🌍 विदेश में बसे परिवारों और बुज़ुर्ग माता‑पिता के बीच सेतु बनता Nila Cares ❤️

Nila Cares

आज के दौर में लाखों लोग बेहतर करियर और जीवन के लिए विदेशों में बस चुके हैं ✈️। लेकिन इस तरक्की की सबसे बड़ी कीमत अक्सर परिवार से दूरी के रूप में चुकानी पड़ती है 👵👴। खासकर जब माता‑पिता उम्रदराज़ हों, तो उनकी देखभाल दूर बैठकर करना भावनात्मक 😔, मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी समस्या का समाधान लेकर आया है Nila Cares 🏥।


💡 निजी अनुभव से जन्मा स्टार्टअप

Nila Cares के संस्थापक एंथनी जैकब ने यह स्टार्टअप अपने निजी अनुभवों से प्रेरित होकर शुरू किया। फिनटेक सेक्टर में काम करते हुए उन्होंने देखा कि जब लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैसे भेजते हैं 💸, तो थोड़ी सी देरी भी चिंता और तनाव पैदा कर देती है।

एंथनी और उनकी बहन विदेश में रहते हैं, जबकि उनके माता‑पिता श्रीलंका में रहते हैं 🌏। महामारी के दौरान यह दूरी और भी मुश्किल हो गई। यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि पैसे भेजना तो आसान है, लेकिन भरोसेमंद हेल्थकेयर की व्यवस्था करना अब भी बड़ा मुद्दा है।


🤝 भरोसे पर आधारित देखभाल मॉडल

Nila Cares सिर्फ एक सर्विस नहीं, बल्कि सीमाओं के पार भरोसे का पुल है 🌉। कंपनी उन परिवारों को मानसिक शांति देती है जो दूर रहकर भी अपने माता‑पिता की अच्छी देखभाल चाहते हैं।

भारत जैसे देशों में बुज़ुर्ग देखभाल अभी पूरी तरह रेगुलेटेड पेशा नहीं है ⚠️। इसलिए Nila Cares ने खुद की सख्त भर्ती और ट्रेनिंग प्रक्रिया बनाई है:

  • 👩‍⚕️ कम से कम 5 साल का अनुभव
  • 📝 पुलिस वेरिफिकेशन
  • 🧠 जेरियाट्रिक और सहानुभूति आधारित ट्रेनिंग

इसका मकसद है केवल केयर नहीं, बल्कि भरोसा और सुकून देना 🌼।


💰 निवेश जुटाने की चुनौती

एंथनी जैकब के लिए फंडिंग जुटाना आसान नहीं था। कई निवेशकों को लगता था कि बुज़ुर्ग देखभाल कोई बड़ा बिज़नेस नहीं है 🤔। खासकर दक्षिण एशियाई पारिवारिक मूल्यों को समझाना मुश्किल था।

हालात तब बदले जब ऐसे निवेशक जुड़े जिनका खुद का अनुभव विदेश में रहते हुए परिवार की देखभाल से जुड़ा था। इसके बाद Nila Cares ने $2.4 मिलियन प्री‑सीड फंडिंग हासिल की 🚀।


🇮🇳 भारत पर खास फोकस और आगे की राह

हालांकि Nila Cares एक ग्लोबल मॉडल है 🌍, लेकिन फिलहाल कंपनी भारत पर गहराई से फोकस कर रही है। एंथनी का मानना है कि सिर्फ भारत में ही इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का अवसर मौजूद है 💹।

चुनौती यह है कि हेल्थकेयर में टेक्नोलॉजी 🤖 के साथ मानवीय संवेदनशीलता ❤️ भी उतनी ही ज़रूरी है।


🌟 नए उद्यमियों के लिए सीख

एंथनी जैकब की सलाह:

  • 🤝 सही लोगों के साथ काम करें
  • 🗣️ प्रोडक्ट से पहले बातचीत करें
  • 🧘‍♂️ मानसिक संतुलन बनाए रखें

उनके शब्दों में, “खुद को संभालकर रखना सबसे ज़रूरी है।”


📺 यह लेख TechTalks with TFN सीरीज़ का हिस्सा है, जो टेक्नोलॉजी के पीछे की इंसानी कहानियों को सामने लाता है।
Nila Cares दिखाता है कि कैसे टेक + भरोसा मिलकर दूरियों को कम कर सकते हैं ❤️🌍

Read more :🤖 ओपन‑सोर्स AI टूल SGLang से बनी नई कंपनी RadixArk,

🤖 ओपन‑सोर्स AI टूल SGLang से बनी नई कंपनी RadixArk,

RadixArk

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में ओपन‑सोर्स प्रोजेक्ट्स से निकलकर बड़ी कंपनियों का रूप लेना अब एक आम ट्रेंड बनता जा रहा है। इसी कड़ी में ओपन‑सोर्स AI टूल SGLang अब आधिकारिक रूप से एक स्वतंत्र कंपनी के तौर पर सामने आया है, जिसका नाम RadixArk रखा गया है। नई कंपनी की वैल्यूएशन लगभग $400 मिलियन (करीब ₹3,300 करोड़) आंकी गई है।

SGLang की शुरुआत 2023 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले की एक रिसर्च लैब में हुई थी। इस लैब का नेतृत्व Ion Stoica कर रहे थे, जो कि मशहूर डेटा कंपनी Databricks के को‑फाउंडर भी हैं। शुरुआत में यह एक अकादमिक रिसर्च प्रोजेक्ट था, लेकिन बढ़ती मांग और इंडस्ट्री में इसकी उपयोगिता को देखते हुए इसे अब एक फुल‑फ्लेज्ड स्टार्टअप में बदल दिया गया है।


⚙️ AI मॉडल्स को तेज और सस्ता बनाने पर फोकस

SGLang का मुख्य उद्देश्य AI मॉडल्स के inference stage को तेज करना है। Inference वह चरण होता है, जब एक प्रशिक्षित AI मॉडल यूज़र के सवालों का जवाब देता है या किसी इनपुट पर आउटपुट तैयार करता है। यह स्टेज AI सिस्टम्स के लिए सबसे ज्यादा कंप्यूटिंग पावर और लागत मांगता है।

SGLang जैसे टूल्स इस प्रक्रिया को ज्यादा एफिशिएंट बनाकर

  • कंप्यूटिंग लागत कम करते हैं,
  • परफॉर्मेंस बढ़ाते हैं,
  • और AI मॉडल्स को रियल‑टाइम में बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं।

