सकती है।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अब UPI लेन-देन पर धीरे-धीरे शुल्क लगना आम हो जाएगा?
🔮 भविष्य की दिशा: क्या कहता है यह ट्रेंड?
ट्रांजैक्शन ग्रोथ दिखा रही है कि डिजिटल भुगतान भारत में जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
इंटरनेशनल विस्तार से भारत का फिनटेक मॉडल एक ग्लोबल एक्सपोर्ट बनता जा रहा है।
चार्जिंग मॉडल का बदलाव आने वाले समय में सरकार और बैंकिंग नियामकों के बीच बहस और नीतिगत बदलाव की संभावना को जन्म दे सकता है।
📌 निष्कर्ष:
UPI न केवल भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुका है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी अपने पैर जमा रहा है। जुलाई 2025 में हुए ₹25 लाख करोड़ से अधिक के ट्रांजैक्शन यह दिखाते हैं कि यह सिस्टम कितनी तेज़ी से भारतीय अर्थव्यवस्था में गहराई से जुड़ चुका है।
💡 लेकिन ICICI Bank जैसे बैंकों के शुल्क लगाने के फैसले इस सफलता मॉडल के भविष्य पर कुछ नए सवाल ज़रूर खड़े कर रहे हैं।
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साइबर सुरक्षा स्टार्टअप Safe Security, जो पहले Lucideus के नाम से जाना जाता था, ने अपने Series C फंडिंग राउंड में $70 मिलियन (करीब ₹580 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Avataar Ventures ने किया है, जिसमें कई नए और मौजूदा निवेशकों की भागीदारी रही।
💰 निवेशकों की दमदार भागीदारी
इस ताज़ा निवेश राउंड में शामिल प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:
Susquehanna Asia Venture Capital
NextEquity Partners
Prosperity7 Ventures
Eight Roads
पूर्व Cisco CEO John Chambers
Sorenson Capital
Safe Security इस फंडिंग का इस्तेमाल अपनी CyberAGI (Cyber Artificial General Intelligence) विज़न को तेज़ी से लागू करने के लिए करेगा, जिसमें इंजीनियरिंग, R&D और ग्लोबल मार्केट विस्तार शामिल हैं।
🚀 IIT-बॉम्बे से सिलिकॉन वैली तक का सफर
Safe Security की शुरुआत 2012 में IIT-Bombay में साकेत मोदी, विदितकुमार बक्सी और राहुल त्यागी ने मिलकर की थी। शुरुआती वर्षों में यह स्टार्टअप बूटस्ट्रैप्ड रहा और फिर आगे चलकर कंपनी का मुख्यालय Palo Alto (कैलिफ़ोर्निया) शिफ्ट कर दिया गया। आज कंपनी के ऑफिस न्यूयॉर्क, लंदन, बेंगलुरु और नई दिल्ली में भी मौजूद हैं।
Safe Security का फोकस है एंटरप्राइज़ेस को उनके साइबर रिस्क को पहचानने, उसका मूल्यांकन करने और कम करने में मदद करना — और वो भी AI आधारित टूल्स की मदद से।
इसके प्रमुख समाधान हैं:
Cyber Risk Quantification (CRQ)
Third-Party Risk Management (TPRM)
Continuous Threat Exposure Management (CTEM)
कंपनी का मानना है कि पारंपरिक सुरक्षा उपायों की तुलना में ये आधुनिक समाधान कंपनियों को भविष्य के खतरों से अधिक प्रभावी रूप से बचा सकते हैं।
🌐 दुनिया का पहला ऑटोनोमस CTEM प्लेटफॉर्म
Safe Security ने हाल ही में दुनिया का पहला पूरी तरह ऑटोनोमस CTEM (Continuous Threat Exposure Management) समाधान पेश किया है। यह उनके Cyber Risk Singularity प्लेटफॉर्म का एक अहम हिस्सा है।
CTEM अब Safe Security के लिए अगला ग्रोथ ड्राइवर बनता जा रहा है, ठीक उसी तरह जैसे कंपनी ने पहले CRQ को बाज़ार में स्थापित किया और बाद में TPRM को पेश किया। अब कंपनी के आधे से ज़्यादा ग्राहक TPRM मॉड्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
📈 लगातार तीन साल से ट्रिपल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ
कंपनी का दावा है कि उसने लगातार तीन वर्षों से ट्रिपल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। Safe Security अब तक $170 मिलियन से ज़्यादा की कुल फंडिंग जुटा चुकी है।
इसके ग्राहकों की लिस्ट भी काफ़ी प्रभावशाली है, जिनमें शामिल हैं:
Google
Fidelity
T-Mobile
Chevron
IHG (InterContinental Hotels Group)
🧩 CyberAGI: भविष्य की दिशा
Safe Security अब अपने अगली पीढ़ी के AI मॉडल – CyberAGI – पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य है ऐसे टूल्स विकसित करना जो किसी इंसान की तरह ही जटिल साइबर जोखिमों को समझ सकें और उनका समाधान कर सकें।
इस विज़न के तहत कंपनी न केवल अपने प्रोडक्ट्स को और अधिक इंटेलिजेंट बना रही है, बल्कि नए-नए इंडस्ट्री सेक्टर्स में भी प्रवेश कर रही है।
🔮 भारत से ग्लोबल साइबर टेक लीडर बनने तक
Safe Security का सफर एक भारतीय कॉलेज स्टार्टअप से लेकर एक ग्लोबली स्केलेबल साइबर सिक्योरिटी कंपनी बनने तक प्रेरणादायक रहा है। तकनीकी नवाचार, तेज़ ग्रोथ, और वैश्विक विस्तार के साथ यह स्टार्टअप एक नई पीढ़ी के भारतीय टेक लीडर्स का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
📌 निष्कर्ष:
Safe Security का $70 मिलियन का यह Series C फंडिंग राउंड न सिर्फ़ इसके तकनीकी व वाणिज्यिक दृष्टिकोण को और मज़बूत करता है, बल्कि यह दिखाता है कि भारत से निकले स्टार्टअप्स अब साइबर सुरक्षा जैसे वैश्विक मसलों में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।
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मुंबई स्थित D2C स्लीप सॉल्यूशंस स्टार्टअप The Sleep Company ने अपने Series D फंडिंग राउंड में ₹105 करोड़ ($12.3 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Saffron Investments ने किया, जबकि Carillon Investments और Infinity Partners ने भी भागीदारी की है।
🚀 ग्रोथ और विस्तार के लिए होगा फंड का इस्तेमाल
The Sleep Company के Registrar of Companies (RoC) में दायर दस्तावेज़ों के अनुसार, कंपनी के बोर्ड ने Series D CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares) के 19,093 शेयर ₹55,130 प्रति शेयर के हिसाब से जारी करने का प्रस्ताव पारित किया है। इस कदम के माध्यम से कंपनी ₹105 करोड़ की पूंजी जुटाएगी।
The Sleep Company की वैल्यूएशन करीब ₹2,745 करोड़ ($323 मिलियन) हो जाएगी। यह पिछले राउंड (Series C) में मिली ₹1,500 करोड़ की वैल्यूएशन की तुलना में 80% अधिक है। अगर इस राउंड में आगे और पूंजी निवेश होती है, तो कंपनी की वैल्यूएशन और भी बढ़ सकती है।
🛍️ प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और सेल्स चैनल
2019 में स्थापित, The Sleep Company मैट्रेस, पिलो, कुशन, बेडिंग और ऑफिस चेयर जैसी स्लीप और कम्फर्ट से जुड़ी उत्पादों की रेंज पेश करता है। यह D2C (Direct to Consumer) ब्रांड है जो अपने उत्पादों को ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑफलाइन स्टोर्स दोनों के माध्यम से बेचता है।
📊 अब तक जुटाई गई फंडिंग और प्रमुख निवेशक
TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कंपनी ने कुल मिलाकर लगभग $49 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसमें Premji Invest, Fireside Ventures जैसे प्रमुख निवेशकों का नाम शामिल है। इस राउंड के बाद Saffron Investments कंपनी में 3.2% हिस्सेदारी रखेगी।
💹 FY24 में रेवेन्यू 2.5 गुना, लेकिन घाटा भी बढ़ा
