🛕 Ghar Mandir का डिजिटल चमत्कार Info Edge से ₹20 करोड़ जुटाने की तैयारी,

Ghar Mandir

📱 ऑनलाइन भक्ति का बढ़ता प्रभाव
भारत की श्रद्धा-tech इंडस्ट्री में एक और बड़ा कदम आने वाला है। डिजिटल पूजा और मंदिर सेवाएं देने वाला प्लेटफॉर्म Ghar Mandir अब अपने पहले निवेश दौर में $2.5 मिलियन (लगभग ₹20 करोड़) जुटाने की तैयारी में है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व भारत की जानी-मानी निवेश कंपनी Info Edge कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, Info Edge जल्द ही टर्म शीट जारी कर सकती है और डील के लिए फाइनल ड्यू डिलिजेंस स्टेज में पहुंच गई है। यह Info Edge की 2025 में पहली प्रमुख मंदिर-tech या श्रद्धा-tech निवेश पहल होगी।


👥 कौन हैं Ghar Mandir के संस्थापक?
Ghar Mandir की स्थापना सम्या मित्तल और अपूर्व शाह ने अगस्त 2023 में की थी। यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को देश भर के मंदिरों में ऑनलाइन प्रसाद बुकिंग, पारंपरिक पूजा, और संस्कार सेवाएं प्रदान करता है।

  • यूज़र्स सिर्फ ₹101 से पूजा बुक कर सकते हैं।
  • 50+ मंदिरों और पुजारियों के साथ साझेदारी है।
  • सेवा का वीडियो रिकॉर्डिंग भी भेजा जाता है।
  • अब तक 1 लाख+ यूज़र्स को सेवा दे चुका है।

💰 फंडिंग का उपयोग किसमें होगा?
फंडिंग मिलने के बाद Ghar Mandir निम्नलिखित क्षेत्रों में विस्तार करेगा:

  • प्रोडक्ट डेवलपमेंट: ऐप को और अधिक यूज़र-फ्रेंडली बनाना।
  • टेक्नोलॉजी अपग्रेड: AI और ऑटोमेशन का समावेश।
  • नए मंदिरों से भागीदारी: छोटे और बड़े मंदिरों को जोड़ना।
  • वीडियो स्ट्रीमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना।

📈 अनुमानित वैल्यूएशन और डील की स्थिति
Ghar Mandir की वैल्यूएशन $10–15 मिलियन (₹80 से ₹120 करोड़) के बीच हो सकती है, यदि डील सफलतापूर्वक फाइनल हो जाती है।
डील पर काम कर रहे एक व्यक्ति ने बताया, “ड्यू डिलिजेंस अंतिम चरण में है और Info Edge जल्द ही टर्म शीट साझा कर सकता है।”


⚔️ प्रतियोगिता तेज़: कौन-कौन है इस दौड़ में?
Faith-tech स्पेस में अब घमासान मुकाबला चल रहा है। हाल ही में, Ghar Mandir के प्रमुख प्रतिद्वंदी AppsForBharat (Sri Mandir का पैरेंट कंपनी) ने $20 मिलियन की Series C फंडिंग हासिल की थी।
इस सेक्टर में अन्य खिलाड़ियों में शामिल हैं:

  • DevDham
  • Vama
  • Utsav App
  • Sutradhar
  • 27 Mantra

इन सभी का उद्देश्य एक ही है – आस्था को डिजिटल बनाना


📊 श्रद्धा-Tech का तेजी से बढ़ता बाजार
भारत में डिजिटल भक्ति सेवाओं की डिमांड दिन-ब-दिन बढ़ रही है। भक्त अब अपने मोबाइल फोन से ही पूजा, हवन, प्रार्थना और दान जैसी सेवाएं बुक कर रहे हैं।

  • COVID-19 के बाद यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा।
  • Tier 2 और Tier 3 शहरों में भी भारी डिमांड देखी जा रही है।
  • 2025 तक इस सेक्टर का साइज ₹2,000 करोड़ से अधिक होने की संभावना है।

🎥 Ghar Mandir की Unique सेवाएं

  • वीडियो के माध्यम से Live या रिकॉर्डेड पूजा दर्शन
  • विशेष पर्व और व्रतों के लिए थीम आधारित पूजा पैकेज
  • यूज़र्स को डिजिटल ई-प्रसाद सर्टिफिकेट भी भेजा जाता है।
  • पंडित ऑन-डिमांड जैसी सेवा का भी परीक्षण चल रहा है।

🤝 Info Edge की रणनीति
Info Edge ने पहले Zomato, Policybazaar, Naukri जैसे कई यूनिकॉर्न्स में निवेश किया है। अब कंपनी धार्मिक टेक्नोलॉजी में भी अपनी जगह बना रही है।

  • यह निवेश केवल वित्तीय नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम है।
  • Info Edge के इस कदम से श्रद्धा-tech सेक्टर को वैधता और निवेशकों का भरोसा मिलेगा।

🔮 आगे क्या?
अगर यह डील फाइनल होती है, तो Ghar Mandir अपने प्लेटफॉर्म को और विस्तार देने के लिए तैयार है।

  • नए मंदिर और तीर्थस्थल जोड़ने की योजना है।
  • विदेशों में बसे भारतीयों को भी यह सेवा देने पर विचार किया जा रहा है।
  • प्लग-इन मॉडल के तहत पूजा सेवाओं को मंदिर वेबसाइट्स या ऐप्स में एम्बेड करने की तैयारी है।

📌 निष्कर्ष
भारत में आस्था अब केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है — डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उतनी ही मजबूत है। Ghar Mandir का संभावित निवेश और Info Edge जैसी कंपनी का सपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि श्रद्धा-tech सेक्टर में भविष्य की जबरदस्त संभावनाएं छिपी हैं।

📱 अब भक्ति भी डिजिटल है – और इसमें निवेश भी।
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी कंपनी इस आध्यात्मिक दौड़ में आगे निकलती है।


🔗 Source: FundingRaised.in के लिए विशेष रिपोर्ट

Read more : इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की रेस में TVS फिर से नंबर 1, Ola Electric की हालत सबसे खराब!

🚀 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की रेस में TVS फिर से नंबर 1, Ola Electric की हालत सबसे खराब!

ola electric

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट की जुलाई 2025 की बिक्री रिपोर्ट आ चुकी है और इसके नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं। TVS Motor ने एक बार फिर बाज़ी मारी है, वहीं Ola Electric की गिरती पकड़ और घटती बिक्री ने उसे संकट में डाल दिया है।


📉 TVS की बिक्री में गिरावट, फिर भी मार्केट लीडर!