यही वजह है कि बड़े‑बड़े AI‑ड्रिवन प्लेटफॉर्म्स और स्टार्टअप्स इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर टूल्स में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।


🏢 RadixArk को मिला बड़े निवेशकों का समर्थन

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, RadixArk ने कई नामी निवेशकों से फंडिंग जुटाई है। इनमें

  • वेंचर कैपिटल फर्म Accel,
  • और शुरुआती एंजेल निवेशकों में Intel के CEO Lip‑Bu Tan जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

हालांकि कंपनी ने फंडिंग की पूरी रकम सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन वैल्यूएशन से यह साफ है कि निवेशकों को RadixArk के बिजनेस मॉडल और टेक्नोलॉजी पर पूरा भरोसा है।

RadixArk की सार्वजनिक घोषणा पिछले साल अगस्त में की गई थी और अब इसके पीछे की पूरी टीम आधिकारिक तौर पर मूल ओपन‑सोर्स प्रोजेक्ट से अलग होकर नई कंपनी के तहत काम कर रही है।


🚀 इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ता इस्तेमाल

SGLang को पहले ही कई टेक‑फोकस्ड कंपनियों द्वारा अपनाया जा चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,

  • Elon Musk की AI कंपनी xAI,
  • और AI‑कोडिंग टूल बनाने वाली कंपनी Cursor
    जैसी टीमें SGLang का इस्तेमाल अपने AI सिस्टम्स के ट्रेनिंग और इंफ्रेंस को तेज करने के लिए कर चुकी हैं।

जैसे‑जैसे बड़े AI मॉडल्स का साइज और जटिलता बढ़ रही है, वैसे‑वैसे उन्हें तेज और किफायती तरीके से चलाने वाले टूल्स की जरूरत भी बढ़ती जा रही है।


🔓 ओपन‑सोर्स रहेगा SGLang, लेकिन कमाई का नया रास्ता

RadixArk ने साफ किया है कि वह SGLang को ओपन‑सोर्स इंजन के रूप में आगे भी विकसित करता रहेगा। इसका मतलब यह है कि डेवलपर्स और रिसर्चर्स इसे मुफ्त में इस्तेमाल कर सकेंगे।

हालांकि, इसके साथ‑साथ कंपनी कुछ नए कमर्शियल टूल्स भी बना रही है। इनमें से एक प्रमुख प्रोडक्ट है Miles, जो एक reinforcement learning framework है। यह फ्रेमवर्क AI मॉडल्स को समय के साथ खुद को बेहतर बनाने में मदद करता है।

इसके अलावा, RadixArk ने अब पेड होस्टिंग सर्विसेज के लिए चार्ज करना भी शुरू कर दिया है। यानी कोर सॉफ्टवेयर मुफ्त रहेगा, लेकिन एडवांस्ड सर्विसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भुगतान करना होगा।


🌐 AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा ट्रेंड

RadixArk का यह कदम AI इंडस्ट्री में चल रहे एक बड़े ट्रेंड को दर्शाता है। कई ऐसे टूल्स, जो पहले

  • यूनिवर्सिटी लैब्स
  • या ओपन‑सोर्स कम्युनिटी
    का हिस्सा थे, अब बढ़ती डिमांड के कारण कमर्शियल बिजनेस में बदले जा रहे हैं।

खासतौर पर AI inference पर फोकस करने वाली कंपनियां निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती जा रही हैं, क्योंकि यही वह हिस्सा है जो AI को असल दुनिया में काम करने लायक बनाता है।


🔮 आगे क्या?

AI का इस्तेमाल जैसे‑जैसे हर सेक्टर में बढ़ रहा है, वैसे‑वैसे तेज, भरोसेमंद और किफायती इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ेगी। RadixArk जैसी कंपनियां इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में काम कर रही हैं।

$400 मिलियन की वैल्यूएशन के साथ RadixArk ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां टेक इंडस्ट्री की अगली बड़ी ग्रोथ स्टोरी बन सकती हैं।

Read more :💳 Juspay ने जुटाए $50 मिलियन,

💳 Juspay ने जुटाए $50 मिलियन,

Juspay

भारत के डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि के साथ हुई है। बेंगलुरु‑आधारित पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Juspay ने $50 मिलियन (करीब ₹415 करोड़) की Series D फॉलो‑ऑन फंडिंग जुटाई है। इस निवेश राउंड का नेतृत्व WestBridge Capital ने किया है, जो प्राइमरी और सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के मिश्रण के रूप में किया गया है। इस डील में Avendus Capital ने Juspay के फाइनेंशियल एडवाइज़र की भूमिका निभाई।

इस फंडिंग के साथ Juspay की वैल्यूएशन $1.2 बिलियन तक पहुंच गई है, जो पिछले राउंड में लगभग $900 मिलियन थी। इसके साथ ही Juspay 2026 का पहला भारतीय यूनिकॉर्न बन गया है।


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग का प्राइमरी कैपिटल हिस्से का उपयोग

  • ग्लोबल एक्सपेंशन,
  • नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट,
  • और टेक्नोलॉजी क्षमताओं को मजबूत करने
    के लिए किया जाएगा।

वहीं, सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के जरिए शुरुआती निवेशकों और ESOP होल्ड करने वाले कर्मचारियों को आंशिक लिक्विडिटी प्रदान की जाएगी। यह पिछले एक साल में Juspay द्वारा किया गया दूसरा लिक्विडिटी इवेंट है।


📈 ऑपरेशनल ग्रोथ ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

Juspay की यह फंडिंग कंपनी की मजबूत ऑपरेशनल ग्रोथ के बाद आई है। कंपनी का दावा है कि उसका Annualised Total Payment Volume (TPV) $1 ट्रिलियन को पार कर चुका है। इसके प्लेटफॉर्म पर रोजाना 300 मिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए जाते हैं।

Juspay आज

  • ई‑कॉमर्स,
  • ट्रैवल,
  • फूड डिलीवरी,
  • इंश्योरेंस,
  • और फाइनेंशियल सर्विसेज
    जैसे सेक्टर्स में काम करने वाली कंपनियों और बैंकों को सेवाएं देता है।

🌍 ग्लोबल लेवल पर मजबूत मौजूदगी

भारत के अलावा, Juspay ने अपनी उपस्थिति कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मजबूत की है। कंपनी वर्तमान में

