⚡ Ola Electric की तेज रफ्तार पर ब्रेक,

ola electric

भारत का electric two-wheeler market बीते एक साल में तेजी से बदला है और इस बदलाव का सबसे बड़ा असर Bhavish Aggarwal के नेतृत्व वाली Ola Electric पर देखने को मिला है। एक समय EV सेगमेंट की undisputed leader रही Ola Electric, जिसकी 2024 के अंत तक बाजार में हिस्सेदारी 35% से ज्यादा थी, अब 6% से भी नीचे फिसल चुकी है।

यह गिरावट न सिर्फ कंपनी की बिक्री में दिख रही है, बल्कि इसका असर शेयर बाजार से लेकर ब्रांड इमेज तक साफ नजर आ रहा है।


📉 2024 बनाम 2025: Ola Electric का गिरता ग्राफ

अगर आंकड़ों की बात करें तो Ola Electric के लिए 2024 एक मजबूत साल रहा था। कंपनी ने उस साल:

  • 🚲 4.07 लाख यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की
  • 📊 35.47% मार्केट शेयर हासिल किया

लेकिन जनवरी 2025 से तस्वीर तेजी से बदलने लगी।

जनवरी 2025 से अब तक Ola Electric की:

  • कुल बिक्री: 2.04 लाख यूनिट्स
  • ओवरऑल मार्केट शेयर: 14.9%

यानी सिर्फ एक साल में Ola की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी लगभग आधी रह गई।


🗓️ जनवरी 2025: जब Ola अभी भी लीडर थी

Vahan data के मुताबिक, जनवरी 2025 में Ola Electric अभी भी EV two-wheeler सेगमेंट में नंबर वन थी:

  • Ola Electric: 24.8%
  • TVS Motor: 24.41%
  • Bajaj Auto: 21.81%
  • Ather Energy: 13.31%

इसके बाद Greaves Electric Mobility और Hero MotoCorp का नंबर आता है।

लेकिन यहीं से Ola Electric के लिए मुश्किलें शुरू हो गईं।


⚠️ शिकायतें, सेफ्टी इश्यू और सर्विस की कमजोरी

जनवरी 2025 के बाद Ola Electric लगातार विवादों में घिरती चली गई। ग्राहकों की ओर से:

  • ⚡ वाहन में technical defects
  • 🔥 safety concerns
  • 🛠️ कमजोर after-sales service
  • 📞 सर्विस सेंटर्स की कमी

जैसी शिकायतें लगातार सामने आने लगीं।

इसका सीधा असर फरवरी 2025 में दिखा, जब Ola का मार्केट शेयर गिरकर 11.31% रह गया।


🔄 बीच में आई हल्की रिकवरी, लेकिन टिक नहीं पाई

हालांकि 2025 के बीच के महीनों में Ola Electric ने थोड़ी वापसी की कोशिश जरूर की।

  • अप्रैल 2025 में मार्केट शेयर बढ़कर 21.42% पहुंचा
  • इसके बाद कुछ महीनों तक यह लगभग stable रहा

लेकिन यह रिकवरी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई।


📉 सितंबर 2025 के बाद फिर से गिरावट

सितंबर 2025 के बाद Ola Electric की स्थिति फिर कमजोर होने लगी।

  • नवंबर 2025: 7.16% मार्केट शेयर
  • जनवरी 2026: सिर्फ 5.87%

जनवरी 2026 में Ola Electric ने महज 5,488 यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की, जो कभी मार्केट लीडर रही कंपनी के लिए बड़ा झटका है।


🚀 Ather Energy की जबरदस्त उड़ान

जहां Ola Electric संघर्ष कर रही है, वहीं Ather Energy ने शानदार प्रदर्शन किया है।

Ather की:

  • 2024 बिक्री: 1.26 लाख यूनिट्स
  • 2025 बिक्री: 2.18 लाख यूनिट्स
    ➡️ 72% की ग्रोथ

मार्केट शेयर भी:

  • जनवरी 2025: 13.31%
  • जनवरी 2026: 18.16%

इतना ही नहीं, Ather ने:

  • Ola Electric को market capitalization में पीछे छोड़ा
  • Q2 FY26 में ₹899 करोड़ revenue दर्ज किया

Ather की मौजूदा market cap:

  • 💰 ₹23,712 करोड़ (~$2.63 billion)

🏍️ Legacy players: TVS और Bajaj की मजबूत पकड़

EV मार्केट में TVS Motor और Bajaj Auto जैसी legacy कंपनियां पूरे साल स्थिर बनी रहीं।

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच:

  • TVS Motor:
    • मार्केट शेयर: 23.75%
    • रजिस्ट्रेशन: 3.26 लाख यूनिट्स
  • Bajaj Auto:
    • मार्केट शेयर: 21.05%
    • रजिस्ट्रेशन: 2.89 लाख यूनिट्स

इन कंपनियों की मजबूत distribution, भरोसेमंद service नेटवर्क और brand trust ने इन्हें लगातार फायदा पहुंचाया।


📉 शेयर बाजार में भी Ola Electric की फिसलन

Ola Electric की गिरावट सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं रही। शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

  • 📉 आज शेयर प्राइस: ₹30.79 (All-time low)
  • 📈 Listing price (Aug 2024): ₹75
  • 📊 कुछ हफ्तों में peak: ₹150

मौजूदा market capitalization:

  • ₹14,115 करोड़ (~$1.56 billion)

यानी निवेशकों का भरोसा भी अब Ola Electric पर डगमगाता नजर आ रहा है।


🔮 आगे Ola Electric के लिए क्या चुनौती?

Ola Electric के सामने अब कई बड़े सवाल खड़े हैं:

  • क्या कंपनी अपनी service quality सुधार पाएगी?
  • क्या customer trust दोबारा जीत पाएगी?
  • क्या नए product launches गिरावट को थाम पाएंगे?

