91Trucks को मिलेगा ₹30-35 करोड़ का नया निवेश,

91Trucks

भारत में कमर्शियल व्हीकल लिस्टिंग प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा 91trucks जल्द ही ₹30-35 करोड़ ($3.5-4 मिलियन) का नया फंडिंग राउंड जुटाने के लिए तैयार है।

सूत्रों के अनुसार, Arkam Ventures इस निवेश दौर का नेतृत्व कर रहा है, और कुछ मौजूदा निवेशकों के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।

“डील की शर्तें लगभग तय हो चुकी हैं और आधिकारिक घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है,” एक सूत्र ने जानकारी दी।


🚛 91trucks: कमर्शियल व्हीकल्स के लिए ऑल-इन-वन प्लेटफॉर्म

📌 91trucks की स्थापना 2022 में अभिषेक गौतम, सिद्धार्थ शर्मा और विकास शर्मा ने की थी।
📍 यह एक गुरुग्राम स्थित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो ट्रकों, बसों और थ्री-व्हीलर्स के लिए रीव्यू, स्पेसिफिकेशन और ग्राहक रेटिंग उपलब्ध कराता है।
📍 यह प्लेटफॉर्म यूजर्स को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है, जिससे वे अपने व्यवसाय के लिए सही कमर्शियल वाहन खरीद सकें।
📍 91Trucks ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स, डीलर्स, बैंकों और NBFCs के साथ मिलकर IT सॉल्यूशंस और फाइनेंसिंग विकल्प भी प्रदान करता है।


💰 91Trucks का पिछला फंडिंग इतिहास

🔹 मई 2024: कंपनी ने Titan Capital, Atrium Angels और Sparrow Capital से सीड फंडिंग जुटाई थी।
🔹 हालांकि, 91Trucks ने इस निवेश की सार्वजनिक घोषणा नहीं की थी।
🔹 ताजा निवेश के बाद, कंपनी का वैल्यूएशन $15-20 मिलियन (₹125-165 करोड़) तक पहुंच सकता है।


📢 91Trucks के नए फंडिंग राउंड से इंडस्ट्री को क्या मिलेगा?

91Trucks का यह नया फंडिंग राउंड भारतीय कमर्शियल व्हीकल मार्केट में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गति देगा।
यह न केवल कंपनी की वृद्धि में सहायक होगा, बल्कि ट्रक खरीदने और बेचने के पूरे तरीके को बदल सकता है। आइए, जानते हैं कि यह निवेश कैसे बाजार में नए बदलाव लाएगा।


🚀 फंडिंग से 91Trucks को कैसे फायदा होगा?

नए निवेश के बाद, 91Trucks निम्नलिखित क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है:

1️⃣ टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म अपग्रेड

✅ 91Trucks अपने प्लेटफॉर्म में AI और डेटा एनालिटिक्स जैसी नई टेक्नोलॉजी जोड़ सकता है।
✅ इससे ट्रक खरीदारों और विक्रेताओं को बेहतर एक्सपीरियंस मिलेगा और उनकी जरूरत के हिसाब से बेस्ट ऑप्शन चुनना आसान होगा।

2️⃣ डीलर और OEM पार्टनरशिप बढ़ाना

✅ कंपनी ट्रक डीलर्स, ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) और NBFCs के साथ मजबूत संबंध बना सकती है।
✅ इससे वाहन फाइनेंसिंग और ऑन-स्पॉट लोन अप्रूवल जैसी सुविधाएं भी बेहतर होंगी।

3️⃣ विस्तार और मार्केटिंग

✅ नए फंडिंग का इस्तेमाल कर 91Trucks नए शहरों में अपने ऑपरेशन को बढ़ा सकता है।
✅ कंपनी ज्यादा से ज्यादा ट्रांसपोर्टर्स, फ्लीट ओनर्स और छोटे व्यवसायों तक पहुंच बना सकती है।
नई मार्केटिंग रणनीतियों से ब्रांड अवेयरनेस को भी बढ़ाया जा सकता है।


📈 भारतीय कमर्शियल व्हीकल मार्केट की मौजूदा स्थिति

🚚 ट्रक और कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री क्यों बढ़ रही है?

ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विस्तार से ट्रकों की मांग बढ़ रही है।
इलेक्ट्रिक और CNG ट्रकों की तरफ शिफ्ट – सरकार के नए नियमों और बढ़ते ईंधन खर्च के चलते लोग इलेक्ट्रिक और CNG व्हीकल्स की ओर बढ़ रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा फोकस – कंपनियां डिजिटल सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे खरीदारों और विक्रेताओं के लिए प्रोसेस आसान हो।

📊 भारत का ट्रकिंग सेक्टर $150 बिलियन (₹12 लाख करोड़) से ज्यादा का है, और अगले 5 सालों में इसमें 12-15% की ग्रोथ का अनुमान है।


🔍 91Trucks की तुलना अन्य प्लेटफॉर्म्स से

91Trucks का मुकाबला भारत में मौजूद अन्य ऑटोमोबाइल-फोकस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से होगा। आइए, इसकी तुलना कुछ प्रमुख कंपनियों से करें:

प्लेटफॉर्मफोकस एरियाबिजनेस मॉडलखासियत
91Trucksकमर्शियल वाहन (ट्रक, बस, थ्री-व्हीलर)B2B और B2Cट्रकों की खरीद, बिक्री, फाइनेंसिंग और IT समाधान
CarDekhoपैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल्सB2Cनई और पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री, लोन और बीमा
Droomऑटोमोबाइल ई-कॉमर्सB2Cइस्तेमाल की गई गाड़ियों और EVs की लिस्टिंग
OLX Autoसेकेंड हैंड गाड़ियों की बिक्रीC2Cयूजर-टू-यूजर सेलिंग प्लेटफॉर्म

📌 91Trucks उन बिजनेस ओनर्स और ट्रांसपोर्टर्स के लिए ज्यादा फायदेमंद है जो कमर्शियल व्हीकल खरीदने या फाइनेंस करवाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनाना चाहते हैं।


🔮 भविष्य में क्या हो सकता है?

🎯 संभावनाएं:

✔️ भारत में नंबर 1 B2B ट्रकिंग प्लेटफॉर्म बनने का मौका
✔️ EV ट्रकिंग मार्केट में बड़ा खिलाड़ी बनने की संभावना
✔️ डेटा ड्रिवन लॉजिस्टिक्स और फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस लाने का अवसर

🚧 चुनौतियां:

मजबूत प्रतियोगिता (CarDekho, Droom, OLX Auto)
छोटे ट्रांसपोर्टर्स को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में लाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है
EV ट्रकों और फाइनेंसिंग को लेकर नीतियों में बदलाव का असर


💡 क्या 91Trucks भारतीय ट्रकिंग इंडस्ट्री को बदल सकता है?