  • एशिया‑पैसिफिक,
  • मिडिल ईस्ट,
  • लैटिन अमेरिका,
  • यूरोप,
  • यूके
  • और नॉर्थ अमेरिका
    में अपने एंटरप्राइज और बैंकिंग क्लाइंट्स को सेवाएं दे रही है।

कंपनी के साथ आज 500 से अधिक एंटरप्राइज और बैंक जुड़े हुए हैं।


🧠 ओपन‑सोर्स और मॉड्यूलर पेमेंट सिस्टम पर फोकस

2012 में स्थापित Juspay पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को ओपन‑सोर्स, इंटरऑपरेबल और मॉड्यूलर सिस्टम के आधार पर विकसित करता है। कंपनी की प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं:

  • पेमेंट ऑर्केस्ट्रेशन
  • ऑथेंटिकेशन
  • टोकनाइजेशन
  • और बैंकों के लिए कोर पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर

इसके अलावा, Juspay AI‑ड्रिवन टूल्स में भी निवेश कर रहा है, जिनका उद्देश्य

  • मर्चेंट एक्सपीरियंस बेहतर बनाना
  • और इंटरनल ऑपरेशंस को ज्यादा एफिशिएंट बनाना है।

🧾 पिछली फंडिंग का सफर

Juspay की फंडिंग जर्नी भी काफी मजबूत रही है।

  • अप्रैल 2025 में कंपनी ने $60 मिलियन की Series D फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Kedaara Capital ने किया था। इसमें SoftBank और Accel ने भी भाग लिया था।
  • दिसंबर 2021 में Juspay ने $60 मिलियन की Series C फंडिंग हासिल की थी, जिसका नेतृत्व SoftBank Vision Fund 2 ने किया था।
  • इससे पहले, 2020 में Series B और 2016 में Accel से शुरुआती संस्थागत निवेश प्राप्त हुआ था।

👥 टीम और वर्कफोर्स

बेंगलुरु में मुख्यालय वाली Juspay की टीम आज 1,500 से अधिक कर्मचारियों की है। कंपनी डिस्ट्रिब्यूटेड वर्कफोर्स मॉडल पर काम करती है, जिसमें कर्मचारी

  • भारत,
  • अमेरिका,
  • यूरोप,
  • लैटिन अमेरिका,
  • साउथईस्ट एशिया
  • और मिडिल ईस्ट
    में फैले हुए हैं।

💰 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

वित्त वर्ष FY25 (मार्च 2025 तक) के लिए Juspay ने

  • ₹540 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू
  • और ₹62.28 करोड़ का मुनाफा
    रिपोर्ट किया है, जो कंपनी की सस्टेनेबल ग्रोथ को दर्शाता है।

🔮 आगे की राह

$1.2 बिलियन वैल्यूएशन और मजबूत ग्लोबल उपस्थिति के साथ Juspay अब भारतीय पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक लीडिंग नाम बन चुका है। नई फंडिंग के जरिए कंपनी न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य की डिजिटल पेमेंट्स जरूरतों के लिए टेक्नोलॉजी‑ड्रिवन सॉल्यूशंस पर भी फोकस बढ़ाएगी।

Read more :🌿 Dhun Wellness को $4 मिलियन की फंडिंग,

🌿 Dhun Wellness को $4 मिलियन की फंडिंग,

Dhun Wellness

भारत के तेजी से बढ़ते वेलनेस और हेल्थकेयर सेक्टर में एक और स्टार्टअप ने निवेशकों का भरोसा जीता है। वेलनेस स्टार्टअप Dhun Wellness ने हाल ही में $4 मिलियन (करीब ₹36.6 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस निवेश राउंड को SRF लिमिटेड और Havells India ने को‑लीड किया है। इसके अलावा, इस राउंड में कई एंजेल निवेशकों ने भी भागीदारी की है।

👥 कौन‑कौन रहे निवेशक

इस फंडिंग राउंड में शामिल प्रमुख एंजेल निवेशकों में

  • अरुषि आयुष अग्रवाल
  • ऐश लिलानी
  • Tracxn के को‑फाउंडर अभिषेक गोयल
  • संजय कपूर
  • और अन्य निजी निवेशक शामिल हैं।

कंपनी ने एक प्रेस रिलीज़ में बताया कि इस पूंजी का उपयोग भारत के प्रमुख शहरों में अपने संचालन का विस्तार करने के लिए किया जाएगा।

📍 चार नए शहरों में विस्तार की योजना

Dhun Wellness इस फंडिंग का उपयोग पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरी बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करेगा। कंपनी का मानना है कि इन शहरों में वेलनेस और प्रिवेंटिव हेल्थ को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और यहां इसके टारगेट कस्टमर बेस के लिए मजबूत संभावनाएं हैं।

🌸 Dhun Wellness क्या करता है

Dhun Wellness की शुरुआत वर्ष 2023 में मीरा कपूर द्वारा की गई थी। यह एक अर्बन वेलनेस सैंक्चुअरी के रूप में काम करता है, जो शहरों में रहने वाले लोगों को समग्र स्वास्थ्य और मानसिक शांति का अनुभव प्रदान करता है।

कंपनी का कॉन्सेप्ट पारंपरिक भारतीय उपचार पद्धतियों और आधुनिक वेलनेस साइंस के संतुलित मिश्रण पर आधारित है। इसमें

  • आयुर्वेद,
  • साउंड हीलिंग,
  • क्रायोथेरेपी,
  • इन्फ्रारेड सॉना,
    जैसी तकनीकों और प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है।

🧘‍♀️ शहर में रहते हुए समग्र स्वास्थ्य का अनुभव

Dhun Wellness का लक्ष्य उन शहरी उपभोक्ताओं को सेवा देना है जो अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच बिना शहर छोड़े होलिस्टिक वेल‑बीइंग की तलाश में रहते हैं। कंपनी के प्रोग्राम विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिजाइन किए गए हैं जो

  • थकान,
  • नींद की समस्या,
  • गट हेल्थ,
  • और मानसिक तनाव
    जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

🗓️ पर्सनलाइज़्ड 7‑डे वेलनेस प्रोग्राम

Dhun Wellness की सबसे बड़ी खासियत इसके पर्सनलाइज़्ड सात‑दिवसीय वेलनेस प्रोग्राम हैं। इन प्रोग्राम्स में शामिल होते हैं:

  • एक्सपर्ट कंसल्टेशन
  • न्यूट्रिशन गाइडेंस
  • बॉडी‑माइंड थैरेपी
  • और घर के लिए कस्टमाइज्ड वेलनेस प्लान

इसके साथ ही, कंपनी अपने ग्राहकों को 24×7 कंसीयर्ज सपोर्ट भी उपलब्ध कराती है, जिससे उन्हें एक प्रीमियम और सहज अनुभव मिलता है।

🔬 पूर्वी ज्ञान और पश्चिमी साइंस का मेल

कंपनी के अनुसार, Dhun Wellness प्राचीन पूर्वी ज्ञान और पश्चिमी लॉन्गेविटी साइंस को मिलाकर काम करता है। इसका उद्देश्य केवल लक्षणों का इलाज करना नहीं, बल्कि असंतुलन की जड़ तक पहुंचना है।

यह अप्रोच आज के उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, खासकर उन लोगों में जो दवाइयों के बजाय प्रिवेंटिव और नैचुरल हेल्थ सॉल्यूशंस की ओर झुकाव रखते हैं।

📊 वेलनेस मार्केट में बड़ी संभावनाएं

एक मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हेल्थ और वेलनेस बाजार 2033 तक $256.9 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। भारत इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है, जहां शहरी आबादी में लाइफस्टाइल‑डिज़ीज़ और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

🚀 15% मंथ‑ऑन‑मंथ ग्रोथ का दावा

Dhun Wellness का कहना है कि वह वर्तमान में 15% महीने‑दर‑महीने ग्रोथ देख रहा है। बढ़ती मांग को देखते हुए, कंपनी अब एक कंप्रीहेंसिव लॉन्गेविटी वर्टिकल बनाने की दिशा में काम कर रही है।

इस वर्टिकल का फोकस होगा:

  • प्रिवेंटिव केयर
  • पर्सनलाइज़्ड वेलनेस प्रोटोकॉल
  • और लॉन्ग‑टर्म हेल्थ ऑप्टिमाइज़ेशन

🔮 आगे की राह

नई फंडिंग के साथ Dhun Wellness न सिर्फ अपने फिजिकल सेंटर्स का विस्तार करेगा, बल्कि टेक‑ड्रिवन पर्सनलाइज़ेशन, सर्विस क्वालिटी और ब्रांड बिल्डिंग पर भी निवेश बढ़ाएगा।

कुल मिलाकर, Dhun Wellness भारत के उभरते वेलनेस इकोसिस्टम में एक प्रीमियम और टेक‑इनेबल्ड खिलाड़ी के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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🏠 Urban Company की मजबूत ग्रोथ

Urban Company

घरेलू सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Urban Company ने चालू वित्त वर्ष 2025‑26 (FY26) की तीसरी तिमाही में मजबूत राजस्व वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, कंपनी का कुल घाटा अभी भी बना हुआ है, जिसकी मुख्य वजह उसकी हाई‑फ्रीक्वेंसी हाउसकीपिंग सेवा InstaHelp में किया गया भारी निवेश बताया गया है। यह जानकारी कंपनी द्वारा जारी शेयरहोल्डर लेटर में दी गई।

📈 लेनदेन और राजस्व में 32% की सालाना बढ़ोतरी

31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में Urban Company का नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) बढ़कर ₹1,081 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 32% अधिक है। इसी अवधि में कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व भी 32% की वृद्धि के साथ ₹383 करोड़ तक पहुंच गया।

यह ग्रोथ दर्शाती है कि Urban Company की कोर सर्विसेज – जैसे ब्यूटी, सैलून, रिपेयर और मेंटेनेंस – लगातार उपभोक्ताओं की पसंद बनी हुई हैं।

⚠️ घाटा बना रहा, InstaHelp बना बड़ी वजह

मजबूत टॉपलाइन के बावजूद, Urban Company को Q3 FY26 में ₹17 करोड़ का कंसॉलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA घाटा हुआ। कंपनी के अनुसार, इस घाटे की सबसे बड़ी वजह उसकी नई हाउसकीपिंग सर्विस InstaHelp रही।

InstaHelp ने अकेले इस तिमाही में ₹61 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA घाटा दर्ज किया। हालांकि, यदि InstaHelp को अलग कर दिया जाए, तो Urban Company का कोर बिजनेस ₹44 करोड़ के EBITDA मुनाफे में रहा। कुल मिलाकर, कंपनी का नेट घाटा ₹21 करोड़ रहा।

👥 यूज़र और सर्विस पार्टनर बेस में मजबूती

शेयरहोल्डर लेटर के अनुसार, Q3 FY26 में Urban Company के पास

  • 78 लाख वार्षिक लेनदेन करने वाले यूज़र्स, और
  • 59,475 मासिक सक्रिय सर्विस पार्टनर थे।

यह आंकड़े कंपनी के मजबूत प्लेटफॉर्म नेटवर्क और बढ़ते उपभोक्ता भरोसे को दर्शाते हैं।

🇮🇳 भारत कंज़्यूमर सर्विस बिजनेस रहा मुनाफे में

InstaHelp को छोड़कर Urban Company का भारत कंज़्यूमर सर्विस बिजनेस पूरी तरह लाभ में रहा। इस सेगमेंट का

  • NTV रहा ₹781 करोड़, और
  • राजस्व बढ़कर ₹265 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर 26% की वृद्धि है।

यह सेगमेंट कंपनी की आय और स्थिरता की रीढ़ बना हुआ है।

🛍️ नेटिव ब्रांड्स में जबरदस्त उछाल

Urban Company के Native Brands बिजनेस ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया।

  • इसका NTV 93% बढ़कर ₹79 करोड़ हो गया, जबकि
  • राजस्व दोगुना होकर ₹62 करोड़ तक पहुंच गया।

यह संकेत देता है कि कंपनी अपने इन‑हाउस प्रोडक्ट्स के जरिए नए ग्रोथ अवसर बना रही है।

🌍 इंटरनेशनल बिजनेस में भी तेजी

भारत के बाहर, खासतौर पर UAE और सिंगापुर में Urban Company का प्रदर्शन मजबूत रहा।

  • इंटरनेशनल बिजनेस का NTV 79% बढ़कर ₹193 करोड़ पहुंचा,
  • जबकि राजस्व ₹50 करोड़ रहा।

इससे स्पष्ट है कि कंपनी की सेवाएं वैश्विक बाजारों में भी तेजी से स्वीकार की जा रही हैं।