EV मार्केट अब पहले से ज्यादा competitive हो चुका है, जहां सिर्फ aggressive pricing नहीं, बल्कि quality, reliability और service सबसे बड़ा differentiator बन चुके हैं।


✨ निष्कर्ष

एक समय EV revolution का चेहरा बनी Ola Electric आज सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। वहीं Ather, TVS और Bajaj जैसी कंपनियां consistency और भरोसे के दम पर आगे निकल चुकी हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Ola Electric इस गिरावट से कैसे उबरती है — या फिर यह बाजार में अपनी पकड़ और खोती चली जाती है।

Read more :🧪 Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद लिया एग्जिट,

🧪 Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद लिया एग्जिट,

Healthians

भारत की जानी-मानी healthtech startup Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने करीब एक दशक तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद अब आधिकारिक तौर पर एग्जिट ले लिया है। Gurugram स्थित इस डायग्नोस्टिक स्टार्टअप के साथ अपने सफर को याद करते हुए Sahni ने LinkedIn पोस्ट के जरिए इस बड़े फैसले की जानकारी दी।

Deepak Sahni ने लिखा,

“Healthians में Founder और CEO के तौर पर 10 साल बिताने के बाद, नवंबर 2023 में मैंने Executive Chairman की भूमिका संभाली थी। पिछले एक साल में मैंने कंपनी की पहली truly professional management team को गाइड किया। मेरे लिए Healthians कभी सिर्फ एक कंपनी नहीं रही — यह एक मिशन था, एक ऐसी समस्या जिसे हल करना जरूरी था।”


🚀 ₹3,000 करोड़ वैल्यूएशन तक पहुंचाया Healthians

Deepak Sahni के नेतृत्व में Healthians ने भारतीय हेल्थ डायग्नोस्टिक सेक्टर में एक मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने बताया कि कंपनी को:

  • 💰 ₹3,000 करोड़ से ज्यादा के valuation तक स्केल किया गया
  • 🌍 300 से ज्यादा शहरों में विस्तार हुआ
  • 🏥 22+ डायग्नोस्टिक लैब्स बनाई गईं
  • 📈 बिना external investment bankers के 7 funding rounds पूरे किए

Sahni के मुताबिक, Healthians ने यह साबित किया कि भारत में large-scale diagnostics business “soul” के साथ भी खड़ा किया जा सकता है।


💸 अब तक $75 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है Healthians

Deepak Sahni के कार्यकाल में Healthians ने अब तक कुल $75 मिलियन (करीब ₹620 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। कंपनी के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • WestBridge Capital
  • BEENEXT
  • DG Ventures
  • YouWeCan

कंपनी में Deepak Sahni की हिस्सेदारी 6.5% बनी हुई है। हालांकि उन्होंने सभी executive responsibilities छोड़ दी हैं, लेकिन वे आगे भी एक shareholder के तौर पर जुड़े रहेंगे।


🧭 अब आगे क्या करेंगे Deepak Sahni?

Healthians से एग्जिट के बाद Deepak Sahni अब नए फोकस के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने बताया कि वे:

  • 💡 हेल्थकेयर से जुड़ी गहरी और जटिल समस्याओं पर काम करेंगे
  • 🚀 नए और promising founders को सपोर्ट करेंगे
  • 🤝 अपने ₹100 करोड़ के corpus commitment के जरिए अगली पीढ़ी के उद्यमियों में निवेश करेंगे

Sahni ने कहा कि वह अब ज्यादा clarity और courage के साथ नए ventures बनाने पर ध्यान देंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि

“इस महीने से मैंने सभी formal executive responsibilities छोड़ दी हैं। अब management team और investors कंपनी को आगे ले जाएंगे, और मैं sidelines से cheer करूंगा।”


📊 Healthians की FY25 Financial Performance

Deepak Sahni के एग्जिट के साथ ही Healthians के ताजा फाइनेंशियल आंकड़े भी सामने आए हैं, जो कंपनी की improving health को दर्शाते हैं।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल consolidated financial statements के मुताबिक:

🔹 Revenue Performance

  • FY25 Operating Revenue: ₹263 करोड़
  • FY24 Operating Revenue: ₹243 करोड़
    ➡️ 8% YoY growth

Non-operating income ₹7 करोड़ को जोड़ने के बाद:

  • Total Income FY25: ₹270 करोड़
    ➡️ 7% की कुल ग्रोथ

📉 घाटे में बड़ी कटौती, EBITDA पॉजिटिव

Healthians के लिए FY25 एक अहम साल रहा, क्योंकि कंपनी ने अपने घाटे को काफी हद तक कम कर लिया।

  • FY24 Loss: ₹45 करोड़
  • FY25 Loss: ₹5 करोड़
    ➡️ 89% की गिरावट

इतना ही नहीं, कंपनी ने:

  • ₹32 करोड़ का Positive EBITDA दर्ज किया
  • 📊 EBITDA Margin: 12.17%

यह संकेत देता है कि Healthians अब operational efficiency और cost control के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रही है।


🏠 250+ शहरों में At-Home Diagnostic Services

Healthians आज भारत के 250 से ज्यादा शहरों में at-home diagnostic services ऑफर करता है। कंपनी का दावा है कि वह अब तक:

  • 🧪 10 करोड़ से ज्यादा टेस्ट कर चुकी है

Covid के बाद बढ़ी preventive healthcare awareness और home-based testing की मांग ने Healthians जैसे प्लेटफॉर्म्स को मजबूती दी है।


🔮 आगे की तस्वीर: नया नेतृत्व, नई दिशा

Deepak Sahni के जाने के बाद Healthians अब पूरी तरह से professional management team के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। बेहतर financials, घाटे में कमी और EBITDA positivity यह संकेत देते हैं कि कंपनी अगले कुछ सालों में:

  • Profitability की ओर बढ़ सकती है
  • IPO या strategic investment जैसे विकल्पों पर काम कर सकती है

✨ निष्कर्ष

Healthians से Deepak Sahni का एग्जिट भारतीय startup ecosystem के लिए एक founder-to-mentor transition का मजबूत उदाहरण है। जहां एक तरफ कंपनी operational maturity की ओर बढ़ रही है, वहीं Sahni अब नए founders और healthcare innovation पर फोकस करेंगे।

Read more :🏢 WeWork India Q3 FY26 Results ₹17 करोड़ का मुनाफा,

🏢 WeWork India Q3 FY26 Results ₹17 करोड़ का मुनाफा,

WeWork India

Managed office space provider WeWork India ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी ने ₹17 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (Profit) दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में हुए भारी नुकसान के मुकाबले एक बड़ा टर्नअराउंड माना जा रहा है।

NSE से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, WeWork India का ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल-दर-साल 29% बढ़कर ₹634 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि Q3 FY25 में यह ₹492 करोड़ था। यह ग्रोथ कंपनी के लिए खास है क्योंकि पिछले कुछ सालों में को-वर्किंग स्पेस सेक्टर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।


📈 रेवेन्यू और इनकम: मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस

Q3 FY26 में WeWork India की कुल आय (Total Income) ₹644 करोड़ रही। इसमें ₹634 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू और ₹10 करोड़ की Other Income शामिल है।

वहीं अगर नौ महीने (April–December 2025) की बात करें, तो कंपनी का रेवेन्यू 24% की ग्रोथ के साथ ₹1,744 करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹1,410 करोड़ था।

यह दर्शाता है कि हाइब्रिड वर्क मॉडल और फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग का WeWork India को सीधा फायदा मिल रहा है।