🔹 भारतीय लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री तेजी से डिजिटल हो रही है।
🔹 91Trucks का यह फंडिंग राउंड इस बदलाव को और तेज कर सकता है।
🔹 सही रणनीति के साथ, 91Trucks कमर्शियल व्हीकल मार्केट के लिए वही कर सकता है, जो CarDekho और OLX ने पैसेंजर कार मार्केट के लिए किया।

💰 अगर कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को मजबूत करती है, ज्यादा डीलर्स और पार्टनर्स जोड़ती है और मार्केटिंग पर फोकस करती है, तो यह अगले कुछ सालों में भारत का सबसे बड़ा B2B कमर्शियल व्हीकल प्लेटफॉर्म बन सकता है। 🚛🚀

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Ola Electric ने 1,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की,

ola electric

Ola Electric की 1,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी ने पूरे इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में हलचल मचा दी है। यह सिर्फ Ola Electric के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय EV इंडस्ट्री के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

क्या यह EV इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मंदी का संकेत है? या फिर यह सिर्फ ओला इलेक्ट्रिक की अपनी आंतरिक चुनौतियों का नतीजा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


💼 Ola Electric की छंटनी: प्रमुख कारण और चुनौतियां

1️⃣ Ola Electric का बढ़ता घाटा (Rising Losses)

Ola Electric ने FY25 की तीसरी तिमाही (Q3 FY25) में ₹1,045 करोड़ का राजस्व कमाया, लेकिन इसके घाटे में 50% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹564 करोड़ हो गया।
🚨 प्रमुख कारण:
✅ लागत बढ़ना (High Operational Costs)
✅ ग्राहकों की शिकायतें और ब्रांड की छवि पर असर (Negative Customer Sentiments)
✅ प्रतिस्पर्धा में इजाफा (Increased Competition)

2️⃣ प्रतिस्पर्धा का दबाव (Rising Competition)

Ola Electric पहले भारत में EV स्कूटर सेगमेंट की निर्विवाद लीडर थी, लेकिन अब बाजार में Bajaj, TVS, और Ather Energy जैसी कंपनियों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
📉 बाजार हिस्सेदारी (Market Share) का बदलता समीकरण:
📌 जनवरी 2025 में Ola Electric ने 24.91% बाजार हिस्सेदारी के साथ नंबर 1 स्थान फिर से हासिल किया था।
📌 फरवरी 2025 में कंपनी ने 25,000 से अधिक यूनिट्स बेचीं, जिससे बाजार में उसकी स्थिति मजबूत बनी रही।

3️⃣ ग्राहकों की बढ़ती शिकायतें और CCPA का नोटिस

  • अक्टूबर 2024 में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Ola Electric को नोटिस जारी किया था।
  • गलत विज्ञापन (Misleading Advertisements) और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को लेकर ग्राहकों की लगातार शिकायतें सामने आई थीं।
  • इससे कंपनी की ब्रांड वैल्यू और मार्केट ट्रस्ट पर असर पड़ा।

4️⃣ छंटनी से कंपनी को क्या फायदा होगा?

🚀 Ola Electric इस छंटनी के जरिए:
परिचालन लागत (Operational Costs) में कटौती करेगी।
फंडिंग और निवेश आकर्षित करने की क्षमता में सुधार करेगी।
कंपनी की लाभप्रदता (Profitability) बढ़ाने के लिए मार्जिन सुधारने पर ध्यान देगी।


🔍 भारतीय EV बाजार की स्थिति: क्या Ola Electric अकेली है?

भारत का EV उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।

📈 VAHAN पोर्टल के अनुसार, फरवरी 2025 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों की बिक्री:

कंपनीबिक्री (फरवरी 2025)
Ola Electric25,000+
Bajaj Auto20,006
TVS Motors17,603
Ather Energy11,129
Greaves Electric Mobility3,492

📌 Ola Electric के मुकाबले दूसरी कंपनियों की स्थिति:

Bajaj और TVS ने Ola Electric को कड़ी टक्कर दी है।
Ather Energy की भी मजबूत पकड़ बनी हुई है।
Paytm-backed BluSmart और Hero MotoCorp के Vida जैसे नए खिलाड़ी भी EV सेगमेंट में प्रवेश कर चुके हैं।

बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सरकारी नीतियों के कारण कंपनियों को परिचालन लागत और लाभप्रदता के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।


📊 Ola Electric के लिए आगे क्या?

📌 संभावित रणनीतियां:

EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश
बैटरी इनोवेशन और स्वैपेबल बैटरी मॉडल को अपनाना
नए प्रोडक्ट लॉन्च – ‘Roadster X’ और अन्य इलेक्ट्रिक मॉडल्स
ग्लोबल एक्सपैंशन और निर्यात बाजार में प्रवेश

💰 क्या Ola Electric IPO लॉन्च करेगी?

  • कंपनी ने पहले ही IPO फाइल करने की योजना बनाई थी, लेकिन वित्तीय स्थिति को देखते हुए इसमें देरी हो सकती है।
  • प्रतिस्पर्धी कंपनियां भी IPO की तैयारी में हैं, जिससे बाजार में Ola Electric को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

🚀 निष्कर्ष: Ola Electric के लिए यह छंटनी कितना फायदेमंद साबित होगी?

📉 Ola Electric की 1,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी यह दर्शाती है कि कंपनी गंभीर वित्तीय और परिचालन दबाव का सामना कर रही है।

📌 छंटनी के प्रभाव:
🔹 अल्पकालिक रूप से, यह लागत में कटौती कर सकती है, लेकिन इससे कंपनी की ब्रांड छवि प्रभावित हो सकती है।
🔹 दीर्घकालिक रूप से, अगर कंपनी नए इनोवेशन और बैटरी टेक्नोलॉजी पर ध्यान देती है, तो यह बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।

💡 अगले कुछ महीनों में Ola Electric की रणनीतियां यह तय करेंगी कि वह EV बाजार में लीडर बनी रहेगी या नई कंपनियां उससे आगे निकल जाएंगी।

Read more :B2B payments platform Rupifi को $144 मिलियन की फंडिंग,

B2B payments platform Rupifi को $144 मिलियन की फंडिंग,

Rupifi

भारत के B2B डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम में तेजी से उभर रही फिनटेक कंपनी Rupifi ने $144 मिलियन (₹1,215 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। यह कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी फंडिंग राउंड है और तीन वर्षों में पहला बड़ा निवेश भी। इस दौर में कंपनी के मौजूदा निवेशक Quona Capital और Tiger Global ने भाग लिया है।

Rupifi फंडिंग डिटेल्स: 66,427 शेयरों की बिक्री

Rupifi के बोर्ड ने ₹1,82,818 प्रति शेयर की कीमत पर 66,427 अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रिफरेंस शेयर (Compulsory Convertible Preference Shares – CCPS) जारी करने के लिए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है। कंपनी ने यह जानकारी कॉर्पोरेट मामलों के रजिस्ट्रार (RoC) में दायर अपनी नियामक फाइलिंग में साझा की है।

💰 यह फंडिंग कंपनी की व्यवसायिक गतिविधियों को सपोर्ट करने और पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

कंपनी का परिचय और बिजनेस मॉडल

Rupifi की स्थापना 2020 में हुई थी और यह माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को डिजिटल B2B प्लेटफॉर्म्स और मार्केटप्लेस पर मल्टी-लेंडर एक्सेस प्रदान करता है।

👉 यह iSpirt के Open Credit Enablement Network (OCEN) के समान कार्य करता है और MSMEs को आसान लोन उपलब्ध कराता है।

🔹 प्रमुख सेवाएं:
1️⃣ लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit) – MSMEs को लचीले लोन विकल्प देता है।
2️⃣ इनवॉइस फाइनेंसिंग (Invoice Financing) – छोटे व्यवसायों को उनकी बिक्री पर अग्रिम पूंजी मिलती है।
3️⃣ तेज और डिजिटल लोन प्रोसेसिंग – स्मार्ट अंडरराइटिंग सिस्टम की मदद से बैंकों, NBFCs और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए लोन प्रोसेसिंग को आसान बनाता है।

अब तक मिली कुल फंडिंग

💵 अब तक, Rupifi ने कुल $35 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।
📌 2022 में, कंपनी ने $25 मिलियन की सीरीज़ A फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Tiger Global और Bessemer Venture Partners ने किया था।