🧹 InstaHelp: ग्रोथ के साथ घाटा

InstaHelp ने Q3 FY26 में

  • 16.1 लाख ऑर्डर,
  • ₹28 करोड़ का NTV, और
  • ₹6.8 करोड़ का राजस्व दर्ज किया।

हालांकि, भारी निवेश और स्केल‑अप लागत के कारण यह वर्टिकल अभी भी ₹61 करोड़ के EBITDA घाटे में है, जिससे कंपनी की कुल लाभप्रदता प्रभावित हो रही है।

💰 मजबूत कैश बैलेंस और ESOP मंजूरी

Urban Company ने Q3 FY26 का अंत ₹2,095 करोड़ के कैश बैलेंस के साथ किया, जिससे कंपनी के पास आगे के निवेश और विस्तार के लिए पर्याप्त फंडिंग रनवे मौजूद है।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने Employee Stock Option Scheme 2015 के तहत 70.82 लाख स्टॉक ऑप्शन्स को मंजूरी दी, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹88 करोड़ आंकी गई है।

📊 शेयर प्रदर्शन और मार्केट कैप

तिमाही के अंत में Urban Company के शेयर ₹124.7 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹18,033 करोड़ (लगभग $2 बिलियन) तक पहुंच गया।

🔚 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Urban Company की कोर सर्विसेज मजबूत ग्रोथ और मुनाफा दिखा रही हैं, जबकि InstaHelp भविष्य की संभावनाओं के लिए एक बड़ा लेकिन महंगा दांव साबित हो रहा है। मजबूत कैश रिज़र्व और बढ़ता यूज़र बेस यह संकेत देता है कि कंपनी लंबी अवधि में अपने घाटे को संभालने की क्षमता रखती है।

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💄✨ Purplle की जबरदस्त ग्रोथ IPO की ओर बढ़ता ब्यूटी ब्रांड

Purplle

पिछले पांच साल ओम्नीचैनल ब्यूटी प्लेटफॉर्म Purplle के लिए बेहद अहम रहे हैं 🚀। तेज़ विस्तार, ब्रांड अधिग्रहण, लगातार फंडिंग और मजबूत प्राइवेट लेबल स्ट्रैटेजी के दम पर कंपनी ने ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट में अपनी अलग पहचान बनाई है 💅।

📊 रेवेन्यू ग्रोथ की कहानी
Purplle का सफर FY21 में ₹128 करोड़ से शुरू होकर FY25 में ₹1,367 करोड़ तक पहुंच गया है। खास बात यह रही कि FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹680 करोड़ से दोगुना होकर ₹1,367 करोड़ हो गया 📈। यह आंकड़े Registrar of Companies (RoC) से लिए गए समेकित वित्तीय विवरणों पर आधारित हैं।

🏬 ड्यूल बिजनेस मॉडल बना ताकत

2012 में शुरू हुई Purplle दो प्रमुख मॉडल पर काम करती है 👇
🛍️ थर्ड‑पार्टी ब्यूटी ब्रांड्स का मार्केटप्लेस
🏷️ खुद के प्राइवेट लेबल ब्रांड्स

इसके स्वामित्व वाले ब्रांड्स में Faces Canada, Good Vibes, Alps Goodness, Carmesi और DermDoc शामिल हैं 🌸। आज Purplle के प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़+ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं और देशभर में 20,000 से ज्यादा ऑफलाइन टचपॉइंट्स मौजूद हैं 🇮🇳।

🔥 प्राइवेट लेबल से आई सबसे ज्यादा ग्रोथ

FY25 में Purplle की ग्रोथ का असली इंजन इसके owned‑brand products रहे 💪।
➡️ कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 82.5% योगदान
➡️ इस सेगमेंट से आय 4 गुना बढ़कर ₹1,129 करोड़

वहीं, थर्ड‑पार्टी ब्रांड्स को प्रमोशन से मिलने वाली मार्केटिंग इनकम 22% घटकर ₹225 करोड़ रह गई 📉।

💰 इसके अलावा, ब्याज से मिलने वाली आय को मिलाकर कंपनी की कुल आय ₹1,409 करोड़ तक पहुंच गई।

🧾 सब्सिडियरी कंपनियों की भूमिका

Purplle की ग्रोथ में इसकी सहायक कंपनियों का भी बड़ा योगदान रहा 👇
🏢 Manash E‑Commerce: ₹989 करोड़
💄 Faces Canada: ₹373 करोड़
🎥 Glamrs: ₹4 करोड़

💸 खर्च भी बढ़े, लेकिन स्केल के साथ

तेजी से बढ़ती बिक्री के चलते कंपनी के खर्च भी बढ़े 📦
🔹 प्रोक्योरमेंट कॉस्ट: ₹671 करोड़
🔹 एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: ₹176 करोड़
🔹 विज्ञापन खर्च: ₹218 करोड़
🔹 ट्रांसपोर्टेशन: ₹100 करोड़

इन सबको मिलाकर FY25 में कुल खर्च ₹1,478 करोड़ पहुंच गया।

📉 मुनाफे की ओर कदम

FY25 में Purplle ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.08 खर्च किया। हालांकि अभी कंपनी घाटे में है, लेकिन
📊 EBITDA और ROCE में सुधार
💰 मार्च 2025 तक ₹273 करोड़ कैश बैलेंस

यह दिखाता है कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है 🔄।

🤝 निवेशकों का भरोसा बरकरार

अब तक Purplle $500 मिलियन+ फंडिंग जुटा चुका है 💵।
इसमें $180 मिलियन की Series F फंडिंग शामिल है, जिसका नेतृत्व ADIA की इकाई ने किया, साथ ही Premji Invest और Blume Ventures जैसे बड़े निवेशक भी जुड़े रहे 🌍।

🚀 IPO की ओर बढ़ता सफर

Purplle की मौजूदा ग्रोथ उसे Nykaa के IPO‑पूर्व स्तर के करीब ले जा रही है 📍। अगर खर्चों पर कंट्रोल बना रहा और ग्रोथ जारी रही, तो FY26‑FY27 में IPO की संभावना मजबूत हो सकती है 🏦।

✨ कुल मिलाकर, Purplle ने यह साबित कर दिया है कि उसने ग्रोथ का सही फॉर्मूला पकड़ लिया है। अब अगला लक्ष्य — मुनाफा और पब्लिक मार्केट्स में एंट्री