💸 खर्चों का हाल: Lease और Finance Cost सबसे बड़ा बोझ

हालांकि कंपनी का रेवेन्यू मजबूत रहा, लेकिन खर्चों का स्तर भी ऊंचा बना हुआ है।

Q3 FY26 में प्रमुख खर्च:

  • 🏗️ Depreciation (Lease-related): ₹246 करोड़
  • 👥 Employee Benefits Expense: ₹52 करोड़
  • 💳 Finance Cost: ₹152 करोड़

इन सभी खर्चों को मिलाकर कंपनी का कुल खर्च ₹624.5 करोड़ रहा।

इसके बावजूद WeWork India ने इस तिमाही में प्रॉफिट दर्ज किया, जो इसकी बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ऑक्यूपेंसी लेवल्स में सुधार को दर्शाता है।


🔄 घाटे से मुनाफे तक का सफर

WeWork India की परफॉर्मेंस में सबसे बड़ा बदलाव नेट प्रॉफिट के मोर्चे पर देखने को मिला है।

  • Q3 FY25: ₹83 करोड़ का नुकसान
  • Q3 FY26: ₹17 करोड़ का मुनाफा

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने लगभग ₹100 करोड़ से ज्यादा का पॉजिटिव टर्नअराउंड किया है।

वहीं नौ महीने की अवधि में कंपनी का कुल मुनाफा ₹9 करोड़ रहा है, जो यह दिखाता है कि WeWork India धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है।


📊 शेयर बाजार में प्रदर्शन: फ्लैट लिस्टिंग, बाद में गिरावट

WeWork India ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में एंट्री की थी। हालांकि, इसका डेब्यू ज्यादा धमाकेदार नहीं रहा।

  • 📌 Issue Price: ₹648 प्रति शेयर
  • 📌 Listing Price: ₹650 (सिर्फ 0.3% प्रीमियम)
  • 📌 BSE पर ओपनिंग: ₹646.5

लिस्टिंग के बाद शेयर पर दबाव देखने को मिला।
11:12 AM तक शेयर ₹561.40 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹7,508 करोड़ (लगभग $817 मिलियन) हो गया है।


🏙️ WeWork India का बिज़नेस मॉडल क्यों खास है?

WeWork India भारत में Managed और Flexible Office Spaces उपलब्ध कराता है, जो खासतौर पर:

  • Startups
  • MSMEs
  • Large Enterprises
  • Hybrid Work अपनाने वाली कंपनियों

के लिए डिजाइन किए गए हैं।

भारत में जैसे-जैसे कंपनियां long-term leases की जगह flexible workspaces को प्राथमिकता दे रही हैं, WeWork जैसे प्लेयर्स के लिए ग्रोथ के नए मौके बन रहे हैं।


🔍 आगे की राह: क्या WeWork India ग्रोथ बरकरार रख पाएगा?

WeWork India के लिए आने वाले क्वार्टर कई मायनों में अहम होंगे:

  • बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट को कंट्रोल करना
  • ऑक्यूपेंसी रेट्स को और बेहतर बनाना
  • मुनाफे की निरंतरता बनाए रखना

अगर कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रेवेन्यू ग्रोथ को इसी तरह बनाए रखती है, तो आने वाले समय में यह भारत के को-वर्किंग सेक्टर में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल प्लेयर के रूप में उभर सकती है।


✨ निष्कर्ष

WeWork India का Q3 FY26 प्रदर्शन यह साफ संकेत देता है कि कंपनी घाटे के दौर से बाहर निकल रही है। हालांकि शेयर बाजार की प्रतिक्रिया फिलहाल ठंडी है, लेकिन फाइनेंशियल्स में आया सुधार लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए पॉजिटिव साइन माना जा सकता है।

Read more :🥗 Clean-Label Food Startup The Whole Truth की FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ,


🥗 Clean-Label Food Startup The Whole Truth की FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ,

The Whole Truth

Peak XV Partners द्वारा समर्थित clean-label food और nutrition startup The Whole Truth ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू जहां 3 गुना से ज्यादा बढ़ा, वहीं तेज़ विस्तार और बढ़ते operating व marketing खर्चों के चलते इसका नुकसान (loss) भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गया।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, The Whole Truth का revenue from operations FY25 में 232% उछलकर ₹216 करोड़ पहुंच गया, जो FY24 में ₹65 करोड़ था। यह ग्रोथ भारतीय consumer food startup ecosystem में कंपनी की मजबूत पकड़ को दर्शाती है।


📊 कुल आय ₹220 करोड़ के पार

The Whole Truth अपने सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री से ही रेवेन्यू कमाती है। इसमें शामिल हैं:

  • Protein bars
  • Peanut butter
  • Dark chocolates
  • Energy bars
  • Immunity balls
  • Muesli

FY25 में अन्य आय (other income) को जोड़कर कंपनी की कुल आय ₹220 करोड़ रही, जबकि FY24 में यह ₹71 करोड़ थी। यानी एक साल में कंपनी ने स्केल के मामले में बड़ी छलांग लगाई है।


💸 खर्च भी तेज़ी से बढ़े

तेज़ ग्रोथ के साथ खर्चों में भी तेज़ इजाफा हुआ। FY25 में कंपनी का total expense 2.6 गुना बढ़कर ₹248 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹96 करोड़ था।

सबसे बड़े खर्च कौन-से रहे?

🔹 Raw material / Cost of materials consumed

  • कुल खर्च का 53% हिस्सा
  • FY25 में ₹131 करोड़
  • FY24 में ₹38 करोड़
  • यानी 3.5 गुना बढ़ोतरी

🔹 Advertising और Marketing खर्च

  • FY25 में ₹41 करोड़
  • FY24 की तुलना में 2 गुना से ज्यादा
  • कुल खर्च का 16.5%

🔹 Employee benefit expenses

  • 114% की बढ़ोतरी
  • FY25 में ₹30 करोड़

🔹 Marketplace charges और Transportation खर्च

  • दोनों मिलाकर करीब ₹18 करोड़

इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी ने ब्रांड बिल्डिंग, टीम विस्तार और distribution पर जमकर निवेश किया है।


📉 नुकसान 17% बढ़ा, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स बेहतर

FY25 में The Whole Truth का loss ₹28 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹24 करोड़ था। यानी नुकसान में करीब 17% की बढ़ोतरी हुई।

हालांकि, अच्छी बात यह है कि unit economics में सुधार देखने को मिला है:

  • FY24 में कंपनी ₹1 कमाने के लिए ₹1.48 खर्च कर रही थी
  • FY25 में यह घटकर ₹1.15 रह गया

