मैनेज्ड वर्कस्पेस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर IndiQube ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान ऑपरेशनल स्तर पर मजबूत ग्रोथ दर्ज की, लेकिन बढ़ती लागत और फाइनेंस खर्च के कारण उसका घाटा साल-दर-साल (YoY) बढ़ गया।
Ind AS के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45.5% बढ़ा, जबकि घाटे में 21% की वृद्धि दर्ज की गई।
📈 रेवेन्यू 390 करोड़ रुपये पहुंचा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध वित्तीय विवरण के मुताबिक, IndiQube का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर 390 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में 268 करोड़ रुपये था।
इस तरह कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 45% की वृद्धि दर्ज की।
इसके अलावा, कंपनी को नॉन-ऑपरेटिंग सोर्सेस से 21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, जिससे कुल आय Q3 FY26 में बढ़कर 411 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
📊 नौ महीनों में 38% की वृद्धि
अगर पूरे नौ महीने (अप्रैल से दिसंबर अवधि) की बात करें तो बेंगलुरु स्थित IndiQube ने FY26 के पहले नौ महीनों में 1,049 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।
यह पिछले साल की समान अवधि (FY25) में दर्ज 762 करोड़ रुपये के मुकाबले 38% की वृद्धि दर्शाता है।
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने मैनेज्ड ऑफिस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मॉडल के जरिए लगातार विस्तार कर रही है।
💼 खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी
जहां एक तरफ कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं दूसरी तरफ खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
👩💼 कर्मचारी लाभ खर्च
Q3 FY26 में कर्मचारी लाभ से जुड़े खर्च 34% बढ़कर 23.5 करोड़ रुपये हो गए। यह बढ़ोतरी कंपनी के विस्तार और नए सेंटर्स जोड़ने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
💳 फाइनेंस कॉस्ट
कंपनी का सबसे बड़ा खर्च फाइनेंस कॉस्ट रहा, जो कुल खर्च का करीब 26% हिस्सा है।
यह खर्च Q3 FY26 में बढ़कर 112 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 86 करोड़ रुपये था। यानी इसमें 30% की वृद्धि दर्ज की गई।
🏗️ डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन
इसी तरह, डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन खर्च भी बढ़कर 144 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आमतौर पर नई प्रॉपर्टीज, इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स में निवेश के कारण बढ़ता है।
📉 कुल खर्च 434 करोड़ रुपये
इन सभी कारकों को मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 434 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 313 करोड़ रुपये था।
इस तरह कुल खर्च में साल-दर-साल आधार पर 39% की वृद्धि हुई।
🔻 घाटा 17 करोड़ रुपये
बढ़ते खर्चों के चलते IndiQube का घाटा भी बढ़ा।
Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध घाटा 17 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 14 करोड़ रुपये था। यानी घाटे में 21% की वृद्धि हुई।
हालांकि, एक सकारात्मक संकेत यह है कि तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के घाटे में कमी आई है।
Q2 FY26 में जहां कंपनी का घाटा 30 करोड़ रुपये था, वहीं Q3 में यह घटकर 17 करोड़ रुपये रह गया। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अपने खर्चों को धीरे-धीरे संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
📌 शेयर प्राइस और मार्केट कैप
आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में IndiQube का शेयर प्राइस 177 रुपये पर बंद हुआ।
इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 3,751 करोड़ रुपये (करीब $414 मिलियन) रहा।
🏙️ विस्तार की रणनीति पर फोकस
IndiQube देशभर में मैनेज्ड ऑफिस स्पेस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस उपलब्ध कराती है। हाइब्रिड वर्क कल्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार के चलते इस सेक्टर में मांग लगातार बढ़ रही है।
कंपनी अपने नेटवर्क को बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते बिजनेस हब्स तक विस्तार देने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, इस विस्तार के साथ फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे खर्च भी बढ़ रहे हैं, जो फिलहाल मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं।
🔮 निष्कर्ष
कुल मिलाकर Q3 FY26 में IndiQube ने मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45% से अधिक बढ़ा है और नौ महीने की अवधि में भी शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि, बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण घाटा साल-दर-साल बढ़ा है। फिर भी, तिमाही आधार पर घाटे में कमी आना एक सकारात्मक संकेत है।
आने वाले समय में अगर कंपनी अपने खर्चों को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाती है और फाइनेंस कॉस्ट को नियंत्रित करती है, तो यह ग्रोथ को मुनाफे में बदलने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
IndiQube फिलहाल ग्रोथ और स्केल पर फोकस कर रही है, और निवेशक इसकी लागत प्रबंधन रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।
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