🔹 वर्तमान में कंपनी में Quona Capital सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है, उसके बाद Tiger Global और Bessemer Venture Partners प्रमुख निवेशक हैं।

वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में घाटे में कमी

📊 Rupifi के लिए FY24 एक स्थिर वित्तीय वर्ष रहा।

राजस्व (Revenue):

  • FY24 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹33.74 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग स्थिर है।
  • हालांकि, कंपनी ने अपने घाटे को 22.8% तक कम कर लिया।

घाटा (Losses):

  • FY23 में कंपनी का घाटा ₹79.8 करोड़ था, जो FY24 में घटकर ₹61.6 करोड़ रह गया।
  • यह बताता है कि कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

B2B फिनटेक मार्केट में Rupifi का स्थान

Rupifi का फोकस भारत के MSME सेक्टर को डिजिटल क्रेडिट और फाइनेंसिंग में मदद करने पर है। देश में 6 करोड़ से अधिक MSMEs हैं, लेकिन इनमें से बहुत से बिजनेस को पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से क्रेडिट प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

💡 Rupifi कैसे मदद कर रहा है?
🔹 तेजी से लोन अप्रूवल और डिजिटल प्रोसेसिंग
🔹 B2B प्लेटफॉर्म्स के साथ इंटीग्रेशन
🔹 छोटे व्यापारियों के लिए लचीले फाइनेंसिंग ऑप्शन

📌 भारत में डिजिटल लोन और पेमेंट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। छोटे व्यवसायों के लिए UPI, BNPL (Buy Now, Pay Later), और डिजिटल क्रेडिट स्कीम्स का विस्तार हो रहा है, जिससे Rupifi जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है।

Rupifi की भविष्य की योजनाएं

🚀 इस नई फंडिंग से कंपनी को किन क्षेत्रों में फायदा होगा?

1️⃣ MSME क्रेडिट को और मजबूत बनाना:

  • कंपनी छोटे व्यापारियों के लिए अधिक इनोवेटिव और किफायती क्रेडिट उत्पाद पेश कर सकती है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और NBFCs के साथ नए साझेदारी कर सकती है।

2️⃣ व्यापार विस्तार:

  • कंपनी का लक्ष्य अपने डिजिटल पेमेंट्स और लोन उत्पादों को भारत के ग्रामीण और छोटे शहरों में अधिक MSMEs तक पहुंचाना है।

3️⃣ AI और स्मार्ट अंडरराइटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल:

  • बेहतर डेटा एनालिटिक्स और AI-आधारित लेंडिंग मॉडल विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

निष्कर्ष

📌 Rupifi ने $144 मिलियन (₹1,215 करोड़) की फंडिंग जुटाकर MSME डिजिटल लेंडिंग सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

📈 कंपनी का ध्यान अपने फाइनेंसिंग मॉडल को और अधिक MSMEs तक पहुंचाने और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को बेहतर बनाने पर है।

💡 भारत में डिजिटल लोन और MSME क्रेडिट सेक्टर में तेजी से ग्रोथ हो रही है, जिससे Rupifi जैसी कंपनियों के लिए अपार संभावनाएं हैं।

🚀 आने वाले समय में, यह फंडिंग कंपनी को अधिक MSMEs तक अपनी सेवाएं पहुंचाने और भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम में और मजबूती लाने में मदद करेगी।

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फरवरी 2025 में UPI ने दर्ज किए 16.11 अरब ट्रांजैक्शन,

UPI

भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की तेजी जारी है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2025 में UPI ने 16.11 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए। हालांकि, जनवरी 2025 के 16.99 अरब ट्रांजैक्शन की तुलना में यह 5.2% की गिरावट दर्शाता है।

लेकिन सालाना (YoY) आधार पर, फरवरी 2024 की तुलना में UPI ट्रांजैक्शन में 33% की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि भारत में डिजिटल पेमेंट्स का विस्तार लगातार हो रहा है और UPI का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।


UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू में भी गिरावट, लेकिन सालाना ग्रोथ बरकरार

📉 फरवरी 2025 में UPI ट्रांजैक्शन का कुल मूल्य ₹21.96 लाख करोड़ रहा, जो जनवरी 2025 के ₹23.48 लाख करोड़ से 6.5% कम है।
📈 हालांकि, सालाना आधार पर तुलना करें तो UPI का ट्रांजैक्शन मूल्य फरवरी 2024 की तुलना में 20% बढ़ा है।

💡 फरवरी में गिरावट क्यों आई?
फरवरी में ट्रांजैक्शन की संख्या में गिरावट आना मौसमी प्रवृत्ति (seasonal trend) का हिस्सा है क्योंकि यह महीना जनवरी की तुलना में छोटा होता है।

📊 डेली ट्रांजैक्शन डेटा:
फरवरी 2025 में औसतन प्रति दिन 575 मिलियन (57.5 करोड़) UPI ट्रांजैक्शन हुए, जो जनवरी के 548 मिलियन (54.8 करोड़) से अधिक है।
डेली ट्रांजैक्शन वैल्यू भी बढ़कर ₹78,446 करोड़ हो गई, जबकि जनवरी में यह ₹75,743 करोड़ थी।

👉 इसका मतलब यह है कि हालांकि फरवरी में कुल ट्रांजैक्शन की संख्या कम रही, लेकिन प्रति दिन के औसत में सुधार हुआ।


UPI लीडर्स: कौन रहा नंबर 1?

जनवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, UPI पेमेंट ऐप्स की रैंकिंग इस प्रकार रही:

🏆 1. PhonePe – 8.1 अरब ट्रांजैक्शन
🥈 2. Google Pay – 6.18 अरब ट्रांजैक्शन
🥉 3. Paytm – 1.15 अरब ट्रांजैक्शन

📌 फरवरी 2025 के लिए ऐप-वार ट्रांजैक्शन डेटा अभी जारी नहीं हुआ है।

📊 PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे प्रमुख UPI ऐप्स भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर हावी हैं।


UPI का तेजी से विस्तार: 450 मिलियन उपयोगकर्ता

NPCI के CEO दिलीप असबे ने हाल ही में कहा कि UPI के पास वर्तमान में 450 मिलियन (45 करोड़) उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से 200 मिलियन (20 करोड़) प्रतिदिन एक्टिव रहते हैं।

🚀 क्या आने वाले समय में UPI का दायरा और बढ़ेगा?
NPCI अब 200-300 मिलियन (20-30 करोड़) और नए यूजर्स को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके लिए RBI, सरकार और फाइनेंशियल संस्थानों की भागीदारी आवश्यक होगी।


UPI इनोवेशन के लिए NPCI का नया R&D सेंटर

💡 UPI को और अधिक मजबूत और इनोवेटिव बनाने के लिए NPCI एक नए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर की स्थापना करने जा रहा है।
🏢 यह नया 5000-क्षमता वाला R&D सेंटर डिजिटल पेमेंट टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को गति देने और वैश्विक साझेदारियों (global collaborations) को मजबूत करने में मदद करेगा।

📌 इससे भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और UPI को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने का मौका मिलेगा।


UPI का भविष्य: क्या डिजिटल भुगतान और बढ़ेगा?

📊 वर्तमान ट्रेंड्स को देखें तो UPI की ग्रोथ आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

🚀 UPI का विस्तार किन पहलुओं पर निर्भर करेगा?