यह दिखाता है कि स्केल बढ़ने के साथ कंपनी की operational efficiency बेहतर हो रही है।


📉 Profitability Metrics अभी निगेटिव

FY25 में कंपनी के प्रमुख profitability indicators अभी भी निगेटिव रहे:

  • ROCE: -14.85%
  • EBITDA Margin: -13.43%

हालांकि growth-stage consumer startups के लिए यह असामान्य नहीं है, खासकर तब जब फोकस market capture और brand trust पर हो।


💰 Cash Position मजबूत, ग्रोथ के लिए पूरी तैयारी

31 मार्च 2025 तक:

  • Cash और bank balance: ₹141 करोड़
  • FY24 में यह ₹72 करोड़ था
  • यानी लगभग 2 गुना बढ़ोतरी

कंपनी के current assets ₹270 करोड़ रहे, जो बताता है कि The Whole Truth फिलहाल फाइनेंशियल रूप से आरामदायक स्थिति में है और आगे ग्रोथ के लिए पूंजी की कमी नहीं है।


🧾 अब तक $38 मिलियन की फंडिंग, Series D की तैयारी

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, The Whole Truth अब तक कुल $38 मिलियन (करीब ₹315 करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Peak XV Partners
  • Matrix Partners
  • Sauce

इसके अलावा, कंपनी Series D round में $34 मिलियन जुटाने की तैयारी कर रही है। इस डेवलपमेंट की एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग पहले Entrackr ने की थी।


🔮 आगे की राह: ₹500 करोड़ का टारगेट और बड़ी चुनौती

The Whole Truth फिलहाल ऐसी स्थिति में है जहां वह:

  • आराम से ग्रोथ कर सकती है
  • कुछ समय तक नुकसान सह सकती है
  • और brand purity के अपने वादे पर टिकी रह सकती है

कंपनी का clean-label और purity-first approach उसे premium consumer segment पर फोकस करने की आज़ादी देता है। इससे advertising cost भी लंबे समय में घट सकती है, क्योंकि भरोसेमंद ब्रांड खुद-ब-खुद repeat customers बनाता है।

लेकिन बड़ा सवाल यही है 👇

क्या The Whole Truth ₹500 करोड़ और उससे आगे की ग्रोथ हासिल कर पाएगी, बिना quality से समझौता किए?

जैसे-जैसे कंपनी profitable होने के करीब पहुंचेगी, competition भी तेज़ होगा। दूसरे ब्रांड उन high-margin segments में घुसने की कोशिश करेंगे, जिन्हें The Whole Truth ने identify किया है।


🧠 निष्कर्ष

The Whole Truth ने FY25 में यह साबित कर दिया है कि:

  • Strong brand + clean promise = तेज़ ग्रोथ
  • Costs पर कंट्रोल संभव है
  • लेकिन long-term success के लिए सिर्फ marketing काफी नहीं

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी scale, purity और profitability के बीच संतुलन कैसे बनाती है। यही संतुलन तय करेगा कि The Whole Truth भारत का अगला बड़ा food-nutrition ब्रांड बनता है या नहीं 🚀

Read more :⚖️ Legal-Tech Startup SpotDraft को Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की फंडिंग,

⚖️ Legal-Tech Startup SpotDraft को Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की फंडिंग,

SpotDraft

भारतीय legal-tech startup SpotDraft ने अपनी Series B extension के तहत $8 मिलियन (करीब ₹66 करोड़) की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Qualcomm Ventures ने किया है। यह निवेश ऐसे समय आया है जब SpotDraft एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI-powered contract management को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह फंडिंग कंपनी के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले SpotDraft ने फरवरी 2025 में अपने Series B round में $54 मिलियन जुटाए थे। वहीं, मार्च 2023 में कंपनी ने $26 मिलियन का Series A राउंड पूरा किया था। यानी अब तक SpotDraft ने निवेशकों का मजबूत भरोसा लगातार बनाए रखा है।


💡 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

SpotDraft इस नई फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में करेगा:

  • Product और AI capabilities को मजबूत करना
  • Enterprise ग्राहकों की संख्या बढ़ाना
  • Americas, EMEA और India जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार

कंपनी का फोकस ऐसे AI tools बनाने पर है जो privacy-first हों और बड़े एंटरप्राइज की जरूरतों के अनुसार काम करें।


🤖 Privacy-First AI: SpotDraft की सबसे बड़ी ताकत

SpotDraft को बाकी legal-tech startups से अलग बनाता है इसका on-device AI model। आमतौर पर AI-based legal platforms दस्तावेज़ों को cloud पर प्रोसेस करते हैं, जिससे डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

लेकिन SpotDraft का दावा है कि उसका AI:

  • Sensitive legal documents को cloud पर नहीं भेजता
  • On-device ही contract review और analysis करता है
  • Enterprise-grade data security प्रदान करता है

यही वजह है कि बड़े कॉर्पोरेट और global enterprises SpotDraft को तेजी से अपना रहे हैं।


🚀 Qualcomm Snapdragon Summit 2025 में दिखाई ताकत

SpotDraft ने हाल ही में Qualcomm Snapdragon Summit 2025 में अपनी तकनीक का लाइव डेमो दिया, जहां कंपनी ने दिखाया कि उसका AI मॉडल Snapdragon X Elite laptops पर बिना किसी cloud connectivity के काम कर सकता है।

यह डेमो Qualcomm Ventures के निवेश का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साबित हुआ कि SpotDraft का AI:

  • Lightweight है
  • Secure है
  • Enterprise-ready है

📈 तेज़ी से बढ़ता बिजनेस और यूज़र बेस

SpotDraft के ग्रोथ आंकड़े भी काफी मजबूत हैं:

  • Customers में 100% year-on-year growth
  • Contract volumes में 173% YoY increase
  • करीब 50,000 monthly active users
  • हर साल 10 लाख से ज्यादा contracts प्रोसेस

ये आंकड़े बताते हैं कि legal-tech सेक्टर में SpotDraft तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।


🏢 बड़े नामों को बना चुका है ग्राहक

SpotDraft के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई जानी-मानी कंपनियां कर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Apollo.io
  • Panasonic
  • Zeplin
  • Whatfix

इन ग्राहकों की मौजूदगी यह दिखाती है कि SpotDraft सिर्फ स्टार्टअप्स ही नहीं, बल्कि बड़े enterprises के लिए भी एक भरोसेमंद समाधान बन चुका है।


💰 Financial Performance: Revenue तीन गुना

वित्तीय मोर्चे पर भी SpotDraft ने अच्छा प्रदर्शन किया है:

  • FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹60 करोड़
  • FY23 में रेवेन्यू ₹20 करोड़ था
  • यानी तीन गुना ग्रोथ