TVS Motor ने जुलाई महीने में कुल 22,225 यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की, जिससे उसका 21.6% मार्केट शेयर बना रहा। हालांकि यह जून 2025 के मुकाबले लगभग 12.73% की गिरावट है, जब कंपनी ने 25,468 यूनिट्स बेचे थे।

TVS के स्थिर प्रदर्शन ने यह दिखाया है कि ब्रांड पर ग्राहकों का भरोसा बना हुआ है, भले ही कुल बिक्री में थोड़ी कमी आई हो।


⚡ Bajaj ने भी झेला झटका, पर दूसरा स्थान बरकरार

Bajaj Auto ने जुलाई में 19,650 यूनिट्स की बिक्री की, जिससे उसका 19.10% मार्केट शेयर रहा। लेकिन यह भी जून के 23,161 यूनिट्स के मुकाबले 15.16% की गिरावट है।

इस गिरावट के बावजूद Bajaj अपनी जगह पर कायम रहा है, और TVS के बाद सबसे ज़्यादा भरोसेमंद ब्रांड बना हुआ है।


😞 Ola Electric की भारी गिरावट, मार्केट शेयर हुआ आधे से भी कम

कभी EV टू-व्हीलर मार्केट की बादशाह कही जाने वाली Ola Electric अब मुश्किलों से घिरी हुई है। जुलाई 2025 में Ola ने केवल 17,848 यूनिट्स बेचीं, जो कि 2024 की तुलना में 57.29% की गिरावट है (जुलाई 2024 में 41,802 यूनिट्स बिकी थीं)। इसका मार्केट शेयर भी 38.83% से घटकर सिर्फ 17.35% रह गया।

💸 इतना ही नहीं, Ola Electric के शेयर की कीमत भी बुरी तरह गिरी है:

  • लिस्टिंग प्राइस: Rs 76
  • मौजूदा कीमत: Rs 41.2
  • ऑल टाइम हाई: Rs 157.4
  • मार्केट कैप में गिरावट: Rs 33,521 करोड़ से Rs 18,190 करोड़ तक (~45% की गिरावट)

उपयोगकर्ताओं की शिकायतें और लगातार घटती बिक्री इस गिरावट के मुख्य कारण हैं।


🔼 Ather Energy की वापसी, बिक्री में अच्छी बढ़त

Ather Energy ने जुलाई में 16,231 यूनिट्स की बिक्री की, जो जून के 14,677 यूनिट्स के मुकाबले 10.59% की वृद्धि है। इसका मार्केट शेयर 15.78% तक पहुंच गया है।

स्टॉक मार्केट में Ather के शेयर भी स्थिरता दिखा रहे हैं:

  • लिस्टिंग प्राइस: Rs 328
  • मौजूदा प्राइस: Rs 353.75

यह संकेत देता है कि कंपनी को निवेशकों का भरोसा मिल रहा है।


🔼 Hero MotoCorp का जोरदार कमबैक

Hero MotoCorp जुलाई में पांचवे स्थान पर रहा, लेकिन इसकी बिक्री में सबसे ज़्यादा ग्रोथ दर्ज की गई — 36.27% की बढ़त के साथ 10,489 यूनिट्स की बिक्री। इसका मार्केट शेयर भी 10.20% तक पहुंच गया है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा संकेत है कि ग्राहकों में फिर से भरोसा बढ़ रहा है।


📊 अन्य कंपनियों का प्रदर्शन भी दिलचस्प

  • Greaves Electric Mobility: जुलाई में 4.08% मार्केट शेयर के साथ छठे स्थान पर रहा।
  • Pure EV (IPO की तैयारी में): 1.64% शेयर के साथ सातवें स्थान पर, बिक्री में 18.12% ग्रोथ
  • River Mobility: 20.4% महीने-दर-महीने वृद्धि
  • Kinetic Green: 59.92% की भारी ग्रोथ, और पहली बार टॉप 10 में शामिल।

📌 EV मार्केट में क्या ट्रेंड बन रहा है?

  1. ब्रांड की विश्वसनीयता और सर्विस नेटवर्क अब ग्राहकों की प्राथमिकता बन रही है।
  2. Ola जैसे हाई-वैल्यू स्टार्टअप्स की गिरावट इस बात का संकेत है कि केवल मार्केटिंग से लंबी रेस नहीं जीती जा सकती।
  3. Hero, Ather और Kinetic जैसी कंपनियों की वापसी दिखाती है कि इनोवेशन और ग्राहक फीडबैक पर ध्यान देना ज़रूरी है।

🔮 भविष्य का क्या अनुमान है?

EV टू-व्हीलर सेक्टर में अगले कुछ महीनों में कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां Ola अपने प्रदर्शन को सुधारने की कोशिश करेगी, वहीं Hero, Ather और TVS जैसे ब्रांड अपनी स्थिति और मजबूत करने की ओर अग्रसर हैं।


निष्कर्ष:

TVS और Bajaj ने बाज़ी मार ली है, लेकिन Ola Electric की गिरावट पूरे EV सेक्टर के लिए एक चेतावनी है। ग्राहक अब सिर्फ ब्रांडिंग नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, गुणवत्ता और आफ्टर सेल्स सर्विस को भी ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं।

➡️ EV सेक्टर की इस दिलचस्प दौड़ में आने वाले महीने और भी बड़े मोड़ ला सकते हैं। FundingRaised पर जुड़े रहें ऐसी ही ख़बरों के लिए! 🚀⚡

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📉 जुलाई में भारतीय स्टार्टअप फंडिंग में बड़ी गिरावट, monthly funding report

monthly funding

🚨 जुलाई में फंडिंग ग्राफ सबसे नीचे, 38% की गिरावट!

monthly funding जुलाई 2025 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अब तक का सबसे सुस्त महीना साबित हुआ। जून में जहां कुल $960 मिलियन की फंडिंग हुई थी, वहीं जुलाई में यह घटकर केवल $598 मिलियन रह गई – यानी 38% की गिरावट। सबसे खास बात यह रही कि इस महीने कोई भी $100 मिलियन+ डील नहीं हुई है।

अगर कुछ प्री-IPO और भारत-अमेरिका आधारित स्टार्टअप्स की बड़ी डील्स न होतीं, तो यह आंकड़ा $400 मिलियन तक सिमट सकता था।


📊 कुल आंकड़े: जुलाई में हुए 105 सौदे

TheKredible के अनुसार, जुलाई में भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल 105 डील्स में $598 मिलियन जुटाए।

  • ग्रोथ और लेट-स्टेज फंडिंग: 19 डील्स में $368 मिलियन
  • अर्ली स्टेज फंडिंग: 70 डील्स में $230 मिलियन
  • 16 डील्स की राशि नहीं बताई गई

📉 महीने-दर-महीने और साल-दर-साल ट्रेंड

2025 की शुरुआत जनवरी में $1.76 बिलियन के मजबूत आंकड़े से हुई, लेकिन इसके बाद फरवरी में यह $802.72 मिलियन तक गिरा। मार्च और मई में यह थोड़ी रिकवरी दिखाते हुए $1 बिलियन के पार पहुंचा, लेकिन जुलाई अब तक का सबसे कमजोर महीना रहा।

साल-दर-साल तुलना में भी जुलाई 2025 की फंडिंग और डील्स की संख्या में भारी गिरावट देखी गई।