1️⃣ नए उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाना:

  • ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे व्यवसायों में UPI अपनाने को बढ़ावा देना।
  • अधिक लोगों को डिजिटल पेमेंट के प्रति जागरूक बनाना।

2️⃣ अंतरराष्ट्रीय विस्तार:

  • UPI को भारत के बाहर अन्य देशों में अपनाने के लिए NPCI विभिन्न सरकारों और बैंकों से साझेदारी कर रहा है।
  • कुछ देशों में UPI आधारित पेमेंट्स पहले ही शुरू हो चुके हैं, और यह ट्रेंड आगे भी बढ़ेगा।

3️⃣ UPI पर क्रेडिट और लोन सुविधाएँ:

  • कई फिनटेक कंपनियां UPI के जरिए बाय नाउ, पे लेटर (BNPL) और छोटे लोन की सेवाएं देने की तैयारी कर रही हैं।
  • इससे डिजिटल भुगतान का दायरा और बढ़ेगा।

📌 UPI की लगातार बढ़ती लोकप्रियता से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में डिजिटल ट्रांजैक्शन और तेजी से बढ़ेंगे।


निष्कर्ष: UPI का दबदबा बरकरार, ग्रोथ जारी

📈 फरवरी 2025 में UPI ट्रांजैक्शन में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन सालाना आधार पर 33% की मजबूत वृद्धि हुई।
📉 ट्रांजैक्शन वैल्यू में 6.5% की मासिक गिरावट थी, लेकिन सालाना 20% की बढ़ोतरी दर्शाती है कि डिजिटल भुगतान का चलन लगातार बढ़ रहा है।

📌 NPCI का 450 मिलियन यूजर्स को जोड़ने का लक्ष्य और नया R&D सेंटर UPI की वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगा।
📌 आने वाले वर्षों में, UPI का उपयोग और अधिक बढ़ेगा, जिससे डिजिटल पेमेंट को नया आयाम मिलेगा। 🚀

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Ola Electric ने फरवरी 2025 में 25,000 से अधिक EV बेचे,

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इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Ola Electric ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने फरवरी 2025 में 25,000 से अधिक यूनिट्स की बिक्री की, जिससे भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (2W) सेगमेंट में 28% का मार्केट शेयर बरकरार रखा है।

📌 जनवरी 2025 में, Ola Electric ने 24.91% मार्केट शेयर के साथ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में फिर से अपनी टॉप पोजीशन हासिल की।
📌 दिसंबर 2024 में Bajaj और TVS ने Ola को पछाड़ दिया था, लेकिन जनवरी में Ola ने बाज़ार में वापसी की।

🚀 Ola Electric की बिक्री और मार्केट शेयर में यह बढ़ोतरी कंपनी के मजबूत स्कूटर पोर्टफोलियो और देशभर में 4,000 स्टोर्स की उपलब्धता के कारण हुई है।

👉 कंपनी के प्रवक्ता ने कहा:
“हम अपने मजबूत स्कूटर पोर्टफोलियो और 4,000 स्टोर्स के नेटवर्क के चलते टियर 3 और टियर 4 शहरों में तेजी से बढ़ती मांग देख रहे हैं। अगले महीने Roadster X की डिलीवरी शुरू होने के साथ ही हम EV अपनाने की गति को और तेज़ करना चाहते हैं।”


VAHAN डेटा: Ola Electric की बिक्री नंबर जल्द होंगे अपडेट

🔹 शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक VAHAN पोर्टल के ताज़ा डेटा के अनुसार, भारत में प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों की बिक्री इस प्रकार रही:

  • Bajaj Auto – 20,006 यूनिट्स
  • TVS Motor – 17,603 यूनिट्स
  • Ather Energy – 11,129 यूनिट्स
  • Greaves Electric Mobility – 3,492 यूनिट्स
  • Ola Electric – 8,390 यूनिट्स (संभावना है कि दिन के अंत तक डेटा अपडेट होगा)

💡 Ola Electric के नंबर अभी पूरी तरह अपडेट नहीं हुए हैं, और कंपनी का दावा है कि दिन खत्म होने तक वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे।


Ola Electric की नई रणनीति: वाहन पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव

📌 Ola Electric ने हाल ही में वाहन पंजीकरण एजेंसियों के साथ अपने अनुबंधों को फिर से तय किया है।

कंपनी का कहना है कि यह बदलाव VAHAN पोर्टल पर उसके रजिस्ट्रेशन नंबरों को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। लेकिन…

इस कदम का मुख्य उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को आसान और अधिक किफायती बनाना है।
इस रणनीति से Ola Electric को लॉन्ग टर्म में लागत घटाने और बिजनेस ऑप्टिमाइजेशन में मदद मिलेगी।


Ola की ग्रोथ में फैक्ट्री और रिसर्च सेंटर की बड़ी भूमिका

🚀 Ola Electric की तेज़ी से बढ़ती सफलता के पीछे इसके दो प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर रहे हैं:

🔹 Futurefactory और EV हब, तमिलनाडु

  • यह Ola Electric का प्रमुख प्रोडक्शन सेंटर है।
  • कंपनी के इलेक्ट्रिक स्कूटरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन यहीं होता है।

🔹 Battery Innovation Centre (BIC), बेंगलुरु

  • यह Ola Electric का बैटरी रिसर्च और इनोवेशन सेंटर है।
  • बैटरियों के परफॉर्मेंस और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने पर यहां रिसर्च होती है।

💡 इसके अलावा, Ola Electric के पास पूरे भारत में 750 से अधिक कंपनी-ओन्ड स्टोर्स हैं, जिससे इसे देश की सबसे बड़ी EV रिटेल नेटवर्क कंपनी कहा जा सकता है।


Q3 FY25: Ola Electric को हुआ ₹564 करोड़ का नुकसान

📊 Ola Electric को दिसंबर 2024 को समाप्त तिमाही (Q3 FY25) में मिक्स्ड रिजल्ट्स देखने को मिले:

कंपनी की कुल आय ₹1,045 करोड़ रही।
हालांकि, यह पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 19.4% कम थी।
कंपनी का घाटा 50% बढ़कर ₹564 करोड़ हो गया।

💡 इससे साफ है कि Ola Electric को अपने फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में सुधार करने के लिए लागत में कटौती और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर काम करना होगा।


Ola की बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनियाँ शेयर बाजार में उतरने को तैयार

📌 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में Ola Electric की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनियाँ भी तेजी से ग्रोथ और विस्तार की ओर बढ़ रही हैं।

📊 Ather Energy

  • SEBI से शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने (IPO) की अंतिम मंजूरी प्राप्त कर चुकी है।
  • जल्द ही Ather का IPO निवेशकों के लिए खुलेगा।

📊 Greaves Electric Mobility (Ampere की पेरेंट कंपनी)

  • कंपनी ने दिसंबर 2024 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए Draft Red Herring Prospectus (DRHP) फाइल किया।
  • यह भी जल्द ही IPO के जरिए निवेशकों से पूंजी जुटाएगी।

💡 इन कंपनियों की IPO योजनाएँ भारतीय EV इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा को और तेज़ कर सकती हैं।


क्या Ola Electric मार्केट में अपनी लीड बरकरार रख पाएगी?

🔹 Ola Electric ने जनवरी और फरवरी 2025 में शानदार प्रदर्शन किया है और अपनी टॉप पोजीशन को मजबूत किया है।
🔹 लेकिन कंपनी को अपने फाइनेंशियल लॉस को नियंत्रित करने और EV सेगमेंट में और अधिक विस्तार करने की आवश्यकता होगी।
🔹 बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Ola Electric को इनोवेशन और किफायती EV मॉडल पर ध्यान देना होगा।

🚀 क्या Ola Electric अपने लीडिंग पोजीशन को बनाए रखेगी या Bajaj, TVS और Ather जैसे प्रतिद्वंद्वी इसे फिर से पीछे छोड़ देंगे? आने वाले महीनों में इसका जवाब मिलेगा!