हालांकि कंपनी का नुकसान ₹68 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा। FY25 के नतीजे अभी सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।


⚔️ Competitors से कड़ी टक्कर

भारत में legal-tech स्पेस तेजी से बढ़ रहा है और SpotDraft को कई खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ रहा है, जैसे:

  • Legistify
  • Leegality
  • Sirion
  • Vakilsearch

हालांकि SpotDraft का AI-first और privacy-centric approach इसे इस भीड़ में अलग पहचान देता है।


🔮 आगे की राह

Experts का मानना है कि आने वाले वर्षों में:

  • Enterprises legal automation को तेजी से अपनाएंगे
  • AI-based contract management की मांग बढ़ेगी
  • Data privacy सबसे बड़ा differentiator बनेगा

ऐसे में SpotDraft की रणनीति और Qualcomm Ventures जैसी global investor की backing इसे भारत ही नहीं, बल्कि global legal-tech मार्केट में भी एक मजबूत खिलाड़ी बना सकती है।


कुल मिलाकर, SpotDraft की यह नई फंडिंग भारतीय legal-tech ecosystem के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि अगर टेक्नोलॉजी, AI और privacy को सही तरीके से जोड़ा जाए, तो भारतीय स्टार्टअप्स ग्लोबल लेवल पर भी बड़ा खेल खेल सकते हैं 🚀

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💳 Juspay ने जुटाए $50 मिलियन,

Juspay

भारत के डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि के साथ हुई है। बेंगलुरु‑आधारित पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Juspay ने $50 मिलियन (करीब ₹415 करोड़) की Series D फॉलो‑ऑन फंडिंग जुटाई है। इस निवेश राउंड का नेतृत्व WestBridge Capital ने किया है, जो प्राइमरी और सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के मिश्रण के रूप में किया गया है। इस डील में Avendus Capital ने Juspay के फाइनेंशियल एडवाइज़र की भूमिका निभाई।

इस फंडिंग के साथ Juspay की वैल्यूएशन $1.2 बिलियन तक पहुंच गई है, जो पिछले राउंड में लगभग $900 मिलियन थी। इसके साथ ही Juspay 2026 का पहला भारतीय यूनिकॉर्न बन गया है।


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग का प्राइमरी कैपिटल हिस्से का उपयोग

  • ग्लोबल एक्सपेंशन,
  • नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट,
  • और टेक्नोलॉजी क्षमताओं को मजबूत करने
    के लिए किया जाएगा।

वहीं, सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के जरिए शुरुआती निवेशकों और ESOP होल्ड करने वाले कर्मचारियों को आंशिक लिक्विडिटी प्रदान की जाएगी। यह पिछले एक साल में Juspay द्वारा किया गया दूसरा लिक्विडिटी इवेंट है।


📈 ऑपरेशनल ग्रोथ ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

Juspay की यह फंडिंग कंपनी की मजबूत ऑपरेशनल ग्रोथ के बाद आई है। कंपनी का दावा है कि उसका Annualised Total Payment Volume (TPV) $1 ट्रिलियन को पार कर चुका है। इसके प्लेटफॉर्म पर रोजाना 300 मिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए जाते हैं।

Juspay आज

  • ई‑कॉमर्स,
  • ट्रैवल,
  • फूड डिलीवरी,
  • इंश्योरेंस,
  • और फाइनेंशियल सर्विसेज
    जैसे सेक्टर्स में काम करने वाली कंपनियों और बैंकों को सेवाएं देता है।

🌍 ग्लोबल लेवल पर मजबूत मौजूदगी

भारत के अलावा, Juspay ने अपनी उपस्थिति कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मजबूत की है। कंपनी वर्तमान में

  • एशिया‑पैसिफिक,
  • मिडिल ईस्ट,
  • लैटिन अमेरिका,
  • यूरोप,
  • यूके
  • और नॉर्थ अमेरिका
    में अपने एंटरप्राइज और बैंकिंग क्लाइंट्स को सेवाएं दे रही है।

कंपनी के साथ आज 500 से अधिक एंटरप्राइज और बैंक जुड़े हुए हैं।


🧠 ओपन‑सोर्स और मॉड्यूलर पेमेंट सिस्टम पर फोकस

2012 में स्थापित Juspay पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को ओपन‑सोर्स, इंटरऑपरेबल और मॉड्यूलर सिस्टम के आधार पर विकसित करता है। कंपनी की प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं:

  • पेमेंट ऑर्केस्ट्रेशन
  • ऑथेंटिकेशन
  • टोकनाइजेशन
  • और बैंकों के लिए कोर पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर

इसके अलावा, Juspay AI‑ड्रिवन टूल्स में भी निवेश कर रहा है, जिनका उद्देश्य

  • मर्चेंट एक्सपीरियंस बेहतर बनाना
  • और इंटरनल ऑपरेशंस को ज्यादा एफिशिएंट बनाना है।

🧾 पिछली फंडिंग का सफर

Juspay की फंडिंग जर्नी भी काफी मजबूत रही है।

  • अप्रैल 2025 में कंपनी ने $60 मिलियन की Series D फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Kedaara Capital ने किया था। इसमें SoftBank और Accel ने भी भाग लिया था।
  • दिसंबर 2021 में Juspay ने $60 मिलियन की Series C फंडिंग हासिल की थी, जिसका नेतृत्व SoftBank Vision Fund 2 ने किया था।
  • इससे पहले, 2020 में Series B और 2016 में Accel से शुरुआती संस्थागत निवेश प्राप्त हुआ था।

👥 टीम और वर्कफोर्स

बेंगलुरु में मुख्यालय वाली Juspay की टीम आज 1,500 से अधिक कर्मचारियों की है। कंपनी डिस्ट्रिब्यूटेड वर्कफोर्स मॉडल पर काम करती है, जिसमें कर्मचारी

  • भारत,
  • अमेरिका,
  • यूरोप,
  • लैटिन अमेरिका,
  • साउथईस्ट एशिया
  • और मिडिल ईस्ट
    में फैले हुए हैं।

💰 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

वित्त वर्ष FY25 (मार्च 2025 तक) के लिए Juspay ने

  • ₹540 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू
  • और ₹62.28 करोड़ का मुनाफा
    रिपोर्ट किया है, जो कंपनी की सस्टेनेबल ग्रोथ को दर्शाता है।

🔮 आगे की राह

$1.2 बिलियन वैल्यूएशन और मजबूत ग्लोबल उपस्थिति के साथ Juspay अब भारतीय पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक लीडिंग नाम बन चुका है। नई फंडिंग के जरिए कंपनी न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य की डिजिटल पेमेंट्स जरूरतों के लिए टेक्नोलॉजी‑ड्रिवन सॉल्यूशंस पर भी फोकस बढ़ाएगी।