🔝 टॉप 10 ग्रोथ-स्टेज डील्स

  • Safe Security – $70M (Series C)
  • Gupshup – $60M (Series F)
  • IndiQube – $44M (Pre-IPO)
  • Smartworks – $20M (Pre-IPO)
  • AppsForBharat – $20M (Series C)
  • Truemeds – $20M (Series B)
  • Navi, Varthana, Credit Wise Capital – उल्लेखनीय निवेश
  • Khetika (Foodtech) – $18M

🚀 टॉप 10 अर्ली-स्टेज डील्स

  • QpiAI – $32M (Series A)
  • Composio – $25M (Series A)
  • Netrasemi – $12.5M
  • Kluisz.ai – $10M (Seed)
  • Metaforms, STAN – $9M each
  • InPrime Finserv – $6.02M
  • EduFund – $6M
  • EVeez, Enlite – $5.4M और $5.32M

AI, फिनटेक, एडटेक और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े स्टार्टअप्स में निवेशकों की खास दिलचस्पी दिखी।


🔄 M&A हलचल: खरीद-बिक्री का महीना

  • Udaan ने ShopKirana को खरीदा
  • Zaggle ने Rio.Money को लिया
  • Desi Farms ने Suruchi Dairy को टेकओवर किया

इसके अलावा SaaS, हेल्थटेक, AI और HRTech में भी कई छोटे-बड़े अधिग्रहण हुए।


🏙️ शहर और सेक्टर वार निवेश

  • बेंगलुरु: 39 डील्स में $339.7M
  • दिल्ली-NCR: 24 डील्स में $130.25M
  • मुंबई: 15 डील्स में $71.58M
  • अहमदाबाद और हैदराबाद: $10M से कम

सेक्टर वाइज:

  • AI – 16 डील्स में $128.35M
  • Fintech – 8 डील्स में $81.42M
  • Deeptech – 8 डील्स में $42.58M
  • E-commerce – $36.16M
  • Healthtech – $32.52M

📈 सीरीज़-वाइज फंडिंग ब्रेकडाउन

  • Series A: 17 डील्स में $154.44M
  • Seed Rounds: 38 डील्स में $63.06M
  • Pre-Series A: 16 डील्स में $31.38M
  • Debt Funding: $59.8M (5 डील्स)
  • Pre-Seed: 10 डील्स में $7.86M

🧯 छंटनी, बंद स्टार्टअप्स और नियुक्तियाँ

  • Ola Krutrim ने 100+ कर्मचारियों को निकाला
  • Blip, Ohm Mobility, Astra जैसे स्टार्टअप्स बंद
  • 26+ सीनियर नियुक्तियाँ हुईं
  • इस साल की पहली छमाही में कुल 1,000 छंटनियाँ दर्ज हुईं

📉 ट्रेंड्स जो ध्यान खींचते हैं

🌾 Agritech का पतन:

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 सालों में एग्रीटेक का निवेश घटा है — जुलाई में सिर्फ 1 डील दर्ज हुई।

👗 Quick Fashion का उभार:

VCs अब तेजी से फैशन डिलीवरी स्टार्टअप्स की तरफ झुक रहे हैं। Reliance ने भी Ajio Rush के ज़रिए इस स्पेस में एंट्री की।

💰 IPO से पहले फाउंडर का दांव:

  • Peyush Bansal (Lenskart) – ₹222 करोड़ के शेयर खरीदे
  • Amagi फाउंडर्स – ₹9 करोड़
  • Zetwerk Promoters – ₹600 करोड़ की योजना

🏢 Co-working का IPO बूम:

  • Smartworks, Indiqube ने सूचीबद्धता पाई
  • WeWork India को SEBI से मंज़ूरी

⚖️ जांच और रेग्युलेटरी खतरे:

ED ने 2025 में गेमिंग, फिनटेक, ई-कॉमर्स कंपनियों की जांच तेज़ की है।
Probo, Myntra, Simpl जैसी कंपनियां जांच के घेरे में हैं।


🔚 निष्कर्ष: सुधार की जरूरत या बदलाव की आहट?

जुलाई 2025 का महीना हमें दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाता है — एक ओर कमजोर प्राइवेट फंडिंग, दूसरी ओर IPO की तेज़ रफ्तार।
एग्रीटेक में गिरावट, क्विक फैशन का उभार और फाउंडर्स का खुद पर विश्वास ऐसे ट्रेंड्स हैं जो बताते हैं कि बदलाव की ज़रूरत है।

IPO की सफलता और फंडिंग के बीच की ये खाई लंबे समय तक नहीं चल सकती। इंडो-US ट्रेड टेंशन जैसे फैक्टर्स को छोड़ दें, तो साल के अंत तक बड़ी डील्स वापस लौट सकती हैं।


📌 पूरा डेटा व एनालिसिस पढ़ने के लिए विजिट करें: FundingRaised.in

Read more : जुलाई 2025 में UPI ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड: 19.47 बिलियन ट्रांजैक्शन

📈 जुलाई 2025 में UPI ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड: 19.47 बिलियन ट्रांजैक्शन

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर हर महीने नई ऊंचाइयों को छू रहा है। National Payments Corporation of India (NPCI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, Unified Payments Interface (UPI) ने जुलाई 2025 में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस महीने कुल 19.47 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹25.08 लाख करोड़ रही।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान का परिदृश्य लगातार तेज़ी से विस्तार कर रहा है, और UPI इसमें एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है।


🔢 जून की तुलना में मजबूत बढ़त

जुलाई में दर्ज UPI ट्रांजैक्शन जून 2025 के मुकाबले 5.8% अधिक रहे। जून में कुल 18.40 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी वैल्यू ₹24.04 लाख करोड़ थी। वहीं ट्रांजैक्शन वैल्यू के लिहाज़ से 4.3% की ग्रोथ दर्ज की गई है।

  • 📆 औसतन रोज़ाना 628 मिलियन ट्रांजैक्शन जुलाई में किए गए, जो अब तक की सबसे ऊँची दैनिक दरों में से एक है।

📊 सालाना वृद्धि भी दमदार

अगर हम सालाना तुलना करें, तो जुलाई 2024 की तुलना में जुलाई 2025 में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 35% की ग्रोथ हुई है, जबकि ट्रांजैक्शन वैल्यू में 22% की वृद्धि दर्ज की गई है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि UPI केवल शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि भारत के कोने-कोने में लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।


📱 कौन से UPI ऐप्स हैं टॉप पर?