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Chargeup

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है 🚀। खासकर लास्ट‑माइल मोबिलिटी में इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी सेगमेंट में काम कर रही दिल्ली‑आधारित EV‑फोकस्ड मोबिलिटी स्टार्टअप Chargeup ने ₹22 करोड़ (करीब $2.4 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाई है 💰।

इस फंडिंग राउंड को IAN Group का समर्थन मिला है, जबकि Cap‑A और कंपनी के मौजूदा निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है। यह राउंड करीब चार साल के अंतराल के बाद आया है और Chargeup का यह तीसरा फंडिंग राउंड है।

📊 पहले भी जुटा चुकी है निवेश

Chargeup ने इससे पहले
🔹 नवंबर 2022 में Capital‑A और Anicut Capital के नेतृत्व में $7 मिलियन की प्री‑सीरीज़ A1 फंडिंग
🔹 उसी साल $2.3 मिलियन की प्री‑सीरीज़ A फंडिंग

हासिल की थी। नई पूंजी के साथ कंपनी एक बार फिर आक्रामक विस्तार की तैयारी में है।

🎯 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Chargeup के मुताबिक, इस ताज़ा निवेश का इस्तेमाल 👇
⚡ हाई‑डिमांड EV मार्केट्स में विस्तार
🧠 ड्राइवर्स और लेंडर्स के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने
🌍 इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर अपनाने वाले क्षेत्रों में ऑपरेशंस स्केल करने

के लिए किया जाएगा।

👨‍🔧 ड्राइवर‑फर्स्ट प्लेटफॉर्म

2019 में वरुण गोयनका और सतीश मित्तल द्वारा स्थापित Chargeup खुद को एक driver‑first EV technology platform के रूप में पेश करता है। इसका फोकस खासतौर पर लास्ट‑माइल EV ड्राइवर्स पर है।

EV थ्री‑व्हीलर ड्राइवर्स को अक्सर
❌ ऊंची फाइनेंसिंग लागत
❌ बैटरी से जुड़ा डाउनटाइम
❌ गाड़ी खड़ी रहने से आय का नुकसान

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Chargeup इन चुनौतियों को टेक्नोलॉजी और डेटा के जरिए हल करने की कोशिश करता है।

🔗 ड्राइवर, OEM और लेंडर्स एक प्लेटफॉर्म पर

Chargeup का प्लेटफॉर्म IoT और डेटा‑ड्रिवन टूल्स का इस्तेमाल करता है, जिससे
🏦 NBFCs और लेंडर्स के लिए लेंडिंग रिस्क कम होता है
🚗 ड्राइवर्स की कमाई स्थिर होती है
📈 वाहन उपयोग और रीसेल वैल्यू बेहतर होती है

यह प्लेटफॉर्म ड्राइवर्स, OEMs, डीलर्स और लेंडर्स को एक ही सिस्टम से जोड़ता है।

👥 10,000+ ड्राइवर, आगे बड़ा लक्ष्य

Chargeup अब तक 10,000 से ज्यादा EV ड्राइवर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ चुका है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY27 तक 20,000 और ड्राइवर्स को जोड़ा जाए 📅।

कंपनी जिस मार्केट में काम कर रही है, उसकी अनुमानित वैल्यू करीब $12 बिलियन है 💡, जो लॉजिस्टिक्स और पैसेंजर मोबिलिटी में इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर्स की बढ़ती मांग से प्रेरित है।

🌱 EV भविष्य में Chargeup की भूमिका

सरकारी EV नीतियों और बढ़ती ईंधन लागत के बीच Chargeup जैसे स्टार्टअप्स भारत की मोबिलिटी को ज्यादा
✅ सस्ती
✅ टिकाऊ
✅ ड्राइवर‑फ्रेंडली

बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। नई फंडिंग के साथ Chargeup का लक्ष्य सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि EV ड्राइवर्स के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद इकोसिस्टम बनाना है ⚡🚛।

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Meine Electric

भारत में रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए डीपटेक एनर्जी स्टोरेज स्टार्टअप Meine Electric ने हाल ही में अपने प्री‑सीड फंडिंग राउंड में $7.5 लाख (करीब 6.7 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व AntlerRebalance और Venture Catalysts ने किया है, जबकि इसमें gradCapitalAIC‑AU Incubation Foundation और कई एंजेल निवेशकों ने भी भागीदारी की है।

कंपनी का कहना है कि इस पूंजी का उपयोग प्रयोगशाला स्तर पर विकसित किए गए प्रोटोटाइप्स को पायलट‑रेडी आयरन‑एयर बैटरी सिस्टम में बदलने, साथ ही अपने रिसर्च और इंजीनियरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में किया जाएगा।


⚡ 16–24 घंटे की स्टोरेज क्षमता पर फोकस

2023 में स्थापित Meine Electric की स्थापना प्रियंश मोहन और स्तुति कक्कड़ ने की थी। यह स्टार्टअप Iron‑Air Long Duration Energy Storage (LDES) सिस्टम विकसित कर रहा है। कंपनी का दावा है कि वह APAC क्षेत्र की पहली और दुनिया की चुनिंदा कंपनियों में से एक है, जो इस तकनीक पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।

Meine Electric की बैटरियां 16 से 24 घंटे तक की ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जो 24×7 रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई को संभव बनाने में मदद कर सकती हैं। यह तकनीक खासतौर पर उन ग्रिड्स के लिए उपयोगी है, जहां सोलर और विंड एनर्जी का बड़ा हिस्सा होता है।


🔧 आयरन‑एयर बैटरी कैसे काम करती है?