Read more :Kinetic Green को भारी वित्तीय झटका: FY24 में घाटा 11 गुना बढ़ा,

Kinetic Green को भारी वित्तीय झटका: FY24 में घाटा 11 गुना बढ़ा,

Kinetic Green

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Kinetic Green को वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा है। कंपनी का घाटा 11 गुना (11X) बढ़कर ₹77 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण विज्ञापन खर्च और कर्मचारी लाभों में भारी वृद्धि रही।

📉 इसके अलावा, Kinetic Green की कुल आय में भी 3% की गिरावट दर्ज की गई, जो ₹301 करोड़ (FY23) से घटकर ₹291 करोड़ (FY24) रह गई।

💡 Greater Pacific Capital द्वारा समर्थित इस कंपनी के लिए यह झटका महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत के बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


Kinetic Green की मुख्य व्यवसाय गतिविधियां

📌 Kinetic Green एक प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता है, जो विभिन्न श्रेणियों में वाहन बनाती है, जिनमें शामिल हैं:

  • इलेक्ट्रिक स्कूटर
  • इलेक्ट्रिक रिक्शा (E-Rickshaw)
  • इलेक्ट्रिक साइकिल
  • इलेक्ट्रिक बग्गी और अन्य व्यावसायिक वाहन

💰 FY24 में, कंपनी की आय का एकमात्र स्रोत इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री से हुआ।

📉 हालांकि, बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बढ़ते खर्चों ने इसकी वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है।


सबसे बड़ा खर्च: प्रोक्योरमेंट और विज्ञापन

Kinetic Green के लिए सबसे बड़ा खर्च कच्चे माल (Procurement) की लागत रही, जो इसके कुल खर्च का 62% है।

📊 हालांकि, कंपनी ने इस लागत को 5.4% घटाकर ₹229 करोड़ (FY24) कर दिया, जो FY23 में ₹242 करोड़ थी।

लेकिन…

🚀 विज्ञापन खर्च में भारी उछाल आया है!

  • FY24 में विज्ञापन खर्च 8.2X बढ़कर ₹58 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह बहुत कम था।
  • यह दर्शाता है कि कंपनी ने मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

📌 कर्मचारी लाभों में भी 52.4% की वृद्धि हुई है, जिससे कुल लागत बढ़ गई।

💡 इन बढ़े हुए खर्चों के कारण Kinetic Green का कुल व्यय FY23 में ₹310 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹369 करोड़ हो गया, यानी 19% की वृद्धि!


गिरती कमाई और बढ़ते नुकसान

💸 बिक्री में गिरावट और बढ़ते खर्चों के कारण, Kinetic Green का घाटा 11 गुना बढ़कर ₹77 करोड़ हो गया।

📊 मुख्य वित्तीय आँकड़े:

  • FY23 का घाटा: ₹7 करोड़
  • FY24 का घाटा: ₹77 करोड़ (11X वृद्धि)
  • EBITDA मार्जिन: -20.55% (यानी, कंपनी को परिचालन स्तर पर भारी नुकसान हो रहा है)
  • FY24 में कंपनी ने ₹1.27 खर्च किए हर ₹1 की ऑपरेटिंग रेवेन्यू कमाने के लिए

📉 इसका मतलब है कि कंपनी को अपना व्यवसाय लाभदायक बनाने के लिए बड़े बदलाव करने होंगे।


FY24 के अंत तक कंपनी की संपत्तियाँ

📌 पुणे स्थित Kinetic Green ने FY24 के अंत तक ₹169 करोड़ की कुल संपत्तियाँ दर्ज कीं।

📌 कंपनी के पास ₹2.3 करोड़ की नकद राशि और बैंक बैलेंस था, जो वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से बहुत अधिक नहीं है।


Kinetic Green के सामने बड़ी चुनौतियाँ

🚧 1. प्रतिस्पर्धा का दबाव:

  • भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है।
  • Ola Electric, Ather Energy, और Hero Electric जैसे बड़े ब्रांड बाज़ार पर हावी हो रहे हैं।
  • Kinetic Green को इस प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए बेहतर रणनीति अपनानी होगी।

🚧 2. बढ़ते विज्ञापन खर्च का असर:

  • FY24 में कंपनी ने बड़े स्तर पर विज्ञापन पर खर्च किया, लेकिन इसका असर बिक्री पर नहीं दिखा।
  • यदि बिक्री नहीं बढ़ी, तो इतनी भारी मार्केटिंग लागत स्थायी नहीं होगी।

🚧 3. लागत कम करने की जरूरत:

  • कर्मचारियों की लागत और अन्य ऑपरेटिंग खर्चों को नियंत्रित करना जरूरी है।
  • प्रोक्योरमेंट और लॉजिस्टिक्स में सुधार लाकर कंपनी मुनाफे में आ सकती है।

क्या Kinetic Green FY25 में वापसी कर पाएगी?

🔍 क्या किया जा सकता है?
1️⃣ लागत प्रबंधन:

  • कंपनी को अपने विज्ञापन और कर्मचारियों की लागत को संतुलित करना होगा।

2️⃣ बेहतर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो:

  • अधिक किफायती और उन्नत फीचर्स वाले इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने होंगे।

3️⃣ बेहतर फंडिंग और निवेश:

  • नई फंडिंग जुटाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की जरूरत होगी।

निष्कर्ष: Kinetic Green को वित्तीय स्थिति सुधारने की जरूरत

📉 FY24 में Kinetic Green के लिए कई वित्तीय चुनौतियाँ रहीं:
कंपनी का राजस्व 3% घटा
विज्ञापन खर्च 8X बढ़ा
कर्मचारियों की लागत 52% बढ़ी
कुल घाटा 11X बढ़कर ₹77 करोड़ हो गया

💡 अगर कंपनी को FY25 में मजबूती से वापसी करनी है, तो उसे अपनी लागतों को नियंत्रित करने, सेल्स बढ़ाने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस करना होगा।

🚀 क्या Kinetic Green इन चुनौतियों से उभर पाएगी, या यह घाटा और बढ़ेगा? यह देखने वाली बात होगी!

Read more : Increff के को-फाउंडर और पूर्व CTO रोमिल जैन ने दिया इस्तीफा,

Increff के को-फाउंडर और पूर्व CTO रोमिल जैन ने दिया इस्तीफा,

Increff

SaaS स्टार्टअप Increff के को-फाउंडर और पूर्व चीफ टेक्निकल ऑफिसर (CTO) रोमिल जैन ने कंपनी छोड़ दी है। सूत्रों के मुताबिक, जैन ने पिछले साल के अंत में Increff से अपना नाता तोड़ लिया था और अब वे एक नए एंटरप्रेन्योरियल वेंचर पर काम कर सकते हैं।

📌 एक सूत्र ने जानकारी दी, “रोमिल जैन ने पिछले साल Increff छोड़ दिया था और जल्द ही वे अपने नए प्रोजेक्ट की घोषणा कर सकते हैं।”

हालांकि, Increff ने इस खबर पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।


रोमिल जैन: SaaS इंडस्ट्री में एक मजबूत लीडर

रोमिल जैन ने 2016 में Increff की सह-स्थापना की थी। इससे पहले, उन्होंने DevFactory और Computer Associates में चीफ आर्किटेक्ट और प्रिंसिपल इंजीनियर के रूप में काम किया था।