हालांकि जुलाई 2025 के लिए ऐप-वाइज ब्रेकडाउन अब तक जारी नहीं हुआ है, लेकिन जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार:

  • PhonePe ने 46.5% UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और लगभग 50% ट्रांजैक्शन वैल्यू को संभाला।
  • Google Pay ने 35.6% वॉल्यूम और 35% वैल्यू के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
  • Paytm तीसरे स्थान पर रहा, जिसके पास 6.9% वॉल्यूम और 5.6% वैल्यू की हिस्सेदारी थी।

📌 यह आंकड़े दिखाते हैं कि UPI सेगमेंट में PhonePe और Google Pay की पकड़ बेहद मज़बूत बनी हुई है, जबकि Paytm लगातार संघर्ष कर रहा है।


🌍 UPI का इंटरनेशनल विस्तार

भारत के इस डिजिटल चमत्कार ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। वर्तमान में UPI इन देशों में लाइव है:

  • भूटान
  • नेपाल
  • मॉरीशस
  • श्रीलंका
  • सिंगापुर
  • फ्रांस
  • ओमान
  • UAE

🗺️ NPCI अब कतर, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी UPI को विस्तारित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा UK, मालदीव, नामीबिया और ओमान जैसे देश भी UPI इंटीग्रेशन को एक्सप्लोर कर रहे हैं।

यह भारत की फिनटेक डिप्लोमेसी का हिस्सा है, जो डिजिटल इंडिया की ग्लोबल पहचान को मज़बूती दे रहा है।


💸 UPI पर अब शुल्क? ICICI Bank का नया कदम

अब तक UPI व्यापारियों के लिए एक फ्री पेमेंट मॉडल था, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

TheHeadandTale की रिपोर्ट के अनुसार, ICICI Bank ने अब बड़े मर्चेंट्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स से UPI लेन-देन पर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है

यह कदम भारत के UPI इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक सरकार समर्थित नीति के तहत मर्चेंट्स से कोई चार्ज नहीं लिया जाता था।

  • 💬 यह कदम भविष्य में अन्य बैंकों और कंपनियों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे मर्चेंट्स की लागत बढ़ सकती है।
  • इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अब UPI लेन-देन पर धीरे-धीरे शुल्क लगना आम हो जाएगा?

🔮 भविष्य की दिशा: क्या कहता है यह ट्रेंड?

  1. ट्रांजैक्शन ग्रोथ दिखा रही है कि डिजिटल भुगतान भारत में जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
  2. इंटरनेशनल विस्तार से भारत का फिनटेक मॉडल एक ग्लोबल एक्सपोर्ट बनता जा रहा है।
  3. चार्जिंग मॉडल का बदलाव आने वाले समय में सरकार और बैंकिंग नियामकों के बीच बहस और नीतिगत बदलाव की संभावना को जन्म दे सकता है।

📌 निष्कर्ष:

UPI न केवल भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुका है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी अपने पैर जमा रहा है। जुलाई 2025 में हुए ₹25 लाख करोड़ से अधिक के ट्रांजैक्शन यह दिखाते हैं कि यह सिस्टम कितनी तेज़ी से भारतीय अर्थव्यवस्था में गहराई से जुड़ चुका है।

💡 लेकिन ICICI Bank जैसे बैंकों के शुल्क लगाने के फैसले इस सफलता मॉडल के भविष्य पर कुछ नए सवाल ज़रूर खड़े कर रहे हैं।


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Read more : ‘Safe Security’ ने Series C में जुटाए $70 मिलियन,

🛡️ ‘Safe Security’ ने Series C में जुटाए $70 मिलियन,

Safe Security

साइबर सुरक्षा स्टार्टअप Safe Security, जो पहले Lucideus के नाम से जाना जाता था, ने अपने Series C फंडिंग राउंड में $70 मिलियन (करीब ₹580 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Avataar Ventures ने किया है, जिसमें कई नए और मौजूदा निवेशकों की भागीदारी रही।

💰 निवेशकों की दमदार भागीदारी

इस ताज़ा निवेश राउंड में शामिल प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Susquehanna Asia Venture Capital
  • NextEquity Partners
  • Prosperity7 Ventures
  • Eight Roads
  • पूर्व Cisco CEO John Chambers
  • Sorenson Capital

Safe Security इस फंडिंग का इस्तेमाल अपनी CyberAGI (Cyber Artificial General Intelligence) विज़न को तेज़ी से लागू करने के लिए करेगा, जिसमें इंजीनियरिंग, R&D और ग्लोबल मार्केट विस्तार शामिल हैं।


🚀 IIT-बॉम्बे से सिलिकॉन वैली तक का सफर

Safe Security की शुरुआत 2012 में IIT-Bombay में साकेत मोदी, विदितकुमार बक्सी और राहुल त्यागी ने मिलकर की थी। शुरुआती वर्षों में यह स्टार्टअप बूटस्ट्रैप्ड रहा और फिर आगे चलकर कंपनी का मुख्यालय Palo Alto (कैलिफ़ोर्निया) शिफ्ट कर दिया गया। आज कंपनी के ऑफिस न्यूयॉर्क, लंदन, बेंगलुरु और नई दिल्ली में भी मौजूद हैं।


🧠 Safe Security क्या करता है?

Safe Security का फोकस है एंटरप्राइज़ेस को उनके साइबर रिस्क को पहचानने, उसका मूल्यांकन करने और कम करने में मदद करना — और वो भी AI आधारित टूल्स की मदद से।

इसके प्रमुख समाधान हैं:

  • Cyber Risk Quantification (CRQ)
  • Third-Party Risk Management (TPRM)
  • Continuous Threat Exposure Management (CTEM)

कंपनी का मानना है कि पारंपरिक सुरक्षा उपायों की तुलना में ये आधुनिक समाधान कंपनियों को भविष्य के खतरों से अधिक प्रभावी रूप से बचा सकते हैं।


🌐 दुनिया का पहला ऑटोनोमस CTEM प्लेटफॉर्म

Safe Security ने हाल ही में दुनिया का पहला पूरी तरह ऑटोनोमस CTEM (Continuous Threat Exposure Management) समाधान पेश किया है। यह उनके Cyber Risk Singularity प्लेटफॉर्म का एक अहम हिस्सा है।

CTEM अब Safe Security के लिए अगला ग्रोथ ड्राइवर बनता जा रहा है, ठीक उसी तरह जैसे कंपनी ने पहले CRQ को बाज़ार में स्थापित किया और बाद में TPRM को पेश किया। अब कंपनी के आधे से ज़्यादा ग्राहक TPRM मॉड्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।


📈 लगातार तीन साल से ट्रिपल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ

कंपनी का दावा है कि उसने लगातार तीन वर्षों से ट्रिपल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। Safe Security अब तक $170 मिलियन से ज़्यादा की कुल फंडिंग जुटा चुकी है।

इसके ग्राहकों की लिस्ट भी काफ़ी प्रभावशाली है, जिनमें शामिल हैं:

  • Google
  • Fidelity
  • T-Mobile
  • Chevron
  • IHG (InterContinental Hotels Group)

🧩 CyberAGI: भविष्य की दिशा

Safe Security अब अपने अगली पीढ़ी के AI मॉडल – CyberAGI – पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य है ऐसे टूल्स विकसित करना जो किसी इंसान की तरह ही जटिल साइबर जोखिमों को समझ सकें और उनका समाधान कर सकें।

इस विज़न के तहत कंपनी न केवल अपने प्रोडक्ट्स को और अधिक इंटेलिजेंट बना रही है, बल्कि नए-नए इंडस्ट्री सेक्टर्स में भी प्रवेश कर रही है।