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🌿 Dhun Wellness को $4 मिलियन की फंडिंग,

Dhun Wellness

भारत के तेजी से बढ़ते वेलनेस और हेल्थकेयर सेक्टर में एक और स्टार्टअप ने निवेशकों का भरोसा जीता है। वेलनेस स्टार्टअप Dhun Wellness ने हाल ही में $4 मिलियन (करीब ₹36.6 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस निवेश राउंड को SRF लिमिटेड और Havells India ने को‑लीड किया है। इसके अलावा, इस राउंड में कई एंजेल निवेशकों ने भी भागीदारी की है।

👥 कौन‑कौन रहे निवेशक

इस फंडिंग राउंड में शामिल प्रमुख एंजेल निवेशकों में

  • अरुषि आयुष अग्रवाल
  • ऐश लिलानी
  • Tracxn के को‑फाउंडर अभिषेक गोयल
  • संजय कपूर
  • और अन्य निजी निवेशक शामिल हैं।

कंपनी ने एक प्रेस रिलीज़ में बताया कि इस पूंजी का उपयोग भारत के प्रमुख शहरों में अपने संचालन का विस्तार करने के लिए किया जाएगा।

📍 चार नए शहरों में विस्तार की योजना

Dhun Wellness इस फंडिंग का उपयोग पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरी बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए करेगा। कंपनी का मानना है कि इन शहरों में वेलनेस और प्रिवेंटिव हेल्थ को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और यहां इसके टारगेट कस्टमर बेस के लिए मजबूत संभावनाएं हैं।

🌸 Dhun Wellness क्या करता है

Dhun Wellness की शुरुआत वर्ष 2023 में मीरा कपूर द्वारा की गई थी। यह एक अर्बन वेलनेस सैंक्चुअरी के रूप में काम करता है, जो शहरों में रहने वाले लोगों को समग्र स्वास्थ्य और मानसिक शांति का अनुभव प्रदान करता है।

कंपनी का कॉन्सेप्ट पारंपरिक भारतीय उपचार पद्धतियों और आधुनिक वेलनेस साइंस के संतुलित मिश्रण पर आधारित है। इसमें

  • आयुर्वेद,
  • साउंड हीलिंग,
  • क्रायोथेरेपी,
  • इन्फ्रारेड सॉना,
    जैसी तकनीकों और प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है।

🧘‍♀️ शहर में रहते हुए समग्र स्वास्थ्य का अनुभव

Dhun Wellness का लक्ष्य उन शहरी उपभोक्ताओं को सेवा देना है जो अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच बिना शहर छोड़े होलिस्टिक वेल‑बीइंग की तलाश में रहते हैं। कंपनी के प्रोग्राम विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिजाइन किए गए हैं जो

  • थकान,
  • नींद की समस्या,
  • गट हेल्थ,
  • और मानसिक तनाव
    जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

🗓️ पर्सनलाइज़्ड 7‑डे वेलनेस प्रोग्राम

Dhun Wellness की सबसे बड़ी खासियत इसके पर्सनलाइज़्ड सात‑दिवसीय वेलनेस प्रोग्राम हैं। इन प्रोग्राम्स में शामिल होते हैं:

  • एक्सपर्ट कंसल्टेशन
  • न्यूट्रिशन गाइडेंस
  • बॉडी‑माइंड थैरेपी
  • और घर के लिए कस्टमाइज्ड वेलनेस प्लान

इसके साथ ही, कंपनी अपने ग्राहकों को 24×7 कंसीयर्ज सपोर्ट भी उपलब्ध कराती है, जिससे उन्हें एक प्रीमियम और सहज अनुभव मिलता है।

🔬 पूर्वी ज्ञान और पश्चिमी साइंस का मेल

कंपनी के अनुसार, Dhun Wellness प्राचीन पूर्वी ज्ञान और पश्चिमी लॉन्गेविटी साइंस को मिलाकर काम करता है। इसका उद्देश्य केवल लक्षणों का इलाज करना नहीं, बल्कि असंतुलन की जड़ तक पहुंचना है।

यह अप्रोच आज के उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, खासकर उन लोगों में जो दवाइयों के बजाय प्रिवेंटिव और नैचुरल हेल्थ सॉल्यूशंस की ओर झुकाव रखते हैं।

📊 वेलनेस मार्केट में बड़ी संभावनाएं

एक मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हेल्थ और वेलनेस बाजार 2033 तक $256.9 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। भारत इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है, जहां शहरी आबादी में लाइफस्टाइल‑डिज़ीज़ और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

🚀 15% मंथ‑ऑन‑मंथ ग्रोथ का दावा

Dhun Wellness का कहना है कि वह वर्तमान में 15% महीने‑दर‑महीने ग्रोथ देख रहा है। बढ़ती मांग को देखते हुए, कंपनी अब एक कंप्रीहेंसिव लॉन्गेविटी वर्टिकल बनाने की दिशा में काम कर रही है।

इस वर्टिकल का फोकस होगा:

  • प्रिवेंटिव केयर
  • पर्सनलाइज़्ड वेलनेस प्रोटोकॉल
  • और लॉन्ग‑टर्म हेल्थ ऑप्टिमाइज़ेशन

🔮 आगे की राह

नई फंडिंग के साथ Dhun Wellness न सिर्फ अपने फिजिकल सेंटर्स का विस्तार करेगा, बल्कि टेक‑ड्रिवन पर्सनलाइज़ेशन, सर्विस क्वालिटी और ब्रांड बिल्डिंग पर भी निवेश बढ़ाएगा।

कुल मिलाकर, Dhun Wellness भारत के उभरते वेलनेस इकोसिस्टम में एक प्रीमियम और टेक‑इनेबल्ड खिलाड़ी के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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🏠 Urban Company की मजबूत ग्रोथ

Urban Company

घरेलू सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Urban Company ने चालू वित्त वर्ष 2025‑26 (FY26) की तीसरी तिमाही में मजबूत राजस्व वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, कंपनी का कुल घाटा अभी भी बना हुआ है, जिसकी मुख्य वजह उसकी हाई‑फ्रीक्वेंसी हाउसकीपिंग सेवा InstaHelp में किया गया भारी निवेश बताया गया है। यह जानकारी कंपनी द्वारा जारी शेयरहोल्डर लेटर में दी गई।

📈 लेनदेन और राजस्व में 32% की सालाना बढ़ोतरी

31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में Urban Company का नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) बढ़कर ₹1,081 करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 32% अधिक है। इसी अवधि में कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व भी 32% की वृद्धि के साथ ₹383 करोड़ तक पहुंच गया।