मार्च 2024 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 2.5 गुना बढ़कर ₹312 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष (FY23) में ₹127 करोड़ था। हालांकि, कंपनी का घाटा भी इसी अवधि में 58% बढ़कर ₹58.69 करोड़ हो गया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी ने तेज़ी से रेवेन्यू तो बढ़ाया है, लेकिन बढ़ती लागत और विस्तार योजनाओं की वजह से उसे घाटे का सामना करना पड़ा।
🤝 ChrysCapital के साथ बातचीत, हो सकता है और निवेश
खबरों के मुताबिक, The Sleep CompanyChrysCapital के साथ एक नए डील पर भी बातचीत कर रही है, जिसमें $50 मिलियन का निवेश संभावित है। यह डील प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह की हिस्सेदारी बिक्री के माध्यम से की जा सकती है।
🛏️ बाज़ार में प्रतिस्पर्धा: Wakefit, SleepyCat, Duroflex
कंपनी का मुकाबला अब तेजी से बढ़ते स्लीप टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरबल्स मार्केट में Wakefit, SleepyCat, और Duroflex जैसे ब्रांड्स से है। Wakefit हाल ही में ₹468 करोड़ जुटाने के लिए SEBI में DRHP दाखिल कर चुकी है, जिससे यह सेगमेंट और भी प्रतिस्पर्धी हो गया है।
🔮 आगे की राह: ग्रोथ और इनोवेशन
कंपनी ने इस फंडिंग को “ग्रोथ, एक्सपेंशन और जनरल कॉर्पोरेट पर्पस” के लिए उपयोग करने की योजना बनाई है। इसका मतलब है कि कंपनी भारत और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, प्रोडक्ट इनोवेशन और मार्केटिंग में निवेश करेगी।
निष्कर्ष: The Sleep Company की यह Series D फंडिंग न सिर्फ कंपनी की तेजी से बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि स्लीप सॉल्यूशंस और कंज्यूमर हेल्थ वेलनेस की कैटेगरी में D2C ब्रांड्स के लिए निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले महीनों में कंपनी की बाजार में गतिविधियाँ और विस्तार रणनीति इस क्षेत्र में एक नई दिशा तय कर सकती हैं।
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Swiggy ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में ₹4,961 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही ₹3,222 करोड़ की तुलना में 54% अधिक है। यह बढ़ोतरी Swiggy के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, लेकिन इसके साथ ही चिंता की बात यह है कि कंपनी का घाटा भी लगभग दोगुना हो गया है।
🚚 Scootsy Logistics बना सबसे बड़ा कमाई का स्रोत
Swiggy की सहायक कंपनी Scootsy Logistics ने कंपनी की कुल ऑपरेटिंग इनकम में 46% हिस्सेदारी दर्ज की। Q1 FY26 में Scootsy की कमाई ₹2,259 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 में ₹1,268 करोड़ थी — यानी 78% की सालाना वृद्धि।
🍽️ फूड डिलीवरी बिजनेस में 19% की बढ़त
Swiggy का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस अभी भी इसकी आय का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। Q1 FY26 में इस वर्टिकल से कंपनी को ₹1,800 करोड़ की कमाई हुई, जो कि पिछले साल ₹1,518 करोड़ थी। यानी फूड डिलीवरी से 19% की YoY ग्रोथ दर्ज हुई।
🛒 क्विक कॉमर्स ने भी दिखाई दोगुनी रफ्तार
Swiggy का क्विक कॉमर्स सेगमेंट, जो इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए किराना और एफएमसीजी प्रोडक्ट्स डिलीवर करता है, ने भी जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की। इसकी कमाई दोगुनी होकर ₹806 करोड़ हो गई, जो कि पिछले साल Q1 FY25 में ₹374 करोड़ थी। ऑर्डर फ्रिक्वेंसी और नए डार्क स्टोर्स की बदौलत इस सेगमेंट का GOV (Gross Order Value) काफी बढ़ा।