आयरन‑एयर बैटरियां लोहे (Iron), हवा (Air) और पानी (Water) जैसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करती हैं। यह बैटरी एक रिवर्सिबल रस्टिंग प्रोसेस पर काम करती है, जिसमें चार्ज और डिस्चार्ज के दौरान लोहे का ऑक्सीकरण और डी‑ऑक्सीकरण होता है।

लिथियम‑आयन बैटरियों के मुकाबले, जो आमतौर पर शॉर्ट‑ड्यूरेशन स्टोरेज (2–4 घंटे) के लिए उपयुक्त होती हैं, आयरन‑एयर बैटरियां लॉन्ग‑ड्यूरेशन और डेली साइक्लिंग के लिए बेहतर मानी जाती हैं। यही कारण है कि इन्हें सोलर‑हैवी पावर ग्रिड्स के लिए एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है।


💰 कम लागत और बेहतर परफॉर्मेंस का दावा

Meine Electric का दावा है कि उसकी तकनीक मौजूदा बैटरी समाधानों की तुलना में कम लागत पर स्टोरेज उपलब्ध करा सकती है। इसके अलावा, यह सिस्टम फास्ट चार्ज और डिस्चार्ज के लिए ऑप्टिमाइज़ किया गया है, ताकि यह सोलर एनर्जी जनरेशन साइकिल्स के साथ बेहतर तालमेल बैठा सके।

कंपनी का मानना है कि यह तकनीक भारत जैसे देशों में, जहां ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है और पावर ग्रिड पर दबाव बना रहता है, वहां गेम‑चेंजर साबित हो सकती है।


🏭 चेन्नई में पायलट प्रोडक्शन की तैयारी

Meine Electric वर्तमान में चेन्नई स्थित 5,000 वर्ग फुट की सुविधा से ऑपरेट कर रही है, जिसे पायलट‑लेवल प्रोडक्शन के लिए तैयार किया जा रहा है। कंपनी ने अब तक अपनी तकनीक से जुड़े 4 पेटेंट प्राप्त किए हैं, जबकि 7 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया में हैं।

यह मजबूत पेटेंट पोर्टफोलियो कंपनी की तकनीकी क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है।


🚀 आगे की रणनीति और भविष्य की योजनाएं

आने वाले समय में Meine Electric का लक्ष्य ग्रिड‑कनेक्टेड प्रोटोटाइप्स तैयार करना और उसके बाद बड़े पैमाने पर पायलट डिप्लॉयमेंट्स करना है। स्टार्टअप की योजना 2027 तक कंटेनराइज़्ड आयरन‑एयर बैटरी सिस्टम लॉन्च करने की है।

इसके साथ ही कंपनी पावर प्रोड्यूसर्सकमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) कस्टमर्स के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स को लेकर बातचीत कर रही है। इन साझेदारियों के जरिए कंपनी अपने सिस्टम की रियल‑वर्ल्ड परफॉर्मेंस को साबित करना चाहती है।


🌱 भारत के एनर्जी ट्रांजिशन में अहम भूमिका

भारत का लक्ष्य 2030 तक बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ने का है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती एनर्जी स्टोरेज बनी हुई है। ऐसे में Meine Electric जैसी कंपनियां, जो लॉन्ग‑ड्यूरेशन और किफायती स्टोरेज समाधान विकसित कर रही हैं, देश के एनर्जी ट्रांजिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

निवेशकों का मानना है कि अगर यह तकनीक स्केल पर सफल होती है, तो यह न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकती है।

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✈️📊 Q3 FY26 में Ixigo की शानदार ग्रोथ, मुनाफे में 55% की बढ़ोतरी

Ixigo

ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) Ixigo के लिए चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) काफी मजबूत रही है। गुरुग्राम‑आधारित इस कंपनी ने न सिर्फ अपने बिज़नेस स्केल में 31% की बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि मुनाफे में भी जबरदस्त उछाल दिखाया है। 📈

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त अनऑडिटेड नतीजों के अनुसार, Ixigo का ऑपरेशनल रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹317.5 करोड़ हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह ₹242 करोड़ था। यानी साल‑दर‑साल आधार पर कंपनी ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। 💰


🚆 ट्रेन टिकटिंग बनी सबसे बड़ी ताकत

Ixigo के कारोबार में ट्रेन टिकटिंग सेगमेंट सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर बना रहा।

  • कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू का 42% हिस्सा ट्रेन टिकटिंग से आया
  • Q3 FY26 में ट्रेन टिकटिंग से ₹134 करोड़ की कमाई
  • Q3 FY25 में यह आंकड़ा ₹120 करोड़ था

भारत में रेलवे यात्रियों की बड़ी संख्या और Ixigo के स्मार्ट फीचर्स जैसे लाइव ट्रेन स्टेटस, कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन और फेयर अलर्ट 🚦 ने इस सेगमेंट को और मजबूत किया है।


🚌✈️ फ्लाइट और बस बुकिंग से भी बढ़ी कमाई

ट्रेन के अलावा, Ixigo ने अन्य ट्रैवल कैटेगरी में भी अच्छा प्रदर्शन किया:

  • फ्लाइट बुकिंग: 32% रेवेन्यू योगदान
  • बस बुकिंग: 24% रेवेन्यू योगदान

यह साफ दिखाता है कि Ixigo अब एक मल्टी‑मोडल ट्रैवल प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां यूज़र्स एक ही ऐप पर ट्रेन, फ्लाइट और बस की बुकिंग कर सकते हैं। 📱


💵 अन्य आय से कुल इनकम ₹334 करोड़

ऑपरेशनल रेवेन्यू के अलावा, कंपनी ने ब्याज और फाइनेंशियल एसेट्स से ₹16.5 करोड़ की अतिरिक्त आय भी अर्जित की।
➡️ इसके साथ ही Q3 FY26 में Ixigo की कुल आय ₹334 करोड़ तक पहुंच गई।


📉 खर्च बढ़े, लेकिन मुनाफा और तेज़ी से बढ़ा

हालांकि खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई:

  • एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च: 15% YoY बढ़कर ₹45 करोड़
  • कुल खर्च: ₹296 करोड़ (Q3 FY25 में ₹224 करोड़)

लेकिन अच्छी बात यह रही कि रेवेन्यू ग्रोथ खर्चों से ज्यादा रही, जिससे कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार हुआ। ✅


🟢 मुनाफे में 55% की उछाल

Ixigo ने Q3 FY26 में ₹24 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जबकि Q3 FY25 में यह ₹15.5 करोड़ था।
📊 यानी मुनाफे में 55% की शानदार बढ़ोतरी

यह दिखाता है कि कंपनी अब ग्रोथ के साथ‑साथ सस्टेनेबल प्रॉफिट मॉडल पर भी फोकस कर रही है।


👨‍💼 ESOP से कर्मचारियों को मिला प्रोत्साहन

Ixigo ने अपने कर्मचारियों के लिए ESOP स्कीम के तहत

  • 98,944 स्टॉक ऑप्शंस को मंजूरी दी
  • कुल वैल्यू करीब ₹2.3 करोड़

यह कदम कर्मचारियों को कंपनी की लॉन्ग‑टर्म ग्रोथ से जोड़ने की रणनीति को दर्शाता है। 🤝