यह ग्रोथ दर्शाती है कि Urban Company की कोर सर्विसेज – जैसे ब्यूटी, सैलून, रिपेयर और मेंटेनेंस – लगातार उपभोक्ताओं की पसंद बनी हुई हैं।

⚠️ घाटा बना रहा, InstaHelp बना बड़ी वजह

मजबूत टॉपलाइन के बावजूद, Urban Company को Q3 FY26 में ₹17 करोड़ का कंसॉलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA घाटा हुआ। कंपनी के अनुसार, इस घाटे की सबसे बड़ी वजह उसकी नई हाउसकीपिंग सर्विस InstaHelp रही।

InstaHelp ने अकेले इस तिमाही में ₹61 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA घाटा दर्ज किया। हालांकि, यदि InstaHelp को अलग कर दिया जाए, तो Urban Company का कोर बिजनेस ₹44 करोड़ के EBITDA मुनाफे में रहा। कुल मिलाकर, कंपनी का नेट घाटा ₹21 करोड़ रहा।

👥 यूज़र और सर्विस पार्टनर बेस में मजबूती

शेयरहोल्डर लेटर के अनुसार, Q3 FY26 में Urban Company के पास

  • 78 लाख वार्षिक लेनदेन करने वाले यूज़र्स, और
  • 59,475 मासिक सक्रिय सर्विस पार्टनर थे।

यह आंकड़े कंपनी के मजबूत प्लेटफॉर्म नेटवर्क और बढ़ते उपभोक्ता भरोसे को दर्शाते हैं।

🇮🇳 भारत कंज़्यूमर सर्विस बिजनेस रहा मुनाफे में

InstaHelp को छोड़कर Urban Company का भारत कंज़्यूमर सर्विस बिजनेस पूरी तरह लाभ में रहा। इस सेगमेंट का

  • NTV रहा ₹781 करोड़, और
  • राजस्व बढ़कर ₹265 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर 26% की वृद्धि है।

यह सेगमेंट कंपनी की आय और स्थिरता की रीढ़ बना हुआ है।

🛍️ नेटिव ब्रांड्स में जबरदस्त उछाल

Urban Company के Native Brands बिजनेस ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया।

  • इसका NTV 93% बढ़कर ₹79 करोड़ हो गया, जबकि
  • राजस्व दोगुना होकर ₹62 करोड़ तक पहुंच गया।

यह संकेत देता है कि कंपनी अपने इन‑हाउस प्रोडक्ट्स के जरिए नए ग्रोथ अवसर बना रही है।

🌍 इंटरनेशनल बिजनेस में भी तेजी

भारत के बाहर, खासतौर पर UAE और सिंगापुर में Urban Company का प्रदर्शन मजबूत रहा।

  • इंटरनेशनल बिजनेस का NTV 79% बढ़कर ₹193 करोड़ पहुंचा,
  • जबकि राजस्व ₹50 करोड़ रहा।

इससे स्पष्ट है कि कंपनी की सेवाएं वैश्विक बाजारों में भी तेजी से स्वीकार की जा रही हैं।

🧹 InstaHelp: ग्रोथ के साथ घाटा

InstaHelp ने Q3 FY26 में

  • 16.1 लाख ऑर्डर,
  • ₹28 करोड़ का NTV, और
  • ₹6.8 करोड़ का राजस्व दर्ज किया।

हालांकि, भारी निवेश और स्केल‑अप लागत के कारण यह वर्टिकल अभी भी ₹61 करोड़ के EBITDA घाटे में है, जिससे कंपनी की कुल लाभप्रदता प्रभावित हो रही है।

💰 मजबूत कैश बैलेंस और ESOP मंजूरी

Urban Company ने Q3 FY26 का अंत ₹2,095 करोड़ के कैश बैलेंस के साथ किया, जिससे कंपनी के पास आगे के निवेश और विस्तार के लिए पर्याप्त फंडिंग रनवे मौजूद है।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने Employee Stock Option Scheme 2015 के तहत 70.82 लाख स्टॉक ऑप्शन्स को मंजूरी दी, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹88 करोड़ आंकी गई है।

📊 शेयर प्रदर्शन और मार्केट कैप

तिमाही के अंत में Urban Company के शेयर ₹124.7 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹18,033 करोड़ (लगभग $2 बिलियन) तक पहुंच गया।

🔚 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Urban Company की कोर सर्विसेज मजबूत ग्रोथ और मुनाफा दिखा रही हैं, जबकि InstaHelp भविष्य की संभावनाओं के लिए एक बड़ा लेकिन महंगा दांव साबित हो रहा है। मजबूत कैश रिज़र्व और बढ़ता यूज़र बेस यह संकेत देता है कि कंपनी लंबी अवधि में अपने घाटे को संभालने की क्षमता रखती है।

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💄✨ Purplle की जबरदस्त ग्रोथ IPO की ओर बढ़ता ब्यूटी ब्रांड

Purplle

पिछले पांच साल ओम्नीचैनल ब्यूटी प्लेटफॉर्म Purplle के लिए बेहद अहम रहे हैं 🚀। तेज़ विस्तार, ब्रांड अधिग्रहण, लगातार फंडिंग और मजबूत प्राइवेट लेबल स्ट्रैटेजी के दम पर कंपनी ने ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट में अपनी अलग पहचान बनाई है 💅।

📊 रेवेन्यू ग्रोथ की कहानी
Purplle का सफर FY21 में ₹128 करोड़ से शुरू होकर FY25 में ₹1,367 करोड़ तक पहुंच गया है। खास बात यह रही कि FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹680 करोड़ से दोगुना होकर ₹1,367 करोड़ हो गया 📈। यह आंकड़े Registrar of Companies (RoC) से लिए गए समेकित वित्तीय विवरणों पर आधारित हैं।

🏬 ड्यूल बिजनेस मॉडल बना ताकत

2012 में शुरू हुई Purplle दो प्रमुख मॉडल पर काम करती है 👇
🛍️ थर्ड‑पार्टी ब्यूटी ब्रांड्स का मार्केटप्लेस
🏷️ खुद के प्राइवेट लेबल ब्रांड्स

इसके स्वामित्व वाले ब्रांड्स में Faces Canada, Good Vibes, Alps Goodness, Carmesi और DermDoc शामिल हैं 🌸। आज Purplle के प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़+ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं और देशभर में 20,000 से ज्यादा ऑफलाइन टचपॉइंट्स मौजूद हैं 🇮🇳।

🔥 प्राइवेट लेबल से आई सबसे ज्यादा ग्रोथ

FY25 में Purplle की ग्रोथ का असली इंजन इसके owned‑brand products रहे 💪।
➡️ कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 82.5% योगदान
➡️ इस सेगमेंट से आय 4 गुना बढ़कर ₹1,129 करोड़