🍲 अन्य सेवाओं से कुल आय ₹5,048 करोड़
Swiggy की अन्य सेवाएं — जैसे Dine Out, Genie, Swiggy Mini और गैर-ऑपरेटिंग इनकम को मिलाकर कंपनी की कुल आमदनी Q1 FY26 में ₹5,048 करोड़ तक पहुंच गई।
💸 खर्च में 60% की भारी बढ़त, घाटा पहुंचा ₹1,197 करोड़
राजस्व बढ़ने के बावजूद कंपनी का कुल खर्च भी तेजी से बढ़ा। FMCG प्रोडक्ट्स की खरीद में ₹2,064 करोड़ (33% खर्च), डिलीवरी शुल्क में ₹1,313 करोड़ (26% वृद्धि), कर्मचारियों के वेतन और बेनिफिट्स पर ₹686 करोड़ तथा विज्ञापन पर ₹1,036 करोड़ खर्च किया गया।
इन सभी को मिलाकर Swiggy का कुल खर्च Q1 FY26 में ₹6,244 करोड़ हो गया, जो कि पिछले साल ₹3,908 करोड़ था — यानी 60% का इजाफा। और इसी खर्च की वजह से कंपनी का घाटा ₹611 करोड़ से बढ़कर ₹1,197 करोड़ हो गया — 96% की बढ़त, यानी लगभग दोगुना।
🔁 बोर्ड में बदलाव: नए चेहरों की एंट्री
Swiggy ने हाल ही में अपने बोर्ड में बदलाव किया है। SoftBank के सुमेर जुनेजा और Accel के आनंद डेनियल ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। उनकी जगह noon के CEO फाराज़ खालिद को स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति Swiggy की अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों की ओर इशारा करती है।
Swiggy के शेयर गुरुवार को ₹404 पर ट्रेड हो रहे थे और कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹1,00,730 करोड़ के स्तर पर पहुंच चुका है।
⚔️ Zomato से तुलना: बढ़त के बावजूद मुनाफा नहीं
Swiggy की मुख्य प्रतिद्वंदी Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal ने भी Q1 FY26 में 70% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹7,167 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जबकि Q1 FY25 में यह ₹4,206 करोड़ था। हालांकि, Eternal का मुनाफा घटकर ₹25 करोड़ रह गया है, जो कि एक अलग तरह की चुनौती दिखाता है।
📊 निष्कर्ष: विकास की रफ्तार बनी हुई है, लेकिन घाटा चिंता का कारण
Swiggy ने रेवेन्यू और उपयोगकर्ता संख्या दोनों में जोरदार बढ़त दिखाई है। फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और नई सेवाओं में निवेश की बदौलत कंपनी का बाजार विस्तार जारी है। लेकिन लगातार बढ़ते खर्च और दोगुने घाटे से यह स्पष्ट है कि लाभप्रदता तक का सफर अभी लंबा है। Swiggy को अपने लागत ढांचे पर नियंत्रण और मार्जिन में सुधार के लिए आने वाले तिमाहियों में रणनीतिक फैसले लेने होंगे।
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फूडटेक दिग्गज Swiggy और मोबिलिटी कंपनी Rapido के बीच रणनीतिक साझेदारी अब सवालों के घेरे में है। Swiggy ने स्टॉक एक्सचेंज में फाइलिंग कर यह संकेत दिया है कि वह Rapido में किए गए अपने निवेश की “सक्रिय समीक्षा” कर रहा है। कारण बताया गया है – दोनों कंपनियों के व्यवसायिक रिश्तों की बदलती प्रकृति।
💰 निवेश और हिस्सेदारी की कहानी
Swiggy ने अप्रैल 2022 में Rapido के $180 मिलियन Series D राउंड का नेतृत्व किया था और करीब 12% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस निवेश ने समय के साथ अच्छा मूल्यवृद्धि (value appreciation) दर्ज किया है। लेकिन अब Swiggy इसे भुनाने (monetize) की दिशा में सोच रहा है ताकि उसकी बैलेंस शीट को मजबूत किया जा सके।
दिलचस्प बात यह है कि Swiggy ने Rapido की हालिया $200 मिलियन Series E फंडिंग (जून 2025) में भाग नहीं लिया, जिसे Nexus ने लीड किया था। यह दर्शाता है कि दोनों के बीच रणनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।