🔮 भारत से ग्लोबल साइबर टेक लीडर बनने तक

Safe Security का सफर एक भारतीय कॉलेज स्टार्टअप से लेकर एक ग्लोबली स्केलेबल साइबर सिक्योरिटी कंपनी बनने तक प्रेरणादायक रहा है। तकनीकी नवाचार, तेज़ ग्रोथ, और वैश्विक विस्तार के साथ यह स्टार्टअप एक नई पीढ़ी के भारतीय टेक लीडर्स का प्रतिनिधित्व कर रहा है।


📌 निष्कर्ष:

Safe Security का $70 मिलियन का यह Series C फंडिंग राउंड न सिर्फ़ इसके तकनीकी व वाणिज्यिक दृष्टिकोण को और मज़बूत करता है, बल्कि यह दिखाता है कि भारत से निकले स्टार्टअप्स अब साइबर सुरक्षा जैसे वैश्विक मसलों में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।


📣 ऐसे ही स्टार्टअप फंडिंग और टेक इनोवेशन की खबरों के लिए जुड़े रहिए FundingRaised.in के साथ! 🚀

Read more : ‘The Sleep Company’ ने जुटाए ₹105 करोड़,

🛏️ ‘The Sleep Company’ ने जुटाए ₹105 करोड़,

The Sleep Company

मुंबई स्थित D2C स्लीप सॉल्यूशंस स्टार्टअप The Sleep Company ने अपने Series D फंडिंग राउंड में ₹105 करोड़ ($12.3 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Saffron Investments ने किया, जबकि Carillon Investments और Infinity Partners ने भी भागीदारी की है।

🚀 ग्रोथ और विस्तार के लिए होगा फंड का इस्तेमाल

The Sleep Company के Registrar of Companies (RoC) में दायर दस्तावेज़ों के अनुसार, कंपनी के बोर्ड ने Series D CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares) के 19,093 शेयर ₹55,130 प्रति शेयर के हिसाब से जारी करने का प्रस्ताव पारित किया है। इस कदम के माध्यम से कंपनी ₹105 करोड़ की पूंजी जुटाएगी।

इस राउंड में:

  • Saffron Investments ₹87.73 करोड़ ($10.3 मिलियन)
  • Carillon Investments ₹9.74 करोड़
  • Infinity Partners ₹7.77 करोड़ निवेश करेंगे।

📈 The Sleep Company वैल्यूएशन में 80% की जबरदस्त उछाल

The Sleep Company की वैल्यूएशन करीब ₹2,745 करोड़ ($323 मिलियन) हो जाएगी। यह पिछले राउंड (Series C) में मिली ₹1,500 करोड़ की वैल्यूएशन की तुलना में 80% अधिक है। अगर इस राउंड में आगे और पूंजी निवेश होती है, तो कंपनी की वैल्यूएशन और भी बढ़ सकती है।

🛍️ प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और सेल्स चैनल

2019 में स्थापित, The Sleep Company मैट्रेस, पिलो, कुशन, बेडिंग और ऑफिस चेयर जैसी स्लीप और कम्फर्ट से जुड़ी उत्पादों की रेंज पेश करता है। यह D2C (Direct to Consumer) ब्रांड है जो अपने उत्पादों को ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑफलाइन स्टोर्स दोनों के माध्यम से बेचता है।

📊 अब तक जुटाई गई फंडिंग और प्रमुख निवेशक

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कंपनी ने कुल मिलाकर लगभग $49 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसमें Premji Invest, Fireside Ventures जैसे प्रमुख निवेशकों का नाम शामिल है। इस राउंड के बाद Saffron Investments कंपनी में 3.2% हिस्सेदारी रखेगी।

💹 FY24 में रेवेन्यू 2.5 गुना, लेकिन घाटा भी बढ़ा

मार्च 2024 को समाप्त वित्तीय वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 2.5 गुना बढ़कर ₹312 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष (FY23) में ₹127 करोड़ था। हालांकि, कंपनी का घाटा भी इसी अवधि में 58% बढ़कर ₹58.69 करोड़ हो गया।

इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी ने तेज़ी से रेवेन्यू तो बढ़ाया है, लेकिन बढ़ती लागत और विस्तार योजनाओं की वजह से उसे घाटे का सामना करना पड़ा।

🤝 ChrysCapital के साथ बातचीत, हो सकता है और निवेश

खबरों के मुताबिक, The Sleep Company ChrysCapital के साथ एक नए डील पर भी बातचीत कर रही है, जिसमें $50 मिलियन का निवेश संभावित है। यह डील प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह की हिस्सेदारी बिक्री के माध्यम से की जा सकती है।

🛏️ बाज़ार में प्रतिस्पर्धा: Wakefit, SleepyCat, Duroflex

कंपनी का मुकाबला अब तेजी से बढ़ते स्लीप टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर ड्यूरबल्स मार्केट में Wakefit, SleepyCat, और Duroflex जैसे ब्रांड्स से है। Wakefit हाल ही में ₹468 करोड़ जुटाने के लिए SEBI में DRHP दाखिल कर चुकी है, जिससे यह सेगमेंट और भी प्रतिस्पर्धी हो गया है।

🔮 आगे की राह: ग्रोथ और इनोवेशन

कंपनी ने इस फंडिंग को “ग्रोथ, एक्सपेंशन और जनरल कॉर्पोरेट पर्पस” के लिए उपयोग करने की योजना बनाई है। इसका मतलब है कि कंपनी भारत और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, प्रोडक्ट इनोवेशन और मार्केटिंग में निवेश करेगी।


निष्कर्ष:
The Sleep Company की यह Series D फंडिंग न सिर्फ कंपनी की तेजी से बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि स्लीप सॉल्यूशंस और कंज्यूमर हेल्थ वेलनेस की कैटेगरी में D2C ब्रांड्स के लिए निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। आने वाले महीनों में कंपनी की बाजार में गतिविधियाँ और विस्तार रणनीति इस क्षेत्र में एक नई दिशा तय कर सकती हैं।


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Read more : डबल रेवेन्यू लेकिन डबल घाटा भी Swiggy की Q1 FY26

📈 डबल रेवेन्यू लेकिन डबल घाटा भी Swiggy की Q1 FY26

Swiggy

🧾 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 54% की जबरदस्त बढ़त

Swiggy ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में ₹4,961 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही ₹3,222 करोड़ की तुलना में 54% अधिक है। यह बढ़ोतरी Swiggy के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, लेकिन इसके साथ ही चिंता की बात यह है कि कंपनी का घाटा भी लगभग दोगुना हो गया है।

🚚 Scootsy Logistics बना सबसे बड़ा कमाई का स्रोत

Swiggy की सहायक कंपनी Scootsy Logistics ने कंपनी की कुल ऑपरेटिंग इनकम में 46% हिस्सेदारी दर्ज की। Q1 FY26 में Scootsy की कमाई ₹2,259 करोड़ रही, जो कि Q1 FY25 में ₹1,268 करोड़ थी — यानी 78% की सालाना वृद्धि