🚀 Increff को-फाउंडर्स:

  • रोमिल जैन
  • राहुल जैन
  • अंशुमान अग्रवाल

📌 सूत्रों के अनुसार, जैन अपने नए स्टार्टअप की घोषणा जल्द ही कर सकते हैं।

💡 उनकी अगली पहल SaaS, ई-कॉमर्स, या टेक्नोलॉजी के अन्य उभरते क्षेत्रों में हो सकती है, लेकिन अभी इस पर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।


Increff में नेतृत्व में बदलाव: विशाल राज बने नए को-फाउंडर

🚀 Increff ने रोमिल जैन के जाने के बाद कंपनी के नेतृत्व में बदलाव किया है।

📌 विशाल राज, जो पिछले सात सालों से कंपनी के साथ जुड़े हैं, अब Increff के नए को-फाउंडर बन गए हैं।
📌 वर्तमान में, विशाल राज Increff के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) हैं।

💡 Increff इस बदलाव के साथ अपनी टेक्नोलॉजी को और मजबूत करने और नए बिजनेस अवसरों को एक्सप्लोर करने की योजना बना रहा है।


Increff: 700+ ब्रांड्स के साथ इन्वेंट्री मैनेजमेंट को आसान बना रहा है

🚀 Increff एक SaaS प्लेटफॉर्म है जो फैशन ब्रांड्स और रिटेलर्स को इन्वेंटरी मैनेजमेंट ऑप्टिमाइज़ करने में मदद करता है।

📌 यह स्टार्टअप ब्रांड्स को उनकी सेल्स वेलोसिटी को 2 से 3 गुना तक बढ़ाने में मदद करता है।
📌 Increff के ओमनीचैनल और मर्चेंडाइजिंग प्लेटफॉर्म से ब्रांड्स को बेहतर इन्वेंटरी मैनेजमेंट, वेयरहाउस ऑप्टिमाइज़ेशन, और ऑर्डर फुलफिलमेंट में मदद मिलती है।
📌 फिलहाल, कंपनी 700+ ब्रांड्स के साथ काम कर रही है और इसकी पहुंच 35 देशों तक फैली हुई है।

💡 इसका प्लेटफॉर्म ब्रांड्स को अधिक कुशल और लागत प्रभावी तरीके से संचालन करने में सक्षम बनाता है।


Increff की अब तक की फंडिंग और ग्रोथ

🚀 Increff ने फरवरी 2022 में अपने सीरीज B फंडिंग राउंड में $12 मिलियन (करीब ₹100 करोड़) जुटाए थे।

📌 इस राउंड का नेतृत्व TVS Capital Funds, Premji Invest और Flipkart के को-फाउंडर बिन्नी बंसल की 021 Capital ने किया था।
📌 कुल मिलाकर, Increff ने अब तक लगभग $17 मिलियन (करीब ₹140 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।

💡 इन्वेस्टर्स का ध्यान इस स्टार्टअप की मजबूत ग्रोथ और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉल्यूशंस पर है, जो फैशन और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं।


Increff की वित्तीय स्थिति: FY24 में राजस्व बढ़ा, घाटा घटा

📊 TheKredible की रिपोर्ट के अनुसार, Increff का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY24 में 5.8% बढ़कर ₹90 करोड़ हो गया, जो FY23 में ₹85 करोड़ था।

📌 कंपनी ने अपने नुकसान को भी 29% तक कम किया, जो FY23 में ₹48 करोड़ था और FY24 में ₹34 करोड़ रह गया।

📌 बेहतर लागत प्रबंधन और बढ़ते राजस्व के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।

💡 यह आंकड़े दिखाते हैं कि Increff अपने बिजनेस मॉडल को सफलतापूर्वक स्केल कर रहा है और आने वाले समय में और भी ग्रोथ कर सकता है।


आगे का रास्ता: Increff और रोमिल जैन दोनों के लिए नए अवसर

🚀 Increff के लिए:
📌 नए को-फाउंडर और CTO विशाल राज के नेतृत्व में, कंपनी अपने वैश्विक विस्तार और तकनीकी नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
📌 कंपनी के पास पहले से ही मजबूत निवेशकों और ब्रांड पार्टनर्स का समर्थन है, जिससे इसके ग्रोथ की संभावनाएं अच्छी दिख रही हैं।

🚀 रोमिल जैन के लिए:
📌 सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही अपने नए स्टार्टअप की घोषणा कर सकते हैं।
📌 उनका नया वेंचर SaaS, ई-कॉमर्स, या अन्य टेक्नोलॉजी सेगमेंट में हो सकता है।

💡 दोनों पक्षों के लिए यह बदलाव नए अवसरों को जन्म देगा और SaaS इंडस्ट्री में इनोवेशन को बढ़ावा देगा।


निष्कर्ष: Increff और रोमिल जैन, दोनों के लिए एक नया अध्याय

📌 रोमिल जैन का Increff छोड़ना कंपनी के लिए एक बड़ा बदलाव है, लेकिन विशाल राज के नेतृत्व में यह SaaS स्टार्टअप अपनी ग्रोथ जारी रखने के लिए तैयार है।
📌 Increff की मजबूत टेक्नोलॉजी, फंडिंग, और ग्लोबल विस्तार योजनाएं इसे और अधिक सफल बना सकती हैं।
📌 वहीं, रोमिल जैन के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं – क्या वे एक नया स्टार्टअप लॉन्च करेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा!

💡 SaaS और इन्वेंट्री मैनेजमेंट इंडस्ट्री में इन बदलावों के क्या प्रभाव होंगे? यह आने वाले महीनों में साफ हो जाएगा। 🚀

read more :Vidyut ने Flourish Ventures से $2.5 मिलियन की फंडिंग जुटाई,

Vidyut ने Flourish Ventures से $2.5 मिलियन की फंडिंग जुटाई,

Vidyut

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने को गति देने के उद्देश्य से, फुल-स्टैक EV इकोसिस्टम प्लेटफॉर्म Vidyut ने वैश्विक फिनटेक निवेशक Flourish Ventures से $2.5 मिलियन (करीब ₹20.75 करोड़) की फंडिंग जुटाई है

📌 इस फंडिंग का उपयोग Vidyut की “बैटरी-एज़-अ-सर्विस” (BaaS) पेशकश को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे पैसेंजर और कॉमर्शियल EV सेगमेंट में इसका विस्तार होगा।
📌 Vidyut का लक्ष्य छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMBs) के लिए EV को अधिक किफायती और सुलभ बनाना है, ताकि भारत की क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को तेज किया जा सके।

💡 Vidyut का अनूठा बिजनेस मॉडल EV बैटरियों को वाहन से अलग करके “पे-पर-किलोमीटर” सब्सक्रिप्शन पर पेश करता है, जिससे तीन-पहिया (3W) EV की शुरुआती लागत 35-40% तक कम हो जाती है।


Vidyut अब तक $16.5 मिलियन की फंडिंग जुटा चुका है

Vidyut ने अब तक कुल $16.5 मिलियन (₹137 करोड़) से अधिक की फंडिंग जुटाई है, जिसमें शामिल हैं:

3one4 Capital
Credit Saison
Flourish Ventures
Zephyr Peacock
Lighthouse Canton
अन्य प्रमुख निवेशक

📌 कंपनी ने फरवरी 2023 में अपनी सीरीज A फंडिंग में $10 मिलियन जुटाए थे

💡 यह नया निवेश Vidyut को EV फाइनेंसिंग और बैटरी सेवाओं में और अधिक नवाचार करने में मदद करेगा।