Swiggy का Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) प्रदर्शन मजबूत रहा। कंपनी का कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 45.2% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹14,797 करोड़ रहा। यह ग्रोथ मुख्यतः फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स (Instamart), और आउट-ऑफ-होम कंजम्पशन से आई है।
🍔 फूड डिलीवरी से हुआ सबसे बड़ा योगदान
GOV: ₹8,086 करोड़ (YoY वृद्धि: 18.8%)
पिछले साल की तुलना में ₹6,808 करोड़ से उछाल
Monthly Transacting Users (MTUs): 1.2 मिलियन नए यूज़र्स जुड़े, कुल 16.3 मिलियन (8 क्वार्टर में सबसे अधिक वृद्धि)
डिलीवरी पार्टनर्स: 6.06 लाख एक्टिव मंथली पार्टनर्स
टोटल ऑर्डर्स: 264 मिलियन
🌧️ मानसून और एप्रेज़ल का असर – मार्जिन में गिरावट
हालांकि, फूड डिलीवरी वॉल्यूम में वृद्धि हुई, लेकिन सीजनल कारणों से मार्जिन पर असर पड़ा।
Adjusted EBITDA Margin: Q4 FY25 के 2.9% से घटकर Q1 FY26 में 2.4%
कारण: मानसून में डिलीवरी पार्टनर्स की वापसी और एनुअल एंप्लॉयी एप्रेज़ल
⚡ Instamart बना ग्रोथ इंजन – 100% से अधिक की ग्रोथ!
Swiggy की क्विक कॉमर्स यूनिट Instamart ने तगड़ा प्रदर्शन किया।
GOV: ₹5,655 करोड़ (YoY वृद्धि: 107.6%)
Average Order Value (AOV): ₹612 (25.7% की वृद्धि)
टोटल ऑर्डर्स: 92 मिलियन
Swiggy ने इस क्वार्टर में 41 नए डार्क स्टोर जोड़े, जिससे इनकी कुल संख्या 1,062 हो गई जो कि 127 शहरों में फैले हैं। अब कंपनी डिमांड वाले क्षेत्रों में ही विस्तार कर रही है और मौजूदा कैपेसिटी को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है।
💼 कंपनी की वित्तीय स्थिति
Swiggy के पास तिमाही के अंत में ₹5,354 करोड़ की नकद राशि और नकदी समतुल्य (cash & cash equivalents) थी। कंपनी ने यह भी दोहराया कि Instamart को स्केल करना उसकी प्राथमिकता है, साथ ही वह Q3 FY26 से Q1 FY27 के बीच contribution margin breakeven हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।
🏍️ Rapido की स्थिति और बढ़ती दूरी
Rapido ने हाल ही में यूनिकॉर्न क्लब में एंट्री ली है और उसकी वैल्यूएशन में तेज उछाल देखा गया है। लेकिन Swiggy की अनुपस्थिति उसके लेटेस्ट फंडिंग राउंड में यह दर्शाती है कि दोनों के बीच रणनीतिक तालमेल कमजोर हुआ है।
Swiggy का कहना है कि वह निवेश समीक्षा के बाद उचित निर्णय लेगा—हो सकता है कि वह अपनी हिस्सेदारी पूरी तरह बेच दे या आंशिक निकासी करे।
🤖 बाजार और निवेशकों की नजरें अब Swiggy पर
Swiggy के लिए यह एक क्रूशियल मोड़ है—एक तरफ निवेश की समीक्षा है, तो दूसरी तरफ Instamart जैसी यूनिट की आक्रामक ग्रोथ और फूड डिलीवरी में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का दबाव।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि Swiggy अब रिज़ल्ट-ओरिएंटेड रणनीतियों की ओर बढ़ रहा है, जहां हर निवेश को लाभप्रदता और रणनीतिक दृष्टिकोण से परखा जाएगा।
📌 निष्कर्ष: Swiggy और Rapido की कहानी अब सिर्फ निवेश की नहीं, बल्कि बदलते बिज़नेस इकोसिस्टम की भी है। जहां एक ओर Swiggy अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने और Instamart को स्केल करने में जुटा है, वहीं Rapido के साथ संबंधों की पुनः समीक्षा उसकी रणनीतिक सतर्कता को दर्शाता है। आने वाले महीनों में यह देखना रोचक होगा कि Swiggy इस साझेदारी को आगे कैसे ले जाता है।
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