🍽️ फूड डिलीवरी बिजनेस में 19% की बढ़त

Swiggy का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस अभी भी इसकी आय का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। Q1 FY26 में इस वर्टिकल से कंपनी को ₹1,800 करोड़ की कमाई हुई, जो कि पिछले साल ₹1,518 करोड़ थी। यानी फूड डिलीवरी से 19% की YoY ग्रोथ दर्ज हुई।

🛒 क्विक कॉमर्स ने भी दिखाई दोगुनी रफ्तार

Swiggy का क्विक कॉमर्स सेगमेंट, जो इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए किराना और एफएमसीजी प्रोडक्ट्स डिलीवर करता है, ने भी जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की। इसकी कमाई दोगुनी होकर ₹806 करोड़ हो गई, जो कि पिछले साल Q1 FY25 में ₹374 करोड़ थी। ऑर्डर फ्रिक्वेंसी और नए डार्क स्टोर्स की बदौलत इस सेगमेंट का GOV (Gross Order Value) काफी बढ़ा।

🍲 अन्य सेवाओं से कुल आय ₹5,048 करोड़

Swiggy की अन्य सेवाएं — जैसे Dine Out, Genie, Swiggy Mini और गैर-ऑपरेटिंग इनकम को मिलाकर कंपनी की कुल आमदनी Q1 FY26 में ₹5,048 करोड़ तक पहुंच गई।


💸 खर्च में 60% की भारी बढ़त, घाटा पहुंचा ₹1,197 करोड़

राजस्व बढ़ने के बावजूद कंपनी का कुल खर्च भी तेजी से बढ़ा। FMCG प्रोडक्ट्स की खरीद में ₹2,064 करोड़ (33% खर्च), डिलीवरी शुल्क में ₹1,313 करोड़ (26% वृद्धि), कर्मचारियों के वेतन और बेनिफिट्स पर ₹686 करोड़ तथा विज्ञापन पर ₹1,036 करोड़ खर्च किया गया।

इन सभी को मिलाकर Swiggy का कुल खर्च Q1 FY26 में ₹6,244 करोड़ हो गया, जो कि पिछले साल ₹3,908 करोड़ था — यानी 60% का इजाफा। और इसी खर्च की वजह से कंपनी का घाटा ₹611 करोड़ से बढ़कर ₹1,197 करोड़ हो गया — 96% की बढ़त, यानी लगभग दोगुना।


🔁 बोर्ड में बदलाव: नए चेहरों की एंट्री

Swiggy ने हाल ही में अपने बोर्ड में बदलाव किया है। SoftBank के सुमेर जुनेजा और Accel के आनंद डेनियल ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। उनकी जगह noon के CEO फाराज़ खालिद को स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति Swiggy की अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों की ओर इशारा करती है।


💹 Swiggy शेयर और मार्केट कैप में स्थिरता

Swiggy के शेयर गुरुवार को ₹404 पर ट्रेड हो रहे थे और कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹1,00,730 करोड़ के स्तर पर पहुंच चुका है।


⚔️ Zomato से तुलना: बढ़त के बावजूद मुनाफा नहीं

Swiggy की मुख्य प्रतिद्वंदी Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal ने भी Q1 FY26 में 70% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹7,167 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जबकि Q1 FY25 में यह ₹4,206 करोड़ था। हालांकि, Eternal का मुनाफा घटकर ₹25 करोड़ रह गया है, जो कि एक अलग तरह की चुनौती दिखाता है।


📊 निष्कर्ष: विकास की रफ्तार बनी हुई है, लेकिन घाटा चिंता का कारण

Swiggy ने रेवेन्यू और उपयोगकर्ता संख्या दोनों में जोरदार बढ़त दिखाई है। फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और नई सेवाओं में निवेश की बदौलत कंपनी का बाजार विस्तार जारी है। लेकिन लगातार बढ़ते खर्च और दोगुने घाटे से यह स्पष्ट है कि लाभप्रदता तक का सफर अभी लंबा है। Swiggy को अपने लागत ढांचे पर नियंत्रण और मार्जिन में सुधार के लिए आने वाले तिमाहियों में रणनीतिक फैसले लेने होंगे।

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Read more : Swiggy और Rapido के रिश्तों में खटास?

🍽️ Swiggy और Rapido के रिश्तों में खटास?

Swiggy

फूडटेक दिग्गज Swiggy और मोबिलिटी कंपनी Rapido के बीच रणनीतिक साझेदारी अब सवालों के घेरे में है। Swiggy ने स्टॉक एक्सचेंज में फाइलिंग कर यह संकेत दिया है कि वह Rapido में किए गए अपने निवेश की “सक्रिय समीक्षा” कर रहा है। कारण बताया गया है – दोनों कंपनियों के व्यवसायिक रिश्तों की बदलती प्रकृति।

💰 निवेश और हिस्सेदारी की कहानी

Swiggy ने अप्रैल 2022 में Rapido के $180 मिलियन Series D राउंड का नेतृत्व किया था और करीब 12% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस निवेश ने समय के साथ अच्छा मूल्यवृद्धि (value appreciation) दर्ज किया है। लेकिन अब Swiggy इसे भुनाने (monetize) की दिशा में सोच रहा है ताकि उसकी बैलेंस शीट को मजबूत किया जा सके।

दिलचस्प बात यह है कि Swiggy ने Rapido की हालिया $200 मिलियन Series E फंडिंग (जून 2025) में भाग नहीं लिया, जिसे Nexus ने लीड किया था। यह दर्शाता है कि दोनों के बीच रणनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।

📊 Swiggy का ताज़ा प्रदर्शन: मजबूत ग्रोथ के संकेत

Swiggy का Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) प्रदर्शन मजबूत रहा। कंपनी का कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 45.2% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹14,797 करोड़ रहा। यह ग्रोथ मुख्यतः फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स (Instamart), और आउट-ऑफ-होम कंजम्पशन से आई है।

🍔 फूड डिलीवरी से हुआ सबसे बड़ा योगदान

  • GOV: ₹8,086 करोड़ (YoY वृद्धि: 18.8%)
  • पिछले साल की तुलना में ₹6,808 करोड़ से उछाल
  • Monthly Transacting Users (MTUs): 1.2 मिलियन नए यूज़र्स जुड़े, कुल 16.3 मिलियन (8 क्वार्टर में सबसे अधिक वृद्धि)
  • डिलीवरी पार्टनर्स: 6.06 लाख एक्टिव मंथली पार्टनर्स
  • टोटल ऑर्डर्स: 264 मिलियन

🌧️ मानसून और एप्रेज़ल का असर – मार्जिन में गिरावट

हालांकि, फूड डिलीवरी वॉल्यूम में वृद्धि हुई, लेकिन सीजनल कारणों से मार्जिन पर असर पड़ा।

  • Adjusted EBITDA Margin: Q4 FY25 के 2.9% से घटकर Q1 FY26 में 2.4%
  • कारण: मानसून में डिलीवरी पार्टनर्स की वापसी और एनुअल एंप्लॉयी एप्रेज़ल

⚡ Instamart बना ग्रोथ इंजन – 100% से अधिक की ग्रोथ!