⚔️ MakeMyTrip से मुकाबला

Ixigo का सीधा मुकाबला MakeMyTrip जैसी बड़ी कंपनियों से है।

  • MakeMyTrip ने Q3 FY26 में $295 मिलियन रेवेन्यू दर्ज किया
  • घाटा घटकर $7 मिलियन रह गया

हालांकि स्केल अलग है, लेकिन Ixigo की बढ़ती प्रॉफिटेबिलिटी उसे निवेशकों के बीच खास बनाती है। ⭐


📉📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

22 जनवरी को ट्रेडिंग सेशन के अंत में:

  • Ixigo शेयर प्राइस: ₹235
  • मार्केट कैपिटलाइजेशन: ₹10,320 करोड़ (~$1.1 बिलियन)

यह निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। 💹


🔚 निष्कर्ष

Q3 FY26 में Ixigo ने यह साबित कर दिया है कि वह भारत के ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल खिलाड़ी बनता जा रहा है। ट्रेन टिकटिंग में पकड़, मल्टी‑सेगमेंट ग्रोथ और बेहतर फाइनेंशियल कंट्रोल कंपनी को आगे और ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। 🚀

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✈️🧳 Escape Plan ने जुटाए 25 मिलियन डॉलर,

Escape Plan

भारत में ट्रैवल और मोबिलिटी सेक्टर के तेज़ी से बढ़ते दायरे के बीच ट्रैवल प्रोडक्ट्स प्लेटफॉर्म Escape Plan ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप ने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में 25 मिलियन डॉलर (करीब ₹210 करोड़) जुटाए हैं 💰। इस राउंड का नेतृत्व Jungle Ventures ने किया, जबकि Fireside Ventures और IndiGo Ventures ✈️ ने भी इसमें भागीदारी की।

यह फंडिंग Escape Plan के लिए एक अहम मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी अब भारत के साथ-साथ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों 🌍 में भी अपने कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही है।


🔙 पहले भी निवेशकों का भरोसा जीत चुकी है कंपनी

Escape Plan इससे पहले जुलाई 2025 में $5 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है। यह निवेश Jungle Ventures के First Cheque@Jungle प्रोग्राम के तहत आया था 🤝। उस राउंड में भी Fireside Ventures और कई एंजेल इन्वेस्टर्स शामिल थे।
इस शुरुआती पूंजी के बाद कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स, ब्रांड और रिटेल नेटवर्क को तेज़ी से विस्तार दिया।


📈 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के मुताबिक, नई फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से:

  • 🏷️ ब्रांड बिल्डिंग
  • 💸 प्राइसिंग स्ट्रैटेजी को मजबूत करने
  • 🛍️ डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल नेटवर्क बढ़ाने

में किया जाएगा।

Escape Plan अपनी ओम्नी-चैनल मौजूदगी को मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर‑I और टियर‑II शहरों तक फैलाने पर फोकस कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य देशभर में 200+ फिजिकल स्टोर्स खोलने का है 🏬, खासकर एयरपोर्ट्स, ट्रैवल हब्स और प्रमुख ट्रैवल कॉरिडोर्स पर।


👥 आधुनिक भारतीय यात्रियों पर खास ध्यान

Escape Plan की स्थापना 2025 में अभिनव पाठक और अभिनव जुत्शी ने की थी। दोनों संस्थापकों का मानना है कि आज का भारतीय यात्री ज़्यादा स्मार्ट, एक्सपीरियंस‑ड्रिवन और क्वालिटी‑कॉन्शियस है 🧠✨।

इसी सोच के साथ कंपनी लगेज, ट्रैवल एक्सेसरीज़ और मोबिलिटी सॉल्यूशंस डिजाइन और क्यूरेट करती है, जो:

  • 🧳 बिज़नेस ट्रैवल
  • 🌴 फैमिली वेकेशन
  • 🌏 इंटरनेशनल ट्रिप्स

जैसी अलग‑अलग जरूरतों को पूरा करते हैं।


🛒 ऑनलाइन + ऑफलाइन दोनों में मजबूत पकड़

Escape Plan एक मजबूत ओम्नी‑चैनल बिज़नेस मॉडल पर काम करता है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को:

  • 🖥️ ऑनलाइन मार्केटप्लेस
  • 📱 D2C प्लेटफॉर्म
  • 🏪 ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स

के ज़रिए बेचती है।

कंपनी का दावा है कि वह फिलहाल ₹300 करोड़ से ज़्यादा के एनुअलाइज्ड रेवेन्यू रन रेट पर काम कर रही है 🚀, जो अलग‑अलग शहरों और चैनलों से आ रही मांग का नतीजा है।


🌍 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एंट्री की योजना

भारत में मजबूत पकड़ के बाद Escape Plan अब उन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एंट्री की योजना बना रहा है, जहां भारतीय यात्रियों की आउटबाउंड ट्रैवल गतिविधियां अधिक हैं ✈️🌎। इससे ब्रांड को ग्लोबल पहचान और नए रेवेन्यू अवसर मिलने की उम्मीद है।


💻 टेक्नोलॉजी और 🌱 सस्टेनेबिलिटी पर फोकस

कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी क्षमताओं को भी मज़बूत कर रही है ताकि:

  • ⚡ तेज़ डिलीवरी
  • 📦 बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट
  • 🔄 सभी चैनलों पर कंसिस्टेंसी

सुनिश्चित की जा सके।

इसके साथ ही Escape Plan डिज़ाइन‑लेड इनोवेशन और सस्टेनेबल मटीरियल्स पर भी निवेश कर रहा है 🌿, जिससे पर्यावरण‑अनुकूल और स्टाइलिश प्रोडक्ट्स तैयार किए जा सकें।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा, लेकिन मज़बूत रणनीति

भारत के ट्रैवल गियर मार्केट में Mokobara, Nasher Miles, Uppercase और Acefour Accessories जैसे ब्रांड्स पहले से मौजूद हैं। हालांकि, मजबूत ब्रांडिंग, ओम्नी‑चैनल रणनीति और निवेशकों के भरोसे के दम पर Escape Plan इस रेस में खुद को अलग पहचान दिलाने की कोशिश कर रहा है 💪।


✅ निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Escape Plan की यह फंडिंग न सिर्फ कंपनी की ग्रोथ को नई रफ्तार देगी 🚀, बल्कि भारत के ट्रैवल प्रोडक्ट्स सेक्टर में इसे एक टेक‑ड्रिवन, कस्टमर‑फोकस्ड और ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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