Vidyut: भारत में EV फाइनेंसिंग को बदलने वाला स्टार्टअप

Vidyut की स्थापना 2021 में हुई थी और इसे Swiggy और Bounce के पूर्व अधिकारी क्षितिज कोठी (Xitij Kothi) और गौरव श्रीवास्तव (Gaurav Srivastava) ने शुरू किया था

Vidyut की खासियत:

📌 “बैटरी-एज़-अ-सर्विस” (BaaS) मॉडल:

  • बैटरियों को EV से अलग कर किराए पर देने से, ग्राहकों की शुरुआती लागत कम हो जाती है।
  • तीन-पहिया EV की कीमतें 35-40% तक कम हो जाती हैं, जिससे वे पेट्रोल-डीजल वाहनों से भी सस्ते हो जाते हैं।

📌 EV रीसेल और लाइफसाइकल मैनेजमेंट:

  • Vidyut ने 2023 में EV रीसेल और लाइफसाइकल मैनेजमेंट समाधान पेश किए।
  • यह EV मालिकों को उनके पुराने वाहनों के लिए बेहतर कीमत दिलाने में मदद करता है।

📌 सितंबर 2024 में पैसेंजर EV सेगमेंट में एंट्री:

  • JSW MG Motor India के साथ साझेदारी कर Vidyut ने भारत का पहला 4-व्हीलर BaaS मॉडल पेश किया, जिससे ग्राहकों की शुरुआती लागत 30% तक घट गई।

💡 Vidyut के इस मॉडल ने EV अपनाने को आसान बना दिया है और इससे ग्राहकों की आय में 10-15% तक की वृद्धि हुई है।


Vidyut के प्रमुख उद्योग साझेदार और वितरण नेटवर्क

Vidyut के पास मजबूत इंडस्ट्री टाई-अप्स हैं, जिससे यह भारत के प्रमुख EV निर्माताओं के साथ काम कर रहा है:

TATA Motors
JSW
MG Motor India
Mahindra Last Mile Mobility
Piaggio
Euler Motors

📌 वर्तमान में Vidyut का नेटवर्क 30 शहरों में फैला हुआ है, जिससे छोटे व्यवसायी और फ्लीट ऑपरेटर अधिक लाभ कमा रहे हैं।

💡 इस मजबूत नेटवर्क के चलते Vidyut भारत में EV सेक्टर में गेम-चेंजर बन सकता है।


Vidyut की नई EV रीसेल सर्विस: सेकंडरी मार्केट में क्रांति

Vidyut ने हाल ही में तीन-पहिया कॉमर्शियल EV वाहनों के लिए एक रीसेल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है

📌 यह सेवा वाहनों के निरीक्षण, मूल्यांकन, बिक्री, और RTO डॉक्यूमेंटेशन की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाती है
📌 EV रीसेल प्लेटफॉर्म की मदद से ग्राहक अपने पुराने EV वाहनों के लिए 10-15% अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं, जो पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों से अधिक है।

💡 इस नई सेवा से सेकंडरी EV बाजार को मजबूती मिलेगी और कॉमर्शियल EV मालिकों को अधिक रिटर्न मिलेगा।


क्या Vidyut भारत में EV इंडस्ट्री में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है?

Vidyut की तेजी से बढ़ती ग्रोथ और मजबूत बिजनेस मॉडल इसे भारत में EV सेक्टर का बड़ा खिलाड़ी बना सकता है।

📊 Vidyut की प्रमुख उपलब्धियां:
हर महीने 15% की ग्रोथ
OEM कंपनियों के साथ मजबूत टाई-अप्स
EV फाइनेंसिंग और रीसेल मार्केट में इनोवेशन

Vidyut के विस्तार में ये चीजें मदद करेंगी:

🚀 नए फंडिंग राउंड – अधिक निवेश के साथ कंपनी अपने BaaS मॉडल को और विकसित कर सकती है।
🚀 नए वाहन सेगमेंट में प्रवेश – वर्तमान में Vidyut तीन-पहिया और चार-पहिया EV सेगमेंट में काम कर रही है, लेकिन आने वाले समय में यह और विस्तार कर सकती है।
🚀 डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार – 30 से अधिक शहरों में उपस्थिति बढ़ाने से कंपनी को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

💡 भारत में बढ़ती EV मांग और सरकार की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नीति के चलते, Vidyut का भविष्य उज्ज्वल नजर आता है! 🚗⚡

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Nykaa ने ESOP स्कीम के तहत 90,500 इक्विटी शेयर जारी किए,

Nykaa

भारत की अग्रणी ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केटप्लेस Nykaa ने अपनी Employee Stock Option (ESOP) योजना के तहत 90,500 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

📌 ESOP के तहत जारी किए गए इन शेयरों की कुल कीमत लगभग ₹1.49 करोड़ आंकी गई है, जो सोमवार को NSE पर ₹165 प्रति शेयर के ओपनिंग प्राइस पर आधारित है।
📌 कंपनी ने अपने रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि नए जारी किए गए इक्विटी शेयर मौजूदा इक्विटी शेयरों के बराबर माने जाएंगे।

Nykaa की ESOP योजना में लगातार विस्तार

Nykaa बीते कुछ महीनों में लगातार ESOP योजना के तहत नए शेयर जारी कर रही है

📌 नवंबर 2023 में कंपनी ने 1.80 लाख इक्विटी शेयर जारी किए थे
📌 अक्टूबर 2024 में 3.08 लाख शेयर जारी किए गए
📌 दिसंबर तिमाही (Q3 FY25) में कुल 4.8 लाख शेयर जारी किए गए


Nykaa के Q3 FY25 के नतीजे: मुनाफे में 51.7% की जबरदस्त वृद्धि

📈 Nykaa का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है और कंपनी ने Q3 FY25 में शानदार ग्रोथ दर्ज की है।

Q3 FY25 में Nykaa का कुल राजस्व ₹2,267 करोड़ तक पहुंच गया
Q3 FY24 में यह ₹1,789 करोड़ था, यानी 26.7% की बढ़ोतरी
ब्यूटी सेगमेंट का योगदान सबसे ज्यादा रहा, जिसने कुल ₹2,060 करोड़ का राजस्व उत्पन्न किया
फैशन सेगमेंट से कंपनी को ₹200 करोड़ की आमदनी हुई, जो कुल राजस्व का 8.8% है
कंपनी का शुद्ध लाभ 51.7% बढ़कर ₹26.4 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹17.4 करोड़ था

💡 Nykaa की यह बढ़त दिखाती है कि भारत में ब्यूटी और फैशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और कंपनी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।


Nykaa के अधिग्रहण और निवेश: Earth Rhythm और Dot & Key में हिस्सेदारी बढ़ाई

Nykaa अपनी मार्केट पोजीशन मजबूत करने के लिए रणनीतिक अधिग्रहण कर रही है।

Earth Rhythm में बहुमत हिस्सेदारी

📌 Nykaa ने पहले 2022 में Earth Rhythm में एक अल्पसंख्यक हिस्सेदारी ली थी
📌 अब कंपनी ने इसे बहुमत हिस्सेदारी में बदल दिया है, जिससे इसका नियंत्रण बढ़ गया है
📌 यह अधिग्रहण प्राथमिक और द्वितीयक लेनदेन के मिश्रण के माध्यम से किया गया