Swiggy की क्विक कॉमर्स यूनिट Instamart ने तगड़ा प्रदर्शन किया।

  • GOV: ₹5,655 करोड़ (YoY वृद्धि: 107.6%)
  • Average Order Value (AOV): ₹612 (25.7% की वृद्धि)
  • टोटल ऑर्डर्स: 92 मिलियन

Swiggy ने इस क्वार्टर में 41 नए डार्क स्टोर जोड़े, जिससे इनकी कुल संख्या 1,062 हो गई जो कि 127 शहरों में फैले हैं। अब कंपनी डिमांड वाले क्षेत्रों में ही विस्तार कर रही है और मौजूदा कैपेसिटी को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही है।

💼 कंपनी की वित्तीय स्थिति

Swiggy के पास तिमाही के अंत में ₹5,354 करोड़ की नकद राशि और नकदी समतुल्य (cash & cash equivalents) थी। कंपनी ने यह भी दोहराया कि Instamart को स्केल करना उसकी प्राथमिकता है, साथ ही वह Q3 FY26 से Q1 FY27 के बीच contribution margin breakeven हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

🏍️ Rapido की स्थिति और बढ़ती दूरी

Rapido ने हाल ही में यूनिकॉर्न क्लब में एंट्री ली है और उसकी वैल्यूएशन में तेज उछाल देखा गया है। लेकिन Swiggy की अनुपस्थिति उसके लेटेस्ट फंडिंग राउंड में यह दर्शाती है कि दोनों के बीच रणनीतिक तालमेल कमजोर हुआ है।

Swiggy का कहना है कि वह निवेश समीक्षा के बाद उचित निर्णय लेगा—हो सकता है कि वह अपनी हिस्सेदारी पूरी तरह बेच दे या आंशिक निकासी करे।

🤖 बाजार और निवेशकों की नजरें अब Swiggy पर

Swiggy के लिए यह एक क्रूशियल मोड़ है—एक तरफ निवेश की समीक्षा है, तो दूसरी तरफ Instamart जैसी यूनिट की आक्रामक ग्रोथ और फूड डिलीवरी में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का दबाव।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि Swiggy अब रिज़ल्ट-ओरिएंटेड रणनीतियों की ओर बढ़ रहा है, जहां हर निवेश को लाभप्रदता और रणनीतिक दृष्टिकोण से परखा जाएगा।


📌 निष्कर्ष:
Swiggy और Rapido की कहानी अब सिर्फ निवेश की नहीं, बल्कि बदलते बिज़नेस इकोसिस्टम की भी है। जहां एक ओर Swiggy अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने और Instamart को स्केल करने में जुटा है, वहीं Rapido के साथ संबंधों की पुनः समीक्षा उसकी रणनीतिक सतर्कता को दर्शाता है। आने वाले महीनों में यह देखना रोचक होगा कि Swiggy इस साझेदारी को आगे कैसे ले जाता है।

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Read more : DesignX को मिली नई उड़ान!

🏭 DesignX को मिली नई उड़ान!

DesignX

नोएडा स्थित स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप DesignX ने अपनी प्री-सीरीज़ A फंडिंग राउंड में $2 मिलियन (करीब ₹16.6 करोड़) जुटाए हैं। अब यह कंपनी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फैक्ट्रीज़ को डिजिटल बनाने की दिशा में और तेज़ी से आगे बढ़ेगी।


💸 किसने लगाया पैसा? जानिए निवेशकों की पूरी लिस्ट

इस ताज़ा फंडिंग राउंड का नेतृत्व Rockstud Capital ने किया है। साथ ही, We Founder Circle, Piper Serica, और कंपनी के मौजूदा क्लाइंट्स ने भी इस राउंड में भागीदारी की।

इस निवेश से DesignX को अपने AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म को और उन्नत बनाने और भारत के साथ-साथ वैश्विक विस्तार की तैयारी करने में मदद मिलेगी।


🧠 क्या करता है DesignX? एक स्मार्ट डिजिटल फैक्ट्री सिस्टम

2015 में इंजीनियर भाइयों राजत श्रीवास्तव और निशांत श्रीवास्तव द्वारा स्थापित DesignX एक उभरता हुआ टेक स्टार्टअप है जो फैक्ट्री संचालन को पूरी तरह से डिजिटल करने का समाधान प्रदान करता है।

🛠️ प्रमुख तकनीकी समाधान: Df-OS

DesignX का प्रमुख उत्पाद है — Digital Factory Operating System (Df-OS)। यह प्लेटफॉर्म फैक्ट्री फ्लोर के 600 से अधिक मैनुअल प्रक्रियाओं को डिजिटल करता है और उन्हें मौजूदा ERP, IoT और अन्य एंटरप्राइज टूल्स के साथ इंटीग्रेट करता है।

इसका लाभ?

➡️ रीयल-टाइम ऑपरेशन डेटा
➡️ बेहतर प्रोडक्टिविटी
➡️ घटते ऑपरेशनल लॉसेज़
➡️ AI-बेस्ड प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स


🏢 किन बड़ी कंपनियों के साथ काम कर रहा है DesignX?

DesignX पहले से ही कई दिग्गज क्लाइंट्स को अपनी सेवाएं दे रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • Unilever
  • Suzuki
  • Dabur
  • Hero
  • और कई अन्य ऑटो, FMCG और फार्मा सेक्टर की कंपनियां

ये ब्रांड अब अपने उत्पादन की हर प्रक्रिया को स्मार्ट और डेटा-संचालित बना रहे हैं — DesignX की मदद से।


🌍 आगे की योजना: भारत से वैश्विक मंच तक

DesignX इस फंडिंग का उपयोग भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने पैर पसारने के लिए करेगा। साथ ही, कंपनी अपने AI-संचालित फैक्ट्री OS में और भी स्मार्ट फीचर्स जोड़ेगी।

कंपनी के को-फाउंडर राजत श्रीवास्तव ने कहा:

“हमारी कोशिश है कि दुनिया की हर फैक्ट्री को AI-संचालित, इंटीग्रेटेड और पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। हमारी टेक्नोलॉजी उत्पादन को 10x तक कुशल बना सकती है।”


🤖 कंपटीशन भी है दमदार! किन कंपनियों से टक्कर?

DesignX का मुकाबला इंडस्ट्री 4.0 और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग स्पेस में इन खिलाड़ियों से है:

  • Precog
  • Infinite Uptime
  • Lynkit

इनमें से कई कंपनियां पहले से ही AI और IoT इंटीग्रेशन में काम कर रही हैं, लेकिन DesignX की खास बात इसका सुपर-कस्टमाइजेबल Df-OS और ERP/IoT के साथ seamless इंटीग्रेशन है।


📊 स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग: भारत में बड़ा अवसर

🤔 क्यों जरूरी है ये सॉल्यूशन?