वहीं, थर्ड‑पार्टी ब्रांड्स को प्रमोशन से मिलने वाली मार्केटिंग इनकम 22% घटकर ₹225 करोड़ रह गई 📉।

💰 इसके अलावा, ब्याज से मिलने वाली आय को मिलाकर कंपनी की कुल आय ₹1,409 करोड़ तक पहुंच गई।

🧾 सब्सिडियरी कंपनियों की भूमिका

Purplle की ग्रोथ में इसकी सहायक कंपनियों का भी बड़ा योगदान रहा 👇
🏢 Manash E‑Commerce: ₹989 करोड़
💄 Faces Canada: ₹373 करोड़
🎥 Glamrs: ₹4 करोड़

💸 खर्च भी बढ़े, लेकिन स्केल के साथ

तेजी से बढ़ती बिक्री के चलते कंपनी के खर्च भी बढ़े 📦
🔹 प्रोक्योरमेंट कॉस्ट: ₹671 करोड़
🔹 एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: ₹176 करोड़
🔹 विज्ञापन खर्च: ₹218 करोड़
🔹 ट्रांसपोर्टेशन: ₹100 करोड़

इन सबको मिलाकर FY25 में कुल खर्च ₹1,478 करोड़ पहुंच गया।

📉 मुनाफे की ओर कदम

FY25 में Purplle ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.08 खर्च किया। हालांकि अभी कंपनी घाटे में है, लेकिन
📊 EBITDA और ROCE में सुधार
💰 मार्च 2025 तक ₹273 करोड़ कैश बैलेंस

यह दिखाता है कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है 🔄।

🤝 निवेशकों का भरोसा बरकरार

अब तक Purplle $500 मिलियन+ फंडिंग जुटा चुका है 💵।
इसमें $180 मिलियन की Series F फंडिंग शामिल है, जिसका नेतृत्व ADIA की इकाई ने किया, साथ ही Premji Invest और Blume Ventures जैसे बड़े निवेशक भी जुड़े रहे 🌍।

🚀 IPO की ओर बढ़ता सफर

Purplle की मौजूदा ग्रोथ उसे Nykaa के IPO‑पूर्व स्तर के करीब ले जा रही है 📍। अगर खर्चों पर कंट्रोल बना रहा और ग्रोथ जारी रही, तो FY26‑FY27 में IPO की संभावना मजबूत हो सकती है 🏦।

✨ कुल मिलाकर, Purplle ने यह साबित कर दिया है कि उसने ग्रोथ का सही फॉर्मूला पकड़ लिया है। अब अगला लक्ष्य — मुनाफा और पब्लिक मार्केट्स में एंट्री

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Chargeup

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है 🚀। खासकर लास्ट‑माइल मोबिलिटी में इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी सेगमेंट में काम कर रही दिल्ली‑आधारित EV‑फोकस्ड मोबिलिटी स्टार्टअप Chargeup ने ₹22 करोड़ (करीब $2.4 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाई है 💰।

इस फंडिंग राउंड को IAN Group का समर्थन मिला है, जबकि Cap‑A और कंपनी के मौजूदा निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है। यह राउंड करीब चार साल के अंतराल के बाद आया है और Chargeup का यह तीसरा फंडिंग राउंड है।

📊 पहले भी जुटा चुकी है निवेश

Chargeup ने इससे पहले
🔹 नवंबर 2022 में Capital‑A और Anicut Capital के नेतृत्व में $7 मिलियन की प्री‑सीरीज़ A1 फंडिंग
🔹 उसी साल $2.3 मिलियन की प्री‑सीरीज़ A फंडिंग

हासिल की थी। नई पूंजी के साथ कंपनी एक बार फिर आक्रामक विस्तार की तैयारी में है।

🎯 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Chargeup के मुताबिक, इस ताज़ा निवेश का इस्तेमाल 👇
⚡ हाई‑डिमांड EV मार्केट्स में विस्तार
🧠 ड्राइवर्स और लेंडर्स के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने
🌍 इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर अपनाने वाले क्षेत्रों में ऑपरेशंस स्केल करने

के लिए किया जाएगा।

👨‍🔧 ड्राइवर‑फर्स्ट प्लेटफॉर्म

2019 में वरुण गोयनका और सतीश मित्तल द्वारा स्थापित Chargeup खुद को एक driver‑first EV technology platform के रूप में पेश करता है। इसका फोकस खासतौर पर लास्ट‑माइल EV ड्राइवर्स पर है।

EV थ्री‑व्हीलर ड्राइवर्स को अक्सर
❌ ऊंची फाइनेंसिंग लागत
❌ बैटरी से जुड़ा डाउनटाइम
❌ गाड़ी खड़ी रहने से आय का नुकसान

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Chargeup इन चुनौतियों को टेक्नोलॉजी और डेटा के जरिए हल करने की कोशिश करता है।

🔗 ड्राइवर, OEM और लेंडर्स एक प्लेटफॉर्म पर

Chargeup का प्लेटफॉर्म IoT और डेटा‑ड्रिवन टूल्स का इस्तेमाल करता है, जिससे
🏦 NBFCs और लेंडर्स के लिए लेंडिंग रिस्क कम होता है
🚗 ड्राइवर्स की कमाई स्थिर होती है
📈 वाहन उपयोग और रीसेल वैल्यू बेहतर होती है

यह प्लेटफॉर्म ड्राइवर्स, OEMs, डीलर्स और लेंडर्स को एक ही सिस्टम से जोड़ता है।

👥 10,000+ ड्राइवर, आगे बड़ा लक्ष्य

Chargeup अब तक 10,000 से ज्यादा EV ड्राइवर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ चुका है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY27 तक 20,000 और ड्राइवर्स को जोड़ा जाए 📅।

कंपनी जिस मार्केट में काम कर रही है, उसकी अनुमानित वैल्यू करीब $12 बिलियन है 💡, जो लॉजिस्टिक्स और पैसेंजर मोबिलिटी में इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर्स की बढ़ती मांग से प्रेरित है।

🌱 EV भविष्य में Chargeup की भूमिका

सरकारी EV नीतियों और बढ़ती ईंधन लागत के बीच Chargeup जैसे स्टार्टअप्स भारत की मोबिलिटी को ज्यादा
✅ सस्ती
✅ टिकाऊ
✅ ड्राइवर‑फ्रेंडली

बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। नई फंडिंग के साथ Chargeup का लक्ष्य सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि EV ड्राइवर्स के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद इकोसिस्टम बनाना है ⚡🚛।

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