Dot & Key में 90% हिस्सेदारी

📌 Nykaa ने अपनी सहायक कंपनी Dot & Key में हिस्सेदारी बढ़ाकर 90% कर दी है
📌 इसके लिए कंपनी ने ₹265.3 करोड़ का निवेश किया
📌 Dot & Key एक स्किनकेयर और ब्यूटी ब्रांड है, जिसकी मार्केट में अच्छी पकड़ बन रही है

💡 इन अधिग्रहणों से Nykaa का ब्यूटी सेगमेंट और मजबूत होगा और कंपनी को नए ग्राहक मिलने की संभावना बढ़ेगी।


Nykaa की रणनीति: ग्रोथ को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी

Nykaa अपने बिजनेस को तेजी से डिजिटल और ऑफलाइन दोनों मोर्चों पर विस्तार कर रही है

📌 ऑफलाइन स्टोर्स का विस्तार

Nykaa ने भारत के कई शहरों में अपने ऑफलाइन स्टोर्स खोले हैं, जिससे ग्राहकों को शॉपिंग का बेहतर अनुभव मिल रहा है।

📌 डिजिटल इनोवेशन

AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाना
Nykaa Fashion और Nykaa Man के जरिए नए कैटेगिरी में विस्तार
Nykaa ऐप पर नए फीचर्स और पर्सनलाइज्ड सिफारिशें जोड़ना


Nykaa का भविष्य: क्या यह ब्यूटी मार्केट में लीडर बना रहेगा?

Nykaa की मजबूत वित्तीय स्थिति और तेजी से बढ़ती बाजार हिस्सेदारी इसे भारत का अग्रणी ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड बनाए रखने में मदद करेगी।
ESOP योजनाएं कर्मचारियों के लिए आकर्षक हैं और यह टैलेंट को बनाए रखने में कारगर साबित हो सकती हैं।
Earth Rhythm और Dot & Key में हिस्सेदारी बढ़ाने से कंपनी का पोर्टफोलियो और मजबूत होगा।
ब्यूटी और फैशन सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद Nykaa की रणनीतिक प्लानिंग इसे आगे बनाए रखने में मदद करेगी।

💡 क्या Nykaa अपनी ग्रोथ बनाए रख पाएगा या अन्य कंपनियां इसे चुनौती देंगी? यह देखना दिलचस्प होगा! 🚀

Read more :Zomato का Blinkit में ₹1,500 करोड़ का निवेश,

Zomato का Blinkit में ₹1,500 करोड़ का निवेश,

Blinkit

भारत का फूडटेक दिग्गज Zomato अपनी क्विक कॉमर्स शाखा Blinkit में ₹1,500 करोड़ (~$178 मिलियन) का भारी निवेश कर चुका है। यह निवेश ₹500 करोड़ के फंडिंग राउंड को बंद करने के सिर्फ एक महीने बाद आया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि Zomato अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस को लेकर कितनी गंभीर है।

लेकिन यह निवेश कितना प्रभावी होगा? क्या Zomato Blinkit को भारत का सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स ब्रांड बना पाएगा? आइए विस्तार से समझते हैं।


Blinkit को फंडिंग कैसे मिली?

Zomato ने Blinkit में यह ₹1,500 करोड़ की राशि विशेष प्रस्ताव (special resolution) के तहत जुटाई

📌 Blinkit के बोर्ड ने 7,612 इक्विटी शेयर जारी किए, जिनका प्रत्येक का मूल्य ₹19,70,181 था।
📌 इससे कुल ₹1,500 करोड़ (~$178 मिलियन) जुटाए गए
📌 Zomato ने यह निवेश Blinkit की ग्रोथ और ऑपरेशनल विस्तार के लिए किया है

Zomato पहले भी ₹8,500 करोड़ जुटा चुका है

📌 तीन महीने पहले Zomato ने ₹8,500 करोड़ जुटाए थे
📌 Qualified Institutional Placement (QIP) के जरिए यह राशि मिली
📌 इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय स्थिति मजबूत करना और Blinkit को क्विक कॉमर्स सेगमेंट में लीडर बनाना था


Zomato और Blinkit का बिजनेस परफॉर्मेंस

📈 Zomato की रेवेन्यू ग्रोथ शानदार रही

Q3 FY25 में Zomato की ऑपरेशनल रेवेन्यू 64.4% बढ़कर ₹5,405 करोड़ हो गई
पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹3,288 करोड़ थी
लेकिन मुनाफे में गिरावट आई, जो 57.2% घटकर ₹59 करोड़ रह गया

🔥 Blinkit ने भी शानदार प्रदर्शन किया

Q3 FY25 में Blinkit का रेवेन्यू 117% बढ़कर ₹1,399 करोड़ हो गया
Q3 FY24 में यह सिर्फ ₹644 करोड़ था

📌 यह वृद्धि बताती है कि Blinkit भारत में तेजी से ग्रोथ कर रहा है
📌 अब Zomato इसे और बड़े स्तर पर ले जाना चाहता है


Swiggy और Zepto से कड़ी प्रतिस्पर्धा

भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार बहुत प्रतिस्पर्धी हो चुका है।

Swiggy का बड़ा निवेश

📌 Swiggy ने भी पिछले हफ्ते अपनी सप्लाई चेन यूनिट Scootsy Logistics में ₹1,000 करोड़ (~$117 मिलियन) का निवेश किया
📌 Swiggy Instamart, Blinkit और Zepto से पिछड़ रही है
📌 इसलिए कंपनी नए निवेश और रणनीतियों पर काम कर रही है

Citi की रिपोर्ट में Blinkit सबसे आगे

📌 भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में Blinkit की बाजार हिस्सेदारी 41% है
📌 Zepto भी तेजी से बढ़ रहा है
📌 Swiggy Instamart 23% बाजार हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है

इसका मतलब है कि फिलहाल Blinkit आगे है, लेकिन प्रतियोगिता बहुत तगड़ी है।


Zomato और Blinkit की रणनीति: क्या आगे होगा?

🚀 Blinkit की रणनीति यह सुनिश्चित करने पर आधारित है कि ग्राहक 10-15 मिनट में ग्रोसरी और अन्य सामान प्राप्त कर सकें।
🚀 नए निवेश का उपयोग डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत करने, नए शहरों में विस्तार करने और सर्विस क्वालिटी बढ़ाने में किया जाएगा।

Zomato की क्विक कॉमर्स रणनीति में मुख्य बिंदु

📌 और अधिक डार्क स्टोर्स खोलना, जिससे डिलीवरी टाइम कम किया जा सके
📌 फ्लैश सेल और डिस्काउंट ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करना
📌 AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए डिमांड-फोरकास्टिंग को बेहतर बनाना
📌 Swiggy और Zepto को मात देने के लिए नए इनोवेशन लाना


क्या Zomato Blinkit को नंबर 1 बना पाएगा?

Zomato का Blinkit में ₹1,500 करोड़ का निवेश बताता है कि कंपनी क्विक कॉमर्स सेगमेंट में लीडर बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।
Swiggy Instamart और Zepto के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, लेकिन Blinkit की ग्रोथ इसे नंबर 1 बना सकती है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Zomato का यह निवेश कितना सफल साबित होता है!


निष्कर्ष

Zomato ने Blinkit में ₹1,500 करोड़ निवेश कर यह साफ कर दिया है कि क्विक कॉमर्स उसका प्रमुख फोकस एरिया है। हालांकि, Swiggy और Zepto जैसी कंपनियां भी बड़े निवेश कर रही हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। अब यह देखना बाकी है कि Zomato इस सेगमेंट में अपनी पकड़ को और मजबूत कर पाता है या नहीं! 🚀

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