भारत में आज भी हजारों फैक्ट्रियां अभी तक मैनुअल या आंशिक रूप से डिजिटल हैं। इससे:

  • मशीनों की स्थिति का अंदाजा सही नहीं लग पाता
  • डाउनटाइम बढ़ता है
  • क्वालिटी और क्वांटिटी में असंतुलन आता है

🧭 DesignX का समाधान:

➡️ 600+ प्रोसेसेज़ का ऑटोमेशन
➡️ रीयल-टाइम मशीन मॉनिटरिंग
➡️ IoT और AI बेस्ड प्रेडिक्शन

यानी फैक्ट्रीज को एक नया, आधुनिक चेहरा देना।


📈 निवेशकों का भरोसा: ‘Next Big Thing’!

Rockstud Capital के मैनेजिंग पार्टनर ने कहा:

“DesignX एक बेमिसाल उदाहरण है कि कैसे इंडियन इंजीनियरिंग टैलेंट फैक्ट्रियों की दशा और दिशा दोनों बदल सकता है। हम इसमें लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल देखते हैं।”


📝 निष्कर्ष: स्मार्ट फैक्ट्रियों की क्रांति, DesignX के साथ

DesignX ना सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को डिजिटल बना रहा है, बल्कि भारत को ग्लोबल ‘स्मार्ट फैक्ट्री हब’ बनाने की ओर भी एक कदम बढ़ा रहा है।

अब देखना ये होगा कि इस फंडिंग से कंपनी कितनी तेजी से भारत के बाहर अपने ऑपरेशंस का विस्तार करती है, और क्या यह स्टार्टअप आने वाले वर्षों में भारत की अगली यूनिकॉर्न लिस्ट में जगह बनाएगा?


📍 यह रिपोर्ट FundingRaised.in के लिए तैयार की गई है — भारत के स्टार्टअप, टेक और निवेश जगत की हर हलचल को सबसे पहले और सबसे सटीक तरीके से जानने का ठिकाना।

© FundingRaised | 2025

Read more : Freshworks की दमदार छलांग! राजस्व में 18% की बढ़त और घाटे में 80% की गिरावट

🚀 Freshworks की दमदार छलांग! राजस्व में 18% की बढ़त और घाटे में 80% की गिरावट

Freshworks

💼 सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस (SaaS) फर्म Freshworks ने 2025 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को चौंका दिया है। जहां कंपनी का रेवेन्यू 18% बढ़ा, वहीं ऑपरेशनल घाटा 80% तक घटा है।


💰 2025 की दूसरी तिमाही में $204.7 मिलियन की कमाई 📈

Freshworks ने जून 2025 को समाप्त तिमाही में $204.7 मिलियन का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि (Q2 CY24) में $174 मिलियन था। यानी 18% की सालाना वृद्धि।

इसके अलावा, पिछली तिमाही यानी Q1 CY25 की तुलना में भी कंपनी ने 4% की तिमाही दर तिक बढ़त दिखाई है, जहां रेवेन्यू $196 मिलियन था।


🗣️ CEO डेनिस वुडसाइड ने क्या कहा?

Freshworks के CEO और प्रेसिडेंट Dennis Woodside ने कहा:

“Freshworks ने एक और मजबूत तिमाही दर्ज की है। हमने Q2 में अपने पूर्वानुमानों से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें 18% राजस्व वृद्धि, 29% ऑपरेटिंग कैश फ्लो मार्जिन और 27% एडजस्टेड फ्री कैश फ्लो मार्जिन शामिल है।”


📊 पूरे साल का प्रदर्शन: $720 मिलियन तक पहुँचा रेवेन्यू

Freshworks ने कैलेंडर वर्ष 2024 (CY24) में कुल $720 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो 2023 के $596 मिलियन से 20.8% की बढ़त दर्शाता है।

कंपनी को भरोसा है कि CY25 के पूरे साल में उसका रेवेन्यू $822.9 मिलियन से $828.9 मिलियन के बीच रहेगा। यानी साल-दर-साल 14% से 15% की वृद्धि का अनुमान है।


🛠️ क्या करती है Freshworks? जानिए इसके प्रोडक्ट्स

Freshworks एक ग्लोबल SaaS कंपनी है जो मार्केटिंग, सेल्स, कस्टमर सपोर्ट और आईटी सर्विस मैनेजमेंट के लिए कई सॉफ्टवेयर समाधान प्रदान करती है। इसके मुख्य प्रोडक्ट्स हैं:

  • Freshdesk (कस्टमर सपोर्ट)
  • Freshservice (आईटी सर्विस मैनेजमेंट)
  • Freshsales (CRM और सेल्स)
  • Freshmarketer (मार्केटिंग ऑटोमेशन)
  • Freshchat (लाइव चैट और मैसेजिंग)

ये प्रोडक्ट्स दुनियाभर की कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं।


💸 लागत में नियंत्रण का कमाल! खर्च घटाया, लाभ बढ़ाया

🧾 खर्च का ब्रेकडाउन:

  • कंपनी की कुल लागत Q2 CY25 में $182 मिलियन रही।
  • इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा — 52% — सेल्स और मार्केटिंग पर गया, यानी करीब $95 मिलियन
  • यह खर्च पिछले साल की तुलना में 8.7% कम है।
  • रिसर्च, स्टाफ सैलरी और अन्य खर्चों को मिलाकर लागत को सीमित रखा गया।

📉 घाटे में भारी कमी:

इसी खर्च नियंत्रण का असर ये हुआ कि Freshworks ने अपना ऑपरेटिंग लॉस 80% घटाकर सिर्फ $9 मिलियन कर लिया, जो पिछले साल इसी तिमाही में $44 मिलियन था।


🧮 मार्जिन भी मजबूत! निवेशकों को राहत

  • ऑपरेटिंग कैश फ्लो मार्जिन: 29%
  • एडजस्टेड फ्री कैश फ्लो मार्जिन: 27%

इससे यह साफ है कि कंपनी सिर्फ कमाई ही नहीं कर रही, बल्कि कैश मैनेजमेंट में भी सक्षम साबित हो रही है।


📉 घाटे से मुनाफे की ओर? 📊

Freshworks का यह ट्रेंड इशारा करता है कि आने वाले समय में कंपनी लॉस से बाहर निकलकर प्रॉफिट में आने की ओर बढ़ रही है। लगातार रेवेन्यू ग्रोथ और लागत में अनुशासन कंपनी को फाइनेंशियल रूप से और मजबूत बनाएगा।


📌 निष्कर्ष: Freshworks की ग्रोथ स्टोरी में अब रोमांच और भी बढ़ा!

Freshworks ने Nasdaq पर लिस्टेड रहते हुए एक बार फिर दिखाया है कि भारतीय SaaS कंपनियां ग्लोबल स्टेज पर कितना दम रखती हैं। ऑपरेशन लॉस में भारी कमी, रेवेन्यू में तेज़ ग्रोथ और मार्जिन्स में सुधार इस बात की गवाही देते हैं।

कंपनी की रणनीति साफ है — प्रोडक्ट क्वालिटी को बनाए रखते हुए, खर्चों पर कंट्रोल और मार्केट एक्सपेंशन। आने वाले क्वार्टर में Freshworks को देखना दिलचस्प रहेगा, क्या वो पहली बार सालाना स्तर पर मुनाफा दर्ज कर पाएगी?


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